Sunday, 28 February 2021

अनानास के जूस से बेहतर होता है पाचन तंत्र, पेट की समस्या से मिलती है राहत

अनानास का जूस सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। गर्मियों के दिनों में इस जूस का सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलने के साथ ही कई बीमारियों से भी निजात मिलती है। क्योंकि अनानास के जूस में ब्रोमेंलैन नामक पोषक तत्व पाया जाता है। इससे पेट संबंधी रोगों से भी छुटकारा मिलता है।

जानकारी के अनुसार अनानास का जूस आंखों के लिए बहुत लाभदायक है। क्योंकि इसमें विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ए होता है। जो आंखों के लिए फायदेमंद है। इस के जूस को रोज पीने से आंखों से संबंधित कई बीमारियों से राहत मिलेगी।

अनानास का जूस पेट संबंधी रोगों को दूर करने में भी काफी मददगार होता है। दस्त, पेट फूलने की समस्या, घबराहट आदि में भी अनानास के जूस का सेवन करना चाहिए। इससे आपका पाचन तंत्र मजबूत होगा। वह इसमें एंजाइम्स होता है। जो प्रोटीन को डाइजेस्ट करने में भी मदद करता है।

अनानास के जुलूस में कैलोरी बहुत कम मात्रा में होती है। इसके सेवन से व्यक्ति का वजन घटने लगता है। इसे पीने से हड्डियां मजबूत होती है और हड्डियों में सूजन भी नहीं आती है। इसलिए रोजाना अनानास का जूस पीना चाहिए। इसे आप घर में भी बना सकते हैं।



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हल्दी का दूध करता है एंटीबायोटिक का काम, कैंसर के रोगियों के लिए भी फायदेमंद

हल्दी का दूध आपके शरीर में एंटीबायोटिक का काम करता है। रोजाना हल्दी का दूध पीने से यह कई बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। किसी प्रकार का घाव, चोट लगने, शरीर में दर्द होने और अन्य कारणों में भी लोग आज भी हल्दी के दूध का उपयोग करने की सलाह देते हैं। हम आज आपको ऐसे ही कुछ बीमारियों में हल्दी के दूध का सेवन करने का तरीका बतायंगे।

प्राचीन समय से ही हल्दी का दूध विभिन्न प्रकार की घाव को ठीक करने, बुखार आदि में किया जाता रहा है। क्योंकि हल्दी के दूध में औषधीय गुण होते हैं। हल्दी एंटीबायोटिक होने के साथ दूध में मौजूद कैल्शियम के साथ मिलने पर और भी पावरफुल हो जाती है। आप इसका सेवन रोजाना करेंगे तो यह आपकी सेहत के साथ सुंदरता को भी बढ़ाएगी।

हड्डियों को करेगी मजबूत-

हल्दी का दूध पीने से आप की हड्डियां मजबूत होती है।क्योंकि हल्दी में एंटीबायोटिक और दूध में कैल्शियम के गुण होते हैं। जो हड्डी के डैमेज और फेक्चर के लिए भी काफी फायदेमंद रहता है।

कैंसर के रोगियों के लिए फायदेमंद-

हल्दी में करक्यूमिन पदार्थ पाया जाता है। जो कैंसर के रोगियों के लिए काफी लाभदायक है। इसलिए कैंसर से पीड़ित लोगों को हल्दी का दूध दिया जाता है।

ब्लड सरकुलेशन बढ़ाने में लाभदायक-

हल्दी का दूध व्यक्ति के ब्लड सरकुलेशन बढ़ाने में काफी मददगार होता है। शरीर में चोट लगने, किसी भी प्रकार का दर्द होने आदि में भी हल्दी का दूध दिया जाता है। जिससे किसी भी प्रकार के दर्द से निजात मिलती है।

अनिद्रा के लिए फायदेमंद-

हल्दी में अमीनो एसिड होता है। जो अनिद्रा की शिकायत को दूर करता है। दौड़ भाग भरी जिंदगी में हमारे शरीर को आराम भी बहुत जरूरी है। ऐसे में अगर आप हल्दी का दूध पीते भी हैं। तो यह आपकी नींद के लिए काफी फायदेमंद होगा।

सर्दी खांसी के लिए बेहतर-

हल्दी के दूध में एंटीबायोटिक होता है। जो शरीर के फ्री रेडिकल सेल से लड़ता है। दूध में हल्दी मिलाकर पीने से सर्दी, खांसी, गले की खराश और सीजनल बुखार से राहत मिलती है।

वजन कम करने में मददगार-

हल्दी का दूध कैल्शियम और मिनरल्स से भरपूर होता है। जो फैट को कम करने में काफी मददगार होता है।हल्दी का दूध पीने से व्यक्ति का वजन भी तेजी से कम होता है। इससे आप स्वस्थ रहने के साथ सुंदर भी नजर आएंगे।



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पेट के कीड़े खत्म करने हैं तो इस प्रकार करें टमाटर का सेवन, बच्चों के लिए है फायदेमंद

वैसे तो टमाटर में कई पोषक तत्व होते हैं और वह सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि टमाटर का सेवन रोज सुबह खाली पेट करने से आपको और भी कई फायदे होंगे। आज हम टमाटर से होने वाले फायदों के बारे में बताएंगे। टमाटर बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी की सेहत के लिए लाभदायक है।

आपको बता दें कि टमाटर में विटामिन सी, विटामिन, पोटैशियम, लाइकोपिन आदि पर्याप्त मात्रा में होता है।टमाटर में कोलेस्ट्रोल को कम करने के गुण होते हैं और यह वजन कम करने के लिए भी काफी फायदेमंद रहता है। टमाटर की कई खासियत है और इसे खाने से निश्चित ही लोगों को फायदे मिलते हैं। टमाटर को काटकर सलाद के रूप में भी खा सकते हैं और इसका सूप भी बनाकर पी सकते हैं

बच्चों के लिए फायदेमंद-

-बच्चों को सूखा रोग हो जाए तो उसके लिए टमाटर काफी फायदेमंद है। बच्चे को रोजाना एक गिलास टमाटर का जूस पिलाएं। इससे उसे सूखे रोग में काफी आराम मिलेगा।

-बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए भी टमाटर काफी फायदेमंद होता है। इसलिए सुबह-सुबह बिना पानी पीए ही पका हुआ टमाटर खाना चाहिए।

मोटापे से मिलेगी मुक्ति-

-टमाटर का उपयोग वजन घटाने के लिए भी किया जा सकता है। इसके लिए हर रोज दो गिलास टमाटर का जूस पीना चाहिए।

गठिया के रोगियों के लिए फायदेमंद-

-टमाटर गठिया से पीड़ित मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसलिए टमाटर के जूस में अजवाइन मिलाकर पीएं।

गर्भवती महिलाएं करें सेवन-

-गर्भवती महिलाओं के लिए टमाटर का सेवन करना बहुत फायदेमंद रहता है। क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी होता है। जो गर्भावस्था के दौरान काफी फायदेमंद रहता है।

पेट के कीड़े करें दूर-

-पेट में कीड़े होने पर टमाटर को काटकर उसमें काली मिर्च लगाएं और सुबह खाली पेट खाएं। इससे निश्चित ही पेट के कीड़े मर जाएंगे।

चेहरे के लिए टमाटर-

-टमाटर में काला नमक मिलाकर खाने से चेहरे की लालिमा बढ़ती है। लेकिन टमाटर कच्चा होना चाहिए।इसी के साथ टमाटर के गूदे को चेहरे पर रगड़ने से त्वचा में निखार आता है। टमाटर के रोजाना सेवन करने से डायबिटीज में भी फायदा होता है। इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है और स्किन से जुड़ी समस्याएं भी दूर होती है।



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चेहरे से हटाना है चश्मा और बढ़ानी है आंखों की रोशनी, तो आज से ही करें यह काम

बच्चों से लेकर बड़ों तक में आंखों की रोशनी कमजोर पड़ना आम बात होती जा रही है। आजकल छोटे छोटे बच्चों को चश्मे लगने लगे हैं। क्योंकि मायोपिया और हाइपरमेट्रोपिया के केस बढ़ते जा रहे हैं। इसी के साथ लोगों को ग्लूकोमा, केटरेक्ट, रेटिनोपैथी सहित अन्य आंखों से सम्बंधित समस्या हो रही है। तो कुछ घरेलू उपाय है। जिनकी सहायता से आप आंखों की रोशनी बढ़ा सकते हैं और चेहरे का चश्मा भी हट सकता है।

आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए यह करे काम-

-आंखों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन ए आवश्यक होता है। ऐसे फल खाने चाहिए जिससे विटामिन ए भरपूर मात्रा में मिले। इसके लिए फल और सब्जियां अपने भोजन में शामिल करना चाहिए।

-शहतूत की टूटी पत्तियां और गुलाब की पत्तियों को एक गिलास में डालकर रखें। इसके बाद उस पानी से अपनी आंखों को धोए। नंगे पैर हरी घास पर चलने से भी आंखों की रोशनी तेज होती है।

-आंखों की रोशनी बढ़ानी है, तो आंवले का सेवन करना चाहिए। हर दिन एक आंवले का सेवन करते हैं तो आपको दिनों दिन अच्छे से दिखने लगेगा।

-इलायची और लौंग का मिश्रण बना कर खाना चाहिए। हो सके तो 10 ग्राम छोटी इलायची, 20 ग्राम सौंफ मिलाकर पीस लें और इस मिश्रण की एक चम्मच हर दिन दूध के साथ पी सकते हैं। ऐसा करने से आंखों की कमजोरी दूर होने लगती है।

-आंखों के चारों और अखरोट के तेल से मालिश करने से चश्मे का नंबर कम होता है। हर दिन ऐसा करने से आंखों की रोशनी बढ़ने लगती है।

-सबसे पहले अपने पैरों को धोए और साफ कपड़े से पोछने के बाद सरसों के तेल से पैर के तलवों पर मालिश करें। यह उपाय रोज सोने से पहले करने से आपकी आंखों की रोशनी बढ़ेगी।

-आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए व्यक्ति को पौष्टिक भोजन करना चाहिए। इसी के साथ बच्चों को विटामिन ए वाले आहार देना चाहिए।

-बच्चे जिस कमरे में बैठकर पढ़ते हैं। वहां रोशनी का बेहतर प्रबंध होना चाहिए। तेज रोशनी नहीं होनी चाहिए और कम रोशनी भी नहीं रहनी चाहिए। साथ ही साल में एक बार बच्चों की आंखों का चेकअप भी कराना चाहिए। वैसे तो यह घरेलू उपाय हैं। इनसे आंखों की रोशनी बढ़ती है। लेकिन अगर आप आंखों से संबंधित समस्या तो अच्छे चिकित्सक को जरूर दिखाएं।



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संतरा सेहत के लिए है बहुत फायदेमंद, इसके छिलके से बढ़ती है खूबसूरती

संतरा ऐसा फल है जो खाने में स्वादिष्ट लगने के साथ ही सेहत के लिए भी काफी लाभदायक है। आश्चर्य की बात तो यह है कि संतरे का रस जहां सेहत के लिए फायदेमंद है। वहीं दूसरी ओर उसके छिलके भी आपकी खूबसूरती बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। आज हम आपको ऐसे टिप्स बताएंगे। जिसके माध्यम से आप संतरे के छिलकों का भी उपयोग कर सकते हैं।

संतरे के छिलके से बनाएं स्क्रब-

संतरे का छिलका लोग यूं ही फेंक देते हैं। लेकिन आप संतरे के छिलके को सुखाकर उसका स्क्रब भी बना सकते हैं। इसके लिए आप संतरे के छिलके को सुखाने के बाद उसका पाउडर बना लें और उसमें गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे चेहरे पर लगाएं। इसे स्क्रब करते हुए चेहरे को साफ करें। इससे आपकी रूखी त्वचा को पोषण मिलेगा। इसमें आप गुलाब जल की जगह कच्चे दूध का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

मुहांसों के लिए फायदेमंद-

संतरे के छिलके का पाउडर बनाकर इसका पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं। उससे चेहरे पर आए कील मुंहासे खत्म हो जाएंगे।

त्वचा को मिलेगी प्राकृतिक चमक-

आपकी रूखी त्वचा को चमकदार बनाने के लिए संतरे के छिलके का स्क्रब काफी असरदार रहेगा। क्योंकि इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। इसलिए यह आपकी त्वचा के लिए काफी फायदेमंद है।

सन्तरे के रस से भी बना सकते हैं पेस्ट-

गुलाब जल या दूध की अपेक्षा आप संतरे के रस और पाउडर को मिलाकर भी पेस्ट बना सकते हैं। इसे आपकी त्वचा पर लगाने से त्वचा को नमी मिलेगी और आपकी चेहरा चमकने और से एक समान नजर आएगा।

गर्मी के साइड इफेक्ट से भी बचाएगा-

गर्मियों में स्किन पर तेज धूप लगने के कारण आपकी त्वचा झुलस जाती है। ऐसे में अगर आप संतरे के छिलके का पैक बनाकर लगाएंगे। तो इस से झुलसी हुई त्वचा में चमक आएगी और आपका चेहरा निखर जाएगा।

सेहत के लिए फायदेमंद संतरा-

आपको बता दें कि संतरे में किसी प्रकार का फैट या कोलेस्ट्रोल नहीं होता है। जबकि इसमें डाइटरी फाइबर रहता है। जो शरीर के हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है। संतरे में विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है और इसमें नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट होता है। जो इम्यूनिटी बढ़ाता है, खून साफ करने और स्टेमिना बढ़ाने के लिए भी संतरा काफी मददगार रहता है। इसी के साथ आंखों के लिए विटामिन ए और शरीर के लिए विटामिन बी कॉम्प्लेक्स का स्रोत है। जो हीमोग्लोबिन भी बढ़ाता है। इससे हड्डियां भी मजबूत होती है और यह ब्लड प्रेशर रेगुलेटर करता है। इसलिए यह फ्रूट व्यक्ति के सेहत के साथ खूबसूरती के लिए भी काफी फायदेमंद है।



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Saturday, 27 February 2021

आपके भी मुंह से आती है बदबू, तो दूर करने के लिए अपनाएं यह आसान तरीके

मुंह से बदबू आने पर सामने खड़े लोग भी आपसे बात करने से बचना चाहते हैं। जैसे जैसे आप बोलते हैं वैसे वैसे आपके मुंह से बदबू आती है। ऐसे में दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच आप कई बार शर्मा जाते हैं। क्योंकि लोग आप से दूरी बनाने लगते हैं। इस समस्या से निजात पाने के लिए कुछ आसान उपाय हैं।

आपके मुंह से अगर बदबू आ रही है। तो आज से ही यह उपाय शुरू करें। ताकि आपको इस समस्या से छुटकारा मिले-

- मुंह से बदबू आती है, तो उसे दूर करने के लिए एक गिलास पानी में दो चम्मच सेब का सिरका डालें और उसके गरारे करें।

- तुलसी के पत्तों को चबाने से भी मुंह की दुर्गंध कम होती है।

- एक गिलास पानी में थोड़ा अदरक कूटकर डालें और उसे उबाल कर ठंडा होने दें। इसके बाद दिन में तीन चार बार कुल्ले करें।

- फिटकरी का एक टुकड़ा आधे गिलास पानी में डालकर रखें। करीब 5 मिनट बाद फिटकरी निकाल दें।और रात को सोने से पहले इस पानी से कुल्ला करें। तो निश्चित ही मुंह की बदबू दूर होगी और पायरिया की शिकायत से भी आराम मिलेगा।

-लौंग और इलायची का पेस्ट बनाएं। इसे दातों पर मंजन की तरह उंगली से मालिश करें, फिर कुल्ला करें।

-सूखे धनिया के दाने मुंह में डालकर चबाने से भी दुर्गंध दूर होगी।

-पुदीना की पत्तियों को बारीक पीस लें और इस का घोल बनाकर दिन में तीन चार बार कुल्ला करें।

