Friday, 30 June 2023

Stop Hair Fall : मनसन क मसम म झडत बल क समसय क लए आयरवदक उपय

मानसून के मौसम में सबसे अधिक परेशान करता है बालों का झड़ना या हेयर फॉल। बारिश के मौसम में सबसे अधिक बाल झड़ते हैं। दरअसल, इस समय वातावरण में नमी मौजूद होती है। इसके कारण स्कैल्प पर चिपचिपाहट और इंफेक्शन होने की संभावना होती है। केमिकल प्रोडक्ट इस समस्या को और अधिक बढ़ा देते हैं। ऐसी स्थिति में आयुर्वेदिक इलाज ही कारगर हो सकते हैं।

गीले बालों को बांधने से डेंड्रफ व खुजली की समस्या होने लगती है। इससे बाल धीरे-धीरे जड़ों से कमजोर होकर टूटने लगते हैं। इस समस्या में ये उपाय किए जा सकते हैं।

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ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पानी पिएं। प्राणायाम करें, इससे शरीर में रक्त का संचार बढ़ता है और बाल मजबूत होते हैं।
100 ग्राम मुल्तानी मिट्टी में 10 ग्राम सफेद चंदन पाउडर मिला लें, बालों पर लगाने से पहले इसमें 20 मिलिग्राम गुलाब जल डाल लें। 15 मिनट बाद सिर धो लें। अगर डेंड्रफ की समस्या हो तो आप इस पेस्ट में नीम की पत्तियों को पीसकर भी प्रयोग कर सकते हैं।

बालों को झड़ने से रोकने के लिए
मेथी और सौंफ का हेयर पैक
आप चाहें तो बाजार में उपलब्ध आयुर्वेदिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर सकती हैं। पर इसके लिए प्राकृतिक सामग्रियां सबसे ज्यादा इफैक्टिव हैं। हेयर लॉस और हेयर फॉल से बचाने में मेथी का हेयर पैक आपकी मदद कर सकता है।

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कैसे करें प्रयोग

- मेथी या सौंफ को रात भर पानी या उबले चावल के पानी में डालकर छोड़ दें।

- सुबह इसे पीस कर अपने स्कैल्प और बालों पर लगा लें।

- आधे घंटे बाद बाल साफ कर लें।

- आंवला, रीठा, शिकाकाई, नीम, सौंफ को रात भर भिगों दें। इसे पीसकर लगा लें या इसके पानी से बालों को धो लें।

- आधे घंटे बाद बालों की सफाई कर लें।

2 गुनगने तेल से स्कैल्प और बालों की मालिश
बालों को झड़ने से रोकने के लिए हल्के गर्म तेल से मसाज कारगर आयुर्वेदिक इलाज है। इससे स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। जिससे बाल जड़ों से मजबूत हो जाते हैं।

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कैसे करें प्रयोग

सरसों, तिल या आंवले के तेल को हल्का गर्म करें।

उंगलियों के पोरो में लगाकर हल्के हाथों से स्कैल्प की मालिश करें।

शरीर को पोषण जरूरी

पोषक तत्वों की कमी से बाल झड़ रहे हैं तो 4-5 अंजीर, 10-15 मुनक्के, 20-25 किशमिश, 2-4 बादाम एक गिलास पानी में रात को भिगोकर रख दें। सुबह इन्हें खा लें और उसी पानी को पी भी लें। डायबिटीज होने पर अंजीर(१) और मुनक्के (५-७) ही प्रयोग करें। शरीर को पोषण मिलते ही बाल टूटने बंद हो जाएंगे। डॉ. रमाकांत शर्मा, नेचुरोपैथी विशेषज्ञ

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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गस पर सक रटय खन स ह सकत ह नकसन जनकर आप भ छड दग खन!

हाल के दिनों में कई ऐसे रिसर्च में कहा गया है कि गैस पर सेकी गईं रोटियां खाने से बचना चाहिए क्योंकि इनसे नुकसान हो सकता है। आज के अंक में जानते हैं कि इस बात में क्या सच्चाई है।

 

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वायरल खबर
एक वायरल खबर के अनुसार जर्नल एनवायर्नमेंट साइंस एंड टेक्नोलॉजी में प्रकाशित एक शोध के अनुसार सीधे गैस पर रोटी सेंकने से प्रदूषित गैस निकलती है। यह कार्बन मोनो ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड होता है। इस कारण ऐसी रोटियां खाने से नुकसान हो सकता है।

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अन्य रिसर्च
फूड स्टैंडर्ड ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड की ओर से वर्ष 2011 में एक रिसर्च प्रकाशित किया था। इसमें कहा गया था कि सीधे आंच पर सेंकने से कार्सिनोजेनिक रसायन का उत्सर्जन होता है जो सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। तवे पर सेकी रोटी खाना चाहिए।

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रोटी के अंदर गैस नहीं जाती, इसलिए सुरक्षित
सीनियर फिजिशियन, डॉ. आलोक गुप्ता के अनुसार, अपने देश ही नहीं, दुनियाभर के कई देशों में हजारों वर्षों से तंदूर या सीधे आग पर रोटियां सेंककर खाने का चलन है। कुछ दशकों से रसोई गैस भी आई है, जिसमें मीथेन या कार्बन डाइऑक्साइड जैसे गैसें होती हैं। लेकिन इसमें समझने वाली बात यह है कि कोई भी गैस रोटी के अंदर नहीं जाती है और न ही गैस रोटी में भरती है। इसलिए नुकसान होने वाली बात स्पष्ट नहीं है। केवल अनुमान के आधार पर ऐसा बोलना ठीक नहीं है।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Liver diseases: सइलट कलर ह लवर क रग य द वजह ल रह ह जन

लिवर, शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इसका वजन करीब डेढ़ किलो तक होता है। यह शरीर का मल्टीपल फंक्शन ऑर्गन है जो कि शरीर में पोषक तत्वों को मेटाबोलाइज करने, वसा का भंडारण करने, पाचन में सहायक पित्तरस का उत्पादन करने और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखता है। हमारी जीवनशैली इस अंग को प्रभावित करती है। इसकी वजह से युवाओं में लिवर रोग की समस्या बढ़ रही है। लिवर सही तरह से काम कर रहा है या नहीं, इस बारे में जागरूक होना जरूरी है।

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लिवर रोग...खामोश रोग
आयुर्वेद में शरीर को स्वस्थ रखने में लिवर की भूमिका को अहम माना गया है। लिवर रोग बड़ी खामोशी के साथ आते हैं। यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर में बढ़ रही होती है। उन्हें शुरुआती लक्षणों के आधार पर पहचान नहीं सकते हैं। लिवर को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

जानिए जोखिम कारक
अल्कोहल, मोटापा, डायबिटीज, टैटू या बॉडी पियर्सिंग, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित लोगों के रक्त और शारीरिक तरल के सम्पर्क में आना आदि।

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इसके रोगों के प्रकार

पीलिया : इस रोग की वजह से शरीर का रंग पीला दिखने लगते हैं। नाखून में पीलापन और आंखें पीली दिखना इसके प्रमुख लक्षण हैं।

हेपेटाइटिस: यह वायरस के कारण होता है। यह पांच तरह का है। हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई। इनमें से कुछ अल्पकालिक हैं।

लिवर कैंसर: लिवर में जब कैंसर का टिशू बन जाता है तो उसे लिवर कैंसर कहते हैं। इसमें हिपेटोसेलुलर कार्सिनोमा प्रमुख है।

फैटी लिवर: लिवर में वसा का अत्यधिक संग्रहण फैटी लिवर का कारण बनता है। यह मुख्यत: दो तरह का होता है, अल्कोहॉलिक फैटी लिवर व नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर।

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लिवर फाइब्रोसिस: जब लिवर में फैट जमा होता है तो वह लिवर को खराब भी करता है। इसे स्कारिंग भी कहते हैं। लिवर सामान्य की तुलना में कड़ा होता जाता है।

लिवर सिरोसिस: लिवर के सिकुडऩे से लिवर सिरोसिस की समस्या होती है। लिवर सिरोसिस का मुख्य कारण हेपेटाइटिस बी और सी, जंक फूड्स का सेवन होता है।

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ध्यान देने योग्य बातें

आर्टिफिशियल शुगर व सॉफ्ट ड्रिंक्स से बचें: सॉफ्ट ड्रिंक्स में शुगर की मात्रा काफी ज्यादा होती है। वहीं आर्टिफिशियल शुगर में सुक्रोज होता है जो शरीर में जाने के बाद 50 फीसदी ग्लूकोज और 50 फीसदी फ्रुक्टोज में बदलता है। फ्रुक्टोज लिवर में जाकर वसा के रूप में इक_ा होता है। एक व्यक्ति को अधिकतम 25-30 ग्राम (5-6 चम्मच) तक चीनी खाना चाहिए।

सप्लीमेंट्स के प्रयोग से बचें: युवा अक्सर जिम में जाकर एक्सरसाइज करते हैं। उनमें मसल्स बनाने का क्रेज भी अधिक होता है। जिम में उन्हें सप्लीमेंट लेने की सलाह दी जाती है। इन सप्लीमेंट्स में स्टिरॉइड्स का उपयोग किया जाता है। मसल्स तो बन जाते हैं, लेकिन यह नुकसानदेह होते हैं।

नई ब्लेड का उपयोग करने को कहें: सैलून में अक्सर देखा जाता है कि इस्तेमाल की गई ब्लेड का उपयोग एक से अधिक व्यक्तियों पर किया जाता है। इस्तेमाल की गई ब्लेड भी हेपेटाइटिस जैसा रोग होने का कारण बनती हैं।

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अल्ट्रासाउंड जरूर कराएं: मोटापे और डायबिटीज से ग्रसित मरीजों में फैटी लिवर की समस्या अधिक देखी जाती है। इसलिए इन मरीजों को अल्ट्रासाउंड के जरिए लिवर में फैट के जमा होने की स्थिति और लिवर फंक्शन टेस्ट अवश्य कराने चाहिए।



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Vitamin B12 क कम स चलन म ह सकत ह समसय आज स ह शर कर द य कम

हमारे शरीर के लिए जितना महत्व कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज और फैटी लीवर जैसीबिमारियों को रोकना है उतना ही जरूरी है शरीर में पोषक तत्व की कमियों पर ध्यान देना है। विटामिन बी12 हमारे शरीर के लिए एक ज़रूरी पोषक तत्व है। जो हमारी मेंटल और फिजिकल स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार है। यह हमारे शरीर में डीएनए और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी एक प्रमुख पोषक तत्व है। विटामिन B12 की कमी के कारण आपको गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। आज हम आपको बताएंगे कि विटामिन B12 की कमी से दिमाग में क्या लक्षण होते हैं-

