Tuesday, 31 December 2019

इन सवालों के जवाब से जानें क्या आपका दिमाग भी करता है दो नावों की सवारी

1. सेहत के बारे में आपकी सोच हमेशा तनाव से भरी होती है और डराती है?

अ: सहमत

ब: असहमत

2. कुछ भी अच्छा और नया कदम उठाने से पहले आप बहुत सोचते हैं ?
अ: सहमत

ब: असहमत

3.आपकी पहली सोच अच्छी होती है और आपको सुधरने के लिए हिम्मत बंधाती है ?
अ: सहमत

ब: असहमत

4. पहली पॉजिटिव सोच पर कायम न रह पाना आपकी कमजोरी है ?
अ: सहमत

ब: असहमत

5. आप जब भी सोचा हुआ कदम उठाते हैं, डर दूसरी सोच पर हावी हो जाता है?
अ: सहमत

ब: असहमत

6. आपका सैकेंड थॉट अक्सर नेगेटिव होता है व आपको कमजोर बनाता है?
अ: सहमत

ब: असहमत

7. आप 'करूं' या 'ना करू' की उलझन में फंसते हैं तो 'ना करूं' अपने फायदे गिनवाकर भारी पड़ता है ?
अ: सहमत

ब: असहमत

8. आप नेगेटिव और उलझन भरे विचारों को आत्मशक्ति से जीत नहीं पाते ?
अ: सहमत

ब: असहमत

9. परिणाम का डर आपको खर्च व समय के गुणा-भाग में उलझाकर आलसी बना देता है ?
अ: सहमत

ब: असहमत

स्कोर और एनालिसिस -
आप खुद ही उलझ रहे हैं: अगर आप क्विज के 6 या उससे ज़्यादा सवालों से 'सहमत' हैं तो आपकी सोच और दूसरी बार आने वाले विचार आपको उलझा रहे हैं। आप आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन कुछ ऐसा सोचते हैं कि पीछे लौट जाते हैं। सेहत को सुधारने के लिए मन को ताकत देनी होगी।

सोच पर भारी है आपका विश्वास: आप क्विज के 6 या ज़्यादा सवालों के जवाब 'असहमत' हैं तो आपका मन और विचार आपके काबू में हैं। आप उसी विचार और दिशा में सोचते हैं जिसे करने का सामथ्र्य आपके अंदर होता है।



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Increase sperm motility: हफ्तेभर में शुक्राणु की गुणवत्ता बढ़ा देगा ये आहार

increase sperm motility in hindi: आप यदि शुक्राणु गुणवत्ता संबंधी समस्या से परेशान है तो, आपके लिए एक अच्छी खबर है। आप चाहे तो एक सप्ताह के भीतर अपने शुक्राणुओं की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं। इस बात का खुलासा एक रिसर्च में किया गया है। छोटे पैमाने पर एक नए यूरोपीय अध्ययन में पाया गया है कि एक आदमी का आहार दो हफ्तों से भी कम समय में उसके शुक्राणु की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

स्वीडन के लिंकोपिंग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वाले 20 से 27 वर्ष की आयु के 15 स्वस्थ, धूम्रपान न करने वाले युवा पुरुषों किया गया।

प्रतिभागियों को दो सप्ताह की अवधि के लिए शोधकर्ताओं द्वारा निर्धारित आहार का पालन करने के लिए कहा गया। पहले सप्ताह के दौरान, उन्हें नॉर्डिक पोषण सिफारिशों Nordic Nutrition Recommendations के आधार पर भोजन दिया गया, जिसमें उच्च मात्रा में अनाज, रोटी, आलू, फल और सब्जियों को शामिल किया, जबकि वसा और मिठाई का कम उपयोग किया गया। इसके साथ डेयरी, मांस, मछली, अंडे और बीन्स की एक मध्यम मात्रा शामिल कि गई है। , ।

दूसरे सप्ताह के दौरान, प्रतिभागियों ने आहार के अलावा उच्च मात्रा में चीनी का सेवन किया - प्रति दिन 375 ग्राम चीनी, लगभग 3.5 लीटर सोडा या 450 ग्राम कैंडी।

टीम ने अध्ययन के शुरू में प्रतिभागियों के शुक्राणु की गुणवत्ता और अन्य स्वास्थ्य कारकों को मापा, एक स्वस्थ आहार खाने के पहले सप्ताह के बाद, और एक उच्च-चीनी आहार खाने के दूसरे सप्ताह के बाद।

पीएलओएस बायोलॉजी में ऑनलाइन प्रकाशित किए गए निष्कर्षों से पता चला है कि अध्ययन की शुरुआत में प्रतिभागियों में से एक तिहाई में शुक्राणु की गतिशीलता कम थी ( low sperm motility ) - जो कि शुक्राणु की गति करने की क्षमता है, और एक कारक है जो शुक्राणु की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। हालांकि, टीम को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि अध्ययन के अंत तक, सभी प्रतिभागियों की शुक्राणु गतिशीलता ( Increase sperm motility ) सामान्य हो गई थी, जिसमें पहले सप्ताह से ही सुधार देखा गया।

अध्ययन प्रमुख अनीता ने कहा कि हमारा अध्ययन बताता है कि आहार शुक्राणु की गतिशीलता को प्रभावित करता है। और बहुत ही कम समय में तेजी से अपना असर दिखाता है। जोकि ध्यान देने योग्य बात है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि शुक्राणु की गतिशीलता में वृद्धि स्वस्थ आहार का प्रत्यक्ष परिणाम हो सकती है, जो दूसरे सप्ताह में बनी रही। जब प्रतिभागी अधिक चीनी भी खा रहे थे।

टीम ने छोटे आरएनए अंशों को भी देखा, जो शुक्राणु में पाए जाते हैं और एक कोशिका के विकास व गतिशीलता से जुड़े होते हैं, में भी दो सप्ताह के बाद बदलाव देखा गया।

टीम ने उल्लेख किया कि शुक्राणु की गुणवत्ता कई पर्यावरणीय और जीवन शैली कारकों से नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकती है, उदाहरण के लिए, मोटापा और मोटापे से संबंधित बीमारियां, जैसे कि टाइप 2 मधुमेह, खराब शुक्राणु की गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध जोखिम कारक हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा हमारे अध्ययन से पता चलता है कि थोड़े समय में आहार के जरिए शुक्राणु की गतिशीलता को बदला जा सकता है और इसके महत्वपूर्ण नैदानिक प्रभाव हैं।



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Headaches in kids: बच्चे काे रहता है सिरदर्द, ताे न करें नजरअंदाज

Headaches in kids in Hindi: सिरदर्द सिर्फ वयस्कों की नहीं बल्कि बच्चों और किशोरों को भी परेशान कर सकता है। कई रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है। रिसर्च में पता चला है कि स्कूल जाने वाली उम्र के लगभग 75 प्रतिशत बच्चों को कभी-कभी सिरदर्द का अनुभव हो सकता है और उनमें से 10 प्रतिशत को नियमित यह परेशानी हो सकती है।

Types Of Headaches
सिरदर्द दो प्रकार के हो सकते हैं: प्राथमिक सिरदर्द विकार, जैसे कि माइग्रेन, तनाव का सिरदर्द, पुराना दैनिक सिरदर्द, क्लस्टर सिरदर्द, जो कुछ आंतरिक प्रक्रियाओं और अन्य ट्राइजेमिनल ऑटोनोमिक सेफालिज्म के कारण होता है। सैकंडरी सिरदर्द विकार, जो किसी बीमारी के लक्षण के रूप में उत्पन्न होता है। लगभग 58.4 प्रतिशत स्कूल जाने वाले बच्चे प्राथमिक सिरदर्द विकार के विभिन्न रूपों के शिकार होते हैं। सिरदर्द के सामान्य कारणों में सहकर्मी का दबाव, प्रदर्शन का दबाव या खराब प्रदर्शन और अतिरिक्त गतिविधियों का कम होना शामिल है।

प्राथमिक सिरदर्द का निदान चिकित्सा इतिहास और शारीरिक परीक्षण के गहन व सावधानीपूर्वक अध्ययन द्वारा किया जा सकता है। उपचार के उद्देश्य में आम तौर पर दर्द निवारक दवा, बचाव चिकित्सा और bio-behavioural therapy शामिल की जाती है।

बच्चों के मामलों में व्यापक उपचार रणनीति तैयार करने के लिए बच्चे की स्थिति का गहन अध्ययन महत्वपूर्ण है। माता-पिता के लिए कभी-कभी समस्या की गंभीरता का पता लगाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि बच्चे अक्सर अपनी शिकायत सही से रखने सफल नहीं होते हैं। सिरदर्द का अनुभव करने वाले बच्चे अक्सर गुस्सैल, चिड़चिड़े और हिंसक होते हैं। साथ ही, बच्चे विभिन्न लक्षणों के साथ विभिन्न प्रकार के सिरदर्द से पीड़ित होते हैं। सिरदर्द के सामान्य लक्षण ( Headaches symptoms ):

आधासीसी ( migraines )
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, माइग्रेन सबसे अधिक प्रचलित बीमारियों में से एक है। इसके लक्षण हैं:

1. सिर में तेज दर्द और थकावट।

2. मतली और उल्टी।

3. पेट में ऐंठन।

4. ध्वनि और प्रकाश के प्रति तीव्र संवेदनशीलता।

तनाव से प्रेरित सिरदर्द ( Tension-induced headaches )
वयस्कों की तुलना में ये बच्चों और किशोरों में अधिक आम हैं। अक्सर तनाव और थकान के परिणामस्वरूप सिर और गर्दन के ऊतकों में सामान्य रक्त प्रवाह में व्यवधान उत्पन्न होता है, जिससे सिरदर्द होता है।

इसके लक्षण हैं:

1. माथे के दोनों तरफ दर्द।

2. सिर और गर्दन क्षेत्र के आसपास की मांसपेशियों में दर्द।

क्लस्टर सिरदर्द ( Cluster headaches )
क्लस्टर सिरदर्द एक दिन या एक सप्ताह की अवधि में पांच या अधिक बार होता है। इसका प्रभाव हर बार 15 मिनट से तीन घंटे तक हो सकता है। ये हैं लक्षण :

1. माथे के एक तरफ तेज दर्द।

2. नाक भरना, आंखों से पानी आना, झल्लाहट और गुस्सा।

अलग-अलग ट्रिगर बच्चों में माइग्रेन, तनाव-प्रेरित सिरदर्द या पुराने सिरदर्द के रूप में सिरदर्द पैदा कर सकते हैं, जैसे:

1. मौसमी फ्लू और वायरल संक्रमण, लगातार साइनस संक्रमण, या टॉन्सिलिटिस।

2. तनाव और थकान, नींद न आना।

3. अत्यधिक शारीरिक परिश्रम।

4. लंबे समय तक पढ़ने, लंबे समय तक टीवी देखने और वीडियो गेम खेलने के कारण आई स्ट्रेन।

5. सिर में चोट।

6. ट्यूमर।

7. भावनात्मक तनाव, सहकर्मी दबाव, प्रदर्शन दबाव।

8. मस्तिष्क संक्रमण जैसे मैनिंजाइटिस और एन्सेफलाइटिस।

9. नाइट्रेट या एमएसजी जैसे परिरक्षकों को खाद्य एलर्जी।

10. रक्त शर्करा के स्तर में गिरावट के लिए भूख और निर्जलीकरण।

नजरअंदाज न करें सिरदर्द ( do not ignore headache )
सिरदर्द होने पर अक्सर लोग इसे नजर अंदाज कर देते हैं। और डॉक्टर के पास जाने बजाय अपनी से मर्जी से एनाल्जेसिक और पेरासिटामोल का इस्तेमाल करते हैं। यह हानिकारक हो सकता है क्योंकि इन दवाओं का अति प्रयोग सिरदर्द को बढ़ाने के साथ, उपचार में भी समस्या पैदा कर सकता है।

सिर में मालिश, कोल्ड कंप्रेस या अच्छी नींद सामान्य सिरदर्द में राहत दिला सकती है। सिरदर्द से बचने के लिए संतुलित आहार करना और बाहरी गतिविधियों में भाग लेना फायदेमंद हो सकता है। यदि बार-बार सिरदर्द पेरशान करे तो उसको नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। अपने बच्चे की शिकायत पर ध्यान देना और चिकित्सक की सलाह लेना बेहद जरूरी है।



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अंडे से ज्यादा फायदेमंद है टमाटर

टमाटर भोजन के सर्वाधिक लाभदायक खाद्य पदार्थों में से एक है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोध के अनुसार टमाटर अनेक प्रकार के कैंसर से हमारी सुरक्षा करता है, जिसमें छाती और गले के कैंसर प्रमुख हैं। केवल 100 ग्राम टमाटर से 0.9 ग्राम प्रोटीन, 0.2 ग्राम वसा और 3.6 ग्राम कार्बोहाइड्रेट प्राप्त हो जाते हैं। टमाटर में आयरन की मात्रा एक अंडे की तुलना में पांच गुना अधिक होती है।

टमाटर का कैल्शियम दांतों व हड्डियों को मजबूत बनाता है। यह खून की कमी दूर करता है, पेट साफ करने व वजन कम करने में सहायता करता है। टमाटर के इन लाभों के लिए इसे कच्चा खा सकते हैं या जूस पी सकते हैं। पथरी, खांसी, आर्थराइटिस, सूजन या मांसपेशियों के दर्द में टमाटर नहीं खाना चाहिए।

बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए टमाटर बहुत फायदेमंद होता है। गर्भावस्था में टमाटर का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी होता है, जो गभर्वती के लिए काफी अच्छा होता है।



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yoga pranayam Benefits: तन ही नहीं मन को भी मजबूत बनाता है योग

Yoga Pranayam Benefits in Hindi: योग तन को ही नहीं, मन को भी सेहतमंद रखता है। यह एक आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक अभ्यास है जो शरीर, सांस और मन को जोड़ने में मदद करता है। शारीरिक मुद्राओं, सांस लेने के व्यायाम और ध्यान का एक संयोजन, योग समग्र स्वास्थ्य में सुधार करने में मददगार है। दुनिया भर में कई लोग तनाव कम करने के लिए योग कर रहे हैं। आप यदि अपनी फिटनेस का बनाए रखना चाहते हैं तो अपनी दिनचर्या में योग को जरूर शामिल करें। शुरूआत में आप कुछ आसान योग आसनों के जरिए अपने तन और मन को सेहतमंद बना सकते हैं। आइए जानते हैं इन योगासनों के बारे में :-

