Friday, 31 January 2020

Union Budget 2020: स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 69 हजार करोड़ रुपये आवंटित

Union Budget 2020 In Hindi: केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए कई नई घोषणाएं की हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य क्षेत्र ( Health Budget ) के लिए पिछले बजट की तुलना में 6602 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी के साथ कुल 69 हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। पिछले साल 2019-20 के बजट में स्वास्थ्य के क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार ने 2018-19 बजट की तुलना में 19 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 62,398 करोड़ रूपये दिए थे। साल 2018-2019 के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य पर 52,800 करोड़ रूपये दिए थे।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट के मुख्य बिंदु :-

- स्वच्छ भारत मिशन के लिए 12,300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।

- सरकार ने हेल्थकेयर सेक्टर के लिए 69,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया है।

- आयुष्मान स्कीम के तहत नए अस्पताल बनाए जाएंगे।

- मिशन इंद्रधनुष का दायरा बढ़ाकर इनमें 12 बीमारियां और शामिल की गईं। इसमें पांच नए वैक्सीन जोड़े गए।

- पीएम जन आरोग्य योजना से 20 हजार से ज्यादा अस्पताल जुड़े हैं। जाे आयुष्मान भारत के लाभार्थियों का इलाज करते हैं।

- टियर 2 और टियर 3 शहरों में और पीपीपी मोड से अस्पतालों बनाए जाएंगे। पहले चरण में 112 आकांक्षी जिलों से इसकी शुरुआत होगी। इनमें भी जिन जिलों में एक भी अस्पताल पैनल में नहीं है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इससे बड़ी संख्या में रोजगार मिलेगा।

- मेडिकल उपकरणों पर जो टैक्स लगता है उससे मिलने वाले पैसे का उपयोग इन्हीं अस्पतालों को बनाने में किया जाएगा।

- जन औषधि केंद्र को 2024 तक हर जिले में लाया जाएगा। इनमें 2 हजार दवाइयां और 3 हजार सर्जिकल्स उपलब्ध होंगे।

- टीबी हारेगा, देश जीतेगा - ये अभियान लांच किया गया है। 2025 तक टीवी की बीमारी को भारत से खत्म किया जाएगा।

- ओडीएफ प्लस ताकि साफ-सफाई को लेकर जागरुकता बढ़ाई जाए। सॉलिड वेस्ट कलेक्शन पर फोकस रहेगा। इस वर्ष 2020-21 में स्वच्छ भारत अभियान के लिए 12,300 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं।

- हर घर तक पाइप से पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन पर काम चल रहा है जिसे 3.6 लाख करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं। 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में ये स्कीम इसी साल तक लागू करने का लक्ष्य है।



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Smoking Hazards: समय से पहले दिमाग की उम्र बढ़ाती है नशे की लत

Smoking Hazards In Hindi: हम सभी जानते हैं कि स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डालता हैं। लेकिन कम ही लोगों को इस बात की जानकारी होगी कि नशे की ये आदत दिमाग पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। हाल ही में हुए एक शोध में शोधकर्ताओं ने पाया है कि रोज स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन करने वालों लोगों का दिमाग, नशा न करने वाले लोगों के दिमाग की तुलना में कमजोर होता है।

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि जीवनशैली की कुछ आदतें, जैसे कि भारी धूम्रपान और शराब का सेवन, विशिष्ट मस्तिष्क क्षेत्रों में प्रतिकूल प्रभाव से जुड़ी हैं।

सदर्न कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, अमरीका के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में कहा है कि शराब सेवन की आवृत्ति और सापेक्ष दिमागी उम्र के हमारे विश्लेषण ने संकेत दिया कि रोजाना शराब पीने वाले लोगों की तुलना में कभी-कभी शराब पीने वाले लोगों के सापेक्ष मस्तिष्क की उम्र कम थी।

निष्कर्षों के लिए, अनुसंधान दल ने 45 से 81 वर्ष की आयु के 17,308 व्यक्तियों के सापेक्ष मस्तिष्क आयु की पहचान करने के लिए मशीन लर्निंग मेथड और एमआरआई का इस्तेमाल किया।


मस्तिष्क की उम्र पर धूम्रपान और पीने का प्रभाव
अध्ययन में सामने आया कि एक साल तक राेज एक पैकेट सिगरेट पीने वालाें के दिमाग की आयु न पीने वालाें वालाें के दिमाग की तुलना में 0.03 वर्ष अधिक थी। यही परिणाम अल्कोहल का सेवन करने वाले में देखने का मिले। मस्तिष्क आयु वृ़द्धि का मतलब दिमाग पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव के तौर पर परिभाषित किया।

निष्कर्ष बताते हैं कि मस्तिष्क की उम्र पर धूम्रपान और शराब पीने के हानिकारक प्रभाव मुख्य रूप से उन लोगों में हो सकते हैं जो उच्च स्तर पर धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन करते हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा कि हमारी खोज पिछले अध्ययनों के अनुरूप थी, जिसमें पता चला था कि भारी शराब का सेवन मस्तिष्क के लिए हानिकारक होता है।



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Pregnancy Care Tips: गर्भावस्था में ऐसे रखें अपना और बच्चे का ध्यान

Pregnancy Care Tips In Hindi: मां बनना हर महिला के लिए एक ममतामयी अनुभव होता है। इसलिए ये जरूरी है कि गर्भावस्था खुद की और बच्चे की उचित देखभाल की जाए। जरा सी लापरवाही बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं गर्भावस्था के दौरान फायदा पहुंचाने वाली कुछ खास टिप्स के बारे में जाे आपकी ही नहीं बल्कि गर्भावस्थ शिशु की सेहत भी बनाएं रखेंगी :-

- गर्भावस्था के दौरान बायीं करवट से सोना चाहिए। इससे प्लेसेंटा में ब्लड और दूसरे पोषक तत्त्व भरपूर मात्रा में जाते हैं जो शिशु को फायदा करते हैं। इस दौरान पैरों और घुटनों को मोड़कर रखना चाहिए और पैरों के बीच में तकिया लगाना चाहिए। इससे कमर दर्द में आराम मिलता है। पीठ के बल सोने से पीठदर्द के साथ सांस व पाचनतंत्र की समस्याएं होने के साथ ब्लड प्रेशर कम होने का खतरा रहता है।

