Saturday, 31 October 2020

सांप के जहर को भी मार देती है सर्पगंधा औषधि, जानिए इसके अन्य चमत्कारिक फायदे

सर्पगंधा एक वनस्पति है इसका उपयोग औषधि के रूप में किया है। सर्पगंधा स्वाद में कड़ुआ, तीखा, कसैला होता है। सर्पगंधा की जड़ का प्रयोग रोगों में औषधि के रूप में किया जाता है। इसका प्रयोग मैनिया, ब्लडप्रेशर (रक्तचाप) आदि रोगों में भी किया जाता है। सर्पगंधा मासिक धर्म को ठीक करता है, पेशाब संबंधी रोगों में फायदेमंद है। सर्पगंधा बुखार को ठीक करता है।

पतले दस्त और उल्टी यानी हैजा होने पर 3-5 ग्राम सर्पगंधा की जड़ के चूर्ण को गुनगुने जल के साथ सेवन करें। सर्पगंधा अपच और कब्ज को दूर करता है। यह गैस को समाप्त करता है। इन कारणों से होने वाले पेट के दर्द में सर्पगंधा की जड़ का काढ़ा बनाकर 10-30 मिली मात्रा में पीएं। अवश्य लाभ होगा।

सर्पगंधा चूर्ण और बटी के फायदे -

निन्दाकार वटी : सर्पगंधा 30 ग्राम, नील कमल 12 ग्राम, पिपलामूल 12 ग्राम, जटामांसी 12 ग्राम, खुरासनी अजवायन 12 ग्राम लेकर चूर्ण बना लें। चूर्ण में जल से घोंटकर गोली बना लें। सुबह-रात को एक-एक गोली लें। 2 घंटे पूर्व कुछ न लें। नींद अच्छी आएगी।

सर्पगंधादि चूर्ण : सर्पगंधा 60 ग्राम, ब्राह्मी 30 ग्राम, शंखपुष्पी 12 ग्राम, जटामासी 12 ग्राम, अश्वगन्धा, गुलाब के फूल, श्वेत चंदन, बड़ी इलायची 6-6 ग्राम लेकर चूर्ण बना लें। 2 ग्राम सुबह-शाम ठंडे पानी के साथ लें। निन्द्रा, रक्तचाप, स्मरणशक्तिमें लाभकारी है। उन्माद मानसिक अस्थिरता, हिस्टीरिया में पानी के साथ दो ग्राम चूर्ण लें। ये औषधीय नुस्खे आयुर्वेद चिकित्सक के परार्मश से ही लें।



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डायबिटीज के मरीज जान लें ये 8 खास बातें, होगा फायदा

डायबिटीज़ एक तरह से चयापचय (मेटाबॉलिक) में खराबी की अवस्था है। हाई ब्लड शुगर लेवल को हम डायबिटीज़ यानी मधुमेह के नाम से जानते हैं। अगर इसकी जांच न की जाए, तो इससे त्वचा और आंखों से जुड़ी आम परेशानियों से लेकर ब्रेन स्ट्रोक और नर्वस सिस्टम से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। डायबिटीज के मरीज को खानपान के साथ दिनचर्या का खयाल रखना चाहिए जिससे व्यक्ति का जीवन संतुलित रह सके।

1- डायबिटीज के मरीज को घी, तेल, तली भुनी, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड, आइसक्रीम, चॉकलेट, पैक्ड फूड और बासी खाना खाने से बचना चाहिए।

2- जिसका वजन सामान्य से अधिक है उसे 10 हजार कदम रोजाना चलना चाहिए वजन के अनुसार डॉक्टरी राय पर इसमें बदलाव हो सकता है। डॉक्टरी सलाह लें।

3- डायबिटीज रोगी को खानपान डाइट चार्ट के अनुसार रखना चाहिए। जांच रिपोर्ट, डायबिटीज के प्रकार, उम्र, कदकाठी और दिनचर्या के आधार पर खाना और समय तय होता है।

4- घर का बना सामान्य और पौष्टिक खाना फायदेमंद रहता है। मिक्स ग्रेन आटा सेहत के लिए अच्छा है। गेंहू, जौ, बाजरा और चने के मिश्रण से तैयार बेजड़ की रोटी डायबिटीज में फायदा करती है।

5- मधुमेह के रोगी के लिए रोजाना 30 से 45 मिनट की वॉक के साथ रोजाना हल्की फुल्की एक्सरसाइज जरूरी है। जॉगिंग टहलना दिनचर्या में शामिल होना चाहिए।

6- मधुमेह रोगी वही खाद्य पदार्थ लें जिसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 55 से कम है वे सुरक्षित हैं। ग्लाइसेमिक इंडेक्स 70 से अधिक है तो उसे न खाएं। फलों का जूस तो बिलकुल न लें।

7- मधुमेह रोगी फल खा सकते हैं। ब्लड शुगर लेवल के अनुसार डॉक्टरी सलाह पर सेब, पपीता, जामुन, अमरूद जैसे अन्य फल 24 घंटे के भीतर 100 ग्राम खा सकते हैं।

8- जिन लोगों को डायबिटीज नहीं है उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। मीठा नियंत्रित मात्रा में लें, नियमित व्यायाम करें और समय-समय पर जांच करवाते रहें।



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41-50 की उम्र में पीरियड्स बंद होने की प्रक्रिया को कहते हैं मेनोपॉज, जानें इसके बारे में

महिलाओं में 40 से 50 वर्ष की उम्र जब में मेनोपॉज मतलब रजोनिवृत्ति होती है। साधारण भाषा में जब महिला के पीरियड्स आना बंद हो जाते हैं तो उसे मेनोपॉज कहते हैं। जब मेनोपॉज होता है तो महिलाओं में कई शारीरिक व मानसिक बदलाव होते हैं। मेनोपॉज के दौरान किसी भी शारीरिक तकलीफ को नजरअंदाज न करें।

ऐसे होती है मेनोपॉज की शुरूआत -
महिलाओं में 40 की उम्र के बाद यदि करीब एक साल तक मासिक धर्म नहीं आए तो मेनोपॉज की अवस्था माना जाता है। मेनोपॉज में मासिक धर्म धीरे-धीरे कम होने लगता है। फिर एक-दो साल के भीतर पूरी तरह बंद हो जाता है। इसका कारण शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन की मात्रा का कम होना होता है। मेनोपॉज की स्थिति में महिला को घबराने की जरूरत नहीं है।

मेनोपॉज की समस्याएं-
जब महिलाओं में मेनोपॉज की समस्या होती है तब तनाव, उदासी, बेचैनी, घबराहट, भ्रम, चिड़चिड़ापन, दुविधा की स्थिति, अनिद्रा और गुस्सा आने जैसे लक्षण होते हैं। इसमें महिलाओं को अधिक गर्मी लगना, बुफारे आना, यूरिन में जलन, जननांग में संक्रमण जैसी समस्याएं होने लगती हैं। सकती हैं।

सावधानी रखें-
मेनोपॉज की प्रक्रिया के दौरान महिलाएं शक्कर व मीठा कम खाएं । मीठा खाने से हड्डियों में दर्द की समस्या हो जाती है। बीपी, थायरॉइड, मधुमेह वजन, पैपस्मीयर, मैमोग्राफी की जांच जरूरी है। मेनोपॉज के दौरान जननांग की सफाई का विशेष ध्यान रखें इस दौरान संक्रमण का खतरा रहता है। संक्रमण होने पर क्रीम और कुछ एंटीबायोटिक दवाएं चलती हैं जिनसे आराम मिलता है। जननांग में संक्रमण होने पर पानी ज्यादा से ज्यादा पीएं। ग्वार फली, भिंडी, आलू, मटर, चना और गोभी ना खाएं। मसालेदार और चटपटा भोजन खाने से बचना चाहिए। शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी से परहेज करें। गुनगुने पानी से नहाएं। तनाव कम लें।

इन बातों का ध्यान रखें-
नियमित खानपान में गाजर, पालक, टमाटर, आंवला, पपीता और अखरोट शामिल करने चाहिए।
महिला को सोयाबीन अधिक खाना चाहिए।
नियमित व्यायाम के साथ घूमना टहलें।
खुद को व्यस्त रखें ।
योग के साथ ध्यान लगाएं और प्राणायाम करें।
तनाव से दूर रहें, किसी चीज की चिंता न करें ।



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किचन में मौजूद इस छोटी-सी चीज से करें माइग्रेन का इलाज

माइग्रेन एक तरह का सिर दर्द है। ये बहुत कष्टदायक सिरदर्द होता है इसमे सिर की एक तरफ या आंखों के ऊपर तेज झनझनाहट वाला दर्द महसूस होता है। माइग्रेन में होने वाला सिरदर्द बहुत तकलीफ दायक होता है। माइग्रेन में सिर के एक ओर रुक -रुक कर भयानक दर्द होता है। माइग्रेन सिरदर्द से जुड़े लक्षणों में जी मिचलाना, एक आंख या कान के पीछे दर्द, टेम्पल में दर्द, प्रकाश और/ या ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता, अस्थायी दृष्टि हानि व उल्टी आदि शामिल हैं। माइग्रेन के कुछ घरेलू उपचार भी हैं।

राई से करें माइग्रेन का उपचार-
आमतौर पर किचन में रखी राई का इस्तेमाल अचार बनाने या फिर सब्जी में तड़का लगाने के लिए करते हैं। राई दिखने में जितनी छोटी है उतने ही फायदों से भरपूर है। यह कई स्वास्थ्य समस्याओं में भी कारगर है।

राई में मैंगनीज, मैग्नीशियम, फास्फोरस, विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, फाइबर, फिनालिक एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई पोषक तत्त्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

राई माइग्रेन के दर्द में बहुत कारगर है। सिर का दर्द या माइग्रेन में इसको बारीक पीसकर दर्द वाले हिस्से पर लगाना होता है। दो से तीन घंटे में आराम मिल जाता है।



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तनाव व थकान से राहत के लिए शरीर के इन बिंदुओे को दबाएं

आज के समय में अनियमित जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिदंगी में मानसिक तनाव एक आम समस्या बन गई है। अधिक काम के बोझ के कारण थकान व तनाव दूर करने के लिए एक्यूप्रेशर से उपचार किया जा सकता है। हमारे शरीर में कुछ ऐसे बिंदु होते हैं जिन्हें दबाने से थकान और तनाव में आराम मिलता है। आइये जानते हैं इनके बारे में।

1- तनाव और सिर दर्द में आराम के लिए आंख के ऊपर दोनों भौंहों के बीच प्वॉइंट पर उंगलियों से कम से कम 20 बार दबाव बनाएं।

2- सिर के पिछले भाग में अंगुलियां रखें। गर्दन व सिर के ज्वॉइंट पर अंगुलियों से 20 सेकंड तक दबाव बनाएं। इसके बाद कनपट्टी से लेकर माथे के केंद्र तक के प्वॉइंट्स पर अंगुलियों से दबाव बनाएं। इसे तनाव में आराम मिलेगा।

3- गर्दन पर मसाज के लिए कनपटी से गर्दन के केंद्र बिंदु तक अंगुलियों से 20 सेकंड तक दबाव बनाते रहें। गर्दन के निचले हिस्से में प्वॉइंट्स पर अंगुलियों से 20 सेकंड दबाव बनाएं।

4- कंधों के केंद्र बिंदु पर तीन उंगलियों से टटोलें और हड्डियों पर हल्का प्रेशर डालें। 20 सेकंड तक तेज दबाव दें और छोड़ दें। इससे दिमाग रिलैक्स होगा।



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कोरोना वायरस से सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल दुनियाभर के लिए चिंता का विषय- डब्ल्यूएचओ

जेनेवा । कोविड-19 को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की आपातकालीन समिति ने सर्वसम्मति से सहमति जताई है कि महामारी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल को वैश्विक चिंता का विषय बना दिया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, यह घोषणा शुक्रवार को 2 दिवसीय बैठक के समापन के बाद हुई। यह बैठक डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ट्रेडोस एडनहोम घेब्रेयसिस ने अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य रेगुलेशन के तहत महामारी की स्थिति और प्रगति की समीक्षा करने के लिए की गई थी।

समिति के अनुसार, महामारी को अब भी एक समन्वित अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया की जरूरत है। समिति ने डब्ल्यूएचओ और देशों को आने वाले महीनों के लिए अंतर्राष्ट्रीय यातायात के संबंध में विभिन्न उपायों, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखना और भावी कोविड -19 टीकों के लिए योजना तैयार करने संबंधी सलाह दीं। समिति ने देशों से महामारी को लेकर दी जाने वाली प्रतिक्रिया के राजनीतिकरण से बचने का भी आग्रह किया।

