Saturday, 31 July 2021

डायबिटीज कंट्रोल और भी आसान, बायोकॉन की दवा को मिली मंजूरी

नई दिल्ली। डायबिटीज के मरीजों के लिए एक नई खुशखबरी (Good News for Diabetes patients) है। यदि उन्हें अपना ब्लड शुगर घटाना हो तो सिर्फ इंसुलिन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। अमेरिका की फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने बायोकॉन वायट्रिस की दवा को मंजूरी दे दी है। यह पहली ऐसी दवा है जो डायबिटीज के पेशेंट्स के लिए इंसुलिन जैसे काम करेगी और ब्लड शुगर को घटाने में मदद करेगी।

अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (USFDA) द्वारा डायबिटीज की दवा को मंजूरी मिलने का मतलब है कि अब आपको इंसुलिन कि जरूरत नहीं पड़ेगी। मरीज अब डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन लिए बिना भी ये दवा का उपयोग कर सकते हैं। यह हमारे लिए एक सबसे बड़ी सफलता है, क्योंकि डायबिटीज (Diabetes Causes and Treatment) न सिर्फ भारत में, बल्कि दुनिया में बढ़ती हुई बहुत बड़ी बीमारी है। जिसका इलाज अब और आसान हो गया है।

अब आपको ब्लड शुगर के लेवल को घटाने के लिए सिर्फ इन्सुलिन पर ही निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। आप बायोकॉन वायट्रिस का भी उपयोग कर सकेंगे। इसे अमेरिका की फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के तरफ से मंजूरी दे दी गई है। यह पहली ऐसी दवा है, जो इंसुलिन जैसा काम करेगी और तो और ब्लड में शुगर के लेवल को घटाने में भी मदद करेगी। यह विज्ञान के लिए सबसे अच्छी शोध साबित हुई है, क्योंकि इतनी बड़ी बीमारी का अब तक सिर्फ एक ही इलाज था- इंसुलिन। इस शोध से साबित होता है कि इस गंभीर बीमारी से निपटने के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं।

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इस बायोसिमिलर दवा को बायोकॉन बनाएगी और अमेरिका में सेमग्ली की मार्केटिंग बायोकॉन की पार्टनर कंपनी वाइट्रिस करेगी। जेनेट वुडकॉक जो कि USFDA कार्यकारी आयुक्त हैं, उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि ये खासतौर पर उन लोगों के लिए कारगर है, जो रोज इंसुलिन पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने बताया कि अब आप इसका उपयोग कर सकते हैं। यह इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर प्रोडक्ट है जो वाकई में बहुत किफायती है।

बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स को बाजार में लॉन्च किया जा रहे है। ये कम दामों में बनी हुई दवाई है जो सेफ,सुरक्षित,अच्छी क्वालिटी की और प्रभावशाली है। जो डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद साबित होगी।

आज देश और दुनिया में बहुत सारे डायबिटीज के मरीज हैं जिनके लिए ये दवाई फायदेमंद साबित होगी। इस नई दवा के बाजार में आने से सबको बहुत खुशी हुई है, क्योंकि बहुत दिन बाद डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों के लिए कुछ नया देखने को मिला है। जो हमारे लिए एक खुशखबरी है।

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यूएसएफडी ने बताया है कि इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर दवा सेफ यानी सुरक्षित है। डायबिटीज के मरीजों के लिएर लाभदायक साबित होगी। जो मरीज इसका उपयोग करना शुरू करेगा, उसे कोई ज्यादा फर्क महसूस नहीं होगा।

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Health tips : हरी मिर्ची खाने से सेहत को होते हैं कई फायदे, आप भी करें डाइट में शामिल

वैसे तो हरी मिर्च का उपयोग हर घर में किया जाता है। लेकिन कुछ लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं। तो कुछ लोग हरी मिर्ची का सेवन नहीं करते। जबकि हरी मिर्ची लाल मिर्ची की अपेक्षा भी सेहत के लिए अधिक फायदेमंद होती है। अगर आप इसका सेवन करेंगे। तो निश्चित ही कई बीमारियों से भी आपका बचाव होगा।

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लो कैलोरी-

हरी मिर्ची में जीरो कैलोरी होती है। इसलिए यह खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही सेहतमंद भी रखती है। इसका नियमित उपयोग करने से आपका मेटाबॉलिज्म भी बराबर रहता है।

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इम्यूनिटी करेगी स्ट्रांग-

हरी मिर्च एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है। इस कारण यह हमारा इम्यूनिटी सिस्टम स्ट्रांग करती है। हरी मिर्च खाने से प्रोस्टेट संबंधित रोगों का खतरा भी कम हो जाता है।

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कोलेस्ट्रोल होगा कंट्रोल-

जो लोग हरी मिर्च का सेवन करते हैं। उनका ब्लड सरकुलेशन बराबर रहता है। इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कंट्रोल में रहता है। खून के थक्के नहीं बनते हैं और हार्ट संबंधी रोग भी कम होते हैं। इसलिए जो लोग हरी मिर्च का सेवन नहीं करते हैं। वे अब शुरू कर दें।

यह भी पढ़ें - सेहतमंद रहने के लिए रोजाना सुबह उठकर करें यह काम।

सर्दी-जुकाम में फायदेमंद-

हरी मिर्ची में केप्सीसिन नामक तत्व होता है। जो सर्दी जुकाम और साइनस इनफेक्शन के खतरे को कम करता है। सर्दी जुकाम होने पर हरी मिर्च का सेवन जरूर करना चाहिए।

दर्द में मिलेगा आराम-

हरी मिर्च में विटामिन सी और बीटा कैरोटीन पाया जाता है। इस कारण यह आंखों ओर स्किन के लिए भी फायदेमंद है। इसे ठंडी वह अंधेरी जगह में रखना चाहिए हवा और रोशनी के संपर्क में आने से इसका विटामिन समाप्त होता है।



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Face care : चेहरे पर नजर आ रहे अनचाहे बालों को दूर करने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

जिस प्रकार पुरुषों के चेहरे पर मूछ और दाढ़ी में बाल आते हैं। उसी प्रकार कई बार महिलाओं के चेहरे पर भी बाल आ जाते हैं। जो महिलाओं की खूबसूरती को प्रभावित करते हैं। इन्हें चेहरे से दूर करने के लिए आप कुछ घरेलू उपाय कर सकती हैं।

वैसे तो हर महिलाओं की ख्वाहिश रहती है कि उनके बाल लंबे और घने रहे। लेकिन चेहरे पर निकलने वाले बाल उन्हें अच्छे नहीं लगते हैं। इसे दूर करने के लिए वे तमाम उपाय भी करती हैं।लेकिन कई बार उससे भी फायदा नहीं होता है।इसलिए आप चेहरे पर नजर आने वाले अनचाहे और छोटे छोटे बालों को दूर करने के लिए कुछ उपाय कर सकते हैं।

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दरअसल, महिलाओं के चेहरे पर आने वाले इन बालों की समस्या को हरसूटिज्म कहा जाता है। शरीर में टेस्टोटेरोन ओर एंंड्रोजन की मात्रा अधिक होने के कारण यह दिक्कत होती है। इनसे छुटकारा पाने के लिए आप यह घरेलू उपाय कर सकती हैं।

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पपीते का करें उपयोग-

चेहरे पर नजर आने वाले अनचाहे बालों को बढ़ने से रोकने के लिए पपीता बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें पेपैन एंजाइम होता है। इसका नियमित रूप से उपयोग करने से चेहरे पर बाल आने की समस्या धीरे-धीरे कम होकर खत्म हो जाती है। इसके लिए आप एक चम्मच पपीते का गूदा और आधा चम्मच हल्दी का पाउडर ले। इन दोनों को पेस्ट के रूप में तैयार कर चेहरे और गर्दन पर लगाएं। जब यह पेस्ट सूख जाए तो सादे पानी से धो लें। यह उपाय आप सप्ताह में दो बार कर सकते हैं। इससे त्वचा में भी निखार आएगा और अनचाहे बालों से भी निजात मिलेगी।

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एलोवेरा जेल का उपयोग करें -

अनचाहे बालों से छुटकारा पाने के लिए आप एलोवेरा जेल का भी उपयोग कर सकते हैं। आप चार चम्मच एलोवेरा जेल में एक चौथाई चम्मच बेसन मिलाएं और दो चम्मच सरसों का तेल मिला लें। इसे अच्छे से मिक्स करके पेस्ट बना लें और चेहरे पर जहां बाल दिखे, वहां पर इसे लगाएं और जब यह सुख जाए तो साफ कपड़े से साफ कर लें। इस पेस्ट को लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि बालों की ग्रोथ से उलटी दिशा में इस पेस्ट को लगाया जाए। पेस्ट को पोछने के बाद फिर चेहरे को पानी से धो लें।

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नींबू और चीनी का उपयोग करें-

चेहरे से अनचाहे बालों को हटाने के लिए आप ब्राउन शुगर में एक चम्मच नींबू का रस मिलाएं। फिर इस मिश्रण में आधा कप पानी डालकर गर्म करें। यह पानी उबलने के बाद गैस बंद कर दें और जब यह ठंडा हो जाए। तो वैक्स की तरह अपने चेहरे पर उपयोग करें और वैक्स स्ट्रिप की सहायता से चेहरे से बाल को हटाए।



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Energy and Stamina foods: स्टैमिना हो रहा है कम, तो डाइट में शामिल करें ये 5 सुपरफूड्स

नई दिल्ली। शरीर जब अंदर से कमजोर महसूस करेगा तो आप कोई भी काम सही तरीके से नहीं कर पाएंगे। आपको दिन भर थकान, आलस महसूस होगा। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो थोड़ी देर काम करते ही थक जाते हैं। शरीर स्फूर्तिदायक और चुस्त-दुरुस्त रहता है तो ही आप किसी भी कार्य को बेहतर तरीके से कर पाते हैं। ऐसे में शरीर में स्टैमिना (Energy and Stamina foods) का होना बहुत जरूरी है।

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आपने गौर किया होगा जब आप एक्सरसाइज या वर्कआउट करते होंगे तो थकान महसूस होती होगी। यह दर्शाता है कि आपका स्टैमिना कम हो रहा है। परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप अपना स्टैमिना बढ़ा सकते हैं, उसके लिए अपनी डाइट का ध्यान रखें।

डाइट में स्टैमिना बढ़ाने वाले फूड्स को भरपूर मात्रा में शामिल करें। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि कैसे आप अपना स्टेमिना बढ़ा सकते हैं। जानिए, कौन से फूड्स के सेवन से स्टैमिना बढ़ाया जा सकता है।

ये फूड बढ़ाएंगे स्टैमिना

केला

जल्दी-जल्दी थकने का मतलब है कि आपमें ताकत नहीं है और आपको एनर्जी की जरूरत है। इसलिए केले को खाने में शामिल करें। केले में एंटी-ऑक्सीडेंट्स के साथ पोटैशियम भी भरपूर मात्रा में होता है जो कि स्टैमिना बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें विटामिन सी, मैग्नीशियम, कैल्शियम, फोलेट, जिंक और आयरन आदि पोषक तत्व होते हैं। रोज सुबह वर्कआउट करने से पहले या घर का काम शुरू करने से 30 मिनट पहले केला खाएं। यह आपका स्टैमिना बढ़ाने में मदद करेगा।

केल

केल (एक हरे रंग की सब्जी होती है, जिसकी पत्तियां ब्रोकली की तरह दिखती हैं) कब्ज की समस्या में राहत दिलाने वाले फाइबर और हेल्दी स्टार्च होते हैं। आपका पेट अगर रोजाना अच्छे तरीके से साफ होगा तो इससे भी आपका स्टैमिना पॉवर बढ़ेगा। केल में विटामिन सी, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, फोलेट, जिंक और आयरन आदि पोषक तत्व होते हैं, इसलिए केल का सेवन जरूर करें।

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नारियल पानी

दिन में कम से कम एक बार नारियल पानी जरूर पिएं। कुछ लोगों को नारियल पानी का महत्व नहीं मालूम है, लेकिन लगातार एक महीने तक पीने के बाद आपको इसका महत्व पता चल जाएगा। इसमें विटामिन ई पर्याप्त मात्रा में होता है। इसके साथ ही यह शरीर को हाइड्रेट भी रखता है, जिसके कारण थकावट नहीं होती है।

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चिया सीड्स

दिन में दो बार चिया सीड्स स्टेमिना (Energy and Stamina foods) बढ़ाने के लिए लीजिए। इससे आपके शरीर में थकावट नहीं होगी। दरअसल, चिया सीड्स स्टेमिना बढ़ाने के लिए लाभकारी होता है। इसमें काफी मात्रा में फाइबर, प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो दिन भर एनर्जी देते हैं। इसकी सबसे अच्छी बात है कि इससे वजन भी नहीं बढ़ता है। वर्कआउट करने से पहले आप इसका सेवन कर सकते हैं।

