Thursday, 31 December 2020

शराब से संबंध और जीन में बदलाव जैसी कोरोना वैक्सीन जुड़ी हैरानी भरी जानकारी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी के बीच वर्ष 2020 खत्म हो गया है और इस साल भारत में कोविड वैक्सीन मिलने की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। हालांकि बीते कुछ वक्त से वैक्सीनेशन को लेकर सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई को देखने पर इस बात की काफी संभावना जताई जा रही है कि जनवरी में देश में वैक्सीनेशन शुरू हो जाएगा। हालांकि वैक्सीन आने से पहले ही इसे लेकर कई भ्रांतियां और सवाल भी लोगों के जेहन में आ रहे हैं। जानिए कोरोना वैक्सीन से जुड़ी हैरानी भरी जानकारी।

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सवाल 1: अतीत में टीकों को ऑटिज्म से जोड़ा गया है। इनका क्या?

जवाबः वर्ष 1985 में एमएमआर को ऑटिज्म से जोड़ने वाला एक पेपर था। इसके बाद लाखों बच्चों ने यह साबित कर दिया कि वैक्सीन और ऑटिज्म के बीच कोई संबंध नहीं है। सभी टीके न्यूनतम अस्थायी दुष्प्रभावों (साइड इफेक्ट्स) के साथ बेहद सुरक्षित हैं।

सवाल 2: ऐसे जानकारियां भी आ रही हैं कि वैक्सीन mRNA मानव जीनोम में शामिल हो जाती है और हमारी आनुवंशिक संरचना (जेनेटिक स्ट्रक्चर) को बदल देती है। क्या यह सच है?

जवाबः mRNA वैक्सीन सेल को स्पाइक प्रोटीन का उत्पादन करने के लिए एक मैसेज देता है जो एंटीबॉडी उत्पादन को प्रेरित करता है। यह वही करता है जो इसे करने के लिए निर्देशित किया जाता है। आज तक कोई प्रतिकूल घटना दर्ज नहीं की गई है।

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सवाल 3: अल्कोहल और कोविड वैक्सीन की परस्पर क्रिया (इंटरेक्शन) क्या है?

जवाबः अत्यधिक शराब सेवन, वैक्सीन के लिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं (इम्यूनिटी रिस्पॉन्स) को कम कर सकता है। चूंकि रूस के लोगों को भारी शराब पीने के लिए जाना जाता है, इसलिए उनकी सरकार ने पहली खुराक के दो सप्ताह पहले और दूसरी खुराक के 6 सप्ताह बाद तक शराब पीने से बचने की सलाह दी है। स्पुतनिक वैक्सीन 21 दिनों में दो खुराक के रूप में दी जाती है। कभी-कभार शराब या बीयर का गिलास प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

सवाल 4: वायरस उत्परिवर्तित (म्यूटेट) हो गया है तो क्या हमें एक और टीके की जरूरत होगी। क्या हमें इंतजार नहीं करना चाहिए?

जवाबः अब तक वायरस ने फ्लू वायरस की तरह म्यूटेशन की प्रवृत्ति नहीं दिखाई है। इसके अलावा, विकसित किए जा रहे टीकों में इसे ध्यान में रखा गया है और इससे अभी भी काम करना चाहिए।

सवाल 5: अगर मैं वैक्सीन नहीं लेना चाहता तो क्या होगा? क्या इसे अनिवार्य किया जाएगा?

जवाबः अधिकांश देशों में यह अनिवार्य नहीं होगी। आपको बिना किसी विशेष उपचार के साथ नई वायरल बीमारी और और नए टीके के बीच चुनाव करना होगा। चयन आपका है। जैसा कि शुरू में एक मांग और आपूर्ति के बीच बड़ी खाई होगी, वैक्सीन ना लेकर आप दूसरों की मदद कर सकते हैं।

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सवाल 6: यदि मैं एक वरिष्ठ नागरिक या पहले से किसी बीमारी के साथ प्राथमिकता सूची की श्रेणी में आता हूं, तो मैं उचित टीकाकरण प्राधिकरण से कैसे संपर्क करूं?

जवाबः जल्द ही एक वेबसाइट और एक ऐप 'CoWIN' आएगा, जहां आप अपने संबंधित विवरणों के साथ पंजीकरण कर पाएंगे।

सवाल 7: CoWIN क्या है?

जवाबः यह दुनिया का पहला, डिजिटल, एंड टू एंड, वैक्सीन वितरण और मैनेजमेंट सिस्टम है। इसमें लाभार्थी पंजीकरण, प्रमाणीकरण, दस्तावेज सत्यापन, सत्र आवंटन, AEFI रिपोर्टिंग और प्रमाणपत्र निकलना शामिल है। वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद, यह लाभार्थी को सूचित करने वाला एक एसएमएस भेजेगा। वैक्सीन केंद्र खुद पांच लोगों द्वारा मैनेज किया जाएगा और प्रति दिन अधिकतम 100 टीके लगाएगा। टीकाकरण के बाद व्यक्ति को केंद्र छोड़ने से पहले 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है।

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सवाल 8: निकट भविष्य में इस्तेमाल के लिए कितने प्रकार के कोरोना टीके उपलब्ध होने की संभावना है?

जवाबः भारत के सीरम इंस्टीट्यूट (ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका) द्वारा विकसित कोविशिल्ड एक नॉन-रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्टर वैक्सीन है। ये वे वायरस हैं जिन्हें डिलीवरी सिस्टम के रूप में कार्य करने के लिए संशोधित किया गया है जो वायरल एंटीजन को हमारी प्रतिरक्षा कोशिकाओं (इम्यून सेल) तक ले जाते हैं। सीरम इंस्टीट्यूट वैक्सीन में कोरोना वायरस एंटीजेन डिलीवर करने वाला चिंपैंजी एडेनोवायरस इस्तेमाल किया गया है और रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-V जिसे डॉ रेड्डी लैब द्वारा भारत में बनाया गया है, में मानव एडेनोवायरस डिलीवर करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वेक्टर है।

भारत बायोटेक इंडिया लिमिटेड द्वारा कोवैक्सिन, एक संपूर्ण सेल निष्क्रिय टीका है। बच्चों के टीकाकरण में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश वर्तमान टीके इस तकनीक द्वारा बनाए गए हैं। चूंकि ये मारे गए वायरस हैं, इसलिए ये इम्यूनिटी पैदा करते हैं, लेकिन बीमारी का कारण नहीं बन सकते हैं।

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फाइजर और मॉडर्ना संयुक्त राज्य अमरीका के हैं, जिसमें mRNA अणु होते हैं। ये कोड मैसेज ले जाते जो मानव कोशिका को कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन के निर्माण के लिए प्रेरित करता है। ये प्रोटीन एंटीबॉडीज का उत्पादन करने के लिए हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा पहचाने गए हैं। वहीं, अन्य भारतीय कंपनियां जैसे बायोलॉजिकल ई, कैडिला हेल्थकेयर और जेनोवा भी टीका विकास के उन्नत चरण में हैं।

सवाल 9: क्या मैं टीका लगने के बाद बिना मास्क के घूम सकता हूं?

जवाबः नहीं, अभी नहीं। ऐसा केवल तभी किया जा सकता है जब अधिकांश आबादी को या तो बीमारी हो गई हो या उन्हें टीका लग गया हो। इसका मतलब है कि आबादी ने झुंड प्रतिरक्षा (हर्ड इम्यूनिटी) विकसित कर ली है।

सवाल 10: क्या निकट भविष्य में नए और बेहतर कोविद टीके लगने की उम्मीद है?

जवाबः दिसंबर 2020 तक विभिन्न चरणों में 250 से अधिक टीके परीक्षण के अधीन हैं। नए वितरण तरीकों को भी विकसित करने के लिए बहुत सारे शोध चल रहे हैं। नैजल स्प्रे वैक्सीन शायद सबसे आशाजनक है। एक कई खुराक वाली नैजल स्प्रे डिवाइस बहुत सुविधाजनक और किफायती हो सकती है। यह लोकल IgA एंटीबॉडी पैदा करेगी और वायरस को प्रवेश पर ही रोक देगी। यह नाक में ही वायरस को रोकेगा और इस प्रकार बीमारी फैलने को भी रोकेगा।

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दुर्भाग्य से, चूंकि यह एक जीवित टीका होगा, इसलिए इसे अधिकतम और सबसे कठिन परीक्षणों की आवश्यकता होगी और इस तरह बाजार में आने में सबसे लंबा समय लगेगा।

बता दें कि कोई भी टीका 100 फीसदी सुरक्षा नहीं देता है। इसके अलावा एक टीका पाने वाले व्यक्ति में बीमारी बढ़ नहीं सकती है लेकिन वह इसे दूसरों तक पहुंचा सकता है। कृपया मास्क पहनना जारी रखें, फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करें और कुछ और समय तक हाथों को सैनेटाइज करना जारी रखें।

(नोटः उपरोक्त जानकारी विभिन्न रिपोर्टों, चिकित्सकों और सरकार द्वारा वक्त-वक्त पर जारी सूचनाओं के आधार पर है।)



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बिना सोच-समझे नहीं लें एंटीडिप्रेसेंट

आज जब हर दस में से आठ व्यक्ति अवसाद (Depression) और चिंता (anxiety) से ग्रस्त हो रहे हैं, तो एंटीडिप्रेसेंट (Antidepressant) या ट्रैक्विंलाइजर्स (Tranquilizers) द्वारा मन को शांत करने की कोशिश भी बढ़ रही है। जाहिर है, इन दवाओं का इस्तेमाल बेतहाशा बढ़ रहा है। चिंता, अवसाद या तनाव का शमन करने वाली दवाओं के विवेकहीन उपयोग से सेहत को कई नुकसान हो सकते हैं। ट्रैंक्विलाइजर शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को डिप्रेस कर देते हैं जबकि एंटीडिप्रेसेंट हमारी ब्रेन केमिस्ट्री को बदल डालते हैं। मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. मैक्स पेम्बर्टन कहती हैं, 'दोनों दवाएं हमारी फीलिंग्स (feelings) को खत्म कर देती हैं और इमोशनल रिएक्शन (Emotional reaction) को कुंद कर देती हैं।

इनके सेवन से यौनेच्छा में कमी, ऊर्जा ह्वास, डिसकनेक्शन और यहां तक कि कई बार आत्महत्या की प्रवृत्ति जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती हैं। इन दवाओं के सेवन करने वाले अक्सर सुस्त रहने लगते हैं। मेडिकल साइकोथेरेपिस्ट डॉ. रिचर्ड वुलमैन कहते हैं, कोई भी कुशल और पेशेवर जनरल फिजीशियन या मनोचिकित्सक रोगी का पूरा क्लीनिकल डायग्नोसिस करता है, उसके लक्षणों की पड़ताल करता है और फिर तय करता है कि रोगी को सचमुच केमिकल असिस्टेंस दवा की जरूरत है या नहीं।

चिकित्सक को अच्छी तरह मालूम होता है कि एक बार रोगी को एंटीडिप्रेसेंट देने के बाद उसे रोगी पर लगातार नजर रखनी पड़ेगी। चर्चित किताब 'द फिक्स' के लेखक डेमियन थाम्पसन ने अपनी किताब में मूड बदलने वाली दवाओं पर हमारी बढ़ती निर्भरता का गहन विश्लेषण किया है। वे कहते हैं, 'कुछ दवाएं सुनिश्चित करती हैं कि कतिपय अनुभूतियां आप तक न पहुंचें। कुछ मामलों में यह व्यक्तित्व को धुंधला कर देती हैं और व्यक्ति अपने आप स्वभाव से हटकर व्यवहार करने लगता है। इसलिए बेहद जरूरी है कि एंटीडिप्रेसेंट या ट्रैंक्विलाइजर कुशल एवं योग्य चिकित्सक की देखरेख में सीमित डोज में ही ली जाएं।



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Wednesday, 30 December 2020

कोरोना वैक्सीन के नुकसान आए सामने, खुराक लेने के आठ दिन बाद हुआ संक्रमण

न्यूयॉर्क। अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक कंपाउंडर (पुरुष नर्स) देश में आपातकालीन उपयोग के लिए अनुमोदित फाइजर वैक्सीन की पहली खुराक प्राप्त करने के आठ दिन बाद कोविड-१९ पॉजिटिव पाए गए हैं। मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मैथ्यू डब्ल्यू (४५) ने एक फेसबुक पोस्ट में १८ दिसंबर को वैक्सीन प्राप्त करने के बारे में बात कही है।

उन्होंने एबीसी 10 न्यूज को बताया कि उन्हें केवल उनके हाथ में एक दिन कुछ दर्द हुआ मगर इसके अलावा कोई अन्य साइड इफेक्ट नहीं हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वैक्सीन मिलने के आठ दिन बाद वह कोविड-19 इकाई में काम करते हुए अस्वस्थ महसूस करने लगे। मैथ्यू ने क्रिसमस के बाद खुद का परीक्षण कराया और इसके परिणामों से पता चला कि वह कोविड-19 पॉजिटिव हैं।

सैन डिएगो के फैमिली हेल्थ सेंटर्स के एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिश्चियन रेमरस ने एबीसी न्यूज को बताया कि पहली खुराक के बाद भी अगर कोई वायरस के संपर्क में आया है तो उसका पॉजिटिव परीक्षण करना अप्रत्याशित नहीं है। उन्होंने कहा, हम वैक्सीन नैदानिक परीक्षणों से जानते हैं कि वैक्सीन से सुरक्षा विकसित करने के लिए आपको लगभग 10 से 14 दिन तो लगने ही वाले हैं। बता दें कि फाइजर के तीसरे चरण के आंकड़ों से पता चला है कि यह वैक्सीन 95 प्रतिशत प्रभावशाली है।



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Coronavirus: भारत में कोरोना का सामने आया नया रूप, रीढ़ की हड्डी में फैल रहा है इंफेक्शन

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज भले ही ठीक होकर अपने घर में पंहुच रहे है लेकिन इसके बाद भी वो कुछ ना कुछ परेशानियों से जकड़े हुए है। अभी हाल ही में कोरोना का का नया रूप सामने आया है जिसके बाद से डॉक्टर्स में भी इसको लेकर चिंता बढ़ गई है, अब इसके नए-नए साइड इफेक्ट भी सामने आने लगे हैं। अभी तक कोरोना से समक्रमित लोगों के शरीर में तरह तरह के साइड इफेक्ट्स सुनने को मिल रहे थे, लेकिन अब कोरोना की वजह से नई तरह की परेशानियां सामने आ रहीं हैं।मुंबई के डॉक्टिर्स ने इस बात का खुलासा करते हुए बताया है कि कोरोना वायरस के कुछ बुजुर्ग मरीजों में एक नया इंफेक्शन देख रहे हैं। और ये इंफेक्शन कोरोना की वजह से रीढ़ की हड्डी में हो रहा है।

मरीजों को आई समस्या
डाॅक्टरों के मुताबिक मुंबई के एक अस्पताल में ऐसे मरीज सामने आ रहे है जो कोरोना वायरस की जंग जीत चुके थे अब इसी तरह कोरोना वायरस की जंग जीत चुके 6 बुजुर्ग लोगों को वायरल बुखार की समस्या हुई है। जिसके बाद उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती किया गया। लेकिन उन्हें अब रीढ की हड्डी में परेशानी हो रही । जिसके चलते उनकी रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन किया गया। जिसके बाद उन्हें दिन में तीन बार एंटीबॉयोटिक दी गई।



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चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने के लिए उपयोग में लाए ये 3 सुपरफूड, लाएगा जल्द ही निखार

