Monday, 31 July 2023

Worst food for children: ये 5 फूड्स बच्चों की ग्रोथ रोककर इम्यूनिटी को कर देते हैं कमजोर, लिवर को भी हो सकता है खतरा

Worst Foods For Children: क्या आपके बच्चे की इम्युनिटी कम है या उसकी ग्रोथ रुक गई है, तो इसके पीछे उसका खानपान जिम्मेदार है। बच्चों की मेंटल और फिजिकल ग्रोथ के साथ ही उनकी इम्युनिटी को 5 खाने की चीजें बुरी तरीके से प्रभावित करती हैं। तो अगर आपका बच्चा इन पांच चीजों को खाने का आदी है तो आपको उसे बदलने के लिए कमर कस लेनी चाहिए।


कुछ फूड्स ऐसे हैं जो स्वाद में तो बेस्ट होते हैं, लेकिन बच्चों की सेहत के लिए नहीं। इन फूड़स का लगातार सेवन करने से बच्चों की ग्रोथ और इम्युनिटी ही वीक नहीं होती, बल्कि इससे उनका लिवर भी खराब होने लगता है। तो चलिए जानें ये 5 फूड्स कौन से हैं।

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फ्रेंच फ्राइज : फ्रेंच फ्राइज बच्चों को बहुत पसंद होते हैं लेकिन ट्रांस फैट और कैलोरी से भरी हुई यह चीज बच्चों के डाइजेशन के लिए बहुत हानिकारक है। आप अगर फ्राइज को रिप्लेस ही करना चाहते हैं, तो आलू की जगह शकरकंद या दूसरी सब्जियों को


सॉफ्ट ड्रिंक्स : सोडा या कोला पीने से टाइप -2 डायबिटीज और मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। अपने बच्चों को पैकेज्ड फलों के रस का सेवन न करने दें, इसमें सिर्फ सोडा, शुगर के अलावा कुछ नहीं होता।ऑलिव ऑयल में फ्राई करके बच्चों को दें।

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शुगर ग्रेन : शुगर से भरपूर चीजों में फाइबर न के बराबर होता है। जैसे, क्रीम रोल फैट और शुगर के अलावा कोई भी पोषक तत्व नहीं होता है। बच्चों को ऐसी चीजें दें, जिसमें 10 ग्राम से कम चीनी और कम से कम तीन ग्राम फाइबर हो।


प्रोसेस्ड फूड : कई शोध कहते हैं कि प्रोसेस्ड रेड मीट, जैसे हॉट डॉग, डायबिटीज, पेट के कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, हॉट डॉग सोडियम, वसा और नाइट्रेट से भरे हुए होते हैं, जिनसे कैंसर का खतरा होता है। अगर आप डेली मीट खरीदते हैं, तो कम सोडियम, कार्बनिक वेरिएंट के लिए जाएं, जो एक्सट्रा नाइट्रेट्स फ्री हो।

फ्रूट फ्लेवर वाली चीजें : फ्रूट यानी फल वाले फ्लेवर को पढ़कर यह न समझें कि कोई चीज फलों से बनी हुई है। उदाहरण के लिए, फ्रूट केक या फ्रूट गमी, कैंडी की तरह चीनी से भरे होते हैं। यह चीजें शुगर और केमिकल से भरी होती हैं, जो बच्चों के दांतों से चिपककर कैविटी की प्रॉब्लम देती है।

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डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Prevent liver problems: वजन घटाकर भी कर सकते लिवर की समस्याओं से बचाव, मिलेंगे गजब के फायदे

Prevent liver problems: लिवर, पेट में दायीं ओर होता है। इसका वजन शरीर का लगभग दो फीसदी या औसतन 1500 ग्राम तक होता है। साइज 14-16 सेंटीमीटर तक होती है, लेकिन चर्बी के कारण इसका आकार बढ़ भी सकता है। इसे फैटी लिवर कहते हैं। अत: फैट नियंत्रित रखें। अगर बीएमएसआइ 30 से अधिक है, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित नहीं है तो भी लिवर पर फैट जमा होता है।

 

संभावित कारण
लिवर रोगों का सबसे प्रमुख कारण अल्कोहल है। अल्कोहल से होने वाले सिरोसिस से 20 साल तक आयु कम हो सकती है। अधिक मीठा खाना, कुछ दवाइयां जैसे टीबी, एंटी-बायोटिक्स, स्टेरॉइड्स अधिक लेने से लिवर रोगों की आशंका कई गुना बढ़ती है। हृदय व फेफड़ों के रोगियों में भी यह आशंका रहती है।


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प्रमुख लक्षण
कई बार इसके लक्षण दिखाई नहीं देते, बल्कि किसी अन्य बीमारी की जांच के दौरान इसका पता चलता है। इसके लक्षणों में भूख न लगना, पेट में पानी भरना, पेट में दायीं तरफ दर्द होना, यूरिन पीला आना, आंख व त्वचा का रंग पीला होना, पैरों में सूजन, उल्टी और थकान आदि की समस्या रहती है।

 

कैसे हो पहचान

भूख न लगने पर ब्लड टेस्ट (सीबीसी) करवाते हैं। इसमें प्लेटलेट्स काउंट कम होने पर बीमारी की आशंका रहती है। लिवर का साइज पता करने के लिए अल्ट्रासाउंड और इसमें कैंसर की जांच के लिए सीटी स्कैन किया जाता है। नई जांच फाइब्रो स्कैन से भी लिवर में फैट का पता किया जा सकता है।

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इलाज व सावधानी

वजन ज्यादा है तो डाइट और व्यायाम से 25 बीएमआई रखें। अल्कोहल से दूरी बनाएं। बिना डॉक्टरी सलाह दवाइयां न लें। ज्यादा मीठा व ऑयली फूड न खाएं। लिवर की बीमारी है तो टोंड मिल्क पीएं। जंक व पैक्ड फूड, सोडा ड्रिंक्स से दूरी बनाएं। हेपेटाइटिस हो तो तत्काल इलाज लें। हेपेटाइटिस ए, बी व ई के टीके लगवाएं। शुरुआत में बचाव सबसे उपयोगी है। बीमारी बढऩे पर दवाइयों से इलाज होता है। गंभीर स्थिति में लिवर ट्रांसप्लांट भी करना पड़ सकता है।

 

 



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Health Tips: खून की कमी को दूर करने के लिए इन चीजों का करें सेवन, शरीर में तेजी से बढ़ेगा खून

Health Tips: शरीर में खून की कमी होना हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। आयरन की कमी की वजह से शरीर में खून की कमी होने लगती है। ऐसे में हमें अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। शरीर में खून बढ़ाने के लिए हमें आयरन से भरपूर डाइट लेनी चाहिए।

Health Tips: आजकल की बदलती लाइफस्टाइल और गलत खानपान की वजह से शरीर में खून की कमी होना एक आम समस्या है। शरीर में खून की कमी होने पर कई तरह की समस्याएं पैदा होने लगती है और कई दिनों तक ऐसा रहने ने गंभीर बीमारियां भी हो सकती है। शरीर में खून की कमी होने का मुख्य कारण आयरन की कमी होता है। हमारे स्वस्थ्य शरीर के लिए पोषक तत्वों के साथ-साथ आयरन भी जरूरी होता है, जो हमारे शरीर में रेड ब्लड सेल्स का निर्माण करता है।

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शरीर में अगर आयरन की प्रॉब्लम आती है तो हीमोग्लोबिन तेजी से कम होने लगता है। जिसके चलते थकान-कमजोरी महसूस होने लगती है। अगर इसे समय पर ध्यान नहीं दिया तो किडनी फेल होने के साथ कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता सामना। ऐसे में कुछ चीजों का सेवन करके आप खून की कमी को दूर कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं इन चीजों के बारे में जो खून की कमी को पूरा करने में मदद करते है

खून की कमी को दूर करने वाले फूड्स
1. पालक
खून की कमी को दूर करने के लिए पालक का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि पालक में विटामिंस, आयरन, फाइबर और कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर में तेजी से खून की कमी को पूरा करने में मदद करते है।

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2. चुकंदर

खून की कमी को दूर करने के लिए चुकंदर का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि चुकंदर में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो तेजी से शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है।

3. अनार
खून की कमी को दूर करने के लिए अनार का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि अनार आयरन से भरपूर होता है, जो शरीर में खून बनाने के लिए एक जरूरी तत्व है। अनार का सेवन करने से शरीर में खून तेजी से बनता है।

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डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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वॉर्मअप से अकड़न होती है दूर, घटती है इंजरी रिस्क

Sports injury: स्पोट्र्स इंजरी का अर्थ खेल या व्यायाम के दौरान लगने वाली चोट से है। इस दौरान शरीर के किसी भी भाग में चोट लग सकती है, लेकिन स्पोट्र्स इंजरी का प्रयोग केवल उन्हीं चोटों के लिए किया जाता है, जिनमें मस्क्युलोस्केलेटल सिस्टम प्रभावित होता है। इसमें अधिकतर चोटें मसल्स या जॉइंट्स में ही होती हैं।

कॉमन स्पोट्र्स इंजरी
इसमें चोट के आधार पर उसे अलग-अलग तरीकों से जानते हैं। जानिए, ऐसी ही कुछ इंजरी के बारे में-
मोच: खेलने और व्यायाम के समय लिगामेंट्स के खिसक जाने से मोच आ सकती है। लिगामेंट्स वे टिश्यू गु्रप होते हैं, जो हड्डियों को आपस में जोड़ते हैं।
खिंचाव: शरीर के अंदर टेंडन्स टिश्यू के मोटे, रेशेदार तार होते हैं, जो हड्डी को मांसपेशियों से जोड़ते हैं। इनमें खिचांव ही स्ट्रेन है। कुछ लोग स्ट्रेन को मोच समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं।


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मांसपेशियों में सूजन: चोट लगने के कारण सूजन होना भी सामान्य है। सूजी हुई मांसपेशियां दर्दनाक और कमजोर हो सकती हैं, साथ ही जल्दी क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।


फ्रैक्चर: इसमें हेयरलाइन व कंप्लीट फै्रक्चर होता है। हेयरलाइन में हड्डी जुड़ी हुई और कम्प्लीट में अलग होती है।


डिस्लोकेशन: इसमें हड्डियां अपने जोड़ के स्थान से खिसक जाती हैं, इसे डिस्लोकेशन कहते हैं। इसमें दर्द-सूजन होता है, संबंधित हिस्से में कमजोरी आ जाती और रोटेटर कफ इंजरी भी होती है।

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इन चोटों के संभावित कारण
1. एक्यूट इंजरी : किसी घटना या एक्सीडेंट के कारण हो सकती है। जिसके कारण आप भी महसूस कर सकते हैं। जैसे स्लिप होना, गिर जाना, किसी चीज से टकराना आदि। इसका इलाज जल्दी हो जाता है।

2. क्रॉनिक इंजरी: यह लंबे समय तक रहती है। इसकी शुरुआत एक्यूट इंजरी से होती है, लेकिन किन्हीं कारणों से यह पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाती है। इसलिए क्रॉनिक में बदल जाती है।

