Thursday, 31 August 2023

गंभीर बीमारियों का अद्भुत इलाज इस चमत्कारी जड़ी-बूटी में

Ginger powder's effectiveness in COVID-19 treatment : : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, आईआईटी-बीएचयू व गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में दावा किया गया है कि सुंठी (सूखी अदरक का पाउडर) कोविड19 के प्रबंधन में प्रभावी साबित हो सकता है।

अध्ययन के अनुसार सुठी का इस्तेमाल कोविड19 के प्रसार को रोकने में कारगर है। बीएचयू के वैद्य सुशील कुमार दुबे ने बताया कि यह अपनी तरह का पहला अंतर-विषययी अध्ययन है, जो कोरोना वायरस के संबंध में उच्चतम महत्व की औषधि (सुंठी) के आयुर्वेदिक संश्लेषण की चिकित्सकीय सुरक्षा और प्रभावकारिता पर प्रारंभिक प्रमाण प्रदान करता है।

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उन्होंने बताया कि वाराणसी में सरकार द्वारा संचालित कोविड19 अस्पतालों में भर्ती कोरोना वायरस संक्रमित रोगियों के घर के सदस्यों और स्वास्थ्य कर्मियों (डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय, पैरामेडिक) समेत 800 से अधिक प्रतिभागियों पर अध्ययन किया गया।

डॉ. दुबे ने कहा कि इस अध्ययन के लिए वाराणसी के तत्कालीन जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा द्वारा सहयोग उपलब्ध कराया गया। इस अध्ययन में बहु-केंद्रीय, नॉन-रैंडमाइज्ड, ओपन-लेबल, सिंगल-आर्म, प्री-पोस्ट डिज़ाइन का उपयोग किया गया।

प्रतिभागियों ने 15 दिनों तक सुंठी पाउडर का चार बार रोज़ाना सेवन किया, दो बार मौखिक रूप से (2 ग्राम) और दो बार नासिका द्वारा (0.5 ग्राम) लिया। उनका 15, 30 और 90 दिनों के बाद अध्ययन किया गया।

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इसके अलावा, फाइटोकेमिकल विश्लेषण में लिक्विड क्रोमाटोग्राफी को मास स्पेक्ट्रोमेट्री के साथ जोड़कर किया गया।

शोधकर्ताओं के मुताबिक नतीजों से स्थापित हो पाया कि अदरक में फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जो कोविड 19 के प्रसार को रोकने में मदद करते हैं, और इसका आयुर्वेदिक संश्लेषण कोविड 19 के लक्षणों व प्रसार को कम करने में मददगार हैं।

इस अध्ययन के नतीजे जर्नल ऑफ हर्बल मेडिसिन में प्रकाशित हुए हैं, जो ब्रिटेन में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल हर्बलिस्ट्स की औपचारिक पत्रिका है।

ब्रिटेन में हर्बल चिकित्सकों का अग्रणी पेशेवर संगठन है। वैद्य सुशील दुबे के अनुसार यह अध्ययन, अब तक इस प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित भारत के मात्र दो कोविड 19 संबंधित चिकित्सा अध्ययनों में से एक है।

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अध्ययनकर्ताओं का सुझाव है कि सम्पूर्ण विश्व में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के कोविड 19 निवारण और प्रबंधन प्रोटोकॉल में सूखी अदरक को शामिल करना संक्रमण के ख़तरे की जद में आने वाले लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए सुरक्षित, प्रभावी, तुरंत लागू करने योग्य, और लागत-कुशल तरीका हो सकता है।

इस शोध दल में डॉ. सुनील कुमार मिश्रा (आईआईटी बीएचयू) तथा डॉ. हितेश जानी (गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय) शामिल हैं। आईएएनएस)



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Health Benefits of Giloy: गिलोय है बेहद चमत्कारी, रोजाना सेवन करने से मिलेंगे 11 गजब के फायदे

Health Benefits of Giloy: गिलोय औषधीय गुणों से भरपूर है। गिलोय की जड़ें, तना और पत्तियां तीनों ही सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। इसका इस्तेमाल दवा बनाने में किया जाता है। लेकिन इसका देसी तरीके से सेवन भी बेहद लाभकारी है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। जो शरीर को कई रोगों से बचाते हैं। इस लेख में हम आपको गिलोय से होने वाले 11 फायदों के बारे में बताएंगे।

जानिए क्या है गिलोय
गिलोय एक प्रकार का बेल है, जो जंगलों, खेतों की मेड़ों और पहाड़ों की चट्टानों पर आसानी से देखी जा सकती है। गिलोय की तासीर गर्म होती है। मटर के बीज के जैसे इसके फल होते हैं। इसका तना हरा और देखने में रस्सी जैसा प्रतीत होता है। गर्मियों में इसपर छोटे पीले फूल भी आते हैं।

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इम्यूनिटी बूस्ट करता है गिलोय
गिलोय हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसके कमजोर पड़ने पर हम आसानी से बीमार पड़ जाते हैं। कमजोर इम्यूनिटी वालों के लिए गिलोय का सेवन लाभकारी साबित हो सकता है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में गिलोय के जूस का सेवन ज्यादा फायदेमंद है।

 

पुराने बुखार के लिए है चमत्कारी
लंबे समय से हो रहे बुखार या कहे क्रोनिक फीवर को ठीक करने में मदद करता है। इसमें गिलोय के तने और पत्तियों को इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें एंटीपायरेटिक यानी बुखार को ठीक करने वाला और एंटी-मलेरियल यानी मलेरिया इंफेक्शन को दूर करने वाले गुण पाते जाते है। गिलोय जूस के फायदे क्रोनिक कफ यानी पुरानी खांसी को ठीक करने में भी होते हैं।

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पाचन शक्ति बढ़ाए गिलोय
पाचन शक्ति को दुरुस्त रखने में गिलोय फायदेमंद है। गिलोय में पाए जाने वाले औषधीय गुण पाचन संबंधी कई समस्याओं जैसे कि डायरिया और दस्त से उबरने में मदद करते हैं। पाचन तंत्र को मजबूत करने में भी गिलोय का उपयोग किया जा सकता है।

 

डायबिटीज को करता है नियंत्रित
डायबिटीज की समस्या में भी गिलोय के बहुत फायदे हैं। गिलोय में मौजूद एंटी-हाइपरग्लाइसेमिक यानी ब्लड शुगर को कम करने वाले प्रभाव फायदेमंद है। यह शरीर में इंसुलिन की सक्रियता को बढ़ाकर ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है।

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डेंगू से करता है बचाव
गिलोय औषधीय गुणों का भंडार है। इसमें कई ऐसे रसायन पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कई बीमारियों को दूर करते हैं। जिस वजह से मलेरिया और डेंगू जैसे वायरल इंफेक्शन भी इसके सेवन से ठीक हो जाते हैं।

 

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अस्थमा में लाभकारी है गिलोय
अस्थमा की समस्या में राहत पाने में गिलोय का सेवन लाभकारी है। इसमें शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ श्वास संबंधी समस्याओं से छुटकारा दिलाने वाले गुण पाए जाते हैं। जिस वजह से अस्थमा से राहत पहुंचाने में गिलोय लाभकारी है। गिलाय के तने के जूस को शहद के साथ मिलाकर इसका सेवन किया जा सकता है।

 

गठिया की समस्या से दिलाए राहत
गिलोय के सेवन से गठिया की परेशानी दूर हो सकती है। गिलोय में एंटी-इंफ्लेमेटरी यानी सूजन को कम करने वाले गुण पाते जाते हैं। इसके साथ ही इसमें एंटी-अर्थराइटिक और एंटी-ऑस्टियोपोरोटिक यानी जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत दिलाने वाले गुण भी पाए जाते हैं।

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यौन इच्छा बढ़ाने में कारगर
गिलोय के सेवन से यौन इच्छाओं में बढ़ोतरी होती है। इसमें गिलोय अहम भूमिका निभाती है। रिसर्च के अनुसार, गिलोय में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी यानी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला गुण पाए जाते हैं। रोगों बचाने के साथ इसमें पाए जाने वाले ऐफ्रडिजीएक गुण यौन इच्छाओं को बढ़ाने में मदद करते हैं।

 

आंख संबंधी समस्या में लाभकारी
आंखों से संबंधित विकारों से राहत पहुंचाने में गिलोय मददगार है। इसमें पाया जाने वाला इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण आंखों के लिए बहुत फायदेमंद है। गिलोय में पाए जाने वाले गुण आंखों से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा दिलाने में सहायक हैं।

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बवासीर में लाभकारी है गिलोय
बवासीर में गिलोय सेवन लाभकारी है। गिलोय का सेवन बवासीर से राहत दिला सकता है। गिलोय के औषधीय गुण खूनी बवासीर के इलाज में सहायक हो सकते हैं। इसलिए बवासीर के मरीजों को गिलोय का सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से बवासीर में होने वाले रक्तस्राव और कब्ज से भी राहत पाया जा सकता है।

 

सूजन में राहत देता है गिलोय
गिलोय का सेवन सूजन संबंधी समस्या में फायदेमंद हो सकते हैं। गिलोय में एंटी इंफ्लामेंटरी गुण पाए जाते हैं। जो सूजन से राहत दिलाने में सहायक होते हैं।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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प्राकृतिक चमक से भरपूर : रॉ मिल्क फेस पैक द्वारा पाएं चमकती और ग्लोइंग त्वचा

Experience Glowing Skin with the Magic of Raw Milk Face Pack : जब बात आती है सुंदर और चमकती त्वचा की, तो प्राकृतिक उपाय हमेशा प्राथमिकता रखते हैं। रॉ मिल्क फेस पैक इसी तरह का एक प्राकृतिक उपाय है जिससे आप अपनी त्वचा को निखार सकते हैं और उसमें चमक ला सकते हैं। यह फेस पैक आपकी त्वचा को पोषित करता है और उसमें मोहक ताजगी लाता है।

Benefits of Raw Milk: रॉ मिल्क के फायदे:
रॉ मिल्क (कच्चा दूध) में पूरे पोषण से भरपूर गुण होते हैं जो आपकी त्वचा के लिए बेहद उपयोगी होते हैं। इसमें विटामिन, प्रोटीन, लैक्टोज, और मिनरल्स शामिल होते हैं, जो आपकी त्वचा को निखार देते हैं और उसे स्वस्थ बनाते हैं।

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Raw Milk Face Pack रॉ मिल्क फेस पैक की तैयारी:
सामग्री:

2 चम्मच रॉ मिल्क
1 चम्मच मलाई (दही की मलाई भी उपयोग कर सकते हैं)
1 चम्मच शहद
2 चम्मच चंदन पाउडर

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Face pack method फेस पैक तरीका:

सबसे पहले एक कटोरी में रॉ मिल्क और मलाई को अच्छे से मिला लीजिए।
अब इसमें शहद और चंदन पाउडर डालकर अच्छे से मिला लीजिए। आपको एक गाढ़ा मिश्रण मिलना चाहिए।
आपका रॉ मिल्क फेस पैक तैयार है।

How to make face pack फेस पैक बनाने का तरीका:

- अपने चेहरे को हल्का गरम पानी से धो लीजिए ताकि आपकी त्वचा के पोर्स खुल सकें।
- तैयार किया हुआ रॉ मिल्क फेस पैक को अपने चेहरे पर एक होमज़ लेयर के रूप में लगाएं।
- अपने आँखों के चारों ओर कक्षुक करें और 15-20 मिनट तक पैक को सुखने दीजिए।
- जब पैक पूरी तरह से सूख जाए, तो गरम पानी के साथ अपने चेहरे को धो लीजिए। आप अपने हाथों से हलके हलके मसाज करके उसे हटा सकते हैं।
- अंत में, ताजगी और चमक के साथ चमकती त्वचा का आनंद लें।

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इस फेस पैक का अधिकांश समय सप्ताह में एक बार ही इस्तेमाल करें।
यदि आपकी त्वचा पर कोई एलर्जी या जलन होती है, तो तुरंत इसका प्रयोग बंद कर दें और चिकित्सक से सलाह लें।


रॉ मिल्क फेस पैक एक प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है जिससे आप बिना किसी हानिकारक रसायनिक पदार्थ के अपनी त्वचा को निखार और चमक सकते हैं। इसके नियमित इस्तेमाल से आपकी त्वचा में नई ऊर्जा आएगी और आप अपने प्राकृतिक सौंदर्य को बनाए रख सकेंगे।



