Thursday, 27 April 2023

Homemade Herbal Facepacks: नीम, पुदीना, तुलसी से घर पर बनाएं फेसपैक और अपनी त्वचा को दें ठंडक

Homemade Herbal Facepacks: सदियों से दादी- नानी के घरेलु नुस्खों में हर्बल पत्तियों का उपयोग किया जाता रहा है। हेल्थ के साथ- साथ इन नेचुरल प्रोडक्ट्स के ब्यूटी के लिए भी कई लाभ हैं। कई रिसर्च से यह पता चलता है की इनमें एंटीइंफ्लामेटरी व एंटीऑक्सीडेंट जैसे गुण शामिल हैं। इन पत्तियों का फेसपैक बनाकर इनसे गर्मियों में स्किन से जुड़े प्रोब्लेम्स दूर किये जा सकते हैं। एक और जहां नीम का फेसपैक एक्ने हटाने में काम आता है वहीं मिंट फेसपैक स्किन को ठंडा रखने में मदद करता हैं। इनका फेसपैक बनाने से पहले यह जान लेना जरूरी है की आपकी स्किन टाइप कैसी है और आपकी स्किन प्रॉब्लम क्या हैं। बढ़ती हुई गर्मी में धूप, पसीने और धूल मिट्टी सेबचाने के लिए इन होम मेड फेसपैक से चेहरे की कोमलता, ताजगी और ग्लो बरकरार रक् सकते हैं। इस आर्टिकल में हमने कुछ असरदार फेसपैक बनाने की विधि शेयर की है।

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Neem Leaves Face Pack:
नीम के पत्ते अपने एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज के लिए जाने जाते हैं। नीम के पत्ते बाल और त्वचा दोनों से जुड़ी समस्या हल करने में कारगर हैं।ये एक्ने को रोकने में मदद करते हैं। नीम की पत्तियों का फेस पैक बनाने के लिए एक मुट्ठी नीम की पत्तियों को पीसकर लें। इसमें एक चुटकी हल्दी पाउडर, एलोवेरा जेल और गुलाब जल मिलाएं और पेस्ट बनाकर अपने चेहरे पर लगाएं। इसे कुछ देर (15-20 मिनट) चेहरे और गर्दन पर लगा रहने दें फिर ठन्डे पानी से धो लें।

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Tulsi Leaves Face Pack: रिसर्च से पता चलता है की तुलसी के पत्तों में एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं जो बैक्टीरिया से लड़ने और मुंहासों को रोकने में मदद करते हैं। तुलसी के पत्तों का फेस पैक बनाने के लिए एक मुट्ठी तुलसी के पत्तों को पीसकर उसमें आवश्यकता अनुसार दही और एक चुटकी हल्दी मिलाएं। इसे मिक्स करके अच्छी तरह से पेस्ट बना लें। अपने चेहरे पर ब्रश या उंगलियों की मदद से फैलाएं। 20 से 25 मिनट तक रखें और फिर धो लें।

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Mint Leaves Face Pack: पुदीने की पत्तियों में कूलिंग इफेक्ट होता है जो गर्मियों में स्किन को फ्रेश करने में मदद करता है। पुदीने की पत्तियों का फेस पैक बनाने के लिए एक मुट्ठी पुदीने की पत्तियों को पीसकर उसमें शहद और एक चम्मच बेसन मिलकर पेस्ट बना लें। इसे अपने चेहरे पर लगाएं, 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर पानी से धो लें।

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Rose Leaves Face Pack: गुलाब की पत्तियों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो स्किन को ठंडा रखने में मदद करती हैं। गुलाब की पत्तियों का फेस पैक बनाने के लिए एक मुट्ठी गुलाब की पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़े गुलाब जल और एक चमच दूध की ताज़ी मलाई मिलाएं। इसे अच्छे से मिक्स करके पेस्ट बना लें और चेहरे पर लगाएं। पानी से धोने से पहले 15-20 मिनट के लिए चेहरे पर लगा रहने दें।

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Curry Leaves Face Pack: कड़ी पत्ते एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं जो त्वचा से उम्र का पता ही नहीं चलने देते हैं। कड़ी पत्ते का फेस पैक बनाने के लिए एक मुट्ठी पत्ते को पीस लें। इसमें शहद और आधा चम्मच चन्दन मिलाएं और पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें फिर पानी से धो लें।

Disclaimer: किसी भी फेसपैक को लगाने से पहले पैच टेस्ट अवश्य करें साथ ही यह भी सुनिश्चित करें की वह आपकी त्वचा के लिए सही है।


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Thursday, 20 April 2023

Summer Glow: इन 6 असरदार होममेड फेस पैक से ऑयली व बेजान स्किन को कहें अलविदा

Summer Glow with home-made face packs: गर्मियों में घर पर बने प्राकृतिक फेस पैक त्वचा के लिए काफी फायदेमंद हो सकते हैं। घर पर नेचुरल प्रोडक्ट्स से तैयार किये गए फेस पैक गर्मियों के दौरान त्वचा को आराम दे सकते है और आमतौर पर यह सेफ होते है क्यूंकि इनमें कोई केमिकल मिक्स नहीं किया जाता। अक्सर देखा गया है की आसान होम मेड फेस पैक्स छोटी बड़ी स्किन प्रोब्लेम्स से छुटकारा दिला सकते हैं। इनमें त्वचा हाइड्रेट करना, गर्मी से स्किन की सुरक्षा करना, मुंहासों को रोकना, अतिरिक्त तेल को हटाना, त्वचा को एक्सफोलिएट करना और त्वचा को आराम देना शामिल है। इस आर्टिकल में जानिए गर्मियों के दौरान नेचुरल होम मेड फेस पैक क्यों जरूरी है और कैसे आसानी से उन्हें बनाया जा सकता है।

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Sun safe: खीरा, एलोवेरा और टमाटर जैसे नेचुरल प्रोडक्ट्स में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो त्वचा को धूप के हानिकारक प्रभावों से बचा सकते हैं। इसका फेस पैक बनाने के लिए 1/4 कप खीरे का रस और 1/4 कप टमाटर का रस मिलाएं। इस मिक्सचर को अपने चेहरे पर लगाएं और पानी से धोने से पहले 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें।

Hydrate your skin: शहद, दही और दूध से त्वचा को हाइड्रेशन मिल सकता है। खासकर गर्मियों के दौरान यह त्वचा शुष्क होने से बचा सकता है। 1/4 कप खीरे के गूदे में 2 बड़े चम्मच दही मिलाएं। इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। बाद में पानी से धो लें।

Acne care: नीम, हल्दी और चंदन से बना फेस पैक गर्मियों में त्वचा पर मुंहासों को रोकने में मदद कर सकता हैं। 8-10 ताजी नीम की पत्तियां, 2 चम्मच चंदन पाउडर, 1/4 कप खीरे का गूदा, 2 चम्मच गुलाब जल, 1 चम्मच शहद लें। नीम की पत्तियों को पीस कर बारीक पेस्ट बना लें। इसे चंदन पाउडर व खीरे के गूदे के साथ अच्छी तरह मिलाएं। फिर गुलाब जल और शहद मिलाएं और तब तक हिलाएं जब तक कि यह सॉफ्ट पेस्ट न बन जाए। इस पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं। इसे 15-20 मिनट तक या सूखने तक लगा रहने दें। इसे ठंडे पानी से धो लें और अपने चेहरे को पैट ड्राई करें।

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Oily skin: नींबू या संतरा और बेसन का फेसपैक चेहरे पर ज़्यादा तेल को हटाने में मदद कर सकता है। गर्मियों के समय विशेष रूप से यह फायदेमंद होता है। क्योंकि इस समय त्वचा तैलीय हो जाती है। 1/2 कप बेसन में 4 स्पून नींबू या संतरे का रस मिक्स करते हुए सॉफ्ट पेस्ट बना लें। इसे अपने चेहरे पर लगाएं और पानी से धोने से पहले 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें।

Exfoliate your skin: ओटमील या चावल का पाउडर और चीनी से बना फेस पैक त्वचा को एक्सफोलिएट करने और डेड स्किन हटाने में मदद करता है। गर्मियों के दौरान जब त्वचा बेजान हो जाती है तो यह फेस पैक यूज कर सकते हैं । 1/2 कप चावल के आटे और 4 चम्मच चीनी में आवश्यकता अनुसार दूध, दही या पानी मिलकर एक सॉफ्ट पेस्ट बना लें । इस पेस्ट को ब्रश या उंगलियों की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं। इसे 20 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर पानी से अपने चेहरे से धो लें।

Keep cool: एलोवेरा, खीरा, और गुलाब जल त्वचा को शांत करने में मदद कर सकते हैं। जब गर्मी और पसीने के कारण त्वचा में जलन होने लगती है इस दौरान यह विशेष रूप से फायदेमंद होते हैं। 1/4 कप खीरे का गुदा और 1/2 चम्मच एलोवेरा जेल मिलाएं। साथ में कुछ बूंदें गुलाब जल की डालें। इसका अच्छा पेस्ट बना लें। अपने चेहरे पर लगाएं और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर पानी से धोने लें।

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Wednesday, 19 April 2023

महिलाएं बनाएं ऐसे कैलेंडर व शेड्यूल ताकि याद रख सकें सेहत की बातें

पीरियड्स कैलेंडर अवश्य बनाएं

जब बच्चियां टीनएज में आती हैं और प्यूबर्टी वाली अवधि से गुजरती हैं तो अक्सर उनके मन में मासिक धर्म अवधि को लेकर शंका व सवाल होते हैं। इसमें माताएं उनकी मदद कर सकती हैं। उनके लिए आप पीरियड्स कैलेंडर बना सकती हैं। छोटी-सी डायरी में पीरियड्स कैलेंडर बनाकर उसके बैग में रख सकती हैं। मासिक धर्म हर 21 से 35 दिनों की अवधि में आते हैं और दो से सात दिन तक चलते हैं। स्मार्टफोन में पीरियड ट्रैकिंग ऐप भी डाउनलोड कर सकती हैं। बस अवधि के पहले दिन को चिह्नित करें और गिनें कि मासिक धर्म कितने दिनों का है तो मासिक धर्म के पहले दिन से 32 दिन तक गिनें। यह अगले पीरियड्स की अवधि होगी।