ट्रेडोस ने बैठक के बाद एक प्रेस वार्ता में कहा कि सरकारों को वायरस से निपटने पर ध्यान देना चाहिए और राजनीतिकरण से बचना चाहिए।" ट्रेडोस ने घोषणा की कि अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के एक समूह ने अपने चीनी समकक्षों के साथ पहली वर्चुअल बैठक की। यह बैठक डब्ल्यूएचओ के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय मिशन का हिस्सा थी जो कोरोनावायरस का मूल पहचानने के लिए काम कर रही है। जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के अनुसार, दुनिया में कोरोनावायरस मामलों की कुल संख्या 4.54 करोड़ और मौतों की संख्या 11.87 लाख हो चुकी है।



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भारत में 121641 लोग कोरोना से गंवा चुके हैं जान, पिछले तीन दिनों से बढ़ रहे मरीज

नई दिल्ली । भारत में 24 घंटों में कोरोनावायरस के 48,268 नए मामले सामने आने और 551 मौतों के साथ शनिवार को देश में इस बीमारी के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 81,37,119 हो गई। राष्ट्रीय राजधानी में भी पिछले तीन दिनों से प्रतिदिन लगभग 5,000 मामलों के साथ संक्रमण की संख्या में वृद्धि देखने को मिली है।

कुल कोविड-19 मामलों में से, 5,82,649 वर्तमान में सक्रिय हैं, 74,32,829 को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है जबकि 1,21,641 लोग कोरोना से जान गंवा चुके हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों ने दर्शाया कि रिकवरी दर 91.34 प्रतिशत है और मृत्यु दर 1.49 प्रतिशत है।

महाराष्ट्र कुल 16,72,858 मामलों और 43,837 मौतों के साथ कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बना हुआ है। इसके बाद आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और दिल्ली हैं।
इस बीच, दिल्ली में शुक्रवार को कोरोना के 5,891 नए मामले दर्ज किए गए, जो अब तक का सबसे अधिक एक दिवसीय वृद्धि है, जिसमें कुल मामलों की संख्या बढ़कर 3.81 लाख के पार पहुंच गई, जबकि 47 नई मौतों के साथ राष्ट्रीय राजधानी में अब तक 6,470 लोगों की मौत हो चुकी है।
संक्रमण की तीसरी लहर से जूझ रही है राष्ट्रीय राजधानी में पिछले तीन दिनों से प्रतिदिन 5,000 से अधिक मामले आ रहे हैं।
इस बीच, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने शुक्रवार को एक ही दिन में 10,67,976 सैंपल परीक्षण किए। अब तक कुल 10,87,96,094 नमूनों की जांच हो चुकी है।



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Friday, 30 October 2020

शरद पूर्णिमा- इम्यूनिटी बढ़ाकर रोगों से बचाती है चांदनी रात में बनी खीर

शरद पूर्णिमा वाले दिन बनी खीर को अमृत माना जाता है। इस खीर को खाना फायदेमंद होता है । चंद्रमा की किरणों से निकली ऊर्जा त्वचा के रोमछिद्रों के जरिए रक्त कोशिकाओं में मिलकर सभी अंगों को मजबूत बनाती है। आयुर्वेद के अनुसार शरद पूर्णिमा से विसर्गकाल (शरद, शिशिर व हेमंत) की शुरुआत होती है और इस दौरान शरीर की इम्युनिटी और बल स्वाभाविक रूप से मजबूत रहते हैं।

चंद्रमा की चांदनी फायदेमंद -
शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूरे तेज पर होता है । इसमें से निकलने वाली चांदनी में ठंडक से शरीर को फायदा होता है । इस दिन चांदी के बर्तन में चावल से बनी खीर को किरणों के सीधे संपर्क में रखने के बाद अद्र्धरात्रि ( 12 बजे) में खाएं। इसमें ऊर्जा का संग्रहण होता है। चांदी के बर्तन में रखा दूध कम प्रतिक्रिया दिखाता है। दूध व चावल की तासीर पित्त को नियंत्रित करती है।

शरद ऋतु गर्मी से सर्दी के बीच का समय होता है। एक तरह से गर्मी के जाने और शीत के आगमन से मौसमी एलर्जी खासतौर पर त्वचा की, सांस लेने में तकलीफ या सांस का फूलना, अस्थमा आदि ज्यादा होती है। आयुर्वेद में इसे तमक श्वास की समस्या कहते हैं। खाना पचाने वाले पित्त में बदलाव आते ही अस्थमा की समस्या होती है।



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कब्ज की वजह से होती है पाइल्स, फिशर और फिस्टुला की समस्या

आज के अव्यवस्थित खानपान और आधुनिक जीवनशैली के कारण कब्ज एक आम समस्या बन गई है। कब्ज में मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में मुश्किल होती है। पेट साफ नहीं हो पाता है। ज्यादा जोर लगाने से भी स्टूल पास नहीं होता है। यह पाचन से जुड़ी एक समस्या है। यदि कब्ज ज्यादा दिन तक रहे और इसका समय पर इलाज न कराया जाए तो बवासीर, फिशर, फिस्टुला की समस्या भी हो सकती है। आईये जानते हैं इनके बारे में।

बवासीर -
बवासीर या पाइल्स में गुदा मार्ग के अंदर व बाहरी हिस्से में सूजन आ जाती है। इस वजह से उसके अंदर व बाहरी हिस्से में मस्से निकलने लगते हैं। इस कारण से मल विसर्जन करने के दौरान दर्द व खून निकलता है। मस्से बाहर की ओर आ जाते हैं।

फिशर -
फिशर भी एक तरह का गुदा रोग है। इसमें गुदा में व आसपास के हिस्से में दरारें व कट हो जाते हैं।

फिस्टुला-
फिस्टुला में गुदा के आसपास छेद होने से उसमें तेज दर्द, सूजन, लाल त्वचा, कब्ज और मल-त्याग के समय खून आने लगता है। अगर सही समय पर इलाज न कराया जाए तो यह कैंसर और आंतों की टी.बी. का कारण बन सकती है।

पाइल्स के लक्ष्ण-
शुरुआत में तो पाइल्स के लक्षण दिखाई नहीं देते। पहले हल्की खारिश महसूस होती है, गुदा के अंदर मस्से व जोर लगाने पर हल्का खून आता है, फिर दूसरी स्टेज में मल त्याग के वक्त मस्से बाहर आने लगते हैं। इसमें दर्द व खून निकलता है। तीसरी स्टेज में मस्से बाहर निकल आते हैं इसमें मरीज को तेज दर्द व मल के साथ खून ज्यादा आता है। आखिरी स्टेज में मस्से बाहर की ओर लटक जाते हैं। संक्रमण का भी खतरा रहता है।

इसके कारण क्या हैं-
असमय खानपान, मिर्च-मसालेदार चीजें खाने, तनाव, खराब जीवनशैली की वजह से दिक्कत होती है।

उपचार-
भोजन में फाइबर व प्रोटीन युक्त चीजों को शामिल करें । मौसमी, हरी सब्जियां, सोयाबीन, दालें, दानामेथी, अलसी के बीज आदि का सेवन करें। डिब्बाबंद चीजों से परहेज करें। शाकाहारी भोजन लें। मैडिटेशन, योग, आयुर्वेद और दवाओं से भी उपचार किया जा सकता है। तीसरी और चौथी स्टेज में सर्जरी की जाती है। इसमें एंडोस्कोपी से इलाज आसान है।



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अगर कूल्हे, जांघ या पिंडलियों में होता है तेज दर्द तो हो सकती ये बीमारी

ब्लड वेसल्स में ब्लॉकेज के कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज की समस्या होती है। में पैरों तक खून ले जाने वाली धमनियां ब्लॉकेज से सिकुड़ जाती हैं तो पेरीफेरल आर्टेरियल डिजीज की समस्या होती है और पैरों को ब्लड सप्लाई कम होने के कारण इससे थोड़ा सा चलने पर पैरों में दर्द होने लगता है। जब ब्लड वेसल्स में थक्का जम जाता है तो बैठे हुए भी पैर में दर्द होता है। जब इन ब्लड वेसल्स में कोलेस्ट्रॉल का जमाव ज्यादा होता है तो पैरों में रक्त प्रवाह बंद हो जाता है। ऐसे में पैर का वो हिस्सा सिकुड़ जाता है। काला हो जाता है। इसे गैंग्रीन कहते हैं (पैरों में ब्लॉकेज की थ्रोम्बोसिस समस्या भी होती है जो दूषित रक्त के प्रवाह से जुड़ी शिराओं में होती है)। इसमें इन्फेक्शन से मरीज को सेप्टीसीमिया भी हो सकता है। इससे बचने के लिए पैर के उस हिस्से को काटकर अलग करना पड़ता है। इससे हृदय पर भी बुरा असर पड़ता है।

लक्षण-
इसमें कूल्हे, जांघ या पिंडली में दर्द होता है। पैरों का सुन्न होना, कमजोरी, पैर में बाल कम होना, उनका रंग बदलना, स्किन चिकनी होना, नाखून की ग्रोथ व पैर की पल्सेशन कम होना एवं पैर में घाव आसानी से नहीं भरता है।

रोकथाम व उपचार-
स्मोकिंग, जंकफूड, तली-भुनी चीजें, ट्रांस फैट का सेवन कम करें। नियमित व्यायाम करें। पैरों को चलाते रहें। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर व ब्लड कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रखें। होना चाहिए।

उपचार-
इनमें ब्लॉकेज होने पर एंजियोप्लास्टी से बंद नसों को खोला जाता है। यदि एंजियोप्लास्टी नहीं हो सकती तो बाइपास सर्जरी की जाती है।



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हर्बल दवा से होगा किडनी की पथरी का इलाज

नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) ने किडनी की पथरी को खत्म करने के लिए एक हर्बल दवा विकसित की है। नई दवा का नाम यूआरओ-05 है जो किडनी से पथरी को हटाने के लिए नॉन-इन्वेंसिव विकल्प प्रदान करती है। पांच साल के शोध के माध्यम से लागत प्रभावी दवाओं को विकसित किया गया है।

संस्थान के 67वें वार्षिक दिवस को चिह्न्ति करते हुए मंगलवार को उत्पादन के लिए दवा की तकनीक को एनबीआरआई को हस्तांतरित किया गया। यह दवा मौखिक रूप से दी जाएगी और यह उत्पादन के लिए तैयार है, वहीं यह छह महीने के भीतर बाजार में उपलब्ध होगी।

इस दवा का क्लिनिकल परीक्षण किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में किया गया था और अब तक के परीक्षण काफी उत्साहजनक रहे हैं। दवा को एक सेंटीमीटर पथरी के आकार तक प्रभावी पाया गया है। प्रारंभिक परिणामों से पत्थर के आकार में लगभग 75 प्रतिशत की कमी हुई है, वहीं इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं नजर आया। आईआईटीआर ने विषाक्तता को लेकर दवा की जांच की है और इसे लेने का कोई बड़ा दुष्प्रभाव नहीं पाया है।

दवा गंगा के मैदान में पाए जाने वाले पांच पौधों से तैयार की जाती है। यही नहीं, इसमें प्रयोग होने वाली वनस्पति भी प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है, जिसके कारण दवाओं के निर्माण के लिए कच्चे माल की कोई समस्या नहीं होगी। वैज्ञानिकों का दावा है कि हर्बल दवा पथरी के लिए दी जाने वाली एलोपैथिक दवा टेम्सुलोसिन जितनी ही प्रभावी है। साथ ही, हर्बल होने के कारण इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है।



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भारत ने कोरोना परीक्षण क्षमता को बढ़ाकर 10 करोड़ से ऊपर पहुंचाया

नई दिल्ली । देश में पिछले 24 घंटों में कोरोनावायरस के 48,648 नए मामले और 563 मौतों के साथ शुक्रवार को कुल संख्या बढ़कर 80,88,851 हो गई। राष्ट्रीय राजधानी में भी दैनिक मामलों की संख्या में वृद्धि जारी है। कुल कोविड-19 मामलों में से, 5,94,386 वर्तमान में सक्रिय हैं। 73,73,375 को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है जबकि 1,21,090 महामारी से जान गंवा चुके हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों ने दर्शाया कि जहां रिकवरी दर 91.15 प्रतिशत है, वहीं मृत्यु दर 1.50 प्रतिशत है।

मंत्रालय ने कहा कि भारत ने अपनी परीक्षण क्षमता को जनवरी के मुकाबले बढ़ाकर 10.65 करोड़ से अधिक कर लिया है। उच्च परीक्षण के कारण पॉजिटिविटी दर लगातार गिर रही है। यह वर्तमान में 7.54 प्रतिशत है।" महाराष्ट्र 16,66,668 मामलों और 43,710 मौतों के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बना हुआ है। इसके बाद आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और दिल्ली का स्थान है।

दिल्ली में दैनिक संक्रमण की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि जारी है। गुरुवार को एक स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 5,739 ताजा कोविड-19 के मामले दर्ज किए गए, जो एक दिन में अब तक का सबसे अधिक मामला है। 27 नई मौतों के साथ कोरोना के अब तक दिल्ली में 3.75 लाख मामले सामने आ चुके हैं। राष्ट्रीय राजधानी में इस बीमारी से अब तक 6,423 लोगों की मौत हो चुकी है।