 

विटामिन B12 दिमाग की नसों के लिए एक प्रमुख तत्व माना जाता है। इसकी कमी के कारण आपको न्यूरोलॉजिकल समस्या हो सकती हैं। यूके नेशनल हेल्थ सर्विसेज (एनएचएस) का कहना है कि विटामिन बी12 की कमी के अधिकांश मामलों का इलाज आसानी से किया जा सकता है। इसलिए B12 आपकी मेंटल हेल्थ के लिए बहुत ज़रूरी है।

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यूके नेशनल हेल्थ सर्विसेज (एनएचएस) का मानना है कि विटामिन B12 की कमी आपके दिमाग की सिग्नल देने वाली नस को प्रभावित करती है। इससे आपका पूरा शरीर प्रभावित होता है जिससे आपको बोलने और चलने में समस्या हो सकती है। एक अध्यन के अनुसार, विटामिन B12 की कमी वाला व्यक्ति अस्थिर या लड़खड़ाते हुए चलता है।

अन्य लक्षण
शरीर में विटामिन B12 की कमी धीरे-धीरे देखने को मिलती है जिससे लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं।
हाथ या पैरों में झुनझुनी या सेंसेशन होना।
चलने में समस्या होना या बैलेंस बनाने में समस्या आना।
एनेमिया की समस्या होना।
सोचने या समझने में परेशानी होना।
कमजोरी या थकान होना।

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विटामिन B12 की कमी को पूरा करने के उपाय
पौधे विटामिन बी12 नहीं बनाते हैं। विटामिन B12 के लिए आपको मीट, डेरी प्रोडक्ट, ब्रेड या अंडे जैसे फूड का सेवन करना होगा। सख्त शाकाहारियों और विगन खाना खाने वाले लोगों में B12 की कमी होने का खतरा अधिक होता है। उन्हें विटामिन से भरपूर डाइट लेने की ज़रूरत है या विटामिन सप्लीमेंट उनके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। जिन लोगों ने वजन घटाने के लिए सर्जरी करवाई है उनमें भी विटामिन बी12 की कमी होने की संभावना अधिक होती है। क्योंकि ऑपरेशन के कारण शरीर में विटामिन B12 की कमी हो जाती है।



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Health Tips: अगर आप भ शर कर दग य 5 कम त नह पडग डकटर और दवइय क जररत

आजकल के खानपान और लाइफस्टाइल की वजह से हमारी सेहत पर इसका गलत प्रभाव पड़ रहा है। जिसकों ठीक करने के लिए डॉक्टर और दवाइयों के लिए अच्छे-खासे पैसे भी खर्च करने पड़ रहे हैं। कई बीमारियों को तो पैसे खर्च करने के बाद भी पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता। उन्हें बस कंट्रोल किया जा सकता है। जैसे- डायबिटीज़, मोटापा और बीपी। अगर आप डॉक्टर की मंहगी फीस और दवाइयों में अब और ज्यादा पैसे नहीं खर्च करना चाहते हैं तो आपको ये पांच टिप्स फॉलो करना होगा। जिससे आप फिट बने रहेंगे।

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1. रोजाना धूप सेंकें
सुबह की धूप हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। इससे शरीर को भरपूर मात्रा में विटामिन डी मिलता है जो हड्डियों की मजबूत बनाता है। साथ ही धूप सेंकने से कई तरह की स्किन समस्याएं भी दूर होती है। अच्छी नींद के लिए भी धूप को जरूरी माना गया है। क्योंकि इससे शरीर में मेलाटोनिन हॉर्मोन पैदा होता है जो अच्छी नींद के लिए जरूरी माना गया है और थोड़ी देर धूप में बैठने से स्ट्रेस भी दूर होता है।

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2. रोजाना करें वर्कआउट
रोजाना 20-30 मिनट का समय जरूर निकालें वर्कआउट करने के लिए। इससे आप न सिर्फ शरीर को फिट रख सकते हैं बल्कि अपनी उम्र के भी कई साल बढ़ा सकते हैं। वर्कआउट का मतलब जिम जाकर घंटों पसीना बहाना नहीं होता बल्कि घर के नॉर्मल कामकाज से भी आसानी से खुद फिट रहा जा सकता है। जिसमें योग, रस्सी कूदना, पैदल चलना इत्यादि एक्टिविटीज़ हैं जिनके लिए किसी भी तरह के खर्च की जरूरत नहीं और इनके फायदे ही फायदे हैं।

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3. लें हेल्दी डाइट
कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज़, हार्ट प्रॉब्लम्स जैसी खतरनाक बीमारियों से बचे रहना चाहते हैं तो पहले अपनी डाइट से ऑयली, मसालेदार और जंक फूड को पूरी तरह से बंद कर दें। इसके अलावा चीनी और नमक की मात्रा भी कम कर दें। सादा भोजन करने से शरीर के साथ-साथ मन भी स्वस्थ रहता है। इसके साथ ही आपको को खाने का समय निर्धारित करना चाहिए। यह सबसे ज्यादा जरूरी है।

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4. भरपूर मात्रा में पीएं पानी
शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पानी बहुत जरूरी है। आप दिनभर में कम से कम 6 से 8 गिलास पानी जरूर पीएं। गुनगुना पानी पीना और भी ज्यादा फायदेमंद होगा। इससे पाचन तो सही रहता ही है साथ ही मोटापा भी कंट्रोल रहेगा।

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5. 6-8 घंटे की लें नींद
शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए अच्छी नींद का बहुत बड़ा रोल है। सुकून भरी नींद आपको दिनभर फ्रेश और एनर्जेटिक फील कराते हैं। इससे आप किसी काम पर फोकस कर सकते हैं। साथ ही इससे याद्दाश्त दुरुस्त रहती है और डाइजेशन भी सही रहता है। इसके लिए बिस्तर पर जाते ही मोबाइल, टीवी आदि का इस्तेमाल न करें।

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रजन सरफ इतन मनट पदल चलन स आप रहग फट आज स ह कर द शर

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हममें से ज्यादातर लोग अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं रख पाते हैं। स्क्रीन के सामने लंबे समय तक काम करना चीजों को और अधिक कठिन बना देता है। अंतिम परिणाम जोड़ों का दर्द है। खैर, रोजाना पैदल चलना सबसे आसान चीजों में से एक हो सकता है जिसे कोई भी व्यक्ति अपनी जीवनशैली में सुधार के लिए शुरू कर सकता है।

चलना आपकी मांसपेशियों और जोड़ों को मजबूत करने में मदद कर सकता है और आपको अपने वजन को मेंटेन रखने में भी मदद कर सकता है जो आपके घुटनों और पैरों पर अधिक दबाव नहीं डालेगा। इसके लिए अधिक प्रयास की भी आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि प्रतिदिन 30 मिनट या 10 हजार कदम पैदल चलने से ही आप अपनी जीवनशैली में बहुत कुछ बदल सकते हैं।

आइए पैदल चलने के कुछ प्रमुख लाभों के बारें में जानते हैं-

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स्वस्थ वजन बनाए रखना
आपके शरीर में अतिरिक्त चर्बी होना वास्तव में आपके घुटनों और जोड़ों के लिए हानिकारक हो सकता है। यदि आपके शरीर का वजन आपके शरीर के लिए इष्टतम सीमा से अधिक है, तो यह जोड़ों के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। पैदल चलने से कैलोरी बर्न करने और वजन कम करने में मदद मिलती है और गतिशीलता के साथ आपका शरीर भी ठीक से काम करता है।

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पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है
नियमित रूप से टहलने से पाचन में मदद मिलती है। नियमित रूप से चलने से आपका शरीर गति में रहता है और आपके घुटने की उचित गति बनी रहती है, जो श्लेष द्रव के उत्पादन में मदद करता है। यह द्रव स्नेहक के रूप में कार्य करके घुटने को क्षति से बचाने में मदद करता है।

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एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली बनाने में मदद करता है
वर्तमान समय में जहां महामारी दुनिया को परेशान कर रही है, पैदल चलना आपके शरीर को स्वस्थ रखने का सबसे बुनियादी तरीका है। व्यायाम के न्यूनतम रूप रोगजनकों के उत्पादन को बढ़ा सकते हैं जो शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने में मदद करते हैं।

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रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है
खाने के बाद टहलने से रक्त शर्करा कम होगी और यह उचित स्तर पर रहेगी जिससे उच्च रक्तचाप के साथ-साथ दिल के दौरे का खतरा भी कम होगा।

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तनाव कम करना और अपने मूड को बेहतर बनाना
चूंकि गतिहीनता के कारण मांसपेशियों और हड्डियों की स्थिति खराब हो जाती है, जो लोगों को मानसिक रूप से भी प्रभावित कर सकती है। चलने से एंडोर्फिन उत्पन्न होता है जो एक हार्मोन है जो आपके तनाव को कम करता है और आपके मूड को बेहतर बनाता है।

 

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Thursday, 29 June 2023

बदलत लइफसटइल क दषपरभव ह न:सतनत जनए कय ह उपय

निसंतानता गंभीर समस्या है। बदलती लाइफस्टाइल का असर संतान सुख पर भी पड़ रहा है। ऐसा देखा गया है कि 30 फीसदी इनफर्टिलिटी पुरुषों के कारण, 30 फीसदी महिलाओं की वजह से और 30 फीसदी दोनों की वजह से होती है। शेष 10 फीसदी मामलों में कारण अज्ञात हैं। यहां हम महिला व पुरुष में निसंतानता के कारण बताएंगे।

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महिलाओं में कारण
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ, डॉ. औबी नागर के अनुसार, महिलाओं में फर्टिलिटी की सही उम्र 20-25 वर्ष होती है लेकिन शादी देर से होने, उसके बाद भी गर्भनिरोधक चीजों के उपयोग से ओवेरी की उम्र कम हो जाती है। ओवेरियन रिजर्व (कितने एग उपलब्ध हैं जिनसे प्रेग्नेंसी हो सके) उम्र बढऩे के साथ कम होता जाता है।

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पीसीओडी: पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिजीज में एग्स तो बनते हैं, लेकिन ओवेल्युशन नहीं होता। पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। वजन बढऩे लगता है।
हार्मोन: थाइरॉइड व प्रोलेक्टिन हार्मोन से भी फर्टिलिटी प्रभावित होती है। प्रेग्नेंसी में दिक्कत आती है।