क्विनोआ

यह एक ग्लूटन फ्री सुपरफूड है जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और एमीनो एसिड आदि प्रचुर मात्रा में होते हैं। रोज सुबह नाश्ते में इससे बनी रोटी खाएं। दिन भर के लिए आपको भरपूर एनर्जी मिल जाएगी। साथ ही यह स्टेमिना बढ़ाने के लिए भी फायदेमंद होता है।



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Cornea Test And Covid : एक अध्ययन का दावा है कि कॉर्निया टेस्ट से लम्बे समय से कोविड से पीड़ित का पता लगा सकता है

नई दिल्ली। ब्रिटिश जर्नल ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी में प्रकाशित एक रिसर्च में पता चला है कि मनुष्यों की आंखों की परतों में पाए जाने वाली कोशिकाओं के तंत्रिका क्षति के संकेत डॉक्टर्स को ये समझने में सहायता कर सकते हैं कि रोगी लांग टाइम से कोविड (Cornea Test And Covid) से पीड़ित है या नहीं। अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया, "कॉर्नियल कन्फोकल माइक्रोस्कोपी कॉर्नियल छोटे तंत्रिका फाइबर के नुकसान की पहचान करता है और विशेष रूप से न्यूरोलॉजिकल लक्षणों वाले लोगों में जो लंबे समय से कोवि़ड से पीड़ित रोगियों में डीसी में वृद्धि देखी गई है।"

टर्की और कतर के शोधकर्ताओं ने जो अध्ययन किया है उसमें ये पता चला है कि नर्व फाइबर(तंत्रिका फाइबर) कि हानि और कॉर्निया की परत पर जो मुख्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं में वृद्धि है ये लंबे समय से कोविड के पहचान की विशेषता कर सकती है। रिसर्च में 40 मरीज लिए गए थे, जो तकरीबन पांच से छह महीने पहले कोविड -19 से ठीक हुए थे। जिसमें से 30 व्यक्ति बिलकुल फिट हो चुके थे और उन्हें रेफरल तृतीयक विश्वविद्यालय हॉस्पिटल में क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन में रखा गया था।

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Cornea Test And Covid: रिसर्च में ये बताया गया है कि खूशबु न आना, खाने में स्वाद न आना, चक्कर आना, हाथ पैर सुन्न हो जाना आदि जो न्यूरोलॉजिकल लक्षण वाले व्यक्तियों के कॉर्निया में बदलाव अच्छे से देखे जा सकते हैं। सभी रोगियों की डेंड्राइटिक कोशिकाओं की क्षति और बढ़त को छोटी तंत्रिका फाइबर को ढूंढ़ने के लिए सीसीएम का यूज़ करके कॉर्निया स्कैन किया गया था। ।

उसके बाद 40 स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना 40 कोविड रोगों से पीड़ित व्यक्तियों कि की गई। रिसर्च में जो लोग नामांकित थे सभी 40 व्यक्तियों को उनके सांस, दिल, न्यूरोलॉजिकल, त्वचा विज्ञान, नाक, कान और गलों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी इक्कठा करने के लिए प्रश्नावली दी गई। कोरोना महामारी से संक्रमित होने के लगभग 4 हफ़्तों के बाद कम से कम 20 से 22 रोगियों ने न्यूरोलॉजिकल के लक्षणों की सूचना दी, वहीं बचे हुए 13 लोगों ने 12 हफ़्तों बाद उनको भी यही लक्षण पाए जाने की बात कही।

अध्ययन में बताया गया है कि COVID-19 के रोगियों में 4 सप्ताह में लगातार न्यूरोलॉजिकल लक्षणों वाले रोगियों में परिपक्व डीसी पाए गए, वहीं 12 सप्ताह में परिपक्व और अपरिपक्व डीसी में वृद्धि के साथ, COVID-19 में प्रतिरक्षा सक्रियण के विकास में अंतदृष्टि रखते हैं।

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Tips for Kids In Moonsoon: बच्चों को मानसून में बीमारियों से सुरक्षित रखने के उपाय

नई दिल्ली। आमतौर पर मानसून सबको पसंद होता है। इस मौसम में लोग घर की छत या बालकनी पर परिवार के साथ बैठकर गप्पे लड़ाते हैं और बारिश का मजा लेते हैं। बारिश के सुहाने मौसम में एक हाथ में चाय का प्याला और चेहरे में मुस्कान जरुर दिखती है।

मानसून (Tips for Kids In Moonsoon) अपने साथ बहुत सारी बीमारियां भी लेकर आता है। बारिश के मौसम में बीमारियां जल्दी होने का खतरा बना रहता है। ऐसा इसलिए भी होता है, क्योंकि हवा में नमी कि मात्रा ज्यादा होती है तो वातावरण में बैक्टीरिया के जल्दी पनपने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर ऐसे मौसम में बच्चों का ध्यान रखने कि बहुत जरूरत होती है। बारिश में डेंगू, मलेरिया, हैजा,टाइफाइड,सामान्य सर्दी,जुखाम जैसी बीमारी होने का खतरा अधिक होता है। इसलिए अपना तो ध्यान रखें ही साथ ही साथ बच्चों का भी ध्यान रखें।

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Tips for Kids In Moonsoon: आइए, जानते हैं कि बच्चों को बारिश के मौसम में होने वाली बीमारियों से कैसे सुरक्षित रखें-

1. फंगल इन्फेक्शन- वातावरण में अत्यधिक नमी के कारण बैक्टीरिया और संक्रमण आसानी से पनपते हैं और उनके लिए फैलना बहुत आसान हो जाता है। इसलिए बच्चों को अधिकतर इस मौसम में स्किन इन्फेक्शन या एलर्जी हो जाती है, क्योंकि वे बारिश में नहाने, खेलने-कूदने जाते हैं। ये इन्फेक्शन एक से दूसरे को भी फैल सकता है।

इनसे बचने के लिए अपने बच्चों पर ध्यान दें। ज्यादा बाहर न निकलने दें, इस मौसम में जितना हो सके बाहर के खाने से बचें, क्योंकि आपकी सुरक्षा आपके हाथों में है। घर में सफाई का ध्यान रखें, अपना तौलिया किसी के भी साथ साझा न करें। ऐसा करके आप इन्फेक्शन से बच सकते हैं।

2. डेंगू- डेंगू बारिश के मौसम में तेज़ी से फैलता है। लोग अक्सर इस मौसम में अपने बगीचे या घर में जमे हुए पानी को साफ करना भूल जाते हैं। जैसे गमलों, टायरों, फूलों आदि जगह पानी एकत्रित होने लगता है और मच्छर अपना डेरा वहीं बनाने लग जाते हैं। ऐसे में इस बात का ध्यान रखना है कि बारिश का मौसम आने से पहले ही घर की सफाई कर लें। बच्चों को जितना हो सके उतना बचाएं। पूरी आस्तीन का कपड़ा पहनाए, मोजे पहना कर रखें इसके साथ शाम को ज्यादा उन्हें बाहर न जाने दें।

3. सामान्य सर्दी- ये सर्दी आमतौर पर गंभीर नहीं है, लेकिन फिर भी इसका ध्यान देना जरूरी है। इसको रोकने के लिए आप सफाई पर ध्यान दें, अपने बच्चे को लगातार हैंड वाश कराते रहें और जितना हो सके गुनगुना पानी पीने को देते रहें। ये आपको कई बीमारियों से दूर रखेगा।

यह भी पढ़ें:मानसून में फिट रहने के लिए अपनाए ये टिप्स



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Child RSV Disease: क्या है आरएसवी और बच्चों में क्यों बढ़ रहे हैं आरएसवी के केस?

नई दिल्ली। ब्रिटेन के अस्पतालों में सांस के संक्रमण से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। इसमें दो महीने से कम उम्र के बच्चों में रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी) (Child RSV Disease)नामक संक्रमण पाया गया है। इसके परिणामस्वरूप बच्चे ब्रोंकाइटिस से पीड़ित हो गए हैं।

आरएसवी एक सामान्य सांस की बीमारी है। वास्तव में इतना सामान्य है कि हम में से लगभग सभी दो साल की उम्र तक इससे संक्रमित हो जाते हैं। अधिकांश लोगों के लिए, यह वायरस नाक बहने और खांसी और सर्दी जैसी बीमारी का कारण बनता है। आम तौर पर ये बीमारी एक या दो सप्ताह के भीतर उपचार के बिना ही ठीक हो जाती हैं।

ब्रोंकाइटिस कभी-कभी घातक हो सकता है। दुनिया भर में हर साल लगभग 3.5 करोड़ बच्चे अस्पताल में भर्ती होते हैं, इनमें से लगभग 5 प्रतिशत मामलों में दुखद रूप से मौत होती है।

हाथ धोने, मास्क पहनने और लोगों के बीच संपर्क को कम करने जैसी प्रतिक्रियाओं के कारण 2020-21 की सर्दियों में फ्लू बहुत कम हो गया। पिछले वर्षों की तुलना में देखा जाए तो उत्तरी गोलार्ध के देशों में ब्रोंकाइटिस के मामलों में 84% तक कम थे। ऑस्ट्रेलिया में भी इन केसों में कमी देखी गई, लेकिन अब इसके विपरीत हो रहा है। 2021 की गर्मियों में आऱएसवी के संक्रमण ने नवजात शिशुओं को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इसमें एक माह के शिशु की संख्या ज्यादा पाई गई।

इसे भी पढ़ेंःबदलते मौसम में मासूमों पर आरएसवी की मार

इससे बचाव के लिए न्यूट्रलाइज़िंग एंटीबॉडी (मातृ एंटीबॉडी और पैलिविज़ुमाब जैसे एंटीबॉडी उपचार) किया जाता हैं, लेकिन कई शोध समूहों के प्रयासों के बावजूद, वर्तमान में कोई टीका उपलब्ध नहीं है, लेकिन अब आरएसवी इम्युनिटी पर बेहतर शोध के कारण टीके के मामले में विकास हुआ है। कई इस उम्मीद में नैदानिक परीक्षणों में है कि सभी बच्चों को आरएसवी-प्रेरित ब्रोंकाइटिस से बचा सकते हैं।

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Oral Hygine Mouth Care: दुर्गंध वाले मुंह से चूमना पड़ सकता है भारी

नई दिल्ली। जीवन में स्वास्थ्य का महत्व हम सभी समझते हैं। साथ ही हम बाहर से दिखने वाले शरीर के अंगों जैसे कि बाल और त्वचा का ख्याल भी रखते हैं। लेकिन इन सबके बीच हम अक्सर ओरल हेल्थ (Oral Hygine Mouth Care) पर उतना ध्यान नहीं देते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि भारत में 80 प्रतिशत लोग किसी न किसी प्रकार की ओरल हेल्थ यानी मुंह की समस्या से परेशान हैं। इसके बाद भी लोग ओरल हेल्थ की तरफ ध्यान नहीं देते हैं। मुंह की सफाई ठीक से न होने पर कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।

इसे भी पढ़ेंः जब मुंह से आने लगे बदबू तो अपनाएं घरेलू उपचार

डॉ. टीना शॉ ने बताया कि दुर्गंध वाले मुंह से कोई किसी को चूमता है तो उसके मुंह के बैक्टीरिया दूसरे व्यक्ति के मुंह में जा सकते हैं।

अच्छा होगा कि मुंह से आने वाली दुर्गंध के बारे में साथी से खुलकर बात करें।

दंत चिकित्सक और ओरल जीनोम की संस्थापक डॉ. टीना शॉ के मुताबिक दुर्गंध वाले मुंह से चुंबन करने से या दुर्गंध वाली मुस्कान भी किसी को नुकसान पहुंचा सकती है।

मुंह से आने वाली दुर्गंध मुंह में प्लाक का निर्माण कर सकती है, मसूड़े की बीमारी हो सकती है और बैक्टीरिया के लिए प्रजनन स्थल बन सकता है। अगर आप अपने साथी को लार भरा चुंबन करते हैं तो ये सारी चीजें होने की संभावना होती है।

इसे भी पढ़ेंः सांसों की दुर्गंध और शरीर की बदबू से हैं परेशान तो करें ये घरेलू उपाय



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Diabetes Causes and Treatment : डायबिटीज के मरीजों के लिए खुशखबरी, यूएसएफडी ने बायोकॉन की दवाई को दी मंजूरी

नई दिल्ली। USFDA द्वारा डायबिटीज की दवा को मंजूरी मिलने का मतलब ये है कि अब आपको इंसुलिन कि जरूरत नहीं पड़ेगी। मरीज अब डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन लिए बिना भी ये दवा का उपयोग कर सकते हैं। ये हमारे लिए एक सबसे बड़ी सफलता है, क्योंकि डायबिटीज (Diabetes Causes and Treatment) न सिर्फ भारत में, बल्कि दुनिया में बढ़ती हुई बहुत बड़ी बीमारी है। जिसका इलाज अब और आसान हो गया है। अब आपको ब्लड शुगर के लेवल को घटाने के लिए सिर्फ इन्सुलिन पर ही निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। आप बायोकॉन वायट्रिस का भी उपयोग कर सकेंगे।