दिल्ली में पिछले दो दिनों से रोजाना 5,000 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। जबकि 23 अक्टूबर से दैनिक संख्या 4,000 से ऊपर बनी हुई है। इस बीच, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने गुरुवार को एक ही दिन में 11,64,648 सैंपल परीक्षण किए। अब तक कुल 10,77,28,088 नमूनों की जांच हो चुकी है।



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ये कंपनी जल्दी दुनियाभर में लॉन्च करेगी कोरोना वैक्सीन

वाशिंगटन । अमेरिकी बायोटेक्नोलॉजी कंपनी मॉडर्ना जल्दी ही दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन की घोषणा करेगी। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अपने कोविड-19 वैक्सीन के वैश्विक लॉन्च की तैयारी कर रही है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने गुरुवार को एक बयान में मॉडर्ना के सीईओ स्टीफन बैंसेल के हवाले से बताया, "हम एमआरएनए-1273 के लॉन्चिंग के लिए सक्रिय रूप से तैयारी कर रहे हैं और हमने दुनियाभर की सरकारों के साथ कई आपूर्ति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।"

फरवरी में आ सकती है Corona की Vaccine, विभाग ने मांगा स्वास्थ्य कर्मियों का ब्यौरा

वैक्सीन पर काम कर रही है कंपनी-
बैंसेल के अनुसार, कोविड-19 वैक्सीन एमआरएनए-1273 के तीसरे चरण के अध्ययन के अलावा मॉडर्ना के पास अब दूसरे चरण के चार प्रोग्राम हैं। उन्होंने आगे कहा, "मॉडर्ना उच्चतम डेटा गुणवत्ता मानकों और कठोर वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रतिबद्ध है, हमने एमआरएनए-1273 को आगे बढ़ाने के लिए नियामकों के साथ काम करना जारी रखा है।"

30,000 लोगों पर पूरा किया था अध्ययन-
गौरतलब है कि 22 अक्टूबर को एमआरएनए-1273 के तीसरे चरण के अध्ययन ने विविध समुदायों के लगभग 37 प्रतिशत प्रतिभागियों के साथ 30,000 प्रतिभागियों पर इनरोल्मेंट पूरा किया था। वहीं 14 जुलाई को द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित वैक्सीन के पहले चरण के अंतरिम विश्लेषण से पता चला कि एमआरएनए-1273 ने सभी आयु वर्गों के लोगों पर अच्छी तरह से काम किया और सार्स-सीओवी-2 के खिलाफ तेजी से काम किया।



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'युवाओं में सबसे ज्यादा हो रहा ये रोग' , जानें इसके बारे में

आपके शरीर के जोड़, घुटने, कूल्हे, कंधे या फिर पूरे शरीर में बिना किसी खास वजह से दर्द और सूजन हो तो सतर्क हो जाएं ये गठिया Arthritis की समस्या हो सकती हैं । कभी-कभी तकलीफ इतनी बढ़ जाती है कि आपको चलने-फिरने में भी दिक्कत होने लगती है। ज्यादातर लोगों में ये समस्या उम्र बढ़ने के साथ दिखाई देती है, सामान्यत: इस बीमारी के लक्षण 30 से 35 वर्ष की उम्र में दिखाई देते हैं। गठिया अनुवांशिक व जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में ये बीमारी ज्यादा गंभीर होती है। यदि समय पर इसका इलाज और जीवनशैली में सुधार किया जाए तो जोड़ों में दर्द की दिक्कत से बच सकते हैं। इससे लोगों की चाल तक बदल जाती है। शुरुआती समय में इसका इलाज कराने से राहत मिल सकती है।

सोरियाटिक आर्थराइटिस नजरंदाज करना पड़ सकता है भारी

गठिया का कारण -
गठिया शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। जब हड्डियों के जोड़ों में यूरिक एसिड जमा होने लगता है तो धीरे-धीरे वह गठिया का रूप ले लेता है। यूरिक एसिड बढ़ने की प्रमुख वजह गलत खानपान व जीवनशैली है। जब शरीर में यूरिक एसिड बढ़ जाता है तो ये जोड़ों में छोटे-छोटे क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है। इस जमाव के कारण जोड़ों में दर्द और ऐंठन की समस्या होने लगती है। खराब जीवनशैली की वजह से युवावर्ग इसकी चपेट में ज्यादा आ रहा है।

गठिया के प्रकार -
रूमेटॉयड ।
सोराइटिक ।
ओस्टियो सोराइसिस ।
पोलिमायलगिया रूमेटिका ।
एनकायलाजिंग स्पोंडिलाइटिस ।
रिएक्टिव ।
गाउट या गांठ ।
सिडडोगाउट गठिया ।

इन बातों का रखें ध्यान -
गठिया में खानपान का विशेष ध्यान रखना होता है। विशेषज्ञों के अनुसार आलू, चावल, तली हुई चीजें नहीं खानी चाहिए। साथ ही सर्दी में ठंडे पानी से स्नान से बचना एवं सर्दी व बारिश में विशेष ध्यान देना चाहिए।

गठिया के लक्षण -
जोड़ों में दर्द, सूजन, बुखार, थकान आती है। शुरुआती तौर पर अंगुलियों में दर्द होता है। गठिया के कारण कई बार अंगुलियां मुड़ती नहीं हैं। कलाइयों में भी सूजन आ जाती है। खासतौर पर सर्दियों और बरसात के मौसम में समस्या ज्यादा होती है।



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Ayurvedic Drink For Immunity: इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाले 3 आयुर्वेदिक ड्रिंक्स, दिलाएंगे कई रोगों को छुटकारा!

नई दिल्ली। अगर किसी इंसान का इम्यून सिस्टम मजबूत है तो वह कई संक्रामक बीमारियों से लड़ सकता है। हमारे घरों में ऐसे कई औषधिय चीजें मौजूद रहती है जिसका उपयोग करके आप छोटी मोटी बीमारियों का उपचार आसानी से कर सकती हैं। (Home Remedies) से बनने वाली ड्रिंक इंसानों के पूरे शरीर को स्वास्थ दुरुस्त रखने में कारगर होती है। हम अपने घरों में युपयोग होने वाली कई साधारण वस्तुओं से इम्यूनिटी बढ़ाने वाली ड्रिंक्स (Immunity Boosting Drink) बना सकते हैं।

1. तुलसी है आयुर्वेदिक ड्रिंक का सशक्त माध्यम

तुलसी का पौधा आमतौर पर हर घर में पाया जाता है। जब सर्दी जुकाम होता है तो अपनी चाय में अदरक के साथ तुलसी ज़रूर डालते हैं। वैसे तुलसी को सबसे अच्छा घरेलू इम्यूनिटी बूस्टर माना जाता है। जानकार तुलसी के सेवन के तरीके की जानकारी को काफी उपयोगी मानते हैं। विज्ञान भी तुलसी के गुण को मानता है जो इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाता है। आयुर्वेद में तुलसी के पत्ते को वात, पित्त और कफ नाशक माना गया है, इसी वजह से तुलसी के पत्ते को इम्यूनिटी बढ़ाने में फायदेमंद माना गया है।

कैसे बनाएं ड्रिंक

– 6 से 8 पत्तियां तुलसी की, हरी इलायची, 3-4 काली मिर्च, अदरक और साथ मे 10-12 मुनक्का लें।

– दो गिलास पानी बर्तन में ले कर उसे धीमी आंच पर लगभग 15 मिनट पकल कर पानी आधा करलें।

– इस काढ़े को ठंढ़ा होने के बाद पिया जा सकता है।

तुलसी से बना यह आयुर्वेदिक इम्यूनिटी बूस्टर हर घर में बनाया जा सकता है जो हर किसी के लिए फायदेमंद होगा।

2. त्रिफला आयुर्वेद में है अमृत

बैक्टीरिया और वायरस इंसानों के सबसे बड़े छुपे हुए दुश्मन होते हैं, जिनका इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है, उन्हें ये जल्दी अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं। लेकिन जिनकी मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली होती है उन्हें ये दूर से सलाम करते हैं। इसके अलावा प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करने में आयुर्वेद के कुछ नुस्खे काफी कारगर होते हैं। उनमें से एक है त्रिफला, जो साधारण जड़ी-बूटियों के पारंपरिक आयुर्वेदिक मिश्रण से तैयार किये जाते हैं।

कैसे बनाएं त्रिफला ड्रिंक

– दो गिलास पानी में त्रिफला चूर्ण मिलाकर धीमी आंच पर चढ़ा दें

– पानी पाक कर आधा होने तक खौलाएं।

– इस काढ़े के ठंडा होने पर छान लें और सेवन करें

3. अश्वगंधा का इम्यूनिटी बूस्टर ड्रिंक

अश्वगंधा अपने आप मे आयुर्वेद की एक प्रमुख दवा मानी गई है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ कई बीमारियों के इलाज में भी कारगर है। पर कोरोना महामारी के दौर में आयुर्वेदिक औषधियों पर लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ है। इसी वजह से आयुष मंत्रालय सहित कई स्वास्थ्य संगठन जड़ी बूटियों के माध्यम से इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं। इन्ही जड़ी बूटियों में एक है अश्वगंधा।

अश्वगंधा का ड्रिंक बनाने की विधि

– अश्वगंधा का इम्यूनिटी बूस्टर ड्रिंक बनाने के लिए अश्वगंधा का पाउडर, शहद और नींबू लें

– अश्वगंधा ड्रिंक बनाने के लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच अश्वगंधा पाउडर डालें।

– एक गिलास पानी जब 10 मिनट उबल कर आधा हो जये, इसमें शहद और नींबू का रस डाल कर गैस बंद कर छान लें। इसे पिया जा सकता है।

बताई जा रही यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी बीमारी के लिए किसी विशेषज्ञ या अपने डॉक्टर से सलाह लें। पत्रिका इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करती है।



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'इन योगासन से लचीला बनेगा शरीर', जानें इनके बारे में

आप शरीर को फिट रखने के लिए कई तरह के प्रयास करते हैं। जिम में घंटों पसीना बहाते हैं। डायटिंग आदि करते हैं। लेकिन फिर भी ज्यादा कोई फायदा नहीं होता है। एरोबिक, एक्सरसाइज, ब्रिस्क वॉक, मॉर्निंग वॉक और कार्डियो एक्सरसाइज ये सब करना शरीर के लिए फायदेमंद है लेकिन योग-आसान, प्रणायाम ऐसे एक्सरसाइज हैं जो आपके शरीर को भीतर से मजबूत बनाती है। इन आसनों को आप कार्डियो के रूप में कर सकते हैं। आइये जानते हैं इनके बारे में।

'इन खास टिप्स से तुरंत कम होगा मोटापा', जानें इनके बारे में

ऊर्ध्व हस्तासन -
सबसे पहले इस आस को करने के लिए सावधान की स्थिति में खड़े हो जाएं। दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर ऊपर की ओर खींचें। फिर सांस खींचते हुए पहले दाएं तरफ और फिर बाएं तरफ थोड़ा झुकें। इस दौरान सामान्य सांस लेते रहें। इसके नियमित अभ्यास से लंबाई तो बढ़ती है साथ ही हर अंग की मांसपेशियों और अंदरूनी कोशिकाओं पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा व आपका शरीर अंदर से मजबूत रहेगा। इसे करते समय सावधानी इस बात की रखें कि अभ्यास के दौरान कोई दिक्कत जैसे असहज महसूस होने, चक्कर आने, सिरदर्द जैसी परेशानी होने लगे तो तुरंत इसे करना छोड़े दें।

उत्कटासन -
पहले सीधे खड़े हो जाएं फिर दोनों पैरों के बीच 6 इंच की दूरी व दोनों हाथों को कंधों के बराबर सामने की ओर रखें। धीरे-धीरे सांस लेते हुए घुटनों को मोड़ते हुए जैसे कुर्सी पर बैठते हैं वैसे ही बैठें। हाथों को सिर के बराबर ऊपर ले जाएं व सामान्य सांस लें। इसी स्थिति में रुकें। धीरे-धीरे सांस छोड़ें। प्रारंभिक अवस्था में आएं। इससे जांघ, कमर व पेट की चर्बी कम होने से मांसपेशी व हड्डियां मजबूत होती हैं। कब्ज-एसिडिटी में लाभ होता है। याद रखें कि इस आसन को खाली पेट नहीं करें। पैरों में किसी प्रकार की चोट हो तो बिना विशेषज्ञ व चिकित्सक की सलाह के न करें।

पूर्वोत्तानासन -
ये एक ऐसा आसान है इससे पूरे शरीर का व्यायाम होता है। जमीन पर सीधे लेट जाएं। आसमान की तरफ देखें। श्वांस अंदर लेते हुए नितम्बों, कमर व कन्धों को ऊपर की ओर उठाते हुए आसमान की ओर देखते रहें। इसके बाद हाथ पीछे करते हुए पैर के अंगूठे को पकडऩे का प्रयास करें। पैर का अंगूठा पकड़ते समय ठोड़ी सीने से सटी होनी चाहिए। इससे शरीर मजबूत व लचीला बनता है। कमरदर्द में फायदेमंद है। पूर्वोत्तानासन को गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक से परामर्श के बिना नहीं करना चाहिए। सामान्यत: बिना एक्सपर्ट के कोई भी योग नहीं करना चाहिए।