कम उम्र में सेक्सुअली एक्टिव होना: इससे पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज होती है जो कि ओवेरियन ट्यूब्स को ब्लॉक कर देती हैं।
जननांगों की टीबी: यह ओवरी, यूट्रस और ओवेरियन ट्यूब्स पर प्रभाव डालती है।

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एशरमैन सिन्ड्रोम: अनवांटेड प्रेग्नेंसी होने पर डीएनसी-एमटीपी कराने से बच्चेदानी की परत पर नुकसान होने से एशरमैन सिन्ड्रोम होता है।

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पुरुषों में कारण
निसंतानता के पुरुषों में भी कई कारण हैं स्पर्म काउंट कम होना, स्पर्म की गतिशीलता कम होना, पुरुषों का टाइट कपड़े पहनना, उससे अंडकोष के तापमान पर असर पड़ता है। अंडकोष के लिए तापमान 36 डिग्री तक होना चाहिए। संक्रमण आदि कई कारण हैं।

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इलाज: आइयूआइ
यह इंट्रा यूटराइन इनसेमिनेशन है। इसमें सीमन को गाढ़ा और साफ कर यूट्रस में छोड़ा जाता है। उससे प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ती है। यह अक्सर उन मामलों में किया जाता है जिनमें स्पर्म की सक्रियता बेहद कम होती है।

एआरटी
आइयूआइ के विफलता के बाद आर्टिफिशियल रिप्रॉडक्टिव टेक्नीक का उपयोग करते हैं जिसमें आइवीएफ और इक्सी दो तकनीकें उपयोग में ली जाती हैं। आइवीएफ में स्पर्म और एक अंडे को साथ छोड़ देते हैं और उन्हें स्वत: ही मिश्रित होने देते हैं जबकि इक्सी में एक अंडे में एक स्पर्म को इंजेक्ट किया जाता है।



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शरर म कह भ सकरमण ह त ह सकत मननजइटस इस तरह कर सकत ह बचव

मेनिनजाइटिस एक प्रकार का संक्रामक रोग है, जो मस्तिष्क के अंदर वाले हिस्से मेनिन्जेस में मौजूद फ्लूड सीएसएफ में संक्रमण से होता है। इस बीमारी के कारण हैं। शरीर में कहीं भी मसलन कान, नाक, दांत, फेफड़ों में संक्रमण है तो भी हो सकता है। यह बीमारी संबंधित अंगों से खून के माध्यम से मस्तिष्क में भी चली जाती है। अगर समय पर इलाज न मिले तो मरीज की जान भी जा सकती है। इसलिए संक्रमण का तत्काल इलाज लेना चाहिए।

 

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मेनिनजाइटिस के मुख्य प्रकार

1. कम्युनिटी एक्वायड बैक्टीरियल: यह बैक्टीरिया से होता है। यह संक्रमण जानलेवा हो सकता है। यह भीड़भाड़ वाले जगहों पर जाने से वहां के संक्रमित लोगों को खांसने-छींकने से भी फैल सकता है। भीड़ वाली जगह जाते हैं तो मास्क लगाएं।

2. वायरल मेनिनजाइटिस: यह वायरस से होता है। यह बैक्टीरियल संक्रमण जितना खतरनाक नहीं है। अगर इम्युनिटी अच्छी है तो इससे बचाव होता है।

3. फंगल मेनिनजाइटिस: फंगस हमारे शरीर में ही होते हैं। जब इम्युनिटी कम होती है तो हो जाता है। जैसे मधुमेह, एचआइवी और कैंसर पीडि़तों को भी हो सकता है।

 

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4. पैरासिटिक मेनिनजाइटिस: यह पैरासाइट से होता है, जो दिमाग और तंत्रिकातंत्र पर प्रभाव डालता है। ये बहुत कम होता है। अमेबिक मेनिनजाइटिस होता है जो बहुत दुर्लभ होता है। यह गंदा पानी नाक में जाने से होता है।

5. गैर संक्रामक मेनिनजाइटिस: यह किसी संक्रमण से नहीं बल्कि सिर पर चोट, कैंसर, ब्रेन सर्जरी, कुछ प्रकार की दवाइयां या ड्रग्स आदि से होता है।

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तेज सिरदर्द और बेहोशी जैसे लक्षण हैं तो इलाज में न करें देरी मेनिनजाइटिस के लक्षणों में बुखार, तेज सिरदर्द, बेहोशी, उल्टी और मतली, जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द और अकडऩ, हाथों और पैरों का ठंडा पडऩा, कंपकंपी, त्वचा का पीला पडऩा, होंठों का नीला पडऩा आदि। बाद में आलस, भ्रम, दौरे पडऩा, हार्ट बीट बढऩा, तेज रोशनी से परेशानी और गर्दन में दर्द रह सकता है। गर्दन के दर्द की पहचान भी अलग होती है। अगर मरीज अपनी ठोड़ी को गर्दन से चिपकाता है तो गर्दन में तेज दर्द होता है।

केस: कान में पस के बाद फैला संक्रमण
अगर शरीर में कहीं भी संक्रमण हुआ है तो वह खून से दिमाग में पहुंचकर मेनिनजाइटिस कर सकता है। अभी एक ऐसे मरीज का इलाज चल रहा है जिसके कान में घाव और पस बना हुआ था। अचानक से सिर में तेज दर्द और बेहोशी जैसे लक्षण आने पर ईएनटी सर्जन ने रेफर किया। जांच में मरीज को मेनिनजाइटिस की पुष्टि हुई।

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टीबी भी कारण
मेनिनजाइटिस का एक कारण टीबी की बीमारी भी है। इसे ट्यूबरकूलस मेनिनजाइटिस कहते हैं। किसी संक्रमित के खांसने से इसके बैक्टीरिया फेफड़ों में चले जाते हैं। सालों तक वहां पड़े रहे हैं। वहां से बैक्टीरिया ब्लड के रास्ते मेनिन्जेस में चले जाते हैं। तब ट्यूबरकूलस मेनिनजाइटिस हो जाता है।

खतरा कब बढ़ता है
जब मौसम बदलता है तो इसकी आशंका अधिक रहती है। जिनकी इम्युनिटी कम होती है उनमें भी इसके होने की आशंका रहती है।

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जांच और इलाज
इस बीमारी की पहचान के लिए रीढ़ की हड्डी से द्रव निकालकर उसका अलग-अलग मानकों मसलन, बैक्टीरिया, वायरस या फंगस आदि किस कारण से हुआ है। उसकी पहचान होती है। इसके बाद उन कारणों का इलाज किया जाता है। जैसे बैक्टीरियल है तो एंटीबैक्टीरियल दवा देते हैं जबकि फंगल या वायरस है तो उसके लिए एंटीफंगल और एंटीवायरस दवा देते हैं। गैर संक्रामक मेनिनजाइटिस का इलाज कोर्टिसोन दवाओं (खास एलर्जी के लिए उपयोग की जाने वाली दवाइयां) की मदद से किया जा सकता है। कुछ मामलों में तो दवा की भी जरूरत नहीं पड़ती है। गंभीर स्थिति में मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती करना होता है।

वैक्सीन और हाइजीन से बचाव हो सकता
इस बीमारी के बचावों पर ध्यान दें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते हैं तो मास्क लगाएं। धू्रमपान न करें। बच्चों-बुजुर्गों को न्यूमोकोकल वैक्सीन लगते हैं। वे भी लगवाएं। इनसे भी संक्रमण से बचाव होता है। वायरल संक्रमण भी हवा से फैलते हैं। इसका ध्यान रखें। पैरासाइट और फंगस से बचाव वाले काम करें जैसे घर में सीलन, जानवरों और पक्षियों के मल से दूर रहें। हाइजीन का ध्यान रखें कोई भी चीज किसी से अन्य के साथ साझा न करें।



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आपत सथत म घबरए नह इस तरह द फरसट एड बच जएग जन

अक्सर आपने देखा होगा कि कई बार कुछ ऐसी स्थितियां हो जाती हैं कि व्यक्ति को तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है, लेकिन मौके पर यदि प्राथमिक उपचार भी न मिले तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि हर व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में फर्स्ट एड के तरीके अवश्य आने चाहिए ताकि अस्पताल पहुंचने तक उसकी स्थिति गंभीर न हो। यहां कुछ ऐसी स्थितियों और उनके प्राथमिक उपचार के बारे में बताया जा रहा है- जब आप ऐसी किसी परिस्थिति का सामना करें तो घबराएं नहीं, फस्र्ट एड कैसे देनी है उसके लिए तैयार रहें।

 

किसी को हार्ट अटैक आए तो क्या करें
यदि कोई दिल का दौरा पडऩे से अचानक बैठे-बैठे गिर पड़े तो ऐसी स्थिति में तत्काल सीपीआर दिया जाना चाहिए। सीपीआर हार्ट अटैक के बाद रोगी की जान बचाने के लिए एक कारगर उपाय है। वहीं यदि किसी व्यक्ति को घबराहट हो रही है और सीने में दर्द की यदि वह शिकायत कर रहा है तो ऐसी स्थिति में उसे एस्प्रीन दें। उसके बाद तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। एस्प्रीन इस समय धमनियों में ब्लॉकेज बनने की प्रक्रिया को बेहद धीमा कर देती है जिससे रोगी को गंभीर संकट से बचाया जा सकता है। ध्यान रहे कि हर व्यक्ति में हार्ट अटैक के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। उन्हें नजरअंदाज न करें।

 

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जब बच्चे के गले में कुछ अटक जाए तो...
पहले यह सुनिश्चित करें कि यदि वह खांस रहा है या बात कर रहा है तो उसे रिलेक्स होने दें। लेकिन यदि सांस लेने में परेशानी हो तो पहले उससे दम घुटने के बारे में पूछें। यदि वह सिर हां में हिलाएं तो आप पैनिक न हों। पहले किसी को एंबुलेंस बुलाने के लिए कहें। फिर बच्चे के पीछे खड़े हो जाएं। अपनी बांहों को बच्चे के कमर के चारों ओर लपेटें। एक हाथ से मुट्ठी बनाएं, अंगूठा अंदर रखें। मुट्टी को बच्चे की छाती के ठीक नीचे और नाभि से थोड़ा ऊपर रखें। दूसरे हाथ से मुट्ठी पकड़ें। तेजी से ऊपर की ओर धक्का देकर पेट में दबाएं। यह टुकड़े को बाहर निकलने में मदद करेगा। दो-तीन बार दोहराएं। जब टुकड़ा बाहर निकल जाए तो डॉक्टर के पास बच्चे को ले जाएं।