नई दिल्ली।चेहरे से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए हम तरह तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन इसका असर कुछ की क्षणों के लिए होता है। चेहरे की खूबसूरती के बनाए रखने के लिये सबसे ज्यादा जरूरी होता है कि त्वचा अंदर से पूरी तरह से साफ रहे है और यह तभी हो सकता है जब आप हेल्दी डाइट बहुत जरूरी लेंगे। कुछ खास तरह के सीड्स भी शरीर को अंदर से स्वस्थ बनाकर त्वचा को जवां और खूबसूरत बनाने का काम करते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।

चिया सीड्स- चिया सीड्स त्वचा के लिए सबसे अच्छा उपचार माना गया है इसमें मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड त्वचा के रूखेपन को दूर करता है। चिया सीड्स खाने से हाइड्रेशन बढ़ता है जिससे त्वचा साफ, कोमल और चमकदार बनती है। चिया सीड चेहरे पर झुर्रियों आने से रोकता है और एंटी एजिंग का काम करता है।

फ्लैक्स सीड्स- फ्लैक्स सीड्स यानी अलसी का बीज शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है इसका सेवन करने से शरीर के बिगड़े हार्मोन में सुधार होता है। अलसी का बीज ना केवल शरीर के लिए बल्कि मुंहासों से जुड़ी समस्या को भी दूर करता है।ये शरीर की अंदर से सफाई करता है और स्किन को हेल्दी बनाता है।

सनफ्लावर सीड्स- सनफ्लावर सीड्स यानी सूरजमुखी के बीज में जिंक, विटामिन A, B1 और E की भरपूर मात्रा पाई जाती हैं। इसके अलावा इसमें बहुत सारा मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं और त्वचा को जवां बनाते हैं। सूरजमुखी के बीज चेहरे के काले दाग-धब्बों को भी दूर करने में बहुत फायदेमंद हैं।



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Tuesday, 29 December 2020

पेन मैनेजमेंट थैरेपी को अपनाएं...दर्द को करें बॉय बॉय

पेन मैनेजमेंट थैरेपी है क्या
हमारे शरीर में कहीं भी दर्द हो रहा है, इसका अहसास हमें हमारा दिमाग करवाता है। पेन मैनेजमेंट थैरेपी में इसके विशेषज्ञ दर्द से संबंधित नर्व पर काम करते हैं। हमेशा के लिए दर्द से निजात दिलाने वाली इस थैरेपी में बिना किसी चीर-फाड़ के मरीज को एक ही दिन में आराम मिल जाता है।
कैंसर के दर्द में भी आराम
इस थैरेपी से स्लिप डिस्क, नसों एवं जोड़ों, कंधों, घुटनों और कमर दर्द आदि के अलावा हरपीज एवं ऑस्टियोपोरोसिस के दर्द से भी निजात मिल जाती है। कैंसर के दर्द से पीडि़त को भी यह थैरेपी आराम पहुंचाती है।
सर्जरी के पेन में भी रिलीफ
किसी जरूरी सर्जरी को आप केवल इसलिए टालते जा रहे हैं कि आपको पेन होगा तो आप घबराइए नहीं। पेन मैनेजमेंट थैरेपी विशेषज्ञ डॉ. अमितेश पाठक के अनुसार, पेन विशेषज्ञ की देख-रेख में होने वाले किसी भी ऑपरेशन में मरीज को दर्द का सामना नहीं करना पड़ता।



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पेन मैनेजमेंट थैरेपी को अपनाएं...दर्द को करें बॉय बॉय

पेन मैनेजमेंट थैरेपी है क्या
हमारे शरीर में कहीं भी दर्द हो रहा है, इसका अहसास हमें हमारा दिमाग करवाता है। पेन मैनेजमेंट थैरेपी में इसके विशेषज्ञ दर्द से संबंधित नर्व पर काम करते हैं। हमेशा के लिए दर्द से निजात दिलाने वाली इस थैरेपी में बिना किसी चीर-फाड़ के मरीज को एक ही दिन में आराम मिल जाता है।
कैंसर के दर्द में भी आराम
इस थैरेपी से स्लिप डिस्क, नसों एवं जोड़ों, कंधों, घुटनों और कमर दर्द आदि के अलावा हरपीज एवं ऑस्टियोपोरोसिस के दर्द से भी निजात मिल जाती है। कैंसर के दर्द से पीडि़त को भी यह थैरेपी आराम पहुंचाती है।
सर्जरी के पेन में भी रिलीफ
किसी जरूरी सर्जरी को आप केवल इसलिए टालते जा रहे हैं कि आपको पेन होगा तो आप घबराइए नहीं। पेन मैनेजमेंट थैरेपी विशेषज्ञ डॉ. अमितेश पाठक के अनुसार, पेन विशेषज्ञ की देख-रेख में होने वाले किसी भी ऑपरेशन में मरीज को दर्द का सामना नहीं करना पड़ता।



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पेन मैनेजमेंट थैरेपी को अपनाएं...दर्द को करें बॉय बॉय

पेन मैनेजमेंट थैरेपी है क्या
हमारे शरीर में कहीं भी दर्द हो रहा है, इसका अहसास हमें हमारा दिमाग करवाता है। पेन मैनेजमेंट थैरेपी में इसके विशेषज्ञ दर्द से संबंधित नर्व पर काम करते हैं। हमेशा के लिए दर्द से निजात दिलाने वाली इस थैरेपी में बिना किसी चीर-फाड़ के मरीज को एक ही दिन में आराम मिल जाता है।
कैंसर के दर्द में भी आराम
इस थैरेपी से स्लिप डिस्क, नसों एवं जोड़ों, कंधों, घुटनों और कमर दर्द आदि के अलावा हरपीज एवं ऑस्टियोपोरोसिस के दर्द से भी निजात मिल जाती है। कैंसर के दर्द से पीडि़त को भी यह थैरेपी आराम पहुंचाती है।
सर्जरी के पेन में भी रिलीफ
किसी जरूरी सर्जरी को आप केवल इसलिए टालते जा रहे हैं कि आपको पेन होगा तो आप घबराइए नहीं। पेन मैनेजमेंट थैरेपी विशेषज्ञ डॉ. अमितेश पाठक के अनुसार, पेन विशेषज्ञ की देख-रेख में होने वाले किसी भी ऑपरेशन में मरीज को दर्द का सामना नहीं करना पड़ता।



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पोस्ट कोविड सिंड्रोम में कैसे रखें अपनी सेहत और लक्षणों पर नजर

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के कई लक्षण हैं और इनमें खांसी और ठंड से लेकर सांस फूलना और बुखार तक शामिल है। जहां इस महामारी से संक्रमित सभी लोगों में ये लक्षण दिखें जरूरी नहीं, लेकिन कोविड-19 टेस्ट में निगेटिव आने वाले कई लोगों में गंध या स्वाद का पता ना चलना और यहां तक कि थकान, जोड़ों का दर्द, शरीर में दर्द जैसे तमाम लक्षण हो सकते हैं।

विभिन्न संक्रामक रोग विशेषज्ञों के मुताबिक इस घटना को "पोस्ट-कोविड सिंड्रोम या लंबे वक्त से कोविड" के रूप में जाना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, "हालांकि, सिंड्रोम के विभिन्न पहलुओं को अभी भी पूरी तरह से समझा जाना बाकी है, लेकिन जो स्पष्ट है कि सिंड्रोम का व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता पर महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसमें परिवार और सामाजिक जीवन को प्रभावित करने के साथ ही उत्पादकता भी शामिल होती है।"

चिकित्सकों के मुताबिक अगर कोई कोविड-19 लक्षणों का अनुभव करता है तो वह क्या कर सकता है:

किस पर ध्यान केंद्रित करें

अगर आपको पहले से कोई बीमारी है और कोविड-19 लक्षण नजर आते हैं, तो अपने चिकित्सक से यह सुनिश्चित करने के लिए मिलें कि क्या आप ठीक हैं और यह भी समझ सकते हैं कि आपको क्या अतिरिक्त उपाय अपनाने हैं।

चिकित्सक बताते हैं, "मधुमेह वाले मरीजों के लिए उपयुक्त आहार, व्यायाम और दवाओं के साथ आपकी HbA1C वैल्यू 6.5mg/dL या उससे कम होनी चाहिए। संतुलित पौष्टिक आहार, अच्छा हाइड्रेशन और नियमित शारीरिक व्यायाम भी स्वस्थ और युवा लोगों के लिए आवश्यक है।"

कोरोना वायरस की टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी वायरस आपको फिर से पकड़ ना ले, इसे लेकर सजग रहें। इस तरह आप अपने लक्षणों पर कड़ी निगरानी रख सकते हैं।

घबराएं मत

अगर दुर्भाग्य से आपके लक्षण कम नहीं हो रहे हैं- तो घबराएं नहीं। यदि आपको बीमार होने के हफ्तों बाद भी लक्षण दिखाई देते हैं, तो अपने चिकित्सक से मिलें और उसके अनुसार इलाज की योजना बनाएं।

खुद को आराम दें

आपके शरीर ने अभी एक वायरस से लड़ाई की है इसलिए इसे ठीक होने के लिए वक्त चाहिए। जल्दबाजी में उछल-कूद करने के बजाए खुद को दिनचर्या में वापस आने के लिए कुछ दिन दें। जब भी आवश्यकता हो, मदद के लिए पूछने में संकोच न करें।

जो लोग बाहर काम करना पसंद करते हैं, उनके लिए कम तीव्रता वाले व्यायाम से शुरुआत करना सबसे अच्छा है, जबकि इस दौरान दिल की धड़कन, नाड़ी की दर और रक्तचाप पर निगरानी करना बेहद जरूरी होगा। व्यायाम में वृद्धि किसी के लक्षण और इन मापदंडों पर आधारित होनी चाहिए।

लक्षणों को नजरअंदाज न करें

जब आपको लगता है कि कुछ सही नहीं है, तो विस्तृत मूल्यांकन के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करें। उदाहरण के लिए, लगातार सांस लेने के लिए छाती या पल्मनरी फंक्शन टेस्ट के सीटी स्कैन की आवश्यकता हो सकती है। एक रिकवरी प्लान में अक्सर फिजिकल थेरेपी और परामर्श के साथ दवाएं भी शामिल हो सकती हैं।

जहां जोड़ों के दर्द या सिरदर्द जैसे कुछ लक्षणों से राहत पाने के लिए दवाएं हैं, गंध/स्वाद के नुकसान के लिए कोई विशिष्ट इलाज नहीं है। इसके लिए, केवल एक चीज की आवश्यकता है और वो आश्वासन और धैर्य है। इसके लिए किसी झूठे दावे पर भरोसा ना करें। इसके साथ ही स्वयं से इलाज न करें क्योंकि यह अच्छे की बजाय अधिक नुकसान कर सकता है।



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किसे लेनी चाहिए COVID-19 Vaccine और किसे नहीं? 10 जरूरी सवाल

सवाल 1: क्या गर्भवती महिला या स्तनपान कराने वाली मां वैक्सीन ले सकती है?

किसी भी कंपनी ने अभी तक गर्भावस्था में वैक्सीन का परीक्षण नहीं किया है। सीडीसी ने गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को टीका देने के खिलाफ सलाह दी है। ब्रिटेन के अधिकारियों ने महिलाओं को शॉट के बाद दो महीने तक गर्भवती नहीं होने की सलाह दी है। चूंकि अब तक उपलब्ध टीके लाइव वैक्सीन नहीं हैं, इसलिए अनजाने में दिए जाने पर इसमें कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।

12. क्या एक मधुमेह रोगी वैक्सीन ले सकता है?

हां, वास्तव में मधुमेह को इस गंभीर बीमारी के लिए एक जोखिम कारक के रूप में स्थापित किया गया है और सभी मधुमेह रोगियों को प्राथमिकता पर टीका लगाया जाना चाहिए।

13. यदि टीके का विकल्प दिया जाए, तो मुझे कौन सा लेना चाहिए?

सभी टीके समान असर की पेशकश कर रहे हैं, हालांकि स्थानीय प्रतिक्रियाएं अलग हो सकती हैं। जो भी उपलब्ध हो ले लीजिए। सकारात्मक सोचें कि कम से कम आपको दूसरों से पहले टीका लगाया जा रहा है। भारतीय निर्मित टीके हमारी आबादी के लिए अधिक उपयुक्त होंगे क्योंकि वे सस्ते होते हैं और इन्हें 2-8 डिग्री सेल्सियस पर रखा जा सकता है। एमआरएनए टीकों को भंडारण के लिए माइनस तापमान -70 (फाइजर) और -20 (मॉडर्ना) की आवश्यकता होती है, जिसे गर्मियों के महीनों में बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

14. टीका लगने के कितने दिन बाद, मुझमें सुरक्षा विकसित होगी?

दूसरी खुराक के 10 दिन बाद सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा शुरू होती है। असर सभी गंभीरता के खिलाफ 70-90% और अस्पताल में भर्ती होने के खिलाफ 100% है। इसका तत्काल उद्देश्य अस्पताल और मृत्यु दर को रोकना है।

15. टीका कब तक प्रतिरक्षा प्रदान करेगा?

यह एक नया वायरस है, नई तकनीक का टीका है, इसलिए हम नहीं जानते। कुछ वर्षों के लिए इन टीकाकृत आबादी और उनके एंटीबॉडी को देखने के बाद, हम समझ सकेंगे। बूस्टर की आवश्यकता और उनकी जरूरत कब होगी, इन फॉलो अप और गणितीय मॉडलिंग के बाद तय किया जाएगा।

16. किस उम्र के बच्चों को टीका लगाया जा सकता है? क्या खुराक वयस्कों के समान है या कम खुराक दी जानी है?

अब तक किए गए परीक्षण केवल 18 वर्ष से ऊपर के वयस्कों के लिए हुए हैं। अब 12 साल से ऊपर के बच्चों के लिए ट्रायल शुरू हो गए हैं। छोटे बच्चों और शिशुओं पर परीक्षण किए जाने के बाद ही खुराक का फैसला किया जाएगा।

17. क्या यह इम्यूनोकंप्रोमाइज़्ड (जिन पर वायरस असर नहीं डालता) व्यक्तियों को दिया जा सकता है?

एमआरएनए टीका और निष्क्रिय टीके सुरक्षित हैं। एस्ट्राजेनेका और स्पुतनिक-वी एडेनोवायरस वेक्टर वैक्सीन भी सुरक्षित हैं क्योंकि वे वायरल वेक्टर वैक्सीन को गैर-प्रतिरक्षित कर रहे हैं। लाइव वैक्सीन और वायरल वेक्टर वैक्सीन की नकल से बचना होगा।

18. वैक्सीन के दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) क्या होने की उम्मीद है?

परीक्षण की आबादी द्वारा रिपोर्ट किए गए दुष्प्रभावों में ज्यादातर हल्के कोविड जैसे लक्षण हैं, जिनमें कुछ बुखार और थकान, इंजेक्शन की जगह पर दर्द और कठोरता भी बताई गई है। टीके से संबंधित होने के लिए ट्रांसवर्स मायलिटिस और चेहरे की पक्षाघात की रिपोर्ट नहीं मिली है। आम तौर पर, सभी टीके सुरक्षित हैं। हालांकि इन टीकों को रिकॉर्ड समय में बनाया गया है, लेकिन परीक्षण पद्धति और प्रक्रियाओं से समझौता नहीं किया गया है।

19. मुझे अंडे से एलर्जी है। क्या मैं वैक्सीन ले सकता हूं?

