Monday, 30 September 2019

फटी त्वचा के लिए जान लें ये घरेलू नुस्खे

सर्दियों की शुरूआत होन के साथ ही त्वचा संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। खासकर त्वचा का फटना या रूखा होना। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब रूखी त्वचा की केयर न की जाए। लापरवाही से त्वचा में दरार व खून आने लगता है। सूरज की किरणों, प्रदूषण, सर्द हवाओं व शरीर में पोषक तत्त्वों की कमी जैसे कई कारणों से होने वाली स्किन संबंधी समस्या से प्राकृतिक तरीकों से छुटकारा पा सकतेे हैं।

त्वचा को बनाएं नम : 3 चम्मच जैतून व एक चम्मच अरंडी के तेल को मिलाकर चेहरे पर लगाकर भाप लें। गुनगुने पानी में डूबे हुए कपड़े को हल्का निचोड़कर चेहरे पर ढकें व ठंडा होने पर हटाएं। इससे त्वचा मुलायम हो जाएगी।

नींबू का रस : इसे त्वचा पर लगाने से या संतरे के फेस पैक से चेहरे पर निखार आता है। नींबू रस त्वचा पर लगाने से शुरू में हल्की जलन हो सकती है। रस को चेहरे पर लगाकर 10 मिनट बाद उसे धो लें।

कारगर पपीता : फटी त्वचा पर पपीता लगाना भी लाभकारी है। इसके गूदे का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाकर मसाज करें और 10-15 मिनट के लिए लगे हुए छोड़ दें। बाद में गुनगुने पानी से धोएं।

शहद-दालचीनी : एंटीबैक्टीरियल होने के कारण दालचीनी का लेप चेहरे पर लगाने से बैक्टीरिया मर जाते हैं। दालचीनी पाउडर को शहद में मिलाकर लगाएं और इस लेप को 5 मिनट तक चेहरे पर लगाकर छोड़ दें। फिर इसे ठंडे पानी से धो लें। शहद लगाने से त्वचा मुलायम होती है।



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सुबह उठते ही आती हैं छींकेंं तो जानें ये खास बातें

तापमान में बदलाव से कई बार लोगों को सुबह जल्दी उठने के साथ लगातार छींकें आती हैं। वैसे तो छींकना एलर्जी से बचाव की स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिससे शरीर में मौजूद एलर्जी के कारक बाहर निकलते हैं। लेकिन रोज सुबह 4-5 बार से ज्यादा छींकें आना सामान्य नहीं। इसके साथ नाक बहना, आंखों में जलन व नाक बंद होने जैसी दिक्कत भी होती है। जाने कुछ घरेलू उपाय-

ये भी उपयोगी -
मेथी के दाने : एक कप पानी में 2-3 चम्मच मेथी के दानों को उबालें। पानी आधा रहने पर गुनगुना घूंट-घूंट कर पीएं, लाभ होगा।

पान का पत्ता : 2-3 पान के पत्ते को पीसकर जूस निकालकर आधे चम्मच शहद के साथ लेने से कफ, एलर्जी और सर्दी नहीं रहती।

खट्टे फल : फ्लेवेनॉएड्स व एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फल संतरा, नींबू, अंगूर आदि इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार हैं। ये सर्दी व एलर्जी के कारक वाले बैक्टीरिया से लड़ते हैं। इनमें से एक फल रोज खाएं।

सौंफ : एंटीऑक्सिडेंट युक्त सौंफ को हर्बल टी के रूप में ले सकते हैं। इससे एलर्जी के प्रति लडऩे की क्षमता बढ़ती है।

हल्दी : आयुर्वेद में हल्दी का धुआं सूंघने की प्रक्रिया हर्बल स्मोकिंग कहलाती है। इसके लिए 1-2 चम्मच पिसी हल्दी को गर्म तवे पर रखकर इससे निकलने वाले धुएं को सूंघें। तवे पर एक चम्मच घी गर्म कर के भी हल्दी पाउडर डाल सकते हैं।

काली मिर्च : 5-8 काली मिर्च और एक चुटकी हल्दी पाउडर को काली मिर्च के पत्ते में अच्छी तरह से लपेट लें और इसे हल्का गर्म करें। ब्रश करने के तुरंत बाद इसे चबाएं। बच्चों को इसे न दें क्योंकि इससे मुंह और सीने मेें जलन हो सकती है।

लहसुन : सहजन के पत्ते व लहसुन को मिलाकर अच्छी तरह से पेस्ट बना लें। इसे कपड़े या रुमाल पर लगाकर सूंघें। सहजन की जगह तुलसी पत्ता भी उपयोगी है।



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मां को एनीमिया है तो होने वाले बच्चे की इम्युनिटी होगी खराब

डॉक्टर्स के अनुसार पोषण व हाइजीन का अभाव एनीमिया का कारण है। इससे मां-शिशु दोनों को दिक्कतें होती हैं। जिन गर्भवती महिलाओं को ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है, उनके शिशु कम इम्युनिटी वाले पैदा होते हैं।

हीमोग्लोबिन कम -
खून में आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन कम होने लगता है, जिसे एनीमिया कहते हैं। आयरन शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं (रेड ब्लड सेल्स) बनाता है जिससे हीमोग्लोबिन का निर्माण होता है। इसका काम फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर रक्त में पहुंचाना है। ऐसे में हीमोग्लोबिन कम होने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। एक स्वस्थ पुरुष में 13-16 व महिला में 12-14 मिग्रा. प्रति डेसिलीटर हीमोग्लोबिन होना चाहिए।

कारण : पोषण (फॉलिक एसिड, विटामिन-बी12, आयरन) की कमी अहम है। कुछ रोगों के कारण जैसे दवाओं का दुष्प्रभाव, थायरॉइड, थैलेसीमिया, किडनी संबंधी समस्या, कैंसर, नियमित रक्तस्त्राव और खराब दिनचर्या से भी एनीमिया हो सकता है।

ऐसे पाएं राहत -
फॉलेट : शरीर को नई रक्त कोशिकाएं बनाने के लिए फॉलेट, विटामिन-12, आयरन की जरूरत होती है जो हरी सब्जियों, साबुत अनाज, सूखे मेवों, पालक, चुकंदर व सेब में होते हैं।

अनार: प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम व कार्बोहाइडे्रट, हीमोग्लोबिन की मात्रा को तेजी से बढ़ाकर रक्त संचार को ठीक करता है। रोज सुबह खाली पेट अनार खाने या जूस पीने से खून की कमी पूरी होती है।

किशमिश: आयरन, फाइबर आदि होने से किशमिश व खजूर रोग के इलाज में उपयोगी हैं। रातभर पानी में भीगी किशमिश शहद के साथ खाएं। 100 ग्रा. खजूर में 90 मिग्रा. आयरन है।

शहद-
आयरन व विटामिन बी12 से युक्त शहद और स्नैैक्स में भुने चने व गुड़ खाने से हीमोग्लोबिन बनता है। खट्टे फल भी खाएं।



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इन सवालों के जवाब अच्छी रखेंगे आपके हृदय की सेहत

प्रश्न : हृदय का मुख्य काम क्या है?

हृदय ऐसा अंग है जो रक्त की पम्पिंग कर पूरे शरीर में इसका संचार करता है। हृदय के अंदर चार चैम्बर होते हैं। उनके बीच में वॉल्व होते हैं। इनकी मदद से हृदय पम्पिंग कर शुद्ध रक्त शरीर में पहुंचाता है। शरीर का एक्टिव भी रखने का काम करता है।

प्रश्न : बीपी व हाई बीपी की बॉर्डरलाइन क्या है ?
120/80 बीपी की आदर्श रीडिंग व 140/90 हाई बीपी की बॉर्डरलाइन मानी जाती है। 120-140 व 80-90 में जीवनशैली में बदलाव की सलाह दी जाती है। अगर बीपी लेवल 140/90 से ऊपर हो तो मरीज को नियमित रूप से दवा लेने की जरूरत पड़ती है।

प्रश्न : हृदय को स्वस्थ कैसे रख सकते हैं?
मदिरापान, धूम्रपान से दूर रहना चाहिए। तनाव लेने से बचें। वजन, शुगर व बीपी नियंत्रित रखें। नमक व शक्कर का कम प्रयोग करें। डीप फ्राई चीजें खाने से हार्ट की बीमारी होती है। इनसे बचें। दो चम्मच से ज्यादा घी न लें। योग, व्यायाम व ध्यान करने से भी इसमें बचाव होता है।

प्रश्न : हाइपर टेंशन की दिक्कत क्यों होती है?
हाइपर टेंशन की वजह वंशानुगत, अनियमित जीवनशैली हो सकती है। यह तनाव, ज्यादा वजन व शारीरिक गतिविधि न होने से होता है। ज्यादा जंक फूड व कोल्डड्रिंक्स से दिक्कत बढ़ती है। ऊपर से नमक मिलाकर खाने से इसकी आशंका अधिक होती है।

प्रश्न : लो-हाई बीपी कैसे नियंत्रित करें?
लो बीपी में भी मरीज को आराम करना चाहिए। रोजाना कम से कम 2.5-3 लीटर पानी पीएं। नमक-शक्कर का पानी भी फायदा करता है। हाई बीपी में दवाइयां नियमित लें। अपने मन से कोई दवा न छोड़ें। दिन में एक चौथाई चम्मच से ज्यादा नमक न लें। अगर ऐसी समस्या है तो मौसमी फल, ताजा खाना खाएं। हल्का व्यायाम भी करें।

प्रश्न : स्वस्थ हृदय के लिए युवा क्या करें?
किशोरावस्था के समय से ही संतुलित खानपान, 30-60 मिनट नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। ऊपर के सवाल में जैसा बताया गया है किसी भी तरह के व्यसन से बचें।

प्रश्न : कब सलाह लें?
स्वस्थ हृदय जरूरत के मुताबिक पंपिंग व धड़कन को कम-ज्यादा करता है। भारी काम, तेज गति से काम करने (दौड़ने, व्यायाम आदि) पर सांस फूलना, थकान है तो चिकित्सक से परामर्श लें।

प्रश्न : हृदय रोगी किन बातों का ध्यान रखें?
चिकित्सक को नियमित दिखाएं और दवा लें। यदि एंजियोप्लास्टी या बायपास सर्जरी हुई है तो खून पतला करने की दवा नियमित लें। सांस ज्यादा फूलती है तो पानी और नमक कम लें।

प्रश्न : सर्जरी कितने तरह की होती है?
सर्जरी हृदय की धमनियों के ब्लॉक होने पर, वॉल्व को बदलने के लिए होती है। हृदय तकलीफों का इलाज एंजीयोप्लास्टी तकनीक से हो सकता है।

प्रश्न : सर्जरी की जरूरत कब पड़ती है?
यदि हृदय की सभी धमनियों में कई ब्लॉकेज हैं तो सर्जरी की जरूरत पड़ती है। वॉल्व के लीकेज और हृदय के छेद बंद करने में भी सर्जरी होती है।



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Navratri Special Diet: नवरात्रि में केले से एेसे बनाएं हेल्दी स्नैकिंग

कच्चे केले बेहद पौष्टिक होते हैं और यह फाइबर, बीटा-कैरोटिन, कैल्शियम, विटामिन ए और सी का भी एक अच्छा स्त्रोत है। ग्लूटन फ्री इस फल का उपयोग आप कई तरह के व्यंजनों को बनाने में कर सकते हैं। कच्चे केले से बने स्नैक्स नवरात्रि के व्रत में खाना फायदेमंद है। आइये जानते हैं इसे कैसे बनाएं।

कच्चा केले के कटलेट्स।
सामग्री :
2 छोटे कच्चे केले
2 मध्यम आकार के आलू।
1/4 कप कसावे का आटा।
1 टीस्पून लाल मिर्च पाउडर।
1 टीस्पून पुदीने के सुखे पत्ते।
हिमालयन सॉल्ट (सेंधा नमक)
3 टेबलस्पून तेल।

विधि :
1. सबसे पहले केले और आलू को प्रेशर कूकर में डाल दें और इसके बाद इन्हें तीन सीटी लगने या दस मिनट तक पका लें। इस प्रक्रिया में हड़बड़ी बिल्कुल न करें क्योंकि हमारा मकसद इन्हें ऐसे पकाना है जिससे कि ये बिल्कुल सॉफ्ट हो जाए और इन्हें अच्छे से मैश किया जा सके।

2. इसके बाद इन्हें कूकर के गर्म पानी से निकाल लें और कुछ देर तक ठंडा होने के लिए छोड़ दें। कुछ देर बाद आलू और केले के छिलके को छील लें और इन्हें एक-एक कर किसी बड़े बर्तन में डालते जाएं।

3. इसके बाद उबले आलू और केले को चम्मच या पोटैटो मैशर से मसल लें।

4. इसके बाद इसमें ऊपर लिखे सभी मसालों को बारी-बारी से डालते जाएं और कसावे के आटे को मिलाएं और सबको अच्छे से मिला लें और एक अच्छा मिश्रण तैयार कर लें।

5. इस प्रक्रिया के बाद अपनी हथेलियों को चिकना कर लें और इस मिश्रण को थोड़ा-थोड़ा लेकर टिक्की के आकार का बना लें।

6. अब पैन को गैस पर चढ़ाकर उसमें तेल डाल लें और तेल के गर्म होने के बाद उनमें एक-एक कर इन टिक्कियों को रख दें।

7. धीमे आंच पर इन्हें 8-10 मिनट तक पकाए और इसके बाद इन्हें पलट दें और फिर हल्के सुनहरे होने तक पकाएं। दोनों साइड से अच्छे से पक जाने के बाद इन्हें एक प्लेट पर निकाल लें।

फलाहारी हरी चटनी के साथ इन्हें गर्मागर्म परोसें।



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Sunday, 29 September 2019

Heart Health: बढ़ते वजन को न करें इग्नोर, हार्ट अटैक का है बड़ा कारण

ज्यादा वजन (Obesity) : शरीर में तय मात्रा से ज्यादा फैट की वजह से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है जो हृदय संबंधी बीमारियों का कारण बनता है। ट्रांस फैट हार्ट अटैक का कारण बनता है। कोलेस्ट्रॉल की जांच साल में एक बार करा सकते हैं।
हाई बीपी (High Blood Pressure) : लंबे समय से हाई बीपी धमनियों को ब्लॉक करता है। जिससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ता है। डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर का लगातार उतार-चढ़ाव हार्ट के लिए ठीक नहीं होता है। इससे हृदय की कार्य क्षमता प्रभावित होती है।
हार्ट के लिए स्मोकिंग, शराब खतरनाक

स्मोकिंग से हार्ट की धमनियां सिकुड़ जाती हैं। रक्त संचार बाधित होता है। शराब हृदय की मांसपेशियों को कमजोर करती है। हार्ट की पंपिंग क्षमता घटती है।
बढ़ता स्ट्रेस : तनाव का संबंध हृदय से होता है। इससे जितना हो सके दूर रहें क्योंकि तनाव से अड्रेनलिन हॉर्मोन रिलीज होता है। इससे हार्ट रेट बढ़ता है। ब्लड प्रेशर भी बढऩे लगता है। ऐसी स्थिति लगातार होने से ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, हार्ट पंपिंग से खून व उसे पहुंचने वाली ऑक्सिजन की मात्रा घटती-बढ़ती है। इससे धमनियों पर दबाव से हृदय संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं।
कम नींद : कम नींद से तनाव, थकान बढ़ती है। कम से कम 7 घंटे की नींद लेनी चाहिए। कम सोने से हृदय की धमनियों की कार्यक्षमता बढ़ती है। इससे पूरे दिन शरीर का संतुलन बिगड़ा रहता है। अनिद्रा की वजह से हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
फैमिली हिस्ट्री : बैड कोलेस्ट्रॉल बढऩा जेनेटिक हो सकता है। माता-पिता में से किसी को ५५ साल से पहले हार्ट अटैक हुआ है तो बच्चों में आशंका कई गुना बढ़ जाती है। बच्चों में जींस व खानपान की आदतों का समान होना है। बच्चों को चिकित्सक की परामर्श से जांच करानी चाहिए।

