Tuesday, 31 October 2023

सुबह-सुबह गुड़-चने खाकर पाएं फौलादी इम्यूनिटी, मजबूत हड्डियां और तंदरुस्त दिल

भुने हुए चने और गुड़ दोनों ही सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं। इन दोनों को साथ में खाने से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। आइए जानते हैं कि सुबह-सुबह गुड़-चने खाने से सेहत को क्या-क्या फायदे होते हैं?

1. इम्यूनिटी को बढ़ाता है

गुड़ और चने में एंटीऑक्सीडेंट, जिंक और सेलेनियम जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं, जो इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं। ये मिनरल्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जिससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

2. दिमाग को तेज करता है

गुड़-चने का मिश्रण विटामिन बी6 से भरपूर होता है, जो दिमाग की कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद करता है। विटामिन बी6 याददाश्त बढ़ाने में भी मदद करता है।

3. मांसपेशियों को मजबूत बनाता है

गुड़-चने में प्रोटीन, पोटैशियम और कार्ब्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो मांसपेशियों के निर्माण के लिए जरूरी हैं।

4. खून की कमी को दूर करता है

गुड़ और चने में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो खून की कमी को दूर करने में मदद करता है।

5. दिल को स्वस्थ रखता है

गुड़ और चने में पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं, जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

6. हड्डियों को मजबूत बनाता है

गुड़ और चने में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

7. श्वसन तंत्र को मजबूत बनाता है

गुड़-चने खाने से श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।

8. वजन कम करने में मदद करता है

गुड़-चने में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो वजन कम करने में मदद करता है।

कैसे खाएं गुड़-चने

गुड़-चने को खाने के लिए आप इसे एक साथ मिलाकर खा सकते हैं या फिर चने में गुड़ मिलाकर खा सकते हैं। गुड़-चने को सुबह-सुबह खाना सबसे अच्छा होता है।

सावधानियां

गुड़-चने को अधिक मात्रा में खाने से वजन बढ़ सकता है।
गुड़-चने को खाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें, अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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कोलेस्ट्रॉल को जड़ से खत्म कर देगी आपकी रसोई में पड़ी हुई ये चीज, रोजाना करें इन 5 तरीकों से सेवन

बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। अदरक एक ऐसा मसाला है जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है। आइए जानते हैं अदरक को बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए कैसे इस्तेमाल करें।

अदरक और नींबू की चाय

एक कप पानी में अदरक का एक टुकड़ा और नींबू का रस मिलाकर उबाल लें। फिर इसमें शहद मिलाकर पी लें। इस चाय को दिन में दो बार पीने से बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद मिल सकती है।

कच्चा अदरक चबाएं

बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए अदरक को कच्चा चबा सकते हैं। अदरक में जिंजरोल और शोगोल नामक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं।

लहसुन और अदरक का काढ़ा

लहसुन और अदरक को कुचलकर एक कप पानी में उबाल लें। फिर इस पानी को गर्मागर्म पिएं। इस काढ़े से बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद मिल सकती है।

अदरक का पाउडर

अगर आपको सीधे तौर पर अदरक का प्रयोग करना पसंद नहीं है, तो आप खाने में अदरक के पाउडर को छिड़क सकते हैं। इससे भी बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद मिल सकती है।

अदरक का सेवन करने के तरीके

अदरक को बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए कई तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। आप इनमें से किसी भी तरीके से अदरक का सेवन कर सकते हैं।

अदरक का सेवन करने के लाभ

अदरक का सेवन करने से सिर्फ बैड कोलेस्ट्रॉल ही नहीं बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। अदरक का सेवन करने से शरीर में सूजन कम होती है, पाचन क्रिया दुरुस्त होती है, और सर्दी-खांसी से राहत मिलती है।

अदरक का सेवन करने के नुकसान

अदरक का सेवन करने से कोई नुकसान नहीं होता है। हालांकि, अगर आपको किसी तरह की कोई स्वास्थ्य समस्या है तो अदरक का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।



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Monday, 30 October 2023

शहतूत की पत्‍तियों का अर्क डायबिटीज के मरीजों के लिए वरदान, ऐसे करें इस्तेमाल

Mulberry Leaves Benefits: आजकल कि लाइफस्टाइल और डाइट ऐसी हो गई है कि डायबिटीज की बीमारी होना बहुत ही ज्यादा आम बात है, इस बीमारी का खतरा पहले बढ़ते उम्र के लोगों को ज्यादातर रहता था, वहीं आजकल कम उम्र के लोग भी धीरे-धीरे इस बीमारी का शिकार बनते जा रहे हैं।

डायबिटीज बीमारी होने पर इसे नियंत्रित करने कि बहुत ही ज्यादा आवश्य्कता होती है। ऐसे में शहतूत की पत्तियां बहुत ही ज्यादा गुणकारी साबित हो सकती हैं। इस पत्तियों के रोजाना सेवन से स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं दूर होती जाती हैं, वहीं ये आपको स्वस्थ बना के रखने में भी असरदार होती है।

ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने में करती है मदद
शहतूत के साथ-साथ इसकी पत्तियों में भी ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कि डीऑक्सीनोजीरिमाइसिन जैसे कई सारे यौगिक गुणों से प्रचुर मात्रा में भरपूर होते हैं। इसकी पत्तियों के सेवन से ग्लूकोज का लेवल काफी हद तक नियंत्रण में रहता है। ज्यादा फायदा चाहते हैं तो रोजाना सुबह इसकी पत्तियों को खाली पेट खा सकते हैं।

जानिए इस पत्ती के सेवन से होने वाले अन्य फायदों के बारे में
वेट लॉस में करता है मदद
वजन को कम करना चाहते हैं तो शहतूत के पत्तियों का सेवन बहुत ही ज्यादा लाभदायक साबित हो सकता है, इसकी पत्तियों का रोजाना सेवन तो करें हीं, वहीं इसकी पत्तियों की चाय बनाकर भी पी सकते हैं, इसके सेवन से मोटापा कम हो जाता है, वहीं बेली फैट की समस्या भी दूर हो जाती है।

पिम्पल्स की समस्या को करता है दूर
शहतूत के पत्तियों का सेवन रोजाना करते हैं तो इससे कील-मुहासें, पिम्पल्स के जैसी अन्य समस्याएं दूर होती जाती हैं, इसकी पत्तियों के इस्तेमाल के लिए आप इसके साथ ही नीम के पत्तों को पानी में गर्म कर लें, फिर इसे छान कर चेहरे में लगा लें, इससे मुहासें ठीक हो जाते हैं।

यह भी पढ़े-सर्दी-जुकाम, हृदय रोग और कैंसर से बचाता है अनार, रोजाना एक मुठ्ठी खाने से मिलते हैं ये फायदे

हार्ट की सेहत को रखता है स्वस्थ
शहतूत की पत्तियों में एक फ्लेवोनॉयड नामक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो दिल से जुड़ी बीमारियों को दूर कर देते हैं, इसलिए इनका आप रोजाना सेवन कर सकते हैं।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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सोने का तरीका बिगाड़ रहा सूरत, एक तरफ करवट के नुकसान, चेहरे पर रिंकल्स और होंठ के आकार में बदलाव

आपके सोने का तरीका आपके चेहरे पर झुर्रियां पैदा कर सकता है, यहां तक कि आपके होंठों और आंख का आकार भी बदल सकता है। आपको जानकार हैरानी होगी कि आप चेहरे पर झुर्रियां मिटाने के लिए लाखों प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यदि सोते समय ध्यान नहीं देंगे, तो आपकी सूरत बदल सकती है। हर रात आपको अपने चेहरे पर झुर्रियां गहरी होती नजर आ सकती हैं। यह दावा एक अमरीकी फैशन इंफ्ल्यूएंसर मैरिएन ने किया है उनके असमान होंठ का आकार एक तरफ सोने के कारण हुआ था। अब सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि आप कैसे सोते है और इसका आपके चेहरे पर क्या प्रभाव पड़ता है। हालांकि इस बात पर यकीन करना मुश्किल है कि क्या वास्तव में सोने की स्थिति आपके चेहरे की समरूपता को बदल सकती है।

नींद का चेहरे की त्वचा से संबंध
लंदन की एक क्लिनिकल फेशियलिस्ट केट केर कहती हैं कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपकी नींद आपके चेहरे की त्वचा और अंगों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। एस्थेटिक सर्जरी जर्नल के एक अध्ययन के अनुसार, नींद के दौरान हमारे चेहरे पर दबाव और तनाव चेहरे की विकृति का कारण बन सकती हैं। जब हम करवट या पेट के बल सोते हैं तो इससे चेहरे पर सिलवटें बनने लगती है। एक ही तरफ सोने से समय के कारण जैसे-जैसे त्वचा पुरानी होती जाती है और वापस उभरने की क्षमता खो देती है, तो लाइने स्थाई हो सकती हैं। यही बात शरीर के अन्य हिस्सों पर भी लागू होती है।

आंखों के आकार में परिवर्तन
विशेषज्ञों की मानें तो एक तरफ करवट लेकर सोने से एक विशिष्ट क्षेत्र पर बार-बार दबाव पड़ सकता है, सिलवटें पैदा हो सकती हैं और रेखाएं— झुर्रियां भी हो सकती है। इसका मतलब यह हो सकता है कि एक आंख का आकार या ऊंचाई थोड़ी अलग है, या होठों का एक किनारा दूसरे से नीचे हैं। वहीं जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, विषमताएं अधिक स्पष्ट हो जाती हैं और इसके अलावा, त्वचा की लोच कम हो जाती है, जिसका अर्थ है कि रात की नींद के बाद स्थिर रेखाओं को पुनः सक्रिय होने और वापस लौटने में अधिक समय लग सकता है।

मुंहासों का भी खतरा
सोने की पोजिशन में तकिए का भी अपना महत्व है, एक ही तरह सोने से आपका चेहरा तकिए से दब जाता है, जिससे मुंहासे की समस्या बनी रहती है। पीठ के बल सोने से चेहरे पर किसी तरह का घर्षण नहीं होता, जिससे आंखों के नीचे सूजन और काले घेरे कम हो जाते है। कई लोग चेहरे पर झुर्रियों और आकार की शिकायत करते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि यह स्थिति उनकी नींद से जुड़ी हो सकती है।

पीना चाहिए पर्याप्त पानी
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि यदि आप पर्याप्त मात्रा में पानी पीते हैं, तो इससे आपकी त्वचा हाईड्राइड रहती है। जिससे नींद की स्थिति में चेहरा लचीला रहता है। सोने से पहले चेहरे पर मॉश्चयराइजर भी लगाना चाहिए, इससे भी चेहरे पर नमी बनी रहती है।

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heart attack: यदि गंभीर कोविड हुआ था, तो कम मेहनत करें, हार्टअटैक का जोखिम

कोरोना का प्रसार तो खत्म हो गया, लेकिन कोरोना ने शरीर पर ऐसा असर छोड़ा है कि इसके गंभीर परिणाम नजर आ रहे हैं। बीते दिनों नवरात्री में सामने आई हार्टअटैक की घटनाओं को इसका उदाहरण माना जा सकता है। इस तरह के मामलों पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर की ओर से किए गए एक अध्ययन के मुताबिक जिन लोगों को गंभीर रूप से कोविड हुआ था और पर्याप्त समय नहीं बीता है उन लोगों को दिल का दौरा पड़ने से बचने के लिए कम से कम एक या दो साल तक ज्यादा एक्सरसाइज, रनिंग या कठिन परिश्रम करने से बचना चाहिए। उनका यह बयान उस समय आया है, जब हाल ही गुजरात में गरबा खेलने के दौरान लोगों को हार्ट अटैक हुए हैं। इसमें विभिन्न आयुवर्ग के लोग शामिल रहे हैं।

कोरोना और हार्ट अटैक का क्या संबंध, संभावनाओं पर बात
वायरस से लड़ते समय असामान्य तरीके से बनने वाली प्रतिरक्षा दिल को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे रक्तवाहिनियां मोटी हो जाती हैं जिससे उनमें रक्त प्रवाह के लिए जगह कम हो जाती है और वो बाधित हो जाता है, इसे वस्क्यूलर इंफ्लेमेशन कहा जाता है। इसलिए जो लोग पहले ही दिल संबंधी बीमारियों से ग्रस्त थे उनमें ये समस्या और गंभीर हो गई।

युवा आ रहे हैं चपेट में
इंडियन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, बीते सालों में 50 वर्ष से कम उम्र के 50 फीसदी और 40 साल से कम उम्र के 25 फीसदी लोगों में हार्ट अटैक का जोखिम देखा गया है। हालांकि हालांकि इनमें से किसी भी मामले के कोविड से जुड़े होने के प्रमाण नहीं मिले हैं लेकिन कुछ लोग हार्ट अटैक को कोरोना महामारी के प्रभाव के रूप में देख रहे हैं।

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Fatigue Symptoms: सोकर उठने के बाद थकान से हैं परेशान? आजमाएं ये 5 आसान उपाय

Fatigue Symptoms: सुबह उठकर अक्सर हमें एक अजनबी दर्द सिर में और शरीर में थकान का अहसास होता है, जिसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इस थकावट के स्थायी रूप से बने रहने से जीवन में असहानीय कठिनाइयाँ पैदा हो सकती हैं। इस स्थिति को मेडिकल साइंस में "क्रोनिक फैटिग सिंड्रोम" भी कहा जाता है, जिसके लक्षणों को समझना और उसके उपायों के बारे में जानकारी होना महत्वपूर्ण होता है। इसलिए चलिए, हम क्रोनिक फैटिग सिंड्रोम के बारे में थोड़ा और जानते हैं।

Fatigue Symptoms: सोकर उठने के बाद अक्सर शरीर में थकान बनी रहती है, बॉडी में थकान के पीछे कई सारे कारण हो सकते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि थकान के ज्यादा बने रहने से शरीर को बहुत सारी समस्यायों का कारण बन सकता है। इस स्थिति को मेडिकल साइंस में क्रोनिक फटीग सिंड्रोम भी कहा जाता है, इसके होने पर बॉडी को बहुत ही ज्यादा थकावट और दर्द महसूस होती है। इसलिए जानिए क्या है क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के लक्षण और जानिए इसके उपायों के बारे में भी।