इन टीकों के उत्पादन के लिए एग सेल लाइनों का उपयोग नहीं किया जाता है। अंडे से एलर्जी होने पर भी इन्हें सुरक्षित रूप से लिया जा सकता है।

20. मैंने सुना है कि इसमें ***** या बंदर का उत्पाद हैं? मैं शुद्ध शाकाहारी हूं।

इन दिनों निर्मित नए टीके ऐसे किसी भी ऐसे उत्पाद से रहित हैं।



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Sunday, 27 December 2020

त्वचा की समस्याओं को दूर करने के लिये रोज सुबह करें ठंड़े पानी का उपयोग, मिलेंगे कई फायदे

नई दिल्ली। सर्दियों में त्वचा पर रूखापन काफी आता है। यदि आप त्वचा की स्कीन के रूखे पन से बचाना चाहते है तो त्वचा को साफ करने के लिए आप गर्म पानी की जगह ठंडे पानी का उपयोग करना चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि सुबह उठने पर चेहरे पर हल्की सूजन दिखाई देती है। कभी-कभी चेहरे पर लाल छोटे-छोटे दाने नजर आने लगते हैं। कभी कभी तनाव, या नींद पूरी ना होने से भी ये फुंसियां हो सकती हैं। लेकिन यदि आप अपनी स्कीन के पूरी तरह से स्वस्थ रखना चाहते है तो रोज सुबह ठंडे पानी से चेहरे को धोए। सुबह-सुबह चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे आपको स्किन की कई तरह की समस्याओं से छुटकारा दिला सकते हैं। आइए जानते हैं कि ठंडे पानी से चेहरा धोने के क्या फायदे होते हैं।

चेहरे की झुर्रियां कम होती हैं

चेहरे पर आ रही सूजन को खत्म करने के लिए आइस क्यूब का उपयोग काफी अच्छा उपचार माना जाता है ठीक उसी तरह ठंडे पानी से चेहरा धोना भी एक अच्छा टिप्स माना जाता है। ठंडे पानी से चेहरा धोने से त्वचा को जवां बनाती हैं। और चेहरे की झुर्रियां पड़ने की संभावना कम बनी रहती है।

चेहरे पर चमक आती है

चेहरे को ठंडे पानी से धोने से त्वचा बिल्कुल साफ सुधरी हो जाती है। इससे आपको फ्रेश महसूस होगा। ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है जिससे चेहरे पर चमक आती है।

चेहरे के रोम छिद्र बंद होते हैं

ठंडे पानी से चेहरा धोने से खुले रोम छिद्र बंद हो जाते हैं। गर्म पानी से अपना चेहरा धोने के बाद, उन छिद्रों को बंद करने के लिए उस पर थोड़ा ठंडा पानी छिड़कें। आंखों में ठंडे पानी के छींटे डालने से भी त्वचा को ठंडेपन का एहसास होता है।

त्वचा में आती है कसावट

ठंडा पानी से चेहरा धोने से यह सूर्य की किरणों के हानिकारक प्रभावों से छुटकारा दिलाता है। चेहरा में कसावट आती है।ये धूप में खुलने वाले रोमछिद्रों को भी कम करता है।



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दुनिया के देशों को कैसे मिलेगी उचित तरीके से कोरोना वैक्सीन ?

बीजिंग। दुनिया के विभिन्न देश कोरोना वैक्सीन खरीदने में सक्रिय हैं। अब तक ११ अरब से अधिक वैक्सीन का ऑर्डर पूरा हो चुका है, जिसमें करीब 8 अरब टीके मुख्य देशों ने खरीदने के लिए प्रस्तुत किये और अन्य 3.9 अरब आरक्षित हैं या वार्ता में हैं। समय बीतने के चलते यह संख्या तेजी से बढ़ेगी। हालांकि, देखने में ये वैक्सीन दुनिया के अधिकांश
लोगों को कवर कर सकते हैं, लेकिन खेद की बात है कि इसमें अधिकांश वैक्सीन पहले ही यूरोपीय संघ, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा आदि विकसित देशों ने खरीदे हैं। कुछ देशों द्वारा खरीदे गये वैक्सीन की संख्या काफी ज्यादा है, जो पूरी आबादी को 10 बार लगाने के लिए भी पर्याप्त है। लेकिन अन्य देशों के लोगों के लिए वैक्सीन मिलने में और लंबे समय की जरूरत है।

अनुमान है कि अमीर देशों में वर्ष 2021 के वसंत में उच्च जोखिम वाले लोगों को टीका लगाने की संभावना होगी और गर्मियों में सभी लोगों को टीका लगा दिया जाएगा, लेकिन गरीब देशों को शायद एक साल बाद मौका मिलेगा। वैक्सीन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी सरकार अपने नागरिकों को वैक्सीन
लगाने की प्राथमिकता देगी, फिर अन्य देशों को देने पर विचार करेगी। जो देश ज्यादा टीके पाएंगे, वह पहले महामारी को खत्म कर सकेंगे।

अब कोविड-19 महामारी फिर भी पूरी दुनिया में फैल रही है। जल्दी वैक्सीन का अनुसंधान करना और उचित वितरण करना महामारी के फैलाव को रोकने का एकमात्र रास्ता है। इसमें पूरी दुनिया को एकजुट होकर सहयोग करना चाहिए।

कैसे गरीब देशों को भी वैक्सीन मिलने का मौका सुनिश्चित हो सकता है, कोवैक्स ने समाधान का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। कोवैक्स की स्थापना सीईपीआई, जीएवीआई, और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की। उद्देश्य है कि कोरोना टीके का अनुसंधान और उत्पादन को तेज किया जाए और सभी सदस्य देशों को उचित से वैक्सीन मिलने को सुनिश्चित किया जाए।

चीन 8 अक्तूबर को कोवैक्स में शामिल हुआ, जो इसमें शामिल सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि चीन वस्तुगत कार्रवाई से वैक्सीन का उचित वितरण बढ़ाना चाहता है और विकासशील देशों को टीका देगा। चीन विभिन्न देशों के साथ दुनिया में महामारी को खत्म करने में योगदान देना चाहता है, ताकि विभिन्न देशों के लोगों की जान, सुरक्षा और स्वास्थ्य बरकरार रखा जा सके।



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Saturday, 26 December 2020

सर्दी में डैंड्रफ की समस्या से है परेशान? इन 4 नैचुरल तरीकों से करें इसका समाधान

नई दिल्ली: ठंड के मौसम में आपने महसूस किया होगा बाल कुछ ज़्यादा झड़ते हैं। इसकी वजह आखिर क्या होती है, कभी आपने सोचा, शायद नहीं। दरअसल सर्दी के मौसम में बालों की कुछ ज़्यादा देखभाल करना होता है, अगर बालों के प्रति लापरवाही बरती तो बाल रूखे हो सकते हैं और बालों में डैंड्रफ (Natural way to avoid dandruff) हो सकते हैं, जिससे आगे चलकर बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और इससे गंजा बनने के चांस बढ़ जाते हैं। ऐसे में बालों की खास देखभाल ज़रूरी होता है, आइए जानते हैं ठंड में बालों को स्वस्थ और चमकदार कैसे बनाए रखें।

ठंड में तेल मालिश- ठंड में यदि बाल रूखे हो जाते हैं तो हफ्ते में एक दिन गर्म नारियल के तेल या फिर बादाम के तेल से सिर और बालों की मालिश करें। ऐसा करने से सर में ब्लड सर्कुलेशन सुचारू होता है और बालों का रूखापन दूर होता है, जिससे ठंड में भी बाल स्वस्थ और मजबूत रहेंगे।

हेयर कटिंग कराएं- ठंडी के मौसम में बालों को छोटा कराना एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। दरअसल शीतलहर बालों को रूखा और बेजान बना देती हैं, नतीजा यह होता है कि बाल टूटने या झड़ने लगते हैं। लेकिन बालों की ट्रिमिंग से इन सभी परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है।

 

खुला सिर रखने से बचें- कड़ाके की ठंड में बालों को जितना हो सके उतना कवर करके रखें, नहीं तो बाल रूखे और बेजान हो सकते हैं। बालों को जूड़ा, विग्स, वीव्ज स्टाइल में रखें, ज्यादा से ज्यादा सिर पर स्कार्फ का इस्तेमाल करें। लेकिन दोपहर की धूप में बालों को खुला रख कर सेंकने की आदत डालें जो फायदेमंद होगा।

गैप करके सिर को धोएं- ठंड के दिनों में बालों को हर दिन धोने से बचना चाहिए। ऐसा करने से बाल की जड़ों में मौजूद नैचुरल ऑयल सूख जाते हैं जिससे बाल की नमी खत्म हो जाती है, जिससे बाल अस्वस्थ और बेजान हो जाते हैं। इस लिए इस समस्या से बचने के लिए हफ्ते में दो दिन ही बाल धोएं।



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Friday, 25 December 2020

Corona Vaccine और टीकाकरण से जुड़े टॉप 10 सवालों के जवाब

नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी से इस साल की शुरुआत होने के बाद से अब 2020 अपने अंतिम सप्ताह में पहुंच चुका है। दुनिया भर को अब जिस सबसे बड़ी खुशखबरी का इंतजार है, वो कोरोना वायरस की वैक्सीन है। भारत में कोरोना वैक्सीन का पहले चरण में बड़ा अभियान चलाने की तैयारी है, जिसके लिए 30 करोड़ लोगों को चुना गया है। केंद्र सरकार कभी भी टीकाकरण की घोषणा कर सकती है। ऐसे में कोरोना वैक्सीन से जुड़े टॉप 10 सवालों के जवाब जानना बेहद जरूरी हो जाता है।

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प्रश्न 1ः कोरोना वैक्सीन कब उपलब्ध होने की संभावना है?

उत्तरः संभवत: सरकार इसे जनवरी तक ला सकती है और निजी बाजार में यह मार्च तक पहुंच जाएगा।

प्रश्न 2ः क्या हम सभी को इसे लेने की आवश्यकता है?

उत्तरः हां, सभी को इसे लेना चाहिए।

प्रश्न 3ः सबसे पहले किसे मिलेगी कोरोना वैक्सीन?

उत्तरः इसे प्राथमिकता के आधार पर लगाया जाएगा। सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों, फिर फ्रंटलाइन कार्यकर्ता और पैरामेडिकल स्टाफ जिसमें प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस, सेना, सफाईकर्मी आदि को पहले मिल जाएगी। इसके बाद 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग और मधुमेह, रक्तचाप, ट्रांसप्लांट और कीमोथेरेपी जैसी बीमारी वाले लोग इसे प्राप्त करेंगे। और फिर तब स्वस्थ वयस्क, किशोर, बच्चे और सबसे अंतिम में नवजात शिशु का नंबर आएगा।

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प्रश्न 4ः कैसे दी जाएगी वैक्सीन?

उत्तरः सार्वजनिक और निजी केंद्रों के माध्यम से डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों, नर्सों और प्रशिक्षित सहयोगियों द्वारा वैक्सीन लगाई जाएगी।

प्रश्न 5ः वैक्सीन की आवश्यक खुराक और इनमें लगने वाला वक्त कितना है?

उत्तरः इस्तेमाल की गई वैक्सीन के आधार पर 21 दिनों या 28 दिनों के अंतर पर दो खुराक दी जानी हैं।

प्रश्न 6ः क्या होगा अगर मैं केवल एक खुराक लेता हूं?

उत्तरः एक खुराक आपको शायद 60-80 फीसदी का केवल आंशिक संरक्षण देगी और लंबे समय तक नहीं चलेगी। पूर्ण सुरक्षा के लिए आपको अनुशंसित अंतराल पर दो खुराक लेनी चाहिए।

प्रश्न 7ः क्या होगा अगर मैं दूसरी खुराक लेना भूल जाऊं? क्या मुझे फिर से पहली लेनी चाहिए?

उत्तरः बस दूसरी खुराक जल्द से जल्द लें। पहली खुराक को दोहराने की आवश्यकता नहीं है।

इस तरह डाउनलोड करें CoWIN ऐप और कोरोना वैक्सीन के लिए करें प्री-रजिस्टर

प्रश्न 8ः क्या दोनों खुराक समान हैं?

उत्तरः अधिकांश टीकों में एक ही खुराक दो बार दी जाती है। हालांकि, स्पुतनिक-V वैक्सीन में अलग-अलग वेक्टर वायरस के रूप में दोनों खुराक हैं, इसलिए इसे खुराक 1 और 2 के रूप में चिह्नित किया जाएगा। वहीं, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की पहली खुराक आधी खुराक के रूप में आ सकती है।

प्रश्न 9ः क्या आपको कोरोना होने पर भी इसे लेने की आवश्यकता है? ठीक होने के कितने दिनों के बाद लेनी चाहिए?

उत्तरः हां। लेकिन वह प्राथमिकता सूची में अंतिम होगा। आप इसे दूसरों को लेने दे सकते हैं, जिन्हें शायद आपसे ज्यादा जरूरत है। अगर आपमें एंटीबॉडी प्रतिक्रिया विकसित नहीं हुई है तो आपको इसकी आवश्यकता पहले पड़ सकती है।

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प्रश्न 10ः क्या यह एक ऐसे व्यक्ति को दी जा सकती है जिसे कोविड के इलाज के रूप में प्लाज्मा मिला हो?

उत्तरः डोनर प्लाज्मा में एंटी कोविड-19 एंटीबॉडी होते हैं और वे टीके के लिए इम्यून रिस्पॉन्स को दबा सकते हैं। जैसे कि जो लोग कोविड-19 से उबर चुके हैं, उन्हें शुरुआती चरणों में वैक्सीन की आवश्यकता नहीं हो सकती है।

(नोटः उपरोक्त जानकारी विभिन्न रिपोर्टों, चिकित्सकों और सरकार द्वारा वक्त-वक्त पर जारी सूचनाओं के आधार पर है।)



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Thursday, 24 December 2020

CORONA VACCINE : डरें नहीं...कोरोना से छह माह से ज्यादा बचाएगी वैक्सीन

वॉशिंगटन. कोरोना वायरस संक्रमण के बाद स्वस्थ हुए लोगों के शरीर में एंटीबॉडीज बनने से छह माह से अधिक समय तक दोबारा संक्रमण की आशंका नहीं रहती है।

दोबारा संक्रमण का खतरा बहुत कम
अमरीकी राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. नेड शार्पलेस ने कहा कि संक्रमण के बाद जिन लोगों के शरीर में एंटीबॉडी मौजूद हैं, उनमें दोबारा संक्रमण का खतरा बहुत कम है।
पहला अध्ययन : 0.3 से 3 फीसदी संक्रमित
पहला अध्ययन अमरीका के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में 30 लाख से अधिक लोगों पर हुआ। एंटीबॉडी की जांच के लिए नमूने लिए गए। इनमें से 0.3 फीसदी ऐसे लोग संक्रमित पाए गए, जिनमें पहले वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी थे। 3 फीसदी ऐसे लोग संक्रमित पाए गए जिनमें एंटीबॉडी नहीं थे।
दूसरा अध्ययन : 0.16 से 1.96 फीसदी संक्रमित
दूसरा अध्ययन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स के 12,500 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों पर किया गया। एंटीबॉडी के लिए रक्त की जांच की गई। इनमें से 1,265 लोगों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी थे। छह माह बाद दो लोग संक्रमित हुए। शेष 11,364 कर्मियों में शुरुआत में एंटीबॉडी नहीं थे, लेकिन छह माह बाद सिर्फ 223 संक्रमित हुए।



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पीरियड्स से जुड़ी वो बातें जो महिलाओं के लिए बनी है मुसीबत, नही कर सकती ये काम

नई दिल्ली। इंसान से लेकर जानवरों तक में माहवारी आना एक नेचुरल प्रक्रिया है, जिससे महिलाओं को हर महीने इस दर्द भरी मुश्किसो से गुजरना पड़ता है। लेकिन ससे भी बड़कर दूसरा दर्द होता है। हमारे समाज के द्वारा बने गए वो नियम जो पीरियड्स के दौरान हमें मानने पड़ते है। जिसे आज से नही बल्कि कई जन्मों से लोग इसका पालन करते रहे है। लेकिन पुरानें समय में बने इन नियमों के पीछे भी एक अलग बात छुपी हुई है।, जिसके बारे में आज हम आपको बताएंगे।