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अलसी के बीजों का सही तरीके से करें सेवन और पाएं बेहतरीन फायदे

पूरी दुनिया में योग्य खाद्य पदार्थों का सेवन करने के लिए बड़े से बड़े उपाय और तरीके खोजे जा रहे हैं। आजकल, अलसी के बीजों की महत्वपूर्णता भी बढ़ रही है, क्योंकि इनमें गुणकारी प्रोपर्टीज़ होती हैं जो हमारे स्वास्थ्य को बेहद लाभकारी तरीके से प्रभावित कर सकती हैं। इस लेख में, हम आपको बताएंगे कि अलसी के बीजों का सेवन कैसे करें और उनके फायदे क्या हैं।

Importance of flax seeds अलसी के बीजों का महत्व

अलसी के बीज, जिन्हें लिनसीड भी कहा जाता है, एक प्रकार के अनाज होते हैं जो आपके आहार में शामिल किए जा सकते हैं। ये छोटे और गहरे नीले रंग के बीज होते हैं जो पूरे दुनिया में सेहतमंद खाद्य पदार्थों के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं। अलसी के बीजों में बहुत सारे पोषक तत्व और विटामिन्स होते हैं, जैसे कि आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

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Benefits of consuming flax seeds अलसी के बीजों के सेवन का तरीका और फायदे:

सुबह के समय भिगोकर खाएं: अलसी के बीजों को पानी में सुबह के समय भिगोकर रखें। इससे उनका आकार बड़ जाएगा और उनके पोषण तत्व आसानी से शरीर द्वारा अवशोषित हो सकेंगे।

योग्यता से मिश्रण में शामिल करें: आप अलसी के बीजों को अपने प्रिय योग्य खाद्य पदार्थों में मिलाकर खा सकते हैं, जैसे कि दही, फलों की चटनी, या सलाद।

बेक्ड आइटम्स में शामिल करें: आप अलसी के बीजों को ब्रेड, मफिन्स, या बिस्किट्स के आटे में मिलाकर बेक्ड आइटम्स बना सकते हैं।

शेक या स्मूदी में डालें: अलसी के बीजों को स्मूदी या शेक में मिलाकर पीने से आपको उनके स्वास्थ्य लाभ मिलेंगे और स्वाद भी बढ़ जाएगा।

पानी के साथ सेवन करें: सबसे सरल तरीका है अलसी के बीजों को पानी के साथ सेवन करना। आप उन्हें बिना किसी खाद्य पदार्थ के साथ भी पी सकते हैं।

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Benefits of Flax Seeds: अलसी के बीजों के फायदे:

A treasure trove of nutrition पौष्टिकता का खजाना: अलसी के बीजों में फाइबर, प्रोटीन, आमिनो एसिड्स, और आवश्यक विटामिन्स जैसे कि विटामिन-ई और विटामिन-बी का समृद्ध स्रोत होता है।

Flax Seeds for Heart health हृदय स्वास्थ्य: अलसी के बीज हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि वे आपके चोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं।

Flax Seeds for Digestive health डाइजेस्टिव स्वास्थ्य: अलसी के बीज में मौजूद फाइबर आपके पाचन क्रिया को सुधारने में मदद कर सकता है और कब्ज की समस्या को कम कर सकता है।

Flax Seeds for Weight Control: वजन नियंत्रण: अलसी के बीज वजन घटाने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि वे भूख को कम कर सकते हैं और लड़ाई करने में सहायक हो सकते हैं।

Flax Seeds for Reduce the risk of diabetesमधुमेह के खतरे को कम करें: अलसी के बीज ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं और मधुमेह के खतरे को कम कर सकते हैं।

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Precautions and Adequate Dosage: सावधानियां और पर्याप्त मात्रा:

हालांकि अलसी के बीजों के बहुत सारे फायदे होते हैं, आपको इसके सेवन में सावधानी बरतनी चाहिए। अधिक मात्रा में सेवन करने से पाचन संक्रिया में दिक्कत हो सकती है और कुछ लोगों को एलर्जी की समस्या भी हो सकती है। इसलिए, यदि आपने पहले कभी अलसी के बीज नहीं खाए हैं, तो पहले छोटी मात्रा में शुरुआत करें और अपने डॉक्टर से सलाह लें।

अलसी के बीजों का सेवन करना आपके स्वास्थ्य को कई तरीकों से बेहतर बना सकता है। आप उन्हें अपने दैनिक आहार में शामिल करके उनके फायदों का आनंद उठा सकते हैं। याद रखें कि सही मात्रा में और सावधानीपूर्वक उनका सेवन करें, ताकि आपका स्वास्थ्य हमेशा उत्तम रहे।



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कहीं आप भी तो नहीं खा रहे हैं नकली अदरक! सेहत को हो सकता है ये खतरा

Fake Ginger is harmful for Health: अदरक स्वाद के साथ-साथ हमारी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसका सेवन एक औषधी के रूप में भी किया जाता है। सर्दियां में लोग अदरक वाली चाय पीना पसंद करते हैं। एक कप अदरक वाली चाय आपका गर्माहट प्रदान करेगी। साथ ही इसका सेवन सर्दी जुकाम और गले की खराश जैसी परेशानियों में भी किया जाता है। मसाले के साथ-साथ इसका सेवन बहुत सी बीमारियों के उपचार में औषधि के रूप में किया जाता है। अदरक में विटामिन बी-6, आयरन, पोटैशियम प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। लेकिन क्या आपने नकली अदरक के बारे में सुना है। कहीं आप नकली अदरक का सेवन तो नहीं कर रहे हैं। यह आपके सेहत के लिए घातक हो सकता है। असली अदरक की पहचान नही होने पर नकली अदरक खरीद लेते हैं और बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। आज हम इस लेख में आपको नकली और असली अदरक की पहचान और नकली अदरक के नुकसान के बारे में बताएंगे।

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छिलके से करें पहचान
अब जब भी आप अदरक खरीदने जाएं अदरक को नाखुन से खुरच कर देखें। अगर छिलका आसानी से उतर जाए तो यह असली अदरक है। छिलका नहीं उतरता है तो यह नकली अदरक है। नकली में छिलका बहुत कठोर सा होता है। असली अदरक का छिलका सॉफ्ट और बहुत पतला होता है।

 

सुगंध से पहचान करें
असली अदरक की पहचान उसकी खुशबू से आसानी से की जा सकती है। असली अदरक की सुगंध तेज होती है। साथ ही इसकी खुशबू बहुत देर तक बनी रहती है। जबकि नकली अदरक की गंध तीखी नहीं होती है। इसलिए जब भी अदरक खरीदें उसे सुंघकर जरूर देखें। ऐसे में आप असली-नकली की पहचान कर पाएंगे।

 

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रेशों से करें असली-नकली की पहचान
अदरक खरीदते समय जब उसको तोड़कर देखेंगे तो असली अदरक में रेशे दिखाई देंगे जबकि नकली अदरक में रेशे नहीं दिखाई देंगे। तो समझ जाएं कि वह अदरक नकली है।

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ना खरीदे साफ और चमकीले अदरक
बता दें कि अदरक के नाम पर बाजार में उसके जैसे दिखने वाला तहड़ भी बिकते हैं। यह एक पहाड़ी पेड़ की जड़ होती है। यह सूखने के बाद बिलकुल अदरक जैसी दिखती है। असली अदरक का छिलका चमकीला नहीं होता। अदरक के छिलके को चमकीला बनाने के लिए उसको एसिड से क्लीन किया जाता है। यह सेहत के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।

 

चखकर भी कर सकते हैं असली-नकली की पहचान
असली-नकली अदरक की पहचान आप इसे चखकर भी कर सकते हैं। चखते ही आप समझ जाएंगे कि अदरक असली है या नकली। साथ ही असली अदरक को आप बहुत दिनों तक फ्रीज में स्टोर करके रख सकते हो लेकिन नकली अदरक के साथ ऐसा नहीं है। यह बहुत जल्दी खराब हो जाता है।

 

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जानिए क्या होती है नकली अदरक
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल और चमोली इलाकों में तहड़ नाम का पेड़ पाया जाता है। इस पेड़ का कुछ हिस्सा काटकर उसे सुखाकर अदरक के रूप में बेचा जाता है। सूखने के बाद तहड़ पेड़ का हिस्सा असली अदरक की तरह ही दिखाई देता है। इसलिए खरीदते समय सावधानी जरूरी है।

 

क्या होते हैं नुकसान
अदरक में विटामिन बी-6, आयरन, पोटैशियम, जिंक, फॉस्फोरस और एंटी-ऑक्सीडेंट्स जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। जो हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। अदरक का सेवन एक महीने तक लगातार करने से हाई कोलेस्ट्रॉल, आर्थराइटिस, कैंसर और पेट संबंधी बीमारियों से एक हद तक निजात पाया जा सकता है। जबकि नकली अदरक में ये पोषक तत्व नहीं पाए जाते हैं। नकली अदरक के सेवन से कैंसर एवं बहुत सी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे आपको एलर्जी और अल्सर जैसी दिक्कते हो सकती हैं।



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Wednesday, 30 August 2023

Benefits of Bath in rain: बारिश में नहाने से मिलते हैं गजब के फायदे, नहीं होंगी ये 5 समस्याएं

Benefits of Bath in rain: सावन में बारिश में नहाने का मजा ही कुछ और है। बहुत से लोग बारिश के पानी में नहाने से कतराते हैं। उन्हें बाल झड़ने और बीमार पड़ने का डर रहता है। लेकिन क्या आपको पता है कि बारिश के पानी से नहाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। बारिश में भीगने से सेहत से जुड़ी कई समस्‍याएं दूर हो सकती हैं। बारिश का पानी घमौरियों से लेकर फोड़े फुंसियों तक का नेचुरल इलाज कर सकता है।

सेहत के लिए फायदेमंद है बारिश का पानी
बारिश का पानी हमारी सेहत के लिए भी यह कई तरह से फायदेमंद होता है। बारिश के पानी को वॉटर सोर्स का सबसे शुद्ध विकल्‍प माना जाता है। यही नहीं, यह अनकॉन्‍टैमिनेटड सोर्स भी है जिसमें ना तो क्‍लोरीन या फ्लोराइड होता है और ना ही किसी अन्‍य तरह का टॉक्सिक कैमिकल होते हैं।

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बालों के लिए बहुत फायदेमंद है बारिश का पानी
बारिश का पानी सॉफ्ट वॉटर होता है जिसमें कई ऐसे मिनरल्‍स पाए जाते हैं हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। इसमें अल्‍कालाइन पीएफ पाया मौजूद होता है। जो बालों के लिए बहुत फायदेमंद है। यह हेवीमेटल से फ्री होता है जिस वजह से बाल मजबूत और लंबे होते हैं। यह बालों के स्‍कैल्‍प से गंदगी को आसानी से दूर कर सकता है। साथ ही इससे बालों के डलनेस दूर होते हैं और बाल ग्‍लॉसी बन सकते हैं।

बारिश के पानी से स्किन को मिलता है लाभ
बालों के साथ-साथ स्किन के भी बारिश का पानी फायदेमंद होता है। यह स्किन और लचीला बनाता है। साथ ही स्किन की नमी को मेंटेन करता है। यह स्किन के सेंसिटिवीटी को कम करता है। साथ ही उन्हें हेल्दी बनाता है।

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बारिश में नहाने से स्‍ट्रेस होता है कम
बारिश के पानी से नहाने पर शरीर में इंडॉरफिन और सेरोटोनिन हार्मोन रिलीज होते हैं। ये हार्मोन्‍स हर तरह के स्‍ट्रेस को कम करते हैं। साथ ही मूड को बेहतर करते हैं। लोगों का मानना है कि बारिश में नहाने के बाद नींद अच्‍छी आती है। जिससे माइंड के साथ बॉडी भी रिलैक्‍स होता है। साथ ही यह हार्मोनल बैलेंस को बनाए रखने में भी फायदेमंद है।

