Wednesday, 30 June 2021

National Doctors Day 2021: भारत में एक जुलाई के दिन ही क्यों मनाया जाता हैं डॉक्टर्स डे, जानिए इसकी ख़ास वजह

National Doctors Day 2021: कोविड-19 महामारी में डॉक्टर्स कम्यूनिटी ने अपनीअहम भूमिका निभाई है। डॉक्टर्स अपनी जान की परवाह किए बिना ही देश सेवा में लगे हुए हैं। भारत में आज यानि एक जुलाई के दिन नेशनल डॉक्टर डे मनाया जाता है। यह देश सेवा में डॉक्टरों के महत्वपूर्ण योगदान को याद करने के लिए मनाया जाता है। डॉक्टर को भवन के रूप में देखा जाता है।

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आज यानि एक जुलाई के दिन देश के महान डॉक्टर बिधानचंद्र रॉय की पुण्यत‍िथ‍ि भी है। इस दिन को यादगार बनाने के तौर पर डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। इस खास दिन को डॉक्टर डे के रूप में मनाने के लिए केंद्र सरकार ने 1991 में शुरुआत की थी। डॉ. बिधानचंद्र रॉय महान चिकित्सक होने के साथ ही पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। इनका जन्म 1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना जिले के खजांची में हुआ था। रॉय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देश में ही और उच्च शिक्षा इंग्लैंड में रहकर पूरी की थी।

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चिकित्सा से राजनीती में
डा. विधानचंद्र रॉय समाजसेवी, आंदोलनकारी और प्रखर वक्त भी थे। डा. रॉय आजादी की लड़ाई में असहयोग आंदोलन का हिस्सा भी रहे। लोग उन्हें महात्मा गांधी और नेहरू के डॉक्टर के तौर पर पहचानते थे। राजनीती की तरफ उन्होंने महात्मा गांधी के कहने पर रुख किया था। वे बंगाल के द्वितीय मुख्यमंत्री बने। बिधानचंद्र रॉय ने सियालदाह से अपने करियर की शुरुआत की थी। वे अपनी कमाई को दान कर दिया करते थे।

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बिधानचंद्र रॉय का चिकित्सा ही नहीं समाज के प्रति योगदान को भी कभी नहीं भुलाया जा सकता। आज के डॉक्टर्स के लिए एक आदर्श के तौर पर हैं। आजादी के आंदोलन में घायल हुए देशवासियों की निस्वार्थ भाव से सेवा की।

 

National Doctors Day 2021

 

कोरोनाकाल में डॉक्टर्स की भूमिका
डॉक्टर्स को देश में भगवान के रूप में ऐसे ही नहीं देखा जाता। डॉक्टर सच में भगवान का दूसरा स्वरुप होता है। कोरोना संक्रमण के समय जब मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा था, उस समय डॉक्टर्स बिना रुके अपना काम मुस्तैदी के साथ कर रहे थे। बहुत से डॉक्टर्स ऐसे थे, जिन्होंने करोनकाल में अपने घरवालों से दूरी बना ली थी। वीडियो कालिंग के जरिए ही परिवार से रूबरू होते थे। मौत से सीधा सामना करते हुए अपना कर्तव्य निभाने वाले डॉक्टर्स के सम्मान में यह दिन कुछ ख़ास है। आज के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को संबोधित भी करेंगे।

Web Title: National Doctors Day 2021: Know about history and significance of this day



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Glowing skin home remedies :- चमकदार ग्लोइंग त्वचा के लिए अपनाएं यह घरेलू उपाय

महिलाओं और लड़कियों के लिए अपनी skin की देखभाल करना सबसे अहम काम होता है। क्योंकि जिस की त्वचा जितनी अच्छी होगी। वो उतनी ही खूबसूरत दिखेगी। ऐसे में वे कई बाजार के प्रोडक्ट का भी इस्तेमाल करती है। लेकिन अगर आप इन घरेलू उपाय का सहारा लेंगे। तो निश्चित ही कम खर्चे में आपकी त्वचा में गजब का निखार आएगा।

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इस कारण होती है समस्या-

धूल, धूप, प्रदूषण आदि कारणों से त्वचा बेजान और रूखी हो जाती है। चेहरे पर झुर्रियां, रेडनेस, कील मुंहासे आदि भी होने के कारण आपकी खूबसूरती प्रभावित होती है। अगर आप भी ऐसी ही किसी समस्या से जूझ रही है। तो अपनी त्वचा को हाइड्रेट और ग्लोइंग रखने के लिए इन घरेलू उपाय का लाभ लें।

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चावल का पानी इस्तेमाल करें-

चावल के पानी में एंटीऑक्सीडेंट, प्रोटीन, स्टार्च भरपूर मात्रा में होता है। जो आपकी त्वचा को चमकदार बनाए रखने में मदद करता है। इसके लिए आप पहले चावल को अच्छे से धो कर साफ़ कर ले। फिर चावल को उबालकर उसका पानी एक बाउल में निकाल कर करीब 2 से 3 घंटे के लिए फ्रिज में रखें। जब यह पानी बर्फ की तरह जम जाए तब अपने चेहरे पर लगाएं।

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खीरे का इस्तेमाल करें-

खीरा आपकी त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन सी और कैफीक एसिड होता है। जो त्वचा में आई सूजन को कम करता है। त्वचा को हाइड्रेट करता है और आपके चेहरे में निखार लाता है। इसके लिए आप की खीरे की फ्यूरी बना लें और उसमें नींबू के रस की कुछ बूंदें डालकर एक चम्मच शहद के साथ मिलाएं। इस मिश्रण को फ्रिज में ठंडा कर आइस क्यूब के रूप में जमा लें। फिर चेहरे से लेकर गर्दन तक पर मसाज करते हुए लगाएं। ऐसा करने के बाद अपने चेहरे को हल्के गुनगुने पानी से आधे घंटे बाद धो लें।

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गुलाब और दालचीनी का उपयोग करें-

चेहरे में निखार लाने के लिए आप गुलाब और दालचीनी का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप दालचीनी की स्टिक, दो चम्मच गुलाब की पंखुड़ियां और दो कप पानी मिलाएं। अब इन सभी को अच्छे से गर्म करें। जब इसका रंग ब्राउन ऑरेंज कलर हो जाए। तब इस मिश्रण को फ्रिज में ठंडा कर आइस क्यूब बनाएं और फिर इसे चेहरे पर इस्तेमाल करें। आपके चेहरे पर गजब का निखार आएगा।



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Insomnia Problem :- नींद नहीं आने की समस्या से परेशान हो गए हैं, तो जीवन शैली में करें यह बदलाव

पर्याप्त नींद नहीं आने के कारण व्यक्ति अपने आपको थका कमजोर और बीमार सा महसूस करता है। क्योंकि उसके शरीर को पूर्ण रूप से आराम नहीं मिल पाता है। ऐसे में वह लगातार अनिद्रा का शिकार होने के कारण कई बीमारियों से भी घिर जाता है। इसलिए जरूरी है कि आप रोजाना 8 घंटे जरूर नींद लेें। अगर आपको पर्याप्त नींद नहीं आ रही है। तो अपनी जीवनशैली में यह बदलाव जरूर करें।

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मेडिटेशन करें -

आप अनिद्रा के कारण परेशान हो चुके हैं। तो आपको ध्यान लगाना चाहिए। आप किसी शांत जगह पर बैठकर गहरी सांस लें और आंख बंद करके अपनी सांस को महसूस करें। यह प्रक्रिया आप रोज 5 से 7 मिनट कर सकते हैं। धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर 20 मिनट तक ले जाए। रोजाना इस प्रकार ध्यान लगाने से आपका तनाव कम होगा और आप खुद की भावनाओं पर कंट्रोल कर पाएंगे। इससे आपको नींद भी बेहतर आएगी और आप बिना किसी दिक्कत के सो सकेंगे।

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भगवान का नाम लें-

दिमाग को शांत और स्वस्थ रखने के लिए आपको मंत्र जाप करना चाहिए। अगर आपको नींद नहीं आ रही है। तो आप कोई मंत्र का जाप करें। अगर आपको कोई मंत्र भी नहीं आता है। तो आप ओम, जय श्री राम, जय श्री राम या ओम नम: शिवाय आदि का जाप कर सकते हैं। इससे आपको बेहतर महसूस होगा और जल्दी नींद आ जाएगी।

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रोज व्यायाम करें-

अपने आप को फिट और तंदुरुस्त रखने के लिए एक्सरसाइज बहुत अच्छा तरीका है। अगर आप अनिद्रा से परेशान हैं। तो व्यायाम करने से आपको इस समस्या से छुटकारा मिलेगा। आप रोजाना गहरी नींद सो पाएंगे।

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योग प्राणायाम करें -

अच्छी नींद लेने के लिए योग और प्राणायाम बहुत ही फायदेमंद होता है। योग करने से आपके मसल्स को काफी आराम मिलता है और माइंड भी शांत रहता है। इसके लिए आप चाहे तो किसी योग गुरु से मार्गदर्शन भी ले सकते हैं।



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Badam Milk :- सेहत और सुंदरता के लिए बहुत फायदेमंद है बादाम का दूध, इस तरह करें सेवन

वैसे तो बादाम का सेवन लोग कई प्रकार से करते हैं। लेकिन Badam milk का सेवन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि बादाम में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। दूध भी कैल्शियम से भरपूर होता है। जो शरीर को मजबूत करने के साथ ही हड्डियों को भी स्ट्रांग बनाता है। इसलिए बादाम का दूध रोज पीना चाहिए।

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बादाम के दूध के फायदे-

बादाम का दूध विटामिन ए से भरपूर होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते हैं। यह आंखों को स्वस्थ रखने के लिए मददगार होता है। इसी के साथ तनाव को भी दूर करता है। इसका रोजाना सेवन करने से मोतियाबिंद सहित आंखों से जुड़ी कई बीमारियां दूर होती है।

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हार्ट को स्वस्थ रखने में मददगार-

बादाम का दूध पीने से हार्ट स्वस्थ रहता है। हमारा इस दूध में कोलेस्ट्रॉल या सैचुरेटेड फैट नहीं होता है। इसमें पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड होता है।यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। बादाम के दूध में विटामिन ई होता है। जो हृदय को स्वस्थ रखने में काफी फायदेमंद माना जाता है।

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हड्डियों के लिए बेहतर -

बादाम के दूध का सेवन हमारी हड्डियों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि दूध में कैल्शियम होता है। इसी के साथ में विटामिन डी भी होता है। जो हड्डियों को मजबूत करने में मदद करता है।

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त्वचा के लिए अमृत -

बादाम का दूध विटामिन ई से भरपूर होता है। इसलिए यह त्वचा के लिए अमृत के समान होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते हैं।।जो त्वचा को निखारने में मददगार होते हैं। इसका सेवन करने से आपके शरीर को कई फायदे होते हैं।

इम्युनिटी होगी स्ट्रांग-

बादाम का दूध हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मददगार होता है। क्योंकि इसमें विटामिन ए, डी और मिनरल्स होते हैं। इसके साथ ही इसमें आयरन और विटामिन बी भी होता है । जो आपकी सेहत के लिए फायदेमंद है।



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Diet Plan :- अस्थमा अटैक से बचने ऐसा बनाएं डाइट प्लान, इन चीजों को करें आहार में शामिल

अस्थमा ऐसी बीमारी है। जिसके कारण व्यक्ति अंदर ही अंदर खोखला होता जाता है। ऐसे में समय रहते Asthma पर ध्यान देना जरूरी है।ताकि किसी गंभीर अवस्था का सामना नहीं करना पड़े। इसलिए हमें अपनी डाइट में कुछ चीजों को शामिल करते हुए अपना डाइट प्लान बेहतर बनाना होगा।