सबसे पहले जानिए कि सुबह उठते ही क्यों होती है थकान
कई बार सोके उठने पर ब्लड प्रेशर बढ़ने या घटने लगता है, जिसकी वजह से आपको घबराहट शुरू हो जाती है, इसकी कमी के कारण आपके रोगों के लड़ने कि क्षमता कमजोर होने लगती है। कई गंभीर बीमारियां जैसे कि डायबिटीज या हाइपरटेंशन भी इन्ही के कारण होता है, अक्सर ये समस्या तब होती है, जब बॉडी में विटामिन डी की कमी रहती हो। इन्हीं कारणों से हड्डियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, जकड़न के जैसी अन्य समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है। इन्हीं के कारण शरीर में कमजोरी बढ़ जाती है और व्यक्ति थका हुआ महसूस करता है।

जानिए क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के लक्षणों के बारे में
- मूड का तेजी से बदलना
- सिरदर्द के साथ बॉडी में पेन बने रहना
- किसी भी काम पर ठीक से फोकस न कर पाना
- मसल्स में सूजन और दर्द का बने रहना
- गले में दर्द के साथ लिम्फ नोड्स में सूजन का बने रहना
- बुखार के साथ बॉडी पेन होना
- शरीर में थकावट का बने रहना और चाल-फेर में दिक्कतें होना

यह भी पढ़े-Intermittent fasting वजन कम करने और मधुमेह नियंत्रण के लिए सुरक्षित और प्रभावी: अध्ययन

इन लक्षणों से कैसे निजात पाया जा सकता है
- नाश्ते में अखरोट, मूंगफली, बादाम, काजू का भरपूर मात्रा में सेवन करना।
-हरी सब्जियां जब भी खाएं तो इस बात का खासतौर पर ध्यान में रखें कि ये ज्यादा तेल-मसाले में न पकी हों, वहीं इन्हें ज्यादा देर तक न भूनें।
-हरी सब्जियों को उबाले और इसके पानी को भी पियें
-ब्रेकफास्ट में रोटी, दलिया, दही, अंकुरित अनाज आदि को डाइट में शामिल कर सकते हैं, इससे बॉडी को पर्याप्त मात्रा में पोषण मिलेगा

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karwa chauth 2023: करवा चौथ के एक दिन पहले थाली में इन्हें करें शामिल, ये भूलकर भी ना खाएं

एक दिन पहले संतुलित आहार करना फायदेमंद रहता है। ऐसी चीजों का इस्तेमाल करें, जिसमें कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन और मिनरल्स, जैसे सभी जरूरी घटक हो। एक दिन पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के साथ—साथ छाछ, नारियल पानी, फ्रूट जूस और हर्बस का भी यूज करना चाहिए। आइए जानते हैं किस करवाचौथ के एक दिन पहले आपकी थाली में क्या होना चाहिए शामिल।

ब्राउन राइस और बीन्स
करवा चौथ से एक दिन पहले डाइट में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स शामिल करना चाहिए। इससे लम्बे समय तक एनर्जी बनी रहती है। कार्ब्‍स दो प्रकार के होते हैं सिंपल और कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्ब्‍स. सिंपल कार्ब्‍स की तुलना में कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्ब्स अधिक पोषक तत्वों से भरे होते हैं जो शरीर के लिए आवश्‍यक हैं। ये रिच फाइबर के होते हैं, इनमें ब्राउन राइस, बीन्स, मोटा अनाज और फाइबर युक्त वेजिटेबल्स एंड फ्रूटस शामिल होते है।

केला, संतर, सेब
ऐसे फलों का इस्तेमाल करना चाहिए, जिनमें रिच फाइबर होने के साथ—साथ वे शरीर में पानी की मात्रा की भी पूर्ति करें। करवा चौथ से एक दिन पहले केला, संतरा, सेब या अन्य फाइबर युक्त फलों का यूज किया जा सकता है।

सूखे मेवें
आप सूखे मेवे भी खा सकते हैं, इससे भी शरीर में ताकत आएगी और आपकी बॉडी अगले दिन फास्ट रखने के लिए तैयार होगी। सूखे मेवोें में सभी तरह के पोषक तत्व होते हैं, जो उर्जा बनाए रहते है।

नारियल पानी
नारियल पानी पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसमें पोटेशियम जैसे आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जो हाइड्रेटेड रखने में अहम भूमिका निभाते है। वैसे तो चिकित्सक हर दिन नारियल पानी पीने की सलाह देते हैं, लेकिन यदि आप रोजाना नारियल पानी नहीं पीती, तो करवा चौथ के एक — दिन पहले से इसे पीना शुरू कर दें, इससे आप बेहतर फील करेंगी।

इनके सेवन से बचें
करवा चौथ के एक दिन पहले और व्रत खोलते समय तला—भूना खाने से बचना चाहिए। इससे अगले दिन त्र पेट खराब होने की समस्या झेलनी पड़ सकती है। ज्यादा ठंडी और फ्रीज में रखी चीजों का भी इस्तेमाल न करें, ताजा खाना खाएं ताकि अगले दिन व्रत के लिए पूरी तरह से तैयार रहें।

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Sunday, 29 October 2023

Lungs health: जानिए गुब्बारा फुलाने की सही पोजिशन, एक्सरसाइज बॉल पर रोजाना 10 से 15 गुब्बारे फुलाएंगे तो सुधरेगी फेफड़ों की सेहत

आपको यह जानकार हैरानी होगी कि गुब्बारे फुलाने से हम जितनी अधिक आॅक्सीजन की आपूर्ति करते हैैं, उससे हम लम्बे समय तक बिना सांस फूले और ताजगी के साथ काम कर सकते हैं। गुब्बारा फुलाना फेफड़ों के लिए उपयोगी एक्सरसाइज है। इससे हमारे फेफड़ों को ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में लेने में मदद करती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रतिदिन 10 से 15 गुब्बारों को फुलाने से फेफड़ों की क्षमता सुधरती है।

धीरे—धीरे शुरू करें गुब्बारा फुलाना
यहां ये ध्यान देने की बात है कि आपको इस एक्सरसाइज को धीरे—धीरे शुरू करना होगा। एकदम से बहुत ज्यादा गुब्बारे फुलाने से आप परेशानी में आ सकते हैं। पहले कुछ ही गुब्बारे फुलाएं और उसके बाद धीरे—धीरे इन गुब्बारों की संख्या बढ़ाए। यदि आप घुटनों पर बैठकर या एक्सराइज बॉल पर बैठकर गुब्बारे फुलाते हैं, तो इससे मिलता है ज्यादा फायदा।

क्यों जरूरी है फेफड़ों की सेहत
फेफड़े हमारे शरीर में ऑक्सीजन का संचार करते हैं, लेकिन बढ़ते पॉल्यूशन के कारण फेफड़ों की सेहत प्रभावित होती है। वहीं इसमें वायरस, बैक्टीरिया और फंगस विकसित होने का खतरा भी बना रहता है, इस स्थिति में फेफड़ों की एक्सराइज बहुत ज्यादा जरूरी है।

क्या कहते हैं चिकित्सक
विशेषज्ञों के मुताबिक उम्र के बढ़ने के साथ ही फेफड़ों में फाइब्रोसिस, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज अस्थमा जैसी स्थितियां उत्पन्न होने की संभवनाएं रहती है। ऐसे में फेफड़ों को स्वस्थ रखना जरूरी है, एक्सरसाइज इसका एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यह पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है।

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Saturday, 28 October 2023

रोजाना कोल्डड्रिंक के सेवन से फ्रैक्चर का जोखिम, युवाओं में लगातार कम हो रहा है बीएमडी

यदि आप यह सोच रहे हैं कि सिर्फ दुर्घटना से ही फ्रैक्चर होता है, तो आप गलत है। कोल्ड ड्रिंक के नियमित सेवन और गतिहीन जीवनशैली के कारण भी फ्रैक्चर का उच्च जोखिम रहता है। हड्डी रोग विशेषज्ञों का दावा है कि शीतल पेय के नियमित सेवन और गतिहीन जीवनशैली के कारण हड्डियां कमजोर हो रही हैं। इससे 40-50 आयु वर्ग के लोगों में अस्थि खनिज घनत्व (बीएमडी) में कमी आ सकती है, जो बाद में ऑस्टियोपोरोसिस में तब्दील हो जाती है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के प्रोफेसर शाह वलीउल्लाह ने चीन में सात वर्षों तक 17,000 लोगों पर किए गए एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा, 'दैनिक शीतल पेय का सेवन वयस्कों में फ्रैक्चर के उच्च जोखिम से जुड़ा है।'

अध्ययन में पाया गया कि शीतल पेय की अधिक खपत सामाजिक-जनसांख्यिकीय कारकों और समग्र आहार पैटर्न से स्वतंत्र रूप से फ्रैक्चर जोखिम से जुड़ी है। वलीउल्लाह ने कहा, “एक समान पैटर्न यहां देखा गया है। हमें ओपीडी में 40-50 आयु वर्ग के 100 में से 35 मरीज मिल रहे हैं, जिनका बीएमडी कम हो गया है। एक दशक पहले तक ऐसा नहीं था, जब वयस्क आबादी में शीतल पेय की खपत कम थी।

चीनी, सोडियम और कैफीन
आर्थोपेडिक सर्जन की मानें तो कि हड्डियों के स्वास्थ्य पर शीतल पेय का प्रभाव उनमें मौजूद चीनी, सोडियम और कैफीन की मात्रा के कारण होता है, जिससे कैल्शियम की हानि बढ़ जाती है और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। 'इसके अलावा शीतल पेय की बोतल के उत्पादन में प्लास्टिक में पाया जाने वाला रसायन फ़ेथलेट्स हड्डियों की प्रक्रियाओं को बाधित कर सकता है, जिससे कंकाल संबंधी विकृतियां और ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है।'

भारतीय महिलाओं को सजग होने की जरूरत
शुरुआती जांच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाओं को अधिक जागरूक होना चाहिए क्योंकि उन्हें पश्चिम की तुलना में एक दशक पहले ऑस्टियोपोरोसिस हो जाता है क्योंकि यहां रजोनिवृत्ति की उम्र 47 वर्ष है जबकि पश्चिमी देशों में यह 50 वर्ष है। उन्‍होंने कहा, ''चूंकि हार्मोन एस्ट्रोजन नई हड्डियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जब इसका स्राव बंद हो जाता है तो बीएमडी कम हो जाता है और ऑस्टियोपोरोसिस का कारण बनता है। इसलिए 45 साल से अधिक उम्र की जिन महिलाओं को कमर दर्द की शिकायत है, उन्हें अपनी जांच करानी चाहिए।''

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World Stroke Day 2023: आंखों से ​धुंधला दिखना, जी मचलाना, हिचकी आना...बेहद साधारण से लक्षण भी हो सकते हैं स्ट्रोक के संकेत, गोल्डन आवर से न चूकें

यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो हॉस्पिटल के अध्ययन के अनुसार युवाओं में स्ट्रोक का खतरा पहले से अधिक बढ़ गया है, 35 से 50 आयु वर्ग वाले लोगों में स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं, जिसका मुख्य कारण बदलती लाइफस्टाइल बताया जा रहा है। स्ट्रोक के लक्षण कई बार बेहद सामान्य तो कई बार बेहद गंभीर रूप से नजर आते हैं, यह आपात स्थिति होती है, सही समय इलाज मिले तो व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। ऐसे में स्ट्रोक आने के कुछ घंटे गोल्डन आवर माने जाते हैं, जिस समय यदि व्यक्ति को उचित इलाज मिले तो स्ट्रोक की स्थिति से उबर सकता है।
जब दिमाग की कोई नस ब्लॉक हो जाती है तो ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) आता है। लेकिन इससे पहले मिनी ब्रेन स्ट्रोक भी आता है, इसके लक्षण बेहद हल्के होते हैं, जिन्हें वक्त पर पहचानकर बड़े अटैक से बच सकते हैं। इन्हें ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक भी कहते हैं। वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर जानिए इसके लक्षण।

72 प्रतिशत भारतीयों के किसी ना किसी एक रिश्तेदार में गंभीर लक्षण
एक अनुमान के मुताबिक भारत में मृत्यु के दूसरे सबसे आम कारणों में स्ट्रोक है, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। सोशल मीडिया कम्युनिटी प्लेटफॉर्म लोकल सर्कल्स की ओर से पिछले दिनों किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 72 प्रतिशत भारतीयों के करीबी नेटवर्क में एक या एक से अधिक व्यक्ति ऐसे हैं, जिन्होंने कोविड के बाद से पिछले साढ़े तीन वर्षों में हृदय, मस्तिष्क स्ट्रोक या कैंसर की स्थिति झेली हैै। हालांकि ऐसी स्थितियों के मूल कारण का अभी पता नहीं चल सकता है, लेकिन पिछले वर्ष ही 20 प्रतिशत से अधिक लोगों के करीबी नेटवर्क में ऐसे मामले सामने आए थे।

क्यों मनाया जाता है स्ट्रोक डे
हर साल 29 अक्तूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। साल 2004 में सबसे पहले कनाडा में वर्ल्ड स्ट्रोक कांग्रेस ने इस दिन को मनाया। दो साल बाद वर्ष 2006 में इस दिन को जन जागरूकता के लिए घोषित किया गया। साल 2006 में वर्ल्ड स्ट्रोक फेडरेशन और इंटरनेशनल स्ट्रोक सोसाइटी के विलय के साथ वर्ल्ड स्ट्रोक संगठन स्थापित हुआ। तब से विश्व स्ट्रोक संगठन (डब्ल्यूएसओ) इस दिन को मनाता है। इस वर्ष विश्व स्ट्रोक दिवस की थीम 'Together We Are Greater Than Stroke' (एक साथ मिलकर हम स्ट्रोक से भी बड़े हैं।) यह विषय उच्च रक्तचाप, अनियमित दिल की धड़कन, धूम्रपान, आहार और व्यायाम जैसे जोखिम कारकों की रोकथाम पर जोर देता है।