- भारी वजन ना उठाएं , जैसे कि पानी से भरी बाल्टी ,सील-बट्टा ,भारी कुर्सी, बक्सा इत्यादि।

- बहुत देर तक ना खड़े रहे। यदि आपको किचन में बहुत देर तक खड़ा होना पड़ता है तो वहां कुर्सी का इस्तेमाल करें।

- सीढ़ियों का प्रयोग कम से कम करें। यदि करना ही पड़े ताे एक बार करने की काेशिश करें।

- हील वाली सैंडल या चप्पल ना पहनें।

- बाहरी खाना ना लें, खासतौर पर जंक फूड से परहेज करें।

- सिगरेट, शराब या अन्य किसी भी नशे का प्रयोग न करें। नशा बच्चे के दिमागी विकास पर नकारात्मक असर डालता है।

- पर्याप्त नींद लें। गर्भावस्था के दौरान दिन में कम से कम दो घंटे जबकि रात में आठ घंटे की नींद स्वस्थ मां और शिशु के लिए बहुत जरूरी है। इससे गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत ठीक रहने के साथ मां को भी गर्भावस्था के दौरान कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी नहीं होती है।

-कम से कम 3 लीटर पानी राेज पिंए।

खानपान ऐसा हो
गर्भवती को अपनी सेहत को बेहतर रखने के लिए पौष्टिक आहार लेना चाहिए। इसमें दाल, रोटी, चावल, मौसमी सब्जी के साथ फल, मेवे, गुड़ और गुड़ से बनी चीजें खानी चाहिए। शरीर में आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन की मात्रा का ध्यान देना होगा। कमी अधिक है तो डॉक्टर की राय से आयरन, कैल्शियम की गोली लेनी चाहिए। इससे जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं।

नियमित जांच कराएं
गर्भावस्था में नियमित जांच जरूरी है। इसमें हीमोग्लोबिन और ब्लड प्रेशर महत्त्वपूर्ण है। मां का हीमोग्लोबिन और ब्लड प्रेशर ठीक रहेगा तो गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ होगा। हीमोग्लोबिन लेवल बारह से कम नहीं होना चाहिए। हाई रिस्क प्रेगनेंसी में मां का एचबी कम है, ब्लड प्रेशर असंतुलित है और प्लेसेंटा नीचे की ओर है तो गर्भवती को समय-समय पर डॉक्टरी सलाह लेते रहना चाहिए।



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Hybrid Skin: हाइब्रिड स्किन से आसान हाेगा जली त्वचा का इलाज

Hybrid Skin In Hindi: चीन में वैज्ञानिकों ने सूअरों और मनुष्यों के जीन को मिलाकर एक नई तरह की त्वचा ( Human and pig gene hybrid ) विकसित की है जिसे मनुष्यों पर लगाया जा सकता है। वैज्ञानिकों की इस खोज को जलने और एसिड हमलों के पीड़ितों के इलाज के लिए पथ-प्रदर्शक माना जा रहा है। म्यूटेंट 'स्किन' उस दिशा में एक और कदम है, जिसमें सूअरों को उन अंगों के साथ तैयार किया जा रहा है जिन्हें इंसानों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जानवरों के अंगों का इस्तेमाल करने से अंग दानदाताओं की कमी की समस्या को हल किया जा सकता है और इन जानवरों में मानव जीन को इंजेक्ट करने से मानव शरीर और प्रतिरक्षा प्रणाली इन अंगों को अधिक आसानी से स्वीकार कर सकती है।

कृत्रिम 'त्वचा' का विकास नानचंग विश्वविद्यालय से संबद्ध अस्पताल में चीन के शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा किया गया है, जिसका नेतृत्व लिंचिंग जो ने किया।

त्वचा का मैकाक बंदरों पर पहली बार परीक्षण किया गया था और परिणामों से पता चला कि यह 25 दिनों तक बंदर की मूल त्वचा पर स्थापित रहने में कामयाब रहा। इसमें किसी भी तरह की अतिरिक्त दवा की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि त्वचा में सम्मलित मानव जीन ने बाहरी वस्तु को बाहर फेंकने वाली बंदरों की प्रतिरक्षा प्रणाली को रोका दिया था। शोधकर्ताओं को लगता है कि मानवों पर संकर त्वचा और भी बेहतर काम कर सकती है।

हाइब्रिड बनाने के लिए सूअरों के जीन में आठ विशिष्ट मानव जीन जोड़े गए। यह विकास उन वैज्ञानिकों की मदद कर सकता है जो अंग दान संकट को हल करने के लिए कृत्रिम अंगों को विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।



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Diet To Treat UTI: यूटीआई की समस्या काे कम करता है शाकाहार - शाेध

Diet To Treat UTI in Hindi: शाकाहारी भोजन स्वास्थ्य के लिए अच्छा है क्योंकि इससे मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई) के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इस बात का खुलासा जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में हुआ है। शोध में पता चला है कि शाकाहारी भोजन यूटीआई ( urinary tract infection (UTI) ) के कम जोखिम से जुड़ा है। यूटीआई की समस्या महिलाओं में आमतौर पर देखी जा सकती है। खासकर गर्भावस्था के दौरान। यह समस्या मूत्राशय में होती है। जिससे पेल्विक दर्द होता है, पेशाब करने की इच्छा बढ़ जाती है, पेशाब में जलन के साथ दर्द होता है। अधिक गंभीर संक्रमण में किडनी भी खराब हो सकती है। इसके कारण पीठ दर्द, मतली और अन्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।

ताइवान में बौद्ध त्ज़ु ची मेडिकल फाउंडेशन के अध्ययन शोधकर्ताओं के अनुसार, यह संक्रमण आमतौर पर ई-कोलाई जैसे आंत बैक्टीरिया के कारण होता है, जो मूत्रमार्ग के माध्यम से मूत्र पथ में प्रवेश करता है और गुर्दे व मूत्राशय को प्रभावित करता है। कई शोधों में ये बात सामने आई है कि मांस का सेवन यूटीआई के लिए जिम्मेदार ई-कोलाई आंत बैक्टीरिया को बढ़ाता है। लेकिन अभी इस बात के ठोस सबूत नहीं हैं कि मांस से परहेज करने से यूटीआई का खतरा कम हो जाता है।