 

सूजन या कमजोरी होने पर विशेषज्ञ को दिखाएं

तेज दर्द, ज्यादा सूजन, कोई गांठ या संबंधित हिस्से में कमजोरी या वजन से दिक्कत होती है तो तत्काल विशेषज्ञ को दिखाएं, यह इमरजेंसी की स्थिति है। इसमें ओवर द काउंटर दवाइयां लेने से बचें। इंजरी दो सप्ताह तक ठीक न हो तो फिजियोथैरेपी या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

 

इनका भी रखें ध्यान
चोट वाली जगह पर अधिक दबाव न डालें। कुछ दिन आराम करें।
आइस लगाने से सूजन-जलन कम होती है। दर्द में भी आराम मिलता है।
चोट वाली जगह को ऊं चा रखने से सूजन, जलन और दर्द कम करने में भी मदद मिल सकती है।
अगर इस तरीके से आराम न मिल रहा हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें, क्योंकि इसमें सही उपचार जरूरी है।

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इलाज और बचाव
स्पोट्र्स इंजरी में गंभीरता के आधार पर इलाज होता है। हल्की चोट में आराम और फिजियो की जरूरत होती है, जबकि गंभीर होने पर सर्जरी की जाती है। जिन्हें ऐसी समस्या ज्यादा होती है, वे पहले अपने शरीर की क्षमता की जांच भी करवा सकते हैं। आधुनिक सुविधाओं के चलते पहले से शरीर की पूर्ण जांच सुविधा उपलब्ध है। इन कमियों को दूर भी किया जा सकता है।

 

स्पोट्र्स इंजरी से कैसे करें बचाव
व्यायाम या खेल से पहले एक फिटनेस प्लान तैयार करें। केवल एक ही व्यायाम न करें। सबको थोड़ा-थोड़ा समय दें।
व्यायाम और स्पोट्र्स से पहले हमारा शरीर ठंडा रहता है। इससे अंगों में अकडऩ होती है। इसलिए हल्के व्यायाम से वॉर्मअप की सलाह दी जाती है।
शरीर में पानी की कमी न होने दें। इससे शरीर में लचीलापन बढ़ता है।


व्यायाम से पहले स्ट्रेचिंग से मांसपेशियों की क्षमता में बढ़ती और चोट का जोखिम कम होता है, जूते सही पहनें।
व्यायाम या खेल के सही नियम की जानकारी न होने से भी इंजरी की आशंका रहती है। जानकारी कर लें।
जब शरीर या किसी अंग में दर्द हो तो व्यायाम करने से बचें। इससे इंजरी की आशंका बढ़ती है। शरीर की क्षमता से ज्यादा व्यायाम न करें।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

 



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एक महीने में 10 किलो वजन कैसे घटाएं, रोजाना कितनी वॉक है जरूरी, क्या है नियम, जानिए सब कुछ

2 किलोमीटर वॉक 100 कैलोरी बर्न हो सकती है

How to reduce 10 kg weight in a month, how much walk is necessary : अगर आप भी अपना वजन घटाने की सोच रहे हैं तो इसके लिए ब्रिटिश नेशनल हेल्थ सर्विस ने एक रिपोर्ट के अध्ययन में बताया है कि वजन घटाने के लिए कितने किलोमीटर रोजाना वॉक करना चाहिए, इसके लिए कोई फुलप्रूव तरीका तो नहीं है। इसके लिए अलग-अलग लोगों का अनुभव अलग-अलग हो सकता है इसमें चलने की स्पीड सबसे बड़ा कारक है इसके अलावा भी कई कारक जिम्मेदार होते हैं।

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अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक 1 मील यानी 1.6 किलोमीटर चलने में 55 से 140 कैलोरी बर्न होती है। ब्रिटिश नेशनल हेल्थ सर्विस रोजाना कम से कम 150 मिनट की मॉडरेट वॉकिंग करनी चाहिए। अगर आप ब्रिस्क वॉक करते हैं तो इसे 75 मिनट तक कर सकते हैं।

रोजाना कम से कम 10 हजार कदम चलने की सलाह दी जाती है। लेकिन इससे कितना वजन घटेगा ये तय नहीं है इसका जवाब यह है कि यह हर व्यक्ति का वजन अलग-अलग तरह से घटेगा। कुछ लोग 7-8 किलो वजन एक महीने में घटा लेते हैं जबकि कुछ लोगों को 7-8 किलो वजन घटाने में 2 महीने से भी ज्यादा समय लग सकता है। कितना वजन घटेगा, इसके लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं। सबसे बड़ा कारक चलने की स्पीड और रेगुलर्टी है।

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वजन घटाने के लिए डाइट पर कंट्रोल भी जरूरी
आपका कितना वजन घटेगा यह कई बातों पर निर्भर करता है। अमूमन वजन घटाने के लिए ब्रिस्क एक्सरसाइज की सलाह दी जाती है। ब्रिस्क एक्सरसाइज का मतलब है कि आप जब वॉक करते हैं तो इसकी स्पीड कम से कम 6 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति इससे अधिक गति से वॉक करता है रनिंग करता है तो यह और तेजी से वजन कम करेगा।

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हालांकि सिर्फ वॉक करने से ही वजन कम नहीं होगा। वजन कम करने के लिए आपको डाइट पर कंट्रोल भी जरूरी है। डाइट में अनहेल्दी चीजों को बाहर करना होगा और हेल्दी चीजों को शामिल करना होगा। वहीं डाइट की मात्रा में भी कमी करनी होगी। इसके अलावा पर्याप्त नींद और तनाव मुक्त जीवन भी वजन घटाने के लिए जरूरी है।

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खून की नलियों में सूजन बढ़ाते है मलेरिया के परजीवी, बरते ये सावधानियां

मलेरिया, मादा एनाफिलिज मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी है। इसमें समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार हर वर्ष विश्व में 24 और भारत में 1.5 करोड़ मलेरिया के रोगी होते हैं। वर्ष 2020 में विश्वभर में मलेरिया से करीब 6.27 लाख लोगों की मृत्यु मलेरिया के कारण से हुई थी।

 

संभावित लक्षण
तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, ठंड-कंपकंपी, थोड़ी-थोड़ी देर पर प्यास लगना, हाथ-पैरों में ऐंठन, लंबे समय तक समस्या रहने पर शरीर में खून की कमी, बेचैनी, मांसपेशियों में दर्द इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।

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खून की नलियों में सूजन से बढ़ती है दिक्कत- मलेरिया के परजीवी से खून की नलियों में सूजन होती है, जिससे शरीर के महत्त्वपूर्ण अंग जैसे फेफड़े, लिवर, हार्ट और किडनी को पर्याप्त खून नहीं मिलता है। इन अंगों के फेल होने की आशंका बढ़ जाती है। ब्लड शुगर लेवल कम हो जाता है और अचानक से शरीर की इम्युनिटी भी कमजोर होने लगती है।

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क्या खाएं बीमारी में
हल्की-सुपाच्य चीजें जैसे सेब, दलिया, खिचड़ी, साबूदाना आदि खाने चाहिए। इसमें अमरूद और तुलसी-कालीमिर्च का काढ़ा पीने से भी आराम मिलता है।

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इन बातों का रखें ध्यान
ठंडा पानी पीने या ठंडे पानी से नहाने से बचें। खट्टे फल, खट्टी चीजें, जूस, दही, चावल, मूली और मिर्च-मसाले या अम्ल रस से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।

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बचाव के तरीके

मलेरिया की कोई वैक्सीन नहीं है, इसलिए सावधानी बरतें। घर के आसपास सफाई रखें, ताकि मच्छर नहीं पनपें। मच्छरदानी लगाएं। बारिश में पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। लक्षणों की अनदेखी न करें।

 

कब दिखते हैं इसके लक्षण
मच्छर के काटने के 7-30 दिन के भीतर लक्षण दिखते हैं। जिन्हें पहले इसका संक्रमण हो चुका, उनमें दोबारा से होने पर लक्षण देरी से दिखते हैं।

 

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Elaichi Milk Benefits: इलायची वाला दूध बढ़ाता है शरीर में ताकत , जानें इसके कमाल के फायदे

Elaichi Milk Benefits: दूध में इलायची डालकर सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। दूध और इलायची के सारे पोषक तत्वों के गुणों से भरपूर होते है। इलायची वाला दूध का सेवन करने से पाचन तंत्र और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

Elaichi Milk Benefits: दूध और इलायची का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन जब दूध में इलायची डालकर सेवन करते है तो इससे लाभ दोगुने बढ़ जाते हैं। दूध में विटामिंस, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। तो वहीं इलायची में विटामिन बी-6, प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और नियासिन जैसे पोषक तत्व के गुण पाए जाते है, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। दूध में इलायची डालकर सेवन करने से हड्डियों मजबूत होती है। साथ ही इनका सेवन करने से पाचन तंत्र दुरूस्त होता है। तो आइए जानते हैं इलायची वाला दूध का सेवन करने से सेहत को मिलने वाले फायदे के बारे में

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Benefits of cardamom milk इलायची वाला दूध के फायदे
1. Beneficial in strengthening bones हड्डियों को मजबूत बनाने में फायदेमंद
हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए इलायची वाला दूध का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि दूध और इलायची दोनों में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जिससे इनका एक साथ सेवन करने से हड्डियों को मजबूती मिलती है।

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2. Beneficial in strengthening the digestive system पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में फायदेमंद
पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए इलायची वाला दूध का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि दूध और इलायची दोनों में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है। साथ ही पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।

3. Beneficial in keeping the heart healthy हार्ट को स्वस्थ बनाए रखने में फायदेमंद
हार्ट को स्वस्थ बनाए रखने के लिए इलायची वाला दूध का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि दूध और इलायची दोनों में मैग्नीशियम पाया जाता है, जो हार्ट को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।

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4. Beneficial in detoxing the body शरीर को डिटॉक्स करने में फायदेमंद
शरीर को डिटॉक्स करने के लिए इलायची वाला दूध का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि रोजाना इलायची वाला दूध का सेवन करने से शरीर से विषाक्त पदार्थ को निकालने में मदद मिलती है। क्योंकि इलायची में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। साथ ही इसमें मैंगनीज भी पाया जाता है जो फ्री रेडिकल को नष्ट करने के साथ-साथ शरीर को डिटॉक्स भी करता है।

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डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Pistachios Benefits: पिस्ता खाने के बेमिसाल फायदे, डायबिटीज से लेकर वजन को कंट्रोल करने में होता है फायदेमंद

Pistachios Benefits: पिस्ता का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। पिस्ता कई सारे पोषक तत्वों के गुणों से भरपूर होता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए पिस्ता का सेवन करना फायदेमंद होता है। यह डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करता है।

