Saturday, 29 February 2020

Skin Care In Pregnancy: गर्भावस्था में ऐसे रखें त्वचा का ध्यान, नहीं होंगे खिंचाव के निशान

Skin Care In Pregnancy In Hindi: गर्भावस्था के दौरान एक महिला कई भावनात्मक और शारीरिक परिवर्तनों से गुजरती है। इस समय कई हार्मोनल परिवर्तन होते हैं जिससे महिला का शरीर प्रसव के लिए तैयार होता है। ऐसे में गर्भवती महिला की त्वचा में भी कई परिवर्तन आते हैं। जैसे की पेट पर खिंचाव के निशान बनना, जो कि प्रसव के बाद स्थाई रह जाते हैं। लेकिन ऐसे समय में त्वचा की सही देखभाल की जाए तो इस इन निसानों की समस्या से निजात मिल सकती है। पर आपको इस बात से सावधान रहना होगा कि आप क्या उपयोग करते हैं। बाजार में मौजूद कई केमिकल युक्त ब्यूटी प्रोडक्ट आपके और आपके बच्चे के लिए अच्छे नहीं हो सकते हैं। इसलिए, आपको यह जानना होगा कि गर्भावस्था के दौरान त्वचा के लिए क्या सही है, क्या नहीं।

Pregnancy Skin Care Routine
गर्भावस्था में त्वचा की देखभाल आपके बच्चे के लिए भी सुरक्षित होनी चाहिए। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ त्वचा के लिए आपको गर्भावस्था-सुरक्षित त्वचा देखभाल दिनचर्या को अपनाना चाहिए। क्योंकि इस अवस्था में आप त्वचा में कई परिवर्तन, जैसे- शुष्कता, खुजली, चकत्ते, मुँहासे, लालिमा और खिंचाव का अनुभव कर सकते हैं। इसलिए, जब आप गर्भवती होती हैं तो आपकी त्वचा बहुत नाजुक होती है और आपको त्वचा की देखभाल की दिनचर्या की आवश्यकता होती है जो सुरक्षित हो। आइए जानते हैं गर्भावस्था में त्वचा की देखभाल कैसे कि जाए:-

हल्की मालिश
यह आपके रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देगा और शुष्क त्वचा से निपटने में मदद करेगा। हालांकि, मालिश न केवल आपकी त्वचा को फिर से जीवंत करेगी बल्कि आपको गर्भावस्था के दर्द और तनाव से राहत पाने में भी मदद करेगी। इसलिए, अपनी गर्भावस्था त्वचा देखभाल दिनचर्या के हिस्से के रूप में हर दिन हल्की मालिश करें। इसके लिए जैतून तेल युक्त एलोवेरा या अश्वगंधा की मालिश अच्छा विकल्प है।

मॉर्निंग में हमेशा मॉइस्चराइज
अपने स्नान के बाद हर सुबह मॉइस्चराइजर का उपयोग करें। इससे आपकी त्वचा दिन भर दमकती रहेगी। लेकिन जब आप एक मॉइस्चराइजर चुनें तब यह देख लेें की वह रसायनों से मुक्त हो। बॉडी बटर क्रीम जो कोकोआ बटर और ग्लिसरीन जैसे प्राकृतिक अवयवों से समृद्ध है, एक अच्छा विकल्प है। यह आपकी त्वचा में नमी को संतुलित करेगा और आपको नरम और कोमल त्वचा देगा। यह सूखी त्वचा के कारण खुजली से निपटने में आपकी मदद कर सकता है और आपको खिंचाव के निशान से बचने में मदद कर सकता है।



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Height Increase Tips: हाइट बढ़ाने के लिए जरूरी है अच्छी नींद, जाने क्यों

Height Increase Tips In Hindi: अच्छी हाइट की चाहत हर किसी को होती है। 14-18 साल के बीच सही खानपान व वर्कआउट से सामान्य हाइट पाई जा सकती है। इसके बाद लंबाई बढ़ाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। लेकिन कई बार देखने में आता है कि कई लोगों की लम्बाई किशोरावस्था में भी ज्यादा नहीं बढ़ती, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। आइए जानते हैं लम्बाई बढ़ने से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में:-

लंबाई न बढ़ने के 4 प्रमुख कारण
पोषक तत्त्वों में कमी
शरीर में जरूरी तत्त्वों का अभाव जैसे प्रोटीन, कैल्शियम, मिनरल, आयरन व विटामिन अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए डेयरी उत्पाद, हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें और मौसमी फल को डाइट में शामिल करें। जंकफूड व चाय-कॉफी से परहेज करें।

कई रोगों के कारण
कई बार ग्रोथ हार्मोन सही होने के बावजूद हाइट नहीं बढ़ती। जिसका कारण थायरॉइड हार्मोन, पिट्यूटरी ग्रंथि से निकले हार्मोन की कमी है। पेट में कीड़े होना, ट्यूबरक्लोसिस, सिलियक डिजीज, अवसाद या बचपन से किसी भी प्रकार की लंबी बीमारी भी वजह है।

बढ़ता तनाव
ग्रोथ हार्मोन का जुड़ाव दिमाग की पिट्यूटरी ग्रंथि से है। ऐसे में तनाव के कारण इस ग्रंथि की कार्यप्रणाली बिगड़ती है।

हार्मोन्स में गड़बड़ी
ग्रोथ हार्मोन के साथ कई बार थायरॉइड या एंडोक्राइन हार्मोन का स्तर संतुलित न होने से भी ऐसा होता है।

आनुवांशिकता भी एक वजह
कई बार आनुवांशिकता भी लंबाई न बढऩे का कारण बनती है। ऐसे में माता-पिता में से किसी एक की हाइट पर बच्चे की हाइट निर्भर होती है। जो कि जेनेटिक बदलाव के कारण होता है। कई बार जरूरी नहीं कि माता-पिता जितनी हाइट बच्चे की हो, परिवार के अन्य लोगों से मिलती-जुलती भी हो सकती है।

बेवजह दवा न लें
हाइट बढ़ाने के लिए ऐसी कोई दवाई, हार्मोन थैरेपी या वर्कआउट नहीं जो मनचाही हाइट दें। यह एक प्राकृतिक क्रिया है। इसलिए जरूरी है कि आप बेवजह दवाओं के चक्कर में न पड़े। इनसे ज्यादा नुकसान हो सकता है। जैसे, ग्रोथ हार्मोन टैबलेट का प्रयोग हाइट बढ़ाने के लिए आम है। इनकी ओवरडोज से कई बार लंबाई जरूरत से ज्यादा, सिरदर्द, दिमाग में पानी का प्रेशर बढ़ना, थायरॉइड डिसऑर्डर, जॉइंट पेन जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

14-18 साल की उम्र में लंबाई बढ़ाने के लिए इन पर दें ध्यान

एक्सरसाइज: संतुलित डाइट के साथ ताड़ासन, सूर्यनमस्कार, वृक्षासन जैसे व्यायाम को नियमित करने से फायदा होता है। क्योंकि भोजन से मिलने वाला पोषण वर्कआउट या योग के दौरान मांसपेशियों व हड्डियों में अवशोषित हो जाता है। स्कीपिंग व साइक्लिंग भी मददगार होती हैं।

विटामिन-डी लें: इस तत्त्व के लिए सुबह के समय की धूप हड्डियों के विकास व मजबूती के लिए जरूरी है। इससे जिन हड्डियों का विकास किसी कारण से रुक जाता है, वे सक्रियता से काम करना शुरू कर देती हैं। रात के समय ग्रोथ हार्मोन रिलीज होते हैं, जिसके लिए पर्याप्त नींद लें।

उपयोगी औषधियां: अश्वगंधा या शतावरी चूर्ण की एक या आधी चम्मच की मात्रा दूध के साथ लेने से भी हड्डियों का विकास होता है।



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कई बीमारियों में करागर इलाज करता है खजूर, जानें इसके फायदे

आयुर्वेद के अनुसार खजूर मधुर,पौष्टिक,बलवर्धक,श्रमहारक, संतोष दिलाने वाला, पित्तनाशक, वीर्यवर्धक और शीतल गुणों वाला है। खजूर और खारक में विटामिन, प्रोटीन, रेशे, कार्बोहाइड्रेट और शर्करा होने की वजह से उसे पूर्ण आहार कहा जाता है। खजूर सस्ता व कई खूबियों से भरपूर होता है। इसे रोजाना खाने से कई रोगों में लाभ होता है। जानते हैं उनके बारे में।

एनर्जी : खजूर कुदरती शर्करा का भंडार है जो एनर्जी देता है। इसमें कैलोरी भी नाममात्र की होती है इसलिए यह सेहत के लिए फायदेमंद है। बढ़ते बच्चों के लिए खजूर खाना काफी फायदेमंद होता है क्योंकि उन्हें ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है।
आयरन : रोजाना खजूर खाने से एनीमिया की समस्या में लाभ होता है क्योंकि इसमें आयरन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है।
पोषक तत्व : इसमें कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस, पोटेशियम, मैगनीशियम, जिंक, थियामिन, नियासिन, फॉलेट, विटामिन ए और विटामिन के पाया जाता है।
फाइबर: कब्ज होने पर रोज रात को खजूर भिगो दें और सुबह पानी के साथ खा लें।

ये भी हैं फायदे -
हड्डियां: इसमें सेलेनियम, कॉपर व मैगनीशियम होते हैं जो हड्डियों को मजबूती प्रदान करते हैं।
हार्ट फ्रैंडली: इसमें पोटेशियम काफी मात्रा में और सोडियम ना के बराबर होता है इसलिए यह दिल और नर्व सिस्टम को दुरुस्त रखता है।
इतने खाएं: डाइटीशियन डॉ. अनामिका सेठी के अनुसार खजूर की तासीर गर्म होती है इसलिए गर्मी से अगर फोड़े-फुंसियां हो रहे हों तो इन्हें ना खाएं। गर्मी के दिनों में एक व सर्दी के दिनों में चार खजूर खा सकते हैं।



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चीन से आए लोगों का हुआ कोरोना वायरस परीक्षण, सभी की रिपोर्ट नेगेटिव

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित चीन के वुहान से कल भारत लाए गए 112 लोगों के प्रथम बार किये गए नमूनों को आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) की जांच में नेगेटिव पाया गया है।

विदित है कि इस दल में 76 भारतीय और 36 विदेशी नागरिक हैं जिनमें 5 बच्चे, और 8 परिवार भी शामिल हैं। विदेशी नागरिकों के दल में चीन से 6, बांग्लादेश से 23, म्यांमार और मालदीव प्रत्येक से 2, और संयुक्त राज्य अमेरिका से 1, दक्षिण अफ्रीका से 1 तथा मेडागास्कर प्रत्येक से 1 नागरिक शामिल हैं। सभी नव आगंतुकों को सभी आधारभूत सुविधाएं प्रदान करवाई जा रही हैं। आईटीबीपी के डॉक्टर्स द्वारा इनका रोग चिकित्यीय प्रक्रिया के मुताबिक परीक्षण किया जा रहा है। अभी तक इनमें से किसी में भी कोरोना वायरस का कोई लक्षण नहीं पाया गया है।

ऐसी आशा है कि इन्हें लगभग 14 दिनों तक क्वारंटाइन में रखा जायेगा। इनका दोबारा 14 वें दिन अंतिम परीक्षण नमूने एकत्रित करके किया जायेगा और ठीक पाए जाने पर इन्हें केंद्र से विदा कर दिया जायेगा। इस कैंप में चार पृथक बेड उपलब्ध हैं और जीवन रक्षक उच्च तकनीक वाली एम्बुलेंस भी मुहैया करवाई गई हैं।



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Constipation: बार-बार कब्ज होना हो सकता है इस बीमारी का संकेत, न करें नजरअंदाज

Constipation In Hindi: अधिक उम्र के लोगों को आए दिन पेट से जुड़ी समस्याओं की शिकायत रहती है। फिर चाहे ऐसा किसी भी मौसम में ही क्यों न हो। बढ़ती उम्र के साथ सामान्यत: आंतों की कार्यप्रणाली धीमी होने से कब्ज की दिक्कत रहती है। पेट से जुड़ी समस्याएं इनमें आम हो जाती हैं। ऐसे में वे अक्सर घरेलू नुस्खे अपनाकर या सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार ऐसा करना भारी पड़ता है। यह छोटी और बड़ी आंत में कैंसर की वजह से भी होता है।

प्रमुख कारण
50-60 वर्ष से अधिक उम्र के महिला और पुरुष दोनों इस रोग से प्रभावित हो सकते हैं। मुख्य कारण अधिक उम्र में आंतों की कार्यक्षमता का घटना है। लक्षणों को पेट संबंधी समस्या समझ लंबे समय तक नजर अंदाज करना भी इस रोग की प्रमुख वजह है। बार-बार कब्ज की शिकायत रोग का एक अन्य कारण है।

लक्षण
अचानक वजन कम होने के साथ शरीर में खून की कमी प्रमुख रूप से होने लगती है। इसके अलावा बार-बार चक्कर आना, बुखार, थकान, स्टूल में खून आना भी सामान्य लक्षण बनकर उभरते हैं। व्यक्ति शारीरिक कमजोरी के साथ पेट साफ होने और बिना कारण पेटदर्द महसूस करता है।

ये है इलाज
लक्षणों की समय पर पहचान कर डॉक्टरी सलाह लें। रोग के प्रकार और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सर्जरी के अलावा कीमोथैरेपी, रेडियोथैरेपी और इम्यूनोथैरेपी प्रयोग में ली जाती है।



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दक्षिण कोरिया में कोरोनावायरस के मामले बढ़कर 2931 हुए, 17 लोगों की मौत

सियोल। दक्षिण कोरिया ने शनिवार को डाएगू में कोरोवायरस से संक्रमण के और भी मामले सामने आने को लेकर चेतावनी जारी की है। देश में इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 2931 हो चुकी है, वहीं इससे 17 लोगों की मौत हो चुकी है।

समाचार एजेंसी योनहप ने कोरिया सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (केसीडीसी) के बयान का हवाला देते हुए जानकारी दी कि देश में शनिवार को इस वायरस के 594 नए मामले सामने आए हैं, जिसमें 476 मामले डाएगू के हैं, जो सियोल से 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहीं इसके पड़ोस में नॉर्थ ग्योंगसैंग प्रांत स्थित है। देश के चौथे सबसे बड़े शहर डाएगू की जनसंख्या 25 लाख है। वहीं अधिकारियों ने शिनचोनजी चर्च में आने वाले लोगों का की जांच शुरू कर दी है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने शिनचोनजी चर्च में आने वाले 210,000 से अधिक लोगों का परीक्षण करना शुरू कर दिया है, ऐसे में आने वाले दिनों में वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। दक्षिण कोरिया के स्वास्थ्य अधिकारियों ने चर्च में आने वाले 88 प्रतिशत लोगों का बहुत कम समय में ही जांच कर लिया है, जिसमें से दो प्रतिशत लोगों में नोवल कोरोनावायरस जैसे लक्षण देखे गए हैं। केसीडीसी ने कहा कि चर्च के 3381 सदस्यों से नमूने लिए गए हैं, जिनमें कोरोनावायरस के लक्षण देखे गए हैं। समाचार एजेंसी योनहप ने यहां उपस्वास्थ्य मंत्री किम गैंगलिप के बयान का हवाला देते हुए कहा, ''शिनचोनजी के अनुयायियों के बीच पुष्ट मामलों का अनुपात बहुत अधिक है और अगले कुछ दिनों में डाएगू में वायरस का परीक्षण पूरा होने तक नए मामलों की संख्या बढ़ेगी।



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Apricot Beauty Tips: खुबानी से चंद मिनटों में पाएं मुलायम और चमकदार त्वचा