स्ट्रोक के गंभीर संकेत
चेहरे, हाथ या पैर का अचानक सुन्न होना या कमजोरी, खासकर शरीर के एक तरफ।
अचानक भ्रम, बोलने में परेशानी।
एक या दोनों आंखों में देखने में अचानक कठिनाई।
अचानक चलने में परेशानी, संतुलन बिगड़ना।
बिना किसी ज्ञात कारण के अचानक तेज सिरदर्द।

स्ट्रोक के साधारण संकेत
दिन में नींद आना
हिचकी आना
जी मचलाना
चक्कर आना

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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डायबिटीज को जड़ से खत्म करने वाले 3 दुर्लभ पत्ते

डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है जो खून में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ा देती है। इस बीमारी के कारण दिल, गुर्दे और नसों को नुकसान हो सकता है। डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए दवाइयों के साथ-साथ कुछ आयुर्वेदिक हर्ब्स भी बहुत फायदेमंद होते हैं।

इस लेख में हम आपको तीन ऐसे दुर्लभ पत्तों के बारे में बताएंगे जो डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। ये पत्ते हैं:

अंजीर के पत्ते
भृगुराज के पत्ते
नीलगिरी के पत्ते
अंजीर के पत्ते:

अंजीर के पत्ते में एंटी-डायबेटिक गुण होते हैं। ये पत्ते ग्लूकोज के अवशोषण को कम करके ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

भृगुराज के पत्ते:

भृगुराज के पत्ते भी ब्लड शुगर को कम करने में मदद करते हैं। ये पत्ते इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाकर ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करते हैं।

नीलगिरी के पत्ते:

नीलगिरी के पत्ते में भी एंटी-डायबेटिक गुण होते हैं। ये पत्ते पैंक्रियाज के बीटा सेल्स को सक्रिय करके इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाते हैं।

डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है, लेकिन कुछ आयुर्वेदिक हर्ब्स के सेवन से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। अंजीर के पत्ते, भृगुराज के पत्ते और नीलगिरी के पत्ते डायबिटीज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।



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रात 7 बजे के बाद खाना खाने से बढ़ सकता है GERD का खतरा, जानिए क्यों

हैदराबाद के अपोलो अस्पताल में एक न्यूरोलॉजिस्ट डॉ सुधीर कुमार ने दो प्रमुख कारण बताए कि क्यों एक व्यक्ति को रात का खाना जल्दी खाना चाहिए।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर एक पोस्ट साझा की और लिखा कि जल्दी खाना खाने से GERD (गैस्ट्रो-ओसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज) का खतरा कम हो सकता है।

डॉ सुधीर कुमार ने लिखा, "खाने के लिए समय को सीमित करना (जल्दी खाना खाकर) मोटापा, मधुमेह और कई अन्य बीमारियों के खतरे को कम करता है।

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उन्होंने आगे कहा, "यदि आप इतिहास में और पीछे जाते हैं, तो हमारे दादा-दादी और पिछली पीढ़ियां सूर्य अस्त होने के तुरंत बाद ही रात का खाना खा लेती थीं। देर रात का खाना और देर रात के पब/पार्टियां इन सब ले लिए जिम्मेदार है।

डॉ कुमार ने एक इंटरनेट यूजर की पोस्ट का जवाब दिया, जिसने 25 अक्टूबर को उनकी पोस्ट पर टिप्पणी की जिसमें साधारण जीवनशैली के सुझाव दिए गए थे जो संभावित रूप से किसी व्यक्ति के जीवन को बदल सकते हैं।

टिप्स में बताए गए बिंदुओं में से एक में जल्दी खाना खाना और सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे के बीच खाने पर जोर दिया गया था।

एक यूजर, जिसका नाम @seemarkmenon है, ने लिखा, "7 बजे क्यों? हम ऐसे जीवन जीते हैं जो 7 बजे से परे जाते हैं। मैं एक रेस्तरां में काम करता हूँ उदाहरण के लिए। 11.30 बजे तक घर पहुंचें। हम बाद में क्यों नहीं खा सकते? यह सिद्धांत तब नहीं था जब हम छोटे बच्चे थे, वयस्क 8.30/9 बजे खाते थे। क्या अब दृष्टिकोण या मनुष्य बदल गया है?

टिप्पणी के जवाब में, डॉ कुमार ने लिखा कि अगर देर रात में खाना खाया जाए तो GERD विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

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GERD क्या है?

गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) एक आम स्थिति है जिसमें पेट की सामग्री अन्नप्रणाली में चली जाती है। रिफ्लक्स एक बीमारी बन जाता है जब यह बार-बार या गंभीर लक्षण या चोट का कारण बनता है। यह रिफ्लक्स अन्नप्रणाली, ग्रसनी या श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।

GERD के लक्षण

GERD (गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज) का प्राथमिक संकेतक आमतौर पर हर्टबर्न होती है, जिसे अक्सर छाती में गर्मी की अनुभूति के रूप में वर्णित किया जाता है, साथ में गले या मुंह में खट्टा या कड़वा तरल पदार्थ का भाटा होता है।

हर्टबर्नऔर रिफ्लक्स का संयोजन GERD के लिए इतना विशिष्ट है कि औपचारिक परीक्षण हमेशा आवश्यक नहीं हो सकता है।

GERD से जुड़े अन्य लक्षणों में शामिल हैं:

गैर-जलती छाती में बेचैनी, आमतौर पर छाती के बीच में केंद्रीयकृत और पीछे की ओर फैली हुई।

निगलने में कठिनाई (डिस्पैगिया के रूप में जाना जाता है)।

गले, स्वरयंत्र, या श्वसन प्रणाली को शामिल करने वाले एटिपिकल रिफ्लक्सलक्षण:

गले में खराश
लगातार खांसी
लार का बढ़ना
सांस लेने में कठिनाई



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Friday, 27 October 2023

आयु बढ़ा सकती है सिर्फ 22 मिनट की एक्टिविटी, ऑफिस में 8 घंटे लगातार बैठे रहने के नुकसान भी होंगे कम

आपको यह जानकार हैरानी होगी कि सिर्फ 22 मिनट की एक्टिविटी लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाली मृत्यु दर के जोखिम को कम कर देती हैं। एक नई रिसर्च के मुताबिक 24 घंटे में यदि आप सिर्फ रोजाना 22 मिनट निकाल लें तो आप अपनी आयु बढ़ा सकते । ये रिसर्च आज की भागदौड़ वाली लाइफ स्टाइल की ओर ध्यान केन्द्रित करती है, जहां लम्बे समय तक बैठे रहने के कारण लोगों को कई तरह की हैल्थ प्रॉब्लम फेस करनी पड़ती है। ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन की ओर से प्रकाशित नए शोध में पाया गया है कि अगर आपकी जीवनशैली गतिहीन है तो प्रतिदिन 22 मिनट की मध्यम से तीव्र एक्सराइज करने से मृत्यु का जोखिम कम हो सकता है।

11,989 प्रतिभागियों के डेटा का विश्लेषण
अध्ययन में नॉर्वे, स्वीडन और अमरीका में 11,989 प्रतिभागियों के डेटा का विश्लेषण शामिल था। शोध में भाग लेने वाले पार्टिसिपेंट्स की आयु 50 या फिर इससे अधिक थी। इस संबंध में न्यूयॉर्क के हॉस्पिटल फॉर स्पेशल सर्जरी के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. कार्ल सिरिनो का कहना है कि आज हम सभी व्यस्त जीवन जी रहे हैं। घरों से बाहर निकलना नहीं चाहते, विलासिताएं इस तरह से हम पर हावी हो गई हैं, कि शारीरिक मेहनत से जी चुराने लगे हैं। वे कहते हैं कि बाहर निकलें और उतने ही सक्रिय रहें जितने हम सैकड़ों साल पहले हुआ करते थे।

क्या कहता है शोध
इस शोध में हिप एक्सेलेरोमीटर के जरिए डेटा इकट्ठा किया गया था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि लोग कब सक्रिय थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग प्रतिदिन 12 या अधिक घंटों तक गतिहीन रहते थे, उनके लिए भी यदि 22 मिनट की सीमा पूरी हो जाती है, तो संबंधित मृत्यु जोखिम समाप्त हो जाता है।

22 मिनट एक्सरसाइज जरूरी
शोध में पाया गया कि लम्बा जीने के लिए 22 मिनट की एक्सरसाइज बेहद जरूरी है। उदाहरण के लिए, जो लोग 10 मिनट की एक्सराइज करते हैं, जो प्रतिदिन छह घंटे तक गतिहीन रहते हैं, उनमें अभी भी मृत्यु दर के जोखिम में 32% की गिरावट देखी गई है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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बच्चों की तरह खाइए...सप्ताह भर में कम होगा वेट

बच्चों का खाना खाने का तरीका बड़ों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। वाकई में बच्चे का खाने का तरीका आप में हेल्दी फूड हैबिट्स विकसित कर सकता है। यहां हम आपको बच्चों की तरह छोटे चम्मच या फिर छोटे जार में खाना खाने के लिए नहीं कह रहे हैं, बल्कि उनकी फूड हैबिट्स पर गौर करने पर जोर दे रहे हैं, क्योंकि बच्चों की कुछ आदतें आपके लिए फायदेमंद होती हैै।

धीरे—धीरे और चबाकर खाना
छोटे—छोटे बाइट खाना और उसे खूब देर तक चबाना हेल्थ के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता हैै। खाने को धीरे—धीरे खाना अधिक खाने से निजात दिलाता है। शोधकर्ताओं का अध्ययन बताता है कि धीरे—धीरे खाने में कम कैलोरी गेन करते हैं और भूख भी शांत होती है।

नई चीजें खाना सीखना
बच्चे नई—नई चीजें खाने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि खाने में वैरायटी से शरीर में सभी तरह के न्यूट्रिशंस, एंटीआॅक्सिटेंड और विटामिन मिल जाते हैं। खाने से बोरियत भी नहीं होती। एक स्टडी के अनुसार विभिन्न तरह के खाद्य पदार्थ खाने से डायबिटीज का खतरा कम रहता है। ऐसे में बड़ों को भी बच्चों की तरह विभिन्न तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। विभिन्न तरह की रैसेपीस के साथ एक्सपेरिमेंट करने चाहिए।

जिस खाने को न देखा है और ना चखा है, उसे भी एंजॉय करना
अक्सर हम नए खाने के प्रति एक बार में तैयार नहीं होते, लेकिन बच्चे नई चीज की और आकर्षित होते हैं। साथ ही उसके टेस्ट को एंजॉय भी करते हैं। खासकर आॅर्गेनिक फूड, जिसे आप भी पसंद कर सकते हैं। जिस तरह वह नट्स और फ्रूट्स खाते हैं, उसी तरह आप भी इनका इस्तेमाल कर सकते हैं। यह भी आपकी हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद होगा।

पेट भरने के बाद बिल्कुल भी नहीं खाना
बच्चों की सबसे अच्छी आदत होती है, जब उनका पेट भर जाता है, तो एक बाइट भी नहीं खा सकते। फिर भले ही आप कितनी कोशिश कर लें, बच्चा खाने को फेंक भी देता है। लेकिन बड़े पेट भरने के बाद मन नहीं भरा, तो भी खाते रहते हैं। इस तरह की ओवर ईटिंग उन्हें भारी पड़ती है। ऐसे में जब भूख हो तो ही खाइए, बिना भूख के नहीं खाइए। बच्चों के खाने का समय तयहोता है, लेकिन आपके खाने का समय आगे पीछे होता रहता है, यह भी स्वास्थय के लिए सही नहीं है।

खाने को लेकर उत्साहित
बच्चे खाने को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित होते हैं,वे मजे लेकर खाते हैं। खाने को ही नहीं,वे तो खाने से भरी टेबल देखकर ही आनन्दित हो जाते हैं,लेकिन बड़ों के साथ ऐसा नहीं होता। वे खाने को लेकर बहुत कम उत्साहित होते हैं, वे खाने को दिनचर्या मानते हैं। बहुत कम लोग ही स्वाद का आनन्द लेते हैं। एक्सपट्र्स मानते हैं कि बिना मन से खाया गया खाना ज्यादा फायदा नहीं करता।

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Nature botox: जानिए फ्रोजन खीरा कितने काम का, दूर करेगा चेहरे के रिंकल्स

खीरे की खूबियां तो आपको पता होंगी। त्वचा की सुंदरता को बनाए रखने के लिए लम्बे समय से खीरे का उपयोग होता आया है। त्वचा पर खीरे को लेकर कई तरह के एक्सपेरिमेंट भी होते आए हैं। हाल ही खीरे की चर्चा इसलिए भी हैं, क्योंकि एक अमरीकी सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर कैंडल ने ये दावा किया है कि फ्रोजन खीरा उनके लिए नेचुअल बोटॉक्स साबित हुआ है।

जब खुद पर ट्राय किया तब पता चला
टिकटॉक पर कैंडल ने बताया कि उसने एक वीडियो देखा था, जिसमें एक महिला बर्फ से जमे हुए खीरे का उपयोग कर रही थी, उस महिला को देखकर कैंडल ने भी ऐसा ही किया और कुछ ही दिनों में उसे हैरान करने वाले नतीजे सामने आने लगे।
......
माइग्रेन में भी फायदा
विशेषज्ञों के मुताबिक खीरे का उपयोग न सिर्फ झुर्रियों को कम करने, बल्कि माइग्रेन और अन्य समस्याओं के इलाज के लिए भी किया जा सकता है। कैंडल के अनुभव बताते हैं कि अब उनके फ्रीज में खीरा हमेशा रहता है, वे खीरे के टुकड़ों को जमा देती है और हर दिन उसका उपयोग करती है। आइस रोलर के स्थान पर जमे हुए खीरे को लगाने से चेहरे की सूजन भी दूर होती है। इससे चेहरे की स्कीन बेहद मुलायम हो जाती है। विटामिन से भरपूर प्राकृतिक बोटोक्स खीरा सूजन में मदद करता है, इसे आप आसानी से स्टोर करके रखते हैं।