इसे अमेरिका की फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के तरफ से मंजूरी दे दी गई है। ये पहली ऐसी दवा है, जो इंसुलिन जैसा काम करेगी। ये ब्लड में शुगर के लेवल को घटने में मदद करेगी। यह विज्ञान के लिए सबसे अच्छी शोध साबित हुई है, क्योंकि इतनी बड़ी बीमारी का अब तक सिर्फ एक ही इलाज था- इंसुलिन। इस शोध से साबित होता है कि इस गंभीर बीमारी से निपटने के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं।


यह भी पढ़ें:कम कार्ब डाइट डायबिटीज में कारगर

Diabetes Causes and Treatment: ये बायोसिमिलर दवा को बायोकॉन बनाएगी और अमेरिका में सेमग्ली की मार्केटिंग बायोकॉन की पार्टनर कंपनी वाइट्रिस करेगी। जेनेट वुडकॉक जो कि USFDA कार्यकारी आयुक्त हैं, उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि ये खासतौर पर उन लोगों के लिए कारगर है, जो रोज इंसुलिन पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने बताया कि अब आप इसका उपयोग कर सकते हैं। ये इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर प्रोडक्ट है जो वाकई में बहुत किफायती है।

बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स को बाजार में लॉन्च किया जा रहे है। ये कम दामों में बनी हुई दवाई है जो सेफ,सुरक्षित,अच्छी क्वालिटी की और प्रभावशाली है। जो डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद साबित होगी।

आज देश और दुनिया में बहुत सारे डायबिटीज के मरीज हैं जिनके लिए ये दवाई फायदेमंद साबित होगी। इस नई दवा के बाजार में आने से सबको बहुत खुशी हुई है, क्योंकि बहुत दिन बाद डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों के लिए कुछ नया देखने को मिला है। जो हमारे लिए एक खुशखबरी है।

यह भी पढ़ें: शुगर को कैसे करें कंट्रोल

यूएसएफडी ने बताया है कि इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर दवा सेफ यानी सुरक्षित है। डायबिटीज के मरीजों के लिएर लाभदायक साबित होगी। जो मरीज इसका उपयोग करना शुरू करेगा, उसे कोई ज्यादा फर्क महसूस नहीं होगा।

यह भी पढ़ें: डायबिटीज ठीक करने के कुछ घरेलू उपाय



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Acne marks : कील मुंहासे के निशानों को दूर करना है तो अपनाएं यह घरेलू टिप्स

युवा अवस्था में चेहरे पर कील मुंहासे होना आम बात है। इसे ठीक करने के लिए कई उपाय भी किए जाते हैं और यह दूर भी हो जाते हैं। लेकिन अधिकतर लोगों के चेहरे पर इस के निशान रह जाते हैं। अगर आप मुहांसों के निशानों को ठीक करना चाहते हैं। तो इन घरेलू उपाय का सहारा ले सकते हैं। इससे आपकी त्वचा में ग्लो भी आएगा।

यह भी पढ़ें - खूबसूरती बढ़ाने के लिए डेली रूटीन में शामिल करें स्ट्रॉबेरी।

दाल और दूध का मास्क लगाएं -

एक्ने के निशान को दूर करने के लिए आप दाल और दूध का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप रात को मसूर की दाल एक कटोरी दूध में भिगोकर रख दें। अगले दिन सुबह इसे पीस लें और इस मिश्रण को मुंहासे के निशानों पर लगाएं। जब यह पेस्ट अच्छे से सूख जाए, तो चेहरे को धो लें। इसका नियमित उपयोग करने से चेहरे पर नजर आ रहे निशान साफ हो जाएंगे।

यह भी पढ़ें - प्राकृतिक रूप से बालों को काला करने के लिए चाय पत्ती का करें इस तरह उपयोग।

नींबू का रस लगाएं-

मुंहासे के निशानों को दूर करने के लिए नींबू का रस भी बहुत फायदेमंद होता है। इसे लेकर आप चेहरे के दाग धब्बों पर लगाकर 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धोएं। इससे काफी अंतर नजर आएगा। क्योंकि नींबू में साइट्रिक एसिड होता है। जो त्वचा को लाइट और ग्लोइंग बनाने में भी काफी मददगार होता है।

यह भी पढ़ें - बारिश में वाटर प्रूफ मेकअप कराना है तो इन बातों का रखें ध्यान।

कच्चे आलू का रस लगाएं-

कील मुंहासे के निशान को दूर करने के लिए आप कच्चे आलू का उपयोग भी कर सकते हैं। आप इसके रस को लगा कर 15 से 20 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद चेहरे को धो सकते हैं। कच्चा आलू निशानों को दूर कर त्वचा में ग्लो लाने के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें केटेकोलेज नामक एंजाइम होता है। जो त्वचा की रंगत बदलने में मददगार होता है।

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टमाटर का गूदा लगाएं-

टमाटर विटामिन से भरपूर होता है। इसलिए मुंहासे के निशानों को दूर करने में बहुत मददगार रहता है। आप टमाटर का गूदा रगड़ते हुए चेहरे पर लगाएं और करीब 20-25 मिनट तक के लिए छोड़ दें। इससे बहुत जल्दी अंतर नजर आएगा।



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Corona affects Spermatogenesis: फेफड़ों के साथ-साथ शुक्राणुओं की संख्या को भी प्रभावित करता है कोरोना

नई दिल्ली। कोरोना आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है लेकिन हाल ही में विशेषज्ञों ने कहा है कि यह महामारी अस्थायी रूप से शुक्राणुजनन (spermatogenesis) की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।
डॉक्टरों ने कहा, 'कोरोना के ठीक होने के बाद शुक्राणुओं की सामान्य संख्या को लौटने में दो-तीन महीने लगते हैं।'

पहले के अध्ययनों से पता चला है कि वायरल रोग जैसे हेपेटाइटिस सी, ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी), हर्पीज और इबोला जैसी बीमारियां शुक्राणुजनन, शुक्राणुओं की संख्या, हार्मोन का स्तर और शुक्राणु (Sperm) की गतिशीलता को प्रभावित करती हैं। डॉक्टरों ने कहा कि यही पैटर्न Sars-Cov-2 से संक्रमित पुरुष रोगियों में भी देखा जा रहा है, जो कोरोना वायरस के कारण बनता है।

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डॉ ऋचा जगताप (नैदानिक निदेशक, सलाहकार प्रजनन चिकित्सा एवं नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी) ने कहा, 'कोरोना के कारण बुखार होती है, जो एक रोगी में शुक्राणुजनन को प्रभावित करती है। हमने देखा है कि संक्रमण के बाद ठीक हुए मरीजों में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है, लेकिन यह अस्थायी है।'

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डॉक्टर ने दोहराया कि यह कहा जा सकता है कि कोविड -19 प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है, लेकिन यह सिर्फ अस्थायी है।

Corona Affects Spermatogenesis: Corona Affects Sperm Count Along With Lungs

इंदिरा आईवीएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सह-संस्थापक डॉ क्षितिज मर्डिया ने भी इसी तरह का विचार रखा है। उन्होंने कहा, “हमने देखा है कि पुरुष कोरोना संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जो अल्पकालिक शुक्राणु की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। लेकिन दो-तीन महीने में वे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। मैंने किसी भी मरीज में कोई स्थायी क्षति नहीं देखी है।"

नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन रिप्रोडक्टिव हेल्थ (NIRRH) के एक शोधकर्ता ने कहा, 'कुछ शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि प्रजनन अंगों में ACE2 (एंजियोटेंसिन-परिवर्तित एंजाइम 2) रिसेप्टर्स होते हैं जो Sars-Cov-2 के लिए एक प्रवेश बिंदु प्रदान करते हैं। दुनिया भर के शोधकर्ताओं ने संक्रमित पुरुषों में प्रजनन अंगों में वायरस पाया है। इसलिए, इस बात की संभावना है कि वायरस शुक्राणुओं की संख्या कम कर सकता है, लेकिन इस पर और रिसर्च की आवश्यकता है।'

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डॉक्टरों ने सुझाव दिया है कि कोरोना से ठीक हुए मरीज अगर संक्रमण से उबरने के बाद अपने यौन व्यवहार में या गर्भावस्था की योजना बनाते समय किसी भी तरह के बदलाव का सामना करते हैं तो डॉक्टर से अवश्य सलाह लें।



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Mosquitoes problem : मच्छरों से हो गए हैं परेशान, तो इस तरह पाएं निजात

मच्छरों पर नियंत्रण पाने के लिए यूं तो बाजार में कई प्रकार के प्रोडक्ट मिलते हैं। लेकिन उससे स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। ऐसे में आप कुछ घरेलू उपाय के माध्यम से मच्छरों की समस्या से निजात पा सकते हैं।

मच्छरों से निजात पाने के लिए आप घर में उपयोग आने वाली वस्तु का उपयोग कर सकते हैं। इनसे मच्छर भी दूर हो जाएंगे और सेहत पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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-जहां मच्छर काफी अधिक है। वहां पर खिड़की दरवाजे बंद कर दें और कपूर जलाएं। इससे मच्छर तुरंत भाग जाएंगे।

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जिस कमरे में मच्छर काफी अधिक है। उसमें लेवेंडर के तेल का स्प्रे करें। क्योंकि इसकी खुशबू से मच्छर तुरंत भाग जाते हैं।

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लहसुन की गंध से भी मच्छर भागते हैं। इसलिए आप लहसुन का रस शरीर पर लगाएं। तो मच्छर आपको नहीं काटेंगे।

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-अजवाइन को बारीक पीस लें और इस पाउडर को आप सरसों के तेल में डालें। फिर इसमें गत्ते का टुकड़ा भिगोए और कमरे में कहीं भी ऊंचाई पर रख दें। इसकी गंध से मच्छर दूर भाग जाएंगे।

-नीलगिरी का तेल भी मच्छरों को भगाने में मददगार होता है। आप नींबू के रस में नीलगिरी का तेल मिलाकर हाथ, पैर और शरीर पर लगाएं, तो मच्छर नहीं काटेंगे।

-पुदीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसका उपाय आप मच्छरों से बचने के लिए भी कर सकते हैं। पुदीने के पत्तों का रस शरीर पर लगाने से मच्छर नहीं काटते हैं।

-नीम का तेल शरीर पर लगाने से भी मच्छर नहीं काटते हैं। आप चाहे तो नारियल का तेल और नीम का तेल मिलाकर दीया लगा सकते हैं। उससे भी मच्छर दूर भागते हैं।

-तुलसी का रस शरीर पर लगाने से भी मच्छर नहीं काटते हैं। इसी के साथ घर में तुलसी का पौधा होने से भी मच्छर काफी दूर रहते हैं।

-नारियल के तेल में लौंग का तेल मिलाएं और इसे शरीर पर लगाएं। इससे मच्छर आपसे दूर रहेंगे।



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Friday, 30 July 2021

Running benefits : दौड़ने से मजबूत होती है मांसपेशियां और हड्डियां, लेकिन स्पॉट रनिंग नुकसानदायक

सुबह-सुबह की दौड़ शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होती है। अगर आप रोज सुबह दौड़ने जाते हैं। तो इससे बढ़िया एक्सरसाइज कोई हो ही नहीं सकती है। क्योंकि इससे पूरे शरीर की एक्सरसाइज हो जाती है और हमारा शरीर मजबूत और सेहतमंद रहता है।

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दरअसल, दौड़ना एक बहुत ही आसान प्रक्रिया है। लेकिन इसके कई सारे फायदे होते हैं। इससे हमारी मांसपेशियां और हड्डियां बहुत मजबूत होती है और यह वजन कंट्रोल करने के साथ ही हार्ट, ब्लड प्रेशर, शुगर आदि को भी कंट्रोल में रखता है। इसलिए आप रोजाना सुबह दौड़ने जरूर जाएं।

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स्पॉट रनिंग नहीं फायदेमंद-

वैसे तो दौड़ने के कई फायदे हैं। लेकिन स्पॉट रनिंग यानी कि घर में ही ग्रेनाइट, मार्बल या अन्य पत्थर की कठोर सतह पर लगाई जाने वाली दौड़ शरीर के लिए फायदेमंद नहीं होती है। क्योंकि इसमें ग्राउंड रिएक्शन फोर्स की कमी होती है।जिससे पैरों के जोड़ों पर इसका असर पड़ता है।जिससे जोड़ों के दर्द या घुटने के दर्द की समस्या भी हो सकती है। इसलिए आप दौड़ने जाएं तो खुले मैदान में दौड़े।