बरते ये सावधानियां
बारिश के पानी में नहाने से पहले आपको कुछ बातों को ख्याल रखना चाहिए। पहली बारिश के पानी में नहाने से बचना चाहिए. बरसात की पहली बारिश दूषित होती है। इससे सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। एलर्जी या हेल्‍थ से जुड़ी समस्‍या है तो डॉक्‍टर की सलाह जरूर लें।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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High BP कंट्रोल करने के लिए करें इन 3 जूस का करें सेवन, हार्ट को मिलेंगे चमत्कारी फायदे

High BP Control: आज के समय में अधिकतर लोग हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी से ग्रसित हैं। उच्च बीपी होने से हार्ट संबंधित समस्याएं होने का खतरा रहता है। यदि समय रहते हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल नहीं किया जाता है तो स्ट्रोक, हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज तक भी हो सकता है। जब धमनियों यानी आर्टरीज सिकुड़ जाती है तो ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है। ऐसे में हार्ट को ब्लड पंप करने में अधिक मेहनत करना पड़ता है, इस वजह से ब्लड प्रेशर हाई होने की समस्या बढ़ जाती है। ऐसा होने पर आपको डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। इसके साथ ही डाइट और जीवनशैली में बदलाव करना होगा।

 

आंवला और अदरक का जूस
अगर आपका ब्लड प्रेशर हाई रहता है तो आप आंवला और अदरक का जूस का सेवन कर सकते हैं। आंवला के सेवन से ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस कम होता है। हाइपरटेंशन भी कम करता है। जबकि अदरक में कुछ ऐसे कम्पाउंड पाए जाते हैं जो वासोडिलेशन (vasodilation) को बढ़ावा देते हैं और नसों को चौड़ा करता है। नसें जब चौड़ी होती हैं तो हाई ब्लड प्रेशर की समस्या कम होती है।

 

पीएं धनिया के बीज का पानी
एक्सपर्ट के अनुसार, धनिया का अर्क एक मूत्रवर्धक के रूप में काम करता है, जो आपके शरीर से अतिरिक्त सोडियम और पानी को बाहर निकालने में मदद करता है। इससे आपका रक्तचाप काफी हद तक कम हो जाता है। आगर आप धनिया को पानी में उबालकर या रात भर भिगोकर इसके पानी का सेवन करेंगे तो बहुत लाभ मिलेगा।

 

चुकंदर और टमाटर का रस
चुकंदर में नाइट्रेट (NO3) भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जो हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को कम करने में सक्षम है। नाइट्रेट नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) का उत्पादन करता है और ब्लडस्ट्रीम में इसकी सांद्रता बढ़ाता है। इससे एंडोथेलियल फंक्शन अनुकूलित होता है। जबकि टमाटर के अर्क में लाइकोपीन, बीटा कैरोटीन और विटामिन ई जैसे कैरोटीनॉयड होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स को निष्क्रिय करने के लिए एक बेहद ही प्रभावी एंटीऑक्सिडेंट होते हैं। इसके सेवन के लिए चुकंदर और टमाटर को मिलाकर जूस बनाएं। इसे पीने से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में सुधार होगा।



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रोज करें मुट्ठी भर मखानों का इस तरह सेवन , शरीर को मिलेंगे ये 10 स्वास्थ्य लाभ

10 health benefits of makhanas : प्राचीन समय से ही, मखाने भारतीय खाद्य पदार्थों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। यह स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन होते हैं जो आपको विभिन्न स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकते हैं। मखाने, जिन्हें 'फोड़ी', 'फोकली', 'फोजना' या 'फोफ़ली' के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रकार के पौधों के बीजों से बनते हैं और इनका सेवन आपके स्वास्थ्य को कई तरीकों से बेहतर बना सकता है।

इस लेख में, हम आपको प्रस्तुत करेंगे मखानों के शीर्ष 10 स्वास्थ्य लाभ, जिनके माध्यम से आप इन छोटे से आहार के अद्भुत गुणों का आनंद उठा सकते हैं। इन लाभों को जानकर आपको मखानों को अपने आहार में शामिल करने का आग्रह हो सकता है, ताकि आप स्वस्थ और पौष्टिक जीवन का आनंद ले सकें।

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पौष्टिकता का खजाना: मखाने में उच्च मात्रा में प्रोटीन, विटामिन B, फाइबर और आवश्यक मिनरल्स जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फॉस्फोरस होते हैं, जो आपके शरीर की पौष्टिकता को बढ़ावा देते हैं।

वजन कम करने में मददगार: मखाने में कम कैलोरी और फैट होने के कारण वे वजन कम करने में मदद कर सकते हैं। यह आपको भूख की अवशोषणा से बचाने में मदद करते हैं और आपको धीरे-धीरे वजन कम करने में सहायता प्रदान करते हैं।

हृदय स्वास्थ्य: मखानों में कम वसा और कोलेस्ट्रॉल होने से हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इसके साथ ही, वे आपकी रक्तचाप को नियंत्रित रखने में भी मदद करते हैं।

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डायबिटीज के प्रबंधन: मखाने में अप्रेक्षित शर्करा होने के कारण वे डायबिटीज के मरीजों के लिए उपयुक्त होते हैं। ये रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं और इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ावा देते हैं।

पाचन तंत्र को सुधारने में सहायक: मखाने में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जिससे पाचन तंत्र को सहायता मिलती है और कब्ज समस्या से राहत मिलती है।

कैल्शियम का स्रोत: मखानों में अच्छी मात्रा में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों की मजबूती और दांतों की स्वास्थ्य देखभाल में मदद करता है।

अंधश्रद्धा को दूर करने में सहायक: मखाने में थायमिन (विटामिन B1) की अच्छी मात्रा होती है, जो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है और अंधश्रद्धा को कम करने में सहायक होता है।

एंटीऑक्सीडेंट्स का स्रोत: मखानों में विटामिन E की अच्छी मात्रा होती है, जो शरीर के अंदर के कई हानिकारक रेडिकल्स से लड़ने में मदद करता है।

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उच्च ऊर्जा स्रोत: मखाने में अच्छी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो आपको उच्च ऊर्जा प्रदान करता है और थकान से बचाता है।

ग्लूटेन-फ्री विकल्प: मखाने ग्लूटेन-फ्री होते हैं, इसलिए वे केलिए एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं जो ग्लूटेन से प्रभावित होते हैं या जो ग्लूटेन को अपनी डाइट से निकालना चाहते हैं।

मखानों के ये स्वास्थ्य लाभ इसे एक पौष्टिक और स्वास्थ्यप्रद विकल्प बनाते हैं, जिसे आप अपनी दिनचर्या में शामिल करके उन सभी लाभों को प्राप्त कर सकते हैं।



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Homemade protein Powder: इस देसी नुस्खे से सभी प्रकार की कमजोरी होगी दूर, सेवन से मिलेंगे जगब के फायदे

Health Benefits of Homemade protein Powder: आजकल बदलते जीवन शैली में ज्यादातर लोग शारीरिक समस्याओं को लेकर परेशान रहते हैं। शरीर में दर्द की समस्या, कमजोरी आना इत्यादि समस्याएं हमें काफी परेशान करती हैं। बदलते मौसम में ऐसी समस्याएं ज्यादा होती है। इसकी वजह है हमारा खान-पान। हमारे खाने में प्रर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। इस वजह से ऐसी समस्या आम है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आज हम आपके लिए एक ऐसा पाउडर लेकर आए हैं जिसके सेवन से आप शक्तिशाली बन जाएंगे। थकान, कमजोरी की समस्या कुछ ही दिनों में दूर हो जाएगी। इसको बनाना बेहद आसान है। इसके सेवन से पाचन संबंधी समस्या भी नहीं होगी। यह एक वेज प्रोटीन पाउडर है। जो मांसाहार से दूगनी ताकत देगा। इसको घर में बना सकते हैं।

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इन लोगों के लिए फायदेमंद
इस पाउडर को बच्चे ले सकते हैं। बच्चों को ग्रोथ के लिए पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व की आवश्यकता होती है। इसलिए बच्चों को इसे दे सकते हैं। साथ ही जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान पेट और बॉडी पेन की समस्या होती है। उन महिलाओं को इसका सेवन करना चाहिए। इसके अलावा 40 साल की उम्र के बाद मांसपेशियां कमजोर होने लगती है। जिस वजह से हड्डियों, जोड़ों में दर्द होती है। ऐसे लोग भी इसका सेवन कर सकते हैं। इस पाउडर को गर्भवती महिलाएं भी ले सकती हैं। इसके सेवन में मां और बच्चा दोनों स्ट्रोंग होते हैं।

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सामग्री
100 ग्राम मूंगफली के दाने लेंगे। इसमें 25.8 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। मीट में जितना प्रोटीन पाया जाता है उतना ही प्रोटीन इसमें पाया जाता है। साथ ही इसको हर कोई खरीद भी सकता है। यह शुगर लेवन को भी नियंत्रित करता है। दूसरा इनग्रेडिएंट्स है कद्दू के बीज। 50 ग्राम कद्दू के बीज लेंगे। 1 ग्राम कद्दू के बीज में प्रोटीन पाया जाता है। इसके वजह से हमें अच्छी नींद आती है। यह मैग्निशियम और मिनरल्स का अच्छा श्रोत है। शुगर लेवल और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है। इसमें फाइबर भी प्रचूर मात्रा में होता है। तीसरा इनग्रेडिएंट्स लेंगे सोयाबीन के दाने। 100 ग्राम सोयाबीन लेंगे। इसे प्रोटीन का पावरहाउस माना जाता है। इसमें अलग-अलग ढेर सारे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। चौथा इनग्रेडिएंट्स लेंगे अलसी के बीज। 50 ग्राम अलसी के बीज लेंगे। इसमें प्रोटीन के साथ-साथ फाइबर भी पाया जाता है। यह पेट की चर्बी को भी पिघलाता है। पांचवां इनग्रेडिएंट्स लेना है 50 ग्राम बादाम। इसमें कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं। ओवरऑल हेल्थ के अलावा यह दिमागी विकास के लिए भी फायदेमंद होता है। अगला और लास्ट इनग्रेडिएंट्स लेते हैं 100 ग्राम ओट्स। ओट्स में कार्बोहाइड्रेट और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

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कैसे बनाएं ये पाउडर
सभी इनग्रेडिएंट्स को अलग-अलग 2 मिनट के लिए ड्राई रोस्ट कर लेना है। इसके बाद सब को ठंडा होने के लिए रख दें। ठंडा होने के बाद सभी को मिलाकर मिक्सी में फाइन पाउडर बना लें। अब प्रोटीन पाउडर बनके तैयार है। इसको निकालकर एयर टाइट कंटेनर में भरकर रख लें।

 

ऐसे करें सेवन
इसके सेवन के लिए सही टाइमिंग और सही तरीका बहुत जरूरी है। दिनभर में आप कभी भी पी सकते हैं। इसको गुनगुने दूध का पानी से पी सकते हैं। एक ग्लास दूध में 2 चम्मच पाउडर डालकर इसको मिला लें। फूर घूंट-घूंट करके पीएं।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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दूध में मिलाकर सोने से पहले पीलें ये देसी चीज , ताकत से भर जाएगा शरीर और मिलेंगे अनगिनत फायदे

The Power of Combining Ghee with Milk for Health Benefits : प्राचीन समय से ही, घी और दूध मानव जीवन के अभिन्न हिस्से रहे हैं और इनके सेवन के स्वास्थ्य लाभों का मनन किया गया है। यह न केवल अपने स्वाद के लिए जाने जाते हैं, बल्कि इनमें छिपी अनगिनत पोषण गुणों की वजह से वे हमारे शारीर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। घी और दूध दो ऐसे पौष्टिक आहार हैं जो हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। ये हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और विभिन्न पोषण तत्वों से भरपूर होते हैं। यहाँ पर घी और दूध के पीने के कुछ स्वास्थ्य लाभों की चर्चा की जाएगी:

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Doodh me desi ghee mila kar pine ke fayde :

Health Benefits of Ghee: घी के स्वास्थ्य लाभ:

पौष्टिकता का खजाना: घी में विटामिन A, डी, ई, और K जैसे पौष्टिक विटामिन्स होते हैं जो हड्डियों, आँखों, और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं।

शरीर के लिए ऊर्जा: घी में मौजूद सत्त्व युक्त फैट शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं और लंबे समय तक भूख को कम करने में मदद करते हैं।

