Thursday, 30 November 2023

चीन के बाद इन देशों में बढ़ा बच्चों में निमोनिया का प्रकोप, महामारी घोषित

एवियन फ्लू डायरी, एक संक्रामक रोग समाचार ब्लॉग पर एक पोस्ट से पता चला कि माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया संक्रमण महामारी स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें गर्मियों में शुरू हुई वृद्धि पिछले पांच हफ्तों में काफी बढ़ गई है डेनमार्क के स्टेटेंस सीरम इंस्टीट्यूट के अनुसार, "संख्या अब इतनी अधिक है कि यह एक महामारी है।


स्टेटेंस सीरम इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ शोधकर्ता हैन-डोर्टे एम्बोर्ग के अनुसार, "पिछले पांच हफ्तों में, नए मामलों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, और अब हम सामान्य से कहीं अधिक मामले देख रहे हैं, और यह कि पूरे देश में व्यापक संक्रमण है।


सप्ताह 47 में, माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया संक्रमण के 541 नए मामले सामने आए, जो कि सप्ताह 42 से तीन गुना से अधिक है, जब मामलों की संख्या 168 थी। मामलों की वास्तविक संख्या शायद बहुत अधिक है, क्योंकि हल्के लक्षणों वाले हर किसी का परीक्षण नहीं किया जाता है।


हालांकि, एम्बोर्ग ने कहा कि डेनमार्क के लिए मामले "असामान्य नहीं" हैं, जो ऐतिहासिक रूप से लगभग हर चार साल में माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया संक्रमणों की राष्ट्रव्यापी महामारी देखता है।


उन्होंने कहा कि घटना आमतौर पर शरद ऋतु और शुरुआती सर्दियों में सबसे अधिक होती है।
एम्बोर्ग ने कहा, पिछले चार वर्षों में, माइकोप्लाज्मा संक्रमणों की संख्या बहुत कम रही है, और इसलिए यह असामान्य नहीं है कि अब हमारे पास एक महामारी है। हम वास्तव में इसके लिए इंतजार कर रहे थे क्योंकि हमने कोविड-19 महामारी के बाद देश को बंद कर दिया था ।


यह रोग अक्सर हल्के फ्लू जैसे लक्षणों के रूप में थकान, सिरदर्द, गले में खराश और लंबे समय तक सूखी खांसी, विशेष रूप से रात की खांसी के साथ प्रकट होता है।


बहुसंख्यक लोगों को बुखार होता है, लेकिन आमतौर पर इतना अधिक बुखार नहीं होता है जितना कि इन्फ्लूएंजा और अन्य अधिक क्लासिक निमोनिया के साथ होता है।


पोस्ट में कहा गया है, इसने इसे 'कोल्ड निमोनिया' या 'अटिपिकल निमोनिया' का उपनाम दिया है, क्योंकि नियमित पेनिसिलिन का भी संक्रमण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।


पिछले हफ्ते, नीदरलैंड्स ने सरकार की निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त से बच्चों और युवाओं में निमोनिया के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि की सूचना दी फ्लूट्रैकर्स, एक संक्रामक रोग समाचार संदेश बोर्ड।
नेदरलैंड्स इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ सर्विसेज रिसर्च (एनआईवीईएल) के अनुसार पिछले हफ्ते, 5 से 14 साल की उम्र के 100,000 बच्चों में से 103 निमोनिया से पीड़ित थे।


नीदरलैंड्स के स्थानीय मीडिया ने बताया, यह सात दिन पहले दर्ज किए गए 83 से 24 प्रतिशत अधिक था, एनआईवीईएल के आंकड़ों से पता चला। यह कथित तौर पर हाल के वर्षों में एनआईवीईएल द्वारा दर्ज किया गया निमोनिया का सबसे बड़ा प्रकोप है।
2022 में, पीक फ्लू सीज़न के दौरान साप्ताहिक औसत में 58 बच्चों को निमोनिया से पीड़ित देखा गया। चार साल से कम उम्र के मामलों में भी 124 से बढ़कर 145 प्रति 100,000 हो गए।



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रात को सोने से पहले पैर के तलवों पर करें इस तेल की मालिश, दूर होती है कई समस्याएं

Mustard oil foot massage: आजकल की व्यस्त और भागदौड़ की जिंदगी में लगातार काम करने की वजह से अधिक थकान होने लगती है। जिसका सीधा असर हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। लेकिन सरसों के तेल से पैर के तलवों की मालिश करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को कई तरह के लाभ मिलते हैं। क्योंकि अधिक थकान होने पर सरसों के तेल से पैरों के तलवों की मालिश करने से थकान दूर होती है और सुकून भरी नींद आती है। साथ ही सरसों के तेल से पैरों की मालिश करने से कई तरह की बीमारियां दूर होती है। इसके अलावा तलवों की मालिश करने से शारीरिक और मानसिक आराम मिलता है। तो आइए जानते हैं सरसों के तेल से पैर के तलवों की मालिश करने के बारे में


सरसों के तेल से पैर के तलवों की मालिश करने के फायदे
1. तनाव और चिंता को दूर होता
तनाव और चिंता को दूर करने के लिए सरसों के तेल से पैर के तलवों की मालिश करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सरसों के तेल से पैर के तलवों की मालिश करने से तनाव और चिंता दूर होता है और मानसिक सुकून मिलता है।

2. सुकून भरी नींद आती
सुकून भरी नींद पाने के लिए सरसों के तेल से पैर के तलवों की मालिश करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सरसों के तेल से पैर के तलवों की मालिश करने से अनिद्रा की समस्या से छुटकारा मिलती है। साथ ही इससे थकान दूर होती है और दिमाग शांत होता है। जिससे सुकून भरी नींद आती है।

3. महिलाओं के लिए फायदेमंद
महिलाओं की कई परेशानियां दूर करने के लिए सरसों के तेल से पैर के तलवों की मालिश करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सरसों के तेल से पैरों की मालिश करने से पीरियड्स के दौरान होने वाली दर्द और ऐंठन से राहत मिलती है। साथ ही ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

4. जोड़ों के दर्द से आराम मिलता
जोड़ों के दर्द से आराम पाने के लिए सरसों के तेल से पैर के तलवों की मालिश करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि रात को सोते समय सरसों के तेल से पैरों की मालिश करने से जोड़ों के दर्द से आराम मिलता है। क्योंकि इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिससे नसों को आराम मिलता है और जोड़ों का दर्द कम होता है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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छाती में जमे कफ का रामबाण इलाज! ये घरेलू नुस्खे दिलाएंगे तुरंत राहत

Home Remedies: बदलते मौसम में लोग सबसे ज्यादा सर्दी-खांसी की समस्या का सामना करते हैं। आज के समय सर्दी-खांसी होना सबसे आम बात है। अक्सर सर्दी-खांसी होने पर छाती में कफ जमने की समस्या हो जाती है, जिसकी वजह से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। छाती में जमा कफ को बाहर निकालने के लिए लोग कई तरह-तरह की एंटीबायोटिक दवाओं का का सहारा लेते हैं, लेकिन फिर भी आराम नहीं मिलता है। लेकिन कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे भी है जिन्हें अपनाकर आप छाती में जमे कफ को बाहर निकाल सकते हैं। तो आइए जानते हैं इन घरेलू नुस्खे के बारे में जो छाती में जमे कफ को बाहर निकाल ने में मदद करते हैं

छाती में जमे कफ राहत दिलाने वाले घरेलू नुस्खे
काली मिर्च और शहद
छाती में जमे कफ को बाहर निकालने के लिए काली मिर्च और शहद का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि काली मिर्च और शहद में मौजूद तत्व छाती में जमे कफ को बाहर निकालने में मदद करते हैं। साथ ही ये गले में खराश और सर्दी-जुकाम की समस्या से राहत दिलाने में मदद करते हैं। इसलिए एक चम्मच में कुटी हुई काली मिर्च को लें और उसमें शहद मिलाकर सेवन करें।

यह भी पढ़े-पेट और कमर की चर्बी कम करने के आयुर्वेदिक उपाय, महीने में दिखेगा फर्क

तुलसी और अदरक की चाय
छाती में जमे कफ को बाहर निकालने के लिए तुलसी और अदरक की चाय का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि तुलसी और अदरक दोनों ही एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों से भरपूर होती हैं, जो सर्दी-खांसी, जुकाम से राहत दिलाने में मदद करती हैं। इसलिए तुलसी और अदरक की चाय पीने से छाती में जमे कफ को बाहर निकालने में मदद मिलती है। इससे कफ आसानी से बाहर निकल जाता है।

पुदीने का तेल
छाती में जमे कफ को बाहर निकालने के लिए पुदीने के तेल का इस्तेमाल करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि पुदीने का तेल छाती में जमें कफ को बाहर निकालने में प्राकृतिक रूप से मदद करता है। इसलिए गर्म पानी में पुदीने के तेल की कुछ बूंदे डालकर इससे भाप लेने से छाती में जमा कफ को बाहर निकलता है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Wednesday, 29 November 2023

पानी में हल्दी मिलाकर पीने से मिलते हैं यह 7 जबरदस्त फायदें

1. गुनगुना हल्दी वाला पानी पीने से दिमाग तेज होता है! सुबह के समय हल्दी का गुनगुना पानी पीने से दिमाग तेज और उर्जावान बनता है।

2.‌ आप यदि रोज़ हल्दी का पानी पीते हैं!तो इससे खून में होने वाली गंदगी साफ होती है!और खून जमता भी नहीं है!यह खून साफ करता है!और दिल को बीमारियों से भी बचाता है।

3. लीवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्दी का पानी किसी औषधि से कम नही है!क्योंकि हल्दी का पानी टाॅक्सिस लीवर के सेल्स को फिर से ठीक करता है! इसके अलावा हल्दी और पानी के मिले हुए गुण लीवर को संक्रमण से भी बचाते हैं।

4. हार्ट की समस्या से परेशान लोगों को हल्दी वाला पानी पीना चाहिए क्योंकि हल्दी खून को गाढ़ा होने से बचाती है जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है।

5. जब हल्दी के पानी में शहद और नींबू मिलाया जाता है!तब यह शरीर के अंदर जमे हुए विषैले पदार्थों को निकाल देता है!जिसे पीने से शरीर पर बढ़ती हुई उम्र का असर नहीं पड़ता है!हल्दी में फ्री रेडिकल्स होते हैं जो सेहत और सौंदर्य को बढ़ाते है...!!

6. शरीर में किसी भी तरह की सूजन हो और वह किसी दवाई से ना ठीक हो रही हो तो आप हल्दी वाला पानी का सेवन करें!हल्दी में करक्यूमिन तत्व होता है!जो सूजन और जोड़ों में होने वाले असहय दर्द को ठीक कर देता है! सूजन की अचूक दवा है हल्दी का पानी!

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mental health: स्टडी में सामने आया इंटरनेट का मेंटल हैल्थ पर प्रभाव

ऑक्सफोर्ड इंटरनेट इंस्टीट्यूट की ओर से जारी जर्नल क्लिनिकल साइकोलॉजिकल साइंस में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि इंटरनेट तकनीक और प्लेटफार्मों के नैगेटिव प्रभावों के बारे में लोकप्रिय धारणाओं के बावजूद इंटरनेट को अपनाया जा रहा है और इसका ब्रेन पर असर भी कम है। यह स्टडी 168 देशों में 15 से 89 वर्ष की आयु के दो मिलियन व्यक्तियों के डेटा के आधार पर की गई है। यहां के प्रोफेसर्स के अनुसार उन्होंने तकनीक और मानव कल्याण के बीच होने वाले प्रभावों को खोजा, लेकिन उन्हें किसी प्रकार के परिणाम नहीं मिले।

गहन डेटा का अध्ययन
शोधकर्ताओं ने समय और जनसंख्या जनसांख्यिकी दोनों के आधार पर वेलबीइंग और इंटरनेट अपनाने पर अब तक के सबसे व्यापक डेटा का अध्ययन किया। हालांकि इंटरनेट के उपयोग के प्रभावों को नहीं जांचा गया, लेकिन इस बात के संकेत जरूर मिल गए हैं कि इसका हैल्थ पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

जीवन से संतुष्ट
विभिन्न आयु समूह और जेंडर पर किए गए इस अध्ययन से ये जरूर सामने आया है कि इस अवधि के दौरान महिलाओं की जीवन संतुष्टि में वृद्धि हुई है। रिसर्चर्स ने पाया कि मोबाइल ब्रॉडबैंड अपनाने में वृद्धि से जीवन में अधिक संतुष्टि हुई है। हालांकि अभी इसपर और अध्ययन बाकि है।



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Tuesday, 28 November 2023

heart health: जानिए सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा

सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है धीरे-धीरे तापमान में गिरावट आने लगी है। इसका असर सेहत पर भी पड़ना शुरू हो गया है। सर्दी के मौसम में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार हाइपरटेंशन, डायबिटीज या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को ज्यादा सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। इस समय हृदय रोग का सर्वाधिक खतरा रहता है। तेज सर्दी में कार्डियक संबंधित समस्याओं से लेकर ब्रेन स्ट्रोक और लकवे का भी खतरा रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी बढ़ने के साथ-साथ अस्पतालों के आउटडोर में हृदय रोगियों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हो रही है।

बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.शशि मोहन शर्मा का मानना है कि हाइपरटेंशन के मरीजों में हार्ट डिजीज होने की संभावना अधिक होती है। उन्हें अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं डायबीटीज के मरीज को स्ट्रोक होने की संभावना अधिक होती है। सर्दी में शरीर को गर्म रखें। दर्द, जकड़न जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करें। चिकित्सक की परामर्श के बिना दवा न लें।