अध्ययन के लिए, अनुसंधान दल ने ताइवान में 9,724 बौद्धों में यूटीआई की घटनाओं का आकलन किया, जिन्होंने त्ज़ु वेजी शाकाहारी अध्ययन में भाग लिया। यह एक अध्ययन है जिसने ताइवान के बौद्धों में स्वास्थ्य परिणामों पर शाकाहारी आहार की भूमिका की जांच की। शोधकर्ताओं ने पाया कि गैर-शाकाहारियों की तुलना में शाकाहारियों में यूटीआई का समग्र जोखिम 16 प्रतिशत कम था।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि शाकाहारी भोजन से जुड़े यूटीआई जोखिम की कमी महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक थी, हालांकि बिना आहार के आधार पर, पुरुषों में समग्र यूटीआई का जोखिम महिलाओं की तुलना में 79 प्रतिशत कम था। अध्ययन में यह सुझाव दिया कि ई-कोलाई के सामान्य स्रोतों जैसे कि पोल्ट्री और पिग का मांस नहीं खाने से, शाकाहारी ई कोलाई से बच सकते हैं, जो यूटीआई का कारण बनता है।

शोधकर्ताओं ने यह भी प्रस्ताव दिया कि उच्च फाइबर सेवन के साथ शाकाहारी भोजन आंत में ई कोलाई के विकास को रोक सकता है और आंत को अधिक अम्लीय बनाकर यूटीआई के जोखिम को कम कर सकता है।

उन्होंने कहा कि यूटीआई जोखिम, रोगजनकों और शाकाहारी आहार के बीच संबंधों को स्पष्ट करने के लिए अभी और अध्ययनों की आवश्यकता है।



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Low-calorie sweeteners: गर्भावस्था में अच्छा नहीं है लो कैलोरी स्वीटनर का सेवन

Low-calorie sweeteners In Hindi: गर्भावस्था के दौरान लो कैलोरी स्वीटनर का सेवन आपके बच्चे के बॉडी फैट में वृद्धि और उनके आंतों के माइक्रोबायोटा को बाधित कर सकता है। जर्नल गट में प्रकाशित एक शोध में इस बात का खुलासा किया गया है। आंत माइक्रोबायोटा में खरबों बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीव होते हैं जो आंतों के मार्ग में रहते हैं और हमारे स्वास्थ्य और कई बीमारियों के जोखिम को प्रभावित करते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार ये निष्कर्ष, महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे जीवन के महत्वपूर्ण प्रारंभिक वर्षों को प्रभावित करते हैं, खासकर गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान।

कनाडा के कैलगरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ता रेलेने रीमर ने कहा कि कम कैलोरी मिठास का सेवन गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान सुरक्षित माना जाता है, हालांकि सबूत मानव अध्ययनों से यह पता चला है कि यह शरीर के वजन और अन्य हृदय जोखिम कारकों को बढ़ा सकते हैं।

रीमर ने कहा कि स्टीविया, जिसे एस्पार्टेम और अन्य कम कैलोरी कृत्रिम मिठास की जगह पर एक प्राकृतिक विकल्प के रूप में देखा जाता है, ने भी प्रारंभिक जीवन में बढ़ते हुए मोटापे के जोखिम पर एक समान प्रभाव दिखाया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, एस्पार्टेम एक कृत्रिम स्वीटनर, और स्टीविया एक प्राकृतिक निम्न-कैलोरी स्वीटनर, दक्षिण अमेरिका के एक पौधे से निकाला जाता है, जो चीनी की तुलना में 200-400 गुना अधिक मीठा होता है।

उच्च मोटापे से बचने के लिए, महिलाओं और बच्चों में कम कैलोरी वाले मिठास का उपयोग बढ़ गया हैं। लेकिन इसकी बढ़ती खपत मोटापे के खतरे का बढ़ाती है।

रीमर ने कहा ने कहा कि मेटरनल मेटाबॉलिज्म और गट माइक्रोबायोटा पर आहार सामग्री के प्रभाव को समझना, इष्टतम मातृ आहार को परिभाषित करने में मदद कर सकता है, जो माँ और बच्चे दोनों के लिए एक स्वस्थ भविष्य को बढ़ावा देता है।

चूहों पर किए गए इस अध्ययन में, एक फैकल ट्रांसप्लांट का उपयोग मोटापे के बढ़ते जोखिम के कारण परिवर्तित आंत माइक्रोबायोटा के प्रत्यक्ष प्रभाव को दिखाने के लिए किया गया था। परिणामों में सामने आया कि कम कलौरी मिठास का सेवन करने वाली माताओं के बच्चों के वजन में वृद्धि होने के साथ ब्लड ग्लूकोज की मात्रा भी अधिक रही।

अध्ययन में कहा गया है कि भले ही संतानों ने कभी भी मिठास का सेवन नहीं किया हो, लेकिन माँ के माइक्रोबायोटा और चयापचय में बदलाव, उनकी संतानों में माइक्रोबायोटा को बदलने और मोटापे को ट्रिगर करने के लिए पर्याप्त थे।



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गर्भावस्था में धूम्रपान करने से आपके बच्चे को सकता है ये खतरा

एक शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि गर्भावस्था के शुरुआती चरण में धूम्रपान करने से शिशुओं की हड्डियों में फै्रक्चर होने का खतरा कुछ हद तक बढ़ जाता है। ऐसे कई सारे शोध हुए हैं, जिनमें पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान और शिशुओं की वृद्धि में आने वाली समस्याओं का एक सीधा संबंध है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान का प्रभाव शिशुओं की हड्डियों के स्वास्थ्य और जीवन के विभिन्न चरणों में इनके फ्रैक्चर होने के खतरे के बारे में मिले साक्ष्य दुर्लभ और भिन्न है।

स्वीडन के ऑरेब्रो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा कि अध्ययन से प्राप्त निष्कर्ष से यह संकेत मिलता है कि गर्भावस्था के दौरान मां के धूम्रपान का संबंध एक साल की उम्र से पहले के दौर में हड्डियों के फ्रैक्चर होने से है। उन्होंने आगे कहा कि गर्भावस्था के दौरान सिगरेट के धुएं के संपर्क में आना वैसे तो बाल्यावस्था या युवावस्था के पहले चरण में फ्रैक्चर के जोखिम पर एक लंबे समय तक चलने वाला जैविक प्रभाव नहीं लगता है।