पूजा ना करना

महावारी होने के दौरान महिलाओं को पूजा स्थल पर जाने की मनाही होती है। कहा जाता है कि कि इस दौरान मंदिर में जाने या पूजा करने से उनका प्रकोप बरसता है इसलिए पीरियड्स में महिलाओं को पूजा करने की मनाही होती है।

खाना बनाना
पीरियड्स में लड़कियों को किचन जाने की मनाही होती है। पुराने लोगों की धारणा है कि ऐसे समय में खाना बनाने से वह दूषित हो जाता है और जहर फैल सकता है। लेकिन इसके पीछे का तथ्य यह है कि पहले के जमाने प्रोटेक्शन सही तरीके ना होने की वजह से महिलाओं को शारीरिक तकलीफ काफी होती है। इससे उनको कुछ दिन का अराम मिल जाता था।

जमीन पर सोना
पहले के समय में महावारी के दौरान महिलाओं को जमीन पर सोने को कहा जाता था। इसके पीछे का कारण यह है कि यह प्रथा शायद इसलिए बनाई गई थी ताकि कपड़ों पर दाग धब्बे लगने के खतरे से बचा जा सके।

अचार को छूना गलत
माना जाता है कि पीरियड्स में आचार को छूने से वो खराब हो जाता है क्योंकि उसमें कीटाणु फैल जाते हैं। मगर, इसके पीछे का कारण यह है कि पीरियड्स के दौरान हार्मोन ज्यादा सक्रिय होते हैं। जिसके चलते मसालेदार चीजे खराब हो जाती है। खाने से उनके संतुलन में गड़बड़ हो सकती है

बाल धोना
पीरियड्स में बाल धोने के लिए मना किया जाता है। इसके पीछ का तर्क यह है कि इस दौरान अंडे टूटते हैं और उसमें एकत्रित खून शरीर से बाहर निकल जाता है। ऐसे में अगर बाल धोने से बॉडी टेम्प्रेचर ठंडा हो जाएगा और ब्लीडिंग सही नहीं होगी। हालांकि पीरियड्स के 3 दिनों बाद आप बाल भी धो सकती हैं।

पार्टनर के साथ संबंध बनाना
कुछ लोगों का मानना है कि अगर आप इस दौरान पति को छुने, गले या हाथ लगाने से वो दूषित हो जाएगा जबकि यह सच नहीं है। वैज्ञानिकों की मानें तो इस दौरान रिलेशन बनाने से एंडोर्फिन और स्ट्रेस बस्टिंग केमिकल्स बनते हैं, जिससे क्रैम्प्स से राहत मिलती है।



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Corona Care: पास-पास सो रहे हैं तो विपरीत दिशा में रखें सिर

इंपीरियल कॉलेज, लंदन के एक अध्ययन के अनुसार ऑफिस की तुलना में घरों में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसकी वजह बिना लक्षण वाले मरीज हैं जो तेजी से संक्रमण को फैला रहे हैं। जानते हैं संक्रमण को कम करने के लिए कुछ जरूरी बातें-
बा हर से घर आ रहे हैं तो जूते-चप्पल बाहर निकाल दें। स्वेटर-कोट पहने हैं तो इनको धूप में रख दें। सीधे बच्चों को न छूएं। पहले हाथ-पैरों और चेहरे को साबुन से धोएं। मास्क भी धो दें। अगर एक साथ बैठकर खाते तो थोड़ी दूरी बना लें। खाते समय भी एयरोसोल्स निकलते हैं। बाथरूम से ब्रश करते हुए लोग खांसते हैं। ऐसे में कोशिश करें कि बाथरूम में पंखा चला लें या फिर आधा घंटा बाद ही दूसरा कोई इस्तेमाल में लें। कोशिश करें कि सभी अलग सोएं। अगर ऐसा नहीं हो पा रहा है तो सोते समय एक दूसरे का सिर विपरीत दिशा में होना चाहिए। कंबल-रजाई साझा करने से बचें। कोशिश करें कि कंबल-रजाई को रोज थोड़ी देर धूप में डाल लें। इससे भी कीटाणु मर जाते हैं।
सफाई के समय
अगर घर में काम करने के लिए किसी को बुलाते है तो विशेष सावधानी बरतें। आते ही उससे पूछें कि उसे कोई दिक्कत तो नहीं है। अगर है तो उसे छुट्टी दे दें। सबसे पहले हाथ को साबुन धुलाएं। उसे अपने घर का मास्क दें। रोज मास्क धुलवा दिया करें।
घर के मुखिया को चाहिए कि रोज शाम को परिजनों से पूछें कि उन्हें कोई लक्षण या शरीर में बदलाव तो नहीं हो रहा है। यदि शरीर में दर्द, थकान और ऊर्जा की कमी महसूस हो रही तो उस व्यक्ति को एक अलग कमरे में आइसोलेट कर दें।
कु छ लोग लक्षण आने के बाद भी अनदेखी करते हैं। आप ऐसा न करें। कुछ लोग कहते हैं कि मुझे तो हर साल ही जुकाम होता है या फिर ठंडे पानी से नहाने से गले में खराश या बुखार हो जाता है। कोविड-19 की वजह से इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से परामर्श लें।



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Corona Update: बच्चों में बुखार के साथ शरीर पर रेशेज कोरोना के बाद वाले लक्षण

कोविड के बाद से इस तरह के मरीजों की संख्या हॉस्पिटल्स में बढ़ गई है। यह मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम इन चाइल्ड (एमआइएस-सी) हो सकता है।
एमआइएस-सी लक्षण
पिछले 24 घंटे या इससे अधिक समय से बुखार, उल्टी, दस्त, शरीर पर रेशेज, पेट में दर्द और थकान रहती है। बच्चों में ये सभी लक्षण कोरोना के बाद दिखाई देते हैं। इसकी जांच कोविड आरटी पीसीआर टेस्ट के साथ सीबीसी, लिवर फंग्शन टेस्ट, ईएसआर, ईको आदि जांचें की जाती है। इसमें तत्काल इलाज लें।
हृदय पर भी होता है असर
ऐसे बच्चों का इलाज तीन-पांच दिन तक हॉस्पिटल में भर्ती कर किया जाता है। इलाज में देरी होती है तो बच्चों के हृदय पर असर पड़ सकता है। धमनियों में सूजन से हार्ट फेल्योर की आशंका हो जाती है। लिवर और किडनी पर भी असर पड़ता है।
इनका रखें विशेष ध्यान
छोटे बच्चों में कोरोना के कम ही लक्षण दिखते हैं। अगर फैमिली में पिछले एक-दो माह में किसी को कोरोना हुआ है तो भी बच्चों की एक माह तक मॉनिटरिंग करें। लक्षण दिखते हैं तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।



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खाली पेट चाय पीने से घटता मेटाबॉलिज्म, बढ़ती है हार्ट रेट

सुबह खाली पेट बेड टी या कॉफी पीना सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और ब्रीदिंग रेट पर असर पड़ता है। शरीर का मेटाबॉलिज्म कम होने से गैस आदि की परेशानी हो सकती है।
चाय या कॉफी के साथ दिन की शुरुआत करने से ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। पूरे दिन एसिडिटी की समस्या हो सकती है। इससे भूख भी खत्म हो जाती है। इस तरह लंबे समय तक भूखे रहने से बॉडी में कैलोरी की कमी होने से चक्कर आना जैसी समस्या हो सकती है। बेड टी पीने से मेटाबॉलिज्म धीमा होने के साथ ही बॉयलॉजिकल क्लॉक में गड़बड़ी हो सकती है।
यह हो सकता है विकल्प
दिन की शुरुआत गुनगुने पानी के करें। उठने के दो घंटे में कुछ खाना चाहिए। खाली पेट घर से बाहर न निकलें। नाश्ते में पोहा, परांठा, इडली आदि ले सकते हैं। सुबह ग्रीन टी लें। खाली पेट गुनगुना पानी पीना चाहिए। इससे पेट में कब्ज आदि की समस्या में भी आराम मिलता है।



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प्रेगनेंसी के दौरान हर महिलाओं को होती है ये 5 बड़ी समस्या, जान लें बचाव के उपाय

नई दिल्ली। शादी के बाद मां बनना हर महिलाओं का पहला सपना होता है लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान खानपान से लेकर हर छोटी चीजों पर ध्यान रखना काफी जरूरी होता है। क्योंकि इन दिनों शरीर में तेजी से हॉर्मोन्स परिवर्तन होते है। जिससे महिलाओं में चिड़चापन, भूख ना लगना उल्टी का होना, मूड़ स्विंग, बाल झड़ना, जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नही इस दौरान डायबिटीज, यूटीआई जैसी समस्याओं के होने की संभावना भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में हर महिलाओं को इससे बचाव के उपाय पता होने चाहिए। चलिए आज हम आपको प्रेगनेंसी में होने वाली 5 कॉमन प्रॉब्लम्स और उससे बचाव करने के टिप्स बताते हैं...

डायबिटीज

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं में सही खानपान ना होने से जेस्टेशनल डायबिटीज के खतरे बढ़ जाते है, जिसका सीधा असर बच्चे पर पड़ता है जिससे नवजात बच्चे में कुछ जन्मजात बीमारियां के होन की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में महीलाओं को चाहिए कि वह आसे समय में आलू, चावल, जंक फूड, मीठी चीजों का सेवन ना करें। और हर 3 महीने में OGTT (ओरल ग्लूकोस टोलरेंस टेस्ट) करवाएं।

यूटीआई

शरीर में प्रोजेस्ट्रेरोन की मात्रा बढ़ने की वजह से महिलाओं को इस समय यूटीआई इंफेक्शन का खतरा भी रहता है, जिसका सीधा असर हमारी किडनी पर पड़ता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए महिलाओं को चाहिए कि वो ज्यादा से जड्यादा मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें और सही डाइट लें।

प्री-एक्लेमप्सिया

शुरुआत के समय में कुछ महिलाओं को बीपी के बढ़ने समस्याए होने लगती है। जिसके कारण यूरिन के रास्ते प्रोटीन निकल जाता है। इसे प्री-एक्लेमप्सिया कहा जाता है, जो काफी गंभीर स्थिति है। इसके कारण चेहरे पर सूजन, पैरों में दर्द, ब्लड सर्कुलेशन में दिक्कत और शिशु के विकास में बाधा आने लगती है। ऐसे में महिलाएं रेगुलर चेकअप करवाती रहें और कोई भी दिक्कत आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

पैरों और कमर में दर्द

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं में पैर दर्द , कमर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, सूजन और खिंचाव के कारण उठना-बैठना में मुश्किले आने लगती है। इसके बचने के लिए ज्यादा आराम करें और भारी सामान उठाने से बचें। इसके साथ ही सोने की पोजिशन भी सही रखे।

एनीमिया

प्रेगनेंसी के दौरान सही खानपान ना होने से महिलाओं के शरीर में खून की कमी होने लगती है। इससे ना सिर्फ बच्चे की ग्रोथ रूकती आती है बल्कि यह गर्भपात का कारण भी बन सकता है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप डाइट में अनार, चुकंदर, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंजीर, खजूर जैसे आयरन युक्त चीजें खाएं, ताकि शरीर में खून की कमी ना हो।



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कोरोना ही नहीं, इन बीमारियों में भी घटती है सूंघने की क्षमता

कोरोना के चलते आजकल सूंघने की क्षमता कम हो रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कोरोना के अलावा दूसरी बीमारियां भी हैं, जिसमें सूंघने की क्षमता प्रभावित होती है। यदि लंबे समय तक गंध नहीं आ रही तो इसके पीछे न्यूरोडिजनरेटिव डिजीज जैसे डिमेंशिया, अल्जाइमर्स आदि के लक्षण हो सकते हैं।
डिमेंशिया का संकेत
गंध का अहसास नहीं होने के पीछे सर्दी-जुकाम, वायरल इन्फेक्शन, रायनाइटिस, कुछ दवाइयों का दुष्प्रभाव आदि कारण हो सकते हैं। कई बार ब्रेन ट्यूमर की वजह से भी सूंघने की शक्ति कमजोर होने लगती है। यदि लंबे समय तक गंध का अहसास नहीं हो रहा है तो यह डिमेंशिया का शुरुआती लक्षण हो सकता है। न्यूरोडिजनरेटिव डिजीज अल्जाइमर्स और पार्किंसंस में भी गंध जा सकती है।
उम्र बढऩे पर जोखिम
उम्र बढऩे पर इंद्रियों की शक्ति कमजोर होने के कारण सूंघने की क्षमता कमजोर हो सकती है। जुकाम-खांसी और कफ के कारण एनोस्मिया हो सकता है। इससे सूंघने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।
आधा चम्मच मुलैठी पाउडर देगा मजबूती
सूंघने की क्षमता के नुकसान को रोकने के लिए जरूरी है कि न्यूरोडिजनरेटिव रोगों की आशंका कम की जाए। इसके लिए सबसे बेहतर होगा कि शुरुआत से ही स्वस्थ दिनचर्या और पौष्टिक आहार का प्रयोग किया जाए। साथ ही विशेषज्ञ की सलाह से शंखपुष्पी, गिलोय, अश्वगंधा, ब्राह्मी, वच, जटामांसी, ब्राह्मी वटी आदि का प्रयोग कर सकते हैं। नियमित दूध या पानी के साथ आधा चम्मच मुलैठी लें। गिलोय का रस भी मानसिक स्वास्थ्य में लाभ देगा।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए रोज खाएं भीगे बादाम और अखरोट
नियमित सात-आठ बादाम और तीन-चार अखरोट को भिगोकर प्रयोग करें। इससे याद्दाश्त और अन्य तरह की मानसिक समस्याओं की आशंका को कम किया जा सकता है। इसके अलावा देसी घी की एक बूंद नाक में डाल सकते हैं। देसी घी का नियमित प्रयोग भी मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। ब्रह्म रसायन जैसे च्यवनप्राश आदि का प्रयोग करें। नियमित आहार में आंवला और हरड़ का प्रयोग भी न्यूरोडिजनरेटिव रोगों की आशंका कम करेगा।
दिमागी सक्रियता के लिए जरूरी है नियमित व्यायाम
उम्र के साथ होने वाली मानसिक समस्याएं कहीं न कहीं सूंघने की क्षमता को भी प्रभावित करती हैंं। इनकी आशंका को कम करने के लिए जरूरी है कि नियमित कुछ ऐसे व्यायाम किए जाएं, जो दिमागी सक्रियता को बढ़ाते हों। इसमें पढऩा, पहेलियों को हल करना, याद्दाश्त वाले खेल खेलना आदि एक्टिविटीज को शामिल किया जा सकता है।



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Wednesday, 23 December 2020

Health Tips: खाली पेट लहसुन खाने से ज्यादा फायदा होता है

खाली पेट लहसुन खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है। इससे न केवल वजन नियंत्रित रहता है बल्कि डिप्रेशन, हाई बीपी और डायबिटीज में भी फायदा मिलता है। मूड अच्छा होता है। एंटीबायोटिक, एंटीइंफ्लेमेटरी गुण और भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडें्टस होने से यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाता है। इससे इम्युनिटी भी बढ़ती है। चार-पांच कलियां रोज खा सकते हैं। ज्यादा खाने से एसिडिटी हो सकती है। खाली पेट लहसुन खाने से ज्यादा फायदा होता है.
बुखार-एलर्जी में बैंगन खाने से बढ़ती दिक्कत
कई बीमारियों में विशेषज्ञ बैंगन न खाने की सलाह देते हैं। इसमें बुखार, एलर्जी, खुजली, खून की कमी, पथरी और लो ब्लड प्रेशर आदि बीमारियां शामिल हैं। ऑक्जलेट की मात्रा अधिक होने से पथरी की परेशानी बढ़ सकती है। बैंगन की तासीर गर्म होती है, इसलिए बुखार में इसे खाने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है। गर्भावस्था में भी इसको खाने से बचना चाहिए क्योंकि यह एसिडिटी का कारण बनता है।