डिटॉक्सीफिकेशन शेड्यूल

महिलाएं सप्ताह में शरीर को डिटॉक्स करने के लिए शेड्यूल बनाएं और उसे अपनी किचन में ऐसी जगह लगाएं जहां आपकी नजर ज्यादा पड़ती हो। उससे आपको शरीर को डिटॉक्स करना भी याद रहेगा। सुबह के समय या तो गुनगुना पानी पीएं या फिर सुबह खाली पेट गुनगुना नींबू पानी पीएं। उसके अलावा डिटॉक्स वाटर भी बना सकती हैं, जिसमें नींबू, पुदीना, खीरे के टुकड़े और अदरक हो। पानी पीने का अंतराल भी इस शेड्यूल में लिखें। इससे आप अपनी सेहत के लिए कुछ समय दे पाएंगी।



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समर वेडिंग का सीजन शुरू, जानिए इस बारे के नए ट्रेंड्स के बारे में

ओपन एयर या डेस्टिनेशन वेडिंग

वेन्यू को शॉर्टलिस्ट करते समय, समर वेडिंग्स के लिए लोकेशन के मौसम की स्थिति महत्वपूर्ण है। अपने देश में गर्मी ज्यादा होती हैं, इसलिए यदि आप अपने शहर में विवाह स्थल का चयन कर रहे हैं तो ऐसी जगहें चुनें, जहां आपके मेहमानों के लिए पर्याप्त जगह हो, गर्मी परेशान न करे। इसके लिए एयर कंडीशनिंग हॉल में भोज की व्यवस्था कर सकते हैं। अगर आपका बजट अनुमति देता है तो आप डेस्टिनेशन वेडिंग का विकल्प चुन सकते हैं। ऋषिकेश, नैनीताल, मसूरी या दक्षिण भारत में मुन्नार या ऊटी जैसे हिल स्टेशन आपकी शादी को यादगार बनाएंगे। रिसेप्शन पार्टी के लिए आप रिजॉर्ट में ओपन एयर चुन सकते हैं। हरे-भरे लॉन में बोहेमियन सजावट के लिए पेस्टल कलर्स का चयन करें।

शादी का भोज

भारतीय शादियां अपने भोज की वजह से भी प्रसिद्ध हैं। खाने में तरह-तरह की वैरायटी शादियों में परोसी जाती है। इस समय शादी के भोज में ध्यान रखें कि खाने का मेन्यू सीमित रखें। हाइड्रेटिंग ड्रिंक्स जैसे आम पन्ना, इमली पन्ना, छाछ, खस और गुलाब के शरबत रखें। स्टार्टर्स में कोल्ड सूप्स, फ्रूट चाट व ग्रिल्ड आइटम्स रखें।

दुल्हन के लिए समर वेडिंग फैशन

1. आउटफिट - समर वेडिंग सीजन में इस बार ब्राइडल लहंगे में लैवेंडर, मिंट ग्रीन और पाउडर ब्लू जैसे पेस्टल शेड्स लोकप्रिय होंगे। ये सॉफ्ट कलर रोमांटिक और फेमिनिन लुक देने के लिए परफेक्ट हैं। उसके अलावा ब्राइडल लहंगे में इंडियन और वेस्टर्न का फ्यूजन भी दिखाई देगा। ब्राइडल वियर फ्लोरल और प्रकृति से प्रेरित दिखाई देंगे। फ्लोरल प्रिंट्स और फोलिएज पैटर्न से लेकर बॉटनिकल मोटिफ्स तक, ये डिजाइन ब्राइडल आउटफिट्स में ताजगी और प्राकृतिक सुंदरता का स्पर्श जोड़ेंगे। इनमें पर्ल और स्टिल्स का उपयोग किया जाएगा। वहीं इस बार गोटा-पत्ती के साथ बनारसी का भी मेल देखा जाएगा।

2. मेकअप - अब वाटरप्रूफ एचडी मेकअप होने लगा है, लेकिन हो सकता है कि यह आपको इस मौसम में अच्छा महसूस न कराए। आप नेचुरल और लाइट मेकअप का चयन कर सकती हैं। उसमें आप अपनी आंखों और होठों को हाइलाइट करा सकती हैं।

3. ज्वेलरी - कुंदन और जड़ाऊ ज्वेलरी हर शादी में लोकप्रिय होती है, क्योंकि यह रॉयल लुक देती है। कुछ नया ट्राइ करना है तो इस बार एमरल्ड ज्वेलरी का ट्रेंड रहेगा। बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी से लेकर साउथ एक्ट्रेस नयनतारा ने अपने ब्राइडल लुक को एमरल्ड ज्वेलरी से ही कंप्लीट किया था।

दूल्हे के लिए -
दूल्हे के लिए जरूरी नहीं कि आप अपनी शादी में इस मौसम में शेरवानी या बंद गला पहनें। यह इस मौसम में आरामदायक महसूस नहीं कराएगा। उसकी जगह आप धोती-कुर्ता या कुर्ता पायजामा का चयन कर सकते हैं। इन पर खूबसूरत नेहरू जैकेट्स पहनें।



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Monday, 17 April 2023

क्या ड्राई स्किन गर्मी में भी सताती है? जानिए कारण और त्वचा को कोमल रखने के आसान उपाय

Causes for Dry Skin in Summer : ड्राई स्किन सिर्फ सर्दी के मौसम की ही परेशानी नहीं है, यह गर्मियों में भी तकलीफ दे सकती है। सबसे पहले तेज धूप और गर्मी के संपर्क में आने से त्वचा में पानी की कमी हो सकती है जिससे स्किन ड्राई हो जाती है। सनबर्न त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है और रूखापन बढ़ सकता है। अगर समर में स्विमिंग करते हैं तो क्लोरीनयुक्त पूल में तैरने से भी त्वचा का नेचुरल ऑयल निकल सकता है जिससे त्वचा रूखी हो सकती है। गर्मियों में अक्सर हम एयर कंडीशनर की ठंडी हवा में रहते हैं इस कारण भी स्किन में डॉयनेस आ सकती है। धूप में निकलना, गर्मी, बार-बार या देर तक नहाना, तैरना और स्किनकेयर रूटीन का ख़याल न रखना स्किन को ड्राई और रूखा कर सकता है। अमेरिकन अकादमी ऑफ़ डर्मेटोलॉजी एसोसिएशन (AADA) के अनुसार धूप से झुलसी त्वचा गर्मियों की मस्ती को दरकिनार कर सकती है। इन गर्मियों में होने वाली त्वचा की समस्याओं से बचने के लिए एएडीए (AADA) ने कुछ रेमेडीज बताई हैं।

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Summer Heat and Sweat
: गर्मियों में पसीना आना स्वाभाविक है। जब पसीना हमारी त्वचा पर बैक्टीरिया और तेल के साथ मिल जाता है तो यह स्किन के पोर्स को बंद कर सकता है। इससे एक्ने होने की सम्भावना बढ़ जाती है। एक्ने को रोकने के लिए धूप और गर्मी से आये पसीने को एक साफ तौलिया, वेट टिश्यू या कपड़े से पसीना सोखें, पोंछे नहीं । पसीने को पोंछने से आपकी त्वचा में जलन हो सकती है, जिससे एक्ने ब्रेकआउट हो सकता है पसीने से भरे कपड़े, तौलिये, टोपी को दोबारा पहनने से पहले धो लें। स्किन के लिए ऑयल फ्री प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करें।

Sun Exposure and Safety: गर्मियों के दौरान घर से बाहर समय बिताते समय अपनी त्वचा को धूप से बचने के लिए हैट, सन ग्लासेस, लिप ग्लॉस लगाएं और लूज कॉटन कपडे पहनें। पानी पीते रहें क्यूंकि डिहाइड्रेशन से भी स्किन और लिप्स ड्राई हो सकते हैं।

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Regular and Adequate Moisturization: गर्मियों में आराम और ठंडक पाने के लिए अक्सर हम या तो स्विमिंग पूल में या एयर कंडीशनर की ठंडी हवा में रहते हैं, इस कारण भी स्किन में ड्राइनेस आ सकती है। इसलिए गर्मी के मौसम के दौरान स्किन केयर रूटीन बनाए रखना जरूरी है। घर से बाहर जाने से पहले अच्छा सनस्क्रीन लगाएं। नहाने के लिए हर्ष शैम्पू या साबुन का प्रयोग ना करें। हो सके तो हर्बल साबुन खरीदें। गर्म पानी की बजाय गुनगुने पानी से या ठंडे पानी से नहाएं। पूल से बाहर निकलने के तुरंत बाद स्नान और शैंपू करना, अच्छे बॉडी वाश से शावर लेना चाहिए। नहाने के तुरंत बाद मॉइश्चराइजर लगाएं।

Natural Skincare: एलोवेरा एक स्किन फ्रेंडली प्रोडक्ट है। यह हर मौसम में हमारे लिए फायदेमंद है। एलोवेरा में मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं जो स्किन का रूखापन, सूखापन और सूजन को कम करने में मदद करता है। ड्राई स्किन से बचने के लिए ताजा एलोवेरा जेल को अपनी त्वचा पर लगाएं। इसके अलावा बाजार से जो स्किन केयर प्रोडक्ट्स खरीदें, सुनिश्चित करें कि उसमें एलोवेरा है।

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Sunday, 16 April 2023

माधुरी दीक्षित ने शेयर किया अपने होटों के ग्लैमर का राज, ये हैं उनके फेवरेट लिपस्टिक

Madhuri Dixit's Lipstick Love : सभी मेकअप प्रोडक्ट्स की तरह ही लिपस्टिक भी कई तरह की हैं जैसे लिक्विड, पेंसिल, वाटरप्रूफ, स्मज-प्रूफ, मैट, ग्लॉसी, ग्लिटर व वाटरप्रूफ लिपस्टिक। अलग- अलग स्किन टोन और मौकों के लिए सेलिब्रिटीज और फैशन सेवी लोग न सिर्फ अलग लिपस्टिक का इस्तेमाल करते हैं बल्कि इस बात का ध्यान भी रखते हैं की प्रोडक्ट नॉन टॉक्सिक तो नहीं है। आमतौर पर लिपस्टिक का काम होटों को डिफाइन करना और उन्हें एक खूबसूरत कलर देना है। हालांकि भी सच है कि कई एक्सपर्ट्स लिपस्टिक के चॉइस से लोगों की पर्सनालिटी के बारे में बता देते हैं। उदाहरण के तौर पर लाल रंग की स्ट्रांग लिपस्टिक कॉन्फिडेंस का संकेत है। जब कोई जेट रेड लिपस्टिक लगता है तो इसका मतलब है की वो अपने आप में बहुत कॉन्फिडेंट है।