शोध का निष्कर्ष पत्रिका बीएमजे में प्रकाशित हुआ है। यह शोध साल 1983 से लेकर 2000 तक के बीच स्वीडन में पैदा हुए 16 लाख की आबादी पर आधारित था। माताओं में से 377,367 ने अपनी गर्भावस्था के प्रारंभिक चरणों में धूम्रपान किया था, जबकि 1,302,940 महिलाओं ने ऐसा नहीं किया था। जन्म से लेकर 21 वर्ष की औसत आयु (अधिकतम 32 साल) तक इसके नतीजे को देखा गया।

शोध निष्कर्ष में कहा गया है कि इस अवधि के दौरान 377,970 फ्रैक्चर की पहचान (हर साल 1,000 लोगों में 11.8 की दर से) की गई। शोधकर्ताओं ने भाई-बहनों के बीच तुलना कर इसका भी विशेषण किया, ताकि इनसे प्राप्त अपरिमेय पारिवारिक कारकों (आनुवांशिक और पर्यावरणीय) के अनचाहे प्रभावों को नियंत्रित किया जा सके। मोटे तौर पर, गर्भावस्था के दौरान मां के धूम्रपान करने का संबंध बच्चों में हड्डियों के फ्रैक्चर होने से हैं, जिसकी संभावना सबसे ज्यादा एक साल की आयु के पहले तक के दौर में होती है, लेकिन इसका प्रभाव बचपन से लेकर पांच साल की आयु व 32 साल तक की उम्र तक रहता है।



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Fermented Soy Benefits: दिल की सेहत बनाएं रखती है फर्मेन्टेड सोया डाइट

Fermented Soy Benefits in Hindi: स्वस्थ खाद्य पदार्थों के बारे में जागरूकता बढ़ने के साथ, हमारी डाइट में दिन-प्रतिदिन बदलाव होते जा रहे हैं। विभिन्न विदेशी सुपरफूड्स से लेकर स्वस्थ पेय पदार्थों तक, लोगों ने अपने नियमित आहार चार्ट में पौष्टिक तत्वों को शामिल करना शुरू कर दिया है। अगर हम नए खाद्य पदार्थों के बारे में बात करते हैं, तो फर्मेन्टेड सोया उत्पाद निश्चित रूप से सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। यह बात एक शोध में साबित हुई है। फर्मेन्टेड सोया उत्पाद जैसे टोफू, नट्टो और मिसो फिटनेस डाइट के तौर पर दुनियाभर में जाने जाते हैं। ये सोया उत्पाद विटामिन K1, फोलेट, फास्फोरस, कॉपर मैंगनीज जैसे विटामिन और खनिजों से समृद्ध हैं। शोधकर्ताओं का कहना है, किण्वित सोया उत्पाद जैसे कि मिसो (एस्पेरेगिलस ओरेजा के साथ किण्वित सोयाबीन), टोफू (सोयाबीन दही), और नाटो (बेसिलस सबटिलिस के साथ किण्वित सोयाबीन) का अधिक सेवन, प्रारंभिक मृत्यु के कम जोखिम से जुड़ा है।


जर्नल बीएमजे में प्रकाशित शोध के निष्कर्षों के लिए, शोधकर्ताओं ने कई प्रकार के सोया उत्पादों और कैंसर, हृदय रोग, श्वसन रोग और चोट जैसे कारकों से होने वाली मौत के बीच संबंध की जांच की। उन्होंने 45-74 वर्ष की आयु के 42,750 पुरुषों और 50,165 महिलाओं पर अपने निष्कर्षों को आधारित किया जो जापान के 11 सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक अध्ययन में भाग ले रहे थे।


सोया उत्पादों पर अध्ययन
अध्ययन के अनुसार, प्रतिभागियों ने अपनी आहार की आदतों, जीवन शैली और स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में विस्तृत प्रश्नावली भरी। अध्ययन में पाया गया कि किण्वित सोया (नट्टो और मिसो) का अधिक सेवन करने वाले लोगों में सभी तरह के रोगों से होने वाली मौत की संभावना 10 प्रतिशत तक कम थी।

जिन पुरुषों और महिलाओं ने नेटो खाया, उनमें भी हृदय की मृत्यु का जोखिम उन लोगों की तुलना में कम था, जिन्होंने नाटो नहीं खाया था, लेकिन सोया सेवन और कैंसर से संबंधित मृत्यु दर के बीच कोई संबंध नहीं था।

शोधकर्ताओं के अनुसार, किण्वित सोया उत्पाद उनके किण्वित समकक्षों की तुलना में फाइबर, पोटेशियम और बायोएक्टिव घटकों में समृद्ध होते हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि सभी सोया उत्पादों की तुलना में किण्वित सोया उत्पादों (नाटो और मिसो) का अधिक सेवन मृत्यु दर के कम जोखिम से जुड़ा था।



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Coronavirus: यूपी में कोरोनावायरस संदिग्धों की रिपोर्ट नकारात्मक आई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जानलेवा कोरोनावयरस के दो संदिग्ध मरीजों के परिणाम नकारात्मक आए हैं। डॉक्टरों ने इस बात की जानकारी दी। मरीजों में से एक महाराजगंज और दूसरा गाजीपुर का है। दोनों चीनी शहर वुहान में दवा का अध्ययन कर रहे थे और कुछ समय पहले अपने घर लौट आए थे।

कम्युनिकेबल डिजीज के निदेशक मिथलेश चतुर्वेदी ने कहा कि जहां एक ओर दो संदिग्धों की रिपोर्ट मिल गई है, वहीं गाजियाबाद से तीसरे संदिग्ध की रिपोर्ट का इंतजार है। चतुर्वेदी ने कहा, ''गाजियाबाद की मरीज को उसी के घर में अलग रखा गया है। उन्हें पूर्ण रूप से स्वस्थ घोषित करने से पहले हम अगले 28 दिनों तक इंतजार करेंगे। संदिग्धों के रक्त, बलगम और थूक के नमूनों को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे भेजा गया था। गुरुवार देर रात रिपोर्ट प्राप्त हुई। गाजीपुर के चीफ मेडिकल ऑफिसर जी.सी. मौर्य ने कहा कि उनके जिले की रहने वाली यह मेडिकल की छात्रा वुहान में पढ़ाई कर रही थी। उन्होंने कहा कि 'केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इस बाबत अलर्ट जारी करने के बाद छात्रा 15 जनवरी को घर वापस आ गई थी। उसकी जांच के लिए एक मेडिकल टीम भेजी गई। लेकिन लड़की में कोरोनोवायरस के लक्षण नहीं दिखाई दिए।