बच्चा जब सिक्का निगल जाए...
इस स्थिति में उसे आगे की तरफ झुकाएं। एक हाथ से उसका सीना दबाएं और दूसरे हाथ से पीठ थपथपाएं। ऐसा 4-5 बार करें। सिक्का बाहर निकल आएगा। यदि फिर भी न निकले और बच्चे को तेज खांसी आ रही हो तो ऐसे में उसे खांसने दें, कफ बनने के साथ सिक्का बाहर निकल आएगा। बाद में डॉक्टर को अवश्य दिखाएं।

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जब किसी को मिर्गी का दौरा आ जाए तो...
फिजिशियन, डॉ. सुरभि गोयल के अनुसार, मिर्गी के रोगी को करवट दिलाएं, उसके बाद उसके कपड़े ढीले कर दें। मुंह से झाग आएं तो उन्हें साफ कर दें। उसके मुंह में पानी न डालें। दांत किटकिटाएं तो मुंह में कपड़ा न डालें। नुकीली चीज यदि आसपास है तो उसे हटा दें और डॉक्टर से सम्पर्क करें।



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Weight Loss Tips: अगर इस तरह पएग दध त पट ह जएग अदर रसरच म हआ खलस

आजकल लोगों की लाइफस्टाइल और अनहेल्दी खानपान की वजह से खराब हो गई है। जिस वजह से पेट का मोटापा बढ़ने की समस्या से हर दूसरा व्यक्ति को है। लोग पेट की चर्बी घटाने के उपाय करते हैं लेकिन उससे उन्हें अच्चा रिजल्ट नहीं मिल पाता। लेकिन आज हम जो वेट लॉस डाइट टिप्स लेकर आए हैं। उसका इस्तेमाल करके आप अच्चे रिजल्ट पा सकते हैं। कई बार हम वजन घटाने के लिए खाना छोड़ देते हैं कई बार मीठा, डेयरी और कई अन्य हेल्दी चीजों से परहेज करने लगते हैं। कई बार हम दूध को भी छोड़ देते हैं, लेकिन दूध वजन घटाने में काफी फायदेमंद हो सकता है। तेजी से वजन घटाने के लिए दूध का इस्तेमाल करना है। दूध एक ऐसी चीज है, जो किसी व्यक्ति को हेल्दी तरीके से वजन कम करने में मदद कर सकता है।

 

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दूध से घटता है वजन
दूध वजन घटाने में सहायता हो सकता है। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि दूध जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स आपको वजन कम करने में मदद कर सकते हैं। दूध वास्तव में प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है, जो शरीर में मसल्स बिल्डिंग और रखरखाव के लिए जरूरी मैक्रोन्यूट्रिएंट है। पेप्टाइड YY हार्मोन के कारण दूध भूख को कम कर सकता है और आपको लंबे समय तक तृप्त महसूस करवा सकता है।

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दूध में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। ये मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देता है, जिसकी वजह से वजन कम हो सकता है। दूध और केले की स्मूदी प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर और पोटेशियम का एक बड़ा स्रोत है। ये पोषक तत्व आपको तृप्त रखने में मदद करते हैं। प्रोटीन और कैल्शियम के अलावा विटामिन बी12, मैग्नीशियम और जिंक का एक बेहतरीन स्रोत है, जो वजन घटाने के लिए बहुत अच्छे हैं। वजन घटाने के लिए आपको स्किम्ड मिल्क चुनना चाहिए क्योंकि यह वजन घटाने वाले लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है।

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दूध में मिलाकर पिएं दालचीनी
एक सॉस पैन लें और उसमें एक कप दूध और एक टुकड़ा दालचीनी की छाल डालें। इसे उबालें और फिर दालचीनी की छाल हटा दें। दूध को एक कप में डालें और एक चुटकी पिसी हुई दालचीनी से सजाएं। इसके बाद इसे चाय की तरह पी जाएं।

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खाएं चिया सीड पुडिंग
बादाम का दूध, दही, मेपल सिरप और वेनिला को एक साथ मिलाएं। चिया बीजों को फेंटें। रात भर ढककर फ्रिज में रखें। एक पैन में नारियल के बुरादे को लगभग 1-3 मिनट तक भून लें और फिर उन्हें ठंडा होने दें। हलवे को फ्रिज से बाहर निकालें और अच्छी तरह हिलाकर गुठलियां हटा दें। ऊपर से केले के टुकड़े, कटी हुई स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी और नारियल के टुकड़े डालकर खा लें।



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National Doctors Day: परचन भरत क पहल पच डकटर जनहन दनय क दय जञन

हर साल 1 जुलाई को भारत राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाता है। यह दिन चिकित्सक, परोपकारी, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय को समर्पित है। यह दिन उन चिकित्सकों को सम्मानित करने के लिए समर्पित है जो रोगियों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं। यह डॉक्टरों द्वारा समाज में किए गए महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार करने और उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण के लिए आभार व्यक्त करने का दिन है।

 

राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस 2023 की थीम "सेलिब्रेटिंग रेजिलिएंस एंड हीलिंग हैंड्स" है। यह थीम कठिन समय के दौरान, विशेषकर कोविड-19 महामारी के दौरान, डॉक्टरों की निरंतर प्रतिबद्धता और लचीलेपन को पहचानती है।

 

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प्राचीन भारत के पहले पांच डॉक्टर प्राचीन भारतीय सभ्यता कई महान डॉक्टरों का घर रही है जिन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है प्राचीन भारतीय सभ्यता चिकित्सा ज्ञान और खोज का केंद्र थी, इसके डॉक्टर विभिन्न प्रकार की बीमारियों और रोगों के लिए नवीन उपचार और इलाज विकसित करते थे।

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यह ज्ञान न केवल भारत के भीतर बल्कि शेष विश्व के साथ भी साझा किया गया, जिससे चिकित्सा पद्धति पर स्थायी प्रभाव पड़ा। इस लेख में, हम राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस 2023 का सम्मान करते हुए प्राचीन भारत के पहले पांच डॉक्टरों के बारे में बताएंगे।

प्राचीन भारत के प्रथम पांच चिकित्सक

1. आत्रेय Atreya
आत्रेय प्राचीन भारत के सबसे पहले ज्ञात डॉक्टरों में से एक थे। उन्हें वैज्ञानिक चिकित्सा के जनक के रूप में जाना जाता है और माना जाता है कि उनका जीवन लगभग 800 ईसा पूर्व था। आत्रेय पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के समर्थक थे। उन्होंने आत्रेय संहिता लिखी, जिसे आयुर्वेद पर सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक माना जाता है।

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2. सुश्रुत Sushruta
सुश्रुत एक चिकित्सक और सर्जन थे जो लगभग 600 ईसा पूर्व रहते थे। उन्हें सर्जरी के क्षेत्र में, विशेष रूप से प्लास्टिक सर्जरी और मोतियाबिंद सर्जरी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें प्लास्टिक सर्जरी के जनक के रूप में जाना जाता है। सुश्रुत ने सुश्रुत संहिता लिखी, जिसे आज भी आधुनिक सर्जनों द्वारा संदर्भ के रूप में उपयोग किया जाता है।

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3. चरक Charaka
चरक एक चिकित्सक थे जो लगभग 300 ईसा पूर्व के थे। उन्हें आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान और चरक संहिता लिखने के लिए जाना जाता है, जिसे आज भी आयुर्वेद पर सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक माना जाता है।

4. वाग्भट्ट Vagbhata
वाग्भट्ट एक चिकित्सक थे जो 600 ई.पू. के आसपास रहते थे। उन्हें आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान और अष्टांग हृदय लिखने के लिए जाना जाता है, जिसे आयुर्वेद पर सबसे व्यापक ग्रंथों में से एक माना जाता है।

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5. माधवाचार्य Madhavacharya
माधवाचार्य एक चिकित्सक थे जो लगभग 700 ई.पू. में रहते थे। उन्हें आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान और माधव निदानम लिखने के लिए जाना जाता है, जिसे आयुर्वेद में रोगों के निदान पर सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक माना जाता है।

 

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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National Doctors Day: भरत न वशव क दए ह य शरष 5 चकतस यगदन जसक बर म जनकर आप करग गरव

हर साल 1 जुलाई को भारत राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाता है। यह दिन चिकित्सक, परोपकारी, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय को समर्पित है। यह दिन उन चिकित्सकों को सम्मानित करने के लिए समर्पित है जो रोगियों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं। यह डॉक्टरों द्वारा समाज में किए गए महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार करने और उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण के लिए आभार व्यक्त करने का दिन है।

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राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस 2023 की थीम "सेलिब्रेटिंग रेजिलिएंस एंड हीलिंग हैंड्स" है। यह थीम कठिन समय के दौरान, विशेषकर कोविड-19 महामारी के दौरान, डॉक्टरों की निरंतर प्रतिबद्धता और लचीलेपन को पहचानती है। इस मौके पर आज हम भारत के द्वारा विश्व को दिए शीर्ष 5 चिकित्सा योगदान के बारे में बताएंगे। जैसा की हम जानते हैं भारत में चिकित्सा पद्धतियों की एक लंबी परंपरा है जिसने विश्व में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहां दुनिया में भारत के शीर्ष 5 चिकित्सा योगदान हैं-

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1. आयुर्वेद: आयुर्वेद एक पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणाली है जिसका अभ्यास 5,000 वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा है। यह प्राकृतिक उपचारों के उपयोग पर जोर देता है और मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन पर ध्यान केंद्रित करता है।

 

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2. योग: योग एक शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास है जिसकी शुरुआत प्राचीन भारत में हुई थी। इसने अपने कई स्वास्थ्य लाभों के लिए दुनिया भर में लोकप्रियता हासिल की है, जिसमें तनाव और चिंता को कम करना, लचीलेपन में सुधार और समग्र कल्याण को बढ़ावा देना शामिल है।

 

3. मोतियाबिंद सर्जरी: भारत ने मोतियाबिंद सर्जरी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। देश ने नवोन्मेषी तरीके विकसित किए हैं जिससे मोतियाबिंद सर्जरी सुरक्षित और अधिक सुलभ हो गई है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

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4. प्लास्टिक सर्जरी: भारत प्लास्टिक सर्जरी में अपनी प्रगति के लिए जाना जाता है, खासकर पुनर्निर्माण सर्जरी के क्षेत्र में। देश ने कई कुशल सर्जन पैदा किए हैं जिन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

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5. पारंपरिक चिकित्सा: भारत में पारंपरिक चिकित्सा की एक समृद्ध परंपरा है जिसमें सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पद्धतियां शामिल हैं। इन प्रथाओं का उपयोग सदियों से किया जा रहा है और इसने लोकप्रियता हासिल की है।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Wednesday, 28 June 2023