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Red Carpet Worthy
: हम अक्सर सेलिब्रिटीज की मेकअप चॉइस को फॉलो करते हैं। वो इसलिए भी है क्यूंकि हम जानते हैं की उन्हें बेहतरीन प्रोडक्ट्स के बारे में पता है। बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने फेवरेट ऑय लाइनर और लिपस्टिक के बारे में बात की। यहां जानिये उन्होंने किन ब्रांड्स के लिपस्टिक्स को बताया अपना फेवरेट।

Madhuri Dixit's Top Lipsticks : अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर बॉलीवुड दिवा माधुरी दीक्षित नेने ने अपने फेवरेट लिपस्टिक ब्रांड्स साझा किये। उन्होंने उन लिपस्टिक के बारे में बताया जिन्हें वो अक्सर इस्तेमाल करती हैं। माधुरी दीक्षित के बताये हुए ब्रांड्स में अच्छी लिपस्टिक के गुण है। इसमें कुछ लिपस्टिक लॉन्ग-लास्टिंग, समज -प्रूफ, वेटलेस, रिच कलर (जो काफी समय तक टिकता है ), क्रीमी टेक्सचर, वीगन, मॉइस्चराइजर युक्त और वाटर रेसिस्टेंट होने के साथ ही हाइड्रेट भी करती हैं। इनमें पैराबेन्स , परफिन , प्रेसेर्वटिवेस यूज नहीं होता है और ये एनिमल फ्रेंडली हैं। माधुरी दीक्षित ने जिन लिपस्टिक ब्रांड्स को अपना फेवरेट बताया वे हैं; मैक ब्रांड (MAC) का मैहर (Mehr) और रूबी वू (Ruby Woo), सेफोरा नंबर 36 (Sephora no 36), कलरबार का आउटरेज (Colorbar : Outrage), पैट मेकग्रथ का ओमी (Pat Mcgrath : OMI), और शेर्लोट टिलबरी का पिलो टॉक
( Charlotte Tilbury : Pillow talk )
(Photos : Instagram)

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Thursday, 13 April 2023

गर्मी के मौसम में हेल्दी बॉडी और ग्लोइंग स्किन के लिए अपनाएं ये टिप्स

Summer healthy routine : हम सब की यह चाह रहती है की हर मौसम में त्वचा सॉफ्ट, सिल्की और टेन फ्री रहे। ग्लोबल वार्मिंग को देखते हुए ऐसा करना चैलेंजिंग लग सकता है (कभी तेज धूप, तो कभी बारिश और कभी ठंडी हवा ) लेकिन ना मुमकिन नहीं। फिलहाल बात गर्मियों की करें तो अपनी सेहत और स्किन का ख्याल रखने के लिए सबसे पहले अच्छी डाइट मेंटेन करें। फास्ट फूड से दूरी बनाए रखें और खुद को हमेशा हाइड्रेट रखें। इसके अलावा अपनी स्किन की देखभाल के लिए रूटीन सेट करें। गर्मियों के लिए कोई भी स्किन रिलेटेड प्रोडक्ट खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखें की वो अच्छी क्वालिटी के हों, ऑयल फ्री व नेचुरल हो और आपकी स्किन टोन के मुताबिक हो। इन सब बातों के अलावा अपने वार्डरोब को भी गर्मी के हिसाब से अरेंज करें। जहां तक हो सके मौसम के मुताबिक फैब्रिक चूज करें।

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1. आपकी त्वचा को हानिकारक यूवी किरणों से बचाने के लिए सनस्क्रीन लगाना बहुत जरूरी है। सही एसपीएफ वाला सनस्क्रीन चुनें और इसे अच्छी तरह से अपने चेहरे, गर्दन, हाथों और पैरों सहित खुली त्वचा पर लगाएं। करें। अगर स्विमिंग पूल में जा रहे हैं तो स्वीमिंग के बाद फिर से लगाएं।

2. वैसे तो दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक की धूप को अच्छा मन जाता है (इससे विटामिन डी मिलती है ) लेकिन अगर आपको धूप से परेशानी होती है तो अपने पास हमेशा एक वेट टिश्यू पेपर, छाता, स्कार्फ़, कैप/ हैट, सनग्लासेज जरूर रखें। डायरेक्ट धूप के सामने आने से बचें। लाइट या पस्टेल कलर के कॉटन कपङे पहनें।

3. 'पानी पीते रहे ' इस बात को जितना कहा जाए कम है। हालांकि यह काम मुश्किल नहीं पर काम के दौरान इसे याद रखना अक्सर मुश्किल हो जाता है। इसलिए चाहे टाइमर सेट करना पड़े तो करें पर खुद को हाइड्रेट रखें। इससे आपकी स्किन खिल खिल रहेगी, लिप्स नहीं सूखेंगे और कई बीमारियों आपसे दूर रहेंगी।

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4. अपनी स्किन के डेड सेल्स को हटाने, जमा हुआ मिल निकलने और अपने पोर्स को सही करने के लिए फेसवाश, क्लेन्ज़र या स्क्रब इस्तेमाल करें। मार्किट में कई ऑप्शन अवेलेबल हैं इनमें जो भी आपके स्किन को सूट करता है वो खरीदें। इसके अलावा घर पर भी फेस पैक या स्क्रब तैयार कर सकते हैं। याद रहे स्क्रब करते वक़्त ज़्यादा रगड़ें नहीं।

5. रात को सोने से पहले नारियल के तेल की हलके हाथों से मालिश कर लें। बादाम का तेल (Almond Oil ) भी यूज कर सकते हैं। अगर तेल नहीं लगाना चाहते तो कोई मॉइश्‍चराइज़र या क्रीम लगा लीजिये, वो जो आपकी स्किन को सूट करता हो और जिसमे ज़्यादा केमिकल ना हों।

6. अपनी डाइट में फ्रेश फ्रूट्स, वेजटेबल्स, और मिल्लेट्स शामिल करें। एक अच्छी डाइट आपके शरीर के बहार और अंदर सुरक्षा कवच बन कर रहेगी।

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Tuesday, 11 April 2023

इन ब्रांड के ऑय लाइनर इस्तेमाल करती हैं माधुरी दीक्षित, जानें उनके फेवरेट ऑय लाइनर

Beautiful Eyes : ऑयलाइनर कई तरह के होते हैं जैसे लिक्विड, जेल, पेंसिल, वाटरप्रूफ, स्मज-प्रूफ, कलर, ग्लिटर, मैट, पेंसिल व वाटरप्रूफ आईलाइनर। जितनी इनकी वैरायटी है उतनी ही इनके लगाने की टेक्निक। अलग अलग मौकों के लिए लोग न सिर्फ अलग ऑय लाइनर यूज करते हैं बल्कि उसे लगाने का अंदाज भी अलग ही होता है। आमतौर पर बेसिक ऑय लाइनर आंखों को डिफाइन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। डिफाइन करने के लिए एक ऑय लाइनर यूज करते हुए आंखों के ऊपरी लैश लाइन के साथ एक पतली लाइन बनानी होती है। यह तो हुआ बेसिक तरीका ऑय लाइनर लगाने का लेकिन कई सेलिब्रिटीज इसे अलग अलग तरीके से लगते हैं। साथ ही अपना लुक स्टाइलिश रखने के लिए वे तरह तरह के लाइनर भी यूज करते हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित ने मंगलवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने फेवरेट ऑय लाइनर के बारे में बात की। यहां जानिये उन्होंने किन ब्रांड्स को बताया अपना फेवरेट ऑय लाइनर ब्रांड।

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Madhuri Dixit's Favourite Eyeliner Brands : ऑय मेकअप रूटीन के लिए ब्लैक ऑय लाइनर काफी पॉपुलर है। इसे लगाने से आंखें अच्छी तरह डिफाइन होती हैं और बड़ी नजर आती हैं। परफेक्ट लाइनर लगाने के लिए, आंख के अंदरूनी कोने से शुरू करें और पलकों के सहारे एक पतली लाइन खींचे। चाहें तो धीरे-धीरे इसे बाहरी कोने की ओर मोटा रख सकते हैं। ब्लैक ऑय लाइनर का चुनाव करते समय र चुनते समय उसकी टेक्निक, कम्फर्ट, फिनिश और टेक्सचर पर ध्यान दें। ऐसा ही कुछ है माधुरी दीक्षित का फेवरेट ब्लैक ऑयलाइनर। अपने इंस्टाग्राम वीडियो पर उन्होंने Lakme Shine ऑय लाइनर को अपने फेवरेट लाइनर्स में से एक बताया। यह लाइनर लाइटवेट, शाइन, स्मज प्रूफ, लॉन्ग लास्टिंग आई मेकअप है। इसके अलावा जो दूसरे ब्रांड्स बॉलीवुड की दिवा माधुरी दीक्षित नेने को पसंद है वे हैं ब्रांड Colorbar (Pen ) का लाइनर जो कि उनके हिसाब से यूज करने में आसान है। Kay Beauty ब्रांड का पर्पल कलर जिसे वो फन के लिए लगाती हैं, Faces Canada का मैट ब्लू ऑय लाइनर और Nykaa का ग्रीन कलर जो वे कभी कभी यूज करती है। (Photos : Instagram)

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इन मेकअप ब्रांड के ऑय लाइनर इस्तेमाल करती हैं माधुरी दीक्षित, जानें उनके फेवरेट ऑय लाइनर

Beautiful Eyes : ऑयलाइनर कई तरह के होते हैं जैसे लिक्विड, जेल, पेंसिल, वाटरप्रूफ, स्मज-प्रूफ, कलर, ग्लिटर, मैट, पेंसिल व वाटरप्रूफ आईलाइनर। जितनी इनकी वैरायटी है उतनी ही इनके लगाने की टेक्निक। अलग अलग मौकों के लिए लोग न सिर्फ अलग ऑय लाइनर यूज करते हैं बल्कि उसे लगाने का अंदाज भी अलग ही होता है। आमतौर पर बेसिक ऑय लाइनर आंखों को डिफाइन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। डिफाइन करने के लिए एक ऑय लाइनर यूज करते हुए आंखों के ऊपरी लैश लाइन के साथ एक पतली लाइन बनानी होती है। यह तो हुआ बेसिक तरीका ऑय लाइनर लगाने का लेकिन कई सेलिब्रिटीज इसे अलग अलग तरीके से लगते हैं। साथ ही अपना लुक स्टाइलिश रखने के लिए वे तरह तरह के लाइनर भी यूज करते हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित ने मंगलवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने फेवरेट ऑय लाइनर के बारे में बात की। यहां जानिये उन्होंने किन ब्रांड्स को बताया अपना फेवरेट ऑय लाइनर ब्रांड।