Apricot Beauty Tips In Hindi: न्यूट्रीशनिस्ट स्वस्थ व चमकदार त्वचा के लिए नियमित खुबानी खाने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक इसमें ऐसे तत्त्व हैं जो त्वचा को पोषण और ताजगी देते हैं। इसमें ऐसा खास तेल भी मौजूद है जो त्वचा की कोशिकाओं का पुनर्निर्माण करता है। यह तेल हल्का होता है साथ ही इसमें चिकनाई नहीं होती। ऐसे में इसे खाना फायदेमंद है। अमरीकी यूनिवर्सिटी के अनुसार मौसम के अनुसार इसे रोजाना खाया जा सकता है। इसमें मौजूद विटामिन-ए और ई स्किन में नमी बनाए रखते हैं। आइए खुबानी त्वचा का कैसे खयाल रखती है :-


त्वचा के लिए खुबानी के फायदे – Skin Benefits of Apricot in Hindi

एंटी-एजिंग
एजिंग प्रभाव को कम करने के लिए एक तो इसका सेवन (रोजा दो से तीन) किया जा सकता और दूसरा इसका फेस पैक बनाया जा सकता है।

त्वचा की चमक
अपने एंटी-एंजिग प्रभाव के साथ खुबानी का प्रयोग त्वचा की चमक बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। खुबानी कई विटामिन्स (ए, सी, ई) से समृद्ध होती है, जो त्वचा के लिए एंटी-एजिंग और ब्यूटी एजेंट के रूप में काम करती है। चेहरे की चमक बढ़ाने के लिए आप खुबानी का इस्तेमाल बताए गए तरीके से कर सकते हैं।

त्वचा विकार
विटामिन-सी और ए से भरपूर होने के कारण खुबानी का तेल संवेदनशील त्वचा के लिए कारगर माना जाता है। यह एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से समृद्ध होता है, जो त्वचा संक्रमण से आपको निजात दिला सकता है।

खुबानी का फेस पैक:
सामग्री: तीन से चार पके हुए खुबानी के फल, जैतून तेल की तीन से चार बूंदें या नींबू का रस।

विधि: पकी हुए खुबानी का छिलका उतार लें। इसके गुदे के साथ जैतून का तेल या नींबू का रस मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें।
आप तेल या नींबू के बिना भी खुबानी के गुदे का पेस्ट बना सकते हैं। अब तैयार पेस्ट को पूरे चेहरे पर लगाएं और 15 से 20 मिनट के लिए इसी अवस्था में छोड़ दें।इसके बाद साफ ठंडे पानी से चेहरे को धो लें।आप यह प्रक्रिया हफ्ते में दो बार दोहरा सकते हैं।

खुबानी ब्यूटी फेस पैक:

सामग्री: दो चम्मच शहद, खुबानी का गुदा दो चम्मच, बादाम तेल आधा चम्मच, नींबू का रस आधा चम्मच।

विधि: सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें।पेस्ट को चेहरे पर लगाएं।अब 15-20 मिनट के लिए पेस्ट को चेहरे पर लगे रहने दें।फिर ठंडे पानी से चेहरे को धो लें।यह प्रक्रिया आप हफ्ते में दो बार कर सकते हैं।



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Memory Boosters: याददाश्त तेज करता है तिल का तेल, ऐसे करें उपयोग

Memory Boosters In Hindi: अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का एक प्रकार है जो रोगी के शारीरिक व मानसिक रूप से काम करने पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके मरीजों को कई बातें भूलने की बीमारी होती है। धीरे-धीरे यह बीमारी इतनी प्रबल हो जाती है कि व्यक्ति रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातें भी भूलने लगता है। जानें इसका आयुर्वेदिक इलाज-

प्रमुख लक्षण
तनाव की समस्या जो धीरे-धीरे अवसाद का रूप ले लेती है। उदासीनता महसूस होना, अकेलेपन का अहसास या समाज से दूरी बना लेना, रोजमर्रा के बर्ताव में बदलाव, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना या शक की भावना का बढ़ना प्रमुख है। इसके अलावा बढ़ती उम्र भी कारण है जिसके साथ व्यक्तिमें आक्रोश बढ़ जाता है।

तिल का तेल
आयुर्वेद में तिल के तेल का प्रयोग याददाश्त बढ़ाने में उपयोगी है। तिल के तेल को गुनगुना गर्म कर उसकी 3-3 बूंदें अपने नाक के दोनों नथुनों में डाल सकते हैं। सिर व पैरों के तलवों की मालिश के अलावा तेल को भोजन में भी प्रयोग कर सकते हैं।

अश्वगंधा
अश्वगंधा ऐसी जड़ीबूटी है जो रोग को बढ़ने से रोकती है। इसका काम दिमाग को मजबूत करना है। कई शोधों के अनुसार इससे शरीर में ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स बनते हैं जो दिमागी नसों को एक्टिव रखते हुए मानसिक कार्यक्षमता बढ़ाते हैं।

हल्दी व बादाम
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन तत्त्व अच्छा एंटीऑक्सीडेंट्स है। रोजाना भोजन में इसके प्रयोग से या फिर दूध में चुटकीभर इसे लेने से दिमाग को ताकत मिलती है। यह दिमाग की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को रिपेयर करती है। वहीं बादाम ब्रेन के लिए हैल्दी फूड है। इसमें मौजूद विटामिन-ई याददाश्त बढ़ाने में सहायक है।

शंखपुष्पी
बे्रन टॉनिक है शंखपुष्पी। इसके खास तत्त्व दिमागी कोशिकाओं को सक्रिय कर भूलने की समस्या दूर करते हैं। 3-6 ग्रा. चूर्ण रोज दूध के साथ पीएं।

गाजर खाएं
इसमें मौजूद विटामिन-ए से याददाश्त पर हुआ नकारात्मक प्रभाव कम होता है। इसे सब्जी के रूप में, जूस या हल्वे के रूप में खा सकते हैं। बुजुर्गों के लिए इसका सूप काफी फायदेमंद होता है।



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Nadi Shodhana Pranayama: नाड़ी शोधन प्राणायाम से शरीर को मिलती है नई ऊर्जा

Nadi Shodhana Pranayama In Hindi: आयुर्वेद के अनुसार नाड़ी शोधन प्राणायाम के जरिए शरीर की 72 हजार नाड़ियों को शुद्ध किया जा सकता है। किसी भी प्राणायाम को शुरू करने से पहले इसे करना उपयोगी है। सूर्याेदय से पहले इसका अभ्यास एकांत और खुले वातारण में करना चाहिए। क्योंकि इस समय वातावरण में शुद्ध हवा मौजूद होती है जो मुंह से होते हुए फेफड़ों तक जाती है और यहां से हृदय के जरिए रक्त में मिलकर हर अंग तक पहुंचती है। साथ ही भस्त्रिका व अग्निसार जैसे प्राणायाम हृदय की पंपिंग बढ़ाकर इसकी कार्यक्षमता बढ़ाते हैं। जानते हैं इस प्राणायाम के बारे में-


ऐसे करें : सुखासन की मुद्रा में सीधे बैठकर आंखें बंद कर लें। दाएं हाथ के अंगूठे से दाएं नथुने को बंद कर पूरी सांस बाहर निकालें। अब बाएं नथुने से सांस लें, मध्यमा अंगुली से बाएं नथुने को बंद कर कुछ देर सांस को क्षमतानुसार अंदर रोक कर रखें। फिर दायां अंगूठा हटाकर सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। 1-2 सेकंड सांस को बाहर छोड़ें। इस प्रक्रिया को दाएं नथुने से भी दोहराएं। इस एक चक्र को 5-7 मिनट करें। इसे खाली पेट करें। इसे करने के दौरान मुंह से सांस न लें। जल्दबाजी न करें।

विशेष: इस प्राणायाम के अभ्यास के दौरान सांस लेने में जितना समय लगता है, उससे अधिक समय सांस रोकने और छोडऩे में लगता है। सांस लेते समय सांस की गति इतनी धीमी होनी चाहिए कि सांस लेने की आवाज स्वयं को आए। सुविधा के लिए आप शुरुआत में 1:1:1 के अनुपात में सांस लें, रोकें और छोड़ें। कुछ समय बाद नियमित अभ्यास के आधार पर इस अनुपात को 1:2:2 और फिर 1:4:2 कर सकते हैं। इससे फेफड़े मजबूत बनेंगे।

हृदय को दुरुस्त रखता नाड़ी शोधन प्राणायाम
माना जाता है कि यदि व्यक्ति का हृदय स्वस्थ है तो वह हर तरह से स्वस्थ है। लेकिन सांस लेने में तकलीफ, भारीपन महसूस होना या थोड़ा-सा काम करते ही थक जाना हृदय पर पड़ने वाले दबाव की ओर इशारा करता है। ऐसे में नाड़ीशोधन प्राणायाम हृदय को दुरुस्त रखता है।



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शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए जानिए ये आसान घरेलू उपाय

शरीर की फिटनेस के लिए ऊपरी तौर पर सिर्फ शरीर को ही चुस्त-दुरुस्त रखने का प्रयास नहीं करना चाहिए बल्कि अंदरूनी अंगों के साथ ही त्वचा व बालों का भी खास ध्यान रखना चाहिए। तेज धूप से सेहत की रक्षा करने के लिए आप निम्न उपाय अपना सकते हैं।

नहाने के पानी में लैवेंडर तेल की बूंदें मिलाकर नहाएं, आप दिनभर एक्टिव रहेंगे और शरीर को ठंडक व ताजगी मिलेगी।
सनबर्न हो जाए तो त्वचा पर हर 2-4 घंटे में बर्फ मलें। पके हुए केले में मिल्क पाउडर व शहद मिला लें। चेहरे को धोकर इस लेप को बीस मिनट तक लगाए रखें। सनबर्न की वजह से जो त्वचा असामान्य रंग की हो गई थी उसमें सुधार होगा।

मुल्तानी मिट्टी, जई का दलिया, चंदन का बुरादा बराबर मात्रा में मिलाकर एक डिब्बे में बंद करके रखें व इसे स्क्रब की तरह इस्तेमाल करें। इसके प्रयोग से त्वचा पर धूप का दुष्प्रभाव कम होगा। गर्मी के मौसम में रोजाना 15-20 गिलास पानी पीएं। इससे शरीर में मौजूद दूषित पदार्थ मूत्र व पसीने के रूप में निकल जाते हैं। गर्मी के मौसम में चाय और कॉफी कम पीनी चाहिए।

गर्मी के दिनों में त्वचा पर साबुन नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा में जलन हो सकती है। शरीर को साफ रखने के लिए टोनर व एस्ट्रिजेंट का प्रयोग करना चाहिए। त्वचा के छिद्रों को खोलने के लिए जई का दलिया और आलू को टमाटर के गूदे के साथ मिलाकर फेसपैक की तरह लगाएं।
गर्मी के मौसम में फल व सलाद नियमित रूप से खाएं। हमेशा पसीना कॉटन, रूमाल या टिशु पेपर से ही पोंछना चाहिए।



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Cold Cough Remedy: मौसमी बीमारियां दूर करने के लिए रामबाण हैं ये देसी नुस्खे

Cold Cough Remedy In Hindi: मौसम में बदलाव होने के साथ ही सर्दी-जुकाम होना एक आम समस्या है। लेकिन आप चाहे ताे कुछ असरदार घरेलू उपायाें के जरिए सर्दी - जुकाम, खांसी काे दूर किया जा सकता है। आइए जानते हैं इन असरदार नुस्खाें के बारे में:-

- अखरोट खाने से सर्दी-जुकाम और सांस की बीमारी से बचाव होता है। साथ ही गुनगुने पानी में अजवाइन मिलाकर दिन में दो बार पीने से खांसी-जुकाम में लाभ होता है। कफ वाली खांसी में भी यह पानी फायदेमंद होता है।

- अलसी का पानी पीने से सांस की बीमारी व खांसी में आराम होता है। रात को दो चम्मच अलसी के बीजों को पानी में भिगोकर सुबह इस पानी को छानकर पी लें। इससे दमे के मरीजों को फायदा होता है। भुनी अलसी को शहद के साथ चाटने से खांसी दूर होती है। खांसी में अनार का रस पीने से भी लाभ होता है।

- खांसी बचने के लिए हल्दी का उपयाेग पुराने समय से हाेता आया है। इसके लिए आप कई तरीकों से हल्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं। गिलास गर्म दूध में एक छोटा चम्मच हल्दी डालकर पीने से खांसी से जल्द राहत मिलती है। रिसर्च के अनुसार हल्दी में जो एन्टीबैक्टीरीअल गुण होता है वह बलगम से राहत दिलाने में मदद करता है। कई लोग गुड के साथ भी हल्दी खाकर खांसी दूर करते हैं।

- शहद से कई बीमारियों का इलाज होता है और एक गिलास गर्म पानी में शहद डालकर रात को सोने से पहले पीने से खांसी से राहत मिलती है। एक गिलास गर्म पानी में शहद और नींबू का रस डालकर दिन में तीन बार पीने से खांसी से जल्द राहत मिलता है। साथ ही इसके साथ अदरक भी ले सकते हैं और अदरक के टुकड़ों का सीधे भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

- लहसुन भी खांसी से राहत दिलाने में कारगर है। इसके लिए आपको लहसुन को घी में भून कर गर्मागरम खाना होगा।

- अनार का रस भी खांसी से राहत दिलाता है। लेकिन इसके लिए आपको सिर्फ अनार का नहीं, इसमें जरा सा पिपली पाउडर और अदरक भी डालना होगा।



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चीन में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या 2,835 हुई

बीजिंग। चीन में कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,835 हो गई है, जबकि कन्फर्म मामलों की संख्या बढ़कर 79,251 हो गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि उन्हें चीन में शुक्रवार को कोरोनोवायरस संक्रमण के 427 नए कन्फर्म मामलों और 47 लोगों की मौत की जानकारी मिली। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के अनुसार, हुबेई प्रांत में 45, बीजिंग और हेनान में एक-एक की मौत हुई है। आयोग ने कहा कि शुक्रवार को 248 नए संदिग्ध मामले सामने आए। शुक्रवार को, ठीक होने के बाद 2,885 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि गंभीर मामलों की संख्या 288 से घटकर 7,664 हो गई।

आयोग ने कहा कि 1,418 लोगों के अभी भी वायरस से संक्रमित होने का संदेह है। ठीक होने के बाद कुल 39,002 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। आयोग ने कहा कि 658,587 लोगों के संक्रमित मरीजों के करीबी संपर्क में होने का पता चला है, उनमें से 10,193 को शुक्रवार को चिकित्सा निगरानी से छुट्टी दे दी गई है, जबकि 58,233 अन्य अभी भी चिकित्सा निगरानी में हैं। शुक्रवार आधी रात को, हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (एसएआर) में दो मौतों सहित 94 मामलों की पुष्टि हुई थी, मकाऊ एसएआर में 10 और ताइवान में एक मौत सहित 34 मामलों की पुष्टि हुई। हांगकांग में 30, मकाऊ में आठ और ताइवान में नौ मरीजों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।



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Acupressure Benefits: बिना दवा के दर्द दूर करती है एक्यूप्रेशर पद्धति

Acupressure Benefits In Hindi: एक्यूप्रेशर प्राचीन पद्धति है, जिससे रोगों का इलाज बिना दवा के होता है या यूं कहें कि यह शरीर के विभिन्न हिस्सों के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दबाव डालकर रोग के निदान करने की विधि है। इसके तहत शरीर में करीब 107 बिंदुओं पर हाथ के अंगूठे से प्रेशर देने से व्यक्ति रोग और दर्द से मुक्त हो सकता है। आइए जानते हैं इसके बारे में कुछ खास बातें:-