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Thursday, 29 October 2020

ऑस्ट्रेलिया ने हटाया दुनिया का सबसा लंबा लॉकडाउन

दुनिया के सबसे लंबे कोरोनावायरस लॉकडाउन (longest corona virus lock down) में से एक ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न (Melbourne, Australia) में बुधवार की सुबह सरकार ने लॉकडाउन हटा लिया। इस लॉकडाउन के हटने के बाद करीब 50 लाख शहरी (5 मिलियन) अब शहर में कहीं भी आ जा सकेंगे। 3 महीने से ज्यादा के समय तक लॉकडाउन झेलने के बाद मेलबर्न के लोग अब रेस्तरां, पब, बार, पार्क, थिएटर और अन्य सार्वजनिक जगहों पर परिवार संग घूमने का लुत्फ उठा सकेंगे। हालांकि इस दौरान कुछ नियमों का पालन भी करना होगा। लॉकडाउन रोलबैक के बाद शहर में बुधवार तक कोरोना का एक भी नया मामला नहीं आया था। जुलाई के अंत और अगस्त की शुरुआत में महामारी प्रकोप के चरम के दौरान प्रत्येक दिन सैकड़ों संक्रमित मामलों में तेजी से गिरावट भी आई है। मेलबर्न में पीटर डोहर्टी इंस्टीट्यूट फॉर इन्फेक्शन एंड इम्यूनिटी के निदेशक शेरोन लेविन ने बताया कि 111 दिनों के लॉकडाउन ने हजारों लोगों की जान बचा ली। लॉकडाउन ने वायरस के प्रसार को रोकने में मदद की। हालांकि इससे अर्थव्यवस्था और निवासियों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर भी पड़ा है।

ऑस्ट्रेलिया ने हटाया दुनिया का सबसा लंबा लॉकडाउन

31 फीसदी बढ़ गए मानसिक स्वास्थ्य के मामले
ब्लूमबर्ग न्यूज के मुताबिक, मेलबर्न के उपनगर विक्टोरिया में कोरोना लॉकडाउन के दौरान रोजाना औसतन 1200 नौकरियां जा रही थीं। जबकि सितंबर और अक्टूबर में लॉकडाउन के कारण मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं की मांग में 31 फीसदी की वृद्धि हुई। जुलाई में जब लॉकडाउन लगाया लगाया था तो यह कहा गया था कि सिर्फ 6 सप्ताह के लिए ही लॉकडाउन लगाया जा रहा है। इस बीच, शराब की खपत बढ़ गई जिससे घरेलू हिंसा (domestic violence) और तलाक (divorce) के मामले भी बढ़ गए।

ऑस्ट्रेलिया ने हटाया दुनिया का सबसा लंबा लॉकडाउन

कोविड-19 में दरक गए रिश्ते
दरअसल, कोरोना महामारी के दौरान जब ऑस्ट्रेलिया में परिवार आर्थिक तंगियों से गुजरने के दौरान गरीबी और आर्थिक तंगी के दबाव में बहुत से रिश्ते दरक गए। जोड़ों ने आपसी समझौते से एक-दूसरे से अलग होने का निर्णय लिया। द नेक्स्ट वेब की रिपोर्ट के अनुसार, रिलेशनशिप ऑस्ट्रेलिया के सर्वेक्षण में पता चला है कि 739 उत्तरदाताओं में से 42 फीसदी ने लॉकडाउन के दौरान अपने जीवन साथी के साथ अपने रिश्ते में नकारात्मकता महसूस की। अध्ययन में यह भी पता चला है कि बड़ी संख्या में दंपति तलाक संबंधी सलाह लेना चाहते हैं। इन नतीजों को ध्यान में रखते हुए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने भी अलग होने का समर्थन किया है।

ऑस्ट्रेलिया ने हटाया दुनिया का सबसा लंबा लॉकडाउन

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Tuesday, 27 October 2020

'अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कोविड-19 को हराने का एकमात्र तरीका'

संयुक्त राष्ट्र । संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग ही जारी महामारी कोविड-19 (कोरोना वायरस) और जलवायु संकट को हराने का एकमात्र तरीका है। सोमवार को एक अनौपचारिक बैठक में गुटेरेस के दिए बयान के हवाले से सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने बताया, "अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कोविड-19 महामारी, जलवायु आपातकाल, बढ़ती असमानता और नफरत के प्रसार जैसे मुद्दों को हराने का एकमात्र तरीका है।"

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि एक ऐसी चुनौतीपूर्ण घड़ी में मैं बहुपक्षवाद को पुर्नजीवित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रतिबद्धता की घोषणा का स्वागत करता हूं।"

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने यह भी कहा कि मैं आपसी सहयोग को मजबूत बनाने हेतु एक समग्र और गहन प्रयास के प्रति मुखर हूं और साथ ही मैं यह भी देखना चाहता हूं कि दुनिया वर्तमान और आगामी चुनौतियों का सामना कैसे करती है।"



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भारत में 3 महीने में कोरोना के सबसे कम कोरोना के मामले दर्ज किए गए

नई दिल्ली । भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोनावायरस के 36,470 नए मामले सामने आए, जिसके बाद कुल मामलों की संख्या देश में 79,46,429 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को ये जानकारी दी। पिछले तीन महीनों में कोविड-19 मामलों की ये सबसे कम वृद्धि दर्ज की गई है। सोमवार को कुल 45,148 मामले दर्ज किए गए थे।

देश में पिछले 24 घंटों में कोविड-19 से 488 मौतें हुई जिसके बाद कुल मौतों की संख्या 1,19,502 हो गई है। कुल मामलों में से फिलहाल 6,25,857 लोग वायरस के सक्रिय मरीज हैं और 72,01,070 मरीजों को अब तक इलाज के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, देश में वायरस से रिकवरी रेट 90.23 प्रतिशत हो गई है, जबकि मृत्यु दर 1.50 फीसदी है।

महाराष्ट्र अभी भी सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है। यहां अब तक 16,48,665 मामले दर्ज हो चुके हैं और 43,348 मौतें हो चुकी हैं। इसके बाद स्थान है आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और दिल्ली का। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, भारत में एक दिन में 9,58,116 सैंपल की जांच की गई, इसके साथ ही नमूनों की जांच की कुल संख्या 10,44,20,894 हो गई।



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ये छोटी-छोटी टिप्स आपको बाल झड़ने की समस्या से छुटकारा दिलाएंगे

बालों के झड़ने hair loss की समस्या बहुत बढ़ती जा रही है। लोग बाल झड़ने से बचाने के लिए तरह-तरह के उपचार करते है। लेकिन कोई खास फायदा नहीं होता है। जानें ये खास टिप्स...

बालों के झड़ने की समस्या महिलाओं में भी बढ़ रही है, जानें इसके बारे में

1- मेथी के चूर्ण में एलोवेर और पानी मिलाकर उसे गीला कर उसका लेप बालों में लगाएं फिर थोड़ी देर बाद धो लें, इससे फायदा मिलेगा।

2- डैंड्रफ के लिए नीम के तेल में कपूर मिलाकर सिर की मसाज करें। डैंड्रफ नहीं होगा तो बाल भी नहीं झड़ेगे।

3 - रीठा व शिकाकाई से बालों को धुलें।

4- गीले बालों में तेल न लगाएं।

5- दही व नींबू के पेस्ट से बालों की मसाज करें।

6- सही मात्रा में पोषक तत्व लें ।

7- भृंगराज रसायन, भृंगराज व आंवला चूर्ण, मिश्री, काली तिल पीसकर सुबह-शाम पांच ग्राम पानी के साथ लें इससे फायदा मिलेगा।

8- तनाव से बाल झड़ने लगते हैं। इस लिए ज्यादा तनाव न लें।

9- गीले बालों में कंघी न करें । इससे बाल ज्यादा टूटते हैं



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छोटी सी हरड़ कई बड़ी बीमारियों को करेगी दूर, जानें इसके खास फायदे

आयुर्वेद में कई बीमारियों का रामबाण औषधि त्रिफला में हरड़ को भी शामिल किया जाता है। हरड़ सेवन के कई फायदे हैं। हरड़ पाउडर का नियमित सेवन किया जाए तो इससे मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है। इसके सेवन से वजन भी कम होता है। यह पाचन बेहतर करता है इससे गैस, एसिडिटी, अपच जैसी समस्याएं नहीं होती हैं।

हरड़ के फायदे -
हरड़ का स्वाद मीठा, कड़वा होता है।
ये पेट साफ करने और पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
यह पोषक तत्त्वों का अच्छे से समावेश करने और शरीर को स्वस्थ बनाने में मदद करता है।
हरड़ के सेवन से वजन कम करने में मदद मिलती है। ये पित्त को संतुलन बनाए रखता है।
बवासीर में रक्तस्राव में फायदा मिलता है ।
शरीर में कहीं भी सूजन और घाव में फायदेमंद है।

ऐसे करें सेवन -
छोटी हरड़ को हल्का घी में फूलने तक भूनकर बारीक पाउडर बनाकर सेवन करें।
हरड़ एक चम्मच गुनगुने पानी के साथ लेने से पाचन व कब्ज संबंधी समस्या में लाभ मिलता है।
ब्लड प्रेशर, लिवर, खांसी, जुकाम, एलर्जी, एसिडिटी, मोटापा और हृदय संबंधी समस्या में विशेषज्ञ की सलाह से इस्तेमाल करें।



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'इन खास टिप्स से तुरंत कम होगा मोटापा', जानें इनके बारे में

मोटापा इंसान के लिए एक अभिशाप की तरह है। मोटापे की मुख्य वजह शरीर में बहुत अधिक वसा का जमा होना, खराब जीवनशैली, असंतुलित आहार है। तो समझ लीजिए कि आप अगर मोटापा कम करना चाहते हैं तो शरीर से वसा कम करें, आहार का ध्यान रखें, जीवनशैली सही रखें। जानिए कुछ खास टिप्स।

खास टिप्स -
सुबह नाश्ता भारी लें और समय पर करें। लंच सामान्य एवं डिनर हल्का लेना चाहिए। प्रोटीन व पोषणयुक्त संतुलित आहार लेना जरूरी है।
भोजन में लापरवाही न करें । अपनी जीवनशैली को बेहतर रखें।
आहार में कैलोरी की उचित मात्रा लें। (महिलाओं के लिए 1,200 से 1,500 कैलोरी, पुरुषों के लिए 1500 से 1800 कैलोरी )
एकसाथ खाना न खाएं।
जंक फूड न खाएं।
व्यायाम करें।
सात-आठ घंटे की नींद लें।
खाने से एक घंटे पहले या बाद में ही पानी पीएं।
सुबह नींबू का रस डालकर 1 गिलास गुनगुना पानी पीएं।
गरिष्ठ, ठंडे और मीठे भोजन का प्रयोग न करें।
चीनी के स्थान पर शहद लें।



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बदलते मौसम में बुखार के लिए बहुत फायदेमंद है ये स्पेशल काढ़ा, ऐसे करें तैयार, जानें फायदे

इस समय बदलते मौसम में वायरल फीवर की समस्या एक आम बात है। इन दिनों स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव होता रहता है। बुखार, जुकाम से ज्यादातर लोग परेशान रहते हैं। अगर बुखार में लापरवाही कर देंगे तो मर्ज लंबे समय तक ठीक नहीं होता है और समस्या बढ़ती जाती है। बदलते मौसम में बच्चों, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सब जुकाम, बुखार की चपेट में आ जाते हैं। मलेरिया, वायरल फीवर और डेंगू के लिए यूनानी चिकित्सा Unani Medicine पद्धति में तैयार तिरियाकी काढ़ा बुखार में बहुत कारगर है। आइये जानते हैं इस काढ़े के क्या फायदें और इसे कैसे तैयार कर कर सकते हैं।

कोरोना : इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत बनाएगा यह काढ़ा, और यह दूसरा है रामबाण

काढ़े को ऐसे बनाएं-
आलू बुखारा 5 दाने, कासनी के बीज तीन ग्राम, कद्दू के बीज तीन ग्राम, बेहदाने का लुआब तीन ग्राम लेकर जोशांदा बना लें। उसमें अर्क गाउज़बान 72 ग्राम, अर्क गुलाब 72 ग्राम, शर्बत नीलोफर 24 ग्राम, शर्बत ख़ाकसी 5 ग्राम मिलाकर बना लें। इस तरह आपका स्पेशल काढ़ा बन जाएंगा। इस काढ़ा को नियमित सुबह-शाम लेने से तीन से चार दिन में फायदा मिलेगा।