एक्सपर्ट : नूपुर जैन, सीनियर डाइटीशियन, एम्स, रायपुर



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Heart health tips: यदि एक बार हार्ट के पेशेंट बन गए तो क्या होगा?

angina से छाती में पहली बार तेज दर्द होता है। इसे बदहजमी, पसलियों, खांसी से दर्द के अंतर को पहचानना जरूरी होता है। समय पर पहचान कर हार्ट अटैक से बचा जा सकता है। एनजाइना तीन तरह का हो सकता है।
स्टेबल एनजाइना: शारीरिक गतिविधि सीढिय़ां चढऩे, कसरत या अधिक भावुकता के कारण होता है। आराम करने पर कम हो जाता है।
अनस्टेबल एनजाइना : आराम करते, सोते हुए हो सकता है। सर्दी में ज्यादा होता है।
प्रिंजमेटल एनजाइना: हृदय की धमनियों के अस्थायी रूप से सिकुडऩ के कारण होता है। इसकी समय से पहचान, इलाज न होने से स्थिति खतरनाक हो सकती है।
यदि एक बार हार्ट अटैक हुआ तो...?
हृदय रोगों के बाद स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। चिकित्सक की परामर्श से जीवनशैली, खानपान रखना होता है। पेसमेकर लगा है तो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से बचने की सलाह देते हैं। संतुलित भोजन हृदय रोगों से बचाने में मददगार है। सोडियम व सैचुरेटेड फैट वाली चीजों के प्रयोग से बचें। समय से नियमित दवाएं लेनी होती है।

हृदय रोग का कारण कोलेस्ट्रॉल का बढऩा
हृदय रोग का प्रमुख कारण कोलेस्ट्रॉल का बढऩा है। ट्राइग्लिसराइड, एलडीएल व एचडीएल का स्तर 200 एमजी/ डीएल से ज्यादा नहीं होना चाहिए। ईसीजी मरीज की छाती, भुजाओं व पैरों पर इलेक्ट्रोड पैच से हार्ट की इलेक्ट्रिक एक्टिविटी को रेकॉर्ड करते हैं। हार्ट की मांसपेशियों, वॉल्व की स्थिति जांचते हैं। एंजियोग्राफी के लिए कैथेटर को मरीज के हाथ या पैर की रक्त नलिका में डालकर एक्सरे मशीन से हार्ट की कार्यक्षमता का पता लगाते हैं।
...तो सर्जरी ही विकल्प
जब धमनियों में ब्लॉकेज होता है तो इंस्टंट डालने की जरूरत पड़ती है। ब्लॉकेज कई जगह होने पर बाइपास सर्जरी की जाती है।

एक्सपर्ट : डॉ. हेमंत चतुर्वेदी, कॉर्डियोलॉजिस्ट, जयपुर



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Heart Health Tips: इन तीन बातों का ध्यान रखेंगे तो नहीं आएगा हार्ट अटैक

दिल की सेहत को सही रखने के लिए स्वस्थ जीवनशैली व खानपान बहुत जरूरी है। जीवन में तनाव की बजाय हंसते मुस्कराते रहेंगे तो हार्ट अटैक का खतरा भी कम हो जाएगा।

संतुलित थाली : दिन भर खाने में 150-200 ग्रा. हरी सब्जी, 150-200 ग्रा. फ्रूट्स व 150-200 ग्रा. सलाद, 150-200 ग्रा. अनाज होना चाहिए। (औसत मानक)
भरपूर नींद जरूरी : रात को छह घंटे से कम सोने वाले लोगों को हार्ट स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है। 7-8 घंटे की नींद लें। कार्यक्षमता भी अच्छी रहेगी।
कोलेस्ट्रॉल ऐसे घटाएं: हाई फाइबर युक्त चीजें जैसे चोकर, सोयाबीन मिले आटे की रोटी, दलिया, छिलके वाली मूंग दाल, अंकुरित गेहूं, फल-सब्जियां और लहसुन, अदरक नियमित लें।
ऐसे जांचें हार्ट की सेहत : छह मिनट में 500 मीटर पैदल चलें। इस दौरान सांस नहीं फूल रही या कोई और दिक्कत नहीं हो रही है तो जांच की जरूरत नहीं है।
दिल की सेहत के बारे में रिसर्च
ऑस्ट्रेलिया की बेकर हार्ट एंड डायबिटीज इंस्टीट्यूट की रिसर्च के अनुसार विटामिन ई हार्ट अटैक से मांसपेसियों में होने वाले नुकसान से बचा सकता है। इसमें एंटी-ऑक्सिडेंट व एंटी-इनफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह हार्ट की मांसपेशियों के लिए फायदेमंद है। एंटी-ऑक्सिडेंट व एंटी-इनफ्लेमेटरी गुणों की वजह से यह हार्ट की मांसपेशियों के लिए फायदेमंद है। चूहों पर किए गए शोध के दौरान विटामिन ई (अल्फा टोकोफीरोल) दिया गया। इसके बाद उनके हार्ट पर असर देखा गया। विटमिन ई देने के बाद उनके खराब हो चुके हार्ट टिश्यू में सुधार पाया गया। साथ ही चूहों के हृदय की कार्य गतिविधि भी बढ़ गई।

एक्सपर्ट : डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा, आयुर्वेद विशेषज्ञ, एसआर आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर



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Health Tips: स्वाद नहीं, पोषण युक्त इन चीजों के खाने से हार्ट स्वस्थ रहेगा

चटपटे, तला-भुना खाने की आदत हार्ट के लिए भारी पड़ती है। इसमें ट्रांस फैट, बैड कोलेस्ट्रॉल कई गुना ज्यादा होता है। इन चीजों को खाने की आदत से हार्ट को फिट रख सकते हैं।
अलसी : अलसी के बीज कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार हंै। डाइट में एक छोटा चम्मच अलसी के बीज को शामिल कर सकते हैं। पिसे बीज का भी प्रयोग कर सकते हैं।
धनिया : धनिया की बीजों के पाउडर को एक कप पानी में उबालकर दिन में दो बार पीएं। यह कोलेस्ट्रॉल घटाने में मददगार है।
प्याज : High Cholestrol में लाल प्याज फायदेमंद है। एक चम्मच प्याज के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर इसका प्रयोग कर सकते हैं।
आंवला : एक चम्मच सूखे आंवला के पाउडर को एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर सुबह-सुबह पीने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है।
सेब का सिरका : सेब का सिरका कोलेस्ट्रॉल व ट्राइग्लिसराइड के लेवल को कम करता है।
संतरा : हाई कोलेस्ट्रॉल को घटाने में मददगार है।इसे नियमित तीन-चार संतरे खा सकते हैं।
नारियल तेल : नारियल के तेल का १-२ चम्मच प्रयोग कर सकते हैं। प्रोसेस्ड नारियल तेल से बचें।
अखरोट : विटामिन ई युक्त अखरोट ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर होता है। बैड कॉलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को कम करता है।
बादाम : बादाम में पॉली सैचुरेटेड, मोनो अनसैचुरेटेड फैट होते हैं। बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर होता है।
पिस्ता : प्रोटीन, विटामिन सी, फाइबर, पोटैशियम, आयरन, कैल्शियम व जरूरी फैटी एसिड से युक्त होता है।
अंकुरित दालें : अंकुरित राजमा, चना, मूंग, सोयाबीन, उड़द का प्रयोग करें। फाइबर वसा को घटाने में मददगार है।
डार्क चॉकलेट : डार्क चॉकलेट में एंटी-ऑक्सीडेंट्स से रक्त नलिकाएं मजबूत बनती हैं। इसका सेवन करने से भी कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है।
रेड वाइन : यह अंगूर से बनाई जाती है। एचडीएल व एंटी ऑक्सीडेंट्स ब्लॉकेज को घटाने में मददगार हैं। इसकी बजाय अंगूर भी खा सकते हैं।
लहसुन : लहसुन का नियमित सेवन करके भी बैड कोलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है।
चोकर वाली रोटी : बिना चोकर अलग किए गए आटे से बनाई गईं रोटी से भी आप अपना कोलेस्ट्रॉल कम कर सकते हैं।
सोयाबीन : सोयाबीन से बनी चीजें जैसे सोया मिल्क, सोया दही, सोया टोफू, सोया चंक्स आदि चीजों को अपने खाने में शामिल करें। इससे आपका कोलेस्ट्रॉल कम होगा।
सूर्यमुखी : सूर्यमुखी (सूरजमुखी) के तेल और बीज में अनसैचुरेटेड पॉली फैटी एसिड पाया जाता है जो कि कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में काफी लाभकारी है।
डेयरी उत्पाद : दूध, दही, छांछ आदि को अपनी डायट में शामिल करें। फैट-फ्री डेयरी प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करें।
लाल मांस : लाल मांस में पॉलीसैचुरेटेड फैटी ऐसिड पाया जाता है, जो कि हानिकारक कोलेस्ट्रोल के निर्माण को रोकता है।
ग्रीन टी : ये कोलेस्ट्रॉल को कम करने में काफी सहायक होती है।

- डॉ. हेमंत चतुर्वेदी, कॉर्डियोलॉजिस्ट, जयपुर



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सीपीआर देकर बचा सकते हैं दूसरों की जान, जानें इसके बारे में

दुर्घटना में बेहोश व्यक्ति को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी- रेसूसिटेशन) से होश में ला सकते हैं। अगर किसी को ऐसे मरीज दिखाता है तो सबसे पहले 108 नंबर पर फोनकर एम्बुलेंस को सूचना देनी चाहिए ताकि जल्द मदद मिल सके। इसके साथ ही मरीज की सुरक्षा का भी ध्यान देना चाहिए। अगर मरीज सड़क के किनारे या सकरी जगह पर है तो उसको किनारे या खुली जगह पर लनाना चाहिए। इसके बाद सीपीआर देना शुरू करना चाहिए।

पहले जांचें कैरॉटिक पल्स -
मरीज को मदद देने से पहले उसकी कैरॉटिड पल्स (गले की नब्ज कंठ के दोनों तरफ होती) जांचें। तीन अंगुलियों से धड़कन टटोलते हैं। इससे पता चल जाएगा कि मरीज की सांस कैसे चल रही है। इसके बाद से सीने के बीच की हड्डी (स्टर्नम) जहां खत्म होती है वहां पर एक मिनट में 100 से 120 कंप्रेशन देेते हैं। तीस कंप्रेशन के बाद पीडि़त को ओपन एयर-वे की ओर ले जाते हैं। उसके माथे पर सीधे हाथ की तीन अंगुलियां रखकर इंडेक्स फिंगर, थंब से नाक दबाएं। मुंह से कृत्रिम सांस देने के लिए उसके मुंह पर रूमाल लगाकर सामान्य तरीके से सांस दें। एक सेकंड के अंतराल पर पांच बार करें।

किन्हें दे सकते हैं सीपीआर -
ऐसे मरीज को किसी दुर्घटना में घायल होकर सड़क के किनारे पड़ा हो या फिर आग या धुएं की चपेट में आकार बेहोश हो गया है। जिनको अचानक से झटका आया हो और वह बेहोश हो गया है। पानी में डूब रहे किसी व्यक्ति भी देने की जरूरत पड़ती है। लेकिन इसका ध्यान रखें कि आप डॉक्टर नहीं हैं।



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व्यस्त जीवन में भी स्वस्थ रहने के लिए 10 बातों का रखें ध्यान

1-अगर ऑफिस या बिजनेस सेंटर पास है तो गाड़ी का इस्तेमाल करने की बजाय पैदल ही आए-जाएं।
2-ऑफिस में लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। रोजाना 3 मिनट सीढ़ियों चढने से हृदय स्वस्थ रहता है।
3-ऑफिस में 1-2 घंटे के बाद 5 मिनट का ब्रेक लें। थोड़ी वॉक करें। हल्के फुल्के योग-एक्सरसाइज कर सकते हैं।
4 -बाहर का भोजन खाने की जगह घर से टिफिन ले जाएं। ऑफिस टेबल पर नहीं, सहकर्मियों संग कैंटीन में लंच करें।
5 -डेली प्लान बनाएं। इससे काम आसान होगा और स्टे्रस से बचाव होगा।एक दिन ऑफ लेकर रेस्ट करें।
6-रोजाना 30 मिनट हॉबी के लिए दें। इसमें आप चाहें तो किताबें पढ़ें, म्यूजिक सुने या फिर दोस्तों के साथ बातें करें।
7 -रात में गैजेट्स का इस्तेमाल कम करें। इससे आंखों पर स्ट्रेस पड़ता है और आंखों का आईबॉल फैलता है। नींद देरी से आती है।
8- इम्युनिटी बढ़ाने के लिए सूखे मेवे खाएं। इम्युनिटी अच्छी होने से कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है।
9 -लोगों से मिलना-जुलना जारी रखें। इससे आपकी न केवल याद्दाश्त अच्छी होती है बल्कि तनाव भी दूर होता है।
10- हर प्रकार के नशे से दूर रहें। नशे से कुछ देर के लिए आराम भले ही मिलता है लेकिन इससे नुकसान होता है।



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World Heart Day: बीमार नहीं, ऐसे बनें Healthy Heart के हीरो

High BP से बे्रन स्ट्रोक का खतरा 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है क्योंकि लंबे समय तक बढ़ते दबाव के कारण धमनियां सिकुड़ जाती हैं। इससे हृदय को ब्लड पंप करने में काफी परेशानी होती है। खानपान व जीवनशैली में बदलाव कर नियंत्रित किया जा सकता है।

सेहत के 3 सूत्र
नो करी ( No Curry ) : ग्रेवी वाले फूड न लें। इसमें क्रीम, घी, बटर और शुगर ज्यादा होता है। ऐसे भोजन का असर हार्ट की धमनियों पर होता है।

नो वरी ( No Worry ): ज्यादा तनाव और चिंता से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) बढ़ता है। इससे नसों में संकुचन से आर्टरीज ब्लॉक हो सकती हैं। हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है।

नो हरी ( No Hurry ): काम में हड़बड़ी को हरी सिकनेस कहते हैं। काम जल्द न होने पर गुस्सा भी आता है। इससे रक्त प्रवाह तेज हो जाता है। इससे हृदय की शिराओं के फटने का खतरा रहता है।

बीमारियों से बचने के लिए ये तीन बदलाव आज से ही करें

खानपान- (Eating Habit)
कैसा हो खानपान : ज्यादा पका व तला-भुना खाना, जंकफूड, सॉफ्ट ड्रिंक पीने से बचें। दो-तीन चम्मच घी-तेल, मक्खन (10-15 मिली.) चम्मच ले सकते हैं। खाने में 50 प्रतिशत सब्जियां, फ्रूट्स होने चाहिए। सात रंग के फल, सब्जियों का आहार, सलाद खाएं। हाई फाइबर वाली चीजें लें।
सावधानी : एक ही तेल का प्रयोग न करें। ऑलिव व राइस ब्रान ऑयल हार्ट के लिए अच्छा है। चावल (सफेद), चीनी, मैदा न खाएं। एक बार प्रयोग हुए ऑयल को दोबारा प्रयोग न करें।
जीवन शैली (Lifestyle)
ऐसी हो जीवन शैली : रात में दस बजे तक सो जाएं। सुबह सूर्योदय से पहले उठें। उठने के 2-3 घंटे में ब्रेकफास्ट, दोपहर में 1-2 बजे के बीच लंच व रात में आठ बजे तक डिनर करें। सोने से आधे घंटे पहले नियमित एक गिलास लो फैट (3 प्रतिशत) मिल्क पीएंं।
यह भी जरूरी: तीन मुख्य आहार के लेने का समय तय होना चाहिए। तय समय खाने से आहार शरीर को लगता है। लंच से एक घंटे पहले एक प्लेट सलाद व तीन घंटे बाद दो मौसमी फल खाना चाहिए।
योग व्यायाम (Yoga-Exercise )
ऐसे करें योग-व्यायाम : रोजाना 30 मिनट कॉर्डियो एक्सरसाइज जैसे ब्रिस्क वॉक, जॉङ्क्षगग, साइक्लिंग, स्वीमिंग व डांस करें। एक मिनट में 45-50 कदम, ब्रिस्क वॉक में 75-80 कदम और जॉगिंग में 150-160 कदम चलें। इससे पहले 15-30 मिनट तक योग-प्राणायाम करें।
ये भी ध्यान रखें : यदि किसी तरह की समस्या है तो एक्सरसाइज शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें। योगासन व प्राणायम बिना विशेषज्ञ के निर्देशन में करें। इसका पूरा फायदा मिलेगा।