ऐसे बढ़ता है खतरा
सर्दी में आर्टरी सिकुड़ जाती है। आर्टरी में ब्लड भेजने के लिए हार्ट को ज्यादा काम करना पड़ता है।
ऑक्सीजन की कमी।
क्लॉटिंग का खतरा।
हृदय में ब्लड फ्लो तेज हो जाता है। सर्दी में तली भुना भोजन अधिक करना।
शराब और स्मोकिंग का अधिक सेवन।
तनाव और डिप्रेशन।
शारीरिक व्यायाम न करना।



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Monday, 27 November 2023

सर्दियों में फट गए हैं होठ ?, ऑयल मसाज से मिलेगा आराम

सर्दियों में वातावरण में नमी की वजह से होठों का फटना आम बात है। लेकिन फटे होठ जहां चेहरे की खूबसूरती को खत्म करते हैं, वहीं उनमें दर्द भी होता है, ऐसे में सर्दियों में लिप्स की देखरेख करना बहुत जरूरी है। सौंदर्य विशेषज्ञों का मानना है कि क्रीम, बाम या लिपस्टिक के साथ—साथ ऑयल मसाज काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। साथ ही डाइट में कुछ बदलाव करके भी लिप्स की सेहत को सुधारता जा सकता है। शरीर में विटामिन-ए, सी तथा बी-2 की कमी से कई बार होठों में दरारे आ जाती है तथा खून बहना शुरू हो जाता है।

बादाम और नारियल तेल
होठों को फटने से बचाने के लिए रोजाना बादाम या नारियल के तेल से होठों की मालिश कर सकते हैं। नारियल तेल से होठों की चमक बढ़ती है और उसका कालापन भी दूर होता है। नारियल तेल को पोषक तथा नमी बनाए रखने के गुणों से भरपूर माना जाता है। यह त्वचा को मुलायम तथा कोमल बनाता है। इसे होठों पर लगाने से सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणों के नुकसान को रोका जा सकता है तथा यह त्वचा की क्रीम से बेहतर सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

खान—पान में कीजिए बदलाव
बाहरी सौन्दर्य प्रसाधनों की बजाय अपने खान-पान पर ज्यादा ध्यान दीजिए। आप खट्टे फल, पका पपीता, टमाटर, हरी पत्तों वाली सब्जियां, गाजर, जैई तथा दूध वाले पदार्थो को जरूर शामिल कीजिए। हालांकि यदि आपको किसी तरह की हेल्थ प्रॉब्लम है तो चिकित्सक की सलाह से हीें अपनी डाइट में बदलाव करें।

चेहरे पर न लगाएं साबुन
अपने होठों पर साबुन या पाउडर के प्रयोग से परहेज कीजिए। चेहरे को पौंछने के लिए मुलायम कपड़े का इस्तेमाल करें। होठों की चमड़ी पतली और संवेदनशील होती है, ऐसे उसे रगड़कर नहीं पौंछना चाहिए।

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अब साबुन लड़ेगा मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों से

मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों में मौजूदा कीटनाशकों के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता के बीच यह खबर आशाजनक हो सकती है। प्रयोगशाला परीक्षणों और क्षेत्र परीक्षणों दोनों से पता चला है कि नियोनिकोटिनोइड्स, कीटनाशकों का एक विशेष वर्ग, मौजूदा कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोध दिखाने वाली लक्षित आबादी के लिए एक आशाजनक विकल्प है। नियोनिकोटिनोइड्स मच्छरों की कुछ प्रजातियों को तब तक नहीं मार सकते जब तक कि उनकी क्षमता को बढ़ाया न जाए और साबुन से इनकी शक्ति को बढ़ाया जा सकता है।

क्या है मलेरिया
मलेरिया एक विनाशकारी मच्छर जनित बीमारी है जो उप-सहारा अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में प्रचलित है, जिससे बुखार, थकान, सिरदर्द और ठंड लगती है। यह रोग घातक हो सकता है। रोग नियंत्रण केंद्र के अनुसार, 2020 में दुनिया भर में मलेरिया के अनुमानित 241 मिलियन मामले थे, जिसके परिणामस्वरूप 627,000 मौतें हुईं।

तेल आधारित साबुन
पीएलओएस नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज में प्रकाशित एक नए अध्ययन में टीम ने तीन कम लागत वाले अलसी तेल आधारित साबुन का चयन किया जो उप-सहारा अफ्रीका में प्रचलित हैं। टीम ने अध्ययन में लिखा है कि सभी मामलों में, कीटनाशकों ने क्षमता में काफी वृद्धि की है।

उम्मीद बरकरार
टीम को उम्मीद है कि कीटनाशकों को बढ़ाने के लिए कितने साबुन की आवश्यकता है, यह स्थापित करने के लिए अतिरिक्त परीक्षण किया जाएगा। शोधकर्ताओं के मुताबिक हम एक साबुन-कीटनाशक फॉर्मूलेशन बनाना पसंद करेंगे, जिसका उपयोग अफ्रीका में घर के अंदर किया जा सके और उपयोगकर्ताओं के लिए स्वस्थ हो।



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अजवाइन की पत्तियां फाइबर से भरपूर, जूस और मसालों के रूप में करें इस्तेमाल

अजवाइन की पत्तियां न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ा सकती हैं, बल्कि इससे पाचन क्रिया भी मजबूत होती है। आप अजवाइन का जूस भी पी सकते हैं और इसे सब्जी में मसालों के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। सर्दियों में इसकी पकोड़ियां भी बनाई जा सकती हैं। अजवाइन के पत्तों को इंडियन बेरीज के नाम से जाना जाता है। इनमें कई औषधीय गुण और पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इनमें विटामिन-ए, विटामिन-सी, फाइबर, प्रोटीन और फैट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। साथ ही, इनमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल, एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

बढ़ती है रोग—प्रतिरोधक क्षमता
अजवाइन की पत्तियों का इस्तेमाल करने से रोग—प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। साथ ही यदि आप इनका नियमित सेवन करते हैं तो हेल्थ में कई पॉजिटिव बदलाव देखने को मिलते हैं। साथ ही शरीर को संक्रमण से भी बचाया जा सकता है। वहीं संक्रमण से भी बचाव होता है।

पेट के लिए फायदेमंद
अजवाइन के पत्तों का रस पाचन को बेहतर बनाता है और पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। गैस्ट्रिक एसिड और डाइजेस्टिव एंजाइम्स को बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे एसेडिटी की समस्या भी दूर होती है।


जोड़ों के दर्द में मददगार
यदि आपको हड्डियों से संबंधित परेशानी है तो भी अजवाइन के पत्तों का सेवन कर सकते है। इसमें मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से जोड़ो का दर्द व सूजन कम की जा सकती है।

सर्दी—खांसी में उपयोगी
अजवाइन के पत्तों में एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो खांसी, जुकाम और अस्थमा जैसी सांस से जुड़ी परेशानियों के इलाज में प्रभावी हैं। यह श्वास नली को साफ करती है, ऐसे में पीसकर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

ऐसे कर सकते हैं इस्तेमाल
अजवाइन के पत्तों का इस्तेमाल मसाले के मिक्सचर में किया जा सकता है। सब्जी में तड़का लगाते समय इसे पीसकर डाल सकते हैं। किसी भी तरह सूप में इसका यूज किया जा सकता है। साथ ही हरी चटनी में भी आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। धनिए या फिर टमाटर की चटनी में अजवाइन काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

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ब्रेन पर इफेक्ट डाल सकता है क्लाइमेट चेंज

स्टडी के मुताबिक ब्रिटेन में जिनेवा, न्यूयॉर्क, शिकागो, वाशिंगटन, स्टैनफोर्ड, एक्सेटर विश्वविद्यालयों और बर्लिन में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट की टीमों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की घटनाएं ब्रेन की संरचना, कार्य और समग्र स्वास्थ्य को बदल सकती हैं, जबकि यह मूल्यांकन करने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है कि यह भलाई और व्यवहार में परिवर्तनों को कैसे समझा सकता है।

बदल सकता है सोचने का तरीका
पेपर के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के बारे में हमारे सोचने के तरीके, हमारे निर्णय और हमारी प्रतिक्रिया के तरीके को प्रभावित करने में तंत्रिका विज्ञान किस भूमिका निभा सकता है। बदलता पर्यावरण ब्रेन में बदलाव ला सकते है। 1940 के दशक से वैज्ञानिकों ने चूहों के अध्ययन से जाना है कि बदलते पर्यावरणीय कारक मस्तिष्क के विकास और लचीलेपन को गहराई से बदल सकते हैं।

विषैले पदार्थों के सम्पर्क में आ रहे हैं हम
शोध में मनुष्यों में भी यह प्रभाव देखा गया है कि मस्तिष्क प्रणालियों में गड़बड़ी पाई गई है, जिसमें संज्ञानात्मक उत्तेजना की कमी, विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना, खराब पोषण और बचपन में तनाव बढ़ना शामिल है। हालांकि पूरी तरह से आश्चर्य की बात नहीं है, नेचर क्लाइमेट चेंज जर्नल में प्रकाशित नया शोध उस गहरे प्रभाव को उजागर करता है जो किसी के पर्यावरण का उनके मस्तिष्क पर हो सकता है।



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Sunday, 26 November 2023

नॉनवेज की बजाय खाएंगे नट्स और फलियां, तो डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा होगा कम

बीएमसी मेडिसिन पेपर में प्रकाशित अध्ययन में 37 पूर्व अध्ययनों के परिणामों का विश्लेषण किया गया और इसके निष्कर्षों ने आहार में अधिक शाकाहार को शामिल करने के संभावित स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डाला। शोधकर्ताओं ने बताया, अध्ययन से संकेत मिलते हैं कि पशु-आधारित (जैसे, लाल और प्रसंस्कृत मांस, अंडे, डेयरी, पोल्ट्री, मक्खन) की बजाय पौधे-आधारित (जैसे, नट्स, फलियां, साबुत अनाज, जैतून का तेल) खाद्य पदार्थों को अपनाना कार्डियोमेटाबोलिक स्वास्थ्य में लाभकारी होता है।

एक अंडे की जगह नट्स का इस्तेमाल
उन्होंने पाया कि रोजाना एक अंडे की जगह नट्स लेने से हृदय रोग की मृत्यु दर कम हो जाती है। मक्खन के स्थान पर जैतून का तेल इस्तेमाल करने से भी ऐसे ही परिणाम प्राप्त हुए। वहीं रोजाना 50 ग्राम मांस के बदले 28 ग्राम नट्स लेने से कोरोनरी हृदय रोग का खतरा कम हो जाता है।

हालांकि विपरीत परिणाम भी
अध्ययन में विपरीत परिणाम भी देखने को मिले। अध्ययन में यह भी देखने में आया कि पोल्ट्री उत्पादों के सेवन करने के बाद भी कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा रहता है।



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Saturday, 25 November 2023

मोमोज का मजा दे रहा आंतों को सजा

गर्मागर्म मोमोज रेड चटनी के साथ अच्छे तो लगते हैं, लेकिन ये हैल्थ पर बुरा प्रभाव छोड़ सकते हैं। कई साइंटिफिक रीजन है, जिससे ये सामने आया है मोमोज को खाना आपके लिए नुकसान देह हो सकता है। यह प्योर मैदा से बना होता है और मैदा स्वास्थ्य के लिए वैसे भी हानिकारक होता है और जानिए मोमोज खाने के नुकसान।

सभी गुण निकल जाते हैं
मैदा से बनने वाले मोमोज में प्रोटीन और फाइबर नहीं होते है। मैदा तब बनता है जब गेहूं में से फाइबर निकाल लिए जाते हैं। इसके कारण ही मैदान अच्छी तरह से डाइजेस्ट नहीं हो पाता और वह आंतों में जाकर जमने लगता है। उबला होने की वजह से यह ज्यादा नुकसान दायक हो जाता है।

मिलाए जाते हैं कैमिकल
कुछ रिपोट्र्स के अनुसार मार्केट में मिलने वाले मोमोज पूरी तरह से सफेद होते हैं, सफेद बनाए रखने के लिए उनमें ब्लीच या दूसरे कैमिकल मिला दिए जाते हैं। जिससे किडनी की सेहत बिगड़ती है।

चटनी से भी नुकसान
मोमोज को लाल मिर्च की चटनी से खाया जाता है, वो भी स्वास्थ्य के लिए सही नहीं होती है। इससे पेट संबंधी कई समस्याएं हो सकती है। वहीं कुछ मोमोज बेचने वाले मोमोज में मोनोसोडियम ग्लूटामैट नामक केमिकल मिलाते हैं, जिससे टेस्ट बढ़ता है। यह शरीर के लिए किसी स्लो पॉइजन से कम नहीं हैं।

मोमोज के अंदर सड़ी—गली सब्जी
मोमोज के अंदर सब्जियां डाली जाती है, जो हमें अंदर होने के कारण दिखाई नहीं देती। ऐसे में बिना अंदर देखे ही सीधे मोमो मुंह के अंदर चला जाता है। ऐसे में जब भी मोमो खाएं कम से कम अंदर की सब्जियों को देखकर जरूर खाएं।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Friday, 24 November 2023

हल्दी को हल्के में मत लेना, इसके चमत्कारी गुणो के आगे ये 30 रोग घुटने टेक देते है

मधुमेह के रोग : 1 चम्मच पिसी हुई हल्दी को फांककर पानी पीने से मधुमेह में हो रहे बार-पेशाब से आराम मिलता है। या 8 ग्राम पिसी हल्दी रोजाना दो बार पानी के साथ फंकी लें। इससे, बार-बार और अधिक मात्रा में पेशाब का आना, ज्यादा प्यास लगना, आदि मधुमेह के रोगों से आराम मिलता है।

हाथ-पैर फटना : कच्चे दूध में पिसी हुई हल्दी मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से त्वचा मुलायम होती है। इससे हाथ-पैर भी नहीं फटते हैं और यदि फट भी गये हों तो उनमें हल्दी भर दें तो फायदा होगा।