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ठोस जगह पर दौड़ने से नुकसान-

जब आप दौड़ने जा रहे हैं। तो ठोस जगह पर दौड़ने से बचें। क्योंकि इससे पैरों की मांसपेशियों पर स्ट्रेस बढ़ता है। इससे सिर्फ जोड़ों को भी नुकसान नहीं होगा, बल्कि कूल्हे, जांघ, पिंडली और मांसपेशियां भी दुखने लगती है। इससे एड़ियों में भी दर्द हो सकता है।

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खुली हवा में दौड़े -

खुली हवा में दौड़ने से शरीर की कैलोरी अधिक बर्न होती है। इससे वजन भी घटता है और सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। यदि आप बंद कमरे में स्पॉट रनिंग करते हैं। तो इससे आपके शरीर को अधिक फायदा नहीं होता है।

वार्मअप करें -

दौड़ने से पहले वार्मअप करने से मांसपेशियों में रक्त प्रवाह अच्छा होता है। शरीर में लचीलापन आने से इंजरी या चोट लगने की संभावना बहुत कम हो जाती है। इसलिए कम से कम 10 से 15 मिनट तक वार्मअप करना चाहिए। आप जब दौड़ने जाएं तो जूते भी कंफर्टेबल होने चाहिए। ताकि दौड़ते वक्त हमारी एड़ियों को अच्छा सपोर्ट मिल सके।

ऐसे पीएं पानी-

रनिंग के दौरान आपका जितना भी वजन कम होता है। रनिंग के बाद 2 गुना पानी आपको पीना चाहिए। खासतौर पर 1 घंटे या इससे अधिक रनिंग करने वाले व्यक्ति को अपने साथ पानी की छोटी बाटल रखना चाहिए और प्यास लगने पर सिप लेेते रहना चाहिए।

इस प्रकार जहां तक हो सके, ठोस जगह पर रनिंग नहीं करें। घास वाली या कच्ची जगह पर रनिंग करने से आपके शरीर को बहुत फायदे होते हैं। इसलिए कोशिश करें कि मैदान में या घास वाली जगह पर दौड़ लगाएं।



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Beauty Tips: अदरक और नींबू का रस झड़़ते बालों के लिए है औषधि, ऐसे करें इस्तेमाल

Beauty Tips: औरतों के बाल झडऩा सामान्य सी बात है, कंघी करते वक्त बाल अक्सर गिरते हैं। लेकिन यदि ज्यादा गिरने की समस्या है तो आपको कुछ घरेलू उपाय करने की जरूरत है। इन उपायों में सबसे असरदायक है नींबू और अदरक का रस।

सोते समय रात को अदरक और नींबू के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर सिर पर लगाएं। सुबह उठकर धोलें। ऐसा सप्ताह में दो बार करें, असर जल्द होगा। इसके अलावा नींबू के रस के अन्य नुस्खे भी कारगर साबित होते हैं, जिन्हें यहां बताया जाएगा।

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- बरगद (बड़) के दूध में नींबू का रस मिलाकर निरंतर बालों में लगाने से उनका झडऩा बंद हो जाता है।

- नारियल के तेल में थोड़ा सा नींबू का रस और कपूर मिलाएं। इसे दिन में दो बार सिर पर लगाने से बालों का गिरना रुक जाएगा।

- आंवले और नारियल के तेल का मिश्रण भी बालों के लिए बढिय़ा उपाय है। इसके लिए दो चम्मच सूखे आंवले को एक कटोरी नारियल तेल के साथ मिलाकर कुछ देर गर्म करें। ठंडा करके इसे प्रतिदिन लगाएं। बाल गिरना कम हो जाएंगे।

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- नारियल तेल या बादाम के तेल से सिर की अच्छी तरह से मालिश करनी चाहिए। बालों पर धीरे-धीरे मलें।

- सरसों के तेल में मेंहदी के पत्ते डालकर उबाल लें। इसे रात को सोते समय सिर पर लगाएं। सुबह पानी से धीरे-धीरे बालों को साफ कर लें।- प्याज में जरा सा पानी डालकर पीस लें। इसका रस छानकर बालों की जड़ों में लगाएं। आधे घंटे बाद शैम्पू कर लें। हफ्ते में तीन बार ऐसा करें।

- जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर उनका पेस्ट बनाएं। नहाने से पहले इस पेस्ट को सिर पर लगाएं। कुछ समय बाद सिर धो लें।

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- ज्यादा बाल गिर रहे हों तो ग्रीन टी को पीसकर बालों में लगाएं। इसके लिए चाय को उबालकर छान लें और पानी से हेयर वाश करते समय बालों में डालें। ये बहुत अच्छे कंडीशनरका काम करता है।

- नीम की पत्तियों को पीसकर नींबू का रस डालें। फिर सिर पर लगाएं, इसके नियमित प्रयोग से बालों का झडऩा बंद हो जाता है।



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Health Tips: मच्छर, मकड़ी या खटमल के काटने पर तुरंत करें ये घरेलू उपचार

Health Tips: मच्छर, मकड़ी या खटमल के काटने से जलन, चकते या सूजन होना आम बात है। इनके लिए घरेलू उपचार भी किए जा सकते हैं-

मच्छर
मानसून या सूर्यास्त के बाद अक्सर मच्छर काट लेते हैं। ऎसा होने पर उस भाग को पानी से धोने के बाद उस पर शहद लगाएं। शहद में एंटीमाइक्रोबाइल और हीलिंग क्षमता होती है जिससे खुजली और सूजन से राहत मिलती है। इसके अलावा उस हिस्से पर एलोवेरा जैल भी लगाया जा सकता है।

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मकड़ी
इसका काटा खतरनाक होता है। घरेलू उपचार के लिए नमक लगाकर गीली बैंडेज बांध लें। इससे त्वचा लाल नहीं होगी। जैतून का तेल और हल्दी का लेप भी कारगर उपचार है।

खटमल
इसके काटने पर सबसे पहले साबुन व गर्म पानी से उस हिस्से को धोएं। फिर प्याज का टुकड़ा रगड़ें या डॉक्टरी सलाह से लोशन लगाएं। प्याज में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो फौरन राहत प्रदान करते हैं।

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ध्यान रहे
दर्द बढ़कर यदि सूजन आने लगे तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करना ही उचित होगा।



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Weight Loss Tips: जल्दी से वजन कम करने की सोच रहे हैं तो जरूर पढ़ें ये जानकारी, नहीं तो उठानी पड़ सकती है परेशानी

Weight Loss Tips: शरीर के बढ़े हुए वजन से तमाम बीमारियां को बढ़ावा मिलता है। जो लोग बढ़े हुए वजन से परेशान होते हैं वो चाहते हैं कि इस समस्या से जल्द से जल्द छुटकारा पा लिया जाए। बढ़े वजन को जल्दबाजी में घटाने के लिए लोग कई बातों को दरकिनार कर देते हैं। जिससे स्वास्थ्य को फायदा होने की जगह नुकसान होने लगते हैं। जब तक किसी काम को एक योजना बनाकर न किया जाए। तब सही तरह से सफलता नहीं मिलती। तो अगर आप अपना वजन घटाना चाहते हैं तो एक सही योजना बनाए और हो सके तो किसी विशेषज्ञ की देखरेख में डाइट और वर्क आउट करें तो आप खुद को बिना हानि पहुंचाए आसानी से वजन कम कर सकते हैं। इसके लिए हम आप को दे रहे हैं कुछ खास टिप्स...

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1- वजन कम करने के लिए लाइफस्‍टाइल और खान-पान पर ध्‍यान देने की जरूरत है। आप अकसर वजन घटाने की योजानाएं तो बनाते हैं, लेकिन कई बार आपकी योजनाएं आधी-अधूरी रह जाती हैं। दरअसल, लोग अकसर अपने मोटापे को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन चिंता करने की जगह इसके लिए कुछ ठोस कदम उठाने जरूरी हैं। वजन घटाते समय आप बहुत सी बातें सोचते हैं कि ऐसा करेंगे, वैसा करेंगे लेकिन कुछ नहीं कर पाते। इस लिए आप ने प्लान बनाया है उसको सही तरह से फॉलो करें।

2- बहुत से लोग वजन घटाते समय कई गलतियां कर जाते है, जिससे उनका स्‍वास्‍थ्‍य जरूर प्रभावित होता है। ऐसे में जरूरी है कि आपको वजन घटाते समय ऐसी गलतियां नहीं करनी चाहिए जो आपके स्‍वास्‍थ्‍य को नुकसान पहुंचा सकती हैं। आइए जानें वे कौन सी गलतियां है जिनसे आपको बचना चाहिए। 3- अगर आप सोचते हैं कि वजन घटाने के लिए अचानक से सब कुछ खाना-पीना छोड़ दें। तो आप गलत हैं, क्या आप जानते हैं कि डायटिंग बहुत ही नुकसानदायक होती है। इस उपाय से आपका वजन घटने के बजाय बढऩे लगता है। दरअसल कोई भी प्रतिदिन बहुत लंबे समय तक भूखा नहीं रह सकता। ऐसे में लंबे अंतराल के बाद व्यक्ति बहुत खा लेता है जो कि स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्टि से नुकसानदायक है।

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3. कोई भी काम इतनी जल्दी से भी पूरा नहीं होता, जितना हम चाहते हैं। प्रत्येक कार्य को पूरा होने की एक निश्चित प्रक्रिया होती है। जल्दी से वजन घटाने के चक्कर में अधिक मात्रा में निम्बू पानी का सेवन और भोजन में कमी करना भी सेहत को प्रभावित करता है।

4- कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जल्दी वजन घटाने के लिए सप्लीनमेंट्स लेने लगते हैं, जो कि स्‍वास्‍थ्‍य के लिए नुकसानदायक होते हैं और आपकी भूख को भी खत्म कर देते हैं। आज के समय में बहुत से ऐसे सप्लीनमेंट्स मौजूद हैं जिनसे वजन आसानी से कम किया जा सकता है लेकिन इनके शरीर पर साइड इफेक्ट्स भी बहुत जल्दी दिखाई देने लगते हैं।

5- अक्सर लोग वजन घटाने के लिए सुबह का नाश्ता या फिर रात का डिनर छोड़ देते हैं लेकिन सुबह का नाश्ता दिनभर के लिए बहुत जरूरी होता है, इसीलिए आपको एक बार भी खाना नहीं छोडऩा चाहिए बल्कि इसके बजाय आप अपने हेल्दी डायट ले सकते है या फिर आहार में कैलोरी की मात्रा कम कर सकते हैं।

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6- कई बार आप वजन कम करने के लिए अपने शरीर के अधिक चर्बी वाले हिस्से पर ज्यादा जोर देने लगते हैं, और इसके लिए शरीर के उसी हिस्से की अधिक से अधिक एक्सरसाइज करते हैं जबकि ऐसा करना आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए ठीक नहीं हैं।

7- वजन घटाने के लिए लोग खाद्य पदार्थ छोड़कर तरल पदार्थ खासकर नींबू पानी, शहद नींबू पानी या इसी तरह के अन्य डिटॉक्स पीने लगते हैं। ऐसा करने से कुछ समय के लिए आप अपना वजन कम होता देखेंगे लेकिन जब आप ऐसा करना छोड़ देंगे और ठोस पदार्थों को खाएंगे तो ऐसे में आपका वजन पहले से कहीं ज्यादा बढऩे की आशंका बढ़ जाती है।

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8- आजकल वजन कम करने के लिए सर्जरी एक अच्छा उपाय है लेकिन क्या आप जानते हैं लिपोसक्शन या सर्जरी के साइड इफेक्ट्स भी बहुत होते हैं। लिहाजा, आपको वजन कम करने के लिए ऐसा कोई भी उपाय नहीं अपनाना चाहिए जिससे आपको नुकसान हो सकता है या फिर उसके साइड इफेक्ट्स बाद में उभर कर आएं और आपको अपनी गलती पर पछताना पड़े। इसके बजाय आपको संतुलित खानपान और तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।



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Health Tips: गर्म दूध के साथ शहद का सेवन सेहत लिए बेहद लाभकारी, जानें इसके फायदे

Health Tips: वैसे तो गर्म दूध पीना स्वास्थ्य की काफी लाभदायक है, लेकिन यदि उसमें शहद मिलाकर पीना स्वास्थ्य के लिए और अधिक फायदेमंद होता है। क्योंकि गर्म दूध में शहद मिलाने से हीलिंग का गुण पैदा हो जाता है। वैसे तो दूध और शहद दोनों ही स्वास्थ्य के लिए किसी काफी लाभदायक है लेकिन इनका एकसाथ सेवन करें तो वो औषधि की तरह काम करते हैं।