एक्सपर्ट पैनल : डॉ. एम. वली, वरिष्ठ फिजिशियन, सर गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली



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हृदय को मजबूत करने में मददगार देसी तरीके

हेल्दी हार्ट के लिए एक चम्मच अर्जुन की छाल के पाउडर को एक कप पानी में उबालें। इसको फिर एक कप दूध में पकाकर सुबह पीएं। इससे हार्ट मजबूत और कोलेस्ट्रॉल कम होता है। हृदय रोगों से हाथ पैरों में सूजन होने पर गोखुरू का पाउडर दूध में ले सकते हैं। पुनर्नवा का पाउडर या इसकी पत्तियों की सब्जी बनाकर खाएं। 1-2 चम्मच रस पीना भी फायदेमंद है।
बीपी के लिए - उच्च रक्तचाप की समस्या है तो 500 मिलीग्राम से एक ग्राम सर्पगंधा का चूर्ण गुनगुने दूध के साथ लेना चाहिए। सर्पगंधा से बनी औषधि लेने से भी लाभ मिलता है।
तनावमुक्त - इसके लिए ब्राह्मी, अश्वगंधा या जटामासी पाउडर की आधा चम्मच दूध के साथ ले सकते हैं। तनाव कम होने से हार्ट डिजीज से बचाव होता है।
कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल- नियमित 4-5 लहसुन की कलियां खाने से कोलेस्ट्रॉल घटता है। इसको चटनी, दाल में खा सकते हैं। दाल या सब्जी में तडक़ा लगाने से भी फायदा होगा। कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह पर ही लें।



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जानिए संतुलित खानपान और सुबह गर्म पानी पीने के फायदे

सुबह उठने के बाद सबसे पहले एक से दो गिलास गुनगुना पानी पीएं। रिफ्रेश होकर भीगे बादाम और अखरोट खाएं। सुबह उठने के 2-3 घंटे के अंदर कम वसा युक्त दूध के साथ उपमा, दलिया, इडली ब्रेकफास्ट लें। दोपहर से पहले मौसमी फू्रट, नारियल पानी लें।

हर 2 माह में खाद्य तेल बदलें। लंच में सलाद, चपाती, दही, 2 कटोरी सब्जी, अंकुरित बीन्स व डिनर में वेजिटेबल सूप, चपाती ले सकते हैं। करी पत्ता, लहसुन, अदरक, राई, एवोकैडो, नट व चिया सीड हृदय के लिए सेहतमंद माने जाते हैं।

आयुर्वेद में आहार : चिकनाई युक्त व पचने में भारी से परहेज करें। सुबह-शाम अर्जुन की छाल का काढ़ा पीएं। नियमित शहद, लौकी का जूस, आंवला, कच्चा लहसुन, अश्वगंधा, गुग्गल, दूध के साथ अश्वगंधा चूर्ण या दूध में लहसुन उबालकर पीने से हृदय संबंधी तकलीफ में आराम मिल सकता है।

लाफिंग थैरेपी से हार्ट मजबूत : इससे हृदय का व्यायाम होता है। एंडोर्फिन रसायन निकलने से हृदय मजबूत बनता है। रात में लाफिंग थैरेपी से शुगर लेवल में भी फायदा मिल सकता है।



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नेचुरल हार्ट बाइपास का काम करती है एक्सारइज

अगर किसी व्यक्ति के खून की धमनियों में ब्लॉकेज हो गया है और आगे अंगों को ब्लड सप्लाई नहीं हो रही है तो इसमें नियमित एक्सरसाइज करने से लाभ होता है। वर्कआउट इसमें नेचुरल बाइपास की तरह काम करता है। व्यायाम करने से शरीर में छोटी-छोटी नलियां स्वत: ही बनने लगती हैं जिन्हें कोलेट्रल्स कहते हैं। इन नलियों के रास्ते शरीर के अंगों को रक्त की पूर्ति होने लगती है और मरीज में हृदयाघात की आशंका कम होती है। एक्सरसाइज रक्तसंचार प्रक्रिया को बेहतर करती है। ब्लड फ्लो सही होने शरीर के महत्वपूर्ण अंगों का फंग्सन सही हो जाता है।
मिडिल ऐज में व्यायाम से पहले सलाह जरूर लें
युवावस्था में हर एक्सरसाइज का लाभ मिलता है लेकिन अगर कोई मिडिल ऐज (40 पार) में एक्सरसाइज शुरू करना चाहता है तो पहले एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए। इस उम्र में शरीर के अंगों की स्थिति के अनुसार व्यायाम करना चाहिए। कम या ज्यादा व्यायाम करने से अंगों को लाभ नहीं मिलता है। व्यायाम सही तरीके से करना चाहिए।



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हृदय रोग में कठिन योग नहीं, हल्के आसन करने चाहिए

मार्जरी आसन
इस आसन से मेरूदंड और मांसपेशियां में लचीलापन आता है। शरीर का तंत्रिका तंत्र नियंत्रित रहता है। पेट और सीने में खून का संचार अच्छा होता है और हृदय पर दबाव कम पड़ता है। यह प्रक्रिया एक सिटिंग में 10 बार कर सकते हैं। जिनको रीढ़ की हड्डी में दर्द, टीबी व ट्यूमर की समस्या है वे न करें।
भ्रामरी
इस प्राणायाम से न केवल शरीर बल्कि मन भी स्वस्थ रहता है। मानसिक तनाव कम होता है। हाई बीपी और हृदय रोगों से बचाव होता है। एक सिटिंग में तीन बार दोहरा सकते हैं। मिर्गी और ब्रेन ट्यूमर के रोगी इसे ना करें।
अनुलोम-विलोम
यह एकमात्र प्राणायाम है जिसेे कोई भी कर सकता है। इससे शरीर के अनुकंपी और परानुकंपी तंत्रिका तंत्र संतुलित होते हैं। जिससे हृदय की धडकऩ सही रहती है। इसको एक सिटिंग में 5-10 मिनट की अवधि तक कर सकते हैं।
सेतुबंधासन
यह आसन सीने की क्षमता को बढ़ाता है जिससे खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। हृदय का कार्य ठीक रहता है। इस आसन को एक मर्तबा में तीन-तीन बार कर सकते हैं। इसमें 10 सेकंड के लिए शरीर को एक ही स्थिति में रखते हैं। गर्भवती महिलाएं और हर्निया के रोगी इसे करने से बचें।
पवनमुक्तासन
इसे नियमित करने से पाचन ठीक रहता है जिससे कोलेस्ट्रॉल का जमाव नहीं होता है। हार्ट डिजीज का खतरा घटता है। इसे एक सिटिंग में तीन बार करें। इसमें बॉडी को 10 सेकंड तक रोककर रखें। स्लिप ***** के रोगी व गर्भवती महिलाएं न करें।



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Navratri Special: नवरात्री में ऐसे खाेले व्रत, बनी रहेगी सेहत

Navratri Special In Hindi: यदि आप भी नवरात्र के दौरान उपवास रखते हैं तो सेहत से जुड़ी कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है। क्योंकि नौ दिन के व्रत के दौरान लापरवाही बरतने से सेहत बिगड़ भी सकती है। जैसे पाचन गड़बड़ाने के साथ अनचाहा वजन बढ़ता है या कई बार कमजोरी के कारण चक्कर आने, बेहोशी छाने और बीपी घटने की दिक्कत भी हो सकती है। इस दौरान यदि सही खानपान के साथ कुछ नियम अपनाए जाएं ( Navratri Fasting Tips ) तो शरीर से विषैले तत्त्व बाहर निकलते हैं। ज्यादातर विशेषज्ञ उपवास में ऐसी चीजें खाने ( Navratri Fasting Diet Plan ) की सलाह देते हैं जो ग्लूटेन फ्री होने के साथ ही फाइबर में अधिक और फैट में कम होते हैं। अाइए जानते हैं नवरात्र उपवास के दाैरा कैसी हाे डाइट ( Navratri Diet Plan ) :-

व्रत करने से शरीर में बनी रहती ऊर्जा ( Navratri Healthy vrat Food )
कभी-कभी भूखे रहना या उपवास करना हमारे शरीर के लिए फायदेमंद भी होता है। इस दौरान अन्न आदि न खाने से हमारे पाचन तंत्र को आराम मिलता है। शरीर में ऊर्जा बनी रहती है जिसका इस्तेमाल हम नियमित खाते रहने से नहीं कर पाते हैं। व्रत के दौरान संतुलित खाना खाने से भी हमारी सेहत अच्छी रहती है। इस दौरान जो चीजें हम बाकी दिनों में नहीं खा पाते, उन्हें भी खाया जाता है। जैसे साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा आदि। इनसे मिलने वाले पोषक तत्त्व पेट के साथ खासतौर पर दिमाग को सक्रिय बनाए रखते हैं।

बढ़ती कैलोरी ( Weight loss and Gain during Navratri fasting )
सामान्यत: हर व्यक्ति को 1300 - 1400 कैलोरी प्रतिदिन चाहिए होती है। ऐसे में कुछ लोग बाहर या घर में बनने वाले नवरात्र स्पेशल फूड को नौ दिन लगातार खाते हैं। जिनमें हाई कैलोरी होती है। जैसे आलू के चिप्स, कुट्टू के आटे की पूड़ियां, साबूदाने के पकौड़े या वड़ा, तले हुए साबूदाने आदि। तेल में तले होने के कारण कैलोरी दोगुनी मात्रा में शरीर में पहुंचकर वजन बढ़ाती हैं। वहीं जो लोग पूरा दिन कुछ भी न खाकर उपवास करते हैं उनमें ब्लड शुगर का स्तर कम होने से हाइपोग्लाइसीमिया, बीपी कम और डिहाइड्रेशन ( Problem Of Fasting ) हो सकता है। इसलिए दिनभर कुछ न कुछ खाते रहें।


ऐसा हो व्रत डाइट चार्ट ( Navratri Fasting Diet chart )
सुबह 8 - 9 बजे के बीच दूध के साथ फल खाएं। 11 बजे के करीब लस्सी, छाछ, नारियल पानी ले सकते हैं। ये ज्यादा मीठे न हों। सामान्य कैलोरी वाला भोजन लें। 4-5 बजे दूध, चाय या जूस पीएं। रात को दूध संग फल ले सकते हैं।

व्रत के दाैरान इन बाताें का रखें ध्यान ( Right Way To Navratri Fasting )

दिनभर भूखा रहकर जो लोग रात को व्रत खोलते हैं वे उस समय सामान्य दिनों की तुलना में अधिक कैलोरी व कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन कर लेते हैं। साथ ही पूरे दिन की थकान की सोच के साथ वे खाते ही सो जाते हैं। जिससे वसा को पचने के लिए समय नहीं मिलता। अपच व एसिड रिफलक्स हो सकता है।

Navratri vrat 2019: Dos and Donts During Navratri Fasting
- मधुमेह, ब्लड प्रेशर, हृदय रोगी, अस्थमा, एनीमिक या प्रेग्नेंट महिलाएं डॉक्टरी सलाह से व्रत करें।
- उपवास के दौरान पानी की कमी न होने दें। ऐसे में कैल्शियम या इससे संबंधित पोषक तत्त्व जमा होने लगते हैं। इससे गुर्दे में पथरी की समस्या हो सकती है।

Food To Avoid In Navratri Fast:
- सेंधा नमक और चीनी की मात्रा सीमित रखें। साथ ही तली-भुनी चीजें कम से कम खाएं।
- ज्यादा चाय, कॉफी या अधिक मीठी चीजें खासतौर पर मिठाइयों से बचें।

Navratri Fasting Tips And Diet
- नींबू पानी, अनानास जूस, नारियल पानी, विटामिन-ए युक्त फल खाएं।



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हैल्दी हार्ट के लिए जरूरी है मोटिवेशन

हृदय शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर के दूसरे हिस्सों में ब्लड को पहुंचाने वाली धमनियों में खून पंप करता है। इसमें खराबी होने पर हमारी जान पर बन आती है। एक्सपर्ट की मानें तो हार्ट डिजीज होने के कई कारण हैं लेकिन महत्वपूर्ण कारणों में शरीर को आराम न देना, तनावपूर्ण जीवन, असंतुलित खानपान, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधि न करना है। इन बातों का ध्यान रखा जाए तो हृदय रोगों की आशंका 70-80 फीसदी तक कम हो सकती है। इसलिए रोजाना एक-डेढ़ घंटे अपने लिए जरूर निकालें। हैल्दी हार्ट के लिए खुद को मोटिवेट करें। इसके लिए जो भी अच्छी आदतें हैं उन्हें नियमित करूंगा।

हार्ट डिजीज से शरीर पर दुष्प्रभाव
हार्ट बीट यानी दिल की धड़कन अनियंत्रित होने से शरीर की क्षमता कमजोर होने लगती है। मरीज के चलने की क्षमता, शरीर की ऊर्जा और शारीरिक संतुलन पर भी असर पडऩे लगता है। अधिक उम्र के मरीजों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक की भी आशंका बढ़ जाती है। वहीं, हृदय रोगों के कारण दिमाग और किडनी जैसे प्रमुख अंगों की कार्यप्रणाली खराब होने लगती है। हार्ट की समस्या होने पर इसका असर जबड़े, हाथों और गले पर भी पड़ता है। साथ ही शरीर के अंगों को ब्लड सप्लाई सही नहीं होने से उनका फंग्सन सही नहीं रहता है। सेल्स डैमेज होने लगते हैं।

आइसोमेट्रिक नहीं, ऐरोबिक्स करें
आमतौर पर दो तरह की एक्सरसाइज की जाती हैं, ऐरोबिक्स और आइसोमेट्रिक। ऐरोबिक्स में दौडऩे व उछलकूद करने के अलावा वॉक, स्टे्रचिंग आदि शामिल हैं जबकि आइसोमेट्रिक में वजन उठाना, बॉडी बिल्डिंग एक्टिविटी होती हंै। थोड़ी कठिन एक्सरसाइज होने के कारण हृदय रोगी को यह नहीं करनी चाहिए। हार्ट डिजीज में ऐरोबिक्स उपयोगी होती है। करीब 45 मिनट की ऐरोबिक्स सप्ताह में 4-5 दिन नियमित करनी चाहिए।



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ये पांच आधुनिक तकनीक बदल रही हैं हृदय रोगियों की जिंदगी

इलाज की नई तकनीक से मरीजों को अधिक फायदा हो रहा है। आंकड़ों की बात करें तो अकेले भारत में ही हर साल एक लाख से अधिक हार्ट सर्जरी होती हैं। हार्ट से जुड़ी नई तकनीकों से इलाज की राह तेजी से आसान हुई है। तकलीफ में राहत के साथ पैसा और समय भी बच रहा है। इलाज की अवधि भी काफी कम हुई है। अधिक से अधिक लोगों की जिंदगी बचाने वाली इन नई तकनीकों के बारे में जानते हैं-

तावी -
हृदय के वॉल्व सिकुड़ने, लीक करने के कारण वॉल्व बदलना ही विकल्प था। अब तावी (ट्रांसकैथेटर ऑरटिक वॉल्व इम्प्लान्टेशन) से बिना चीर-फाड़ व बेहोशी के पैर की नस के रास्ते एंजियोप्लास्टी की तरह हार्ट के वॉल्व को बदलते हैं। अधिक उम्र के मरीजों में भी कारगर है।