आंतों की सफाई: घी में पाए जाने वाले गुणसूत्र आंतों की सफाई में मदद करते हैं और कब्ज से राहत प्रदान करते हैं।

मस्तिष्क स्वास्थ्य: घी में पाये जाने वाले आयरन और विटामिन B12 मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, जिनसे मस्तिष्क की कार्यशीलता बढ़ती है।

Health Benefits of Milk: दूध के स्वास्थ्य लाभ:

कैल्शियम स्रोत: दूध एक अच्छा कैल्शियम स्रोत होता है जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है।

प्रोटीन का खजाना: दूध में प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है जो मांसपेशियों की निर्माण की प्रक्रिया में मदद करती है।

विटामिन और मिनरल्स: दूध में विटामिन D, आयरन, पोटैशियम, और मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं।

वजन प्रबंधन: दूध की प्राकृतिक मिठास और प्रोटीन का संयोजन वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।

घी और दूध का सेवन हमारे शारीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये हमें ऊर्जा प्रदान करते हैं, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं, और हमारी अंतर्नली की सेहत को बनाए रखने में मदद करते हैं। यदि हम इन्हें संतुलित रूप से सेवन करें, तो हम एक स्वस्थ और पूरी तरह से विकसित जीवन जी सकते हैं।



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Tuesday, 29 August 2023

रोजाना भुने हुए चने खाने से मिलेंगे अद्भुत फायदे , इन दो रोगों में मिलता है जबरदस्त लाभ

प्रकृति ने हमें अनगिनत आहार स्रोतों से नवाचित किया है, जिनमें से एक है चना। यह अनाज सब्जियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो हमारे आहार में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों की प्राप्ति कराता है। विशेष रूप से भुने हुए चने का सेवन करने से हमें अनगिनत स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो सकते हैं।

1. पौष्टिकता का खजाना: भुने हुए चने में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, विटामिन बी6, फोलिक एसिड, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पौष्टिक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह आपके शरीर के उचित पोषण की सुनिश्चित करने में मदद करते हैं।

2. उच्च प्रोटीन स्रोत: भुने हुए चने में उच्च मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, जो हमारे शरीर के मांसपेशियों, शरीर की रक्षा प्रणाली और ऊर्जा स्तर को बनाए रखने में मदद करता है।

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3. डायबिटीज के प्रबंधन: भुने हुए चने का नियमित सेवन करने से ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। इसमें मौजूद फाइबर और प्रोटीन आहार को धीमे रैंकर पाचन प्रक्रिया करने में मदद करते हैं, जिससे डायबिटीज के प्रबंधन में सहायक होते हैं।

4. डाइजेशन को बेहतर बनाएं: भुने हुए चने में पाये जाने वाले फाइबर आपकी पाचन प्रक्रिया को सहायक बनाता है और आपको कब्ज से राहत दिलाता है।

5. हृदय स्वास्थ्य: चने में पाए जाने वाले फाइबर और अंतियोक्सीडेंट्स हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि ये कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

6. वजन प्रबंधन: भुने हुए चने का सेवन करने से आपका वजन प्रबंधन में मदद मिल सकती है। इसमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा से आपका भोजन पर्याप्त समय तक भरा रहता है और बिना अतिरिक्त खाने की भावना के वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

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7. त्वचा की देखभाल: चने में पाए जाने वाले विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

नोट: ध्यान दें कि ज्यादा मात्रा में चने का सेवन करने से बचें, क्योंकि अत्यधिक सेवन से भी कुछ स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। रोजाना एक मुट्ठी भुने हुए चने का सेवन करने से ही आपको उपरोक्त लाभ मिल सकते हैं।

संक्षिप्त में: भुने हुए चने में पौष्टिकता, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों की भरपूर मात्रा होने के कारण इसका नियमित सेवन करने से सेहत में सुधार हो सकता है। याद रखें कि सभी आहार को मात्रमें खाना चाहिए और किसी भी नई आहारिक व्यवस्था की शुरुआत से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।



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कमर की बढ़ती चर्बी से बढ़ सकती है हार्ट अटैक की आशंका, रहे सावधान

हृदयाघात यानी हार्ट अटैक के बहुत-से कारण हो सकते हैं। कमर की बढ़ती चर्बी भी इन्हीं में से एक है। हाल ही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में यह कहा गया है कि किसी व्यक्ति की कमर पर बढ़ती चर्बी हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम दस फीसदी तक बढ़ा सकती है। जानिए क्या कहा है इस रिसर्च में-

 

40 फीसदी तक की आशंका अधिक
रिसर्च के अनुसार, 37 इंच की कमर वाले व्यक्ति की तुलना में 41 इंच की कमर वाले व्यक्ति को हृदय संबंधी समस्याएं होने की आशंका 40 प्रतिशत ज्यादा हो सकती हैं। इसके साथ ही रिसर्च में ज्यादा वजन वाले लोगों की तुलना में ज्यादा कमर वाले लोगों में हृदय की स्थिति विकसित होने की आशंका ज्यादा पाई गई।

 

शोध में सामने आई यह बात
रिसर्च के मुख्य शोधकर्ता डॉ. अयोडिपुपो ओगुंटाडे के अनुसार, हाइ बॉडी मास इंडेक्स वाले व्यक्ति की तुलना में ज्यादा चर्बीयुक्त कमर वाले व्यक्ति में हार्ट फेलियर की आशंका 3.21 गुना ज्यादा सामने आई। जबकि इसके बाद की श्रेणी के व्यक्ति में इसका जोखिम 2.65 गुना पाया गया।

 

हृदय की कार्यप्रणाली पर विपरीत असर
कमर पर बढ़ी हुई चर्बी यह संकेत देती है कि संबंधित व्यक्ति की आंत की चर्बी ज्यादा है। यह अतिरिक्त फैट के रूप में पेट के चारों ओर जमा हो जाती है, जिससे रक्तवाहिकाओं में खून की गति बाधित होने लगती है। इससे हृदय की कार्य प्रणाली भी प्रभावित होने लगती है।

 

नियमित करें हल्की एक्सरसाइज
हर सप्ताह 150 मिनट्स मॉडरेट इंटेंसिटी एक्टिविटीज करें। इनमें साइकिल चलाना, डांसिंग, ब्रिस्क वॉकिंग, हाइकिंग, इनलाइन या रोलर स्केटिंग, स्विमिंग, रनिंग जैसी एक्टिविटीज शामिल करें। इसके अलावा सामान्य दिनचर्या में सीढ़ी चढऩा, लिफ्ट का उपयोग न करना और छोटी दूरियों के लिए बाइक-कार की जगह पैदल चलना आदि।

 

व्यायाम के तुरंत बाद न लें प्रोटीन डाइट
व्यायाम के तुरंत बाद खुद से प्रोटीन डाइट न बढ़ाएं, कई बार यह गुर्दों के लिए दिक्कत दे सकता है। सलाद, मौसमी फल व सब्जियां, फाइबरयुक्त आहार आदि लें। इनसे अच्छी कैलोरी मिलती हैं, लेकिन ये चर्बी नहीं बढ़ाते हैं। समय-समय पर अपने वेस्ट-हिप रेशो की जांच भी करते रहें और ज्यादा हो तो घटाएं। खाना खाते समय मोबाइल फोन से दूरी रखें, ताकि डाइट नियंत्रित रहे।

 



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Vitamin B12 Rich Food : बेजान शरीर में ताकत भर देगा ये आटा , Vitamin B12 से होता है भरपूर

Vitamin B12 Rich Food: विटामिन B12 एक महत्वपूर्ण पौष्टिक तत्व है जो हमारे शरीर के सही विकास और कार्यक्रम के लिए आवश्यक होता है। यह हमारे न्यूरोलॉजिकल फंक्शन को स्थापित रखने में मदद करता है और एनर्जी उत्पन्न करने में भी सहायक होता है। शाकाहारियों के लिए, विटामिन B12 (Vitamin B12) को प्राप्त करने के लिए कुछ सामग्रियों का अधिक सेवन करना महत्वपूर्ण हो सकता है ताकि उनके शारीर में विटामिन B12 की कमी न हो।


शरीर में विटामिन बी12 की कमी (Vitamin B12 Deficiency) से कमजोरी, थकान, याददाश्त की कमी और मुंह में छाले आदि की समस्या होती है. आज के समय में बदलते खान-पान की वजह से विटामिन बी12 (Vitamin B12) की कमी होना आम बात हो गई है. विटामिन बी12 (Vitamin B12) की कमी को दूर करने के लिए मांसाहारी फूड खाने की सलाह (B12 Rich Vegetarian Foods) दी जाती है. हालांकि आप आटे से भी विटामिन बी12 की कमी को दूर कर सकते हैं. यह आटा मांसाहारी चीजों से भी ज्यादा विटामिन बी12 का स्त्रोत है. आइये बताते हैं कि आप कैसे इससे विटामिन बी12 प्राप्त (Vitamin B12 Rich Foods) कर सकते हैं.

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Fortified Diet: फोर्टिफाइड अनाज
शाकाहारियों के लिए एक और उपाय है विटामिन B12 (Vitamin B12) से भरपूर फोर्टिफाइड आहार का सेवन करना। आजकल बाजार में ऐसे अनेक उत्पाद उपलब्ध हैं जिनमें विटामिन B12 को पौष्टिकता से भरपूर बनाया जाता है, जैसे कि ब्रेकफास्ट सीरियल, टोफू, और विटामिन B12 (Vitamin B12) सप्लीमेंट्स। आप इन्हें अपने आहार में शामिल करके भी विटामिन B12 (Vitamin B12) की कमी को पूरा कर सकते हैं।

Dairy Products डेयरी उत्पाद:
डेयरी उत्पाद भी शाकाहारियों के लिए विटामिन B12 (Vitamin B12) का महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं। दूध, दही, पनीर, छाछ आदि डेयरी उत्पादों में विटामिन B12 की मात्रा वर्धित की जाती है। इन्हें अपने आहार में शामिल करके आप विटामिन B12 की आवश्यकता को पूरा कर सकते हैं।

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नट्स
बादाम, अखरोट और तिल जैसे नट्स भी विटामिन बी12 (Vitamin B12) के अच्छे सोर्स हैं. इन्हें रोजाना की डाइट में शामिल करके आप विटामिन बी12 की कमी को पूरा कर सकते हैं. ब्रेड, डबलरोटी, कुकीज और पेस्ट्री आदि खमीर वाले प्रोडक्ट्स भी विटामिन बी12 से भरपूर होते हैं.