कोरोना वायरस को लेकर कुशीनगर का युवक चीन में फंसा -

उत्तर प्रदेश में कुशीनगर के हनुमानगंज इलाके के दंरगोली गांव के बेलवनिया टोला का युवक चीन के हेलांग जियांग शहर में फंसा है। विपिन गुप्ता नामक युवक वहां की जियामुसी यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करता है। कोरोना वायरस के कारण वहां मेडिकल छात्रों को भी कमरे से बाहर निकलने पर प्रतिबंध है। इसकी जानकारी के बाद घरवाले परेशान हैं।बेलवनिया निवासी राज गोविंद गुप्ता ने बताया कि उनका बेटा विपिन गुप्ता चीन के शहर हेलांग जियांग में जियामुसी यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करता है। वह सर्जरी में पीजी अंतिम वर्ष का छात्र है। बेटे ने बताया है कि उसके कालेज में तमाम भारतीय छात्र भी हैं। छात्रों को 15 दिन से मेडिकल कैंप में रखकर स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। परिजन बेटे के सुरक्षित स्वदेश वापसी का इंतजार कर रहे हैं।



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घोड़ों में होने वाली इस बीमारी की खतरा इंसान को भी हो सकता है, जानें इसके बारे में

घोड़ों में होने वाली ग्लैंडर्स की बीमारी से इंसान को हमेशा खतरा बना रहता है, यही कारण है कि भारत सरकार ने अगले पांच साल में देश में इसका खात्मा करने का लक्ष्य रखा है। ग्लैंडर्स एक संक्रामक रोग है, जिसमें बीमारी के जीवाणु पशुओं के शरीर में फैल जाते हैं जिससे उनके शरीर में गांठें पड़ जाती हैं, मुंह से खून निकलने लगता और सांस संबंधी तकलीफें भी बढ़ जाती है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के नए उपमहानिदेशक (पशुविज्ञान) डॉ. बी.एन. त्रिपाठी ने कहा कि ग्लैंडर्स काफी खतरनाक बीमारी है और इससे इंसान को हमेशा खतरा बना रहता है, इसलिए इंसान पर इसके प्रभावों को लेकर देश में लगातार जांच व निगरानी की जाती है। उन्होंने बताया कि जब किसी घोड़े में इस बीमारी के लक्षण पाए जाते हैं तो अश्वपालक के परिवार के सदस्यों के भी सैंपल लिए जाते हैं जिनकी जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि यह नहीं कह सकते हैं कि भारत में मानव पर इस बीमारी का प्रभाव नहीं पड़ सकता है, हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रभाव पड़ सकता है। डॉ. त्रिपाठी ने आईएएनएस को बताया कि घोड़े, खच्चर और गधों में पाई जानेवाली ग्लैंडर्स की बीमारी का उन्मूलन अगले पांच साल में करने का लक्ष्य है और इसके लिए केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय ने नेशनल ग्लैंडर्स एरेडिकेशन प्रोग्राम चलाया है।

हाल ही में, हरियाणा के हिसार में पांच घोड़ियों में ग्लैंडर्स की बीमारी के लक्षण पाए गए, जिनकी जांच के लिए नमूने डॉ. त्रिपाठी के नेतृत्व में ही वैज्ञानिकों की टीम ने एकत्र की थी और पांचों नमूने ग्लैंडर्स की बीमारी के लिए पॉजीटिव पाए गए।

डॉ. त्रिपाठी इससे पहले हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) के निदेशक थे, जो आईसीएआर के अंतर्गत आता है। आईसीएआर के नए उपमहानिदेशक (पशुविज्ञान) के रूप में कार्यभार संभालने के बाद गुरुवार को आईएएनएस से खास बातचीत में डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि इस बीमारी का खात्मा करने के लिए एक ही की तरीका है कि परीक्षण करने के बाद जिन पशुओं में ग्लैंडर्स की बीमारी के लक्षण पाए जाते हैं उनको मार दिया जाता है। ऐसा ही करके अमेरिका, यूरोप कनाडा जैसे बहुत से देशों में इस बीमारी का खत्म किया जा चुका है, लेकिन अभी भी एशिया, दक्षिण अमेरिकी और अफ्रीकी देशों यह बीमारी माजूद है। भारत भी उसी में शामिल है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश 2014 में घोड़ों में पाई जाने वाली ग्लैंडर्स बीमारी का हॉट स्पॉट था जहां से अब दक्षिण भारत में भी इसका प्रसार हो चुका है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड भी में कई जगहों पर घोड़ों में इसके लक्षण मिलते हैं। उन्होंने बताया कि 2006 में घोड़ों में ग्लैंडर्स की बीमारी कई राज्यों में फैल गई, जिनमें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश शामिल थे, जिसके बाद इसका परीक्षण शुरू हुआ।

ग्लैंडर्स एक संक्रामक रोग है, जिसमें बीमारी के जीवाणु पशुओं के शरीर में फैल जाते हैं जिससे उनके शरीर में गांठें पड़ जाती हैं, मुंह से खून निकलने लगता और सांस संबंधी तकलीफें भी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी का पता एलाइजा और कॉम्लीमेंट फिक्सेशन (सीएफटी) परीक्षण के जरिए लगाया जाता है। इस कार्यक्रम के जरिए अगले पांच साल में देश में ग्लैंडर्स रोग का उन्मूलन करने का लक्ष्य रखा गया है।



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Thursday, 30 January 2020

चीन में कोरोना वायरस से 170 की मौत, 7700 लोग संक्रमित

चीन में नए कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या गुरुवार को 170 तक पहुंच गई। वायरस के 7711 मामलों की पुष्टि के साथ विदेशी नागरिकों को स्वदेश भेजने के लिए उड़ानें जारी रहेंगी।

नेशनल हेल्थ कमिशन की प्रतिदिन की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय समयानुसार रात के 12 बजे तक अपडेट के अनुसार गंभीर अवस्था वाले मरीजों की संख्या 1370 रही, जबकि 124 लोगों की अवस्था में सुधार के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।