फायदा- इस काढ़ा के सेवन से मलेरिया, वायरल फीवर और डेंगू जैसी बीमारियों में फायदा मिलेगा। यह कमजोरी भी दूर करता है।

सेवन का तरीका -
गर्भवती महिलाएं इस काढ़े का सेवन न करें। बच्चों व बूढ़े बाकी लोग ले सकते हैं। इसे दिन भर में दो बार ले सकते हैं। बुखार उतरने के बाद भी इसे पी सकते हैं।



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जानिए दांत निकलने पर बच्चों को क्यों होते हैं उल्टी और दस्त

दांत निकलने Teething in Babies के दौरान बच्चों को दस्त या उलटी की समस्या होने लगती है, इसकी मुख्य वजह उनके मसूड़े होते हैं। दरअसल, दांत निकलने के दौरान बच्चों के मसूड़ें बेहद संवेदनशील हो जाते है। इसलिए बच्चा अपने आस-पास की चीजों को मुंह में डालने की कोशिश करता है। इससे बैक्टीरिया या वायरस बच्चों के पेट में चले जाते हैं और बच्चों को उल्टी, दस्त की समस्या होने लगती है। जिन बच्चों की अधिक लार निकलती है, उन्हें भी उल्टी और दस्त होने लगते हैं। दस्त संक्रमण होने से होती है न कि दांत निकलने की वजह से होती है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह और इलाज बेहद जरूरी होता है।

गर्मी के मौसम में बच्चे को होने लगें ज्यादा दस्त तो करें ये उपाय

लक्ष्ण-
बच्चों के 6 से 9 माह के बीच दांत निकलने शुरू हो जाते हैं। हर चीज चबाना, लार आना, रोना, चिड़चिड़ापन, मसूड़ों में खुजली व सूजन, उल्टी-दस्त होना इसके लक्षण है। मसूड़ों में खुजली, जमीन पर पड़ी चीजों को मुंह में लेने से पेट में संक्रमण से बच्चे को दस्त होते हैं। दस्त संक्रमण होने से होती है न कि दांत निकलने की वजह से होती है।

उपचार ऐसे करें-
बच्चे को ज्यादा दस्त, कमजोरी, मसूड़ों में सूजन, चिड़चिड़ापन की समस्या का होम्योपैथी में इलाज है। कैल्शियम सप्लीमेंट दे सकते हैं। होम्योपैथी में कैल्शियम के लिए कैल्केरिया फॉस व अन्य दवाएं देते हैं।

घरेलू उपचार-
बच्चे को केला मसलकर दें। स्तनपान कराते रहें। एक चम्मच चीनी व नमक एक लीटर पानी में घोलें। बच्चे को थोड़ी-थोड़ी देर में देते रहें। दांत निकलने में देरी हो तो बच्चे को इलाज की जरूरत पड़ती है।



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'इस मौसम में होने वाली 6 खतरनाक बीमारियों से ऐसे बचें'

इस बदलते मौसम में सबसे ज्यादा मच्छर जनित व अन्य वायरस के रोगों के मरीज सामने आते हैं। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल फीवर, आई फ्लू, स्क्रब टाइफस के मरीज सामने आते हैं। इन बीमारियों से बचने के लिए सावधानी रखना बहुत जरूरी है। आइये जानते हैं इनके बारे में ।

इन बीमारियों से बचें...

1. डेंगू Dengue
डेंगू वायरस (एडीज मच्छर का संक्रमण ) के काटने से होता है। शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की कमी व त्वचा पर लाल चकत्ते इसके लक्षण हैं।
कैसे बचें : साफ पानी को जमा होने व मच्छरों को पनपने से रोकें। मच्छरों के काटने से बचाव करें।

2. चिकनगुनिया Chikungunya
ये 'आर्बोवायरस' से होता है। 104 डिग्री बुखार, शरीर पर लाल दाने हो सकते हैं। खाना बेस्वाद लगता है।
कैसे बचें : सुबह-शाम के समय विशेष रूप से मच्छरों से बचें। लंबी आस्तीन की शर्ट व फुल पेंट पहनें।

3. मलेरिया Malaria
मच्छर के काटने से होता है। तेज कंपकंपी के साथ बुखार आता है।, ठंड लगती है।
कैसे बचें : पानी ढंककर रखें। पानी की सतह पर तेल डालें इससे मच्छर नहीं पनपेंगे। मच्छरदानी लगाएं।

4. वायरल Viral
सर्दी- जुकाम में होने वाला बुखार है। खांसने-छींकने से फैलता है।
कैसे बचें : बाहर के खानपान को न कहे , घर के आसपास पानी जमा न होने दें।

5. आई फ्लू Eye Flu
इंफ्लूएंजा वायरस से होता है। हाथों से आंखों तक पहुंचता है। आंखों में दर्द व लाल होना लक्षण हैं।
कैसे बचें : हाथों और आंखों को बार-बार धोएं।

6. स्क्रब टाइफस Scrub Typhus
घास व हरियाली में पाए जाने वाले परजीवी कीड़े के काटने से होता है। मांसपेशियों व सिर में दर्द, खांसी इसके लक्ष्ण हैं ।
कैसे बचें : जंगली पौधों से दूर रहें।, पालतू जानवारों से दूर रहें।



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Monday, 26 October 2020

स्वस्थ रहने के लिए महिलाओं को लेने चाहिए ये पोषक तत्व, भूल से भी ना करें इन्हें इग्नोर

नई दिल्ली। भारत में यदि स्वास्थ को लेकर बात करे, तो सबसे ज्यादा बीमारी का बढ़ता आंकड़ा महिलाओँ में सबसे ज्यादा पाया गया है। यहां तक कि कोरोना (Corona) महामारी का सबसे ज्यादा प्रभाव भी महिलाओं, बच्चों और किशोरों पर पड़ा है। महिलाओं की सेहत पर हो रही लगातार गिरावट का सबसे बड़ा कारण तो पहले महिलाएं खुद होती हैं। क्योंकि वो लगातार घर के साथ ऑफिस का काम करने के दौरान अपने शरीर का ख्याल बिल्कुल भी नही करती है और लापरवाही बरतने लगती है और इनकी यही लापरवाही उनकी सेहत के लिए काफी खतरनाक साबित होती है।

परिवार के सदस्यों के स्वस्थ रहने के साथ महिलाओं का स्वस्थ रहना भी काफी जरूरी है और इसके लिए उन्हें चाहिए की वो भरपूर मात्रा में पोषक तत्व का उपयोग अपने खान में करें। स्वस्थ जीवन जीने के लिए पौष्टिक आहार लेना महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से, महिलाओं को अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। क्योंकि महिलाओं के शरीर में शारीरिक परिवर्तन के साथ हार्मोन्स में भी काफी बदलाव होते है। और ऐसे में शरीर में होने वाली कमी को दूर करने के लिए पोषक तत्वों का सेवन करना आवश्यक है। सिर्फ प्रोटीन (protien), विटामिन (vitamin) और कैल्शियम (calcium) ही नहीं बल्कि अन्य कई पोषक तत्व का सेवन भी महिलाओं को रोज करना चाहिए। चलिए आज हम बताते हैं कि किस तरह के पोषक तत्वों महिलाओं के शरीर केलिए वरदान साबित हो सकते है। इसकी कमी को कैसे पूरा किया जाए।

फोलिक एसिड
महिलाओं के शरीर में सेहत का सबसे ज्यादा असर पीरियड्स और प्रेग्नेंसी के दौरान ही देखने को मिला है। क्योंकि उस दौरान उन्हें फोलिक एसिड (folic acid) की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। साथ ही इस दौरान महिलाओं में चिढचिढ़ाहट, डिप्रेशन, माइग्रेन ज्यादा देखने को मिलता है इस कमी को पूरा करने के लिए अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, एवोकाडो, ड्राई बीन्स, नट्स, मटर, ब्रोकली, खट्टे फल और दालों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

आयरन
गर्मभकाल के दौरान महिलाओं के शरीर में सबसे ज्यादा आयरन (iron) की कमी सबसे पहले होती है जिससे उन्हें काम करने के दौरान थकान महसूस होती है और शरीर में रक्त की कमी हो जाती है ऐसे में उन्हें आयरन की ज्यादा जरूरत होती है. इसके लिए पालक, चावल, किडनी बीन्स, टमाटर, ब्रोकली, अंजीर, अखरोट, बादाम-काजू, किशमिश, खजूर और सफेद चने आदि का सेवन करें।

फाइबर
30 से 50 वर्ष की महिलाओं को पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए 25 ग्राम फाइबर (fiber) रोजाना लेना सबसे ज्यादा जरूरी होता है। इससे टाइप-2 डायबिटीज, दिल की बीमारियों और कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है। फाइबर के लिए आप सेब, अखरोट, ब्राऊन राइस, पालक, स्वीट कॉर्न, ब्रोकली, गाजर जैसी चीजों का सेवन भरपूर मात्रा में करें।

विटामिन्स
उम्र के बढ़ने के साथ साथ महिलाओं के शरीर में कई तरहके परिवर्तन होते रहते है। और ऐसे समय में शरीर में होने वाली कमी को पूरा करने के लिए विटामिन व खनिज युक्त (vitamins) चीजों का सेवन करना महिलाओं के लिए काफी जरूरी होता है। इस कमी को पीरा करने के लिए आप लाल शिमला मिर्च, अमरूद, संतरा, ब्रोकली और स्ट्राबेरी का सेवन भरपूर मात्रा में करें। अंडे की जर्दी, टूना फिश और कैटफिश में भी विटामिन्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है।

प्रोटीन
शोध के अनुसार, एक महिला को हर रोज करीब 50ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। इससे ना केवल हड्डियां मजबूत होती है बल्कि महिलाएं कई बीमारियों से भी बची रहती हैं। शरीर में इसकी कमी को पूरा करने के लिए आप अपनी डाइट में चिकन, रेड मीट, मछली, काजू और बादाम का सेवन कर सकते हैं।



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बदलते मौसम में खानपान का ऐसे रखें ध्यान, जानें ये खास टिप्स

इस समय मौसम बदल रहा changing season है, गर्मी का सीजन जा रहा है और सर्दी का सीजन आ रहा है। इसे बदलते मौसम में खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। खानपान पर ध्यान देकर बच्चों, बुजुर्ग बीमार होने से बच सकते हैं। शीत ऋतु में खानपान के साथ जीवनशैली में बदलाव करना होता है। जिनको बीपी, शुगर, थायरॉइड, कैंसर, दमा जैसी बीमारियां हैं उनको विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आहार को तीन भागों में बांटकर भोजन करें।

1- ऊर्जादायक आहार

2- बलकारी आहार

3- रक्षाकारी आहार

ऊर्जादायक आहार : इस आहार में गेहूं, चावल, जौ, बाजरा, मक्का, घी, तेल, गुड़, शक्कर, मक्खन, आलू, शकरकंद, जमींकंद आदि शामिल हैं। इनसे बनी चीजों के भोजन में शामिल करें।

बलकारी आहार : इस आहार में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, एंटीऑक्सीडेंट, प्रोटीन से भरपूर मेवे, दालें, पनीर व दूध आदि शामिल हैं।

रक्षाकारी आहार : बीमारियों से बचाने के लिए विटामिन्स, फाइटो विटामिन्स व खनिज लवणों से युक्त फल, सब्जियां आदि दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।

इसी तरह आहार को बच्चों, महिलाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की कैटेगरी में बंट लेना चाहिए।

बच्चों का आहार : पनीर, दालें, अनाज, विटामिन ए, सी व ई युक्त पदार्थ, अंडे, ताजा फल व सब्जियों का जूस आदि दे सकते हैं।

युवाओं का भोजन : प्रोटीन, अंडे, हरी सब्जियां व फलों का सेवन करें। शरीर में फ्लूड इनटेक ज्यादा न करें।

महिलाओं की थाली : संतुलित आहार के साथ बादाम, अखरोट, अंजीर खाएं। कैल्शियम के साथ भरपूर डेयरी प्रोडक्ट्स भी ले सकते हैं।

बुजुर्गों के लिए : जौ, ज्वार जैसे मोटे अनाज (ओट्स) के साथ अंकुरित दालें लें। तरल पदार्थ के रूप में दही व फलों का जूस, रोजाना 10-12 गिलास पानी पीना जरूरी है।



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अपनी मर्जी से न लगाएं फेस क्रीम, स्टेरॉयड से होता है नुकसान

आमतौर पर हम चेहर गोरा बनाने के लिए, त्वचा में ग्लो लाने के लिए, कील-मुंहासे, दाग आदि हटाने के लिए चेहरे पर बाजार में आने वाली किसी भी क्रीम face cream को लगा लेते हैं, लेकिन उससे होने वाले नुकसान के बारे में नहीं सोचते। अक्सर बिना किसी एक्सपर्ट की सलाह के मेडिकल स्टोर से पूछकर दवाइयां, क्रीम आदि ले लेते हैं। क्रीम लगाने का नुकसान चेहरे को होता है। ऐसे में अत्याधिक स्टेरॉयड के कारण स्कीन पतली होकर नष्ट होने लगती है। चेहरे पर दाने निकलने, खुजली होने, जलन, धूप में चेहरा लाल होने जैसी कई समस्याएं होने लगती है।