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Madhuri Dixit's Favourite Eyeliner Brands
: ऑय मेकअप रूटीन के लिए ब्लैक ऑय लाइनर काफी पॉपुलर है। इसे लगाने से आंखें अच्छी तरह डिफाइन होती हैं और बड़ी नजर आती हैं। परफेक्ट लाइनर लगाने के लिए, आंख के अंदरूनी कोने से शुरू करें और पलकों के सहारे एक पतली लाइन खींचे। चाहें तो धीरे-धीरे इसे बाहरी कोने की ओर मोटा रख सकते हैं। ब्लैक ऑय लाइनर का चुनाव करते समय र चुनते समय उसकी टेक्निक, कम्फर्ट, फिनिश और टेक्सचर पर ध्यान दें। ऐसा ही कुछ है माधुरी दीक्षित का फेवरेट ब्लैक ऑयलाइनर। अपने इंस्टाग्राम वीडियो पर उन्होंने Lakme Shine ऑय लाइनर को अपने फेवरेट लाइनर्स में से एक बताया। यह लाइनर लाइटवेट, शाइन, स्मज प्रूफ, लॉन्ग लास्टिंग आई मेकअप है। इसके अलावा जो दूसरे ब्रांड्स बॉलीवुड की दिवा माधुरी दीक्षित नेने को पसंद है वे हैं ब्रांड Colorbar (Pen ) का लाइनर जो कि उनके हिसाब से यूज करने में आसान है। Kay Beauty ब्रांड का पर्पल कलर जिसे वो फन के लिए लगाती हैं, Faces Canada का मैट ब्लू ऑय लाइनर और Nykaa का ग्रीन कलर जो वे कभी कभी यूज करती है। (Photos : Instagram)

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अच्छी नींद में मददगार है एक्यूप्रेशर, तनाव भी घटता

नींद के लिए जरूरी प्रेशर पॉइंट्स

एनमियां पॉइंट

क्वालिटी स्लीप और इंसोमनिया के लिए एनमियां पॉइंट को दबाते हैं। इसको नियमित दबाने से अच्छी नींद के साथ सपने भी अच्छे आते हैं। एनमियां पॉइंट गर्दन के ठीक पीछे की तरफ होता है। इस प्रेशर पॉइंट को धीरे-धीरे हल्के हाथों से सहलाने से नींद आ सकती है। इसे 10 मिनट तक सहलाना चाहिए।

अच्छी नींद में मददगार है एक्यूप्रेशर, तनाव भी घटता

योंग क्वान

ये प्रेशर पॉइंट पैर के तलवे के बीचों-बीच और अंगुलियों में होता है। इसे गशिंग स्प्रिंग के रूप में भी जाना जाता है। ये शरीर के तनाव को कम कर सकता है और नींद को बढ़ाता है। इसको हल्के हाथों से 10 मिनट तक दबाएं। महिलाओं को चाहिए कि प्रेग्नेंसी के दौरान इस तरह के प्रयोग न करें। समस्या हो सकती है।

अच्छी नींद में मददगार है एक्यूप्रेशर, तनाव भी घटता

शेनमेन

शेनमेन एक्यूप्रेशर पॉइंट अनिद्रा को कम करने के लिए माना जाता है। इससे नींद की गुणवत्त्ता में भी वृद्धि हो सकती है। ये पॉइंट कलाई पर स्थित होते हैं, जिसे दबाने से आराम मिल सकता है। इस पॉइंट को दूसरे हाथ के अंगुठे से दबाना चाहिए। इसको दबाने से ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल होता है।

अच्छी नींद में मददगार है एक्यूप्रेशर, तनाव भी घटता

यिनतांग

ये प्रेशर पॉइंट नाक और दोनों भौंहों के बीच में स्थित है। ये एक्यूपॉइंट बेचैनी, चिंता और अनिद्रा को कम करने में मदद करता है। अंगुली से इस पॉइंट पर दबाव डाला जाता है। यह सिंप्थेटिक नर्वस सिस्टम को आराम देता है। इससे सिरदर्द की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है। 5 मिनट तक हल्के हाथों से दबाएं।

अच्छी नींद में मददगार है एक्यूप्रेशर, तनाव भी घटता

इन बातों का ध्यान रखें

नींद की समस्या से छुटकारा पाने के लिए एक्यूप्रेशर का सहारा लिया जा सकता है। लेकिन शुरुआती अवस्था में किसी विशेषज्ञ की सलाह से ही प्रयोग करें। खाने के 30 मिनट पहले या बाद में ही प्रेशर पॉइंट्स दबाने चाहिए। दबाव इतना ज्यादा नहीं होना चाहिए कि वहां निशान पड़ जाए। सहने योग्य ही दबाव दें। कोशिश करें कि दबाव देते समय पूरा ध्यान उसी बिंदु पर होना चाहिए।



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पढ़िए 'शुभ पानी' पर यह कविता

नल बंद करो जरा

‘पानी बहना अशुभ है’

बढ़ती बेरोजगार शिक्षा ने

इसे अधकचरी आस्था बना दिया

टांकों के बरसाती पानी ने

विकास की सड़कों पर धरना दे दिया...

हांफते नलकूपों ने

धरती का सीना निचोड़ लिया

बूंद बूंद लेकर रेत को

तन्हाई का आलम दे दिया

मिट्टी के कोठारों को भी

कितना सूना कर दिया....

सूर्य से साक्षात्कार करते जल ने

संकल्प लेना छोड़ दिया

बादलों ने शहर शहर

सरगम पर नृत्य छोड़ दिया

घटाओं ने जलाशयों से

ताल मिलाना छोड़ दिया....

सूखते जलाशय बच्चों में

प्राण फूंकना बंद करने लगे

भुरभुरी रेत के टीले

बिन पानी दीवारें चुनने लगे

निष्प्राण हुए धूल के कण

दम घोंटने लगे

शुभता छोड़ कर पानी

शराब की फैक्ट्रियों में रकम होने लगा

कारखानों की नालियों से निकलने लगा

ये पानी पनघट के ठहाके छोड़

घरों में कैंसर करने लगा

ये यमुना सा पानी त्रासदियां करने लगा

धरती का विलाप सुन कर

ग्लेशियर पिघलने लगा

मगर झरने सा बहने की जगह

समंदर का स्तर बढ़ाने लगा

ये पानी सैलाब लाने लगा

हां पानी अब सैलाब लाने लगा

ये पानी रंग बदलने लगा

ये पानी अब काला होने लगा

पत्थर को घिस कर

रेत बनाना बंद करने लगा

रेत का माफिया पनपाने लगा

बाजार की दौड़ में

ये पानी भी बिकने लगा

प्लास्टिक में बंद पानी

मिट्टी की सुंगंध खोने लगा

अपनी ही मिट्टी से

पंच अंग से दूर करने लगा

चलो इस कंटिंजेंसी

पानी की शुभता का संकल्प लें जाएं/ घरों में टांके बनाएं

पानी के कोठार सजाएं

बच्चों में प्राणों का संचार कराएं

धवल चांद फिर थाली में ले आएं!



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Monday, 10 April 2023

घड़े का पानी पीने से सही रहता है खून का पीएच

ठंडे पानी के लिए हमारी निर्भरता मिट्टी के घड़े के बजाय फ्रिज के प्रति बढ़ी है जबकि मिट्टी के घड़े में पानी पीने के कई फायदे हैं। जानते हैं इसके बारे में-

कैसा हो मिट्टी का घड़ा: शीतल जल के लिए काली मिट्टी से बने घड़े का उपयोग करना चाहिए।

कहां रखा जाए: मिट्टी के घड़े को अक्सर लोग अपनी रसोई में रखते हैं। यदि वहां आप घड़ा रख रहे हैं तो इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि वहां हवा का संचार अच्छा हो।

कब बदलना चाहिए: मिट्टी के घड़े को वैसे तीन माह के अंदर बदल दें, अगर पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है तो वहां डेढ़ माह में मटका बदलना जरूरी है।

कैसे सफाई करें: मटके में कभी हाथ डालकर साफ नहीं करें। ऐसे साफ करने से घड़े की गंदगी उसके छिद्रों में चली जाती है। इससे मटका साफ नहीं होता। उचित यही है कि घड़े में पानी डालकर तीन-चार बार उसे खंगाल लें।

घड़े का पानी पीने के फायदे

1. क्षारीयता बढ़ाता: मिट्टी के घड़े में रखे पानी में क्षारीयता बढ़ती है। यह हमारे खून के पीएच को संतुलित रखता है। हमारी दिनचर्या से शरीर में अम्लता बढ़ रही है।

2. पानी को ठंडा रखता: फ्रिज के मुकाबले यह संतुलित आधार पर पानी को ठंडा रखता है। कहा जाता है कि मिट्टी के घड़े में से थोड़ा पानी टपकना चाहिए क्योंकि उसमें से थोड़ा पानी बाहर आता है और वाष्पीकृत होता है।

3. लवणों को बढ़ाता: मिट्टी के घड़े में रखे पानी से पर्याप्त लवण मिलते हैं। इस पानी की क्षारीयता को बढ़ाने के लिए आप उसमें नदी के पत्थर डालकर रखें या फिर आप चांदी भी डालकर रख सकते हैं।



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80% मरीज अन्य पैथी में इलाज लेने के बाद होम्योपैथी के लिए आते हैं

होम्योपैथी भी एलोपैथी और आयुर्वेद की तरह एक चिकित्सा सुविधा देती है। यह काफी सस्ती है। इसके बावजूद इसमें 80 फीसदी मरीज तब आते हैं जब वे एलोपैथी या आयुर्वेद आजमा चुके होते हैं। ऐेसे में बीमारी से रिकवर होने में समय लगता है। शुरुआती अवस्था में आने पर इसमें काफी कारगर इलाज है।

होम्योपैथिक के फायदे

यह एक सुरक्षित चिकित्सा पद्धति है। इसकी आदत नहीं पड़ती, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सभी के लिए सुरक्षित है। डायबिटीज या लैक्टोज इंटॉलरेंस में भी ले सकते हैं। होम्योपैथी इस विश्वास पर चलती है कि शरीर खुद को ठीक कर सकता है। दवा कारणों को जड़ से नष्ट करती है। इसमें स्थाई इलाज होता है।