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ये होते हैं गुण
एक ओर जहां दूध एक संपूर्ण आहार है जिसमें विटामिन ए, बी और डी पर्याप्त मात्रा में होने के साथ ही कैल्शियम, प्रोटीन और लैक्ट‍िक एसिड भी होते हैं। वहीं, दूसरी ओर शहद में एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल आदि गुण होते हैं।

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गर्म दूध में शहद मिलाकर पीने से ये होंगे फायदे
—तनाव दूर होगा तथा तंत्रिका कोशिकाओं और तंत्रिका तंत्र को आराम मिलेगा।

— बेहतर नींद आएगी

— पाचन क्रिया को बेहतर बनेगी और कब्ज नहीं होगी।

— हड्ड‍ियां मजबूत होगी तथा कोई नुकसान है तो उसकी भी भरपाई होगी।

— शारीरिक आैर मानसिक क्षमता में वृद्धि होगी जिससे कार्य करने की क्षमता बढ़ेगी।

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Health Tips: लोहे के बर्तन में पका हुआ खाना खाने से शरीर में नहीं होगी आयरन की कमी

Health Tips: गलत खानपान व खराब जीवनशैली से शरीर में पोषक तत्त्वों व आयरन की कमी आम बात है। कंबोडिया में आयरन फिश की तरकीब से बड़ी संख्या में लोगों को फायदा हुआ है। वहां लोग खाना बनाते समय मछली के आकार के लोहे के टुकड़े को भोजन में डाल देते हैं। नौ माह तक रोजाना इस तरह से तैयार भोजन से वहां के लोगों में 50 फीसदी आयरन की कमी दूर होने के परिणाम सामने आए हैं। हमारे यहां पुराने समय से लोहे की कढ़ाई आदि बर्तनों में खाना बनाने की परंपरा रही है। हम बता रहे हैं लोहे के बर्तन के फायदों के बारे में-

इसलिए बेहतर : लोहे की कढ़ाई में खाना बनाने से उसमें मौजूद लौह अंश भोजन में मिल जाते हैं। यदि कढ़ाई में सब्जी को थोड़ी देर पड़ा रहने दिया जाए तो उसका रंग हल्का काला हो जाता है जो शरीर के लिए फायदेमंद होता है। लगभग सभी हरी सब्जियां आयरन युक्त होती हैं। लोहे की कढ़ाई में बनाने पर लौह तत्व में वृद्धि होकर अधिक फायदेमंद हो जाती हैं।

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बर्तन में जंग लगने पर :
जंग की हल्की परत आने पर बर्तन को हल्का सा पोंछकर प्रयोग करना चाहिए। इससे जंग के हल्के अंश भोजन के साथ मिलकर शरीर में पहुंचते हैं जो रक्तवृद्धि करने में मददगार होते हैं। लेकिन मोटी परत होने पर बर्तन को अच्छे से धोकर ही प्रयोग करें।

दूध ज्यादा देर न रखें :
लोहे के बर्तन में दूध उबाला जा सकता है लेकिन अधिक देर बर्तन में नहीं छोडऩा चाहिए। दूध प्रोटीनयुक्त होता है। उसमें आयरन नहीं होता इसलिए ये बर्तन से मिलने वाले आयरन को अवशोषित नहीं कर पाता। इससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है।

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सामान्य स्थिति :
शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा उम्र के हिसाब से अलग-अलग होती है। सामान्यत: इसकी मात्रा पुरुषों में 14-17 ग्राम प्रति डेसीलीटर व महिलाओं में 12-16 ग्राम प्रति डेसीलीटर के बीच होनी चाहिए। इससे ऊपर के स्तर पर ज्यादा आयरन न लें वर्ना ब्लड कैंसर का खतरा हो सकता है।



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डायाबिटीज और हाई बीपी ने बढ़ाया कोरोना मरीजों में ब्रेन स्ट्रॉक का खतरा

नई दिल्ली। एक ताजा रिसर्च से खुलासा हुआ है कि हाइ ब्लड प्रेशर और डायाबिटीज से पीड़ित कोविड-19 के मरीजों को स्ट्रोक (Brain Stroke and Covid-19) का ज्यादा खतरा होता है। ब्रेन कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक यूके में कोविड-19 से संबंधित न्यूरोलॉजिकल और मनोरोग संबंधी समस्याओं के 267 मामलों की जांच की गई। रिसर्च को साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय में किया गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि 267 मामलों में से, स्ट्रोक सबसे अधिक बार दर्ज की गई स्थिति थी, जिसने लगभग आधे रोगियों को प्रभावित किया।

60 वर्ष से कम उम्र के रोगियों में एक चौथाई से अधिक स्ट्रोक हुए, जिनमें से कई मरीजों में परिवर्तनीय जोखिम कारक का पता चला, जिसका मतलब हुआ कि मरीज पहले से ही स्ट्रोक के जोखिम में थे।

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डिलीरियम, मनोरोग संबंधी घटनाएं और दिमाग को नुकसान के दूसरे सबूत अन्य सामान्य स्थितियों में पाए गए. 10 प्रतिशत से अधिक रोगियों ने एक से अधिक न्यूरोलॉजिकल स्थिति का अनुभव किया और इन रोगियों को गहन देखभाल और वेंटिलेशन की आवश्यकता होने की अधिक संभावना थी।

Brain Stroke by High BP and Diabetes in Corona patients
IMAGE CREDIT: patrika

शोधकर्ता एमी रॉस-रसेल ने बताया, "हमने कितनी अलग-अलग न्यूरोलॉजिकल और मनोरोग संबंधी घटनाओं को देखा, बल्कि ये भी देखा कि उसमें से कुछ स्थितियां एक ही रोगियों के भीतर एक साथ हुईं। इससे पता चलता है कि कोविड की बीमारी एक ही रोगी में तंत्रिका तंत्र (Brain Stroke and Covid-19) के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है।

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इसलिए ये समझना महत्वपूर्ण है कि कोविड के दौरान कुछ स्ट्रोक क्यों होते हैं?" नतीजे से पता चलता है कि कोविड स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय कम कर सकते हैं, जिसमें डायाबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से बचने के लिए जीवनशैली में सुधार, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण, टीकाकरण और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के जरिए गंभीर कोविड के जोखिम से बचना शामिल है।

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Health tips : शरीर में ब्लड का लेवल बढ़ाते हैं यह फूड्स, रोजाना करें सेवन

शरीर में खून की कमी हो जाने से व्यक्ति काफी कमजोर हो जाता है और कई बीमारियां व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेती है। इसलिए हमेशा स्वस्थ और तंदुरुस्त रहने के लिए ब्लड का लेवल बराबर रहना चाहिए। इसलिए आप कुछ फूड्स का सेवन रोजाना करें। जिससे आप स्वस्थ और तंदुरुस्त रहें।

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रोजाना खाएं सेब -

सेब ऐसा फल है। जिसे खाने की सलाह स्वयं डॉक्टर भी देते हैं। अगर आप रोजाना एक सेब खाएंगे। तो यह आपको बीमारियों से भी दूर रखेगा और शरीर में होने वाली खून की कमी को भी पूरी करेगा। यह आपका हीमोग्लोबिन लेवल भी बढ़ाता है।

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चुकंदर का सेवन करें -

चुकंदर शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। आप सलाद के रूप में भी इसका सेवन कर सकते हैं और इसका जूस भी बनाकर पी सकते हैं। जो बहुत आसान तरीके से बन जाता है। केवल चुकंदर को साफ करके काट के मिक्सर में डालें। इसमें पर्याप्त मात्रा में पानी डालकर पीस लें। अब चुकंदर का जूस तैयार हो गया। इसे आप पी सकते है।

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पालक का सेवन करें -

शरीर में खून की कमी हो तो पालक का सेवन जरूर करना चाहिए। पालक में पर्याप्त मात्रा में आयरन होता है। जो शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करता है। पालक की सब्जी आप विभिन्न प्रकार से बना कर खा सकते हैं।

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अनार का सेवन करें -

अनार का सेवन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में सोडियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, लोहा, विटामिन आदि पोषक तत्व होते हैं



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Benefits of green chilly: जानिए हरी मिर्च के बेहतरीन फायदे

नई दिल्ली। हरी मिर्ची (Green Chilly) भारत के हर एक घर में इस्तेमाल होती है। यह खाने के टेस्ट को चटपटा और स्वादिष्ट बनाती है। हरी मिर्ची के बिना खाना फीका और बेस्वाद लगता है। यदि आप भारत के किसी भी कोने में जाएंगे तो यह मिर्ची मिल ही जाएगी, जितने प्रकार के भी व्यंजन हो बिना इसके बेकार से लगते हैं। आप कम तीखा खाते हो या ज्यादा, एक या दो मिर्ची का उपयोग तो प्रतिदिन सभी करते ही हैं। खाने में तीखापन लाने के लिए इसका अधिकतर इस्तेमाल करा जाता है। भारत के खाने में हरी मिर्ची का प्रयोग देख-देख कर अब दूसरे देशों ने भी इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया है। पर क्या आपको ये पता है, यह खाने में स्वाद तो बढ़ाती ही है पर साथ में सेहत के लिए भी बहुत पौष्टिक होती है। आपको तो बस यही पता होगा कि मिर्ची का इस्तेमाल खाने को तीखा बनाने के लिए करा जाता है पर ये नहीं पता होगा कि इसके अनगिनत फायदे भी हैं। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन- सी पाया जाता है। यह आपके इम्युनिटी को मजबूत करता है। इसके अलावा दिल से जुड़ी बीमारियों से भी हमारी रक्षा करता है। और भी बहुत सारे फायदे हैं जो कि हम आपको बताते हैं।

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Benefits of green chilly: सबसे पहले तो यदि हरी मिर्ची का उपयोग करते हैं तो आपका मेटाबॉलिज्म अच्छा हो जाता है।
-हरी मिर्च शरीर में मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के साथ-साथ आयरन को भी बढ़ा देती है।
- हरी मिर्च विटामिन सी से भरपूर होता है, जो स्किन और आंखों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
- हरी मिर्च में बीटा कैरोटीन भी पाया जाता है, जो कि हेयर ग्रोथ में सहायता करता है।
- हरी मिर्च में एंटीऑक्सीडेंट्स पर्याप्त मात्रा में होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।
- हरी मिर्च में एक तत्त्व पाया जाता है, जो कि कैप्सीसिन रक्त संचार को संतुलित बनाकर रखने में फायदेमंद होता है।
-हरी मिर्च को रोज खाने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है, काबू में रहता है।
- हरी मिर्च हार्ट के रोगों से बचाता है, इसकी वजह से दिल से संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
-हरी मिर्च हमारी इम्युनिटी बूस्ट कर देता है।

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Karela benefits : त्वचा और तंदुरुस्ती दोनों के लिए फायदेमंद है करेला, इस तरह करें उपयोग

करेला हमारी त्वचा और सेहत दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। आप इसे सब्जी के रूप में भी खा सकते हैं, और आप इसका जूस बनाकर भी पी सकते हैं। इसी के साथ त्वचा के लिए भी आप इसका उपयोग विभिन्न प्रकार से कर सकते हैं।

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त्वचा के लिए फायदेमंद-

करेला का उपयोग करने से हमारी त्वचा पर नजर आने वाले कील मुंहासे और दाग धब्बे भी दूर हो जाते हैं। इसके लिए आप करेला और कुछ नीम की पत्तियों को लेकर बारीक पीस लें। इस पेस्ट में आप आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर चेहरे और गर्दन पर लगाएं। इसे करीब आधे घंटे के लिए छोड़ दें। जब यह सूखने लगे तब चेहरा और गर्दन धो लें। इससे आपको तुरंत फर्क नजर आएगा।

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झुर्रियां करेगा दूर-

आपकी त्वचा रूखी और बेजान है। आपके चेहरे पर झुर्रियां हो रही है। तो आप एक चम्मच करेले के रस में 2 बड़े चम्मच दही को मिक्स करें और इसमें एक अंडे का सफेद भाग निकाल कर डाल लें। इसे अच्छी तरह पेस्ट बनाकर चेहरे और गर्दन पर लगाएं। इससे आपके चेहरे पर नजर आने वाली झुर्रियां भी दूर हो जाएगी।

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त्वचा में आएगा गजब का निखार-

आपको अपनी त्वचा में निखार लाना है। तो इसके लिए आप करेले का उपयोग करें। इसके लिए करेले और संतरे के सूखे छिलके को दरदरा पीस लें। इसमें एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी पाउडर डालें और आधा चम्मच बेसन भी मिला लें। इस पेस्ट को अब चेहरे पर लगाकर करीब 20 मिनट के लिए छोड़ दे। इसे स्क्रब करते हुए लगाएं और फिर जब यह सूखने लगे तो इसे सादे पानी से धो लें। इससे आपकी त्वचा में निखार आएगा।

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सेहत के लिए फायदेमंद-

करेले का सेवन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि यह कड़वा होता है। इसलिए आप इसकी सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं। इसका सेवन करने से हमारा इम्यूनिटी सिस्टम भी स्ट्रांग रहता है। यह हमें कई बीमारियों से दूर रखता है।