दरअसल, कोरोना काल में स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। ऐसे में उन लोगों को ध्यान देने की अधिक जरूरत है। जो किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसे में अस्थमा और अटैक से पीड़ित लोगों को भी ध्यान देने की बहुत जरूरत है। क्योंकि ऐसे लोगों पर कोरोना वायरस का कहर अधिक बरपता है।

अस्थमा से पीड़ित लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। साथ ही खांसी और घबराहट भी होती है। वही अटैक का मुख्य कारण शरीर में बलगम और श्वास नली संकीर्ण होना है। अस्थमा के अटैक के कई कारण होते हैं। इसलिए अस्थमा के रोगी इनहेलर लेकर अपने आप को तुरंत ठीक करने की कोशिश करते हैं। अस्थमा के रोगियों को अपनी डाइट पर विशेष ध्यान देना होगा।

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अस्थमा के रोगी इन चीजों का करें सेवन-

यह फूड्स खाएं-

अस्थमा के रोगियों को विटामिन सी से भरपूर फूडस का सेवन करना चाहिए। क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते है। जो फेफड़ों को की सुरक्षा करने में मददगार होता है। जो लोग विटामिन सी युक्त पदार्थों का सेवन करते हैं। उन्हें अस्थमा अटैक का खतरा भी कम होता है। इसलिए आप संतरा, ब्रोकली, कीवी आदि चीजें डाइट में शामिल करें।

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शहद-दालचीनी का करें सेवन-

अस्थमा के रोगियों को शहद और दालचीनी का सेवन करना चाहिए। इसके लिए रात में सोने से पहले तीन चुटकी दालचीनी और एक चम्मच शहद मिलाकर लेने से फेफड़ों को आराम मिलता है। इससे फेफड़ों से जुड़ी कई समस्याएं दूर होती है।

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तुलसी का करें सेवन -

अस्थमा के रोगियों को तुलसी का सेवन करना चाहिए। इसके लिए चाय में दो से तीन पत्ती तुलसी के डाल कर खूब उकालें। इससे अस्थमा अटैक की आशंका कम हो जाती है।

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रोजाना खाएं दाल-

आपको बता दें कि दाल प्रोटीन का अच्छा सोर्स होता है। इसलिए आप मूंग, चना, सोयाबीन आदि दालें का सेवन करें। जो आपके स्वास्थ्य के लिए बेहतर होती हैं। दाल फेफड़ों को भी मजबूत बनाती है और संक्रमण से दूर रखती है।

हरी सब्जियां खाएं-

स्वास्थ्य के लिए हरी सब्जियां बहुत फायदेमंद होती है। अगर आप के फेफड़ों में कफ जमा होता है, तो हरी सब्जियां खाएं। इससे अस्थमा अटैक की आशंका कम होती है। इम्यून सिस्टम भी बेहतर होता है।



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Tuesday, 29 June 2021

Vitamin B12 :- स्वस्थ रहने के लिए शरीर को चाहिए विटामिन B12, इन स्रोतों से करें रोजाना पूर्ति

हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए Vitamin B12 बहुत आवश्यक होता है। क्योंकि इसमें वह सब तत्व होते हैं। जो हमारे दिमाग, मांसपेशियों और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि आप विटामिन B12 किन किन स्रोतों से प्राप्त कर सकते हैं।

दरअसल शरीर को व्यवस्थित रूप से काम करने के लिए खनिज, प्रोटीन, विटामिन सभी जरूरी होते हैं। अगर शरीर में किसी भी विटामिन की कमी होती है। तो यह शरीर के लिए ठीक नहीं होता है।

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एनीमिया की होती समस्या-

विटामिन B12 को कोबालामाइन के रूप में भी पहचाना जाता है। इससे दिमाग सामान्य तरीके से काम करता है। शरीर में रेड ब्लड सेल्स और डीएनए के निर्माण के लिए भी यह बहुत जरूरी होता है। इसकी कमी से कमजोरी और एनीमिया की शिकायत भी होती है। इसी के साथ वजन तेजी से कम होता है। मांसपेशियां कमजोर हो जाती है। त्वचा का रंग फीका पड़ने लगता है।

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इतना विटामिन जरूरी-

विटामिन B12 की पूर्ति करने के लिए 18 साल से अधिक की उम्र वालों को रोजाना 2.4 विटामिन B12 का सेवन करना चाहिए। आप नॉनवेज खाते हैं। तो विटामिन B12 के कई स्रोत हैं। चिकन, मीट, मछली और अंडों से विटामिन B12 भरपूर मात्रा में मिलता है। अगर आप रोजाना दो अंडे भी खा लेते हैं। तो इससे दैनिक जरूरत की फोटो 46% पूर्ति हो जाती है।

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यह हैं शाकाहारी स्रोत-

अगर आप शाकाहारी हैं। तो विटामिन B12 की पूर्ति के लिए आपको डेयरी प्रोडक्ट का उपयोग करना होगा। इसमें दूध, दही, पनीर का सेवन करें। इसी के साथ ही आप काजू, बदाम, टोफू, जई और नारियल के दूध का भी सेवन कर सकते हैं। इसी के साथ आप विटामिन B12 की कमी होने पर शराब का सेवन बिल्कुल नहीं करें और फोलिक एसिड लेने से भी बचना चाहिए। क्योंकि शराब विटामिन B12 का लेवल काफी कम करता है।



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Hair Treatments: बाल झड़ने या सफेद होने पर जरूर आजमाएं आंवले के ये घरेलू नुस्खे

Hair Treatments: आज के खान-पान और लाइफस्टाइल की वजह से बच्चों में भी सफ़ेद बाल और से पहले गंजापन देखने को मिल रहा है। इन समस्याओं के पीछे मार्केट में मिलने वाले केमिकल युक्त शैंपू व तेल भी जिम्मेदार हैं। इस समस्या से बचने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार करने के साथ ही प्राकृतिक चीजों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। बालों के लिए आंवला कितना गुणकारी है, आइए जानते हैं इसके बारे में...

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आंवले का प्रयोग
बालों के लिए ही नहीं, आवंला बहुत सी बीमारियों में औषधी के रूप में काम लिया जाता है। बाल संबंधी समस्याएं विटामिन सी की कमी से होती हैं। ऐसे में आंवले का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। आंवले रस पीने के अलावा इसे सब्जी या मुरब्बे के रूप में भी खा सकते हैं। ताजा आंवला न मिलने की स्थिति में इसका चूर्ण ले सकते हैं। चूर्ण को डॉक्टरी सलाह से ही लें। यह पंसारी की दुकान पर आसानी से मिल जाता है।

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तेल मालिश
महिलाएं आजकल बालों को खुला रखती हैं। प्रॉपर तेल की मालिश नहीं करने से बालों की जड़ को पोषण नहीं मिलता और वे झडऩे लगते हैं। जो लड़कियां चिपचिपे बाल नहीं चाहतीं उन्हें रात के समय नारियल, तिल्ली या सरसों के तेल को गुनगुना गर्म कर मालिश करनी चाहिए। सुबह उठने के बाद बालों को अच्छे से धो लें।

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ये भी आजमाएं
35 या उससे भी कम उम्र में लोग बालों को नेचुरली काला करने के लिए आंवले का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए आंवला, काले तिल व भृंगराज को समान रूप ले लेवें। इसमें बूरा चीनी मिलाकर 20-20 ग्राम सुबह शाम सेवन करें। लेकिन जुकाम में इसका इस्तेमाल न करें।

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नाक में षढ़बिंदु तेल
आयुर्वेद के अनुसार नाक में षढ़बिंदु और अरूण तेल की 4-4 बूंदे डालने से जुकाम में राहत मिलती है। इसकी महक बालों को जड़ से मजबूत करती है। यदि ये तेल उपलब्ध न हों तो सरसों या घी को नाक में हल्का सा लगाकर सूंघने से भी फायदा होता है।

Web Title: Hair Treatments: benefits of eating gooseberry for hair



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Health News: कई प्रकार के रोगों की रोकथाम में मददगार है हींग, जानिए इसके फायदे

Health News: सेहतमंद रहने के लिए लोग खान-पान से लेकर लाइफस्टाइल तक विशेषज्ञों की सलाह लेते हैं। खान-पान में लापरवाही को ही सेहत का दुश्मन माना जाता है। बहुत से मसाले ऐसे हैं जिन्हे भोजन में काम लेने से स्वाद के साथ बीमारियों में भी राहत मिलती है। इन मसालों में हींग को बहुत ही उपयोगी बताया गया है। यह पेट का दोस्त मानी जाती है। यह अपच और पेट की जटिलता को तुरंत खत्म करके राहत प्रदान करती है। हींग शरीर की भूख को बढ़ाने के साथ ही विभिन्न विकारों की रोकथाम में सहायता करती है। आइए जानें इसके विशेष गुणों के बारे में...

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दर्द निवारक
हींग कई प्रकार के दर्द में राहत प्रदान करती है। इससे माइग्रेन का दर्द, दांत का दर्द, माहवारी का दर्द, सामान्य सिर-दर्द दूर किया जाता है। इसमें उपस्थित सशक्त एंटी-ऑक्सीडेंट्स तथा दर्द-निवारक गुण तुरंत दर्द से राहत देते हैं। दांतों के दर्द को कम करने के लिए हींग, नींबू-रस के गाढ़े पेस्ट का उपयोग उस एरिया में करना चाहिए, जहां दर्द हो रहा हो। गर्म पानी में पाउडर हींग को घोल कर पीने मात्र से ही माइग्रेन तथा सिर-दर्द दूर हो जाता है।

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कैंसर रोधी
हींग के एंटी-ऑक्सीडेंट्स से कोशिकाओं में फ्री-रेडिकल्स को फैलने का मौका नहीं मिलता है। ये रेडिकल्स ही कार्सिनोजेनिक प्रभाव को विस्तार देते हैं, पर हींग एंटी-कार्सिनोजेनिक एजेंट की तरह विभिन्न प्रकार के कैंसर की रोकथाम करती है। खासतौर पर यह बड़ी आंत से जुड़े कैंसर के रोकथाम में अधिक प्रभावी है।

फेफड़े संबंधी रोग
हींग शक्तिशाली श्वसन उत्तेजक और कफ-निस्सारक है। यह गले में जमा हुए कफ तथा छाती के रक्त संकुचन में तुरंत राहत देती है। अगर आपको सूखी खांसी, बलगम या ब्रॉन्काइटिस की शिकायत रहती है, तो हींग, शहद तथा अदरक के मिश्रण के नियमित सेवन से लाभ पहुंचता है।

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महिला/पुरूषों के रोग
महिलाओं की माहवारी के दौरान पेट व पेड़ू में अचानक उठे दर्द को हींग से कम किया जाता है। यह पेट में होने वाली ऎंठन, अनियमित माहवारी के इलाज में काम में आती है। इसके अलावा हींग की जड़ से केंडिडा इंफेक्शन तथा ल्यूकोरिया का भी इलाज किया जाता है। पुरूषों के यौन संबंधी विकारों को भी हींग से ठीक किया जा सकता है। यह नपुंसकता, अल्प शुक्राणु संख्या तथा प्रीमैच्योर-इजेक्यूलेशन जैसी दिक्कतों को दूर करने में सक्षम है। ग्रामीण इलाकों में मर्दानगी बढ़ाने के लिए हींग को गर्म जल में मिलाकर पीने का चलन है। इससे रक्त का प्रवाह तेज हो जाता है तथा अल्प रक्तचाप की दिक्कत से फौरन राहत मिलती है।

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स्किन प्रॉब्लम
हींग में कई शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमटॉरी एजेंट्स होने की वजह से इसका उपयोग सौन्दर्य प्रसाधन उत्पाद में किया जाता है। यह त्वचा पर पनपने वाले corns और calluses को ठीक करती है। हींग का कूलिंग इफेक्ट त्वचा की जलन को कम करता है और बैक्टीरिया को उत्पन्न नहीं होने देता है।