आयुर्वेद की तरह 3 मिआज्म

आयुर्वेद में बीमारी के पीछे प्रवृति को कारण और तीन त्रिदोष बताए गए हैं। वैसे होम्योपैथी में भी तीन मिआज्म सोरा, साइकोसिस और सिफलिस बताया गया है। डॉ. हैनीमैन ने अपने पुस्तक क्रॉनिक डिजीज में लिखा है कि कुछ लोगों और परिवारों में उनकी बीमारी का 'मूल’ होता है जो इलाज के बावजूद ठीक होने से रोकता है या एक विशेष बीमारी या बीमारी के प्रकार की प्रवृत्ति में वृद्धि करता है। जब तक इसकी जड़ का इलाज नहीं किया जाता और इसे हटाया नहीं जा सकता है। बीमारी जड़ से ठीक हो, इसलिए इलाज लंबा चल सकता है।

दवा की कम डोज, असर ज्यादा

मिनिमम डोज सिद्धांत पर होम्योपैथी काम करती है। इसकी दवाओं के अर्क को मीठी गोली या लिक्विड के रूप में दिया जाता है ताकि कम दवा ही पूरे शरीर में अच्छे से फैले। कम डोज भी ज्यादा असर करती है। कुछ दवाओं को सिर्फ सूंघने के लिए कहा जाता है। यह भी उतनी असरकारी होती है।

ज्यादातर बीमारियों में कारगर:

वैसे तो होम्योपैथी दिनचर्या और मौसमी बीमारियों में सबसे कारगर माना गया है। लेकिन पुरानी और असाध्य बीमारियाें को भी जड़ से ठीक करती है।

दवा बनाने का सिद्धांत

कच्ची औषधियों को घोल के रूप में इसकी दवा तैयार की जाती है। इसकी दवा पोटेंसी में तैयार की जाती है। पोटेंशियाइज्ड दवाएं शरीर की इम्युनिटी मजबूत करती और उत्प्रेरक ग्रंथियों को भी उकसाती हैं ताकि दवा शरीर में ज्यादा अवशोषित हो सकें।

होम्योपैथी की सीमा

इसमें इमरजेंसी यानी एक्सीडेंट, हार्ट अटैक और सर्जरी के लिए विकल्प नहीं हैं। एलोपैथी की तरह इसमें टीकाकरण नहीं है। विटामिन्स और मिनरल्स की गोलियां भी इसमें नहीं होती हैं। शरीर में पोषकता के लिए आहार पर ही निर्भर रहना पड़ता है।

साइड इफेक्ट्स नहीं, हीलिंग क्राइसिस

होम्योपैथी में साइड इफेक्ट नहीं होता है। लेकिन दवाइयों के बाद कुछ लक्षण दिखते हैं जैसे बुखार की दवा के साथ लूज मोशन या उल्टी आदि। इससे शरीर में मौजूद जहरीले तत्त्व बाहर निकलते हैं। इसे हीलिंग क्राइसिस कहते हैं। अधिकतर दवाइयों में इस तरह के भी लक्षण नहीं दिखते हैं।

हर मर्ज की अलग दवा, हिस्ट्री से होती पहचान

एलोपैथी में बुखार के लिए हर व्यक्ति को पैरासिटामॉल देते हैं। होम्योपैथी में बुखार के लिए हर व्यक्ति की दवा अलग-अलग होती है। यह प्रकृति के आधार पर तय की जाती है। जैसे बीमारी का कारण, मरीज की हिस्ट्री, मरीज का व्यवहार, उसकी पसंद- नापसंद, उसकी सोच और मरीज कैसे सपने देखता है आदि।

लहसुन-प्याज पर रोक नहीं, परफ्यूम से बचें

दवा लेने से 30 मिनट पहले या बाद में गंध वाली चीजें जैसे लहसुन-प्याज आदि लेने की सलाह दी जाती है ताकि दवा की गंध और दूसरी चीजों से न मिले। हां, कुछ बीमारियों में कॉफी और परफ्यूम आदि से बचने के लिए सलाह दी जाती है।

क्या जर्मनी की दवाइयां ही बेहतर होती हैं?

ऐसा नहीं है। एक दशक पहले से तक केवल जर्मनी की दवाइयां ही बेहतर होती थीं। अब जर्मन तकनीक से और वहां की कंपनियां भी भारत में दवाइयों का निर्माण कर रही हैं। इसलिए अब अपने देश में बनी होम्योपैथी दवाइयां भी बेहतर परिणाम दे रही हैं।

दूसरी पैथी ले सकते हैं?

हां, होम्योपैथी के साथ दूसरी पैथी ले सकते हैं। लेकिन मेरी सलाह है कि ऐसा करने से बचें ताकि पता चल सके कि कौनसी पैथी असर कर रही है। अगर ले रहे हैं तो दोनों दवाइयों के बीच 40-50 मिनट का अंतर रखें। अपने डॉक्टर को भी बताएं।



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गैस पर सिकी रोटियां खाने से क्या नुकसान हो सकता?

वायरल खबर

एक वायरल खबर के अनुसार जर्नल एनवायर्नमेंट साइंस एंड टेक्नोलॉजी में प्रकाशित एक शोध के अनुसार सीधे गैस पर रोटी सेंकने से प्रदूषित गैस निकलती है। यह कार्बन मोनो ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड होता है। इस कारण ऐसी रोटियां खाने से नुकसान हो सकता है।

अन्य रिसर्च

फूड स्टैंडर्ड ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड की ओर से वर्ष 2011 में एक रिसर्च प्रकाशित किया था। इसमें कहा गया था कि सीधे आंच पर सेंकने से कार्सिनोजेनिक रसायन का उत्सर्जन होता है जो सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। तवे पर सेकी रोटी खाना चाहिए।

रोटी के अंदर गैस नहीं जाती, इसलिए सुरक्षित

अपने देश ही नहीं, दुनियाभर के कई देशों में हजारों वर्षों से तंदूर या सीधे आग पर रोटियां सेंककर खाने का चलन है। कुछ दशकों से रसोई गैस भी आई है, जिसमें मीथेन या कार्बन डाइऑक्साइड जैसे गैसें होती हैं। लेकिन इसमें समझने वाली बात यह है कि कोई भी गैस रोटी के अंदर नहीं जाती है और न ही गैस रोटी में भरती है। इसलिए नुकसान होने वाली बात स्पष्ट नहीं है। केवल अनुमान के आधार पर ऐसा बोलना ठीक नहीं है।



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Sunday, 9 April 2023

क्यों जरूरी है ऑर्गेनिक लिपस्टिक; नेचुरल लिपस्टिक से होंठ दिखते हैं सुंदर, रहते है सॉफ्ट

Green, Natural, Organic : हेल्दी लिविंग अवेयरनेस के चलते इन दिनों सब कुछ आर्गेनिक हो रहा हैं। लोग सिंथेटिक प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से बचते हुए नेचुरल और आर्गेनिक प्रोडक्ट्स की तरफ फ्हिर एक बार अपना रुझान दिखा रहे हैं। खाने पीने से लेकर कपड़े और मेकअप भी आर्गेनिक होने लगे हैं। खासकर जब मेकअप की बात आती है तो ऑर्गेनिक कॉस्मेटिक्स का चलन अब जोरों पर है। इसकी वजह यह भी है की आजकल मेकअप स्किन रेजिमे का एक हिस्सा बन चुका है। अब मेकअप किसी त्यौहार या पार्टी का मोहताज नहीं है। यही कारण है की नेचुरल मेकअप प्रोडक्ट्स की पॉपुलैरिटी बढ़ रही है। बात मेकअप की है तो लिपस्टिक का नंबर सब से पहले आता है। इसके बिना कोई मेकअप पूरा नहीं होता मगर सिर्फ इसे लगाकर आप मेक ओवर का दावा कर सकते हैं। ऐसा ही कुछ इम्पैक्ट होता है एक लिपस्टिक का। ऐसे में क्यों जरूरी है आर्गेनिक व नेचुरल लिपस्टिक आइए जानते हैं एक्सपर्ट से। इस आर्टिकल में नविता खाटवकर, आर एंड डी- पर्सनल केयर,नेटसर्फ कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड, हमारे साथ ऑर्गेनिक लिपस्टिक के फायदे शेयर करेंगी।

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Power of Natural Lipstick
: एक्सपर्ट नविता खाटवकर कहती हैं, 'हालांकि मेकअप में लिपस्टिक हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं पर उसका फ़ॉर्मूलेशन होंठों के लिए हमेशा सही नहीं होता। वह हमरी लिप स्किन को खराब कर सकता है। इस बात की बहुत ज़्यादा संभावना है कि हमअपने होंठों पर लगाए गए लिपस्टिक के रंग को अनजाने में ही सही पर खा लें, इसलिए भी ऑर्गेनिक लिपस्टिक एक अच्छा ऑप्शन है। कई रिसर्च से पता चलता है की लिप मेकअप के लिए ऑर्गेनिक लिपस्टिक,जो की नेचुरल प्रोडक्ट्स से बनता है, वो अन्य लिपस्टिक की तुलना में ज़्यादा फायदेमंद होता है। इसका कारण यह है की आर्गेनिक लिपस्टिक्स में सिंथेटिक या फिर हानिकारक तत्व नहीं होते है।' वे आगे बताती हैं आर्गेनिक लिपस्टिक इस्तेमाल करने के फायदे कुछ इस तरह हैं :

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Healthy Lips : ऑर्गेनिक लिपस्टिक में आमतौर पर मॉइस्चराइजिंग प्रॉपर्टी होती हैं, इसलिए यह होंठों को स्वस्थ बनाएं रखने में मदद कर सकती हैं। हमें अपने लिए सही लिपस्टिक का चुनाव बेहद सावधानी से करना चाहिए। लिपस्टिक खरीदने से पहले अपनी त्वचा को बेहतर तरीके से जानें और मार्किट में अवेलेबल सबसे नेचुरल,ऑर्गेनिक और सॉफ्ट लिपस्टिक का चुनाव करें। हो सकता है इनलिपस्टिक के साथ 24 घंटों तक बने रहना, या किस-प्रूफ होना जैसे बड़े दावे ना हों, लेकिन यह नेचुरल होने के कारण लम्बे समय तक आपके स्वास्थ्यके लिए सही रहेगी।