क्या है बोटॉक्स ट्रीटमेंट
बोटॉक्स स्किन को जवां बनाए रखने में मदद करती है। चेहरे के जिस हिस्से में झुर्रियां होती हैं उस हिस्से में बॉटुलिनम इंजेक्शन के डोज दिए जाते हैं, जिससे चेहरे की मांसपेशियों को आराम मिलता है। मांसपेशियों के सिकुड़ने से झुर्रियां बढ़ती हैं। यह ट्रीटमेंट झुर्रियों को कम करता है। ये ट्रीटमेंट आमतौर पर लोग 25 की उम्र के बाद लेने लगते हैं।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Blood Pressure: सोते समय बढ़ता है ब्लड प्रेशर, जानें कैसे करें कंट्रोल

Blood Pressure: आजकल कि लाइफस्टाइल और डाइट ऐसी हो गई है कि ब्लड प्रेशर की बीमारी बहुत ही ज्यादा कॉमन हो गई है, पहले इस बीमारी का खतरा बढ़ते उम्र के लोगों को ज्यादातर रहता था, वहीं आजकल इस बीमारी ने कम उम्र के लोगों को भी अपने गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। जब व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 140/90 mm /hg के ऊपर रहता है, तो ये हाई ब्लड प्रेशर होता है, वहीं व्यक्ति का ब्लड प्रेशर यदि 90/60 रहता है तो ये लो ब्लड प्रेशर होता है। वहीं सोते समय ब्लड प्रेशर हाई या लो होने का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में इसे सामान्य रखना चाहते हैं तो आपका ब्लड प्रेशर 120/80 mm Hg होना चाहिए,जानिए कि ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना चाहते हैं तो कौन सा स्लीपिंग पोजीशन सबसे बेस्ट साबित हो सकता है।

जानिए नींद का ब्लड प्रेशर के ऊपर कैसे प्रभाव पड़ता है
वास्तव में नींद का सीधा असर ब्लड प्रेशर के ऊपर नहीं पड़ता है, लेकिन यदि आपका मूड खराब है तो ये हार्मोन्स को प्रभावित कर सकता है, इसके परिणाम स्वरूप आपका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, यदि व्यक्ति कम से कम 5 घंटे से कम सोता है तो इसका असर सीधा तौर पर ब्लड प्रेशर के ऊपर पड़ता है, ऐसे में व्यक्ति का ब्लड प्रेशर हाई हो सकता है। इसके अलावा वहीं ये कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज जैसी अन्य बीमारियों का कारण भी बनता है।

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जानिए ब्लड प्रेशर के पेशेंट्स को किस पोजीशन में सोना चाहिए
यदि ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखना चाहते हैं तो ऐसे में करवट लेकर सोना बहुत ही ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है, जो महिलाएं प्रेग्ननेंट हैं उन्हें बाईं और करवट लेकर सोने की सलाह दी जाती है, वहीं ब्लड प्रेशर के पेशेंट्स को सोने के पोजीशन के साथ-साथ खान-पान और लाइफस्टाइल के ऊपर फोकस करने कि भी बहुत ही ज्यादा आवश्य्कता होती है, वहीं बीपी को चेक करते रहे और साथ ही साथ डॉक्टर से भी समय-समय पर सम्पर्क करते रहें।

ब्लड प्रेशर के मरीजों को बाईं करवट में सोना चाहिए। इस पोजीशन में सोने से हृदय को रक्त पंप करने में आसानी होती है, जिससे ब्लड प्रेशर कम होता है। इसके अलावा, इस पोजीशन में सोने से पेट की आंत में जाने वाला रक्त का प्रवाह भी बढ़ता है, जिससे पाचन में सुधार होता है।

ब्लड प्रेशर के मरीजों को पीठ के बल या पेट के बल में सोने से बचना चाहिए। इन पोजीशन में सोने से हृदय पर दबाव पड़ सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।

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यहां कुछ अन्य सुझाव दिए गए हैं जो ब्लड प्रेशर के मरीजों को अच्छी नींद लेने में मदद कर सकते हैं:

- नियमित रूप से सोने और जागने का समय निर्धारित करें।
- अपने कमरे को अंधेरा, शांत और ठंडा रखें।
- सोने से पहले कैफीन और शराब से बचें।
- नियमित रूप से व्यायाम करें, लेकिन सोने से पहले हल्का व्यायाम करें।
- यदि आप ब्लड प्रेशर के मरीज हैं और आपको नींद में परेशानी हो रही है, तो अपने डॉक्टर से बात करें।



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Thursday, 26 October 2023

गोंद से जुड़ेंगी हड्डी, भरेंगे घाव, अब कम समय में ठीक होंगे मरीज

भोपाल. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आइआइएसइआर) भोपाल के शोधकर्ताओं ने दो साल में ऐसा बायोमेडिकल गोंद तैयार किया है, जो चोटिल अंग और घाव भरने से लेकर हड्डी जोड़ने में सक्षम है।

ये टिश्यू भी तेजी से रिपेयर करता है, इससे कम समय में मरीज ठीक होगा। यह दिखने में पारदर्शी है और शरीर के लिए सुरक्षित भी। सूखी और गीली दोनों फॉर्म में काम करता है। उनका यह शोध केमिस्ट्री ए यूरोपियन जर्नल में प्रकाशित किया गया है। आइआइएसइआर के प्रोफेसर आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि इसके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं है। यह खुद समय के साथ घुल जाता है।

न साइड इफेक्ट होगा और न हवा-पानी से बचाने की जरूरत होगी

इसके लिए किसी अतिरिक्त एजेंट या धातु की आवश्यकता नहीं है। अब तक इस गोंद का प्रयोग शरीर के बाहर किया है। अगले चरण में इसका प्रयोग जानवरों पर किया जाएगा, जिसमें घाव, नसों में छेद, टूटी हड्डी और टिश्यू पर लगाया जाएगा। इसके बाद मानव शरीर पर प्रयोग किया जाएगा।

विदेश में चल रहे इस तरह के प्रयोग

बायोमेडिकल पदार्थ को बनाने की प्रेरणा मसल्स नामक जलीय जीव से मिली, जो इसी तरह का चिपचिपा पदार्थ बनाता है। इससे वह चट्टानों व अन्य जीवों से चिपका रह सकता है।

श्रीवास्तव के अनुसार ऐसे पदार्थों का उपयोग विदेश में किया जा रहा है। इनका इस्तेमाल चिकित्सा और टिश्यू इंजीनियरिंग में हो रहा है, लेकिन अब तक उपयोग हो रहे पदार्थ फाइब्रिन, कोलेजन, जिलेटिन और चिटोसन जैसे प्राकृतिक पॉलिमर होते हैं। इनसे शरीर के भीतर होने वाली जैविक प्रक्रियाओं के ट्रिगर होने का जोखिम रहता है। ऐसे में आइआइएसइआर भोपाल का गोंद सुरक्षित और बेहतर विकल्प साबित होगा।

शशांक अवस्थी



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mental health: तनाव को दूर करना आपके हाथ, बचपन में लौटकर देखिए

जयपुर. थैरेपीज का नाम सुनते ही एक बार के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट दिमाग में आता है। लेकिन कुछ ऐसी थैरेपीज भी हैं, जो दर्द और दवाइयों से दूर रहते हुए खेल=खेल में मेंटल स्ट्रेस को दूर करती हैं। हम बात कर रहे हैं प्ले, हॉर्टिकल्चर और बिबलियो थैरेपीज की, जो न सिर्फ मूड को फ्रेश करती हैं, बल्कि हेल्थ के लिए बेनिफिशियल भी साबित होती है। इन्हें घर पर भी आसानी से किया जा सकता है। खास बात यह है कि आप हर उम्र में इन्हें शुरू कर सकते हैं।

खेल=खेल में दूर करें मेंटल स्ट्रेस

प्ले थैरेपी

जिस तरह एक बच्चे की मेंटल हैल्थ के लिए उसका खेलना-कूदना जरूरी होता है, उसी तरह प्ले थैरेपी बड़ों के लिए भी बेनिफिशियल साबित हो सकती है। खेल खेलने से बच्चों के ब्रेन का डवलमेंट होता है। ऐसे में गेम्स सेल्फ हीलिंग का काम करते हैं, जो माइंड के लिए बेस्ट थैरेपी कही जा सकती है। डॉक्टर्स भी स्टेमिना बढ़ाने से लेकर पर्सनैलिटी डवलमेंट के लिए प्ले थैरेपी को प्रमोट करते हैं। यहीं नहीं, इससे एक्सरसाइज भी होती है।

बिबलियो थैरेपी एक डिफरेंट हीलिंग प्रक्रिया है

बिबलियो थैरेपी

बिबलियो थैरेपी एक डिफरेंट हीलिंग प्रक्रिया है। बिबलियो से मतलब स्टोरी टैलिंग से हैं, जिसमें बुक्स पढऩा, स्टोरीज सुनना और शब्दों को लिखना शामिल हैं। इसे राइटिंग थैरेपी से जोड़कर भी देखा जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक डिप्रेशन के ट्रीटमेंट में बिबलियो थैरेपी लाभदायक साबित होती है। इस थैरेपी के रिजल्ट भी लम्बे समय में नजर आते हैं, लेकिन बेहद इफेक्टिव रहते हैं।

प्लांट्स के करीब आने से आंतरिक सुकून मिलता है

हॉर्टिकल्चर थैरेपी

अमरीकन हॉर्टिकल्चर थैरेपी एसोसिएशन ने हॉर्टिकल्चर थैरेपी को खास तरीके से डिफाइन किया है। एसोसिएशन के मुताबिक किसी व्यक्ति को गार्डनिंग या फिर प्लांट बेस्ड एक्टिविटीज में व्यस्त करके ट्रीटमेंट किया जा सकता है। प्लांट्स के करीब आने से आंतरिक सुकून मिलता है। प्लांट्स को देखने से पॉजिटिव इमोशंस जनरेट होते हैं, जो लाइफ को देखने का नजरिया बदल देते हैं। गार्डनिंग से तनाव, नकारात्मकता और उदासी को दूर किया जा सकता है।

बदलती लाइफ में जरूरी
ये थैरेपीज बदलती लाइफ स्टाइल डिजीज जैसे हारपरटेंशन, डिप्रेशन, स्ट्रैस और नैगेटिव थॉट्स को दूर करती है। वहीं खेलना हर उम्र के लिए लाभदायक रहता है, इससे बॉडी में स्फूर्ति बनी रहती है। ऐसे में प्ले थैरेपी लाइफ में नई एनर्जी लाती है, यदि आप खेल से दूर रहते हैं, तो आज से भी इन थैरेपीज का आनन्द ले सकते हैं।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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लीची के पत्तों के अनसुने फायदे, जानें कैसे करें इस्तेमाल

Health Tips: लीची की बात करें तो इसका सेवन सेहत के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है, स्वाद के साथ-साथ ये सेहत के लिए भी बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होती है, इसमें विटामिन ए, विटामिन सी और कई सारे फायदेमंद तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। लीची के पत्तियों के रोजाना सेवन से वहीं स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं भी दूर हो जाती हैं, ये किडनी से जुड़ी समस्या को दूर करने से लेकर यूरिक एसिड को कंट्रोल में रखने में मदद करती है।

खांसी की समस्या को करता है दूर
खांसी की समस्या को दूर करना चाहते हैं तो लीची ही नहीं इसके पत्तियों को भी रोजाना के डाइट में शामिल कर सकते हैं, आप इसकी पत्तियों की चाय बना सकते है , इसके सेवन से सर्दी-जुकाम के जैसी अन्य समस्याएं दूर हो जाएंगी। वहीं इसकी पत्तियों के रोजाना सेवन से पुरानी से पुरानी खांसी की समस्या धीरे-धीरे दूर हो जाती है।

कैंसर की समस्या को करता है दूर
लीची ही नहीं इसकी पत्तियों में भी ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं, इसकी पत्तियों के इस्तेमाल से शरीर को कई तरीके की बीमारियों से लड़ने की बहुत ही ज्यादा मदद मिलती है, वहीं ये कैंसर सेल्स को भी बढ़ने नहीं देता है। साथ ही अन्य बीमारियों को भी दूर करता है।

वेट लॉस में करता है मदद
वेट को कम करना चाहते हैं तो लीची का सेवन बहुत ही ज्यादा गुणकारी साबित हो सकता है, ये फाइबर की मात्रा से भरपूर होता है, इसकी पत्तियों के सेवन से वजन भी कंट्रोल में रहता है, वहीं ये त्वचा को पोषण प्रदान करता है, इसके सेवन से वजन कम और बेली फैट की समस्या भी दूर होती जाती है।

लीची के पत्तों के फायदे

- खांसी और सर्दी-जुकाम में राहत
- कैंसर से बचाव
- वजन कम करने में मदद
- पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है
- रक्तचाप को नियंत्रित करता है
- हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा है
- लीची के पत्तों का सेवन कैसे करें

लीची के पत्तों का सेवन कई तरह से किया जा सकता है। आप इन पत्तों की चाय बनाकर पी सकते हैं, या फिर इन्हें सूखाकर चूर्ण बनाकर सेवन कर सकते हैं।

लीची के पत्तों की चाय बनाने का तरीका

लीची के पत्तों की चाय बनाने के लिए, आपको निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगी:

- 10-15 लीची के पत्ते
- 1 कप पानी

यह भी पढ़े-Neem Datun: नीम की दातून से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों को करें कंट्रोल

विधि:

- लीची के पत्तों को अच्छी तरह से धो लें।
- एक पैन में पानी गर्म करें।
- जब पानी उबलने लगे तो इसमें लीची के पत्ते डाल दें।
- 5-7 मिनट तक पत्तों को पानी में उबालें।
- चाय को छानकर पी लें।
- लीची के पत्तों के सेवन के नुकसान

लीची के पत्तों के सेवन के कोई ज्ञात नुकसान नहीं हैं। हालांकि, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लीची के पत्तों का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।