सीआरटी-डी -
जिन मरीजों के हृदय की पम्पिंग क्षमता स्थाई रूप से कमजोर हो चुकी है। उनके लिए यह बेहतर विकल्प है। ऐसे मरीजों को कार्डियक रीसिंक्रोनाइजेशन थैरेपी डिफिब्रिलेटजिन कराते हैं। यह हार्ट पम्पिंग क्षमता बढ़ाने वाला पेशमेकर है।

लीड लेस पेसमेकर-
यह कैप्सूल के आकार का होता है। यह सामान्य पेसमेकर से 93% छोटा है। टाइटेनियम का बना होने से संक्रमण की आंशका कम रहती है। जिस तरह एंजियोप्लास्टी में धमनी के माध्यम से स्टेंट डालते हैं उसी तरह यह पेसमेकर भी लगाया जाता है।

पीडियाट्रिक डिवाइस -
हृदय में छेद का इलाज अब बिना ऑपरेशन के संभव है। मरीज के पैरों की नसों से पीडियाट्रिक डिवाइस हृदय तक पहुंचाते हैं। जालियों के बीच छोटे-छोटे बॉल डालकर हृदय के छेद बंद करते हैं। ये प्रकिया बिना चीर-फाड़ के थोड़ी देर में हो जाती है। अगले दिन मरीज की छुट्टी हो जाती है।

रोटाब्लेशन -
पहले जिन मरीजों की हृदय धमनियों में कैल्शियम अधिक होता था। उन्हें एंजियोप्लास्टी से स्टेंट लगाने में परेशानी होती थी। ऐसे मरीजों की बायपास सर्जरी होती थी। अब रोटाब्लेशन तकनीक सेड्रिलिंग कर कैल्शियम व वसा कुछ देर में ही बाहर निकाल देते हैं।



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Navratri Special: व्रत में ये चीजें खाएंगे तो बीमारियां भागेंगी दूर

एंटीऑक्सीडेंट युक्त नारियल पानी से बीपी नियंत्रित और अन्य बीमारियों में फायदा मिलता है। विटामिन्स, मिनरल्स, ग्लूकोज से भरपूर बनाना शेक इलेक्ट्रोलाइट संतुलन, बीपी नियंत्रण और हड्डियों के लिए फायदेमंद है। चुकंदर, सेब, पपीता, खीरा, अनार से दिनभर तारोताजा रहेंगे। Navratri Fast करते समय उचित खानपान रखेंगे तो शरीर को भी इसका पूरा फायदा होगा। Deep Fried, तेज मसालेदार लेने से पित्त बढ़ सकता है। बुखार व अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए कोशिश संतुलित आहार लेने की करें।
तला-भुना, तेज मसालेदार न लें
व्रत के दौरान लोग संतुलित खानपान पर ध्यान नहीं देते हैं। इससे शरीर में अग्नि मंद हो जाती है। व्रत का उद्देश्य पित्त कम कर हल्का व सुपाच्य खाकर सेहतमंद रहना है। व्रत में उचित खानपान से सेहत को मजबूत कर सकते हैं। Deep Fried, तेज मसालेदार लेने से शरीर में पित्त की वृद्धि हो सकती है। बुखार व अन्य समस्याएं हो सकती हैं,जरूरी है कि संतुलित आहार लें। भोजन में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करें जिनमें फाइबर अधिक और वसा की मात्रा कम हो। भोजन हल्का व सुपाच्य हो।
डिहाइड्रेशन से बचें
डिहाइड्रेशन से बचने के लिए एनर्जी युक्त तरल पदार्थ लेने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। खानपान का ध्यान न रखने से व्रत के बाद डिहाइड्रेशन, बदहजमी, सिरदर्द व चक्कर आने जैसी दिक्कत हो सकती है।
व्रत से पूर्व हल्का खाना
व्रत से एक दिन पहले हल्की डाइट लें। रात को खाने में फल, खिचड़ी, दलिया ले सकते हैं। बीमार हैं तो व्रत से पहले डॉक्टरी परामर्श ले सकते हैं। हर दो घंटे में तरल-पदार्थ लेते रहें। मधुमेह रोगी ज्यादा देर खाली पेट न रहें। चार-पांच चीजें एकसाथ खाने के बजाय दो-तीन घंटे के अंतराल में थोड़ा-थोड़ा खाएं।
बाजार से रेडीमेड पैक्ड फूड से बचें
बाजार में व्रत के लिए उपलब्ध केले व आलू के चिप्स, रेडीमेड आहार न लें। मात्रा से ज्यादा चीनी, तली-भुनी चीजें, पुड़ी न खाएं। पित्त बढ़ता है।
नमक का रखें ख्याल
व्रत में सामान्य नमक नहीं लेते हैं, सेंधा नमक लें। इसमें पोटैशियम की मात्रा ज्यादा व सोडियम की मात्रा कम होती है। किडनी की बीमारी में मात्रा से ज्यादा सेंधा नमक न लें। कुट्टू व सिंघाड़े का आटा शरीर के पाचन तंत्र को बढ़ाता और हाई बीपी में लाभदायक है। इसमें 70-75 प्रतिशत कार्ब व 20-25 प्रतिशत प्रोटीन होता है। व्रत में कुट्टू के इस्तेमाल से कमजोरी महसूस नहीं होती है। विटामिन-ई युक्त ड्राई फ्रूट्स लें।
एक्सपर्ट —डॉ. कृतिका जितेंद्र जोशी, आयुर्वेद विशेषज्ञ, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर



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world heart day: सीढ़ियां चढ़ते हुए सांस फूले तो हो सकता है हृदयाघात, जानें इसके बारे में

हृदयाघात - world heart day: world heart day 2019:

सीढ़ियां चढ़ते वक्त सांस फूलती है तो सावधान हो जाएं। रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज से हृदय तक रक्त नहीं पहुंचने से हृदयघात होता है। एक दम से सीने में तेज दर्द, सांस फूलने, पसीना आने पर तुरंत अस्पताल ले जाएं। गोल्डन आवर ट्रीटमेंट से 80% मरीज बच सकते हैं। डिस्प्रिन दें, ईसीजी कराएं। कुछ इंजेक्शन से भी आराम मिलता है।

साइलेंट अटैक -
हार्ट अटैक यानि दिल के दौरे के दौरान आमतौर पर लक्षण आधे घंटे तक रहते हैं। आराम करने या दवा खाने से राहत नहीं मिलती है। मामूली दर्द से गंभीर पीड़ा तक हो सकती है। कई लोगों में हार्ट अटैक के लक्षण नहीं दिखते हैं जिसे साइलेंट मायोकार्डियल इन्फेक्शन यानि एमआई कहते हैं। ये ज्यादातर डायबिटीज के मरीजों में होता है।

कार्डियक अरेस्ट -
ये हार्ट की ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय एकदम से काम करना बंद कर देता है। व्यक्ति बेहोश हो जाता है। तत्काल उपचार न मिलने पर कुछ मिनटों में जान भी जा सकती है। इसका कारण हृदय की धमनियों में पूरी तरह ब्लॉकेज आकर हार्टअटैक आना है। प्रारंभिक उपचार के लिए व्यक्ति के सीने में कंप्रेशन और मुंह के माध्यम से सांस दी जाती है।



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world heart day: दिल की अच्छी सेहत के लिए अपनी आदतें सुधारिए

world heart day: world heart day 2019: हृदय रोगों के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए 29 सितंबर को हर वर्ष विश्व हृदय रोग दिवस मनाया जाता है। हृदय औसतन 13 सेंमी. लंबा, 9 सेमी. चौड़ा और करीब तीन सौ ग्राम वजनी होता है। स्वस्थ व्यक्ति का दिल एक मिनट में 72-80 बार धड़कता है। 10-15 साल पहले बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी लेकिन खराब जीवनशैली और असंतुलित खानपान से अब युवा भी हृदय रोगी हो रहे हैं। अमरीका में हृदय रोगियों की औसत उम्र 55 और भारत में 40-45 साल है। खानपान, नियमित व्यायाम, योग और ध्यान से बचाव संभव है।

बच्चे -
गर्भावस्था के दौरान मां के शराब, पीने, धूम्रपान करने या वायरल इंफेक्शन से नवजात के हृदय में छेद की आशंका बढ़ती है। ऑपरेशन ही विकल्प है। डिवाइस पद्धति से हृदय के छेद को बंद किया जाता है। पहले इको कार्डियोग्राफी जांच से पता करते हैं कि किन छेदों को डिवाइस पद्धति से बंद किया जा सकता है।

युवा -
युवाओं में हाइपर टेंशन, हार्ट अटैक तेजी से बढ़ रहा है। खराब जीवनशैली, तनाव, भावनात्मक वेदना, वॉल्व में इंफेक्शन- सिकुड़ने या लीकेज से हृदयाघात की आशंका बढ़ती है। शराब, धूम्रपान से दूरी हृदय की तकलीफों से बचाती है।

बुजुर्ग -
बुजुर्गों में ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, कॉलेस्ट्राल नियंत्रित न रहने से हृदयघात की आशंका बढ़ती है। बचाव के लिए नियमित दिनचर्या, मॉर्निंग वॉक जरूरी है। समय-समय पर जांच कराते रहें। शक्कर व नमक का सेवन कम से कम करें।

महिलाएं -
महिलाओं में मेनोपॉज के बाद हार्मोन असंतुलन होता है। हॉर्मोन्स में परिवर्तन होता है। इससे हृदयघात के मामले बढ़ते हैं। शरीर में शुगर व बीपी बढ़ने की आशंका रहती है। वजन नियंत्रित रखें।

ये हैं 5 कारण -
1. मोटापा
2. व्यायाम की कमी
3. जंकफूड-फास्टफूड
4. अनियमित दिनचर्या
5. दबाव और तनाव

65% 18-35 वर्ष आयु के युवा हैं हाई ब्लड प्रेशर के मरीज।
50 % हार्ट अटैक का खतरा 50से कम आयु के लोगों में।
80% हार्ट अटैक के मरीजों को गोल्डन ऑवर ट्रीटमेंट से बचाना संभव।
30 मिनट नियमित योग-ध्यान, व्यायाम से हृदय संबंधी बीमारियों से बच सकते हैं
35-44 की उम्र में महिलाओं को हृदय रोग का ज्यादा खतरा।

एंजियोप्लास्टी -
एंजियोप्लास्टी में हृदय की धमनी के ब्लॉकेज को एक मेटल ट्यूब (स्टेंट) लगाकर खोलते हैं। इसमें बिना चीर-फाड़ व बेहोशी के हाथ या पैर की नस में सुई के जरिये हृदय की धमनी तक स्टेंट को पहुंचाकर कुछ मिनटों में ब्लॉकेज खोल देते हैं। ऐसे स्टेंट भी आ रहे हैं जो शरीर में घुल जाते हैं। इनकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अभी काम चल रहा है। वॉल्व भी एंजियोप्लाटी तकनीक से बिना ऑपेरशन बदले जाते हैं। यह एक जटिल प्रकिया है।

हार्ट ट्रांसप्लांट-
जिनका हृदय आंतरिक व बाह्य संरचना के बदलाव से खराब हो चुका है उनका हार्ट ट्रांसप्लांट करते हैं। लंबे समय तक ब्लॉकेज के बाद बायपास सर्जरी न कराने से या खराब वॉल्व को समय से न बदलवाने से दिक्कत होती है। डोनर हृदय, किडनी, कैंसर और सेप्सिस का मरीज है तो हृदय प्रत्यारोपण नहीं करते हैं। ब्रेन डेड व्यक्ति व मरीज का ब्लडगु्रप मैच कराकर ट्रांसप्लांट करते हैं। ट्रांसप्लांट के बाद भी लंबे समय तक दवाइयों लेनी होती हैं।

पेसमेकर -
पेसमेकर बैट्री चालित माचिस की डिब्बी से भी छोटा उपकरण है जो मरीज के सीने की चमड़ी के नीचे लगता है। इससे हृदयगति सामान्य हो जाती है। भारी काम करते समय जरूरत अनुसार हृदयगति तेज करता है। इसकी बैटरी 8-10 साल चलती है। छोटे ऑपरेशन से इसकी बैटरी बदली जाती है। सीने के जिस तरफ पेसमेकर लगता है उस हाथ को ज्यादा घुमाना नहीं चाहिए। जेब में मोबाइल भी न रखें। हर छह माह में पेसमेकर की जांच कराते रहें।



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World Heart Day: नमक ही नहीं ये चीजें भी करती है दिल काे बीमार

World Heart Day in Hindi: आप अगर लम्बे समय तक अपने दिल काे सेहतमंद ( Healthy Heart ) रखना चाहते हैं ताे हेल्दी डाइट पर जाेर दीजिए। क्याेंकि कुछ भी खाना आपके दिल की सेहत के लिए अच्छा नहीं हाेता है। खासकर जब आपकाे दिल की बीमारी हाे। आज हम आपकाे कुछ ऐसे फूडस के बारे में बताने जा रहे हैं जाे दिल की सेहत खराब कर सकते हैंं। सेहतमंद दिल के लिए जरूरी है कि आप जहां तक हाे इन फूडस से दूरी बना लें। आइए जानते दिल काे नुकसान पहुंचाने वाले इन फूडस ( Foods Bad For Heart ) के बार में

सैचुरेटेड फैट व साेडियम Foods To Avoid With Heart Disease
फास्ट फूड का शौक दिल के लिए ही नहीं बल्कि पूरे शरीर की सेहत के लिए खराब हाेता है। उच्च सैचुरेटेड फैट व साेडियम युक्त फास्ट फूड दिल की धमनियाें काे ब्लाक करते हैं। जिससे स्ट्राेक का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं इनका सेवन आपकाे मधुमेह, माेटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी राेगाें भी ग्रस्त कर सकता है। इसलिए स्वस्थ दिल और सेहत के लिए पिज्जा, बर्गर जैसे फास्ट फूड से दूरी बना लें।

चीनी Worst Food For your Heart
चीनी का ज्यादा सेवन मोटापा, सूजन, उच्च कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह के खतरे काे बढ़ाता है।ये सभी हृदय रोग के जोखिम कारक हैं। चीनी युक्त चीजाें का कम से कम सेवन आपके दिल की उम्र बढ़ाता है। कैंडी, कोल्ड ड्रिंक्स, डिब्बा बंद जूस, चीनी युक्त अनाज, कुकीज़ और पेस्ट्री जैसी चीजें अपने आहार से बाहर निकाल देना दिल के लिए अच्छा हैं।

ज्यादा तले-भुने खाने से रहे दूर Diet To Avoid With Heart Disease
कई अध्ययनों ने फ्राइड फूड्स काे दिल के लिए खतरा बताया है। फ्रेंच फ्राइज़, फ्राइड चिकन और फ्राइड स्नैक्स खाने से दिल की बीमारी का खतरा बढ़ता है। पारंपरिक फ्राइंग के तरीके ट्रांसफैट बनाते हैं, जाेकि खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने और अच्छे काे कम करने के लिए जाना जाता है। इसलिए दिल की मजबूती के लिए ज्यादा तले-भुने खाने से परहेज रखें।

डायट साेडा Worst Diet For your Heart
डायट साेडा में फैट और कैलारी नहीं हाेने के बावजूद भी यह माेटापे का खतरा बढ़ा सकता हैं। शोध बताते हैं कि डायट साेडा में पाए जाने वाले रसायन वास्तव में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बैक्टीरिया को बदल सकते हैं, जाे लाेगाें का वजन बढ़ाकर दिल के लिए खतरा पैदा कर सकता है।



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World Heart Day: दिल की बीमारी दूर रखने के लिए अपनाएं ये लाइफस्टाइल