त्वचा के रोग : हल्दी को पीसकर तिल के तेल में मिलाकर मालिश करें इससे चर्म रोग खत्म हो जाएगा। याअगर शरीर में खुश्की (चमड़ी सूख) गई हो तो सरसों के तेल में हल्दी को मिलाकर शरीर पर उसकी मालिश करने से लाभ होता है।

टांसिल का बढ़ना : 2 चुटकी पिसी हुई हल्दी, आधी चुटकी पिसी हुई कालीमिर्च और 1 चम्मच अदरक के रस को मिलाकर आग पर गर्म कर लें और फिर शहद में मिलाकर रात को सोते समय पीने से 2 ही दिन में टांसिल की सूजन दूर हो जाती है।

चेहरे की झांइयां : 10-10 ग्राम हल्दी और तिल को पीसकर पानी में मिलाकर रात को सोते समय चेहरे पर लगाएं और सुबह गर्म पानी से धो लें। इससे चेहरा चमक उठता है।

शरीर को शक्तिशाली बनाना : लगभग 500 ग्राम की मात्रा में हल्दी की गांठे और एक किलो बुझा हुआ चूना लेकर इसको एक मिट्टी के बर्तन में डालकर इसमें ऊपर से 2 लीटर पानी डालें। पानी डालते ही चूना पकने लगता है और जब यह ठण्डा हो जाए तो बर्तन को ढककर रख दें।

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इसके बाद 2 महीने बाद हल्दी की गांठों को निकालकर पीसकर चूर्ण बना लें। हल्दी की गांठों के चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में लेकर 10 ग्राम शहद के साथ मिलाकर लगातार 4 महीने तक रोजाना खाने से शरीर का खून साफ हो जाता है और इससे शरीर में भरपूर ताकत आती है।

चोट लगने पर : चोट लगने पर एक चम्मच हल्दी गर्म दूध के साथ पीने से दर्द और सूजन दूर हो जाती है। चोट लगी जगह पर हल्दी को पानी में मिलाकर उसका लेप लगाएं और अगर चोट ज्यादा गहरा हो तो उसमें हल्दी भर दें इससे चोट जल्द भर जाएगी। आंख में चोट लगने पर भी हल्दी को खाया जा सकता है। घी, आधा चम्मच सेंधानमक, थोड़ा-सा पानी मिलाकर हलुवा सा बनाकर चोट पर रखकर बांधें।

आधा लीटर उबलते हुए गर्म पानी में आधा चम्मच सेंधानमक डालकर हिलाएं फिर इसमें एक चम्मच हल्दी डालें और बर्तन को उतारकर रख दें जब पानी सेक करने लायक हो जाये तो कपड़ा भिगोकर चोट वाले अंग पर इससें सेंक करें। इससे दर्द में आराम मलेगा।

दांत दर्द : हल्दी, नमक और सरसों का तेल मिलाकर रोज मंजन करें। इससे दांत मजबूत बनेंगे।

हड्डी के टूटने पर : हड्डी के टूटने पर रोज हल्दी का सेवन करने से लाभ मिलता है। एक प्याज को पीसकर एक चम्मच हल्दी मिलाकर कपड़े में बांध लें। इसे तिल के तेल में रखकर गर्म करें और इससे फिर सेंक करें। कुछ देर सेंकने के बाद पोटली खोलकर दर्द वाले स्थान पर बांध दें।

पेट की गैस : पेट में जब गैस भर जाती है तो बहुत दर्द होता है। ऐसी स्थित में पिसी हुई हल्दी और सेंधानमक 5-5 ग्राम की मात्रा में पानी से लें।

गठिया : गठिया के रोग में हल्दी के लड्डू खाने से लाभ होता है।

चेचक : हल्दी और इमली के बीज समान मात्रा में पीसकर चुटकी भर प्रतिदिन 7 दिनों तक लेने से माता (चेचक) नहीं निकलती है। चेचक के निकलने पर इमली के बीज का चूर्ण हल्दी में मिलाकर लेने से चेचक जल्द ही ठीक हो जाता है। चेचक के दानों में अगर घाव हो जाये तो पान के कत्थे को हल्दी के संग सूखा ही छिड़के तो वह ठीक हो जायेगा।

सौन्दर्यवर्धक : पिसी हुई हल्दी, चंदन का बुरादा, पिसे हुए हरे नीम के पत्ते प्रत्येक 2-2 चम्मच में लेकर मिला लें और चेहरे पर मलें। इससे चेहरा चमक उठेगा और इस प्रयोग से चेहरे के कील मुंहासें, दाग-धब्बे दूर हो जाएंगे। कुछ हफ्ते लगातार इसे मलने से चेहरे का रंग भी साफ हो जाता है।

खुजली : शरीर के पीले रंग के दाने जिसमें मवाद भरी हो और उनमें खुजली हो तो, एक चम्मच हल्दी, एक कप गर्म दूध, चौथाई चम्मच देशी घी, स्वाद के लिए शक्कर डालकर सुबह शाम पियें।

आंखों के रोग : हल्दी को अरहर की दाल में पकायें और छाया में सुखा लें उसे पानी में घिसकर, शाम होने से पहले ही दिन में दो बार जरूर लगायें इससे झामर रोग, सफेद फूली और आंखों की लालिमा में लाभ होता है।

पथरी : हल्दी और पुराना गुड़ छाछ में मिलाकर सेवन करने से पथरी नष्ट हो जाती है।

मस्से : हल्दी की गांठ को अरहर की दाल में पकायें फिर छाया में सुखाकर, गाय के घी में पीसकर (मस्सों) पर उसका लेप करें, इससे मस्से तुरन्त नर्म हो जाते हैं और दर्द दूर होता है।



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पालक से दो गुना आयरन मिलता है इस हरे पत्ते से, खून की कमी, सांस की समस्याएं, वजन घटाने में है रामबाण

पालक के पत्तों के बाद अजवाइन की पत्तियां आयरन का सबसे अच्छा स्रोत हैं। इन पत्तियों में आयरन की मात्रा पालक के पत्तों से भी ज्यादा होती है। अजवाइन की पत्तियां खाने से खून की कमी, सांस की समस्याएं, वजन घटाने, और किडनी की पथरी जैसी कई बीमारियों से राहत मिल सकती है।

अजवाइन की पत्तियों के फायदे

पाचन में सुधार: अजवाइन की पत्तियां पाचन एंजाइमों की रिहाई को बढ़ावा देती हैं, जिससे पाचन में सुधार होता है और अपच, गैस, और सूजन जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
खून की कमी में लाभदायक: अजवाइन की पत्तियों में भरपूर मात्रा में आयरन होता है, जो खून की कमी को दूर करने में मदद करता है।
सांस की समस्याओं में राहत: अजवाइन की पत्तियों में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो खांसी, सर्दी, और जमाव जैसी सांस की समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं।
वजन घटाने में मदद: अजवाइन की पत्तियों में कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है, जो वजन घटाने में मदद कर सकता है।
मासिक धर्म दर्द से राहत: अजवाइन की पत्तियों के एंटी-स्पस्मोडिक गुण मासिक धर्म के दर्द और परेशानी को कम करने में मदद कर सकते हैं।
किडनी की पथरी को तोड़ने में मदद: अजवाइन की पत्तियों के मूत्रवर्धक गुण मूत्र उत्पादन को बढ़ाते हैं, जिससे किडनी की पथरी को तोड़ने में मदद मिल सकती है।

अजवाइन की पत्तियों का सेवन कैसे करें

- अजवाइन की पत्तियों को चबाकर खा सकते हैं।
- अजवाइन की पत्तियों का जूस पी सकते हैं।
- अजवाइन की पत्तियों को सब्जी या सलाद में डालकर खा सकते हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें

- अजवाइन की पत्तियों का सेवन सीमित मात्रा में करें।
- अगर आपको किसी तरह की कोई बीमारी है, तो अजवाइन की पत्तियों का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।

अजवाइन की पत्तियों के कुछ अतिरिक्त फायदे

- अजवाइन की पत्तियों में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर को मुक्त कणों से बचाने में मदद करते हैं।
- अजवाइन की पत्तियों में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
- अजवाइन की पत्तियों में विटामिन A होता है, जो आंखों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।

अजवाइन की पत्तियां एक पौष्टिक और बहुगुणी सब्जी है। इन पत्तियों का सेवन करने से कई तरह की बीमारियों से राहत मिल सकती है।



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एप्पल साइडर विनेगर से पाएं 7 जबरदस्त फायदे, बस करें ऐसा

एप्पल साइडर विनेगर एक ऐसा प्राकृतिक उपाय है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए कई फायदेमंद हो सकता है। यह अमले के रूप में प्राप्त होने वाला है और इसमें कई पोषण तत्व होते हैं जो हमें स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। यहां हम एप्पल साइडर विनेगर के फायदों और इसके सही तरीके से सेवन के बारे में बात करेंगे।

एप्पल साइडर विनेगर के फायदे:

वजन कम करने में सहारा: एप्पल साइडर विनेगर का सेवन वजन कम करने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद एसिड हमारी भूख को कम करने में मदद करता है और खाना खाने के बाद भी हमें जल्दी भरा महसूस कराता है।

डाइजेशन को सुधारना:
एप्पल साइडर विनेगर का सेवन अच्छी डाइजेशन को बढ़ावा दे सकता है और अपच की समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है।

इम्यून सिस्टम को मजबूत करना:
इसमें मौजूद ऐंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी का संयोजन हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान कर सकता है, जिससे हम बीमारियों से बच सकते हैं।

खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करना:
एप्पल साइडर विनेगर का सेवन कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है और दिल के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकता है।

सही तरीके से एप्पल साइडर विनेगर का सेवन:

पानी के साथ:
एप्पल साइडर विनेगर को पानी के साथ मिलाकर पीना सबसे सही तरीका है। एक चम्च एप्पल साइडर विनेगर को एक गिलास पानी में मिलाएं और इसे खाली पेट पीना फायदेमंद हो सकता है।

शहद के साथ:
यदि आप एप्पल साइडर विनेगर का स्वाद बढ़ाना चाहते हैं, तो आप इसे थोड़ा सा शहद के साथ मिलाकर पी सकते हैं। शहद न केवल स्वादिष्ट बनाता है बल्कि इसे पीने का अनुभव भी बेहतर बना देता है।

सलाद सॉस के रूप में:
आप एप्पल साइडर विनेगर को सलाद सॉस के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं। इससे आपके खाने में एक नए फ्लेवर का आनंद लिया जा सकता है और स्वास्थ्य के लाभों को भी मिल सकता है।

सावधानी: एप्पल साइडर विनेगर का अधिक सेवन करने से बचें और अगर आपको कोई रोग है तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।

एप्पल साइडर विनेगर एक स्वास्थ्यप्रद उपाय हो सकता है जो सावधानीपूर्वक और उचित मात्रा में लेने पर हमें कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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डब्ल्यूएचओ की चेतावनी: वर्ष 2050 तक हो सकती है हर साल 10 मिलियन लोगों की मौत, जानें पूरा मामला

जिस तेजी से एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल बढ़ रहा है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में ये एएमआर यानि रोगाणुरोधी प्रतिरोध के रूप में उभर सकता है। वैश्विक स्वास्थ्य निकाय ने एएमआर को 10 प्रमुख वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में से एक के रूप में मान्यता दी है, दुनिया भर में बैक्टीरिया एएमआर से सालाना अनुमानित 5 मिलियन मौतें होती हैं।

ऐसे हुआ अध्ययन

इस संबंध में डब्ल्यूएचओ-यूरोप ने एक सर्वे किया। सर्वे में 14 देशों के 8,221 प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिनमें ज्यादातर पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया के थे। एंटीबायोटिक्स लेने के सबसे आम कारणों में सर्दी, फ्लू जैसे लक्षण, गले में खराश और खांसी शामिल थे। ये लक्षण अक्सर वायरस के कारण होते हैं, लेकिन इनके खिलाफ एंटीबायोटिक्स देने पर भी इनका असर देखने को नहीं मिला।

रिसर्च से ये बात आई सामने
फ्रंटियर्स जर्नल में प्रकाशित निष्कर्षों से यह भी पता चला है कि चिकित्सक अधिकांश एंटीबायोटिक्स निर्धारित या सीधे देते हैं। 14 देशों में एक तिहाई उत्तरदाताओं ने बिना चिकित्सीय नुस्खे के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन किया। कुछ देशों में, 40 प्रतिशत से अधिक एंटीबायोटिक्स बिना चिकित्सकीय सलाह के प्राप्त की गईं।

लोग नहीं हैं अवेयर
सर्वे में यह भी सामने आया कि एंटीबायोटिक्स को लेकर लोगों में जागरुकता की कमी है। यह रिसर्च स्पष्ट रूप से शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को दर्शाता है। रोगाणुरोधी दवाओं की प्रभावशीलता को संरक्षित करने के लिए कई स्तरों पर हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है, जैसे समय पर टीकाकरण, बेहतर स्वच्छता और अनुचित नुस्खे में कमी।

अक्सर ये करते हैं गलती
अधिकांश लोग एंटीबायोटिक्स का कोर्स पूरा नहीं करते। तबीयत में सुधार होते देख वो दवा लेना बंद कर देते हैं। या कभी वायरल की चपेट में आएं तो उसके लिए सेव कर लेते है। इस तरह की प्रेक्टिस सही नहीं है और इससे नुकसान पहुंचता है।



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Thursday, 23 November 2023

इस ड्राईफ्रूट के छिलके का पाउडर, दाग-धब्बों और पिंपल्स का रामबाण इलाज

Beauty Tips: अखरोट के छिलके का पाउडर भी सुंदरता के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। अखरोट के छिलके में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एक्सफोलिएटिंग गुण होते हैं। ये गुण त्वचा को निखारने, दाग-धब्बों को दूर करने, मुंहासे और पिंपल्स को रोकने और त्वचा की झुर्रियों को कम करने में मदद करते हैं।