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Wednesday, 25 October 2023

बालों का झड़ना, थकान, और यौन समस्याएं: घरेलू उपायों से मिलेगा छुटकारा

Health Tips: आजकल कि लाइफस्टाइल और डाइट ऐसी हो गई है कि पुरषों को बढ़ती उम्र के साथ ही कई सारी समस्यायों का सामना करना पड़ता है, बढ़ती उम्र के साथ ही कई सारी समस्याएं ऐसी होती हैं जिनसे वे ग्रसित हो जाते हैं, जैसे कि बालों का टूटना व झड़ना, ड्राई स्किन, गंजापन आदि। इन सभी समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं तो ये घरेलू उपाय आपकी बहुत ही ज्यादा मदद कर सकते हैं, इन समस्यायों को यदि आप दूर करना चाहते हैं तो इन टिप्स को अपना सकते हैं।


बढ़ती उम्र के साथ ही पुरषों को होती है ये कॉमन समस्याएं
थकान
थकान आज के समय में ये एक आम समस्या बनती जा रही है, खासकर पुरषों में, पुरषों को इन समस्याओं का सामना ज्यादा करना पड़ता है क्योंकि उनकी फिजिकल एक्टिविटीज भी ज्यादा होती है, इनको दूर करना चाहते हैं तो आप डाइट में नट्स, ड्राई फ्रूट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। इनके आलावा आप डाइट में हाई फाइबर रिच फूड्स को ले सकते हैं, इनके सेवन से थकान की समस्या जल्द से जल्द दूर होती जाती है।

गंजेपन की समस्या
गंजेपन की समस्या अक्सर पुरषों के तौर पर ज्यादातर महिलाओं को देखने को अधिक मिलती है, ऐसे में इन समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं तो प्याज के रस का इस्तेमाल बहुत ही ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है, प्याज के रस के इस्तेमाल से धीरे-धीरे नए बाल उगने लगते हैं, वहीं ज्यादा फायदा चाहते हैं तो आप इसमें नारियल के तेल को भी मिला सकते हैं।

कब्ज की समस्या
कब्ज एक कॉमन समस्या है, इस समस्या से ज्यादातर पुरुष परेशान रहते हैं, क्योंकि फिजिकल एक्टिविटीज सही से न होने के कारण कब्ज की समस्या होने लग जाती है, ऐसे में इस समस्या से खुद का बचाव करने के लिए डाइट में तरबूज, खरबूज, अजवाइन, सेंधा नमक जैसी चीजों को डाइट में शामिल कर सकते हैं, इनके सेवन से वहीं भूख लगने कि समस्या भी दूर हो जाती है।

ड्राई स्किन
बढ़ती उम्र में पुरषों को ड्राई स्किन की समस्या अक्सर महिलाओं से ज्यादा होती है, इसका मुख्य कारण है कि धूल, धूप, प्रदूषण ये सारे मुख्य कारण हो सकते हैं, इन सब का असर सीधेतौर पर त्वचा के ऊपर पड़ता है, ड्राई स्किन की समस्या को दूर करने के लिए आप डाइट में ओटमील, एप्पल, विटामिन सी युक्त चीजों को शामिल कर सकते हैं, वहीं नहाने के पानी में भी गुलाबजल को मिला सकते हैं।

यह भी पढ़े-Neem Datun: नीम की दातून से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों को करें कंट्रोल

बालों का झड़ना और गंजापन पुरुषों के लिए एक आम समस्या है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप निम्नलिखित घरेलू उपायों को आजमा सकते हैं:

अश्वगंधा - अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो बालों के विकास को बढ़ाने में मदद करती है। अश्वगंधा के चूर्ण को दूध या पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से सेवन करें।
मेथी दाना - मेथी दाना में प्रोटीन, आयरन, और फाइबर जैसे पोषक तत्व होते हैं जो बालों के विकास के लिए आवश्यक होते हैं। मेथी दानों को पानी में भिगोकर पीस लें और इस पेस्ट को अपने बालों पर लगाएं।

नारियल का तेल - नारियल का तेल एक प्राकृतिक कंडीशनर है जो बालों को मजबूत और स्वस्थ बनाता है। नारियल के तेल को अपने बालों पर लगाकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दें, फिर धो लें।

कमजोरी और थकान

कमजोरी और थकान पुरुषों के लिए एक आम समस्या है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप निम्नलिखित घरेलू उपायों को आजमा सकते हैं:

अश्वगंधा - अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो शक्ति और ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करती है। अश्वगंधा के चूर्ण को दूध या पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से सेवन करें।

अदरक - अदरक एक प्राकृतिक उत्तेजक है जो थकान को दूर करने में मदद करता है। एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर पीएं।

नींबू पानी - नींबू पानी एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। एक गिलास पानी में एक नींबू का रस मिलाकर पीएं।

सेक्सुअल समस्याएं

सेक्सुअल समस्याएं पुरुषों के लिए एक आम समस्या है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप निम्नलिखित घरेलू उपायों को आजमा सकते हैं:

अश्वगंधा - अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो यौन इच्छा और प्रदर्शन को बढ़ाने में मदद करती है। अश्वगंधा के चूर्ण को दूध या पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से सेवन करें।

केसर - केसर एक प्राकृतिक उत्तेजक है जो यौन इच्छा को बढ़ाने में मदद करता है। एक गिलास दूध में एक चुटकी केसर मिलाकर पीएं।

शहद - शहद एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है जो पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। एक गिलास दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर पीएं।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन घरेलू उपायों को कुछ दिनों तक नियमित रूप से करने से ही असर होता है। इसके अलावा, स्वस्थ खानपान और नियमित व्यायाम भी इन समस्याओं से छुटकारा पाने में मदद कर सकते हैं।



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Neem Datun: नीम की दातून से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों को करें कंट्रोल

आजकल डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां आम हो गई हैं। इन बीमारियों के कारण लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि इन बीमारियों को नियंत्रित करने में नीम के दातून भी मदद कर सकता है?

नीम के दातून में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं जो इन बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। नीम के दातून के नियमित इस्तेमाल से दांतों में जमी गंदगी और बैक्टीरिया साफ होते हैं। इससे मुंह के अंदर का बैक्टीरियल लोड कम होता है, जिससे डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।


जानिए दातून के कौन-कौन से फायदे होते हैं
जर्नल ऑफ़ क्लीनिकल डायग्रोसिस एन्ड रिसर्च में छपी एक लेख के मुताबिक ये बताया गया है कि नीम का दातून का यदि आप रोजाना इस्तेमाल करते हैं तो इससे स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस की वृद्धि रोकने में बहुत ही ज्यादा मदद मिलती है, ये एक ऐसा तत्व होता है जो दांतों में सड़न की समस्या को दूर करने में बहुत ही ज्यादा असरदार साबित होता है, वहीं ये तत्व डायबिटीज की बीमारी कंट्रोल करने से लेकर हाई ब्लड प्रेशर के जैसी कई सारी समस्यायों को दूर करने में बहुत ही ज्यादा मददगार साबित होते हैं।


जानिए टूथपेस्ट के कौन-कौन से नुकसान होते हैं
आजकल बाजार में कई सारे ऐसे माउथवाश आते हैं जो मुँह में मौजूद बक्टेरिया को मार देते हैं, लेकिन वहीं इनमें कुछ ऐसे केमिकल्स भी होते हैं जो कि मैट्रिक ओक्ससाइड के स्तर को कम कर देते हैं, इनसे ब्लड प्रेशर बढ़ने कि समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। वहीं ब्रिटिश डेंटल जर्नल में 2018 में छपी लेख के मुताबिक जो व्यक्ति ज्यादा माउथवाश का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें ज्यादा डायबिटीज की समस्या भी हो सकती है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Health Tips: दूध में चीनी डालकर पीने से होते हैं ये 10 नुकसान, आज ही छोड़ दें ये आदत

Health Tips: दूध के साथ चीनी का सेवन बहुत ही ज्यादा आम बात है, अक्सर लोग दूध को खाली पीना पसंद नहीं करते हैं, ऐसे में वे इसके स्वाद को बढ़ाने के लिए शुगर का इस्तेमाल करते हैं, यदि आप भी ऐसे हैं जो चीनी के साथ में दूध का इस्तेमाल करते हैं तो आपको बहुत ही ज्यादा सतर्कता बरतने कि जरूरत होती है। ऐसे में जानिए कि दूध के साथ शुगर के सेवन से कौन-कौन से नुकसान हो सकते हैं और इनका साथ में सेवन क्यों नहीं करना चाहिए।

बढ़ सकता है हाई ब्लड प्रेशर
हाई ब्लड प्रेशर के पेशेंट हैं तो आपको शुगर और दूध के साथ में सेवन को अवॉयड करना चाहिए, शुगर में सक्रोज़ की मात्रा बहुत ही ज्यादा होती है, वहीं मिल्क में लैक्टोज की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण डायबिटीज की बीमारी बढ़ने का खतरा बहुत ही ज्यादा बढ़ जाता है। यदि आपका ब्लड प्रेशर अक्सर हाई रहता है तो दूध के साथ में शुगर के सेवन से बचना चाहिए।


फैटी लिवर का बढ़ सकता है खतरा
दूध में चीनी डालकर पीते हैं तो ये आपके मेटाबायोलिज्म को भी प्रभावित करता है, इसके कारण आपके लिवर में फैट एकत्रित होने लग जाता है, जिसके कारण फैटी लिवर की समस्या बाद सकती है।


कोलेस्ट्रॉल लेवल हाई हो जाना
दूध में चीनी डालकर पीते हैं तो ये आपके कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढ़ा सकती है, कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ने से आपके हार्ट को अनेकों समस्यायों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए कोशिश करें कि दूध के साथ कभी भी शुगर को मिक्स करके न पियें।

एजिंग
लगातार दूध में शुगर डालकर सेवन करते हैं तो इससे एजिंग की प्रोब्लेम्स बढ़ सकती हैं, इसके ज्यादा इस्तेमाल से डल स्किन, रिंकल्स, फेस के ग्लो का कम हो जाना जैसी अन्य समस्यायों का सामना करना पड़ सकता है, इनके कारण आप वहीं उम्रदराज दिखाई देने लगते हैं।

यह भी पढ़े-Health News: सर्दी-जुकाम से लेकर हड्डियों के दर्द तक, दूध-शहद से दूर होंगी ये 10 समस्याएं

दूध में चीनी डालकर पीने से होने वाले 10 नुकसान:

वजन बढ़ सकता है: चीनी एक कैलोरीयुक्त पदार्थ है जो वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। दूध में चीनी डालकर पीने से कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे वजन बढ़ सकता है।

मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है: चीनी खून में शुगर के स्तर को बढ़ा सकती है, जिससे मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है। दूध में चीनी डालकर पीने से खून में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।

पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं: चीनी पाचन तंत्र को परेशान कर सकती है। दूध में चीनी डालकर पीने से कब्ज, दस्त, और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

दांत खराब हो सकते हैं: चीनी दांतों के लिए हानिकारक होती है। दूध में चीनी डालकर पीने से दांतों में सड़न और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।

अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है: चीनी अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकती है। दूध में चीनी डालकर पीने से अस्थमा के खतरा बढ़ सकता है।

हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है: चीनी रक्त में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को बढ़ा सकती है, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। दूध में चीनी डालकर पीने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर बढ़ सकते हैं, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।

स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है: चीनी स्ट्रोक का एक जोखिम कारक है। दूध में चीनी डालकर पीने से स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

कैंसर का खतरा बढ़ सकता है: कुछ अध्ययनों से पता चला है कि चीनी कैंसर का एक जोखिम कारक हो सकती है। दूध में चीनी डालकर पीने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

त्वचा की समस्याएं हो सकती हैं: चीनी त्वचा की समस्याओं को बढ़ा सकती है। दूध में चीनी डालकर पीने से मुंहासे, झुर्रियां, और अन्य त्वचा की समस्याएं हो सकती हैं।

ऊर्जा का स्तर कम हो सकता है: चीनी ऊर्जा का एक त्वरित स्रोत है, लेकिन यह लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान नहीं करती है। दूध में चीनी डालकर पीने से ऊर्जा का स्तर कम हो सकता है।



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Health News: शरीर में अनचाही गांठों से हैं परेशान? कहीं ये लिपोमा तो नहीं, जानिए कैसे करें पहचान

Lipoma: गांठ की समस्या होने पर बॉडी को अनेकों नुकसान हो सकते हैं, इस समस्या को यदि आप ज्यादा दिन तक अनदेखा करते हैं तो स्वास्थ्य से जुड़ी अनेकों समस्याएं आपको झेलनी पड़ सकती हैं। गांठ की समस्या होने के कारण ये कैंसर के जैसी गंभीर बीमारी भी बन सकती है। गांठ होने के पीछे और भी कई सारे कारण हो सकते हैं, जैसे कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, ओबेसिटी, लेस फिजिकल एक्टिविटी आदि सारे कारण हो सकते हैं, जिनके कारण शरीर में गांठ बन सकती है। ऐसे में जानिए कि बॉडी में अनचाही गांठ कहीं लिपोमा तो नहीं, जानिए।

जानिए लिपोमा के कौन-कौन से लक्षण हो सकते हैं
- लिपोमा की बात करें तो ये बॉडी के किसी भी हिस्से में हो सकता है जैसे कि कंधे, पेट, जांघ, हाँथ, पैर, पीठ आदि में।
-लिमोपा आमतौर पर दर्दनाक नहीं होता है, लेकिन ये ज्यादा बढ़ने पर गांठ भी बन सकती है, जिसके कारण ये दर्दनाक साबित होते हैं।
-लिपोमा की बात करें तो ये ज्यादा टाइट गांठ नहीं होती है, उंगलियों से यदि इसपर प्रेशर बनाया जाता है तो ये आसानी से इधर-उधर चलते हैं।
-लिपोमा कि शुरुआत की बात करें तो ये दिखने में छोटे से होते हैं, लेकिन समय के साथ ही ये बढ़ना शुरू कर देते हैं।


जानिए इस बीमारी का खतरा किस व्यक्ति को ज्यादातर होता है
लिपोमा की बीमारी का खतरा आमतौर पर 40 से लेकर 60 वर्ष के लोगों को ज्यादातर होती है, ये बीमारी अक्सर इस ऐजग्रुप के लोगों को ज्यादातर होती है, इसलिए कहा जाता है कि बढ़ती उम्र के लोगों को वजन कम रखने कि बहुत ही ज्यादा आवश्य्कता होती है।