-अजवाइन को भिगोकर उसका पानी पीएं, इसी के साथ अजवाइन को सेककर खाएं।

-ताजा गुलाब की पंखुड़ियों को चबाने और मसूड़ों पर मालिश करने से पायरिया और मुंह की दुर्गंध से राहत मिलती है।

-नमक और सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों की मसाज करने से मुंह की दुर्गंध कम होती है।

-अमरूद यानी जामफल के पत्ते चबाने से भी मुंह से आ रही बदबू कम पड़ेगी।

-नीम की पत्तियों को धोने और फिर सुखाने के बाद जलाकर राख बना लें। इस राख से दातों और मसूड़ों की मसाज करें।

-मुलेठी को भी चबाना चाहिए, उसे चूसने और चबाने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है और खांसी के लिए भी आरामदायक जड़ी है।

-अनार के छिलके को पानी में उबालकर कुल्ला करें।

-मुंह से संबंधित रोगों से मुक्ति पाने के लिए समय-समय पर लौंग चबाएं।

-भोजन करने के बाद सौंफ और मिश्री खाएं।



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मोटापे से परेशान हैं तो आज से ही करें यह काम, तेजी से घटेगा वजन

तले-गले खाद्य पदार्थ, फास्ट फूड खाने और परिश्रम के अभाव में मोटापा व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेता है। क्योंकि मोटापा अपने साथ कई बीमारियां भी साथ लेकर आता है। इसलिए हर कोई मोटापे से मुक्ति पाना चाहता है। लेकिन समय के अभाव के कारण यह संभव नहीं होता है। आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताएंगे। जिसकी सहायता से आप बिना किसी परेशानी के अपना वजन कम कर सकते हैं।

जानकारी के अनुसार मोटे व्यक्ति को अपना वजन कम करने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे शरीर में जमा फेट तेजी से गिरने लगेगा और व्यक्ति को मोटापे से मुक्ति मिलेगी। इसलिए हम बताएंगे कि किस प्रकार गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए।

यह तो सभी जानते होंगे कि पानी शरीर के पोषक तत्वों को सोख लेता है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है। यानी अच्छी चीजें ग्रहण करता है और खराब चीजों को पसीने के माध्यम से बाहर निकाल देता है। इससे पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। अगर ऐसे में गुनगुना पानी पिया जाए तो यह रामबाण उपचार होगा। क्योंकि इससे हर दिन वजन में गिरावट आएगी।

पानी से कम होगी भूख-

अगर आप सुबह उठते ही गर्म पानी का सेवन करने लगते हैं। तो आपको बार-बार लगने वाली भूख की समस्या से निजात मिलेगी। क्योंकि इससे आपकी भूख दब जाएगी और आप जब भी खाएंगे तो अत्यधिक नहीं खा पाएंगे। इससे आपको वजन कम करने में मदद होगी। साथ ही गुनगुने या गर्म पानी से आपके शरीर का फेट भी कम होगा।

पानी में नहीं होती कैलोरी-

पानी के माध्यम से व्यक्ति का वजन इसलिए कम होता है। क्योंकि पानी में कैलोरी नहीं होती है। अगर हर व्यक्ति दिन में 8 से 10 गिलास पानी पीये तो निश्चित ही इससे शरीर को कई फायदे मिलेंगे। क्योंकि गर्म पानी शरीर से फेट कम करता है और वजन घटाने में काफी मददगार साबित होता है। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है। जिससे कैलोरी तेजी से कम होती है और व्यक्ति को एनर्जी भी मिलती है। इसी के साथ आपको सोड़ा युक्त पेय पदार्थ, चाय, काफी आदि से बचना चाहिए।

इस प्रकार पीएं गर्म और गुनगुना पानी-

-सुबह उठने के बाद खाली पेट गर्म पानी पीए।

-व्यायाम करने के बाद एक से दो गिलास पानी पीएं।

-आप खाना खाने से पहले भी गुनगुने पानी का सेवन करें। ताकि आपकी भूख कम हो, खाने से पहले और खाने के बाद भी गुनगुना पानी पीएं।

-रात को सोने से करीब एक-दो घंटे पहले गुनगुना पानी पीने की आदत डालें।

वैसे तो गर्म पानी पीने के अनगिनत फायदे हैं। लेकिन आपको किसी प्रकार की दिक्कत होती है। तो जितना सहन हो सके उतना ही गर्म या गुनगुना पानी पीएं। क्योंकि अगर आप दिन में एक गिलास भी गर्म पानी का सेवन करते हैं। तो वह आपके लिए काफी फायदेमंद होगा।



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पैरों में आ रही है सूजन, तो बिना देर करें घर में करें यह उपाय

शरीर में पोषण की कमी, शारीरिक परिश्रम नहीं करना और अत्यधिक मोटापे की वजह से व्यक्ति के पैरों में सूजन आ जाती है। कई लोगों को देर तक बैठे रहने, काफी देर तक खड़े रहने, बढ़ती उम्र आदि कारणों से ब्लड सरकुलेशन प्रभावित होने के कारण भी पैरों में सूजन की समस्या आती है। अगर आपके पैरों में भी सूजन की समस्या आ रही है। तो आज से ही यह उपाय करें। निश्चित ही इन उपायों से पैरों की सूजन और दर्द से राहत मिलेगी।

आपको पैरों की सूजन और दर्द से राहत दिलाने के लिए कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं। जिससे आपको निश्चित ही राहत मिलेगी।

बेकिंग सोडा से राहत-

बेकिंग सोड़े में एन्टी इन्फ्लामेट्री तत्व होते हैं। जो चावल के पानी के साथ मिलकर पैरों में जमा अतिरिक्त पानी को सोख लेता है और पैरों में ब्लड सरकुलेशन भी ठीक होने लगता है। इसके लिए आपको करीब 2 चम्मच चावल को पानी में उबालना होगा। इस पानी में दो चम्मच बेकिंग सोडा डालकर पेस्ट बना लें और 15 मिनट के लिए पैरों पर लगाएं। इससे आपको काफी राहत मिलेगी।

एसेंशियल ऑयल-

पैरों की सूजन और पैरों में आए दर्द को कम करने के लिए यह एक बहुत फायदेमंद उपाय है। एसेंशियल ऑयल को पानी में डालकर मिक्स करें और इसमें आधा कब सेंधा नमक भी डाल दें। इस पानी में पैरों को 15 मिनट तक डुबाये रखें इससे आप को काफी राहत मिलेगी। इसके लिए यूकेलिप्टस, पेपरमिंट, लेमन एसेंशियल ऑयल की तीन से चार बूंदे आधा बाल्टी गर्म पानी में डालना होगी।

नींबू और जैतून का तेल-

नींबू, दालचीनी और जैतून के तेल से पैरों का दर्द और सूजन से राहत मिल सकती है। क्योंकि नींबू में सूजन रोधी गुण होते हैं। इसी के साथ दालचीनी और जैतून का तेल भी सूजन को कम करने के लिए काफी कारगर उपाय है। इसलिए करीब आधा चम्मच दालचीनी पाउडर, एक चम्मच नींबू का रस, एक चम्मच जैतून का तेल और एक चम्मच दूध को मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को पैरों में लगाकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दें ।और इसे रात भर लगा रहने दें। जिससे निश्चित ही आपको राहत मिलेगी।

जौ का पानी

आपको बता दें कि जौ का पानी आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। जौ के पानी से पेशाब ज्यादा आता है। जिससे शरीर के सभी विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इससे पैरों की सूजन कम होती है। इसके लिए आप एक से दो कप पानी ले और मुट्ठी भर जो के दाने डालकर पानी के भूरा होने तक उबालें। इस पानी को ठंडा होने पर छानकर पी लें। आप दिन में एक दो गिलास जौ का पानी पी सकते हैं। इससे आपको काफी फायदा होगा।

सेंधा नमक-

सेंधा नमक में हाइड्रेटिंग मैग्नीशियम सल्फेई के क्रिस्टल होते हैं। जो मांसपेशियों के दर्द को ठीक करता है।इसलिए करीब आधा कप सेंधा नमक को गर्म पानी से भरे एक टब में डालें और करीब 15 से 20 मिनट के लिए अपने पैरों को डुबोकर रखें। इससे आपके पैरों को सूजन और दर्द से राहत मिलेगी। इसे आप रात को सोने से पहले कर सकते हैं।

धनिया-

धनिया सूजे हुए पैरों में जमा अतिरिक्त विषाक्त को शरीर से बाहर निकालता है । इसके लिए आप करीब एक कप पानी में 3 चम्मच धनिया के बीच को डालकर उबालें। इस को तब तक उबालें जब तक कि पानी आधा न रह जाए। इसके बाद पानी को ठंडा कर छानकर पी लें। दिन में दो बार इस पानी को पिए जिससे काफी फायदा।



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कच्चे आम से दूर होगी डायबिटीज और हाइपरटेंशन, रोजाना करना होगा इतना सेवन

वैसे तो आम हर व्यक्ति की पसंद है। बच्चे से लेकर बूढ़े तक आम को शौक से खाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कच्चा आम सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। इससे डायबिटीज से लेकर हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों से भी राहत मिलती है। बस आपको रोज कुछ मात्रा में खाना होगा। इससे आपको निश्चित ही लाभ होगा।

जानकारी के अनुसार कच्चा आम रोजाना प्रतिदिन 10 से 15 ग्राम खाना स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। हालांकि बाजार में मिलने वाले आम का स्क्वैश, जूस, आइसक्रीम आदि खाने से बचना चाहिए। क्योंकि इससे शुगर बढ़ती है। लेकिन कच्चा आम काफी फायदेमंद होता है।

कच्चे आम में विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। कच्चे आम पर हल्का नमक लगाकर खाने से गर्मियों में आपको कुछ राहत मिलेगी और यह शरीर में होने वाली पानी की कमी को भी रोकता है। लू लगने से भी बचाव करता है। कुछ लोग कच्चे आम को उबालकर उसका रस निकालकर चीनी, जीरा आदि मिलाकर पीते हैं। जिससे गर्मी में हिट स्ट्रोक से राहत मिलती है और त्वचा रोगों में भी यह फायदेमंद होता है। क्योंकि कच्चे आम में जेन्थोन एंटीऑक्सीडेंट होता है। जो हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद है।

गर्मी में हमारे शरीर से पसीना निकलने के कारण शरीर में आयरन, सोडियम, क्लोराइड जैसे खनिज और कई पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। लेकिन कच्चे आम का सेवन करने से हमें यह तत्व मिल जाते हैं और उन तत्वों का नुकसान नहीं होता।

कच्चे आम से हमारे शरीर में पानी की आपूर्ति भी होती है और पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है। क्योंकि इसमें एसिड होता है। जिससे गर्मियों में होने वाली पाचन संबंधी समस्या को भी बचा जा सकता है। इसमें पैक्टिन होने के कारण व्यक्ति को डायरिया, दस्त, बवासीर का सहित पेट सबंधी कई समस्या भी नहीं होती है।

कच्चा आम रक्त विकार दूर करने में भी मददगार होता है। उसमें विटामिन सी होने से यह रक्त के कणों के निर्माण में काफी सहायक होता है। यह ब्लड कैंसर, हैजा, तपेदिक जैसी बीमारियों से भी बचाव करता है। इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होता है। जो दांत के दर्द के लिए भी फायदेमंद होता है। जिससे मसूड़े और दांत मजबूत होते हैं और मुहं से आने वाली बदबू भी कम होती है।



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मुंह में हो गए छाले तो यह करें घरेलू उपाय, दूध और लहसुन से खत्म होगी समस्या

हार्मोन संतुलन बिगड़ने, खानपान में बदलाव, पेट में कब्ज आदि कारणों से लोगों के मुंह में छाले हो जाते हैं। जिसकी वजह से उनका भोजन करना भी दुश्वार हो जाता है। ऐसे में अगर आपको भी छाले की समस्या है। तो कुछ घरेलू उपाय से उन्हें दूर किया जा सकता है। इसमें खर्च भी नहीं आएगा और आपका काम भी हो जाएगा।

आपको बता दें कि गर्मी के मौसम में मुंह में छाले की समस्या अधिक होती है। अगर आपके मुंह में भी छाले हो गए हैं। तो उनको आप घर बैठे ही दूर कर सकते हैं, बस थोड़ा सा ध्यान देना होगा।

बर्फ से करें मसाज-

मुंह में छाले हो गए हैं तो उन पर बर्फ से मसाज कर सकते हैं। जिससे छालों को ठंडक मिलेगी और काफी फायदा होगा। इसी के साथ छाले के आसपास में दर्द और सूजन भी कम होगी।

दूध से दूर होंगे छाले-

दूध में काफी मात्रा में कैल्शियम होता है। जो वायरस से लड़ने का काम करता है। अगर आपके मुंह में छाले हो गए हैं। तो ठंडे दूध में रुई भिगोकर छाले वाली जगह पर लगाएं। इससे आपके मुंह में हुए छाले दूर होंगे।

एलोवेरा से मिलेगी राहत-

छाले होने पर आप एलोवेरा का भी उपयोग कर सकते हैं। एलोवेरा को बीच में से काट कर उसके गूदे को छाले वाले जगह पर लगाएं। इससे छाले की जलन कम होगी । क्योंकि एलोवेरा में जख्म को जल्दी भरने का गुण होता है। इसलिए छाले भी जल्दी खत्म हो जाएंगे।

लहसुन का उपयोग-

आपके मुंह में छाले हो गए हैं। तो लहसुन के माध्यम से भी उन्हें दूर कर सकते हैं। इसके लिए आपको लहसुन की कलियां लेकर उसका पेस्ट बनाना है और इस पेस्ट को छाले वाली जगह पर लगाएं। करीब 15 से 20 मिनट तक इसे लगा रहने दें। इसके बाद कुल्ला कर मुंह धो सकते हैं। क्योंकि लहसुन में एंटीबायोटिक गुण होते हैं। इसलिए वह छाले को जल्दी ठीक करेगा।

इसके अलावा चमेली के पत्ते से भी आपके छाले को राहत मिलेगी। चमेली के पत्तों को चबाकर उसके रस को छाले वाली जगह पर आने दें। इससे छाले जल्दी खत्म होंगे। खोपरा चबाने से भी छाले में राहत मिलेगी।



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इस वजह से टूट सकती हैं हड्डियां, रखें सावधानी

हड्डियों (bones) में दर्द होना ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) का सामान्य लक्षण है जिसकी शुरुआत में पहचान नहीं होती। इस रोग में मांसपेशियों (muscles) पर अधिक दबाव पडऩे से हड्डियां कभी भी टूट सकती हैं। इसलिए वृद्धावस्था (old age) में अधिक वजन उठाने के लिए मना करते हैं। समय से पहले मेनोपॉज (menopause), किसी कारण अंडाशय को निकलवाना या उसका खराब होना रोग के अहम कारण हैं। कई बार सामान्य मेनोपॉज के बाद भी, आने वाले 15 वर्षों में हड्डियों से काफी कैल्शियम निकल जाता है जिससे महिलाएं रोग की शिकार हो जाती हैं।

इससे किस तरह की समस्याएं हो सकती हैं?
इस बीमारी को साइलेंट किलर भी कहते हैं। क्योंकि खासकर रीढ़ की हड्डीए कूल्हों व कलाई की हड्डी में फ्रैक्चर से पहले कोई लक्षण नहीं दिखते। अब तक रोग के ज्यादातर मामले महिलाओं में पाए जाते थे। लेकिन पिछले 5-10 सालों में हुए कई शोधों के दौरान पुरुषों में भी इसकी शिकायत पाई गई। हालांकि पुरुषों के सेक्स हार्मोन में अचानक कमी नहीं आती व 70 साल की उम्र तक बरकरार रहता है। इसलिए पुरुष इस रोग से बचे ही रहते हैं।