यह भी पढ़े-ब्लैक कॉफी के कमाल के फायदे, वजन कम करने से लेकर तनाव को दूर करने तक

अखरोट का सेवन करना स्वास्थ्य और स्किन दोनों के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। अखरोट कई सारे पोषक तत्वों के गुणों से भरपूर होता है। अखरोट पाया जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड स्किन के लिए काफी फायदेमंद होता है। लेकिन क्या आपको पता है अखरोट की तरह ही इसके छिलके से बने पाउडर का इस्तेमाल करने से स्किन को कई तरह के लाभ मिलते हैं। जी हां, जिस अखरोट के छिलके को हम बेकार समझ कर फेंक देते हैं, वह स्किन के लिए बहुत ही लाभकारी है। इससे स्किन के डेड सेल्स बाहर निकल जाते हैं और स्किन पर ग्लो आती है। साथ ही अखरोट के छिलके से बने पाउडर का इस्तेमाल करने से दाग-धब्बें दूर होते है। तो आइए जानते स्किन के लिए अखरोट के छिलके से बने पाउडर का इस्तेमाल करने से मिलने वाले फायदे के बारे में


स्किन के लिए अखरोट के छिलके के फायदे
दाग-धब्बों को दूर करने में फायदेमंद
दाग-धब्बों को दूर करने के लिए अखरोट के छिलके से बने पाउडर का इस्तेमाल करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि अखरोट के छिलके में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो स्किन के दाग-धब्बों और आंखों के नीचे के काले घेरों को कम करने में मदद करते हैं। जिससे स्किन पर निखार आती है।


डेड स्किन सेल्स को हटाने में फायदेमंद
डेड स्किन सेल्स को हटाने के लिए अखरोट के छिलके से बने पाउडर का इस्तेमाल करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि चेहरे पर अखरोट के छिलके के पाउडर का इस्तेमाल करने से चेहरे से मृत कोशिकाएं बाहर निकालती है और चेहरे के नीचे की साफ स्किन को बाहर लाने में मदद मिलती है।

ऑयली स्किन को दूर करने में फायदेमंद
ऑयली स्किन को दूर करने के लिए अखरोट के छिलके से बने पाउडर का इस्तेमाल करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि ऑयली स्किन पर अखरोट के छिलके को पीसकर उनका फेस मास्क बनाकर लगाने से ऑयली और चिपचिपी स्किन को दूर करने में मदद मिलती है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Neem Flower Benefits: नीम के फूलों का चमत्कारी लाभ, जानकर रह जाएंगे हैरान

Neem Flower Benefits: नीम का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। नीम का पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर होता है। आयुर्वेद में नीम के पेड़ के सभी हिस्सों जैसे फलों, पत्तियों, छाल और फूलों का इस्तेमाल तरह-तरह के रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। नीम कई सारे पोषक तत्वों के गुणों से भरपूर होता है। साथ ही इसमें नीम में एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटीमाइक्रोबियल, एंटीपैरासिटिक और एंटीडायबिटिक गुण मौजूद होते हैं। नीम की तरह ही इसके फूल भी सेहत के लिए लाभकारी है। जी हां, नीम के फूल का इस्तेमाल करने से सेहत और स्किन दोनों को कई तरह के लाभ मिलते हैं। नीम का फूल भी कई बीमारियों को दूर करने में फायदेमंद माना जाता है। तो आइए जानते हैं नीम के फूल से मिलने वाले फायदे के बारे में

नीम के फूल के फायदे
ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में फायदेमंद
ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए नीम के फूल का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। नीम के फूल में एंटीडायबिटीक गुण पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को नीम के फूलों का पाउडर का सेवन जरूर करना चाहिए।

यह भी पढ़े-ब्लैक कॉफी के कमाल के फायदे, वजन कम करने से लेकर तनाव को दूर करने तक

स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद
स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए के लिए नीम के फूल का इस्तेमाल करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। नीम के फूल में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। साथ ही फोड़े-फुंसियों के इलाज में नीम के फूलों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे स्किन की अशुद्धियों को ठीक करने में मदद मिलती है। इसलिए स्किन पर नीम के फूलों को सुखाकर पाउडर बनाकर लगाएं।

पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में फायदेमंद
पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने के लिए के लिए नीम के फूल का इस्तेमाल करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। नीम के फूलों का इस्तेमाल करने से कब्ज, गैस और अपच की समस्या से राहत मिलती हैं।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Wednesday, 22 November 2023

Bone health: कोरोना से बिगड़ गई हड्डियों की सेहत, स्टडी में खुलासा

स्लोवाकिया में कोमेनियस विश्वविद्यालय के रिसर्चर्स के अध्ययन में 387 यंग एडल्ड शामिल थे, जिनकी हड्डियों के स्वास्थ्य का माप कोविड-19 महामारी से पहले लिया गया था और 386 जिनका माप महामारी के दौरान सितंबर 2020 से नवंबर 2022 तक लिया गया था। जिसमें सामने आया कि कोरोना के दौरान बदली लाइफस्टाइल के कुछ बदलावों ने अस्थि खनिज घनत्व और कुल अस्थि खनिज सामग्री को कम किया है।

बोन मिनरल्स डेंसिटी में कमी
रिसर्चर्स के मुताबिक कोविड-19 महामारी के कारण युवा वयस्कों में अस्थि खनिज घनत्व में महत्वपूर्ण कमी आई है। लंबे-कोविड-सिंड्रोम के एक महत्वपूर्ण लक्षण के रूप में इस महामारी से संबंधित हड्डी के ऊतकों में कमी का मूल्यांकन करने के लिए अतिरिक्त शोध की आवश्यकता है। उनके मुताबिक महामारी के बाद सीनियर सिटीजंस की बोंस की जांच की जानी चाहिए।

पहले चूहों पर किया था अध्ययन
चूहों पर किए गए पिछले अध्ययन से पता चला है कि SARS-CoV-2 संक्रमण सूजन का कारण बनता है जिससे हड्डियों की संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकते हैं। जर्नल ऑफ ऑर्थोपेडिक रिसर्च में प्रकाशित अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि कोविड-19 वाले लोगों को दीर्घकालिक ऑर्थोपेडिक परेशानियां हो सकती है। फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। अध्ययन में, जिन चूहों में कोविड-19 था, उनमें हड्डियों का महत्वपूर्ण नुकसान देखा गया। इस नुकसान से हड्डी की यांत्रिक शक्ति कम हो गई और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ गया।



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डायबिटीज टाइप-1 और टाइप-2 में अंतर, जानें किन लक्षणों से पहचानें

Diabetes Diet: डायबिटीज में ब्लड शुगर को कम करने में कुछ फूड्स बहुत काम आते हैं, वहीं कुछ फूड्स अचानक से शुगर बढ़ा देते हैं। ऐसे में टाइप वन और टाइप टू डायबिटीज के मरीजों के लिए क्या खाना बेहतर है, चलिए जानें।

ब्लड शुगर कभी भी घट या बढ़ सकता है। खासकर डायबिटीज के मरीजों अपने शुगर लेवल पर हमेशा नजर रखनी चाहिए। यहां आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो शुगर में जरूर खाने चाहिए। साथ ही ये भी बताएंगे कि किन फूड्स को खाने से बचना चाहिए।

डायबिटीज दो तरह का होता है- टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज
टाइप 1 डायबिटीज- टाइप 1 डायबिटीज किसी भी उम्र में हो सकता है। बच्चों या युवाओं में होने वाली डायबिटीज टाइप वन ही होती है। ये एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर इंसुलिन बनाना अपने आप ही बंद हो जाता है। इस बीमारी में कोशिकाएं इंसुलिन बनाने वाले अग्नाशय की कोशिकाओं पर हमला कर उन्हें खत्म कर देती है। टाइप वन डायबिटीज जन्मजात भी हो सकती है।

टाइप 2 डायबिटीज- टाइप 2 डायबिटीज के कई कारण होते हैं। मोटापा, हाइपरटेंशन और खराब लाइफस्टाइल और खानपान इस बीमारी के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसमें शरीर में इंसुलिन कम बनने लगता है या कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं होती हैं। टाइप 2 डायबिटीज अधिकतर वयस्क लोगों में पाया जाता है।

डायबिटीज में क्या खाएं-क्या नहीं (Foods To Eat With Type 2 Diabetes)
डायबिटीज के मरीजों को ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जिसमें पोषक तत्व जैसे फाइबर, विटामिन और मिनरल्स की मात्रा काफी अधिक हो। लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड का सेवन करना डायबिटीज में जरूरी है। ये वो फूड होते हैं जो पेट में जाकर तुरंत नहीं टूटते और इससे ब्लड में शुगर असानी से नहीं घुलती।

टाइप 2 डायबिटीज के मरीज इन चीजों को करें अपनी डाइट में शामिल
फ्रूट्स (सेब, संतरा, बेरीज, मेलन, आड़ू) - सब्जियां (ब्रोकली, फूलगोभी, पालक, खीरा आदि) - साबुत अनाज (किनोआ, ओट्स, ब्राउन राइस आदि)
फलियां (बीन्स, दाल, चना, सोयाबीन)
नट्स (बादाम, अखरोट, पिस्ता, काजू )
बीज (चीया सीड्स, कद्दू के बीज, अलसी के बीज, भांग के बीज )
प्रोटीन-युक्त चीजें (सीफूड, टोफू, लो फैट रेड मीट आदि)
ब्लैक कॉफी, फीकी चाय, सब्जियों का जूस
डायबिटीज के मरीज ना करें इन चीजों का सेवन- (Foods Not To Eat With Type 2 Diabetes)
हाई फैट मीट - फुल फैट डेयरी प्रोडक्ट्स (फैट मिल्क, बटर, चीज़)
मीठी चीजें (कैंडीज, कुकीज, मिठाई, बेक्ड चीजें, आइस क्रीम) मीठे पेय पदार्थ (जूस, सोडा, मीछी चाय, स्पोर्ट्स ड्रिंक्स), स्वीटनर्स (टेबल शुगर, ब्राउन शुगर, शहद, मेपल सिरप)
प्रोसेस्ड फूड (चिप्स, प्रोसेस्ड मीट, माइक्रोवेव में बनें पॉपकॉर्न)
ट्रांस फैट्स (फ्राइड फूड्स, डेयरी मुक्त कॉफी क्रीमर आदि)

कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पर रखें नजर ( Type 2 Diabetes Carb Counting)
सीमित मात्रा में कार्ब्स का सेवन करना ब्लड शुगर के मरीज के लिए बेहद जरूरी है। गेहूं, सफेद चावल आदि - सूखे बीन्स, दालें और अन्य फलियां - आलू और बाकी स्टार्च युक्त फूड्स, फ्रूट्स और फ्रूट जूस - दूध और योगर्ट (दही), प्रोसेस्ड स्नैक्स आदि से दूरी बनाए रखें।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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'रेड हॉट ड्रिंक' से हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और मोटापा दूर, जानें कैसे बनाएं

Red Tea for Health: हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल ये दो ऐसे रोग हैं जो सीधे हार्ट पर असर डालते हैं। हाई बीपी से हार्ट में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, कोलेस्ट्रॉल रक्त वाहिकाओं में जमा होकर उन्हें अवरूद्ध कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

 

अगर आप हाई बीपी या कोलेस्ट्रॉल जैसी कई बीमारियों से जूझ रहे तो आपके लिए रेड हॉट ड्रिंक दवा की तरह काम करेगी। नेचुरली आप अपनी बीमारियों को आसानी से काबू रख सकेंगे।

उच्च रक्तचाप यानि हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल दोनों ही बीमारियों में ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। वहीं, डायबिटीज और मोटापा भी एक बड़ा कारण होता है हार्ट फेल का। इसलिए इन सभी बीमारियों को काबू रखने में हिबिस्कस टी यानी गुड़हल की चाय को औषधिय समान बताया गया है।

हिबिस्कस टी पर जर्नल न्यूट्रिशन रिव्यूज में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ये हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और डायबिटीज जैसे रोगों में बेहद फायदेमंद है। तो चलिए जानें किन-किन बीमारियों में ये रेड हॉट ड्रिंक यानी गुड़हल की चाय फायदेमंद हैं।

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1. एंटीऑक्सीडेंट इम्युनिटी बढ़ाती है
गुड़हल में बीटा-कैरोटीन, विटामिन सी और एंथोसायनिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। एंटीऑक्सिडेंट से भरे होने के कारण ये चाय इम्युनिटी बूस्टर होती है और इंफेक्शन आदि से बचाती है। साथ ही एंटीऑक्सिडेंट शरीर के भीतर मुक्त कणों के रूप में जाने वाले हानिकारक अणुओं को नष्ट कर देते हैं। फ्री रेडिकल्स उन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं जो कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों में योगदान करती हैं। मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से लड़ने के लिए ये एंटीऑक्सिडेंट बहुत काम आते हैं।

2. सूजन से लड़ती है
हिबिस्कस टी सूजन से लड़ने वाली होती है। अगर शरीर में कहीं भी सूजन है तो आपको इसकी चाय पीनी चाहिए। ये जोड़ों के दर्द को भी कम करती है। कैंसर, अस्थमा, अल्जाइमर रोग, हृदय रोग और रुमेटीइड गठिया आदि में ये चाय दवा की तरह काम करती है।

3. रक्तचाप कम करने वाली
उच्च रक्तचाप के साथ ये दिल का दौरा, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी समस्याओं में भी बेहद फायदेमंद होती है।

4. कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक
उच्च कोलेस्ट्रॉल के साथ ही ये हाई कोलेस्ट्रॉल में भी कारगर है। ये नसों में चिपके मोम जैसे लिसलिसे फैट को पिघालाकर बाहर करती है। इससे धमनियों की सूजन भी कम होती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।