World Heart Day In Hindi: विश्व हृदय दिवस हर साल 29 सितंबर ( World Heart Day 2019 ) को हृदय रोगों और उनकी रोकथाम के लिए जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। दिल की बीमारियां एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती हैं और जानलेवा हो सकती हैं। हृदय रोग को अवरुद्ध धमनियों या धमनियों में पट्टिका कहा जाता है जिससे दिल का दौरा पड़ सकता है, सीने में दर्द (एनजाइना) या स्ट्रोक पैदा करने वाला स्थायी नुकसान हो सकता है। बहुत सी आदतें हैं जो अकेले या एक साथ हृदय रोग और दिल के दौरे में योगदान करती हैं। उदाहरण के लिए, धूम्रपान, शारीरिक रूप से निष्क्रिय होना, अधिक वजन, खराब खाने की आदतें और बहुत अधिक शराब पीना। ये सभी कारण दिल के सेहत काे नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन आप चाहे ताे हेल्दी लाइफस्टाइल ( Healthy lifestyle For Healthy Heart ) अपनाकर अपने दिन काे सेहतमंद रख सकते हैं।

पोषक तत्वों से भरपूर हो डाइट ( Diet For Healthy Heart )
पोषक तत्वों से भरपूर हो डाइट खाने से कई तरह से दिल के राेगाें का खतरा कम हो जाता है। सेहतमंद डाइट रक्तचाप, रक्त कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में भी मददगार हाेती है।दिल की सेहत काे बनाए रखने के लिए अपनी डाइट में फल और सब्जियां, साबुत अनाज, अनसैचुरेटेड फैट, प्रोटीन (बीन्स, नट्स, मछली और पोल्ट्री से), और जड़ी-बूटियों व मसालों को शामिल करें।

Foods Bad For Heart:
प्रोसेस्ड फूड, नमक, तेजी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट (सफेद ब्रेड, सफेद चावल, आलू ), लाल मांस,सोडा या कुछ अन्य चीनी-मीठे पेय आदि से दूरी बनाकर रखें।

शराब का सेवन कम करें और धूम्रपान छोड़ दें ( Smoking Affects Heart Health )
तंबाकू का सेवन किसी के लिए भी जोखिम भरा है, विशेष रूप से शराब के शौकिनाें काे इससे ज्यादा नकुसान हाेता है। शराब पीने वाले अन्य धूम्रपान करने वालों की तुलना में दिल की बीमारी के खतरों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि ज्यादा शराब पीने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। इसलिए जरूरी है कि दिल की सेहत के लिए शराब और धूम्रपान से जितनी जल्दी दूरी बना ली जाए अच्छी है।

सक्रिय रहें ( Best Exercise For Heart Disease )
हमारा हृदय एक मांसपेशी है जिसे मजबूत और स्वस्थ रहने के लिए नियमित रूप से काम करने की आवश्यकता होती है। व्यायाम और अन्य प्रकार की शारीरिक गतिविधि जैसे चलना या तैरना मूड-बूस्टिंग रसायनों को जारी करने में मदद करता है जिसे एंडोर्फिन कहा जाता है। व्यायाम करने से न केवल तनाव दूर रहता है, बल्कि यह आपके रक्तचाप को कम करके, हृदय की मांसपेशियों को मजबूत और स्वस्थ बनाकर कर र्हट डिजजे से बचाता है।

तनाव कम करें और ठीक से सोएं ( Stress Affect Your Heart )
तनाव दिल ही नहीं बल्कि पूरी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। मानसिक आघात का अनुभव करने वाले लोगों की अक्सर दिल का दौरा पड़ने से माैत हाेती है।इसलिए जरूरी है कि तनाव काे दूर रखा जाए। अच्छी नींद तनाव से छुटकारा दिलाने में बेहद मददगार हाेती है। नींद दिमाग जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है।

दंत स्वच्छता बनाए रखें ( Oral Hygiene Affect Your Heart )
मसूड़ों की बीमारी दिल की बीमारी से जुड़ी होती है क्योंकि यह बैक्टीरिया से होती है जो रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकती है और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। यह रक्त के थक्के बनाने का काम भी करती है। जिसका असर आपके दिल की सेहत पर पड़ता है। इसलिए नियमित रूप से अपने दांताें की सफाई कर Oral Hygiene काे मेंटेन रखें।



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Rhinoplasty: राइनोप्लास्टी से ठीक हो सकती है टेढ़ी नाक

Rhinoplasty In Hindi: नाक के बीच में दो पतली हड्डियां होती हैं जो नाक को दो भागों में बांटती हैं। इससे नाक से सांस लेने की प्रक्रिया पूरी होती है। चोट, किसी रोग या जन्मजात विकृति के कारण जब यह हड्डी टेढ़ी हो जाती है तो सांस लेने में तकलीफ होने के साथ चेहरा भद्दा दिखता है। इस हड्डी को राइनोप्लास्टी टेक्नीक से ठीक करते हैं। जिन्हें यह समस्या है उन्हें समय रहते इलाज लेना चाहिए वर्ना सांस संबंधी दिक्कत हो सकती है।आइए जानते हैं इसके बारे में :-

ऐसे होती सर्जरी
नाक की हड्डी को ठीक करने के लिए सर्जरी करते हैं जिसमें गले में ट्यूब डालकर कृत्रिम सांस देकर प्रक्रिया पूरी करते हैं। सर्जरी के बाद नाक में विशेष जेल लगाते हैं। ऐसे में रोगी मुंह से सांस लेता है। एलर्जी, नाक में पॉलिप्स बनने से छींक आने के साथ पानी निकलता है। ऐसे में रोगी को एलर्जी के कारक से दूरी बनानी चाहिए।

बहरेपन का इलाज
बहरापन जन्मजात या जन्म के बाद भी हो सकता है। जन्म से बहरा होने के कई कारण हैं। प्रेग्नेंसी में बिना डॉक्टरी सलाह के दवाएं लेना, जिसका दुष्प्रभाव शिशु के दिमाग व सुनने की क्षमता पर पड़ता है। साथ ही इस दौरान शिशु को पोषक तत्त्वों की पूर्ति न होना। विशेषज्ञ सर्जरी या कॉक्लियर इंप्लांट कर सुनने की क्षमता वापस लाते हैं। माइक्रोस्कोपिक तरीके से कान का नया पर्दा भी बनाया जाता है।

मददगार जांचें
सुनाई देने की क्षमता ऑडियोमेट्री टैस्ट से जांचते हैं। जिन्हें बिल्कुल सुनाई नहीं देता या कम उम्र का शिशु है तो ऐसे रोगियों की ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिसपॉन्स ऑडियोमेट्री (बेरा टैस्ट) व ओटोएक्यूस्टिक एमिशन टैस्टिंग (ओएई) जांच करते हैं। इससे सुनने की क्षमता और हियरिंग लॉस का पता चलता है।

ध्यान रखें
गले में खराश व सर्दी-जुकाम लंबे समय से है तो इसे नजरअंदाज न करें क्योंकि इससे कान के पर्दे में छेद हो सकता है। हड्डी बढ़ने, कान में कुछ जाने या ट्यूमर बनने से भी कान के पर्दे में छेद होता है। कान की सफाई खुद से न करें और ईयरफोन के प्रयोग से बचें।



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Saturday, 28 September 2019

Salt Hazard: तंबाकू तरह नमक पर भी लगनी चाहिए स्वास्थ संबंधी चेतावनी - एक्सपर्ट

Salt Hazard In Hindi: आप खाने में ज्यादा नमक खाने के शाैकिन है ताे आपकाे सावधान हाे जाना चाहिए। क्याेंकि अधिक नमक का सेवन, अब कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बन गया है। क्लिनिकल हाइपरटेंशन पत्रिका में प्रकाशित एक नए शाेध के अनुसार, द वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग और प्रमुख स्वास्थ्य संगठनों ने सुपरमार्केट और रेस्तरांआें को नमक की डिब्बियाें salt shakers पर भी तंबाकू की तर्ज पर स्वास्थ्य चेतावनी लेबल लगाने के लिए चेताया है।

अनहेल्थी डाइट विश्व स्तर पर मौत का एक प्रमुख कारण
वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग के पूर्व अध्यक्ष व शाेध के मुख्य लेखक, डॉ नॉर्म कैंपबेल ने कहा कि हमें अाहार में नमक कम करने के लिए आैर अधिक कठाेर दृष्टिकोण की जरूरत है। अनहेल्थी डाइट विश्व स्तर पर मौत का एक प्रमुख कारण है, आैर अधिक नमक इसके जाेखिम काे बढ़ाता है।2017 में वैश्विक स्तर पर 3 मिलियन से अधिक मौतें होने का अनुमान है।"

सोडियम का सेवन 30% तक कम करने का लक्ष्य
उन्हाेंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कर्इ देशों के लिए 2025 तक सोडियम का सेवन 30% तक कम करने का लक्ष्य रखा है। सरकारें और खाद्य उद्योग प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में नमक को कम करने के लिए एक साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, उपभोक्ताआें में नमक के खतराें के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जल्द कार्रवाई की आवश्यकता है।

नमक खाने पर दें जाेर
कई देशों ने लोगों को, कम नमक खाने के लिए प्रोत्साहित करने वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को तलाशना शुरू कर दिया है। लेकिन अभी तक हमने किसकाे भी नमक संबंधी चेतावनी लेबल लगे हुए जरूरी कंटेनर का उपयाेग करते हुए नहीं देखा। जबकि नमक हमारे अधिकांश व्यंजनों का हिस्सा है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन रक्तचाप के स्तर में वृद्धि का कारण बनता है, जिससे आगे चलकर पूरे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ज्यादा नमक अकाल माैत का कारण
जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ में जनसंख्या नमक कटौती विश्व स्वास्थ्य संगठन सहयोग केंद्र, के निदेशक जैक्वी वेबस्टर ने टिप्पणी की है कि बहुत अधिक नमक खाने से लोगों के रक्तचाप में वृद्धि होती है जो स्ट्रोक या हृदय रोग से हाेने वाली अकाल मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है।

उन्हाेंने कहा कि नमक के पैकेज और डिस्पेंसर पर स्वास्थ्य चेतावनी, दुनिया भर के लोगों काे नमक के खतरों के बारे में बताने का एक सरल आैर सस्ता उपाय है।

नमक के पैकेज और डिस्पेंसर पर स्वास्थ्य चेतावनी ( Tobacco-style Health Warning On Salt Shakers )
रिजाल्व टू सेव लाइव्स के सीईओ डॉ टॉम फ्राइडेन ने कहा कि ज्यादातर लोग इस बात से अवगत नहीं हैं कि वे जितना नमक खा रहे हैं, वह रक्तचाप बढ़ा रहा है और उनके जीवन को छोटा कर रहा है। पैक किए गए खाद्य पदार्थों और मेनू पर चेतावनी लेबल लोगों को स्वस्थ विकल्प चुनने में मदद कर सकते हैं। नमक पैकेजिंग पर भी इस तरह का चेतावनी लेबल लगाना स्वस्थ विकल्प को आसान विकल्प बनाने का एक और तरीका है।



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Bone Health: बढ़ती उम्र में भी हड्डियां मजबूत रखते हैं ये नेचुरल तरीके

Bone Health TIps In Hindi: शरीर काे संतुलित व गतिमान रखने के लिए मजबूत हड्डियों का हाेना बहुत जरूरी। लेकिन अक्सर देखा जाता कि लाेग हड्डियों की सेहत ( Bone Health ) के प्रति गंभीर नहीं हाेते। बचपन से लेकर आपके जवान हाेने तक हड्डियों काे खनिज ( Minerals ) का पाेषण मिलता है। आैर 30 की उम्र आते - आते अापकी हड्डियां अपना पूरा विकास कर चुकी हाेती है।यदि इस समय तक आपकी हड्डियों का पूर्ण विकास नहीं हुआ हाे ताे यह आगे चलकर कमजाेर व आसानी से टूटने वाली हड्डियाें की समस्या पैदा कर सकता। लेकिन खुशी की बात ये है कि पाेषण युक्त डाइट व स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हड्डियों की कमजाेरी काे दूर किया जा सकता है। आइए जानते हैं इनके बारे में ( Natural Way To keep Your Bone Healthy) :

बहुत सारी सब्जियां खाएं ( Vegetables Are Good For Bones )
विटामिन सी का स्रोत हाेने से सब्जियां हड्डियों के विकास के लिए बहुत अच्छी हाेती हैं। विटामिन सी ( Vitamin C ) हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं के उत्पादन को उत्तेजित करता है। इसके अलावा, कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि विटामिन सी के एंटीऑक्सिडेंट प्रभाव हड्डियों की कोशिकाओं को नुकसान से बचा सकते हैं।सब्जियाें का सेवन अस्थि खनिज घनत्व ( Bone Minerals Density ) बाेन डेंसिटी काे बढ़ाता है।हरी और पीली सब्जियों का अधिक सेवन बचपन के दौरान हड्डियों के खनिज ( Bone minerals ) में वृद्धि और युवा अवस्था में अस्थि द्रव्यमान ( Bone Mass ) के रखरखाव का काम करता है।


स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और वेट-बेअरिंग एक्सरसाइज करें ( Exercise Can Build And Maintain Strong Bones )
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और वेट - बेअरिंग जैसी एक्सरसाइज हड्डियों को लम्बे समय तक मजबूत बनाने और बनाए रखने में मदद करती है। साथ ही नई हड्डी के गठन को बढ़ावा देती हैं।Strength Training and Weight-Bearing Exercises एक्सरसाइज युवाआें की तरह वृद्ध पुरुष व महिलाओं में अस्थि खनिज घनत्व, हड्डी की ताकत और हड्डी के आकार में वृद्धि देने के साथ-साथ हड्डी की सूजन में कमी लाती है।

Foods For Healthy Bones: Protein, Calcium, Vitamin D, Vitamion K

पर्याप्त प्रोटीन का सेवन करें ( Protein For Bone Health )
स्वस्थ हड्डियों के लिए प्रोटीन का सेवन जरूरी है। क्याेंकि करीब 50% हड्डी प्रोटीन से बनी होती है।विशेषज्ञाें अनुसार कम प्रोटीन के सेवन से कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है और यह हड्डियों के निर्माण और टूटने की दरों को भी प्रभावित कर सकता है।कर्इ शाेधाें में साबित हाे चुका है कि कम प्रोटीन के सेवन से हड्डियों को नुकसान होता है, जबकि उच्च प्रोटीन का सेवन उम्र बढ़ने और वजन घटाने के दौरान भी हड्डियों के स्वास्थ्य की रक्षा करने में मदद करता है।

दिनभर में हाई-कैल्शियम वाले फूड्स खाएं ( Calcium For Bones )
हड्डी के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम सबसे महत्वपूर्ण खनिज है।क्योंकि पुरानी हड्डी की कोशिकाएं लगातार टूटती रहती हैं आैर कैल्शियम के जरिए नर्इ काेशिकाआें का निर्माण किया जाता है। इसलिए हड्डी की संरचना और ताकत काे बनाए रखने के लिए कैल्शियम युक्त डाइट का सेवन राेज करना चाहिए। सप्लीमेंट के बजाय खाद्य पदार्थों से कैल्शियम प्राप्त करना भी सबसे अच्छा है।

विटामिन डी और विटामिन के की भरपूर मात्रा लें ( Vitamin D , Vitamin K Makes Bone Healthy )
मजबूत हड्डियों के निर्माण के लिए विटामिन डी और विटामिन के बेहद महत्वपूर्ण हैं। विटामिन डी आपके शरीर में कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है। अध्ययनों से पता चला है कि कम विटामिन डी के स्तर वाले बच्चों और वयस्कों में हड्डियों का घनत्व कम होता है। आप सूरज की धूप व फैटी फिश, लिवर और चीज़ जैसे खाद्य स्रोतों से पर्याप्त विटामिन डी प्राप्त कर सकते हैं।