Soya products सोया उत्पाद:
सोया एक महत्वपूर्ण शाकाहारी स्रोत है जो आपको विटामिन B12 (Vitamin B12) प्रदान कर सकता है। बहुत सारे सोया उत्पाद जैसे कि सोया मिल्क, सोया पनीर, सोया दही आदि में विटामिन B12 के योगदान के रूप में फोर्टिफाइड (पौष्टिकता से भरपूर बनाया गया) किया जाता है। आप इन उत्पादों को अपने आहार में शामिल करके विटामिन B12 की मात्रा को पूरा कर सकते हैं।

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सावधानियां:
शाकाहारी आहार में विटामिन B12 (Vitamin B12) की कमी होने का खतरा होता है, इसलिए यदि आपका आहार पूरी तरह से शाकाहारी है, तो आपको नियमित रूप से विटामिन B12 (Vitamin B12) से भरपूर आहार लेने की आवश्यकता होती है। आपने अपने डॉक्टर से सलाह लेना भी महत्वपूर्ण हो सकता है ताकि आपकी विटामिन B12 की आवश्यकताओं को सही तरीके से पूरा किया जा सके।

शाकाहारियों के लिए विटामिन B12 (Vitamin B12) की कमी को दूर करने के लिए सोया और डेयरी उत्पादों का सेवन करना महत्वपूर्ण है। फोर्टिफाइड आहार भी एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। ध्यान देने योग्य है कि आप अपने डॉक्टर की सलाह लें और आपकी आवश्यकताओं के अनुसार उपाय अपनाएं। इसके साथ ही, नियमित शारीरिक जाँच और स्वास्थ्यपर जीवनशैली बनाए रखना भी आवश्यक है।



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Benefits of Aloe Vera Gel : हैल्थ के साथ त्वचा के लिए भी बेहद लाभकारी है एलोवेरा जेल, जानिए इस्तेमाल कैसे करें

Benefits of Aloe Vera Gel: एलोवेरा, जिसे आमतौर पर घरों में 'घृतकुमारी' के नाम से जाना जाता है, एक पौधा है जो कई सालों से स्वास्थ्य और त्वचा सम्बंधित समस्याओं के इलाज में प्रयुक्त होता आया है। एलोवेरा के पत्तों से प्राप्त किया जाने वाला जेल आपकी त्वचा और स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। यहाँ तक कि ,,,इसका रोजाना उपयोग आपको निखरती त्वचा और अच्छी सेहत की ओर एक कदम आगे बढ़ा सकता है।

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Benefits of Aloe Vera Gel: एलोवेरा जेल के लाभ:

Skin care त्वचा की देखभाल: एलोवेरा जेल का नियमित उपयोग आपकी त्वचा को मृदुलता प्रदान कर सकता है और त्वचा की सुरक्षा में मदद कर सकता है। यह जेल त्वचा को आराम देने के साथ-साथ त्वचा के रोम-रोम में आपकी रक्त संचारण को भी बेहतर बना सकता है।

Treats irritation and itching जलन और खुजली का इलाज: एलोवेरा जेल में शांतिप्रद गुण होते हैं, जो त्वचा की जलन और खुजली को कम करने में मदद कर सकते हैं।

Anti-Aging Properties एंटी-एजिंग गुण: एलोवेरा जेल में प्राकृतिक एंटी-एजिंग गुण होते हैं, जो त्वचा को झुर्रियों और उचित चिकित्सा देखभाल के साथ मदद कर सकते हैं।

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Scalp health स्कैल्प की सेहत: एलोवेरा जेल सिर की त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है। इसका नियमित उपयोग बालों की जड़ों को मजबूती देने में मदद कर सकता है और रूके बालों को भी जीवंत बना सकता है।

How to use aloe vera gel: एलोवेरा जेल का इस्तेमाल कैसे करें:

पत्तियों को काटें: एलोवेरा के पत्तियों को काटकर उनके आवश्यक भागों को निकाल लें। आपको उन पत्तियों को चुनना चाहिए जिनमें ज्यादा जेल होता है।

जेल निकालें: पत्तियों को काटने के बाद, आपको अपने हाथों से पत्तियों को काटकर उनमें से जेल निकालना होगा।

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त्वचा पर लगाएं: निकाले हुए एलोवेरा जेल को धीरे-धीरे अपनी त्वचा पर लगाएं। आप इसे चेहरे, गर्दन और अन्य शरीर के हिस्सों पर भी लगा सकते हैं।

15-20 मिनट रखें: एलोवेरा जेल को आपकी त्वचा पर 15-20 मिनट तक रखने दें ताकि वह आपकी त्वचा में अच्छे से आसिमिल सके।

धो दें: जब आपको लगे कि जेल आपकी त्वचा में अच्छे से समा गया है, तो आप उसे धो सकते हैं।

नम तौलिये से पोंछें: त्वचा को पानी से धोने के बाद, आप नम तौलिये से आपकी त्वचा को हलके हाथों से पोंछ सकते हैं।

मॉइस्चराइज़ करें: अगर आप चाहें तो इसके बाद आप एक अच्छी क्वालिटी की मॉइस्चराइज़र भी लगा सकते हैं, ताकि आपकी त्वचा को अधिक मॉइस्चर की आवश्यकता ना हो।

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सावधानियां:

किसी भी नए उत्पाद का प्रयोग करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें, खासकर अगर आपकी त्वचा आलर्जीक हो सकती है।
एलोवेरा जेल को सीधे पौधे से निकालने के पहले धो लें ताकि उस पर किसी भी प्रकार की मिट्टी या कीटाणु आदि का खतरा न रहे।
एलोवेरा जेल एक प्राकृतिक औषधि है जो आपकी त्वचा और स्वास्थ्य के लिए वास्तविक लाभ प्रदान कर सकती है। यदि आप इसका नियमित रूप से उपयोग करते हैं, तो आप जल्द ही उसके बेहतर और स्वस्थ फायदों का आनंद उठा सकते हैं।



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Monday, 28 August 2023

10 प्राकृतिक तरीके करेंगे डायबिटीज को कंट्रोल, फिर कभी नहीं बढ़ेगी शुगर

10 natural ways to control diabetes : डायबिटीज एक गंभीर रोग है जिसमें शरीर में रक्त शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। यह रोग नियंत्रित खानपान और नियमित व्यायाम के माध्यम से प्रबंधित किया जा सकता है। निम्नलिखित हैं 10 प्राकृतिक तरीके जिनसे आप डायबिटीज को नियंत्रित कर सकते हैं और रक्त शर्करा को कम करने में मदद मिल सकती है:

1. Consume Whole Grains साबुत अनाज का सेवन: अनाज में फाइबर और पौष्टिकता भरपूर मात्रा में होती है, जिससे आपकी रक्त शर्करा की स्तर में कमी हो सकती है। खासकर अखरोट, ब्राउन चावल, ओट्स और मिलेट जैसे अनाज खाने चाहिए।

2. Consumption of fruits फलों का सेवन: फलों में प्राकृतिक शुगर होता है जिससे आपके शरीर के अंदर शुगर की मात्रा को संतुलित रूप से बनाए रखने में मदद मिलती है। आपको नियमित रूप से सेब, पपीता, नाशपाती, आदि खाने चाहिए।

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3. Consumption of green vegetables हरी सब्जियों का सेवन: हरी सब्जियां फाइबर से भरपूर होती हैं जिससे आपकी रक्त शर्करा को कंट्रोल करने में मदद मिलती हैं। इनमें पालक, ब्रोकली, गाजर, टमाटर, लौकी आदि शामिल हैं।

4. Consumption of protein sources प्रोटीन स्रोतों का सेवन: मसूर की दाल, चने, तोफू, मखाना आदि प्रोटीन के अच्छे स्रोत होते हैं और ये रक्त शर्करा को संतुलित रखने में मदद करते हैं।

5. Practicing Exercise व्यायाम का अभ्यास: नियमित व्यायाम करने से आपके शरीर की कोशिकाओं का खर्च बढ़ता है और यह रक्त शर्करा को कम करने में मदद करता है। योग, कदमों की गिनती, साइकिलिंग, आदि कर सकते हैं।

6. Weight Management वजन प्रबंधन: अधिशिर्षक वजन से बचने के लिए आपको नियमित व्यायाम करना चाहिए। यह रक्त शर्करा को कम करने में मदद कर सकता है।

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7. Hydration हाइड्रेशन: पर्याप्त पानी पीने से आपके शरीर के अंदर की गंदगी बाहर निकलती है और रक्त शर्करा को कम करने में मदद कर सकती है।

8. Eating on time समय पर खाना: नियमित खानपान और समय पर खाना खाने से रक्त शर्करा की मात्रा को संतुलित रूप से बनाए रखने में मदद मिलती है।

9. Reduce stress तनाव कम करें: योग और मेडिटेशन के माध्यम से तनाव को कम करने से रक्त शर्करा की मात्रा को कम किया जा सकता है।

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10. Regular check-ups नियमित जांच-परीक्षण: अपनी डायबिटीज की स्थिति को नियमित रूप से जांचना महत्वपूर्ण है। इससे आप अपनी प्रगति को माप सकते हैं और आवश्यकतानुसार उपाय अपना सकते हैं।

सावधानियां: डायबिटीज के मामूल इलाज के लिए ऊपर दिए गए सुझावों का पालन करना महत्वपूर्ण है, लेकिन आपको अपने चिकित्सक से परामर्श करना भी जरूरी है। डायबिटीज के लिए किसी भी नए प्रयोग की शुरुआत से पहले चिकित्सक की सलाह लें।



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फिजियोथैरेपी से शरीर में रक्त संचार बढ़ता, हड्डियों को मिलती है मजबूती

Physiotherapy Health Benefits: डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो भारत में महिलाओं में हर तीन में से एक जबकि पुरुषों में हर आठ में से एक को यह बीमारी पाई जाती है। फिजियोथैरेपी के माध्यम से इस रोग में आराम मिल सकता है, जानिए इसके बारे में।

 

 

फिजियोथैरेपी की भूमिका
बड़ी चोट रोकने, काम के समय सही बैठने (खासकर मरीज सिटिंग जॉब में हो), मांसपेशियों की ऐंठन कम करने, मांसपेशियों के खिंचाव व लचीलेपन में मदद करने, शरीर के संतुलन में सुधार करने आदि में फिजियोथेरेपी महत्त्वपूर्ण है। अच्छे फिजियोथेरेपिस्ट के निर्देशन में व्यायाम करें।

 

 

ये होते हैं फायदे
फिजियोथैरेपी से शरीर में रक्त संचार की प्रक्रिया में सुधार होता और गतिशीलता बढ़ती है। इससे बैलेंस संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। शरीर के दर्द में राहत मिलती है। हड्डियों में कैल्शियम की कमी नहीं होती है। साथ ही रक्त संचार भी अच्छे तरीके से होता है। इसके अलावा स्ट्रेचिंग जैसी एक्टिविटीज के माध्यम से दर्द, तनाव, खिंचाव जैसी समस्याओं में भी सुधार होता है।

 

 

व्यायाम की प्रक्रिया
इसमें कई तरह की एक्टिविटीज व एक्सरसाइज को प्राथमिकता दी जाती है। इसमें वेट ट्रेनिंग, बैलेंस ट्रेनिंग, वॉकिंग, जॉगिंग, नंगे पैर चलना, शरीर का वजन स्थिर करना, शरीर में स्थिरता लाना, हड्डियों को मजबूती देने के लिए काम करना, थेराबेंड एक्सरसाइज, जेंटल मसाज जैसी एक्टिविटीज करवाई जाती हैं। इससे ऑस्टियोपोरोसिस सहित कई तरह की बीमारियों में राहत मिलती है।

 

 



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Plate of elderly and women should be full of calcium-vitamins

calcium vitamins benefits: पोषण माह का उद्देश्य सुपोषित भारत का निर्माण करना है, क्योंकि हम जानते हैं कि स्वास्थ्य व वेलबीइंग की दृष्टि से भोजन मुख्य भूमिका अदा करता है। इसलिए जरूरी है, थाली में संतुलित व पोषक आहार की मात्रा तय की जाए। क्योंकि हर आहार स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। चूंकि महिलाएं परिवार की आर्किटेक्ट होती हैं। अगर महिलाएं सुपोषित और जागरूक होंगी तो परिवार का भी बेहतर ध्यान रख पाएंगी। वहीं, परिवार के बुजुर्ग जिन्हें अतिरिक्त देखभाल के साथ पोषण की जरूरत होती है, उनकी डाइट को नजरअंदाज न करें। पोषण माह विशेष में इस बार हम बात करेंगे परिवार की महिलाओं व बुजुर्गों की डाइट पर।

बचे-खुचे के बजाय पोषण पर ध्यान दें
देखा गया है कि जब भी प्राथमिकता देने की बात आती है महिलाएं खुद को अंतिम स्तर पर रखती हैं। बचे-खुचे से अपना पेट भर लेती हैं, जो सही नहीं है। पर्याप्त पोषक तत्त्वों के अभाव से आंतरिक कमजोरी आने लगती है। इसका असर उन्हें 40 वर्ष के बाद पता चलना शुरू होता है। इसलिए जरूरी है कि परिवार की महिलाओं के पोषण पर जरूर ध्यान दिया जाए।

बोन डेन्सिटी चेकअप करवाएं
छरहरी काया के चक्कर में युवतियां क्रैश डाइटिंग करती हैं, जो सही नहीं है। उन्हें ऐसी डाइट लेनी चाहिए जो उनके दिनभर के पोषण स्तर को बनाए रखे। चॉकलेट, कॉफी, फास्ट फूड से दूर रहें। बोन मिनरल डेन्सिटी का महिलाएं व युवतियां खयाल रखें। ३० वर्ष के बाद बोन डेन्सिटी चेकअप अवश्य करवाएं।