रोग से बचाव के लिए क्या सावधानी बरतें?
वजन नियंत्रित करने के अलावा शरीर में कैल्शियम (calcium) व विटामिन-डी (vitamin d) की मात्रा संतुलित रखनी चाहिए। पुरुषों में धूम्रपान, शराब पीना, रोग की फैमिली हिस्ट्री, छोटी हड्डियां, तीन माह से ज्यादा कोर्टिकॉस्टेरॉयड दवाओं का प्रयोग व किडनी या लिवर संबंधी बीमारियों के कारण रोग की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में उन्हें 45 वर्ष के बाद बोन मिनरल डेंसिटी टैस्ट (mineral density test) करवाना चाहिए। साथ ही यदि हड्डियां छोटी या कमजोर हैं तो फ्रैक्चर से बचाव के लिए डॉक्टरी सलाह से दवाएं लेनी चाहिए।



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सर्दी में दिल की नसों में सिकुडऩ से बढ़ते हृदयाघात के मामले

सर्दी के मौसम (winter season) में हार्ट अटैक (heart attack) का खतरा बढ़ जाता है। आंकड़ों की मानें तो 50 फीसदी से अधिक हार्ट अटैक सर्दियों में होते हैं। सर्दियों में हृदय रोग (heart disease) के लक्षण भी तुलनात्मक रूप से अधिक गंभीर होते हैं। इसलिए इस मौसम में दिल की खास देखभाल की जानी चाहिए।

धमनियों में सिकुडऩ
सर्दियों में दिल के रोगियों को खास सावधानी की जरूरत पड़ती है। सर्दियों में शरीर से पसीना पर्याप्त मात्रा में नहीं निकलता, इसलिए हृदय रोग, एंजाइना और ब्लड प्रेशर के मरीजों की दवा की मात्रा बढ़ाने की आवश्यकता होती है। इस मौसम में तापमान कम होने से हृदय की रक्त नलिकाएं सिकुडऩे लगती हैं। इसलिए इन सिकुड़ी हुई नसों और धमनियों में रक्तसंचार के लिए अधिक ताकत की जरूरत होती है। जो कि ब्लड प्रेशर से जुड़ी बीमारियों की आशंका बढ़ा देती है। वहीं धमनियां सिकुडऩे और रक्त गाढ़ा होने से भी ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। साथ ही प्लेटलेट्स असंतुलित होने के कारण धमनियों में ब्लॉकेज की आशंका अधिक होती है।

पानी की कमी न हो शरीर में....

कृत्रिम हार्ट वॉल्व लगवा चुके या एंजियोप्लास्टी करवाने वाले जिन लोगों के शरीर में धातु निर्मित स्टेंट लगा होता हैए उनके लिए शरीर में पानी की कमी हार्ट अटैक का कारण बन सकती है। पानी की कमी के कारण रक्त गाढ़ा होने लगता है जिससे यह हृदय की नसों से चिपककर स्टेंट में अवरोध पैदा करता है।

50 प्रतिशत से ज्यादा हार्टअटैक के मामले सर्दी के मौसम में ही अधिक सामने आते हैं।

40 प्रतिशत बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा। ऐसा सुबह के समय ब्लड प्रेशर के स्तर में बदलाव से होता है।

सुबह ध्यान रखें
सांस संबंधी और हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure) के मरीजों को सर्दी की सुबह में खास एहतियात बरतने की जरूरत होती है। सुबह के समय ब्लड प्रेशर के स्तर में आए बदलाव से हार्ट अटैक (heart attack) की आशंका 40 प्रतिशत बढ़ जाती है। इसलिए हाई ब्लड प्रेशर या जिनका रक्त गाढ़ा हो उन्हें सुबह के बजाय थोड़ी धूप निकलने के बाद टहलने या वर्कआउट करने जाना चाहिए।



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गर्मी में सूखने लगे कंठ तो इन ज्यूसों का करें सेवन, सेहत के साथ देंगे ठंडक का अहसास

लगातार बढ़ते तापमान के कारण इस बार समय से पहले गर्मी ने दस्तक दे दी है। दिन में तेज धूप निकलने के कारण लोगों का कंठ सूखने लगता है। ऐसे में अगर आप भी गर्मी से परेशान हैं। तो अपने गले को तर करने के लिए कुछ हेल्दी ज्यूसों का उपयोग करें। जिससे आपको सेहत के साथ-साथ ठंडक का भी एहसास मिलेगा।

हम आपको कुछ ऐसे ज्यूसों के बारे में बताएंगे। जो आप घर में ही तैयार कर सकते हैं। इनसे आपके शरीर को ठंडक और ताजगी मिलेगी और गर्मी से भी राहत होगी।

तरबूज-

तरबूज गर्मी के दिनों में सेहत के लिए सबसे फायदेमंद होता है। क्योंकि इस फल में सबसे अधिक पानी होता है। इसलिए जब गर्मी सताए तो आप तरबूज का सेवन करने के साथ ही तरबूज का जूस भी पी सकते हैं। इसे काटने के बाद आप मिक्सर में घर ही जूस बना सकते हैं। तरबूज में विटामिन सी, बी, बी 2, बी 3 होते हैं।

पुदीना-

गर्मी में पुदीना का जूस आपके शरीर के लिए सबसे फायदेमंद है। इसकी पत्तियों को तोड़कर साफ करें और मिक्सर में डालकर बारीकी पीस सकते हैं। इसमें आप ठंडे पानी के साथ टेस्ट अनुसार नमक शक्कर आदि भी मिला सकते हैं।

नींबू पानी-

अगर आपका गला ज्यादा सूख रहा है। और शरीर में भी डीहाइड्रेशन सा लग रहा है। तो आप नींबू पानी का उपयोग कर सकते हैं। यह पेय अन्य सभी ज्यूसों से सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल्स आदि होते हैं।

मट्ठा-

गर्मियों में मट्ठा यानी छाछ भी सेहत के लिए अमृत माना जाता है। मट्ठे को फ्रिज में रख कर थोड़ा ठंडा होने के बाद उसमें टेस्ट अनुसार जीरा नमक या शक्कर भी मिला सकते हैं। अगर आपको शुगर की समस्या है तो शक्कर नहीं मिलाना फायदेमंद होगा। जिसमें विटामिन बी, पोटेशिय, प्रोटीन और अन्य विटामिंस होते हैं। जिससे शरीर में ताजगी आती और पाचन तंत्र भी बेहतर होता है।



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Friday, 26 February 2021

आइआइटी मद्रास ने कैंसररोधी दवा कैम्पटोथेसिन के स्रोत का विकल्प खोजा

चेन्नई । कैंसररोधी दवा कैम्पटोथेसीन के स्रोत माने जाने वाले चीनी व भारतीय पौधे विलुप्त हो रहे हैं। पौधों के दुर्लभ होने से इनकी व्यापक स्तर पर कटाई हो रही है। आइआइटी मद्रास शोधकर्ताओं ने कैम्पटोथेसीन के उत्पादन के नए स्ट्रेन को खोजने में कामयाबी हासिल की है। इससे दवा सस्ती और मांग पूरी होगी। कैम्पटोथेसिन एक एल्कलॉयड (प्राकृतिक रूप से उपलब्ध रासायनिक यौगिक) है, जिसे चीनी पेड़ कैम्पटोथेकैमिनुमैटा और भारतीय पेड़ नोथापोडीट्स निमोनीना से लिया जाता है। इस शोध का नेतृत्व आइआइटी मद्रास की जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एसो. प्रोफेसर डॉ. स्मिता श्रीवास्तव ने किया।

पौधे में उच्च कैम्पटोथेसिन -
डॉ. स्मिता ने बताया कि पौधों में एंडोफाइट (सूक्ष्मजीव, जो पौधों के अंदर रहते हैं) होता है। यह उच्च कैम्पटोथेसिन का उत्पादन करता है। हमने इस एंडोफाइट का सृजन करने वाले 32 स्ट्रेन का पता लगाया तथा उनमें से उच्च उत्पादकता वाले स्ट्रेन (अल्टरनेरिया एसपी) को अलग किया। पौधे के बाहर उत्पादन के अनुरूप वातावरण के लिए इन विट्रो प्रोडक्शन प्रक्रिया को अपनाया।

कैंसर के आंकड़े चिंताजनक-
भा रत में कैंसर मृत्यु का बड़ा कारण है। एशियन पैसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार 2026 तक भारत में हर साल नए कैंसर के मामले पुरुषों में 0.93 लाख व महिला रोगियों में 0.94 लाख तक पहुंच जाएंगे।



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आइआइटी मद्रास ने कैंसररोधी दवा कैम्पटोथेसिन के स्रोत का विकल्प खोजा

चेन्नई । कैंसररोधी दवा कैम्पटोथेसीन के स्रोत माने जाने वाले चीनी व भारतीय पौधे विलुप्त हो रहे हैं। पौधों के दुर्लभ होने से इनकी व्यापक स्तर पर कटाई हो रही है। आइआइटी मद्रास शोधकर्ताओं ने कैम्पटोथेसीन के उत्पादन के नए स्ट्रेन को खोजने में कामयाबी हासिल की है। इससे दवा सस्ती और मांग पूरी होगी। कैम्पटोथेसिन एक एल्कलॉयड (प्राकृतिक रूप से उपलब्ध रासायनिक यौगिक) है, जिसे चीनी पेड़ कैम्पटोथेकैमिनुमैटा और भारतीय पेड़ नोथापोडीट्स निमोनीना से लिया जाता है। इस शोध का नेतृत्व आइआइटी मद्रास की जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एसो. प्रोफेसर डॉ. स्मिता श्रीवास्तव ने किया।

पौधे में उच्च कैम्पटोथेसिन -
डॉ. स्मिता ने बताया कि पौधों में एंडोफाइट (सूक्ष्मजीव, जो पौधों के अंदर रहते हैं) होता है। यह उच्च कैम्पटोथेसिन का उत्पादन करता है। हमने इस एंडोफाइट का सृजन करने वाले 32 स्ट्रेन का पता लगाया तथा उनमें से उच्च उत्पादकता वाले स्ट्रेन (अल्टरनेरिया एसपी) को अलग किया। पौधे के बाहर उत्पादन के अनुरूप वातावरण के लिए इन विट्रो प्रोडक्शन प्रक्रिया को अपनाया।

कैंसर के आंकड़े चिंताजनक-
भा रत में कैंसर मृत्यु का बड़ा कारण है। एशियन पैसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार 2026 तक भारत में हर साल नए कैंसर के मामले पुरुषों में 0.93 लाख व महिला रोगियों में 0.94 लाख तक पहुंच जाएंगे।



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आइआइटी मद्रास ने कैंसररोधी दवा कैम्पटोथेसिन के स्रोत का विकल्प खोजा

चेन्नई । कैंसररोधी दवा कैम्पटोथेसीन के स्रोत माने जाने वाले चीनी व भारतीय पौधे विलुप्त हो रहे हैं। पौधों के दुर्लभ होने से इनकी व्यापक स्तर पर कटाई हो रही है। आइआइटी मद्रास शोधकर्ताओं ने कैम्पटोथेसीन के उत्पादन के नए स्ट्रेन को खोजने में कामयाबी हासिल की है। इससे दवा सस्ती और मांग पूरी होगी। कैम्पटोथेसिन एक एल्कलॉयड (प्राकृतिक रूप से उपलब्ध रासायनिक यौगिक) है, जिसे चीनी पेड़ कैम्पटोथेकैमिनुमैटा और भारतीय पेड़ नोथापोडीट्स निमोनीना से लिया जाता है। इस शोध का नेतृत्व आइआइटी मद्रास की जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एसो. प्रोफेसर डॉ. स्मिता श्रीवास्तव ने किया।

पौधे में उच्च कैम्पटोथेसिन -
डॉ. स्मिता ने बताया कि पौधों में एंडोफाइट (सूक्ष्मजीव, जो पौधों के अंदर रहते हैं) होता है। यह उच्च कैम्पटोथेसिन का उत्पादन करता है। हमने इस एंडोफाइट का सृजन करने वाले 32 स्ट्रेन का पता लगाया तथा उनमें से उच्च उत्पादकता वाले स्ट्रेन (अल्टरनेरिया एसपी) को अलग किया। पौधे के बाहर उत्पादन के अनुरूप वातावरण के लिए इन विट्रो प्रोडक्शन प्रक्रिया को अपनाया।

कैंसर के आंकड़े चिंताजनक-
भा रत में कैंसर मृत्यु का बड़ा कारण है। एशियन पैसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार 2026 तक भारत में हर साल नए कैंसर के मामले पुरुषों में 0.93 लाख व महिला रोगियों में 0.94 लाख तक पहुंच जाएंगे।



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आइआइटी मद्रास ने कैंसररोधी दवा कैम्पटोथेसिन के स्रोत का विकल्प खोजा

चेन्नई । कैंसररोधी दवा कैम्पटोथेसीन के स्रोत माने जाने वाले चीनी व भारतीय पौधे विलुप्त हो रहे हैं। पौधों के दुर्लभ होने से इनकी व्यापक स्तर पर कटाई हो रही है। आइआइटी मद्रास शोधकर्ताओं ने कैम्पटोथेसीन के उत्पादन के नए स्ट्रेन को खोजने में कामयाबी हासिल की है। इससे दवा सस्ती और मांग पूरी होगी। कैम्पटोथेसिन एक एल्कलॉयड (प्राकृतिक रूप से उपलब्ध रासायनिक यौगिक) है, जिसे चीनी पेड़ कैम्पटोथेकैमिनुमैटा और भारतीय पेड़ नोथापोडीट्स निमोनीना से लिया जाता है। इस शोध का नेतृत्व आइआइटी मद्रास की जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एसो. प्रोफेसर डॉ. स्मिता श्रीवास्तव ने किया।

पौधे में उच्च कैम्पटोथेसिन -
डॉ. स्मिता ने बताया कि पौधों में एंडोफाइट (सूक्ष्मजीव, जो पौधों के अंदर रहते हैं) होता है। यह उच्च कैम्पटोथेसिन का उत्पादन करता है। हमने इस एंडोफाइट का सृजन करने वाले 32 स्ट्रेन का पता लगाया तथा उनमें से उच्च उत्पादकता वाले स्ट्रेन (अल्टरनेरिया एसपी) को अलग किया। पौधे के बाहर उत्पादन के अनुरूप वातावरण के लिए इन विट्रो प्रोडक्शन प्रक्रिया को अपनाया।

कैंसर के आंकड़े चिंताजनक-
भा रत में कैंसर मृत्यु का बड़ा कारण है। एशियन पैसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार 2026 तक भारत में हर साल नए कैंसर के मामले पुरुषों में 0.93 लाख व महिला रोगियों में 0.94 लाख तक पहुंच जाएंगे।



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Thursday, 25 February 2021

मोटापा दूर कर बनना है स्लिम तो रोज खाएं सेब, पाचन तंत्र भी करेगा मजबूत

एप्पल यानी सेब फल खाने से आप तमाम बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं। केवल इसको खाने का तरीका सही होना चाहिए। इससे जहां एक और व्यक्ति का मोटापा दूर होकर वह स्लिम बनता है। वहीं दूसरी ओर सेब के रोजाना इस्तेमाल से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। यह ऐसा फल है जिसके माध्यम से पाचन तंत्र भी मजबूत होता है।

पाचन तंत्र होगा मजबूत-

सेब फल पाचन तंत्र को मजबूत करता है। क्योंकि इसमें अल्कालिनिटी होता है। जो शरीर में मौजूद पीएच लेवल को भी कंट्रोल करता है। व्यक्ति का पाचन तंत्र मजबूत होने से उसमें रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है।