विटामिन K2 अस्थि निर्माण में शामिल एक प्रोटीन ओस्टियोकॉलिन ( Osteocalcin ) को संशोधित करके हड्डियों की सेहत ठीक रखता है। ओस्टियोकॉलिन संशोधन हड्डियों में खनिजों को बाँधने के लिए व हड्डियों में कैल्शियम के नुकसान को रोकने में मदद करता है। Vitamin K2 के दो सबसे सामान्य रूप MK-4 और MK-7 हैं। एमके -4 यकृत, अंडे और मांस में कम मात्रा में मौजूद है। किण्वित खाद्य पदार्थ जैसे कि पनीर, सॉरेक्राट और एक सोयाबीन उत्पाद जिसे नट्टो कहा जाता है, में एमके -7 होता है।

बहुत कम कैलोरी आहार से बचें ( Low - Calorie Diet Is Bad For Bone Health )
हड्डियों की सेहत के लिए कैलोरी कम करना समझदारी नहीं। इससे अापके मेटाबॉलिज्म पर विपरित असर पड़ता। जिससे मांसपेसियाें काे नुकसान हाेने के साथ हड्डियों का घनत्व भी कम हाे जाता है। मजबूत हड्डियों को बनाने और बनाए रखने के लिए, प्रति दिन कम से कम 1,200 कैलोरी वाले प्रोटीन, विटामिन और खनिजों युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करना चाहिए।

स्वस्थ वजन बनाए रखें ( Healthy Body Weight Good for Bones )
आपका बहुत पतला या माेटा हाेना आपकी हड्डियों की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।उदाहरण के लिए, कम वजन होने से ऑस्टियोपीनिया और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। इस लिए हमेशा एक स्वस्थ शारीरिक वजन का मेंटेन करके रखें।

Bone Health Supplements: Magnesium and Zinc, Omega 3

मैग्नीशियम और जस्ता में उच्च खाद्य पदार्थ शामिल करें ( Minerals For Healthy Bones )
कैल्शियम एकमात्र ऐसा खनिज नहीं है जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण ( Role Of Nutrients In Bone Health ) है। मैग्नीशियम और जस्ता सहित कई अन्य खनिज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।मैग्नीशियम, विटामिन डी को सक्रिय रूप में परिवर्तित कर कैल्शियम अवशोषण को बढ़ावा देता है।वहीं जिंक हड्डियों के विकास उसके घनत्व काे बनाए रखने में मदद करता है।

Omega- 3 Fatty Acid For Bones
ओमेगा -3 फैटी एसिड नई हड्डी के गठन को बढ़ावा देने और बड़ी उम्र के लाेगाें की हड्डियों काे नुकसान से बचाने के लिए जाना जाता है।Omega- 3 Fatty Acid , विटामिन, मिनरल व प्राेटिन युक्त आहार के साथ, वेट ट्रेनिंग, जैसी एक्सरसाइज के जरिए अाप किसी भी उम्र में अपनी हड्डियों काे मजबूत बना सकते है।



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home remedies: हिचकी करे परेशान तो ये नुस्खा दिलवाएगा आराम

काम की बात ...
यूं तो हिचकी आना सामान्य बात है, लेकिन लगातार हिचकी आना एक तरह की बीमारी है। हिचकी को रोकना मुश्किल होता है। कई बार गले में कुछ फंसने, मौसम में बदलाव या तेज मिर्च मसाला खाने से हिचकियां आने लगती हैं। इससे बचने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे अपनाए जा सकते हैं। फिर भी हिचकी न रुके तो डॉक्टरी राय लें।
इसलिए होती परेशानी
सीने के हिस्से पर डायफ्रॉम की मांसपेशियों के अचानक सिकुडऩे की वजह से हिचकी आने लगती है। मुंह में जब वायु ऊपर की ओर बढ़ती है तो हिक-हिक की आवाज आती है। इस तरह वायु रुक-रुक कर बाहर निकलती है। ऐसी स्थिति वायु बढ़ाने वाले पदार्थों को खाने से उत्पन्न होती है। कई बार मिर्च मसाले वाली चीजें खाने या गले में कोई चीज अटक जाने से पेट से ऊपर की ओर वायु उठने से होती है जिससे हिचकी शुरू हो जाती है। कुछ गर्म खाने के बाद कुछ ठंडा खाने, धूम्रपान करने या ज्यादा तनाव लेने से भी हिचकी आती है।
ये अपनाएं
कुछ सेकंड के लिए सांस रोकें
अपना ध्यान दूसरी ओर लगाएं
खाना धीरे खाएं, पानी घूंट-घूंट पीएं
कुछ घरेलू उपाय
शहद की मिठास शरीर की नसों को नियंत्रित रखती हैं। ऐसे में सिर्फ शहद चाटने या एक चम्मच नींबू के रस में शहद मिलाकर चाटने से भी आराम मिलता है। नींबू का एक चौथाई टुकड़ा भी मुंह में रख सकते हैं। चीनी भी हिचकी रोकने में सहायक है। कालीमिर्च खाना भी लाभकारी है। तीन कालीमिर्च व मिश्री मिलाकर चबाएं या रस चूसते रहें। जरूरत लगे तो एक या दो घूंट पानी पी सकते हैं। हिचकी से राहत मिलती है।



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Oral Problem: मुंह से आती है बदबू तो करें ये उपाय

कारगर उपाय :
सोने से पहले कुल्ला (Rinse before bedtime): आधा चम्मच नमक आधे गिलास पानी में मिलाकर कुल्ला करें। पानी में नींबू का रस मिलाकर भी कुल्ला कर सकते हैं।
पर्याप्त पानी पीएं (Drink enough water): पानी ज्यादा पीएं। हमारे मुंह में पानी या लार की कमी से बैक्टीरिया मुंह में पनपते हैं। पानी पीने से मुंह में लार बढ़ती है, जिससे ऑक्सीजन का स्तर भी बढ़ता है और मुंह में बैक्टीरिया नहीं पनपते।
इन्हें चबाने पर होगा फायदा
रात में भोजन के बाद सूरजमुखी के बीज या पुदीने की पत्तियां चबाएं। अमरूद की पत्तियां भी चबा सकते हंै।
विटामिन-सी डाइट लें: सिट्रस एसिड युक्त फल मुंह में बैक्टीरिया पनपने से रोकते हैं। चेरी, स्ट्रॉबेरी, नींबू, संतरा आदि खा सकते हैं।
दही फायदेमंद (Yogurt beneficial) : दही खाने से सल्फाइट पदार्थ कम बनता है जिससे सांस की बदबू दूर होती है। बिना चीनी वाला दही लाभकारी है। चीनी से बैक्टीरिया बढ़ते हैं।
हेलिटोसिस रोग
हेलिटोसिस यानी सांस की बदबू, बैक्टीरिया और भोजन से मिलकर शुरू होती है। दांत, जीभ और मसूढ़ों की सफाई नियमित करें। क्योंकि मुंह से दुर्गंध आने की एक वजह यह भी है।



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hair fall: समय पर पहचान लें बाल झडऩे की वजह

आनुवांशिक व अन्य कारणों से भी हेयरफॉल होता है
ज्यादातर लोग बाल झडऩे की वजह शैंपू, ऑयल या अन्य हेयर केयर प्रोडक्ट्स को मानते हैं लेकिन हकीकत में बाल कई कारणों से गिरते हैं। पौष्टिक आहार व नियमित एक्सरसाइज न करने के अलावा आनुवांशिक व अन्य कारणों से भी हेयरफॉल होता है। आनुवांशिक कारण से बाल समय से पहले गिरने लगते हैं, यह समस्या एंडोजेनिक एलोपेसिया कहलाती है। जानें बाल झडऩे की समस्या को कैसे करें दूर-
इसलिए गिरते हैं बाल
खराब दिनचर्या यानी समय पर न उठना व सोना, अधिक तनाव लेना, केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का ज्यादा प्रयोग जैसी आदि कारण हैं। इसके अलावा बालों की जरूरत के अनुसार विटामिन्स, प्रोटीन व मिनरल्स की पूर्ति न होना या हार्मोन्स में गड़बड़ी, खून की कमी और पीसीओडी भी प्रमुख वजह हैं।
हेयरफॉल संबंधी सवाल-जवाब
तेज धूप के संपर्क में ज्यादा रहना : लंबे समय तक तेज धूप के सपंर्क में रहने से पराबैंगनी किरणें बालों को डैमेज करती हैं। धूप या ज्यादा तापमान के एक्सपोजर से बाल दो मुंहे और बेजान हो जाते हैं।
पुरुषों में ही गंजेपन की शिकायत होती है:
नहीं, महिलाओं में भी हार्मोन में बदलाव या थायरॉयड की समस्या से गंजेपन की शिकायत होती है।
रोज शैंपू के इस्तेमाल से बाल झड़ते हैं:
दरअसल गंदगी-डैंड्रफ से बाल की जड़ें कमजोर हो जाती हैं। नियमित शैंपू करने से बाल साफ रहते हैं। ज्यादा बाल टूटने पर माइल्ड शैंपू का प्रयोग करें।
हेयरफॉल से ऐसे बचें
व्यायाम : रोजाना एक घंटा व्यायाम करें। इससे तनाव कम होने के साथ ही सिर में रक्तसंचार बढ़ता है। कपालभाति, अधोमुखश्वासन, भस्त्रिका प्राणायाम, वज्रासन, उत्तानपादासन भी कर सकते हैं।
आहार : प्रोटीन से युक्त चीजें जैसे दाल ज्यादा खाएं।
केमिकल्स : बालों के लिए केमिकल युक्त चीजें प्रयोग में न लें। इनसे बाल कमजोर होते हैं। हीट बालों को नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में रोलर्स, हेयर डायर्स का प्रयोग न करें। केमिकल वाले कलर न लगाएं।



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Hypertension: उच्च रक्तचाप की समस्या को इन नेचुरल तरीकों से करें दूर

Hypertension: हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर माना जाता है। अधिकांश को देर से पता चलता है कि वे इस समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में दवाओं से बचना चाहते हैं तो लाइफ स्टाइल में बदलाव करें। आइए जानते हैं नेचुरल तरीके कैसे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या काे कम ( Natural Way To Prevent High Blood Pressure ) किया जा सकता है :-

सांस से आराम ( Breathing Exercises ): कुछ लोगों का बीपी शाम की तुलना में सुबह ज्यादा होता है। इसका कारण है रात में कम ऑक्सीजन की प्राप्ति। इसके लिए दिन में 10 से 15 बार पेट से गहरी सांस लें। विशेषज्ञों के अनुसार गहरी सांस लेने से शरीर में ऑक्सीजन व रक्त का संचार सुचारू रहता है। मानसिक शांति मिलती है, गुस्सा भी कम आता है।

नियंत्रित खानपान ( Healthy Diet ) : फैटी डाइट व अधिक नमक से परहेज। विशेषज्ञ मानते हैं कि सामान्य व्यक्ति को दिनभर में 5-6 ग्राम नमक खाना चाहिए। सलाद खूब खाएं।

व्यायाम ( Exercise Regularly ) : वजन बीपी का मुख्य कारण है। सामान्य वजन से 4-5 किलो अधिक वजन ब्लडप्रेशर को करीब 4 एमएम-एचजी तक बढ़ा देता है। वॉक, जॉगिंग, जिमिंग व एरोबिक्स एनर्जी लेवल बढ़ाती हैं। डांस से भी वजन घटता है। इससे कैलोरी बर्न होगी और हार्ट की ब्लड पम्पिंग क्षमता बढ़ेगी।

नींद से बीपी कंट्रोल ( Sleep Well ) : अनिद्रा भी इसका एक कारण है। देर रात की पार्टियां ज्यादातर अनिद्रा की वजह बनती हैं जो हार्ट के लिए ठीक नहीं है। 7 से 8 घंटे रोजाना गहरी नींद सोना चाहिए। अच्छी नींद हार्ट के अलावा कई अन्य बीमारियों से बचाव करती है।

योग से फायदा ( Yoga For Hypertension ) : दिल के मामले में योग भी बेहतरीन विकल्प हो सकता है। कई शोध में साबित हो चुका है कि रोजाना योग करने से हृदय संबंधी रोगों के अलावा अन्य गंभीर बीमारियों से भी राहत मिलती है।



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Anger Effects: कम कीजिए गुस्सा नहीं तो सेहत को होंगे ये नुकसान

Anger Effects: बोलने, हंसने या रोने की तरह गुस्सा भी भावना की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। लेकिन ज्यादा गुस्सा व गुस्सा दबाना, दोनों ही आदतें शरीर-दिमाग के लिए सही नहीं हैं। ये आपके लिए कई परेशानियां बढ़ा सकती हैं। आइए जानते हैं गुस्से आपकी सेहत पर पड़ने वाले प्रभावाें ( Anger Effects On Health ) के बारे में :-

Effects Of Anger
हृदय रोग ( Effects Of Anger On Heart )
: कई अध्ययनों में पाया गया कि गुस्सा कोरोनरी हृदय रोगों की आशंका बढ़ाता है। ऐसे में सामान्य व्यक्ति व खासतौर पर कोरोनरी हृदय रोग के मरीजों को इस आदत से बचना चाहिए।

घाव: गुस्से के कारण शरीर में घाव भरने की प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है। शोधकर्ताओं के अनुसार सर्जरी के बाद गुस्सा नहीं करना चाहिए।

हाई ब्लड प्रेशर ( Effects Of Anger On Blood Pressure ) : स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक गुस्सा छिपाने व दबाने वाले अक्सर हाई बीपी के मरीज हो जाते हैं।

फेफड़े ( Effects Of Anger On Lungs ) : एक शोध के मुताबिक अक्सर गुस्सा करने वाले जोर-जोर से सांस लेेते हैं या हांफने लगते हैं व उनके नथुने फूल जाते हैं जिससे फेफड़ों पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में उनके फेफड़ों के काम करने की क्षमता घट जाती है।

डायबिटीज ( Effects Of Anger On Diabetes ) : छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने वालों में टाइप-टू डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है।

सिरदर्द ( Effects Of Anger On Headache ) : गुस्सा मस्तिष्क के कोर्टीसोल हार्मोन को प्रभावित करता है। इससे दिमाग को ऑक्सीजन सही से नहीं मिलती और सिरदर्द होने लगता है।

त्वचा संबंधी रोग ( Effects Of Anger On Skin ) : गुस्से से तनाव बढ़ता है सोरायसिस, एग्जिमा जैसे त्वचा रोगों का एक कारण मानसिक तनाव और अत्यधिक थकान भी है।

आपसी संबंध ( Effects Of Anger On Family ) : अधिक गुस्से या कुंठित होने की स्थिति व्यक्तिके प्रोफेशनल व पारिवारिक रिश्तों को प्रभावित करती है।

अवसाद-चिंता ( Anger Depression ) : गुस्से को अंदर दबाने से शरीर में तनाव व नकारात्मकता पनपती है जो भविष्य में अवसाद या चिंता का कारण बन सकती है।



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Male Infertility: इस गड़बड़ी से पुरुषों में हो सकती है शुक्राणुओं की कमी

Male Infertility: इन दिनों ऐसे पुरुषों की संख्या अधिक है जिनके शुक्राणुओं की गणना कम है। यानी उनकी सीमेन जांच में कोई स्वस्थ शुक्राणु नहीं दिखते। कई बार शुक्राणु टेस्टीज में बन रहे होते हैं, लेकिन ट्यूब बंद होने की वजह से ये सीमेन में सम्मिलित नहीं हो पाते। वेरिकोसील रोग के कारण भी शुक्राणु नहीं बन पाते। मूल जटिलता उस स्थिति में होती है जब पुरुष में शुक्राणु ही नहीं बन पाते या उसके सीमेन के सेम्पल में शुक्राणु पाए ही नहीं जाते। यह स्थिति आजुस्पर्मिया ( Azoospermia ) है। एक प्रतिशत जनसंख्या इसका शिकार है।