डाइट में माइक्रो-न्यूट्रिएंट ज्यादा हों
बुजुर्गों को मानसिक व शारीरिक, दोनों तरह की केयर की जरूरत होती है। उनमें कब्ज की शिकायत अधिक पाई जाती है। इसे दूर करने के लिए पानी की मात्रा और संतुलित भोजन उनके लिए सही है। उनके भोजन में सब्जियों की मात्रा अधिक होनी चाहिए। उनकी डाइट में वेजिटेबल जूस व सूप की मात्रा बढ़ाएं। इससे उनकी डाइट में माइक्रोन्यूट्रिएंट रहेंगे।

महिलाएं इन बातों को रुटीन में करें शामिल
पानी ज्यादा पीएंं, क्योंकि कई बार पानी का इंटेक अच्छा न रहने से भी हार्मोन्स असंतुलित होते हैं।
महिलाओं की डाइट में प्रोटीन की मात्रा कम होती है। प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए पनीर, अंडा, नट्स, सीड्स, हरी सब्जियां, मिल्क प्रोडक्ट, सोया, दालें शामिल करना चाहिए।
खुद को रिफ्रेश करने के लिए मी-टाइम निकालें, फिटनेस पर ध्यान दें।

मौसमी फल और रंगीन सब्जियों का कॉम्बिनेशन अपनी डाइट में रखें।
लंच में सभी पोषक तत्त्वों से भरपूर आहार लें।
शाम को ग्रीन टी, जूस, फल या मेवे खा सकती हैं

डिनर हल्का रखें, दो रोटी, हरी सब्जियां, सलाद आदि लें।
प्रसव के बाद शिशु को ब्रेस्ट फीड आवश्यक रूप से करवाएं।
ऑयल अब्यूज न करें। यानी तेल सही तरह से उपयोग में लें। बार-बार गर्म किए हुए तेल में भोजन न पकाएं। रेडी-टु-ईट फूड से भी बचें।
अपना हर भोजन निश्चित समय पर करें। उसे स्किप न करें।



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बीपी रोगी व्यायाम में करें वॉक-जॉगिंग, शरीर पर कम पड़ेगा दबाव

Benefits of walk jogging: हाइ ब्लड प्रेशर के साथ एक्सरसाइज करना कहीं न कहीं जोखिमयुक्त है, लेकिन डॉक्टरी परामर्श और सही ट्रेनिंग के साथ भी व्यायाम किया जा सकता है। ऐेसे व्यायाम करें जिससे शरीर पर ज्यादा दबाव न पड़े।

कार्डियो व एरोबिक व्यायाम: ये एक्टिविटीज हृदय को मजबूती देने के साथ ही ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में भी सहायक हैं। इनमें वॉकिंग, साइकिलिंग, रोप जंपिंग, स्कीइंग, स्केटिंग लो या हाइ इम्पैक्ट एरोबिक्स, वाटर एरोबिक्स जैसी एक्टिविटीज शामिल हैं।

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: मांसपेशियां मजबूत बनाने और कैलोरी बर्न करने के साथ ही जोड़ों व हड्डियों के लिए भी बेहतर है।
स्ट्रेचिंग: शरीर लचीला बनता है, फुर्ती आती है, बॉडी मूवमेंट में सहायता मिलती है और शरीर का दर्द भी दूर होता है।

क्या करें : सप्ताह में कम से कम 5 दिन व्यायाम करें। हर दिन मीडियम इंटेंसिटी के व्यायाम 30 मिनट तक कर सकते हैं। समय कम हो तो सप्ताह में 4 दिन और 20 मिनट रोजाना एक्सरसाइज कर सकते हैं। इससे भी कम समय हो तो नियमित 5-10 मिनट व्यायाम जरूर करें।

ये बातें ध्यान रखें
एक्सरसाइज के दौरान या बाद में शरीर के रिएक्शन पर ध्यान दें और कोई भी दिक्कत हो तो एक्सरसाइज न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। कुछ जरूरी बातें जिन पर ध्यान दें-

बीपी बढऩे के कारणों का पता करें।
लिपिड प्रोफाइल, किडनी रोग, शुगर सहित जीवनशैली से प्रेरित रोगों व समस्याओं का पता करें।
छाती में अकडऩ, दर्द, चक्कर जैसे लक्षण दिखें तो व्यायाम न करें।
जैसे ही थकान होने लगे, व्यायाम बंद कर दें।

ट्रेनर की देखरेख में व्यायाम करें।
वॉकिंग-जॉगिंग को प्राथमिकता दें और छोटे लक्ष्य के साथ व्यायाम करें।
किसी भी तरह की समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।



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शुगर फ्री गोलियों हैं घातक, इनसे बढ़ती कई बीमारियों की आशंका

Sugar free tablets side effects: डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए चीनी का परहेज करते हैं लेकिन बहुत से लोग चाय या कॉफी में स्वाद के लिए चीनी की जगह शुगर फ्री गोलियां लेते हैं। एक शोध के मुताबिक इस कृत्रिम मिठास से हाइ ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों के साथ कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। इसलिए कोशिश करें कि शुगर फ्री गोलियां लेने से बचें।


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इसलिए भी होता है इनसे नुकसान

इन गोलियों में एस्पार्टेम, सैकरिन, सुक्रोज और रेबियाना जैसे पदार्थ होते हैं। शुगर फ्री गोलियों की पैकिंग पर ये नाम लिखे होते हैं। कई अन्य शोध में यह भी कहा गया है कि इसे प्राकृतिक उत्पादों की मदद से तैयार किया जाता है लेकिन केमिकल प्रोसेस के कारण ये अधिक नुकसान पहुंचाती हैं।


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शोध: मोटापे को बढ़ाती हैं ये गोलियां

मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल (अमरीका) की एक रिसर्च के अनुसार, जो लोग वजन घटाने के लिए शुगर फ्री गोलियां लेते हैं उनमें यह बिल्कुल कारगर नहीं है। यह मेटाबॉलिज्म और पाचन पर असर डालकर मोटापे को बढ़ाती है। लंबे समय तक लेने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका भी रहती है।

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खत्म करती हैं पेट में बैक्टीरिया

शुगर फ्री गोलियों से आंतों में मौजूद बैक्टीरिया पर नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे भूख कम लगती है। मोटापा बढऩे से हार्ट की बीमारियों की आशंका बढ़ती है। कुछ मामलों में लंबे समय तक शुगर फ्री गोलियों को लेने से आंखों की रोशनी भी घटने की आशंका देखी गई है।

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तत्काल साइड इफेक्ट

कुछ लोगों में शुगर फ्री गोलियां लेने के तात्कालिक लक्षण भी दिखते हैं जैसे सिरदर्द, मितली, जोड़ों में दर्द, नींद न आना, घबराहट आदि। अगर कोई व्यक्ति शुगर फ्री गोलियां लेता है और इसमें ऐसे लक्षण दिखते हैं तो उसे इस तरह की गोलियां तत्काल छोड़ देनी चाहिए।

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ऐसे बढ़ता है वजन

अमरीका के सेंटर फॉर साइंस इन पब्लिक इंटरेस्ट के मुताबिक, कृत्रिम स्वीटनर्स से पेट भरा हुआ नहीं लगता और सामने वाले को भूख लगने लगती है। भूख लगेगी तो अधिक खाएंगे और वजन बढऩे से दूसरी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की आशंका रहती है।

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...इसलिए भी शुगर फ्री लेने से बचना चाहिए

एक चम्मच चीनी में करीब 18 कैलोरी होती है और ज्यादा चीनी खाने से मोटापा बढ़ता है। शुगर फ्री गोलियों में कैलोरी नहीं होती है लेकिन इससे दूसरे तरह से नुकसान होते हैं। इसलिए जो लोग शुगर फ्री वाला सोडा, पेस्ट्री या मिठाइयां लेते हैं उनके मेटाबॉलिज्म पर दुष्प्रभाव पडऩे से नुकसान होता है। अमरीका की पड्र्यू यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के मुताबिक, डाइट सोडा से मोटापा, डायबिटीज और हार्ट संबंधित बीमारियां हो सकती हैं। इसी तरह शुगर फ्री मिठाइयां और पेस्ट्री भी नुकसान पहुंचाती हैं।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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Health Benefits of Makhana For Mens: अगर कमजोर पड़ गया है स्टेमिना, तो रोजाना करें इस चीज का सेवन

Makhana Benefits for men: संबंध बनाते वक्त पुरुष का शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। नहीं तो रिश्तों में खटास आ सकती है। अगर पुरुष प्यार के पलों में फेल हो जाए तो साथी पार्टनर का उससे भरोसा कम होने लगता है। यह कमी न केवल पुरुषों में हीनभावना पैदा करती है साथ ही इससे परिवारों में भी बिखराव होने की संभावना भी बढ़ जाती है। मखानों के सेवन से आप इस स्थिति से छुटकारा पा सकते हैं। इसके सेवन से 3 गजब के फायदे होंगे। आप इसका सेवन करके अपनी जिंदगी को खुशहाल बना सकते हैं।

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मसल्स हो जाती हैं मजबूत
शरीर की मसल्स (Makhana Benefits For Male) की कमजोर दूर करने में मखाने का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है. मखाने में कार्बोहाइड्रेट्स और प्रोटीन प्रचूर मात्रा में पाए जाते हैं। जिनसे शरीर की कोशिकाएं मजबूत होती हैं।

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बढ़ता है स्पर्म काउंट
पुरुषों (Makhana Benefits For Male) में खानपान में गड़बड़ी और खराब लाइफस्टाइल की वजह से इंफर्टिलिटी रेट बढ़ रहे हैं। इस वजह से न केवल पिता बनने का सपना टूटता है बल्कि संबंधों में भी बिखर आ जाता है. शारीरिक कमजोरी को दूर करने के लिए पुरुषों को रोजाना मखाने का सेवन करना चाहिए. ऐसा करने से स्पर्म काउंट भी बढ़ जाते हैं।

 

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यौन इच्छा में होती है बढ़ोतरी
खराब लाइफस्टाइल की वजह से यौन इच्छा में गिरावट आ सकती है। जो सुखद मैरिड लाइफ के लिए ठीक नहीं है। इसकी वजह होती है पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन (Testosterone) के उत्पादन में कमी. मखानों को रोजाना सेवन आपको इन समस्याओं से छुटकारा दिला सकता है। इसके सेवन से यौन इच्छा भी बढ़ जाती है।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

 



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Home Remedies for Gall bladder Stone : गॉल ब्लैडर स्टोन को तोड़ देंगे ये घरेलु उपचार, पेट के अंदर ही पिघल जाएगी पथरी

Home Remedies for Gall bladder Stone : गॉल ब्लैडर स्टोन, जो कि पित्ताशय में बनने वाले पत्थर होते हैं, एक आम स्वास्थ्य समस्या है जिसमें पेट के निचले हिस्से में दर्द, उल्टियाँ, पेट में गैस, और पेट की पीड़ा जैसे लक्षण हो सकते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए दवाइयों के साथ-साथ कुछ घरेलू उपचार भी होते हैं, जो निम्नलिखित हैं:

High intake of water पानी की अधिक मात्रा : रोजाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना गॉल ब्लैडर स्टोन को प्रभावित कर सकता है। पानी का अधिक मात्रा में सेवन से पथरी के बनने की संभावना कम होती है क्योंकि यह पथरी को बाहर निकालने में मदद कर सकती है।

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Lemon juice लेमन जूस: नियमित रूप से नींबू का रस पीना गॉल ब्लैडर स्टोन को तोड़ने में मदद कर सकता है। नींबू में मौजूद अम्ल मद्दों को पिघलने में मदद करता है और पथरी को कम करने में मदद कर सकता है।

Padiyankuri (Kitchen Schezwan) पैडीयांकुरी (किचन सेजवान): पैडीयांकुरी एक प्राकृतिक उपाय हो सकता है जो गॉल ब्लैडर स्टोन को कम करने में मदद कर सकता है। इसे रोजाना खाने से स्टोन की वृद्धि को रोकने में मदद हो सकती है।

Onion juice प्याज का रस: प्याज के रस में मौजूद सल्फुर पथरी को तोड़ने में मदद कर सकता है। एक छोटी प्याज का रस निकालकर इसे दिन में दो-तीन बार पीने से लाभ हो सकता है।

Ginger juice अदरक का रस: अदरक का रस भी पथरी को तोड़ने में मदद कर सकता है। इसे गर्म पानी के साथ मिलाकर पीने से लाभ हो सकता है।