Pistachios Benefits: पिस्ता का सेवन करने से सेहत को कई तरह के लाभ मिलते हैं। पिस्ता गुणों का भंडार होता है। पिस्ता में विटामिन बी-6, विटामिन ए, विटामिन ई, विटामिन सी, विटामिन के, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस, थियामिन, कॉपर और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य से जुड़ी कई सारी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं।

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पिस्ता का सेवन करने से डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। साथ ही ये हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। रोजाना पिस्ता का सेवन करना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। तो आइए जानते हैं पिस्ता का सेवन करने से सेहत को मिलने वाले फायदे के बारे में

benefits of eating pistachios पिस्ता खाने के फायदे
Beneficial in controlling diabetes डायबिटीज को कंट्रोल करने में फायदेमंद
डायबिटीज के मरीजों के लिए पिस्ता का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि पिस्ता में लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्‍स होता है, जो डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करता है। ऐसे में डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए डायबिटीज के मरीज पिस्ता का सेवन जरूर करें।

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Beneficial in strengthening bones हड्डियों को मजबूत बनाने में फायदेमंद
हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए पिस्ता का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि पिस्ता में कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्‍नीशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। ऐसे में अपने हड्डियों को हमेशा मजबूत बनाए रखने के लिए पिस्ता का सेवन जरूर करें।

Beneficial in keeping the mind healthy दिमाग को स्वस्थ रखने में फायदेमंद
दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए पिस्ता का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि पिस्ता में मौजूद मिनरल्स ब्रेन के फंक्शन को बेहतर करने में आपकी मदद करते हैं। साथ ही ये माइंड को एक्टिव और अलर्ट करता है। जिससे दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। ऐसे में अपने दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए पिस्ता का सेवन जरूर करें।

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डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Sunday, 30 July 2023

Ginger Oil Benefits: अदरक के तेल का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य और स्किन के लिए होता है बहुत फायदेमंद

Ginger Oil Benefits: अदरक के तेल का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य और स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। अदरक का तेल का सारे पोषक तत्वों के गुणों से भरपूर होता है। अदरक का तेल सिर से लेकर पैर तक की समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है।

Ginger Oil Benefits: अदरक का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। अदरक कई सारे औषधीय गुणों से भरपूर होता है। लेकिन अदरक की तरह ही, इसका तेल भी स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। जी हां, अदरक के तेल का इस्तेमाल करने से सेहत और स्किन को कई तरह के लाभ मिलते हैं। क्योंकि अदरक के तेल में विटामिन ए, विटामिन डी, विटामिन ई, कैल्शियम, आयरन, जिंक, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य और स्किन से जुड़ी कई सारी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। आर्थराइटिस की समस्या से राहत दिलाने में अदरक का तेल फायदेमंद होता है। तो आइए जानते हैं अदरक के तेल का इस्तेमाल करने से सेहत और स्किन को मिलने वाले फायदे के बारे में

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Benefits of ginger oil अदरक के तेल के फायदे
Beneficial in arthritis problem आर्थराइटिस की समस्या में फायदेमंद
आर्थराइटिस की समस्या में अदरक के तेल का इस्तेमाल करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि अदरक के तेल के एंटी-अथ्रैटिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो जोड़ो, पैरों और पंजों की सूजन व दर्द को कम करने में मदद करते हैं।

Beneficial for skin स्किन के लिए फायदेमंद
स्किन के लिए अदरक के तेल का इस्तेमाल करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि अदरक के तेल में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-एजिंग के गुण पाए जाते हैं, जो स्किन के लिए फायदेमंद होते हैं। साथ ही ये स्किन को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा ये स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।

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Beneficial for hair बालों के लिए फायदेमंद
बालों के लिए अदरक के तेल का इस्तेमाल करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि अदरक के तेल में पाए जाते वाले तत्त्व आपके स्कैल्प के ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने का काम करता है जो बालों की ग्रोथ बढ़ाता है। इसके अलावा ये आपके कमजोर बालों को टूटने झडनें से भी बचाता है और उन्हें मजबूत बनाता है। इसके अलावा ये बालों को झड़ने से भी रोकता है और बालों में नेचुरल ग्लो दिलाने में भी मदद करता है।

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डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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व्यायाम से फायदा हो रहा या नुकसान, यहां जानिए

Exercise health benefits: व्यायाम से शरीर में स्फूर्ति आती है और नई ऊर्जा का संचार होता है। यह सब जानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि आप जो एक्सरसाइज कर रहे हैं, वह उसका सही तरीका भी है या नहीं, इसका फायदा हो रहा है या नुकसान। इस पर यहां बात की जा रही है-


व्यायाम के बाद भी थकान
व्यायाम के बाद थका हुआ और कम ऊर्जा स्तर पाते हैं तो मान लीजिए कि व्यायाम से फायदा नहीं हो रहा है। व्यायाम के बाद आप ऊर्जा-उत्साह से भरे होते हैं, न कि थकावट से। ऐसे में अपने व्यायाम के तरीके और न्यूट्रीशन वैल्यू पर ध्यान देने की जरूरत है।

एक ही स्थिति पर अटक गए हैं
यदि आप सप्ताह भर से एक्सरसाइज करने के बाद भी खुद को उसी स्ट्रेंथ, एनर्जी लेवल और वजन पर अटका हुआ महसूस कर रहे हैं तो आपकी एक्सरसाइज सही दिशा में नहीं जा रही है। ऐसे में आपको अपने कोच से सलाह लेकर इस पर काम करना चाहिए। थोड़े दिन के लिए ब्रेक भी ले सकते हैं।

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मेडिकल कंडीशन हो तो
यदि आप किसी मेडिकल कंडिशन से गुजर रहे हों तो ऐसी स्थिति में पहले चिकित्सक से सलाह लें और इसके बाद ही एक्सरसाइज करें। क्योंकि ऐसी स्थिति में भी व्यायाम से आपको फायदा नहीं होगा, साथ ही आप अपने लिए जोखिम भी पैदा कर सकते हैं।

इतना समय परफेक्ट
सप्ताह में पांच बार आधे से एक घंटे तक एक्सरसाइज करना उपयुक्त माना जाता है। इसका फायदा तभी संभव है जब आप कुछ भी खा लेना, दिन में, देर रात या सुबह देर तक सोना जैसी गलत आदतें भी बदल पाएं।

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ज्यादा वर्कआउट ठीक नहीं
ज्यादा व्यायाम से हड्डियां कमजोर, ऑस्टियोपोरोसिस, मांसपेशियों में दर्द, खिंचाव, नींद न आना, कमजोरी, पीरियड्स असामान्य होना, डिहाइड्रेशन, जरूरत से ज्यादा भूख लगना, रक्तचाप बढऩा जैसी बीमारियों और समस्याओं सहित हृदयाघात तक भी संभव है।

 

रोगी हैं तो यह करें
हृदय रोगी सप्ताह में 4-5 दिन 30 मिनट ब्रिस्क वॉक कर सकते हैं। डायबिटीज है तो व्यायाम से पहले व बाद में शुगर लेवल जांचें और हार्ड सरफेस पर व्यायाम न करें। रोगी हैं तो व्यायाम के लिए डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

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जब व्यायाम लगे सजा
यदि आप एक्सरसाइज करते समय उसे एंजॉय करने के बजाय उसे एक सजा समझ रहे हैं, साथ ही इसके प्रति मोटिवेशन भी महसूस नहीं करते हैं तो समझ लें कि आपके व्यायाम का तरीका सही नहीं है। अत: अपनी ट्रेनिंग का तरीका बदलें या फिर कोई और रुटीन फॉलो करें।

 

चोट आ जाए तो...
व्यायाम के दौरान बार-बार तनाव हो या चोट लग रही हो, तब जान लें कि आपके व्यायाम के तरीके सही नहीं हैं और इससे आपको फायदा भी नहीं होगा। अत: चोट सही होने तक खुद को आराम दें और इसके बाद नई ऊर्जा के साथ लौटें।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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अच्छी आदतों से शरीर के तापमान को रखें नियंत्रित, मौसमी बीमारियों से होगा बचाव

अचानक से तेज धूप और गर्मी के कारण कई तरह की समस्याएं हो रही हैं। गर्मी बढऩे के कारण मौसमी समस्याएं जैसे पेट में अपच, गैस, पित्त का बढऩा, पेट में इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इनमें उल्टी, जी मिचलाना, सिर दर्द और अपच प्रमुख लक्षण होते हैं। अच्छी आदतों को अपनाते हुए इनसे बचाव किया जाता सकता है। जानते हैं इसके बारे में-

गर्मी बढऩे से दिक्कत क्यों
शरीर का सामान्य तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है। इससे 5-8 डिग्री कम-ज्यादा होने पर शरीर सहन कर लेता, लेकिन अधिक अंतर होने पर शरीर का मेटोबॉलिज्म बदलता है। शरीर को ज्यादा काम करना पड़ता, दिक्कत शुरू होती है।

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गलत आदतों से बीमारियां
मौसम से शरीर का तापमान बढने और सावधानी नहीं रखने से बीमारियां होती हैं। पर्याप्त आराम नहीं करना, ज्यादा मिर्च-मसालेदार, बासी खाना खाने, नशा करने, ज्यादा चाय-कॉफी पीने, लंबे समय तक बैठे रहना और समय पर डाइट न लेने से भी बीमारियों की आशंका रहती है। जो लोग नियमित व्यायाम नहीं करते हैं, उनमें भी परेशानी हो सकती है। व्यायाम शरीर को सक्रिय रख बीमारियों से बचाता है।

एक रोटी कम ही खाएं
गर्मी से बचाव में डाइट अहम होती है। इस मौसम में सादा व हल्का आहार हो। भूख से एक रोटी कम खाएं। सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीएं। दोपहर में छाछ, लस्सी या दही जरूर लें।

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आहार में इन्हें ज्यादा लें
केले में मौजूद पोटैशियम आंतों में एक लेयर बनाता है, जिससे एसिड बनने की प्रक्रिया रुकती है। इसमें फाइबर भी अधिक होता है। रोज 4-5 पत्तियां पुदीने की खाएं। इससे भी एसिड कम होता है। खाने के बाद एक चम्मच सौंफ व थोड़ी मिश्री लेने से गैस नहीं बनती है। नाश्ते के बाद एक गिलास ठंडा दूध भी पी सकते हैं।

घरेलू उपाय भी कारगर
लू में प्याज का रस और इमली का पानी पिलाने से राहत मिलती है। चंदन या शर्बत के साथ कामदुधा रस दो-दो घंटे पर लें। श्वास कुठार रस, चंदन-कपूर घिसकर शरीर पर लगाएं। इससे भी ठंडक मिलती है। नीम की लकड़ी-लाल चंदन पानी में घिसकर व कलमी-शोरा मिलाकर बदन पर लगाएं। इससे ठंडक मिलती है।

लू लगने पर ये करें
कच्चे आम की चटनी, आमपना, जलजीरा, नींबू शिकंजी, दही, छाछ ज्यादा मात्रा में लें। अपने डॉक्टर को दिखाएं। बुखार होने पर खुली हवा में आराम करें। तेज बुखार जैसे 102 से अधिक होने पर दवा के साथ शरीर पर ठंडी पट्टी करें। ध्यान रखें कि डायरिया के साथ बुखार नहीं है तो दवा लेने से बचें।