5. वजन घटाने वाली
हिबिस्कस टी वेट लॉस में भी मददगार है। ये मेटाबॉलिक रेट को बढ़ाती है जिससे शरीर में जमा चर्बी पिघलने लगती है।

6. बैक्टीरिया से लड़ता है
गुड़हल के अर्क में खतरनाक जीवाणुओं को मारने का दम होता है। यही कारण है कि ये बैक्टरियल इंफेक्शन को दूर करने में कारगर है।

7. लिवर-किडनी के लिए भी हेल्दी
हिबिस्कस लीवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। अर्क अपने शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि के कारण, विभिन्न प्रकार के विषाक्त पदार्थों से जिगर की रक्षा करता है। साथ ही किडनी के फिल्टरेशन में भी मददगार है। इससे शरीर डिटॉक्स होता है।

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Tuesday, 21 November 2023

खजूर के बीज: कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और वजन घटाने के लिए रामबाण

Ways to use date seeds: खजूर खाकर अगर आप उसके बीज को बेकार समझ फेंक देते हैं तो ये खबर आपके लिए है। खजूर के बीज कई समस्याओं का इलाज कर सकते हैं।


खजूर ही नहीं, खूजर के बीज भी औषधिय गुणों से भरे होते हैं। खजूर के बीज सामान्य समस्याओं में ही नहीं, कई गंभीर बीमारियों का इलाज करने में भी कारग है। तो चलिए आपको खजूर के बीज का प्रयोग और इसके फायदे बताएं।

डाइटरी फाइबर से भरे खूजर के बीज के फायदे
1. हाई कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर रहेगा कंट्रोल
खूजर के बीज की कॉफी बना कर पीना शुरू कर दें। कैफीन फ्री एनर्जी बूस्टर की तरह इसके बीज काम करते हैं। वहीं इनके बीज में बैड कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड शुगर को कंट्रोल करने का भी गुण होता है। साथ ही ये शारीरिक कमजोरी को भी दूर करते हैं।

कैसे बनाएं खूजर के बीज की कॉफी
खजूर के बीज को ड्राई रोस्ट करके पीस लें। अब इसे आप ब्लैक कॉफी की तरह बना लें। चाहें तो इस कॉफी में दालचीनी और इलाइची पाउडर मिला लें।

2. कब्ज और आंत की समस्या में लाभकारी
खजूर के बीज रोस्ट करने के बाद आप इसके किसी भी रूप में ले सकते हैं। फाइबर से भरे इसके बीज कब्ज से लेकर आंत को साफ करने में भी काम आते हैं।

3. डेट सीड एनिमिया में लाभकारी
खजूर ही नहीं, खजूर के बीज भी खून बढ़ाने में काम आते है। खजूर के बीज का प्रयोग आप सलाद के ऊपर या मिल्क शेक आदि में कर सकते हैं।

4. स्क्रबिंग से दूर होंगा कालापन
डेट सीड पाउडर को बॉडी स्क्रब की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे शरीर का कालापन दूर होता है और शरीर की डेड स्किन हटती है। इससे शरीर और चेहरे पर निखार आता है।

यह भी पढ़े-नाखूनों से पता चलेगा कि आपको विटामिन B12 की कमी है, जानें ये 3 संकेत

5. डेट सीड वेट लॉस में कारगर
वेट कम करने के लिए अगर आप डेट सीड टी पीना शुरू कर दे तो ये मेटाबॉलिक रेट को बढ़ा सकता है। आप चाय या कॉफी कुछ भी पीएं, लेकिन उसमें दूध का प्रयोग न करें। चाय में शहद और नींबू का प्रयोग कर सकते हैं।

कैसे बनाएं डेट सीड पाउडर?
इसे बनाने का सबसे आसान तरीका यही है कि आप खजूर के बीज को 24 घंटे के लिए भिगो दें और फिर उसे सूखा कर ग्राइंड कर लें या भून कर ग्राइंड कर लें।

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ये सप्लीमेंट बढ़ा सकता है ब्लड क्लॉटिंग का खतरा, जानिए इसके नुकसान

Blood Clotting Reason: खून थक्के बनना एक सामान्य प्रक्रिया है जो शरीर को चोट या संक्रमण से बचाने में मदद करती है। हालांकि, कुछ स्थितियों में, खून थक्के बनना एक गंभीर समस्या हो सकती है, जैसे कि स्ट्रोक, दिल का दौरा, या पल्मोनरी एम्बोलिज़्म।

हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि केवल एक ही सप्लीमेंट खून थक्के बनने की संभावना को 63% तक बढ़ा सकता है। ये सप्लीमेंट है टेस्टोस्टेरोन हार्मोन सप्लीमेंट।


शरीर में विटामिन, मिनरल्स और हार्मोंस की कमी को पूरा करने के लिए अधिकतर ही उसके सप्लीमेंट का लोग प्रयोग करते हैं, लेकिन क्या आपको ता है कि नेचुरली विटामिन-मिनरल्स या हार्मोंस को बढ़ाना सेहतमंद होता है, लेकिन सप्लीमेंट के जरिये इनकी पूर्ति शरीर को कई बार बीमारियों का शिकार भी बना देती है?

ये सप्लीमेंट है टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बढ़ने के लिए यूज होने वाली दवा। शरीर में जब टेस्टोस्टेरोन की कमी होती है तो कई बार टेस्टोस्टेरोन बूस्टर दिया जाता है या लोग खुद ही उसे लेने लगते हैं।

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टेस्टोस्टेरोन हार्मोन सप्लीमेंट की जरूरत क्यों होती है
टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पुरुषों में आम तौर पर कामेच्छा की कमी शीघ्रपतन, एकाग्रता में कमी, शारीरिक कमजोरी, मांसपेशियों की कमजोरी, स्मृति दोष या उदासी को दूर करने के लिए दी जाती है। कई मामलो में महिलाओं को भी ये तब दी जाती है जब वह सेक्सुअली एक्टिव नहीं होती ह्रैं। टेस्टोस्टेरोन हार्मोन यौन क्षमता का विकास के साथ शरीर को नियंत्रित रखता है।

टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंट के नुकसान
टेस्टोस्टेरोन की कमी दूर करने वाली सप्लीमेंट दवाएं सीधे ब्लड सर्कुलेशन पर असर दिखाती हैं और खून कई बार इनसे बेहद गाढ़ा हो जाता है और थक्के भी बनने लगते है। ये थक्के ब्डल सर्कुलेशन को रोकते हैं और कहीं भी बन सकते हैं। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और पैराइलसिस का खतरा बढ़ता है। इन दवाओं से 63 प्रतिशत बढ़ ब्लड क्लाटिंग की संभावना बढ़ जाती है।

अगर आप टेस्टोस्टेरोन हार्मोन सप्लीमेंट का उपयोग कर रहे हैं, तो आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

- अपने डॉक्टर से सलाह लें कि क्या यह सप्लीमेंट आपके लिए सुरक्षित है।
- सप्लीमेंट का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर को अपनी सभी वर्तमान दवाओं के बारे में बताएं।
- सप्लीमेंट का उपयोग करते समय अपने रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों की निगरानी करें।

शोधकर्ताओं का कहना है कि टेस्टोस्टेरोन हार्मोन सप्लीमेंट का उपयोग करने से पहले लोगों को डॉक्टर से बात करनी चाहिए। विशेष रूप से, उन लोगों को जिन्हें खून के थक्के बनने का खतरा अधिक होता है, जैसे कि धूम्रपान करने वालों, मोटे लोगों, और उच्च रक्तचाप वाले लोगों को टेस्टोस्टेरोन हार्मोन सप्लीमेंट का उपयोग करने से बचना चाहिए।

यह भी पढ़े-डायबिटीज के मरीजों के लिए खुशखबरी! ये दो चीजें करेंगी ब्लड शुगर को कंट्रोल

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Monday, 20 November 2023

jaundice case study: पीलिया से मिला 10 दिनों में छुटकारा, सिर्फ नारियल पानी, रसगुल्ला, गन्ने के जूस का इस तरह किया सेवन

मेरा नाम रूचि शर्मा है। मुझे पिछले महीने पीलिया हो गया था। सबसे पहले बुखार आया। मुझे लगा तीन दिन में सही हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तीसरे दिन उबाके और कुछ भी खाने का मन नहीं हुआ। कब्ज और पेट में दर्द से परेशानी होने लगी। अचानक यूरीन का रंग गहरा पीला आने लगा। टेस्ट कराए तो पता चला मेरा बिलीरुबिन लेवल तीन से ज्यादा है और एसजीओटी और एसजीपीटी का स्तर करीब चार हजार के करीब है, जिसकी सामान्य रेंज 50 होती है। मतलब मेरे लिवर को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है। डॉक्टर्स को दिखाया तो उन्होंने कुछ दवाएं दी और डाइट का ध्यान रखने के लिए कहां और कुछ टेस्ट भी करवाएं। लिवर से संबंधित पांच टेस्ट करवाएं, जिसमें हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसे टेस्ट भी शामिल थे। किसी में भी कुछ नहीं निकला।

मैंने ऐसे बदली डाइट
मैंने लिक्विड्स पर ज्यादा ध्यान दिया। पीलिया पता चलने के दो से तीन दिन तक मुझसे कुछ भी नहीं खाया जा रहा था। फिर मैंने नारियल पानी पीना शुरू किया है। शुरू के पांच दिन सुबह और शाम नारियल पानी पीया। मुनक्का लिया, दूध बिल्कुल भी नहीं लिया। ब्रेकफास्ट में रसगुल्ला खाया। दिन के समय में गन्ने का जूस लेने लगी।
और हर आधे घंटे के बाद पानी पीया, इससे यूरीन में सुधार आया। पांच दिन बाद थोड़ी भूख लगने लगी तो उपमा और उबले चावल खाएं। धीरे—धीरे मूंग की दाल का सूप लेने लगी। दवाइयों और डाइट से स्वास्थ्य में सुधार आने लगा। आंखों का पीलापन भी दूर होने लग गया।

रोटी नहीं खाई
पीलिया में मैंने 15 दिन रोटी नहीं खाई। उपमा, इडली, दलिया और खिचड़ी की डाइट ली। गन्ने और नारियल के अलावा पपीते और मौसमी का जूस पीया। डिनर में मूली और टमाटर का सलाद लिया और सबसे जरूरी सौंफ का पानी भी पीया। इन सभी से मुझे बहुत आराम मिला। इस दौरान दूध, चाय और कॉफी का सेवन नहीं किया। बाहर का खाना तो अभी तक शुरू नहीं किया।

पीलिया की यह रही वजह
लिवर सबंधित कई टेस्ट कराने में जब कुछ निकलकर नहीं आया, तो डॉक्टर्स के मुताबिक कुछ गलत खाने में आ गया था, जिसने लिवर में सूजन बढ़ा दी, इस कारण अचानक से लिवर में परेशानी हो गई।

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रसगुल्ला खाने के फायदे, जानिए दिन में कितने रसगुल्ले खा सकते हैं आप

रसगुल्ला लोगों की पसंदीदा मिठाई होने के साथ ही एक बेहतरीन प्रोटीन सोर्स भी है। इसे खाने से कई बीमारियों में राहत मिलती हैं। चिकित्सकों के मुताबिक पीलिया में रसगुल्ला मदद करता है, कई पीलिया रोगी दिन में दो से तीन रसगुल्ले भी खाते हैं, जिससे उन्हें फायदा मिलता है। जानकारी के अनुसार रसगुल्ला कम कैलोरी वाली मिठाइयों में शामिल होता है। 100 ग्राम रसगुल्ले में 153 कैलोरी कार्बोहाइड्रेट, 17 कैलोरी फैट और 16 कैलोरी प्रोटीन होता है। रसगुल्ला एनर्जी से भरपूर होता है। इसके अतिरिक्त रसगुल्ले में भरपूर लैक्टोएसिड और केसिन पाया जाता है। जिससे भी सेहत को फायदा होता है।

पीलिया में रोज सुबह खाएं रसगुल्ला
रसगुल्ला खाली पेट भी खाया जा सकता है, ऐसे में पीलिया रोगी सुबह यदि रोजाना रसगुल्ला खाएंगे तो उन्हें आराम मिल सकता है। इससे लिवर को आराम मिलता है। इसमें प्रोटीन भी होता है, जो पीलिया के दौरान शरीर को पहुंचे नुकसान को कम करता है।


प्रेग्नेंसी में फायदेमंद
प्रेग्नेंसी के दौरान भी रसगुल्ला से काफी फायदा हो सकता है। हालांकि गर्भवती महिलाओं को रोजना दो रसगुल्ले से ज्यादा का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे उन्हें डायबिटीज हो सकती है। रसगुल्ले को पूरी तरह निचोड़कर ही खाएं, ताकि उसमें से शुगर लेवल कम हो जाए।

आंखों के लिए फायदेमंद
रसगुल्ला आंखों के लिए भी फायदेमंद होता है। इससे आंखों की जलन दूर होती है।
आंखों का पीलापन भी दूर होता है। इसमें कैल्शियम की मात्रा भी होती है, जिससे हड्डियों की सेहत सुधरती है। जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।

यूरिन की जलन होती है दूर
रसगुल्ले के सेवन से यूरिन की जलन भी दूर होती है। यह ठंडी तासीर का होता है, बॉडी के अंदर की जलन को सही करता है। इससे मांसपेशियों में भी मजबूती बनी रहती है। हालांकि डायबिटीज के मरीजों को रसगुल्ले का सेवन नहीं करना चाहिए।

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सुबह के समय होती है थकान...तो ये करें उपाय