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पीलिया या पेट की समस्या है तो रोज दो गाजर खाएं, बीपी भी नियंत्रित रहता

आयुर्वेद में तो गाजर को कई मर्जों की दवा बताया गया है। इसमें भरपूर मात्रा में कैरोटीनॉइड, पोटैशियम, विटामिन ए और ई आदि पोषक तत्त्व मिलते हैं जो इम्युनिटी बढ़ाकर बीमारियों से बचाते हैं। कैरोटीनॉइड और बीटा कैरोटीन एंटीऑक्सीडेंट्स हैं जो प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर से भी बचाते हैं। इसी कारण शरीर में कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है जिससे हृदय के रोग नहीं होते हैं। जिनकी धडक़न तेज रहती है उन्हें गाजर को भूनकर खाना चाहिए। इसी तरह जिनको पीलिया या पेट संबंधी परेशानी रहती है उन्हें रोज दो गाजर कच्ची खाना चाहिए। इससे पेट साफ होता है। इसमें मौजूद पोटैशियम बीपी को नियंत्रित रखता है। गठिया, आंखों के रोग, एनीमिया और अनियमित माहवारी की परेशानी है तो भी रोज गाजर खाना चाहिए। गाजर खाने से त्वचा संबंधी परेशानी भी दूर होती है।
गाजर को कई तरह से खा सकते हैं जैसे कच्चा सलाद में, सब्जी, हलवा या फिर खीर भी बनाकर खा सकते हैं।



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Tuesday, 22 December 2020

महिलाओं में इन कारणों से भी होती थकान

जवाब: इतनी कम उम्र में सामान्यत: थकान नहीं होनी चाहिए। अगर हो रही है तो डायबिटीज, थायरॉइड और हीमोग्लोबिन की जांच करवाएं। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में खून कम रहता और थायरॉइड की समस्या अधिक होती है। इन तीन कारणों से भी थकान हो सकती है।
हरी सब्जियां ज्यादा लें
सर्दी के दिनों में हरी पत्तेदार सब्जियां ज्यादा मिलती हैं। आप पालक, फलियां, आंवला, गाजर, चुकंदर, मूली, हरा मटर, लौकी आदि सब्जियां ज्यादा मात्रा में खाएं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स ज्यादा मिलते हैं। इनसे न केवल थकान दूर होगी बल्कि खून भी बढ़ता है। सर्दी में भी लिक्विड डाइट अधिक लें।
कई बार देर रात में सोने से भी ऐसी परेशानी हो सकती है। सही दिनचर्या का पालन करें। रात में जल्दी सोएं और सुबह उठें।
रात में गैजेट्स...
रात में सोने के एक घंटा पहले से मोबाइल-कंप्यूटर से दूरी बना लें। ज्यादा देर तक इन्हें देखने से आंखों में भारीपन और रात में नींद भी नहीं आती है।



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Pregnancy care: गर्भावस्था में दर्द होने पर पेन किलर नहीं, ये करें

प्रेग्नेंसी में सिर, पेट या पैरों में दर्द के लिए दर्द निवारक एक गोली लेने मात्र से गर्भस्थ शिशु को नुकसान हो सकता है। शिशु का डीएनए तक क्षतिग्रस्त हो सकता है। उसमें नपुंसकता भी हो सकती है।
दर्द की गोली से नुकसान
प्रेग्नेंसी में पेन किलर लेने से भू्रण का विकास रूक सकता है। चौथे और छठे महीने में दर्द निवारक गोली लेने से कई गंभीर बीमारियों की आशंका सात गुना तक बढ़ जाती है।
एसिडिटी में दर्द होता है
गर्भावस्था में एसिडिटी से पेट या सिर में दर्द अधिक होता है। सुपाच्य भोजन करें। अगर ज्यादा समस्या हो रही है तो आधा गिलास ठंडा दूध बिना चीनी के पिएं। आराम मिलेगा। ज्यादा मिर्च-मसाले वाली चीजें खाने से बचें। अगर चटपटा खाने का मन करे तो बाजार वाली चीजों को घर में ही तैयार करें। मैदा-बेसन वाले फूड खाने से बचें।
हार्मोनल दवाइयों से भी सिरदर्द
अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी होने पर किसी अनहोनी से बचने के लिए डॉक्टर्स हार्मोनल दवाइयां भी देते हैं। कई बार इन दवाइयों से भी एसिडिटी और सिर में दर्द की समस्या हो सकती है। ऐसी दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लें। वहीं वजन बढऩे से पैरों में दर्द होने लगता है। शाम को गुनगुने तेल से पैरों की मालिश करें। मालिश हमेशा नीचे से ऊपर की ओर करें। हल्के गुनगुने पानी में भी पैरों को थोड़ी देर रखने से राहत मिलती है। यूटीआइ की दिक्कत से पेट के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है। डॉक्टर को दिखाएं।
आंखों मेें भी दर्द
हार्मोनल बदलाव से प्रेग्नेंसी में आंखों की परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में सिर दर्द हो सकता है। आंखों की जांच करवाएं। इससे भी आराम मिल सकता है।



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Winter Care: सर्दी में नमी से प्रदूषण के कण सतह से 5-6 फीट तक नीचे आ जाते, ब्रॉन्काइटिस का खतरा रहता

सर्दी में नमी के कारण हवा में मौजूद प्रदूषण के कण भारी होकर जमीन की सतह से 5-6 फीट पर आ जाते हैं। जब व्यक्ति चलता या टहलता है तो ये कण सीधे सांस से फेफड़े में पहुंचकर ब्रॉन्काइटिस आदि बीमारी करते हैं। गले में सूजन इस बीमारी के मुख्य लक्षण हैं।
सीने में दर्द की समस्या
इसमें खांसी के साथ पीला-हरा बलगम व हल्का बुखार आ सकता है। मरीज सीने में दर्द की शिकायत भी करता है। अगर दो-तीन दिनों में घरेलू उपाय से आराम नहीं मिले तो इसकी जांच कराकर इलाज लें। संक्रमण बढऩे पर निमोनिया हो सकता है।
घर पहुंचकर गरारे करें
मास्क नियमित लगाएं। यह प्रदूषण से
भी बचाता है। सुबह-शाम गुनगुने नमक के पानी से गरारे करें। शाम को बाहर से घर पहुंचते ही गरारे करें। यह दूषित तत्त्वों और बलगम को बाहर निकल देता है। शुद्ध सरसों तेल की २-२ बूंद सुबह-शाम नाक में लगाएं।
होम्योपैथी भी कारगर
एकोनाइट, बेलोडोना, ब्रायोनिया, कालीबाइक्रोम, फॉस्फोरस आदि होम्योपैथिक दवाइयां डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं। यह न केवल प्रदूषण के असर को कम करती हैं बल्कि फेफड़ों के संक्रमण में भी आराम देती हैं।



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Winter Care: सर्दी के मौसम में एलर्जी से बचाते ये आसन-प्राणायाम

आंकड़ों की बात करें तो देश में हर चौथा व्यक्ति किसी न किसी एलर्जी से ग्रसित है। जब भी मौसम बदलता है तो इन मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। सर्दी में यह दिक्कत थोड़ी बढ़ जाती है। इसमें कई योग-प्राणायाम काफी लाभकारी हैं।
एलर्जी के लक्षण
छीकें आना, नाक बहना, आंखों से पानी आना या खुजली होना, नाक बंद होना, गले या कान के छिद्रों में खुजली, कान बंद होना (कान में द्रव भरना), बलगम आना, होंठ, जीभ, आंखों या चेहरे पर सूजन पेट में दर्द, मतली या उल्टी, दस्त, लाल या रुखी त्वचा होना आदि।
सूर्य नमस्कार
इस आसन को रोज 10-25 बार तक कर सकते हंै। इससे फेफड़ों में अधिक ऑक्सीजन पहुंचती है। नई कोशिकाएं बनती हैं। इम्युनिटी बढ़ती है। शरीर को ऊर्जा भरपूर मिलती है। तनाव-अवसाद कम होता है। श्वास नलियां खुलती हैं जिससे एलर्जी में भी बचाव होता है।
अद्र्धचक्रासन
कंधे, गर्दन और बांहों को मजबूत करता है। स्पाइनल कॉड और जोड़ों की समस्याओं में राहत देता है। सांस के रोगों में इसको करने से आराम मिलता है। इससे फेफड़े खुलते हैं। एलर्जी में भी लाभ पहुंचाता है लेकिन जिनको कमर से संबंधी कोई परेशानी है, क्षमता अनुसार करें।
उष्ट्रासन
फेफड़े मजबूत करता है जिससे इम्युनिटी बढ़ती है। एलर्जी से बचाव होता है। शरीर, घुटने और पीठ दर्द में कारगर, साइटिका में आराम और लंबाई बढ़ाने के लिए कारगर आसन है। इसको 5-7 बार रोज करें। कमर और स्पाइन में परेशानी है तो इस आसन को न करें।
ताड़ासन
यह आसन हर कोई कर सकता है। इसको करने से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। पाचन शक्ति को ठीक रखने के साथ ही एलर्जी, अस्थमा से छुटकारा दिलाने के लिए इस आसन को करना चाहिए। जिन्हें तनाव, अवसाद या दिमाग से संबंधी रोग है उन्हें भी यह आसन करना चाहिए। कोई भी आसन विशेषज्ञ से सीखने के बाद ही करें।
ये प्राणायाम भी हैं कारगर
एलर्जी से बचने के लिए सभी प्राणायाम जैसे भस्त्रिका, अनुलोम-विलोम, कपालभाति और उज्जयी प्राणायाम कारगर हैं। इनसे ऑक्सीजन का प्रवाह सही होता और फेफड़ों को मजबूती मिलती है। एलर्जी से बचाव होता है।



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Corona Update: स्टेरॉइड वाले मरीज ठीक होने के बाद ज्यादा आराम करें

क्यों रहता अधिक रिस्क
स्टेरॉइड दवा से ठीक हुए कोविड के मरीजों में रिकवरी के बाद भी कई तरह की समस्याएं हो रही हैं। कोरोना से कोशिकाओं को नुकसान होता है जबकि स्टेरॉइड से इम्युनिटी घट जाती है। इसके कुछ मरीजों में रिकवरी के बाद भी निमोनिया, ब्लड क्लॉटिंग, अचानक से शुगर लेवल बढऩा, वायरल या यूरिन इंफेक्शन की समस्या देखी जा रही है। ऐसे मरीजों को सलाह दी जाती है कि जिनको कम दिनों तक स्टेरॉइड दी गई है उन्हें दो सप्ताह और जिन्हें लंबे समय तक स्टेरॉइड दी गई थी वे कम से कम चार सप्ताह तक आराम के बाद ही अपना काम शुरू करें।
फ्लू के टीके लगवाएं
ऐसे मरीजों को फ्लू और निमोनिया आदि के टीके लगवाने चाहिए। इससे बचाव होता है। मरीज हैल्दी डाइट में प्रोटीन और मौसमी-फल सब्जियां ज्यादा लें। हो सके तो लिक्विड डाइट भी ज्यादा लें। सूप पिएं। डॉक्टर की सलाह से मल्टीविटामिन्स भी लेते रहें। शुरू में ज्यादा न टहलें। हल्का-फुल्का व्यायाम जरूर करते रहें।
छोटे बच्चों
में दिख रहे नए लक्षण
छो टे बच्चों में कोरोना के चार सप्ताह बाद हल्का बुखार और लाल रंग के रेशेज पड़ रहे हैं। लेकिन जांच में बुखार के कारण का पता नहीं चल रहा है। इसमें अच्छी बात यह है कि बच्चे को दवा से आराम मिल जाता है।
दो माह बाद तक डॉक्टर की सलाह से जांचें कराएं
गंभीर मरीज जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं उन्हें दो माह तक अपने डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए। डॉक्टर कुछ जांचें ठीक होने के बाद भी करवाते हैं। इसमें कुछ जांचें एक माह के बाद होती हैं जबकि चेस्ट का एक्सरे और सीटी स्कैन दो माह बाद भी कराना जरूरी होता है। जिन मरीजों को इलाज में स्टेरॉइड दी गई है वे आवश्यक रूप से इन जांचों को डॉक्टर की सलाह से करवाएं। इसके साथ ही बाहर का खाना कुछ माह तक खाने से बचें। बाजार के फूड में न केवल मिर्च-मसाला अधिक होता है बल्कि उनसे संक्रमण हो सकता है।



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Winter care: सर्दी में सेहत संग वजन भी नियंत्रित रखते ये 4 अनाज

जानते हैं उन चार अनाजों के बारे में जो सर्दी में ज्यादा पसंद किए जाते हैं। यह न केवल अधिक पौष्टिक होते हैं बल्कि वजन को भी नियंत्रित रखते हैं।
मांसपेशियों की कमजोरी व थकान दूर करता ज्वार
इसमें भरपूर नियासिन, राइबोफ्लैविन, थायामीन जैसे विटामिन्स के साथ कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, तांबा, फास्फोरस और पोटैशियम होता है। प्रोटीन और फाइबर अधिक होने के साथ ग्लूटेन फ्री भी होता है, जिन्हें गेहूं से एलर्जी है वे भी खा सकते हैं। काब्र्स बहुत कम होने से वजन भी नहीं बढ़ता है। मैग्नीशियम और पोटैशियम अधिक होने से मांसपेशियों की दिक्कत, थकान और कड़ापन की समस्या में आराम मिलता है। शरीर में जलन होता है तो उसमें भी राहत देता है। ज्वार के दानों की राख बनाकर मंजन करने से दांत दर्द और मसूड़ों के सूजन और फाइबर से कब्ज और कैल्शियम अधिक होने से जोड़ों और हड्डियों के रोगों में आराम मिलता है।
कैसे खाएं : ज्वार की रोटी, चीला, गुड़ के साथ हलवा या लड्डू बना सकते हैं। राबड़ी पीने से डायबिटीज के रोगियों में थकान दूर होगी।
कौन न खाएं : जिन्हें पथरी की समस्या रहती है उन्हें ज्वार कम खाना चाहिए। सप्ताह में एक बार खाएं।
बड़ों ही नहीं बच्चों के लिए भी सुपर फूड है रागी
इसमें फाइबर, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, विटामिन बी1, बी2 और कई अन्य पोषक तत्त्व होते हैं। बच्चों और स्तनपान कराने वाले महिलाओं के लिए ज्यादा फायेदमंद है। अन्य अनाजों की तुलना में कैल्शियम और प्रोटीन बहुत ज्यादा होता है। काब्र्स कम होने से वजन नहीं बढ़ता है। हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों की समस्याओं में इसे खाना चाहिए। मानसिक समस्याओं जैसे तनाव, अवसाद और ब्लड प्रेशर में रागी काफी फायदेमंद होती है।
कैसे खाएं : इसे रोटी, हलवा, सूप और चीला के रूप में खा सकते हैं।
कौन न खाएं : जिन्हें पथरी और थायरॉइड की समस्या है वे कम खाएं। थायरॉइड रोगी में कैल्शियम वाली चीजें खाने से आयोडीन कम होता है। इससे थायरॉइड का स्तर बढ़ जाता है।
गुड़ के साथ उबला बाजरा खाने से खून बढ़ता
बाजरे में आयरन, कैल्शियम, जस्ता, मैग्नीशियम और पोटैशियम अधिक मात्रा में मिलता है। यह कॉम्पलेक्स काब्र्स होता है, इसे वे लोग भी खा सकते जिनका वजन ज्यादा है। फाइबर्स ज्यादा होने से कब्ज और पेट की बीमारियों से बचाव करता है। आंतों को साफ कर शरीर को ऊर्जा देता है। बाजरे को रात में भिगो दें और सुबह उबालकर गुड़ के साथ खाएं। इससे खून बढ़ता है। कैल्शियम हड्डियों-मांसपेशियों के लिए अच्छा, अनियमित माहवारी में महिलाएं बाजरे की रोटी, घी और गुड़ खाएं।
कैसे खाएं : रोटी, राबड़ी, हलवा, खिचड़ी या उबालकर गुड़ के साथ खा सकते हैं। अंकुरित भी खा सकते हैं।
कौन न खाएं : जिन्हें पाचन संबंधी परेशानी और गर्मी में खाने से बचें।
संक्रमण से बचाता और जल्द घाव भरता है मक्का
इसमें कैरोटीनॉयड्स, मैग्नीशियम, आयरन, फोलिक एसिड, बीटा-कैरोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, बायोफ्लेवोनॉइड्स, कई प्रकार के विटामिन्स और फाइबर होते हैं, जो शरीर के विकास के लिए जरूरी हैं। इसमें ग्लूटेन भी नहीं होता है। ज्यादा कैल्शियम होने से हड्डियों और हार्ट के रोगियों के लिए फायदेमंद है। यह शरीर को संक्रमण से बचाता, हीलिंग में भी मदद करता है। वजन नियंत्रित रखने के साथ डायबिटीज के रोगी भी इसे खा सकते हैं। यह नई कोशिकाओं की मरम्मत करने का काम करता है। गठिया रोग में आराम देता है। यह जोड़ों में यूरिक एसिड को जमा नहीं होने देता है।
कैसे खाएं : रोटी, हलवा, सूप, उबला हुआ मक्का, भुट्टा, सब्जी भी बनती है। इसमें मैग्नीशियम अधिक होता, इसके भुट्टे के डंठल की राख से मंजन करने से दांतों का पीलापन कम होता है।
कौन न खाएं : यह भारी होता है। जिनको गैस की समस्या है वे कम खाएं। इसेे दिन में ही खाना चाहिए।