अपच
अपच हींग को पुराने समय से घरेलू दवा की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह पेट की समस्याओं और अपच की अकेली घरेलू रामबाण औषधि है। यह एंटी-इंफ्लेमटॉरी व एंटी-ऑक्सीडेंट खूबियों से भरपूर होने के कारण पेट की गड़बड़, अपान वायु, आंतरिक कृमि, तथा दस्त संबंधी दिक्कतों में त्वरित राहत देती है।



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Throat Infection :- बदलते मौसम के कारण गले में संक्रमण और खराश है तो इस तरह करें दूर

मौसम में आए बदलाव का असर शरीर पर तुरंत नजर आने लगता है। फिलहाल गर्मी और ठंडक दोनों होने के कारण कई प्रकार की समस्याएं हो रही है। कई बार अधिक ठंडी चीज खाने से भी गले में खराश हो जाती है। जिससे संक्रमण का भी भय बना रहता है। अगर ऐसी स्थिति है तो आप भी यह घरेलू उपाय अपना सकते हैं।

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दूध और पानी पीएं-

दूध में पानी मिलाकर पीने से गले में खराश से राहत मिलेगी। आप रात को सोते समय दूध में आधा पानी मिलाकर पीएं। इससे गले की खराश कम होगी और आप चाहे तो हल्दी वाला गर्म दूध भी पी सकते हैं।

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गुनगुना पानी पीएं -

गले में खराश होने पर ठंडे पानी की अपेक्षा गुनगुना पानी का सेवन करें। हो सके तो पानी में सिरका डालकर गरारे करें। जिससे गले की खराश बहुत जल्दी दूर होगी। आप गुनगुने पानी में नमक डालकर भी गरारे कर सकते हैं।

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तुलसी और कालीमिर्च-

काली मिर्च और तुलसी दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर गरम पानी में डालें और उबालकर काढ़ा बनाएं। इसे पीने से आपको काफी आराम होगा।

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पालक की बांधे पट्टी-

गले के संक्रमण को दूर करने के लिए पालक के पत्तों को पीसकर इसकी पट्टी बनाएं और गले में बांधे। इसे 20 मिनट तक बांधे रखने के बाद खोलें। इसी के साथ धनिया के दानों को भी पीसकर उसके पाउडर में गुलाब जल मिलाकर गले पर लगाएं। इससे काफी आराम मिलेगा।

कालीमिर्च चाटें-

गले की खराश की समस्या को दूर करने के लिए आप कालीमिर्च को पीसकर पताशे के साथ चाटें। इससे आपको काफी लाभ होगा। इसी के साथ काली मिर्च और दो बदाम दोनों को पीसकर सेवन करने से भी गले के संक्रमण से राहत मिलेगी।



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Benefits of fenugreek seeds :- यूरिक एसिड को करना है कंट्रोल, तो मेथी दाने का करें इस तरह उपयोग

यूरिक एसिड कंट्रोल करने के लिए आप Fenugreek seeds का उपयोग कर सकते हैं।क्योंकि यूरिक एसिड बढ़ने के कारण व्यक्ति को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों की हालत तो यह हो जाती है कि वे उठने बैठने और चलने फिरने में भी काफी दिक्कतों का सामना करते हैं।

यूरिक एसिड की समस्या आजकल आम होती जा रही है। अव्यवस्थित दिनचर्या और बदलते खान-पान के कारण लोगों को इस समस्या का सामना करना पड़ता है। इसके कारण जोड़ों में दर्द, उंगलियों में सूजन, पैरों और हाथों की उंगलियों में चुभन वाला दर्द होता है। ऐसे में व्यक्ति को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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फाइबर युक्त होता है मेथी दाना-

मेथी दाना में उच्च मात्रा में फाइबर होता है। जिसका सेवन करने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है। जिससे वजन कंट्रोल होता है। इस कारण यूरिक एसिड भी कंट्रोल में रहता है। मेथी दाने में मैग्नीशियम, कॉपर, आयरन, विटामिन बी 6, प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट आदि तत्व होते हैं। जो यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मददगार होता है।

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अजवाइन का करें उपयोग-

यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए आप अजवाइन का उपयोग भी कर सकते हैं। क्योंकि अजवाइन में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। जो हाथ पैर और जोड़ों की सूजन को कम करता है। इसमें एंटीबायोटिक तत्व भी होते हैं। जो दर्द में भी राहत देता है।

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ऑलिव ऑयल अपनाएं-

हमेशा फिट और स्वस्थ रहने के लिए आप ऑलिव ऑयल का भी उपयोग कर सकते हैं। क्योंकि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है और विटामिन ई भी पाया जाता है। जो यूरिक एसिड के लेवल को कंट्रोल करता है

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धनिया का उपयोग करें -

धनिया में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। जो पाचन क्रिया को बेहतर करने में मददगार होता है। धनिए के बीज को रात भर पानी में भिगोकर रख दें और सुबह सेवन करें। इसकी पत्तियों की चटनी या सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं। इससे यूरिक एसिड काफी कंट्रोल होता है।



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Ayurveda: पीपल के पत्तों से दूर होती है अनेकों बीमारियां, ऐसे करें सेवन

Ayurveda: आयुर्वेद में पीपल के पेड़ को औषधियों का खजाना माना गया है। यह पेड़ कई प्रकार के रोगों के उपचार में लाभकारी है।पीपल की डाली की दातुन करने व कोमल पत्तों को चबाने से मुंह में छाले, दुर्गध, पायरिया व मसूढ़ों की सूजन में लाभ होता है। इसके अलावा दस्त या दस्त में खून आने पर इसके पत्तों के नर्म डंठल को साबुत धनिया व शक्कर के साथ चबाते हुुए धीरे-धीरे रस लेने से आराम मिलता है।

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5-7 हरे पत्तों को 250 मिलिलीटर पानी के साथ पीस लें। इसमें 1 चम्मच पिसी मिश्री मिलाकर सुबह-शाम लेने से पेशाब (यूरिन) में संक्रमण की समस्या दूर होती है। पीपल व लसोड़े के 5-7 पत्ते एक साथ लेकर 250 मिलिलीटर पानी में पीस लें। इसमें थोड़ा नमक मिलाकर सुबह-शाम 10 दिनों तक लेने से लिवर संबंधी रोगों मे लाभ होता है।

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लगभग 10 पीपल की कोमल पत्तियों को 400 ग्राम दूध के साथ अच्छी तरह से उबाल लें। इसे छानकर इसमें स्वादानुसार पिसी हुई मिश्री मिलाकर सुबह नाश्ते के समय पीने से याददाश्त में कमी व तनाव जैसी समस्याएं दूर होती हैं।

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अगर आपके दांतों में कीड़े लगे हैं तो आप पीपल की एक कच्ची जड़ लीजिए फिर उसे अपने दांतों पर रगड़िए। ऐसा करने से आपके दांतों में लगे कीड़े हट जाएंगे। बहुत से लोग अपना मुंह खोलने में हिचकते हैं क्योंकि उनके मुंह से बदबू आती है। अगर आप भी इन लोगों में शामिल होते हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है, आपको बस पीपल का पत्ता खाना है। पीपल का पत्ता खाने से आपके मुंह से आने वाली बदबू हमेशा के लिए चली जाएगी।

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अगर आपको भी नकसीर की समस्या है तो आप पीपल की पत्तियां खाइए या उसकी पत्तियों को पानी में उबालिए। पानी में उबालने के बाद पतियों को अलग कर दीजिए और पानी पी लीजिए। ज्यादा गर्मी के वजह से नकसीर की समस्या आम होती है। ऐसा करने से आपको पल भर में इस समस्या से छुटकारा मिलेगा।



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Dark Circles :- बरसों पुराने डार्क सर्कल भी होंगे इन घरेलू उपाय से कुछ दिनों में दूर

खून की कमी, कमजोरी, नींद नहीं आना, थकान आदि कारणों से आंखों के नीचे Dark Circles हो जाते हैं। जिससे हमारी सुंदरता काफी प्रभावित होती है। अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। तो इन घरेलू उपाय को आज से ही शुरु कीजिए। निश्चित ही कुछ दिनों में आपको डार्क सर्कल की समस्या से राहत महसूस होगी।

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हल्दी का करें उपयोग-

डार्क सर्कल को दूर करने के लिए आप दो चम्मच हल्दी के पाउडर में एक चम्मच दही और नींबू के रस की कुछ बूंदें डालें। इसे अच्छी तरह से मिला लें और इस पेस्ट को आंखों के आसपास लगाएं।इसे 20 से 25 मिनट तक लगा रहने दें और जब सुखने लगे, तब सादे पानी से धो लें। आप देखेंगे कि आपको काफी फर्क महसूस होगा। ऐसा रोजाना करने से कुछ ही दिनों में डार्क सर्कल की समस्या दूर होने लगेगी।

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ऑरेंज जूस लगाएं-

चेहरे पर छा रहे डार्क सर्कल को दूर करने के लिए आप ऑरेंज के जूस में ग्लिसरीन मिलाकर डार्क सर्कल पर लगाएं। इस पेस्ट को करीब 20 से 25 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर सादे पानी से धो लें। ऐसा सप्ताह में तीन बार जरूर करें।

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टमाटर का जूस लगाएं-

टमाटर के जूस को आंखों के चारों ओर लगाएं और इसे करीब 25 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद सादे पानी से धो लें। इसी प्रकार आप खीरे के जूस का भी उपयोग कर सकते हैं। इसको रोजाना डार्क सर्कल पर लगाएं और 20 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद पानी से धो लें। इससे काफी राहत महसूस होगी।

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बादाम का तेल लगाएं-

बादाम का तेल विटामिन ई से भरपूर होता है। इसे डार्क सर्कल पर लगाने से बहुत जल्दी आपको इस समस्या से छुटकारा मिलेगा। क्योंकि यह त्वचा के अंदर जाकर डार्क सर्कल की समस्या को दूर करता है और त्वचा को स्वस्थ बनाने में मदद करता है।



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Health Tips: वक्त पर सोने और खाने से जीवन रहेगा बेहतर, मानसिक विकारों से भी रहेंगे दूर

Health Tips: हमारा शरीर एक ऎसी मशीन है, जो बेहद संतुलित ढंग से काम करती है। समय पर भोजन तथा समय पर सोने से न केवल जीवन बेहतर होता है, बल्कि यह मानसिक विकार को भी दूर रखता है। सरकाडियन रिद्मस (शरीर के अंदर मौजूद जैविक घड़ी) 24 घंटे के चक्र का पालन करती है और हार्मोन तथा स्वभाव सहित शरीर की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करती है।

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मॉन्ट्रियल के डगलस मेंटल हेल्थ यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट तथा मैकगिल यूनिवर्सिटी की काई-फ्लोरियन स्टॉर्च ने कहा कि इस बात के भी सबूत हैं कि रोजाना की गतिविधियां शरीर में 24 घंटे के अलावा, चार घंटे के एक चक्र से प्रभावित होती हैं, जिसे अल्ट्रेडियन रिद्मस कहते हैं। चार घंटे का अल्ट्रेडियन रिद्मस मस्तिष्क में मौजूद एक मुख्य रसायन "डोपामिन" से प्रेरित होता है। शरीर में जब डोपामिन का स्तर अनियंत्रित हो जाता है, तो चार घंटे का रिद्मस 48 घंटे तक खिंच सकता है।

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अनुवांशिक रूप से संशोधित चूहों पर किए गए अध्ययन में स्टॉर्च के दल ने इस बात का खुलासा किया था कि नींद आने में दिक्कत, अल्ट्रेडियन रिद्मस जेनरेटर में असंतुलन का परिणाम है, जबकि यह पहले सर्काडियन रिद्मस में गड़बड़ी का परिणाम माना जाता था।