कोलेस्ट्रोल करता कंट्रोल-

तली-गली चीजें खाने से कोलेस्ट्रोल की समस्या आम होती जा रही है। ऐसे में एप्पल और जूस पीने से निश्चित ही केलोस्ट्रोल पर नियंत्रण किया जा सकता है। हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए भी सेब काफी फायदेमंद होता है। कई रोगियों को चिकित्सक उबला हुआ सेब खाने की सलाह भी देते हैं।

सुंदरता के लिए-

अगर आपके चेहरे पर काले और सफेद निशान है। तो आप आज से ही सेब फल का सेवन करें। इससे चेहरे के दाग धब्बे तो कम होंगे ही साथ ही चेहरा भी ग्लो करेगा। रोजाना सेब का सेवन करने से आपके शरीर में मौजूद फेट भी धीरे-धीरे कम हो जाएगा। जिससे आप आकर्षक और सुंदर नजर आएंगे।

शुगर को नियंत्रित करें-

सेब फल का नियमित सेवन करने से यह टाइप 2 मधुमेह के खतरे को कम करता है। क्योंकि इसमें मौजूद तत्व शरीर में ग्लूकोस की कमी को पूरा करते हैं और शरीर में पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोस रहने पर आपको इंसुलिन लेने की भी जरूरत नहीं होती है।

पथरी के लिए लाभदायक-

सेब फल के निमित्त उपयोग से यह गुर्दे में होने वाली पथरी से भी बचाव करता है। यदि आप को पथरी की समस्या है। तो आप प्रतिदिन सेव खायें। इससे पथरी से होने वाले दर्द से भी राहत मिलेगी।

मोटापा-

मोटापा व्यक्ति के लिए कई प्रकार की बीमारियां लेकर आता है। ह्रदय रोग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर आदि मोटापे के कारण हो जाते हैं। ऐसे में सेब फल खाने से व्यक्ति की चर्बी कम होती है और वह मोटापे से मुक्त कराता है। क्योंकि सेब फल में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है। जो मोटापे को कम करने में मददगार है।

कब्ज से मिलेगी राहत-

कब्ज और एसिडिटी की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए सेब फल काफी फायदेमंद होता है। सेब में पाया जाने वाला फाइबर पेट की कब्ज को कम करता है और सेब का मुरब्बा भी कब्ज के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होता है। कब्ज खत्म होने से कई बीमारियां खत्म हो जाती है।

दांतों के लिए फायदेमंद-

आपके दांतों के लिए भी सेब काफी फायदेमंद होता है। क्योंकि सेब के सेवन से बैक्टीरिया और वायरस दूर भागते हैं। ऐसे में सेब से आपके मुंह में थूक और लार की मात्रा बढ़ जाती है। जिससे आपके दांतों में पायरिया भी नहीं होता है।

हड्डियों के लिए फायदेमंद-

सेब में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम होता है। इस कारण सेब का प्रतिदिन सेवन करने से और उसका जूस पीने से हड्डियां मजबूत होती है और थकान भी महसूस नहीं होती है। दमे के रोगियों के लिए भी सेब काफी फायदेमंद है। सेब दमें के अटैक को रोकने में भी मददगार है। यह फेंफड़ों को भी मजबूत करता है।



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Corona virus: कोरोना से ठीक हो चुके लोग ना करें इन 7 संकेतों को नजरअंदाज, पड़ सकता है भारी

नई दिल्ली। कोरोना महामारी(COVID-19) से लोग अभी उबर भी नही पाए थे कि दूसरी बार इस महामारी ने फिर करवट लेली है। नया रूप लेकर आई यह महामारी पुराने से भी ज्यादा खतरनाक है। यहां तक कि इसमें पाए जाने वाले लक्षण भी पुराने कोरोना संक्रमण से अलग दिखाई दे रहे है। अभी हाल ही में हुए एक स्टडी से पता चला है कि जो लोग कोरोना वायरस (Impact of COVID-19)से ठीक होकर घर जा चुके थे वे लोग अब कई तरह की नई बीमारी से जूझ रहे है क्योंकि इसका असर लोगों के ब्लड फ्लो पर तेजी से पड़ा है। और खून के बहाव में आने वाली रुकावटों की वजह से कई बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यदि आप कोरोना से ठीक हो चुके हैं तो भी इन 7 संकेतों को नजरअंदाज करना आप पर भारी पड़ सकता है. आइए जानते हैं इनके बारे में...

गंभीर ब्लड क्लॉटिंग- अस्पताल में भर्ती COVID-19 के युवा और बुजुर्ग मरीज जो ठीक होकर घर जा कुके है उनमें अब खून के थक्के बनने की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है. डॉक्टर्स का कहना है कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पहले से बीमारी वाले लोगों में ब्लड क्लॉटिंग खतरनाक हो सकता है।

फेफड़ों और दिल को नुकसान- जिन मरीजों का खून गाढ़ा हो रहा है उन्हें COVID-19 के बाद गंभीर ब्लड क्लॉटिंग की समस्या हो रही है। जो सीधे फेफड़ों और दिल पर असर कर रहा है। एक स्टडी के मुताबिक ब्लड क्लॉट फेफड़ों में रुकावट डालकर सांस की तकलीफ जैसी कई समस्याएं पैदा कर सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में इसकी वजह से हार्ट अटैक भी आ सकता है।

किडनी खराब होना- जॉन हॉपकिंस मेडिसिन की एक स्टडी के मुताबिक ब्लड क्लॉटिंग की वजह से किडनी की रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से किडनी फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।

थ्रोम्बोसिस- ब्लड से जुड़ा COVID-19 का एक और गंभीर खतरा डीप वेन थ्रोम्बोसिस का भी है। इसके होने से पैर की नसों में ब्लड क्लॉट बन जाता है। ज्यादातर लोगों को ये पैर के निचले हिस्से में होता है लेकिन कुछ लोगों को ये शरीर के अन्य हिस्से में भी हो सकता है. अगर इसका इलाज सही समय से ना किया जाए तो ये गंभीर हो सकता है।

शरीर में सूजन- कोरोना वायरस की वजह कुछ लोगों के शरीर में सूजन भी हो रही है. जब वायरस त्वचा पर हमला करता है तो ये खून के कई थक्के बना देता है जिसकी वजह से घाव और सूजन होने लगता है. इसमें बहुत दर्द होता है. इसलिए कोरोना के लक्षण में सूजन को अनदेखा ना करें।

त्वचा का रंग बदलना और चकत्ते पड़ना- स्किन में इन्फेक्शन होने क कतरे ज्यादा देखने व सुने को मिले है। वायरस का असर जब खून पर पड़ता है तो इसकी वजह से स्किन खराब होने लगती है. पैर की उंगलियों का अजीब हो जाना कोरोना के एक लक्षण के रूप में देखा जाता है लेकिन कई शोध से पता चला है कि ब्लड फ्लो पर वायरस के प्रभाव से स्किन का कलर भी बदलने लगता है।

स्ट्रोक का खतरा- कोरोना के मरीजों में स्ट्रोक आने का भी खतरा रहता है. ये खतरा उन्हें भी हो सकता है जिन्हें दिल से जुड़ी कोई बीमारी ना हो. ब्लड फ्लो का सही ना होना या फिर ब्लड क्लॉटिंग स्ट्रोक का मुख्य कारण हैं।



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High Blood Pressure: आंख और चेहरे से पहचाने हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण, चेहरा देते है वॉर्निंग साइन

नई दिल्ली। आज के समय में हाई ब्लड प्रेशर ( high blood pressure)की बीमारी ना केवल बड़े लोगों को बल्कि छोटे लोग भी इसकी चपेट पर रहे है। यह बीमारी इतनी घातक होती है कि लोगों के सोचने समझने से पहले ही ये इंसान को मौत के दरवाजे तक लेकर आती है, इसीलिए इस बीमारी को साइलेंट किलर भी कहा जाता हैं। हाई ब्लड के लक्षणों के बारे में हर कोई अच्छी तरह से जानता व समझता है लेकिन इस बीमारी के आने से पहले ऐसे दो लक्षण और देखने को मिलते है जिससे लोग असानी से पता लगा सकते है इस बीमारी के बारे में..

हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure)का कनेक्शन आर्टिरियल्स नाम की धमनियों से होता है जब ये धमनियां पतली हो जाती है तो हृदय खून को पंप करने के लिए अधिक मशक्कत करता है जिससे नसों में भी प्रेशर काफी बढ़ जाता है। ऐसे में सिर चकराना, घबराहट, पसीना आना जैसे लक्षण देखने को हैं। इसके अलावा, हमें आंखों से भी संकेत मिलने लगते है इसमें ब्लड स्पॉट पड़ने लगता है जो हाई ब्लड प्रेशर का वॉर्निंग साइन हो सकता है।.

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, चेहरे पर लालपन का भी हाई ब्लड प्रेशर से सीधा कनेक्शन हो सकता है. फेस फ्लशिंग की ये समस्या उस वक्त होती है जब चेहरे की रक्त वाहिकाएं पतली हो जाती हैं और शरीर का ब्लड प्रेशर सामान्य से ऊपर हो जाता है।



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काले अंगूर में होता है विटामिन ई, रोज खाने से यह होंगे फायदे.....

अंगूर खाने के गर्मियों में वैसे तो कई फायदे होते हैं।क्योंकि इसमें विटामिन ई होता है। जिसे रोज खाने से कोलेस्ट्रोल कंट्रोल होने के साथ ही बालों और याददाश्त के लिए भी काफी फायदेमंद है। लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग भी नुकसानदायक है। इससे दस्त भी लग सकते हैं। इसलिए आपको काले अंगूर का उपयोग करना चाहिए।

आपको बता दें कि हद से ज्यादा अंगूर खाने से सलिसीक्लिक एसिड आपके शरीर में पाचन संबंधी समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए एक ही दिन में बहुत अधिक अंगूर खाने से दस्त भी लग सकते हैं और इससे वजन भी बढ़ता है। इसलिए अगर आप काले अंगूर खाते हैं। तो वह आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। हम ऐसे ही कुछ फायदे आज आपको बताएंगे।

इंसुलिन में बढ़ोतरी-

काले अंगूर खाने से ब्लड में इंसुलिन की मात्रा बढ़ती है।क्योंकि अंगूर में रेसवार्टल नामक पदार्थ होता है। जो इंसुलिन को बढ़ाता है।

कोलेस्ट्रोल को करेगा कंट्रोल-

अत्यधिक तले गले पदार्थों से व्यक्ति के शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिए काले अंगूर खाने से आपका कोलेस्ट्रोल कंट्रोल में रहेगा। क्योंकि अंगूर में मौजूद साइटोकेमिकल्स दिल के लिए बेहतर होता है।

बालों लिए फायदेमंद-

अगर आपको बालों से संबंधित कोई भी समस्या है। तो आप आज से ही काले अंगूर खाना शुरु कर दें। क्योंकि इसमें विटामिन ई होता है। जो बालों की सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। इससे बाल काले और घने होने के साथ ही मजबूत भी होंगे।

काले अंगूर से घटेगा वजन-

काले अंगूर खाने से व्यक्ति का वजन भी कम होता है। इसलिए अगर आपको अपना वजन कम करना है तो काले अंगूर का उपयोग कर सकते हैं।



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कमजोरी दूर करेगी खारक, दूध के साथ मिलाकर पीने से होगा फायदा

स्वास्थ्य के लिए खारक काफी फायदेमंद है। खारक का सेवन करने से शरीर की कमजोरी तो दूर होती ही है। इसी के साथ अन्य बीमारियां भी आपको छू नहीं सकती है। क्योंकि खारक में फाइबर के साथ एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। जो आपका इम्यूनिटी सिस्टम भी मजबूत करता है और मानसिक सेहत के लिए भी फायदेमंद है।

आपको बता दें कि खारक में कैल्शियम, फाइबर, विटामिन सी जैसे कई पोषक तत्व होते हैं। जिसे दूध के साथ मिलाकर खाने से स्वास्थ्य को कई फायदे होते हैं। खारक यानी छुहारे को दूध में उबालकर उसका सेवन करना चाहिए। जिससे आपका शरीर सेहतमंद रहेगा।

छुहारे के उपयोग के फायदे.....

कमजोरी दूर कर बढ़ाएगा भजन-

अगर आप दुबले-पतले हैं और आपका शरीर कमजोर है। तो छुहारे आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि इसमें काफी कैलोरीज होती है। इसे दूध के साथ लेने से वजन बढ़ने में मदद मिलती है और हर दिन इसका सेवन करने से आपको कई फायदे होंगे।

डायबिटीज में फायदेमंद-

दूध और छुहारे का सेवन ब्लड शुगर लेबल नियंत्रित करने के लिए काफी फायदेमंद रहता है। कई लोग दूध में भीगे हुए छुआरे भी खाते हैं। जिससे आपको काफी फायदा होगा।

हड्डियों के लिए लाभदायक-

दूध और छुहारा आपके स्वास्थ्य से लेकर हड्डियों तक के लिए फायदेमंद होता है। दूध में छुहारा भिगोकर खाने से मांसपेशियों का निर्माण होता है और हड्डियां भी मजबूत होती है।

पेट के लिए फायदेमंद-

छुहारा यानी खारक में पोटेशियम और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं। दूध छुहारे का एक साथ सेवन करने से आप का पाचन तंत्र बेहतर होगा और यह मिश्रण एंजाइम्स को बूस्ट करने में भी मदद करता है। जिससे कब्ज की समस्या भी दूर होती है।

त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद-

आपकी स्किन और बालों के लिए भी दूध और छुहारा काफी फायदेमंद हो सकता है। यह आपकी त्वचा का ग्लो बढ़ाएगा और विभिन्न विटामिन की कमी को पूरा करेगा। जिससे आपके बाल भी झड़ते बंद होंगे।



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Wednesday, 24 February 2021

ब्लड प्रेशर लेवल का घर में करें टेस्ट, कंट्रोल करने के लिए यह करें उपाय

अत्यधिक मानसिक तनाव, खानपान में लापरवाही और दौड़ भाग भरी जिंदगी में लोगों को उच्च रक्तचाप की समस्या होना आम बात हो गई है। लेकिन यही ब्लड प्रेशर व्यक्ति के हार्ट और किडनी पर भी असर करता है। जो कि शरीर के लिए घातक हो सकता है। इसलिए हम आपको बताएंगे कि किस प्रकार आप घर पर ही अपने ब्लड प्रेशर की जांच कर उसे नियंत्रित कर सकते हैं।ताकि आप किसी भी प्रकार की बीमारी से बच सकें।

अगर आप ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित है। तो जरूरी है कि आपका ब्लड प्रेशर समय-समय पर मापा जाए। ताकि आपका ब्लड प्रेशर नियंत्रित रह सकें। इसके लिए जरूरी नहीं कि आप किसी डॉक्टर के पास ही जाएं। आप घर पर ही ब्लड प्रेशर की जांच कर सकते हैं। इसके लिए आपको डिजिटल ब्लड प्रेशर मशीन लाना होगा। जिसके माध्यम से आप आसानी से अपने ब्लड प्रेशर लेवल की जांच घर में कर सकते हैं।

घर पर ब्लड प्रेशर की जांच करने के लिए आपको सबसे पहले मरीज के बाएं हाथ पर बीपी का कफ़ बांधना होता है। कफ को इस तरह से बांधा जाना चाहिए कि कफ़ का नीचे का हिस्सा कोनी के ऊपर खत्म हो, कफ़ पर लगी दोनों नली मरीज के हाथ के अंदर की ओर होनी चाहिए। इसके बाद मशीन में लगा स्विच ऑन करें। बस कुछ ही देर में आपके सामने ब्लड प्रेशर का रिजल्ट आ जाएगा। जिसमें नीचे और ऊपर दोनों का ब्लड प्रेशर बताया जाता है । यानी कि नीचे की बीपी 80 और ऊपर की 120 रहना चाहिए। उम्र के हिसाब से इस में कुछ परिवर्तन रह सकता है। लेकिन अगर ब्लड प्रेशर अधिक कम या अधिक ज्यादा है, तो आपको ध्यान देना होगा।