अक्सर सर्दियों में कई लोगों को सुबह के समय थकान और कमजोरी महसूस होती है। इसकी एक वजह यह भी होती है कि वर्कआउट के लिए ये बिल्कुल भी समय नहीं निकालते। इस कारण तनाव भी बना रहता है। किसी तरह की बीमारी नहीं होने के बाद भी इनमें इस तरह की समस्या ज्यादा रहती है। कुछ ऐसे टिप्स हैं, यदि इन्हें अपनाया जाए तो थकान और कमजोरी से कुछ हद तक राहत मिल सकती है।

मेडिटेशन
सुबह के समय आधा घंटा मेडिटेशन के लिए जरूर निकालें। इससे मानसिक तनाव कुछ हद तक कम होगा। मेंटली रिलेक्स रहने की स्थिति में तनाव से भी राहत मिलेगी। कई बार अनहेल्दी स्लीप पैटर्न की वजह से भी थकान महसूस होती है, इसमें भी मेडिटेशन से राहत मिल सकती हैं।

स्ट्रेचिंग
यदि शरीर में अक्सर अकड़न महसूस हो तो कुछ आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज या योग किया जा सकता है। इससे भी काफी हद तक राहत मिलती है। स्ट्रेचिंग करने से शरीर की मांसपेशियों को खुलने में मदद मिलती है। सुबह के समय आप जुम्बा भी कर सकते हैं। इससे वर्कआउट और म्यूजिक दोनों के फायदे मिलते हैं।

वॉकिंग
सुबह के समय 30 मिनट वॉक से भी फायदा हो सकता है। ताजी हवा न सिर्फ मूड को रिफ्रेश करती हैं, बल्कि पूरे दिन ताजगी भी बनाए रखती है। इस माहौल में वॉक आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। कई रिसर्च बताते हैं कि फ्रेश और एक्टिव बने रहने में वॉक से मदद मिलती है।

मसाज
सर्दियों में मसाज का भी अपना महत्व होता है। इससे भी बहुत हद तक रिलेक्स रहा जा सकता है। गुनगुने तेल की मालिश से मांसपेशियों को रिलेक्स मिलता हैै। यदि आप रात के समय पैरों के तलवे पर इसे लगाकर सोएंगे तो आराम मिलेगा। सुबह के समय गर्म पानी से नहाना भी रिलेक्सफुल रहता है।

डाइट
थकान और कमजोरी की एक वजह प्रॉपर डाइट न होना भी हो सकती है। इस स्थिति से बचने के लिए अपनी डाइट पर ध्यान देना जरूरी है। ब्रेकफास्ट स्किप न करें। हेल्दी स्नेक्स व फ्रूट्स लें। मॉर्निंग मील से काफी फायदा होता है।

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कोविड से गई स्वाद और गंध में तीन साल बाद आता है सुधार

गंध और स्वाद की हानि कोविड संक्रामक रोग के शुरुआती लक्षणों में से एक थी। हालांकि, बाद के वेरिएंट का स्वाद और गंध पर बहुत कम प्रभाव पड़ा है, ओमीक्रॉन वेरिएंट का लगभग कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं है। जेएएमए ओटोलरींगोलॉजी-हेड एंड नेक सर्जरी में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने उन 88 व्यक्तियों में सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता के दीर्घकालिक नुकसान की जांच की, जिनमें कोविड के हल्के लक्षण थे, जिन्होंने मार्च और अप्रैल 2020 में SARS-CoV-2 के लिए सकारात्मक परीक्षण किया था।

स्मैल की तुलना में टेस्ट की जल्द रिकवरी
अध्ययन से पता चला है कि तीन साल की अवलोकन अवधि में गंध की तुलना में स्वाद की आवृत्ति कम और तेजी से रिकवरी दिखाई देती है। शोधकर्ताओं का मत है कि यदि तीन साल में स्वाद और गंध की क्षमता फिर से लौट आती है।


कई लोगों को हुई थी परेशानी
कोविड के दौरान स्मैल और टेस्ट में कमी देखने को मिली थी। कुछ लोगों में अभी भी यह समस्या पूरी तरह से नहीं गई। ऐसे में यह शोध उन लोगों को जरूर राहत देगा,जिनकी सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता में कमी देखने को मिली थी।



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थकान और कमजोरी से छुटकारा पाने के लिए इन 3 विटामिन्स का करें सेवन

हर समय थकान और कमजोरी महसूस होना या नींद आने के बाद भी नींद बने रहना इस बात का संकेत है शरीर में कई तरह के विटामिन्स कम हो रहे हैं। बिना शारीरिक मेहनत के बाद थकान या कमजोरी महसूस होना सामान्य बात नहीं है। कई बार शारीरिक ही नहीं, मानसिक थकान भी होती है। मानसिक थकान के कारण दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है।

ऐसा तभी होता है जब शरीर में कुछ खास विटामिन्स की कमी हो। शारीरिक और मानसिक थकान और कमजोरी को दूर करने के लिए किन तीन विटामिन्स को लेना चाहिए, चलिए जानें।

थकान-कमजोरी दूर करने वाले विटामिन्स-vitamin for fatigue
विटामिन डी (Vitamin D)
जब भी शरीर में विटामिन डी की कमी होती है शरीर और दिमाग दोनों की ही कार्यक्षमता कम हो जाती है। शरीर में दर्द, थकान और काम न करने की इच्छा इसी विटामिन की कमी का संकेत है। मूड खराब होने या स्ट्रेस और डिप्रेशन तक के लिए विटामिन डी ही जिम्मेदार होता है। विटामिन डी की कमी होती है तो जल्दी थकान लग जाती है। साथ ही नींद पूरी होने के बाद भी भारीपन या नींद आने की समस्या रहती है।

इन चीजों को डाइट में करें शामिल
संतरे का जूस, गाय का दूध और दही विटामिन डी के बेहतरीन सोर्स हैं। इसके अलावा धूप विटामिन डी का नेचुरल सोर्स है। इसलिए सुबह-सुबह धूप सेंकने की आदत डाल लें।

विटामिन सी (Vitamin C)
विटामिन सी शरीर में इम्युनिटी बढ़ाने का काम करती है, ले न जब इसकी कमी शरीर में होती है तो शरीर छोटे से रोग से भी लड़ नहीं पाता। ऐसे में वायरस, बैक्टीरिया और रोगों का खतरा बढ़ता है। बीमारियों और शरीर की इम्युनिटी कम होने के कारण शरीर में थकान और कमजोरी बनी रहती है। स्किन स्किन और बाल भी रूखे, बेजान नजर आ सकते हैं।
इन चीजों का करें सेवन
पपीता, मौसंबी, आंवला, नींबू, कीवी, अनानास, स्ट्रॉबेरी, संतरा और आम में विटामिन सी भरपूर होता है।

विटामिन बी12 (Vitamin B12)
विटामिन बी12 हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है। शरीर में रक्त कोशिकाओं या ब्लड सेल्स और डीएनए को बनाने विटामिन बी12 की जरूरत पड़ती है। अगर आप हर वक्त थकान, कमजोरी महसूस कर रहे हैं, तो हो सकता है आपके शरीर में विटामिन बी12 की कमी हो। विटामिन बी12 नर्वस सिस्टम के लिए भी जरूरी होता है। विटामिन बी12 की कमी से आप अनहेल्दी महसूस कर सकते हैं, क्योंकि इसकी कमी से शरीर में ब्लड सेल्स नहीं बन पाते हैं।

इन चीजों का करें सेवन
विटामिन बी12 की पूर्ति के लिए आप अपनी डाइट में मछली, अंडा, साबुत अनाज और मीट शामिल कर सकते हैं।
इन मिनरल्स कमियों से भी होती है थकान और कमजोरी
आयरन, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, पोटेशियम और जिंक की कमी के कारण भी शरीर में थकान और कमजोरी का अहसास होता है।

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Sunday, 19 November 2023

संभालिए बच्चों को...बढ़ रहा है टाइप 2 डायबिटीज का खतरा

बदलती जीवन शैली ने बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष प्रभाव छोड़ा है। न सिर्फ व्यस्क बल्कि बच्चे भी तेजी से डायबिटीज का शिकार हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण बाहर का खाना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी कहीं जा सकती है। चिकित्सक के मुताबिक अब डायबिटीज आनुवांशिकी से ज्यादा बदलती आदतों और जीवनशैली को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। बच्चे अब ज्यादातर घर से बाहर का खाना खाने लगे हैं और यहां तक कि स्कूल में टिफिन लाने से भी बचते हैं।

माता—पिता बच्चों को टिफिन की बजाय पैसे देते हैं
व्यस्त माता-पिता भी टिफिन के बजाय पैसे देते हैं। इसके अलावा उन पर अच्छा प्रदर्शन करने का काफी दबाव है। इसका उद्देश्य कक्षा 4 या 5 से ही चिकित्सा या इंजीनियरिंग जैसे पेशे पर निर्णय लेना है। हमारे समय में यह सारा दबाव कक्षा 10 के बाद ही आता था।

डायबिटीज समाज के लिए खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को डायबिटीज होना न सिर्फ परिवारों, बल्कि समाज के लिए भी बहुत बड़ी समस्या रही है। इससे परिवारों में डायबिटीज का इतिहास बन रहा है और आगे आने वाली पीढ़ी भी प्रभावित हो रही है। यह रोग 17 वर्ष से 40 वर्ष के बीच व्‍यक्ति को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो यूपी में 18 प्रतिशत आबादी, चाहे वह किसी भी उम्र की हो, उसे मधुमेह का खतरा है। ईसीएमआर के अध्ययन के अनुसार वे प्री डायबिटीज श्रेणी में आते हैं। वे अभी भी मधुमेह को होने से रोक सकते हैं, लेकिन इसके लिए उनकी जीवनशैली और खान-पान में बदलाव की जरूरत है।



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Saturday, 18 November 2023

मुंह में ये 3 लक्षण देखकर समझें कि आपकी ब्लड शुगर बढ़ रही है

ब्लड शुगर जब भी शरीर में बढ़ता है तो उसके संकेत शरीर में नजर आने लगते हैं। ब्लड शुगर के संकेत वैसे तो शरीर कई तरह से देता है, लेकिन यहां आज आपको दो ऐसे संकेत के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मुंह में नजर आते हैं।

इंसुलिन के कम निकलना एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। ब्लड में जब शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है और इंसुलिन इनएक्टिव हो जाता है तब डायबिटीज होती है। डायबिटीज टाइप वन अनुवांशिक या जन्मजात होता है, जबकि टाइप टू की वजह बिगड़ी लाइफस्टाइल और खानपान की आदत होती है।


तो चलिए जानें कि डायबिटीज या ब्लड शुगर बढ़ने पर मुंह में कौन से तीन लक्षण नजर आते हैं।
1. मुंह अगर अचानक बहुत सूखने लगा हो और सलाइवा (लार) कम बन रहा हो।
2. मुंह से फलों की महक आए या बदबू आने लगे।
3. दांत में कैविटी और खून की समस्या नजर आए।

डायबिटीज के अन्य लक्षण भी पहचानें
- रात में तीन से चार बार यूरिन का आना
- बहुत अधिक प्यास लगना
- थकावट और कमजोरी महसूस होना
- वजन का कम होना
- नजर कमजोर होना या धुंधला दिखना
- प्राइवेट पार्ट में खुजली और जख्म का देरी से ठीक होना।

नॉर्मल ब्लड शुगर का लेवल कितना होता है
खाने से पहले स्वस्थ व्यक्ति का टार्गेट ब्‍लड शुगर लेवल 100 mg/dl से कम होना चाहिए। वहीं, डायबिटिक का ब्लड शुगर लेवल 80-130 mg/dl तक होना चाहिए। जबकि खाना खाने के बाद स्वस्थ व्यक्ति का ब्‍लड शुगर लेवल 140 mg/dl से कम, तो वहीं डायबिटिक का 180 mg/dl से कम होना चाहिए।

डायबिटीज के कारण
- गलत खान-पान
- फिजिकल एक्टिविटी की कमी
- परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज होने से
- हार्मोंन्स का असंतुलन
- बढ़ती उम्र
- कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ना

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Friday, 17 November 2023

Health update: दुनिया का पहला बॉडी डिवाइस, जो हेल्थ की रखेगा निगरानी

दुनिया का पहला ऐसा बॉडी डिवाइस बन गया है, जो शरीर की निगरानी रख सकता है और उसके अंदर होने वाली असामान्य प्रक्रियाओं को ट्रेक कर सकता है। यह उपकरण शरीर के लगभग किसी भी हिस्‍से पर एक वायरलेस तरीके से फेफड़ों के अंदर और बाहर आने वाली हवा, दिल की धड़कन और यहां तक कि लंबे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (जीआई ट्रैक्ट) के माध्यम से पचने वाले भोजन की प्रगति को ट्रैक कर सकता है।

अभी हुई है पायलट स्टडी
पायलट स्टडी में अमरीका में नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने श्वसन और आंतों की गतिशीलता संबंधी विकारों वाले 15, समय से पहले जन्में बच्चे और 55 वयस्क, जिनमें 20 पुरानी फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ितों को शामिल किया था। नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि उपकरणों ने न केवल क्लिनिकल-ग्रेड सटीकता के साथ प्रदर्शन किया, बल्कि उन्होंने नई कार्यक्षमताएं भी पेश की, जिन्हें विकसित नहीं किया गया है और न ही अनुसंधान या क्लिनिकल देखभाल में पेश किया गया है।

अच्छी तरह हो सकेगा मूल्यांकन
नॉर्थ वेस्टर्न मेडिसिन के थोरेसिक सर्जन अंकित भरत ने बताया कि इन उपकरणों के पीछे का विचार रोगी के स्वास्थ्य का अत्यधिक सटीक निरंतर मूल्यांकन प्रदान करना है। सिलिकॉन से बने उपकरण की लंबाई 40 मिलीमीटर, चौड़ाई 20 मिलीमीटर और मोटाई 8 मिलीमीटर है। डिवाइस में एक फ्लैश मेमोरी ड्राइव, छोटी बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक ब्लूटूथ क्षमताएं और दो छोटे माइक्रोफोन हैं, जिनमें से एक का मुख शरीर के अंदर की ओर है और दूसरे का मुख बाहर की ओर है।