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Vitamin D study :- विटामिन डी को लेकर हुए अध्ययन में नया खुलासा, कोरोना पीड़ित को 20% अधिक नुकसान

जिस प्रकार हमारे शरीर को अन्य प्रोटीन और विटामिन की जरूरत होती है। उसी प्रकार Vitamin D की भी जरूरत होती है। अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी है। तो आप उसे विभिन्न स्रोतों से पूरा कर सकते हैं। खासकर कोरोना से पीड़ित हुए लोगों को अपने शरीर में विटामिन डी की कमी नहीं रहने देना चाहिए।

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इजराइल की बार इलान यूनिवर्सिटी और गैलीली मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन किया। जिसके अनुसार जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है। उन्हें मौत का जोखिम 20% अधिक बढ़ जाता है। यह बात कोरोना की चपेट में आए विटामिन डी की कमी वाले लोगों के अध्ययन में पता चली है। शोधकर्ता के नतीजों के अनुसार संक्रमण से पहले जिन लोगों में विटामिन डी की कमी थी। उनमें से 26 फ़ीसदी लोगों की मौत हो गई। जबकि जिन पीड़ितों में उच्च स्तर पर विटामिन डी था। उनमें से महज तीन प्रतिशत लोगों की ही मौत हुई है।

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अध्ययन में पता चला कि कोरोना के संपर्क में आने से पहले संक्रमण की गंभीरता और मौत के खतरे पर असर पड़ता है। इस अध्ययन के नतीजों को मेडिकल शेयरिंग साइट पर शेयर किया गया है। हालांकि इस महीने के शुरुआत में कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक अध्ययन में इसका नतीजा उल्टा सामने आया था। जिसमें विटामिन डी की कमी और बीमारी की गंभीरता के बीच जुड़ाव का कोई साक्ष्य नहीं नजर आया। नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा कि पूर्व के शोध में सिर्फ विटामिन डी के स्तरों पर गौर किया गया था। इस कारण नतीजे गलत हो सकते हैं। इसलिए यह भी बात है कि लोग खासतौर पर बुजुर्ग विटामिन डी की भरपूर खुराक लें।



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Health Tips :- नाखूनों से पता चलते हैं इन बीमारियों के लक्षण, देखकर आप भी सेहत पर दें ध्यान

नाखूनों के रंग और आकार में होने वाले परिवर्तन हमारे शरीर में होने वाले बदलाव के बारे में बताते हैं। अगर आपको कोई समस्या है। तो Nails का रंग भी बदल जाता है और कई बार उनका आकार भी परिवर्तित हो जाता है। इसलिए आपके नाखून भी अगर कुछ बदले नजर आ रहे हैं। तो आपको अपनी सेहत पर ध्यान देने की बहुत जरूरत है।

इस तरह समझे नाखूनों से बीमारियों के लक्षण...

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नाखून नीला होना-

नाखूनों का रंग अगर नीला हो गया है। तो आप समझ जाएं कि ब्लड सरकुलेशन बराबर नहीं है। आपके शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन भी नहीं मिल रहा है। क्योंकि इसी कारण से नाखून नीले होते हैं। इस अवस्था में नाखून का कुछ हिस्सा या पूरे नाखून नीले हो जाते हैं। ऐसे में तुरंत चिकित्सक को दिखाकर जांच करवानी चाहिए।अगर ऐसी स्थिति है तो यह ह्रदय की कमजोरी को भी दर्शाता है।

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नाखून पीला होना-

अगर आपके नाखून पीले हो रहे हैं। तो यह फंगल इंफेक्शन या सिरोसिस जैसी बीमारी का लक्षण हो सकते हैं। क्योंकि ब्लड में पित्त की मात्रा अधिक होने, लाल होने पर कफ और पित्त का असंतुलन और त्वचा पर सफेद चकते , वात का असंतुलित होने का कारण होता है। लीवर में गड़बड़ी होने पर भी यह समस्या होती है। कई लोगों को पीलिया होने पर भी नाखून पीले होते हैं। इसलिए अगर आपके नाखून भी पीले हैं। तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। क्योंकि कमजोरी और पीलिया के कारण भी ऐसी समस्या होती है।

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सफेद नाखून-

जिन लोगों के नाखूनों पर सफेद धब्बे नजर आ रहे हैं। उन की हड्डियां कमजोर, तनाव और मानसिक दबाव की समस्या हो सकती है। हालांकि कई बार नाखूनों की यह स्थिति इन समस्याओं के कम होने पर ठीक होने लगती है।

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नाखूनों पर खड़ी लाइन-

नाखूनों पर सीधी खड़ी लाइन उभरती हुई दिखाई देती है। यह लाइन स्थिति के अनुसार रंग बदलती है। अगर यह लाइन लाल रंग की होती है। तो यह किसी अंदरूनी चोट को दर्शाती है। अगर यह नीले रंग की होती है। तो यह ब्लड से संबंधित समस्याओं के बारे में बताती है। यह भूरे रंग की होती है, तो मेलानोमा नामक के कैंसर का लक्षण हो सकते हैं। वहीं अगर यह सफेद रंग की लाइन है। तो यह शरीर में न्यूट्रिशन की कमी को दर्शाती है।

टूटते हुए नाखून-

नाखून का टूटना भी कई प्रकार की बीमारियों के लक्षण बताता है। कई बार नाखून बहुत आसानी से टूट जाते हैं। यह लक्षण लीवर और थायराइड जैसी बीमारी के बारे में इशारा करते हैं। अगर आपके नाखूनों की स्थिति ऐसी बन रही है। तो आप शीघ्र ही चिकित्सक से सलाह लें और उपचार शुरू करें।



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Monday, 28 June 2021

Health News: स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं के लिए जारी की वैक्सीनेशन की गाइडलाइन, यहां पढ़ें

Health News: कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लगने वाली वैक्सीन को लेकर अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई थी। किस आयु वर्ग के लिए कौनसी वैक्सीन होनी चाहिए। इसमें भी गर्भवती और नवजात शिशु की मां को वैक्सीन से दूर रखा गया था। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं के लिए भी वैक्सीनेशन की गाइडलाइन जारी कर दी है। प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए वैक्सीनेशन सुरक्षित हैं और ये उन्हें कोरोना से लड़ने में मदद करेगा। वैक्सीनेशन के लिए महिलाएं कोविन पर गर्भवती महिलाएं भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन या वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर भी वैक्सीन लगवा सकती हैं।

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गर्भवती महिलाओं के लिए वैक्सीन
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक प्रेग्नेंसी से संक्रमण का खतरा नहीं बढ़ता। ज्यादातर महिलाओं को हलके लक्षण हो सकते हैं। लेकिन कोरोना से बचने के लिए हर जरूरी उपाय करने चाहिए। इसमें वैक्सीनेशन भी शामिल है। ऐसी महिलाएं जिनका मोटापा ज्यादा है, जिन्हें हाई बल्ड प्रेशर है और जिनकी उम्र 35 साल से ज्यादा है, उन्हें कोरोना का खतरा ज्यादा है।

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इससे पहले इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक स्टडी में पाया गया है कि पहली और दूसरी लहर में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं कोरोना का शिकार हुई हैं। इतना ही नहीं, प्रसव के बाद भी महिलाओं में संक्रमण का स्तर काफी देखा गया। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के बीच गर्भवती महिलाओं पर किए गए शोध के मुताबिक पहली लहर में इनमें सिम्प्टोमेटिक केस (लक्षण वाले मरीज) 14.2 फीसदी था, वहीं दूसरी लहर में यह बढ़कर 28.7 फीसदी हो गया. पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में गर्भवती महिलाओं में संक्रमण दर दोगुनी थी।

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Health News: गर्मी के दिनों में ऐसे रखें अपनी सेहत का ध्यान, कार्य क्षमता में होगा इजाफा

Health News: गर्मी के दिनों में हम अक्सर जल्दी ही निढ़ाल हो जाते हैं और कोई काम करने का मन नहीं करता। तेजी से चमकते सूरज और गर्म हवाएं मानो हमारी सारी ऊर्जा को खींच लेते हैं। ऐसे में अगर आपको अपनी कार्यक्षमता को बरकरार रखना है और साथ साथ बढ़ाना भी है, तो आजमाएं ये आसान उपाय।

दिन भर पीते रहें ठंडा पानी
गर्मियों में हमारे शरीर का डिहाइड्रेशन बहुत तेजी से होता है। शरीर में पानी की मात्रा कम होते ही इसकी ऊर्जा कम होने लगती है। इसलिए दिन भर घड़े का ठंडा पानी, फलों के रस व अन्य पेय पदार्थ नियमित रूप से पीते रहें। इससे आपको ताजगी का अहसास होगा और शरीर में ऊर्जा भी बनी रहेगी।

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दिन में दो-तीन बार चेहरा धोएं
ठंडे पानी से चेहरा धोने पर मुरझाई हुई, पसीने से चिपचिपी हुई स्किन को राहत मिलती है। सुस्त चेहरा और अलसाई आंखें खिल उठती हैं। कहीं भी बाहर से लौटें और थकान महसूस करें तो सबसे पहले पसीना सुखाएं और फिर हाथ पैर औऱ मुंह धो लें।

भरपूर आराम करें
जब मौसम प्रतिकूल हो तो आपके शरीर का जल्दी थक जाना स्वाभाविक है। इससे आप जोर जबरदस्ती काम लेंगे, तो बीमार पड़ जाएंगे। बेहतर होगा दोपहर में आधा घंटा आराम करें और रात को जल्दी सो जाएं। इससे आपको ताजगी और ऊर्जा मिलेगी। सुबह के ठंडे मौसम में अपने पेंडिंग काम कर लें, यह ज्यादा अच्छा होगा।

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नाश्ता जरूर करें
माना कि कई बार सुबह सुबह कुछ खाने की इच्छा नहीं करती। लेकिन इसके बावजूद अपनी सेहत के मद्देनजर आपको नाश्ता जरूर करना चाहिए। भले ही कुछ हल्का फुल्का लें जैसे इडली, पोहा, दलिया, कॉर्नफ्लेक्स आदि। लेकिन भूखे पेट न रहें। अधिक देर भूखे पेट रहने से पेट में गैस भी हो जाती है।

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लंच भी हल्का रखें इस मौसम में
गर्मियों के मौसम में लंच भी हेवी नहीं लेना चाहिए। इन दिनों हमारा पाचन तंत्र भी सर्दियों की तुलना में सुस्त हो जाता है। इसलिए आप फल, सलाद, जूस और मेनमील आदि अलग अलग वक्त पर दो तीन घंटे के अंतराल से लेंगे तो भूख भी नहीं लगेगी, शरीर को आवश्यक कैलोरी भी मिलती रहेगी और पाचनतंत्र भी अपना काम कुशलतापूर्वक करता रहेगा।



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Health News: नर्वस सिस्टम को दुरूस्त रखेंगे ये फूड

Health News: नर्वस सिस्टम पर हमारे शरीर के कंट्रोल और विभिन्न आंतरिक अंगों के परस्पर कम्यूनिकेशन का दारोमदार होता है। इसलिए शरीर की कार्यप्रणाली को दुरूस्त रखने के लिए इसका मजबूत होना बेहद जरूरी है। कई बार इंज्यूरी, बीमारी या शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी की वजह से यह कमजोर या क्षतिग्रस्त हो जाता है। ऐसे में दवाओं के साथ-साथ इसे सपोर्ट देने वाला फूड लेना भी जरूरी है। ये फूड नर्वस की कार्यप्रणाली को चुस्त दुरूस्त करने में मददगार होते हैं।

दालचीनी
यह नर्वस सिस्टम को रिजुवनेट करती रहती है और न्यूरोलॉजिकल्स डिसऑर्डर्स को दूर रखती है।