कैसे होता है इलाज
इस पद्धति में इलाज से पहले मरीज को हाथ रगड़ने के लिए कहते हैं। इस दौरान जो लालिमा उसके हाथ पर आती है मरीज की ऊर्जा के स्तर को दर्शाती है। ऊर्जा को मांपने के लिए दाएं हाथ की छोटी अंगुली के बीच के पॉइंट को दबाया जाता है। इस दौरान उसे दर्द होता है तो इसका मतलब है कि उसका एनर्जी लेवल कमजोर है। इसे ठीक करने के लिए उस बिंदु को पहले दिन 15-20 सैकंड तक दबाते हैं। दिन ब दिन समयावधि बढ़ाते हैं। अंगूठे व तर्जनी अंगुली के बीच का हिस्सा नियमित दबाने से छोटे-मोटे रोगों से निजात पाई जा सकती है।

कब करें
एक्यूप्रेशर खाने से पहले या खाने के आधे घंटे बाद ही करें। सुबह 5-6 के बीच शरीर में बेहतर ऊर्जा का संचालन होता है। इस दौरान इस प्रक्रिया को किया जाए तो फायदा होगा। ध्यान देने की बात है कि इसे बिना विशेषज्ञ की सलाह के न करें क्योंकि गलत पॉइंट दबने से परेशानी बढ़ सकती है।

कई तरह से फायदेमंद
हार्ट अटैक के लक्षण दिखने पर दाएं हाथ की छोटी अंगुली में दर्द होता है। इसे समय रहते दबाने से हार्ट अटैक को रोका जा सकता है। अंगूठे के ऊपरी भाग की मसाज से गर्दन दर्द में आराम होता है। आंखों को स्वस्थ रखने के लिए दोनों हाथ के अंगूठे के बाद अंगूठे व अंगुलियों के बीच वाले स्थान को रगडऩे से आंखों की रोशनी बढ़ती है व आंख संबंधी विकार दूर होते हैं। सुनने संबंधी समस्या होने पर दाएं हाथ की छोटी अंगुली के बीच वाले स्थान को 10-15 सैकंड के लिए दबाएं।

उपयोगी बिंदु
- कमरदर्द की समस्या में दाएं हाथ के अंगूठे की हथेली पर मौजूद 5 पॉइंट को 15-20 सैकंड से एक से डेढ़ मिनट तक दबाने से फायदा होता है।
- पैरों की चारों अंगुलियों की 10-10 मिनट तक मालिश करने से बिंदुओं पर दबाव पड़ने से घुटनों का दर्द दूर होता है।



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Friday, 28 February 2020

Anti Diabetes Remedy: ब्लड शुगर को कम करने में असरदार है गुड़मार

Anti Diabetes Remedy In Hindi: गुड़मार को संस्कृत में मेष श्रृंगी भी कहा जाता है। यह गुड़ + मार दो शब्दों से बना है, गुड़ अर्थात् मीठा, मार यानी नष्ट करने वाली। आयुर्वेद में इसे अकेले या मधुमेहरोधी अन्य दवाओं के साथ मिलाकर (खासकर ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए) प्रयोग में ले सकते हैं। कई रोगों में इसे विभिन्न तरह से प्रयोग में लिया जाता है। आइए जानते हैं इसके फायदाें के बारे में :-


शुगर का स्तर कम: गुड़मार ( Gymnema sylvestre ) की हरी पत्तियों को चबाना या पत्तियों के आधे चम्मच सूखे पाउडर को पानी से लेना खून में शुगर के स्तर को कम करता है। इंसुलिन बनाने की क्षमता बढऩे के साथ आंतों में शुगर का अवशोषण कम होता है। इसीलिए यह मधुनाशिनी कहलाती है।

वजन घटाए: शरीर में वसा के जमाव को रोकने में गुड़मार उपयोगी है। यह मेटाबॉलिज्म को सुधारने में मददगार है।

संक्रमण रोधी: गुड़मार में मौजूद तत्त्व शरीर के विषाणुओं से लड़कर रोगों की आशंका को घटा देते हैं।


ऐसे करें प्रयोग : मधुमेह के लिए गुड़मार की 2-3 हरी पत्तियों को चबाकर ऊपर से पानी पी लें या 2-4 ग्राम सूखी पत्तियों का पाउडर जरूरत के अनुसार सुबह-शाम ले सकते हैं। गुड़मार सत्व 500 मिग्रा मात्रा में सुबह-शाम ले सकते हैंं। विशेषज्ञ के बताए अनुसार ही इसको लेना चाहिए।

गुड़मार के पत्‍तों की चाय
आयुर्वेदिक जड़ी बूटीयों (Herbs) द्वारा तैयार की जाने वाली हर्बल चाय की तरह गुड़मार के पत्‍तों की चाय का भी उपयोग किया जा सकता है। यह स्‍पष्‍ट है कि गुड़मार की चाय का सेवन कर आप चीनी के स्‍वाद को दबा सकते हैं।

एक कप चाय बनाने के लिए चाय के बर्तन में गुड़मार की पत्तियों को ड़ालें और इसमें गर्म पानी मिलाएं। आप इसमें अन्‍य चाय जैसे कि हर्बल टी या ग्रीन टी आदि को भी मिला सकते हैं जो आपके वजन को कम करने में मदद करती हैं। भोजन करने से पहले इस चाय का एक कप सेवन किया जाना अच्‍छा होता है। खास तौर पर जब आप कुछ मीठा खाते हैं ऐसे समय में इस चाय का सेवन जरूर करना चाहिए।

आप चाहें तो गुड़मार की चाय को दिन में 3 बार तक ले सकते हैं। लेकिन इससे अधिक मात्रा में सेवन करने से कुछ नुकसान भी हो सकते हैं।



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चीन में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या 2788 हुई

बीजिंग। चीन में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,788 हो गई है, जबकि कन्फर्म मामलों की संख्या बढ़कर 78,824 हो गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि चीन के 31 प्रांतीय स्तर के क्षेत्रों और शिंजियांग प्रोडक्शन एंड कंस्ट्रक्शन कॉप्र्स से गुरुवार को कोरोनोवायरस संक्रमण के 327 नए मामले सामने आने और 44 लोगों की मौत होने की जानकारी मिली। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के अनुसार, हुबेई प्रांत में 41, बीजिंग में दो और एक शिंजियांग प्रोडक्शन एंड कंस्ट्रक्शन कॉप्र्स में एक की मौत हुई। आयोग ने कहा कि गुरुवार को 452 और संदिग्ध मामले सामने आए। गुरुवार को, ठीक होने के बाद 3,622 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि गंभीर मामलों की संख्या 394 घटकर 7,952 हो गई। चीन में गुरुवार के अंत तक कोरोनावायरस संक्रमण के कन्फर्म मामलों की कुल संख्या 78,824 तक पहुंच गई और 2,788 लोगों की मौत हो चुकी है।

आयोग ने कहा कि 2,308 लोगों के अभी भी वायरस से संक्रमित होने का संदेह है। ठीक होने के बाद कुल 36,117 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। आयोग ने कहा कि 656,054 लोगों के संक्रमित रोगियो के करीबी संपर्क में होने का पता चला, उनमें से 10,525 को चिकित्सा निगरानी के बाद गुरुवार को छुट्टी दे दी गई है, जबकि 65,225 अन्य अभी भी चिकित्सा निगरानी में हैं। गुरुवार के अंत तक, हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (एसएआर) में दो मौतों सहित 93 मामलों की पुष्टि हुई, मकाओ एसएआर में 10 और ताइवान में एक मौत सहित 32 मामलों की पुष्टि हुई। हांगकांग में 26 मरीजों, मकाऊ में आठ और ताइवान में छह को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।



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Coronavirus: वैश्विक मंदी का खतरा बन सकती है कोरोना वायरस की महामारी- मूडीज

coronavirus नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) एक महामारी का रूप लेता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आ सकती है। मूडीज एनालिटिक्स ने हाल ही में चेताया है कि इस वायरस का प्रसार अब इटली व कोरिया में भी हो चुका है। ऐसे में इसके महामारी का रूप लेने की संभावना भी बढ़ गई है।

मूडीज एनालिटिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जांडी ने कोरोना वायरस के प्रभाव और परिस्थितियों पर एक टिप्पणी में कहा कि कोरोना वायरस चीनी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है, जो अब पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बना चुका है। यह धारणा कि चीन में वायरस लगातार बढ़ रहा है, जिससे महामारी के आसार बढ़ रहे हैं।

अमेरिकी एजेंसी ने कहा, ''हमने पहले 20 फीसदी महामारी की आशंका जाहिर की थी, जिसे अब हमने 40 फीसदी कर दिया है।अगर वायरस ने महामारी का रूप ले लिया तो यह इस वर्ष की पहली छमाही के दौरान वैश्विक और अमेरिकी मंदी का कारण बनेगी।

मूडीज के एनालिटिक्स ने कहा, ''हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि ऐसा न हो, लेकिन अगर यह हो जाए तो तैयार रहना ही समझदारी है।

वायरस की वजह से चीनी व्यापार थम सा गया है। यहां पर्यटन पर भी काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। वैश्विक एयरलाइंस चीन में नहीं जा रही हैं और अधिकांश समुद्री जहाजों ने भी एशिया-प्रशांत मार्गों को स्थगित कर दिया है। यह अमेरिका सहित प्रमुख यात्रा स्थलों के लिए एक बड़ी समस्या है, जहां हर साल लगभग 30 लाख चीनी पर्यटक आते हैं। अमेरिका में चीनी पर्यटक किसी भी विदेशी पर्यटकों के सबसे बड़े खर्च करने वालों में से हैं।

एजेंसी ने कहा कि यूरोप में मिलान, इटली जैसी जगहों पर भी पयर्टन का प्रभावित होना निश्चित है, जो देश में नए संक्रमण के मामलों का केंद्र भी है।

मूडीज एनालिटिक्स ने कहा कि बंद कारखाने चीन की विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर देशों और कंपनियों के लिए समस्या हैं। एप्पल, नाइक और जनरल मोटर्स ऐसी अमेरिकी कंपनियां हैं, जो इससे प्रभावित हैं।



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Anti Anxiety Foods: चिंता से राहत पाने के लिए खाएं ये फूड्स

Anti Anxiety Foods in Hindi: आप अक्सर एंग्जाइटी यानि घबराहट महसूस करते हैं तो इसके पीछे आपका खानपान हो सकता हैं। हाल ही में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि कम फल और सब्जी का सेवन करने वाले लोगों में चिंता Anxiety की अधिक संभावना हो सकती है। शोध से पता चला है कि जो लोग रोजाना फल और सब्जियों के तीन से कम स्रोतों का सेवन करते हैं, उनमें चिंता विकार होने का खतरा 24 प्रतिशत ज्यादा होता है।

Anxiety एक मनोवैज्ञानिक विकार है जो मुख्यतौर पर तनाव के कारण होता है, जो आगे चलकर स्थाई अवसाद का रूप ले सकता है। दुनियाभर में लाखों लोग एंग्जाइटी की समस्या से परेशान हैं। लेकिन आप चाहे तो अच्छे खानपान के जरिए Anxiety से अपना बचाव कर सकते हैं। आइए जानते हैं एंग्जाइटी से बचाव करने वाले फूड्स के बारे में:-

1. शतावरी
एक शोध के अनुसार चिंता और अवसाद से पीड़ित लोगों में फोलेट की कमी हो जाती है। शतावरी के मूड-बूस्टिंग पोषक तत्व फोलेट की कमी को पूरा करने में असरदार होते हैं। एक कप शतावरी आपके शरीर में रोज की जरूरत का दो-तिहाई फोलेट प्रदान करता है। फोलेट आपके मानसिक स्वास्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए जरूरी है।

2. एवोकैडो
विटामिन बी 6 सेरोटोनिन सहित शरीर को कई न्यूरोट्रांसमीटर बनाने में मदद करता है, जो मूड को प्रभावित करते है। थायमिन, राइबोफ्लेविन और नियासिन सहित बी विटामिन, तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इन विटामिनों की कमी कुछ लोगों में बढ़ती चिंता से जुड़ी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार एवोकाडोस तनाव से राहत देने वाले बी विटामिन और हृदय-स्वस्थ वसा में समृद्ध हैं जो चिंता को कम करने में मदद कर सकते हैं।

3. बादाम
शोधकर्ताओं का दावा है कि चिंता से संबंधित लक्षणों के लिए मैग्नीशियम एक प्रभावी उपचार हो सकता है, क्योंकि अपर्याप्त मैग्नीशियम मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन के स्तर को कम करता है। बादाम के सिर्फ 1 औंस (जिसमें लगभग 12 नट्स) में 75 मिलीग्राम मैग्नीशियम होता है जो आपके दैनिक अनुशंसित मूल्य का 19% है। आप फलियां,एवोकैडो, बीज जैसे खाद्य पदार्थों में मैग्नीशियम भी पा सकते हैं।

4. ग्रीक योगर्ट
प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ ग्रीक योगर्ट चिंता को कम करने में मदद कर सकता है। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व दिमाग को आराम देने वाले हार्मोन को बढ़ावा देेते हैं। यह अच्छी नींद लाने में भी मददगार होते हैं।

5. ब्लूबेरी
विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट से भरी ब्लूबेरी चिंता से राहत दिलाने में कारगर है।



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जानिए मां की बुरी आदतें कितनी खतरनाक है गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए

अगर मां प्रेग्नेंसी के दौरान भी शराब, चाय और कोल्डड्रिंक लेती हैं तो बच्चे में ऑक्सीजन की कमी, हार्ट रेट का बढ़ना, कम वजन के साथ प्रीमैच्योर डिलीवरी, फेफड़ों की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी के अलावा गर्भपात की आशंका भी बढ़ जाती है। आइये जानते हैं मां की कौनसी आदतें बच्चे पर बुरा असर डालती हैं।

अधिक चाय-कॉफी-
इन्हें अधिक मात्रा में पीने से कई बार आंवलनाल कमजोर हो जाती है।
असर : इनमें मौजूद कैफीन प्लेसेंटा के जरिए बच्चे के शरीर में पहुंचकर उसके मेटाबॉलिज्म व हार्ट रेट को बढ़ा देते हैं। कई बार इनसे श्वसन तंत्र भी कमजोर हो सकता है।

कोल्डड्रिंक्स -
कोल्डड्रिंक्स, भूख को मारती हैं। इन्हें नियमित पीने से अपच की परेशानी होती है।
असर : इसे अधिक पीने से मोटापा, डायबिटीज, दांत संंबंधी समस्याएं और पोषक तत्त्वों की कमी होने लगती है जो मां व बच्चे के शारीरिक विकास पर असर डालती है।

चॉक-चूना खाने की आदत -
कैल्शियम की कमी से कई बार गर्भवती महिला का मिट्टी, चॉक, चूना आदि खाने का मन करता है। धीरे-धीरे स्थिति आदत में बदल जाती है और शरीर आयरन, विटामिन व मिनरल्स को एब्जॉर्ब नहीं कर पाता।
असर : गर्भस्थ शिशु को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता और वह कमजोर पैदा होता है। मां के पेट में कीड़ों की समस्या बच्चे में टायफॉइड, पीलिया का कारण बनती है।

उपाय : देसी डाइट करें फॉलो -
नाश्ता: दलिया, राबड़ी, रोटी-सब्जी, हलवा, पोहा, ढोकला, छाछ, दही, आमरस, शिकंजी, दाल का पानी, सत्तू या सूप लें।
लंच-डिनर: दही/छाछ, दाल, सब्जी, मक्का/बाजरा/मिस्सी रोटी, अचार, हरा धनिया, पुदीना या इमली की चटनी, गुड़ लें।



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HEALTH TIPS : रीढ़ की हड्डी में दर्द है तो करवट से सोएं, गर्दन में खिंचाव न आए