ब्लड प्रेशर अगर 140 / 90 से ज्यादा है। तो इसे हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं और 120/80 तक होना सामान्य माना जाता है और अगर 139 / 89 के बीच का ब्लड प्रेशर है तो यह प्री हाइपरटेंशन कहा जाता है। ब्लड प्रेशर अधिक होने के कारण नाक से खून बहना, सांस लेने में परेशानी होना, सिर दर्द और पेशाब में खून आने जैसी समस्या होती है। इससे बचने के लिए आपको भोजन में फल और सब्जियों का अधिक से अधिक उपयोग करना है। साबुत अनाज जैसे सोयाबीन, लहसुन, प्याज का अधिक सेवन करें। इसके बाद तरबूज भी खाना फायदेमंद होता है। यह एमिनो एसिड के स्तर को कम करता है। जिससे ब्लड प्रेशर का स्तर सामान्य होता है और इसमें फाइबर और लाइकोपिन भी होता है जो आपके शरीर को भी स्वस्थ रखता है। चुकंदर भी हाई ब्लड प्रेशर में आराम पहुंचाता है। इसी के साथ दिन में 3 बार अगर मुट्ठी भर किशमिश खाई जाए तो भी रक्तचाप में कमी होती है। वह भी हाई ब्लड प्रेशर से राहत दिलाता है। क्योंकि दही में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी 6, विटामिन B12 हैं। जो हाई ब्लड प्रेशर को कम करते हैं। पानी, ताजा फलों का जूस, सब्जियों का जूस, नारियल पानी का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। इससे आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहेगा।



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डायबिटीज की जांच कर आप खुद कर सकते हैं कंट्रोल, बस इन बातों का रखें ध्यान

डायबिटीज की समस्या आजकल हर चौथे व्यक्ति में नजर आ रही है। ऐसे में हर कोई इस समस्या से निजात पाना चाहता है। लेकिन समय के अभाव के कारण लोग इस पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। आज हम आपको ऐसे कुछ टिप्स बताएंगे। जिसकी सहायता से आप घर बैठे ही डायबिटीज की जांच कर सकते हैं और थोड़ी सी सावधानी बरतने पर इससे निजात भी मिल सकती है।

इतना रहना चाहिए डायबिटीज लेवल-

वैसे तो शुगर लेवल 70 से 140 मिलीग्राम डीएल होना चाहिए। अगर इससे कम या ज्यादा होता है। तो शुगर भी आपके शरीर में कम या अधिक हो रही है। आप डायबिटीज की जांच घर में कर सकते हैं। आजकल बाजार में शुगर लेवल जांच करने की मशीन भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है। डायबिटीज की जांच करने के लिए सबसे पहले आप अपने हाथों को अच्छी तरह धो लें। इसके बाद लैंसेट को उंगली में चुभाएँ। जिससे आपकी उंगली में से खून की बूंद निकलने लगेगी। इसके बाद टेस्टिंग स्ट्रिप में खून की एक दो बूंद डाले, जिसके कुछ ही देर में आपको पता चल जाएगा कि आपका शुगर लेवल कितना है। वैसे तो शुगर लेवल खाने से पहले और खाने के बाद दो तरह से किया जाता है। यानी की फास्टिंग शुगर और खाने के 2 घंटे बाद के शुगर लेवल की जांच करनी चाहिए। खाने के पहले का शुगर 70 से 110 के अंदर और खाने के बाद का 110 से 140 से अधिक नहीं आना चाहिए।

आपको बता दें कि शरीर में इंसुलिन की कमी से डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखना काफी महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए आप कुछ घरेलू उपाय भी कर सकते हैं। जैसे मॉर्निंग वॉक करना, परिश्रम करना, अधिक शक्कर वाली सामग्रियों का सेवन नहीं करना आदि। इससे आप शुगर कंट्रोल कर सकते हैं। आपको पता चल रहा है कि अगर शुगर लेवल अधिक है तो आप उसे कम करने के उपाय करें और अगर आपका शुगर लेवल कम है तो आपको कुछ मीठा भी खाना पड़ेगा। लेकिन शुगर लेवल कम या अधिक होने पर किसी प्रकार की समस्या आ रही है। तो अपने चिकित्सक को भी दिखा कर उनकी परामर्श ले सकते हैं। ताकि शुगर की वजह से कोई अन्य बीमारी आपको नहीं घेर सके।



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सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है चना, ऐसे खाएंगे तो मिलेगा प्रोटीन और फाइबर

वैसे तो चना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है।क्योंकि इसमें प्रोटीन, फाइबर सहित कई पोषक तत्व होते हैं। जो आपके स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होता है। लेकिन इसे भी सही समय पर खाया जाए तो आपको फायदे मिलेंगे। अन्यथा शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। इसलिए हम आज आपको बताएंगे कि चने किस तरह और किस समय खाना है। जिससे आपको पोषक तत्वों का लाभ मिले।

चने से होते हैं यह लाभ-

-चने में भरपूर मात्रा में पोटेशियम होता है, जो आपको ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में काफी मदद करता है।

-चने में फाइबर होने के कारण वह आपके वजन को बराबर रखता है और आपके पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाता है।

-चने में प्रोटीन होने के कारण यह आपके मसल्स को मजबूत करने में काफी सहायक होता है। जिम और घर में एक्सरसाइज व अधिक परिश्रम करने वाले लोगों को चना जरूर खाना चाहिए। इससे आपकी बॉडी भी मजबूत होगी।

इस तरह खाए चना-

-चने को रात में भिगोकर रखें और सुबह खाली पेट खाएं। इससे आपको काफी लाभ मिलेगा। यह आपके शरीर में प्रोटीन, फाइबर और पोटेशियम की पूर्ति करेगा।

-दिन में चने सुबह और शाम के समय खा सकते हैं।लेकिन सुबह का समय सबसे बेहतर होता है। खाली पेट तो जरूर खाना चाहिए।

-चना पाचन में थोड़ा समय लेता है, चना भारी होता है। इस कारण सुबह खाली पेट खाने से पचने में भी समय मिल जाता है।

-चने को मिट्टी के बर्तन में भिगोना चाहिए। ऐसा करने से चने में मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा और भी अधिक हो जाती है। मिट्टी के बर्तन में चने रात के समय भिगोए। जिससे सुबह यह अच्छी तरह फूल जाएंगे और उनका स्वाद भी अच्छा आएगा।

-चने को चबा चबा कर खाना चाहिए। हो सके तो इसका पानी भी पी सकते हैं। क्योंकि वह भी शरीर के लिए अच्छा होता है। लेकिन जब रात को चने गलाएं तो पहले चने को एक दो बार धो लें। ताकि उसमें धूल मिट्टी हो तो निकल जाए। चने के साथ आप किसमिस का भी उपयोग कर सकते हैं। जिससे उसके फायदे आपको अधिक मिलेंगे। एक दिन में एक मुट्ठी चना खा लेना चाहिए। अगर इतना चने खाने के बाद आपको गैस या पेट संबंधी कोई समस्या आती है। तो चने की मात्रा थोड़ी कम भी कर सकते हैं।

-इस प्रकार चना ताकत बढ़ाने, पाचन तंत्र मजबूत करने और पोषक तत्वों की कमी को दूर करने और यूरिन संबंधी समस्या को दूर करने के लिए काफी लाभदायक है।

इन चीजों का नहीं करें सेवन होगा नुकसान-

-खाली पेट सुबह चने खाने के बाद अचार का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि अचार में सिरका मिलाया जाता है। जो पेट में विष पैदा करता है।

-चने के साथ करेला भी नहीं खाना चाहिए। क्योंकि चने में ऑक्साइड होता है और करेला में भी ऑक्साइड होता है। करेले में ऑक्साइड लेवल अधिक होता है।इसलिए एक के बाद एक खाने से ऑक्साइड शरीर में जाकर मिक्स होता है और आपके शरीर के लिए काफी नुकसान दायक हो सकता है। चने के बाद करेला खाने से आपको स्किन रिलेटेड समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।



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लौंग के फायदे जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान, सुबह उठकर जरूर खाएं दो लौंग

वैसे तो लौंग के फायदे सभी जानते हैं। लेकिन लौंग के कुछ फायदे ऐसे भी हैं। जिन्हें आप जानकर हैरान हो जाएंगे। दरअसल आपका पेट साफ नहीं होता है। तो रोजाना सुबह उठ कर दो लौंग खाएं। इससे निश्चित ही कुछ दिनों में आपका पेट साफ होने लगेगा। क्योंकि लौंग में फाइबर, विटामिन सी, मैग्नीज, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन के भरपूर मात्रा में होता है। इसलिए इसके कई फायदे होते हैं। आज हम आपको इसके कुछ फायदे बताएंगे।

पाचन के लिए फायदेमंद-

लौंग पाचन के लिए काफी फायदेमंद है। जो लोग कब्ज, अपच जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। उन्हें लौंग का सेवन जरूर करना चाहिए।

लीवर करता मजबूत-

लौंग खाने से वह आपके लीवर के लिए काफी फायदेमंद होता है। यह शरीर को डिटॉक्स करने में काफी मदद करता है। यह लीवर फंक्शन को बेहतर बनाने के लिए काफी कारगर है।

इम्युनिटी सिस्टम मजबूत-

लौंग से व्यक्ति का इम्यूनिटी सिस्टम भी बढ़ता है। क्योंकि यह विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है। जो शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने का काम करता है। यह आपके शरीर में संक्रमण और बीमारियों से लड़ता है।

दर्द करे दूर-

दांत का दर्द दूर करने के लिए लौंग काफी फायदेमंद है। लौंग का तेल दातों पर लगाते हैं , तो दांत का दर्द कम हो जाता है। लौंग में ऐसे गुण होते हैं। जो कुछ समय के लिए दर्द को रोक देते हैं। अगर आप अपने दांत का इलाज करवा चुके हैं तो लौंग का सेवन करें, जो दर्द को शांत करने में भी मदद करता है।

सिर दर्द में देता राहत-

लौंग में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह सिर दर्द के लिए बहुत कारगर उपाय है। आप इसका सेवन कर सकते हैं। एक गिलास दूध के साथ लौंग का पाउडर ले। लौंग का तेल लगाने से भी आपको आराम मिल सकता है।

हड्डियों को करता मजबूत-

लौंग हड्डी और संयुक्त स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए काफी फायदेमंद है। लोंग का सेवन हड्डियों के घनत्व को बढ़ाने में मदद करता है।



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ओट्स, केला और दूध से नहीं होगी एसिडिटी, कुछ इस तरह करें उपयोग

खानपान में लापरवाही और कई प्रकार की दवाइयों से व्यक्ति को एसिडिटी हो जाती है। कुछ लोगों को तो एसिडिटी की हमेशा समस्या रहती है। अगर आपको भी एसिडिटी की प्रॉब्लम है। तो आज से ही अपनी डाइट में कुछ फूड्स को शामिल कीजिए। जिससे निश्चित ही आपको एसिडिटी से मुक्ति मिल जाएगी।

हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताएंगे। जिन्हें रोज उपयोग में लेने से एसिडिटी की समस्या नहीं होगी। एसिडिटी होने से कई बार व्यक्ति को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। एसिडिटी के कारण छाती में भी दर्द होने लगता है। ऐसे में व्यक्ति को तब तक राहत नहीं मिलती। जब तक की एसिडिटी कम नहीं हो जाए। इसलिए आज से ही कुछ घरेलू उपाय शुरू करें।

जानकारों की माने तो चाय काफी बार बार पीना, स्मोकिंग, अल्कोहल का सेवन, अधिक तला गला और मसालेदार भोजन करने और लंबे समय तक भूखे रहने के कारण एसिडिटी की समस्या हो जाती है। जब पेट के गैस्ट्रिक ग्लैंड से बहुत अधिक एसिड निकलने लगता है तो पेट में गैस बनती है। पेट में जलन होने लगती है और खट्टी डकार भी आती है। जिसे एसिडिटी कहते हैं। इस का तुरंत इलाज करना जरूरी है। अन्यथा व्यक्ति बेचैन होने लगता है। ऐसे में आप दवाओं की अपेक्षा घरेलू उपाय करेंगे, तो जल्द ही आपको आराम मिलेगा।

केला खाएं-

केला लो एसिड फ्रूट है। जो एसिडिटी की समस्या कम करने में काफी सहायक हो सकता है। केला हमारी भोजन नली की परत में कोटिंग बना देता है। जिससे पेट के एसिड के यहां तक पहुंचने पर भी किसी तरह की दिक्कत महसूस नहीं होती है। केले में फाइबर भी बहुत होता है। जो पाचन तंत्र को मजबूत कर अपच और बदहजमी से बचाता है। इसलिए प्रतिदिन एक केला जरूर खाएं। तो आपको एसिडिटी नहीं होगी।

ठंडा दूध पीएं-

वैसे तो गर्म दूध पीने से भी कुछ लोगों को एसिडिटी हो जाती है। लेकिन अगर आप ठंडा दूध पीएंगे तो आपको एसिडिटी में काफी फायदा मिलेगा। दूध को छाछ की तरह ठंडा कर लें। ठंडा दूध पेट में गैस को रोकने में काफी मदद करता है और दूध में कैल्शियम भी भरपूर होता है। जो पेट में एसिड बनने की प्रक्रिया को रोक देता है।

ओट्स भी फायदेमंद-

ओट्स में हाई फाइबर रहता है। जो एसिडिटी के लक्षणों को कम करता है। फाइबर कब्ज की समस्या दूर करने के साथ ही पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है। ऐसे में जब आपका पेट हमेशा भरा हुआ महसूस करेगा। तो आप कम खाएंगे, ओवरईटिंग नहीं होगी और पेट में जो चीजें हैं। वह लोड कर भोजन नली में वापस नहीं आएंगी। जिससे एसिडिटी नहीं होगी।

हरी सब्जियों का सेवन करें-

भोजन में हरी सब्जियों का उपयोग करना चाहिए। हरी सब्जियां अल्कलाइन होती है जो पेट और पाचन तंत्र दोनों के लिए काफी बेहतर है। हरी सब्जियां पेट में एसिड बनाने की प्रक्रिया को कम कर देती है। इसलिए हमेशा हरी सब्जियों का अधिक से अधिक उपयोग करने का कोशिश करें।

छाछ पीएं-

अगर खाने में तीखा मसालेदार और भारी भोजन हो गया है। तो आपको एसिडिटी की समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए आप किसी प्रकार की दवा लेने की अपेक्षा एक गिलास ठंडी छाछ या बटर मिल्क लें। छाछ में लैक्टिक एसिड होता है। जो पेट में एसिडिटी को नार्मल करने में काफी सहायक है। इसलिए जहां तक हो सके खाने के बाद ठंडी और नमकीन छाछ पीने की कोशिश करें।



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BIG BREAKING : मुकेश अंबानी का अगले 10 साल का क्या है प्लान

नई दिल्ली. रिलायंस कंपनी न्यू एनर्जी यानी इलेक्ट्रिक कारों के लिए बैटरी का उत्पादन। दूसरा डिजिटल में व्यापक रूप से अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी में हैं। जानते हैं इसके पीछे की क्या है वजह-

अगले 10 वर्षों की योजना
प्लास्टिक रिसाइकिलिंग : 10881 करोड़
केमिकल्स : 76193 करोड़
डिजिटल : 108820 करोड़
न्यू एनर्जी 108820 करोड़
रिटेल : 101563 करोड़