एफे न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, बीते बुधवार को 38 मौत दर्ज की गई और 1737 नए मामलों की पुष्टि की गई, जिनमें से 131 मरीजों की अवस्था गंभीर थी और अन्य 21 लोगों का उपचार किया गया। प्रांत के हेल्थ कमिशन के अनुसार, इनमें से ज्यादातर नए मामले व मौत के मामले हुबेई प्रांत के हैं, जहां से इसकी शुरुआत हुई। हुबेई में बुधवार को 1032 मामलों की और 37 मौत की पुष्टि की गई। इस संख्या के बाद मरने वालों का आंकड़ा 162 हो गया है।

वुहान शहर में बुधवार को 356 नए मामलों के साथ ही वायरस से होने वाली 25 मौतों की पुष्टि की गई। वायरस के प्रसार को रोकने के लिए बीते गुरुवार से लोगों को शहर के बाहर जाने और शहर में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, शहर में 90 लाख लोग रहते हैं। हालांकि चीन के बाहर इस वायरस से किसी के मरने की जानकारी सामने नहीं आई है।



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Throat Infection: गले की खराश आैर सूजन दूर करने में रामबाण हैं ये उपाय

Throat Infection In Hindi: सर्दियों के मौसम अक्सर गले में खराश और खांसी जैसी समस्याएं हो जाती है। इसमें गले में कांटे जैसी चुभन, खिचखिच और बोलने में तकलीफ जैसी समस्याएं आती हैं। ऐसा बैक्टीरिया और वायरस के कारण होता है। कई बार गले में खराश की समस्या एलर्जी और धूम्रपान के कारण भी होती है। गले के कुछ संक्रमण तो खुद-ब-खुद ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इलाज की ही जरूरत पड़ती है। ऐसे में आप कुछ घरेलू उपायों से इस मौसमी परेशानी से राहत पा सकते हैं। आइए जानते हैं गले को राहत पहुंचाने वाले घरेलू उपायों के बारे में:-

दूध हल्दी
दूध में हल्दी मिलाकर पीने से गले में खराश से हुई सूजन और दर्द दोनों से आसानी से राहत पाई जा सकती है।आयुर्वेद में हल्दी के दूध को प्राकृतिक एंटीबायोटिक के नाम से भी जाना जाता है।

लहसुन
लहसुन में ऐलीसिन नामक खास तत्व मौजूद होता है, जो गले में इंफेक्शन पैदा करने वाले जीवाणुओं को मार देता है।

शहद
एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच शहद और नींबू का रस मिलाकर दिन में तीन बार पीने से भी सुखी खांसी से आराम पाया जा सकता है। शहद ह्यपेरटोनिक ओस्मोटिक हाइपरोनिक ऑसमाटिक की तरह कार्य करता है,जो गले की सूजन और दर्द को खत्म करने में मदद करता है।

मुलेठी चबाएं
मुलेठी को चबाने से गले की समस्याओ से राहत मिलती है। मौसम परिवर्तन के कारण गले में दर्द या खराश की समस्या से निजात के लिए मुलेठी का चूर्ण मुंह में रखकर चूसने से आपको काफी आराम मिलेगा।

लौंग खाएं
लौंग ऐंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होती है। जब भी आपको गले की खराश महसूस हो, लौंग चबाएं,आपको फायदा मिलेगा।

अदरक का इस्तेमाल
अदरक में ऐंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो गले की सूजन व दर्द को दूर करता है। इसलिए अदरक का सेवन किसी न किसी रूप में करकर इन समस्याओं से निजात पा सकते हैं।

अन्य उपाय
- गले की नमी बनाए रखने के लिए पानी और जूस जैसे तरल पदार्थ को खूब पिएं।
- हलवा, जई (ओट्स) और सूप जैसी नर्म चीजें खाएं-पिएं।
- नमक के गुनगुने पानी से गरारे करें। इससे गले में आराम मिलेगा।
- अदरक, इलायची और काली मिर्च वाली चाय गले की खराश में बेहद आराम पहुंचाती है। साथ ही इस चाय में जीवाणुरोधक गुण भी हैं। इस चाय को नियमित रूप से पीने से गले को आराम मिलता है और खराश दूर होती है।
- धूम्रपान न करें और ज्यादा मिर्च-मसाले वाला भोजन न लें।
- खान-पान में विशेष तौर पर परहेज बरतें। फ्रिज का ठंडा पानी न पिएं, न ही अन्य ठंडी चीजें खाएं।



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Vitamin E oil Benefits: विटामिन ई ऑयल से पाएं दमकती त्वचा और काले बाल

Vitamin E oil Benefits in Hindi: अाप अपने बाल और स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाना चाहते हैं ताे विटामिन E ऑयल का इस्तेमाल आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर विटामिन E ऑयल आपकी रंगत में जोरदार इजाफा कर सकता है। बशर्ते आपको इसके इस्तेमाल का सही तरीका मालूम हो। आज हम आपको विटामिन E ऑयल इस्तेमाल करने के वो तरीके बता रहे हैं, जिन्हें इस्तेमाल कर आप हेल्दी स्किन और बाल पा सकते हैं। तो आइए जानते हैं उन तरीकों के बारे में:-

चेहरे की मसाज करें
चेहरे को स्मूद और सॉफ्ट बनाने के लिए विटामिन E की एक कैप्सूल में आधा चम्मच ऐलोवेरा जेल लगाकर दो मिनट मसाज करें। इसे हर रात सोने से पहले लगाएं। अगर ये सॉल्यूशन आपको चिपचिपा लगे तो आप इसे दिन में भी लगा सकते हैं।

डार्क सर्कल्स दूर करें
एक चम्मच बादाम तेल में एक विटामिन E कैप्सूल मिलाएं। इस मिक्सचर से रोजाना रात को सोने से पहले अंडर आई एरिया की मसाज करें। आपको एक ही हफ्ते में इसका रिज़ल्ट दिखने लगेगा।

स्क्रब के तौर पर
हफ्ते में दो बार विटामिन E की दो कैप्सूल में कॉफी पाउडर मिलाकर चेहरे को स्क्रब करें। इससे आपके फेस की सारी गंदगी बाहर निकलकर आपको मिलेगा क्लियर और ग्लोइंग चेहरा।