गलत मुद्रा में सोने से सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइसिस भी हो सकता है। गर्दन से रीढ़ की हड्डी के अंतिम छोर तक दर्द होता है। यह दर्द कई बार ज्यादा झटके से उठने-झुकने और वजनदार चीजें उठाने से भी होता है। सोते समय रीढ़ की हड्डी में हल्का घुमाव होना चाहिए। तकिया कंधे से सिर तक यानी ऊंचाई उतनी होनी चाहिए जिससे गर्दन में खिंचाव न हो।
गर्दन से कमर तक पेन
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइसिस में गर्दन से कमर के पास तक के जोड़ों में दर्द या सूजन हो जाती है। न्यूरो तंत्रिका में खिंचाव के कारण यह दर्द गर्दन, हाथों, कंधों, पीठ और कमर तक बढ़ जाता है। मांसपेशियां मजबूत न होने से भी हड्डियों पर दबाव पड़ता है। सोते समय तकिया लगाने से सिर व कंधा एक लेवल में रहता है। गर्दन व कमर में दर्द है तो किसी भी करवट से सो तो सकते हैं लेकिन गर्दन, स्पाइन की सीध में होनी चाहिए। इससे दर्द में राहत मिलती है और अच्छी नींद भी आती है।
यह भी है वजह
मोबाइल पर देर तक गर्दन झुककर न देखें। मोबाइल का इस्तेमाल करते समय यह आंखों के लेवल पर होना चाहिए। इससे गर्दन की मांसपेशियों में तनाव व लापरवाही बरतने पर सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइसिस हो सकती है।
घुटने मोड़कर सोएं
कमर में दर्द, नसों में खिंचाव रहता है तो घुटने मोड़कर सोएं। सोते समय दोनों घुटनों के बीच में पतला तकिया जरूर लगाएं।
इन बातों का रखें ध्यान
आप किसी मुद्रा में सोएं पर कमर व गर्दन एक सीध में होनी चाहिए। कमर में दर्द नहीं है तो पैर सीधा कर सो सकते हैं।
लेटकर टीवी न देखें

यदि नसों के दबने की समस्या है तो लंबे समय तक नहीं बैठें और न ही खड़े रहें। हर एक घंटे में 10 मिनट टहल सकते हैं। लेटकर टीवी न देखें। कुर्सी पर बैठें तो पीठ का पीछे सपोर्ट मिलना चाहिए। कमर व पेट की मांसपेशियों की मजबूती के लिए व्यायाम करें। वजन अधिक है तो कम करें। फिजियोथैरेपिस्ट से सेंक करा सकते हैं। नसों व मांसपेशियों की सूजन कम होने से आराम मिलेगा।
एक्सपर्ट : डॉ. अभिषेक तिवारी, ऑर्थोपेडिक सर्जन, रायपुर



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बच्चों इन कारणों से निकलते हैं टेढ़े-मेढ़े दांत

शिशुओं में दांत छह माह की उम्र से निकलने लगते हैं। इन्हें दूध के दांत कहते हैं। ये छह वर्ष की उम्र तक 20 की संख्या में आ जाते हैं और 13 वर्ष की उम्र तक टूटते हैं। इसी उम्र तक 28 दांत भी आ जाते हैं। कई बार खानपान और मुंह की सफाई की कमी से भी बच्चों में दूध के दांत असमय गिरने लगते हैं। यदि ये असमय गिरते हैं तो दांत संबंधी समस्या हो सकती है। इसके बाद पक्के दांत निकलते हैं। जानते हैं विस्तार से-
जल्द दांत गिरने के नुकसान
दूध के दांत असमय गिरने से बच्चे भोजन को ठीक से चबा नहीं पाते हैं। इससे पाचन बिगड़ता है। सेहत ठीक नहीं रहती है। दूध के दांत जल्दी गिरने से दांत टेढ़े-मेढ़े भी निकलते हैं क्योंकि इनके गिरने से आधार बिगड़ जाता है। बच्चों की बोली भी प्रभावित होती है।
सॉफ्ट फूड से भी समस्या
बच्चों में सॉफ्ट खाना खाने से परेशानी अधिक होती है। दांतों का व्यायाम ठीक से नहीं होता है। बच्चों को गन्ना, फल, सलाद आदि खिलाएं।
ये चीजें अधिक खाएं
बच्चों के दांतों की मजबूती के लिए फाइबर वाली चीजें ज्यादा देनी चाहिए। फाइबर को चबाने से दांत प्राकृतिक रूप से साफ हो जाते हैं। इसलिए सेब, गाजर, चुकंदर, अमरूद, साबुत अनाज आदि दे सकते हैं।
ऐसे करें छोटे बच्चों के दांतों की सफाई
छोटे बच्चों के दांतों की सफाई दो दांत निकलने के बाद से ही करनी चाहिए। इनके लिए भी ब्रश आते हैं। अगर ब्रश नहीं है तो माताएं साफ गीले सूती कपड़े से ही दांतों को सुबह-शाम पोछ दें।
चिपकने वाली चीजें न दें
चॉकलेट, टॉफी, पाउडर मिल्क आदि दांतों में चिपकते हैं। इससे दांतों के आसपास एसिड बनता है जिससे दांत तेजी से सडऩे लगते हैं।
इनका रखें ध्यान
रात में कुछ खिलाने के बाद मुंह की सफाई करें। ब्रश नहीं तो कुल्ला कराएं। छोटे बच्चों को रात में दूध पिलाने के बाद मुंह साफ कराएं।



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बढ़ती उम्र के असर को कम करेगा अनार, जानें इसके तमाम फायदे

अनार में बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने का विशेष गुण होता है। अनार का जूस पीने से चेहरे पर निखार आता है। अनार के दानों में रस भरा होता है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ये एक ऐसा फल है जिसके बीज और छिलके में भी कई गुण होते हैं। अनार का सेवन करने से दिल से जुड़ी बीमारियों में बचाव होता है। ये कैंसर होने की आशंका से भी बचाता है। अनार ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रखने के साथ हृदय की बीमारियां और कैंसर का खतरा भी कम करता है।

न्यूट्रीशन इंडेक्स -
एक अनार से 234 कैलोरी ऊर्जा मिलती है। यह कार्बोहाइड्रेट,प्रोटीन, विटामिन-बी व सी के साथ आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम और मैगनीशियम से भरपूर है।

यह वजन घटाने के साथ कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम करता है। यह डाइटिंग के दौरान होने वाली कमजोरी को दूर कर ऊर्जा प्रदान करता है।
जूस पीना ज्यादा बेहतर -
दाने खाने के मुकाबले इसका जूस पीएं। यह रक्तवाहिकाओं में पहुंचकर तुरंत ऊर्जा देता है।
बेस्ट टाइम -
सुबह खाली पेट जूस या दाने ले सकते हैं। इसे खाना खाने के एक घंटे पहले या बाद में लें।
इनके लिए मनाही -
खांसी, कब्ज और एलर्जी के मरीज इसे बिना चिकित्सक की सलाह के न लें।



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दही में मिश्री मिलाकर खाने से बढ़ता है वजन

दही हमारे आहार का प्रमुख हिस्सा है। दही का काम शरीर में बल को बढ़ाना होता है। लेकिन जिन्हें कफ, जोड़ों की समस्या, एलर्जी व सांस संबंधी परेशानी है तो उन्हें परहेज करना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार दही में आंवला चूर्ण, मिश्री व शक्कर मिलाकर खाएं। रात में खाने से बचें।
वसंत में दही खाने से बढ़ता है कफ
दही की प्रकृति उष्ण होती है। वसंत ऋतु में मौसम गर्म होता है। इसे खाने से कफ की वृद्धि होती है। दही का उपयोग हेमंत, शिशिर एवं वर्षा ऋ तु में अधिक करना चाहिए। अगर दही खाना चाहते हैं छाछ के रूप में लें।
गर्मी में संस्कार कर खाना फायदेमंद
अगर गर्मी में दही खा रहे हैं तो उसमें शक्कर, नमक, गुड़ या मिश्री मिला लें। थोड़ा पानी भी मिल सकते हैं। संस्कार करने से दही की तासीर ठंडी हो जाती है। अगर नमक मिलाते हैं तो इसका उपयोग जल्दी कर लें।
दही खाने के अन्य फायदे
दही मिश्री खाने के लाभ: जिनका वजन कम है उन्हें नियमित रूप से दही में मिश्री मिलाकर खाना चाहिए। इससे वजन में बढ़ोत्तरी होती है। इससे स्मरण शक्ति भी बढ़ती है।
तनाव दूर होता: थकान होने पर दही खाते हैं तो ऊर्जा मिलती है। दही में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं। तनाव घटता है। दही शरीर को हाइड्रेट भी रखता है।
भरपूर कैल्शियम: दही में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। दही खाने से दांत और हड्डियां मजबूत होती हैं। साथ ही हड्डियों से जुड़ी बीमारियों की आशंका भी घटती है।
इम्युनिटी बढ़ती: दही से इम्युनिटी बढ़ती है। रोग प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है। अनिद्रा में भी इसका लाभ मिलता है।
डैंड्रफ से बचाव: इसे बालों में लगाने से डैंड्रफ से बचाव होता है। दही लगाने के आधे घंटे बाद बालों को धो लेना चाहिए।



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प्लैंक और एड़ियों के व्यायाम से पिंडलियों के दर्द में मिलती राहत

धावकों के साथ सामान्य लोगों के पिंडलियों में दर्द एक सामान्य परेशानी है। इसे शिन स्प्लिंट्स या मीडियल टिबियल स्टे्रस सिंड्रोम भी कहते हैं। इसमें पिंडलियों में तेज दर्द होता है। जानते हैं कुछ व्यायाम के बारे में जिनसे राहत मिलती है।
1. एड़ियों को स्ट्रेच करें-
जिस पैर की कसरत करनी है उस पंजे को एक सीढ़ी के किनारे पर खड़े होकर एड़ी को हवा में रखें। सहारे के लिए दीवार या रेलिंग पकड़ सकते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे एड़ी को नीचे-ऊपर ले जाएं। 1-2 सेकंड रोकें भी। ऐसा 20 बार करें।
2. हिप एब्डक्टर एक्सरसाइज
पिंडलियां कमजोर होने से ही दर्द होता है। इसके लिए हिप की मजबूती जरूरी है। चित्र के अनुसार कूल्हे को उठाएं और 10 सेकंड तक पैरों को रोककर रखें। फिर 1-2 सेकंड के लिए रिलैक्स करें। ऐसे 15-20 बार करें। कोहनी को कंधे की सीध में रखें और हाथ से सिर को थामे रखें।
3. प्लैंक
कोर स्ट्रेंथ मसल्स (एब्डॉमिनल और पैल्विक मसल्स) की ताकत को बढ़ाने के लिए फोरआर्म प्लैंक करते हैं। इसमें पैरों को कूल्हे की चौड़ाई के बराबर अलग रखें और कोहनी को कंधे की सीध में रखें। इसे 45 सेकंड तक रोकें। इसे 3-4 सेट रोज करने से लाभ मिलता है।
4. शिन स्ट्रेच
चित्र अनुसार एड़ी जमीन पर रखें। वहीें दूसरा पैर 90 डिग्री को बनाता हुआ होना चाहिए। सीधे देखें। ऐसे 15-20 सेकेंड करें और फिर रिलैक्स हो जाएं। इसे दोनों पैरों से 15-15 बार कर सकते हैं।
नोट- इन व्यायाम को किसी एक्सपर्ट से सीखने के बाद ही करें।



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क्यों 9 घंटे से अधिक सोना नहीं चाहिए?

सोना सेहत के लिए अच्छा होता है लेकिन अधिक सोना नुकसान भी पहुंचा सकता है। एक व्यक्ति को औसतन 7-8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। हाल ही मेडिकल जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है जो लोग रोज 9 घंटे या अधिक सोते हैं, उनमें 7 घंटे सोने वाले लोगों की तुलना में हार्ट अटैक का खतरा 23त्न अधिक होता है। साथ ही स्टडी में पाया गया है कि दिन में भी ज्यादा समय तक सोने वाले लोगों में भी हार्ट स्ट्रोक की आशंका अधिक रहती है। चीन के 31,750 लोगों पर हुए अध्ययन में इस बात की पुष्टि हुई है। छह साल तक हुए अध्ययन में जब रिसर्च शुरू की गई थी उस वक्त इन लोगों में दिल से जुड़ी बीमारियां या हार्ट स्ट्रोक की कोई समस्या नहीं थी।
ये भी होता- अधिक समय तक सोने से ब्रेन एक्टिविटी सुस्त होती है। शारीरिक सक्रियता कम होने से मोटापा बढ़ता और फिर डायबिटीज, हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, हार्ट और पाचन की समस्या भी हो सकती है।
वजन नियंत्रित रखना जरूरी
अगर कोई व्यक्ति अधिक समय तक सोता है तो उसको अपना वजन नियंत्रित रखना चाहिए। वजन बढऩे से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। इनसे बचाव के लिए हैवी वर्कआउट करना चाहिए।
एक्सपर्ट कमेंट -वयस्क को औसतन सात घंटे से अधिक नहीं सोना चाहिए। साथ ही दिन में सोने से बचना चाहिए। नियमित व्यायाम जरूरी है। वजन नियंत्रित रखें। वजन बढऩे से कई तरह की परेशानी हो सकती हैं।



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घुटनों और जोड़ों के दर्द के लिए एेसे करें एक्सरसाइज

घुटनों में दर्द की समस्या आजकल केवल बड़े-बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि किसी भी उम्र के व्यक्ति में ये समस्या देखने को मिल रही है। घुटनों और जोड़ों में दर्द से राहत पाने के लिए अक्सर लोग मॉर्निंग वॉक के साथ एक्सरसाइज करते हैं लेकिन सही तरीका मालूम न होने के कारण उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में दर्द और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरप्टेड ब्रिस्क वॉकिंग ही मॉर्निंग वॉक का सही तरीका है। इसमें व्यक्ति तेज चलता है। आधा किमी तक चलने के बाद दो से तीन मिनट बे्रक लेकर फिर वॉक जारी की जाती है।

करें गलतफहमियां दूर-
अक्सर घुटनों में दर्द या फिर गठिया की शुरुआत में व्यक्ति आलथी-पालथी मारकर बैठना बंद कर देता है, जो कि गलत है। क्योंकि पालथी मारकर बैठने से पैरों की मांसपेशियों में लचीलापन बना रहता है जिससे ये अंग एक्टिव रहता है। ऐसे में यदि घुटना प्रत्यारोपित करना भी पड़े तो उसके मुडऩे की क्षमता प्रभावित नहीं होती। गठिया के इलाज और घुटना प्रत्यारोपण के बाद भी अक्सर लोग आलथी-पालथी मारकर बैठना बंद कर देते हैं, जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए।

करें खास व्यायाम-
दर्द दूर करने के लिए स्ट्रेचिंग और स्ट्रेन्थनिंग एक्सरसाइज की जा सकती हैं। आमतौर पर व्यक्ति को स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज की आवश्यकता होती है। यह मांसपेशियों को लचीला बनाती हैं जो हाथ-पैरों के मुडऩे और रोज की गतिविधियों के लिए बेहद जरूरी हैं। स्ट्रेन्थनिंग एक्सरसाइज के जरिए शरीर को मजबूती और शक्ति प्रदान की जाती है। गठिया व घुटने की समस्याओं से बचने के लिए नियमित योग करना चाहिए।

घुटना प्रत्यारोपण में रखें खास ध्यान-
घुटना प्रत्यारोपण कभी भी भ्रामक विज्ञापनों को देखकर न कराएं। ध्यान रखें ऑपरेशन प्रशिक्षित डॉक्टर से ही करवाएं। मरीज कितना डॉक्टर के निर्देशों के पालन करता है प्रत्यारोपित घुटने की लाइफ इस पर निर्भर करती है। इसलिए ट्रांसप्लांट के बाद डॉक्टरी सलाह जरूर लें और उनका पालन भी करें।