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Lifestyle and Diabetes Type 2: कम कार्ब वाले आहार टाइप 2 मधुमेह को कम करते हैं, ब्रिटेन के डॉक्टर का सुझाव

नई दिल्ली। जिस तरह यह बीमारी तेजी से फैल रही है उसे देखते हुए यह लगता है कि आने वाले समय में ऐसा कोई नहीं होगा जिसे यह बीमारी न हो। मधुमेह दो टाइप के होते हैं - टाइप 1 और टाइप 2। टाइप 2 में अधिकतर लोगों को अपने शरीर में ब्लड के प्रोसेस से परेशानी होती है, लेकिन इन्हें टाइप 1 कि तरह इंसुलिन की जरुरत नहीं होती है।

टाइप 2 अधिकतर आपकी जीवनशैली (Lifestyle and Diabetes Type 2) से जुड़ी हुई बीमारी होती है। जरुरत से ज्यादा बढ़ना भी इस बीमारी को प्रभावित करता है। जो आजकल हमारा रूटीन हो गया है सुबह उठना, तैयार होना ऑफिस जाना। न हमें टहलने का टाइम रहता है, न सही से खाने का, बाहर का कुछ भी तला भुना रोज-रोज खा रहे हैं। ये जीवनशैली शरीर में बहुत सारी बीमारियों को आमंत्रित करती है। जिसमें कि मधुमेह की बीमारी सबसे ऊपर है।

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Type 2 diabetes: इसलिए इस बीमारी से बच कर रहना है, क्योंकि इसमें सावधानी नहीं बरती गई तो ये धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है। इसके लिए हमें लाइफस्टाइल (Lifestyle and Diabetes Type 2) में बदलाव लाना बेहद जरूरी है, क्योंकि ये टाइप 2 डायाबिटीज को प्रभावित करता है। यदि हम पहले से ही इसका ध्यान रखते हैं तो इससे बच सकते हैं। एक अच्छी खबर है कि यूके के डॉक्टर ने साझा किया है कि उसने डाइट में केवल थोड़े से बदलाव करके बहुत सारे लोगों को मधुमेह से छुटकारा दिलाया है।

यूके दैनिक की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि साउथपोर्ट में नॉरवुड सर्जरी के डॉक्टर डेविड उरविन ने बताया कि 2012 में उन्होंने टाइप 2 का इलाज बिना दवा के सही करने के बारे में सोचा नहीं था। उन्होंने आगे बताया कि ये संभव होगा या नहीं इसके बारे में वे नहीं जानते थे, लेकिन जैसे-जैसे इस बीमारी की ओर अध्ययन करना शुरू किया तो उन्हें नई राहें मिलती गई। उन्होंने बहुत अवलोकन के बाद ये पाया कि कम कार्ब वाले आहार लेने से टाइप 2 मधुमेह को खत्म करने की संभावनाएं ज्यादा हैं।

मधुमेह टाइप 2 वाले मरीजों को उन्होंने कम कार्ब वाला फ़ूड खाने की सलाह दी और उन्होंने पाया कि कम कार्ब वाले आहार से टाइप 2 वाले मरीज ठीक हो गए। कम कार्ब वाले आहार में आपको स्टार्च वाली सब्ज़ी, अनाज, चीनी और ऐसे खाने जिसमें अधिक कार्ब है उनको कम करना होता है।

रोज के कैलोरी की जरूरतें पूरी करने के लिए थोड़ा अधिक प्रोटीन वाली चीज़ें डाइट में ले सकते हैं। साथ ही साथ ये बताया कि बाहर का खाना ज्यादा न खाएं, चीनी का प्रयोग कम कर दें, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, रोज कम से कम 30 मिनट वॉक करें । आप मधुमेह जैसी बीमारियों से दूर रहेंगे।

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Health Tips : प्रदूषण से प्रभावित हो रही है सेहत तो आहार में शामिल करें यह फूड्स

धूल, दूप, प्रदूषण आदि के कारण हमारी सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ने लगता है। इस समस्या का असर हमारी त्वचा पर भी पड़ता है। जब हम घर से बाहर निकलते हैं। तो प्रदूषण के संपर्क में आ ही जाते हैं। इसके प्रभाव से बचने के लिए हमें कुछ फूड्स को अपने आहार में शामिल करना चाहिए।

आंवले का सेवन करें -

आंवले का सेवन हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें विटामिन सी पाया जाता है और इसी के साथ इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं। जो फ्री रेडिकल्स की सफाई करने में मदद करते हैं। इसलिए आंवले का सेवन जरूर करना चाहिए।

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हरी सब्जियां खाएं-

अगर आप प्रदूषण के संपर्क में आते हैं। तो आप हरी सब्जियों का सेवन अधिक मात्रा में करें।क्योंकि यह आपके शरीर में आने वाले प्रदूषण के प्रभाव को खत्म करती है। हरी सब्जियों में आप गोभी, गाजर, मटर, पालक, ब्रोकली आदि को शामिल कर सकते हैं। इसमें कई प्रकार के विटामिन और प्रोटीन पाए जाते हैं।

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गुड़ का सेवन करें-

गुड़ का सेवन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि गुड़ में आयरन होता है। जो ब्लड में ऑक्सीजन सप्लाई को बराबर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है और प्रदूषण से पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करता है। इसलिए जब आप चाय बनाए तो उसमें शक्कर की जगह गुड़ का इस्तेमाल करें। तो फायदेमंद होगा। इसी के साथ आप भोजन के बाद भी थोड़ा सा गुड़ खा सकते हैं।

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नट्स का सेवन करें -

नट्स का सेवन आपके शरीर के लिए फायदेमंद होता है। यह प्रदूषण से पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करता है। क्योंकि इनमें कई प्रकार के विटामिन और प्रोटीन पाए जाते हैं। इसके लिए आप बादाम, पिस्ता, अखरोट, मूंगफली आदि का सेवन करें।

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अदरक का सेवन करें -

अदरक का सेवन भी आपके शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसे चाय, काढ़ा और सब्जी सभी में शामिल किया जा सकता है। इससे आपका इम्यूनिटी सिस्टम भी स्ट्रांग होता है और मौसम से पड़ने वाले प्रभाव से भी आप को बचाता है।

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काली मिर्च का सेवन करें-

काली मिर्च का सेवन करने से आपके शरीर को कई फायदे होते हैं। क्योंकि इसमें विटामिंस और मिनरल्स पाए जाते हैं। इसका चाय में सेवन करने से आपको काफी लाभ होता है। आप पिसी हुई काली मिर्च में शहद डालकर भी चाट सकते हैं।इससे भी आपको कफ़ आदि समस्या से निजात मिलेगी और प्रदूषण से होने वाला प्रभाव कम होगा।



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Health Tips : खड़े होकर भोजन करना हो सकता है सेहत के लिए नुकसानदायक, जाने क्या पड़ते हैं प्रभाव

शादी, पार्टी हो या अन्य कोई फंक्शन, आजकल खड़े-खड़े भोजन करने का फैशन हो गया है। लोग इसे अपनी शान समझते हैं। लेकिन खड़े होकर भोजन करने की अपेक्षा बैठकर भोजन करना ही सेहत के लिए फायदेमंद होता है। आइये जानते हैं खड़े रहकर भोजन करने से शरीर को क्या नुकसान होते हैं।

प्राचीन काल से ही बैठकर भोजन करने की परंपरा चली आ रही है। लेकिन कई लोग अब खड़े-खड़े भोजन करने लग गए हैं। तो कई लोग डाइनिंग टेबल पर बैठकर भोजन करते हैं। जिन लोगों को कमर, हाथ , पैर, जोड़ो आदि में दर्द है। वह तो ठीक है। लेकिन जो लोग आराम से नीचे बैठकर भोजन कर सकते हैं। उन्हें पालकी मारकर ही भोजन करने बैठना चाहिए। क्योंकि यह शरीर के लिए फायदेमंद होता है।

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एक्स्ट्रा कैलोरी-

खड़े होकर भोजन करने से व्यक्ति अधिक भोजन कर लेता है। जिससे उनके शरीर में एक्स्ट्रा कैलोरी एकत्रित हो जाती है। जिससे मोटापा बढ़ता है और यह शरीर के लिए फायदेमंद नहीं होता है।

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पाचन तंत्र होता गड़बड़-

खड़े-खड़े भोजन करने से व्यक्ति को अपनी भूख भी अंदाज नहीं रहता है और वह ज्यादा खा लेते हैं। जो पचने में भी परेशानी होती है। इस कारण बैठकर भोजन करना चाहिए। जो शरीर के लिए फायदेमंद होता है।

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सिकुड़ जाती है आंते-

खड़े होकर भोजन करने से हमारी आंतें सिकुड़ जाती है और भोजन भी ठीक से पचता नहीं है।जिसका असर हमारे शरीर पर पड़ता है। इससे पेट से संबंधित समस्याएं जैसे कब्ज, एसिडिटी आदि हो जाती है।

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कमर पर भी असर -

खड़े-खड़े भोजन करने से हमारे पैर कमर पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। कमर में दर्द होने लगता है और खड़े-खड़े भोजन करने से व्यक्ति का दिमाग भी संतुलित नहीं रहता है। ऐसे में वह चिड़चिड़ा भी हो जाता है।

अल्सर की समस्या-

व्यक्ति खड़ा रहता है तो गले से पेट तक भोजन और पानी ले जाने वाली नली भी प्रभावित होती है। जिससे अल्सर की समस्या भी पैदा हो सकती है। इसलिए खड़े होकर भोजन नहीं करना चाहिए।

पेट दर्द और सूजन-

खड़े होकर भोजन करने से भोजन सीधा आंतों में जाता है। इस कारण से आपको पेट में दर्द, सूजन आदि समस्या हो सकती है। इसी के साथ फेट जमा होने के कारण मोटापा बढ़ता है। इस कारण खड़े होकर भोजन नहीं करना चाहिए।

आराम से करें भोजन-

जब आप खड़े होकर भोजन करते हैं। तो एक हाथ में आपको थाली पकड़ना होती है और एक हाथ से आप खाते हैं। जरा सा बैलेंस गड़बड़ होने पर थाली गिरने का भी भय रहता है। ऐसे में व्यक्ति का खाने से ज्यादा बैलेंस बनाने में भी ध्यान रहता है। अगर आप वही भोजन बैठ कर करते हैं, तो आपको किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती है। इसलिए शांति से बैठ कर किया गया भोजन ही सेहत के लिए फायदेमंद होता है।



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Weight loss : डाइटिंग और वर्कआउट करने के बाद भी कम नहीं हो रहा वजन तो अपनाएं ये टिप्स

आप मोटापे से परेशान हो चुके हैं और अपना वजन कम करना चाहते हैं। लेकिन डाइटिंग और वर्कआउट करने के बाद भी आपका वजन कम नहीं हो रहा है। तो अब आप यह आसान टिप्स अपनाएं। इससे निश्चित ही कुछ ही दिनों में आपका वजन भी कम कर होने लगेगा और आप अपने आप को फिट और तरोताजा महसूस करेंगे।

दरअसल, कुछ लोगों की दिनचर्या ऐसी होती है कि वह चाह कर भी अपना वजन कम नहीं कर पाते हैं। अगर आप भी काफी परिश्रम करने के बावजूद भी अपना वजन कम नहीं कर पा रहे हैं। तो अब घर में ही इन उपायों को अपने रुटीन में शामिल करना होगा। जिससे आपका फेट बर्न होने लगेगा और कुछ ही दिनों में आप अपना वजन कम कर सकेंगे।

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नींबू और शहद का सेवन करें-

नींबू में फैट ऑक्सीडेंट और विटामिन सी होता है। और शहद में लिपिड कम करने की शक्ति होती है। अगर आप नींबू और शहद को मिलाकर पीते हैं। तो इससे आपका वजन दिन-ब-दिन कम होगा।इसके लिए आप रोज सुबह खाली पेट नींबू और शहद मिलाकर पीएं। इन दोनों का सेवन से आपका वजन तो कम होगा ही, साथ ही कई प्रकार की बीमारियां भी आपको छू नहीं पाएगी। आप चाहे तो दिन में दो बार भी नींबू और शहद पी सकते हैं।

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एलोवेरा का सेवन करें -

जिन लोगों का मेटाबॉलिज्म स्लो होता है। उन्हें एलोवेरा का जूस जरूर पीना चाहिए। इससे मेटाबॉलिज्म फास्ट हो जाता है और पाचन तंत्र भी स्ट्रांग होता है। इससे वजन घटाना आसान होता है। एलोवेरा का सेवन करने से बाल, त्वचा और पेट से संबंधित समस्याएं भी दूर होती है।

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ग्रीन टी का सेवन करें -

ग्रीन टी आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसे रोजाना सुबह पीने से पेट भी साफ रहता है और वजन भी कम होता है। क्योंकि यह शरीर के फेट को कम करने में काफी मददगार होती है। रोजाना ग्रीन टी पीने से बेली फैट भी कम होगा और आप रोजाना दिन में दो से तीन बार ग्रीन टी का सेवन भी कर सकते हैं।

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काली मिर्च का सेवन करें -

काली मिर्च का सेवन भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे इम्यूनिटी भी स्ट्रांग होती है और वजन भी कम होता है। क्योंकि इसमें पाइपरीन नामक तत्व होता है। जो वजन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए रोजाना एक छोटी चम्मच काली मिर्च अपने आहार में जरूर शामिल करें। इससे आपके भोजन का टेस्ट भी बेहतर होगा और मोटापा भी कम हो जाएगा।



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Thursday, 29 July 2021

Menstrual Cycle and Covid 19 vaccine : क्या वाकई Covid-19 के टीके लगाने के बाद पीरियड्स देर से आता है

नई दिल्ली। वुहान से आए कोरोना वायरस एक महामारी बन गया है, जो करोड़ों लोगों की जान ले चुका है। इससे दुनिया का कोई भी कोना अछूता नहीं रहा। इस वायरस से बचने के लिए एक-दूसरे से दूरी बनाए रखें, मास्क पहने और टीका लगवाना आवश्यक हो गया है। इन टीकों को लेकर महिलाओं के मन में पीरियड्स (Menstrual Cycle and Covid 19 vaccine) को लेकर कुछ सवाल हैं, जिनको दूर करने की आज हम कोशिश करेंगे।

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Menstrual Cycle and Covid 19 vaccine:

क्या COVID-19 का टीका आपके पीरियड्स को प्रभावित करता है?