बालों के लिए
बालों को चमकदार, मुलायम और घने बनाने के लिए हफ्ते में एक बार विटामिन E की दो कैप्सूल में तीन चम्मच दही मिलाकर अच्छे से फेंटकर बालों और स्कैल्प पर लगाएं। आप चाहे तो दही के अलावा नारियल तेल या बादाम तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

आइब्रोज घनी बनाने के लिए
विटामिन E ऑयल में ऐसे गुण होते हैं जो बालों की ग्रोथ करने में मदद करते हैं। क्योंकि ये सिर के बालों को बढ़ाने के लिए स्कैप्ल के ऑयल प्रोडक्शन, PH लेवल, ब्लड सर्कुलेशन और फॉलिकल हेल्थ आदि सबको बेहतर बनाता है। ठीक इसी तरह ये विटामिन E ऑयल आइब्रोज के बालों को भी घना करता है। इसके लिए रात में सोने से पहले डाइरेक्ट इस ऑयल से आइब्रोज की मसाज करें।

विटामिन E ऑयल की कैप्सूल्स आपको किसी भी नज़दीकी मेडिकल स्टोर्स से मिल जाएंगी।



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knee Pain: ठंड के माैसम में घुटनाें के दर्द से छुटकारा दिलाते हैं ये आसान उपाय

Home Remedies For knee Pain In Hindi: सर्दियों के मौसम में अक्सर कई लोग घुटने के दर्द से परेशान रहते हैं, खासकर बड़ी उम्र के लोगों में ये समस्या जा देखी जाती है। अगर आप भी घुटने में दर्द की तकलीफ से गुजर रहे हैं तो आप घर में रह कर ही इससे छुटकारा पा सकते हैं। जी हां, कुछ आसान से घरेलू उपाय आपके घुटनों के दर्द को आसानी से गायब कर देंगे। आइए जानते हैं इनके बारे में...

- रोज सुबह खाली पेट एक चम्मच मेथी के पिसे दानों में एक ग्राम कलौंजी मिलाकर गुनगुने पानी के साथ लें। दोपहर और रात में खाना खाने के बाद आधा-आधा चम्मच लेने से जोड़ मजबूत होंगे और किसी प्रकार का दर्द नहीं होगा।

- खाने में दालचीनी, जीरा, अदरक और हल्दी का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करें। गर्म तासीर वाले इन पदार्थों के सेवन से घुटनों की सूजन और दर्द कम होता है।

- मेथी दाना, सौंठ और हल्दी बराबर मात्रा में मिला कर तवे या कढ़ाई में भून कर पीस लें। रोजाना एक चम्मच चूर्ण सुबह-शाम भोजन करने के बाद गर्म पानी के साथ लें। इससे घुटनों के दर्द में काफी आराम मिलता है।

- सुबह खाली पेट लहसुन की एक कली दही के साथ खाएं।

- हल्दी चूर्ण, गुड़, मेथी दाना पाउडर और पानी सामान मात्रा में मिलाएं। थोड़ा गर्म करके इनका लेप रात को घुटनों पर लगाएं और पट्टी बांधकर लेटें।

- अलसी के दानों के साथ दो अखरोट की गिरी सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

- बराबर मात्रा में नीम और अरंडी के तेल को हल्का गर्म करके सुबह-शाम जोड़ों पर मालिश करें।

- मालिश के लिए आप इन चीजों से भी तेल बना सकते हैं। 50 ग्राम लहसुन, 25 ग्राम अजवायन और10 ग्राम लौंग 200 ग्राम सरसों के तेल में पका कर जला दें। ठंडा होने पर कांच की बोतल में छान कर रख लें। इस तेल से घुटनों या जोड़ों की मालिश करें।

- गेहूं के दाने के आकार का चूना दही या दूध में घोलकर दिन में एक बार खाएं। इसे 90 दिन तक लेने से कैल्शियम की कमी दूर होगी।

- कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर बनाए पैड से सिंकाई करने से घुटने के दर्द में आराम मिलता है।



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Weight loss Tips: जल्द वजन घटाने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके

Weight loss Tips in Hindi: आजकल की खराब लाइफस्टाइल और खानपान के कारण लोगों में मोटापा एक आम समस्या बन गया है। शहरों में रहने वाले लोगों में खासतौर पर मोटापे की समस्या देखी जाती है। शरीर पर बढ़ती चर्बी खुद भी एक समस्या है होने के साथ कई बीमारियों को भी न्योता देती है। जिसमें हाई ब्लडप्रेशर, मधुमेह, दिल के रोग आदि शामिल हैं। इसलिए ये जरूरी है कि बढ़ती हुए वजन पर जल्द से जल्द लगाम लगाई जाए। इसके लिए आपको कोई भारी भरकम कसरत करने की जरूरत नहीं है। आप चाहे तो लाइफस्टाइल और खानपान में थोड़ा बदलाव कर नेचुरल तरीके से मोटापा कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं इन तरीकों के बारे में

- आप अगर सच में अपना वजन घटाना चाहते हैं तो आपको अपनी डाइट में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम करनी होगी। कई शोध बताते हैं कि डाइट में ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ने का कारण होते हैं।

- वजन कम करने के लिए खाना छोड़ देना समझदारी नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि वजन कम करने के लिए लोग खाना छोड़ देते हैं। जिससे उनका वजन कम हो ना हो, लेकिन वे बीमार जरूर हो जाते हैं। वजन कम करने के लिए खाना छोड़ने से बेहतर है कि आपको भूख लगे तो टुकड़ाें में खाना खाएं। इस तरह से आपका खाना जल्द हजम हाे जाएगा। जाेकि माेटापे की संभावना काे कम करता है।

- वजन घटाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि आप जो कुछ भी खाएं वो रीयल फूड हो। मार्केट में बिकने वाले प्रोसेस्ड और लो-कार्ब फूड खाने से परहेज करें।

- किसी का भी वजन एक दिन में तो बढ़ नहीं जाता। ऐसे में ये सोचना कि एक दिन में ही वजन कम हो जाए गलत होगा। वजन कम करना एक लंबी प्रक्रिया है जिसके लिए आपको कुछ वक्त तक नियमित रहने की जरूरत होती है। तभी आप बेहतर परिणाम पा सकेंगे।

- अपनी डाइट से आर्टिफिशियल शुगर काे दूर रखें । इसके सेवन से एक ओर जहां वजन बढ़ता है वहीं ऐसी चीजें मीठे को लेकर क्रेविंग बढ़ाने का भी काम करती हैं जो खतरनाक हो सकता है।