लक्षण
उल्टी, जी मिचलाना, गले में जलन, पेट फूलना, मुंह में खट्टा पानी आना, गैस, दस्त, शरीर में पानी की कमी, यूरिन कम होना, आंखों के आगे अंधेरा छाना, बुखार, डकारें, छाती में जलन, सिरदर्द आदि।

 

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इन आदतों से भी राहत
गर्मी में पसीने के साथ लवण भी निकल जाते हैं। इससे बचाव के लिए हर घंटे थोड़ा पानी जरूर पीएं। पानी में नींबू और एक चुटकी नमक जरूर मिला लें।
शरीर को ठंडक देने वाली चीजें जैसे तरबूत, खरबूज, ककड़ी, बेल, शहतूत, फालसे आदि खाते रहना चाहिए।
खस, चंदन, गुलाब जैसे सुगंधित पदार्थों से बनी चीजें, लस्सी, छाछ, शर्बत आदि लें।
दिन में दो बार स्नान जरूर करें। दिन में सोने से बचें। गीले कपड़े न पहनें।
किसी भी प्रकार का नशा न करें। इससे शरीर में दूषित तत्त्वों की मात्रा बढ़ती है। इस मौसम में गर्म पानी से न नहाएं।
गर्मी में हैवी वर्कआउट करने से बचें। इससे भी शरीर का तापमान बढ़ जाता है। जिससे बीमारियों की आशंका बढ़ती है।

 

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शरीर में खून की कमी दूर करते हैं मोटे अनाज, फायदे जानकर रह जाएंगे दंग

Coarse Grains Benefits: भारत में करीब 59 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। इस कारण उनकी सेहत बिगड़ रही है। पारंपरिक थाली पर ध्यान देकर इस कमी को दूर किया जा सकता है। बाजरा, ज्वार, मक्का, रागी, कुटकी, कोदो, कंगनी, सांवा आदि मोटे अनाज की श्रेणी में आते हैं। ये पोषक तत्त्वों से भरपूर हैं। अगर सौ ग्राम अनाज में बात करें तो बाजरा में 16.9 मिग्रा, सांवा या समा के चावल में 15.2 मिग्रा, 100 ग्राम कुटकी यानी लिटिल मिलेट्स में 9.3 मिग्रा, और रागी व कंगनी में भी भरपूर मात्रा में आयरन मिलता है।

 

ऐसे खिलाएं बच्चों को भी
मोटे अनाज से आप डोसा या इडली का घोल बनाकर उसमें चुकंदर, गाजर, बीन्स और पालक जैसी रंगीन सब्जियों को मिलाकर खिला सकती हैं। अंकुरित मोटे अनाज को टमाटर, चुकंदर, खीरा-ककड़ी और कॉर्न के साथ मिलाकर सलाद या चाट के रूप में, पास्ता या सैंडविच फिलिंग में प्रयोग कर खिला सकती हैं। इसके अलावा मोटे अनाज को भिगोकर फिर पीसकर उससे टिक्की और पेनकेक बना सकती हैं।

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गर्भवती को भी जरूर खिलाएं
गर्भावस्था में आयरन की कमी को पूरा करने में मोटा अनाज सहायक हो सकता है। हालांकि इस पर पूरी तरह से निर्भर न रहने की सलाह दी जाएगी, क्योंकि इसकी आवश्यकता पूरी तरह से गर्भवती महिला में मौजूद आयरन की मात्रा पर निर्भर करेगी। वैसे इस समय आप मिलेट्स यानी मोटे अनाज को भिगोकर, किण्वित कर या अंकुरित कर खा सकती हैं।

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दही-छाछ में भिगोकर खाने से ज्यादा फायदा देता बाजरा
मोटे अनाज से आपको आयरन सही रूप में मिले, इसके लिए इसे किस तरह से प्रयोग में लेना है, इस बारे में भी जानना जरूरी है।

अंकुरण : बाजरे को 6-8 घंटे के लिए पानी में भिगो दें। पानी को निथारकर एक ढके हुए हवादार कंटेनर में रख दें। 8-10 घंटे बाद इसे धो लें और कुछ घंटों के लिए छोड़ दें। एक बार जब छोटे-छोटे स्प्राउट्स दिख जाएं तो उन्हें तुरंत स्टीम्ड/ पके रूप में सेवन कर सकते हैं।

किण्वन: बाजरे को दही या छाछ में डालकर भिगो दें और रातभर छोड़ दें। इससे यह फूल जाएगा। फिर इसे पीसकर घोल बना लें या तरल निथार कर खिचड़ी, दलिया आदि बनाने के लिए पका लें।

 

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Saturday, 29 July 2023

Remedies to increase eyesight: जानिए कैसे दूर करें आंखों धुंधलापन और पानी आने की समस्या, जानिए आंखों की हर समस्या का इलाज

Amazing ways to increase eyesight: क्या आपकी आंखों से पानी आता है? या धुंधलापन बढ़ रहा है? तो ये आपकी कमजोर होती आंखों की निशानी है। आंखों की हर तरह की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आपको कुछ खास डाइट और एक्सरसाइज की जरूरत है।

मोबाइल-लैपटॉप और टीवी पर लगातार आंख गड़ाए रखना आंखों के लिए अच्छा नहीं होता, लेकिन कई बार काम की मजबूरी या आदत की वजह से ऐसा करने से बच नहीं पा रहे तो आप डाइट और एक्सरसाइज के जरिये अपनी आंखों के बढ़ते पावर (increase eyesight) को रोक सकते हैं। इतना ही नहीं आपकी थोड़ी सी सर्तकता आपकी आंखों पर चढ़ा चश्मा भी हटा सकती है, बर्शते आप अपनी आंखों से प्यार करेंगे तब। विश्व ग्लूकोमा दिवस पर चलिए आंखों से जुड़ी ये बेहद अहम जानकारी आपको दें।

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कभी 40 की उम्र के बाद आंखों का पावर बढ़ने (increase eyesight) की बात डॉक्टर किया करते थे, लेकिन अब छोटी सी उम्र में ही चश्मा लगाए बच्चे नजर आने लगे हैं। खान-पान में जरूरी विटामिन्स और मिनिरल्स का अभाव ही नहीं, लगातार स्क्रीन पर आंख गड़ाएं रखने के कारण भी आंखों का पावर बढ़ने लगा है। लेकिन थोड़ी सी सूझबूझ और खानपान पर ध्यान देकर आप आंखों पर लगे चश्मे को भी उतार सकते हैं। बस रोज की डाइट में आपको कुछ खास चीजों को दवा मानकर शामिल करना होगा।

कंप्यूटर और मोबाइल से निकलने वाली ब्यू रेज़ आंखों के लिए बेहद खतरनाक होती हैं। भले ही आप इन रेज से बचने के लिए जीरो कट पावर या एंटी ब्लू लाइट चश्मा लगा लें, लेकिन आपकी आंखों को नुकसान भले ही कम हो, लेकिन नुकसान होता जरूर है। अगर बुढ़ापे तक आंखों की तेज रोशनी के साथ मोतियाबिंद जैसी तमाम बीमारियों से बचाना है तो आइए जानते हैं इसके लिए क्या करना है।
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इन चीजों में छुपा है आपकी स्वस्थ आंखों का राज
आंखों के लिए सबसे जरूरी विटामिन है -ए। इसकी कमी से आंखों की रौशनी जाने लगती है। आंखों की प्रकाश-संवेदी कोशिकाओं यानी फोटोरिसेप्टर को हेल्दी रखने में विटामिन ए ही जिम्मेदार होता है। रतौंधी, आंखों में सूखापन या तमाम अन्य आंख की बीमारी विटामिन ए की कमी के कारण ही होता है। इसलिए अपनी डाइट में डेयरी उत्पादों के साथ गाजर का सेवन जरूर करें।

ओमेगा -3 फैटी एसिड आंखों के लिए एक वरदान है। ये आपकी आंखों से चढ़ा चश्मा तक उतार सकता है, अगर इसे आप अपनी डाइट का हिस्सा बना लें तो। नट्स, सीड्स को ओमेगा -3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसके सप्लीमेंट जरूर खाएं। ये बच्चों को भी खिलाए जा सकते हैं।

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आंखों के लिए भी विटामिन सी बहुत जरूरी है। कई रिसर्च से पता चलता है कि मोतियाबिंद वाले लोगों में एंटीऑक्सीडेंट की कमी के चलते ही उन्हें ये समस्या होती है। जो लोग विटामिन-सी की खुराक लेते हैं उन्हें मोतियाबिंद होने की आशंका कम होती है। शिमला मिर्च, खट्टे फल, अमरूद, नींबू, संतरे और ब्रोकली सहित कई फल और सब्जियों में विटामिन-सी की अच्छी मात्रा पाई जाती है।

विटामिन ई आंखों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। विटामिन ई, वसा में घुलनशील एंटीऑक्सिडेंट का एक समूह है जो फैटी एसिड को हानिकारक ऑक्सीकरण से बचाता है। चूंकि हमारे रेटिना में फैटी एसिड की उच्च सांद्रता होती है, इसलिए आंखों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए पर्याप्त में विटामिन-ई का सेवन महत्वपूर्ण माना जाता है।

बादाम, सूरजमुखी के बीज और अलसी के तेल को इस विटामिन से भरपूर माना जाता है। लगातार स्किन पर नजर गड़ाए रखने वाले लोगों को हर 20 से 25 मिनट पर अपनी आंखों को कुछ देर के लिए बंद करना बेहद जरूरी है। आंखों पर चार उंगलियां रखें और हल्के हाथों से उसे बंद कर दें। इससे आखों को रेस्ट भी मिलता है और आंखों में होने वाली चुभन या गड़न से भी आराम मिलता है।

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स्क्रीन पर काम करते हुए बीच-बीच में अपनी पलकों को झपकाने के लिए समय निकालें। ये आंख की सबसे बेस्ट एक्सरसाइज है। आंखों की ड्राइनेस, आंखों से निकलने वाला पानी या चुभन आदि के लिए ही नहीं, आंखों को स्वस्थ बनाने के लिए भी पलकों को झपकाना बेहद जरूरी है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Worst Food for Sleeping Problems: नींद की समस्या से जूझ रहे तो इन 8 फूड्स को ब्लैकलिस्ट में डाल दें

Avoid eating these 8 things at night: रात में बार-बार नींद का उचटना या घंटों नींद का न आना आपकी रात में की गई छोटी सी भूल का नतीजा हो सकती है। डिनर के दौरान ली गई खास चीजें आपकी नींद खराब कर सकती हैं। तो चलिए जानें कि नींद खराब करने वाली ये 8 चीजें कौन सी हैं।