ये टीके सब पर अलग तरीकों से प्रभावित करते हैं। महिलाओं और उनके मासिक धर्म के साथ कुछ चौंकाने वाले प्रभाव सामने आए हैं।
कई सबूतों के अनुसार महिलाओं में टीका लगने के बाद पीरियड्स में कुछ अंतर देखा है, लेकिन अभी तक इसके कोई वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आए तो इस असामान्य दुष्प्रभाव का क्या कारण हो सकता है। वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने टीकाकरण बंद भी कर दिया है।

महिलाओं में मासिक धर्म को प्रभावित करने वाले covid-19 टीकों के बारे में क्या सबूत हैं?

हाल ही में टीकाकरण के आकड़ों में से ये पता चला है कि Covid-19 टीकों का पीरियड्स में एक अलग अजीबोगरीब प्रभाव देखने को मिला है। महिलाओं ने पीरियड्स देर से आने की बात कही है। साथ ही साथ पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द और कुछ और परिवर्तन के बारे में भी बताया है।

क्या आपका इम्यून सिस्टम पीरियड्स में बदलाव ला सकता है?

डॉक्टर्स कि माने तो ये हमारी इम्यून सिस्टम पर डिपेंड करता है। औरतों की हॉर्मोन प्रणाली पुरुषों से अलग होती है। टीकों को लगते ही हॉर्मोन्स में कुछ बदलाव तेजी से होते हैं, जिसके कारण आपके पीरियड्स लेट हो सकते हैं। इसलिए आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मासिक धर्म चक्र में बदलाव लेकर आ सकती है।

यदि आप किसी भी टेंशन में हैं तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से मदद ले सकती हैं। आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। टीकाकरण जरूर करवाएं, क्योंकि कोरोना जैसी महामारी से बचना जरुरी है। टीकाकरण के सभी प्रोटोकॉल को फॉलो करें और अत्यधिक मानसिक तनाव से बचें।

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ICMR Sero Survey: राजस्थान की 76.2 प्रतिशत आबादी में कोरोना एंटीबॉडी, जानें अन्य राज्यों का हाल

ICMR Sero Survey: कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में फिर से वृद्धि देखने को मिल रही है। सरकार द्वारा तीसरी लहर की आशंका को ध्यान में रखते हुए, एहतियात के तौर पर हरसंभव तैयारियां की जा रही है। ऐसे में केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जरुरी सलाह दी है कि वे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के परामर्श से सभी जिलों में सीरो सर्वेक्षण जरूर करें। जिससे स्थानीय स्तर पर 'सीरोप्रीवैलेंस' का आंकड़ा तैयार किया जा सके। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण द्वारा सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों / प्रधान सचिवों / सचिवों (स्वास्थ्य) को पत्र भी लिखा गया है।

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देश में विभिन्न राज्यों के कुल 70 जिलों में ICMR द्वारा किए गए राष्ट्रीय सीरो सर्वे के निष्कर्षों को मंत्रालय ने साझा किया। आंकड़ों पर नजर डालें तो देखेंगे कि टीकाकरण में अव्वल राज्य केरल सबसे सबसे पिछड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश में सर्वेक्षण की गई आबादी में सीरोप्रीवैलेंस सबसे ज्यादा है। कोरोना एंटीबाडी के मामले में राजस्थान की स्थिति भी अच्छी है।

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राज्यवार सीरोप्रीवैलेंस की स्थिति
मध्य प्रदेश - 79 प्रतिशत
महाराष्ट्र - 58 प्रतिशत
केरल - 44.4 प्रतिशत
राजस्थान - 76.2 प्रतिशत
बिहार - 75.9 प्रतिशत
गुजरात - 75.3 प्रतिशत
उत्तर प्रदेश -71.0 प्रतिशत
कर्नाटक - 69.8 प्रतिशत
तमिलनाडु - 69.2 प्रतिशत
ओडिशा - 68.1 प्रतिशत
पंजाब - 66.5 प्रतिशत
तेलंगाना - 63.1 प्रतिशत
असम - 50.3 प्रतिशत
पश्चिम बंगाल - 60.9 प्रतिशत
छत्तीसगढ़ - 74.6 प्रतिशत
आंध्र प्रदेश - 70.2 प्रतिशत

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इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के चौथे दौर के सीरो सर्वे में अलग-अलग राज्यों की आबादी में एंटीबॉडी की मौजूदगी का ब्यौरा दिया गया है। इस साल जून और जुलाई के बीच क़रीब 29 हज़ार लोगों पर यह सर्वे किया गया है जो दिखाता है , सर्वे के मुताबिक, भारत की एक तिहाई आबादी में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ एंटीबॉडी मौजूद है।

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Health Tips: बालों का गिरना, खुजली और डैंड्रफ जैसी समस्याओं से ऐसे पाएं छुटकारा, अपनाएं ये घरेलु नुस्खे

Health Tips: मानसून यानी की रिमझिम फुहारें और बरसात, जहाँ इस मौसम में चिलचिलाती धूूप और गर्मी से राहत मिलती है वहीं यह मौसम बालों के स्वास्थ और देखभाल लिए अच्छा नहीं माना जाता है , इस मौसम में एक तरफ बालों के गीला होने की दिक्कत रहती है वहीं विभिन्न तरह के इन्फेक्शन और समस्याओं का भी डर बना रहता है, बालों का गिरना, खुजली, डैंड्रफ जैसी समस्याएं इस मौसम में बेहद आम हो जाती हैं वहीं अगर सावधानी ना बरती जाए और बालों का ध्यान ना रखा जाए तो भयंकर रूप भी ले सकती हैं।

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अब आपको इन समस्याओं से स्ट्रेस लेने की ज़रूरत नहीं है क्योँकि सिल्वरींन स्पा एंड सैलून की ब्यूटी और हेयर एक्सपर्ट पूर्णिमा गोयल इन्हीं समस्याओं और इनके समाधान से सम्बंधित जानकारी आपसे शेयर कर रही हैं और आपको महत्वपूर्ण टिप्स दे रही हैं जिससे ये मानसून आपके बालों के स्वास्थ के लिए मुश्किल भरा ना होकर सुहावना हो और आप सुन्दर और स्टाइलिश हेयर स्टाइल्स फ्लॉन्ट कर सकें। मानसून के सीज़न मे आपके बालों का क्‍या हाल होता है और इनकी समस्‍याओं से निपटने के लिये क्‍या किया जाए, इसके लिये प्रस्‍तुत हैं कुछ टिप्‍स...

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इस मौसम में बालों की मसाज करना बेहद अहम होता है और मसाज के लिए ऑलिव आयल और आलमंड आयल बेहतरीन ऑप्शन है, अगर आपकी स्कैल्प बेहद ऑयली है तो आप आयल में दो बूंदे नींबू की डाल सकते हैं और हेयर वाश से पहले मसाज कर सकते हैं।

बारिश के पानी में मौजूद प्रदूषित तत्व बालों को कमजोर और डल बना देते है जिनसे स्किन फ़्लॉकिंग जैसी समस्या उत्पन्न हो जाते है और साथ ही बालो के झड़ने की समस्या शुरू हो जाती हैं। इसलिए इस मौसम के दौरान बालो को अच्छे से कवर करके बाहर निकलना अच्छा रहता है, ध्यान रखें की आप बाहर जाने से पहले स्टाइलिश स्कार्फ जो आपकी ड्रेस के कलर से मैच करता है, का इस्तेमाल कर ना केवल बालों का बचाव कर सकती हैं बल्कि एक सुन्दर हेयर स्टाइल भी बना सकती हैं

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इसके अतिरिक्त बालो की सफाई बेहद जरुरी होती हैं, अपने बाल के अनुसार ही माइल्ड शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल करे ताकी बालों को किसी प्रकार का नुकसान ना हो, यदि आप आवला , शिकाकाई, रीठा बेस्ड शैम्पू का इस्तेमाल करेंगी तो ज़्यादा अच्छा है इससे बालों को मज़बूती और पोषण भी मिलेगा, हेयर वाश के बाद गीले बालों में कंघी करने से बचें इससे बालों की जड़ें कमजोर होती हैं और ब्रेकेज की समस्या भी बड जाती है।



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Health Tips: बारिश के मौसम में मच्छरों को भगाने के लिए आजमाएं ये देसी तरीके

Health Tips: गर्मी की शुरुआत के साथ ही मच्छर भी आपको परेशान करने लगेंगे। ऐसे में कुछ प्राकृतिक तरीकों को अपनाकर मच्छरों से बचा जा सकता है।

लौंग का तेल
कई शोधों में यह प्रमाणित हो चुका है कि लौंग के तेल की महक से मच्छर दूर भागते हैं। लौंग के तेल को नारियल तेल में मिलाकर त्वचा पर लगाएं।

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अजवायन पाउडर
एक शोध के अनुसार अजवायन से मच्छर दूर रहते हैं, जिन जगहों पर मच्छर अधिक आते हैं, वहां पर अजवायन या इसका पाउडर डाल दें।

सोयाबीन तेल:
सोयाबीन के तेल से त्वचा की हल्की मसाज करें। इससे मच्छर दूर रहेंगे। इसके अलावा नीलगिरी का तेल भी बहुत कारगर है।

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गेंदे का फूल:
इसकी सुगंध न सिर्फ आपको ताजगी से भर देती है बल्कि मच्छर भी भगाती है। गेंदे का पौधा न सिर्फ अपने बगीचे में लगाएं बल्कि बालकनी में भी इन्हें जगह दें, जिससे शाम के समय मच्छर आपके घर में न आएं।

गोबर के कंडों को जलाकर इसके ऊपर हवन सामग्री या सूखे हुए नीम के पत्ते डाल दें। खिड़की और दरवाजों को बंद करके कमरों में 10 मिनट के लिए इसकी धुनी करें। ध्यान रहे कि इस दौरान घर के लोग कमरे से बाहर चले जाएं। बाद में खिड़की और दरवाजे खोल दें। इस प्रयोग में कर्पूर का भी उपयोग किया जा सकता है। मच्छरों से बचाव के लिए जरूरी है कि घर या पड़ोस में पानी इकट्ठा न होने दें।

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Health Tips: गले का संक्रमण को दूर करने के लिए जरूर अपनाएं ये घरेलु उपाय

Health Tips: बढ़ती सर्दी का सबसे ज्यादा असर गले पर पड़ता है। ऐसे में गले का संक्रमण अक्सर परेशानी की वजह बनता है। इन उपायों को आजमाकर इसे ठीक किया जा सकता है-

गरारों से सूजन दूर : गले के संक्रमण से छुटकारा पाने का यह बेहतरीन तरीका है। चुटकीभर नमक मिला गुनगुना पानी गले में इंफेक्शन की वजह से आयी सूजन को कम करता है।

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भाप लेने से भी आराम: गर्म पानी की भाप लेना गले में इंफेक्शन के लिए तो सहायक है, साथ ही इससे बंद नैसल पैसेजेज खुलते हैं जिससे सांस लेने में आसानी होती है।