Animal friendly : आर्गेनिक लिपस्टिक किसी भी जानवर को किसी भी तरह का नुक्सान पहुंचाए बगैर तैयार की जाती है। इस तरह की लिपस्टिक ज़्यादातर नेचुरल, कलर्स, प्रोडक्ट्स और फॉर्मूलेशन से बनाई जाती है। इनमें जैतून, पेपरमिंट ऑइल और लाइम बटर के साथ कई अन्य प्राकृतिक तत्व शामिल होते हैं जो हमारे होंठों को नरम और मुलायम बनाए रखने में मदद करते हैं।

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Devoid of synthetic ingredients : इनमें सिंथेटिक इंग्रेडिएंट्स कम होते हैं, इसलिए इनसे साइड इफेक्ट्स या एलर्जी होने की संभावना कम होती है।

No dry lips : ऑर्गेनिक इंग्रेडिएंट्स से बनी लिपस्टिक का इस्तेमाल करने से इसके पुरे दिन होटों पर लगे रहने के बावजूद होंठों के रूखे हो जाने की संभावना कम होती है।

Variety : नेचुरल लिपस्टिक कई तरह के रंगों में उपलब्ध होती हैं। इन्हे हम अपनी स्किन टोन के हिसाब से मैच कर सकते हैं।

Skin friendly : ऑर्गेनिक लिपस्टिक सिंथेटिक केमिकल, आर्टिफिशियल सेंट और पैराबेन से मुक्त होती हैं और स्किन को नुकसान नहीं पहुंचती। यह एक मुख्य कारण हैं इन्हें इस्तेमाल करने का।

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Saturday, 8 April 2023

लकवे के बाद जीवन को आसान बनाते नए कैलिपर्स

डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य है कि 2030 तक हर व्यक्ति को जरूरत के सपोर्ट मिल जाएं। इनमें पोलियो, ट्रॉमा पीड़ितों के लिए कैलिपर्स, डायबिटीज या दुर्घटना से पैर गंवाने वालों के लिए जयपुर फुट हैं। इसे असेस्टिव टेक्नोलॉजी कहते हैं।

समय के साथ हुए हैं बदलाव

कैलिपर्स . (ऑर्थोसेसिस) का उपयोग वर्षों से होता आ रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें काफी बदलाव हुए हैं। पहले के कैलिपर्स काफी भारी (वजन 3.5 किग्रा) और उबाऊ होते थे। पैर मोड़ने में परेशानी होती थी। एक ही काला जूता पहनना पड़ता था। दूर से ही कैलिपर्स दिखता था। इसलिए लोग इसे नहीं पहनाना चाहते थे। लेकिन नए कैलिपर्स सुंदर और हल्के होते हैं। इसके ऊपर से पैंट और पसंद के जूते भी पहन सकते हैं।

इनमें भी मददगार ये सपोर्ट्स

जो बच्चे बार-बार गिर जाते, उन्हें चोट लग जाती है। मानसिक रोगी बच्चे जो जमीन या दीवार पर सिर मारते हैं, उनके लिए विशेष हल्के हेलमेट होते हैं। इसी तरह लकवा, हैमरेज, रीढ़ की हड्डी में संक्रमण या चोट, नर्व्स इंजरी, जन्मजात विकृति आदि के लिए भी मॉडर्न सपोटर्स हैं। इसके अलावा कई फ्रेक्चर होने पर देरी से जुड़ने या जुड़ने में परेशानी होने की स्थिति में भी यह बेहद उपयोगी होते हैं। देश में पोलियो खत्म हो गया है, लेकिन जो पहले के मामले हैं उनमें से मात्र 10% को ही जरूरत अनुसार सपोटर्स मिल रहे हैं। गंभीर बीमारी या चोट के बाद जरूरत के सपोर्ट्स देकर व्यक्ति या मरीज के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। इसको लेकर लोगों में जागरूकता होनी चाहिए।

डायबिटीज-एक्सीडेंट में भी उपयोगी जयपुर फुट

जयपुर फुट का उपयोग पहले किसी हादसे में पैर गंवाने वाले को ही लगाया जाता था। पर अब एक्सीडेंट के साथ डायबिटीज और अन्य कारणों काटने की स्थिति में भी अधिक जरूरत पड़ रही है। ये अब बहुत हल्के, मजबूत सस्ते और सुंदर भी बन रहे हैं।



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Friday, 7 April 2023

छह रसों से मिलती अच्छी सेहत, ज्यादा मीठा खाना परेशानी की वजह

यह सभी रस पंचमहाभूतों से उत्पन्न होते हैं अर्थात पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश इनकी उत्पत्ति का आधार होते हैं। इन्हीं षड्रसों के शरीर में बढऩे-घटने से बीमारियां होती हैं।

दोषों का संबंध रसों से

शरीर में जितने भी प्रकार के दोष होते हैं। उनमें त्रिदोष होता है। वात, पित्त और कफ। दोषों का संबंध भी रस से होता है।

रस दोष बढ़ता दोष घटता

मधुर कफ वात, पित्त

अम्ल पित्त, कफ वात
लवण पित्त, कफ वात
कटु पित्त, वात कफ
तिक्त वात पित्त, कफ
कषाय वात पित्त, कफ

ऋतु के अनुसार ही होते हैं रस

आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान में रसों की उत्पत्ति ऋ तु के अनुसार ही मानी गई है। हमारी छह ऋतुएंं और छह ही रसों की उत्पत्ति ऋतुओं से होती है। जैसे हेमंत ऋतु में मधुर रस, शरद में लवण रस, वर्षा ऋतु में अम्ल रस, ग्रीष्म में कटु, बसंत ऋतु में कषाय और शिशिर ऋतु में तिक्त रस की उत्पत्ति होती है। ऋतुओं के अनुसार ही इनका सेवन करना चाहिए।

रसों के बढऩे-घटने से होने वाले रोग

सभी छह रसों से ही हमारे शरीर का अच्छी तरह से संचालन होता है किंतु इनके अत्यधिक या कम प्रयोग से बीमारियां होती हैं। जैसे अधिकतर लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारियों का कारण मधुर रस ज्यादा खाना है। इनमें मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, थकान, आलस्य आदि है। कई रिसर्च के अनुसार हम ज्यादा मधुर रस वाली चीजें खा रहे हैं।

अम्ल रस के अधिक उपयोग से अम्लपित्त या एसिडिटी अल्सर चाहे वह आमाशय का अल्सर हो या आंत्र गत अल्सर हो सकते हैं। इनके कम होने सेे उत्साह की कमी, भोजन के प्रति अरुचि, घावों को भरने में देरी होती है।

लवण रस की अधिकता से उच्च रक्तचाप, अंगों में सूजन,पुरुषत्व में कमी होना आदि लक्षण जबकि इसकी कमी से शरीर में अधिक नींद शिथिलता, सूनापन के लक्षण आते हैं।

कटु रस वाले पदार्थ भूख और पाचन शक्ति ठीक रखते हैं। आंख, कान आदि ज्ञानेन्द्रियां ठीक रहती हैं। मोटापा कम होता है। लेकिन इसकी अधिकता से बेहोशी, घबराहट, थकावट, कमजोरी आदि हो सकती है।

तिक्त रस वाले पदार्थ विषैले प्रभाव, पेट के कीड़ों, कुष्ठ, खुजली, बेहोशी, जलन, प्यास, त्वचा के रोगों, मोटापे व मधुमेह आदि को दूर करते हैं। लेकिन इसकी अधिकता से शरीर में रस, रक्त, वसा, मज्जा तथा शुक्रकी मात्रा घटती है। कमजोरी-थकान होती है।

कषाय रस घाव को जल्दी भरता, हड्डियों को सही जोड़े रखते हैं। इसमें धातुओं और मूत्र आदि को सुखाने वाले गुण भी होते हैं। यही कारण है कि कषाय रस आहार से कब्ज की दिक्कत बढ़ती है। इसकी अधिकता से मुंह सूखना, हृदय में दर्द, पेट फूलना, बोलने में रुकावट, पक्षाघात और लकवे की आशंका रहती है।



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जल्दबाजी में भोजन करना सेहत के लिए हो सकता है नुकसानदायक

जल्दी में खाना क्यों नहीं खाना चाहिए ?

जल्दी में खाने के कई नुकसान हैं। जैसे भोजन के साथ हवा भी पेट में जाती है। गैस-अपच, डकार की समस्या होती है। जल्दी खाने से वजन भी बढ़ता है। आराम से खाते हैं तो भोजन को ठीक से चबाते हैं। इससे पूरा पोषण मिलता है। लिवर पर जोर नहीं पड़ता है। भोजन में लार अच्छे से मिलने से पाचन भी ठीक होता है।

खड़े होकर क्यों नहीं खाना चाहिए ?

जब आप खड़े होते हैं तो आप जल्दी-जल्दी खाते हैं, इसमें भोजन के साथ हवा तो निगलते ही हैं, दूसरी तरफ भोजन तेजी से पाचन तंत्र में पहुंचता है। पाचन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती हैं। इससे पेट फूलने, ऐंठन और गैस की परेशानी होती है।

भोजन के समय पानी क्यों नहीं पिएं ?

भोजन के दौरान जब तक बहुत जरूरत महसूस न हो पानी पीने से बचें। पानी पीने से भोजन को पचने में ज्यादा समय लगता है। पाचन संबंधी दिक्कत हो सकती है। भोजन के 40-50 मिनट पहले और भोजन के 30 मिनट बाद पानी पीना अच्छा मना जाता है।

भोजन के बाद क्यों टहलना चाहिए ?

भोजन के बाद थोड़ी देर टहलना अच्छा होता है, इससे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। पाचन में मदद मिलती है। लेकिन बहुत भागना-दौडऩा भी नहीं करें। भोजन के बाद एक जगह बैठे रहने या लेटने से पाचन में दिक्कत होती है। इससे मोटापा भी बढ़ता है। कोशिश करें कि सोने से तीन घंटे पहले भोजन अवश्य कर लें।

जमीन पर बैठकर क्यों खाना चाहिए ?