शरीर के लिए नींद एक दवा का काम करती हैं, क्योंकि नींद के दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है। अगर नींद में खलल पड़े या रात को अच्छी नींद न आए तो इससे तमाम मानसिक और शारीरिक परेशानियां पैदा होने लगती हैं।8 घंटे की नींद शरीर की रोज की जरूरत है और शरीर की ये खुराक कई बार हमारी ही गलतियों से पूरी नहीं होती।

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Put these 8 foods on the blacklist इन 8 फूड्स को ब्लैकलिस्ट में डाल दें

Alcohol अल्कोहल - रात को सोने से ठीक पहले अगर आप ये सोच कर अल्कोहल लेते हैं कि उनकी दिनभर की थकान उतर जाएगी और बेहतर नींद आएगी तो अपनी सोच को बदल लें,क्योंकि ऐसा कर के वह अपनी नींद ही नहीं हेल्थ को भी चौपट कर रहे हैं। इसमें कैलोरी भी बहुत अधिक होती है जो वेट गेन और डायबिटीज को बढ़ावा देता है।

Pizza- Burger पिज्जा- बर्गर- पिज्जा तो वैसे किसी भी वक्त खाना बेहतर नहीं लेकिन रात में खाना इसे आपके लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। मैदे और कई तरह की सॉस और चीज से मिलकर बना ये पिज्जा हार्टबर्न का कारण होते हैं। वेट और डायबिटीज के साथ हाईबीपी का कारण बन सकता है आपका ये डिनर।

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Chips and snacks चिप्स और नमकीन - रात में खाने के बाद अगर आपकी आदत चिप्स या नमकीन के साथ चाय पीने की है तो इस आदत को आज ही बदल डालें क्योंकि आपके नींद और हेल्थ के लिए इससे बुरी चीज कुछ और नहीं हो सकती है। इन स्नैक्स में बहुत ही अधिक मोनोसोडियम ग्लूटामेट होता है, जो आपको नींद के पैटर्न को धीमे जहर की तरह बिगाड़ता है। साथ ही हाई बीपी, डायबिटीज और वजन बढ़ने के लिए भी ये जिम्मेदार होता है।

Leafy vegetables पत्तेदार सब्जियां - वैसे हरी सब्जियां जेसे ब्रोकली या पत्तागोभी खाना सेहत के लिए अच्छा है लेकिन रात के डिनर में इन्हें लेने से बचें क्योंकि ये गैस पैदा करने का कारण होती हैं। इनमें अघुलनशील फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो लंबे समय तक आपका पेट को भरा रखती है और धीरे-धीरे पचता है। इसे खा कर सोने से ये प्रक्रिया और धीमी होती है इससे ये गैस या पाचन संबंधी अन्य समस्याएं पैदा करने लगती हैं। प्याज, ब्रोकोली, पत्तागोभी, फूल गोभी, खड़े अनाज आदि

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Eat them for dinner इन्हें डिनर में खाएं

Red meat रेड मीट - रेड मीट प्रोटीन और आयरन से भरा जरूर होता है, लेकिन ये आपके डिनर के लिए बेहतर विकल्प नहीं है। इसे खाने के बाद सोने से आपको बेचैनी हो सकती है और आपकी नींद खराब।

Burger or Sandwich बर्गर या सैंडविच- बर्गर में अगर आप खूब सैलेड डाल कर यह सोच कर खा रहे कि ये अब हेल्दी बन जाएगा तो ऐसा नहीं है। बर्गर में मौजूद फैटी फीलिंग्स और सॉस स्वाद में तो लाजवाब हो सकते हैं, लेकिन सेहत के लिए नहीं। ये पेट में एसिड के लेवल को बढ़ा देता हैख् इससे हार्टबर्न की समस्या होती है और रात में खा कर सोते ही यह समस्या तेजी से बढ़ती है जो नींद में खलल का कारण होती है।

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Pasta पास्ता - कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट से भरा पास्ता आपके पेट को भरा महसूस तो करा देगा लेकिन आपकी नींद और सेहत की बैंड बजा देगा। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट, हानिकारक वसा में बदल जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल, बीपी और ह्रदय रोग का कारण बनता है। इसका ग्लासिमिक इंडेक्स बहुत ज्यादा होता है इसलिए ये डायबिटीज का कारण भी हो सकता है। रात में खाने से एसिड फॉर्मेशन बढ़ता है जिससे एसिडिटी और गैस की दिक्कत होती है।

Chaat-Golgappe चाट-गोल्गप्पे- तो याद रखिए इन फूड्स में से कुछ को तो खाने से हमेशा बचें लेकिन कुछ को रात में खाने से बचना चाहिए। ताकि एक बेहतर नींद और बेहतर स्वास्थ्य को पाया जा सके।

Dark Chocolateडॉर्क चॉकलेट- डार्क चॉकलेट में बहुत अधि‍क कैफीन और उत्तेजक पदार्थ होते हैं, जो हृदय को आराम देने के बजाए कार्यशील रखते हैं तथा मस्तिष्क को एक्टिव। ये दिन में लेना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन रात में बेहतर नींद के लिए यह सही नहीं।

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डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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गर्मी में कड़वी व अम्लीय चीजें बढ़ातीं वात दोष, मीठी चीजें लें

Bitter and acidic things increase vata dosha: आयुर्वेद के अनुसार, गर्मी में कफ का शमन और वायु का संचय होने लगता है। इस ऋतु में सूर्य की प्रचंड किरणों और रूखी हवा से शरीर में पानी की कमी होने लगती है। इससे कमजोरी, बेचैनी, उदासी, उत्साह में कमी, थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इन दिनों कड़वी और अम्लीय चीजों को लेने से बचना चाहिए। इनसे शरीर में वायु (वात) का स्तर बढ़ता है।

पेय पदार्थ अधिक लें
इस मौसम में तरल, मीठे, सुपाच्य व शीत गुणों से युक्त पदार्थों का सेवन करें। जैसे- पुरानी साठी के चावल, गेहूं, ठंडाई, सत्तू, दूध, खीर, कैरी, मौसमी, अनार, अंगूर, छिलके वाली मूंग दाल, लौकी, गिलकी, चौलाई, परवल, ककड़ी, हरा धनिया, पुदीना, आम का पना, गुलकंद, पेठा आदि।

खट्टी-कड़वी चीजें न लें
रूखे, बासी, तेज मिर्च-मसाले वाले व तले हुए पदार्थ, अचार, अमचूर, इमली जैसे खट्टे व कड़वे रस वाले खानपान के सेवन से परहेज रखना चाहिए। एल्कोहल और दूसरे नशे से दूर रहें।

अधिक व्यायाम से बचें
सूर्योदय से पहले उठें। सुबह के ठंडे मौसम में घूमें। दिन में घर या ऑफिस में पर्याप्त ठंडा वातावरण होना जरूरी है। शयनकक्ष में हवा का संचार हो या फिर चांदनी में सोएं। अधिक व्यायाम, उपवास और परिश्रम से बचें। सिर पर सीधी धूप न पड़े।


छाछ-सत्तू जरूर लें
4-6 लीटर पानी या तरल पदार्थ लें, जिसमें एक गिलास फलों का रस, राबड़ी (जौ की), सत्तू, छाछ आदि शामिल करें। भोजन में लगभग 2-3 चपाती, 1-1 कटोरी हरी सब्जियां, दाल, दही (रात्रि निषेध), सलाद व फल जैसे खरबूजा, तरबूज जरूर लें।

ये नुस्खे आजमाएं: हरड़ व गुड़ समान मात्रा में लेने से वात व पित्त दोष नहीं होते।। सत्तू को ठंडे पानी में घी व मिश्री मिलाकर पीएं। मुनक्का, फालसा, खजूर, शहद और मिश्री से बना पंचसार पीएं।



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Dry Coconut For Women: सूखे नारियल का सेवन महिलाओं के लिए होता है फायदेमंद, खून की कमी को करता है दूर

Dry Coconut For Women: सूखा नारियल का सेवन करना महिलाओं के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। सूखा नारियल कई सारे पोषक तत्वों के गुणों से भरपूर होता है। सूखा नारियल महिलाओं में होने वाली खून की कमी को दूर करने में मदद करता है।

Dry Coconut For Women: सूखा नारियल का सेवन करना सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। सूखा नारियल में विटामिंस, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीज और सेलिनियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। लेकिन सूखा नारियल महिलाओं के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। ये महिलाओं को कई समस्याओं से दूर रखने में मदद करता है। साथ ही सूखा नारियल महिलाओं में खून की कमी काे दूर करता है। साथ ही प्रेगनेंसी में भी इसका सेवन करना गर्भवती महिलाओं के लिए लाभदायक माना जाता है। इसलिए महिलाओं को अपनी डाइट में सूखा नारियल को जरूर शामिल करना चाहिए। तो आइए जानते हैं महिलाओं को सूखा नारियल से मिलने वाले फायदे के बारे में

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Benefits of eating dry coconut for women महिलाओं के लिए सूखा नारियल खाने के फायदे
1. Beneficial in removing anemia खून की कमी को दूर करने में फायदेमंद
अक्सर ज्यादातर महिलाओं में खून की कमी देखने को मिलती है। खून की कमी को दूर करने के लिए सूखा नारियल का सेवन करना महिलाओं के लिए फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सूखा नारियल में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो महिलाओं में होने वाली खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है। साथ ही इससे आसानी से हीमाेग्लाेबिन बढ़ाया जा सकता है।

2. Beneficial for pregnant women गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद
गर्भवती महिलाओं के लिए सूखा नारियल का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सूखा नारियल में फैटी एसिड मौजूद होता है, जो शिशु के विकास और वृद्धि में मदद करता है। इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं को सूखा नारियल का सेवन जरूर करना चाहिए।

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3. Beneficial in arthritis आर्थराइटिस में फायदेमंद
अक्सर ज्यादातर महिलाएं अर्थराइटिस की समस्या से परेशान रहती हैं। ऐसे में आर्थराइटिस की समस्या से राहत पाने के लिए सूखा नारियल का सेवन करना फायदेमंद माना जाता है। सूखा नारियल में कैल्शियम के साथ अन्य पोषक तत्व के गुण पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं और अर्थराइटिस की समस्या से राहत दिलाते हैं।


4. Beneficial in preventing urine infection यूरिन इंफेक्शन से बचाव करने में फायदेमंद
अक्सर महिलाओं को यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से जूझना पड़ता है। ऐसे में यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से बचाव करने के लिए सूखा नारियल का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि नारियल का सेवन करने से यूरिन इन्फेक्शन बचा जा सकता है। सूखा नारियल यूरिन इंफेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया काे राेकता है। साथ ही इसका सेवन करने से यूटीआई जैसे गंभीर संक्रमण काे भी राेका जा सकता है।

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डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Moth Dal Benefits: मोठ की दाल खाने से सेहत को मिलते हैं ये अद्भुत फायदे, कब्ज की समस्या से मिलती है राहत

Moth Dal Benefits: मोठ की दाल का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। मोठ की दाल के कई सारे पौष्टिक तत्वों के गुणों से भरपूर होता है। मोठ की दाल का सेवन करने से कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