जानिए लिपोमा के क्या-क्या कारण होते हैं
लिपोमा होने के कई सारे कारण हो सकते हैं, जैसे कि शरीर में फैट जरूरत से ज्यादा बढ़ जाने के कारण, वहीं इसके होने का कारण ये भी हो सकता है कि ये अनुवांशिक रूप से परिवारों में एक-दूसरे को हो सकता हो।

लिपोमा के आम लक्षण निम्नलिखित हैं:

- त्वचा के नीचे एक छोटी, नरम गांठ
- दर्द या असुविधा का अभाव
- गांठ का आकार धीरे-धीरे बढ़ता है

लिपोमा के कारण

लिपोमा के कारणों के बारे में पूरी तरह से पता नहीं है। हालांकि, कुछ कारकों को लिपोमा के जोखिम को बढ़ाने वाला माना जाता है, जिनमें शामिल हैं:

आनुवांशिकता
उम्र
मोटापा
कुछ दवाएं
लिपोमा का इलाज

लिपोमा का कोई इलाज नहीं है। हालांकि, यह आमतौर पर बिना किसी समस्या के ही रहती है। कुछ मामलों में, लिपोमा को सर्जरी द्वारा हटाया जा सकता है।



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Tuesday, 24 October 2023

सुबह खाली पेट आंवला का पानी पीने से डायबिटीज हमेशा रहेगा कंट्रोल में

Amla Water Benefits: आंवला का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। आंवला को सुपर फूड कहा जाता है। आंवला में विटामिन सी और अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य से लेकर स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करते है। लेकिन आंवला की तरह ही इसके पाउडर से बने पानी का सेवन करना भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। जी हां, सुबह खाली पेट आंवला का पानी पीने से सेहत को कई तरह के लाभ मिलते है। वजन को कम करने से लेकर पाचन क्रिया को बेहतर बनाने के लिए सुबह खाली पेट आंवले का पानी का सेवन करना फायदेमंद होता है। तो आइए जानते है सुबह खाली पेट आंवले का पानी पीने से सेहत को मिलने वाले फायदे के बारे में

आंवला का पानी पीने के फायदे
डायबिटीज कंट्रोल रखने में फायदेमंद
डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए सुबह खाली पेट आंवले का पानी का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। आंवला में क्रोमियम मौजूद होता है, जो ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद करता है। साथ ही ये डायबिटीज को कंट्रोल में रखता है।

वजन कम करने में फायदेमंद
वजन कम करने के लिए सुबह खाली पेट आंवले का पानी का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। आंवला में अमीनो एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर की मेटाबोलिक दर को सुधारता है। जिससे शरीर पर फैट नहीं जमता है और वजन कम करने में मदद मिलती है।

पाचन क्रिया बेहतर बनाने में फायदेमंद
पाचन क्रिया को बेहतर बनाने के लिए सुबह खाली पेट आंवले का पानी का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। आंवला में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। साथ ही आंवला पानी पाचन को सुधारने में मदद करता है।

आंवला के पानी के फायदे:

इम्यूनिटी को बढ़ाता है: आंवला में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। विटामिन सी इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है।

पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है:
आंवला में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। आंवला का पानी कब्ज, अपच और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है।

वजन कम करने में मदद करता है:
आंवला में कैलोरी की मात्रा कम होती है और यह फाइबर से भरपूर होता है। इसलिए, आंवला का पानी वजन कम करने में मदद कर सकता है।

डायबिटीज को नियंत्रित करता है: आंवला में क्रोमियम होता है, जो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसलिए, आंवला का पानी डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है।

त्वचा के लिए फायदेमंद होता है: आंवला में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं। आंवला का पानी त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करता है।

आंवला का पानी कैसे बनाएं:

आंवला का पानी बनाने के लिए एक चम्मच आंवला पाउडर को एक गिलास पानी में मिलाकर अच्छी तरह से हिलाएं। आप चाहें तो इसमें शहद या नींबू का रस भी मिला सकते हैं।

सुबह खाली पेट आंवला का पानी पीने के फायदे:

सुबह खाली पेट आंवला का पानी पीने से अधिक लाभ मिलते हैं। सुबह खाली पेट आंवला का पानी पीने से शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और पाचन क्रिया भी बेहतर होती है।

आंवला का पानी एक स्वादिष्ट और सेहतमंद पेय है। सुबह खाली पेट आंवला का पानी पीने से कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।



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हार्ट अटैक के संकेत: इन्हें नजरअंदाज करने पर जा सकती है जान

heart attack Symptoms: आजकल की बदलती लाइफस्टाइल और गलत खानपान की वजह से ज्यादातर लोग हार्ट से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे है। आज के समय में हार्ट अटैक की समस्या आम हो गई है। हार्ट अटैक पहले ज्यादा उम्र के लोगों में होती थी लेकिन अब ये समस्या 25 से 30 साल के कम उम्र के युवाओं में भी होने लगी है। भारत में सबसे ज्यादा हार्ट अटैक से लोगों की जान जा रही है। हार्ट अटैक अचानक आता है, लेकिन इस अटैक के आने से पहले शरीर में कई तरह के लक्षण दिखने लगते है। ऐसे में समय रहते ही इन लक्षणों की पहचान करके बीमारी को जानलेवा होने से रोका जा सकता है।


हार्ट में ब्लड का फ्लो रुक जाने से हार्ट अटैक होता है। धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और फैट के जम जाने की वजह से हार्ट में ब्लड ठीक से फ्लो नहीं हो पाता है जो कारण हार्ट अटैक का कारण बनता हैं। इसलिए हम सभी को ये बात जरूर पता होनी चाहिए कि हार्ट अटैक से पहले किस तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं और अटैक आने के तुरंत बाद क्या करना चाहिए। तो आइए जानते है हार्ट अटैक आने से पहले शरीर में दिखने वाले लक्षणों के बारे में
हार्ट अटैक के लक्षण

1. सीने में दर्द और बेचैनी
ज्यादातर हार्ट अटैक से पहले सीने में दर्द, बेचैनी और पसीना की समस्या होती है। इस दौरान सीने के बीच में या फिर उल्टे हाथ की तरफ बहुत अधिक भारीपन, कुछ निचोड़ने जैसा अहसास या फुलावट और दर्द का एहसास होता है।

2. कमजोरी और चक्कर आना
ज्यादातर हार्ट अटैक से पहले कमजोरी महसूस होना और चक्कर या ठंडा पसीना आने की समस्या हो सकती है। जबड़े, गर्दन और पीठ में एक साथ दर्द या बेचैन का एहसास हो सकता है।

3. सांस ले में परेशानी होना
सांस ले में परेशानी होना या छोटी-छोटी सांस लेने जैसी स्थिति हो सकती है। सीने में दर्द या बेचैनी के साथ ठीक से सांस न ले पाने की समस्या हो सकती है।

4. बहुत अधिक थकान लगना
बिना किसी वजह से बहुत अधिक थकान महसूस होना, जी मिचलाना और उल्टी होना भी हार्ट अटैक आने से पहले दिखने वाले लक्षण हो सकते हैं।

हार्ट अटैक के सबसे आम लक्षण निम्नलिखित हैं:

- सीने में दर्द या बेचैनी
- सांस लेने में तकलीफ
- कंधे, गर्दन, या जबड़े में दर्द
- चक्कर आना, उल्टी या जी मिचलाना
- पसीना आना
- थकान
- बेहोशी

हार्ट अटैक से बचाव के उपाय

हार्ट अटैक से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

- स्वस्थ आहार लें
- नियमित रूप से व्यायाम करें
- धूम्रपान न करें
- शराब का सेवन कम करें
- वजन नियंत्रित रखें
- नियमित रूप से डॉक्टर से चेकअप करवाएं



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सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ काली मिर्च का सेवन, सेहत और स्किन के लिए वरदान

Health Tips: काली मिर्च का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। काली मिर्च में विटामिन सी, विटामिन बी6, प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फास्‍फोरस जैसे तत्व के गुण पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य और स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करते है। लेकिन गर्म पानी के साथ काली मिर्च का सेवन करने से सेहत को कई तरह के लाभ मिलते हैं। जी हां, सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ काली मिर्च का सेवन करने से सेहत और स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है। साथ ही गर्म पानी के साथ काली मिर्च का सेवन करने से शरीर से सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। तो आइए जानते है सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ काली मिर्च का सेवन करने से सेहत को मिलने वाले फायदे के बारे में

गर्म पानी के साथ काली मिर्च का सेवन करने के फायदे
1. शरीर को डिटॉक्स करने में फायदेमंद
सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ काली मिर्च का सेवन करने से शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है। गर्म पानी के साथ काली मिर्च सेवन करने से शरीर से सभी विषाक्त पदार्थों और रसायनों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। साथ ही ये पाचन में सुधार करता है और पेट की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।

2. वजन कम करने में फायदेमंद
सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ काली मिर्च का सेवन करने से वजन को कम करने में मदद मिलती है। ये दोनों मिलकर बेहतर पाचन और मेटाबॉलिज्‍म को बढ़ाते हैं और अधिक कैलोरी बर्न होती है। जिससे वजन को कम करने में मदद मिलती है।

3. स्किन के लिए फायदेमंद
सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ काली मिर्च का सेवन करने से स्किन टेक्सचर को सुधारने में मदद मिलती है। इसके साथ ही इनका सेवन करने से स्किन में नमी आती और स्किन में रूखापन नहीं आता। इसके अलावा स्किन हेल्दी और चमकदार बनती है।

4. डिहाइड्रेशन की समस्या को दूर करने में फायदेमंद
सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ काली मिर्च का सेवन करने से डिहाइड्रेशन की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है। ये शरीर में होने वाली पानी की कमी को दूर करने में सहायक होता है। साथ ही शरीर में पानी की कमी न होने से थकान का अनुभव भी नहीं होता है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Sunday, 22 October 2023

डेंगू के खिलाफ जंग... पहली दवा का मानव पर परीक्षण

न्यूयॉर्क. डेंगू बुखार के खिलाफ जंग में महत्त्वपूर्ण कामयाबी मिली है। अमरीकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने डेंगू की बीमारी की पहली दवा बनाई है। हाल ही इसका ह्यूमन ट्रायल किया गया। वैज्ञानिकों ने दावा किया कि ट्रायल सफल रहा। यह डेंगू के खिलाफ एंटीवायरल गतिविधि प्रदर्शित करने वाली पहली गोली है और कई मरीजों को वायरस के एक रूप से बचाने में सक्षम है।

जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के वैज्ञानिकों के मुताबिक ह्यूमन ट्रायल में 10 लोग शामिल किए गए। इन्हें वैक्सीन से पांच दिन पहले एक गोली दी गई। बाद में 21 दिन तक लगातार गोली दी गई। दस में से छह लोगों के रक्त में रोगजनक वायरस के संपर्क में आने के बावजूद डेंगू वायरस नहीं मिला। इनकी 85 दिन तक निगरानी की गई। दवा दो वायरल प्रोटीन की क्रिया को अवरुद्ध करती है। इससे वायरस को प्रतिलिपि बनाने से रोका जा सकता है।

चार प्रकार के डेंगू की होगी रोकथाम

वैज्ञानिक गोली के दूसरे चरण के परीक्षण की तैयारी कर रहे हैं। इसका मकसद चार अलग-अलग प्रकार के डेंगू को रोकना है। अगला कदम इलाज के तौर पर दवा का परीक्षण होगा। अगर दवा बड़े पैमाने पर प्रभावी साबित होती है, तो इसे विभिन्न देशों को उपलब्ध कराया जाएगा। प्राथमिकता निम्न और मध्यम आय वाले देशों को दी जाएगी, जहां डेंगू के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं।

हर साल दुनिया में लाखों मामले

डेंगू मच्छर से होने वाली बीमारी है। इसका बुखार लक्षणहीन होता है। शुरुआत में जोड़ों में गंभीर दर्द और ऐंठन पैदा होती है। इस बीमारी की अब तक कोई दवा या वैक्सीन नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर साल दुनिया में लाखों लोग डेंगू की चपेट में आते हैं। भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक पिछले साल देश में इसके 2.33 लाख से ज्यादा मामले सामने आए।



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Saturday, 21 October 2023

कुछ पुरुष पर्याप्त शुक्राणु क्यों पैदा नहीं करते हैं, स्टडी में सामने आई जानकारी

नए शोध ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि शुक्राणु निर्माण की प्रक्रिया में क्या गलत हो रहा है, जिससे यह समझने में मदद मिली है कि क्यों कुछ पुरुषों में अंडे को निषेचित करने के लिए पर्याप्त शुक्राणु नहीं बनते हैं।

दरअसल, दुनिया भर में लाखों जोड़े बांझपन का अनुभव करते हैं, जिनमें से आधे मामले पुरुषों में उत्पन्न होते हैं। 10 प्रतिशत बांझ पुरुषों में बहुत कम या कोई शुक्राणु उत्पन्न नहीं होता है।

यूके में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में वेलकम सेंटर फॉर सेल बायोलॉजी के सहयोग से अमेरिका में स्टोवर्स इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल रिसर्च के नए अध्ययन से संभावित उपचारों पर संभावित सिद्धांत सामने आ सकते हैं।

स्टोवर्स इन्वेस्टिगेटर स्कॉट हॉले ने कहा, "पुरुषों में बांझपन का एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि उनमें शुक्राणु नहीं बन पाते हैं। यदि आप वास्तव में जानते हैं कि क्या गलत है, तो अभी ऐसी प्रौद्योगिकियां उभर रही हैं, जो आपको इसे ठीक करने का एक तरीका दे सकती है।"

मनुष्यों सहित अधिकांश यौन प्रजनन करने वाली प्रजातियों में, शुक्राणु और अंडाणु कोशिकाओं का उत्पादन करने के लिए जाली की तरह पुल जैसी एक महत्वपूर्ण प्रोटीन संरचना को ठीक से बनाने की आवश्यकता होती है।

जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि चूहों में, इस पुल में एक और बहुत विशिष्ट बिंदु को बदलने से यह ढह गया, जिससे बांझपन हो गया और इस प्रकार अर्ध-सूत्रीविभाजन के साथ समान समस्याओं के कारण पुरुषों में मानव बांझपन की जानकारी मिली।

अर्ध-सूत्रीविभाजन, शुक्राणु और अंडों को जन्म देने वाली कोशिका विभाजन प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं, जिनमें से एक बड़ी प्रोटीन संरचना का निर्माण होता है, जिसे सिनैप्टोनेमल कॉम्प्लेक्स कहा जाता है।

हॉले लैब और वेलकम सेंटर के अन्वेषक ओवेन डेविस ने समझाया, "बांझपन में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता अर्ध-सूत्रीविभाजन में दोष है। यह समझने के लिए कि गुणसूत्र प्रजनन कोशिकाओं में सही तरीके से कैसे अलग हैं, हम वास्तव में इस बात में रुचि रखते हैं कि जब उनके बीच सिनैप्टोनेमल कॉम्प्लेक्स बनता है तो उससे ठीक पहले क्या होता है।"

लेखकों ने चूहों में एक प्रमुख सिनैप्टोनेमल कॉम्प्लेक्स प्रोटीन में उत्परिवर्तन करने के लिए एक सटीक जीन संपादन तकनीक का उपयोग किया, जिसने शोधकर्ताओं को पहली बार जीवित जानवरों में प्रोटीन के प्रमुख क्षेत्रों के कार्य का परीक्षण करने की अनुमति दी।

मॉडलिंग प्रयोगों से अनुमानित केवल एक उत्परिवर्तन को चूहों में बांझपन के दोषी के रूप में सत्यापित किया गया था।

हॉले ने कहा, "हमने इस विशाल संरचना में एक प्रोटीन के एक छोटे से क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया, जिसके बारे में हमें पूरा यकीन था कि यह बांझपन का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।"

बिलमायर ने कहा, "मेरे लिए वास्तव में रोमांचक बात यह है कि हमारा शोध हमें इस बुनियादी प्रक्रिया को समझने में मदद कर सकता है जो जीवन के लिए आवश्यक है।"

--आईएएनएस



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पेट में गैस से सिरदर्द हो रहा है? इन 5 चीजों से तुरंत आराम मिलेगा

Gastric Headache: गैस की समस्या बहुत ही ज्यादा कॉमन होती है, लेकिन क्या आपको पता है कि कई बार ये इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि सिरदर्द के जैसी कई सारी समस्याएं भी आपको झेलनी पड़ सकती हैं, ऐसे में जानिए कि सिरदर्द की समस्या से निजात पाना चाहते हैं तो कौन-कौन से घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकते हैं।

Health Tips: गैस की समस्या अक्सर शरीर में बनी ही रहती है, इसके होने के पीछे कई सारे कारण हो सकते हैं जैसे कि डाइट में उल्टी-सीधी चीजें खाने के कारण, तेल-मसाले युक्त ज्यादा चीजों का सेवन करने के कारण और भी कई सारे कारण हो सकते हैं। लेकिन वहीं सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब यही गैस की समस्या बॉडी के दूसरे पार्ट्स तक पहुंच जाती है, इससे बॉडी के अन्य दूसरे पार्ट्स के ऊपर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए जानिए कि यदि इन समस्यायों से निजात पाना चाहते हैं तो कौन-कौन से घरेलू उपायों को अपना सकते हैं।

गैस्ट्रिक सिरदर्द के कौन-कौन से कारण हो सकते हैं
गैस्ट्रिक सिरदर्द के कई सारे कारण हो सकते हैं, जैसे कि एसिडिटी के कारण, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल में समस्यायों के आने के कारण आदि। गैस की वजह से ज्यादातर सिरदर्द इसलिए भी होता है कि क्योंकि आंत दिमाग के कड़ी से जुड़ी हुई होती है, जिसके कारण गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम में समस्यायों के कारण सिरदर्द झेलना पड़ सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण ये होता है कि बॉडी में भरपूर मात्रा में खाना नहीं पहुंच पा रहा है, जिसके कारण सिरदर्द हो रहा है।

जानिए सिरदर्द दूर करने के घरेलू उपायों के बारे में

नींबू पानी
नींबू पानी का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज्यादा बेहतरीन होता है, ये कई सारे एंटीइन्फ्लामेट्री, एंटी ऑक्सीडेंट के जैसे कई सारे पोषक तत्वों से भरपूर होता है, आप रोजाना गुनगुने पानी में नींबू के रस को पिएं, वहीं खाने में भी नींबू के रस का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके रोजाना सेवन से आपके सिरदर्द की समस्या धीरे-धीरे दूर हो जाती है।


कोल्ड पैक ट्राई करें
यदि आपके पेट में गैस की वजह से सिरदर्द की समस्या रहती है तो आप अपने माथे पर एक ठंडा पैक लगा लें, इसके लिए आप एक तौलिये को लें और के टुकड़ों को अच्छे से लपेट लें, और 3-4 मिनट तक इसको सिर में हल्के हांथों से सिकाई करें, ऐसा करने में सिर दर्द की समस्या दूर हो जाएगी, वहीं ब्लड फ्लो भी सही बना रहेगा।


सौंफ के पानी का सेवन करें
सौंफ के पानी का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज्यादा अच्छा होता है,गैस के कारण सिर में होने वाले दर्द को दूर करना चाहते हैं तो सौंफ के पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके रोजाना सेवन से वहीं आपका मूड भी बूस्ट हो जाता है।


ठंडा दूध लें
रोजाना एक गिलास ठंडे दूध के सेवन से स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं दूर हो जाती हैं, वहीं यदि आपको अक्सर पेट से जुड़ी समस्या रहती है या गैस की वजह से ज्यादातर सिर में दर्द बना रहता है तो भी ठंडे दूध का रोजाना इस्तेमाल कर सकते हैं, इससे सिरदर्द की समस्या से राहत मिल जाती है।

पुदीने का सेवन करें
पुदीने की चाय के सेवन से पेट से जुड़ी कई दिक्कतें दूर हो जाती हैं, ये एंटी बैक्टेरियल और एंटी इन्फ्लामेट्री के जैसी कई सारे पोषक तत्वों से भरपूर होता है, ये आपके पेट मं दर्द को शांत करने के साथ-साथ तुरंत राहत भी दिलाता है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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पीसीओडी और पीसीओएस में अंतर जानिए, भ्रम से बचें

पीसीओडी और पीसीओएस में क्या अंतर है?

पीसीओडी और पीसीओएस दो ऐसी समस्याएं हैं जो महिलाओं में आमतौर पर देखी जाती हैं। इन दोनों समस्याओं के लक्षण एक जैसे होने के कारण अक्सर लोग इन दोनों में भ्रमित हो जाते हैं। हालांकि, इन दोनों के बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं।

पीसीओडी क्या है?

पीसीओडी का मतलब है पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर। इस स्थिति में, महिलाओं के अंडाशय में कई छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं। इन सिस्ट के कारण अंडाशय में अंडे नहीं बन पाते हैं और मासिक धर्म चक्र अनियमित हो जाता है। पीसीओडी के कारण महिलाओं में बालों का झड़ना, चेहरे पर मुँहासे और वजन बढ़ना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

पीसीओएस क्या है?

पीसीओएस का मतलब है पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम। यह एक हार्मोनल विकार है जो महिलाओं में बांझपन, वजन बढ़ना और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। पीसीओएस में, महिलाओं के अंडाशय में कई छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं। इन सिस्ट के कारण अंडाशय में अंडे नहीं बन पाते हैं और मासिक धर्म चक्र अनियमित हो जाता है। पीसीओएस के कारण महिलाओं में इन्सुलिन प्रतिरोध भी हो सकता है, जो टाइप 2 मधुमेह का कारण बन सकता है।

यह भी पढ़े-5 मिनट में ब्लैकहेड्स से छुटकारा! ये 4 घरेलू उपाय आजमाएं

पीसीओडी और पीसीओएस में अंतर

पीसीओडी और पीसीओएस में निम्नलिखित अंतर हैं:

- पीसीओडी एक सामान्य स्थिति है, जबकि पीसीओएस एक गंभीर बीमारी है।
- पीसीओडी का इलाज जीवनशैली में बदलाव करके किया जा सकता है, जबकि पीसीओएस का इलाज दवाओं और जीवनशैली में बदलाव करके किया जा सकता है।
- पीसीओडी से महिलाओं को गर्भधारण करने में कठिनाई हो सकती है, जबकि पीसीओएस से महिलाओं को गर्भधारण करने में बहुत अधिक कठिनाई होती है।

पीसीओडी और पीसीओएस का इलाज

पीसीओडी और पीसीओएस के इलाज में जीवनशैली में बदलाव और दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है। जीवनशैली में बदलाव में शामिल हैं:

- स्वस्थ आहार खाना
- नियमित रूप से व्यायाम करना
- कम वजन बनाए रखना

दवाइयों में शामिल हैं:

- गर्भनिरोधक गोलियां
- इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने वाली दवाइयां
- एंडोमेट्रियोसिस के इलाज के लिए दवाइयां

यदि आपको पीसीओडी या पीसीओएस के लक्षण हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर आपके लक्षणों का मूल्यांकन करेगा और आपके लिए सही इलाज की सिफारिश करेगा।



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उंगलियों के कालेपन को दूर करने के लिए ये 4 घरेलू उपाय हैं असरदार

हाथों और पैरों का कालापन हमारी खूबसूरती को खराब कर सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि धूप में ज्यादा देर तक रहना, एलर्जी , या किसी बीमारी के कारण। इन घरेलू उपायों से आप हाथों और पैरों के कालेपन को दूर कर सकते हैं।

1. नींबू और गुलाबजल

नींबू में ब्लीचिंग गुण होते हैं, जो कालेपन को दूर करने में मदद करते हैं। गुलाबजल त्वचा को मॉइस्चराइज़ करता है।

विधि:

एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पेस्ट को हाथों और पैरों पर लगाकर 15 मिनट के लिए छोड़ दें।
फिर सादे पानी से धो लें।

यह भी पढ़े-Soaked Anjeer Benefits: भीगे हुए अंजीर: सेहत के लिए वरदान, रोज सुबह खाएं और पाएं अनगिनत फायदे

2. हल्दी और गुलाबजल

हल्दी में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाते हैं।

विधि:

एक चम्मच हल्दी पाउडर और एक चम्मच गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पेस्ट को हाथों और पैरों पर लगाकर 15 मिनट के लिए छोड़ दें।
फिर सादे पानी से धो लें।

3. संतरे के छिलके

संतरे के छिलके में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करते हैं।

विधि:

संतरे के छिलकों को सूखाकर पाउडर बना लें।
इस पाउडर में गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पेस्ट को हाथों और पैरों पर लगाकर 15 मिनट के लिए छोड़ दें।
फिर सादे पानी से धो लें।

4. कच्चा दूध

कच्चा दूध त्वचा को मॉइस्चराइज़ करता है और कालेपन को दूर करने में मदद करता है।

विधि:

नहाने से पहले हाथों और पैरों पर कच्चा दूध लगाएं।
15 मिनट के बाद सादे पानी से धो लें।
इन उपायों को नियमित रूप से करने से हाथों और पैरों के कालेपन से छुटकारा मिल सकता है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Friday, 20 October 2023

बिटिया के जन्म पर लोगों की प्रतिक्रिया देख मन विचलित होता था

बिटिया के जन्म पर लोगों की प्रतिक्रिया देख मन विचलित होता था
डॉ. शिप्रा धर
संडे गेस्ट एडिटर
मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। जब मैं बेहद छोटी थी, तभी पिता गुजर गए। मां ने पाला, लेकिन कभी मैंने अपने परिवार में बेटियों के साथ भेदभाव नहीं देखा। जब डॉक्टरी के पेशे में आई तो यहां बिटिया के जन्म पर लोगों की जो प्रतिक्रिया होती थी, उसे देखकर मन बड़ा विचलित होता था। उसके बाद मैंने और पति ने फैसला लिया कि अस्पताल में बिटिया के जन्म पर हम कोई शुल्क नहीं लेंगे। साल 2014 से हम अस्पताल में प्रसव पर शुल्क नहीं ले रहे।
अपनी बिटिया को भी आपकी तरह बनाएंगे -
धीरे-धीरे लोगों की सोच में बदलाव आने लगा। बिटिया होने पर कई लोग अब मेरे पास खुशी-खुशी आते हैं और कहते हैं कि आप समाज के लिए इतना बड़ा काम कर रही हैं, हम भी अपनी बिटिया को पढ़ा-लिखाकर आपकी तरह बनाएंगे। मेरे लिए उनके यह शब्द प्रोत्साहन का काम करते हैं।

पीएम मोदी से मिली सराहना -
2019 में जब बनारस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आए तो उस दौरान मेरी उनसे मुलाकात हुई। जब उन्हें मैंने बेटियों के लिए किए जा रहे मेरे कार्यों के बारे में जानकारी दी तो उन्होंने मुझे उस समय कुछ नहीं कहा, लेकिन कुछ ही देर बाद जब उन्होंने वहां सभा में मेरे इस कार्य की सराहना की तो उसे सुनकर मेरे आंसू छलक पड़े। उन्होंने अमरीका में भी मेरे इस कार्य का जिक्र किया जिसके बारे में मुझे वहां मौजूद साथी डॉक्टर्स से पता चला। सरकार के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की पहल के बाद मेरे कार्यों की पहचान और बढऩे लगी। गुजरात सरकार ने भी मुझे सम्मानित किया है।

बेटियों को पढ़ाने के साथ पैसा भी जमा करातीं -
स्टाफ की बेटियों को पढ़ाना शुरू किया, कोशिका के नाम से हमने अस्पताल में ही बच्चियों की पढ़ाई के लिए सेंटर खोलकर पढ़ाना शुरू किया, जिसे अब कुछ टीचर्स चला रहे हैं। अभी हमारे सेंटर में 42 बच्चियों को निशुल्क पढ़ा रहे हैं। 14 ऐसी बेटियां है जिनका जन्म मैंने ही करवाया, उन्हें यहां पढ़ाते हैं और सुकन्या समृद्धि योजना में उनके नाम से पैसा भी जमा कराती हूं, जो उनके भविष्य में काम आएगा। उनके कौशल विकास का काम भी कर रहे हैं, जिसमें कैंडल्स बनाना, दिए बनाना भी उन्हें सिखाया जाता है।