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कोरोना ही नहीं ये बीमारियां भी जानवरों से होतीं

कोरोना वायरस ही नहीं कई बीमारियां हैं जो जानवरों से मनुष्यों में फैलती। कोरोना ही नहीं ये बीमारियां भी जानवरों से होतीं हैं. जानते हैं इनके बारे में-
कौनसे रोग किस जानवर से- रैबीज (कुत्ता, बिल्ली, बंदर), स्वाइन फ्लू (सुअर), बर्ड फ्लू (मुर्गी और अन्य पक्षियों), एंथ्रेक्स (घरेलू व जंगली जानवर), माल्टा बुखार (भेड़, बकरी, कुत्ता, सुअर), लिस्टीरियोसिस या चकरी रोग(गाय-भैंस आदि से)।
कैसे फैलता- कच्चे दूध, कच्चे मांस, जानवारों की लार, काटने और उनके शरीर पर चिपके परजीवी से संक्रमण का खतरा फैलता है. इससे बचाव की जरूरत है. इसमें सावधानी बतरनी चाहिए।
लक्षण- बुखार, सर्दी-जुकाम, भूख कम लगना, सिरदर्द, चक्कर आना आदि।
ऐसे बचें- कच्चे दूध व कच्चे मांस का सेवन न करें। पालतू जानवरों को चाटने न दें। इनके काटने पर तत्काल चिकित्सक को दिखाएं। बीमार पशुओं के उत्पाद प्रयोग में न लें। पशुओं का भी नियमित टीकाकरण कराएं। उनके बाड़ों में सफाई रखें। संक्रमण फैलाने वाले व बीमार जानवरों से दूर रहें।



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अस्थमा को ऐसे समझें, इस तरह कर सकते हैं बचाव

सांस की मुख्य नली यानी विंड पाइप में इंफेक्शन से सूजन और सिकुडऩ आती है। फेफड़ों को साफ हवा पहुंचाने वाली नली पतली हो जाती हैं। इससे सांस लेने में परेशानी होती है। इसे अस्थमा या दमा कहते हैं। बुजुर्गों में इसकी आशंका अधिक होती।
इलाज कैसे
इसका इलाज दो तरह से होता। तत्काल राहत और स्थाई प्रबंधन। सूजन, जलन, प्रभाव कम करने के लिए कई दवाइयां और इनहेलर देते हैं।
ऐसे करें बचाव
नियमित दवाइयां लें। दिनचर्या सही रखें। ज्यादा ठंडा-गर्म खाने से बचें। बदलते मौसम में विशेष सावधानी बरतें। पर्याप्त नींद लें और तनाव से बचें। धूल-धुआं और प्रदूषित जगहों पर जाने से बचें। घर में कारपेट का इस्तेमाल न करें। परदे और कवर हर माह धोएं। अपने बच्‍चों के खाने में उन चीजों को शामिल करना चाहिए जो न सिर्फ एलर्जी से लड़ने में उनकी मदद करें, बल्‍कि उनके शरीर की इम्‍यूनिटी भी बढ़ाएं. बादाम, मछली जैसे सैलमॉन, पटसन के बीज और सोयाबीन तेल में मौजूद जरूरी पॉलीअनसेचुरेटेड फैट अम्ल आपके बच्चों के खाने में शामिल होकर उन्हें एलर्जी संबंधी बीमारियों से दूर रखते हैं। इनका सेवन आपके बच्चे को खास तौर से अस्थमा और नाक में जलन के खतरे को रोकने में कारगर होगा। पॉलीअनसेचुरेड फैट अम्ल में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटअम्ल आते हैं, जिन्हें एराकिडोनिक अम्ल कहते हैं। ऐसे बच्चों में, जिनमें आठ साल की उम्र में ओमेगा 3 का हाई ब्‍लड लेवल होता है, उनमें 16 साल की उम्र में अस्‍थमा, नाक में जलन और श्लेष्मा झिल्ली में एलर्जी होने का खतरा कम रहता है।



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एलर्जी की समस्या है तो इन बातों को जानें

शरीर के किसी चीज से असहज होकर प्रतिक्रिया देना एलर्जी है। यह खाने की चीजों, पालतू जानवरों, मौसमी बदलाव, फूल-पराग कणों, खुशबू, कोई तत्व, फल-सब्जियों, धूल, धुआं, दवा से होती है। कमजोरइम्युनिटी वालों को बार-बार होती है।
इलाज व परहेज
जिनमें खून की कमी होती है, विटामिन डी या कैल्शियम की कमी है तो गेहूं से होने वाली ग्लूटेन एलर्जी की अधिक आशंका। इन्हें गेहूं के उत्पाद नहीं खाने चाहिए। इसमें कई दवाइयां, इनहेलर देते हैं। इम्यूनो थैरेपी और एलर्जी शॉट्स से भी इलाज किया जाता है।
इस तरह कर सकते हैं बचाव
डस्ट माइट से सबसे अधिक एलर्जी। धूल-धुएं से बचें। पौछा गीला लगाएं। जिन चीजों से एलर्जी बढ़ती है तो उनसे दूर रहें। खट्टी- ठंडी चीजों का परहेज करें। कोई भी दवा अपने मन से न लें।
अस्थमा और एलर्जी में अंतर
कई दिनों से सर्दी, जुकाम, खांसी या सांस लेने में परेशानी एलर्जी हो सकती है। लेकिन अस्थमा में इन लक्षणों के साथ रात में सोते समय खांसी, सीने में जकडऩ सीढिय़ां चढ़ते या व्यायाम से सांस फूलती है। हालांकि पुष्टि के लिए डॉक्टर को दिखाना, जांच जरूरी है।



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ऐसे समझें अस्थमा और एलर्जी में फर्क

मौसम में बदलाव से अस्थमा और एलर्जी की समस्या बढ़ जाती है। आमतौर पर दोनों के लक्षण एक जैसे ही दिखते हैं। ऐसे में इनमें अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है। एक्सपर्ट की मानें तो एलर्जी केवल एक कारण है जबकि अस्थमा बीमारी है। जानते हैं इनके बारे में विस्तार से-
दोनों में अंतर समझें
कई दिनों से सर्दी, जुकाम, खांसी या सांस लेने में परेशानी एलर्जी हो सकती है। लेकिन अस्थमा में इन लक्षणों के साथ रात में सोते समय खांसी, सीने में जकडऩ सीढिय़ां चढ़ते या व्यायाम से सांस फूलती है। हालांकि पुष्टि के लिए डॉक्टर को दिखाना, जांच जरूरी है।
एलर्जी से अस्थमा...
फेफड़ों की एलर्जी से अस्थमा होता है। इसीलिए इसे एलर्जिक अस्थमा कहते हैं। अगर किसी को एलर्जिक अस्थमा नहीं है, केवल एलर्जी है तो उस व्यक्ति में अस्थमा का खतरा 40त्न तक बढ़ जाता है। इन दोनों का कोई स्थाई इलाज मुश्किल है। इसलिए बचाव पर ध्यान दें।
ज्यादा परेशानी कब?
दोनों तकलीफ दो तरह की होती है। एक मौसम में बदलाव से व दूसरी स्थाई। फरवरी से मई और सितंबर से नवंबर तक पराग कण अधिक होते हैं इसलिए इस समय ज्यादा दिक्कत होती। ये कण सूर्य निकलने से पहले और डूबने के बाद ज्यादा एक्टिव होते हैं।



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Thursday, 27 February 2020

Ayurveda Remedies: टूटी हड्डियों को जोड़ने में रामबाण है ये पौधा, एेसे करें उपयाेग

Ayurveda Remedies In Hindi: आयुर्वेद में टूटी हड्डी को जोड़ने के लिए हड़जोड़ के पौधे का कारगर दवा माना गया है। इसे अस्थि संधानक या अस्थिशृंखला के नाम से भी जानते हैं। यह छह इंच की खंडाकार बेल होती है। इसके हर खंड से एक नया पौधा पनप सकता है। हृदय के आकार जैसी दिखने वाली पत्तियों वाले इस पौधेे में लाल रंग के मटर के दाने के बराबर फल लगते हैं। आइए जानते हैं इसके फायदाें के बारे में...

उपयोग और लाभ
भूरे रंग का हड़जोड़ ( Cissus quadrangularis ) पौधा स्वाद में कसैला और तीखा होता है। इसकी बेल में हर 5.6 इंच पर गांठ होती है। इस पौधे की प्रकृति गर्म होती है। जैसा कि इसके नाम से ही साफ है कि यह टूटी हड्डियों को जोड़ने मेंं कारगर है। यह खाने और लगाने दोनों में काम आता है।

ऐसे लें : 250-500 मिलीग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ लें। इसका रस निकालकर ठंडे दूध के साथ ले सकते हैं। इसका 5-6 अंगुल तना लेकर बारीक टुकड़े काटकर काढ़ा बना लें व सुबह-शाम पीएं।

खास बातें : हड़जोड़ में सोडियम, पोटैशियम, कार्बोनेट भरपूर पाया जाता है। इसमें मौजूद कैल्शियम कार्बोनेट और फॉस्फेट हड्डियों को मजबूत करता है। आयुर्वेद सेंट्रल लैब के एक शोध में पाया गया कि हड़जोड़ के उपयोग से हड्डी के जुड़ने का समय 33-50 फीसदी तक कम हो जाता है। यानी प्लास्टर के साथ हडज़ोड़ लिया जाए तो हड्डी जल्दी जुड़ती है। ये हड्डियों को लचीला भी बनाता है इसलिए इसका प्रयोग खिलाड़ी भी करते हैं।

अन्य लाभ : यह खास पौधा प्राकृतिक एनाबॉलिक हार्मोंस को नियंत्रित रखता है जिससे यह ऑस्टियोपोरोसिस रोग से बचाता है। इसमें कीटोस्टेरॉयड्स पाए जाते हैं जो कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी नियंत्रित रखते हैं। इस पौधे की खासियतों में सूजन घटाना, जोड़ों मेंं दर्द दूर करना और हड्डियों को मजबूती देना शामिल हैं। इस पौधे को एक दर्द निवारक के रूप में भी इस्तेमाल में ले सकते हैं। बहुगुणी होने के कारण इसे आसानी से घर पर भी उगाया जा सकता है।



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जानिए छोटी सी अजवाइन के बड़े-बड़े फायदे, दूर करेगी तमाम रोग

अजवाइन ऐसी चीज है, जो न सिर्फ आपके खाने का जायका बढ़ाती है, बल्कि आपके स्वास्थ्य को भी ठीक रखती है। अजवाइन औषधीय गुणों से भरपूर होती है, तभी तो रसोईघर के साथ ही आयुर्वेद में भी इसका खूब इस्तेमाल किया जाता है। अजवाइन न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाती है बल्कि यह पेट से जुड़ी कई बीमारि‍यों को भी दूर रखती है। अजवाइन का पानी रोज सुबह खाली पेट पि‍या जाए तो यह पूरे शरीर लाभ देता है। अजवाइन को ज्यादातर लोग मसाले के रूप में जानते हैं, लेकिन सही मायनों में अजवाइन किसी औषधि से कम नहीं है। अजवाइन पाचक, तीखी, रुचिकारक (इच्छा को बढ़ाने वाली), गर्म, कड़वी, शुक्राणुओं के दोषों को दूर करने वाली, वीर्यजनक (धातु को बढ़ाने वाला), हृदय के लिए हितकारी, कफ को हरने वाली, बुखारनाशक, सूजननाशक, मूत्रकारक (पेशाब को लाने वाला), कृमिनाशक (कीड़ों को नष्ट करने वाला), वमन (उल्टी), शूल, पेट के रोग, जोड़ों के दर्द में, वादी बवासीर (अर्श), प्लीहा (तिल्ली) के रोगों का नाश करने वाली गर्म प्रकृति की औषधि है।

अजवाइन ऐसी चीज है, जो न सिर्फ आपके खाने का जायका बढ़ाती है, बल्कि आपके स्वास्थ्य को भी ठीक रखती है।
आपका पेट खराब है तो अजवाइन को चबाकर खाएं और उसके बाद एक कप गर्म पानी पी लें, पेट ठीक हो जाएगा। पेट में कीड़े हैं तो काले नमक के साथ अजवाइन खाएं।
लीवर की परेशानी है तो 3 ग्राम अजवाइन और आधा ग्राम नमक भोजन के बाद लेने से काफी लाभ होगा।
पाचन तंत्र में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर मट्ठे के साथ अजवाइन लें, आराम मिलेगा।
अगर पेट में गैस की समस्या से परेशान हैं तो 1-2 ग्राम खुरसानी अजवाइन में गुड़ मिलाकर इसकी गोलियां बना कर खाएं, आपको तुरंत राहत मिलेगी।
पेट में गैस होने पर हल्दी, अजवाइन और एक चुटकी काला नमक लें, इससे भी बहुत जल्दी काफी आराम मिलता है।
एसिडिटी की तकलीफ है तो थोड़ा-थोड़ा अजवाइन और जीरा को एक साथ भून लें। फिर इसे पानी में उबाल कर छान लें। इस छने हुए पानी में चीनी मिलाकर पिएं, एसिडिटी से राहत मिलेगी। अजवाइन ऐसी चीज है, जो न सिर्फ आपके खाने का जायका बढ़ाती है, बल्कि आपके स्वास्थ्य को भी ठीक रखती है।



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Iron Deficiency: बच्चे में आयरन की कमी बताते हैं ये संकेत

Iron Deficiency In Hindi: आयरन हमारे शरीर के लिए एक जरूर पाेषक तत्व है। यह ब्लड में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाकर ऑक्सीजन की विभिन्न अंगों तक पहुंचने की क्षमता बढ़ाता है। आयरन बड़ों के लिए ही नहीं बच्चों के लिए भी बहुत जरूरी होता है। ज्यादातर लोग अपने नौनिहालों को दाल का पानी, दूध आदि देते हैं लेकिन आयरन युक्त डाइट पर फोकस नहीं करते। जबकि आयरन बच्चों के दिमाग-शरीर की मजबूती के लिए जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार 11 से अधिक उम्र के लड़के को 11 मिग्रा. व लड़की को 15 मिग्रा. रोजाना आयरन जरूरी है।

आयरन कमी के संकेत
आयरन की कमी का असर मांसपेशियों और दिमाग पर होता है। इससे थकान, भूख न लगना, कमजोरी व त्वचा पीली दिखाई देती है। खासकर हाथ, नाखून व आंखें। बच्चा चिड़चिड़ा व सुस्त रहता है। ऐसे में वे कई बार पेंट, चॉक या मिट्टी खाने लगते हैं।

क्यों जरूरी है आयरन
आयरन ब्लड में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाकर ऑक्सीजन की विभिन्न अंगों तक पहुंचने की क्षमता बढ़ाता है। आमतौर पर आयरन की कमी से लाल रक्त कोशिकाएं बहुत कम बनती हैं। इससे ऊतकों व अंगों तक जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।

कहां से मिलेगा आयरन
हरी पत्तेदार सब्जियां, बीन्स, फल, मुनक्का, किशमिश और सूखे मेवे बच्चों को खिलाएं। विटामिन-सी शरीर में आयरन का अवशोषण सामान्य करता है। इसके लिए टमाटर, ब्रोकली, संतरे का जूस, स्ट्रॉबेरी आदि लें। आयरन के लिए सेब, दाल, पालक, चुकंदर, शहद, खजूर, अनार बच्चों को दे सकते हैं।

हर उम्र की अलग है जरूरत
ब्रेस्टफीडिंग से 4-6 माह तक बच्चे को आयरन मिलता है। जिन्हें नहीं मिल पाता उन्हें डॉक्टरी सलाह से आयरन ड्रॉप्स या आयरन युक्त फॉर्मूला दूध देते हैं। 7-12 माह के शिशु को रोज 11 मिग्रा., 1-3 उम्र वाले को रोज ७ मिग्रा., 4-8 उम्र वाले बच्चों को 10 मिग्रा. व 9-13 साल के बच्चों को हर दिन 8 मिलीग्राम आयरन जरूरी है।