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क्रूसीफेरस वेजीटेबल्स
ब्रोकोली, फूलगोभी और ब्रुसेल्स स्प्राउट में विटामिन बी-6 प्रचुर मात्रा में होता है। यह नर्व फंक्शन के लिए फायदेमंद होता है।

हरी पत्तेदार सब्जियां
पत्तेवाली हरी सब्जियां (पालक, मेथी अन्य साग) पोषक तत्वों व विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी, विटामिन ई, मैग्नीशियम एवं एंटीऑक्सीडेंट्स का खजाना होती हैं। ये ब्रेन और नर्वस सिस्टम की एजिंग को स्लो करती हैं और हमें स्वस्थ रखती हैं।

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लहसुन
लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट व एंटी एजिंग तत्व भरपूर होते हैं। ये नव्र्स को डैमेज होने से बचाते हैं।

ग्रीन टी
ग्रीन टी का नियमित सेवन नर्वस सिस्टम के लिए काफी लाभकारी होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। यह ब्रेन की एजिंग स्लो करती है।

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कद्दू के बीज
मैग्नीशियम, कॉपर, आयरन, जिंक और पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट शरीर औऱ दिमाग को फ्री रैडिकल्स के डैमेज से बचाते हैं।

हल्दी
करक्यूमिन का समृद्ध स्रोत हल्दी इन्फ्लेमेशन से नर्वस सिस्टम की रक्षा करती है। यह एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर होती है।

ओटमील
यह नर्वस सिस्टम को फाइबर, प्रोटीन और एनर्जी देकर उसका पोषण करता है। इसमें विटामिन बी, के, सेलेनियम और आयरन होता है। इनसे अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और एंग्जायटी जैसी मानसिक समस्याओं से छुटकारा मिलकर एकाग्रता भी बढ़ती है।

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नट्स
बादाम, अखरोट, पिस्ता, खूबानी आदि नट्स प्रोटीन और आवश्यक फैटी एसिड से भरे होते हैं। ये ब्रेन के फंक्शन को दुरूस्त करते हैं और नर्वस सिस्टम पर पॉजिटिव इफेक्ट डालते हैं।



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Beauty Tips: मानसून में स्किन-बालों का ऐसे रखें ख़ास ध्यान, मिलेगा फ्रेश और क्लीन लुक

Beauty Tips: मानसून में बालों और स्किन से संबंधित शिकायतें बढ़ जाती हैं। नम हवाओं, बढ़ी हुई आद्र्रता और बारिश में भीग जाने के कारण बैक्टीरिया का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में स्किन और बालों की साफ-सफाई जरूरी होती है। इनकी सफाई में नैचुरल ऑयल्स काफी मददगार साबित हो सकते हैं। ये सफाई के साथ बिना किसी कृत्रिम केमिकल के उपयोग से फ्रेश और क्लीन लुक भी देते हैं।

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मिनरल नहीं नैचुरल आयल
नैचुरल ऑयल्स में एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं। ये त्वचा की खोई हुई नमी को रीस्टोर करते हैं जबकि मिनरल ऑयल स्किन में एब्जॉर्ब न होकर एक परत तैयार कर देते हैं, जो नुकसानदायक होता है।

हैल्थ एक्सपट्र्स की राय में हमेशा प्लांट बेस्ड, कोल्ड प्रेस्ड शुद्ध तेलों का ही उपयोग करना चाहिए। इशेंसियल ऑयल्स को कभी भी स्किन पर सीधे न लगाएं बल्कि किसी करियर ऑयल, लोशन या क्रीम में इसकी कुछ बूंदें मिलाएं।

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पोमीग्रेनेट ऑयल
स्कैल्प का ब्लड सर्कुलेशन दुरूस्त करके यह ऑयल रूखे और बेजान बालों की खोई हुई चमक लौटाता है। ऊंगलियों के पोरों पर कुछ बूंद तेल लेकर मालिश करें ताकि यह एब्जॉर्ब हो जाए। फिर बालों की लंबाई में भी इसे लगाएं। हथेली पर कुछ बूंद पोमीग्रेनेट ऑयल लेकर रगड़े और गर्म होने पर चेहरे और गर्दन में सर्कुलर मोशन में लगाएं। लेकिन इससे पहले स्किन की सफाई जरूर कर लें।

आरगन ऑयल
विटामिन ई, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स का खजाना है आरगन ऑयल। इसे नियमित लगाने से एक्ने, स्ट्रेच माक्र्स और बेजान बालों की समस्या से निजात पा सकते हैं। अल्ट्रावायलेट किरणों से क्षतिग्रस्त स्किन पर यह तेल लगाने से सन टेनिंग आदि से भी मुक्ति मिलती है।

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टी ट्री ऑयल
जिन लोगों को चेहरे पर एक्ने की समस्या बार बार होती है उनके लिए टी ट्री ऑयल वरदान स्वरूप है। यह डैंड्रफ और हेयरफॉल में भी कारगर दवा का काम करता है। जोजोबा ऑयल में इसकी कुछ बूंदें मिलाकर स्किन और स्कैल्प में मसाज करनी चाहिए। रातभर बालों में लगा रहने से फायदा मिलेगा। इसे लगाने से घाव भी जल्दी भरते हैं।

कश्मीर लैवेण्डर
यह इसेंशियल ऑयल मीठी महक के लिए जाना जाता है। इससे सिरदर्द दूर होने के साथ सुकून मिलता है। इसमें एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। इसे सीरम, फेस ऑयल या क्रक्रीम में मिलाकर लगाएं तो झाइयां, दाग धब्बे आदि दूर होकर स्किन दमकने लगेगी।

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Health Tips: रक्त की शुद्धि के लिए जरूर आजमाएं ये आयुर्वेदिक उपाय

Health Tips: अक्सर माना जाता है कि वायु प्रदूषण से रक्त दूषित होने लगता है जो कि गलत धारणा है। दूषित वायु हमारी सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचती है जो ऑक्सीजन की जगह लेने लगती है। धीरे-धीरे कार्बनडाई ऑक्साइड की मात्रा बढऩे लगती है जिससे हीमोग्लोबिन रक्त को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं करा पाता, इस स्थिति को कार्बोऑक्सीहीमोग्लोबिन कहते हैं।

ऐसे बढ़ता है खतरा
शरीर को 90-100 % ऑक्सीजन की जरूरत होती है लेकिन प्रदूषण के कारण जब यह स्तर 90% से कम हो जाता है तो हाइपोऑक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) होने लगता है जिससे थकान, आलस, जुकाम, खांसी, आंखों में जलन व त्वचा संबंधी संक्रमण होने लगते हैं।

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तुलसी का पौधा लगाएं
तुलसी वातावरण में मौजूद प्रदूषण को 30% तक कम करती है। इसके लिए7-11 तुलसी के पत्ते, अदरक, गुड़ व दो कालीमिर्च के दानों को एक गिलास पानी के साथ उबाल लें। एक चौथाई रहने पर इसे गुनगुना पिएं। हफ्ते में एक बार इस काढ़े को बनाकर पीने से दूषित वायु का असर कम होता है।

ये भी जानें
नेचुरोपैथी उपचार में आंतों की शुद्धि के लिए एनीमा दिया जाता है जिससे रक्त भी शुद्ध होता है। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से खून साफ होता है। पत्तागोभी का जूस भी ले सकते हैं।

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इन्हें आजमाएं
तुलसी के पत्तों के एक चम्मच रस को दो चम्मच शहद के साथ लेें। लेकिन डायबिटीज के मरीज न लें।
आधा चम्मच तुलसी के सूखे पत्तों का चूर्ण, एक चौथाई चम्मच सौंठ पाउडर व एक चम्मच शहद को मिलाकर चटनी बना लें। दिन में दो बार चाटें।
गिलोय का रस या आंवला व एलोवेरा का रस २-२ चम्मच लें।
मिर्च-मसाले, तले-भुने और गरिष्ठ भोजन की बजाय सलाद, उबला व कच्चा खानपान लाभकारी होगा।
अनुलोम-विलोम व भस्त्रिका प्राणायाम रक्त को शुद्ध करते हैं। इन्हें सूर्याेदय के बाद व सूर्यास्त से पहले 25-25 मिनट करें।

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Weight Loss :- वजन कम करने के लिए इस तरह अपनाएं लो कार्ब डाइट

वैसे तो शरीर के लिए कार्बोहाइड्रेट का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि वह हमारे शरीर को काम करने के लिए ऊर्जा प्रदान करता है। लेकिन इसका अधिक मात्रा में सेवन करना फैट को बढ़ावा देता है। इससे मोटापा बढ़ता है और व्यक्ति को कई प्रकार की बीमारियां होती है। इसलिए आप लो कार्ब डाइट लेंगे। तो आपका वजन भी कम होगा और आपके शरीर को भरपूर ऊर्जा भी मिलेगी।

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संतुलित आहार लें-

दरअसल, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार लेना चाहिए। क्योंकि जैसा हमारा खान-पान होता है। सेहत पर भी वैसा ही असर पड़ता है। इसलिए हमें आहार में भी उन चीजों को शामिल करना चाहिए। जो हमारे शरीर के लिए जरूरी है और हमें बीमारियों से दूर रख कर स्वस्थ रखें। आज आपको बताएंगे कि आप कौन से लो कार्ब डाइट को आहार में शामिल करें। जिससे आपका वजन भी कम होगा।

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वजन को कम करने और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए लो कार्ब डाइट का सेवन करना चाहिए। इसलिए हमें आहार में उन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। जिनमें लो कार्ब होता है। ऐसे में चावल, आलू, चॉकलेट आदि खाद्य पदार्थ का सेवन हमें बहुत कम मात्रा में करना चाहिए।

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इन प्रदार्थों में लो कार्ब-

हरी पत्तेदार सब्जियां, मक्खन, पत्ता गोभी, पालक, बैंगन, मशरूम, प्याज, टमाटर में कार्ब की मात्रा कम होती है। सरल शब्दों में कहें तो जमीन के ऊपर उगने वाली अधिकतर सब्जियों का सेवन किया जा सकता है। इसी के अलावा डेयरी उत्पाद दही, दूध, मक्खन, पनीर और क्रीम का सेवन भी कर सकते हैं।

इन चीजों का नहीं करें सेवन-

जो लोग लो कार्ब डाइट लेते हैं। उन्हें चॉकलेट, आइसक्रीम, सोड़ा, जूस, केक, पेस्ट्री, कैंडी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इसमें काफी मात्रा में शुगर होती है। इसी के साथ गेहूं, आटा, जो, चावल सभी हाई कार्ब रिफाइंड अनाजों के सेवन से बचने की जरूरत होती है। ब्रेड, पास्ता, मूसली, दलिया और बन का सेवन भी नहीं करना चाहिए। ज्यादातर भूमिगत सब्जियां जैसे शकरकन्द, आलू आदि में कार्ब की मात्रा अधिक होती है। इसी प्रकार फलों में केला, आम, अंगूर और अनानास में कार्बोहाइड्रेट और शुगर की मात्रा अधिक होती है।इसलिए इनसे बचना चाहिए।



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Home Remedies for Burns: जलने पर तुरंत अपनाएं ये घरेलु उपाय, घाव को जल्दी भरने में मिलेगी मदद

Home Remedies for Burns: कई बार रसोई में काम के दौरान या कुछ अन्य वजहों से हाथ अचानक जल जाता है। ऐसे में व्यक्ति समझ नहीं पाता क्या किया जाए? जानते हैं ऐसे कुछ घरेलू उपायों के बारे में जिन्हें अपनाकर दर्द में तुरंत राहत के साथ घाव को जल्दी भरने में मदद मिल सकती है-

एलोवेरा:

इसके जेल को घाव पर सीधे लगाने से जलन कम होती है। केले का छिलका: घाव के भराव के लिए जले हुए स्थान पर केले का छिलका रखना फायदेमंद है।दही: जली हुई जगह पर करीब तीस मिनट तक दही लगाएं इससे दर्द में आराम मिलता है।