समस्या के अन्य मुख्य कारण क्या हैं? ( Male Infertility Cause )
इसके कई कारण हैं जिसमें हार्मोन्स की कमी, बचपन से ही टेस्टीज में इंफेक्शन या चोट लगना, स्मोकिंग व शराब पीने की लत मुख्य हैं। कई बार बॉडी बिल्डिंग के लिए प्रयोग किए जाने वाले स्टेरॉइड से भी आगे चलकर शुक्राणुओं के बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। जरूरत से ज्यादा व्यायाम करने से भी पुरुषों की फर्टिलिटी पर दुष्प्रभाव पड़ता है। अत्यधिक तनाव, चिंता, प्रदूषण, खून की कमी आदि से भी यह दिक्कत होती है।

परेशानी का उपचार क्या है? ( Male Infertility Treatment )
कई नए उपचारों से पुरुषों में इंफर्टिलिटी की समस्या दूर की जाती है। शुक्राणु की कम गणना ओलिगोस्पर्मिया और न के बराबर गणना आजुस्पर्मिया कहलाती है। सीमेन का एक सेम्पल जांच के लिए लेकर उसमें शुक्राणुओं की गणना, गुणवत्ता, आकार का पता लगाते हैं। स्टेम सेल तकनीक से शुक्राणुओं को लैब में विकसित कर महिला के अंडे के साथ सम्मिलित कर उसके गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिए जाते हैं।



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Friday, 27 September 2019

Vitamin B12 Deficiency: शरीर के संतुलन को खराब कर सकती है B12 की कमी

Vitamin B12 Deficiency: विटामिन बी 12 हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा उत्पादन, फैट और प्रोटीन के मेटाबॉलिज्म और एक स्वस्थ तंत्रिका तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। कुछ अध्ययनों के अनुसार भारतीय लाेगाें में 70-100 प्रतिशत तक विटामिन बी 12 की कमी देखी गई है। विटामिन बी 12 की कमी गंभीर स्वास्थ्य राेगाें का खतरा पैदा कर सकती है। खासकर न्यूरोलॉजिकल कॉम्प्लिकेशन काे बढ़ावा मिलता है।

विटामिन बी 12 d की कमी से नुकसान ( Symptoms Of Low Vitamin b12 )

- B12 की कमी से आपका शरीर आॅक्सीजन के प्रवाह के लिए जरूरी रेड ब्लड सेल का उत्पादन नहीं कर पाता है।जिसकी वजह से आप हमेशा थका हुआ आैर कमजाेर महसूस करते हैं।

- विटामिन बी 12 की कमी है,आपके त्वचा का रंग बदल देती है। आपकी त्वचा का रंग पीला पड़ जाता है।

- बी 12 माइलिन के उत्पादन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो आपकी नसों को उत्तेजित करता है और आपके तंत्रिका तंत्र के कार्य के लिए महत्वपूर्ण है। B12 की कमी में तंत्रिका क्षति हाेने पर व्यक्ति काे सुर्इ चुभने जैसा अहसास हाेता है।

- बी 12 की कमी आपके शरीर के बैलेंस का खराब कर सकती हैं। क्याेंकि यह आपके दिमाग आैर शरीर की गतिशिलता के समन्वय काे प्रभावित करती है।

- बी 12 की कमी का प्रारंभिक संकेत लाल और सूजी हुई जीभ हो सकता है। इस स्थिति को ग्लोसिटिस के रूप में जाना जाता है।

- विटामिन बी 12 की कमी से होने वाले एनीमिया के कारण कुछ लोगों को सांस फूलने और चक्कर आने की समस्या हो सकती है। यह तब होता है जब शरीर अपनी सभी कोशिकाओं में पर्याप्त ऑक्सीजन का परिवहन करने में असमर्थ होता है।

- बी 12 की कमी से तंत्रिका तंत्र की क्षति ऑप्टिक तंत्रिका को प्रभावित कर सकती है। इसका परिणाम धुंधला दिखार्इ देना हाे सकता है।

- बी 12 की कमी से कर्इ बार लाेगाें में अवसाद व अल्जाइमर रोग के लक्षण देखे जाते हैं।

Vitamin B12 Sources
विटामिन बी 12 आमतौर पर केवल पशु उत्पादों जैसे मांस, अंडे, मछली से मिलता है। शाकाहारी लाेग दूध, चीज, योगर्ट, साेया दूध आदि से इसकी इसकी पूर्ति कर सकते हैं।



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Weight Loss Drinks: जाै का पानी इस तरह पीने से जल्दी घटेगा वजन

Weight Loss Drinks: आप अपने बढ़ते हुए माेटापे ( Obesity ) काे कंट्राेल करने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं। लेकिन अभी भी सफलता आपसे काेसाें दूर है, ताे आपकाे कुछ अलग करने की जरूरत है। कई बार ऐसा हाेता है कि केवल भाेजन या एक्सरसाइज वजन घटाने में कामयाब नहीं हाे पाते। ऐसे समय में आपकाे भाेजन और एक्सरसाइस के सही काॅम्बीनेशन की जरूरत हाेती है। ऐसी कई छोटी-छाेटी चीजें हैं जो आपके वजन घटाने ( Weight Loss ) की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं। आप अगर इसकी तलाश में हैं ताे जाै का पानी ( Barley Water ) आपकी मदद कर सकता है। आइए जानते हैं कि जाै कैसे वजन घटाने में आपकी मदद कर सकता है :-


फाइबर से भरपूर, जौ को पूरे अनाज जैसे ओट्स और व्होल ग्रेन ( Oats And Whole Grain ) की श्रेणी में गिना जाता है। कैलाेरी की अधिकता हाेने पर भी, कम फैट हाेने के कारण जाै वजन कम करने में मददगार हाेता है।

Barley Nutritional value: आधा कप पकाए हुए जौ में निम्न पाेषक तत्व हाेते हैं :-
कैलोरी: 96
वसा: 1 ग्राम
सैचुरेटेड फैट: 1 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट: 22 ग्राम
प्रोटीन: 2 ग्राम
डाइटरी फाइबर: 3 ग्राम
सोडियम: 2 मिलीग्राम
मैंगनीज: 1 मिलीग्राम

वजन घटाने के लिए जाै का पानी ( Barley Water For Weight Loss )
जौ का पानी कैलोरी में उच्च हाेता है, लेकिन इसमें फैट की मात्रा में बहुत कम हाेती है। जौ के पानी में फाइबर की मात्रा पाचन तंत्र काे मजबूत कर कब्ज जैसी समस्या से छुटकारा दिलाती है। पेट साफ रखने की वजह से यह वजन घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका सेवन शरीर में जमा फैट का बाहर निकाल देता है। कैलाेरी की अधिकता की वजह से यह लम्बे समय तक आपकाे भूख का अहसास नहीं हाेने देता है।

जौ का पानी कैसे तैयार करें ( How To Prepare Barley Water )
सामग्री:
जौ मोती -1 कप
पानी -1.5 लीटर
नींबू का रस -2 बड़ा चम्मच
शहद -1 बड़ा चम्मच
दालचीनी छड़ी -1

तरीका:
- एक पैन में आधा कप जौ डालें। अब इसमें 1.5 लीटर पानी और दालचीनी स्टिक डालें और फिर इसे कम से कम 30 मिनट तक उबलने दें।
- गैस से उतार ठंडा करें। छान कर, स्वाद के लिए इसमें नींबू का रस और शहद मिलाएं और पी लें। जल्द फायदे के लिए दिन में कम से कम दो बार जौ का पानी पिएं।

जौ के पानी के अन्य स्वास्थ्य लाभ ( Barley Water Health Benefits ):
कोलेस्ट्रॉल कम करता है ( Barley Reduces Cholesterol )
प्रतिदिन जौ का पानी पीने से आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रण में रखने में मदद मिलती है। जौ के पानी के एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकाल देता है।

ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है ( Barley For Blood Sugar )
जौ का पानी आपके ब्लड शुगर लेवल को भी नियंत्रित कर सकता है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए यह पेय काफी फायदेमंद है।

विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर
जौ का पानी ( Barley Drink ) विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो स्वस्थ कोशिका वृद्धि को सक्षम बनाता है। यह फोलेट, लोहा, तांबा और मैंगनीज से भरपूर हाेता है।



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Tailbone Pain यानी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में दर्द

कमर के निचले हिस्से में होने वाले दर्द को अक्सर लोग रीढ़ या कूल्हे की परेशानी मान लेते हैं। बैठने पर एकदम नीचे यदि असहनीय दर्द हो तो नजरअंदाज न करें, टेलबोन यानी रीढ़ की हड्डी के अंतिम छोर में सूजन या फे्रक्चर के कारण ऐसा हो सकता है। टेलबोन त्रिकोण आकार की हड्डी है। कुछ मामलों में इससे जुड़े दर्द का कारण तय नहीं होता है। इसके लिए कुछ जांचें करवानी पड़ती है। जानते हैं इस समस्या के बारे में-
दर्द के प्रमुख कारण
किसी प्रकार की चोट लगने के अलावा संक्रमण और लंबे समय से कब्ज की शिकायत अहम कारण हैं। महिलाओं में डिलीवरी के बाद ऐसा ज्यादा होता है।
इलाज-सावधानी
आराम करने के अलावा एंटी इंफ्लेमेट्री दवाएं देने के साथ ही मुलायम और कुशन वाली गद्दी या तकिया लगाकर बैठने की सलाह देते हैं। कोशिश करें कि लंबे समय के लिए एक ही जगह, एक ही पोजिशन में और झुककर न बैठें। गंभीर स्थितियों में स्टेरॉयड दवा व इंजेक्शन के अलावा सर्जरी की जरूरत भी पड़ती है। मरीज को ज्यादा सख्त सतह पर बैठने की मनाही होती है। प्रभावित जगह पर गर्म सेक भी कर सकते हैं।
एक्सपर्ट : डॉ. अजय सिंह, हड्डी रोग विशेषज्ञ, लखनऊ



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Papaya For Skin: मुंहासे दूर कर त्वचा को बेदाग बनाता है पपीता

Papaya For Skin: फाइबर, विटामिन—सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर पपीता आपके पाचन तंत्र को ही नहीं बल्कि आपकी स्किन काे भी सेहतमंद बनाता है। पुराने समय से ही इसका प्रयाेग त्वचा की रंगत निखारने के लिए किया जाता रहा है।आइए जानते त्वचा की देखभाल करने में पपीते के गुणाें ( Papaya Benefits For Skin ) के बारे में :-

एंटी-एजिंग एजेंट ( Papaya Anti Aging Properties )
पपीते के छिलकाें में एंटी-एजिंग गुण पाए जाते हैं। जाे त्वचा की मरम्मत में अहम भूमिका निभाते हैं। चेहरे से मृत त्वचा हटाने के लिए पपीते के छिलके काे रगड़े आैर थाेड़ी देर बाद ठंडे पानी से धाेले। इससे आपकी आपकी त्वचा बेदाग हाेकर निखर उठेगी।

मुँहासे दूर करें ( Papaya For Acne Prone Skin )
पपीते में पाया जाने वाला पैपैन मुंहासाें काे दूर करने में विशेष ताैर पर काम करता है। इसके अलावा पपीते के पत्ताें और बीज में भी मुँहासे राेकने के गुण हाेते हैं।पपीते का गुदा मुहासाें पर लगाने से जल्दी फायदा मिलता है।

मॉइस्चराइजर ( Papaya For Dry Skin )
यदि आपकी त्वचा रूखी और बेजान है तो पपीता आपको फायदा पहुंचा सकता है। पपीते में ऐसे पौषक तत्व पाए जाते हैं जो रूखी और बेजान त्वचा को हाइड्रेट करके चमकदार बनाते हैं। शहद और पपीते का फेस मास्क कुछ दिनाें आपकी त्वचा का नरम व मुलायम बना देगा।

शहद, पपीता फेस मास्क ( Papaya Honey Face Mask )
पके पपीते के टुकड़ाें काे शहद में मिलाकर पेस्ट बना लें, फिर इस पेस्ट को चेहरे पर लगा लें। आधा-एक घंटे बाद गरम पानी से धो लें। इससे आपकी त्वचा रेशम जैसी मुलायम हो जाएगी।

पपीता स्क्रब ( Papaya Scrub )
कच्चे पपीते को कूचकर उसमें मिल्क पाउडर, आधा चम्मच शहद और मसूर की दाल मिलाएं। इसे चेहरे पर लगाकर दो मिनट पर हल्के हाथों से मलें, फिर पांच मिनट बाद साफ पानी से चेहरा धो लें। इन उपायों से कुछ ही दिनों में चेहरे पर निखार नजर आने लगेगा।



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Thursday, 26 September 2019

Anti Cancer Diet: ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करता है लहसुन, प्याज खाना

Anti Cancer Diet: डाइट में कच्चे लहसुन और प्याज का सेवन आपकी सेहत को कर्इ तरीकाें से फायदा पहुंचाता है। स्किन, बाल, पाचन तंत्र, इम्यून सिस्टम के राेगाें से लेकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में भी ये दाेनाें चीजें खाना आपके लिए फायदेमंद साबित हाे सकती हैं। न्यूट्रीशन और कैंसर जर्नल में हालही में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि कच्चे लहसुन और प्याज का सेवन करने से स्तन कैंसर के विकास के जोखिम को कम ( Onion, Garlic Diet May Reduce Breast Cancer Risk ) किया जा सकता है।

अध्ययनों से पता चला है कि लहसुन व प्याज में एेसे एंटी कैंसर घटक पाए जाते हैं जाे Breast Cancer काेशिकाआें के प्रसार काे राेकने प्रभावी हैं।आइए जानते हैं लहसुन व प्याज कैसें स्तन कैंसर से बचाव करते हैं ( How Onions And Garlic Protect Against Breast Cancer ) :-

कच्चा लहसुन
Garlic Nutrition
: लहसुन में एल्काइल सल्फर, एस-एलिलिसिस्टीन, डायलील सल्फाइड और डायलील डाइसल्फाइड याैगिक घटक पाए जाते हैं।ये सभी एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर हाेते हैं। जो लहसुन को स्तन कैंसर से निपटने में प्रभावी बनाते हैं। इसके अलावा, कच्चा लहसुन आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली ( Immune System ) काे मजबूत बनता है। जिससे आप जल्द ही किसी राेग की चपेट में नहीं आ सकते हैं।

प्याज
Onion Nutrition : एल्केनाइल सिस्टीन सल्फ्फाइड्स नामक एक यौगिक की उपस्थिति के कारण, प्याज को एंटीकार्सिनोजेनिक माना जाता है।जाे कि स्तन कैंसर की काेशिकाआें के प्रसार काे राेकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

स्तन कैंसर का खतरा ( Breast Cancer Risk )
अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च के अनुसार, स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है। आंकड़ों से पता चलता है कि विश्व स्तर पर, 2018 में स्तन कैंसर के 2 मिलियन से अधिक नए मामले सामने आए ।

कैसे हाेता है स्तन कैंसर ( What Is Breast Cancer )
स्तन कैंसर तब होता है जब स्तन की कुछ कोशिकाएं के डीएनए में अज्ञात कारण से बदलाव हाेते हैं। जिससे उनका अनियंत्रित विकास होता है। आगे चलकर ये एक ट्यूमर के ताैर घातक हाे सकता है।

स्तन कैंसर के लक्षण ( Breast Cancer Symptoms )
बीमारी के लक्षण स्तन में गांठ, स्तन के आकार में परिवर्तन, उसके आसपास के क्षेत्र में लालिमा आदि जैसे लक्षण हैं, जैसे बुढ़ापे, स्तन कैंसर का पारिवारिक इतिहास, विकिरण का जोखिम, अत्यधिक आयु, पोस्टमेनोपॉज़ल हार्मोन थेरेपी, आदि इस स्थिति को विकसित करने के आपके जोखिम को संभावित रूप से बढ़ा सकते हैं।

यदि आप इस कैंसर के उच्च जोखिम वाले श्रेणी में आते हैं, तो आपको तुरंत एक डॉक्टर से मिलने की जरूरत है।