तेल कारोबार में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने तेल से रसायन कारोबार के पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई में डिमर्जर की रूपरेखा घोषित कर दी है। कंपनी ने शेयरहोल्डर्स व क्रेडिटर्स से मंजूरी मांगी है। गौरतलब है कि तेल से रसायन व्यवसाय को अलग इकाई बनाने का काम पिछले साल शुरू किया था। कंपनी के तेल-से-रसायन व्यवसाय का मूल्यांकन 75 अरब डॉलर किया गया था। कंपनी सऊदी अरब ऑयल कंपनी (अरामको) के साथ 20 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री के लिए बातचीत कर रही थी। लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण यह रुक गई थी। दोनों कंपनियों के बीच एक बार फिर बातचीत का दौर शुरू हो रहा है।
कंपनी का तर्क
कंपनी का कहना है कि अरामको को हिस्सेदारी बेचने के पीछे की वजह रिन्यूएबल एनर्जी की ओर फोकस करना है। स्वच्छ व हरित ऊर्जा विकास की दिशा में कारोबार को बढ़ाएगी।

निवेश की वजह 72 फीसदी ग्रोथ
दुनिया के दो सबसे रिलायंस कंपनी के अमीर मुकेश अंबानी व टेस्ला कंपनी के मालिक एलन मस्क अक्षय ऊर्जा के उत्पादन व भंडारण के लिए बैटरी व सौर पैनल के लिए बड़ा निवेश कर रहे हैं। क्योंकि कोरोना महामारी के बावजूद पिछले साल इस क्षेत्र में 72 फीसदी ग्रोथ है। दोनों कंपनियो की नजर आगामी दस सालों में 36,24,97 करोड़ रुपए के बाजार पर कब्जा करने की है।



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बाहर जाने का प्लान कर रहे हैं तो ठहरिए, जानिए किस राज्य में लगी है पाबंदी

नई दिल्ली. दिल्ली जाने वाले लोगों को कोरोना निगेटिव रिपोर्ट दिखाना जरूरी होगा। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, केरल व पंजाब के लोगों को आरटी-पीसीआर टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट दिखाने के बाद ही एंट्री मिलेगी। जहां दिल्ली में राज्स्थान से जाने वालों को दिल्ली में निगेटिव रिपोर्ट नहीं दिखानी होगी लेकिन महाराष्ट्र में यह छूट नहीं होगी। इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ समेत आठ राज्यों में प्रवेश पर भी निगेटिव रिपोर्ट जरूरी है। टेस्ट रिपोर्ट 72 घंटे के अंदर की होनी चाहिए।

दिल्ली
- महाराष्ट्र, केरल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश व पंजाब के लोगों के लिए जरूरी
- 26 फरवरी शुक्रवार रात्रि 12.00 बजे से 15 मार्च तक के लिए लागू किया
- फ्लाइट, ट्रेन, बसों से आने पर निगेटिव रिपोर्ट पर कार से आने पर छूट
कर्नाटक
- महाराष्ट्र और केरल से आने वालों के लिए निगेटिव रिपोर्ट।
- फ्लाइट में बोर्डिंग से पहले आरटी-पीसीआर रिपोर्ट वेरिफाई।
- पॉजिटिव या संदिग्ध मिलने पर यात्री को क्वॉरंटाइन करेंगे।
केरल
- राज्य से जाने-आने वाले हर व्यक्ति पर लागू होगा।
- अंतरराज्यीय बसों में ये रिपोर्ट दिखाने पर ही टिकट।
- फ्लाइट में बोर्डिंग से पहले ही निगेटिव रिपोर्ट जरूरी।
महाराष्ट्र
- केरल से आने वालों को आरटी-पीसीआर टेस्ट कराना होगा।
उत्तराखंड
- बाहर से आने वालों को आरटी-पीसीआर निगेटिव टेस्ट जरूरी
जम्मू-कश्मीर
- दूसरे राज्यों से आने वालों को निगेटिव रिपोर्ट से मिलेगी एंट्री
गुजरात
- राज्य में आने वालों की स्क्रीनिंग के लिए चेक पोस्ट बनेंगे
- महाराष्ट्र से आने वालों का आरटी-पीसीआर टेस्ट अनिवार्य।
मध्य प्रदेश
- भोपाल, इंदौर, होशंगाबाद, बैतूल, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, अलीराजपुर व महाराष्ट्र की सीमा से लगे जिलों प्रवेश करने पर स्क्रीनिंग होगी।
छत्तीसगढ़
- पड़ोसी राज्यों से आने वाले लोगों के लिए नेगेटिव रिपोर्ट जरूरी

खास-खास बातें
- 11 राज्यों में रिकवरी से ज्यादा कोरोना के नए मरीजों की संख्या बढ़ी
- 122 जिलों में संक्रमण की रफ्तार तेज हुई, पांच राज्य हैं सबसे आगे
- 132 फीसदी बढ़ा महाराष्ट्र में संक्रमण 4 सप्ताह में, 36 जिलों में बिगड़ी हालत
- गुजरात के 4 जिलों अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट में संक्रमण बढ़ा
- मध्यप्रदेश के 3 जिलों इंदौर, भोपाल व बैतूल में केस तेजी से बढ़ रहे



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HEALTH TIPS : 40 पार भी जवां रहने के लिए करें ये काम

महिलाओं की शारीरिक संचरना व शरीर के प्राकृतिक नियम पुरुषों से अलग होते हैं। स्वस्थ रहने के लिए उन्हें कुछ मिनरल्स व विटामिन्स की ज्यादा जरूरत होती है।
आयरन

लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आयरन जरूरी होता है। इससे हीमोग्लोबिन बढ़ता है। यह शरीर में ऑक्सीजन को दूसरे अंगों तक ले जाने में मदद करता है। महिलाओं में खून की कमी को दूर करने के लिए पालक, सेम, बथुआ, साग, चुकंदर, किशमिश, नारियल, सोयाबीन ले सकते हैं।
कैल्शियम

कैल्शियम हड्डियों को मजबूत रखता है। आहार में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा लेना जरूरी है। इसके अलावा मांसपेशियों के लिए भी जरूरी है। दूध, दही, पनीर, गोभी, ब्रोकली, फल, दाल, नींबू, मूंगफली और सिंघाड़ा को आहार में शामिल करें। विटामिन डी व कैल्शियम साथ लेें। कैंसर, डायबिटीज व हाईब्लड प्रेशर से बच सकते हैं।
विटामिन डी

विटामिड डी से हड्डियां मजबूत, वजन नियंत्रित रहता है। मांसपेशियों, प्रतिरक्षा प्रणाली, मस्तिष्क और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच रक्त संचार के लिए आवश्यक होता है। सुबह की धूप में 15 मिनट बैठें। विटामिन डी की जरूरत 35 प्रतिशत पूरी होगी। इसके लिए सप्लीमेंट्स, अंडा, दूध, मशरूम, दही ले सकते हैं।
फॉलिक एसिड

फॉलिक एसिड लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है। गर्भावस्था, जन्मजात दोष रोकने, हृदय, कोशिकाओं के विकास में मदद करता है। गर्भस्थ महिला को 600 मिग्रा. व स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को 500 मिग्रा. प्रतिदिन लेना चाहिए। इसके लिए पालक, ब्रोकली, सेब और संतरे का रस, ***** ग्रेन ब्रेड लेना चाहिए।
विटामिन सी
विटामिन सी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। हृदय रोग से बचाता है। यह एंटीएजिंग भी है। लंबे समय तक जवान रखती है। कोलेजन का उत्पादन करता है और रूखी त्वचा को पोषण देता है जिससे झुर्रियां नहीं आती हैं। विटामिन सी के सबसे अच्छे स्रोत आंवला, संतरा, नींबू, हरी मिर्च, कीवी, अंगूर, तरबूज, स्ट्रॉबेरी, पपीता, आलू और टमाटर हैं।
आयोडीन
आयोडीनशरीर में थायराइड हार्मोन बनाने में मदद करता है। थायराइड शरीर में मेटाबॉलिजम को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से घेंघा रोग हो जाता है। गर्भावस्थ शिशु के विकास के लिए आयोडीन जरूरी है। गर्भस्थ महिलाओं को 220 मिग्रा. व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को 290 मिग्रा. प्रतिदिन जरूरत होती है। यह पनीर, दूध, दही, आयोडीन युक्त नमक लेना चाहिए।
मैग्नीशियम
मैग्नीशियम की कमी से पीरियड के दौरान ऐंठन, ब्लड प्रेशर, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र, हड्डी की मजबूती में मदद करता है। इसके लिए फाइबर से भरपूर आहार लें। हरी पत्तेदार सब्जियां, सूखे मेवे, सोयाबीन, आलू, साबुत अनाज, किनोआ ले सकते हैं।



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आयुर्वेद में ऐसे करते हैं बीमारी की सटीक पहचान, इलाज भी 100 फीसदी कारगर

नाड़ी परीक्षण सुबह कराना चाहिए। उस समय नाडिय़ां सामान्य रूप से चलती हैं। वैद्य पुरुष के दाएं, स्त्री के बाएं हाथ की नाड़ी देखते हैं।

स्पंदन की गति
शरीर में वात, पित्त व कफ त्रिधातु पाई जाती है। इनमें दोष की वजह से व्याधि होती है। जिस स्पंदन की गति व बल के आधार पर धातु और मल की विकृति की पहचान करते हैं वह नाड़ी कहलाती है।

कब कराएं नाड़ी परीक्षण
जो रोगी नहीं है उसकी नाड़ी की जांच सुबह छह से दस बजे करते हैं। जो रोगी हैं उनका नाड़ी परीक्षण दस बजे के बाद कभी भी कर सकते हैं। अंगूठे के बगल की अंगुली वात की नाड़ी होती है जो सांप की तरह चलती है। उसके बगल मध्यमा अंगुली पित्त की नाड़ी होती है जो मेढ़क की तरह व उसके बगल की अंगुली कफ की नाड़ी हंस की भांति चलती है। नाडिय़ों की गति का भाव लघु-गुरु, साम-निराम, उष्णता है या क्षीणता की पहचान करते हैं।

खाली पेट नाड़ी का परीक्षण
सामान्यत: खाली पेट नाड़ी का परीक्षण कराना चाहिए। व्यस्तता, तनाव, दैनिक क्रिया से पहले व बाद में, भूख ज्यादा लग रही हो, नींद आ रही हो, मेहनत करने के बाद तुरंत नाड़ी परीक्षण नहीं करवाना चाहिए। नाड़ी परीक्षण से पहले मन, बुद्धि और इंद्रिय समान अवस्था में रहना चाहिए। शांत अवस्था में ही नाड़ी परीक्षण कराना चाहिए।



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AYURVEDA TIPS : जानिए...किस नाड़ी दोष से कौन बीमारी होती है?

सुबह के समय नाड़ी सामान्य रूप से चलती हैं। वैद्य पुरुष के दाएं, स्त्री के बाएं हाथ की नाड़ी देखते हैं। अंग पर बीमारी का कितना प्रभाव है इसको जान सकते हैं। इससे रक्त में कॉलेस्ट्राल, हृदय की धड़कन की वास्तविक स्थिति जान सकते हैं।
यहां से भी परीक्षण
कलाई के अलावा स्पंदन शरीर के कई स्थानों पर महसूस किया जा सकता है। ग्रीवा, नासा नाड़ी, गुलफसंदी (एंकल) व शंख नाड़ी से भी परीक्षण कर करते हैं।
वात नाड़ी दोष

इससे सर्वाइकल, ऑस्टियो आर्थराइट्सि और स्पॉन्डिलाइसिस की दिक्कत ज्यादा होती है।
पित्त नाड़ी दोष

गालब्लैडर में सूजन, लिवर संबंधी बीमारियां, पीलिया, सिरोसिस की पहचान होती है।
कफ नाड़ी दोष

इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, ट्यूबरोकलोसिस, रक्त, एलर्जी, सांस संबंधी बीमारियों व बुखार आने पर जांच करते हैं।
पंचात्मक नाड़ी दोष

वात-पित्त-कफ की नाड़ी क्रमश: पांच-पांच प्रकार की होती है। पहला प्राणवायु, दूसरा उदान वायु, तीसरा समान वायु, चौथा अपान वायु व पांचवां ज्ञान वायु नाड़ी कहलाती है। इससे रोग की गंभीरता, बीमारी की अवधि व तीव्रता की जानकारी करते हैं।



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AYURVEDA TIPS : शरीर में इन तीन दोषों की बिगड़ने से होते हैं बीमार

शरीर में वात, पित्त व कफ त्रिधातु पाई जाती है। इनमें दोष की वजह से व्याधि होती है। जिस स्पंदन की गति व बल के आधार पर धातु और मल की विकृति की पहचान करते हैं वह नाड़ी कहलाती है।

शरीर में त्रिधातु

शरीर में वात, पित्त व कफ त्रिधातु पाई जाती है। इनमें दोष की वजह से व्यक्ति रोगग्रस्त हो जाता है। कलाई की धमनी की जगह नाड़ी देखी जाती है। जिस स्पंदन की गति व बल के आधार पर त्रिधातु और मल की विकृति की पहचान करते हैं वह नाड़ी कहलाती है। नाड़ी परीक्षण सुबह कराना चाहिए। उस समय नाडिय़ां सामान्य रूप से चलती हैं। वैद्य पुरुष के दाएं, स्त्री के बाएं हाथ की नाड़ी देखते हैं।
ऐसे करते नाड़ी परीक्षण
जो रोगी नहीं है उसकी नाड़ी की जांच सुबह छह से दस बजे करते हैं। जो रोगी हैं उनका नाड़ी परीक्षण दस बजे के बाद कभी भी कर सकते हैं। अंगूठे के बगल की अंगुली वात की नाड़ी होती है जो सांप की तरह चलती है। उसके बगल मध्यमा अंगुली पित्त की नाड़ी होती है जो मेढ़क की तरह व उसके बगल की अंगुली कफ की नाड़ी हंस की भांति चलती है। नाडिय़ों की गति का भाव लघु-गुरु, साम-निराम, उष्णता है या क्षीणता की पहचान करते हैं।



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SPECIAL REPORT : यदि आप भी रोज खाते हैं फास्टफूड तो जान लें ये बात

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित, पौष्टिक आहार और नियमित दिनचर्या जरूरी है। खासकर युवाओं के खानपान व जीवनशैली में तेजी से बदलाव आ रहा है। सामान्यत: लोग सप्ताह में एक से सात बार तक फास्टफूड खा रहे हैं। कुछ मजबूरी तो कुछ शौक के लिए। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी बढ़ रही हैं।

मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज
नौकरीपेशा दंपती व घर से दूर रह रहे युवा शाम के समय फास्टफूड ज्यादा खाते हैं क्योंकि यह आसानी से पेट भरता है। फाइबर व प्रोटीन की कमी से बार-बार भूख लगती है। ईटिंग डिस्ऑर्डर की समस्या शुरू हो जाती है। लंबे समय तक खाने से मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, लिवर व आंतों का कैंसर, महिलाओं में पीसीओडी, चेहरे पर दाने हो सकते हैं।

हाजमा बिगड़ सकता
लगातार सप्ताह भर खाने से पेट में मैदा, नमक व प्रिजर्वेटिव युक्त चीजें ज्यादा जाएंगी। इससे एसिडिटी बढ़ेगी, खट्टी डकारें आएंगी। पाचन बिगड़ेगा। सुस्ती महसूस हो सकती है। शरीर में ग्लूकोज की मात्रा तेजी से बढऩे से डायबिटीज के मरीजों का शुगर का स्तर और वजन बढ़ेगा।



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बीमारियों से बचना चाहते हैं तो न करें ये गलती

यदि आप एक कचोरी खा लेते हैं तो इसमें लगभग 15 मिलीग्राम तेल होता है जो आपके प्रतिदिन की आवश्यकता के बराबर है। इस एक्स्ट्रा तेल को कन्ज्यूम करने के लिए 60 मिनट पैदल चलना होगा। अन्यथा फैट के रूप में शरीर मे जमा होता रहेगा। इस प्रकार हमें सिर्फ घर पर तैयार किए गए भोजन में ही तेल की मात्रा को नियंत्रित नहीं करना होगा, बल्कि बाहर की डीप फ्र्राइड खाद्य वस्तुओं के सेवन से बचना होगा।