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ऑलिव ऑयल:

हीलिंग गुणों से भरपूर जैतून का तेल घाव को जल्दी भरने में मदद करता है। शहद: शहद बरसों से जलने पर उपचार के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। यह एंटीसेप्टिक होता है जिसके कारण घाव जल्दी भरने में सहायक है। जलने पर इसे तुरंत उस स्थान पर सीधे लगाएं।

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पतला सिरका:

कॉटन का नरम कपड़ा सिरके में भिगोकर जले हुए स्थान पर लगाने से आराम मिलता है। लैवेंडर ऑयल: इसमें एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल तत्त्व पाए जाते हैं। इससे जले हुए स्थान पर संक्रमण की आशंका कम होती है।

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Ayurveda Treatments: पेट संबंधित बीमारियों में राहत देता है सूखा धनिया, जानिए इसके फायदे

Ayurveda Treatments: आयुर्वेद में सभी बीमारियों को लेकर समाधान सुझाए गए हैं। पेट से संबंधित सभी बीमारियों के लिए बेहद ही आसान और घरेलु नुस्खे आज हम आपको बताने जा रहे हैं। सूखा धनिया सिर्फ मसाला नहीं बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है। जानते हैं इसके फायदों के बारे में-

पीलिया: सूखा धनिया, मिश्री, आंवला, गोखरू व पुनर्नवा जड़ को बराबर मात्रा में पीस लें। 1-2 चम्मच चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ लेने से लिवर की सूजन, पीलिया और पेशाब कम आने जैसी दिक्कतों में आराम मिलता है।

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पेट में जलन: पिसा धनिया, जीरा, बेलगिरी व नागरमोथा को समान मात्रा में मिलाकर पीस लें। खाने के बाद इसे 1 चम्मच पानी से लें।

मुंह के छाले: 1 चम्मच पिसा धनिया, 250 मिलिलीटर पानी में मसलकर छान लें। इससे दिन में 2-3 बार कुल्ला करें।

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उल्टी : 1 चम्मच धनिया, 2 चम्मच मिश्री व एक इलाइची को पीसकर खाने से लाभ होगा।

पेट में कीड़े : एक से डेढ़ चम्मच धनिया पाउडर सुबह-शाम पानी के साथ 15 दिनों तक लें। बच्चों को 1/4 चम्मच दें।

परहेज: गठिया, कफ व लो ब्लड प्रेशर में परहेज करें क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है।

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Health Tips: नमक के अत्यधिक सेवन से लिवर को होता है नुकसान, खाने में इन चीजों से भी करें परहेज

Health Tips: लिवर शरीर का महत्त्वपूर्ण अंग है। यह शरीर में पाचनक्रिया व मेटाबॉलिज्म सही रखने और विषैले पदार्थ बाहर निकालने के साथ-साथ करीब 500 से ज्यादा काम करने में मददगार है। कुछ बातों का ध्यान रखकर इसे स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है-

अधिक मीठे से बचें:
फैट पैदा करने के लिए लिवर खुद एक फ्रक्टोज (शक्कर की एक किस्म) का उपयोग करता है। ऐसे में अत्यधिक शक्कर या मीठा खाने से इसे क्षति पहुंच सकती है।

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ज्यादा नमक का प्रयोग:
खाने में अत्यधिक नमक के प्रयोग से लिवर में एक तरल पदार्थ बनता है, जो फैटी लिवर रोग का कारण है। इससे लिवर में सूजन आती है।

बाहरी खानपान:
पैक्ड फूड व बाहर की अन्य चीजों में ट्रांसफैट पाया जाता है जो मोटापे की एक मुख्य वजह है। इनसे परहेज करें क्योंकि ऐसे खाद्य पदार्थ कई तरह के रोगों की वजह बन सकते हैं।

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विटामिन-ए :
इस सप्लीमेंट्स का प्रयोग लिवर के लिए नुकसानदायक है।

टैटू के उपकरण :
आजकल शरीर पर टैटू बनवाने का चलन बढ़ रहा है। इसे बनाने वाले उपकरण यदि प्रत्येक उपयोग के बाद स्टेरिलाइज्ड (साफ) नहीं किए जाएं तो हैपेटाइटिस के इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं। इससे लिवर प्रभावित होता है।

दर्दनिवारक दवाएं :
एंटीडिप्रेसेंट्स, स्टेरॉइड्स व कई अन्य दर्द निवारक दवाओं से भी लिवर को नुकसान होता है। इन्हें लेने से बचें।

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सॉफ्ट ड्रिंक्स से परहेज:
सॉफ्ट ड्रिंक्स में आर्टिफिशियल स्वीटनर का प्रयोग किया जाता है। इन्हें ज्यादा मात्रा में लेने से व्यक्तिधीरे-धीरे इनका आदी होने लगता है जिससे मोटापे की समस्या हो सकती है। इससे नॉन अल्कोहॉलिक फैटी लिवर का खतरा भी बढ़ता है।



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सुबह-सुबह की ये आदतें सेहत के लिए है बहुत नुकसानदायक

व्यक्ति के दिन की शुरुआत जितनी अच्छी होती है। उसका पूरा दिन उतना ही अच्छा निकलता है। इसलिए अगर आप भी सुबह उठकर कुछ अच्छी आदतों पर अमल करेंगे, तो आपकी सेहत को भी फायदा होगा और आपका दिल और दिमाग भी प्रसन्न रहेगा। तो आइए जानते हैं वह कौन सी आदत है। जिनसे आपको दूरी बना कर रखना है।

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सुबह उठने के बाद हम अनजाने में कई ऐसी गलतियां करते हैं। जो हमारे शरीर पर गलत प्रभाव डालती है। इससे हमें दिनभर थकान, सुस्ती और आलस छाए रहते हैं। इसलिए आप कुछ आदतों में सुधार करके अपनी सेहत बना सकते हैं। सुबह देर तक सोना, उठते ही सोशल मीडिया पर एक्टिव होना, खाली पेट चाय या काफी पीना, नाश्ते में तला गला खाना आदि से आपको कई प्रकार के नुकसान होते हैं।

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इन आदतों को करे नजर अंदाज...

उठने के बाद भी लेटे रहना-

जो लोग सुबह नींद खुलने के बाद भी लेटे रहते हैं। उनकी सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। साथ ही दिनचर्या भी प्रभावित होती है। क्योंकि आप सुबह सुबह के काम भी लेट करते हैं। इस कारण आपको दिनभर थकान और आलस छाए रहते हैं। इसकी जगह आप सुबह नींद खुलते ही उठ जाएं और एक्सरसाइज करें। जो स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होगा। क्योंकि बहुत देर तक लेटे रहने से आपका ब्लड सरकुलेशन भी बिगड़ जाता है। जिससे कई प्रकार की समस्या होती है।

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खाली पेट चाय या कॉफी पीना-

कई लोग सुबह उठकर खाली पेट चाय - कॉफी का सेवन करते हैं। जो सेहत के लिए ठीक नहीं है।क्योंकि खाली पेट चाय और कॉफी पीने से पेट में गैस सहित अन्य समस्याएं होती है। इसलिए आपको सुबह उठते ही सबसे पहले गुनगुना पानी पीना चाहिए। हो सके तो उसमें नींबू की कुछ बूंदें डालकर शहद के साथ पीएं। आप ग्रीन टी भी पी सकते हैं। क्योंकि ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं । जो आपको रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं और आपकी बॉडी को डिटॉक्स करता है।

एक्सरसाइज नहीं करना-

शरीर को फिट रखने के लिए एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है। क्योंकि भागदौड़ भरी जिंदगी में हम परिश्रम नहीं कर पाते हैं और मोटापे सहित अन्य बीमारी का भी शिकार होते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप रोजाना आधे घंटे एक्सरसाइज जरूर करें। अगर आप एक्सरसाइज नहीं करते हैं। तो अपनी आदत को तुरंत बदल लें।

अनहेल्दी नाश्ता करना-

सुबह के समय आपको हेल्दी नाश्ता करना चाहिए। आप आहार में ड्राई फ्रूट्स, दलिया, फलों का रस, स्प्राउट्स, रोटी, हरी सब्जियां आदि का सेवन करें। क्योंकि इनसे आपको काफी पोषण मिलेगा। इससे आप स्वयं दिन भर अपने आप को तरोताजा महसूस करेंगे। क्योंकि सुबह-सुबह हमें काफी भूख लगती है। क्योंकि यही वह समय होता है। जब हम काफी देर तक भूखे रहते हैं।



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Sunday, 27 June 2021

Skin Care :- हर मौसम में त्वचा की देखभाल के लिए अपनाएं यह सदाबहार नुस्खे

त्वचा से संबंधित समस्या से निपटने और सुंदरता बनाए रखने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे अपनाना बहुत जरूरी है। क्योंकि इनसे ही आपकी त्वचा में नेचुरल ग्लो आएगा। तो आइए जानते हैं वह कौन से फेस पैक हैं। जिनका उपयोग करके आप अपनी त्वचा को निखार सकते हैं।

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इस कारण होती त्वचा प्रभावित-

बढ़ते प्रदूषण, आहार में आए परिवर्तन के कारण त्वचा से संबंधित कई रोग हो जाते हैं। इसी के साथ रूखी और बेजान त्वचा के कारण आपकी खूबसूरती भी प्रभावित होती है। कई बार बाजार के प्रोडक्ट उपयोग करने के बावजूद भी आपको कोई फायदा नहीं मिलता है। तो आपको घरेलू नुस्खे अपनाना चाहिए। जिससे कम खर्च में आपकी त्वचा चमकने लगेगी।

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एलोवेरा फेस पैक लगाएं-

सभी जानते हैं एलोवेरा और हल्दी चेहरे के लिए बहुत फायदेमंद होती है। अगर आप रोजाना इसका जेल तैयार करके चेहरे पर लगाएंगे तो बहुत फायदा करेगा। लेकिन आप इसके साथ हल्दी मिलाकर फेस मास्क की तरह उपयोग करेंगे। तो यह आपके चेहरे में बहुत जल्दी ग्लो लेकर आएगा। इसके लिए आप एलोवेरा के पत्ते का जेल निकाल लें, साथ में एक चुटकी हल्दी मिलाएं और इसे अच्छे से मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं। इसे चेहरे पर ही सूखने दें। जब या ठीक से सुख जाए या करीब आधे घंटे बाद अपने चेहरे को धो लें।इससे आपके चेहरे में गजब का निखार आएगा।

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गुलाब का फेस पैक लगाएं-

आपकी त्वचा के लिए गुलाब का फेस मास्क भी बहुत उपयोगी होता है। आप गुलाब की पत्तियों का उपयोग कर सकते हैं। गुलाब की पंखुड़ियों को पीसकर पेस्ट बना लें और इसमें दूध मिलाएं। फिर इसे फेस पैक की तरह चेहरे पर लगाएं। आप चाहे तो इसमें शहद भी मिला सकते हैं। इसे भी इसी तरह लगाकर सूखने के बाद धो लें। आपकी त्वचा में ग्लो आएगा।



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Health Tips: गर्मियों में बना रहता है फूड पॉइजनिंग का ज्यादा खतरा, ऐसे करें बचाव

Health Tips: कई बार खाने में थोड़ी लापरवाही के चलते फूड पॉइजनिंग की समस्या पैदा हो जाती है। जिससे कमजोरी के साथ-साथ आपको थकान महसूस होने लगती है और कुछ खा पाना भी मुश्किल होता है। आइए जानते हैं फूडपॉइजनिंग के बारे में-