Moth Dal Benefits: मोठ की दाल का सेवन करने से सेहत को कई प्रकार के लाभ मिलते हैं। मोठ दाल मूंग की तरह ही एक दाल है। इसकी गिनती मोटे अनाज के तौर पर होती है। मोठ की दाल में विटामीन बी, प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन, फॉस्फोरस, मैंगनीज और जिंक जैसे पोषक तत्व के गुण पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य से जुड़ी कई सारी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए मोठ की दाल का सेवन करना फायदेमंद होता है। साथ ही ये कब्ज की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। तो आइए जानते हैं मोठ की दाल का सेवन करने से सेहत को मिलने वाले फायदे के बारे में

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Benefits of eating moth dal मोठ की दाल खाने के फायदे
Beneficial in relieving the problem of constipation कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में फायदेमंद
कब्ज की समस्या से राहत पाने के लिए मोठ की दाल का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि मोठ की दाल में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करता है। साथ ही ये पाचन को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।
Beneficial in strengthening muscles मांसपेशियों को मजबूत बनाने में फायदेमंद
मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए मोठ की दाल का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि मोठ की दाल में प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और उनकी मरम्मत करने में मदद करता है। शाकाहारियों के लिए यह प्रोटीन का सबसे बड़ा सोर्स है।

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Beneficial in strengthening bones हड्डियों को मजबूत बनाने में फायदेमंद
हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए मोठ की दाल का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि मोठ की दाल में कैल्शियम और फास्फोरस पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करने में मदद करता है।

Beneficial in reducing stress level स्ट्रेस लेवल को कम करने में फायदेमंद
स्ट्रेस लेवल को कम करने के लिए मोठ की दाल का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि मोठ की दाल में जिंक पाया जाता है, ये शरीर के लिए एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है, जो ऑक्सीडेटिव तनाव को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसका सेवन करने से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का खतरा कम हो जाता है।

यह भी पढ़े-Iodine Rich Foods: स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरूरी है आयोडीन, इन चीजों को अपनी डाइट में करें शामिल

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Iodine Rich Foods: स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरूरी है आयोडीन, इन चीजों को अपनी डाइट में करें शामिल

Iodine Rich Foods: शरीर में आयोडीन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिस तरह स्वस्थ रहने के लिए अन्य पोषक तत्त्व जरूरी है। ठीक उसी तरह से आयोडीन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरूरी होता है। लेकिन शरीर में आयोडीन की कमी होने पर थाइरॉइड की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

Iodine Rich Foods: आजकल के बदलती लाइफस्टाइल और गलत खानपान की वजह से शरीर में आयोडीन की कमी होना एक आम बात है। स्वस्थ शरीर के लिए बहुत जरूरी जाता है। शरीर में अगर आयोडीन की कमी लंबे समय तक बनी रहे तो स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। रोजाना एक व्यक्ति को लगभग 150 माइक्रोग्राम आयोडीन का सेवन करना चाहिए। थायराइड ग्रंथि के लिए आयोडीन बहुत ही जरूरी है।

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क्योंकि थायरॉयड ग्रंथि आयोडीन का इस्तेमाल थायराइड हार्मोन बनाने के लिए करती है। आयोडीन की कमी थाइरॉइड की समस्या पैदा करता है, जिससे थायराइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है। नमक आयोडीन का सबसे अच्‍छा स्‍त्रोत होता है, लेकिन नमक के अलावा भी कुछ फूड्स ऐसे है जो शरीर में आयोडीन की कमी को पूरा करने में मदद करते है। तो आइए जानते है इन फूड्स के बारे में

Foods that make up for iodine deficiency आयोडीन की कमी पूरा करने वाले फूड्स
1. दही
आयोडीन की कमी पूरा करने के लिए दही का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। दही में आयोडीन पाया जाता है, जो दिनभर की आयोडीन की कमी को पूरा करता है। साथ ही पाचन तंत्र को बेहतर रखता है।

2. लहसुन
आयोडीन की कमी पूरा करने के लिए लहसुन का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। लहसुन में आयोडीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर में आयोडीन की कमी पूरा करने में मदद करता है।

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3. भुना आलू
आयोडीन की कमी पूरा करने के लिए भुना आलू का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। आलू के छिल्के में आयोडीन पाया जाता है, जो शरीर में आयोडीन की कमी पूरा करने में मदद करता है।

4. मुनक्का
आयोडीन की कमी पूरा करने के लिए मुनक्का का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। मुनक्का में आयोडीन पाया जाता है, जो शरीर में आयोडीन की कमी पूरा करने में मदद करता है।

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Women Health Care Tips: इन टिप्स को अपनाकर महिला रह सकती हैं स्वस्थ, यहां जानिए सही तरीका

Women Health Care Tips: मां पूरे परिवार की मजबूत धुरी होती है। हर सदस्य का ध्यान रखती है। कई बार तो अपनी सेहत और खानपान की भी अनदेखी कर देती है। कई रिसर्च में सामने आया है कि अगर व्यक्ति खुश रहता है तो वह सेहतमंद भी रहता है। जानते हैं मां को खुश और सेहतमंद रखने के तरीके-

मेंटल हैल्थ है महत्त्वपूर्ण
स्वस्थ रहने के लिए मानसिक स्वास्थ्य बहुत जरूरी है। इसके लिए आपको न केवल दिनचर्या अच्छी रखनी होगी बल्कि लाइफ स्टाइल में बदलाव भी करना होगा।

ऐसे तनाव कम करें
कोई ऐसी गतिविधि न करें, जिससे मां का मानसिक तनाव बढ़े। तनाव बढऩे से शरीर में हार्मोन का असंतुलन होता है। इससे हार्मोन रोग व कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां भी होती हैं।

टिप्स: कोई तनाव है तो परिजनों के साथ साझा करें। 10-15 मिनट मेडिटेशन करें। काम को टालें नहीं। दिनचर्या नियमित रखें। मां के साथ मजेदार गेम्स खेलें। उन्हें इमोशनल सपोर्ट दें। मां को पार्लर वाला ट्रीटमेंट दिलवाएं, जैसे पेडिक्योर, मैनीक्योर, फेस मास्क, बॉडी मसाज आदि।

दिन में भी लें छोटे ब्रेक
नींद का मानसिक स्वास्थ्य से सीधा संबंध है। हर महिला के लिए 7-8 घंटे की नींद बहुत जरूरी है। नींद की कमी से ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्मोन संबंधी बीमारियों की आशंका बढ़ती है। इससे मानसिक सेहत पर भी असर पड़ता है।

टिप्स: अगर महिला को रात में एक-मुश्त नींद लेने का समय नहीं मिल पाता है तो दिन में छोटे-छोटे ब्रेक लें। ध्यान रखें कि सोएं नहीं। यह भी खाने से पहले करें। खाने के बाद सोने से तकलीफ बढ़ती है।

घर में ऐसे करें व्यायाम
महिलाएं व्यायाम की अनदेखी ज्यादा करती हैं। व्यायाम से न केवल शारीरिक सेहत बल्कि मानसिक सेहत भी ठीक होती है।

टिप्स: जिम के लिए समय नहीं है तो घर में ही वॉक करें। स्ट्रेचिंग व्यायाम, योग आदि कर सकते हैं। सीढिय़ां ऊपर-नीचे चल सकती हैं। घर के कार्यों में भी सहयोग करें। इनसे अच्छी स्ट्रेचिंग हो सकती है। ध्यान रखें कि वॉक करते समय पसीना आना चाहिए। साथ ही सांस भी थोड़ी तेज होनी चाहिए।

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बिना उपकरण वाले व्यायाम
कार्डियो: जम्पिंग जैक्स, रस्सी कूदना, स्टार जम्प, सीढिय़ां चढऩा-उतरना, बर्पीज या स्क्वॉट, जॉगिंग आदि।
मजबूती वाले व्यायाम: कुर्सी पर ट्राइसेप्स डिप्स, प्लैंक या साइड प्लैंक, पुशअप, स्क्वॉट या चेयर पॉजिशन, वॉल सिट्स, सिटअप या क्रंचेज, हिप लिफ्ट या ब्रिज पॉजिशन आदि।

डॉक्टरी सलाह से वर्ष में एक बार जांचें जरूरी

रुटीन टेस्ट करवाने में महिलाएं पीछे रहती हैं। इसलिए कई बार उनमें बीमारियां अंतिम स्टेज में पता चलती हैं। वहीं, रुटीन जांचों से खून की कमी (एनीमिया), हड्डियों की कमजोरी (ऑस्टियोपोरेसिस), जननांगों में संक्रमण का भी पता चलता है। 40 वर्ष की उम्र के बाद आंखों, हड्डियों, यूट्रस, हार्ट से संबंधित चेकअप भी जरूरी हो जाते हैं।
30 वर्ष के बाद से ही कुछ जांचें जैसे मेमोग्राम, एचपीवी और पैपस्मीयर डॉक्टरी सलाह पर करवानी चाहिए।
40 वर्ष के बाद से हार्मोन संबंधी दिक्कत होती है। थायरॉइड, शुगर, कैल्शियम, बीपी आदि की जांचें करवा सकती हैं।
50वर्ष के बाद से जांचें हर छह माह में करवाएं। इसमें हृदय रोगों को भी अनिवार्य रूप से शामिल करें।

इस तरह रख सकते हैं मां का ध्यान
डाइनिंग टेबल पर मां को भी बिठाकर खिलाएं। बातें करें।
फैमिली कोई न कोई एक्टिविटी करे, ताकि मां खुश रहे।
मां की तबियत नासाज या किसी बीमारी के लक्षण दिखे तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। इसमें लापरवाही न करें।
हो सके तो सुबह-शाम मां के साथ टहलें। आपके बीच अच्छी बॉन्डिग होगी। वह खुश और स्वस्थ रहेंगी।
हो सके तो मां के लिए खुद भी हैल्दी ब्रेकफास्ट या डिनर बनाएं। ऐसा सप्ताह में कम से कम एक बार जरूर बनाएं।

मां के लिए बनाएं डाइट चार्ट
मां बनने के बाद महिलाओं के शरीर में कैल्शियम, आयरन की कमी हो जाती है। इसी तरह जो महिलाएं मेनोपॉज या इसके बाद वाली स्थिति में होती हैं तो उनमें भी कैल्शियम और दूसरे पोषक तत्त्वों की कमी हो जाती है। इसलिए कोशिश करें कि मां की उम्र और स्थिति के अनुसार डाइट चार्ट बनवाएं।

40 के बाद विशेष ध्यान रखें
40 की उम्र के बाद हर महिला को डाइट में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन डी, आयरन आदि से भरपूर चीजों को शामिल करना जरूरी है। दाल, अनाज, दूध, दही, सलाद, हरी सब्जियां, फल, जूस का सेवन करना बेहद जरूरी है।