मधमह नयतरण करन क लए खए य दस चज एक सथ मलग 5 जबरदसत फयद

मधुमेह, दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली एक बीमारी, जो समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए सावधानीपूर्वक प्रबंधन और ध्यान देने की मांग करती है। दवाओं और जीवनशैली में बदलाव के साथ-साथ, एक संतुलित आहार रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही खाद्य पदार्थों का चयन मधुमेह प्रबंधन में महत्वपूर्ण अंतर ला सकता है, और एक ऐसा पावरहाउस घटक जो ध्यान देने योग्य है वह है अलसी। आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर, अलसी कई प्रकार के लाभ प्रदान करती है जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता कर सकती है। आइए पांच कारणों का पता लगाएं कि क्यों अलसी को अपनी जीवनशैली में शामिल करना मधुमेह के प्रबंधन में सहायक हो सकता है।

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अलसी घुलनशील फाइबर का एक उत्कृष्ट स्रोत है, जो रक्त शर्करा के स्तर को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। घुलनशील फाइबर कार्बोहाइड्रेट के पाचन और अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे भोजन के बाद रक्त शर्करा में अचानक वृद्धि को रोका जा सकता है। नियमित रूप से अलसी का सेवन करने से, मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति बेहतर ग्लाइसेमिक नियंत्रण प्राप्त कर सकते हैं और उच्च रक्त शर्करा से जुड़ी जटिलताओं के विकास के जोखिम को कम कर सकते हैं।

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ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) यह मापता है कि भोजन में कार्बोहाइड्रेट कितनी तेजी से रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाते हैं। अलसी में बहुत कम जीआई होता है, जिसका मतलब है कि इसका रक्त शर्करा के स्तर पर बहुत कम प्रभाव पड़ता है। अपने भोजन में अलसी को शामिल करने से आपके रक्त शर्करा को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है, जिससे यह मधुमेह-अनुकूल आहार के लिए एक आदर्श बन जाता है।

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अलसी ओमेगा-3 फैटी एसिड, विशेष रूप से अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (एएलए) के सबसे समृद्ध पौधे-आधारित स्रोतों में से एक है। ओमेगा-3 फैटी एसिड अपने सूजनरोधी गुणों के लिए जाना जाता है और इसे बेहतर इंसुलिन संवेदनशीलता और कम इंसुलिन प्रतिरोध से जोड़ा गया है। अपने आहार में अलसी को शामिल करने से बेहतर चयापचय स्वास्थ्य में योगदान मिल सकता है, संभावित रूप से टाइप 2 मधुमेह के विकास के जोखिम को कम किया जा सकता है और मौजूदा मधुमेह वाले लोगों को सहायता मिल सकती है।

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अलसी में लिगनेन होता है, जो एक प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन से लड़ने में मदद करता है। अध्ययनों से पता चला है कि अलसी में मौजूद लिगनेन इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार और इंसुलिन प्रतिरोध को कम करके रक्त शर्करा नियंत्रण पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

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मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों में हृदय संबंधी रोग विकसित होने का खतरा अधिक होता है। अलसी के फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड और लिग्नांस का अनूठा संयोजन हृदय संबंधी लाभ प्रदान करता है जो मधुमेह प्रबंधन को पूरक कर सकता है। शोध से संकेत मिलता है कि अलसी के सेवन से रक्तचाप कम करने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और हृदय स्वास्थ्य मार्करों में सुधार करने में मदद मिल सकती है, जिससे अंततः लोगों में हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा कम हो जाता है।

 

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शरर क इन 5 एकयपरशर पवइटस पर दबन स मसलस पन म मलग आरम छमतर ह जएग दरद

मांसपेशियों में दर्द, एक निरंतर और कष्टप्रद अनुभूति है जो हमारी रोजमर्रा की दिनचर्या में बाधा डाल सकती है। लेकिन इस दर्द को कम करने के लिए कई तरीके मौजूद हैं। जिसमें एक्यूप्रेशर की प्राचीन पद्धति भी शामिल है। हमारे शरीर के भीतर सटीक दबाव बिंदुओं को दवा करके हम तनाव को दूर कर सकते हैं, रक्त परिसंचरण को बढ़ा सकते हैं और मांसपेशियों के दर्द को स्वाभाविक रूप से कम कर सकते हैं। आज हम यहां पांच महत्वपूर्ण दबाव बिंदु के बारे में बताएंगे जिससे आप दर्द-मुक्त जीवन शैली फिर से प्राप्त कर सकते हैं।

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गर्दन विश्राम बिंदु Neck Relaxation Point
गर्दन के पीछे, खोपड़ी के आधार के नीचे खोखले क्षेत्र में स्थित, गर्दन विश्राम बिंदु गर्दन और कंधे के दर्द को कम करने के लिए एक उत्कृष्ट दबाव बिंदु है। इस बिंदु पर अपने अंगूठे या उंगलियों के दबाव को नाजुक ढंग से नियोजित करके और एक सुखदायक गोलाकार गति लागू करके, आप तनाव से मुक्ति पा सकते हैं। इसके बाद विश्राम करने से आपको दर्द में राहत मिलेगी।

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पैर की ऐंठन से राहत दिलाने वाला Leg Cramp Reliever
निचले पैर पर, घुटने की टोपी के नीचे लगभग चार उंगली-चौड़ाई और पिंडली की हड्डी के बाहर की ओर एक उंगली-चौड़ाई पर स्थित, पैर की ऐंठन रिलीवर पैर की मांसपेशियों के दर्द और थकान से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण दबाव बिंदु है। अपने अंगूठे या पोर से मजबूती से दबाव डालें और इस बिंदु को कोमल, गोलाकार गति से उत्तेजित करें। यह तकनीक रक्त परिसंचरण को बढ़ाने, कठोरता को कम करने और ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने में मदद करती है।

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हैंड वैली पॉइंट Hand Valley Point
अंगूठे और तर्जनी के बीच पाया जाने वाला यह दबाव बिंदु पूरे शरीर में मांसपेशियों के दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है। अपने विपरीत अंगूठे और तर्जनी का उपयोग करके दबाव डालें और गोलाकार या ऊपर-नीचे गति में धीरे-धीरे मालिश करें। यह तकनीक सिरदर्द, दांत दर्द और सामान्य मांसपेशियों की परेशानी को कम करने में मदद कर सकती है।

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कोहनी क्रीज प्वाइंट Elbow Crease Point
कोहनी क्रीज के बाहरी छोर पर स्थित, यह बाहों और कोहनियों में मांसपेशियों के दर्द और सूजन से राहत के लिए एक आवश्यक दबाव बिंदु है। अपने अंगूठे या तर्जनी से दबाव डालें और गोलाकार गति में मालिश करें। इस बिंदु को उत्तेजित करके, आप मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों की कठोरता और यहां तक कि गठिया के लक्षणों को प्रभावी ढंग से कम कर सकते हैं।

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उदर केंद्र Abdominal Center
नाभि के नीचे लगभग दो अंगुल की चौड़ाई में स्थित, पेट का केंद्र पीठ के निचले हिस्से में दर्द और पेट की परेशानी को कम करने के लिए एक शक्तिशाली दबाव बिंदु है। अपनी उंगलियों का उपयोग करके मजबूत लेकिन हल्का दबाव डालें और दक्षिणावर्त दिशा में मालिश करें। यह तकनीक पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को आराम देने, पाचन में सुधार करने और समग्र जीवन शक्ति को बढ़ाने में मदद करती है।

 



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Today's Health update : पठ दरद म बड रसट स मलत ह आरम लकन सवधन : जनलव ह सकत ह य आरम

Today's Health update : यदि आपको पीठ दर्द है तो बिस्तर पर आराम करना उपयोगी हो सकता है, खासकर यदि आपको बैठने और खड़े होने पर गंभीर दर्द होता है। लेकिन दिन के दौरान बिस्तर पर आराम को एक समय में कुछ घंटों तक सीमित करना सबसे अच्छा है, कुछ दिनों से अधिक नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि बिस्तर पर बहुत अधिक समय बिताने से फायदे की बजाय नुकसान अधिक हो सकता है।

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Bed rest give relief in back pain : यदि आपको आराम करने की आवश्यकता है, तो किसी भी आरामदायक स्थिति में बिस्तर या सोफे पर लेटें। अपनी पीठ पर तनाव कम करने के लिए, करवट लेकर लेटते समय अपने सिर के नीचे और घुटनों के बीच, पीठ के बल लेटते समय घुटनों के नीचे, या पेट के बल लेटते समय अपने कूल्हों के नीचे तकिए लगाने का प्रयास करें। ये स्थितियाँ बैठने या खड़े होने से पीठ पर लगने वाले दबाव को कम करती हैं - विशेष रूप से डिस्क, स्नायुबंधन और मांसपेशियों पर।

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मध्यम पीठ दर्द के इलाज के लिए अब बिस्तर पर आराम करना संभव नहीं है। हालाँकि यह निचली रीढ़ पर तनाव को कम करता है, लेकिन यह अन्य समस्याएं भी पैदा कर सकता है। बिस्तर पर बहुत अधिक समय बिताने से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिनमें पीठ को सहारा देने वाली मांसपेशियां भी शामिल हैं। कुछ लोगों को कब्ज जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं विकसित हो जाती हैं। निष्क्रियता आपके श्रोणि और पैरों की नसों में रक्त का थक्का बनने की संभावना को भी बढ़ा देती है। इससे चोट लग सकती है और प्रभावित नस को नुकसान पहुंच सकता है। यदि थक्के का एक टुकड़ा टूट जाता है, तो यह फेफड़ों में जमा हो सकता है। पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहलाने वाली यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।

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शोध परीक्षणों से पता चलती है कि शारीरिक गतिविधि या कुछ शारीरिक प्रतिबंधों के साथ काम पर जल्दी वापसी या हल्के वर्कआउट के साथ यदि आवश्यक हो बिस्तर पर आराम करने बेहतर है।

पीठ के निचले हिस्से में दर्द वाले लोगों के लिए किस प्रकार का गद्दा सर्वोत्तम है?