लड़कियों ध्यान रखना, गोरा करने वाली क्रीम के ज्यादा इस्तेमाल से निकल आएंगी दाढी-मूंछ

क्रीम का प्रभाव-
क्रीम लगाने पर त्वचा में बदलाव तो आने लगता है त्वचा निखरने लगती हैं आपको लगता है इससे फायदा हो रहा है। आप इसको रोज लगाने लगते हैं। ऐसे में इसका दुष्परिणाम सामने आते हैं। शुरुआत में स्कीन में निखार आता है, लेकिन बाद में फोड़े-फुंसी, खुजली, जलन, धूप में चेहरे पर लाल हो जाना या फिर उनके चेहरे पर बाल निकलने लगते हैं। त्वचा में जलन होने लगती है। इस लिए बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के क्रीम का इस्तेमाल न करें।



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सर्दी-जुकाम में बहुत काम आएंगे ये छोटे-छोटे घरेलू नुस्खे

इस बदलते मौसम में सर्दी, खांसी, कफ और जुकाम जैसी समस्याएं होने लगती है। इन रोगों के उपचार के लिए बाजार की मंहगी दवाओं को छोड़कर घरेलू उपाय करें। इन उपचारों को आजमाकर इन बीमारियों से बचा जा सकता है। आइये जानते हैं इनके छोटे-छोटे घरेलू उपचारों के बारे में।

अदरक- सर्दी के मौसम में अदरक खूब आती है, इससे शरीर की इम्युनिटी भी बढ़ती है। अदरक को घिसकर पानी में एक चौथाई होने तक उबालें। इसके बाद इस गुनगुने पानी में गुड़ और दूध मिलाकर सुबह-शाम पीएं। इससे सर्दी-जुकाम में आराम मिलता है।

इलायची- सर्दी-जुकाम होने पर इलायची पाउडर को रुमाल में डालकर सूंघने से आराम मिलता है। इससे बंद नाक खुल जाती है।

कर्पूर- अगर तेज जुकाम के कारण नाक बंद गई है तो कर्पूर को सूती कपड़े में बांधकर सूंघें। बंद नाक तुंरत खुल जाएगी।

खजूर- खूजर इम्युनिटी बूस्टर का काम करता है। इससे ताकत बढ़ती है। इसलिए सर्दी भर एक खजूर को दूध में उबालकर खाएं और दूध भी पीएं।

नींबू- उबलते हुए पानी में अदरक, कालीमिर्च, थोड़ी चायपत्ती मिलाकर चाय बनाकर इसमें नींबू का रस मिलाकर पीएं। सीने में जकड़न, कफ और खांसी की समस्या में आराम मिलेगा।

जायफल- एक चुटकी जायफल पाउडर को गुनगुने दूध के साथ लेने पर सर्दी-जुकाम में आराम मिलता है।

केसर- ठंड में केसर वाला गर्म दूध बहुत फायदा करता है। केसर वाला दूध ठंड और मौसमी बीमारियों से बचाता है। होता है। रात को सोते समय केसर वाला गुनगुना दूध पिएं मौसमी बीमारियां नहीं होगी।



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‘रस्सी कूदकर घटाएं वजन’, जानें इसके अन्य फायदे

पहले रस्सी rope jumping कूदना बच्चों के लिए एक खेल होता था। अब रस्सी कूद बॉडी एक्सरासाइज का अहम हिस्सा बन चुकी है। मोटापा कम करने व वजन घटाने के लिए रस्सी कूदना फायदेमंद है। रस्सी कूद एक ऐसी कार्डियो एक्सरसाइज है जो ट्रेडमिल से भी जल्दी वजन घटाने में मदद करती है। 15 मिनट रस्सी कूदने का मतलब है कि आपने फुलवर्कआउट कर लिया है। रस्सी कूदने के फायदे जानिए ...

रस्सी कूदने के फायदे:

रोप स्किपिंग मतलब रस्सी कूदने से शरीर में मौजूद अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती है। इस वजन व मोटापा कम होता है।

इससे शरीर का स्टेमिना बढ़ता है।

दिल से जुड़ी परेशानियां नहीं होतीं।

आंखों व हाथों के लिए फायदेमंद ।

इससे पैरों के मसल्स मजबूत होते हैं।

शरीर का रक्त संचार ठीक रहता है।

कब कूदें -
सुबह या शाम को खाना खाने से पहले रस्सी कूद सकते हैं।
10 से 30 मिनट तक रस्सी कूद की जा सकती है
जूते पहनकर रस्सी कूदें।
प्लास्टिक की रस्सी का प्रयोग करें ताकि वह मुड़े नहीं।

ये लोग बचें: हर्निया, दिल, बीपी के रोगियों को और सिजेरियन से प्रसव के तीन माह तक महिलाओं को रस्सी नहीं कूदनी चाहिए।



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भारत में डाउन हो रहा है कोरोना वायरस का ग्राफ, तीन महीनों में सबसे कम मामले सामने आए

नई दिल्ली। भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोनावायरस के 45,148 नए मामले सामने आए, जिसके बाद कुल मामलों की संख्या 79,09,959 हो गई। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को ये जानकारी दी। कुल मामलों में से 6,53,717 फिलहाल सक्रिय हैं, 71,37,228 को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। पिछले 24 घंटों में देश में कोविड-19 से 480 मौतें हुई, जिसके बाद कुल मौतों की संख्या 1,19,014 हो गई।

स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, देश में रिकवरी की दर 90.23 फीसदी है, जबकि मृत्यु दर 1.50 प्रतिशत है। मंत्रालय ने कहा कि भारत ने कोरोनावायरस की लड़ाई में एक मील का पत्थर पार कर लिया है। 70 लाख से ज्यादा मरीज इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं।

महाराष्ट्र अभी भी कोरोनावायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है। यहां अब तक 16,45,020 मामले दर्ज हो चुके हैं और 43,264 लोग इससे जान गंवा चुके हैं। इसके बाद स्थान आता है आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और दिल्ली का।



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“दांतों में ठंडा-गर्म लगे तो हो सकते हैं ये कारण, ऐसे करें उपचार”

दांतों में अगर कुछ ठंडा, गर्म या मीठा खाने या पीने से दांतों में झनझनाहट होती है तो ये एक गंभीर समस्या है, इसे सेंसिटिविटी Sensitive Teeth कहा जाता है। ये दो तरह की होती हैं सेंसिटिविटी और हाइपर-सेंसिटिविटी । दांतों का संवेदनशील होना सामान्य बात है लेकिन अतिसंवेदनशील होने पर इलाज की जरूरत होती है। तो जानिए क्या है दांतों से जुड़ी ये समस्याएं।

दांतों के लिए अच्छा फाइबर डाइट, नमक-तेल की मालिश भी करें

सेंसिटिविटी - कुछ ठंडा या गर्म खाने-पीने पर अगर दांतों में तेज ठंडक या गर्माहट महसूस हो और किसी प्रकार का दर्द या तकलीफ नहीं है तो इसे दांतों का संवेदनशील (सेंसिटिव) होना कहते हैं।

हाइपर-सेंसिटिविटी – यदि दांतों में ठंडा या गर्म खाने-पीने झनझनाहट के साथ तेज दर्द, तेज तकलीफ हो तो इसे हाइपर-सेंसिटिव कहते हैं।

सेंसिटिविटी का कारण-
जब दांतों की एनेमल या सीमेंटम परत दांतों से हट जाती हैं, तो यह स्नायुतंत्र सीधे बाहरी वातावरण के संपर्क में आ जाता है और दांत में झनझनाहट होने लगती है इसे ही सेंसिटिव होना कहते हैं।

सख्त टूथब्रश के इस्तेमाल के कारण ।
पाइरिया होने से।
तम्बाकू और गुटखे का लगातार सेवन करने से।
दांतों के क्षरण या गलने के कारण।
दातों में कैविटी होने से।
दांत का कुछ हिस्सा टूटने से ।

बचाव कैसे करें-
अच्छे टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें। हो सके तो डॉक्टर की सलाह से टूथपेस्ट का उपयोग करें। अम्लीय और खट्टी चीजें जैसे नींबू, कैरी, इमली आदि कार्बोनेटेड कोल्डड्रिंक, सोडा जरूरत से ज्यादा न लें।

सेंसिटिविटी का उपचार –

एन्टी-सेंसिटिव टूथपेस्ट एवं माउथवाश ।

फिलिंग से।

रूट कैनाल ।
ग्राफ्ट ।

क्राउन (कैप) ।



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‘सर्दी में गुड़ खाने के 5 असरदार फायदे’ इन बीमारियों से दूर रहेगा शरीर

सर्दी के मौसम में गुड़ jaggery एक सुपर फूड है, इसके फायदों के बारे में लोगों को कम ही पता होता है। सर्दी के मौसम में गुड़ खाना विशेष लाभकारी होता है। गुड़ का नियमित सेवन करने से सर्दी के मौसम में होने वाले रोगों से बचा जा सकता है। गुड़ का पाचन जल्दी होता है। गुड़ में आयरन होता है इससे शरीर में खून की कमी नहीं होती।

गुड़ के फायदे : रात में सोने से पहले गर्म पानी के साथ करें गुड़ का सेवन, इन जानलेवा बीमारियों का खतरा हो जाएगा कम

1- गुड़ खाने से पाचन में सुधार होता है जिससे भूख बढ़ाती है और सेहत में सुधार होता है।

2- यदि आपको गले में खराश है गला बैठ गया है तो गुड़ के साथ चावल को पकाकर खाएं इससे तुरंत फायदा मिलेगा।

3- अस्थमा और जुकाम में गुड़ का सेवन लाभ देता है। गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा की समस्या नहीं होती । अगर जुकाम जम गया हो तो गुड़ को पिघलाकर उसकी पपड़ी बना कर खाएं। इससे फायदा मिलेगा।

4- कान में दर्द रहता है तो इसके लिए गुड़ और देशी घी को मिला कर खाएं इससे कान दर्द में फायदा होगा।

5- यदि आपको पेट में गैस की समस्या हो तो खाने के बाद गुड़ का सेवन करें इससे पेट में गैस नहीं बनेगी।

6- गुड़ के सेवन से ब्ल-ड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है। खासतौर पर हाई ब्लेड प्रेशर से परेशान लोगों को रोजाना गुड़ खाने से फायदा होता है।



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Sunday, 25 October 2020

गुनगुना पानी पीकर देखिए, सेहत को होंगे चमत्कारिक फायदे

गुनगुने पानी lukewarm water को आयुर्वेद में अमृत के समान माना गया है। गुनगना पानी जठराग्नि एवं धात्त्व अग्नि के साथ शरीर की पाचन क्षमता को मंद कर देता है। गुनगुना पानी पीने से शरीर की कई व्याधियां दूर होती हैं। आइये जानते हैं गुनगुने पानी से होने वाले फायदों के बारे में।

फायदे-
गुनगुना पानी पीने से भूख बढ़ाने वाले रस (जठराग्नि) की प्रक्रिया तेज होती है। इससे भोजन का पाचन दुरुस्त होता है। अपच, गैस, कब्ज और पेट दर्द के साथ श्वसन संबंधी समस्याएं भी खत्म होती हैं। फेफड़ों व सांस नली में जमा कफ निकलता है। गुनगुना पानी सर्दी, जुकाम, खांसी, सांस की तकलीफ में आराम देता है। एक गिलास गुनगुना पानी में आधा चम्मच नमक डाल गरारे करने से गले की खराश दूर होती है।

यूरिन की समस्सा : कुछ लोगों के रुक-रुककर यूरिन आने की समस्या होती है। गुनगुने पानी पीने से इस समस्या में राहत मिलती है। गुनगुना पानी पथरी,यूरिन ट्रेक इंफेक्शन में लाभकारी है। यह शरीर से विषैले तत्त्व बाहर निकलता हैं।

वजन : गुनगुना पानी पीने से शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा नहीं हो पाती है। इससे वजन नियंत्रित रहता है। गुनगुना पानी विटामिन्स, प्रोटीन्स, कार्बोहाइड्रेट्स एवं मिनरल्स को अंत:स्त्रावी ग्रंथियों व हर कोशिकाओं में पहुंचाकर मेटाबोलिज्म को ठीक रखता है।

सावधानी : गुनगुने पानी सर्दी और बारिश के मौसम में पानी चाहिए। रक्त संबंधी रोगी (त्वचा पर फोड़ा-फुंसी और चकत्ते हैं), चक्कर आना, शरीर में जलन, थकावट, नाक से खून आना, पित्त संबंधी परेशानी है तो उन्हें गुनगुने पानी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।



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मुंहासे, रूसी और पसीने की दुर्गंध से छुटकारा पाना चाहते हैं तो नीम को ऐसे करें इस्तेमाल