शरीर में फैट की मात्रा बढ़ाते

डीप फ्राइड कचौरी, समोसा, पकौड़ी, फ्रेंच फ्राइज, मठरी आदि ना केवल शरीर में फैट की मात्रा बढ़ाते हैं, बल्कि बाजार में इन्हें जिस तेल से तैयार किया जाता है उसे अनेक बार स्मोक पॉइंट से अधिक तापमान पर गर्म करने से उसके पोषक तत्व तो नष्ट होते ही हैं एवं ट्रांसफेट की मात्रा बढ़ती है साथ ही ऑक्सीकरण, हाइड्रोलायसिस, पॉलिमेराइजेशन आदि रासायनिक क्रियाओं से स्वास्थ्य के लिए खतरनाक टॉक्सीन, फ्री रेडिकल शरीर में जाते हैं जो घातक बीमारियों का कारण बनते हैं।

25 गुना तक अधिक एसिडिटी

इस प्रकार के उपयोग में लिए जा रहे तेल के नमूने अनेक बार जांच रिपोर्ट में स्वास्थ्य के लिए घातक पाए गए हैं जिनमें हानिकारक तत्वों की उपस्थिति एवं तेल की एसिडिटी 25 गुना तक अधिक पाई गई है।

चबा चबाकर खाएं, नींद अच्छी आएगी

गांठ बांध लें कि रात को कम खाएं और चबा चबाकर खाएं। इससे आप हेल्दी भी रहेंगे और नींद भी अच्छी आएगी। रात में हमारा पाचन तंत्र निष्क्रिय होता है, जिससे हमारे शरीर के लिए भारी भोजन पचाना खाने से जुड़ी है। ज्यादा खाने से अपच, गैस और कब्ज की समस्या हो सकती है।



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BE ALERT : चीनी खाते हैं तो सावधान, कैसे यह अंगों को नुकसान पहुंचाती

फूड सेफ्टी एंड स्टैण्डर्ड ऑथोरिटी ऑफ इण्डिया (एफएसएसएआइ) की ओर से ईट राइट इंडिया कैम्पेन के तहत तेल, चीनी, नमक थोड़ा कम-थोडा कम खाने को लेकर नारा दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार बदलती हुई दिनचर्या के मध्य नजर हमें खान-पान में इन तीन चीजों तेल, चीनी व नमक का उपयोग दिन-प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा कम करना होगा अन्यथा बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। हम सुबह से शाम तक जो भी कुछ खाते-पीते हैं उनमें मुख्यत: इन्हीं तीनों खाद्य पदार्थों का मिश्रण होता है।
चीनी का प्रयोग
चीनी एक प्रकार का कार्बोहाईड्रेट है जिसकी अल्प मात्रा ही हमारे खान-पान में आवश्यक है। इसमें अन्य कोई पोषक तत्व नहीं होता हैं। कॉर्बोहाईडेट की आवश्यक मात्रा शरीर को अन्य खाद्य वस्तुओं से आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इस प्रकार चीनी का अधिक मात्रा में सेवन करने से इसकी अतिरिक्त मात्रा शरीर में एक प्रकार के धीमे जहर का कार्य करती हैं जिससे शरीर में बीमारियां होने की अंदेशा रहता हैं।
ऐसे रखें ध्यान

चाय, कॉफी, दूध में जो शुगर डाली जाती है उसे आधा कर दीजिए। धीरे-धीरे बिल्कुल कम कर दीजिए। केन ज्यूस, जैम, जैली, केचअप, सॉस आदि कम से कम उपयोग में ले क्योंकि ऐसे खाद्य पदार्थों में चीनी की मात्रा अत्यधिक होती हैै। बच्चों को अत्याधिक चीनी युक्त कैंडीज, चॉकलेट, आइसक्रीम, केक, पेस्ट्री जहां तक संभव हो कम देवें क्योंकि इससे बच्चों में मोटापा व नोन कम्युनिकेबल बीमारियां होने का अंदेशा रहता हैं।



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अस्थमा की समस्या है तो यह करें उपाय, हल्दी, काफी और अदरक से मिलेगा आराम

अस्थमा के व्यक्ति के लिए एक एक एक सांस बहुत कीमती होती है। सामान्य व्यक्ति वैसे तो कुछ मिनट तक अपनी सांस रोक सकता है। लेकिन अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को 1 मिनट भी सांस नहीं आए तो वह तड़फने लगता है। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताएंगे। जिसके माध्यम से आप अपनी सेहत का ध्यान रख सकते हैं और अस्थमा की समस्या से भी कुछ हद तक निजात मिल सकती है।

अगर आपको अस्थमा के संबंधित समस्या है। तो आप आज से ही कुछ घरेलू उपाय शुरू कर दीजिए। इससे आपको सांस लेने में दिक्कत नहीं आएगी और आपका स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा।

शहद-

शहद वैसे तो कई बीमारियों का रामबाण उपाय है। आप एक गिलास गर्म पानी और एक चम्मच शहद मिलाकर उसका सेवन करें। इसी के साथ रात में सोने से पहले एक चम्मच शहद और थोड़ी सी दालचीनी पाउडर मिलाकर उसे चाट लें। आप शहद और पानी का सेवन दिन में दो-तीन बार कर सकते हैं। क्योंकि शहद गले से कफ़ हटाने में मदद करता है। इसलिए यह आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा।

हल्दी-

एक गिलास पानी में एक चौथाई चम्मच हल्दी मिलाकर उसका सेवन करें। यह उपाय करीब 15 से 20 दिनों तक प्रतिदिन दिन में तीन बार करें। हल्दी में एंटीमाइक्रोबॉयल गुण होते हैं और इसमें करक्यूमिन भी होता है। जो अस्थमा से लड़ने में काफी मददगार रहता है।

कॉफी-

अस्थमा से राहत दिलाने के लिए काफी फायदेमंद उपाय है। एक गर्म कप काफी का सेवन आपको अस्थमा से तुरंत राहत दिलाएगा। क्योंकि यह वायु मार्ग को तुरंत खोलता है और आप को सांस लेने में आसानी होगी।

अदरक-

वैसे तो आप चाय में अदरक का उपयोग करते ही हैं।लेकिन अस्थमा के रोगियों के लिए भी अदरक काफी फायदेमंद है। अदरक को कूट कर उसे एक कप गर्म पानी में डाल दें और इसे 5 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद पानी को छान लें और इसमें शहद डालकर गरम गरम पीने से फायदा होगा।



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खर्राटे आए तो यह करें उपाय, नहीं पड़ेगा किसी की नींद में खलल.....

मोटापा, शराब का सेवन, मांसपेशियों में कमजोरी, साइनस आदि कारणों से व्यक्ति को सोते समय खर्राटे आने की समस्या होती है। जिसके कारण लोगों की नींद में खलल पड़ता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं। तो कुछ घरेलू उपाय करें। जिससे निश्चित ही नींद के दौरान खर्राटे आने की समस्या से छुटकारा मिलेगा ।

आपको बता दें कि सोते समय सांसों के साथ तेज तेज आवाज आना और वाइब्रेशन होना ही खर्राटे कहलाता है। इसकी आवाज किसी के नाक तो किसी के मुंह में से आती है और यह आवाज सोने के साथ ही शुरू हो जाती है। ऐसे में खर्राटे लेने वाले के पास सोए व्यक्ति को नींद आना भी मुश्किल हो जाता है और खर्राटे मारने वाले व्यक्ति को उठने के बाद गले में जलन सी महसूस होती है।

इन कारणों से आते हैं खर्राटे-

मांसपेशियों की कमजोरी-

किसी व्यक्ति के गले और जीभ की मांसपेशियां बहुत शांत और शिथिल हो जाती है। तो यह लटकने लगती है। और इससे रास्ता रुक जाता है, ऐसे में गहरी नींद अधिक अल्कोहल का सेवन या नींद की गोलियां लेने के कारण ऐसा होता है। उम्र के बढ़ने से भी मांस पेशियां लटक जाती है जिससे खर्राटे आते हैं।

साइनस-

साइनस के बढ़ने से नाक के छिद्र जाम हो जाते हैं और खर्राटे आने लगते हैं। अगर आप साइनस के मरीज है। तो हमेशा सावधानी रखें, आपको जुकाम है या साइनस बढ़ने से परेशान है, तो सोने से पहले भाप जरूर लें।इससे सारी गंदगी बाहर आ जाएगी और आपको सांस लेने में दिक्कत नहीं होगी।

मोटापा-

वजन बढ़ने के कारण भी खर्राटे की समस्या आती है। जब किसी व्यक्ति का वजन अधिक बढ़ जाता है। तो उसकी गर्दन पर ज्यादा मांस लटकने लगता है। इससे लेटते समय मांग के कारण सांस की नली दब जाती है और सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है।जिससे खर्राटे आते हैं।

अल्कोहल का उपयोग-

जो लोग शराब का अधिक सेवन करते हैं। उन्हें भी खराटे की समस्या होती है। क्योंकि अधिक अल्कोहल के सेवन से गले की मांसपेशियां फैल जाती है और खर्राटे आते हैं।

सोने का तरीका सही नहीं होना-

अगर आपके सोने का तरीका सही नहीं है। तो भी खर्राटे कि समस्या आती है। सोते समय गले का पिछला हिस्सा थोड़ा संकीर्ण हो जाता है। ऐसे में ऑक्सीजन संकीर्ण जगह से आती है। तो आसपास के टिशू वाइब्रेट होते हैं।

सर्दी और नाक बंद-

सर्दी के कारण अधिक दिनों तक नाक बंद रहने से डॉक्टर से जांच कराएं। क्योंकि नींद की गोलियां और एलर्जी रोधक दवाइयां भी श्वसन मार्ग की पेशियों को सुस्त बना देती है। जिससे खर्राटे आते हैं। इसी के साथ नीचे वाले जबड़े का छोटा होना भी खर्राटे का कारण है।जब व्यक्ति का जबड़ा सामान्य से छोटा होता है। तो लेटने पर उसकी जीभ पीछे की तरफ हो जाती है और इससे सांस नली ब्लॉक होती है। ऐसे में सांस लेने और छोड़ने पर प्रेशर पड़ता है।

पुरुषों की सांस नली महिलाओं की नली से पतली होती है। इसलिए पुरुषों को खर्राटे ज्यादा आते हैं और यह बीमारी अनुवांशिक भी हो सकती है। जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होती है। व्यक्ति की गर्दन अगर ज्यादा छोटी है तो भी सांस लेते समय आवाज आती है।

खराटे की समस्या को दूर करने के उपाय-

पुदीने में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं। जो गले और नाक के छेदों की सूजन को कम करते हैं। इससे सांस लेना आसान होता है। सोने से पहले पिपरमेंट आयल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर गरारे करने से भी काफी फायदा मिलेगा।

-उबलते हुए पानी में 10 पुदीने की पत्तियां डालकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। जब पानी गुनगुना ओर पीने योग्य हो जाए तो इसको छानकर या बिना छाने पीएं। इससे कुछ ही समय में खर्राटों की समस्या ठीक हो जाती है।

-एक गिलास गुनगुने पानी में 3 चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर पीएं। इसका लगातार सेवन से आपको खर्राटे की समस्या से निजात मिलेगी।

-लहसुन भी कई रोगों की रोकथाम का अचूक उपाय है। लहसुन नासिका मार्ग में बलगम के निर्माण और श्वसन प्रणाली की सूजन को कम करता है। इसके खर्राटे लेने में भी फायदा होगा। क्योंकि लहसुन घाव भरने और ब्लॉकेज को साफ करने के साथ ही श्वसन तंत्र को भी बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती है। चैन की नींद के लिए लहसुन का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद है। एक या दो लहसुन की कली को पानी के साथ ले। इस उपाय को सोने से पहले करने से आप कर खर्राटों से राहत पा सकते हैं।



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चीनी खाने से होते हैं ये नुकसान, शूगर के बजाय खानी चाहिए ये चीजें

चीनी (शक्कर) में सुक्रोज, लैक्टोज फ्रक्टोज और कैलोरी मिलती है लेकिन इसमें विटामिन्स या मिनरल्स नहीं होते हैं। इसका मात्रा से अधिक इस्तेमाल करने से मोटापा, मधुमेह, हार्ट अटैक, कैंसर, ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। चीनी गन्ना और चुकंदर से बनती है।

सफेद चीनी को रिफाइंड शुगर भी कहा जाता है। इसे रिफाइन करने के लिए सल्फर डाई ऑक्साइड, फास्फोरिक एसिड, कैल्शियम हाई-ऑक्साइड का उपयोग किया जाता है। रिफाइनिंग के बाद चीनी में मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स, प्रोटीन, एंजाइम्स जैसे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

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जानिए...खाने को दवा की तरह खाने के लिए क्यों कहते हैं?

रिफाइन चीनी के खाने से मस्तिष्क में रासायनिक क्रियाएं होने से सेरेटोनिन का स्राव हो सकता है, जिससे स्वभाव में चिड़चिड़ापन, अवसाद जैसे लक्षण आते हैं। इसमें सुक्रोज बचता है, इसकी अधिक मात्रा शरीर के लिये नुकसानदायक होती है। अधिक मात्रा में चीनी का इस्तेमाल वसा से ज्यादा नुकसान करती है। इससे मधुमेह की दिक्कत होती है। ज्यादा इस्तेमाल करने से वजन बढ़ सकता है। चीनी या इससे बनी चीजें खाने के बाद मुंह साफ करना चाहिए। ये दांतों की सुरक्षा कवच को नुकसान पहुंचाती है। दिन भर में महिलाओं को २१-२५ ग्राम और पुरुषों को ३०-३५ ग्राम तक चीनी लीनी चाहिए। इससे अधिक मात्रा में लेने में स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है।

चीनी का विकल्प है गुड़, खजूर
चीनी की बजाय मिनरल्स, विटामिन्स युक्त गुड़, शहद, खजूर, फलों का रस, फलों का प्रयोग करना चाहिए। इनके इस्तेमाल से रक्त में ग्लूकोज का स्तर तेजी से नहीं बढ़ता है। 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खाने से ली गई ऊर्जा में शक्कर। दूध, फल और सब्जी में मौजूद शक्कर से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है।

चीनी के चार प्रकार
चीनी चार प्रकार की होती है। ग्रनुलेटेड (दानेदार) चीनी कुकीज़, केक, पाई, आइसक्रीम बनाने में प्रयोग की जाती है। कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और आयरन से भरपूर ब्राउन शुगर रोग प्रतिरोधकता व पाचन सही रखता है। चिपचिपी ब्राउन शुगर को रिफाइंड नहीं किया जाता है। ब्राउन शुगर की तरह और महंगी शुगर को आइसक्रीम सॉस और ब्रेड पुडिंग में प्रयोग होता है। कन्फेक्शनर शुगर मक्का स्टार्च के साथ रिफाइंड दानेदार चीनी का पाउडर के रूप में होता है।



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जानिए...खाने को दवा की तरह खाने के लिए क्यों कहते हैं?