जमीन पर बैठकर खाने की आदत बॉडी-पॉश्चर को ठीक रखती है। इससे मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। शरीर में ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है, हृदय को कम मेहनत करनी पड़ती है। भोजन को पचाने के लिए खून का बहाव बढ़ता, हृदय पर दबाव पड़ता है।



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प्रकृति से दूरी के कारण बिगड़ रही है सेहत

अच्छी सेहत के लिए स्वच्छ हवा, पानी, हैल्दी खानपान, और स्वच्छ जगह जरूरी है। इसके लिए अपने परिवार के सभी लोगों, बच्चे, बुजुर्गों आदि को जागरूक किया जाना चाहिए। जागरूकता का अभाव भी एक कारण है। ऐसा कर परिवार-समाज को रोग मुक्त किया जा सकता है।

प्रकृति के 5 डॉक्टर

हमारी प्रकृति में भी पांच डॉक्टर हैं। इनमें पानी, हवा, पृथ्वी, धूप और आहार है। अगर हम इनकी सुरक्षा करेंगे तो अपनी भी सुरक्षा होगी। आज स्थिति ऐसी है कि स्वच्छ हवा और पानी मिलना भी एक चुनौती भरा काम है। अपने देश में करीब 21 करोड़ लोगों को साफ पीने का पानी नहीं मिलता है। इससे कई तरह की बीमारियां होती हैं। इसी तरह दूषित हवा भी गंभीर रोगों का कारण बन रही है। अपने देश के कई शहर दुनिया के शीर्ष प्रदूषित शहरों में शामिल हंै। इसी तरह पृथ्वी प्रदूषित है तो उपजने वाले अन्न भी हमें स्वस्थ नहीं रख पाएगें।

आदतों में बदलाव से रहेंगे सेहतमंद

हम जिस दिनचर्या में हैं, काम करने का तरीका ही तनाव दे रहा है। एक व्यक्ति इसे ठीक नहीं कर सकता है। सभी को इसके लिए पहल करनी होगी। अच्छी आदतों को अपनाएं। अपने शौक को पूरा करें। गाने सुनें, फैमिली के साथ घूमने जाएं। पूरी नींद लें। रोज योग-व्यायाम करें। किसी प्रकार के नशे आदि से बचें।

शरीर खड़ा होने के लिए बना है, हम ज्यादा बैठ रहे हैं

हमारा शरीर ज्यादा समय खड़े रहने के हिसाब से बना है लेकिन आज उल्टा हो रहा है। हम ज्यादा देर बैठ रहे हैं। इससे पॉश्चर और मानसिक रोगों के साथ दूसरे गंभीर रोग हो रहे हैं। इसी तरह हमारा शरीर धूप और प्रकृति के हिसाब से बना है। लेकिन ज्यादातर लोगों को धूप का एक्सपोजर नहीं हो रहा है। दिन-रात का अंतर हम भूल रहे हैं। इससे बॉडी क्लॉक को नुकसान हो रहा है। एयर कंडीशनर कमरों में रहने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ रहा है। पाचन और हार्मोन के रोग हो रहे हैं।

कुछ देर सेलफोन फ्री टाइम तय करें

मोबाइल की कुछ बुराइयां भी हैं। यह आपको व्यस्त रखता है। इससे बचने के लिए दिन में एक-दो घंटे सेलफोन फ्री टाइम तय करें। यह सुबह या शाम का हो सकता है। आप वॉक पर जाएं तो मोबाइल घर या कार में रखें। बेडरूम को नो मोबाइल जोन बना सकते हैं।

सकारात्मकता से संभव

जीवन की सबसे अच्छी सुंदरता है कि आप अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाएं। इससे आप हर तरह की बुराइयों से बच सकते हैं। आदतें भी अच्छी हो सकती हैं। आप व्यवस्थित हो सकते हैं। यह तब हो सकता है जब आप सकारात्मक रहेंगे। यह आपको मानसिक और शारीरिक बीमारियों से भी बचाता है। सुखी रहने के लिए सकारात्मकता अनिवार्य शर्त है।



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अच्छी सेहत देती है पूर्णता का अहसास

हैल्थ (सेहत) शब्द मूल रूप से संपूर्ण से बना है। जब हम कहते हैं,"स्वस्थ महसूस कर रहा हूं'' तो इसका मतलब है कि अपने भीतर हमें एक पूर्णता का अहसास होता है। चिकित्सा की दृष्टि से यदि हम बीमारियों से मुक्त हैं तो हमें स्वस्थ माना जाता है। लेकिन वाकई में यह स्वास्थ्य नहीं है। अगर हम देह, मन और आत्मा से एक पूर्ण मनुष्य के जैसा महसूस करते हैं, तभी हम वास्तव में स्वस्थ हैं। ऐसे कई लोग हैं, जो चिकित्सा की दृष्टि से स्वस्थ हैं, पर वे सच्चे अर्थों में स्वस्थ नहीं हैं, क्योंकि उन्हें अपने भीतर तंदुरुस्ती का अहसास नहीं होता।

सेहत का अर्थ ऊर्जा से

योग में जब हम स्वास्थ्य कहते हैं तो हमारा आशय तन -मन से नहीं केवल ऊर्जा के काम करने के तरीके से होता है। अगर आपका ऊर्जा-शरीर उचित संतुलन और पूर्ण प्रवाह में है, तो आपका स्थूल शरीर और मानसिक शरीर पूरी तरह से स्वस्थ होंगे। बात जब सेहत की आती है तो कोई भी व्यक्ति पूरी तरह से सुरक्षित स्थितियों में नहीं जीता। हम जो भोजन करते हैं, हम जिस हवा में सांस लेते हैं, हम जो पानी पीते हैं, दैनिक जीवन के तनाव जैसी तमाम चीजें कई तरह से हम पर असर डालती हैं। लेकिन अपने तंत्र में अगर ऊर्जा को सही ढंग से तैयार किया जाए और उसे सक्रिय रखा जाए, तो इन चीजों का असर नहीं होगा। तब भौतिक और मानसिक शरीर पूरी तरह से स्वस्थ रहेंगे। इसमें कोई शक नहीं।

ऊर्जा का पूर्ण प्रवाह जरूरी

फिलहाल चिकित्सा विज्ञान सिर्फ स्थूल शरीर को ही जान पाया है। अगर इससे परे कुछ होता है, तो आप उसे चमत्कार मानते हैं। जबकि मैं इसे केवल दूसरे तरह का विज्ञान कहता हूं। आपके भीतर की जीवन-ऊर्जा ने आपके संपूर्ण शरीर का निर्माण किया है - ये अस्थियां, यह मांस, यह हृदय, ये गुर्दे और हर चीज उसी से बनी है। अगर अपनी ऊर्जा को पूर्ण प्रवाह और उचित संतुलन में रखा जाए, तो ये महज स्वास्थ्य ही नहीं बहुत कुछ करने में सक्षम है।

शरीर को ही स्वस्थ रखना, स्वास्थ्य नहीं

आपने खुद को सिर्फ भौतिक व तार्किक तक सीमित कर रखा है। अनुभव में भौतिक और सोच में तार्किक। जीवन कई तरह से काम करता है। मान लीजिए, आप बिजली के बारे में कुछ नहीं जानते कि बिजली क्या है। हॉल में अंधेरा है। अगर मैं आपसे कहूं कि सिर्फ एक बटन दबाइए और सारे हॉल में रोशनी फैल जाएगी, तो क्या आप विश्वास करेंगे? नहीं। लेकिन जैसे ही मैं आपके सामने बटन दबाता हूं, वहां रोशनी हो जाती है। आप इसे एक चमत्कार कहेंगे, है कि नहीं? चूंकि आप नहीं जानते कि बिजली कैसे काम करती है? इसी तरह, जीवन भी कई और रूपों में घटित होता है लेकिन आपने खुद को सिर्फ भौतिक व तार्किक तक सीमित कर रखा है। अगर अपनी ऊर्जा का संतुलन करें तो आप बहुत कुछ कर सकते हैं।



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Wednesday, 5 April 2023

स्वास्थ्य की वे 4 बातें, जिन्हें हर महिला को जानना चाहिए

बोन हैल्थ

बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों के घनत्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बार-बार गर्भ धारण से कैल्शियम व विटामिन डी की कमी होना स्वाभाविक है। 40 वर्ष की आयु से बोन हैल्थ पर ध्यान दें।

उपाय: सुबह नौ से 11 बजे के बीच धूप में बैठें। दूध, पनीर का सेवन करें। मेनोपॉज के बाद महिलाओं को सोयाबीन, करी पत्ता, अलसी के बीज को भोजन में ज्यादा शामिल करना चाहिए।

डेंटल हैल्थ

अधिकांश महिलाएं अपने होठों पर तो ध्यान देती हैं, किंतु दांतों व मसूढ़ों पर नहीं! पायरिया, मुंह की दुर्गंध व दाढ़-दर्द से बचने के लिए दिन के अलावा रात को भी ब्रश करना उचित है।

उपाय: पर्याप्त पानी पीना कुदरती माउथवॉश का काम करता है। मसूढ़ों की देखभाल के लिए आंवला, नींबू, संतरा, मौसंबी, आलू-बुखारा, किन्नू का सेवन करें। जीभ पर छाने वाली कोटिंग को बिल्कुल नजरअंदाज न करें।

गैस्ट्रिक हैल्थ

पेट की तकलीफें जैसे कब्ज, एसिडिटी, गैस, अपच अधिक तला-भुना व चटपटा खाने से होती हैं। महिलाओं में आए दिन किए जाने वाले व्रत-उपवास भी कहीं-न-कहीं उनके मेटाबॉल्जिम को प्रभावित करते हैं।

उपाय: भोजन में शुद्ध, सात्विक व कुदरती खाद्य पदार्थों का समावेश उसे गुणकारी तथा पाचक बनाता है। दही से खमीरीकृत भोज्य पदार्थों का सेवन जैसे इडली, खमण, महेरी, खीच आदि फायदेमंद है।



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महिलाओं की तीन ‘खराब आदतें’

1. बचा-खुचा खाना
यह महिलाओं की सबसे खराब आदतों में से एक है। इसका असर उनके पोषण पर दिखाई देता है। परिवार में सभी के पोषण का ध्यान रखने वाली महिला अपनी थाली में क्या खा रही उस पर ध्यान नहीं देती। बचा-खुचा खाने की वजह से उन्हें संपूर्ण पोषण नहीं मिलता है। इसकी वजह से कमजोरी, थकान, आयरन-कैल्शियम की कमी व एसिडिटी से जूझना पड़ता है।