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प्याज शरीर में कैल्शियम बढ़ता, पाचन ठीक रखता

इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीसेप्टिक व एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। सर्दी में खाने की सलाह दी जाती है। खांसी, कान का दर्द, बुखार और त्वचा की समस्याओं में भी राहत देता है। इसकी तासीर गर्म होती है, जो शरीर को गर्म बनाए रखता है। प्याज में फाइबर और प्री-बायोटिक्स होता है जो आंत को स्वस्थ रखता है। प्री-बायोटिक्स शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में सुधार करने में मदद कर सकता है, जो मजबूत हड्डियों के लिए बेहद जरूरी है। लाल प्याज में फ्लेवोनॉइड होता है, फैट जमने नहीं देता है।
हींग के उपयोग से माहवारी में कम होता है पेडू का दर्द
हीं ग न केवल पाचक का काम करता है बल्कि यह प्राकृतिक दर्दनाशक भी है। पेट और सिरदर्द में इसको हल्का गर्म करके लेप करने से लाभ मिलता है। दांत दर्द होने पर इसे नींबू की कुछ बूंदों के साथ मिलाकर प्रभावित दांत पर लगा सकते हैं। माहवारी के दौरान ज्यादातर महिलाओं के पेट में दर्द और मरोड़ की शिकायत होती है। इसमें एक चुटकी हींग को गुनगुने पानी में दें। हींग का इस्तेमाल श्वसन नाल से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए किया जाता है। अगर आपको बलगम या फिर छाती में दर्द की शिकायत है तो इसे ले सकते हैं या लेप लगाएं।



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मेडिकल नॉलेज: क्यों कहा जा रहा है कि प्लास्टिक की बोतल में गंगाजल रखने से बचें

जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर (उत्तराखंड ) के वैज्ञानिकों ने अपने एक विशेष शोध में कहा है कि गंगाजल को प्लास्टिक कंटेनर में रखना सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। इससे कई गंभीर परेशानी भी हो सकती है। गंगाजल में मौजूद पोषक तत्त्व प्लास्टिक से क्रिया कर जहरीला हो जाता है। इससे पाचन तंत्र कमजोर, त्वचा से संबंधित समस्याएं, चिड़चिड़ापन, याद्दाश्त में कमी, व्यक्ति का सुध-बुध खोना समेत अन्य गंभीर रोगों की आशंका रहती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्लास्टिक में पॉली प्रोक्लीन, पॉलीकार्बोनेट, कार्बनिक रंग व पीवीसी का इस्तेमाल होता है। यह एक प्रकार से सेहत के लिए बहुत ही खतरनाक रसायन होते हैं। इससे सेहत को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। एक साल बाद इन प्लास्टिक कंटेनरों से थैलेट्स, कार्बनिक रंग, फिलर, फोटो स्टेबलाइजर आदि कैमिकल छूटने लगते है, जो गंगाजल को जहरीला बना देते हैं। इसे कांच की शीशी, चीनी मिट्टी या स्टील के बर्तन में रखें।



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Sleep Apnea: खर्राटे लेना गहरी नींद नहीं, बीमारी होती है

अगर कोई खर्राटे लेकर सोता है तो उसके परिजन कहते हैं कि व्यक्ति गहरी नींद में सो रहा है लेकिन यह बात सही नहीं है। खर्राटे लेना एक प्रकार से स्लीप डिसऑर्डर है, जिसे स्लीप एप्निया कहते हैं। इसमें गले में परेशानी होने से खर्राटे आते हैं। नींद में दिक्कत होती है। व्यक्ति की नींद कई बार अचानक से टूट जाती है। नींद पूरी नहीं होने से दिनचर्या और सेहत पर असर पड़ता है। इसमें सबसे अधिक ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया होता है। विश्व में 10 करोड़ से अधिक लोग स्लीप एप्निया से ग्रसित हैं।
इसका शरीर पर दुष्प्रभाव
थकान, अनिद्रा, याद्दाश्त में कमी, प्रतिक्रिया देने में देरी, हृदय पर दबाव, सुबह सिरदर्द, ध्यान लगाने में दिक्कत।

Risk of Sleep apnea

77% खतरा हाइपरटेंशन का स्लीप एप्निया में बढ़ जाता है
58% रिस्क कॉर्डियक अरेस्ट यानी हार्ट अटैक का बढ़ता है
76% स्लीप एप्निया के रोगियों में हार्ट फेल्योर की आशंका
80% मरीजों में ऑक्सीजन की कमी से सुबह सिरदर्द
15% मरीजों में टाइप 2 डायबिटीज की आंशका बढ़ जाती है, दूसरी भी परेशानी
90% रोगियों में स्ट्रोक यानी ब्रेन हेमरेज की आशंका,
58% लोगों में फैसला लेने की क्षमता पर असर पड़ता है
06 गुना अधिक बढ़ जाती है रोड एक्सीडेंट की आशंका,
58% रोगियों में मूड डिसऑर्डर, एंजाइटी और डिप्रेशन
ऐसे पा सकते हैं राहत
खर्राटे आते हैं तो इसको स्वीकार करें। डॉक्टर के पास जाएं और नियमित इलाज लें। साथ ही वजन कम करें। सही दिनचर्या अपनाएं। समय पर सोएं और उठें। हर रोज करीब 30 मिनट योग और इतना ही समय टहलें। दिन में सोने से बचें। सोने की जगह और पॉश्चर भी बदल सकते हैं। कोई नशा या ऐसी दवाएं लेते हैं जिनसे नींद में परेशानी हो सकती है तो उसे लेने से बचें। इलाज में कुछ डिवाइस और सर्जरी की जाती है। फिजिशियन इलाज करते हैं।



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Health Tips: ऐसा खाएं जो प्रदूषण के असर से बचाए

अमरूद, आवंला, हरी सब्जियां: इनमें विटामिन सी अधिक होता है, जो शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। यह शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल को बाहर निकालता है। आंवला, अमरूद, धनिया पत्ती, पालक, गोभी, शलजम अधिक मात्रा में खाएं। यह हवा के रास्ते शरीर में पहुंचने वाले प्रदूषण को कम करते हैं। गर्म दूध के साथ गुड़ या तिल के लड्डू खाएं। यह ऑक्सीजन को बढ़ाकर बचाव करते हैं
दही में चिया सीड्स खाएं
ओमेगा 3 फैटी एसिड शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है। इसके लिए नट्स और बीज जैसे अखरोट, चिया के बीज, अलसी के बीज को दही में डालकर रोज खाना चाहिए। दानामेथी, सरसों, काले चने, राजमा और बाजरा में भी ओमेगा 3 होता है। रोज डाइट में शामिल करें।
च्यवनप्राश का सेवन, डिटॉक्स चाय, अनुलोम-विलोम प्राणायाम, कपालभांति प्राणायाम तथा भस्त्रिका प्राणायाम से भी प्रदूषण के असर से बचाया जा सकता है। कालीमिर्च और शहद लें।
विटामिन ई के लिए नट्स खाएं
प्रदूषण से बचने के लिए विटामिन ई वाली चीजें ज्यादा मात्रा में खानी चाहिए। इसमें बादाम, सूरजमुखी के बीज, नट और ताजा मछली भी शामिल हैं। प्रदूषण के असर को बीटा कैरोटिन भी कम करता है। गाजर और मूली में यह ज्यादा पाया जाता है। पत्तेदार सब्जियां जैसे चौलाई का साग, धनिया, मेथी और पालक में भी प्रचूर मात्रा में बीटा कैरोटिन पाया जाता है। डाइट में अदरक का उपयोग करने से भी फेफड़ों की बीमारियों से बचाव होगा। इसे शहद के साथ लें।



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Winter care: हाई बीपी के रोगी घर से दवा लेकर ही बाहर निकलें

इन दिनों हाई ब्लड प्रेशर में सबसे सामान्य लक्षण सिरदर्द होता है। वैसे यह लक्षण अधिक ठंडक और शरीर में पानी की कमी से भी हो सकता है लेकिन जिन्हें पहले से बीपी है वे तत्काल अपना बीपी चेक करें। सर्दी के दिनों में भी रोज करीब 8-10 गिलास पानी पीते रहें। बीपी बढऩे पर पैनिक अटैक भी हो सकता है। इसमें नसों में झनझनाहट और पसीना भी आता है। कई बार हाई बीपी के कारण पाचन तंत्र खराब हो जाता है। हाई ब्लड प्रेशर की वजह से कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम में उतार-चढ़ाव होने लगता है, जिससे सांस लेने में परेशानी महसूस होने लगती है। घुटन जैसा महसूस होता है। ऐसा होने पर तत्काल अपने डॉक्टर को दिखाएं।
कई लेयर में कपड़े पहनें
हा ई ब्लड प्रेशर के मरीजों को अधिक ठंड से बचाव करना चाहिए। घर से बाहर निकलते हैं तो दवा जरूर लें। बहुत ज्यादा ठंड में बाहर न निकलें। धूप होने पर थोड़ी देर धूप भी सेंकें। ज्यादा मीठा, नमकीन और खट्टा खाने से बचें। एक मोटा कपड़ा पहनने की जगह कई लेयर में कपड़े पहनें। दिन में गर्मी बढऩे पर इसे थोड़े-थोड़े अंतराल पर ही निकालें। संतुलित, पोषक और ताजा भोजन खाएं। फल और मौसमी सब्जियोंं के साथ चोकरयुक्त आटे की रोटी, अंकुरित अनाज, लौकी और टमाटर का जूस, आंवले का मुरब्बा, लहसुन खाएं। अल्कोहल और कैफीन से बचें।



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Winter care: हाई बीपी के रोगी घर से दवा लेकर ही बाहर निकलें

इन दिनों हाई ब्लड प्रेशर में सबसे सामान्य लक्षण सिरदर्द होता है। वैसे यह लक्षण अधिक ठंडक और शरीर में पानी की कमी से भी हो सकता है लेकिन जिन्हें पहले से बीपी है वे तत्काल अपना बीपी चेक करें। सर्दी के दिनों में भी रोज करीब 8-10 गिलास पानी पीते रहें। बीपी बढऩे पर पैनिक अटैक भी हो सकता है। इसमें नसों में झनझनाहट और पसीना भी आता है। कई बार हाई बीपी के कारण पाचन तंत्र खराब हो जाता है। हाई ब्लड प्रेशर की वजह से कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम में उतार-चढ़ाव होने लगता है, जिससे सांस लेने में परेशानी महसूस होने लगती है। घुटन जैसा महसूस होता है। ऐसा होने पर तत्काल अपने डॉक्टर को दिखाएं।
कई लेयर में कपड़े पहनें
हा ई ब्लड प्रेशर के मरीजों को अधिक ठंड से बचाव करना चाहिए। घर से बाहर निकलते हैं तो दवा जरूर लें। बहुत ज्यादा ठंड में बाहर न निकलें। धूप होने पर थोड़ी देर धूप भी सेंकें। ज्यादा मीठा, नमकीन और खट्टा खाने से बचें। एक मोटा कपड़ा पहनने की जगह कई लेयर में कपड़े पहनें। दिन में गर्मी बढऩे पर इसे थोड़े-थोड़े अंतराल पर ही निकालें। संतुलित, पोषक और ताजा भोजन खाएं। फल और मौसमी सब्जियोंं के साथ चोकरयुक्त आटे की रोटी, अंकुरित अनाज, लौकी और टमाटर का जूस, आंवले का मुरब्बा, लहसुन खाएं। अल्कोहल और कैफीन से बचें।



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ज्यादा जंक फूड से प्रेग्नेंसी के तीसरे तिमाही में फैटी लिवर की आशंका

प्रेग्नेंसी के तीसरे तिमाही यानी 35-36वें सप्ताह में महिलाओं को ज्यादा क्रेविंग होती है। इस दौरान अगर वह ज्यादा अनहैल्दी खाती है तो उनमें फैटी लिवर की आशंका बढ़ जाती है। पेट में दर्द, कम भूख लगना, वजन कम होना, उल्टी, थकान और त्वचा का पीला पड़ जाना इसके कुछ लक्षण हैं। इससे शिशु के विकास पर खराब असर पड़ता है। अगर ऐसा है तो तत्काल जांच करवाएं। कई बार डॉक्टर पेट देखकर ही पता कर लेते हैं। जरूरत होने पर कुछ टेस्ट भी करवाते हैं। लेकिन डॉक्टर से सलाह के बाद ही जांच करवाएं।
इस तरह करें बचाव
हैल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर बचाव कर सकते हैं। क्रेविंग होने पर जंक फूड की जगह फल या मेवे खाएं। डाइट में हल्दी जरूर शामिल करें। इस मौसम में कच्ची हल्दी आती है। इसे डाइट में शामिल करें। इसमें एंटी-बैक्टीरियल,एंटीवायरल,एंटीइंफ्लामेट्री और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह फैटी लिवर की समस्या से बचाव करते है. इसलिए प्रेगनेंसी में इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।



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कोरोना के बाद मुंह सूखने के साथ अन्य लक्षण डायबिटीज जैसे तो अनदेखी न करें