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चीन में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या 2744 हुई

बीजिंग। चीन में कोरोनावायरस से मरने वाले लोगों की संख्या 2744 हो गई है, वहीं 78497 लोगों के इससे संक्रमित होने की पुष्टि की गई है। चीन के स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने गुरुवार को कहा कि देश में कोरोनावायरस के प्रकोप पर अप्रैल के अंत तक नियंत्रण कर लिया जाएगा।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट समाचार पत्र ने चीन के शीर्ष श्वास संबंधी बीमारियों के विशेषज्ञ झोंग नानशन के बयान का हवाला देते हुए कहा कि हालांकि वुहान में ही इसका सबसे अधिक कहर है, क्योंकि बाकी अन्य शहरों में हमने इसका इतना प्रकोप नहीं देखा। उन्होंने आगे कहा कि यह 15 फरवरी के बाद मामलों की संख्या घटने लगी। हमारा पूवार्नुमान कुछ अन्य विदेशी आधिकारिक विशेषज्ञों से मिलता जुलता था और हमें विश्वास है कि यह महामारी अप्रैल में नियंत्रण में होगी।

चीन के बाहर, गुरुवार सुबह तक, पुष्टि किए गए मामलों की संख्या दक्षिण कोरिया (1595), जापान (894), इटली (447), ईरान (139), सिंगापुर (93), हांगकांग (91), अमेरिका (60), थाईलैंड (40), बहराईन (33) ताइवान (31), ऑस्ट्रेलिया (23), मलेशिया (22), जर्मनी (24), फ्रांस (18), कुवैत (18), वियतनाम (16), ब्रिटेन (13), संयुक्त अरब अमीरात (13), कनाडा (12), स्पेन (12), मकाऊ (10), ईराक (पांच), क्रोएशिया (तीन), भारत (तीन), फिलीपींस (तीन), ओमान (दो), फिनलैंड (दो), रूस (दो), पाकिस्तान (दो), अफगानिस्तान (एक), इजरायल (दो), ऑस्ट्रिया (दो), जॉर्जिया (एक), अल्जेरिया (एक), रोमानिया (एक), ब्राजिल (एक), स्विजरलैंड (एक), नॉर्थ मेसेडोनिया (एक), नॉर्वे (एक) मिस्र (एक), लेबनान (एक), कंबोडिया (एक), नेपाल (एक), श्रीलंका (एक), स्वीडन (एक) और बेल्जियम (एक) है।

वहीं, चीन के बाहर ईरान में 19, दक्षिण कोरिया में 13, इटली में 12, जापान में सात, हांगकांग में दो, फ्रांस में एक, ताईवान में एक और फिलीपींस में एक मौतें हुई है।



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Yoga And Pranayam: इन योगासनों से मजबूत करें सिर से पांव तक की मांसपेशियां

Yoga And Pranayam In Hindi: आप अगर अपनी मांसपेशियों को मजबूत बनाना चाहते हैं कुछ खास योगाभ्यास आपके लिए मददगार हो सकते हैं। योग मानसिक स्वास्थ के साथ सिर से लेकर पैर तक की मांसपेशियों की मजबूती और खासकर दिल को सेहतमंद बनाए रखने के लिए भी असरदार है। आइए जानते हैं उन योग पोज के बारे में जिन्हें करने से आप मजबूत मांसपेशियां पा सकते हैं:-

उत्कटासन
काल्पनिक कुर्सी पर बैठने की प्रक्रिया है, उत्कटासन। जांघ, कमर व पेट की चर्बी कम होने से इन अंगों की मांसपेशी व हड्डियां मजबूत होती हैं। हृदयरोगों को दूर रखने में भी लाभदायक है।

ऐसे करें: सीधे खड़े होकर दोनों पैरों के बीच 6 इंच दूरी व दोनों हाथों को कंधों के बराबर सामने की ओर रखें। धीरे-धीरे सांस लेते हुए घुटनों को मोड़ते हुए एेसी अवस्था में बैठें जैसे किसी कुर्सी पर बैठे हों। हाथों को सिर के बराबर ऊपर ले जाएं व सामान्य सांस लें। क्षमतानुसार इस स्थिति में रुककर धीरे-धीरे सांस छोड़ें व प्रारंभिक अवस्था में आएं।

चतुरंग दंडासन
एब्स बनाने के शौकीन व्यक्ति आसानी से घर पर भी इसका अभ्यास कर सकते हैं। असामान्य दिल की धड़कनों की परेशानी होने पर यह आसन अच्छा है।

ऐसे करें: पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अब हथेलियों को सीने के पास लाकर जमीन पर टिकाएं। हाथों पर वजन डालते हुए शरीर को ऊपर उठाएं और पैरों की अंगुलियों के बल टिक जाएं। कलाई और कंधे के बीच जब तक 90 डिग्री का कोण नहीं बन पाता तब तक ऊपर उठें। पीठ सीधी रखें। सिर शरीर की सिधाई में होना चाहिए।

ध्यान रखें: हाथ-पैर से जुड़ी कोई दिक्कत या हाल में कोई सर्जरी हुई हो तो न करें।

ऊर्ध्व हस्तासन
यह आसन शरीर के लिए सबसे लाभदायक माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से लंबाई तो बढ़ती है साथ ही हर अंग की मांसपेशियों और अंदरुनी कोशिकाओं पर असर होता है।

ऐसे करें: ताड़ासन की तरह होता है यह आसन। इसमें केवल एड़ी की स्थिति का फर्क होता है।

ऊर्ध्व हस्तासन में एड़ी को ऊपर नहीं उठाते सिर्फ हथेलियों के सहारा शरीर को ऊपर की ओर खींचते हैं। इस आसन को करने से पहले सावधान की स्थिति में खड़े हो जाएं। अब दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर ऊपर की ओर खींचें। फिर सांस खींचते हुए पहले दाईं तरफ और फिर बाईं तरह थोड़ा झुकें। इस दौरान सामान्य सांस लेते रहें।

ध्यान रखें: वैसे इसके अभ्यास में किसी प्रकार की सावधानी की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन फिर भी असहज महसूस करने या चक्कर, सिरदर्द जैसी परेशानियां हों तो तुरंत विशेषज्ञ से राय लें।



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Postnatal Care: मां के दूध की पौष्टिकता बढ़ाती है गैलेक्टोगोगस डाइट

Postnatal Care In Hindi: गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद का समय, दोनों ही मां और बच्चे के लिए अहम होता है। महिला के शरीर में ब्रेस्टफीडिंग के दौरान भी कई बदलाव आते हैं। गर्भावस्था की तरह इस समय भी महिला को अपने आहार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। क्योंकि मां का आहार ही बच्चे को लगता है। ब्रेस्टफीडिंग के दौरान महिला को प्रोटीन, कैल्शियम व विटामिन से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। ताकि बच्चे के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति की जा सके। आइए जानते हैं ब्रेस्टफीडिंग के दौरान कैसा हो मां का खानपान:-

कैल्शियम: बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए ब्रेस्टफीडिंग के दौरान उसमें कैल्शियम की पूर्ति सिर्फ मां से होती है। आहार में डेयरी उत्पाद, हरी पत्तेदार सब्जियां व सूखे मेवे लें।

प्रोटीन: मां व बच्चे दोनों में हड्डियों की मजबूती के लिए ब्राउन राइस, पीनट बटर व सोया उत्पाद प्रयोग में ले सकती हैं।

विटामिन डी: इसके लिए रोज सुबह या शाम को धूप में बैठें। विटामिन-बी 12 के लिए खमीर और सोयाबीन को आहार में लें।

विटामिन सी: यह आयरन के बेहतर अवशाेषण में मदद करता है। खट्टे फल, आंवला, अमरूद और पपीता विटामिन सी के अच्छे स्त्रोत हैं।

विटामिन ए: गाजर, अंडे, शकरकंदी, हरी पत्तेदार सब्जियां, कद्दू, लाल शिमला मिर्च, मटर, टमाटर और आम में अच्छी मात्रा में विटामिन ए होता है।

आयरन: आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया रोग का मां के दूध की आपूर्ति पर नकारात्मक असर पड़ता है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए आयरन रिच खुराक लेना जरूरी होता है। आयरन के कुछ सामान्य स्रोतों में दालें और फलियां, हरी पत्तेदार सब्जियां, तरबूज, अंडा आदि शामिल हैं।

गैलेक्टोगोगस
मां का दूध बढ़ाने के लिए गैलेक्टोगोगस जैसे जीरा, सौंफ और गोंद के लड्डू, मेथी के लड्डू, बादाम का हलवा, सूखी हुई अदरक (सौंठ) की बर्फी का सेवन फायदेमंद होता है। हांलाकि इनका सेवन मां का वजन बढ़ा सकता है। लेकिन संतुलित तौर पर लेने से वजन कम दूध ज्यादा बढ़ता है। और इससे दूध की पौष्टिकता भी बढ़ती है।



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ज्यादा नींद आती है तो जानिए स्लीप ड्रंकननेस डिसऑर्डर के बारे में

न्यूरोलॉजी जर्नल के अनुसार 'स्लीप ड्रंकननेस डिसऑर्डर' (नींद का नशा) है। इसे भ्रामक उत्तेजना भी कहते हैं। गहरी नींद से जागने पर जब हम कंफ्यूज होते हैं तो यह समस्या होती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ के अनुसार ऐसा तब होता है, जब हमें नॉन रेपिड आई मूवमेंट स्लीप यानी गहरी नींद से जबरन उठा दिया जाए।

इतनी नींद जरूरी -
खानपान की तरह नींद भी जरूरी है। बच्चे को जन्म से लेकर एक साल की उम्र तक करीब 15-16 घंटे सोना जरूरी है। प्रेग्नेंट महिला को रात में 7 घंटे के अलावा दिन में एक से डेढ़ घंटे सोना चाहिए। वयस्कों को 6-8 घंटे सोना चाहिए। बढ़ती उम्र में मेलाटोनिन जैसे हार्मोन कम निकलते हैं, इसलिए बुजुर्गों को नींद ना आने की समस्या होती है, फिर भी उनके लिए 9 घंटे सोना जरूरी होता है।

उठने के बाद लें टाइम -
जिन लोगों को नींद से उबरने में ज्यादा समय लगता है, उन्हें डॉक्टरी परामर्श लेना चाहिए। इस भ्रामक उत्तेजना के दौरान लोगों को हिंसक होते देखा गया है। ड्राइवर व पायलट जैसे पेशे से संबंधित लोगों को अगर नींद से अचानक उठा दिया जाए तो उन्हें ड्यूटी संभालने के लिए कम से कम 15 मिनट इंतजार करना चाहिए वर्ना उनकी असावधानी से अनजाने में बड़ी दुर्घटना हो सकती है। अच्छी नींद लेना चाहते हैं तो तनाव न लें। सोने से पहले दिनभर की चिंताओं को छोड़ दें और गैजेट्स से दूरी बनाएं। कॉफी या अल्कोहल ना लें। योगा, संगीत या डांस क्लास से भी नींद की समस्या में सुधार होता है।



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जानिए आर्टिफिशियल ज्वैलरी स्किन के लिए कितनी नुकसानदायक है

आर्टिफिशियल ज्‍वेलरी से होने वाली एलर्जी मुख्‍य रूप से निकल (nickel) नामक धातु के कारण होती है। इसलिए एलर्जी आभूषणों से नहीं, बल्कि इनमें मौजूद निकल धातु से होती है। इन दिनों इमीटेशन ज्वैलरी का चलन है लेकिन इनमें मौजूद निकल धातु से त्वचा को काफी नुकसान होता है। अमरीकन कॉन्टैक्ट व डर्माटाइटिस सोसायटी की रिपोर्ट के मुताबिक 10 में से 1 महिला को इस ज्वैलरी से स्किन एलर्जी होती है। 14 कैरेट से ज्यादा के गोल्ड से किसी तरह की एलर्जी नहीं होती क्योंकि इसमें कॉपर की मात्रा होती है, लेकिन वाइट गोल्ड से एलर्जी की आशंका बनी रहती है। कई बार आर्टफिशियल ज्वैलरी पहनने से त्वचा पर लाल चकते, खुजली, दाने, घाव या फफोले हो जाते हैं।

उपचार : त्वचा रोग विशेषज्ञ के अनुसार एलर्जी होने पर उस ज्वैलरी को न पहनें या फिर शुद्ध धातु के आभूषण पहनें। डॉक्टरी सलाह से बैरियर क्रीम या स्टेरॉइड क्रीम का स्किन पर प्रयोग ज्वैलरी पहनने से पहले करें। इस क्रीम में डाइमिटाकोन कैमिकल होता है जो त्वचा व ज्वैलरी के बीच एक परत बना देता है। अन्य उपचार डिसेंसेटाइजेशन में निकल की न्यूनतम मात्रा शरीर में इंजेक्ट की जाती है, जो ज्वैलरी की धातु का प्रभाव व्यक्ति पर नहीं पड़ने देती। एलर्जी से बचने के लिए ज्‍वेलरी पहनने से पहले टेलकम पाउडर लगा लें ताकि नमी को सोखा जा सकें। ज्‍यादा टाइट ज्‍वेलरी न पहनें ताकि हवा स्किन तक पहुंचती रहे। समय-समय पर आभूषणों को बदलते रहें तथा इन्‍हें साफ व सूखा रखें। गहनों के पीछे पारदर्शी नेल पोलिश की कई परतों को लगाकर भी एलर्जी की समस्‍या से बचा जा सकता है। इसके अलावा आभूषणों पर पैलेडियम धातु की कोटिंग कराकर भी त्‍वचा को निकल धातु के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है।



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Acidity Treatment: गैस और एसिडिटी दूर करने के लिए अपनाएं ये घरेलू नुस्खे

Acidity Treatment In Hindi: आज के समय में खराब जीवनशैली और खानपान में गड़बड़ी के कारण अम्लता यानी एसिडिटी (Acidity),पेट फूलना (Flatulence) जैसी पाचन संबंधी कुछ समस्याएं हैं जो हमें अपना शिकार बनाती हैं। इलाज में देरी से यह समस्या बढ़ जाती है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते इन दिक्कतों का निपटारा कर दिया जाए। आइए जानते हैं एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या और घरेलू उपचार के बारे में

एसिडिटी के कारण
एसिडिटी के अन्य कारणों में समय पर खाना न लेना और रात में भोजन न करना भी है। ज्यादा तला भुना और मसालेदार खाना। पेट में मौजूद एसिड ऊपर की ओर बढ़कर आहारनली में एसिडिटी करता है। ऐसा पेट व आहारनली के बीच के भाग में किसी तरह की खराबी से होता है।

लक्षण
एसिडिटी के दौरान मुंह में खट्टापन महसूस होता है। पेट के ऊपरी भाग में जलन-दर्द, भूख न लगना, डकार आना, गले में जलन व उल्टी लक्षण हैं। लंबे समय तक इन लक्षणों से अल्सर हो सकता है।

एसिडिटी खत्म करने के घरेलू नुस्खे
अदरक
अदरक का सेवन करने से पाचन क्रिया में मदद मिलती है और यह सूजन व सीने में जलन को रोकता है। खाना खाने के बाद अदरक और नीबू की कुछ बूदों के मिश्रण का एक घूंट आपको कई परेशानियों से दूर रख सकता है।

सौंफ
सौंफ में मौजूद तत्व पेट की गैस कम करने और पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करते हैं। इसे चबाने से या चाय में डालकर लेने से पाचन क्रिया सक्रिय होती है, जिससे सीने में जलन, पेट और आंत की समस्याओं का निदान हो जाता है।