यदि आप अधिकांश लोगों की तरह हैं तो आप अपने जीवन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बिस्तर पर बिताते हैं। इसलिए यह सोचने में कुछ मिनट लगाने लायक है कि क्या आपका गद्दा आपको और आपकी पीठ को वह सहारा दे रहा है जिसकी आपको ज़रूरत है।

इस विषय पर बहुत अधिक शोध नहीं हुआ है फिर भी कुछ अध्ययन बताते हैं। पहले डॉक्टर अक्सर बहुत सख्त गद्दों की सलाह देते थे। लेकिन एक अध्ययन में जिसमें 313 लोग तीन महीने तक मध्यम-दृढ़ या सख्त गद्दे पर सोते थे, मध्यम-दृढ़ गद्दे वाले लोगों ने बिस्तर पर लेटने पर कम दर्द के साथ-साथ मजबूत गद्दे वाले लोगों की तुलना में कम दर्द-संबंधी विकलांगता की सूचना दी। गद्दे पीठ के निचले हिस्से में दर्द से पीड़ित 268 मरीजों के वेटिंग-रूम सर्वेक्षण पर आधारित एक अन्य रिपोर्ट में पाया गया कि जो लोग आर्थोपेडिक (बहुत सख्त) गद्दों पर सोते थे उनकी नींद की गुणवत्ता सबसे खराब थी, जबकि मध्यम और सख्त गद्दों के बीच नींद की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं था।

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जबकि एक नरम गद्दा जो आपके शरीर के प्राकृतिक मोड़ के अनुरूप होता है, आपके जोड़ों को अनुकूल रूप से संरेखित करने में मदद कर सकता है, आप इतनी गहराई तक भी डूब सकते हैं कि आपके जोड़ मुड़ जाते हैं और रात के दौरान दर्दनाक हो जाते हैं।

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अपने सपनों का गद्दा ढूंढने का एक तरीका अलग-अलग गद्दा आज़माना है। यदि आप किसी होटल में या किसी और के घर में रात बिताते हैं तो ध्यान दें कि नए बिस्तर पर सोने के बाद आप कैसा महसूस करते हैं। आप अपने वर्तमान गद्दे के नीचे एक प्लाईवुड बोर्ड लगाने का भी प्रयास कर सकते हैं (जो बेडस्प्रिंग्स से होने वाली किसी भी हलचल को कम कर देगा) या फर्श पर अपने गद्दे के साथ कुछ रातों के लिए सो सकते हैं (जो एक मजबूत बिस्तर की भावना का अनुकरण करता है)।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Tuesday, 27 June 2023

Oxford University report : शरब पन स हत ह सतन कसर लकन दल क ममल म कह बड़ बत

Oxford University report: drinking alcohol causes breast cancer : यह कोई रहस्य नहीं है कि शराब हमारे दिमाग को प्रभावित करती है, और अधिकांश मध्यम शराब पीने वालों को यह पसंद है कि यह उन्हें कैसा महसूस कराता है - अधिक खुश, कम तनावग्रस्त, अधिक मिलनसार। विज्ञान ने शराब के सुखद अनुभव को सत्यापित किया है। पीईटी स्कैन से पता चला है कि शराब एंडोर्फिन ("खुशी के हार्मोन") जारी करती है जो मस्तिष्क में ओपियेट रिसेप्टर्स को बांधती है।

यद्यपि अत्यधिक शराब पीने से उन्माद का खतरा बढ़ जाता है, दशकों के अवलोकन अध्ययनों से संकेत मिलता है कि मध्यम शराब - जिसे महिलाओं के लिए एक दिन में एक से अधिक और पुरुषों के लिए दो से अधिक नहीं पीने के रूप में परिभाषित किया गया है। (एक पेय 1.5 औंस 80-प्रूफ स्पिरिट, 5 औंस वाइन, या 12 औंस बीयर के बराबर होता है।) हालांकि, एक हालिया ब्रिटिश अध्ययन में मध्यम मात्रा में शराब पीने वालों के लिए बुरी खबर है, जो दर्शाता है कि मध्यम मात्रा में शराब पीने से भी स्वास्थ के कई क्षेत्रों में कमी आती है।

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अध्ययन ने क्या कहा?
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने 424 पुरुषों और 103 महिलाओं के डेटा को देखा, जो 10,000 व्यक्तियों के व्हाइटहॉल अध्ययन में भाग ले रहे हैं, जो ब्रिटिश सिविल सेवकों के बीच जीवनशैली और स्वास्थ्य के संबंधों की चल रही जांच है। 1985 में अध्ययन की शुरुआत में सभी प्रतिभागी स्वस्थ थे और कोई भी शराब पर निर्भर नहीं था। अगले 30 वर्षों में, प्रतिभागियों ने अपने शराब सेवन के बारे में विस्तृत सवालों के जवाब दिए और स्मृति तर्क और मौखिक कौशल को मापने के लिए परीक्षण किए। अध्ययन के अंत में उनकी एमआरआई के साथ मस्तिष्क इमेजिंग की गई।

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जब टीम ने प्रश्नावली, संज्ञानात्मक परीक्षण स्कोर और एमआरआई स्कैन का विश्लेषण किया तो उन्होंने पाया कि हिप्पोकैम्पस - स्मृति और तर्क से जुड़ा मस्तिष्क क्षेत्र में सिकुड़न की मात्रा लोगों द्वारा पीने की मात्रा से संबंधित थी। जो लोग एक दिन में चार या अधिक पेय के बराबर पीते थे उनमें हिप्पोकैम्पल सिकुड़न का जोखिम न पीने वालों की तुलना में लगभग छह गुना था जबकि मध्यम मात्रा में पीने वालों में यह जोखिम तीन गुना था। हालाँकि शराब पीने और संज्ञानात्मक प्रदर्शन के बीच एकमात्र संबंध यह था कि भारी शराब पीने वालों की एक मिनट के भीतर एक विशिष्ट अक्षर से शुरू होने वाले अधिक से अधिक शब्दों को नाम देने की क्षमता में तेजी से गिरावट आई थी।

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इसका अर्थ क्या है?
अध्ययन के नतीजे हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केनेथ जे. मुकामल के लिए खबर के रूप में नहीं आते हैं। डॉ. मुकमल और उनके सहयोगियों ने 2001 में इसी तरह के निष्कर्षों की सूचना दी थी। उनकी टीम ने 3,376 पुरुषों और महिलाओं का अध्ययन किया था जो कार्डियोवास्कुलर हार्ट स्टडी में नामांकित थे और जिन्होंने एमआरआई स्कैन भी कराया था और उनके शराब के सेवन की सूचना दी थी। हार्वर्ड के शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि मस्तिष्क की मात्रा शराब के सेवन के अनुपात में सिकुड़ गई, और शराब पीने वालों की तुलना में हल्के और मध्यम शराब पीने वालों में भी शोष (संकुचन) अधिक था।

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डॉ. मुकमल कहते हैं फिर भी एमआरआई स्कैन का अर्थ अभी भी स्पष्ट नहीं है। इस बारे में काफी संदेह है कि क्या एमआरआई पर दिखाई देने वाली शोष मस्तिष्क कोशिकाओं की हानि या मस्तिष्क के भीतर द्रव परिवर्तन के कारण है। वह बताते हैं कि जब शराबी शराब पीना बंद कर देते हैं तो इस प्रकार के शोष में कुछ हफ्तों के भीतर बड़ा सुधार दिखाई देता है, जो कि मस्तिष्क कोशिका मृत्यु के कारण होने पर स्थिति नहीं होती। वे कहते हैं, अध्ययन इस बात का बहुत कम संकेत देता है कि मध्यम शराब पीना वास्तव में दीर्घकालिक मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए अच्छा बुरा या उदासीन है।

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तुम्हे क्या करना चाहिए?
यदि आप मध्यम या कम मात्रा में शराब पीते हैं और यह तय करने की कोशिश कर रहे हैं कि स्वास्थ्य कारणों से इसे कम करना चाहिए या नहीं, तो आप संभवतः कई कारकों पर विचार करना चाहेंगे।

मध्यम मात्रा में शराब पीना अभी भी आपके दिल के लिए अच्छा है। 100 से अधिक अवलोकन संबंधी अध्ययनों ने मध्यम शराब पीने को दिल के दौरे, इस्केमिक (थक्का-जनित) स्ट्रोक, परिधीय संवहनी रोग, अचानक हृदय की मृत्यु और सभी हृदय संबंधी कारणों से मृत्यु के जोखिम को कम करने से जोड़ा है।
कम मात्रा में शराब पीने को पित्त पथरी और मधुमेह के कम जोखिम में भी फायदेमंद बताया गया है।

महिलाओं के लिए कम मात्रा में शराब पीने से भी स्तन कैंसर (breast cancer) का खतरा बढ़ सकता है। यदि आप औसत जोखिम वाली महिला हैं, तो प्रतिदिन एक पेय आपके जीवनकाल में स्तन कैंसर का जोखिम 8.25% से 8.8% तक बढ़ा सकता है।

मध्यम शराब सेवन के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक लाभ। एक चीज़ जिसे स्वास्थ्य आँकड़ों ने नहीं मापा है वह है मध्यम मात्रा में शराब पीने का आनंद। किसी अच्छे रात्रिभोज के साथ एक ग्लास वाइन का आनंद लेना या दोस्तों के साथ कॉकटेल के साथ किसी खुशी के अवसर का जश्न मनाना ठीक है।

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डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Know about good and bad cholesterol : कय हत ह अचछ और बर कलसटरल जनए कतन हन चहए कलसटरल रज

Know about good and bad cholesterol : कोलेस्ट्रॉल स्वास्थ्य में एक जटिल विषय है और शरीर में विभिन्न कार्यों के लिए जिम्मेदार है। लीवर द्वारा उत्पादित यह मोम जैसा पदार्थ शरीर की सभी कोशिकाओं में पाया जाता है और कोशिका झिल्ली की अखंडता, हार्मोनल उत्पादन, और न्यूरोनल और मस्तिष्क के विकास के लिए आवश्यक होता है।

कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) और शरीर में इसके कार्यों के बारे में अधिक समझने के लिए हृदय रोग विशेषज्ञ ने कहा कि हालांकि यह एक व्यापक मुद्दा है इसके दो मुख्य प्रकार हैं - ट्राइग्लिसराइड्स और एलडीएल (कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन या खराब कोलेस्ट्रॉल) और एचडीएल (उच्च घनत्व लिपोप्रोटीन) या अच्छा कोलेस्ट्रॉल।

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कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) एक व्यापक मुद्दा है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर जो इसे शरीर में सामान्य स्तर बनाता है एक प्रयोगशाला से दूसरी प्रयोगशाला में भिन्न होता है। जब भी हम कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट देखते हैं तो हम लैब की संदर्भ सीमा को ध्यान में रखते हैं।

एक नियमित व्यक्ति के लिए कुल कोलेस्ट्रॉल रेंज 150 - 200 के बीच होनी चाहिए। ट्राइग्लिसराइड्स 150 से कम और एलडीएल 160 से कम होना चाहिए। दूसरी ओर एचडीएल 35 से अधिक होना चाहिए।

डॉ. ने कहा, यदि कोई व्यक्ति पहले से ही हृदय रोग से पीड़ित है या मधुमेह से पीड़ित है तो कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) 150 और एचडीएल 145 से कम होना चाहिए।

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मधुमेह विशेषज्ञ ने कहा, "रक्त धमनियों से हानिकारक कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) को हटाने में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मदद मिलती है। कोलेस्ट्रॉल, संतृप्त वसा और ट्रांस वसा में भारी खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन से खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है।

How to prevent bad cholesterol from forming? खराब कोलेस्ट्रॉल को बनने से कैसे रोकें?