पुरानी फेफड़ों की बीमारी में मिलेगा आराम
पुरानी फेफड़ों की बीमारियों और स्वस्थ नियंत्रण वाले वयस्कों में उपकरण ने एक साथ विभिन्न स्थानों पर फेफड़ों की आवाज और शरीर की गति के वितरण को कैप्चर किया, जिससे शोधकर्ताओं को फेफड़ों के विभिन्न क्षेत्रों में एक ही सांस का विश्लेषण करने में मदद मिली।



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रोजाना खाते हैं ये 5 सफेद चीजें? हो जाएं सावधान, इनसे खून में जहर घुल सकता है

ब्लड पॉइजनिंग (Blood Poisoning) या सेप्सिस (Sepsis) होने की वजह कई बार हमारे खानपान की गड़बड़ी भी होती है। सेप्टीसीमिया जानलेवा हो सकता है और कई बार ब्लड में गंदगी के कारण ही किडनी इन्फेक्शन, यूटीआई, निमोनिया या स्किन इन्फेक्शन जैसी समस्याएं होती हैं।

खून में संक्रमण का बड़ा कारण खाई गई चीजें होती हैं। ब्लड पॉइजनिंग एक गंभीर संक्रमण है और इसकी वजह होती है खानपान के जरिये जब खून में हानिकारक बैक्टिरिया पहुंचता है। हालांकि ब्लड पॉइजनिंग का मतलब ये नहीं कि खून में जहर समाहित हो जाता है, बल्कि इसका मतलब ये होता है कि खून प्योर नहीं रहता और इसके कारण कई बीमारियों का खतरा पैदा होता है। मेडिकल भाषा में इस समस्या को सेप्टीसीमिया (septicemia) या सेप्सिस (sepsis) कहा जाता है।

क्या है सेप्टीसीमिया
- सेप्टीसीमिया या सेप्सिस तब होता है जब खून में गंदगी जमा होने लगती है। ये गंदगी किडनी से लेकर लिवर और - - - - फेफड़ों तक को नुकसान पहुचाती है।
- पहचानें सेप्टीसीमिया के लक्षण
- अचानक से शरीर को ठंड लगना
- मध्यम या तेज बुखार का बने रहना
- कमजोरी-थकान के साथ लंबी सांस लेना
- दिल की धड़कन का बढ़ जाना
- त्वचा का पीलापन
- स्किन पर दाने-फोड़े-फुंसी या एलर्जी


ये 5 फूड्स हैं खून में गंदगी की वजह
व्हाइट मक्खन
व्हाइट मक्खन में फैट और सोडियम दोनों अधिक होता है। अगर इसे खाने की आदत है तो तय है कि आपका ब्लड प्योर नहीं रहेगा। हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह ये मक्खन होता है। मक्खन खाने से लिवर भी खराब होता है। हाई सोडियम हाई बीपी और किडनी के लिए भी सही नहीं।

डेयरी प्रोडक्ट
डेयरी प्रोडक्ट में भी फैट की मात्रा बहुत अधिक होती है। फुल क्रीम मिल्क, कर्ड या पनीर सेहत के लिए नुकसानदायक होत हैं। डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, किडनी और दिल की बीमारियों में इनका सेवन खतरनाक होता है।

नमक
नमक अगर ज्यादा हो तो हाई बीपी की समस्या होती है और इससे किडनी पर इफेक्ट पड़ता है और किडनी सही से फिल्टर नहीं कर पाती है और खून में गंदगी समाहित होने लगती है। नमक को शरीर में पानी बढ़ाने के लिए जाना जाता है, इससे खून की नसों पर दबाव बनता है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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किडनी इंफेक्शन: ये 5 लक्षण आपको बताएंगे कि आपके गुर्दे में है संक्रमण

किडनी इंफेक्शन के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं और इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। जैसे-जैसे इंफेक्शन बढ़ता है, लक्षण भी गंभीर होते जाते हैं। किडनी इंफेक्शन के कुछ आम लक्षण हैं:

किडनी में इंफेक्शन के एक नहीं, कई कारण होते हैं। पानी से लेकर खानपान और यूटीआई आदि के कारण भी किडनी तक इंफेक्शन पहुंच जाता है। तो चलिए आज आपको किडनी इंफेक्श से जुड़ी पूरी जानकारी दें, ताकि आप इस बीामरी को समझ सकें और सतर्क रहें।

जानिए कैसे होता है किडनी इंफेक्शन?
1. गंदे या दूषित पानी और खाने की चीजें पेट खराब करती हैं और इसके बैक्टिरिया कई बार किडनी तक पहुंच जाते हैं।
2. ब्लैडर इंफेक्शन होने पर यूरेथ्रा (यूरिन के शरीर से बाहर निकालनेवाली ट्यूब) से इंफेक्शन किडनी तक पहुंच जाता है।
3. किडनी इंफेक्शन का एक बड़ा कारण यूटीआई यानी यूरिन इंफेक्शन भी होता है। यही कारण है कि इसे 'कॉम्प्लिकेटेड यूटीआई' भी कहा जाता है।

किडनी इंफेक्शन के लक्षण
1. यूरिन का रंग, स्मेल और कम या ज्यादा मात्रा इंफेक्शन का इशारा करती है।
2. यूरिन पास करने के दौरान दर्द या खुजली भी इंफेकशन का कारण है।
3. इंफेक्शन बढ़ने पर तेज बुखार और बहुत अधिक सर्दी लगना।
4. कमर के नीचले हिस्से या पीठ और पेट के साइड में तेज दर्द
5. मिचली सा महसूस होते रहना
6. भूख न लगना
7. यूरिन में खून आना
8. यूरिन बार-बार महसूस होना लेकिन होना नहीं
9. किडनी इंफेक्शन होने की स्थिति में व्यक्ति को पेल्विक एरिया में दर्द हो सकता है। यह दर्द हल्का भी हो सकता है तेज भी। कुछ लोगों को यह दर्द अचानक उठता है जबकि कुछ में इंफेक्शन होने के बाद लगातार बना रह सकता है।

यूरिन कलर से पहचानें किडनी इंफेक्शन
- अगर आपके यूरिन का कलर साफ और ट्रांसपैरंट पानी की तरह ना होकर मटमैला हो।
- यूरिन का रंग हल्का गुलाबी या हल्का लाल लगने पर ये गंभीर किडनी इंफेक्शन का संकेत है।
- यूरिन का रंग गुलाबी या लाल होना इस तरफ इशारा करता है कि आपके यूरिनरी ट्रैक्ट में ब्लीडिंग यानी खून का रिसाव हो रहा है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Thursday, 16 November 2023

New Research: गर्भनाल काटने में 2 मिनट की देरी से बच सकती है 91% नवजातों की जान, आयरन के लेवल में नहीं आती कमी

Delay in cutting of umbilical cord can save the lives of 91% of newborns: जन्म के तुरंत बाद गर्भनाल काटना आम बात है। अब एक शोध में दावा किया गया है कि गर्भनाल कुछ देर बाद काटने से नवजात मृत्यु दर के खतरे को आधा किया जा सकता है। यह शोध द लांसेट में प्रकाशित हुआ है। ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान परिषद (एनएचएमआरसी) की दो शोधकर्ताओं डॉ. अन्ना लेने सीडलर और प्रोफेसर लिसा एस्की की शोध रिपोर्ट के मुताबिक अगर गर्भनाल काटने में देरी की जाए तो इससे बच्चे के शरीर में रक्त की मात्रा में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा ब्लड प्लेटेलेट्स में आयरन का स्तर बढ़ता है।

नवजातों की मृत्यु में 91 फीसदी तक की आएगी कमी

गर्भनाल देरी से काटने के कारण शिशु के शरीर में रेड ब्लड सेल्स 60 फीसदी तक बढ़ जाते हैं, जबकि वॉल्यूम में 30 फीसदी तक इजाफा होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्भनाल काटने में कुछ देर से जन्म के तुरंत बाद मृत्यु रोकने की संभावना 91 फीसदी तक बढ़ जाती है।

1.3 करोड़ बच्चे जन्म के समय से पहले हो जाते हैं पैदा

शोधकर्ता डॉ. अन्ना लेने सीडलर का कहना है कि दुनियाभर में हर साल करीब 1.3 करोड़ बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं। जन्म के कुछ समय बाद इनमें से करीब 10 लाख बच्चे मर जाते हैं। शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि गर्भनाल काटने में दो मिनट या उससे ज्यादा समय तक इंतजार करने से समय से पहले जन्मे बच्चों की जान बचाने में काफी मदद मिल सकती है।

9,000 बच्चों के डेटा का विश्लेषण

शोधकर्ताओं की टीम ने करीब 9,000 बच्चों के 60 क्लिनिकल परीक्षण डेटा का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि जन्म के 30 सेकंड या इससे ज्यादा देर बाद गर्भनाल को काटा गया तो समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं में मृत्यु का जोखिम उन बच्चों की तुलना में एक तिहाई कम हो गया जिनकी गर्भनाल को जन्म के तुरंत बाद काटा गया था।

यह भी पढ़ें - Bombay High Court: हाईकोर्ट ने किस मामले में कहा, रेप पीड़िता के बच्चे को गोद लेने के बाद डीएनए कराना सही नहीं



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हाईब्रिड वर्किंग का हार्ट से संबंध, जानिए कैसे काम का तरीका हार्ट को करता है मजबूत

शोधकर्ताओं के मुताबिक कर्मचारियों को अधिक लचीलापन, संतुलन और समर्थन देने से उनके हृदय स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक कोविड के बाद से काम में लचीलेपन के कुछ लाभ देखे हैं। वर्किंग कल्चर बदलने से एम्प्लॉयर को भी फायदा हुआ है। काम में लचीलेपन और कर्मचारियों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करने से उत्पादकता अधिक हो सकती है और टर्नओवर भी कम हो सकता है।

ऐसे हुआ अध्ययन
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने वर्कप्लेस कार्यक्रम विकसित किए जो कामकाजी जीवन और व्यक्तिगत जीवन के बीच एक स्वस्थ संतुलन प्रदान करते हैं, साथ ही एक सहायक कार्य वातावरण भी प्रदान करते हैं। हृदय और रक्त वाहिकाओं से संबंधित समस्याओं के अधिक जोखिम वाले कर्मचारियों में हृदय रोग के जोखिम में कमी देखी गई।

कर्मचारियों का सम्मान जरूरी
एम्प्लॉयर ने अपने एम्प्लॉइज को उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक दायित्वों का सम्मान करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही वर्क परफॉर्मेंस को लेकर आॅनलाइन प्रशिक्षण दिया गया। कर्मचारी और उनके बॉस मिलकर, कर्मचारियों को उनके शेड्यूल पर अधिक नियंत्रण रखने और प्रोडक्टिव काम पर फोकस करने के तरीकों पर बात करते थे।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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कोलेस्ट्रॉल को नसों से निचोड़कर रख देगा ये सस्ता जूस , रिसर्च में हुआ प्रूव

टमाटर एक बहुमुखी सब्जी है जो अपने अद्भुत स्वाद और पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है। यह विटामिन सी, लाइकोपीन और पोटेशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसके अलावा, टमाटर का रस कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी मददगार हो सकता है। रिसर्च अनुसार रोजाना एक गिलास टमाटर का जूस कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर सकता है।

कोलेस्ट्रॉल क्या है?

कोलेस्ट्रॉल एक प्रकार का वसा है जो शरीर में पाया जाता है। यह कोशिकाओं के निर्माण और मरम्मत के लिए आवश्यक है। हालांकि, बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है।

टमाटर का रस कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कैसे कम करता है?

टमाटर का रस में लाइकोपीन नामक एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है। अध्ययनों से पता चला है कि लाइकोपीन एलडीएल ("खराब") कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है।

टमाटर का रस में फाइबर भी होता है, जो कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकने में मदद कर सकता है।

टमाटर का रस पीने के अन्य स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?

टमाटर का रस पीने के कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी हैं। इसमें शामिल हैं:

- रक्तचाप कम करना
- हृदय रोग का खतरा कम करना
- कुछ प्रकार के कैंसर के खतरे को कम करना
- अस्थि स्वास्थ्य में सुधार
- मधुमेह के जोखिम को कम करना

टमाटर का रस कैसे पियें?

टमाटर का रस पीने का सबसे आसान तरीका है इसे सीधे कैन या कार्टन से पीना। आप इसे पानी या अन्य फलों के रस के साथ भी मिला सकते हैं।

टमाटर का रस एक स्वादिष्ट और पौष्टिक पेय है जो आपके समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। यदि आप अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करना चाहते हैं, तो आज ही टमाटर का रस पीना शुरू करें!

कृपया ध्यान दें: टमाटर का रस कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स का कारण बन सकता है। यदि आप एसिड रिफ्लक्स से पीड़ित हैं, तो टमाटर का रस पीने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।

टमाटर का रस एक स्वादिष्ट और पौष्टिक पेय है जो आपके समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी मददगार हो सकता है। यदि आप अपने स्वास्थ्य में सुधार करना चाहते हैं, तो आज ही टमाटर का रस पीना शुरू करें!