गांव से निकल इन बेटियों ने विदेश तक में शुरू किया कारोबार
भोपाल। बेटियों के लिए अच्छी शिक्षा और हुनर सबसे जरूरी है। बेटियों को बराबरी का हक दिलाने का काम रही हैं पाथाखेड़ा की भारती अग्रवाल का। वे पिछले 37 वर्षों से महिलाओं के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने इसकी शुरुआत सात महिलाओं के ग्रुप से की। अब तक 36 हजार महिलाओं को वह स्वरोजगार से जोड़ चुकी हैं। उनके यहां से निकलीं करीब 100 बच्चियां विदेश में नौकरी कर अपने सपने साकार कर रही हैं। भारती कहती हैं कि सबसे हमने झूलाघर शुरू किया, ताकि महिलाएं अपने बच्चों को वहां छोड़कर कुछ नया सीख सकें। धीरे-धीरे महिलाएं हमसे जुड़ने लगीं।

36 हजार को नौकरी-स्वरोजगार से जोड़ा
भारती बताती हैं, महिलाओं को सबसे पहले सिलाई-कढ़ाई सिखाई। उन्हें हिसाब-किताब करने लायक गणित सीखाई। हम महिला आश्रय गृह भी चलाते हैं, जहां 14 से 49 साल तक की पीडि़त और निराश्रित महिलाएं रहती हैं। उन्हें स्किल सीखाकर रोजगार से जोड़ते हैं। अब तक 36 हजार महिलाओं को नौकरी और स्वरोजागर से जोड़ चुके हैं। हम सिर्फ उन्हीं महिलाओं को जोड़ते हैं जो परिवार नियोजन का पालन करे, यानी उनके दो से ज्यादा बच्चे ना हो। क्योंकि इससे महिलाएं अपने भविष्य पर भी ध्यान दे पाती हैं। अभी ग्रुप में 342 सदस्य हैं। जो लड़कियां परिवार की परेशानियों के चलते स्कूल जाना छोड़ देती हैं, उनके परिवार को मोटिवेट कर फिर से स्कूल से जोड़ते हैं। यदि किसी महिला पर अत्याचार होता है तो हमारी टीम वहां पहुंच जाती है उसके मेडिकल सुविधा से लेकर कानूनी सहायता तक दी जाती है। हमारे यहां से निकलीं करीब 100 बच्चियां विदेश में नौकरियां कर रही हैं। हमारी संस्था को देश-विदेश में 59 अवार्ड मिल चुके है।

पिता ने सिखाया, वही जीवन में काम आया
ताबीर हुसैन
रायपुर. कालीबाड़ी स्थित गुरकुल गल्र्स कॉलेज में दो बहनें योगिता यदु और विभांशी कैंटीन चला रही हैं। पिता के निधन के बाद योगिता ने तय किया कि उनसे जो सीखा उसी को आगे बढ़ाएंगे। दोनों इसी कॉलेज से पढ़ाई भी कर रही हैं। योगिता बताती हैं, जब पापा थे तो मैं होटल के कैश काउंटर पर बैठा करती थी। धीरे धीरे मुझे होटल व्यवसाय समझ आने लगा। हमें पता चला कि यहां नई कैंटीन बनी है। चूंकि यहां गल्र्स स्कूल और कॉलेज चलते हैं इसलिए हमें यहां सुरक्षित महसूस होता है।

बिजनेस बढ़ाने में सोशल मीडिया का सहारा
शुरुआती दो महीने थोड़ी परेशानी हुई क्योंकि हमने सीधे तौर पर चीजों को हैंडल नहीं किया था। होटल और कॉलेज कैंटीन में सबसे बड़ा फर्क यह होता है यहां आपको युवाओं की पसंद की चीजें बनानी पड़ती है। ऐसे डिश बनाने के लिए हमने सोशल मीडिया से भी सीखा।

कोई काम छोटा नहीं होता
विभांशी कहती हैं, किसी भी काम की शुरुआत के लिए आत्म विश्वास बहुत जरूरी है। इससे न सिर्फ हिचक बल्कि लोग क्या कहेंगे जैसे विचार भी दूर हो जाते हैं। वैसे भी हजार सीढ़ी चढऩे के लिए पहला कदम तो उठाना ही पड़ता है और यही कदम महत्वपूर्ण होता है। आज हमारे काम को देखकर लोग प्रेरित होते हैं। दूसरों को मिसाल देते हैं। यह इसलिए क्योंकि हमने करके दिखाया है। यहां हम सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक रहते हैं।



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Thursday, 19 October 2023

नारियल की मलाई: पाचन को बेहतर बनाती है, हृदय को स्वस्थ रखती है

Coconut Malai Benefits: नारियल मलाई के फायदे: नारियल की मलाई का सेवन करने से सेहत को कई तरह के लाभ मिलते हैं। नारियल की मलाई पोषक तत्वों से भरपूर होती है और इसके खाने से पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है, साथ ही यह इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करती है।


नारियल की मलाई का सेवन करने से सेहत को कई तरह के लाभ मिलते है। नारियल की मलाई में फाइबर, आयरन, पोटैशियम, फास्फोरस, मैंगनीज, जिंक, एंटी ऑक्सीडेंट्स और एंटी इन्फ्लेमेटरी जैसे तत्त्व के गुण पाए जाते है, जो शरीर के लिए लाभदायक होते है। नारियल की मलाई खाने से पाचन तंत्र और हार्ट स्वस्थ रहता है। साथ ही ये इम्यूनिटी को भी बढ़ाने में मदद करता है। तो आइए जानते है नारियल की मलाई का सेवन करने से सेहत को मिलने वाले फायदे के बारे में

नारियल की मलाई खाने के फायदे
इम्यूनिटी को बढ़ाने में फायदेमंद
इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए नारियल की मलाई का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। नारियल की मलाई में एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी इन्फ्लेमेटरी के गुण पाए जाते है, जो इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करते है। इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए नारियल की मलाई का सेवन जरूर करें।


पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में फायदेमंद
पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए नारियल की मलाई का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। नारियल की मलाई में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है। साथ ही ये पाचन संबंधित समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। जिससे पेट स्वस्थ रहता है।

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हार्ट को स्वस्थ रखने में फायदेमंद
हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए नारियल की मलाई का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। नारियल की मलाई में सेचूरेटेड फैट होता है, जो हार्ट के लिए लाभदायक होता है। क्योंकि ये फैट गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है और बैड को कम करता है। जिससे हार्ट स्वस्थ रहता है।

हृदय स्वास्थ्य में सुधार: नारियल की मलाई में लौरिक एसिड होता है, जो एक प्रकार का संतृप्त वसा है जो हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद कर सकता है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) के स्तर को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है।

त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार: नारियल की मलाई में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो त्वचा को नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं। यह त्वचा को मॉइस्चराइज़ करने और झुर्रियों को कम करने में भी मदद कर सकता है।
हालांकि, नारियल की मलाई में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में खाना चाहिए।

नारियल की मलाई का सेवन करने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं:

- चावल, दाल, या सब्जियों के साथ परोसें।
- मिठाई बनाने के लिए उपयोग करें, जैसे कि हलवा, लड्डू, या केक।
- सॉस या सूप में मिलाएं।
- फ्रूट सलाद या ओट्स में जोड़ें।

यदि आप नारियल की मलाई के स्वास्थ्य लाभों का आनंद लेना चाहते हैं, तो इसे सीमित मात्रा में खाएं और स्वस्थ आहार और जीवन शैली के साथ इसका सेवन करें।

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डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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सोया मिल्क: कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह और वजन घटाने का रामबाण

Soya Milk Benefits: सोया मिल्क का सेवन करने से सेहत को कई तरह के लाभ मिलते हैं। सोयाबीन को अच्छी तरह से पीसकर उसे दूध में मिलाकर सोया मिल्क तैयार किया जा सकता है। सोया मिल्क में विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन बी12, विटामिन डी, विटामिन के, प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्रीशियम, फास्फोरस और सोडियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य से जुड़ी कई सारी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। सोया मिल्क में शहद मिलाकर पीने से फायदे बढ़ जाते हैं। हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए सोया मिल्क का सेवन करना फायदेमंद होता है। तो आइए जानते हैं सोया मिल्क का सेवन करने से सेहत को मिलने वाले फायदे के बारे में

सोया मिल्क कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:
हड्डियों को मजबूत बनाने में फायदेमंद
हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए सोया मिल्क का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सोया मिल्क में कैल्शियम, विटामिन डी और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने मदद करता है।


कमजोरी दूर करने में फायदेमंद
कमजोरी दूर करने के लिए सोया मिल्क का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सोया मिल्क में विटामिन बी12 भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर की कमजोरी को दूर करने में मदद करता है। इसलिए सुबह ब्रेकफास्ट में सोया मिल्‍क पीने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और पूरे दिन ऊर्जा भी बनी रहती है।

वजन कम करने में फायदेमंद
वजन कम करने के लिए सोया मिल्क का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सोया मिल्क में कैलोरी कम और फाइबर अधिक मात्रा में होती है। जिससे पेट लम्बे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और भूख भी जल्दी नही लगती है। जिससे वजन को कम करने में मदद मिलती है। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो सोया मिल्क में शहद मिलाकर जरूर सेवन करें।


हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है:
सोया मिल्क में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकता है।

कैंसर के जोखिम को कम करता है:
सोया मिल्क में आइसोफ्लेवोंस होते हैं, जो पौधे-आधारित यौगिक हैं जो कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

सोया मिल्क कैसे पिएं

सोया मिल्क का सेवन करने का सबसे अच्छा तरीका है इसे ताजा और ठंडा पीना। आप इसे अपने पसंदीदा पेय या व्यंजनों में भी जोड़ सकते हैं।

सोया मिल्क का सेवन करने के कुछ तरीके यहां दिए गए हैं:

आमतौर पर
चाय या कॉफी में
ओट्स या दलिया में
स्मूदी में
पकवानों या डेसर्ट में

सोया मिल्क के लिए सुरक्षित

सोया मिल्क आमतौर पर सुरक्षित होता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। जिन लोगों को सोया से एलर्जी है, उन्हें सोया मिल्क नहीं पीना चाहिए। सोया मिल्क में भी कुछ फाइटोएस्ट्रोजेन होते हैं, जो हार्मोन के समान यौगिक होते हैं। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सोया मिल्क का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

सोया मिल्क एक पौष्टिक और स्वादिष्ट पेय है जो कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। यह दूध का एक अच्छा विकल्प है और कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि आप सोया मिल्क के बारे में सोच रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करना सुनिश्चित करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह आपके लिए सुरक्षित है।



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भीगे हुए अंजीर: सेहत के लिए वरदान, रोज सुबह खाएं और पाएं अनगिनत फायदे

Soaked Anjeer Benefits : अंजीर एक ऐसा फल है जो पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। अंजीर को सुखाकर भी खाया जा सकता है। सूखे अंजीर को पानी में भिगोकर खाने से इसके स्वास्थ्य लाभ और बढ़ जाते हैं।

भीगे हुए अंजीर खाने के कई फायदे हैं। यह हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है, वजन घटाने में मदद करता है, कब्ज से राहत देता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और हड्डियों को मजबूत करता है।

भीगे हुए अंजीर खाने का सबसे आसान तरीका है कि रात को कुछ अंजीर को पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट खाएं। आप भीगे हुए अंजीर को अपने नाश्ते में भी शामिल कर सकते हैं।

भीगे हुए अंजीर एक स्वादिष्ट और पौष्टिक स्नैक है जो आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। तो, रोज सुबह भीगे हुए अंजीर का सेवन करके अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाएं।

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Soaked Anjeer Benefits: अंजीर का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। अंजीर फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। साथ ही इसमें आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, जिंक और मैंगनीज जैसे मिनरल से भरपूर पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मदद करते हैं। लेकिन सूखे अंजीर की जगह भीगे हुए अंजीर का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। जी हां, रोज सुबह भीगे हुए अंजीर का सेवन करने से सेहत को कई तरह के लाभ मिलते हैं। रोज सुबह भीगे हुए अंजीर खाने से हार्ट स्वस्थ रहता है और कब्ज की समस्या भी दूर होती है। तो आइए जानते हैं रोज सुबह भीगे हुए अंजीर का सेवन करने से सेहत को मिलने वाले फायदे के बारे में

भीगे हुए अंजीर खाने के फायदे
1. हार्ट को स्वस्थ रखने में फायदेमंद
हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए रोज सुबह भीगे हुए अंजीर का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद होता है। क्योंकि अंजीर में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मौजूद होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मदद करता है। साथ ही ये हार्ट को स्वस्थ रखता है। इसके अलावा अंजीर शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को कम करने में मदद कर सकता है, जो हार्ट संबंधी समस्याओं का प्रमुख कारण है।


2. शुगर लेवल को कम करने में फायदेमंद
शुगर लेवल को कम करने के लिए रोज सुबह भीगे हुए अंजीर का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद होता है। क्योंकि अंजीर में पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। ये शरीर में शुगर के लेवल को कंट्रोल रखने में मदद करता है। साथ ही अंजीर में क्लोरोजेनिक एसिड मौजूद होता है, जो शुगर लेवल को कम करने में मदद कर सकता है।

3. हड्डियों को मजबूत बनाने में फायदेमंद
हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए रोज सुबह भीगे हुए अंजीर का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद होता है। क्योंकि अंजीर में कैल्शियम, पोटैशियम और फास्फोरस के गुण पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

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4. कब्ज को दूर करने में फायदेमंद
कब्ज को दूर करने के लिए रोज सुबह भीगे हुए अंजीर का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद होता है। क्योंकि अंजीर में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करता है। साथ ही ये आंतों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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