मां की सेहत के 5 टिप्स
1. कम उम्र से ही खानपान और दिनचर्या बेहतर रखें।
2. आयरन रिच डाइट लें, ताकि खून की कमी न हो।
3. मेनोपॉज शुरू होने के पहले विटामिन डी और कैल्शियम रिच डाइट लें। रोज एक लीटर दूध पीएं।
4. रोटी-चावल कम, फल-सब्जियां भी ज्यादा मात्रा में खाएं। शरीर में पानी की कमी न होने दें।
5. डॉक्टरी सलाह से नियमित टीके लगवाएं। कुछ टीके ऐसे हैं जो महिला रोगों से बचाव करते हैं।

उम्र के हिसाब से परेशानी
मां की हर उम्र में परेशानी अलग होती है। इसलिए लक्षणों पर ध्यान दें और तत्काल संबंधित डॉक्टर को दिखाएं।



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Friday, 28 July 2023

Ice therapy : 4 डिग्री टेम्प्रेचर में सामंथा रुथ प्रभु ने ली आइस बाथ थेरेपी , जाने क्या है फायदे

Samantha Ruth Prabhu took ice bath therapy in 4 degree temperature :4 डिग्री टेम्प्रेचर में सामंथा रुथ प्रभु ने ली आइस बाथ थेरेपी , जाने क्या है फायदे

सामंथा ने अपने इंस्टाग्राम से एक 6 मिनट का वीडियो जारी किया है जिसमें वह 4 डिग्री टेम्प्रेचर में आइस बाथ लेती नजर आ रही हैं । आइस बाथ लेने से मसल्स पेन और स्वेलिंग में आराम मिलता है।

जानें आइस बाथ से क्या क्या फायदे हैं :

-आइस बाथ से मसल्‍स , टिश्यूज और जॉइंट पेन में राहत मिलती है । इन सब की जरुरत अक्सर एथलीट या फिर बॉडी बिल्डर को पड़ती है । क्यूंकि ज्यादा वर्कआउट और हैवी वेट लिफ्टिंग की वजह से उन्हें मसल और जॉइंट पेन की समस्या ज्यादा हो होती है। इसके अलावा यह स्वेलिंग और स्वेलिंग की वजह से आई हुई रेडनेस में भी आइस बाथ से रहत मिलती है ।

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-आइस बाथ डिप्रेशन के मरीजों के लिए भी बहुत कारगर थेरेपी है इससे डिप्रेशन लेवल कम होता है और बॉडी रिलैक्स हो जाती है । अगर आपको डिप्रेशन या स्ट्रेस हो रहा है तो आपको यह थेरेपी जरुर लेनी चाहिए । इसके साथ ही आइस थेरेपी आपके डाइजेशन को भी सही रखने और मजबूत बनाने में मदद करता है ।

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-अगर आपको नींद नहीं आती है तो या नींद न आने की समस्या या बिमारी इन्सोम्निया की परेशानी है तो आपके लिए ये थेरेपी किसी चमत्कार से कम नहीं है । ऐसा इसलिए है क्यूंकि यह ठंडा पानी हमारे दिमाग की नसों को शांत कर देता है इसके साथ ही साथ यह हमारे नर्वस सिस्टम को भी काफी राहत पहुंचता है ।

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-लोग इसका इस्तेमाल गर्मी और बारिश के मौसम में भी करते हैं जब बहुत ज्यादा उमस रहती है । जो लोग स्ट्रेस की वजह से बेहद परेशान है। यह थेरेपी उनके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है । इसके साथ ही आइस थेरेपी से आपकी इम्युनिटी भी मजबूत होती है ।

-आइस थेरेपी आपको एनर्जेटिक भी बनाती है क्यूंकि शरीर एक बार के लिए पूरा रेक्सअल हो जाता है। और फिर पूरी तरह रिलैक्स होने के बाद जब हम वापस काम करने लगते है तो हम जोश से भरे हुए होते है ।

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-आइस थेरेपी की वजह ब्लड हमारे इंटरनल ऑर्गन्स के सेल्स को हमारी स्किन के सरफेस पर ले आता है जिसकी वजह से आपको एनर्जेटिक महसूस होता है । क्यूंकि पूरी तरह रिलैक्स होने के बाद जब हम वापस काम करने लगते है तो हम जोश से भरे हुए होते है ।

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डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Thursday, 27 July 2023

Milk With Ghee Benefits: अमृत के समान है दूध में घी मिलाकर पीना, जोड़ों के दर्द में फायदेमंद

Milk With Ghee Benefits: दूध में घी मिलाकर सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। दूध और घी कई सारे पोषक तत्वों के गुणों से भरपूर होता है। दूध और घी का एक साथ सेवन करने से पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद मिलती है।

Milk and Ghee Benefits: दूध और घी का सेवन करने से सेहत को कई तरह के लाभ मिलते हैं। दूध और घी कई सारे पोषक तत्वों के गुणों से भरपूर होता है। लेकिन जब दूध में घी मिलाकर सेवन करते है तो लाभ दोगुने बढ़ जाते हैं। घी में भरपूर मात्रा में विटामिन ए, विटामिन के, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। तो वहीं दूध में विटामिन डी, प्रोटीन, कैल्शियम की भरपूर गुण पाए जाते है, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। दूध और घी का एक साथ सेवन करने से अनिद्रा की समस्या दूर होती है। साथ ही इनका एक साथ सेवन करने से पाचन शक्ति भी बढ़ती है। तो आइए जानते हैं दूध में घी मिलाकर सेवन करने से सेहत को मिलने वाले फायदे के बारे में

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दूध में घी मिलाकर पीने के फायदे
1. पाचन शक्ति बढ़ाने में फायदेमंद
पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए दूध में घी मिलाकर पीना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि दूध में घी मिलाकर पीने से शरीर के अंदर एंजाइम्स रिलीज होते हैं, जिससे पाचन शक्ति बढ़ाती है। साथ ही ये एंजाइम डाइजेशन को बेहतर रखने में मदद करते हैं और पेट की समस्याओं को भी दूर करने में मदद करते हैं।

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2. अनिद्रा की समस्या को दूर करने में फायदेमंद
अनिद्रा की समस्या को दूर करने के लिए दूध में घी मिलाकर पीना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि रात में सोने से पहले दूध में घी मिलाकर पीने से अनिद्रा की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है और दिमाग भी शांत रहता है।

3. जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में फायदेमंद
जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए दूध में घी मिलाकर पीना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि इनका एक साथ सेवन करने से जोड़ों के दर्द कम होते हैं और सूजन में भी राहत मिलती है। इसके अलावा दूध में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिससे हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

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4. मुंह के छाले को ठीक करने में फायदेमंद
मुंह के छाले को ठीक करने के लिए दूध में घी मिलाकर पीना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि इनका एक साथ सेवन करना मुंह में छाले की समस्या में रामबाण की तरह काम करता है। इसलिए इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए दिनभर में एक बार दूध में घी मिलाकर जरूर पीना चाहिए।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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देश में 2000 से 2019 के बीच कैंसर से पुरुषों की तुलना में महिलाओं की मौतें ज्यादा, कुल केस बढ़े

भारत में कैंसर से पुरुषों की तुलना में महिलाओं की मौत अधिक होती है। राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर मृत्यु दर के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि 2000 से 2019 के बीच पुरुषों में कैंसर मृत्यु दर में सालाना 0.19 फीसदी की गिरावट आई है, लेकिन महिलाओं में 0.25 फीसदी की वृद्धि हुई है। कैंसर से मौतों के मामलों में 0.02 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अध्ययन में भारतीयों में होने वाले 23 प्रमुख कैंसर के कारण होने वाली मृत्यु दरों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि इन 19 साल में कैंसर से 1.28 करोड़ से अधिक लोगों की मौत हुई। सबसे अधिक बढ़ोतरी पैंक्रियाज कैंसर में 2.7 फीसदी (पुरुषों में 2.1 फीसदी और महिलाओं में 3.7 फीसदी) हुई। थायरॉइड (0.6%) और पित्ताशय (0.6%) कैंसर को छोडक़र सभी सामान्य कैंसर में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की मृत्यु दर अधिक थी। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में गले के कैंसर की मृत्यु दर छह गुना अधिक थी।

गर्भाशय, स्तन कैंसर से 17.6 फीसदी मौतें

फेफड़े (2.9 फीसदी), मेलेनोमा (2.5 फीसदी), मूत्राशय (2.3 फीसदी), मुंह और ऑरोफरीनक्स (2.2 फीसदी) और यकृत (1.9 फीसदी) कैंसर में महिलाओं और पुरुषों की मृत्यु दर समान थी। महिलाओं में गर्भाशय कैंसर, अंडाशय और स्तन कैंसर के कारण 17.6 फीसदी मौतें हुईं। पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर से 3.7 फीसदी मौतें हुईं।

इन मामलों में कमी..

अध्ययन डब्ल्यूएचओ के सहयोग से किया गया। जेसीओ ग्लोबल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक भारत में फेफड़े, स्तन, कोलोरेक्टम, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा, पित्ताशय, अग्न्याशय, गुर्दे और मेसोथेलियोमा के कैंसर के कारण मृत्यु दर में वृद्धि हुई है। वहीं पेट, अन्नप्रणाली, ल्यूकेमिया और मेलेनोमा कैंसर से मृत्यु के मामलों में कमी आई है।



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Sava Health Benefits: सांवा में चावल से मिलेंगे 30 गुना ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट, गंभीर रोगों से बचाव में कारगर

Sava Health Benefits: सांवा या समा के चावल, ये भी एक तरह का मोटा अनाज हैं, जो मुख्य रूप से व्रत में खाते हैं। इन्हें मोरधन भी कहते हैं। ये छोटे और गोल होते हैं, लेकिन पोषकता में ये फाइबर और प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत हैं। 100 ग्राम सांवा में 3 ग्राम प्रोटीन, एक ग्राम फैट और 32 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होते हैं।

 

डायबिटीज रोगियों के लिए गुणकारी
सांवा खाने से ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। यह लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला अनाज है, इसलिए यह धीरे-धीरे पचकर शरीर को एनर्जी देता है। इसमें आयरन की मात्रा काफी होती है, जिससे आयरन की कमी के चलते होने वाले रोग एनीमिया में यह राहत दे सकता है। समा के चावल में सोडियम की मात्रा नहीं होती है। ऐसे में शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सामान्य रखने में मदद मिलती है। इसे हर रोगी खा सकता है।

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अनार से 5 गुना ज्यादा आयरन
सांवा में सामान्य चावल के मुकाबले 30 गुना ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। यह एंटीएजिंग का काम करता है। बढ़ी उम्र को रोकता है। इसमें अनार की तुलना से 5 गुना अधिक आयरन है। महिलाओं के लिए उपयोगी आहार है। थकान और चक्कर की समस्या में राहत मिलती है। जिन्हें लो शुगर की समस्या उन्हें इसे कम मात्रा में खाना चाहिए। इस रूप में खाएं सांवा : व्रत की खिचड़ी, पूड़ी, कचौरी, पुलाव, डोसा, खीर, चकली, इडली, उत्तपम, टिक्की, चीला, पकौड़े आदि भी बना सकते हैं।