डॉ. कहा, खराब कोलेस्ट्रॉल का सबसे आम स्रोत प्रसंस्कृत भोजन है। कोई भी भोजन जो लंबे समय तक जमे हुए खंड में रखा जाता है उससे बचना चाहिए। सभी प्रकार के जंक फूड जो परिरक्षकों के साथ संग्रहीत होते हैं उनका सेवन नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत अधिक होता है। आपको ताजा भोजन करना चाहिए न कि जब आप बाहर खाना खा रहे हों तब भी भोजन संग्रहित रखें।

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मधुमेह या अत्यधिक रक्त शर्करा के स्तर के परिणामस्वरूप खराब कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) का स्तर भी बढ़ सकता है।

चयापचय दर में कमी और खराब कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि दोनों हाइपोथायरायडिज्म के प्रभाव हैं। हानिकारक कोलेस्ट्रॉल का स्तर यकृत या गुर्दे की बीमारियों से भी बढ़ता है। खराब कोलेस्ट्रॉल पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि विकार के कारण भी हो सकता है।

What is the best way to increase good cholesterol? अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

विशेषज्ञ ने सलाह दी, हालांकि पशु-आधारित खाद्य पदार्थों से परहेज करने से आपको अपने एलडीएल स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका व्यायाम करना है।

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आनुवांशिकी और लीवर स्वास्थ्य जैसे अन्य कारक भी शरीर में कोलेस्ट्रॉल को प्रभावित करते हैं। प्रत्येक 20 में से लगभग तीन लोगों में किसी न किसी रूप में कोलेस्ट्रॉल संबंधी असामान्यताएं होती हैं।

कोलेस्ट्रॉल, संतृप्त वसा और ट्रांस वसा वाले भोजन को सीमित करें; इसके बजाय अधिक मोनो और पॉलीअनसेचुरेटेड वसा (पीयूएफए) होते हैं, जैसे कि कुसुम, सूरजमुखी और मछली का तेल। नट्स भी रक्त कोलेस्ट्रॉल को काफी कम कर सकते हैं।



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Health Tips and Health News: चट य जड क दरद म रहत क लए गरम य ठड? कनस सक कर

Health Tips and Health News: चोट या जोड़ों के दर्द में राहत के लिए ठंडा या गर्म सेंक करना आसान उपाय माना जाता है। लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि कब और किस दर्द में कौनसा सेंक करना चाहिए।

Arthritis आर्थराइटिस

तकलीफ : घुटनों, कंधों, कोहनी व अंगुलियों के जोड़ों में ऊत्तकों का घिस जाना।

यह करें : गर्म पानी से सेंक करने पर जोड़ों व मांसपेशियों की अकडऩ दूर होती है।

Gout flare up गाउट फ्लेयर अप

तकलीफ : बॉडी में यूरिक एसिड की मात्रा बढऩे से पैर के अंगूठे, कोहनी व एडी में अचानक दर्द उठना।

यह करें : बर्फ से सेंक करने पर अचानक उठे दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।

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Headache सिर दर्द

तकलीफ : तंत्रिकाओं व रक्त वाहिकाओं से सिर दर्द या मांसपेशियों में खिंचाव से गले में दर्द।

यह करें : बर्फ से सेंक करने से सिरदर्द में राहत मिलती है और गर्म पानी के सेंक से गले के दर्द में आराम।

Spraining मोच आना

तकलीफ : मांसपेशियों के खिंचने से शरीर के किसी भी भाग में खून इकट्ठा होने की स्थिति या लील पड़ जाना।

यह करें : चोट पर बर्फ का सेंक करने से जलन दूर होती है और गर्म पानी से सेंक करने पर जकडऩ खत्म होती है।

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Stretch खिंचाव आना

तकलीफ : एड़ी, घुटने, पांव, कोहनी आदि के जोड़ों मे लिगामेंट के फट जाने पर खिंचाव आ जाने से दर्द होना।

यह करें : शुरू में ठंडे सेंक से दर्द के कारण हो रही जलन दूर होती है, बाद में गर्म सेंक करने पर मांसपेशियों की अकडऩ।


Tendinitis टेन्डीनिटिस

तकलीफ : पैरों व हाथों की अंगुलियों के छोटे जोड़ों में स्थित नसों (टेंडन्स) की झिल्ली में सूजन आ जाने से दर्द होना।

यह करें : इस स्थिति में ठंडा सेंक करने से बर्फ पहले जलन कम होती है और बाद में दर्द से भी राहत मिलती है।

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Tendinosis टेन्डिनोसिस

तकलीफ : घर्षण के कारण एडी के पास टखने के जोड़ों की पेशियों में दर्द व अकडऩ।

यह करें : जब जलन खत्म हो जाए तो गर्म सेंक करना चाहिए जिससे अकडऩ दूर होती है।


Why cold compress? ठंडा सेंक क्योंं?
बर्फ हमारे शरीर की रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देती है। जिससे हमें दर्द व जलन से हमें छुटकारा मिलने के साथ ही चोट ठीक हो जाती है।

Why hot compress? गर्म सेंक क्यों?
गर्मी से नसों में रक्त प्रवाह तेज हो जाता है जिससे अकड़ी हुई मांसपेशियां ढीली होने लगती हैं और दर्द में आराम मिलता है।

सावधानी
गंभीर चोटों में गर्म सेंक न लें। यह चोट में हो रही जलन को और बढ़ा सकता है। ऐसे में उस चोट को ठीक होने में ज्यादा समय भी लग सकता है

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चोट के 6-7 घंटे बाद ठंडे सेंक से बचें

गर्म पानी का सेंक बहुत अधिक सर्दी के मौसम में करना फायदेमंद होता है। गर्मी के मौसम में गर्म सेंक नहीं करना चाहिए। सर्दी के मौसम में जोड़ों पर स्थित नसें सिकुडऩे लगती हैं। ऐसे में गर्म पानी के सेंक से दर्द पैदा करने वाले ऊत्तक और नसें खुल जाती हैं। ठंडा सेंक केवल ताजा चोट के समय ही करना चाहिए। यदि चोट लगे 6-7 घंटे हो चुके हैं तो ठंडे सेंक से बचना चाहिए। लील पडऩे से रोकने व जोड़ों में खून को इकट्ठा होने से रोकने के लिए ठंडा सेंक किया जाता है।
- डॉ. सत्येन्द्र शर्मा, ऑर्थोपेडिक सर्जन



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Tips to Help Control Stress : तनव क नयतरत करन म मदद कर सकत ह य 7 चज

Health Tips and Health News : रात्रिभोज के कटोरे में क्विनोआ, सलाद, मूली, खीरे को शामिल करें । संतुलित आहार स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत में सहायता कर सकता है। यह तनावपूर्ण घटनाओं से निपटने के लिए आवश्यक अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है। प्रारंभिक शोध से पता चलता है कि ओमेगा -3 वसा और सब्जियों सहित पॉलीअनसेचुरेटेड वसा जैसे कुछ खाद्य पदार्थ कोर्टिसोल के स्तर को विनियमित करने में मदद कर सकते हैं।

Tips to Help Control Stress : यदि आप अक्सर फास्ट फूड पर निर्भर रहते हैं क्योंकि आप थके हुए हैं या घर पर भोजन तैयार करने में बहुत व्यस्त हैं तो इस प्रकार का भोजन अपनी थाली में शामिल करे। यह एक ऐसा अभ्यास है जो लंबे समय में समय बचाने में मदद कर सकता है अधिक संतुलित स्वास्थ्यवर्धक भोजन वजन बढ़ने से रोक सकता है।

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Mindful eating ध्यानपूर्वक खाना

जब हम तनावग्रस्त भोजन करते हैं तो हम यह देखे बिना कि हम क्या या कितना खा रहे हैं, जल्दी-जल्दी खाते हैं, जिससे वजन बढ़ सकता है। ध्यानपूर्वक खाने की हेबिट्स गहरी साँसों को प्रोत्साहित करके, सोच-समझकर भोजन का चुनाव करके, भोजन पर ध्यान केंद्रित करके और भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह से चबाकर तनाव का प्रतिकार करती हैं। इससे भोजन का आनंद बढ़ता है और पाचन क्रिया बेहतर होती है। ध्यानपूर्वक खाने से हमें यह एहसास करने में भी मदद मिल सकती है कि हम शारीरिक भूख के कारण नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक अशांति के कारण खा रहे हैं, जो हमें मुकाबला करने के तंत्र के रूप में अधिक खाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

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Regular exercise नियमित व्यायाम

शारीरिक गतिविधि रक्तचाप और तनाव हार्मोन के स्तर को कम करने में मदद करेगी। चलने और नृत्य जैसे एरोबिक व्यायाम से सांस लेने और हृदय गति बढ़ती है जिससे पूरे शरीर में कोशिकाओं तक अधिक ऑक्सीजन पहुंचती है। इससे हृदय सहित मांसपेशियों में तनाव कम हो जाता है।

Meditation or deep breathing techniques ध्यान या गहरी साँस लेने की तकनीक

तनाव की प्रतिक्रिया में तेज़, उथली साँसें और अनियमित विचार आते हैं। इसलिए मांसपेशियों के तनाव को कम करने हृदय गति को कम करने और मन को शांत करने के लिए धीमी, गहरी सांसें लें। जब भी आप तनाव महसूस करें तो अंदर और बाहर प्रत्येक सांस पर ध्यान केंद्रित करते हुए धीरे-धीरे सांस लें। इस सरल क्रिया के माध्यम से आपका पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र सक्रिय हो जाता है और आपको शांत होने में मदद कर सकता है।