मालासन ( Squat pose )
मालासन से आप पीठ दर्द से छुटकारा पा सकते हैं। यह मुद्रा आपकी पीठ के निचले हिस्से को मजबूत बनाने में मदद करेगी। इस याेग मुद्रा में पहले आप अपने पैरों को समानांतर रखते हुए सीधे खड़े हो जाएं,फिर घुटनों को मोड़ते हुए बैठने की अवस्था में आ जाएं, पीठ सीधी रखते हुए, अपने हाथों को ऐसे मिलाएं जैसे आप प्रार्थना की स्थिति में हों।

मालासन मुद्रा कमर और पीठ के निचले हिस्से को फैलाने में मदद करती है, साथ ही पेट को टोन करती है, और कूल्हों और घुटनों में तनाव से राहत देती है।

अधोमुख शवासन ( Downward Facing Dog Pose )
यह प्रसिद्ध मुद्रा पूरे शरीर को खिंचाव देगी। आप हथेलियों को फर्श पर फैलाकर अपने शरीर का भार उन पर डाले, अपने घुटनों को मोड़ें और अपने नितंब को ऊपर उठाएं, फिर धीरे-धीरे पैरों को सीधा करें। 5 से 10 सांसों के लिए आसन मुद्रा में रहें।

डाउनवर्ड फेसिंग डॉग पोज से हाथों और कलाइयों के साथ पूरे शरीर को मजबूती मिलती है। इसके अलावा, यह पीठ के निचले हिस्से में दर्द से राहत देने और मासिक धर्म और रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम करने में मदद करेगा। यह ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद करने के लिए भी जाना जाता है।

बालासन ( Balasana )
बालासन एक आराम देने वाला मुद्रा है जो किसी भी आसन से पहले या बाद में किया जा सकता है। फर्श पर घुटने मोड़ कर अपनी एड़ी पर बैठें, फिर पंजों को अपने कूल्हों की नीचे दबा लें। जांघों के बीच के धड़ को नीचे करते हुए अपनी भुजाओं को आगे बढ़ाएं।

यह आसन आपको मानसिक शांति देने के साथ आपके पूरे शरीर को आराम देता है।

ताड़ासन ( Mountain Pose )
ताड़ासन आपकी लम्बाई बढ़ाने और मेरूदंड की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। आप को सीधे खड़े होकर, अपने पंजों पर दवाब डालते हुए उपर की ओर उठें। और अपने दोनें हाथों को सिर के उपर की ओर सीधा रखें।
इस मुद्रा का अभ्यास करने से आप मजबूत महसूस करेंगे, रक्त परिसंचरण में वृद्धि, तनाव को कम करेंगे।

बाधा कोनासना ( Butterfly Pose )
यह मुद्रा आपके रक्त परिसंचरण को उत्तेजित करने में मदद करेगी। जैसा कि नाम से पता चलता है, आप तितली की तरह दिखने के लिए बैठे हैं, आपके पैर तितली के पंखों की तरह फैले हुए होने चाहिए। फिर हाथों से पैर के पंजों पकड़ लें और पीठ सीधी रखते हुए बाहों, पीठ और कंधों में खिंचाव महसूस करें। इस मुद्रा के लाभों में रक्त परिसंचरण को उत्तेजित करना, मासिक धर्म के लक्षणों से राहत और रजोनिवृत्ति आदि शामिल हैं।



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नींबू और लौंग से भगाएं घर के मच्छर, जानें ये खास तरीका

अगर आप मच्छरों से परेशान हैं तो इस कुदरती, सुरक्षित और बड़े ही आसान उपाय को आजमा सकते हैं। इससे मच्छर आपके पास नहीं आएंगे।

एक नींबू लीजिए और उसमें बहुत सारी लौंग घुसाकर तीन से चार दिन के लिए सूखने के लिए रख दीजिए। आप चाहें तो साबूत नींबू में लौंग घुसा सकते हैं और चाहें तो काटकर भी ऐसा कर सकते हैं। नींबू की जगह संतरे या मौसमी का प्रयोग भी किया जा सकता है। जैसे-जैसे लौंग लगा हुआ नींबू सूखेगा इसका प्रभाव बढ़ेगा। आप इस लौंग लगे नींबू को घर के अंधेरे कोनों, अलमारियों या किचन में रख सकते हैं।

इसलिए है प्रभावी - खट्टे फलों मेें सिट्रिक एसिड होता है और जब यह लौंग में मौजूद यूजेनॉल नाम के इसेंशियल ऑयल के संपर्क में आता है तो एक ऐसी गंध निकलती है जो मच्छरों को पसंद नहीं होती। यह गंध हमारे शरीर से निकलने वाली गंध को दबा देती है और मच्छर दूर भागते हैं। पहले दादी-नानी ऐसे तरीके प्रयोग करती थीं।



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जानिए मेहंदी के औषधीय गुणों के बारे में, कई रोगों में है फायदेमंद

घुटने का दर्द : मेहंदी और अरण्डी के पत्तों को बराबर लेकर पीस लें। फिर इसे थोड़ा गर्म करके घुटने पर लेप करें। ऐसा करने से घुटनों के दर्द में राहत मिलेगी।

थकान: दौड़ने वाले लोगों और क्रिकेट खेलने वालों को पैरों के तलुवों पर मेंहदी लगाने से थकान में राहत और ठंडक मिलती है।

खून साफ: रात को एक गिलास पानी में मेहंदी के सूखे पत्ते भिगो दें, सुबह इस पानी को छानकर पीने से शरीर में ठंडक के साथ-साथ खून भी साफ होता है।

सिरदर्द या माइग्रेन की परेशानियों के लिए मेहंदी एक बेहतरीन औषधि है। ठंडक भरी मेहंदी को पीसकर सिर पर लगाने से सिरदर्द और माइग्रेन में फायदा होता है। शरीर के किसी स्थान पर जल जाने पर मेहंदी की छाल या पत्ते को पीस कर लेप तैयार कर लीजिए। इस लेप को जले हुए स्थान पर लगाने से घाव जल्दी ठीक होगा और जलन भी नहीं होगी।

तलवों में जलन: गर्मी के दिनों में पैरों के तलुवों में होने वाली जलन पर मेहंदी का लेप लगाने से लाभ मिलता है।



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Monday, 30 December 2019

जिम जाते हैं तो डाइट के बारे में जान लें ये बातें

हाल ही एक स्टडी में यह तथ्य सामने आया है कि नया-नया जिम शुरू करने वाले 25 फीसदी से भी ज्यादा लोग वास्तव में अपना वजन घटाने की बजाय उल्टा बढ़ा लेते हैं। वर्कआउट की शुरुआत करते ही लोग समझने लगते हैं कि अब हम कुछ भी खा सकते हैं क्योंकि जिम में जाकर कैलोरी तो बर्न करनी है। मगर सच्चाई यह है कि जिम में आप इतनी कैलोरी बर्न नहीं कर पाते।

डाइट फर्म फोरजा सप्लीमेंट्स द्बारा करीब 1000 लोगों की खान-पान की आदत के बारे में यह सर्वेक्षण कराया गया। सर्वे में खुलासा हुआ कि 26 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो जिम जाकर छरहरे होने की बजाय और ज्यादा मोटे हो गए।

ये है वजह -
जिम जाने वाले लोग हफ्ते में 4 से 5 बार एक घंटे का समय जिम में बिताते हैं। वर्कआउट के बाद वह समझते हैं कि अब वह कुछ भी खाने को आजाद हैं। इसके अलावा एक्सरसाइज करने से भूख भी बढ़ती है, जिससे आप सामान्य से ज्यादा खाने लगते हैं।



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जानिए लौंग, इलायची से होने वाले फायदों के बारे में

मसाले के रूप में लौंग का इस्तेमाल शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, कार्बोहाइड्रेट्स, सोडियम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भरपूर मात्रा में मिलते हैं। इसमें मौजूद यूजेनॉल ऑयल दांतों के दर्द से आराम दिलाने में लाभदायक है। अगर गर्दन में दर्द या गले में सूजन है तो सरसों के तेल में लौंग मिलाकर मालिश करने से फायदा होता है। घबराहट या उल्टी आने पर लौंग भूनकर उसका पिसा पाउडर शहद के साथ लेने से लाभ मिलता है।

इलायची से सफर में नहीं होगी उल्टी-
वैसे तो इलायची का इस्तेमाल ज्यादातर मसाले के तौर पर होता है लेकिन इसके कई औषधीय गुण भी हैं। गले में खराश हो तो सुबह और शाम इलायची चबाने के बाद गर्म पानी पी लें, अगर गले में सूजन हो तो कदूकस करने पर जो मूली का पानी निकले उसमें छोटी इलायची पीसकर लें। अगर कई केले खा लिए हैं तो एक छोटी इलायची खा लें, केले पच जाएंगे। यात्रा पर जाने के दौरान अगर बस या गाड़ी में उल्टी होती है तो इलायची खा लें उल्टी नहीं आएगी।



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जानिए अच्छी सेहत के लिए कितनी जरूरी है धूप

हमेशा धूप से बचने की आदत आपको बीमार व हड्डियों को कमजोर बना सकती है। पुराने समय में लोग सुबह-सुबह सूर्य नमस्कार करके विटामिन डी ले लेते थे। मां बच्चे की मालिश करने के बाद उसे धूप में लेटाया करती थीं, लोग खेतों में काम करते हुए विटाामिन डी ले लेते थे। लेकिन अब मेट्रो सिटी की लाइफ में लोगों का धूप से संपर्क कम होता जा रहा है और उनमें विटामिन डी की कमी हो रही है।

कई तरह के दर्द हैं संकेत -
विटामिन 'डी' की कमी का कोई स्पष्ट संकेत नहीं होता। इसकी कमी से शरीर में मौजूद कैल्शियम काम नहीं कर पाता जिसके कारण पीठ में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, असामान्य थकान, हाथ-पैर सुन्न होना मांसपेशियों में मरोड़ आना (बायटे आना) सामान्य लक्षण हैं। शरीर में ये परेशानियां हों और निदान न हो, तो विटामिन 'डी' की जांच की सलाह दी जाती है।

धूप से मिलने वाले इस विटामिन 'डी' की अहमियत इस बात से भी हो जाती है कि इसको सन शाइन विटामिन, वंडर ड्रग, चमत्कारी दवाई, सुरक्षा कवच आदि नाम दिए गए हैं। ये नाम इसकी खूबियों को ही दर्शाते हैं। हमारा शरीर स्वस्थ रहे इसके लिए हमें कई किस्म के विटामिनों की जरूरत होती है। हर विटामिन का अपना महत्व है। इन्हीं विटामिनों में से एक है विटामिन 'डी'। इसकी कमी से हमारी हडि़्डयां कमजोर होने लगती हैं। विटामिन डी का सबसे बड़ा स्रोत है सूर्य की किरणें यानी धूप।

धूप क्यों जरूरी है -
धूप से हम शरीर के लिए आवश्यक 90 प्रतिशत विटामिन डी ले सकते हैं। दूध, मशरूम, पनीर और मछली ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनमें विटामिन डी होता तो है लेकिन बहुत कम मात्रा में, जो कि शरीर की जरूरत को पूरा नहीं कर पाता।

हमें ऐसे होता है फायदा -
जब सूरज की रोशनी हमारे शरीर पर पड़ती है तो विटामिन डी मिलने से हमारे शरीर में मौजूद कैल्शियम काम करता है और हड्डियां मजबूत रहती हैं।

सुबह की किरणें सबसे अच्छी -
वैसे तो किसी भी समय की आधे घंटे की धूप अच्छी मानी गई है लेकिन सुबह की धूप को सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इस समय धूप में जो अल्ट्रावॉयलेट किरणें होती हैं वे शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होती हैं।

सर्दियों में धूप में ज्यादा देर तक बैठे रहने से कोई नुकसान नहीं होता क्योंकि विटामिन डी बनाने के लिए शरीर को जितनी धूप चाहिए होती है वह उतनी ही ग्रहण करता है।

दवाई से होती है भरपाई -
हमारे शरीर में विटामिन 'डी' की मात्रा 50-60 नोनोग्राम (डीएल) होती है। अगर यह मात्रा 30 नोनोग्राम (डीएल) से कम हो जाए, तो दवाइयों के जरिए विटामिन 'डी' की पूर्ति करनी पड़ती है। 30 साल पहले माना जाता था कि भारत के लोगों को कभी विटामिन डी की कमी नहीं होगी क्योंकि यहां के लोग धूप का सेवन करते थे लेकिन आज 80 प्रतिशत लोगों में विटामिन 'डी' का स्तर सामान्य से कम है।



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त्वचा में चमक, पाचन, कब्ज, आंखों की रौशनी के लिए फायदेमंद है सौंफ का सेवन

सौंफ की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है ये सेहत के लिए कई तरह से गुणकारी है। यह याददाशत बढ़ाती है, खांसी दूर करती है, नजर तेज करती है और कोलेस्ट्रोल लेवल कंट्रोल करके रखती है। इनके अलावा सौंफ के कई फायदे ये भी हैं:

आंखों की रोशनी : मिश्री के साथ सौंफ मिलकार खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

पेट दर्द : भुनी हुई सौंफ खाने से पेट दर्द, गैस व बदहजमी में राहत मिलती है।
पाचन : खाना खाने के बाद सौंफ खाने से लिवर ठीक रहता है इससे पाचन क्रिया मजबूत होती है। इससे खट्टी डकारे कम आती हैं।

खट्टी डकारें : एक गिलास पानी में सौंफ उबाल कर मिश्री के साथ पीने से फायदा होता है।
सांस की बदबू : सौंफ खाने से सांसों में बदबू नहीं आती है।

कब्ज : दूध, गुलकंद और सौंफ लेने से कब्ज नहीं रहती।
त्वचा में चमक : रोजाना सुबह-शाम सौंफ खाने से त्वचा में चमक आती है।



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शरीर के अंगों की लंबाई से जानें अपनी सेहत का हाल

अक्सर कहा जाता है कि साइज डज नॉट मैटर, मगर आपकी अच्छी सेहत की बात करें, तो यह बहुत मायने रखता है क्योंकि आपके शरीर के अंगों की लंबाई यह बता सकती है कि आप किस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं या नहीं।