फूड पॉइजनिंग
यह बैक्टीरिया जनित रोग है जो पुराने, खराब या दूषित भोजन से होता है। बैक्टीरिया या उसके विषैले तत्व जब हमारे पेट में जाकर आंतों में संक्रमण फैलाते हैं तो फूड पॉइजनिंग की समस्या होती है।

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फूड पॉइजनिंग के कारण
दूषित भोजन, गंदे हाथों से सब्जियां काटना और पकाना इसकी मुख्य वजह है। बिना ढका खाना खाने से भी फूड पॉइजनिंग हो सकती है।

लक्षण
जी घबराना, पेटदर्द, उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन। लेकिन जब सामान्य लक्षणों के अलावा बेहोशी, सुस्ती, ब्लड प्रेशर और डिहाइड्रेशन की वजह से पेशाब कम आने लगे तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करें।

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बैक्टीरिया
गर्मी के मौसम में ये बैक्टीरिया और वायरस सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं। इसकी वजह वातावरण में मौजूद मक्खी और मच्छर हैं।

इलाज
ज्यादातर मामलों में फूड पॉइजनिंग की समस्या थोड़े समय बाद अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन कई बार स्थिति गंभीर भी हो सकती है। जिसके लिए डॉक्टर तुरंत राहत के लिए ओआरएस (ओरल रीहाइड्रेशन सोल्यूशन) का घोल और जरूरत पड़ने पर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं।

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बचाव के लिए
हमेशा ताजा और गर्म खाना खाएं। जहां तक संभव हो घर का बना भोजन करें। खाना बनाने और खाने से पहले व बाद में हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। बाजार की चाट, जूस या कटे हुए फलों से परहेज करें। फ्रिज में रखे खाने को गर्म करने के बाद ही प्रयोग में लेना चाहिए।



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Health News: कम पानी पीने से शरीर में बना रहता है गंभीर बीमारियों का खतरा

Health News: अगर आप भी कम पानी पीते हैं तो जरा सावधान हो जाइये, कम पानी पीने वाले लोगों को किडनी फेल होने का खतरा ज्यादा रहता है। कम पानी पीने से शरीर की दोनों किडनियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं जिसे एक्यूट किडनी अटैक कहते हैं।

एक्यूट किडनी अटैक क्या है?दोनों किडनी किसी नुकसान से थोड़े समय के लिए काम करना कम या बंद कर दें, तो इसे एक्यूट किडनी अटैक या एक्यूट किडनी इंजरी कहते हैं।

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इसके मुख्य कारण क्या हैं?दस्त, उल्टी से शरीर में पानी की कमी, खून के दबाव का कम होना, फेल्सीफेरम मलेरिया, लैप्टोस्पाइरोसिस(एक तरह का बुखार), पथरी से मूत्रमार्ग में अवरोध, खून व किडनी में संक्रमण, सूजन, स्त्रियों में प्रसव के समय खून का दबाव या ज्यादा खून बह जाना, दवा का विपरीत असर व सांप का काटना।

एक्यूट किडनी अटैक के लक्षण?ये लक्षण अलग-अलग मरीजों में कम-ज्यादा हो सकते हैं, जैसे भूख कम लगना, जी मिचलाना, उल्टी, पेशाब कम आना, सांस फूलना, बीपी बढऩा, कमजोरी होना, याददाश्त कम होना, शरीर में ऐंठन और हाथ व पैर में सूजन।

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एक्यूट किडनी अटैक का इलाज?जब किसी रोग के कारण किडनी खराब होने का संदेह या मरीज में होने वाले लक्षणों की वजह से किडनी अटैक की आशंका हो तो तुरंत खून की जांच करानी चाहिए। खून में क्रिएटिनिन और यूरिया की अधिक मात्रा किडनी अटैक का संकेत देती है।

इस अटैक को रोकने के उपाय?उल्टी,दस्त, मलेरिया जैसे किडनी खराब करने वाले रोगों के तुरंत इलाज से एक्यूट किडनी अटैक को रोका जा सकता है। इस रोग से पीडि़त मरीजों को रोग के शुरू में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। पेशाब कम आ रहा हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। किडनी को नुकसान पहुंचाने वाली दवा ना लें।

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सही इलाज से 3-4 हफ्ते में ज्यादातर मरीजों की किडनी फिर से काम करने लगती है। ऐसे मरीजों को इलाज पूरा होने के बाद दवा लेने या डायलिसिस की आवश्यकता नहीं रहती है।



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Health Tips: भोजन को चबाकर खाने के हैं बहुत से फायदे, जल्दी-जल्दी खाने की वजह से हो सकती है मोटापे सहित कई बीमारियां

Health Tips: जल्दी-जल्दी खाने की वजह से हम अपनी शारीरिक जरूरत से ज्यादा भोजन कर लेते हैं। हमारे दिमाग और पेट को यह समझने में 20 मिनट का समय लग जाता है कि अब भूख मिट चुकी है और नहीं खाना चाहिए। इससे अनजाने में वजन बढ़ जाता है, इसलिए खाने की स्पीड पर कंट्रोल करें।

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नुकसान:
जल्दी खाने वाले लोगों को अक्सर गैस, एसिडिटी और कब्ज की समस्या रहती है।

चबाकर खाने के फायदे:
धीरे-धीरे चबाकर खाने से जो लार हमारे मुंह में बनती है, वह खाने में घुलकर पाचन प्रक्रिया को और आसान बनाती है। इससे गैस या कब्ज की समस्या नहीं रहती।

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ऐसे सुधारें आदत
डाइट में सलाद को शामिल करें क्योंकि इन्हें चबाए बिना निगला नहीं जा सकता। डाइनिंग टेबल, स्कूल, कॉलेज या दफ्तर की कैंटीन में बैठकर ही खाना खाएं। टीवी या लैपटॉप के सामने बैठकर ना खाएं। खाते समय बीच-बीच में एकाध घूंट पानी पीएं इससे आप धीरे-धीरे खाएंंगे और खाना अच्छी तरह पचेगा।

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Health News: अनावश्यक पेनकिलर लेने से करें परहेज, नहीं तो हो सकती है गंभीर बीमारी

Health News: ऐसे लोगोंं की संख्या लगातार बढ़ रही है जो मामूली से सिरदर्द, बदनदर्द, कमरदर्द या जोड़ों में दर्द होने पर दिनभर में 1 से 10 गोलियां (पेनकिलर) तक खा लेते हैं। शुरू में व्यक्ति इसे जरूरत के लिए लेता है लेकिन धीरे-धीरे ये आदत बन जाती है। ये पेनकिलर काफी सस्ती आती हैं और इनके लिए कैमिस्ट को कोई डॉक्टरी पर्चा भी दिखाना नहीं पड़ता। इसलिए लोग इन्हें अपनी मर्जी से खा लेते हैं। अनावश्यक पेनकिलर लेने वालों में युवाओं की संख्या ज्यादा है।

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इन दवाओं का होता हैं ज्यादा प्रयोग
फौरन आराम के लिए लोगएस्प्रिन (साल्ट)- डिस्प्रिन, कॉम्बीफ्लेम, ब्रूफेन, डाइक्लोरान दवाएं लेते हैं। डिस्प्र्रिन खून को पतला करके इसे धमनियों में इकट्ठा नहीं होने देती जिससे हार्ट अटैक का खतरा क म होता है। जबकि कॉम्बीफ्लेम, ब्रूफेन और डाइक्लोरान बुखार, सिरदर्द व बदनदर्द में ली जाती हैं।

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ऐसे पहुंचाती हैं नुकसान
जब समान डोज लेते हुए उस दवा का असर कम और साथ में शरीर के भीतर दूसरी तरह की समस्याएं होने लगें तो इन्हें पेनकिलर्स का दुष्प्रभाव मानते हुए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

पेट : ज्यादा पेनकिलर लेने से पेट में अल्सर, कब्ज, इंटरनल ब्लीडिंग की वजह से मल में रक्त आना व खून वाली उल्टियां जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

लिवर: डैमेज होने का खतरा।किडनी: ये दवाएं धीरे-धीरे इसे कमजोर करती हैं।दमा : कई दवाएं अस्थमा भी बढ़ा देती हैं।

मानसिक रोग : कई बार व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, याददाश्त कमजोर होना, उदासी या भ्रम के लक्षण आने लगते हैं।

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सलाह
बिना डॉक्टरी सलाह के ली गई दवा फायदे से ज्यादा नुकसान कर सकती है क्योंकि हर दवा को लेने का अपना तरीका होता है। डॉक्टर मरीज की हिस्ट्री, आयु, खानपान के हिसाब से दवा की मात्रा व परहेज बताते हैं।



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Saturday, 26 June 2021

Health Tips: शरीर के लिए सुरक्षा कवच हैं एंटीबॉडीज, जानिए शरीर में कैसे होता है निर्माण

Health Tips: दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के बाद काफी लोगों में एंटीबॉडी को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। पूछा जा रहा है कि जो वैक्सीन लगवा चुके हैं, अब वे खुद को कोरोना से सुरक्षित मानें या नहीं। साथ ही एंटीबॉडी का स्तर पता करने के लिए कौन-सा टेस्ट कराना सही रहेगा।

बाहरी कीटाणुओं (एंटीजन) को पहचानकर उन्हें खत्म करने की क्षमता रखने वाले एंटीबॉडीज एक प्रकार के प्रोटीन्स होते हैं। ये रक्त का ही एक भाग हैं जिन्हें इम्युनोग्लोबिनिन भी कहते हैं। ये एंटीजंस रोगजनित बैक्टीरिया व वायरस होते हैं जो दो तरह से शरीर में प्रवेश करते हैं। रोग प्रतिरोधकता कम होने व किसी जानवर या कीड़े के काटने पर उनके जहर से।

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शरीर में निर्माण
सभी एंटीबॉडीज शरीर में जन्मजात नहीं होते। मां के गर्भनाल (प्लेसेंटा) से बच्चे को कुछ ही रोगों के विरुद्ध लडऩे वाले एंटीबॉडीज मिलते हैं। ऐसे में जो समस्या मां को रही हो उसके खिलाफ काम कर रहे एंटीबॉडीज बच्चे के शरीर में आ सकते हैं।

जन्म के बाद बच्चे में इन एंटीबॉडीज का निर्माण टीकाकारण के माध्यम से किया जाता है जो आमतौर पर होने वाली बीमारियों से बच्चे को बचाते हैं। इसके अलावा शरीर में एक्टिव व पैसिव दोनों रूप से एंटीबॉडीज बनते हैं।
एक्टिव : ऐसे एंटीबॉडीज जिन्हें शरीर खुद ही बना लेता है।

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पैसिव : इस प्रकार में मरीज को बाहरी रूप से एंटीबॉडीज दिए जाते हैं।

वैक्सीन से सुरक्षा
आमतौर पर होने वाले किसी भी रोग के एक प्रोटीन को लेकर उसी के लिए टीका (वैक्सीन) बना लिया जाता है और मेडिसिनल प्रक्रिया के जरिए शरीर में इंजेक्ट करते हैं।


नवजात शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है इसलिए उसे टीके लगाए जाते हैं ताकि अक्सर शिशु को प्रभावित करने वाले रोगों के कीटाणु उसे बार-बार परेशान न करें। ये टीके बच्चे को बड़ी उम्र तक रोगों से सुरक्षित रखते हैं। साथ ही उनकी रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

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ऑटो-इम्यून एंटीबॉडीज
यह शरीर के खुद के प्रोटीन होते हैं जो कई बार स्वयं की एंटीबॉडीज को ही बाहरी तत्त्व मानने लगते हैं। इन्हीं की वजह से आर्थराइटिस, रुमेटाइड आर्थराइटिस और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं होती हैं इसलिए इन्हें ऑटो-इम्यून डिजीज भी कहते हैं।

एंटीजन से खतरा
बैक्टीरियल, वायरल जनित रोग, दूषित खानपान, सांस के माध्यम या त्वचा के संपर्क से भी बाहरी कीटाणु शरीर में प्रवेश कर कई बीमारियों का कारण बनते हैं।