 

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सांवा के अन्य फायदे
समा के चावल में प्रोटीन भी उच्च स्तर पर मौजूद होता है। जिससे शरीर हल्का और एनर्जेटिक बना रहता है। इसके अलावा शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। समा के चावल ग्लूटेन फ्री होते हैं। इससे शरीर सभी तरह के पोषक तत्त्वों को आसानी से अवशोषित करने में मदद मिलती है।
कब्ज की परेशानियों से राहत दिलाने में यह फायदेमंद हो सकते हैं। इसमें घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर भरपूर रूप से होते हैं।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Tips for Protein Consumption: दूषित पानी व फैटी फूड से होती दिक्कत तो प्रोटीन लें ज्यादा

Tips for Protein Consumption: गर्मी में पेट की बीमारियों के मरीज बढऩे का मुख्य कारण दूषित भोजन और पानी का सेवन करना है। इस मौसम में उल्टी-दस्त, पीलिया और तापघात यानी हीट स्ट्रोक की आशंका होती है।

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एक्यूट गैस्ट्रोएंट्राइटिस
तापमान ज्यादा होने से खाद्य पदार्थ जल्दी दूषित होने लगते हैं। इनसे आंतों में संक्रमण होने लगता है और सूजन के चलते उल्टी-दस्त और बुखार, पेटदर्द, जी मिचलाना, कमजोरी, चक्कर, दस्त में खून या आंव आदि भी इसके लक्षण हैं।

 

उपचार: ओरआरएस पाउडर पानी के साथ लें। बचाव के लिए शरीर में पानी की कमी न होने दें। गंभीर समस्या में डॉक्टरी परामर्श लें।

यह भी ध्यान रखें: वायरल हैपेटाइटिस में लिवर फेलियर की आशंका होती है। यह गर्भावस्था में भी संभव है।

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पीलिया
दूषित भोजन व पानी या बाहरी तरल पदार्थ, गन्ने का दूषित रस इसके लिए जिम्मेदार हैं। इसमें आंखों के साथ ही पेशाब का रंग भी पीला हो जाता है। इसमें डॉक्टर को दिखाएं।

 



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Exercise in Summer: गर्मी में एक्सरसाइज करें तो सिर्फ पानी पर न रहें निर्भर, गंभीर हो सकते हैं परिणाम

Exercise in Summer: गर्मी में व्यायाम कर रहे हैं तो केवल ज्यादा पानी पीने मात्र से सुरक्षा नहीं हो सकती है। बचाव के लिए व्यायाम के तरीके, समय में बदलाव व हाइडे्रशन पर ध्यान देना जरूरी है।

इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स
अधिक पसीने से शरीर से लवण निकल जाते हैं। इसलिए इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स पीएं। एक लीटर पानी में एक ग्राम नमक व 5 ग्राम चीनी मिलाकर पीएं। नमक सोडियम की पूर्ति करता है व चीनी एनर्जी देने के साथ शरीर में लवण को रोककर भी रखता है।

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डांस और स्विमिंग भी
इस समय हैवी वर्कआउट से बचें। अभी स्विमिंग या डांसिंग बेहतर होगा। स्विमिंग से 30 मिनट में करीब 250 और डांस से 200-400 कैलोरी तक बर्न किया जा सकता है।

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कब रोकें एक्सरसाइज
इस मौसम में दिक्कतें भी होती हैं। व्यायाम से असहज महसूस कर रहे हों, जैसे धड़कन बढऩा, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, उल्टी आने जैसा महसूस होना तो तत्काल व्यायाम रोक दें और शरीर को अधिक आराम दें।

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उपायों पर ध्यान दें
व्यायाम के लिए सुबह या देर शाम का समय चुनें।
गर्मी में माइल्ड-टु-मॉडरेट एक्सरसाइज ही करें। धीमे-धीमे कसरत बढ़ाएं।
वर्कआउट से पहले और बाद में खूब पानी पीएं। बीच-बीच में भी पानी पी सकते हैं।
जिम से सीधे निकलकर धूप में न जाएं। तापमान का ध्यान रखें।
लंबे समय तक खाली पेट न रहें। चाय-कॉफी कम लें।

 

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Rules of Eating Fruits: पेट में जाते ही जहर बन जाएंगे फल, अगर आप भी करते हैं ये गलतियां

Rules of Eating Fruits: फलों का सेवन करना हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। यह हमारे शरीर को प्रचूर मात्रा में फाइबर और पोषक तत्वों की आपूर्ति करते हैं। फलों में कई सारे विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। जो बीमारियों को दूर रखने में कारगर हैं। हमेशा लोकल और मौसमी फलों को प्राथमिकता देनी चाहिए। क्योंकि लोकल फल ताजे और आसानी से मिल जाते हैं। क्या आपको पता है कि फल खाने के भी कुछ नियम होते हैं। जिसका पालन करना बहुत जरूरी है। अगर इनका ध्यान नहीं रखेंगे तो बीमार पड़ सकते हैं।

फल खाने फायदे
नियमित फल खाने के बहुत सारे फायदे हैं। इससे हमारे शरीर को जरूरी पोषण मिलता रहता है, जो दिल व दिमाग के लिए फायदेमंद है। इनका सेवन पेट के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है। एक्सपर्ट के मुताबिक फल खाते हुए कुछ नियमों का पालन करना चाहिए।


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हमेशा खाएं पके फल
हमे हमेशा पके हुए फल खाना चाहिए। इससे एसिडिटी, एसिड रिफ्लक्स, हार्टबर्न, गैस, ब्लोटिंग जैसी पेट की कोई भी समस्या नहीं होगी। क्योंकि अधपके फल खाने से आपको पेट संबंधी समस्या हो सकती है।

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खाएं मौसमी फल
हमे हमेशा मौसम के मुताबिक फलों का सेवन करना चाहिए। ऐसे करके आप पैसे के साथ-साथ अपनी सेहत की रक्षा भी कर सकते हैं। जहां गर्मियों में रसीले फल की आवश्यकता ज्यादा होती है, वहीं सर्दियों में गर्मी देने वाले फूड खाने चाहिए। इसलिए मौसमी फलों का सेवन जरूर करें।

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फल के साथ ना खाएं डेयरी प्रॉडक्ट
दूध-दही आदि चीजों के साथ फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। इन्हे खाने से गट हेल्थ बिगड़ जाती है और आपको पेट की तकलीफ हो सकती है। हमेशा इससे बचने की कोशिश करें।

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ना खाएं ज्यादा
किसी भी चीज को जरूरत से ज्यादा नहीं खाना चाहिए। क्योंकि ज्यादा खाने से इसके साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। ज्यादा खाने से गैस, अपच, ब्लोटिंग, पेट दर्द जैसी समस्या हो सकती है।

 

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अब बालों के झड़ने को कहें बाय - बाय और अपनाए यह बेहतरीन उपाय

अब बालों के झड़ने को कहें बाय - बाय और अपनाए यह बेहतरीन उपाय

आज कल बाल झड़ना एक आम समस्या हो गई है । आपके आस-पास हर दूसरा आदमी इस समस्या से जूझ रहा है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सब इसका शिकार हो चुके हैं । हजारों रुपये के शैंपू और ऑयल लगाने के बाद भी हालत में कोई सुधार नहीं है। बालों झड़ने से रोकने के लिए अलग-अलग उपचार और नुस्खे मौजूद हैं, आयुर्वेद के साथ-साथ कई प्राकृतिक और प्रभावी समाधान भी हैं ।

बालों झड़ने की समस्या के लिए आंवला और करी पत्ते किसी चमत्कार से कम नहीं हैं । बाल झड़ने से रोकने के लिए आप आंवला के साथ दूसरी अन्य चीजें भी उसमें शामिल कर सकते हैं जिससे आपके बालों को एक नया जीवन मिलने के साथ आपके बाल काले घने और सुंदर हो जाएंगे।

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सप्ताह में एक बार आंवले के साथ इस्तेमाल करें यह और देखे एक अनोखा परिवर्तन।

1.होम मेड आंवला और करी पत्ते का हेयर ऑयल

बालों को झड़ने से बचाने के लिए सबसे फायदेमंद तरीका आंवला है की आप करी पत्ते का ऑइल घर पर ही बनाए। आंवले को छोटे छोटे टुकड़ों में काट लें और सुखाकर पाउडर बनालें और इस पाउडर को करी पत्तोंमें के थिक पेस्ट में मिला और कोकोनट ऑयल (coconut oil) के साथ मिला लें । यह बालों की जड़ों को मजबूत करने के साथ साथ आपके बालों की ग्रोथ को भी बहुत तेजी से बढ़ा देगा । अच्छे परिणाम पाने के लिए आप इस मिश्रण को शैम्पू करने से एक रात पहले लगाए ।

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2. डीप कंडीशनिंग के लिए आंवला और करी पत्ते का हेयर मास्क

यह हेयर मास्क बालों को सभी जरुरी नुट्रिएंट्स देने के साथ यह हेयर फॉलिकल्स को मजबूती देता है , बाल टूटने से बचता है (hair breakage) और बालों में शाइन बढ़ा लाता है । आंवला पाउडर और करी पत्ते को बारीक पीसकर दही के साथ मिलाकर एक थिक पेस्ट तैयार करें और इसे अपनी रूट्स (hair roots) से लेकर बालों की पूरी लेंथ तक लगाए । शैम्पू से एक घंटा पहले इसे लगालें । बेहतर रिजल्ट्स पाने के लिए इस मास्क को हफ्ते में दो बार लगाए।

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3.आंवला और करी पत्ते से तैयार किया गया टॉनिक

बालों को स्कैल्प से मजबूत करने के लिए घर पर ही तैयार करें यह टॉनिक जो बालों का बालों का गिरना रोकने से लेकर बालों के विकास को दोबारा बढ़ाएगा। आंवला और करी पत्तों को पानी में उबाल लें और पानी आधा रह जाए इतना उबालना है। मिश्रण को ठंडा होने तक छोड़ दें और ठंडा होने के बाद इसे साफ कपड़े की मदद से छान लें । शैम्पू करने के बाद स्प्रे बोतल की मदद से इसे बालों की रूट्स तक लगाए। इस टॉनिक का प्रयोग आप सप्ताह में 3 दिन कर सकते हैं ।

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4.डेली डाइट में आंवला और करी पत्ता

अपनी डेली डाइट (daily diet) में हमें आंवला और करी पत्ते के इस कॉम्बो का उपयोग करना चाहिए क्यूंकि इसके खाने से हेयर हेल्थ (hair health) को फायदा होगा आप डेली खली पेट सुबह आंवले का जूस डेली पी सकते है इससे आपके बालों को मजबूती मिलेगी और इसके साथ ही आपका डाइजेस्टिव सिस्टम (digestive system) भी अच्छा रहेगा और यह वजन काम करने में भी सहायक है । आंवला बालों को तेजी से बढ़ाने मजबूती देने में मदद करता है क्यूंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट (antioxidant) होते हैं ।

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