छोटे कान, हो सकते हैं चर्मरोगी-
छोटे और साफ कान देखने में बहुत सुंदर तो लगते हैं, लेकिन इन पर चर्मरोग का खतरा सबसे ज्यादा बना रहता है। यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल लेस्सिटर के ईएनटी सर्जन जॉर्ज मूर्ति की मानें तो छोटे कान का मतलब हुआ कि जो ट्यूब कान के बाहर से अंदर जा रही है, वह भी छोटी होगी, जिससे कान में एक्जिमा होने का खतरा बढ़ जाता है। बाहरी स्किन की तरह कान की ट्यूब की त्वचा भी बदलती है, जिससे पुरानी त्वचा को खत्म होना चाहिए। लेकिन कान के छेद छोटे होने की वजह से ऐसा नहीं हो पाता और इससे खुजली शुरू हो जाती है। यही नहीं छोटे कान यह भी संकेत देते हैं कि आपको किडनी की समस्या हो सकती है। हालांकि इसके पीछे कोई ठोस कारण अब तक सामने नहीं आए हैं।

लंबी उंगलियां, प्रोस्टेट कैंसर का खतरा -
पुरुषों की उंगलियों की लंबाई प्रोस्टेट कैंसर का संकेत दे सकती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक और इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च ने प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित करीब 1500 व्यक्तियों की उंगलियों की तुलना 3000 स्वस्थ पुरुषों से की। उन्होंने पाया कि जिस व्यक्ति की इंडेक्स फिंगर उसकी रिंग फिंगर से लंबी है, उनमें इस बीमारी की संभावना कम है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ एल्बरटा ने पाया है कि जिनकी इंडेक्स फिंगर लंबी होती है, वे डिप्रेशन के ज्यादा शिकार होते हैं।

पतली थाई, दिल के लिए खतरनाक-
मोटी थाई को पतला करने के चक्कर में लोग जिम में पसीना बहाते हैं। मगर डेनमार्क में हुई एक स्टडी की मानें तो पतली थाई से दिल का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में दिल की बीमारी होने और समय से पहले मृत्यु का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञानुसार इसके पीछे लो मसल मास है, जो इंसुलिन संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकता है।



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Sunday, 29 December 2019

हवाई सफर में कान दर्द से फट सकता है पर्दा

कुछ लोगों को फ्लाइट टेक ऑफ या लेंडिंग के समय कान में दर्द, दबाव या कान सुन्न होने की शिकायत होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तेजी से अधिक ऊंचाई पर जाने या नीचे आने पर होने वाले दबाव परिवर्तन को शरीर संतुलित नहीं कर पाता। इससे होने वाले प्रभाव को बेरोट्रोमा कहते हैं। कई बार इससे कानों के पर्दे फटने का डर रहता है।

लेंडिंग के दौरान निगलते और चबाते रहें क्योंकि इनसे नाक के पिछले भाग व कान के मध्य स्थित युस्टेकियन ट्यूब खुली रहती है। यही वह ट्यूब है जो शरीर के बाहर व अंदर के दवाब परिवर्तन को संतुलित करती है।

जरा संंभलकर -
छोटे बच्चों को कुछ पीने को दें ताकि वे निगलते रहें।
जुकाम, खांसी व ठंड लगने पर यात्रा करने से बचें।
लैंडिंग करते समय सोए नहीं।
हवाई सफर शुरू होने से पहले डीकन्जस्टेन्ट गोली व नेजल ड्रॉप स्प्रे का प्रयोग करें ताकि ट्यूब खुली रहे।



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Almond In Diabetes: टाइप 2 मधुमेह फायदेमंद है बादाम खाना

Almond In diabetes : टाइप 2 मधुमेह जीवनशैली से संबंधित एक रोग है, जिसमें मोटापा एक प्रमुख जोखिम कारक की भूमिका निभाता है। टाइप 2 मधुमेह के जोखिम को कम करने के लिए एक स्वस्थ बीएमआई बनाए रखना महत्वपूर्ण शर्त है। खासकर जब आपके पास परिवार में मधुमेह के इतिहास जैसे अन्य जोखिम कारक हों। इसलिए मधुमेह से पीड़ित लोगों को अपने खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जिन खाद्य पदार्थों में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, उन्हें टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों द्वारा सेवन की सलाह दी जाती है।पाैष्टिक व संतुलित आहार से काफी हद तक डायबीटिज के खतरे को कम किया जा सकता है। जैसे की बादाम, मधुमेह रोगियों के लिए बादाम का सेवन विशेष लाभकारी हाेता है। आइए जानते हैं बादाम खाने के फायदाें के बारे में :-

टाइप 2 मधुमेह में बादाम खाने के फायदे ( Almonds Benefits in type 2 diabetes )
बादाम पारंपरिक रूप से भारतीय आहार का एक हिस्सा रहा है। सभी मां और दादी हमें बादाम खाने के लिए कहती हैं क्योंकि यह ब्रेन पावर बढ़ाता है। इसके अलावा मधुमेह के प्रबंधन में भी बादाम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बादाम में ग्लाइसेमिक इंडेक्स 0 होता है, जिसका अर्थ है कि इसमें बहुत कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो आपके रक्त शर्करा के स्तर को बिल्कुल भी नहीं बढ़ाएगा। हालांकि, बादाम फाइबर, विटामिन और खनिजों में समृद्ध है, जो शरीर को उचित पोषण सुनिश्चित करेगा।

How to Use Almonds in type 2 Diabetes
बादाम को रात भर भिगो कर खाना सेहतमंद होता है। हालांकि, सर्दियों में, बादाम को घी में भुना जा सकता है, स्वादिष्ट स्नैक के तौर पर आप उन पर थोड़ा नमक छिड़क सकते हैं। शरीर को गर्म रखने के लिए सर्दियों के मौसम में बादाम को दूध में मिलाकर भी सेवन किया जाता है। यदि आप मधुमेह प्रबंधन के लिए पेय का सेवन कर रहे हैं, तो चीनी न डालें।



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पियर्सिंग करवाने के बाद इन बातों का रखें ध्यान

फैशन के लिए अब नाक और कानों के अलावा होंठ, जीभ और नाभि पियर्सिंग (छिदवाई) भी करवाई जाने लगी है लेकिन पियर्सिंग कराने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें। यह जानना जरूरी है कि आपको किसी धातु से एलर्जी तो नहीं है। आमतौर पर सर्जिकल स्टेनलेस स्टील, सोना, प्लेटिनम या टाइटैनियम सुरक्षित रहते हैं।
घाव जब तक अच्छी तरह सूख न जाए तब तक क्रीम, डियो या परफ्यूम न लगाएं।
पियर्सिंग के बाद थोड़ा रक्त बहना, सूजन या फुंसी जैसा आकार बन जाना स्वाभाविक है, लेकिन आपको लगे कि समस्या बढ़ रही है, तो तुरंत चिकित्सक की राय लें।

इनका रखें ध्यान -
नई सूई का प्रयोग हो।
छूने से पहले हाथ अच्छी तरह साबुन से धोकर सुखाएं।
नियमित सैलाइन वॉटर से पियर्सिंग की जगह को साफ करें।
तैराकी का शौक रखती हों, तो पियर्सिंग के बाद कम से कम हफ्ते तक स्विमिंग न करें।
गहना अगर पियर्सिंग वाली जगह पर चिपक जाए और घूमे नहीं तो जबरदस्ती ऐसा न करें।



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Quit Smoking: धूम्रपान की लत चुटकियाें में छुड़ा देंगे ये नुस्खे, आज ही आजमाएं

quit smoking In Hindi: धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सभी लोग सिगरेट पैक पर मुद्रित इस वैधानिक चेतावनी को देखते हैं, फिर भी धूम्रपान करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तंबाकू के धुएं में मौजूद रसायन सिर्फ धूम्रपान करने वाले ही नहीं बल्कि नॉनस्मोकर्स के लिए भी हानिकारक होते हैं। धूम्रपान से फेफड़े, आहारनली, स्वश्न तंत्र, मुंह, गले, किडनी, ब्लैडर, लिवर, अग्न्याशय, पेट, सर्विक्स, कोलन और मलाशय के कैंसर हो सकते हैं। यह हृदय रोग, स्ट्रोक, पुरानी प्रतिरोधी फुफ्फुसीय रोग (सीओपीडी), मधुमेह, ऑस्टियोपोरोसिस, संधिशोथ और वयस्कों में अस्थमा के लक्षणों को भी बढ़ा सकता है।

Smoking Injurious To Health
धूम्रपान करने वालों में निमोनिया, तपेदिक और अन्य वायुमार्ग संक्रमणों के विकास का भी अधिक खतरा होता है। धूम्रपान पुरुषों में स्तंभन दोष का कारण बन सकता है, जबकि धूम्रपान करने वाली महिलाओं को गर्भवती होने में मुश्किल हो सकती है। धूम्रपान करने से गर्भवती को गर्भपात होने का खतरा रहता है।

Quit Smoking
धूम्रपान छोड़ना ही स्वस्थ रहने की कुंजी है। धूम्रपान छोड़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन नामुमकिन नहीं। आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं जो आपको धूम्रपान छोड़ने में मदद कर ( Quit Smoking Tips In Hindi ) सकते हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में:-

उठो और चलाे
बैठे रहने की आदत तम्बाकू की लत बढ़ाती हैं। जब भी आपकाे तलब लगे, कुछ समय के लिए सैर पर निकल जाएं और गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। इस तरह से आप फेफड़ों से अधिक वायु का संचार कर सकेंगे। यह तंबाकू की तलब कम करने में मददगार हो सकता है।

खूब पानी पिएं
कम पानी पीने से निर्जलीकरण हो सकता है, जो तनाव की भावनाओं को ट्रिगर कर सकता है। जिसकी वजह से आप धूम्रपान की ओर अग्रसर हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप खूब पानी पिएं, खासकर उस समय जब आपको धूम्रपान का मन करे।

स्वस्थ स्नैकिंग
ब्लड शुगर लेवल कम होने पर भी धूम्रपान करने की ललक मजबूत होती है। इसलिए, जब भी आपको धूम्रपान करने की इच्छा महसूस हो, तो एक पौष्टिक स्नैक जैसे फल का एक टुकड़ा, या कुछ सूखे मेवे या एक कप दही लें।

चबाना शुरू करें
तंबाकू की लालसा को भुलाने के लिए अपने मुंह को व्यस्त रखें। आप तलब से लड़ने के लिए चीनी रहित गोंद या हार्ड कैंडी, या कच्ची गाजर, अजवाइन, नट्स या सूरजमुखी के बीज पर चबा सकते हैं।

निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी
यदि तंबाकू की तलब नेचुरल तरीकों से नहीं जा रही है, तो आप अपने डॉक्टर से निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी के बारे में सलाह ले सकते हैं। निकोटीन रिप्लेसमेंट थैरेपी - जैसे निकोटीन गम, लोज़ेंग, नाक स्प्रे या इनहेलर - को तीव्र क्रेविंग को दूर करने में मददगार पाया गया है।



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ठंडा-गर्म लगता है, दंत क्षरण हो रहा है तो जानें ये बातें

कुछ ठंडा,गर्म या मीठा खाने या पीने पर दांतों में सनसनाहट पैदा हो तो इसे सेंसिटिविटी कहा जाता है। इसी सेंसिटिविटी को समझने के लिए हमें सेंसिटिविटी (संवेदनशीलता) और हाइपर-सेंसिटिविटी (अतिसंवेदनशीलता) में अंतर जान लेना आवश्यक है।

कुछ ठंडा या गर्म खाने-पीने पर अगर उस खाद्य या पेय पदार्थ की ठंडक या गर्माहट का मात्र एहसास हो और किसी प्रकार का कष्ट न हो, तो इसे दांतों का संवेदनशील (सेंसिटिव) होना कहते हैं, लेकिन यह मात्र एहसास ना रहकर तकलीफ में बदल जाए और दांतों में झनझनाहट सी महसूस हो, तो ऐसे में दांतों को अतिसंवेदनशील (हाइपर-सेंसिटिव) कहा जाता है। दांतों का संवेदनशील होना सामान्य बात है लेकिन अतिसंवेदनशील होने पर इलाज की जरूरत होती है। बोलचाल की भाषा में इसी हाइपर-सेंसिटिविटी को हम सेंसिटिविटी कहते हैं।

कैसे होती है सेंसिटिविटी -
जब किसी कारणवश दांतों की एनेमल या सीमेंटम दांतों पर से हट जाते हैं, तो यह स्नायुतंत्र सीधे बाहरी वातावरण के संपर्क में आ जाता है और दांत सेंसिटिव हो जाते हैं।

सख्त टूथब्रश -
सख्त टूथब्रश या मोटे कणों वाले दंतमंजन या टूथपेस्ट के इस्तेमाल से दांत सेंसिटिव हो जाते हैं।
पाइरिया -
पाइरिया की वजह से जब मसूड़े दांतों से हटने लगते हैं, तो भी दांत सेंसिटिव हो जाते हैं। तम्बाकू और गुटखे का लगातार सेवन करने से भी दांत सेंसेटिव हो जाते हैं।
दांतों का गलना -
अधिक अम्लीय खाद्य-पेय पदार्थ से दांत गलने लगते हैं। यही इरोजन है।
कैविटी -
कीड़ा लगने से कैविटी बन जाती है, जिससे सेंसिटिविटी होती है।
दांत टूटने से-
अगर दांत का कुछ हिस्सा टूट जाए तो भी दांत सेंसिटिव हो सकता है।
बचाव-
उच्चस्तरीय टूथपेस्ट उपयोग करें। अम्लीय और खट्टी चीजें जैसे नींबू, कैरी, इमली आदि कार्बोनेटेड कोल्डड्रिंक, सोडा जरूरत से ज्यादा न लें।

सेंसिटिविटी का उपचार -

एन्टी-सेंसिटिव टूथपेस्ट एवं माउथवाश : इनेमल या सीमेंटम का घिसाव ज्यादा मात्रा में नहीं होने पर।
फिलिंग : घिसाव अधिक मात्रा में होने या कैविटी होने पर।
रूट कैनाल : कैविटी के ज्यादा गहरे होने पर
ग्राफ्ट : पाइरिया में हटे हुए मसूड़ों की जगह कृत्रिम तरीके से मसूड़ों का ग्राफ्ट प्रत्यारोपित किया जाता है।
क्राउन (कैप) : टूटने पर दांतों को कैप लगा कर ढक दिया जाता है।



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भूलकर भी न मिस करें नाश्ता, सेहत पर पड़ेगा बुरा असर

सुबह के नाश्ते को अगर मिस करते हैं तो समझिए आप अपने लिए कई बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। रात के खाने के बाद हम सुबह ही कुछ खाते-पीते हैं। ब्रेकफास्ट के इन दो शब्दों का मतलब ही यही है कि रातभर की नींद के दौरान शरीर ने जो व्रत किया है, उसे खोलना। हमारी सेहत के लिहाज से नाश्ते की भूमिका काफी अहम होती है।