जीरा
जीरा का सेवन करने से आग्नाशय के विभिन्न तत्वों का स्राव होने लगता है। इसमें कई पोषक तत्व होते हैं। आप इसे तलकर दूध, दही, शिकंजी, सलाद या सूप में पीसकर भी ले सकते हैं।

प्रोबायोटिक
प्रोबायोटिक ऐसे सूक्ष्म जीव होते हैं, जो पेट की कई बीमारियों को दूर करते हैं। इनका सेवन करने से पाचन तंत्र और प्रतिरोधी तंत्र मजबूत होता है। इन्हें लेने से मूत्राशय संक्रमण, त्वचा संबंधी रोग और सर्दी में का निदान होता है। आप इन्हें दही, केफिर (दूध उत्पाद) और कोम्बुच (एक तरह की ब्लैक टी) के रूप में ले सकते हैं।

दलिया
दलिया घुलनशील और अघुलनशील फाइबरों का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। पोषक तत्वों से भरपूर दलिया को आटा बनाने की प्रक्रिया में हटा दिया जाता है, जिससे स्वस्थ पाचन क्रियाओं के लिए जरूरी विटामिन, पोषक तत्व और फाइबर अलग हो जाते हैं। दलिया से भी पाचन क्रिया को सुचारु रूप से चलाने में सहायता मिलती है।

- परेशानी से बचाव के लिए अधिक तला-भुना खाने से बचें व ज्यादा पानी पीने के अलावा व्यायाम भी करें।



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Canker Sore Treatment: घरेलू नुस्खों से चुटकियाें में दूर करे मुंह के छाले

Canker Sore Treatment In Hindi: मुंह में बार-बार छाले (माउथ अल्सर) हो रहे हैं तो सतर्क रहने की जरूरत है। ये कैंसरस वनॉन कैंसरस होते हैं। नॉन कैंसरस अल्सर आनुवांशिक रूप से होते हैं जो मुंह की अंदरूनी नरम परत (म्यूकस) को नुकसान पहुंचने से होते हैं। ऐसे में ज्यादा गरम व मसालेदार भोजन, शराब, तंबाकू की लत से म्यूकस में छोटे घाव बनने लगते हैं। जानें इसके अन्य कारण-

बीमारी के कारण
पेट साफ न होना, लंबे समय तक कब्ज, म्यूकस पर बार-बार टेढ़े-मेढ़े दांतों से चोट लगना। किसी प्रकार की दवा के संक्रमण से भी घाव बन जाता है। शरीर में पोषक तत्वों की कमी व इम्यूनिटी कमजोर होना भी मुंह में छालों की बड़ी वजह है। कई बार नींद पूरी न होने से खराब हुई पाचनक्रिया भी इस रोग को बढ़ाती है। सिगरेट, बीड़ी, शराब पीने और तंबाकू चबाने वालों में ये छाले बार-बार और गंभीर अवस्था लेकर उभरते हैं। इनके कैंसरस बनने की आशंका अधिक होती है। इसके अलावा मधुमेह रोगियों में भी माउथ अल्सर हो सकता है।

छाले खत्म करने के घरेलू नुस्खे
त्रिफला, चमेली का पत्ते और मुनक्का को शहद के साथ बनाकर लेने से लाभ होता है। चमेली, आम, जामुन के पत्ते चबाने से छाले खत्म होते हैं। शुद्ध टंकण और शुभ्रा भस्म को एक गिलास पानी में मिलकार गरारा करने से भी राहत मिल सकती है।

लहसुन का इस्तेमाल करके
छालों के इलाज के लिए लहसुन बहुत ही कारगर है। दो से तीन लहसुन की कलियां लेकर उनका एक पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को प्रभावित जगह पर लगाएं। लगाने के 15 मिनट बाद उसे धो लें। लहसुन में मौजूद एंटी-बायोटिक गुण छालों को जल्दी ठीक होने में मदद करता है।

टी ट्री ऑयल
टी ट्री ऑयल में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। छालों के ऊपर इन्हें लगाने से बहुत जल्दी फायदा होता है। एक दिन में तीन से चार बार इसे प्रभावित जगह पर लगाने से आराम होगा।

बर्फ का इस्तेमाल
छालों पर ठंडी चीज लगाने से बहुत जल्दी फायदा होता है। साथ ही ये दर्द और सूजन को भी कम करने का कम करता है।

दूध का प्रयोग
दूध में कैल्शियम मौजूद होता है जो वायरस से लड़ने का काम करता है। साथ ही से हीलिंग प्रोसेस में भी सक्रियता से भाग लेता है। ठंडे दूध में रूई भिगोंकर प्रभावित जगह पर लगाने से फायदा होगा।

सावधानी बरतें
- शरीर में फॉलिक एसिड, आयरन, विटामिन-बी12 की कमी न होने दें।
- खाना खाने के बाद मुंह साफ करें, सोने से पहले ब्रश करें।
- बहुत अधिक गरम या मसालेदार भोजन न करें।
- खट्टा खाना खाने से हर समय परहेज करें।
- शरीर में पानी की कमी न होने दें। इसके लिए नींबू पानी आदि पीते रहें।



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Wednesday, 26 February 2020

Ayurvedic Remedies For Piles: आयुर्वेदिक उपायों से आसानी से करें पाइल्स का इलाज

Ayurvedic Remedies For Piles In Hindi: हमारे शरीर के गुदा भाग में रक्त नलिकाएं होती हैं। इन पर दबाव पड़ने या कब्ज के कारण इस भाग के अंदरूनी व बाहरी हिस्से में सूजन आने व मस्सा बनना ही बवासीर (पाइल्स) की समस्या कहलाती है। आयुर्वेद में इसे अर्श कहते हैं। आइए जानते हैं आयुर्वेद के अनुसार इसके प्रकार व उपचार के बारे में :-

पाइल्स के प्रकार
अंदरुनी
मलद्वार के अंदर होने के कारण कई बार रोग का पता नहीं चलता। इसकी चार स्टेज हैं-
पहली: इसमें गुदा के अंदर रक्त नलिकाओं में सिर्फ थोड़ी सूजन होती है। कभी- कभार नब्ज या अन्य किसी कारण से मलत्याग के समय दबाव डालने पर रक्त भी आता है।

दूसरी: इसमें सूजन थोड़ी ज्यादा व दर्द होता है। मलत्याग के समय मस्से बाहर आ जाते हैं जो स्वत: अंदर भी चले जाते हैं।

तीसरी: इस स्टेज में सूजन अधिक होती है और मलत्याग के समय खून अधिक आता है व मस्से बाहर आ जाते हैं जिन्हें अंगुली की मदद से अंदर करना पड़ता है।

चौथी: दर्द अधिक और मल त्याग के समय मस्से बाहर आ जाते हैं जो अंदर नहीं जाते।

बाहरी
मलद्वार के आसपास उसकी बाहरी परत पर छोटी-छोटी गांठें रहती हैं। कभी-कभी इनमें रक्त जमने से असहनीय दर्द होता है। ऐसे में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।

आयुर्वेद उपचार
पाइल्स की पहली व दूसरी स्टेज में इन घरेलू दवाओं से इलाज हाे सकता है:-
- मक्खन से निकली छाछ 4 लीटर, भुना जीरा पाउडर 50 ग्राम और थोड़ा नमक मिलाकर दिन में कई बार ले सकते हैं। 4-5 दिन में काफी राहत मिलेगी।

- 10 ग्रा. किशमिश रात को पानी में भिगोएं। सुबह मसलकर उसका पानी 7-10 दिन तक पीएं।

- बकायन, निंबोली, हरड़ और रसौंत का चूर्ण एक माह तक लेना फायदेमंद है।

- नारियल की जटा का जला हुआ बुरादा एक चम्मच छाछ या मक्खन के साथ सुबह भूखे पेट 5-7 दिन तक लें।

- एलोवेरा, आंवला व त्रिफला जूस पीएं।

आयुर्वेद में इन उपायों के अलावा अग्नि कर्म चिकित्सा का प्रयोग भी करते हैं। इसमें विशेष अग्निकर्म के द्वारा बाहरी या छोटे पाइल्स वाले भाग को जलाते हैं।



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Electrolytes: आपको कोमा में पहुंचा सकती है इलेक्ट्रोलाइट की कमी, ऐसे करें पूर्ति

Electrolytes In Hindi: इलेक्ट्रोलाइट शरीर को स्वस्थ रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी मदद से ही शरीर के मुख्य अंग अपना काम ठीक तरह से कर पाते हैं। इलेक्ट्रोलाइट्स सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड, बाई-कार्बोनेट, मैग्नीशियम क्लोराइड आदि का मिश्रण है जो दिल से लेकर दिमाग और किडनी तक को सुरक्षित रखने का काम करता है। किसी भी तत्त्व जैसे पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन या सोडियम आदि एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं। ऐसे में किसी एक का स्तर घटने या बढ़ने से सभी असंतुलित होने लगते हैं। जिसका शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं इलेक्ट्रोलाइट के बारे में कुछ खास बातें

कब होता है असंतुलन
असंतुलन की स्थिति व्यक्ति के लगातार उल्टी व दस्त की समस्या से बनती है। पानी कम पीने से शरीर में नमक की कमी होने लगती है। साथ ही पेटदर्द या दस्त से शरीर में जरूरी पोषक तत्त्व तेजी से घटते हैं। भागदौड़ या वर्कआउट के दौरान निकले पसीने के कारण मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं जिनकी पूर्ति होनी जरूरी है।

लक्षण पहचानें
दिन में तीन बार से ज्यादा उल्टी या दस्त होना, मुंह अचानक सूखने लगना, आंखों के नीचे सूजन, अधिक नींद आना, पेट में मरोड़ के साथ हल्का दर्द, कमजोरी व थकान महसूस होना, हाथ-पैरों में कंपन, बदन दर्द, भूख न लगना, चक्कर आना, आंखों से धुंधला दिखाई देना, पेशाब में तकलीफ इसके प्रमुख लक्षण हैं।

गंभीर स्थिति
शरीर में पानी या सोडियम की कमी से स्वभाव चिड़चिड़ा और ब्लड प्रेशर तेजी से घटता है। सोडियम लेवल 135 मिलीइक्वीवेलेंट प्रति लीटर से कम होने पर दिमाग में सूजन आने से झटके आते हैं। यह स्तर 110 से कम होने पर वह कोमा में जा सकता है। वहीं पोटेशियम रक्त में 2 फीसदी और शरीर की कोशिकाओं में 98 फीसदी होता है। यह स्तर कम होने पर हार्ट में ब्लॉकेज की स्थिति पैदा होती है।

इलाज : इस स्थिति में ओआरएस का घोल देते हैं। इमरजेंसी में आईवी फ्लूड और दवाओं के जरिए मिनरल्स की पूर्ति करते हैं। रोजाना 5 ग्राम नमक, हरी पत्तेदार सब्जी, दाल आदि ले सकते हैं। शिकंजी के अलावा दिनभर में कम से कम 10-12 गिलास पानी पीना चाहिए।

होम्योपैथी : पोटेशियम, क्लोराइड की मात्रा को संतुलित रखने के लिए कालीम्यूर दवा देते हैं। नाइट्रीम्यूर सोडियम क्लोराइड के लेवल को और कैलकेरिया दवा कैल्शियम व फॉस्फेट की मात्रा को संतुलित रखती है।

आयुर्वेद : समस्या से बचाव के लिए भोजन के बाद एक केला जरूर खाएं। रात को सोते समय दूध पीना लाभदायक है। नाश्ते में पिंड खजूर व मौसमी फल खाएं। इससे किडनी संबंधी समस्या भी नहीं रहती। गिलोय रस पीने से पीएच स्तर ठीक रहता है। खाने में सेंधा नमक खाएं।



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Breast Cancer: स्तन कैंसर का खतरा 80 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है डेयरी का दूध

Breast Cancer In Hindi: दूध पीना हमेशा सेहतमंद माना जाता है। लेकिन कभी-कभी ये गंभीर राेग का कारण भी बन सकता है। हाल ही में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि डेयरी दूध का सेवन महिलाओं स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।

अमेरिका में लोमा लिंडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने दावा किया है उनके अध्ययन में इस बात के पुख्ता प्रमाण मिले हैं कि डेयरी दूध व उससे जुड़े कुछ अन्य कारक महिलाओं में स्तन कैंसर का कारण बनते हैं। उन्होंने यह भी नोट किया कि डेयरी दूध की मध्यम मात्रा भी महिलाओं में स्तन कैंसर के जोखिम में 80 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है।

शोध के सह-लेखक गैरी ई फ्रेजर ने कहा कि प्रति दिन एक चौथाई से एक-तिहाई डेयरी दूध का सेवन करने से स्तन कैंसर का खतरा 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। एक कप पीने से 50 प्रतिशत और प्रति दिन दो से तीन कप पीने वालों के लिए, जोखिम बढ़कर 70 से 80 प्रतिशत हो जाता है।

शोध में वैज्ञानिकों ने लगभग 53,000 महिलाओं के आहार सेवन का 8 सालों तक मूल्यांकन किया, जिनमें से सभी शुरू में कैंसर मुक्त थीं। लेकिन शोध अवधि के दौरान 1,057 नए स्तन कैंसर के मामले सामने आए।

शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने प्रतिभागियों से उनकी जनसांख्यिकी, स्तन कैंसर के पारिवारिक इतिहास, शारीरिक गतिविधि, शराब का सेवन, हार्मोनल और अन्य दवाओं के उपयोग, स्तन कैंसर की जांच और प्रजनन, और स्त्री रोग संबंधी इतिहास के बारे में प्रश्नावली भरवाई गई थी।

शोधकर्ताओं के अनुसार डेयरी दूध में मौजूद सेक्स हार्मोन स्तन कैंसर के लिए जिम्मेदार हो सकता है। क्योंकि डेयरी के लगभग 75 प्रतिशत पशु गर्भवती होती हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं में स्तन कैंसर एक हार्मोन-रेसपांसिव कैंसर है, डेयरी और अन्य जानवरों के प्रोटीन का सेवन हार्मोन के उच्च रक्त स्तर के साथ जुड़ा हुआ है, जैसे की इंसुलिन विकास कारक -1 (IGF-1), जो कुछ तरह के कैंसर काे बढ़ावा देता है।

शाेधकर्ताओं का सुझाव है कि डेयरी दूध की जगह सोया मिल्क अच्छा विकल्प हो सकता है।



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Diet In Diabetes: डायबिटीज कंट्रोल के लिए खाएं शिराताकी नूडल्स और लहसुन

Diet In Diabetes In Hindi: अनियंत्रित मधुमेह यानि डायबिटीज आपको कई गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकता है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते इसे नियंत्रित रखने के लिए कदम उठाए जाएं। आपके लिए ये जानना जरूरी है कि स्वस्थ जीवनशैली और पोषण युक्त आहार के साथ मधुमेह के खतरे को कम किया जा सकता है। आज हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें आप अपनी डाइट में शामिल कर अनियंत्रित मधुमेह को नियंत्रित कर सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में

पत्तेदार हरी सब्जियां "Leafy green vegetables"
पत्तेदार हरी सब्जियां पोषक तत्वों और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होती हैं जो आपके दिल और आंखों के स्वास्थ्य की रक्षा करती हैं। इसके साथ ही ये मधुमेह नियंत्रण में अहम भूमिका निभाती हैं।

दालचीनी "Cinnamon"
दालचीनी टाइप 2 मधुमेह रोगियों में रक्त शर्करा नियंत्रण, इंसुलिन संवेदनशीलता, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर में सुधार कर सकती है।

अंडे "Eggs"
अंडे हृदय रोग के लिए जोखिम कारकों में सुधार करते हैं, अच्छे रक्त शर्करा नियंत्रण को बढ़ावा देते हैं, आंखों के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं और पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं।