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शोध में यह भी पाया गया है कि ध्यान प्रशिक्षण टेलोमेरेस नामक प्रोटीन संरचनाओं को लंबा या छोटा होने से रोक सकता है। टेलोमेरेस आम तौर पर उम्र के साथ और दीर्घकालिक तनाव का अनुभव करने वालों में लंबाई में सिकुड़ते हैं . इससे कोशिकाओं की मृत्यु और सूजन हो सकती है, जो उम्र से संबंधित मनोभ्रंश और हृदय रोग के बढ़ते जोखिम से जुड़ी है। कुछ अध्ययनों में ध्यान अभ्यास को चिंता, दीर्घकालिक तनाव और कोर्टिसोल के स्तर में कमी के जवाब में अधिक टेलोमेयर गतिविधि और लंबाई के साथ जोड़ा गया है।

Mental health counseling or other social support मानसिक स्वास्थ्य परामर्श या अन्य सामाजिक सहायता

अकेलापन महसूस करने से तनाव बढ़ सकता है। किसी विश्वसनीय व्यक्ति के साथ भावनाओं और चिंताओं के बारे में बात करने से मदद मिल सकती है। अक्सर, केवल यह एहसास कि आप अकेले नहीं हैं और आपकी भावनाएँ असामान्य नहीं हैं, तनाव कम करने में मदद कर सकता है।

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Practicing work-life balance कार्य-जीवन संतुलन का अभ्यास करना
छुट्टियों और व्यक्तिगत समय का उपयोग करें या बस दिन में एक घंटा अलग रखें। काम के दबाव से समय-समय पर छुटकारा पाना तनाव को कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और कार्यस्थल पर थकान से जुड़ी शारीरिक और मानसिक बीमारियों के खतरे को कम करने में चमत्कार कर सकता है।

छोटे मिट्टी के बर्तनों में जड़ी-बूटियों को हमेशा अपने पास रखे, जिसमें अजवायन, थाइम, तुलसी शामिल हैं, सप्ताह में कम से कम एक बार मज़ेदार गतिविधियाँ या शौक निर्धारित करें। बागवानी, पढ़ना, संगीत का आनंद लेना, मालिश करवाना, प्रकृति में लंबी पैदल यात्रा करना और पसंदीदा व्यंजन पकाना एक तनाव निवारक के उदाहरण हैं।

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Good sleep hygiene अच्छी नींद

तनाव से सतर्कता की भावना बढ़ सकती है, जिससे नींद आने में देरी होती है और साथ ही रात भर नींद में बाधा आती है। यह किसी को गहरी नींद के चरण में प्रवेश करने से रोक सकता है जिसमें शरीर ऊतकों की मरम्मत और विकास करता है और एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन करता है। REM (रैपिड आई मूवमेंट) नींद का चरण विशेष रूप से मूड विनियमन और स्मृति में मदद करता है। रात में सोने से लगभग 30 मिनट पहले धीमी नींद लेते हुए 7-9 घंटे की नींद का लक्ष्य रखें।



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Monday, 26 June 2023

Health Tips and Health News : वजञनक न ढढ नकल कसर क सबस ससत इलज 2 रपए क य चज जड स खतम कर सकत ह कसर

Health Tips and Health News : कैंसर के मरीजों के लिए एक बड़ी राहत वाली खबर आई है। दुनियाभर के वैज्ञानिक जिस बीमारी के लिए सालों से इलाज ढूंढ रहे थे उसका आखिरकार तोड़ मिल चुका है।

अब तक दुनिया भर में कैंसर के इलाज के लिए अरबों रुपए पानी की तरह बहा दिए गए हैं, लेकिन कोई भी दवा पूरी तरह से कैंसर को जड़ से खत्म करने में नाकाम साबित हुई है। अब तक बाजार में जो दवाएं मौजूद हैं, वो सिर्फ कैंसर को बढ़ने से रोक देती हैं।

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अमेरिका के लडविंग इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च में अमेरिकी वैज्ञानिकों के दल ने हाल ही में कुछ नए शोध किए। इस टीम की अगुवाई मशहूर कैंसर वैज्ञानिक और जॉन हॉप्किंग यूनिवर्सिटी के ऑनकोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) डॉ. ची वान डैंग (Dr. Chi Van Dang ) ने की। उन्होंने कहा कि हम सालों तक रिसर्च कर चुके हैं और अब तक कैंसर के जो भी इलाज मौजूद (treatments for cancer) हैं वो काफी महंगे हैं। हमने जो शोध किया उसमें चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। आपके किचन में रखा बेकिंग सोड़ा कैंसर के लिए रामबाण औषधि है।

डॉ. डैंग के मुताबिक, हमने बेकिंग सोडा ( baking soda )पर लंबी रिसर्च की और जो परिणाम हमने अब तक सिर्फ सुने थे वो प्रमाणित हो गए। उन्होंने बताया कि यदि कैंसर का मरीज बेकिंग सोडा पानी के साथ मिलाकर पी ले तो कुछ ही दिनों में इसका असर दिखने लगेगा। उन्होंने बताया कि कीमोथेरेपी और महंगी दवाओं से भी तेजी से बेकिंग सोडा ट्यूमर सेल्स को न सिर्फ बढ़ने से रोकता है, बल्कि उसे खत्म भी कर देता है।

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डॉ. डैंग ने पूरी जानकारी देते हुए बताया कि हमारे शरीर में हर सेकेंड लाखों सेल्स खत्म होते हैं और नए सेल्स उनकी जगह ले लेते हैं। लेकिन कई बार नए सेल्स के अंदर खून का संचार रुक जाता है और ऐसे ही सेल्स एकसाथ इकट्ठा हो जाते हैं, जो धीरे-धीरे बढ़ता है। इसी को ट्यूमर कहा जाता है। उन्होंने बताया कि हमने ब्रेस्ट और कोलोन कैंसर के ट्यूमर सेल्स पर बेकिंग सोडा के प्रभाव की जांच की और हमने पाया कि बेकिंग सोडा वाला पानी पीने (cancer patient drinks baking soda mixed with water) के बाद जिस तेजी से ट्यूमर सेल्स बढ़ रहे तो वो काफी हद तक रुक गए।

उन्होंने बताया, ट्यूमर सेल्स में आक्सिजन पूरी तरह खत्म हो जाती है, तो उसे मेडिकल भाषा में हिपोक्सिया कहते हैं। हिपोक्सिया की वजह से तेजी से उस हिस्से का पीएच लेवल गिरने लगता है और ट्यूमर के ये सेल एसिड बनाने लगते हैं। इस एसिड की वजह से पूरे शरीर में भयंकर दर्द शुरू हो जाता है। अगर इन सेल्स का तुरंत इलाज न किया जाए तो ये कैंसर सेल्स में तब्दील हो जाते हैं।

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डॉ. डैंग के मुताबिक, बेकिंग सोडा मिला पानी पीने (drinking water mixed with baking soda से शरीर का पीएच लेवल भी मेंटेन रहता है और एसिड वाली समस्या न के बराबर होती है। डॉ. डैंग ने बताया कि कई बार कीमोथेरेपी के बावजूद भी ऐसे कैंसर सेल्स शरीर में रह जाते हैं, जो बाद में दोबारा से शरीर में कैंसर सेल्स बनाने लगते हैं। इन्हें T सेल्स कहते हैं। इन टी सेल्स को नाकाम सिर्फ बेकिंग सोडा से ही किया जा सकता है।

डॉ. वॉन डैंग ने कहा कि पहले भी ये बात आप सुन चुके होंगे कि बेकिंग सोडा कैंसर समेत कई बीमारियों का इलाज है। लेकिन अब हम प्रमाणिक तौर पर कह सकते हैं कि कैंसर का सबसे सस्ता और अच्छा इलाज बेकिंग सोडा से मिला पानी है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों पर हमने प्रयोग किए उन्हें दो हफ्तों पर पानी में बेकिंग सोडा मिलाकर दिया और सिर्फ 2 हफ्ते में उन लोगों के ट्यूमर सेल्स लगभग खत्म हो गई !

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डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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इस गभर रग म करगर ह इलकटरपथ इलज जनए कय हत ह फयद

इलेक्ट्रोहोम्योपैथी या इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा पद्धति के अनुसार जब रक्त और रस (लिंफ) में असंतुलन होता है तो इससे रोग होते हैं। इनमें सुधार से ही रोग ठीक भी होते हैं। इलेक्ट्रोपैथी में पेड़-पौधों के अर्क का उपयोग होता है। पौधों में धनात्मक और ऋणात्मक ऊजाएं होती है। इसी आधार पर इस पैथी को इलेक्ट्रोपैथी कहते हैं। इसमें हर तरह की बीमारियों का इलाज हब्र्स से निकले अर्क से किया जाता है।

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इसकी दवा का कोई साइड इफेक्ट नहीं
इसमें केवल हर्बल दवाओं का इस्तेमाल होता है। इसलिए साइड इफेक्ट नहीं होते हैं। एक्सपर्ट की मानें तो बीमारी का जड़ से इलाज होता है क्योंकि यह दवा मरीज के प्रकृति के आधार पर दी जाती है जो कोशिकाओं के स्तर पर जाकर कार्य करती हैं। इलाज में मरीज को कुछ सावधानी भी बरतनी होती है। अधिकतर मरीजों को खट्टी चीजों का परहेज करना होता है। कुछ परहेज बीमारी की प्रकृति के आधार पर भी होते हैं। कोई भी दवा एक्सपर्ट की सलाह से ही लें।

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इसमें दवा बनाने का तरीका अलग होता है। जिस पौधे का अर्क निकालना होता है उस पौधे को एक कांच के जार में पानी के साथ रख देते हैं। हर सप्ताह पुराने पौधों को निकाल दिया जाता है और दूसरा नया पौधा उसमें डाल देते हैं। यह प्रक्रिया करीब 35-40 दिन तक चलती है। फिर उस पानी को फिल्टर किया जाता है। इसे स्पेजरिक एसेंस कहते हैं। जरूरत के अनुसार इसे डायल्यूट कर डायल्ूशन बनाए जाते हैं। दवा का मूल तत्व पौधों का रस ही होता है लेकिन इसको गोली, टेबलेट, सीरप, इंजेक्शन आदि में भी देते हैं।

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मुख्य रूप से दो प्रकृति
बीमारी की पहचान दो तरह से होती है जैसे संग्वेइन यानी रक्त प्रकृति और लिम्फैटिक यानी रस प्रकृति की होती है। कुछ मरीजों में मिश्रित प्रकृति भी होती है। इस पैथी में बीमारियों को दो वर्गों में बांटा गया है धनात्मक और ऋणात्मक बीमारियां। अगर बीमारी पॉजेटिव नेचर की है तो इलाज नेगेटिव दवा से करते हैं। ऐसे ही रोग यदि नेगेटिव है तो पॉजिटिव दवा देते हैं। पोलराइजेशन नियम अनुसार स्वभाव के विपरीत नेचर वाली दवा असर करती है।



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