अगर नहीं किया ब्रेकफास्ट -
शरीर की सारी क्रियाओं को चलाने के लिए ईधन चाहिए होता है, जो कि हमें भोजन से मिलता है। भोजन को पचाने के बाद शरीर उसे ग्लूकोज में बदल देता है। सही समय पर भोजन करते रहते हैं तो शरीर की ऊर्जा की जरूरत पूरी होती रहती है। सात-आठ घंटे की नींद के बाद सुबह सोकर उठने पर शरीर को ऊर्जा की जरूरत होती है। जरूरी ऊर्जा न मिलने पर शरीर सुरक्षात्मक दशा में चला जाता है। शरीर में जमा फैट और प्रोटीन ग्लूकोज में बदलने लगता है। सारी परेशानी यहीं से शुरू हो जाती है।

दिमाग थकने लगता है -
शरीर में जमी वसा और प्रोटीन को ग्लूकोज में तोड़ने के लिए दिमाग के एक हिस्से को ज्यादा सक्रिय होना पड़ता है। इस क्रिया में दिमाग को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। दिमाग का ज्यादा जोर शरीर के बचाव में लग जाता है। सोचने समझने की क्षमता पर असर पड़ता है। एकाग्रता घट जाती है और दिमाग थकने लगता है।

चिड़चिड़ापन होता है -
बात-बात में गुस्सा, चिड़चिड़ापन और काम में मन नहीं लगता। रोजाना ब्रेकफास्ट छोड़ने से बच्चों की स्कूल में परफॉरमेंस और ऑफिस जाने वालों के काम पर असर पड़ता है।

याददाश्त घटती है -
एकाग्रता में कमी आती है। याददाश्त कमजोर होती है। अमूमन लोगों की शिकायत होती है मैं कुछ ज्यादा भूलने लगा हूं। ऐसे लोग सबसे पहले यही देखें कि कहीं नाश्ता तो मिस नहीं कर रहे।

वजन बढ़ने लगता है -
जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते उनमें धीरे-धीरे ज्यादा मीठे और वसायुक्त भोजन की इच्छा बढ़ती है। ऐसे लोग रात में जरूरत से ज्यादा खाते हैं, जो कि मोटापे की वजह बनती है।

हार्ट अटैक का खतरा -
ब्रेकफास्ट न करने से डायबिटीज और बीपी जैसी बीमारियां जकड़ लेती हैं। भविष्य में इससे घातक हार्ट अटैक का खतरा हो जाता है।



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New year Health tips : सेहत का 20-20 आयुर्वेर्दिक फार्मूला

आयुर्वेद में दवा की अपेक्षा ज्यादा थैरेपी देकर गंभीर बीमारियों का इलाज करते हैं। छोटी बीमारियों के लिए किचन बहुत बड़ी फार्मेसी है। इसका सही तरीके से प्रयोग के लिए जानकारी का होना जरूरी है।

सेहतमंद रहने के लिए क्या कहता है आयुर्वेद
शरीर की तीन प्रकृति वात, पित्त व कफ होती है। इसका संतुलन होना बहुत जरूरी है। शरीर में तीनों तत्वों का संतुलन बिगड़ने से व्यक्ति बीमार होता है। प्रकृति अनुसार ही भोजन करें, इससे पोषक तत्वों का बैलेंस बनता है। इसलिए समय से सुपाच्य, पोषकतत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए।
आयुर्वेद को अपनाएंगे तो सेहतमंद हो जाएंगे
आयुर्वेद स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य को और मजबूत करता है। किसी मरीज का इलाज उसकी प्रकृति के अनुसार किया जाता है। इलाज के दौरान आहार, पोषण आयुर्वेद के अनुसार तय करते हैं। यह जानना सबसे ज्यादा जरूरी है कि कब, क्या, कहां, कैसे, कितना खाना है। यह कैलोरी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के कांसेप्ट से ज्यादा महत्वपूर्ण है। स्वास्थ रहने के लिए आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य मुख्य स्तंभ है। ऋतु के अनुसार खानपान व जीवनशैली के बारे में जानना जरूरी है। नियमित योग कर अपने स्वास्थ्य को और अच्छा बना सकते हैं। सही तरीके से नींद नहीं लेने की वजह से दिक्कतें ज्यादा बढ़ती है।
आयुर्वेद में रोगी की प्रकृति अनुसार इलाज करते
1,000 ईसा पूर्व में आयुर्वेद चिकित्सा को 8 खंडों में विभाजित है। काय चिकित्सा (मेडिसिन), बाल चिकित्सा, मानसरोग (न्यूरोलॉजी), शल्य चिकित्सा (सर्जरी) और शालक्य चिकित्सा (ईएनटी-दांत), अगद तंत्र (टॉक्सिकोलॉजी),रसायन व वृष्य चिकित्सा भी शामिल है। इन चिकित्सा पद्धतियों के बारे में अलग-अलग ग्रंथों में वर्णन है।

प्रकृति के अनुसार लेंगे आहार तो बनेंगे सेहतमंद
वात प्रकृति के हैं तो मधुर, लवण और अम्ल रस वाले आहार लें। पित्त प्रकृति के हैं तो मधुर, तिक्त व कषाय रस वाले आहार लें। कफ प्रकृति के लोग कटु, तिक्त, कषाय रस वाले आहार ले सकते हैं। अन्य प्रकृति के लोग आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से ही आहार लें। भोजन में 6 रस मधुर, लवण, अम्ल, कटु, तिक्त व कषाय होते हैं।
मन की सेहत के लिए योग व प्राणायम करें
सुबह 10 मिनट नियमित प्राणायाम और 30 मिनट योगासन करें। अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, भस्त्रिका में से कोई भी कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार दो सेट दो बार करें, यह सामान्य एक्सरसाइज है। चिकित्सक की सलाह व प्रशिक्षक की निगरानी में ये आसन करें।

एक्सपर्ट : प्रो.संजीव शर्मा, निदेशक एनआइए, जयपुर



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Lose Belly Fat Fast : 6 पैक्स एब्स के लिए सिर्फ 15 मिनट करें ये 4 एक्सरसाइज

lose belly fat fast In Hindi: आपकी कमर का बढ़ता हुआ घेरा ना सिर्फ आपका लुक खराब करता है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों को भी न्योता देता है। इसलिए आपको जरूरत है की बढ़ते हुए टमी पर समय रहते लगाम लगा ली जाए। यदि आप तोंद को कम करने की शुरूआत कर चुके हैं तो अच्छी बात है, यदि नहीं तो आज से ही इसके लिए असरदार कदम उठाएं। आप चाहे तो 30 दिन के अंदर मनचाहा पेट कम कर सकते हैं। उसके लिए आपको केवल 15 मिनट फॉलो करनी होगी 4 खास एक्सरसाइज। आइए जानते हैं पेट को स्लिम करने की असरदार एक्सरसाइज के बारे में :-

रेक्टस एक्सरसाइज ( Rectus Abdominis )
रेक्टस मसल्स पेलविस के सामने रिब्स और प्यूबिक बोन बीच में स्थित होती है। इसकी मजबूती के लिए आप पीठ के बल लेट जाएं। फिर अपनी छाती को पेट की ओर ले जाएं, या अपने पैरों को छाती की ओर ले जाएं। ऐसे 15 बार दोहराएं। इस एक्सरसाइज से रेक्टस मसल्स की वसा घटती है। और पेट स्लिम होता है।

क्रंच एक्सरसाइज ( Crunches )
क्रंच एक्सरसाइज मुख्य तौर पर पेट की मांसपेशियों के निर्माण के लिए जानी जाती है। यह रेक्टस एब्डोमिनिस और अन्य मांसपेशियों को भी टोन करता है। अपनी पीठ के बल लेटें और अपने घुटनों को मोड़ें। अपने पेट की मांसपेशियों पर दबाव डालकर अपने कंधों को उठाएं और कुछ देर रोक लें। इसे 15 बार दोहराएं। इससे से पेट की मांसपेशियां टोन होती हैं।

डबल लेग रीच एक्सरसाइज ( Double Leg Reach )
यह ऊपरी और निचले दोनों एब्डोमिनल काम करता है। अपनी टांगों को फैलाकर अपनी पीठ के बल लेट जाएँ और बाहों को ऊपर की ओर रखें। अपने पैरों को उठाएं और इसे 45 डिग्री के कोण पर रखें। अपने पेट की मांसपेशियों पर दबाव महसूस करें। इसे 10 बार दोहराएं। इस एक्सारसाइज से जल्द ही आप फर्क महसूस करेंगे।

प्लैंक हिप डिप्स ट्राई करें ( Try The Plank Hip Dips )
ये शुरुआती लोगों के लिए एकदम सही हैं। जमीन पर अपनी कोहनी के साथ क्लासिक पुश-अप स्थिति लें। अपने फोरआर्म्स को आराम दें और अपनी बाहों को 90 डिग्री के कोण पर रखें। अपनी पीठ को आर्क करें और अपने ग्लूट्स को छत की तरफ उठाएं। अपने रिबेक और कूल्हों के बीच की दूरी को बंद करने के लिए अपने एब्स को कसकर अंदर की ओर करें। धीरे से प्रारंभिक स्थिति में वापस आ जाएं। 20 बार दोहराएं।



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सर्दी के मौसम में खाएं गुड़, अस्थमा, जुकाम, गैस, पीलिया में होगा फायदा

सर्दी के मौसम में गुड़ खाने का अपना महत्व होता है। गुड़ की तासीर गर्म होती है। गुड़ का नियमित सेवन करने से सर्दी से होने वाले रोगों से बचा जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार गुड़ जल्दी पचने वाला, खून बढ़ाने वाला व भूख बढ़ाने वाला होता है।

बैठा गला: गुड़ के साथ पकाए चावल खाने से बैठा हुआ गला व आवाज खुलती है।
अस्थमा: गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा परेशान नहीं करता है।

जुकाम: अगर जुकाम जम गया हो तो गुड़ को पिघला कर उसकी पपड़ी बना कर खिलाएं।
कान दर्द: गुड़ और घी मिला कर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

पेट में गैस: खाने के बाद गुड़ लेने से पेट में गैस नहीं बनती है।
पीलिया: पांच ग्राम सौंठ, दस ग्राम गुड़ के साथ लेने से पीलिया में लाभ होता है।

मेमोरीः गुड़ का हलवा खाने से मेमोरी भी बढ़ती है।



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Saturday, 28 December 2019

Smoking During Pregnancy: गर्भावस्था में धूम्रपान करें या नहीं, ये है सही जवाब

smoking during pregnancy In Hindi: क्या गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान सुरक्षित है, यदि आप इस सवाल का जवाब खोज रहे हैं तो, आपके लिए ये जानना जरूरी है कि गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान केवल गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए नहीं, बल्कि मां के लिए भी बहुत घातक है। महिला को गर्भाधान से पहले या गर्भावस्था में जितना जल्दी हो धूम्रपान छोड़ देना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान गर्भ में पल रहे बच्चे को क्रानियोफेशियल असामान्यताएं यानी चेहरे, मुंह और होंठों के जन्म दोष का शिकार बनाने के साथ विकास मंदता और प्रीटर्म डिलीवरी का जोखिम बढ़ाता है। तंबाकू उत्पादों में पाया जाने वाला निकोटीन गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क और फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। धूम्रपान से महिला को गर्भधारण, सब फर्टिलिटी या बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि गर्भधारण प्लान कर रही और गर्भाधान कर चुकी महिला दोनों को ही धूम्रपान ये दूर रहना चाहिए।


गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान के दीर्घकालिक प्रभाव ( Long term effects of Smoking while Pregnant )

ऑक्सीजन की कमी ( less oxygen )
धूम्रपान से माँ की हृदय गति और रक्तचाप बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि धूम्रपान उसके रक्तप्रवाह में कार्बन मोनोऑक्साइड बढ़ाता है, जिससे रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। वास्तव में, देखा जाए ताे इसका सीधा मतलब ये है कि बच्चे को कम ऑक्सीजन मिलती है और इसके हानिकारक परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी ( Ectopic pregnancy )
धूम्रपान के प्रभाव से एक्टोपिक गर्भावस्था हो सकती है। निकोटीन फैलोपियन ट्यूब में संकुचन का कारण बनता है जिससे निषेचित अंडे को गर्भाशय में पहुंचने से रोका जाता है जिसके परिणामस्वरूप अस्थानिक गर्भावस्था Ectopic pregnancy होती है।

प्लेसेंटा एबॉर्शन ( Placental Abruption )
प्लेसेंटा से संबंधित जटिलताओं के लिए धूम्रपान एक प्रमुख जोखिम कारक है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें नाल बच्चे के जन्म से पहले गर्भाशय से अलग हो जाती है। इसमें आपातकालीन प्रसव की आवश्यकता पड़ती है।

प्लेसेंटा प्रेविया ( Placenta Previa )
प्लेसेंटा प्रेविया एक और गंभीर समस्या जो धूम्रपान की वजह से हो सकती है। प्लेसेंटा प्रेविया की स्थिति में नाल गर्भाशय के निचले हिस्से में विकसित होता है जो बच्चे के जन्म से पहले अलग हो सकता है। प्लेसेंटा प्रेविया अत्यधिक रक्तस्राव और गर्भावस्था की हानि या समय से पहले जन्म का कारण बन सकता है। इस तरह की समस्या में अधिकांश तौर पर बच्वे का जन्म सिजेरियन सेक्शन द्वारा होता है।

प्रीटरम डिलीवरी ( Preterm Delivery )
गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने वाली अधिकांश महिलाओं में प्रीटरम डिलीवरी और कम वजन के शिशु होने की समस्या देखी जाती हैं। प्रीटरम जन्म से जुड़े कई स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं, जिनमें नवजात शिशु में न्यूरो डेवलपमेंट एब्नार्मेलिटी, देखने और सुनने की क्षमता की कमी जैसी जटिलताएं शामिल हैं। इसके अलावा मिसकैरेज और स्टिलबर्थ, Small placenta, अंतर्गर्भाशयी विकास मंदता ( Intrauterine growth retardation ) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

धूम्रपान से बच्चे में हाेने वाले जन्म दोष ( Smoking Rises Birth Defects )
- जन्मजात हृदय दोष (Congenital heart defects )
- अन्य संरचनात्मक दिल की असामान्यताएं ( Other structural heart abnormalities )
- क्रैनियोफेशियल असामान्यताएं, कटे होंठ और कटे तालु।( Craniofacial abnormalities, cleft lips and cleft palate )
- प्रसव के बाद-अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम उन महिलाओं में अधिक होता है जो गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करती हैं। ( sudden infant death syndrome Risk )

गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान छोड़ना जरूरी ( Quitting smoking during pregnancy is Necessary )

धूम्रपान छोड़ना कठिन है लेकिन नामुमकिन नहीं, मां बनने की चाह रखने वाली महिलाओं अपने और आने वाले बच्चे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर जल्द से जल्द की भी तरह के कृत्रिम या नेचुरल धूम्रपान से दूर बना लेनी चाहिए। यहां तक कि सेकेंड हैंड स्मोकिंग गर्भवती महिलाओं को उसी तरह से प्रभावित करती है जैसे कि खुद धूम्रपान करती है, इसलिए सेकंड हैंड स्मोकिंग से भी बचना जरूरी है।

Smoking Is Bad
गर्भावस्था के किसी भी चरण में धूम्रपान छोड़ने से माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य लाभ होते हैं। धूम्रपान से बचने से बच्चे के फेफड़ों में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ जाती है और उन्हें अच्छे से विकसित होने में मदद मिलती है। ई-सिगरेट ( e cigarette ) भी हानिरहित नहीं है। ई-सिगरेट में निकोटीन बच्चों के विकास के लिए हानिकारक है। ध्यान रखें कि धूम्रपान में कोई सुरक्षा नहीं है।



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एनर्जी बूस्टर के साथ त्वचा को निखारता है नारियल पानी

नारियल पानी पेट को ठंडक पहुंचाता है और यह एक अच्छा एनर्जी बूस्टर भी है। इसको पीने से शरीर को अतिरिक्त एनर्जी मिलती है। नारियल पानी को चेहरे पर लगाने से त्वचा चमकदार होती है। नारियल पानी स्किन को हाइड्रेट भी करता है, जिससे त्वचा ज्यादा ताजा और युवा दिखाई देने लगती है। इससे चहरे की झुर्रियां कम होती हैं।

कई शोधों में यह दावा भी किया जा चुका है कि नियमित नारियल पानी पीने से त्वचा पर बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम किया जा सकता है। यह मेटाबॉलिज्म को ठीक रखकर मोटापे से भी बचाता है। यह किडनी की समस्या में भी फायदा करता है। यह रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को संतुलित रखता है, जिससे डायबिटीज का खतरा कम रहता है। नारियल पानी दूध से भी ज्यादा पोषक होता है क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रोल और वसा नहीं होती। पेशाब संबंधी समस्याओं में भी नारियल पानी फायदा करता है।



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Herbal oil Benefits : 10 रूपए में त्वचा की खूबसूरती बढ़ाएं, जोड़ों का दर्द मिटाएं

Castor Oil benefits in Hindi: पुराने समय से ही एरण्ड का तेल सेहत के लिए खास फायदेमंद माना जाता रहा है। यह रोगाणुरोधी antimicrobial और एंटी इंफ्लेमेटरी anti-inflammatory गुणों से समृद्ध है। अरंडी में पाए जाने वाले एक विशेष प्रकार के फैट, जिसे रिकिनोइलिक एसिड के रूप में जाना जाता है, का उपयोग कई दवाओं में किया जाता। Castor oil का उपयोग आपको कई स्वास्थ्य लाभ पहुंचाता है। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में:-

मुंह की देखभाल ( Castor Oil For Oral Health )
अरंडी का तेल गम इंफेक्शन और रूट कैनाल इंफेक्शन से आपके मुंह को प्रोटेक्ट करता हैं। इसके साथ ही डेन्चर से संबंधित स्टामाटाइटिस की समस्या में भी फायदेमंद है। इस तेल के एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण दांतों के स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं। आप ब्रश करते समय इस तेल की कुछ बूंदें अपने टूथपेस्ट में मिलाकर इसका फायदा ले सकते हैं।

कब्ज मिटाए ( Castor Oil For Constipation )
एरण्ड का तेल कब्ज को खत्म करने में सहायक होता है। अरंडी का तेल पेरिस्टलसिस को प्रोत्साहित करता है (आंतों के संकुचन जो ठोस अपशिष्ट को हटाने में सहायता करते हैं)। इसमें पाया जाने वाला रिकिनोइलिक एसिड एक शक्तिशाली लैक्सेटिव के तौर पर काम करता है और आंतों को उत्तेजित कर, मल को आसानी से बाहर निकाल देता है। आंतों को सुचारू रखने के लिए आप हर सुबह 1 टीएसपी कोल्ड-प्रेस्ड कैस्टर ऑयल का सेवन करें। स्वाद अच्छा लगे तो आप एक गिलास संतरे या क्रैनबेरी के रस में 1 चम्मच तेल मिला सकते हैं।

जोड़ों का दर्द दूर भगाए ( Castor Oil For Joint Pain )
अरंडी के तेल में पाया जाने वाला Ricinoleic एसिड anti-inflammatory गुणों से भरपूर होता है। यह जोड़ों के दर्द, सूजन और गले की मांसपेशियों को राहत देने में विशेष तौर पर काम करता है, खास कर गठिया से पीड़ित लोगों के लिए। इसके लिए तेल को सीधे दर्द वाली जगह पर लगाएं और हीटिंग पैड या गर्म पानी की थैली से ढँक दें।

प्रतिरक्षा को बढ़ावा देता है ( Castor Oil Boosts Immunity)
प्राकृतिक चिकित्सक मानते हैं कि अरंडी का तेल संक्रमण से लड़ने वाली सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाकर प्रतिरक्षा को बढ़ाता है। अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना 1 चम्मच अरंडी के तेल का सेवन करें।

त्वचा पर निखार लाए ( Castor Oil For Skin )
त्वचा की देखभाल के लिए अरंडी का तेल काफी फायदेमंद होता हैं। अरंडी के तेल में मौजूद सक्रिय यौगिक, अनिषेचक एसिड, दाद के इलाज में विशेष रूप से प्रभावी है। त्वचा पर इस तेल की मालिश से त्वचा मुलायम और चमकदार बनती है।

अपने बालों को मजबूत बनाए ( Castor Oil For Hair )
अरंडी का तेल बालों की सेहत के लिए भी बहुत उपयोगी हैं। सिर में इसकी मसाज बालों के विकास को गति देने के साथ क्षतिग्रस्त बालों की मरम्मत भी करती है। यह फंगल संक्रमण और रूसी से छुटकारा दिलाने में भी सहायक है। कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल आइब्रो को घना करने के लिए भी किया जा सकता है।



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तुलसी की पत्ती सौंदर्य, पचान शक्ति, खुजली और रतौंधी में है फायदेमंद

तुलसी का पौधा हवा में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट करता है। तुलसी की पत्तियों की सेवन करना लाभकारी होता है। इसकी सुगंध श्वास संबंधी कई रोगों से बचाती है। तुलसी की एक पत्ती रोज सेवन करने से रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।

पाचन शक्ति में लाभदायक -
तुलसी की पत्तियों को पीसकर इसका रस पीने से पाचनशक्ति ठीक होती है और पेट से संबंधित रोग दूर होते हैं।
जुकाम-सर्दी व थकावट में तुलसी के पत्ते चाय के साथ सेवन करने से सर्दी, जुकाम व थकान संबंधित समस्याएं दूर होती हैं।
खुजली में फायदा : तुलसी के रस के दो चम्मच पीने से खुजली की समस्या से छुटकारा मिलता है।

सूखी पत्तियां भी काम की -
सौंदर्य के लिए फायदेमंद -
तुलसी की सूखी पत्तियों को पीसकर उबटन लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है और झाइयां दूर होती हैं।
रतौंधी में फायदेमंद -
तुलसी की पत्तियों का रस 15 दिन तक दो बूंद नेत्रों में डालने से रतौंधी में आराम मिलता है।



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Castor oil For Skin: कैस्टर ऑयल से इस तरह पाएं बेदाग और मुलायम त्वचा

Castor Oil for skin in hindi: केस्टर आयल या अरंडी का तेल आपकी स्किन के लिए बहुत ही फायदेमंद है। यह न केवल त्वचा के इंफेक्शन को दूर करने और उसका इलाज करने में सहायक है, बल्कि इसके कई सौंदर्य लाभ भी हैं।अरंडी के तेल में मौजूद अनिषेचक एसिड undecylenic acid नाम का एक्टिव कम्पाउंड दाद के इलाज में विशेष रूप से प्रभावी है। प्रभावित क्षेत्र पर 2 चम्मच अरंडी का तेल और 4 चम्मच नारियल तेल का मिश्रण लागू करें और इसे रात भर छोड़ दें। इससे जल्द फायदा मिलेगा। आइए जानते हैं castor oil के फायदाें ( Castor Oil Benefits ) के बारे में :-

मुंहासे ठीक करें ( Castor oil for Acne )
Castor oil त्वचा की सूजन को कम करने और बैक्टीरिया को मारकर मुंहासे ठीक करने में लाभदायक है। आप साफ चेहरे पर तेल की एक दो बूंदों से मालिश कर रात भर छोड़ दें। अगली सुबह अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। कुछ ही दिनों में आपको मुंहासों से छुटकारा मिल जाएगा।

त्वचा काे मुलायम बनाए ( Castor Oil for hydrate skin )
कैस्टर ऑयल सीधे लगाने पर त्वचा में आसानी से प्रवेश कर जाता है। यह कोलेजन और इलास्टिन के उत्पादन को उत्तेजित करता है, जो त्वचा को नरम और हाइड्रेट करते हैं। इससे त्वचा की झुर्रियां खत्म हो जाती हैं। इसके लिए आप अरण्डी के तेल में एक कॉटन बॉल डुबोएं और इसे रोजाना सोने से पहले झुर्रियों वाली त्वचा पर लगाएं। आंखों के आसपास थोड़ी मात्रा में ही प्रयोग करें। कुछ ही दिनों में आपको फायदा नजर आने लगेगा।

अनचाहे निशान मिटाए ( Castor Oil for stretch marks )
एरंड का तेल अनचाहे निशान और खिंचाव के निशान को स्थाई रूप से मिटा सकता हैं। हालांकि यहां यह धीरे-धीरे काम करता है, लेकिन कुछ ही दिनों में आपको इसका फायदा दिखने लगेगा। इसके लिए रोजाना स्किन वार्ट या टैग पर एक चुटकी बेकिंग सोडा के साथ कैस्टर ऑयल लगाएं।



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एेसे करें घुटनों की केयर, जानें इसके बारे में

घुटने में दर्द की कई वजह होती हैं। लिगामेंट्स का क्षतिग्रस्त हो जाना भी घुटने में दर्द पैदा होने की एक बड़ी वजह है। इनमें से कुछ प्रमुख हैं-आर्थराइटिस, रीयूमेटाइड, आस्टियोआर्थराइटिस और गाउट जैसी तकलीफों से दर्द होता है। टेन्टीनाइटिस में घुटने में सामने की ओर दर्द होता है। यह दर्द सीढ़ियों अथवा चढ़ाव पर चढ़ते और उतरते समय बढ़ जाता है। यह धावकों और साइकिल चलाने वालों को ज्यादा होता है।

घिसा हुआ कार्टिलेज या उपास्थि भी घुटने में दर्द की वजह होती है। इसे मेनिस्कस टियर भी कहा जाता है। इस समस्या के दौरान घुटने के जोड़ के अंदर की ओर या बाहर की ओर दर्द पैदा हो सकता है। चोट लगना और फ्रेक्चर होने जैसी समस्याएं भी घुटने की हालत खराब कर सकते हैं। इन सबके अलावा नीकैप के खिसकने, जोड़ में संक्रमण जैसी समस्याओं से भी घुटने में स्थाई दर्द हो सकता है।

ऐसे करें नी केयर -
कैल्शियम को अपने भोजन का हिस्सा बनाइए।
हल्दी के नियमित इस्तेमाल से जोड़ो के दर्द में राहत मिलती है और जोड़ लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं।
घुटने से जुड़े व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइए। धीरे-धीरे साइकिल चलाना एक अच्छा विकल्प है लेकिन यह घुटने की तकलीफ होने से पहले का परामर्श है। दर्द का सामना कर रहे लोगों को इससे बचना चाहिए।
अपनी क्षमता से ज्यादा वजन उठाने से बचें। ऐसा करके आप अपने पूरे शारीरिक ढांचे को खतरे में डाल रहे हैं।
अगर आपका वजन ज्यादा है तो ये खतरे की घंटी है।



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New Year Dish : सलाद की ये 4 वैराइटी रखेंगी फिट

नए साल को आप सेहतमंद तरीके से सेलिबे्रट कर सकते हैं। सलाद की इन तीन वैराइटी को ट्राई करें।

खीरा-अनार सलाद
सामग्री : 300 ग्राम छोटे टुकड़ों में कटा खीरा, 40 ग्राम अनार, 60 ग्राम टंगा हुआ दही, 5 ग्राम अलसी के बीज, चुटकीभर व स्वाद के अनुसार नमक व सफेद मिर्च पाउडर, दो चम्मच शहद, 10 एमएल अनार का सीरप।
बनाने की विधि : ड्रेसिंग बनाने के लिए एक कटोरे में शहद, अनार का सिरप, दही, नमक व सफेद मिर्च पाउडर को अच्छी तरह से मिला लें। अब इसमें खीरा और अनार मिक्स करें। अब इस सलाद को प्लेट में निकालें। ऊपर से अलसी के बीज व अनार के कुछ दानें डालकर गार्निंश करें। फिर इसे सर्व करें।

फ्रूट सलाद
सामग्री : आधा-आधा कप टुकड़ों में कटा पपीता, सेब, केला, चीकू, अमरूद, कीवी, एक चम्मच नींबू का रस, एम चम्मच शहद, चुटकीभर नमक, चुटकीभर काली मिर्च पाउडर।
गार्निशिंग के लिए : भुना बादाम और पुदीने की पत्तियां
बनाने की विधि : एक कटोरे में सभी कटे फलों को लेकर मिक्स करें। अब इसमें नमक, शहद, नींबू का रस, और कालीमिर्च पाउडर डालकर मिक्स करें। अब इस सलाद को रोस्टेड बादाम व पुदीने की पत्तियों से सजाएं।