2. पूरी नींद न लेना
बच्चों व पति का टिफिन, बुजुर्गों का खाना-पीना संभालने वाली महिला पूरे घर में सुबह सबसे पहले उठती है, लेकिन रात को सभी काम निपटाकर सबसे देर से सोती है। उसकी वजह से वह पूरी नींद नहीं ले पाती। खासकर कामकाजी महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारी होती हैं। उससे कई बीमारियां, चिड़चिड़ापन, भोजन का मन न होना आदि समस्याएं होती हैं। रोजाना हर किसी को 7-8 घंटे की नींद जरूरी है।

3. यूरिन रोकना
इसे हमारे देश में विडम्बना ही कहेंगे क्योंकि यदि महिलाएं यात्रा कर रही हैं तो कई जगह सार्वजनिक शौचालय ही नहीं मिलते और यदि कहीं होते हैं तो बेहद गंदी स्थिति में होते हैं। उसकी वजह से मजबूरन उन्हें यूरिन लंबे समय तक रोकना पड़ता है। यह धीरे-धीरे आदत का रूप ले लेता है। उसके वजह से यूरिन इंफेक्शन की समस्या हो सकती है।



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Tuesday, 4 April 2023

चाहते है हेल्दी स्किन तो फेसवॉश खरीदने से पहले इन बातों का रखें खयाल

Importace of a Facewash : चेहरे की क्लीनिंग और दिन भर की धूल मिटटी से स्किन पर जमी हुई गन्दगी, एक्सेस तेल को हटाने के लिए फेसवाश का इस्तेमाल किया जाता है। अगर यह गन्दगी साफ़ ना की जाए तो चारे पर जमे हुए मैल से स्किन के पोर्स बंद हो जाते है। पोर्स बंद होने का नतीजा यह होता है की हमारे चेहरे पर एक्ने, ब्लैकहेड्स और अन्य स्किन प्रोब्लेम्स होना शुरू जो जाती है। मार्केट में ऐसे कई प्रोडक्ट्स है जो का दवा करते है की वो बेस्ट है लेकिन कौन सा प्रोडक्ट खरीदें यह आपको तय करना होगा। अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर करते हुए डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर रश्मि शेट्टी ने कहा, 'अपने पोर्स को साफ रखना बहुत जरूरी है। आपको यह सुनिश्चित करना है कि जब आवश्यक हो तो सही फेस वॉश का उपयोग करके आप अपना चेहरा धो धोएं।' फेसवॉश खरीदने से पहले नीचे दिए गए इन पांच बातों का ध्यान रखना चाहिए:

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Different Skin Types
: ऐसा फेस वॉश चुनना जरूरी है जो आपकी त्वचा को सूट करता हो। यदि आपकी ऑयली स्किन है, तो एक ऐसा फेस वॉश का चयन करें जिसमें सैलिसिलिक एसिड (salicylic acid ) या बेंज़ोयल पेरोक्साइड ( benzoyl peroxide) हो, जो त्वचा पर ऑयल बनने से रोकने में मदद करता है। अगर आपकी स्किन ड्राई है, तो ऐसा फेस वॉश चुनें जो जेंटल और हाइड्रेटिंग हो।

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Check Ingredients
: फेस वॉश खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखें उसमें नेचुरल और आर्गेनिक इंग्रेडिएंट्स हों। ऐसे फेसवाश खरीदने से बचें जिनमे हारश केमिकल जैसे सल्फेट्स, पैराबेन और सिंथेटिक फ्रेग्रन्सेस हों। ऐसे प्रोडक्ट्स आपके स्किन को डैमेज और इर्रिटेट कर सकते है। ऐसे फेस वॉश की तलाश करें जिसमें प्राकृतिक और जैविक तत्व हों। ऐसे फेसवॉश से बचें जिनमें कठोर रसायन जैसे सल्फेट्स, पैराबेन और सिंथेटिक सुगंध होते हैं जो त्वचा को परेशान कर सकते हैं। डॉक्टर रश्मि शेट्टी ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट पर उन इंग्रेडिएंट्स के नाम लिखे जो ब्लैकहेड्स को रोकने/कम करने में मदद करते है। इनमें रेटिनोल, adapalene, niacinamide, विटामिन सी, बेंज़ोइल पेरोक्साइड और वो फेसवाश शामिल है जिनमें AHA और BHA हों।


Study Brand Reputation
: फेस वॉश खरीदने से पहले उस ब्रांड की रेपुटेशन की जांच अवश्य कर लें। ऐसे ब्रांड की तलाश करें जो अपनी क्वालिटी के लिए जाने जाते हैं। इस तरह के आर्गेनिक और नेचुरल प्रोडक्ट्स चुनें जो अपनी मैन्युफैक्चरिंग मैं सस्टेनेबल प्रैक्टिस पर ध्यान देते है।

Scan Formulation : ऐसा फेस वॉश चुनें जो सॉफ्ट हो और स्किन से नेचुरल ऑयल्स न छीने। बहुत स्ट्रांग चेमिकल्स वाला फेस वॉश नहीं खरीदें, यह स्किन को खराब कर सकता है।

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Beware of Price
: महंगे का मतलब हमेशा बेहतर नहीं होता है। एक ऐसे फेसवॉश देखें जो आपके स्किन को सूट करता हों (इंग्रेडिएंट्स चेक करें ), आपके बजट में फिट हो और जिसकी रिव्यु अच्छी हो। अगर ब्रांड अच्छा है और उसकी रिव्यु अच्छी है तो ऐसे फेसवाश में थोड़े ज़्यादा पैसे देना बुरा नहीं है।

A few good face wash : फॉरेस्ट एसेंशियल्स डेलिकेट फेशियल क्लींजर कश्मीरी केसर एंड नीम, क्लिनिक फेस वॉश, बायोटिक बायो हनी जेल रिफ्रेशिंग फोमिंग फेस वॉश, हिमालया हर्बल्स नीम फेस वॉश, mCaffeine फेस वॉश (Forest Essentials Delicate Facial Cleanser Kashmiri Saffron and Neem, Clinique face wash, Biotique Bio Honey Gel Refreshing Foaming Face Wash Himalaya Herbals Neem Face Wash: mCaffeine face wash )

यह भी पढ़ें : केमिकल से रहें दूर, इन ऑर्गेनिक काजल से आंखों को दें परफेक्ट लुक




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Monday, 3 April 2023

याद रखने में सहायक ‘एक्रोनिम’

एक्रोनिम का अर्थ शब्द संक्षेपण से है। यदि आपको किसी भी विषय के विविध बिंदु याद रखने में परेशानी का अनुभव होता है तो उन सभी बिंदुओं के शुरुआती लैटर्स आपकी मदद कर सकते हैं। जैसे भारत में पाई जाने वाली पांच तरह की मिट्टी-एलुवियल, रेड, माउंटेन, ब्लैक और डेजर्ट को आप MR BAD से याद रख सकते हैं। एक्रोनिम्स का इस्तेमाल किसी भी विषय की जानकारी को याद रखने में हो सकता है।

याददाश्त बढ़ाने में एक्रोनिम्स का बड़ा योगदान है। यदि आपने एक्रोनिम का अभ्यास किया है तो आपको कई शब्दों को याद रखने की जगह सिर्फ एक ही शब्द या वाक्य याद रखना होता हे।

एक्रोनिम स्टूडेंट्स को उन विषयों के बीच संबंध स्थापित करने में मदद करते हैं, जिससे छोटे-छोटे कॉन्सेप्ट्स को एक-दूसरे से जोड़ना आसान हो जाता है।

शब्दों को संक्षेप में लिखने से समय की भी बचत होती है। इससे अपने नोट्स को दोहराने में अधिक समय नहीं लगता। एक ही शब्द के साथ कई शब्द जुड़े होने से यह आपकी रिकॉल क्षमता को भी बढ़ा सकता है।



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घर में किसी को संक्रमण है तो मास्क लगाएं

अच्छी बात यह है कि इसके मामले गंभीर नहीं हो रहे हैं। नियमित मास्क लगाने से कोरोना या दूसरे संक्रमण को 75 फीसदी तक रोका जा सकता है। अगर दोनों तरफ के लोग मास्क लगाएं तो बीमारी के फैलने की आशंका 95 फीसदी तक कम हो जाती है। घर में किसी को सर्दी-खांसी जुकाम है तो उस व्यक्ति को भी नियमित मास्क लगाना चाहिए। इससे संक्रमण दूसरे सदस्यों में नहीं होगा।

बच्चों-बुजुर्गों को फायदा :

बच्चे और बुजुर्गों की इम्युनिटी ज्यादा कमजोर होती है। अगर किसी को संक्रमण हुआ है तो बच्चे-बुजुर्गों को उनसे दूर रखें। कोशिश करें कि बदलते मौसम में हर कोई मास्क लगाए तो कई तरह के संक्रमण और एलर्जी से बचाव हो सकता है।

साल में एक बार लगवाएं वैक्सीन :

कोरोना वैक्सीन की तीसरी डोज लगवा सकते हैं। इसके अलावा हर व्यक्ति वर्ष में एक बार इनफ्लूएंजा वायरस का एक डोज लेना चाहिए। इससे मौसमी बीमारियों से बचाव होगा।



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Saturday, 1 April 2023

मोटापे की सर्जरी से डायबिटीज के साथ लिवर रोगों में भी राहत

अगर मोटापा कम होता है तो इनमें भी सीधे तौर पर राहत मिलती है। हाल ही एम्स नई दिल्ली में हुए एक शोध में देखा गया है कि मोटापे को कम करने की बैरियाट्रिक सर्जरी से न केवल टाइप-2 डायबिटीज में राहत मिलती है बल्कि लिवर से जुड़े रोगों खासकर लिवर सिरोसिस को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

एक्सपर्ट कमेंट- एम्स के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. संदीप अग्रवाल के अनुसार बैरियाट्रिक सर्जरी के बाद मधुमेह की बीमारी काफी हद तक ठीक हो जाती है। गंभीर मरीजों को भी कम दवा लेनी पड़ती है। साथ ही फैटी लिवर व लिवर सिरोसिस जैसी बीमारियों में बैरियाट्रिक सर्जरी के भी फायदे हैं। अधिक वजन का दुष्प्रभाव लिवर पर अधिक होता है।

ऐसे हुआ अध्ययन - इस अध्ययन में ऐसे 400 मरीजों पर अध्ययन किया गया, जिन्हें पहले से लिवर सिरोसिस की समस्या थी और उनकी बैरियाट्रिक सर्जरी हुई थी। इससे मरीजों को काफी राहत मिली है।



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