चिया के बीज "Chia seeds"
चिया के बीज में उच्च मात्रा में फाइबर होते हैं, इसमें पचने योग्य कार्ब्स में कम होते हैं, इस वजह से यह रक्तचाप और सूजन को कम कर सकती है।

हल्दी "Turmeric"
हल्दी में कर्क्यूमिन होता है, जो हृदय और गुर्दे की बीमारी से रक्षा करते हुए रक्त शर्करा के स्तर और सूजन को कम कर सकता है।

ग्रीक योगर्ट "Greek yogurt"
ग्रीक दही स्वस्थ रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ावा देता है, हृदय रोग के जोखिम कारकों को कम करता है और वजन प्रबंधन में मदद कर सकता है।

नट्स "Nuts"
नट्स डायबिटिक डाइट के तौर पर काफी फायदेमंद होते हैं। वे पचने योग्य कार्ब्स में कम हैं और रक्त शर्करा, इंसुलिन और एलडीएल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं।

ब्रोकली "Broccoli"
ब्रोकली एक कम कैलोरी, कम कार्ब वाला भोजन है जिसमें उच्च पोषक तत्व होते हैं। यह स्वस्थ पौधों के यौगिकों से भरा हुआ है जो विभिन्न बीमारियों से बचा सकता है।

जैतून का तेल "Extra-virgin olive"
एक्स्ट्रा-वर्जिन जैतून के तेल में स्वस्थ ओलिक एसिड होता है। यह रक्तचाप और हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

फ्लैक्ससीड्स "Flaxseeds"
फ्लैक्ससीड्स सूजन, हृदय रोग, रक्त शर्करा के स्तर को कम करने के साथ इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार लाता है।

एप्पल साइडर सिरका "Apple cider vinegar"
एप्पल साइडर सिरका इंसुलिन संवेदनशीलता और निम्न ब्लड शुगर के स्तर में सुधार कर सकता है। यह आपको लंबे समय तक भूख का एहसास नहीं होने देता।

स्ट्रॉबेरी "Strawberries"
स्ट्रॉबेरी कम चीनी वाले फल होते हैं जिनमें मजबूत एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं और हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

लहसुन ( Garlic )
लहसुन मधुमेह वाले लोगों में रक्त शर्करा, सूजन, एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप को कम करने में मदद करता है।

स्क्वैश ( Summer and winter squash )
समर और विंटर स्क्वैश में लाभकारी एंटीऑक्सिडेंट होते हैं और ब्लड शुगर और इंसुलिन के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं।

शिराताकी नूडल्स ( Shirataki noodles )
शिराताकी नूडल्स में ग्लूकोमानन आपकाे पेट भरा हुआ महसूस कराता है। और रक्त शर्करा नियंत्रण और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार कर सकता है।



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Tuesday, 25 February 2020

गर्दन और कमर में तेज दर्द हो रहा है तो हो सकती है ये वजह, जानें इसके बारे में

इस समय की आधुनिक जीवनशैली में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो लंबे समय तक एक पॉजीशन में बैठने के कारण होती हैं। इसमें कमर एवं गर्दन का दर्द प्रमुख है। इसका मुख्य कारण होता है ‘स्पॉन्डिलाइटिस’। सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस से गर्दन और रीढ़ की हड्डी ज्यादा प्रभावित होती है। स्पॉन्डिलाइटिस एक प्रकार की सूजन है, जो हमारी रीढ़ के जोड़ों में होती है। रीढ़ कई जटिल जोड़ों से बनी होती है। यदि किसी भी जोड़ में सूजन आ जाए तो हमें दर्द होने लगता है, जिसे स्पॉन्डिलाइटिस कहते हैं। ऐसा ही एक खास जोड़ है 'इंटरवर्टेब्रल डिस्क' जिसमें एक मुलायम जैल होता है। यह 'शॉक एब्जॉर्बर' का काम करता है और झटके लगने पर रीढ़ को नुकसान होने से बचाता है। लेकिन कई बार जब यह जैल कम हो जाता है तो जोड़ों में अकड़न और दर्द होने लगता है। बढ़ती उम्र, बैठने का गलत तरीका, व्यायाम न करना, खराब जीवनशैली, मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन, अनियंत्रित डायबिटीज, थायरॉइड, बढ़ा हुआ यूरिक एसिड और कोलेस्ट्रॉल, स्पॉन्डिलाइटिस के प्रमुख कारण हैं। जिसमें पीठ और गर्दन में तेज दर्द होता है।

ध्यान रखें -
कुछ बातों का ध्यान रखकर हम स्वयं को इस बीमारी से बचा सकते हैं जैसे कि सही ढंग से बैठना, नियमित व्यायाम और सेहतमंद भोजन करना। सर्दी में गर्म कपड़े पहनना और दर्द वाले हिस्सों पर सिकाई करना भी लाभदायक होता है। जीवनशैली, शुगर, यूरिक एसिड व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखकर स्पॉन्डिलाइटिस से बचा जा सकता है।

इलाज से राहत -
स्पॉन्डिलाइटिस के इलाज में अल्ट्रासोनिक मसाज, शॉर्ट वेव व मीडियम वेव डायाथर्मी, इंटरफेरेंशिअल थैरेपी, एक्यूपंचर व एक्यूप्रेशर, व्यायाम आदि के साथ दवाओं से मरीज का इलाज किया जाता है। इससे कम हो चुके जैल को बढ़ाया जाता है। जो मरीज सिहरन या सुन्नता से पीड़ित हों, उनका ऑपरेशन के बिना भी अन्य तरीकों से इलाज किया जा सकता है।

 

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का दर्द जिस जगह पर हो रहा हो वहां गर्म पानी के बैग या बर्फ के टुकड़ों से सिकाई करना भी एक अच्छा ऑप्शन है। इससे जल्द ही राहत मिलती है, लेकिन यह लगातार करना होता है। सर्जरी की सलाह तब ही दी जाती है जब इसके दर्द से ब्रेन मस्तिष्क की नसें डैमेज होने लगे और किसी प्रकार के इलाज से आराम न हो।

ऑपेरशन होने पर -
यदि मरीज का ऑपरेशन करना भी पड़े (फै्रक्चर आदि होने पर) तो यह कम से कम चीरा लगाए, एंडोस्कोपिक व खास सूक्ष्म औजारों से किया जा सकता है। यह 'की होल' ऑपरेशन कम आयु के लोगों व बुजुर्गों के लिए सुरक्षित होता है।



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जानिए संतरे के छिलके से होने वाले फायदे के बारे में

संतरे का छिलका न केवल स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है बल्कि खूबसूरती निखारने में भी ये बहुत कारगर है। संतरा गुणों की खान होता है। संतरे के छिलकों में विटामिन और खनिज होते हैं। जो मस्तिष्क संबंधी अनेक विकारों को दूर करते हैं जैसे डिप्रेशन (अवसाद)और तनाव। संतरे के छिलकों में विटामिन-सी भी भरपूर मात्रा में मौजूद रहता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत करता है। विटामिन-सी बालों को मजबूती प्रदान करता है और झड़ने से रोकता है।

संतरे के छिलकों में विटामिन-ए भी होता है जो आंखों को तंदरुस्ती प्रदान करता है। इसके छिलकों में मौजूद कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिए अति आवश्यक है। संतरे के छिलके दिल की बीमारियों को दूर करते हैं और इसका सेवन करने वाला व्यक्ति हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर जैसे रोगों से बचा रहता है

इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट गुण त्वचा और बाल दोनों को निखारने का काम करता है। अगर आप ग्लोइंग और बेदाग त्वचा की इच्छा रखते हैं तो एकबार संतरे के छिलके को जरूर इस्तेमाल करके देखें। संतरे के छिलके के पाउडर को शहद के साथ मिलाकर लगाने से टैनिंग दूर हो जाती है और चेहरे पर निखार आता है।



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Body Pain: बीमारी का संकेत हो सकता है शरीर में लगातार दर्द, न करें नजरअंदाज

Body Pain In Hindi: शरीर में दर्द होना किसी बीमारी या आंतरिक बदलाव का लक्षण होते हैं। दर्द बताता है कि शरीर के अंदर बीमारी शुरू हो चुकी है। ये शारीरिक या मानसिक दोनों हो सकती हैं। संक्रमण, चोट, रिएक्शन, सूजन, जलन आदि के कारण भी दर्द हो सकता है। दर्द में कई और शारीरिक लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं जैसे उल्टी होना, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, बेहोशी छाना आदि। जानते हैं कैसे-कैसे शरीर में दर्द हो सकते हैं और शरीर पर उसका क्या दुष्प्रभाव पड़ सकता है।

साइकोसोमैटिक पेन
कई बार हमें कोई शारीरिक समस्या नहीं होती तब भी शरीर के किसी हिस्से में दर्द होने लगता है, इसे साइकोसोमैटिक पेन कहते हैं। यह शब्दावली उन दर्दों के लिए होती है जिनमें मन की परेशानी शारीरिक रूप से प्रदर्शित होती है।

दिल की धमनियों का दर्द
दिल की धमनियों के दर्द को पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज कहते हैं। हृदय से शरीर के अंगों तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में रक्त संचार बाधित होने से भी दर्द होता है।


मांसपेशियों में दर्द
मांसपेशियों में दर्द सामान्य है और इसमें एक या एक से अधिक मांसपेशियां शामिल होती हैं। मांसपेशी के दर्द में लिगामेंट्स, टेंडन और उनको जोड़ने वाले अन्य हिस्सेे हो सकते हैं।

साइकोजेनिक पेन
कुछ मानसिक बीमारियों में लोग ठीक तरह से नहीं खाते और पूरी नींद नहीं ले पाते हैं, जिससे शरीर के किसी भाग में दर्द होता है।

रेफर्ड पेन
रेफर्ड पेन को रिफलेक्टिव पेन भी कहते हैं। जब दर्द चोट वाली जगह के पास या वहां से दूर हो तो रेफर्ड पेन कहते हैं। ऐसे दर्द को नजरअंदाज न करें।

सिरदर्द दर्द : इसके कारणों का पता नहीं चला है, फिर भी तनाव, अवसाद, शराब की आदत, कब्ज, थकान, शोरगुल या तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी हो सकती है।

कमर में दर्द
रीढ़ की हड्डी में 32 कोशिकाएं होती हैं जिसमें से 22 गति करती हैं। जब इनकी गति अपर्याप्त होती है या ठीक नहीं होती तो कई समस्याएं हो जाती हैं। हमारी कमर की बनावट में कार्टिलेज, जोड़, मांसपेशियां, लिगामेंट आदि शामिल होते हैं।

क्यों महसूस होता है दर्द
शरीर में नसें इलेक्ट्रिक वायर की तरह आपस में जुड़ी होती हैं जो किसी भी हिस्से में दर्द या फिर चोट का संदेश तुरंत मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। शरीर के सभी हिस्सों में फैली इन नसों के क्षतिग्रस्त होने, रक्त संचार बाधित होने या फिर नस फटने के कारण दर्द होता है। अधिकतर दर्द उत्तकों के नष्ट होने से होते हैं। यह आपको दर्द, टीस या धुकधुक के रूप में महसूस होते हैं।

इलाज
दर्द के कारणों का पता लगाकर उसका उपचार करते हैं। जैसे संक्रमण है तो एंटीबॉयोटिक्स लेने से दर्द चला जाता है। चोट लगी है तो पेन किलर से आराम मिलता है। साइकोसोमैटिक पेन को मनोचिकित्सकीय तरीके से ठीक करते हैं। माइक्रो एंडोस्कोपी स्पाइन सर्जरी (एमईएस) ने कमर दर्द और गर्दन के दर्द के उपचार को बेहतर और आसान बनाया है, इसमें आधे घंटे से भी कम समय लगता है और आराम मिलता है।



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Postnatal Care: बच्चे के जन्म के बाद मां की सेहत के लिए अहम हाेते हैं 45 दिन, रखें खयाल

Postnatal care In Hindi: गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर, जेस्टेशनल डायबिटीज और पाइल्स संबंधी समस्याएं होती हैं जो प्रसव के बाद अपने आप ठीक हो जाती है। 40 से 50 फीसदी महिलाओं में प्रसव बाद भी ये समस्याएं रहती हैं। गर्भावस्था में खानपान के साथ दिनचर्या का खास खयाल रखा जाए तो इनसे बचा जा सकता है। गर्भावस्था में बीपी की समस्या रहने पर हाथों-पैरों में सूजन रहती है। वजन तेजी से बढ़ता है और थकान महसूस होती है। एक हफ्ते में एक किलो वजन बढ़ रहा है तो सतर्क हो जाएं। ब्लड प्रेशर लगातार गड़बड़ाने से जच्चा-बच्चा दोनों की जान को खतरा हो सकता है।

डिलीवरी बाद रखें ध्यान
डिलीवरी ऑपरेशन से हो या नॉर्मल। दोनों स्थितियों में शरीर के भीतर खून की कमी होती है। ऐसे में आयरनयुक्त खानपान पर अधिक ध्यान देना चाहिए। इसमें हरी सब्जी जैसे पालक, बथुआ, मेथी, गाजर, ककड़ी खा सकते हैं। गर्मी के मौसम में तरबूज, खरबूज लेने से फायदा होता है। तरल पदार्थों में छाछ, दूध, पतली दाल, दही और सूप लें। इनसे सभी पोषक तत्त्व मिलते हैं।

घी खाने में सावधानी
प्रसव बाद देसी घी खाने की सलाह दी जाती है हालांकि घी वसायुक्त होता है और ज्यादा लेने से बीपी के साथ मोटापा भी बढ़ता है। प्रसव बाद बिना डॉक्टरी सलाह के घी का इस्तेमाल पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बनता है जिससे प्रसूता की तबियत खराब हो सकती है। इसका असर नवजात पर भी पड़ता है क्योंकि वह फीडिंग पर ही निर्भर रहता है।

ये जांचें नियमित कराएं
गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के बाद महिलाओं को कुछ जांचें नियमित रूप से करानी चाहिए। हीमोग्लोबिन, थायरॉइड टैस्ट, पैप स्मियर टैस्ट और सर्विक्स की जांच जरूरी है। महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी किसी समस्या के होने का यदि कोई बड़ा कारण है तो इन जांचों से समयपूर्व पता चल सकता है।

प्रसव बाद 45 दिन अहम
गर्भधारण और गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। प्रसव के बाद शुरुआती 45 दिन अहम होते हैं। शरीर अपनी पुरानी अवस्था में आता है। प्रसव बाद व्यायाम जरूर करें।



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यूरोपीय संघ ने कोरोना से निपटने के लिए 25.2 करोड़ डॉलर का सहायता पैकेज दिया

ब्रसेल्स। यूरोपीय संघ (ईयू) ने तेजी से फैलते कोरोनावायरस पर नियंत्रण, रोकथाम और वैश्विक तैयारी को बढ़ावा देने के लिए 23.2 करोड़ यूरो (25.2 करोड़ डॉलर) के सहायता पैकेज की घोषणा की है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने ईयू के सोमवार के बयान के हवाले से कहा कि इस धन से बीमारी का पता लगाने व निदान करने व संक्रमित लोगों की देखभाल और इसके आगे प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी। कुल राशि के आधा के करीब 11.4 करोड़ यूरो से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को वैश्विक तैयारी व वैश्विक योजना की प्रतिक्रिया में मदद मिलेगी और 10 करोड़ यूरो तत्काल जरूरी शोध के लिए हैं।

यूरोपीय आयोग (ईयू) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन ने कहा कि जैसा कि मामलों का बढऩा जारी है, सार्वजनिक स्वास्थ्य हमारी पहली प्राथमिकता है। चाहे यह यूरोप, चीन या कहीं और तैयारियों को बढ़ावा देना हो, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर काम करना चाहिए। इससे ही कोराना वायरस खत्म किया जा सकता है।



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