Parijat leaves पारिजात पत्तियाँ: पारिजात के पत्तों को पीसकर उनका रस निकालें और यह रस पानी में मिलाकर पीने से पथरी को कम करने में मदद हो सकती है।

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Gall bladder stone prevention गॉल ब्लैडर स्टोन की रोकथाम

पाचन प्रणाली मानव शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और इसका सही तरीके से काम करना आवश्यक है ताकि हम स्वस्थ और कुशल रह सकें। इस प्रक्रिया में गॉल ब्लैडर भी एक महत्वपूर्ण अंग होता है, जिसका मुख्य कार्य आमतौर पर पाचन तंत्र के सहयोगी तरीके से निम्नलिखित कार्यों का संचालन करना होता है:

आयरन संचयन: गॉल ब्लैडर की प्रमुख कार्यप्रणाली में से एक है आयरन संचयन, जिसमें यह पूरी तरह से आयरन को संचित करके रखता है ताकि शरीर के अन्य हिस्सों में आयरन की आवश्यकता होने पर उसे प्रदान किया जा सके।

गॉल ब्लैडर अपशोषण: गॉल ब्लैडर आपके खाद्य पाचन के प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। जब आप भोजन खाते हैं, तो गॉल ब्लैडर अपशोषण के द्वारा आपके खाद्य को पाचन के लिए आवश्यक सामग्री के साथ मिश्रित करता है।

गॉल ब्लैडर छोड़ना: जब आप खाद्य पचाने के लिए आवश्यक सामग्री की आवश्यकता होती है, तो गॉल ब्लैडर अपने निचले हिस्से में आवश्यक सामग्री को प्रेषित करता है ताकि पाचन प्रक्रिया निरंतर चल सके।

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What are gall bladder stones? गॉल ब्लैडर स्टोन क्या होते हैं?
गॉल ब्लैडर स्टोन वास्तविकता में पत्थरों की तरह की कठिन पदार्थ होते हैं जो आपके गॉल ब्लैडर में बन सकते हैं। ये पत्थर आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल या बिलिरुबिन के तत्वों की अधिक मात्रा के कारण बनते हैं और यह आपके गॉल ब्लैडर के पास अवशोषित हो सकते हैं, जिससे वे दर्द और अन्य समस्याएँ पैदा कर सकते हैं।

Gall bladder stone prevention: गॉल ब्लैडर स्टोन की प्रमुख वजहें:

असहीत आहार: अधिक तले हुए, अधिक मसालेदार और प्रसादित खाद्य पदार्थों का सेवन करने से गॉल ब्लैडर स्टोन की संभावना बढ़ जाती है।

अपव्यवस्थित जीवनशैली: बैठे रहना और अप्रयास्थित जीवनशैली से भी इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

वजन में वृद्धि: अत्यधिक वजन और मोटापा भी गॉल ब्लैडर स्टोन की आशंका को बढ़ाते हैं।

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Gall bladder stone prevention: गॉल ब्लैडर स्टोन से बचाव:

पर्याप्त पानी पीना: रोजाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने से गॉल ब्लैडर स्टोन बनने की संभावना कम होती है।

स्वस्थ आहार: तले हुए, मसालेदार और जंक फूड की बजाय स्वस्थ आहार जैसे कि फल, सब्जियाँ, अनाज आदि का सेवन करें।

नियमित व्यायाम: योग और व्यायाम आपके पाचन प्रणाली को सुचारु रूप से काम करने में मदद कर सकते हैं।

वजन की नियंत्रण: अत्यधिक वजन से बचने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम का पालन करें।

नियमित खानपान: नियमित खानपान के साथ-साथ बच्चों को भी स्वस्थ खाद्य पदार्थों की अवश्यकता होती है।

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Symptoms of gall bladder stones गॉल ब्लैडर की पथरी के लक्षणों की कुछ सामान्य जानकारी निम्नलिखित है:

पेट के दहीने ओर या ऊपरी पेट में दर्द: यह एक आम लक्षण है, जिसमें बहुतायत में दर्द होता है, जो अक्सर दहीने कंधे या ऊपरी पेट में महसूस होता है।

पेट में उबकाई और तीव्र दर्द: पथरी की वजह से पेट में उबकाई और अचानक तीव्र दर्द हो सकता है, जो कुछ समय के लिए बहुत ही असहनीय हो सकता है।

पेट की उबाऊ: गैल ब्लैडर में पथरी के कारण पेट में उबाऊ हो सकता है, जिससे आपको बुरा लग सकता है और आपकी खान-पान की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

पेट की गैस : पथरी के कारण पेट में गैस बन सकती है और यह आपको असहज महसूस करा सकती है।

पेट के निचले हिस्से में दर्द: कई बार पथरी की वजह से पेट के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है, जो पैरों तक भी फैल सकता है।

पेट में सूजन: पथरी के कारण पेट में सूजन हो सकती है और आपकी पेट की दिक्कत को बढ़ा सकती है।

पीले रंग की त्वचा और आखों का पीलापन: जब पथरी गैल ब्लैडर में संकुचित होती है, तो यह आपकी त्वचा को पीला बना सकती है और आपकी आँखों का भी पीलापन हो सकता है।

गॉल ब्लैडर स्टोन की रोकथाम के लिए यह उपाय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित चेकअप करवाने से आप गॉल ब्लैडर स्टोन से बच सकते हैं और अपने पाचन प्रणाली को स्वस्थ रख सकते हैं।

कृपया ध्यान दें कि ये उपाय केवल सामान्य गॉल ब्लैडर स्टोन के लिए हैं और गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा, सही खानपान और नियमित व्यायाम भी गॉल ब्लैडर स्टोन से बचाव में मदद कर सकते हैं।

नोट: ऊपर दिए गए उपायों का इस्तेमाल करने से पहले किसी विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।



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Diabetes, high blood pressure and uric acid को कंट्रोल करती है इस पेड़ की छाल

peepal bark benefits : पीपल वृक्ष (Ficus religiosa), जिसे संस्कृत में 'आश्वत्थ' कहा जाता है, भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह वृक्ष पुरानी कहानियों, चिकित्सा ग्रंथों और आध्यात्मिक विचारों में भी उल्लेखित है। पीपल की छाल उसके विभिन्न औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है, जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप और यूरिक एसिड जैसी समस्याओं के इलाज में मददगार साबित हो सकती है।

मधुमेह (Diabetes) के लिए पीपल की छाल के फायदे:
पीपल की छाल में विशेष प्रकार के तत्व पाए जाते हैं जैसे कि फेनॉलिक और टैनिनिक यूरिया, जो मधुमेह के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं। इन तत्वों का मधुमेह के खतरनाक प्रभावों को कम करने में मदद की जा सकती है जैसे कि रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करना और इंसुलिन के प्रवाह को सुधारना।

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उच्च रक्तचाप (Hypertension) के लिए पीपल की छाल के फायदे:
पीपल की छाल में वासोडिलेटर गुण होते हैं, जो रक्तवाहिनियों को बढ़ावा देते हैं और रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही, यह छाल रक्त में कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में भी सहायक हो सकती है जो उच्च रक्तचाप की समस्या को बढ़ावा देते हैं।

यूरिक एसिड (Uric Acid) के लिए पीपल की छाल के फायदे:
यूरिक अम्ल की अधिकता से उत्पन्न होने वाली गठिया (Gout) और अन्य संबंधित समस्याएँ अच्छे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। पीपल की छाल में विशेष तत्व पाए जाते हैं जो मूत्रिक अम्ल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं और गठिया जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

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सावधानियाँ:
पीपल की छाल का सेवन केवल औषधीय उद्देश्यों के लिए ही करें और इसका अत्यधिक सेवन नहीं करें। इसे बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह की चिकित्सा या प्रयोगशाला उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं करना चाहिए।


पीपल की छाल में पाए जाने वाले औषधीय तत्व मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मूत्रिक अम्ल जैसी समस्याओं के इलाज में मददगार साबित हो सकते हैं। तात्कालिक चिकित्सा देखभाल के बिना, इसे केवल औषधीय उद्देश्यों के लिए ही उपयोग करें और सावधानी से सेवन करें।



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खट्टा-मीठा पाइनएप्पल खाने से दूर होती हैं ये 7 बीमारियां, जानिए मिठास और खटास का अनोखा संयोजन

Pineapple Health Benefits : स्वाद में मिठास और खटास एक अनोखा संयोजन होता है जिसे खाने में आनंद आता है। पाइनएप्पल एक ऐसा फल है जिसमें यह स्वाद का खेल विशेष रूप से प्रकट होता है, और इसके साथ ही यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी कई लाभ प्रदान करता है। पाइनएप्पल में मौजूद विभिन्न पोषक तत्व हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करते हैं।

1. Rich source of Vitamin C विटामिन सी की भरपूर श्रोत: पाइनएप्पल में अच्छी मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देता है। विटामिन सी एंटीऑक्सिडेंट्स का श्रेष्ठ स्रोत होता है जो कील-मुहासे और त्वचा समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं।

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2. Improve digestion पाचन क्रिया को बेहतर बनाएं: पाइनएप्पल में अननासिक एन्जाइम ब्रोमेलेन पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करता है। यह खाने की प्रक्रिया को आसान बनाता है और जीआनो जूडिकल यानी खाने के लाल रंग को तोड़ने में मदद करता है।

3. Beneficial for bones हड्डियों के लिए फायदेमंद: पाइनएप्पल में कैल्शियम और मैग्नीसियम की भरपूर मात्रा होती है, जो हड्डियों की मजबूती को बढ़ावा देते हैं। इसके साथ ही मैग्नीसियम मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में मदद करता है।

4. Digestive Health डाइजेस्टिव स्वास्थ्य : यह फल अपने विशेष एन्जाइम के कारण पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करता है, जिससे आपकी डाइजेस्टिव स्वास्थ्य मजबूत रहती है।

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5. Control glucose levels ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित करें: पाइनएप्पल में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो आपके शरीर के ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करती है। यह डायबिटीज के रिस्क को कम करने में सहायक हो सकता है।

6. Skin care स्किन की देखभाल: पाइनएप्पल में मौजूद विटामिन सी त्वचा को युवा और चमकदार बनाने में मदद करता है। यह कोल्लेजन की उत्पत्ति को बढ़ावा देता है और त्वचा के धूल-मिट्टी को हटाने में मदद करता है।

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7. Healthy option स्वास्थ्यपूर्ण विकल्प: स्वादिष्ट और सेहतमंद तरीके से बनाया गया पाइनएप्पल स्वास्थ्यपूर्ण विकल्प हो सकता है। आप इसे फ्रेश फ्रूट, सलाद, स्मूदी, या तंदूरी सब्जी के रूप में शामिल कर सकते हैं।

इस प्रकार, पाइनएप्पल में मौजूद स्वाद की मिठास और खटास के साथ-साथ विभिन्न पोषक तत्व हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं। तो, आप भी अपने आहार में पाइनएप्पल को शामिल करके इसके लाभों का आनंद उठा सकते हैं।



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रिसर्च में हुआ खुलासा, भविष्य में लू से बढ़ेगी मरने वालों की संख्या, इन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा

Death due to Heat Waves: पिछले 20 सालों में जानलेवा लू चलने की घटनाओं में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। एक अध्ययन के अनुसार भविष्य में इस प्रकार की प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों की घटनाएं और बढ़ेंगी। जिस वजह से लू संबंधी मामलों में मृत्यु दर बढ़ने की आशंका जताई गई है। यह दावा एक अध्ययन में किया गया है।

अध्ययन में पाया गया है कि लू के प्रकोप से यूरोपीय देश विशेष रूप से ज्यादा प्रभावित होंगे। शोधकर्ताओं के अनुसार, लू से बुजुर्गों, बीमार लोगों और गरीबों के लिए ज्यादा खतरनाक होगा।


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रिसर्च के अनुसार, 2003 में लू चलने के दौरान यूरोप में तापमान 47.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। यह हालिया दशकों में सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना गया है। इस लू के कारण कुछ सप्ताह के भीतर ही 45,000 से 70,000 लोगों की मौत हो गई थी।