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Health News: रक्त नलिका में स्कैंरिंग का निर्माण हो सकता है घातक, इस जोखिम से बचने के लिए जरूर आजमाएं ये उपाय

Health News: विटामिन 'ए' मानव शरीर में कई कार्यों को अंजाम देता है। वर्ष 2015-16 में अमेरिकी शोधकर्ताओं के एक दल ने इसकी मदद से एक ऐसे जैव निम्नीकरणीय (बायोडिग्रेडेबल) पदार्थ का विकास किया है, जो रक्त नली में स्कैरिंग (घाव भरने की स्वाभाविक क्रिया) से होनेवाले खतरों को दूर करने में सक्षम है। स्कैरिंग घाव भरने की प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा है और रक्त नलिका में स्कैंरिंग का निर्माण घातक भी हो सकता है।

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नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के मुख्य शोधकर्ता गुईलर्मो अमीर ने कहा, जब घाव होता है, तो कोशिकाओं में विभाजन होता है और यह रक्त नलिका में चला जाता है, जिससे स्कैरिंग का निर्माण होता है। यह रक्त नलिका में अवरोध उत्पन्न कर सकता है, जिससे रक्त परिवहन में बाधा पैदा हो सकती है। क्षतिग्रस्त रक्त नलिका के इलाज के लिए विटामिन ए से निर्मित मुलायम लोचदार पदार्थ का इस्तेमाल किया जा सकता है या इसका प्रयोग चिकित्सकीय उपकरण जैसे स्टेंट्स या प्रोस्थेटिक वेस्कुलर ग्राफ्ट्स के निर्माण में किया जा सकता है।

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पत्रिका एसीएस बायोमेटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग में प्रकाशित शोध में लेखकों ने कहा, चूंकि यह पदार्थ विटामिन 'ए' का बना होता है, इसलिए यह शरीर को तो लाभ पहुंचाता ही है, साथ ही चिकित्सकीय उपकरणों के निर्माण में भी यह अपनी व्यापक भूमिका निभाता है।

पदार्थ के नष्ट होने पर विटामिन 'ए' बाहर निकलता है, जो स्कैरिंग को कम करता है या उससे बचाव करता है। मधुमेह से पीडि़त लोगों के घाव भरने में एक बैंडेज के निर्माण में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

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Health News: आयरन की कमी को पूरा करने के लिए लोहे के बर्तन में पकाएं खाना

Health News: स्वस्थ शरीर के लिए खान-पान पर नियंत्रण होना बेहद जरुरी है। शरीर में गलत खानपान व खराब जीवनशैली से पोषक तत्त्वों व आयरन की कमी होना आम बात है। ऐसे में लोहे के बर्तनों में पका हुआ भोजन सेहत के लिए फायदेमंद रहता है। हमारे यहां प्राचीन समय से ही लोहे की कढ़ाई आदि बर्तनों में खाना बनाने की परंपरा रही है। आइए जानते हैं इसके बेहतरीन फायदे ...

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आयरन की पूर्ति
लोहे की कढ़ाई में खाना बनाने से उसमें मौजूद लौह अंश भोजन में मिल जाते हैं। यदि कढ़ाई में सब्जी को थोड़ी देर पड़ा रहने दिया जाए तो उसका रंग हल्का काला हो जाता है जो शरीर के लिए फायदेमंद होता है। लगभग सभी हरी सब्जियां आयरन युक्त होती हैं। लोहे की कढ़ाई में बनाने पर लौह तत्व में वृद्धि होकर अधिक फायदेमंद हो जाती हैं।

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बर्तन में जंग लगने पर
जंग की हल्की परत आने पर बर्तन को हल्का सा पोंछकर प्रयोग करना चाहिए। इससे जंग के हल्के अंश भोजन के साथ मिलकर शरीर में पहुंचते हैं जो रक्तवृद्धि करने में मददगार होते हैं। लेकिन मोटी परत होने पर बर्तन को अच्छे से धोकर ही प्रयोग करें। दूध ज्यादा देर न रखें : लोहे के बर्तन में दूध उबाला जा सकता है लेकिन अधिक देर बर्तन में नहीं छोडऩा चाहिए। दूध प्रोटीनयुक्त होता है। उसमें आयरन नहीं होता इसलिए ये बर्तन से मिलने वाले आयरन को अवशोषित नहीं कर पाता। इससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है।

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सामान्य स्थिति
शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा उम्र के हिसाब से अलग-अलग होती है। सामान्यत: इसकी मात्रा पुरुषों में 14-17 ग्राम प्रति डेसीलीटर व महिलाओं में 12-16 ग्राम प्रति डेसीलीटर के बीच होनी चाहिए। इससे ऊपर के स्तर पर ज्यादा आयरन न लें वर्ना ब्लड कैंसर का खतरा हो सकता है।



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Patrika Explainer: कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट के खिलाफ लड़ाई में क्या है कारगर

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के मामले थमने के बाद भारत में अब एक नई और बड़ी चिंता सामने आ चुकी है। अब कोरोना वायरस के डेल्टा-प्लस वेरिएंट से जुड़े मामले कम से कम 10 राज्यों में दर्ज किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान 10 से अधिक देशों में की जा चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारी डेल्टा वेरिएंट के बढ़ते खतरे से चिंतित हैं, लेकिन ऐसे समय जब टीकाकरण अभियान तेजी से चल रहा है और नए इलाज आ चुके हैं, इस तरह के जोखिम का मूल्यांकन कैसे किया जा रहा है और ऐसी कौन सी रणनीति हैं जो इसे बेअसर कर सकती हैं।

डेल्टा-प्लस वेरिएंट क्या है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने डेल्टा-प्लस के ओरिजनल-स्ट्रेन यानी मूल डेल्टा वेरिएंट या B.1.617.2 को वैश्विक स्तर पर चिंता के रूप में स्वीकार किया। डेल्टा-प्लस वेरिएंट के पहले आनुवंशिक तत्व जिसे AY.1 भी कहा जाता है, मार्च में यूरोप में पहचाने गए और फिर, अप्रैल में ब्रिटेन ने कहा कि देश में आए पहले पांच मामले "उन व्यक्तियों के संपर्क थे जिन्होंने नेपाल और तुर्की के माध्यम से यात्रा की थी।"

मूल डेल्टा को नोवल कोरोना वायरस के एक अलग स्ट्रेन के रूप में नामित किया गया था क्योंकि इसमें कुछ विशिष्ट म्यूटेशन दिखाई देते थे जिससे यह वायरस अन्य वेरिएंट्स से अलग व्यवहार करता था। डेल्टा-प्लस वेरिएंट को अन्य म्यूटेशन के साथ लेने के बाद इसे मूल वंश से काफी अलग माना जाता है। इसके मुख्य म्यूटेशन को K417N कहा जाता है और इसमें वायरस की सतह पर स्पाइक प्रोटीन शामिल होता है जिसका इस्तेमाल वह मानव कोशिकाओं पर आक्रमण करने के लिए करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि K417N वायरस को मानव कोशिकाओं को अधिक मजबूती से पकड़ने की अनुमति देता है।

डेल्टा-प्लस को "चिंताजनक वेरिएंट" कहे जाने की सलाह देने वाले भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि इसकी दो अन्य चिंताजनक विशेषताएं हैं: पहला, बढ़ा हुए संक्रमित संचरण, जिसका अर्थ है कि यह तेजी से फैल सकता है और दूसरा, इसमें मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी का प्रतिरोध करने की संभावित क्षमता भी है। बता दें कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी उच्च जोखिम वाले हल्के से मध्यम कोविड-19 मरीजों के लिए देश में इलाज का एक नया तरीका है।

क्या डेल्टा-प्लस वेरिएंट के खिलाफ काम करते हैं टीके?

यही वह अहम सवाल बना हुआ है जिसका वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ संतोषजनक जवाब तलाश रहे हैं। किसी भी नए महत्वपूर्ण वेरिएंट का सामने आना लगभग हमेशा ही इसके खिलाफ टीकों की प्रभावशीलता के बारे में सवाल खड़ा करते हैं।

ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर पहले प्रचलित नोवल कोरोना वायरस के पुराने वेरिएंट्स के खिलाफ टीका विकसित किया गया था, तो अब इस बात का संदेह है कि यह एक नए वेरिएंट के खिलाफ समान रूप से प्रभावी नहीं होगा। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यहां कोई डिफ़ॉल्ट नियम नहीं चल रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि भारत में इस्तेमाल किए जा रहे दो फ्रंटलाइन टीके कोविशील्ड और कोवैक्सिन दोनों डेल्टा-प्लस वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी हैं, हालांकि आगे के विवरण अभी आने हैं।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के हवाले से विशेषज्ञों ने कहा कि डेल्टा-प्लस वेरिएंट आबादी के बीच फैलने में तेज हो सकता है और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों या "अपूर्ण वैक्सीन प्रतिरक्षा" वाले लोगों को प्रभावित करने की क्षमता प्रदर्शित कर सकता है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) ने कहा है कि वे डेल्टा-प्लस वेरिएंट का अध्ययन करेंगे कि टीके इसके खिलाफ कितने प्रभावी हैं।

एनआईवी के एक वैज्ञानिक ने कहा, "डेल्टा संस्करण से संबंधित पहले के आंकड़ों के अनुसार, भारत में मौजूदा टीकों के साथ न्यूट्रलाइजेशन हो रहा था। हालांकि न्यूट्रलाइजेशन कम हो गया है, लेकिन यह डेल्टा वेरिएंट से बचाव के लिए पर्याप्त है। डेल्टा प्लस को भी (इसी तरह से) व्यवहार करना चाहिए। हम इस दिशा में काम कर रहे हैं। हमने इस वेरिएंट को आइसोलेट कर दिया है और हम जल्द ही एक अध्ययन करने जा रहे हैं।"

कौन सी रणनीति है कारगर?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, WHO ने डेल्टा-प्लस के साथ ट्रांसमिशन के ज्यादा जोखिम को नोट किया है और इस वेरिएंट के बारे सलाह जारी की है। डब्लूएचओ के मुताबिक इस वेरिएंट को फैलने से रोकने के लिए लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना, मास्क पहनना समेत सुरक्षा संबंधी अन्य उपायों को नहीं छोड़ना चाहिए। वैक्सीन लगवा चुके लोगों को भी मास्क पहनना नहीं छोड़ना चाहिए।

हालांकि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पहले ही कह चुका है कि जिन इलाकों में यह वेरिएंट पाया जाता है, उन्हें "निगरानी, तेज परीक्षण, तेज कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और टीकाकरण में प्राथमिकता पर ध्यान केंद्रित करके अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया को बढ़ाने की जरूरत हो सकती है। डेल्ट वेरिएंट सामने आने पर ब्रिटेन जैसे देशों ने टीकाकरण की दर में तेजी लाने की रणनीति को अपनाया क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण वाले लोग संक्रमित होने पर भी हल्के लक्षण दिखाते हैं।

लेकिन कुल मिलाकर विशेषज्ञों का कहना है कि डेल्टा-प्लस वेरिएंट के सामने भी वही सावधानियां महत्वपूर्ण हैं, जो कोविड-19 महामारी के शुरुआती दिनों से जरूर थीं। इसलिए, व्यक्तिगत स्तर पर मास्किंग, हाथ धोने और दूरी बनाए रखने का लगातार पालन किया जाना चाहिए, जबकि स्वास्थ्य अधिकारियों को किसी भी क्षेत्र में आबादी के माध्यम से महत्वपूर्ण रूप से फैलने से पहले नए वेरिएंट के सामने आने की पहचान करने के लिए उचित परीक्षण, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और जीनोमिक निगरानी सुनिश्चित करने की जरूरत है।



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