ये उपाय भी कारगर: गले में नमी बनाए रखने के लिए पानी और जूस जैसे तरल पदार्थ लें। हलवा, जई व ओट्स जैसी चीजें भी खा सकते हैं। अदरक, इलायची व काली मिर्च वाली चाय गले की खराश में बेहद आराम पहुंचाती है। साथ ही इस चाय में एंटीबैक्टीरियल गुण भी हैं। इसे पीने से खराश दूर होती है।

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ध्यान रहे: आराम न मिलने या समस्या बढऩे पर देर किए बगैर विशेषज्ञ से परामर्श करें।



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Health News: मक्का खाने से दूर होती हैं कई बीमारियां, ऐसे करें इस्तेमाल

Health News: भुट्टे के दानों यानी मक्का या कॉर्न में स्वास्थ्यरक्षक पदार्थ होते हैं जो सेहत को संवारने का काम करते हैं। जानते हैं इनके बारे में।

कोलेस्ट्रॉल: विटामिन-सी, बायोफ्लेवोनॉयड, कैराटेनॉयड और फाइबर की प्रचुरता से मक्का कोलेस्ट्रॉल कम करता है। धमनियों में रुकावट को समाप्त कर हृदय को स्वस्थ बनाता है। कैंसर: इसमें एंटीऑक्सीडेंट और फ्लेवोनॉयड होते हैं जो कैंसर का खतरा घटाते हैं। कॉर्न में फेसलिक एसिड है जो बे्रस्ट व लिवर के ट्यूमर के आकार को कम करता है।

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त्वचा : विटामिन-ए और सी व एंटीऑक्सीडेंट होने से मक्का झुर्रियां होने से रोकता है। आंखें: कॉर्न में बीटा कैरोटीन (विटामिन-ए) होता है जो आंख संबंधी समस्याओं को घटाता है। एनर्जी: कार्बोहाइड्रेट की प्रचुरता के कारण यह ऊर्जा का स्रोत है।

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कब्ज: इसमें फाइबर होता है जो मलाशय या कोलन में जमा गंदगी को बाहर निकालने में मदद करता है।

एनीमिया : आयरन का स्रोत है मक्का। उबली मक्का खाने से एनीमिया यानी रक्त की कमी दूर होती है। मक्का में विटामिन-बी और फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद होता है।

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Weight Loss Tips: तुरई का नियमित सेवन करने से घटता है वजन

Weight Loss Tips: तुरई की सब्जी पचने में आसान होती है इसलिए अस्वस्थ व बीमार लोगों के लिए भी यह काफी फायदेमंद होती है। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में।

यह रक्त और मूत्र दोनों में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करती है। इसलिए यह डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकती है। एक तुरई में 95 प्रतिशत पानी और केवल 25 फीसदी कैलोरी होती है। जिससे वजन नहीं बढ़ता।

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इसमें संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल बहुत ही सीमित मात्रा में होता है जो वजन कम करने में सहायक है। इसका नियमित प्रयोग करने से कब्ज नहीं होता और पेट भी साफ रहता है। तुरई पित्त, सांस संबंधी रोगों, बुखार, खांसी और पेट के कीड़ों को दूर करने में लाभकारी है। तुरई में बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो नेत्र दृष्टि बढ़ाने में मदद करता है। इसका रस पीलिया रोग के उपचार में भी फायदेमंद है।

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यह मुंहासे, एक्जिमा, सोरायसिस और अन्य त्वचा संबंधी रोगों के उपचार में सहायक होती है। कुष्ठ में भी तुरई उपयोगी होती है। तुरई की सब्जी खाने से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। इससे न केवल रक्त शुद्ध होता है बल्कि बवासीर जैसे रोग में भी राहत मिलती है।

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Brain Power: पजल्स बनाएंगे बच्चों को स्मार्ट और इंटेलीजेंट, नियमित अभ्यास जरुरी

Brain Power: अगर आप अपने बच्चों को स्मार्ट, इंटेलीजेंट और जमाने के साथ चलने लायक बनाना चाहते हैं तो उन्हें तरह तरह के पजल्स खेलने के लिए दें। ध्यान रखिए इस तरह की एक्सरसाइज से उनके दिमाग की बत्ती जलेगी। बच्चों के लिए राजस्थान पत्रिका अख़बार में ब्रेन पावर पेज प्रकाशित होता है। यह पेज पूरी तरह से मस्तिष्क शक्ति से ही संबंधित है।

स्मरणशक्ति बढ़ती है
पजल खेलते वक्त बच्चे को दिमाग खूब खपाना पड़ता है जिससे उसके दिमाग की अच्छी कसरत हो जाती है। दिमाग की कसरत होते रहने से मसल्स का लचीलापन बढ़ता है और स्मरणशक्ति बढ़ती है। दुनिया भर के मनोवैज्ञानिकों ने स्मरणशक्ति बढ़ाने के कई उपायों में से एक पहेली और पजल्स सोल्व करना भी बताया है।

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अक्षरज्ञान
विभिन्न पजल गेम्स में बच्चों को अलग-अलग तरह की आकृतियां, अक्षर, चित्र, रंग, पशु-पक्षी आदि देखने को मिलते हैं। इससे बच्चे नई चीजें सीखते और समझते हैं। इससे उन्हें अपने आसपास की दुनिया में मौजूद चीजों का ज्ञान होता है।

हाथों-आंखों का संतुलन
किसी भी पजल को सोल्व करने में बच्चे को पूरी एकाग्रता से काम करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में उसे अपने हाथों और आंखों में समुचित संतुलन भी बनाकर रखना होता है। यह अभ्यास बच्चे के जीवन में सकारात्मक असर डालता है।

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समस्या से मुकाबला
पजल सोल्व करने के लिए बच्चों को धैर्य की जरूरत होती है। इससे वे समस्याओं का समाधान करने की कला सीखते हैं। समस्याओं के समाधान के लिए जिस चिंतन, मनन और कौशल की जरूरत होती है, वह बच्चा पजल्स के माध्यम से सीख सकता है।

हैंडल करना सीखते हैं
जिन पजल्स में कई छोटे-छोटे टुकड़ों को जोड़कर आकृति बनानी होती है, उनसे बच्चे छोटी चीजों को हैंडल करने और उन्हें संभालकर रखने का गुण आता है। इससे बच्चा बड़ा होकर अपनी चीजों को भी संभालकर रखना सीखता है।

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Alcohol reduce heart attack risk: शराब का सेवन हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है, जानें अध्ययन क्या कहता है

नई दिल्ली। अध्यन के दौरान ये पता चला है कि हृदय के रोगी जो शराब का सेवन नहीं करते और जो व्यक्ति हृदय रोग के बाद भी शराब (Alcohol Reduce Heart Attack Risk) पीते हैं वे कम से कम 50 प्रतिशत स्ट्रॉक, दिमाग की बीमारियां या मरने से बचे हैं, लेकिन शराब कि खुराक ज्यादा नहीं होनी चाहिए। औसतन 6 ग्राम से ज्यादा शराब का सेवन नुकसानदायक हो सकता है।

आगे अध्ययन में ये भी बताया गया है कि जो लोग रोजाना कम से कम आठ ग्राम शराब पीते हैं उनकी मृत्यु का जोखिम लगभग 27 प्रतिशत कम हो जाता है। शराब का सेवन दिए गए मात्रा से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, वरना ये फायदे की जगह नुक्सान भी पहुंचा सकता है। एक दिन में 6 या 8 ग्राम से ज्यादा शराब का सेवन न करें और न ही एल्कोहॉल एडिक्टेड बनें। वाइनपेयर ने साझा किया है कि पूरे अमेरिका राज्य में लगभग 14 ग्राम एल्कोहॉल होता है।

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रिसर्च में ये भी बताया गया है कि दिल के बढ़ते मामलों के साथ और भी चीजें ध्यान में रखनी चाहिए, क्योंकि हर चीज के बुरे या अच्छे पहलू दोनों ही होते हैं। यदि आपको दिल कि समस्या है या बीमारी है और आप बहुत अधिक मात्रा में सेवन करें तो हानिकारक हो सकता है। आपको शराब का सेवन दिए गए मात्रा के अनुसार ही करना चाहिए अत्यधिक एल्कोहॉल की मात्रा सेहत को बिगाड़ सकती है।

इसके अतिरिक्त, ये भी ध्यान रखें कि आपको दिल के साथ कोई दूसरी बीमारी तो नहीं है जिसमें एल्कोहॉल लेना मना हो, क्योंकि फिर ये कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। अध्ययन के सह-लेखक चेंगई डिंग का कहना है कि उनके अनुसार सीवीडी यानी दिल कि बीमारी वाले लोग दिल के दौरे,स्ट्रॉक, एनजाइना को रोकने के लिए थोड़ी सी शराब का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन यदि वे ज्यादा पी रहें हैं तो सेवन करना कम कर दें, क्योंकि खाना हो या पीना हर चीज लिमिटेड मात्रा में ही फायदा करती हैं। यदि वे जरूरत से ज्यादा हो जाए तो फायदे कि जगह नुकसान पहुंचाने लगती है।

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Lose weight Ayurvedic way: क्या फलों को खाने से कम होता है वजन?

नई दिल्ली। आयुर्वेद का भी यही कहना है की फल हमारे सेहत के लिए बहुत लाभदायक होते हैं। इनको खाने से हमारे शरीर को सभी प्रकार के पौष्टिक आहार मिलते हैं। ये मिनरल्स और विटामिन्स से भरपूर होते हैं। इसलिए वजन को घटाने में लाभदायक हैं। यदि आप वजन घटाने में आयुर्वेद ( Lose weight Ayurvedic way ) का सहारा लेते हैं तो भी ये बहुत अच्छा होता है । क्योंकि आयुर्वेद वजन घटाने के फायदों का खजाना माना जाता है। ये वजन कम करने में मदद तो करता ही है साथ ही साथ उम्र बढ़ने के लक्षणों के लिए भी लाभदायक होता है।

हम वजन को कम करना चाहते हैं तो डाइट में इन फलों को शामिल जरुर करना चाहिए। लेकिन क्या आपको ये पता है कि फलों का सेवन भी सही और उचित समय में करना चाहिए। हर भोजन का अपना एक समय होता है । जैसे नाश्ता भारी करें ताकि पूरे दिन अच्छे से काम कर सकें और आपको थकान महसूस ना हो। रात को हल्का खाएं ताकि पेट भरा ना लगे और नींद अच्छी आए। वैसे ही फलों को खाने का भी अपना एक समय होता है जब वो ज्यादा फायदा करते हैं।

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आयुर्वेद में फलों का उपयोग फायदेमंद बताया गया है। साथ ही साथ आयुर्वेद ने ताजे फलों को कैसे खाया जाए और कैसे इसका उपयोग करें इसके बारे में भी बताया है। यदि आप फलों को खा रहे हैं तो कुछ जरुरी बातों का ध्यान रखें ताकि ये शरीर को और फायदा दे सकें।

सबसे पहले तो ये जानते हैं की वजन घटाने के लिए फल कैसे लाभदायक हो सकते हैं?

जब भी फल को खाने की बात आती है तो आयुर्वेद ने इसको खाने के लिए कुछ जानकारी दी है। खाने में इन सेहतमंद फलों का उपयोग करने के अपने कुछ फायदे और नुकसान होते हैं।

फायदे

आयुर्वेद के अनुसार खट्टे फलों को छोड़ कर बाकी सारे फलों को सुबह खाली पेट खाया जा सकता है। आप सुबह इन फलों का उपयोग कर सकते हैं जैसे केला,नाशपाती,सेब,अमरुद,आड़ू इन सब का आप सुबह सेवन कर सकते हैं। ये फायदेमंद भी हैं आपको वजन कंट्रोल करने में मदद करेंगे साथ ही साथ पाचन तंत्र को भी फायदा पहुंचाते हैं। खाना खाने से पहले इनको खाएं क्योंकि ये जल्दी हजम हो जाते हैं।

नुकसान

आयुर्वेद के हिसाब से खाना खाने के पहले आप फलों का सेवन करें लेकिन भोजन के बाद में इन्हे खाने से बचें क्योंकि ये गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल में सूजन पैदा कर सकता है। आयुर्वेद के हिसाब से कच्चे और पके हुए पदार्थों को एक साथ ना खाएं। यदि आप भोजन के बाद खाते हो तो कम से कम 1 घंटे का गैप जरूर रखें। आयुर्वेद के अनुसार फलों और दूध का प्रयोग एक साथ ना करें।

वजन कम करने के लिए कौन से फलों का उपयोग करें

वजन कम करने के लिए आपको ब्लूबेरी, सेब, स्ट्रॉबेरी, नासपाती, ब्लैकबेरी, सेब, पपीता का प्रयोग कर सकते हैं। क्योंकि इसमें वजन घटाने के लिए महत्वपूर्ण तत्त्व मौजूद हैं। यदि आप रोज इनका सेवन करते हैं तो ये आपको बहुत फायदा पहुंचा सकते हैं।



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