क्या, कब और कैसे खाना चाहिए
जब बात शरीर को हेल्दी रखने की आती है तो उसमें हमारी ईटिंग हैबिट्स का बहुत बड़ा हाथ होता है। ऐसे में फिट और हेल्दी रहना है तो आयुर्वेद के अनुसार जानें कि हमें क्या खाना चाहिए, कब खाना चाहिए और कैसे खाना चाहिए। हम दिनभर में जो भी खाते-पीते हैं, जरूरी नहीं कि वह शरीर के लिए फायदेमंद ही हो। आयुर्वेद में हर चीज के खाने-पीने का समय मौसम व शारीर की प्रकृति के अनुसार तय किया गया है।
आहार के छह रस
आयुर्वेद के अनुसार, भोजन में 6 रस शामिल होने चाहिए। ये 6 रस हैं- मधुर (मीठा), लवण (नमकीन), अम्ल (खट्टा), कटु (कड़वा), तिक्त (तीखा) और कषाय (कसैला)। शरीर की प्रकृति के अनुसार ही भोजन करना चाहिए। इससे शरीर में पोषक तत्वों का असंतुलन नहीं होता है। कुछ लोग मिली हुई प्रकृति के होते हैं। ऐसे लोगों को अपने भोजन के लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर की परामर्श से आहार करना चाहिए।

इन चीजों को खाने से बचें

फूड सेफ्टी एंड स्टैण्डर्ड ऑथोरिटी ऑफ इण्डिया (एफएसएसएआइ) की ओर से ईट राइट इंडिया कैम्पेन के तहत तेल, चीनी, नमक थोड़ा कम-थोडा कम खाने को लेकर नारा दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार बदलती हुई दिनचर्या के मध्य नजर हमें खान-पान में इन तीन चीजों तेल, चीनी व नमक का उपयोग दिन-प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा कम करना होगा अन्यथा बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। हम सुबह से शाम तक जो भी कुछ खाते-पीते हैं उनमें मुख्यत: इन्हीं तीनों खाद्य पदार्थों का मिश्रण होता है।



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क्या आप जानते हैं? मसल्स पॉवर बढ़ाने के लिए कितनी प्रोटीन लेनी चाहिए

मसल्स पॉवर बढ़ाने के लिए डाइट में प्रोटीन की भरपूर मात्रा होनी चाहिए। सामान्यत: प्रति किलोग्राम वजन पर एक ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। इसीलिए प्रोटीन की जरूरत व्यक्ति की गतिविधि और वजन के हिसाब से होती है। प्रोटीन को लेकर सर्टीफाइड हैल्थ कोच की मदद ले सकते हैं।

कार्बोहाइड्रेट व फैट की मात्रा ज्यादा

एक्सपर्ट बताते हैं कि सामान्य डाइट में कार्बोहाइड्रेट व फैट की मात्रा ज्यादा होती है लेकिन मसल्स के लिए कार्बोहाइड्रेट व फैट की मात्रा को संतुलित करना जरूरी है और प्रोटीन की मात्रा बढ़ानी होती है। यदि आप अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं रात में अपने पास एक एक बड़े बर्तन में शहद मिला दूध रखें। इसके अलावा रात में जब भी नींद टूटे तो इसे पीकर सो जाएं। ये वजन बढ़ाने में बहुत मदद करता है। रात में मिली यह एक्स्ट्रा खुराक वजन बढ़ाने में मददगार मानी जाती है। इसके अलावा पनीर, बटर, चिकन, मूंगफली आदि ले सकते हैं।



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Tuesday, 23 February 2021

क्या आपको गहरी नींद नहीं आती? जानिए क्या है कारण

फिजिकल व मेंटल हैल्थ के लिए आठ घंटे की नींद लेना जरूरी होता है। इससे मांसपेशियां मजबूत होती है और मस्तिष्क की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। किसी भी इंसान के शरीर में मसल्स की ग्रोथ होती है तो तो माना जाता है कि उसकी उसका विकास सही तरीके से हो रहा है।
भूख भी लगती, पाचन भी अच्छा रहता
अक्टूबर से लेकर मार्च तक सर्दी का मौसम मसल्स बनाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। यह मौसम हार्ड वर्कआउट करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान भूख भी खूब लगती है। हाजमा भी अच्छा रहता है। शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। थकान नहीं लगती है। स्केलटन मसल्स (कंकालीय मांसपेशियां) किसी भी स्वस्थ व्यक्ति की पहचान होती है। ये मानव शरीर का सबसे एडोप्टेबल टिश्यू भी कहलाती हैं जिन्हें आसानी से शेप में लाया जा सकता है।

सोने के दौरान शरीर क्या करता है?
शरीर में आंतरिक मरम्मत का काम सोने के दौरान रात में होता है। जब हम गहरी नींद में होते हैं तो शरीर क्लीनिंग का कार्य करता है। इससे शरीर अगले दिन काम करने के लिए तैयार होता है। आप जिम या घर में मसल्स वर्कआउट करते हैं तो फिर उन्हें रिकवर और रिपेयर होने के लिए आराम देना भी जरूरी है। एक्सपर्ट कहते हैं कि इसलिए आपको कम से कम 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए और अपने वर्कआउट को भी बदलते रहना चाहिए।



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क्या आपको गहरी नींद नहीं आती? जानिए क्या है कारण

फिजिकल व मेंटल हैल्थ के लिए आठ घंटे की नींद लेना जरूरी होता है। इससे मांसपेशियां मजबूत होती है और मस्तिष्क की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। किसी भी इंसान के शरीर में मसल्स की ग्रोथ होती है तो तो माना जाता है कि उसकी उसका विकास सही तरीके से हो रहा है।
भूख भी लगती, पाचन भी अच्छा रहता
अक्टूबर से लेकर मार्च तक सर्दी का मौसम मसल्स बनाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। यह मौसम हार्ड वर्कआउट करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान भूख भी खूब लगती है। हाजमा भी अच्छा रहता है। शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। थकान नहीं लगती है। स्केलटन मसल्स (कंकालीय मांसपेशियां) किसी भी स्वस्थ व्यक्ति की पहचान होती है। ये मानव शरीर का सबसे एडोप्टेबल टिश्यू भी कहलाती हैं जिन्हें आसानी से शेप में लाया जा सकता है।

सोने के दौरान शरीर क्या करता है?
शरीर में आंतरिक मरम्मत का काम सोने के दौरान रात में होता है। जब हम गहरी नींद में होते हैं तो शरीर क्लीनिंग का कार्य करता है। इससे शरीर अगले दिन काम करने के लिए तैयार होता है। आप जिम या घर में मसल्स वर्कआउट करते हैं तो फिर उन्हें रिकवर और रिपेयर होने के लिए आराम देना भी जरूरी है। एक्सपर्ट कहते हैं कि इसलिए आपको कम से कम 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए और अपने वर्कआउट को भी बदलते रहना चाहिए।



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शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है ग्रीन टी, चाय काफी की जगह पीए रोज....

क्या आप जानते हैं ग्रीन टी आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। यह चाय और कॉफी से भी अच्छा पेय है। जिसे रोज पीने से आपके शरीर की कई बीमारियां भी दूर हो जाएगी। आज हम आपको ग्रीन टी से होने वाले फायदे के बारे में बताएंगे।

-ग्रीन टी वजन घटाने में काफी सहायक मानी जाती है, इसका सेवन सुबह खाली पेट करना चाहिए।

-ग्रीन टी में मौजूद एन्टी ऑक्सिडेंट मौजूद शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचाता है। सिर दर्द होने पर एक कप ग्रीन टी पीने से आपको तुरंत आराम होगा।

-ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए भी ग्रीन टी काफी फायदेमंद होती है। इससे ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में आता है ।

-बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी ग्रीन टी फायदेमंद है। बिना किसी रोक-टोक के बच्चों और बुजुर्गों को भी यह पिला सकते हैं।

-नियमित ग्रीन टी पीने से बुरे कोलेस्ट्रोल को काफी कम किया जा सकता है।

-ग्रीन टी में मौजूद पोलीफेनॉल्स शुगर लेवल कंट्रोल करने में काफी सहायक होता है। इसका anti-diabetic तत्व शुगर कंट्रोल करते हैं।

-ग्रीन टी से बीमारियों से लड़ा जा सकता है।।इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। इस टी में नींबू और शहद मिलाने से चेहरे में निखार आता है।



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तो, इन तरीकों से करें ज्यादा कैलोरी बर्न

एक शोध के मुताबिक अगर आप खुले वातावरण में मौजूद ताजा हवा में रहते हैं तो 12 फीसदी ज्यादा कैलोरी बर्न कर सकते हैं। घर में खुलापन न होने के कारण एक्सरसाइज (exercise) करने पर बॉडी वार्मअप होने में समय लेती है और कैलोरी बर्न में भी समय लगता है। खुली जगह पर आप बिना किसी मशीन के एक्सरसाइज करें तो ज्यादा कैलोरी बर्न कर सकते हैं।

खेलें टेनिस
टेनिस (Tennis) के माध्यम से आप पूरे शरीर को एक्टिव रख सकते हैं। अगर आप इस खेल में परफेक्ट नहीं हैं तो और भी अच्छी बात है। इस तरह बॉल बार-बार गिरेगी तो कैलोरी बर्न भी ज्यादा होगी। इस तरह आप एक घंटे में करीब 400 कैलोरी बर्न कर सकते हैं। हाथ, पांव, पेट, पीठ और आंखों के लिहाज से टेनिस बहुत अच्छा खेल है। इसमें आपको पूरी तरह शारीरिक सक्रियता दिखानी होती है, जो किसी भी एक्सरसाइज के बराबर फायदा देती है।

करें साइक्लिंग
साइकिल (cycle) चलाने से पांवों की मसल्स मजबूत होती हैं और पेट पर चर्बी नहीं चढ़ती। आप नियमित रूप से साइक्लिंग करेंगे तो सेहतमंद रहेंगे और कैलोरी भी बर्न होती रहेगी। साइक्लिंग (cycling) के दौरान आप बैलेंस बनाने की कोशिश करते रहते हैं। इससे आपकी एक्टिवनेस बनी रहती है।

जॉगिंग करें
फैट कम करने के लिए जॉगिंग (jogging) सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। इसमें सबसे ज्यादा आपके पैरों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे आप आधा घंटे में 300 कैलोरी बर्न कर सकते हैं। जॉगिंग करने से हड्डियों के जोड़ मजबूत होते हैं। जॉगिंग करते समय आपको नए-नए तरीकों को इस्तेमाल में लेना चाहिए, ताकि इसमें आपकी दिलचस्पी बनी रहे।



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इन आदतों को रखें दूर, दांत रहेंगे स्वस्थ

एक सर्वे बताता है कि भारतीय अपने दांतों को लेकर खासे लापरवाह हैं। लगभग साठ प्रतिशत भारतीय (Indian) डेंटिस्ट (Dentist) की सेवाएं लेने से कतराते हैं। अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ बातों को जोड़कर और कुछ आदतों को घटाकर दांतों को आसानी से स्वस्थ रखा जा सकता है।

ज्यादा पानी (water) पिएं और खाने के बाद नियमित कुल्ला करें। नियमित कुल्ला करने से मसूड़ों और दांतों के बीच फंसे कण भी बाहर निकल आते हैं। इससे मुंह दुर्गंधमुक्त रहता है।

अपने खाने में सेब, खीरा, गाजर जैसे फलों को शामिल करें। ये आपके दांतों को प्राकृतिक रूप से साफ करते हैं और मसूड़ों की समस्या भी दूर करते हैं।

शुगर फ्री (sugar free) और दांतों को चमकदार बनाए रखने वाले च्युइंगम प्रोड्क्टस भी दांतों को साफ रखने में सहायक होते हैं। इनका संतुलित इस्तेमाल आपके पाचन को भी बेहतर बनाता है।

ठंडे पेय लेते वक्त स्ट्रॉ का उपयोग करें ताकि आपके दांत बेहद ठंडे और मीठे के सीधे सम्पर्क में आने से बचें।

दिन में कम से कम दो बार नियमित ब्रश करें। दिन में भी कुछ खाने के बाद मुंह की सफाई जरूर करें। विटामिन सी को भोजन का हिस्सा बनाएं। इससे मसूड़े स्वस्थ बने रहेंगे।

कैल्शियम वाले टूथपेस्ट से ज्यादा कारगर है कि आप इसकी जगह कैल्शियम से भरपूर भोजन करें और दांतों को मजबूत बनाएं।

इन्हें कहें अलविदा
चॉकलेट और टॉफी का कम से कम इस्तेमाल करें। चॉकलेट पूरे मुंह में घुलकर दांतो की दरारों में फंस जाता है और कैविटि बनाता है।

भोजन में स्टार्च का इस्तेमाल कम करें। यह बैक्टेरिया पैदा करता है जिनकी वजह से दांतों में सडऩ की समस्या पैदा हो जाती है।

ज्यादा गर्म और ज्यादा ठंडे दोनों प्रकार के खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। ये दोनों ही दांतों के इनैमल को खराब करते हैं।

बहुत ठंडी चीज खाने के तुरंत बाद बहुत गर्म चीज न खाएं। इससे नसों में सनसनाहट की समस्या पैदा होती है। मसूड़ों से खून पायरिया के लक्षण हैं। तुरंत डेंटिस्ट से संपर्क करें।

दांतों की सुरक्षा के लिए देर तक भूखे रहना और दुर्गंधयुक्त पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।



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रोगों को दूर रखना है, तो करें ये काम

एक्यूप्रेशर सिद्धांत (Acupressure theory) के अनुसार हमारे हाथों मेें पूरे शरीर के प्रत्येक अंग व प्रत्यांग के दबाव बिंदु होते हैं, जिनको दबाने पर सम्बंधित अंग तक खून व ऑक्सीजन (oxygen) का प्रवाह पहुंचने लगता है और धीरे-धीरे वह रोग ठीक होने लगता है। इन सभी दबाव बिंदुओं को दबाने का सबसे सरल तरीका ताली (Clap) है।

अंगुली ताली
इस ताली में बाएं हाथ की हथेली पर दाएं हाथ की चारों अंगुलियों को एक साथ तेज दबाव के साथ इस प्रकार मारा जाता है कि दबाव पूरा हो और आवाज अच्छी आए। इस प्रकार की ताली से बाएं हथेली के फेंफड़े, यकृत, पिताशय, गुर्दे छोटी आंत व बड़ी आंत तथा दाएं हाथ की अंगुली के साइनस के दबाव बिंदु दबते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप इन अंगों तक खून का प्रवाह तीव्र होने लगता है। ताली को जब तक बजाया जाए तब तक कि हथेली लाल न हो जाए। इस प्रकार की ताली कब्ज, एसिडिटी, मूत्र, संक्रमण खून की कमी व श्वास लेने में तकलीफ जैसे रोगों में लाभ पहुंचाती है।

थप्पी ताली
इस प्रकार की ताली में दोनों हाथों के अंगूठा-अंगूठे से कनिष्का-कनिष्का से तर्जनी-तर्जनी से यानि की सभी अंगुलियां अपने समानांतर दूसरे हाथ की अंगुलियों पर पड़ती हो, हथेली-हथेली पर पड़ती हो। इस प्रकार की ताली से आवाज बहुत तेज व दूर तक फेंकी जा सकती है। इस प्रकार की ताली कान, आंख, कंधे, मस्तिष्क, मेरूदंड के सभी बिंदुुओं पर दबाव डालती है। इस ताली का सर्वाधिक लाभ फोल्डर एंड सोल्जर, डिप्रेशन, अनिद्रा, स्लिप डिस्क, स्पोगोलाइसिस, आंखों की कमजोरी में पहुंचता है। इस ताली को भी जब तक बजाया जाए तब तक कि हथेली लाल न हो जाए।

ग्रिप ताली
इस ताली में सिर्फ हथेली को हथेली पर ही इस प्रकार मारा जाता है कि वह क्रॉस का रूप धारण कर ले। इस ताली से कोई विशेष रोग में लाभ तो नहीं मिलता है, लेकिन यह ताली उत्तेजना का कार्य करती है। इस ताली से अन्य अंगों के दबाव बिंदु सक्रिय हो उठते हैं। यह ताली सम्पूर्ण शरीर को सक्रिय करने में मदद करती है। यदि इस ताली को तेज व लम्बा बजाया जाता है तो शरीर में पसीना आने लगता है जिससे कि शरीर के विषैले तत्व पसीने से बाहर आकर त्वचा को स्वस्थ रखते हैं।



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