ऑलिव (जैतून) सलाद
सामग्री : 40 ग्राम छोटे टुकड़ों में कटी गाजर, 45 ग्राम ब्रॉक्ली के छोटे टुकड़े, 15 ग्राम बारीक व गोलाकार में कटी प्याज, 25 ग्राम उबली मटर, 35 ग्राम बीन्स, 30 ग्राम बैंगनी पत्तागोभी, 35 ग्राम फलियां, 35 ग्राम टुकड़ों में कटा टमाटर, 20 ग्राम स्लाइज में कटे ऑलिव (जैतून), चुटकीभर व स्वाद के अनुसार नमक, कालीमिर्च, 30 ग्राम रेडिमेड फ्रेंच ड्रेसिंग।
बनाने की विधि : एक कटोरी में एक एक कर सभी सामग्री डालें और अच्छे से मिक्स करें। इस सलाद को बे्रड पर मक्खन लगाकर सर्व करें।
पास्ता सलाद
सामग्री : 25 ग्राम उबली मटर, 30 ग्राम बारीक कटी गाजर, 40 ग्राम बारीक कटी ब्रॉक्ली, 30 ग्राम राजमा बीन्स, 15 ग्राम बारीक व गोलाकार में कटी प्याज, 60 ग्राम उबला पास्ता, 30 ग्राम टुकड़ों में कटा टमाटर, 30 ग्राम बारीक कटी बैंगनी पत्तागोभी, 30 ग्राम बारीक कटी फली, स्वाद के अनुसार नमक व सफेद मिर्च पाउडर, दो बड़े चम्मच टमैटो कैचअप।
बनाने की विधि : एक कटोरे में नमक, कालीमिर्च, आदि को मिलाकर बाकी सभी चीजों को मिलाकर मिक्स करें। अब इसे प्लेट में निकालकर सर्व करें।



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टाइट बेल्ट से हो सकती है एसिड बनने और कैंसर की समस्या

एक नई स्टडी में सामने आया है कि ज्यादा टाइट बेल्ट लगाने वाले लोगों में गले का कैंसर होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। स्कॉटलैंड के विशेषज्ञ मानते हैं कि टाइट बेल्ट से पेट का एसिड गले तक पहुंच जाता है, जिससे कैंसर का खतरा पैदा होता है। ग्लास्गो यूनिवर्सिटी के अनुसार मोटे लोगों में इसका खतरा और भी बढ़ जाता है। इस लिए ज्यादा टाइट बेल्ट लगाने से बचना चाहिए।

स्टडी में पाया गया कि जो लोग बेल्ट ज्यादा टाइट लगाते हैं, उनमें एसिड की समस्या ज्यादा होने लगती है। जो मोटे लोग ज्यादा टाइट बैल्ट लगाते हैं उनमें यह समस्या और भी ज्यादा गंभीर पाई गई। शोध के अनुसार टाइट बेल्ट लगाने से पेट और ग्रासनली पर जोर पड़ता है, जिससे एसिड ऊपर की तरफ लीक होने लगता है। 55 साल से ज्यादा की उम्र वाले लोगों में भी इसका खतरा ज्यादा रहता है। इस लिए ज्यादा डाइट बेल्ट पहनने से बचना चाहिए।



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कमर का घेरा घटाना चाहते हैं तो ले इस तरह की डाइट

अल्कलाइन डाइट में वेट लॉस प्रोग्राम के तहत मुख्य रूप से क्षारीय प्रकृति के फूड लेने पर जोर दिया जाता है और बॉडी का पीएच (क्षारीय और अम्लता की माप) बैंलेंस 7.35 से 7.45 के बीच बरकरार रखने की कोशिश की जाती है। इस तरह की डाइट से वेट कंट्रोल रहता है।

फायदे : इससे न सिर्फ वजन घटाने में मदद मिलती है बल्कि आर्थराइटिस, डायबिटीज और कैंसर सरीखी कई बीमारियों में राहत भी मिलती है। यह डाइट अवसाद को भी कम करती है।

अल्कलाइन चीजें : गाजर, पत्तागोभी, फूलगोभी, पालक, शिमला मिर्च, नींबू और लहसुन। इन चीजों को खाने से शरीर में अल्कालाइन की पूर्ति होती है।

ये है थ्योरी - हमारा रक्त कुछ हद तक क्षारीय प्रकृति का होता है, जिसका पीएच लेवल 7.35 से 7.45 के बीच होता है। हमारी डाइट भी इसी पीएच लेवल को मेंटेन करने वाली होनी चाहिए, इसलिए 70 फीसदी अल्कलाइन फूड और 30 फीसदी एसिड फूड खाना चााहिए। इससे मोटापा कम होता है।



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Obesity Beat Cancer: मोटापा कम कर सकता है कैंसर का जाेखिम - शाेध

Obesity Beat Cancer in Hindi: मोटे और अधिक वजन वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर है, हाल ही में शोधकर्ताओं ने पाया है कि हायर बॉडी वेट या हाई बॉडी मास इंडेक्स ( bmi ) कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है।

नॉन स्माल सेल लंग कैंसर (NSCLC) के लिए एक सामान्य इम्यूनोथेरेपी उपचार, एटिजोलिजुमाब के नैदानिक परीक्षणों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, फ़्लिंडर्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने हाई बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के साथ दवा के प्रयोग ज्यादा फायदेमंद पाया है।

ऑस्ट्रेलिया में फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय में कार्यरत अध्ययन के प्रमुख अन्वेषक गणेशन किचेनदास ने कहा कि यह एक दिलचस्प परिणाम है और यह अन्य कैंसर और अन्य कैंसर-रोधी दवाओं के साथ आगे की जांच करने की क्षमता को बढ़ाता है। हमें बीएमआई और संबंधित सूजन के बीच संभावित लिंक में और अध्ययन करने की आवश्यकता है, जो कैंसर के इस इलाज के रूप में विरोधाभासी प्रतिक्रिया के पीछे के तंत्र को समझने में मदद कर सकता है।

WHO का अनुमान है कि अधिक वजन या मोटापे के कारण कम से कम 2.8 मिलियन लोगों की हर साल मौत हो जाती है। अधिक वजन और मोटापा रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और इंसुलिन प्रतिरोध पर प्रतिकूल मेटाबॉलिज्म प्रभाव को दर्शाता है। कोरोनरी हार्ट डिजीज, इस्केमिक स्ट्रोक और टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस के खतरे लगातार बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के साथ बढ़ते हैं।

किचेनदास ने कहा कि पिछले अध्ययनों ने मोटापे को कुछ तरह के कैंसर को बढ़ावा देने वाला माना गया हैं, जबकि हाल के अध्ययन में ये सामने आया है कि मोटापा कुछ कैंसर के जोखिमों को कम करने में सहायक हो सकता है।

JAMA ऑन्कोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित इन निष्कर्षों के लिए, 1,434 प्रतिभागियों ने अध्ययन में भाग लिया, जिसमें 49 प्रतिशत सामान्य वजन, 34 प्रतिशत अधिक वजन और सात प्रतिशत मोटे थे।

शोधकर्ताओं ने पाया कि चार क्लिनिकल परीक्षणों में उच्च BMI (BMI 25 kg / m2) वाले NSCLC रोगियों में atezolizumab के साथ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है, जो स्पष्ट रूप से प्रतिरक्षा जांचकर्ता अवरोधक (ICI) चिकित्सा से लाभान्वित होते हैं।

अध्ययन में कहा गया है कि इस तर्ज पर फेफड़ों के कैंसर के उपचार के विकल्प तेजी से विकसित हो रहे हैं और इसमें आईसीआई, आणविक लक्षित दवाएं और कीमोथेरपी शामिल हैं।

किचेनदास ने कहा कि हम मानते हैं कि अन्य कैंसर के उपचारों में उच्च बीएमआई की संभावित सुरक्षात्मक भूमिका में और अधिक अध्ययनों की आवश्यकता है।



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रोटी के अलावा मक्के के आटे से तैयार टिक्की, परांठा व टिकिया भी हैं पौष्टिक

सर्दी के मौसम में घी के अलावा विभिन्न अनाज भी ज्यादा खाए जाते हैं। साथ ही अनाज की बात करें तो मक्के की रोटी के साथ सरसों का साग खूब खाया जाता है। गेहूं के अलावा बाजरा और मक्के के आटे से बनी रोटी विशेषकर खाई जाती है। कुछ लोग इसे घर की बजाय मार्केट और रेस्टोरेंट में खाते हैं। आप चाहें तो घर पर भी मक्के के आटे से बनी रोटी और अन्य रेसिपी बना सकते हंै।
जानें इसके सेहतमंद फायदों के बारे में -
ऊर्जा का अच्छा स्त्रोत : यदि आप रेगुलर जिमिंग करते हैं तो मक्की की रोटी आपको दिनभर के लिए एनर्जी देती हैं। इसमें मौजूद भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट शरीर में ऊर्जा का स्तर ज्यादा रखता है।
वजन नियंत्रित : ऐसे लोग जिनका वजन ज्यादा है आर घटाने की सोच रहे हैं वे सर्दी के मौसम में नियमित रूप से मक्के के आटे से बनी रोटी आदि खा सकते हैं। विटामिन, मिनरल्स, फाइबर जैसे खास तत्वों से युक्त इस आटे से तैयार चीजों को खाने से वजन में कमी आती है। कार्बोहाइड्र्रेट से युक्त होने के कारण इससे बनी रोटी या अन्य चीजें खाने से पेट भरा-भरा रहता है। जिससे बार-बार भूख नहीं लगती है।
मजबूत हड्डियां : मैग्नीशियम और आयरन से युक्त मक्की की रोटी खाना हड्डियों को मजबूती देता है। इसके अलावा इसमें जिंक और फॉस्फोरस भी पाया जाता है। ऐसे में यह आर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस जैसे रोगों से बचाव में भी मददगार है।
पाचन में आसान : गेहूं की रोटी की अपेक्षा मक्की की रोटी आसानी से पच जाती है। एसिडिटी, कब्ज आदि पेट संबंधी समस्याओं से निजात दिलाने में भी फायदेमंद है। इसमें काफी मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो पेट की सफाई कर लिवर को भी दुरुस्त रखता है।
खाने के विकल्प : मक्के के आटे से रोटी के अलावा परांठा, कटलेट, टिक्की आदि लाभकारी हैं।



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Friday, 27 December 2019

Disadvantages of Tea: आप भी पीते हैं दूध की चाय, ताे जान लीजिए इसके नुकसान

Black Tea Benefits In Hindi: चाय पीना दिल के लिए और कैंसर की रोकथाम में फायदेमंद माना गया है। चाय एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है और इसमें ऐसे तत्व होते हैं जो आपको रिलेक्स करने में मदद करते हैं।यह स्वस्थ पेय एंटीऑक्सिडेंट और रक्त शुद्ध करने वाले एजेंटों में भी समृद्ध है। लेकिन इसमें दूध मिलाना इसके गुणों को कम कर सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि चाय में दूध मिलाने पर उसकी बायोलॉजिकल एक्टिविटी में बदलाव हो सकता है और पॉजिटिव इफेक्ट खत्म हो सकते हैं। चाय प्रेमियों को इसके सभी फायदे लेने के लिए काली चाय ( Black Tea ) का सेवन करना चाहिए।

विशेष रूप से, चाय में फ्लेवोनोइड्स, जिसे कैटेचिन कहा जाता है, को दिल के लिए अच्छा माना जाता है। लेकिन अध्ययनों से पता चला है कि दूध में मौजूद प्रोटीन का एक समूह, जिसे कैसिंस कहा जाता है, कैटेचिन के प्रभाव को कम कर देता है।

दूध की चाय पीने के कुछ नुकसान ( Disadvantages Of Drinking Milk Tea )

अनिद्रा ( insomnia )
कॉफी की तरह, चाय भी कैफीन से भरपूर होती है। दिन में दो कप से अधिक चाय पीने से अनिद्रा की बीमारी हो सकती है। यह दूध और चीनी के साथ चाय के सबसे आम दुष्प्रभावों में से एक माना जाता है। दूध की चाय आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी बाधित कर सकती है। यह चिंता, तनाव, बेचैनी को बढ़ावा देता है।

चेहरे पर दाने ( pimples )
दूध वाली चाय पीने का एक और प्रमुख दुष्प्रभाव पिंपल्स का दिखना है। कम मात्रा में ली गई चाय आपके शरीर को detoxify करने में मदद कर सकती है। जबकि दूध की चाय का अधिक सेवन अत्यधिक गर्मी उत्पन्न कर सकता है और शरीर के रसायनों में असंतुलन पैदा कर सकता है। इससे पिंपल्स की समस्या हो सकती है।

कब्ज ( constipation )
चाय में मौजूद थियोफिलाइन नामक रसायन आपके शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में मदद कर सकता है। लेकिन बहुत अधिक थियोफिलाइन आपको निर्जलित कर सकता है और अत्यधिक कब्ज पैदा कर सकता है।

सूजन ( Bloating )
बहुत ज्यादा दूध वाली चाय से पेट फूल सकता है। चाय में कैफीन आपके सूजन का कारण है। इसमें दूध मिलाने से स्थिति बढ़ सकती है क्योंकि दूध और कैफीन गैस निर्माण को बढ़ावा देते हैं।

पोषक तत्वों की कमी ( Nutrient Deficiencies )
चाय के अधिक सेवन का एक अन्य दुष्प्रभाव पोषक तत्वों की कमी है। अध्ययन कहते हैं कि एक साथ चाय और दूध पीना शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा डाल सकता है। बहुत अधिक चाय लोहे और जस्ता की कमी का कारण बन सकती है।



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जानिए हरी मिर्च और अदरक खाने के फायदे

हरी मिर्च सेहत के लिए फायदेमंद है। प्रतिदिन भोजन के साथ दो-तीन ताजा हरी मिर्च खाने से मधुमेह रोग में फायदा होता है। हरी मिर्च पाचक ग्रंथियों के लिए भी फायदेमंद है और कब्ज दूर करती है। खून में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर हरी मिर्च खाने से लाभ होता है। मिर्च के सेवन से भूख कम लगती है और बार-बार खाने की इच्छा नहीं होती जिससे वजन बढ़ने का खतरा कम हो जाता है।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है अदरक -
अदरक को आयुर्वेद में महाऔषधि के रूप में जाना जाता है। अदरक में शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। ताजे अदरक में 81 प्रतिशत पानी, 2.5 प्रतिशत प्रोटीन, 1 प्रतिशत वसा, 2.5 प्रतिशत रेशे और 13 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। अदरक शरीर की प्रतिरोधात्मक क्षमता बढ़ाता है। इसके सेवन से सर्दी जुकाम का खतरा कम रहता है। इसमें जिंक, क्रोमियम और मैगनीशियम होता है, जो रक्त संचार में मदद करते हैं। इसका रोजाना सेवन करने से कोलेस्ट्रोल का स्तर कम हो जाता है। आधा घंटा अदरक चबाने से सिरदर्द और घबराहट नहीं होती। अदरक की चाय पीने से ब्लड शुगर भी कंट्रोल रहती है।