सवाल- मुझे दो माह पहले कोरोना हुआ था। पांच दिन की दवा लेने के बाद ठीक हो गया लेकिन अब भी मुंह सूखा-सूखा सा लगता है। शरीर में दर्द और थकान भी रहती है। चक्कर आने जैसा लगता है। कई बार यूरिन भी जाना पड़ता है। विजय राजावत, 37 वर्ष
कोरोना का असर 2-3 माह तक रह सकता है। इसके कारण ही मुंह सूखना, थकान, कमजोरी और बदन दर्द की दिक्कत होती है। अगर कोई सांस संबंधी या दूसरी परेशानी नहीं है तो परेशान न हों। ज्यादा आराम करें। अच्छी दिनचर्या का पालन करें और हैल्दी डाइट लें।
कोरोना के बाद भी डायबिटीज
मुंह सूखना, प्यास लगना और बार-बार यूरिन जाना डायबिटीज के भी लक्षण होते हैं। आपकी उम्र 30 वर्ष से अधिक है और परिवार में किसी को डायबिटीज की हिस्ट्री है तो इसकी जांच करवा सकते हैं। कई मरीजों में देखा गया है कि उन्हें डायबिटीज नहीं थी पर कोरोना के बाद लक्षण दिखे।
प्रोटीन वाली चीजें लें
कोरोना में कोशिकाओं को अधिक नुकसान हो रहा है। ऐसे में प्रोटीन वाली चीजें ज्यादा खाएं। यह नई कोशिकाओं के बनने में मदद करता है।
डॉ. सुनील महावर, फिजिशियन, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर



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इन सात चीजों को लेने के बाद पानी पीने से बढ़ती है परेशानी

हमारी प्राचीन चिकित्सा में कई परहेज बताए गए हैं। इनमें पानी पीने के भी नियम हैं। उसके अनुसार भुने चने और अमरूद खाने के बाद पानी पीने से पेट में दर्द हो सकता है। पाचन क्रिया में दिक्कत आ सकती है। इसी तरह अधिक ठंडी चीजों को खाने के 10 मिनट बाद पानी पीएं। तुरंत पीने के बाद गले में खराश और दांतों में सेंसिविटी की समस्या हो जाती है। चाय या कॉफी पीने के बाद जीभ पर मौजूद टेस्ट बड्स एक्टिव हो जाते हैं। 20-25 मिनट बाद ही पानी पीएं, नहीं तो पाचनतंत्र धीमा हो जाता है।
इन फलों के बाद भी...
केला, चीकू, नाशपाती, सेब, अनार, अनान्नास खाने के बाद भी पानी न पीएं। इनमें शुगर कंटेंट और साइट्रिक एसिड होता है। पानी पीने से अपच, खांसी, शुगर लेवल बढ़ता है। खट्टे फल खाने के बाद पानी पीने से गले में दर्द, खराश हो सकता है। इसलिए आयुर्वेद में भी कई चीजों के परहेज के बारे में बताया गया है। इनमें कुछ चीजों के खाने के बाद पानी पीने से मना किया गया है।



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30-50 मिनट रोज व्यायाम करने से तनाव, असाध्य व पुरानी बीमारियों का खतरा घटता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि कोरोना महामारी के चलते लोग व्यायाम से दूर हो रहे हैं। इससे उन्हें कई तरह की परेशानियां हो रही है। सभी उम्र के लोगों को रोज कुछ समय व्यायाम करना चाहिए। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस ऐडनॉम ने सोशल साइट पर संदेश जारी कर लोगों से व्यायाम करने की अपील की है। उन्होंने बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए व्यायाम का समय भी बताया है।
व्यायाम के फायदे
नियमित व्यायाम करने से इम्युनिटी रिएक्टिव होती है। ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है। यह हमारी नींद को कम करता है। इससे हमें सुबह उठने पर तकलीफ नहीं होती है। हृदय रोग, खून की नलियों से जुड़े रोग, टाइप 2 डायबिटीज और मोटापा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा ïघटता है। यह मानसिक स्वास्थ्य सुधारता, तनाव को रोकने में मदद करता है। कई अन्य बीमारियों का रिस्क भी घटता है।
छोटे बच्चे व्यायाम नहीं करें, स्पोट्र्स खेलें और दौड़ लगाएं
कोविड काल में अधिकतर बच्चे कंप्यूटर, टीवी और मोबाइल पर गेम खेलते हुए बीता रहे हैं। बाहर नहीं जा रहे हैं। इससे उनमें डायबिटीज और मोटापा की आशंका बढ़ रही है। दस साल तक के बच्चे फ्री रनिंग, हाथों से किए जाने वाले काम, दौडऩा, बॉल कैच करें। इससे बड़े बच्चे साइक्लिंग, टेनिस और स्केटिंग आदि खेलें। इससे हड्डियों और मासंपेशियों का सही विकास होता है।
सप्ताह में 130-300 मिनट तक मॉडरेट इंटेंसिटी एक्सरसाइज करें। साथ ही 75-150 मिनट अधिक-तीव्रता वाली एरोबिक्स करें। सप्ताह में दो दिन मांसपेशियों की मजबूती वाले व्यायाम करने चाहिए। जॉगिंग, वॉकिंग, ट्रैकिंग, साइक्लिंग, स्पोटर्स, सूर्य नमस्कार आदि कर सकते हैं।
30-50 मिनट रोज और सप्ताह में 3-4 दिन व्यायाम करें। इसमें मॉडरेट एक्सारसाइज करें। वॉकिंग, जॉङ्क्षगग, स्टें्रथ करने वाले व्यायाम डंबल प्रेस, चेस्ट प्रेस, बेंटओवर रो आदि करें। कोई मेडिकल कंडीशन है तो धीरे-धीरे व्यायाम का समय बढ़ाएं। शुरू के दो-तीन सप्ताह में ज्यादा व्यायाम न करें।
इन्हें 150 मिनट तक सप्ताह में मध्यम-तीव्रता वाली एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसमें वॉकिंग और हल्के आसन शामिल हैं। हर तीन माह के अनुसार योग प्लान करें। खूब पानी पीएं। वर्कआउट में कोई समस्या है तो तत्काल छोड़ दें। अभी बाहर जाने से परहेज करें।
रोज व्यायाम के फायदे
35% हार्ट और स्ट्रोक का खतरा कम होता है
50% टाइप 2 डायबिटीज की आशंका घटती है
50%कोलन कैंसर का रिस्क कम होता है
20%खतरा ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क घट जाता है
30% रिस्क जल्दी मृत्यु का खतरा कम होता है



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प्रदूषण कम करने लिए घर में लगाएं ये 5 पौधे

सर्दी और स्मॉग से वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। दूसरी तरफ सर्दी के दिनों में अधिकतर समय लोग घरों या बंद कमरे में रहना पसंद करते हैं। इससे भी कमरे में हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है। ऐसे में कुछ पौधे लगाए जा सकते हैं, जो न केवल घर की खूबसूरती बढ़ते हैं बल्कि दूषित तत्वों को सोखकर वातावरण को भी स्वच्छ बनाते हैं। जानते हैं इन पौधों के बारे में-
स्नेक प्लांट : यह हवा में मौजूद टॉक्सिन जैसे फॉर्मलाडेहाइड, टोल्यूनी और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड को सोख लेता है। जिनको सिर दर्द और नींद में दिक्कत है उन्हें भी ये लगाना चाहिए।
मनी प्लांट : यह हवा से रासायनिक विषाक्त पदार्थों को अवशोषित करने में सक्षम है। यह फॉर्मलाडेहाइड, बेंजीन, ट्राइक्लोरोइथीलीन, जाइलीन आदि जहरीली गैसों को सोखकर ताजा ऑक्सीजन छोड़ता है।
पीस लिली : यह वायु शोधन के लिए सबसे अच्छा इनडोर पौधा है। कार्बन मोनोऑक्साइड, फॉर्मलाडेहाइड और बेंजीन जैसी हवा में पाई जाने वाली जहरीली गैसों को बेअसर कर सकता है। अधिक ऑक्सीजन देता है।
एरेका पॉम: यह हवा से विषाक्त पदार्थों जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, फॉर्मलाडेहाइड, जाइलीन, टोल्यूनी और गैसों आदि को तेजी से अवशोषित करता है। इससे ऑक्सीजन की कमी नहीं होती है।
स्पाइडर प्लांट : कई अध्ययनों के अनुसार यह पौधा हवा से फॉर्मलाडेहाइड, अमोनिया और बेंजीन और दूसरी दूषित गैसों को सोख लेता है। यह सिक बिल्डिंग सिंड्रोम को फिल्टर कर प्यूरीफायर का काम करता है।



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क्या रोज अंडा खाने से डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है?

ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन में प्रकाशित एक शोध में कहा गया है कि जो लोग रोज एक या इससे अधिक अंडा खाते हैं तो उनमें डायबिटीज टाइप-2 का रिस्क सामान्य लोगों की तुलना में 60% अधिक होता है। यह अध्ययन चीन और कतर मेडिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त प्रयास से किया गया है। यह शोध काफी संख्या पर किया गया है। इसमें पाया गया है कि जो लोग रोज एक से अधिक अंडा खाते हैं उनमें फास्टिंग ब्लड शुगर बहुत अधिक बढ़ जाता है। इससे डायबिटीज की आशंका रहती है। अध्ययन में करीब 50 वर्ष की उम्र के लगभग 8,500 लोगों को शामिल किया गया। इसमें पाया गया है कि जो लोग रोज करीब 38 ग्राम अंडा (एक अंडा) खाते हैं तो उनमें 25 फीसदी और रोज करीब 50 ग्राम से अधिक (करीब दो) अंडे खाते हैं तो उनमें 60त्न अधिक तक डायबिटीज होने का खतरा रहता है। इसलिए कोई समस्या है तो विशेषज्ञ की सलाह से ही अंडा खाएं। अंडा खाते समय सावधानी बरतनी चाहिए। वैसे अंडा प्रोटीन का अच्छा स्रोत है लेकिन अधिक उम्र के लोग ज्यादा नहीं खाएं।



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शरीर में जमा दूषित तत्वों को बाहर निकाल बीमारियां दूर करती प्राकृतिक चिकित्सा

प्राकृतिक चिकित्सा हमारी प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। इसके अनुसार शरीर का निर्माण पंच महाभूत से बना है। इससे के कम या ज्यादा होने से बीमारियां होती हैं और इलाज भी इन्हीं से होता है। नवंबर माह में नेचुरोपैथी दिवस मनाते हैं।
पंच महाभूत का सिद्धांत
क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा, पंच तत्त्व मिल बना शरीरा। यह कहावत न केवल शरीर की बनावट बल्कि बीमारियों के इलाज के लिए भी सटीक है। क्षिति- पृथ्वी (मिट्टी), जल-पानी, पावक-अग्नि (पाचक अग्नि), गगन- आकाश (खाली जगह) और समीरा-वायु (हवा) है। इसको पंच महाभूत कहते हैं। इन पांच महाभूत की कमी या अधिकता से ही बीमारियां होती हैं। इनसे ही इलाज किया जाता है।
शरीर को शुद्ध करती मिट्टी
शरीर के दूषित तत्त्वों को मिट्टी बाहर निकालती है। इसका लेप लगाने से कब्ज, पेट, त्वचा रोगों से बचाव होता है। हाई बीपी और सिर दर्द होने पर माथे या सिर पर मिट्टी का लेप लगाते हैं। त्वचा रोगों में मिट्टी का लेप लगाकर धूप में बैठते हैं। मानसिक समस्याओं में भी मिट्टी का लेप नियमित माथे पर लगाने से तनाव, अनिद्रा, थकान और चिड़चिड़ापन आदि में आराम मिलता है।
सूर्य स्नान के लाभ
देश की करीब 80त्न आबादी में विटामिन डी की कमी है। इससे कम उम्र में हड्डियां कमजोर होती है। अगर रोज 45 मिनट धूप में बैठें तो इससे बच सकते हैं। महिलाओं की अधिकतर बीमारियों का कारण भी धूप की कमी है। डायबिटीज और हृदय रोगों से बचाव के लिए भी नियमित धूप में बैठना चाहिए।
अंकुरित काला तिल है दवा
सर्दी में काले तिल को अंकुरित लेना दवा की तरह काम करता है। यह न केवल मौसमी समस्याओं से बचाता है, बल्कि थायरॉइड, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हड्डी रोगों में भी लाभ देता है। खून की कमी, गठिया, ब्लड प्रेशर, हृदय रोगों और शरीर में सूजन है तो भी आराम मिलता है।
बालों के लिए प्याज लगाएं
अगर बाल झड़ रहे हैं या सफेद हो रहे हैं तो प्याज की लुगदी बना लें। इसमें नींबू का रस और सरसों का तेल मिलाकर करीब 20-25 मिनट तक रात में मसाज करें। सुबह मुल्तानी मिट्टी या रीठा से धो लें। विशेषज्ञ की सलाह से ही इसका प्रयोग करें। सर्दी में आंवला, अमरूद और गाजर का प्रयोग भी अधिक करें।



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बीते समय को भूलो, वर्तमान देगा सेहत

स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि व्यक्ति गुजरे जमाने की चिंता करने की बजाय मौजूदा समय का खयाल रखे। पुराने खयालों में खोए रहेंगे तो चिंता (Anxiety) और अवसाद (Depression) आपको घेर लेंगे। इसलिए वर्तमान (present) को सुधारने की कोशिश करें और सेहत अच्छी बनाएं।

मजे से गुजारो वर्तमान
दुनिया में ज्यादातर लोग अपने पुराने समय को याद कर-करके दुखी होते रहते हैं। उनके खयालों में बस यही रहता है कि मैं ऐसा करता तो आज ऐसा होता... इस तरह की सोच से इंसान को कुछ हासिल नहीं हो पाता। जो समय गुजर गया है, उसका दुख मनाने से आपकी सेहत बिगड़ती है और मानसिक व शारीरिक गड़बडिय़ां पैदा होने लगती हैं। अगर इंसान सिर्फ पुराने समय के बारे में विचार करता रहेगा तो वह आज के बारे में तो सोच ही नहीं पाएगा।

अतीत देता है सबक
क्या हुआ अगर आप अपने अतीत में कोई अच्छा फैसला नहीं कर पाए या कोई लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए। अभी भी आपके पास समय है। अगर आप मौजूदा समय का सही तरह से इस्तेमाल करेंगे तो खुशियां लौट आएंगी और सेहत पर भी अच्छा असर पड़ेगा। यह आपके ऊपर है कि आप जीवन को किस तरह से बनाना चाहते हैं। अगर आप अतीत के दुखों को ओढ़े रहेंगे तो सेहत बिगड़ जाएगी और कई बीमारियां आपको घेर लेंगी। तब आपका वर्तमान भी बिगड़ जाएगा।

सेहत के प्रति रहें सतर्क
अच्छे स्वास्थ्य (health) के लिए आपको प्रण लेना होगा कि आप अपने अतीत को लेकर कभी दुखी नहीं होंगे। वर्तमान समय का सही तरह उपयोग करेंगे और सेहत के प्रति पूरी तरह जागरूक रहेंगे। जो इंसान अपनी सेहत को लेकर सतर्क रहता है, वह मौजूदा समय का भी सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल कर पाता है। वर्तमान में ही जीवन की सारी खुशियां छुपी रहती हैं। इस तरह आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी और जीवन भी अच्छे से गुजरेगा।

जब कभी आपको पुराने समय की यादें परेशान करें और आप खुद को डिप्रेशन में पाएं तो मन को खुश रखने का प्रयास करें। संगीत सुन सकते हैं या नृत्य कर सकते हैं। इनसे मिलने वाली खुशियां आपको अतीत की बजाय वर्तमान में लौटने पर मजबूर कर देंगी और आपका स्वास्थ्य अच्छा बना रहेगा।



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स्वस्थ रहने के लिए खाने से पहले सोचें

स्वस्थ रहने के लिए आपको हेल्दी फूड खाना चाहिए। ज्यादातर लोग भूख (hunger) लगने पर कुछ भी खा लेते हैं और बाद में सोचते हैं कि वे स्वस्थ क्यों नहीं रह पाते। आप कुछ भी मुंह में डालने से पहले थोड़ा विचार करें कि क्या यह सेहत के नजरिए से अच्छा है या नहीं?