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Breast Cancer Diagnosis: समय पर जांच से ब्रेस्ट कैंसर की होती है पहचान

Breast Cancer Diagnosis: इन दिनों स्तन कैंसर खराब जीवनशैली से जुड़ी समस्या बनती जा रही है। जबकि पांच फीसदी मामलों में महिला की उम्र बढ़ने, माहवारी समय से पहले होने लगे या उम्र की सीमा पूरी होने के बाद भी जारी रहे तो इस रोग का खतरा रहता है। ऐसे में शरीर का खास खयाल रखें तो परेशानी से बच सकते हैं। यह जेनेटिक भी है। इसलिए परिवार में यदि पहले किसी को यह रोग हो तो सतर्क रहने की जरूरत है।देश में हर साल एक लाख में से 25 महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आती हैं जिसमें औसतन 17 की मौत हो जाती है।

खुद कर सकते हैं स्तन की जांच ( How do You check for breast cancer? )
25-45 वर्ष की महिलाएं अपने स्तन की जांच खुद से कर सकती हैं। स्तन को छूने पर किसी तरह की गांठ महसूस हो या स्तन का आकार बड़ा या छोटा हो, निप्पल से खून या सफेद द्रव्य निकले या स्तन पर किसी तरह का घाव या लालिमा दिखे तो नजरअंदाज न करें। ये स्तन कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में साल में तीन बार स्तन की मैमोग्राफी जांच करवाएं। 45 के बाद साल में दो बार जांच जरूरी है।

इलाज के बाद लापरवाही न बरतें ( Breast Cancer Treatment on Time )
कुछ मामलों में ऑपरेशन के बाद रोगी को लिनियर एस्केलेटर मशीन की मदद से कंप्यूटराइज्ड सिकाई दी जाती है। रेडियोथैरेपी में मरीज को पिन-प्वाइंट रेडिएशन देते हैं जिससे शरीर के किसी दूसरे हिस्से या अंग को नुकसान नहीं होता है। ऑपरेशन के बाद मरीज को यह नहीं समझना चाहिए कि वह पूरी तरह ठीक हो गया है। सावधानी बरतना जरूरी है।

सर्जरी कर निकालते गांठ ( Surgery For Breast Cancer )
स्तन में किसी तरह की गांठ का पता चलने पर उसकी जांच करते हैं। गांठ 5 सेमी. से छोटी है तो सर्जरी कर निकाल देते हैं। यदि आकार इससे बड़ा हो तो कीमोथैरेपी देते हैं। साथ ही रेडियोथैरेपी कर गांठ के आकार और कैंसर कोशिका को फैलने व बड़े होने से रोकते हैं। इसके बाद नियमित सोनोग्राफी और मैमोग्राफी जांच कराई जाती है।



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Hair Care Tips: बाल झड़ने की समस्या काे जड़ से खत्म कर देगा आंवले का ये नुस्खा

Hair Care Tips: अाजकल बड़ाें के साथ बच्चाें में भी समय से पहले बाल सफेद होने व बाल झड़ने की परेशानी देखी जाती है। इसके कई कारण हाे सकते हैं। जिसमें मार्केट में मिलने वाले केमिकल युक्त शैंपू व तेलों का अधिक प्रयोग और खराब जीवनशैली आैर खानपान शामिल हैं।Hair Loss की समस्या से बचाव के लिए दिनचर्या में सुधार और प्राकृतिक चीजों का प्रयोग करना चाहिए। आइए जानते हैं कुछ खास घरेलू नुस्खाें के बारे में जो हर उम्र में उपयोगी हैं :-

आंवले का प्रयोग
Amla Use For Hair Care: विटामिन-सी की कमी से बाल संबंधी समस्याएं होती हैं। ऐसे में आंवले का नियमित प्रयोग करें। ताजा आंवले का रस पीने के अलावा इसे सब्जी बनाकर या मुरब्बे के रूप में खा सकते हैं। आंवला न मिले तो इसका चूर्ण डॉक्टरी सलाह से लें।

सिर की तेल मालिश
Oil Massage In Head: इन दिनों बालों को खुला रखने का फैशन बढ़ गया है। लड़कियां तेल की मालिश नहीं करतीं। जिससे बालों की जड़ को पोषण नहीं मिलता व बाल झडऩे लगते हैं। यदि दिनभर में चिपचिपे बाल नहीं चाहतीं तो रात के समय नारियल, तिल्ली या सरसों के तेल को गुनगुना गर्म कर इससे मालिश करें। सुबह बालों को धो लें।

यह मिश्रण मददगार
Hair Care Home Remedies: 40 से कम उम्र के लोग बालों को नेचुरली काला करने के लिए आंवला, काले तिल व भृंगराज को समान मात्रा में लेकर कूटें। इसमें चीनी का बूरा मिलाकर 20 - 20 ग्रा. सुबह शाम लें। लेकिन जिन्हें जुकाम है वे पहले इस समस्या को ठीक करें, उसके बाद ही इसे लें।

नाक में षढ़बिंदु तेल
Nasya For Hair Fall: नाक में षढ़बिंदु और अरुण तेल की 4-4 बूंदें डालने से जुकाम से तो राहत मिलती है साथ ही इसकी महक बालों को जड़ से मजबूती देती है। यदि ये तेल उपलब्ध न हों तो सरसों या घी को नाक में हल्का सा लगाकर सूंघने से भी फायदा होता है।



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Long Breath Diet: 2 मिनट की इस कसरत से जल्द दूर हाेगा माेटापा

Long Breath Diet: लम्बे समय तक सेहतमंद रहने के लिए जरूरी है कि शरीर का वजन कंट्राेल में रखा जाए। क्याेंकि बढ़ता हुआ माेटापा आपकाे युवा अवस्था में ही मधुमेह, उच्च रक्तचाप व दिल की बीमारी का शिकार बना सकता है। एक्सरसाइज आैर हैल्दी डाइट के जरिए शरीर के वजन काे कम किया जा सकता है। लेकिन फिर भी कर्इ बार पेट पर जमा चर्बी काे खत्म करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है।इसलिए आज हम आपकाे बताने जा रहे हैं एक एेसी तकनीक के बारे में जिसे दाे मिनट राेज करने से कुछ ही दिनाें में आपकाे पेट पर जमा चर्बी से छुटकारा मिल जाएगा। आइए जानते हैं क्या है वाे तकनीक:-

जापानी तकनीक तेजी से कम हाेती है चर्बी ( Japanese Technique For Weight Loss )
जापानी अभिनेता माइक रोसुके ने इस तकनीक की खोज की है। रोसुके ने इस तकनीक का उपयाेग कर कुछ ही हफ्तों में 13 किलो वजन के साथ कमर से 4.7 इंच चर्बी कम करली। दिलचस्प बात यह है कि अभिनेता ने वजन कम करने नहीं, बल्कि अपने पीठ में हाे रहे दर्द से राहत पाने के लिए इस व्यायाम की शुरूअात की थी।यह उनके डॉक्टर द्वारा निर्धारित एक व्यायाम था जिसे करने के लिए केवल 2 मिनट लगते हैं।

Long Breath Diet Exercise
इस तकनीक में आपको एक निश्चित स्थिति में खड़े हाेकर तीन सेकंड तक सांस ( Breathing Exercises ) लेनी है आैर सात सेकंड के लिए जोर से साँस छोड़नी है। यह एक तथ्य है कि सांस लेने का व्यायाम वजन कम करने में मदद कर सकता है। बल्कि कई यूरोपीय डॉक्टरों ने इस दावे का समर्थन करते हुए कहा है कि यह अत्यधिक प्रभावी है।

माना जाता है कि फैट ऑक्सीजन, कार्बन और हाइड्रोजन से बना होता है और जब हम सांस लेते हैं तो आॅॅॅक्सीजन फैट कोशिकाओं तक पहुँचकर उन्हें पानी आैर कार्बन में बदल देती है। शरीर में जितनी आॅॅॅक्सीजन हाेगी फैट उतना बर्न हाेगा।

कैसे करें ( How To Do Long Breath Diet Exercise )

1: सीधे खड़े हो जाएं, एक पैर को आगे बढ़ाएं, दूसरे पैर को पीछे रखें।

2: बट को तनाव दें और अपने शरीर का वजन पिछले पैर पर रखें।

3: अपनी बाहों को सिर के ऊपर उठाएं। धीरे-धीरे 3 सेकंड के लिए सांस लें।

4: फिर 7 सेकंड के लिए जोर से सांस छोड़ें, अपने शरीर की सभी मांसपेशियों को तनाव दें।

इन्हें 2 से 10 मिनट तक जितनी बार संभव हो दोहराएं।

Benefits Of Long Breath Diet
पेट की चर्बी को जल्दी से कम करने में मदद करने के अलावा, यह आपके शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने और चयापचय में सुधार करने में भी मदद कर सकता है।



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Healthy Diet For Elderly: बढ़ती उम्र में न होने दें प्रोटीन की कमी

Healthy Diet For Elderly: बर्मिंघम की अलबामा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने शोध में पाया कि सीबीएफ बीटा नामक प्रोटीन हड्डियों के बनने में मददगार कोशिकाओं को शरीर में बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण है। इसलिए बुजुर्गों में बढ़ती उम्र के साथ इस प्रोटीन का निर्माण धीमा हो जाता है जिससे शरीर में इसकी कमी हो जाती है। इसीलिए वृद्धजन को हड्डियों की मजबूती के लिए प्रोटीन व कैल्शियम युक्त चीजें खानी चाहिए। आइए जानते हैं बढ़ती उमर् में प्राेटन डाइट के फायदाें के बारे में ( Protein Diet Benefits In Hindi ) :-

वरिष्ठ लोग काे अधिक प्रोटीन की जरूरत क्यों है? ( Why is protein so important to the elderly? )
प्रोटीन के बिना, हमारा शरीर मांसपेशियों और हड्डियों की ताकत को कम करना शुरू कर देता है। शोध में पाया गया है कि वरिष्ठ लोग प्रोटीन का उपयोग कम उम्र के लोगों की तरह आसानी से नहीं कर पाते हैं, इसलिए उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए उनके शरीर को अधिक प्रोटीन की आवश्यकता हो सकती है।

बढ़ती उम्र में मांसपेशियां मजबूत करता है प्राेटिन ( Protein Diet Benefits In Elderly )
उम्र बढ़ने के साथ पोषण की जरूरतें बदलती हैं और उनमें से एक बदलाव यह है कि हमें अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। पर क्यों? इसका जबाव ये है कि गतिशील रहने के लिए हमारी मांसपेशियाें काे प्रोटीन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।खासकर हमारी हड्डियों से जुड़ी मांसपेशियां प्राेटन का सबसे ज्यादा अवशाेषण करती हैं। आैर यही शरीर काे गति देने का काम करती हैं। युवा अवस्था शरीर के कुल वजन का 30% से 50% प्रोटीन मांसपेशियों में पाया जाता है।जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, मांसपेशियों में कमी आती है। 75-80 साल की उम्र तक, शरीर में केवल 25% मांसपेशियों रह जाती है। जिनमें प्राेटिन का स्तर काफी कम हाेता है। जिससे शरीर दिन-ब-दिन कमजाेर हाेने लगता है।प्राेटन युक्त डाइट का सेवन इन कमजाेर मांसपेशियाें काे मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है।

कितना प्रोटीन की आवश्यकता है? ( How Much Protein Do Seniors Need? )
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार हमें अपनी कुल कैलाेरी का 10-35% हिस्सा प्रोटीन युक्त आहार से लेना चाहिए।इसका मतलब है कि यदि हम एक दिन में 2000 कैलोरी खाते हैं, तो हमें 100 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। प्रोटीन की उच्च मात्रा वाली चीजाें के एक औंस में आमतौर पर 7 ग्राम वास्तविक प्रोटीन होता है।

हाल ही में हुर्इ कुछ रिसर्च से सामने आया है कि बुजुर्ग लोगों के लिए प्रोटीन की मात्रा बहुत कम हो सकती है। बुजुर्ग लोगों काे अपने शरीर के प्रति किलोग्राम वजन पर 1.0-1.3 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, यदि आपका वजन 100 किलाे हैं ताे आपकाे रोज 80 ये 130 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए। 180 पाउंड वजन करते हैं, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि प्रतिदिन 80-104 ग्राम प्रोटीन का सेवन करें, भले ही आपकी कैलोरी की मात्रा कम हो।

यहां से मिलेगा प्राेटिन ( High Protein Source )
साेयबीन, चना, दालें, सूखे मेवे व दूध शाकाहारी प्रोटीन के मुख्य स्त्रोत है। इसके अलावा अंडा, मछली, रेड मीट आदि में भी प्राेटिन की उच्च मात्रा पार्इ जाती है। खाद्य पदार्थ नई कोशिकाओं को बनाने और आपकी मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।



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Wednesday, 25 September 2019

Loneliness And Health: एकाकीपन घटा सकता है आपकी उम्र, ऐसे करें बचाव

Loneliness And Health: अमरीका की ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी में की गई नई रिसर्च के अनुसार अकेलापन और सामाजिक अलगाव मोटापे की तरह ही इंसान की लंबी उम्र के लिए खतरा पैदा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार पब्लिक हैल्थ से जुड़े लोगों को इस रिसर्च के नतीजों को गंभीरता से लेना चाहिए। व्यक्ति को अपने सामाजिक संबंधों के साथ अकेला रहने की प्रवृत्ति को छोड़ देना चाहिए। ये स्थितियां आयु सीमा को प्रभावित करती हैं। आइए जानते हैं एकाकीपन के खतरे के बारे में ( Loneliness Effects On Your Health ) :-

यह आपके रक्तचाप को बढ़ा सकता है ( Loneliness Boost Blood Pressure )
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग के मुताबिक, जो लोग अकेले होते हैं, उनमें अक्सर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर का स्तर ज्यादा होता है।

अवसाद काे बढ़ता है ( Loneliness Increase Depression)
अकेलापन अक्सर अवसाद, उदासी और दूसरों से बचने की भावनाओं से संबंधित होता है। अकेला रहना पंसद करने वाले लाेगाें काे सामजिक मेलजाेल में परेशानी हाेती है। वाे अधिकाश ताैर पर एक अनजाने डर से ग्रसित रहते हैं। जाे दिन-ब-दिन उनकी मानसिक आैर शारीरिक स्थिति काे नुकसान पहुंचाता है।अकेले रहने वालाें लाेगाें काे अक्सर नींद नहीं आने की शिकायत रहती है। विशेषज्ञाें के अनुसार स्लीपलेसनेस अकेलेपन से संबंधित राेग है,क्योंकि अकेले रहने वाले लोग चिंता का अधिक शिकार हो सकते हैं, जो उन्हें रात में जगाकर रखती है।

शरीर में सूजन का स्तर बढ़ा सकता है ( Loneliness Raise Inflammation Levels In The Body )
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग के अनुसार, जो लोग अधिक सामाजिक होते हैं उनमें इंटरल्यूकिन -6 का स्तर कम होता है, जो एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जो सूजन से जुड़ी बीमारियों जैसे अल्जाइमर, रूमेटाइड अर्थराइटिस और कुछ कैंसर से जुड़ा होता है। अकेले रहने वाले लाेगाें में इंटरल्यूकिन -6 का स्तर अधिक पाया जाता है।

गतिहीन बना सकता है ( Loneliness Makes You more sedentary )
विशेषज्ञाें के अनुसार अकेले रहना आपकाे गतिहीन बना सकता है। अक्सर देखा जाता कि अकेले रहने वाले लाेग व्यायाम आदि में रूचि नहीं रखते। साथ ही खाना खाने पर कम जाेर देते हैं। अधिकाश समय भूखा रहना पंसद करते हैं।

क्या करें ( What To Do When You Feel Loneliness )
यदि आप अकेलापन महसूस कर रहे हैं या अवसाद के लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें कि क्या आपको अतिरिक्त मदद लेनी चाहिए।



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