मुंहासे, पसीना और रूसी एक आम समस्या है, इसके उपचार के लिए बाजार में मौजूद तमाम मंहगे प्रॉडक्ट यूज करने के बाद भी कोई फायदा नहीं होता। इन समस्याओं से छुटकारा पाना के लिए एक प्राकृतिक और आसान तरीका है.. नीम का इस्तेमाल neem leaves। नीम में एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक, कृमिनाशक, चर्मरोग नाशक तत्व होते हैं। नीम की पत्तियां, इसके फूल फल, बीज, जड़, छाल आदि सब में औषधीय गुणों होते हैं। आइये जानते हैं कैसे आप इस नीम के स्पेशल घोल से मुंहासे, पसीने की बदबू, रूसी आदि से छुटकारा पा सकते हैं।

पसीने की दुर्गन्ध : गर्मी हो या सर्दी शरीर से पसीना तो निकलता ही है। शरीर के पसीने वाले हिस्सों में बैक्टीरिया पनपने के कारण बदबू आने लगती है। नीम के पानी से स्नान करने से इस समस्या से छुटकारा मिलता है।

मुंहासे : मुंहासे युवाओं की एक आम समस्या है, मुहांसे और इसके दाग चेहरे को खराब कर देते हैं। चेहरे पर बार-बार मुहांसे या ब्लैकहेड्स निकल रहे हैं तो नीम के पानी से मुंह धोने से फायदा होता है। सप्ताह में तीन-चार दिन नीम के पानी से चेहरा धोएं मुहांसे के समस्या से छुटकारा मिलेगा।

रूसी (डैंड्रफ): रुसी बालों की एक मुश्किल समस्या है, रूसी से सिर में खुजली भी होने लगती है। नीम के पानी से सप्ताह में 1-2 दिन बाल धोने से रूसी की समस्या में राहत मिलती है।

ऐसे करें तैयार – पेड़ से तोड़ी गई नीम की पत्तियों को पानी से साफ कर लें। फिर एक बड़े बर्तन में पानी को उबालें, जब पानी खूब उबलने लगे तो इसमें नीम की पत्तियां डालकर पांच मिनट तक उबालें। जब पानी हल्का हरे रंग का होने लगे व जलकर थोड़ा रह जाए तो इसको छान लें और नहाते समय पानी में मिले लें। नीम के पत्तों और बेर के पत्तों को पानी में उबालकर ठंडा कर बालों को धो लें। बालों का झड़ना कम जाएगा।



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अल्कलाइन डाइट से कम करें ‘पेट की चर्बी’, जानें इसके बारे में

अल्कलाइन डाइट Alkaline Diet में भोजन में उन खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाता है जो बॉडी में एसिड (अम्ल) का निर्माण करने की जगह क्षार की निर्माण करते हैं। अल्कलाइन खाद्य पदार्थों (क्षारीय खाद्य पदार्थों) का सेवन करने से शरीर का pH लेवल संतुलन में रहता है। अल्कलाइन डाइट के पीछे सिद्धांत खाने के तरीके को ठीक कर पीएच संतुलन का करना है।

कैसे काम करती है ये डायट-

अल्कलाइन डाइट में वेट लॉस और शरीर की चब्री घटाने के लिए मुख्य रुप से क्षारीय प्रकृति के भोजन का सेवन करने पर जोर दिया जाता है। इससे बॉडी का पीएच(क्षारीय और अम्लता की माप) बैंलेंस 7.35 से 7.45 के बीच बरकरार रखकर मोटापा घटाने में सहायता मिलती है।

ऐसे समझे – हमारे शरीर का खून कुछ हद तक क्षारीय प्रकृति का होता है, जिसका पीएच लेवल 7.35 से 7.45 के बीच होता है। हमारी डाइट भी इसी पीएच लेवल को मेंटेन करने वाली होनी चाहिए, इसलिए 70 फीसदी अल्कलाइन फूड और 30 फीसदी एसिड फूड खाना चाहिए। शरीर में Ph स्तर असामान्य होने पर थकान, कमजोर पाचन क्रिया और खराब इम्‍यून सिस्‍टम में खराबी आने लगती है जिससे शरीर बीमारियों की चपेट में आने लगता है।

pH की रेंज 0–14 के बीच होती है:
एसिडिक: 0.0–6.9
न्यूट्रल : 7.0
अल्कलाइन या बेसिक: 7.1–14.0

इसके फायदे : इस डायट को फॉलो करने से वजन घटता है शरीर की चब्री कम होती है, आर्थराइटिस, डायबिटीज और कैंसर आदि बामारियों में फायदा होता है। इससे अवसाद की समस्या भी खत्म होती है। यह डाइट बुढापे बुढ़ाने की रफ़्तार को भी कम करती है।

अल्कलाइन चीजें : इसमें मांस, डेयरी प्रोडक्ट, मिठाई, कैफीन, एल्कोहॉल, कृत्रिम और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ से परहेज तथा अधिक ताजा फल और सब्जियों तथा नट्स और बीजों का सेवन आता है। गाजर, पत्तागोभी, फूलगोभी, पालक, शिमला मिर्च, नींबू और लहसुन।



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सुबह का नाश्ता भूलकर भी न करें मिस, हो जाएंगे बीमार, जानें ये खास बातें

अगर आप भी सुबह का नाश्ता नहीं करते तो सावधान हो जाइये। ब्रेक+फास्ट (नाश्ता) दो शब्दों से मिलकर बना है, इसका मतलब ये है कि रातभर के लंबे अंतराल में शरीर ने जो व्रत किया है उसे तोड़ना। अच्छी सेहत के लिए नाश्ता करना बहुत जरूरी है।

ब्रेकफास्ट न करने से नुकसान-
शरीर में होने वाली सभी क्रियाओं के लिए ईधन यानि ऊर्जा की आवश्यकता होती है, और ये ऊर्जा हमें भोजन से मिलती है। भोजन को पचाने के बाद शरीर उसे ग्लूकोज में बदल देता है। यदि शरीर को सही समय पर भोजन मिलता रहे तो शरीर में ऊर्जा की पूर्ती होती रहती है। रात की लंबी नींद के बाद सुबह सोकर उठने पर शरीर को ऊर्जा की जरूरत होती है। जरूरी ऊर्जा न मिलने पर शरीर सुरक्षात्मक दशा में चला जाता है। शरीर में जमा फैट और प्रोटीन ग्लूकोज में बदलने लगता है। सारी परेशानी यहीं से शुरू हो जाती है।

दिमागी थकान-
शरीर में जमी वसा और प्रोटीन से ग्लूकोज बनाने के लिए दिमाग को ज्यादा काम करना पड़ता है। दिमाग का ज्यादा जोर शरीर के बचाव में लग जाता है। इससे सोचने, समझने की क्षमता पर असर पड़ता है। एकाग्रता में कमी आती है। और दिमाग थकने लगता है।

चिड़चिड़ाहट होना-
सुबह का नाश्ता नहीं करने से हर समय गुस्सा आता रहता है, चिड़चिड़ापन और काम में मन नहीं लगता।

एकाग्रता घटती है
नाश्ता नहीं करने से एकाग्रता में कमी आती है। याददाश्त कमजोर होती है। लोगों की शिकायत होती है कि वे जल्दी भूल जाती है, ऐसे लोग सबसे पहले यही देखें कि वे सुबह नाश्ता कर रहे या नहीं।

मोटापा बढ़ना-

ब्रेकफास्ट नहीं करने से लोगों में ज्यादा मीठे और वसायुक्त भोजन की इच्छा बढ़ती है। ऐसे लोग रात में जरूरत से ज्यादा खाते हैं, जो कि मोटापे की वजह बनती है।

हार्ट अटैक हो सकता है-
ब्रेकफास्ट न करने से डायबिटीज और बीपी की समस्या हो सकती हैं और इन्हीं बीमारियों से भविष्य में हार्ट अटैक का खतरा हो जाता है।



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यदि आपके मन में एक्सरसाइज को लेकर ये भ्रम हैं तो आज ही उन्हें दूर कर दें

आमतौर पर लोगों में एक्सरसाइज को लेकर कई तरह के भ्रम Myths About Exerciseहोते हैं। एक्सराइज के बारे सही और सटीक जानकारी न होने के कारण आपको फायदा होने की जगह नुकसान होने लगता है। इसका नतीजा ये होता है कि आप या तो एक्सराइज करना छोड़ देते हैं या गलत तरीके से करते रहते हैं जिसका खामियाजा आपकी सेहत और शरीर को भुगतना पड़ता है। इस लिए हम आपको कुछ ऐेसे भ्रम के बारे में बता रहे हैं जो आप पाले बैठे हैं। इस विषय में सही जानकारी रखना फायदेमंद होगा। यहां सबसे जरूरी बात ये है कि हो सके तो किसी एक्सपर्ट की देखरेख में ही एक्सरसाइज करें।

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जानिए भ्रम और सच्चाई के बारे में-

भ्रम - धीरे-धीरे एक्सरसाइज करने से ज्यादा फैट बर्न होता है।
सच्चाई : इस बात की सच्चाई ये है कि जितनी इंटेंसिटी के साथ एक्सरसाइज करेंगे उतनी ही ज्यादा कैलोरीज बर्न होगी । हाई इंटेंसिटी के वर्कआउट से मेटाबोलिक रेट बढ़ती है, जिससे ज्यादा कैलोरीज बर्न होती हैं। इसलिए हमेशा हाई गियर में एक्सरसाइज करें।

भ्रम - एक्सरसाइज करते रहो और जो मन चाहे खाते रहो।
सच्चाइ : दरअसल होता ये है कि सारी वसा (फैट) हमको शरीर के ऊपर दिखाई देता है, लेकिन वसा की कुछ मात्रा हमारे अंगों में विसरल फैट के रूप में जमा हो जाती है, जो सेहत के लिए ज्यादा खतरनाक है। एक्सरसाइज करने का फायदा तभी मिलेगा जब आप सही, संतुलित और सुपाच्य भोजन लेंगे।

भ्रम . सुबह खाली पेट करनी चाहिए एक्सराइज ।
सच्चाई : इस बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है । आप सुबह, दोपहर या शाम अपनी सुविधा के अनुसार जब चाहे एक्सरसाइज कर सकते हैं। एक्सरसाइज खाली पेट बिल्कुल भी न करें। कसरत से पहले फल, जूस, अंडा या हल्का भोजन लें।

भ्रम . ज्यादा एक्सरसाइज करने से होता है ज्यादा फायदा।
सच्चाई : यदि आप ऐसा सोचते हैं तो आप गलत हैं, अपनी शारीरिक क्षमता से ज्यादा एक्सरसाइज शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे मसल्स या हड्डियों को नुकसान हो सकता है। मांसपेशियों में खिंचाव के कारण शरीर में दर्द रह सकता है ।



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जापानी वैज्ञानिकों ने डीएनए-आधारित कोविड-19 वैक्सीन बनाई, अमरीका में होगा तीसरे चरण का ट्रायल

दुनियाभर में कोरोना वायरस कोविड-19 (corona virus covid-19) का टीका (covid-19 vaccine) बनाने की होड़ मची है लेकिन वायरस के 10 महीने की अवधि बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई कारगर वैक्सीन वैज्ञानिक जगत दुनिया को नहीं दे सके हैं। इस प्रयास में अब जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी (Osaka University, Japan) के वैज्ञानिकों ने भी अपना दावा पेश किया है। ओसाका विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में दो तरीकों स्यूडोवायरस ऐस्से और बाइंडिंग ऐस्से का इस्तेमाल किया है। हालांकि यह अध्ययन अब भी अपने प्रारंभिक चरण में है। 21 अक्टूबर को बायोरेक्सिव में प्रकाशित इस अध्यययन में प्रकाशित वैज्ञानिक रिपोर्टों समीक्षा नहीं की गई है इसलिए ओसाका विश्वविद्यालय के अध्ययन को मान्यता प्राप्त डेटा के रूप में निर्णायक नहीं माना जा सकता है।

जापानी वैज्ञानिकों ने डीएनए-आधारित कोविड-19 वैक्सीन बनाई, अमरीका में होगा तीसरे चरण का ट्रायल