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स्विट्जरलैंड स्थित ईटीएच ज्यूरिख विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि आने वाले समय में ऐसी लू आम हो सकती है। 2013 से यूरोप, दक्षिण पूर्व एशिया, लातिन अमेरिका, अमेरिका और कनाडा के 47 देशों के 748 शहरों और समुदायों में रोजाना गर्मी से अतिरिक्त मृत्यु हुई थी। जिसका डेटा एकत्रित किया गया।

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अतिरिक्त मृत्यु दर से यह बात सामने आई कि एक निश्चित अवधि में अपेक्षित मृत्यु दर से अधिक कितने लोगों की मौत हुई है। शोधकर्ताओं ने सभी 748 स्थानों के औसत दैनिक तापमान और मृत्यु दर के बीच संबंध की गणना करने के लिए इस डेटा का उपयोग किया। इससे उन्होंने प्रत्येक स्थान के ऐसे आदर्श तापमान के बारे में पता लगाया, जिसमें अतिरिक्त मृत्यु दर सबसे कम है।



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महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं चिया सीड्स , जानिए 5 फायदे

Chia seeds are very beneficial for women: चिया बीज आजकल स्वास्थ्यवर्धक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं, और विशेष रूप से महिलाओं के लिए ये बीज बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। चिया बीज (Chia seeds) हमारे स्वास्थ्य को सुधारने के साथ-साथ महिलाओं के लिए कई विशेष फायदे प्रदान करते हैं। इस लेख में, हम चिया बीज के महिलाओं के लिए फायदे की विस्तृत चर्चा करेंगे।

1. Extremely Effective on Heart Health: हार्ट हेल्थ पर बेहद प्रभावी:
चिया बीज (Chia seeds) में अच्छी मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं। ये फैटी एसिड्स रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।

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2. Helpful in improving hormonal balance हॉर्मोनल बैलेंस को सुधारने में मददगार:
चिया बीज (Chia seeds) में विटामिन बी, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और आयोडिन जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं जो हॉर्मोन्स की सही मात्रा में सफलतापूर्वक नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। यह महिलाओं के मासिक धर्म के नियमितता को बनाए रखने में मदद कर सकता है और पीरियड्स के दर्द को कम करने में भी सहायक हो सकता है।

3. Helpful in Maintaining Bone Health बोन हेल्थ को बनाए रखने में सहायक:
चिया बीज (Chia seeds) में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स होते हैं जो हड्डियों के स्वास्थ्य को सुधारने में मदद कर सकते हैं। महिलाएं जो अपने बोन हेल्थ का ख्याल रखना चाहती हैं, उनके लिए चिया बीज एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं।

4. Helpful in reducing weight वजन कम करने में सहायक:
चिया बीज (Chia seeds) के सेवन से बढ़ती हुई भूख को कम करने में मदद मिल सकती है जिससे वजन कम करने का प्रयास सफलता पूर्वक हो सकता है। इसके अलावा, चिया बीज में ऊबले हुए पानी में फूलने से बीज वजन में वृद्धि करके भूख को दबा सकते हैं, जिससे भोजन की मात्रा कम हो सकती है।

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5. Skin Care: त्वचा की देखभाल:
चिया बीज (Chia seeds) में विटामिन ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स (omega-3 fatty acids) होते हैं, जो त्वचा को ग्लो करने में मदद कर सकते हैं और उसकी नमी बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा, चिया बीज में प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है जो त्वचा की मरम्मत को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है।


चिया बीज(Chia seeds) महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हो सकते हैं। इन्हें नियमित रूप से सेवन करके महिलाएं अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकती हैं और विभिन्न रोगों से बच सकती हैं। हालांकि, किसी भी नए आहार को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए, खासकर ऐसे मामलों में जहाँ रूग्णता की स्थिति हो।



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Sunday, 27 August 2023

ALERT : स्लीप एपनिया से 60 फीसदी बढ़ जाता है ब्रेन स्ट्रोक का खतरा

कैलिफोर्निया. स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने हाल ही एक अध्ययन में बताया कि स्लीप एपनिया (सोते समय कुछ पल के लिए सांस का बंद होना) से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिकों एक दशक में 20 से 50 वर्ष की उम्र के लगभग 17 लाख लोगों पर अध्ययन किया। इसमें पाया कि स्लीप डिसऑर्डर वाले लोगों में एट्रियल फाइब्रिलेशन विकसित होने की आशंका पांच गुना अधिक होती है। इसके कारण इनमें स्ट्रोक का खतरा भी 60 फीसदी अधिक होता है।
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि स्लीप एपनिया की वजह से उच्च रक्तचाप, टाइप 2 मधुमेह और अवसाद जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि जिन लोगों में स्लीप एपनिया की शुरुआत हेाती है, वे जीवनशैली में बदलाव कर इसे नियंत्रित कर सकते हैं, जैसे वजन कम करना, धूम्रपान या शराब यदि करते हैं तो इसे छोडऩा। जिनको ज्यादा समस्रूा है, वे सीएपीए मशीन का उपयोग कर सकते हैं।

कब होता है स्लीप एपनिया
स्लीप एपनिया तब होता है, जब सोते वक्त सांस लेने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। इससे सांस लेने में दिक्क्त होने लगती है।



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जापानी लोगों की लम्बी आयु के पीछे क्या है रहस्य: 7 फूड्स जो 100 साल तक जीने में करते हैं मदद

7 Japanese Superfoods Unveiling the Path to a Centenarian Life : जब हम जापान की आयुर्वेदिक विचारधारा की बात करते हैं, तो हम सोचते हैं कि उनके दीर्घ जीवन के पीछे खानपान की विशेष भूमिका हो सकती है। जापानी लोगों की लम्बी आयु का रहस्य उनके आहार में छिपा होता है, जिसमें कई ऐसे आहार होते हैं जो उन्हें स्वस्थ और सुखद जीवन जीने में मदद करते हैं। यहाँ, हम आपको 7 ऐसे आहार के बारे में बता रहे हैं जिनका (food secrets behind long lives of japanese people) सेवन करके आप भी लंबे और स्वस्थ जीवन का आनंद उठा सकते हैं।

फिश (Fish): जापान में मछली खाने की परंपरा बहुत पुरानी है और यह उनके दीर्घ जीवन के एक महत्वपूर्ण कारण मानी जाती है। मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते हैं जो हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं और खून की चर्चा को कम करने में मदद करते हैं।

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Plant-based diet वनस्पति आहार: जापानी लोग अक्सर वनस्पति आहार खाते हैं, जैसे कि सोया, टोफू, मिसो और वनस्पतियों से बनी चीजें। ये आहार उन्हें फाइटो-एस्ट्रोजेन्स प्रदान करते हैं जो हड्डियों को मजबूती प्रदान करते हैं और कैंसर के खिलाफ रक्षा करते हैं।

Rice and Whole Grains चावल और साबुत अनाज: जापान में चावल और साबुत अनाजों का सेवन करने की परंपरा है, जो उनके आहार का मुख्य हिस्सा होते हैं। ये अच्छे कार्बोहाइड्रेट्स प्रदान करते हैं जो ऊर्जा के स्रोत के रूप में काम करते हैं और पेट को भरपूर महसूस करने में मदद करते हैं।

Vegetables सब्जियां: जापानी खाने में सब्जियों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। विभिन्न प्रकार की सब्जियां उन्हें विटामिन, मिनरल्स और फाइबर की मात्रा प्रदान करती हैं, जो उनके शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं।

Seafood सीफूड (समुंद्री खाद्य): जापान में सीफूड का सेवन भी आम है और इसमें विभिन्न प्रकार के समुंद्री जीवों को शामिल किया जाता है, जैसे कि क्रैब, श्रिम्प, स्क्विड आदि। सीफूड में प्रोटीन होता है जो मांसपेशियों की मजबूती को बढ़ावा देता है और विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है।

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Green Tea ग्रीन टी: जापान में ग्रीन टी की पारंपरिक चाय का सेवन करना आम है। ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो आपके शरीर को रोगों से बचाने में मदद करते हैं और आपकी त्वचा को भी स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं।

Fruits फल: जापानी आहार में फलों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। विभिन्न प्रकार के फल उन्हें विटामिन, मिनरल्स और फाइबर प्रदान करते हैं और उनके पाचन प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में मदद करते हैं।

food secrets behind long lives of japanese people

food secrets behind long lives of japanese people : इन 7 आहारों को अपने खानपान में शामिल करके आप भी जापानी लोगों की तरह दीर्घ और स्वस्थ जीवन का आनंद उठा सकते हैं। याद रखें, आहार सिर्फ आपके शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए स्वस्थ आहार का पालन करते हुए हम भी एक लंबे और खुशहाल जीवन का आनंद उठा सकते हैं।



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Saturday, 26 August 2023

वर्कआउट से पहले वॉर्मअप व आदतो में बदलाव से कम होगी स्पोट्र्स इंजरी

स्पोट्र्स इंजरी ऐसी चोट होती है, जिसमें जख्म तो नहीं दिखता, लेकिन अंदरूनी रूप से शरीर में असहनीय दर्द होता है। इसमें हड्डियां टूटने, मोच आने, अंग, मांसपेशी आदि का अपनी जगह से खिसकने व लिगामेंट के क्षतिग्रस्त होने जैसी समस्याएं होती हैं। नेशनल स्पोट्र्स डे (29 अगस्त) के मौके पर जानते हैं कि स्पोट्र्स इंजरी क्या होती है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है।

 

व्यायाम से पहले वॉर्मअप इसलिए जरूरी
कसरत से पहले 5-10 मिनट वॉर्मअप एक्सरसाइज करें, ताकि मसल्स लचीली हों। 20-22त्न मामलों में ट्रेनर या कोच के न होने से चोट लगती है। यदि प्रभावित हिस्से पर सूजन व दर्द 3-4 दिन या इससे ज्यादा समय तक रहें तो डॉक्टरी सलाह लें। इसमें कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और लचीलापन आदि शामिल हैं। ये सब चोट की संभावना को कम करने में मदद करेंगे। वैकल्पिक रूप से विभिन्न मसल्स ग्रुप के लिए और हर दूसरे दिन एक्सरसाइज करें।

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ज्यादा एक्सरसाइज से बचें
अगर आपको चोट लग जाती है तो जब तक आप पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो जाते, खेल या व्यायाम शुरू न करें। दर्द में खासतौर पर काम शुरू न करें।

 

खूब पानी पीएं
व्यायाम या खेलकूद से पहले हमारा शरीर ठंडा होता है। ठंडे शरीर में जल्दी चोट लगती है। ऐसे में वार्मअप जरूरी है। पर्याप्त पानी डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक से बचाता है।

 

स्ट्रेचिंग न भूलें
स्ट्रेचिंग, मांसपेशियों के संकुचन व परफॉर्मेंस में सुधार कर सकती हैं। चोट का जोखिम कम होता है। स्ट्रेचिंग दर्दनाक न हो, बल्कि धीरे-धीरे शुरू करें।

 

सही तकनीक और उपकरण
खेल या व्यायाम से जुड़ा हर उपकरण या प्रयोग में आने वाली चीजें सही हों, जैसे जूते। जूते सही नहीं होंगे तो ये पैर में चोट का कारण बन सकते हैं। खेल या व्यायाम की सही तकनीक जानें। थकान या दर्द की स्थिति में व्यायाम करने या खेलने को नजरअंदाज करें।

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स्पोट्र्स इंजरीज के लिए आरआइसीई मेथड
हल्की इंजरी में आरआइसीई मेथड अपनाया जाता है। इसमें आर को रेस्ट यानी आराम, आइ को आइस यानी बर्फ, सी को कम्प्रेशन यानी दबाव। ई को एलिवेशन यानि ऊंचाई के लिए जाना जाता है। अच्छे परिणाम के लिए इसे चोट के 24 से 36 घंटे के बीच अपनाया जाता है।चोट से ऐसे बचाएं शरीर का हर अंग
शरीर के हर अंग के लिए अलग-अलग व्यायाम होते हैं। इन अंगों को इंजरी से बचाने के लिए कौन-कौनसी व्यायाम प्रक्रिया अपनानी चाहिए। जानते हैं इसके बारे में-

गर्दन और पीठ का दर्द
बैक इंजरी या कमरदर्द से बचने के लिए गर्दन, बैक और पेट की मसल्स को स्ट्रेच करना चाहिए।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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