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मोटे लोगों में सोते हुए बर्न होती है एनर्जी, जानें कैसे

अध्ययन में यह भी पाया गया कि दिन के दौरान मोटापे से ग्रस्त लोगों में हार्मोन इंसुलिन का स्तर अधिक होता है। शोधकर्ताओं के लिए यह भी हैरान करने वाली स्थिति थी कि मोटे और सामान्य लोगों में बॉडी की एनर्जी बर्न होने का समय अलग—अलग था। मोटापे को 30 या उससे अधिक के बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के रूप में परिभाषित किया गया है। अधिक वजन या मोटापा होने से उच्च रक्तचाप और टाइप 2 मधुमेह जैसी स्वास्थ्य स्थितियों का खतरा बढ़ाता है।

शरीर में होते हैं बदलाव
हर 24 घंटे में लोग शरीर में कई बदलावों का अनुभव करते हैं जो मानव शरीर की आंतरिक घड़ी से शुरू होते हैं। ये परिवर्तन आम तौर पर किसी भी समय शरीर की जरूरतों को सर्वोत्तम ढंग से पूरा करने के लिए दिन के निश्चित समय पर होते हैं।

ऐसे हुआ अध्ययन
नींद की प्रत्येक अवधि के बाद प्रतिभागियों को प्रत्येक दिन के समय में खाने और विभिन्न परीक्षणों में भाग लेने के लिए जगाया गया। एक परीक्षण में प्रतिभागियों को मास्क पहनकर व्यायाम करना था जो एक अप्रत्यक्ष कैलोरीमीटर नामक मशीन से जुड़ा था, जो उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड को मापता है और ऊर्जा के उपयोग का अनुमान लगाने में मदद करता है। प्रत्येक दिन प्रदान किए गए समान भोजन के जवाब में ग्लूकोज के स्तर को मापने के लिए रक्त के नमूने भी एकत्र किए गए।

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विटामिन बी12 की कमी से हो सकते हैं ये 5 गंभीर नुकसान, इन 4 फूड्स से करें कमी को पूरा

विटामिन बी12 एक ऐसा पोषक तत्व है जो शरीर के लिए बहुत जरूरी है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन, तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य और मस्तिष्क के कार्य के लिए आवश्यक है। विटामिन बी12 की कमी से थकान, कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ, हाथ-पैरों में झुनझुनी, और यहां तक कि मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं।

विटामिन बी12 का सबसे अच्छा स्रोत मांसाहारी खाद्य पदार्थ हैं, जैसे कि मांस, मछली, अंडे, और डेयरी उत्पाद। शाकाहारी लोगों को विटामिन बी12 की कमी होने का खतरा अधिक होता है, क्योंकि वे इन खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करते हैं।

शाकाहारी लोग विटामिन बी12 की कमी को दूर करने के लिए निम्नलिखित तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं:

डेयरी उत्पादों का सेवन करें

दूध, दही, पनीर, और मट्ठा सभी अच्छे विटामिन बी12 के स्रोत हैं। एक गिलास दूध में लगभग 2.4 माइक्रोग्राम विटामिन बी12 होता है।

मशरूम खाएं

शिताके मशरूम एक ऐसा मशरूम है जो विटामिन बी12 का एक अच्छा स्रोत है। एक कप शिताके मशरूम में लगभग 1.5 माइक्रोग्राम विटामिन बी12 होता है।

फलों और सब्जियों का सेवन करें
कुछ फलों और सब्जियों में विटामिन बी12 की मात्रा होती है, लेकिन यह बहुत कम होती है। सेब, केला, और संतरा कुछ ऐसे फल हैं जिनमें विटामिन बी12 होता है।

विटामिन बी12 सप्लीमेंट लें
यदि आप विटामिन बी12 की कमी से पीड़ित हैं, तो आप विटामिन बी12 सप्लीमेंट ले सकते हैं। विटामिन बी12 सप्लीमेंट आमतौर पर गोलियों, कैप्सूल, या तरल पदार्थ के रूप में उपलब्ध होते हैं।

यदि आपको लगता है कि आपको विटामिन बी12 की कमी हो सकती है, तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। डॉक्टर आपकी विटामिन बी12 के स्तर का परीक्षण कर सकते हैं और आपको सही इलाज की सलाह दे सकते हैं।



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Wednesday, 15 November 2023

सुबह की धूप के गजब फायदे, जान लें सही समय

यदि आप सूरज उगने के बाद 15 से 20 मिनट तक नियमित धूप सेकेंगे तो कई बीमारियों से बचे रहेंगे। सुबह—सुबह की धूप बेहद फायदेमंद होती है। सुबह के समय की गुनगुनी धूप से विटामिन डी तो मिलता ही है, लेकिन इसके दूसरे भी बहुत सारे फायदे है। इस समय सूर्य की किरणें बहुत ज्यादा तेज नहीं होती और वह त्वचा को किसी तरह का नुकसान नहीं होने देती।

बढ़ाती है नेचुरल एंटीडिप्रेसेंट लेवल
यदि आप नियमित रूप से सुबह की धूप सेंकते हैं तो इससे ब्रेन में नेचुरल एंटीडिप्रेसेंट लेवल बढ़ता है। इससे आपको डिप्रेशन से राहत मिलती है, आपका मूड भी अच्छा रहता है और आप तनाव मुक्त रहते हैं।

सुधरती है नींद की गुणवत्ता
सुबह के समय कुछ देर धूप में बैठने से नींद की गुणवत्ता सुधरती है। अक्सर लोग नींद से जुड़ी समस्याओं से परेशान रहते हैं। ऐसे में धूप में बैठने से नींद की कमी दूर होती है।

बढ़ता है एनर्जी हॉर्मोन
सुबह की धूप से एनर्जी हॉर्मोन भी बढ़ता है। शरीर में एनर्जी बनी रहती है। मन प्रसन्न होता है और सुबह जल्दी उठने की आदत भी बन जाती है। इससे पूरा दिन ताजगी भरा रहता है।

रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार
आपको जानकार हैरानी होगी कि विशेषज्ञों के मुताबिक धूप सेंकने से शरीर में रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। शरीर को मजबूती मिलती है और शरीर कई तरह की बीमारियों से दूर रहता है।

विटामिन डी की कमी होती है दूर
सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने पर हमारा शरीर विटामिन डी बनाता है। सर्दियों में अक्सर विटामिन डी की कमी से कई समस्याएं आ जाती है। विटामिन डी से कैल्शियम की पूर्ति होती है। ऐसे में यदि आपको विटामिन डी की कमी है, तो धूप में जरूर बैठना चाहिए। डॉक्टर्स भी यही सजेस्ट करते हैं।

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रोजाना एक समय पर एक्सरसाइज के फायदे जानकर हैरान रह जाएंगे आप

एक्सरसाइज और रेस्ट यदि हर दिन एक ही समय पर हो तो जोड़ों और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानियों से निजात मिल सकती है। उनके एथलेटिक प्रदर्शन में सुधार आता है और चोट से बचने में भी मदद मिलती है। यह अध्ययन यूके के नेचर कम्यूनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है, जिसमें चूहों को शामिल किया गया था। वैज्ञानिक लंबे समय से जानते हैं कि मस्तिष्क के बॉडी क्लॉक और अन्य अंगों के बॉडी क्लॉक के बीच समन्वय होना जरूरी है, यदि ऐसा नहीं होता है तो मधुमेह और हृदय रोग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
शोध कर्ताओं के मुताबिक हमने यह समझने के लिए एक नए तंत्र की पहचान की है कि हमारे शरीर की घड़ियां बाहरी वातावरण के साथ कैसे समन्वय करती हैं। ये क्लॉक आपको परिवर्तनों के लिए तैयार करने के लिए विकसित हुई हैं।

अध्ययन से यह आया सामने
रिसर्च से सामने आया है कि सुबह की शारीरिक गतिविधियां और नींद—जागने के चक्र
के बारे में ब्रेन क्लॉक हिड्डयों के ऊतकों तक समय की जानकारी पहुंचाती हैं। यदि व्यक्ति व्यायाम के समय में बदलाव करता है, तो इस डीसिंक्रनाइज़ेशन के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है। शोध चूहों पर किया गया था, जिसमें ट्रेडमिल पर चूहों को नियमित एक ही समय में एक्सरसाइज करवाई गई थी।

बढ़ती आयु में मददगार
बढ़ती हुई आयु में यदि इस पैटर्न पर एक्सरसाइज या आराम किया जाए, तो ज्यादा स्वस्थ रहा जा सकता है। शोध के मुताबिक सीनियर सिटीजंस के लिए यह पैटर्न अधिक फायदेमंद हो सकते हैं।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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दिन के समय आती है झपकी, तो संभल जाएं

मेलबर्न में एक हार्ट एंड डायबिटीज इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर्स के मुताबिक नींद की सेहत से समझौता या रात की पारी में काम करना पुरुषों और महिलाओं और सभी आयु समूहों में उच्च रक्तचाप का खतरा पैदा कर देता है। अध्ययन से पता चला है कि रात की पारी में काम करने वाले स्थायी कर्मचारी, जो पांच या छह घंटे से कम सोते थे, उन्हें सबसे अधिक खतरा था, लेकिन मिश्रित पारी में काम करने वालों का रक्तचाप भी बढ़ा हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि बहुत लंबे समय तक सोने से भी दुष्प्रभाव सामने आते हैं।

ऐसे बना रहेगा हेल्दी बीपी
हेल्दी बीपी को बनाए रखने के लिए सात घंटे की नींद जरूरी है, इससे ज्यादा या फिर कम नींद भी सेहत पर नैगेटिव असर डालती है। वहीं जिन लोगों की रात की शिफ्ट स्थाई है, उनमें उच्च स्तर पर ब्लडप्रेशर देखने को मिल रहा है। शरीर की सर्कैडियन घड़ी मानव शरीर में लगभग सभी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है, जिसमें पाचन क्रिया, हृदय गति और नींद से जागने का व्यवहार शामिल है। शरीर की सामान्य जैविक लय में व्यवधान शरीर को सिंक से बाहर कर सकता है, जिससे सर्कैडियन तनाव पैदा हो सकता है, और इस प्रकार नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।

प्रॉपर नींद लें
विशेषज्ञों के मुताबिक स्वस्थ शरीर के लिए प्रॉपर नींद जरूरी है। यदि आप शिफ्ट में काम करते हैं, तो नींद का पूरा ध्यान रखें। अपनी दिनचर्या को इस तरह से प्लान करें कि सात घंटे नींद के लिए निकाल सकें। शिफ्ट बदलने से भी परेशानी बढ़ती है, इसके लिए भी खुद को तैयार रखें। हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज पर फोकस रखें।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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विटामिन सी की बेस्ट सोर्स है गोभी के परिवार की यह सब्जी

हम बात कर रहे हैं केल की, इसमें कई प्रकार के गुण होते हैं। यह एक प्रकार की पत्तेदार हरी सब्जी होती है, जिसका उपयोग सलाद, चिप्स, परांठे और सब्जी के रूप में किया जाता है। केल में भी दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियों की तरह भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। यदि आप मोटापे से परेशान हैं तो इसका सेवन कर सकते हैं, इससे फैट कम होता है और शरीर में ताकत बनी रहती है। विटामिन और मिनरल्स से भरपूर इस सब्जी में कई पोषक तत्व होते हैं।

खाने में भी टेस्टी
इससे हार्ट की सेहत सुधरती है। साथ ही ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। इसका स्वाद भी बहुत ज्यादा टेस्टी होता है और शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

कॉलेस्ट्रॉल लेवल को करती है कम
केल को विटामिन सी का दुनिया में बेस्ट सोर्स माना जाता है। इससे कॉलेस्ट्रॉल का लेवल भी कम होता है। इससे कई तरह बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है, नियमित रूप से आप इसे सलाद के रूप में खा सकते है। इसमें विटामिन के भी होता है, इसके जूस को भी नियमित रूप से पीया जा सकता है।

कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा
केल कैल्शियम और मैग्नीशियम का भी महत्वपूर्ण सोर्स है, जिसे खाने से शरीर में इनकी कमी नहीं होती है और हड्डियों को मजबूती मिलती है। डायबिटीज, हार्ट डिजीज और ब्लड प्रेशर में भी राहत मिलती है।

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Tuesday, 14 November 2023

Health update: सिंगल डोज में 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा बैड कॉलेस्ट्रोल, आ गई जीन थैरेपी

यूएस के बोस्टन में विकसित सीआरआईएसपीआर-आधारित जीन-एडिटिंग थेरेपी वर्व-101 के एक डोज ने उन लोगों में कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को काफी कम कर दिया, जिन्हें खराब कोलेस्ट्रॉल के रूप में भी जाना जाता है। कई केसेज में वंशानुगत एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत अधिक होता है, जिसके कारण कम उम्र में दिल का दौरा पड़ने का खतरा अधिक होता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों के अनुसार खराब कॉलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए दशकों से दैनिक गोलियों या रुक-रुक कर इंजेक्शन लेने की बजाय इसका उपयोग किया जा सकता है। यह वन डोज थैरेपी दशकों तक एलडीएल-सी को कम कर सकती है। अध्ययन में न्यूजीलैंड और यूके में 7 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल थीं। ऐसे प्रतिभागियों को चुना गया, जिसमें वंशानुगत एक ऐसा जीन विरासत में मिला है, जिसमें एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा लेने के बावजूद बैड कॉलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत अधिक था।

प्रतिभागियों को पहले से बीमारी थी
अध्ययन में भाग लेने वाले अधिकांश प्रतिभागियों को पहले से ही गंभीर कोरोनरी धमनी रोग था और उन्हें पहले से ही दिल का दौरा पड़ चुका था या फिर कोरोनरी बाईपास सर्जरी या स्टेंटिंग से गुजरना पड़ा था। यह थैरेपी देने के उनके बैड कॉलेस्ट्रोल में 50 प्रतिशत तक कमी आई थी। दवा ने छह महीने में एलडीएल-सी को भी कम कर दिया, जिसमें एकमात्र प्रतिभागी को 0.6 मिलीग्राम/किग्रा प्राप्त हुआ, जिसका फॉलो-अप जारी रहा।

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