हो सकती हैं कई समस्याएं
आज के दौर में बाजार में खाने-पीने की कई चीजें मिलती हैं। इसके अलावा कई कंपनियां डिब्बाबंद फूड भी निकालती हैं। युवाओं के बीच में इस तरह के फूड काफी मशहूर है। ज्यादातर युवा इनमें मौजूद पोषक तत्वों के बारे में विचार ही नहीं करते और इनका भारी मात्रा में सेवन करते हैं। कई बार तो डिब्बाबंद फूड और फास्ट फूड के चक्कर में कई युवा पौष्टिक भोजन भी नहीं करते और दिनभर इस तरह की चीजें खाते रहते हैं। इनसे शरीर में मोटापा (obesity), एसिडिटी (acidity), गैस और अपच जैसी समस्याएं पैदा होने लगती हैं।

बाद में दिखता है असर
युवावस्था में ही शरीर का विकास सबसे तेजी से होता है। अगर इस समय पौष्टिक चीजों का सेवन नहीं किया जाएगा तो आगे चलकर कई समस्याओं का सामना कर सकता है। आज युवा पीढ़ी भोजन में पोषक तत्वों को नजरअंदाज करती रहेगी तो आने वाले समय में उसे इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे। कई युवा दूध, दही और फल खाने में नाक-मुंह सिकौडऩे लगते हैं। अगर सेहत के लिए जरूरी चीजों का सेवन कम किया जाएगा तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती जाएगी और शरीर बीमारियों का घर भी बन सकता है। बाजार में खुले में मिलने वाली चीजों के निर्माण में अच्छी क्वालिटी की सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जाता और मिलावट भी हो सकती है। इस कारण से भी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

फैसला आपको करना है
जब भी आप बाजार में कुछ खाने की योजना बनाएं तो इस बारे में जरूर विचार करें कि क्या इससे मेरे शरीर को जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति हो पाएगी। ऐसा तो नहीं है कि इसे खाने से मेरी सेहत पर गलत असर पड़ेगा। इस तरह आप खुद फैसला कर पाएंगे कि आपको क्या खाना है और क्या नहीं। सिर्फ स्वाद के लिए गलत चीजें खाने के बजाय फलों, अनाज, जूस, दूध का सेवन आपकी सेहत बना सकता है। अगर आपको पता है कि आप जिस चीज को ग्रहण कर रहे हैं, उसमें कितने पौष्टिक तत्व हैं तो इससे आपकी सेहत को ही फायदा होगा और आप हर तरह की समस्या से बचे रहेंगे।



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Saturday, 19 December 2020

इस विटामिन के हैं ढेरो फायदे

विटामिन डी (Vitamin D) की कमी से बच्चों में रिकेट (Ricket) नामक हड्डी की बीमारी हो जाती है, यह तो आपने खूब सुना है लेकिन विटामिन डी की कमी से कई और बीमारियां हो सकती हैं। जाहिर है विटामिन डी के सेवन के ढेर सारे फायदे हैं।

मसल्स फाइबर की ग्रोथ
यूएस स्थित विटामिन डी काउंसिल के संस्थापक एवं साकिएट्रिस्ट डॉ. जॉन कैनल कहते हैं, 'शोधपत्रों से पता चलता है कि गर्मियों में एथलीटों के परफॉर्मेंस सर्दियों की तुलना में काफी बेहतर होते हैं। विटामिन डी मसल्स फाइबर की ग्रोथ को स्टीमुलेट करता है। रक्त में इसके उच्च स्तर से संतुलन और प्रतिक्रिया की टाइमिंग भी इम्प्रूव होती है।'

बीमारियों से सुरक्षा
वैज्ञानिकों को कई ऐसे प्रमाण मिले रहे हैं कि विटामिन डी के उच्च स्तर की मौजूदगी से जीवन में आगे चलकर डायबिटीज (diabetes) और हार्ट डिजीज (heart disease) जैसी जानलेवा बीमारियों से काफी हद तक सुरक्षा मिल सकती है। बीते साल टाइप-2 डायबिटीज (type 2 diabetes) के 90 मरीजों पर किए गए एक खास अध्ययन के अनुसार विटामिन डी वाला योगर्ट पीने वाले मरीजों में ब्लड शूगर व वजन सामान्य योगर्ट पीने वाले लोगों की तुलना में जल्दी कंट्रोल हुआ।

कहां मिलेगा विटामिन डी
वैसे तो सूर्य का प्रकाश विटामिन डी का आदर्श स्रोत है, लेकिन भारत में कुपोषण एवं सूर्य की रोशनी में पर्याप्त एक्जपोजर न होने से लोगों में इसकी कमी हो रही है। नियमित रूप से इसकी रेकमंडेड डोज लेने (10 से 20 माइक्रोग्राम) के लिए भोजन में दही (Curd), चीज (cheese), मछली (fish), अंडे (eggs), मशरूम (mushroom) और फोर्टीफाइड अनाज शामिल करने चाहिए।

दर्द से राहत
एक अन्य अध्ययन से पता चला है कि विटामिन डी के अच्छे स्तर से धमनियों में कड़ापन आने की आशंका कम हो जाती है, जिससे हृदय रोग की संभावना घटती है।



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ज्यादा खाओगे तो हो जाओगे बीमार

स्वस्थ रहने के लिए शरीर को पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जबकि लोग सोचते हैं कि ज्यादा खाने से इंसान स्वस्थ रह सकता है। ज्यादा खाने की बजाय सही खाना ज्यादा जरूरी है। आपको पता होना चाहिए कि क्या खाना सेहत के लिए सही होता है और क्या नुकसान दायक।

घेर लेंगी कई बीमारियां...
आज के जमाने में सेहत को भरपेट भोजन से जोड़कर देखा जाता है, जबकि यह सच नहीं है। कुछ लोग दिनभर कुछ न कुछ खाते रहते हैं पर वे स्वस्थ नहीं रह पाते। ऐसा इसलिए है कि वे शरीर की जरूरत को ध्यान में रखे बिना बस खाते रहते हैं। उन्हें पता ही नहीं होता और वे बीमारियों को बुला लेते हैं। कम खाने से कोई नुकसान नहीं होता और ज्यादा खाने से आपकी सेहत खराब हो सकती है, पाचन तंत्र बिगड़ सकता है, मोटापा हो सकता है। इसलिए जरूरत से ज्यादा खाने की कोशिश न करें।

पेट में रखिए थोड़ी जगह
आपको जरूरत से ज्यादा खाने की बजाय जरूरत से कम खाने का प्रयास करना चाहिए। खाइए कम और तरल पदार्थों का ज्यादा सेवन कीजिए। आपको पानी, दूध और छाछ जैसी पदार्थों को भोजन में शामिल करना चाहिए। पेट को फुल करने की बजाय उसमें थोड़ी जगह बचनी चाहिए। अगर आप स्वाद के चक्कर में ठूंस-ठूंसकर खा लेंगे तो आप बाद में परेशान होंगे। आजकल स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स और पिज्जा-बर्गर के कारण भूख का तो पता ही नहीं लगता है और शरीर बीमारियों का घर बनता जाता है। इसकी बजाय आपको खाद्य पदार्थों में मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी रखनी चाहिए और उसी के मुताबिक अपनी डाइट तय करनी चाहिए। इससे आपकी सेहत को ही फायदा होगा।

आलस्य छोड़ मेहनत करें
कुछ लोग स्वाद के चक्कर में दिनभर तरह-तरह की चीजें खाते रहते हैं। इसकी बजाय सुबह के नाश्ते, दिन के भोजन और रात्रि के आहार के बारे में एक निश्चित योजना बनानी चाहिए। दोपहर में हल्का-फुल्का खा सकते हैं, पर हर बार खाने को मिले तो पेट को फुल करना जरूरी नहीं है। अगर आप पेट को फुल करने में लगे रहेंगे तो शरीर की पाचन क्षमता कम होने लगेगी। अगर आप खाते रहेंगे और कड़ी मेहनत नहीं करेंगे तो आपको कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। अगर कोई स्वादिष्ट व्यंजन सामने रखे तो मना करना सीखिए, वरना आपका ही बुरा होगा।



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Friday, 18 December 2020

कोरोना वैक्सीन लगने के बाद होंगी बुखार और दर्द जैसी मामूली समस्याएं

नई दिल्ली | केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी होगी, लेकिन टीका लगने के बाद बुखार और जिस स्थान पर इंजेक्शन लगेगा, वहां दर्द होने जैसे मामूली दुष्प्रभाव दिख सकते हैं। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि वैक्सीन शॉट लेना स्वैच्छिक होगा। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब टीकाकरण की सुरक्षा और प्रभावकारिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हाल के एक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत लोग इसके दुष्प्रभावों के डर से वैक्सीन लेने से हिचकिचाते हैं।

डर को दूर करते हुए, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, "कोविड-19 टीके केवल तभी लगाए जाएंगे, जब उनकी सुरक्षा सिद्ध हो जाएगी। टीके सुरक्षित और प्रभावी होंगे, लेकिन बुखार, इंजेक्शन स्थल पर दर्द आदि जैसे मामूली दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इस तरह के प्रभाव किसी भी वैक्सीन में पाए जा सकते हैं।"

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राज्यों को किसी भी कोविड-19 वैक्सीन से संबंधित साइड-इफेक्ट से निपटने के लिए व्यवस्था शुरू करने का निर्देश दिया गया है। मंत्रालय ने कहा, "कोविड-19 का टीका लेना व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करेगा।"

मंत्रालय ने कहा कि विभिन्न टीके परीक्षण के अलग-अलग चरण में हैं और सरकार जल्द ही कोविड-19 टीकाकरण शुरू करने के लिए तैयारी कर रही है। कम अवधि में परीक्षण के बाद तैयार टीका क्या सुरक्षित होगा और क्या इसके कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, इस पर मंत्रालय ने कहा है कि सुरक्षा और कारगर होने के आधार पर नियामक संस्थानों की मंजूरी के बाद टीके की पेशकश की जाएगी। हाल ही में स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा है कि टीकाकरण शुरू होने पर 'प्रतिकूल' प्रतिक्रियाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है।



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Stale Bread Benefits: बासी रोटी खाने से होते हैं गजब के फायदे, कई बीमारियों से मिलता है छुटकारा!

नई दिल्ली। Health Benefits Of Stale Chapati: एक जमाना था जब बासी खाने को सेहत के लिए अच्छा नही माना जाता था। लेकिन जानकार बासी रोटी खाने के एक नहीं काफी फायदे (Benefits Of Eating Stale Bread) बताते हैं। आइये जानते है आखिर बासी खाने के क्या-क्या फायदे होते हैं।

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1. बासी रोटी से डायबिटीज में मिलता है फायदा

जानकार मानते हैं कि बासी रोटी यदि सुबह खाली पेट खाई जाए तो बढ़े हुए ब्लड शुगर को कम किया जा सकता है। हर दिन दूध के साथ बासी रोटी खाने पर डायबिटीज में होता है सुधार। विशेषज्ञों का मानना है कि बासी रोटी में लाभकारी बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं जो रक्त से ग्लूकोज की मात्रा कम करने में सहायक होते हैं।

2. पेट की समस्या से मिलेगी निजात

जिन्हें लंबे समय से कब्ज की शिकायत हो उनके लिए बासी रोटी खाना बेहद फायदेमंद जो सकता है। बासी रोटी खाने से पेट साफ होता है। बासी रोटी पेट की हर तरह की समस्या को दूर करने में सहायक होती है। बासी रोटी एसिडिटी में भी फायदेमंद साबित हो सकती है।
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3. शरीर के तापमान को रखती है बैलेंस

बासी रोटी भले लोग पसंद ना करें लेकिन इसे खाने से शरीर का तापमान सामान्य बना रहता है। यह बात रिसर्च में भी सामने आई है। जानकार बताते हैं यदि दूध के साथ मिलाकर बासी रोटी खाई जाए तो इसके फायदे और भी ज्यादा बढ़ सकते हैं।

4. बासी रोटी से पाचन होता है मजबूत

पाचन तंत्र को खराब करने में कब्ज की मुख्य भूमिका होती है। लेकिन बासी रोटी में ग्लूकोज की मात्रा घट जाती है और फाइबर प्रचुर मात्रा में होती है, जो हाजमे के लिए काफी फायदेमंद होती है। इसी लिए बासी रोटी को पाचन तंत्र को हेल्दी रखने वाला बताया जाता है।

5. बासी रोटी से दुबलापन होता है दूर

शरीर को तंदरुस्त रखने के लिए उचित मात्रा में फाइबर और कार्ब्स का मिलना ज़रूरी होता है। ऐसे में बासी रोटी खाने से ये ज़रूरी दोनों तत्व शरीर को आसानी से मिल जाते हैं, जिससे दुबलापन दूर होता है बॉडी को एनर्जी मिलती है।



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सर्दियों में डैंड्रफ की समस्या से कैसे पाएं छुटकारा, जान लें इन घरेलू नुस्खों का आसान तरीका

नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम आते ही हमें कई तरह की समस्याओं से होकर गुजरना पड़ता है क्योंकि इन दिनों चलने वाली सर्द हवाओं से ना केवल स्कीन खराब होती है बल्कि बालों पर भी इसका असर देखने को मिलता है। ठंड के समय में बाल बेजान होने के साथ डैंड्रफ या रूसी की समस्या बढ़ जाती है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह भी होती है कि ठंड के मौसम में स्कैल्प में रूखापन आ जाता है, जिसके कारण डैंड्रफ की समस्या होती है। यह हमारे बालों के लिए काफी नुकसानदायक है।इसके कारण सिर में खुजली, बालों का झड़ना और बालों के टूटने की समस्या काफी होने लगती हैं। तो चलिए हम बताते है इससे निजात पाने के असान तरीके..

1. मेथी

मेथी के दानों को रात में भिगोकर रख दे और सुबह इसका इसका पेस्ट बनाकर स्कैल्प में लगाएं। कुछ देर सूखने के लिए छोड़ दें और बाद में साफ पानी से बालों को धो लें।

2. नारियल और जैतून का तेल

सर्दियों में बाल रूखे और बेजान है तो इसके लिए नारियल या जैतून का तेल काफी फायेमंद साबित हो सकता है। इसके अलावा तेल में कपूर मिलाकर मसाज करेंगी, तो आपको डैंड्रफ से जल्द ही छुटकारा मिल जाएगा।

3. नींबू का रस

रूसी की समस्या को दूर करने के लिए नींबू के रस काफी अच्छा उपचार है। इसका उपयोग करने के लिए आप सरसों के तेल या फिर नारियल के तेल में एक नींबू को अच्छी तरह निचोड़ कर रस निकाल लें। फिर इस तेल से सिर की जंड़ों की हल्के हाथों से मसाज करें और कुछ देर के लिए इसे यूं ही छोड़ दें। 15 से 20 मिनिट के बाद बालों को अच्छी तरह से धो लें। ऐसा हफ्ते में दो बार करें जरूर फायदा मिलेगा।

4. एलोवेरा जेल का करें इस्तेमाल

एलोवेरा औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसमें एंटीफंगल और एंटिबैक्टीरियल के गुण पाए जाते है जो डैंड्रफ की समस्या दूर करने में लाभदायक होते है।

5. बालों में दही लगाएं

बालों से डैंड्रफ को खत्म करने के साथ इन्हे पोषित करने के लिए दही का उपयोग काफी अच्छा उपाय है। बालों और स्कैल्प पर दही लगाने से डैंड्रफ की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है। इसके लिए आप एक कटोरी में दही लेकर बालों की जड़ों और स्कैल्प पर लगाते हुए मालिश करें। और 1-2 घंटे तक इसे यूं ही छोड़ दें। उसके बाद बालों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें।



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