कोविड-19 के विरुद्ध डीएनए से प्रेरित टीका
जापानी शोधकर्ताओं ने एक डीएनए-आधारित वैक्सीन विकसित की है जो कोरोना वायरस कोविड-19 के ही परिवार के एक अन्य सदस्य सार्स-सीओवी-2 (SARS-COV-2) के स्पाइक पर मौजूद ग्लाइकोप्रोटीन को लक्षित करती है। सार्स वायरस इस प्रोटीन का उपयोग मानव कोशिकाओं के एसीई-2 (ACE-2) रिसेप्टर से जुडऩे के लिए करता है। वायरस स्वस्थ मानव कोशिकाओं (HUMAN CELL) में प्रवेश करने और शरीर को संक्रमित करने के लिए एसीई-2 का उपयोग एक टूल की तरह करता है। शोधकर्ताओं ने वायरस के स्पाइक ग्लाइकोप्रोटीन के अत्यधिक-अनुकूलित डीएनए अनुक्रम (RNA) एन्कोडिंग को विकसित करने के लिए इन-सिलिको जीन अनुकूलन का उपयोग किया। यह अनुकूलन एल्गोरिद्म अभिव्यक्ति और इम्यूनोजेनेसिटी या शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाता है। डीएनए अनुक्रम एन्कोडिंग को डीएनए वैक्सीन पीवीएएक्स1 (pVAX1) के प्लास्मिड में इंजेक्ट किया। इसी तरह, उन्होंने प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं का आकलन करने के लिए स्यूडोवायरस न्यूट्रलाइजेशन एसेज का इस्तेमाल किया। अभी यह वैक्सीन जापान में क्लिनिकल परीक्षण के प्रारंभिक चरण में है। लेकिन प्रारंभिक आंकड़ों से पता चला है कि टीके ने कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाला है।

जापानी वैज्ञानिकों ने डीएनए-आधारित कोविड-19 वैक्सीन बनाई, अमरीका में होगा तीसरे चरण का ट्रायल

अमरीका में होगा तीसरे चरण का परीक्षण
22 अक्टूबर को अमरीका की स्वास्थ्य सेक्रेटरी और वैज्ञानिक हिल्डा बास्टियन ने ट्विटर पर संभावना जताते हुए ट्वीट किया कि ओसाका विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया जा रहा डीएनए वैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण संभवत: अमरीका में हो सकता है। ट्वीट में उन्होंने कोविड-19 वैक्सीन विकसित करने में ओसाका विश्वविद्यालय की साझेदार कंपनी एन्जीस की घोषणा को भी शामिल किया है। इसमें कहा गया है कि तीसरे चरण की तैयारी में अमरीकी कंपनी ब्रिकेल बायोटेक इंक के साथ सहयोग करने का सौदा हुआ था। एक बार टीके का पहला और दूसरा चरण सफल हो जाए तो वे तीसरे चरण के परीक्षण के लिए अमरीका को चुनने का प्रयास करेंगे। एन्जीस ने अनुमान लगाया है कि जापान की यह वैक्सीन 2021 तक बाजार में आ सकती है।



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मोबाइल, कम्प्यूटर, लैपटॉप का करते हैं ज्यादा इस्तेमाल तो आंखों को होगा नुकसान, जानें ये खास बातें

आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स हमारे लिए जितने उपयोगी हैं उससे कहीं ज्यादा हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक है, इन गैजेट्स का हद से ज्यादा इस्तेमाल हमारी सेहत पर खराब असर डालता है। कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल स्क्रीन आदि पर ज्यादा समय तक नजरे टिकाए रखना आंखों के लिए हानिकारक damage eyes है। स्क्रीन वाले गैजेट्स का इस्तेमाल करते समय आंखों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आइये जानते हैं इसके लिए कुछ खास टिप्स।

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इन खास बातों का रखें ध्यान-
मोबाइल, कम्प्यूटर, लैपटॉप चलाते समय आंखों को बीच-बीच में थोड़ा आराम देते रहे लगातार नजरें टिका का नजरें टिका कर न रखें। काम के दौरान हर घंटे आंखों को 3-5 मिनट के लिए आराम दें।

कंप्यूटर, लैपटॉप पर काम करते समय करीब एक मीटर की दूरी रखें। स्क्रीन और आंखों के बीच डेढ़-दो फीट का फासला जरूर रखें।

कंप्यूटर, लैपटॉप का स्क्रीन आई लेवल की ऊंचाई पर होना चाहिए। याद रखें ज्यादा गर्दन और कमर को झुकाकर काम ना करें।

स्क्रीन पर काम करते समय आंखों को बीच-बीच में झपकाते रहें। इससे आंखों में ड्राइनेस या आई स्ट्रेन की समस्या नहीं होगी। आंखों को जल्दी-जल्दी खोलें और बंद करें। ऐसा 15 से 20 बार कर सकते हैं।

यदि आप चश्मे लगाते हैं तो चश्मा लगाकर ही काम करें, साथ ही नंबर चेक कराते रहें कि चश्मे का नंबर बढ़ा तो नहीं हैं।

आंखों में गुलाब जल या डॉक्टर की सलाह पर कोई आई ड्रॉप डाल सकते हैं। भी डाल सकते हैं। रुई के फोहे को गुलाब जल में भिगोकर आंखों पर रखने से आराम मिलता है।

आंखों को आराम देने के लिए 20-20 गेम खेलें। इसके लिए आपको करना ये है कि 20 मिनट तक स्क्रीन आंखों को टिका कर रखने के बाद 20 सेकंड के लिए नजर वहां से हटाएं और खुद से 20 फीट दूर पर स्थित किसी चीज पर फोकस करें । आंखें पास की चीजों पर फोकस करती हैं तो उन्हें ज्यादा काम करना पड़ता है। ऐसे में बीच-बीच में दूर की चीजों पर फोकस करना जरूरी है।



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Saturday, 24 October 2020

स्वाद के साथ पाचन भी ठीक रखती आंवले-धनिया की चटनी

बाजार में आंवला और हरा धनिया आने लगा है। इसकी चटनी स्वाद के साथ पाचन भी ठीक रखती है। इसे बनाने के लिए हरा धनिया-आंवला 100-100 ग्राम, कालीमिर्च 10 नग, हींग एक चुटकी, जीरा आधा चम्मच, चार हरीमिर्च, नमक स्वादानुसार।
इस तरह खुद भी बनाएं
नमक छोडक़र सभी सामग्री को सबसे पहले अच्छे से साफ कर धो लें। इसके बाद एक मिक्सर में थोड़ा पानी मिलाकर अच्छे से पीस लें। इसके बाद फिर ऊपर से नमक मिला लें। इसको बनने में दो मिनट का समय लगता है। इसे नाश्ते, लंच या डिनर में खा सकते हैं। अगर इसमें मिर्च कम डालते हैं तो बच्चे भी इसे खा सकते हैं।
त्वचा-बालों को भी फायदा
आंवला पित्त को कम कर कई बीमारियों से बचाता है। यह वजन नियंत्रित रखता है। जो लोग अधिक वजनी है वे इस चटपटी तीखी चटनी को खाकर स्वाद बढ़ा सकते हैं। उन्हें ज्यादा फ्राइड चीजें खाने की इच्छा नहीं होगी। हरा धनिया और जीरा पेट के लिए फायदेमंद है। इस चटनी को खाने से बालों और त्वचा की समस्या में भी लाभ मिलता है। मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए इम्युनिटी भी बढ़ती है।



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शरीर में वात बढ़ने से चिकनाई कम होने लगती है, यह भी जोड़ों में दर्द की वजह

सर्दी में जोड़ों की समस्या बढ़ जाती है। इसकी मुख्य वजह ठंडक से शरीर में सूजन बढऩा है। इससे बुजुर्गों और जोड़ के रोगियों में दर्द बढ़ जाता है। अगर अभी से डाइट और दिनचर्या में कुछ बदलाव किया जाए तो इस समस्या से बचाव किया जा सकता है।
योग सिर्फ जोड़ों का दर्द ही नहीं बल्कि कई बीमारियों को दूर रखता है। अगर शुरू में मुश्किल आसन नहीं कर पाते हैं तो रोज सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, मेडिटेशन को ही लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं। इसके अलावा सुबह-शाम 25-30 मिनट जरूर टहलें। इससे जोड़ों में सूजन से बचाव होता है।
वात बढऩे से होता है दर्द
शरीर में वात की अधिकता होने से जोड़ों में दर्द की समस्या होती है। इससे जोड़ों में चिकनाई कम होने लगती है। जिससे जोड़ों में दर्द होने लगता है। इसलिए घी, तिल या सरसों-जैतून के तेल से मालिश करें और डाइट में घी को शामिल करें। इससे सूजन कम होगी और दर्द भी कम होगा।
नीम-सहजन डाइट में लें
जोड़ों के दर्द से राहत के लिए डाइट में करेला, नीम और सहजन की डंठल का उपयोग करें। ठंडी-खट्टी चीजों का परहेज करें। सुबह की धूप में थोड़ी देर जरूर बैठें या टहलें।



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Unani Tips: एक चम्मच शहद के साथ केसर रोज लेने से भी बढ़ती है इम्युनिटी

केसर में विटामिंस, मिनरल्स, पोटैशियम, एंटीबैक्टीरियल तत्व और एंटीआक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मिलते हंै। वहीं शहद प्राकृतिक प्रतिरोधक होता है जो बीमारियों से बचाव करता है। अगर बच्चे सात साल से छोटे हैं तो एक चम्मच शहद में केसर की एक-दो कतरन रोज देना चाहिए जबकि बच्चे की उम्र 7-12 वर्ष के बीच में है तो उसे एक चम्मच शहद के साथ 2-3 कतरन केसर के दें। वहीं वयस्कों को रोज 3-4 कतरन केसर और एक चम्मच शहद देने से इम्युनिटी बढ़ती है। इसी तरह खमीरा मरवरीद और खमीरा बनेफ्शा देने से भी शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है। पांच साल से छोटे बच्चे हैं तो उन्हें 4-5 ग्राम, 12 साल से छोटे बच्चों को 6-7 ग्राम और वयस्क को 10 ग्राम की मात्रा में देना चाहिए। इससे अधिक लेने से बचें। इससे दिक्कत हो सकती है। ग्वारपाठे यानी एलोवेरा का हलवा भी शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाता है। इससे शरीर मौमसी बीमारियों से बचती है। कोई भी दवा लेने से पहले विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।
डॉ. मो. आसिफ खान, यूनानी विशेषज्ञ



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नॉर्मल डिलीवरी के लिए रोज पिएं 10-12 गिलास पानी और ïघर के हल्के काम करें

प्रेग्नेंसी में अधिकतर महिलाएं चाहती हैं कि उनकी नॉर्मल डिलीवरी ही हो क्योंकि इसके कई फायदे भी हैं। वहीं सर्जरी में न केवल चीरा लगता है बल्कि बाद में भी कई तरह की दिक्कतें खासकर कमर में दर्द आदि भी रहता है। ऐसे में कुछ तरीके हैं जिनका पालन कर नॉर्मल डिलीवरी की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं।
नियमित योग और हल्के व्यायाम करते रहना फायदेमंद
प्रेग्नेंसी के दौरान हल्का व्यायाम और योग की सलाह दी जाती है। साथ ही घर के छोटे-छोटे व हल्के काम करते रहें। इससे महिला और गर्भस्थ शिशु, दोनों स्वस्थ रहते हैं। एक्सपर्ट की सलाह से रोज कम से कम 30 मिनट योग-व्यायाम करें।

तनाव वाले काम से बचें
गर्भावस्था में बहुत जरूरी है कि महिला खुश रहे। उसे किसी प्रकार तनाव न हो। मां की मानसिक स्थिति का सीधा असर गर्भस्थ शिशु के जन्म और डिलीवरी पर पड़ता भी है। पॉजेटिव रहें।
ग र्भ में शिशु एक थैली में रहता है। इस थैली को एमनियोटिक फ्लूड कहते हैं। इसी से बच्चे को ऊर्जा मिलती है। ऐसे में मां के लिए जरूरी है कि वह हर रोज 10-12 गिलास पानी पिएं। इससे थैली सूखती नहीं है। साथ ही आयरन और कैल्शियम लें। इससे भी सामान्य डिलीवरी में काफी मदद मिलती है।



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नाक बहने की समस्या है तो खट्टी-ठंडी चीजों का परहेज करें

आजकल सुबह उठते ही अधिकतर लोगों में नाक से पानी व छींके आने की समस्या होती है। कुछ लोग इसके लिए सर्दी-जुकाम की दवा लेते हैं जबकि यह एलर्जी भी होती है। इसमें होम्योपैथी दवा अधिक कारगर है। लेकिन कोई भी दवा लेने से पहले होम्योपैथी विशेषज्ञ की राय जरूर लें। क
कारणों की पहचान करें: एलर्जी से बचाव करना ही अच्छा उपाय है। इसके कारणों की पहचान कर इससे दूर रहें। सुबह-शाम गुनगुने पानी से गरारे करें। ठंडी और खट्टी चीजों से परहेज करें। जंक और फास्ट फूूड न खाएं। इन दिनों हल्का खाना खाएं। अपने घर और गाड़ी को साफ रखें। इसके धूल से भी एलर्जी की समस्या हो सकती है।
डॉक्टरी सलाह से लें ये दवाएं: होम्योपैथी में लक्षणों व मरीज की हिस्ट्री के आधार पर इलाज होता है। सिनापिस निग्रा, सबाडिल्ला, ब्रायोनिया, आर्सेनिक अल्बम आदि दवाइयां डॉक्टरी सलाह से लें। डॉ. पुनीत आर. शाह, होम्योपैथी विशेषज्ञ, जयपुर



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