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Caffeine Benefits: कैफीन से कम हाेता है माेटापा, लेकिन इन बाताें का रखें ध्यान

caffeine Benefits in Hindi: आप यदि कॉफी पीने के शौकिन है तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। इलिनोइस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने हाल ही में हुए एक शोध में इस बात का दावा किया गया है कि त्योहारी सीजन के दौरान एक दिन में 4 कप कॉफी पीने से अनहेल्दी फैट और चीनी खाने के बाद भी वजन को बढ़ने से रोका जा सकता है। कैफीन का सेवन खाने में फैट और शुगर उच्च होने के बावजूद, कोलेस्ट्रॉल और वजन के उत्पादन को सीमित कर सकता है। कैफीन सेवन से वसा के अवशोषण में 22% और वजन बढ़ने के स्तर में 16% की कमी पाई गई।

अध्ययन में, चूहों को लगभग चार सप्ताह तक मध्यम मात्रा में कार्ब (40 से 45% के बीच) और प्रोटीन (15%) खिलाया गया। इसके साथ ही, चूहों को मेट चाय दी गई, जो एक हर्बल पेय है जो फाइटोकेमिकल्स, फ्लेवोनोइड और अमीनो एसिड से समृद्ध है, इसका सेवन दक्षिण-पूर्वी लैटिन अमेरिका में एक उत्तेजक के रूप में सेवन किया जाता है।

अध्ययन में कहा गया है कि चाय के एक कप में 30-300 मिलीग्राम कैफीन की तुलना में मेट चाय में कैफीन 65-130 मिलीग्राम तक होता है। हालांकि, कैफीन के स्रोत की परवाह किए बिना, इसने वसा कोशिकाओं में लिपिड के संचय को 20 से 41% तक कम कर दिया। द जर्नल ऑफ फंक्शन फूड्स में प्रकाशित, अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला है कि इस पेय को "एंटी-मोटापा" एजेंट माना जा सकता है।

कैफीन सेवन के जुड़ी खास बातें ( Caffeine side effects )
- कैफीन का सेवन बेहतर मूड और मस्तिष्क की कार्यक्षमता, ऊर्जा के स्तर में सुधार और चयापचय को बढ़ावा देने जैसे फायदे देता है। लेकिन, दूसरी ओर बहुत अधिक कैफीन का सेवन, आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। कैफीन प्रकृति में नशे की लत है और कुछ लोग इसके प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। बहुत अधिक कैफीन होने के कुछ सामान्य दुष्प्रभाव हैं, जैसे- बेचैनी, चिंताए , अनियमित दिल की धड़कन, नींद में खलल और परेशानी का अनुभव, सिर दर्द, उच्च रक्तचाप।

- गर्भवती महिलाओं को कैफीन का सेवन सीमित करना चाहिए क्योंकि यह लो बर्थ के जोखिम को बढ़ा सकता है

एक दिन में कैफीन कितना सुरक्षित है? ( How much caffeine is safe in a day? )
अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) के अनुसार, एक दिन में खपत के लिए 400 मिलीग्राम कैफीन सुरक्षित है। यह एक दिन में 2-4 कप कॉफी के बराबर है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन और गायनोकोलॉजिस्ट के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को कैफीन का सेवन 200 मिलीग्राम तक सीमित करना चाहिए।



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सर्दी-जुकाम व तनाव के लिए फायदेमंद है संतरे का सेवन

संतरा गुणों की खान होता है। संतरे के छिलकों में विटामिन होते हैं। जो मस्तिष्क संबंधी अनेक विकारों को दूर करते हैं जैसे डिप्रेशन (अवसाद) और तनाव। संतरे के छिलकों में विटामिन- सी भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है, ये शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत करता है। विटामिन-सी बालों को मजबूती प्रदान करता है और झड़ने से रोकता है।

संतरे के छिलकों में विटामिन-ए भी होता है ये आंखों को तंदरुस्ती प्रदान करता है। इसके छिलकों में मौजूद कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिए अति आवश्यक है। संतरे के छिलके दिल की बीमारियों को दूर करते हैं और इसका सेवन करने वाला व्यक्ति हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर जैसे रोगों से बचा रहता है।

संतरे में मौजूद विटामिन सी एलर्जी और सर्दी को दूर रखने में मदद करता है। सर्दी-जुकाम होने पर संतरा और किन्नू फल को खाना चाहिए, इससे बीमारी जल्दी दूर हो जाती है। सर्दी के मौसम में रोज संतरे का सेवन करने से सर्दी-जुकाम जल्दी नहीं होता। इसके साथ ही यह कान को भी इंफेक्शन से बचाता है।



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HEALTH TIPS : कहीं आपके पेट में खाना सड़ तो नहीं रहा?

दाल, चावल, सब्जी, रोटी, दूध, दही और फलों समेत कई चीजों का सेवन हम भोजन के रुप में करते हैं। ये सभी चीजें हमारे पेट में जाती हैं और पेट के जरिए भोजन से उत्पन्न होनेवाली ऊर्जा पूरे शरीर में पहुंचती है। दरअसल पेट में एक छोटा सा स्थान होता है जिसे अमाशय कहते हैं। भोजन इसी में जाता है और खाते वक्त अमाशय में जो अग्नि प्रज्जवलित होती है उसे जठराग्नि कहते हैं। ये भोजन को पचाने में मदद करती है। कई बार जब लोग खाना खाते वक्त ज्यादा पानी पी लेते हैं और कई लोग तो खाते वक्त फ्रीज का ठंडा पानी पी लेते हैं तो इससे पाचन बिगड़ता है।

बीमारी की जड़ पेट से जुड़ी होती है

खाना खाने के बाद हमारे पेट में दो ही क्रिया होती है। पहली क्रिया को डाइजेशन कहा जाता है जिससे खाना पचता है और दूसरी फर्मेन्टेशन की क्रिया जिसका मतलब है पेट में खाने का सड़ना। ऐसा माना जाता है कि बीमारी की जड़ पेट से जुड़ी होती है। स्वस्थ रहने के लिए पाचन का सही होना जरूरी है। पाचन बिगड़ने से बीमारियां शुरू होती हैं। जब खाना पचता नहीं है तो यह सड़ने लगता है। जिस व्यक्ति का पाचन जितना अच्छा रहता है उसका स्वास्थ्य उतना ही अच्छा रहता है।
पाचन बिगड़ने से ये असर पड़ता
पाचन क्रिया बिगड़ने से शरीर अस्वस्थ और दिमाग सुस्त हो जाता है जिसका असर हमारी कार्यक्षमता पर पड़ता है। इसके पीछे प्रमुख वजह है ज्यादा खाना, अनियमित खान-पान, देर तक जागना जैसी कई चीजें पाचन क्रिया को प्रभावित करती हैं।
इसलिए सड़ने लगता है खाना
पाचन बिगड़ने से खाना पेट में सड़ने लगता है। ऐसा पेट की जठराग्नि के कम होने से होता है। इससे शरीर में थकान, सुस्ती, चेहरे की चमक घटने लगती है। मोशन में दिक्कत व कब्ज की समस्या शुरू हो जाती है जो बाद में फिशर, पाइल्स की समस्या होने लगती है। इसके अलावा इससे यूरिक एसिड, कॉलेस्ट्रॉल और हार्टअटैक से लेकर कई गंभीर बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।
डॉ. राजेश कुमार शर्मा, आयुवेद विशेषज्ञ



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Child care In Winter: बच्चों को सर्दी, जुकाम, बुखार से बचाएंगे ये टिप्स

Child care In Winter in Hindi: सर्दी के मौसम यानि खांसी, जुकाम व बुखार का मौसम। सर्द हवाओं के कारण शायद ही कोई इन मौसमी बीमारियों से बच पाता है। खासकर बच्चे इन मौसमी बीमारियों की चपेट में जल्द आते हैं। ऐसे मौसम में बच्चों का खास देखभाल की जरूरत होती हैं। क्योंकि वे जब घर, स्कूल या बंद परिवेश में एक साथ खेलते हैं, तो बीमारी को फैलने का खतरा ज्यादा होता है। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है आप कुछ सावधानियां रखकर अपने बच्चों की सर्दी से होने वाले संक्रमण से बचाव कर सकते हैं।आइए जानते हैं किन उपायों के जरिए बच्चों को सुरक्षित ( Tips to protect child from common cold ) रखा जा सकता है :-

बच्चों में सामान्य सर्दी का संक्रमण ( Common winter infections among children )
फ्लू या इन्फ्लूएंजा ( Flu or influenza )
आमतौर पर ’फ्लू’ के रूप में जाने जाने वाला इन्फ्लूएंजा अत्यधिक संक्रामक है और इसके लक्षणों में तेज बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और खांसी शामिल हैं। इन्फ्लूएंजा की सबसे अच्छी रोकथाम एक फ्लू शॉट है और जबकि एंटीवायरल दवाएं उपलब्ध हैं, सबसे अच्छा इलाज बहुत आराम करना और तरल पदार्थ पीना है।

खराब गला ( StreP Throat )
स्ट्रेप गला, सर्दी और खांसी का एक कारण, यह बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होता है और नियमित गले में खराश की तुलना में अधिक दर्दनाक होता है। यह आमतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों में देखा जाता है, जो छींकने और खांसने से फैलता है। इस दौरान व्यक्ति को बुखार, सिरदर्द और गले में लिम्फ नोड्स सूजन होने के अलावा निगलने में परेशानी हो सकती है। एंटीबायोटिक्स इस संक्रमण को ठीक करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन गर्म पानी पीने से भी दर्द से राहत मिलती है।

ब्रोंकियोलाइटिस ( Bronchiolitis )
ब्रोंकियोलाइटिस बच्चों में होने वाला एक आम श्वसन संक्रमण, रेस्पिरेटरी सिंकिटियल वायरस (आरएसवी) इसका सबसे आम कारण है। यह फेफड़ों में वायुमार्ग की सूजन का कारण बनता है, जिससे उनमें कफ भरता है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसमें नाक चलना, लो ग्रेड फिवर, खांसी और घरघराहट होती है। एंटीबायोटिक्स के अलावा, भरपूर आराम करने और ढेर सारा पानी पीने से इसमें आराम मिलता है।

निमोनिया ( Pneumonia )
यह फेफड़ों का एक संक्रमण है, जो बैक्टीरिया के कारण होता है और खांसी, बुखार और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों का प्रदर्शन करता है। अस्थमा, कैंसर या दिल की समस्याओं जैसे दीर्घकालिक रोग निमोनिया को और अधिक संवेदनशील बनाते हैं। निमोनिया की आशंका होने पर अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से संपर्क करें।

घरेलू उपाय ( Home remedies to prevent cough and cold )

- यहाँ कुछ सरल चीजें हैं जो आप और आपका बच्चा ठंड में होने या गुजरने की अपनी संभावनाओं को कम करने के लिए कर सकते हैं:

- छींकने, खांसने और नाक बहने पर और खाने से पहले बच्चे के हाथों का गरम पानी और साबुन से धोएं।

- अपने हाथों पर कीटाणुओं से बचने के लिए अपनी कोहनी में खांसी करें।

- जुकाम वाले अन्य बच्चों के साथ पेय की बोतलें, कप और बर्तन साझा न करें।

- विटामिन सी जैसी खुराक बच्चों में जुकाम की अवधि और गंभीरता को कम कर सकती है।

- बच्चों को छींकने के दौरान छींकने और खांसने के दौरान नाक या मुंह को ढंकना चाहिए।

- जरूरत होने पर मास्क का उपयोग करें। बीमारी को बढ़ने से रोकने के लिए लक्षणों के प्रारंभिक चरण में ये उपाय करना महत्वपूर्ण है। चिकित्सीय हस्तक्षेप आवश्यक है या नहीं यह जाँचने के लिए अपने चिकित्सक से मिलें।



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हार्मोनयुक्त दूध बढ़ाता है मोटापा और आलस, जानें इसके बारे में

दुनियाभर में दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है। इसमें प्रोटीन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, विटामिन और कैल्शियम मौजूद होते हैं लेकिन यदि दूध हार्मोंस से भरा हो तो यह दूध आपके लिए किसी बड़े खतरे से भी कम नहीं।

करीब 40 सालों से डेयरी उद्योग दुनियाभर में डेयरी प्रोडक्ट्स के बहाने सेहत के बाजार को कैश कर रहा है। स्तनधारियों का दूध उनके बच्चों के लिए एक सीमित अवधि तक पोषण प्रदान करने के लिए होता है। चार पैर वाले दूधारू पशुओं के दूध में जो हार्मोन होते हैं उनसे 50किलो का बछड़ा एक साल में 350 किलो का हो जाता है। चौपायों के दूध में हार्माेन के असर से बच्चों का वजन तेजी से बढ़ता है।

इंसुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर का मुद्दा -
अमरीका और इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने 1988 में ही हार्मोन वाले दूध के खतरों से आगाह कर दिया था। आम दूध से 10 गुना अधिक 'आईजीएफ-1Ó हार्मोन इंजेक्शन से प्राप्त किए दूध में पाया गया। आईजीएफ-1 पाश्चुराइजेशन से नष्ट होने के बजाय शक्तिशाली हो जाता है। अमरीका कीड नियामक संस्थान एफडीए के शोधकर्ताओं ने बताया है कि आईजीएफ-1 आंतों से रक्त प्रवाह में पहुंच जाता है।

शरीर की अपने ही खिलाफ लड़ाई -
डॉक्टर जॉन मैकडुगल के शोध के अनुसार मानव शरीर में ग्रोथ हार्मोन होता है और दूध में भी यही ग्रोथ हार्मोन होता है। दूध का प्रोटीन भी एमिनो एसिड से बनता है जबकि शरीर के भीतर भी पहले से एमिनो एसिड होता है। यह आपस में मिलकर परस्पर विरोधी के रूप में काम करते हैं। इसे मेडिकल साइंस में 'ऑटो इम्युन डिसीज' कहा जाता है, जिसका मतलब होता है कि शरीर अपने ही खिलाफ लड़ाई लड़ने लगता है। इससे दिल की बीमारियां, कैंसर, गठिया और मधुमेह जैसी बीमारियां हो जाती हैं।

दूध की जगह इसके विकल्प को अपनाएं -
जिन लोगों को दूध अच्छा नहीं लगता, वे संतुलित मात्रा में दही, पनीर या छाछ लें। डेयरी उत्पादों के सैचुरेटेड फेटी एसिड्स शरीर की पाचन प्रक्रिया धीमी करते हैं और इस कारण आलस आता है।

दूध से प्रोटीन एलर्जी -
कुछ लोगों को बचपन से ही डेयरी उत्पादों से एलर्जी होती है क्योंकि वह दूध में पाए जाने वाले लेक्टोज को पचा नहीं पाते। दूध लेने पर उनके पेट में मरोड़ उठती है या उन्हें दस्त लग जाते हैं। संभवतया इसीलिए करीब डेढ़ लाख हैल्थ प्रोफेशनल्स की भागीदारी वाला एनजीओ द फिजियन कमेटी फॉर रिस्पॉसिबल मेडिसिन भी बच्चों को दूध न देने के पक्ष में है। जयपुर के चिकित्सक श्रीकांत शर्मा कहते हैं हार्मोनयुक्त दूध रोजाना पीने से बच्चों में वजन का तेजी से बढ़ना, अनचाही जगहों पर उभार आना, लड़कियों का जल्दी वयस्क होना, महिलाओं में मासिक अनियमितता, गर्भधारण में परेशानी के अलावा कई घातक बीमारियां होने लगी हैं।



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HEALTHY RECIPE : घर पर बनाएं टेस्टी इमरती

सामग्री : दो कप (पूरी रात पानी में भिगी हुई धुली उड़द दाल), तीन कप चीनी, डेढ़ कप पानी, केसर कलर, आधा टी स्पून इलाइची पाउडर, 500 ग्राम (फ्राई करने के लिए) घी या तेल लें।
बनाने की विधि : दाल को धोकर और पीसकर इसमे केसर कलर मिला लें। दाल अच्छे से फेंट लें और कुछ बूंदे पानी में डालकर देखें। दाल को गर्मियों में 3 से 4 घंटे तक छोड़ दें। पानी में चीनी डालकर धीमी आंच पर घुलने दें। इसे लगातार चलाते रहें जब तक कि चीनी का तार न बन जाए (एक बूंद उंगली के पर रखें फिर दोनों को अलग करें तो आपको तार बनता दिखेगा)। इसके बाद इसमें इलाइची पाउडर डालें। इसे बैटर को नोजल वाले पाइप या एक कपड़े में छेद करके डालें। इसके बाद गर्म घी या तेल में इमरती बनाएं। आंच को धीमा करें ताकि यह क्रिस्पी और क्रंची हो जाए। इसे अब घी या तेल से निकालकर चाशनी में में 3 से 4 मिनट के लिए रखें। इसके बाद इसे छानकर सर्व करें।
नोट : यह रेसिपी हमें इशिका पूरबिया ने भेजा है।



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HEALTHY RECIPE : स्वाद के साथ पौष्टिकता से भरपूर मटर, पनीर पुलाव

सामग्री : एक बड़ा चम्मच तेल, 100 ग्राम पनीर के स्लाइस, एक कप बासमती चावल, 200 ग्राम हरी मटर, आधा चम्मच लहसुन डेढ़ बड़ा चम्मच घी, आधा कसा हुआ अदरक, 2-3 लौंग, एक चम्मच नींबू का रस, एक काली इलायची, आधी दालचीनी, एक चम्मच जीरा, काली मिर्च पाउडर, हरा धनिया, आधा चम्मच गरम मसाला, नमक स्वादानुसार लें।

बनाने की विधि : सबसे पहले चावल धोकर एक घंटे के लिए भिगो दें। कड़ाही में घी या तेल डालकर धीमी आंच पर गर्म करें। इसमें तेज पत्ता, लौंग, जीरा और दालचीनी स्टिक, बड़ी इलायची, कसी हुई अदरक, लहसुन डालकर भून लें। अब इसमें पनीर के क्यूब्स डाल दें। अब इस मिश्रण में मटर डालकर भूनें। इसमें चावल डाल दें और एक मिनट तक पकाएं। इसमें दो कप पानी और स्वादानुसार नमक डालकर अच्छे से मिलाकर उबाल लें। जब पानी उबल जाए तो आंच धीमी करके इसे 5 मिनट तक पका लें। इसके बाद इसमें गरम मसाला, काली मिर्च पाउडर और नींबू का रस डाल दें। करीब पांच मिनट तक पकाएं। इसके बाद गैस बंद कर दें। मटर-पनीर पुलाव तैयार है। इसे गर्मा-गरम सर्व करें।

नोट : यह रेसिपी हमें नैना कौर ने भेजी है।

 



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HEALTHY RECIPE : पौष्टिक तत्वों से भरपूर है सहिजन का केक

सामग्री : मैदा एक कप, कडेन्स मिल्क आधा कप, पिसी शक्कर एक चौथाई कप, काजू 10 ग्राम, बेकिंग सोडा आधा चम्मच, बेकिंग पाउडर आधा चम्मच, सहिजने का पाउडर एक चौथाई कप, दूध आधा कप, घी/मक्खन एक चौथाई कप लें।
बनाने की विधि : एक बर्तन में मैदा, बेकिंग सोडा और बेकिंग पाउडर मिलाकर छान लें। दूसरे बर्तन में घी और शक्कर अच्छी तरह फेंट ले। कन्डेस मिल्क मिला लें। तीनों को मिक्स कर लें। टाइट लगे तो धीरे-धीरे दूध डाल दें। अब घोल बनाकर सांचे में घी लगाकर मैदा बुरक दे। ओवन या कुकर में गर्म करके प्लेट पर नमक डालें। ओवन के अन्दर घोल को रख दें। 40-50 मिनट तक बेक करने के बाद चाकू से चेक कर लें। यदि चाकू पर कुछ नहीं चिपके तो समझ लें केक तैयार है। ठंडा होने के बाद इसे सर्व कर सकते हैं।

नोट : यह रेसिपी हमें डॉ. ममता तिवारी ने भेजी है। आप कृषि विश्ववद्यालय कोटा की निदेशक भी हैं।

लजीज खाना चाहते हैं तो पढ़ें ये HEALTHY RECIPES

1- ऐसे बनाएं शकरकंद का हलवा

2- क्रिस्पी टोफू स्टिक कैसे बनाएं

3- स्वाद लीजिए चीज दही वेज रोल का

 



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इन बीजों को खाने से मिलेगी अच्छी सेहत, जानें इनके बारे में

आपको जानकर हैरत होगी कि फलों और सब्जियों के जो बीज हम अनजाने में यूं ही फेंक देते हैं उनमें मौजूद जिंक, मैग्नीशियम, आयरन, प्रोटीन और विटामिन जैसे पोषक तत्व हमारी सेहत में चार चांद लगा सकते हैं।

कद्दू के बीज -
कद्दू का नाम सुनकर अक्सर न सिर्फ बच्चे बल्कि बड़े भी मुंह बना लेते हैं। मगर कद्दूू कितना हैल्दी है, इसका अंदाजा भी आप नहीं लगा सकते। इसकी सब्जी में तो सेहत के गुण भरे होते ही हैं, कद्दू के बीजों में पौष्टिक तत्व कुछ कम नहीं होते। यह बीज विटामिन बी के अच्छे स्रोत हैं। इसके अलावा आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और प्रोटीन भी इसमें होते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि स्ट्रेस और चिंता को दूर करने के लिए कद्दू के बीज काफी उपयोगी होते हैं। यही नहीं सब्जी, सूप, सलाद, जिसमें चाहे और जैसे चाहे इसको आप खा सकते हैं।

सूरजमुखी के बीज-
गर्भवती महिला को सेहतमंद रखने के लिए सूरजमुखी के बीज काफी अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं। इसमें विटामिन बी और विटामिन ई भी काफी होता है। विटामिन ई आपकी कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है। साथ ही स्किन और बालों को हैल्दी रखता है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सूरजमुखी के बीज कैंसर से बचाने में भी कारगर हैं। इन बीजों में प्रोटीन भी काफी होता है, साथ ही दिल का ख्याल रखने का काम भी यह बीज बखूबी करना जानते हैं।

सेहत के साथी तिल -
माना जाता है तिल का तेल कभी खराब नहीं होता। तिल न सिर्फ मैगनीज प्रचुर मात्रा में पाया जाता है बल्कि यह विटामिन बी1, जिंक, डायटरी फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और फॉसफोरस का अच्छा भी स्रोत है। इसके अलावा इसमें सेसामिन और सेसामोलिन नाम के दो विशेष तत्व होते हैं, जो कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। इसी वजह से हाई ब्लड शुगर की समस्या पर नियंत्रण होता है। तिल लिवर का ध्यान रखने में भी सहायक सिद्ध होता है। तिल खाकर उसके ऊपर से गर्म पानी पीने से पेट दर्द ठीक हो जाता है।

तरबूज के बीज -
हम में से भला कौन है, जिसे मीठे-मीठे तरबूज को खाना पसंद न हो। लेकिन अक्सर हम तरबूज के टेस्ट में इतने डूब जाते हैं, उसके बीजों को नजरअंदाज कर देते हैं और उन्हें फेंक देते हैं। मगर इन्हीं बीजों में हमारी रोजाना की जरूरत के अधिकतर पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं। तरबूज के बीजों में आयरन, पोटेशियम, विटामिन, वसा और कैलोरी होती हैं। कई जगहों पर तो लोग तरबूज के बीजों को धूप में सुखाकर रख लेते हैं और बाद में उसे खाते हैं इसीलिए आज से आप भी तरबूज के बीजों को फेंके नहीं।



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Corn Problem : लूज फुटवियर पहनने से हो सकती हैं त्वचा पर गांठें

जब पैर या इसके किसी खास हिस्से पर अधिक दबाव पड़ता है तो वहां की स्किन मोटी और सख्त होने लगती है। यह हार्ड स्किन स्पेशल स्किन सेल्स के कारण पैदा होती है। इसे कैलस कहते हैं। अगर समय पर इसका इलाज न कराया जाए तो यह कॉर्न में बदल जाती है। कॉर्न का काम हमारे शरीर को किसी भी दबाव से बचाना होता है पर कई बार नाखून जैसा स्ट्रक्चर बनने से ये चलते समय बहुत चुभते हैं, जिसकी वजह से उस जगह दर्द होने लगता है।
प्रमुख कारण
ज्यादा चलने से पैरों पर अधिक दबाव पड़ता है जिससे पैरों की अंगुलियों के जोड़ों में कठोर, मोटी और परतदार त्वचा बनने लगती है। गलत फिटिंग के फुटवियर पहनने से भी यह समस्या हेाती है। हील्स को कम से कम पहनना चाहिए। इनसे पैर के अंगूठे के बेस पर कॉर्न बनने लगता है। चलने का गलत तरीका भी इसका कारण बन सकता है। बिना मोजे के जूते पहनने से पैरों में फिक्शन होता है जिस कारण यह समस्या हो सकती है।
इलाज...
घरेलू तरीके अपनाने के अलावा इन कॉर्न को कई बार घिसते भी हैं ताकि सख्त भाग हट सके।
सावधानी
पुरुषों के मुकाबले यह प्रॉब्लम स्त्रियों को ज्यादा होती है। जूते या सैंडल आगे से चौड़े होने चाहिए। उनका सोल भी आरामदायक हो। फ्लैट्स पहनने की कोशिश करें। जब ज्यादा चलना हो तो लगातार चलते रहने के बजाय बीच-बीच में रेस्ट लें। पैरों के नाखून काटते वक्त सीधे बैठें। डॉक्टर द्वारा बताए अनुसार लोशन लें। समय पर इलाज न लेने से लोशन फायदा नहीं करता है। कॉर्न के चुभने पर आमतौर पर चलने के तरीके में बदलाव आता है। इसलिए तुरंत फिजिशियन को दिखाएं और इलाज कराएं।



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Healthy Vegetables: सेहतमंद रहने के लिए डाइट में शामिल करें ये खास सब्जियां

healthy vegetables In Hindi: सेहतमंद रहने के लिए पौष्टिक खाने की बहुत जरूरत होती है। पोषक तत्वों से भरपूर आहार आपको कई बीमारियों से बचा कर रखता है। एक अध्ययन के अनुसार अपने दैनिक आहार में 1.5 कप हरी पत्तेदार सब्जियां ( leafy greens vegetables ) शामिल करने से आपको टाइप 2 डायबिटीज होने की संभावना कम हो सकती है। अपने आहार में विभिन्न प्रकार की सब्जियों को शामिल करना भी खुश और स्वस्थ रहने का सबसे सरल तरीका है। सब्जियां विटामिन, एंटीऑक्सिडेंट, अमीनो एसिड और खनिजों जैसे पोषक तत्वों के समृद्ध स्रोत हैं। आइए जानते हैं उन सेहतमंद सब्जियों ( Healthy Vegetables ) के बारें में जो आपको स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है :-

चुकंदर ( Beet Root )
चुकंदर नाइट्रेट का एक अच्छा स्रोत हैं, जो आपके रक्तचाप के लिए अच्छा हैं। इस सुपरफूड में फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी होते हैं। इसे स्लाइस में काटें और अपने सलाद में जोड़ें।

एस्परैगस ( Asparagus )
एस्परैगस खाने से आपको विटामिन बी मिलेगा, जो उच्च रक्तचाप से लड़ने में मदद करेगा। कच्चे एस्परैगस को सलाद के रूप में खाया जा सकता है।

पालक ( spinach )
पोषक तत्वों से भरपूर पालक हर लिहाज से सेहतमंद है। इसमें विटामिन सी, ए, और के के साथ-साथ मैंगनीज की स्वस्थ मात्रा होती है। पालकी सब्जी, सलाद या बस पालक को उबाल कर स्मूदी के तौर पर पिएं, ये हर तरह से सेहत को फायदा पहुंचाता है।

ब्रोकोली ( broccoli )
ब्रोकोली में विशेष पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो छोटे मोटे रोग दूर करन के साथ कैंसर जैसे रोग के जोखिम को कम करने के लिए जाने जाते हैं। इस वेजी खाने से आपको भरपूर मात्रा में विटामिन सी और के मिलेगा। इसे बस एक चुटकी नमक और कालीमिर्च के साथ उबाल कर आप अपने खाने में शामिल कर सकते हैं।

गाजर ( carrot )
विटामिन ए से भरपूर गाजर काफी सेहतमंद होती हैं। इसमें बीटा-कैरोटीन भी होता है, जो एक एंटीऑक्सिडेंट है जो गाजर को उनके जीवंत नारंगी रंग देता है और कैंसर की रोकथाम में मदद कर सकता है। गाजर में विटामिन सी, विटामिन के और पोटैशियम भी अधिक होता है।

लहसुन ( garlic )
शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि लहसुन हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के साथ-साथ रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। कुछ अध्ययनों से यह भी पता चला है कि यह कैंसर की रोकथाम में मददगार हैं। लहसुन में मौजूद मुख्य सक्रिय यौगिक एलिसिन कई रोगों से शरीर की रक्षा करता है।



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