- अगर आप कोई दवा ले रहे हैं तो उसमें मौजूद सभी तत्वों की जानकारी ले लें। कई दवाइयां ऐसी होती हैं जिनके इस्तेमाल से भी वजन बढ़ता है। ऐसे में दवाइयों का रिव्यू करना जरूरी है।

- वजन कम करने की इच्छा रखने वालों को डेयरी प्रोडक्ट और नट्स के इस्तेमाल में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए।

- अगर आप खाने पर पूरे दिन में कंट्रोल नहीं कर पाते हैं तो बीच-बीच में फास्ट रखें। अपनी क्षमता के मुताबिक आप चाहें तो दोपहर बाद के खाने से लेकर अगली सुबह के नाश्ते के बीच में कुछ न खाएं। या फिर ब्रेकफास्ट के बाद लंच न करें और जल्दी डिनर कर लें। इस फास्ट को ऐसे भी रख सकते हैं - या तो आज डिनर करके अगले पूरे दिन कुछ न खाएं और सीधा डिनर करें। या फिर हफ्ते में 5 दिन अपनी पसंद से खूब खाएं और दो दिन बिल्कुल छोड़ दें। बीच में आप कम चीनी या बिना चीनी के चाय या काफी ले सकते हैं।

- वजन कम करना चाह रहे है तो इसके लिए बेहद जरूरी है कि आप स्मार्ट तरीके से व्यायाम करें। ऐसी एक्सरसाइज करें जिससे पूरे शरीर का वर्कआउट हो। चलना, साइकिल चलाना, दौड़ना, योगा करना आदि इसके बेहतरीन तरीके हैं।



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केरल के मरीज में हुए कोरोनावायरस की पुष्टि, दिल्ली के मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव

तिरुवनंतपुरम। चीन में फैल रहे कोरोनावायरस से अभी तक बचे हुए भारत में भी अब इस वायरस से संक्रिमित एक मामले की पुष्टि हो गई है। भारत में इस वायरस का पहला मामला केरल से सामने आया है। केरल में एक मरीज में इस वायरस के होने की पुष्टि हुई है।

आरएमएल में भर्ती मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव -

दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में नोबेल कोरोना वायरस जैसे लक्षणों के साथ भर्ती तीनों मरीजों में से कोई भी इस वायरस से पीड़ित नहीं पाया गया है। अस्पताल प्रशासन ने आज बताया कि तीनों मरीजों के नमूनों की जाँच रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट निगेटिव है, जिसका मतलब यह है कि जाँच के लिए भेजे गये उनके नमूनों में यह वायरस नहीं पाया गया है। इन मरीजों को 27 जनवरी को आरएमएल में भर्ती कराया गया था। तीनों में कोरोना वायरस जैसे लक्षण पाये गये थे और वे पिछले दिनों चीन होकर आये थे। उन्हें अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड बनाकर रखा गया था।



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Coronavirus: आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा से करें कोरोनावायरस से बचाव

coronavirus In hindi: दुनियाभर में कोरोनावायरस के बढ़ रहे प्रकोप को देखते हुए आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तहत अनुसंधान परिषदों ने भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी के आधार पर कोरोनावायरस से बचाव की सलाह जारी की है। जो इस प्रकार है:-

आयुर्वेद के अनुसार
- व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें।
- साबुन और पानी से अपने हाथों को कम से कम 20 सेकैंड तक धोएं।
- कम से कम 20 सेकंड के लिए अपने हाथों को अक्सर साबुन और पानी से धोएं।
- शदांग पनिया (मुस्ता, परपाट, उशीर, चंदन, उडिच्य़ा और नागर) प्रसंस्कृत पानी (1 लीटर पानी में 10 ग्राम पाउडर डाल कर उबालें, जब तक यह आधा तक कम न हो जाए) पी लें। इसे एक बोतल में स्टोर करें और प्यास लगने पर पिएं।
- बिना धोए हाथों से अपनी आँखें, नाक और मुँह छूने से बचें।
- जो लोग बीमार हैं उनसे निकट संपर्क से बचें।
- बीमार होने पर घर पर रहें।
- खांसी या छींक के दौरान अपना चेहरा ढंक लें और खांसने या छींकने के बाद अपने हाथों को धो लें।
- अक्सर छुई गए वस्तुओं और सतहों को साफ करें।
- संक्रमण से बचने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर यात्रा करते समय या काम करते समय एक एन95 मास्क का उपयोग करें।
- यदि आपको कोरोना वायरल संक्रमण का संदेह है, तो मास्क पहनें और तुरंत अपने नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
- आयुर्वेदिक प्रथाओं के अनुसार रोगनिरोधी उपाय / इम्यूनोमॉड्यूलेटरी ड्रग्स।
- स्वस्थ आहार और जीवन शैली के माध्यम से प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए उपाय किए जाएंगे।
- अगस्त्य हरितकी 5 ग्राम, दिन में दो बार गर्म पानी के साथ।
- शेषमणि वटी 500 मिलीग्राम दिन में दो बार।
- त्रिकटु (पिप्पली, मारीच और शुंठी) पाउडर 5 ग्राम और तुलसी 3-5 पत्तियां (1-लीटर पानी में उबालें, जब तक यह ½ लीटर तक कम नहीं हो जाता है और इसे एक बोतल में रख लें) इसे आवश्यकतानुसार और जब चाहे तब घूंट में लेते रहें।
प्रतिमार्स नास्य : प्रत्येक नथुने में प्रतिदिन सुबह अनु तेल / तिल के तेल की दो बूंदें डालें।

* यह सलाह केवल सूचना के लिए है और इसे केवल पंजीकृत आयुर्वेद चिकित्सकों के परामर्श से अपनाया जाएगा।

होमियोपैथी
होमियोपैथी दवा आर्सेनिकम एल्बम 30 को कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ रोगनिरोधी दवा के रूप में अपनाया जा सकता है, जिसे आईएलआई की रोकथाम के लिए भी सुझाया गया है। आर्सेनिकम एल्बम 30 की एक डोज की सिफारिश की गई है, जो प्रतिदिन खाली पेट में तीन दिनों के लिए इस्तेमाल की जाती है। खुराक को एक महीने के बाद दोहराया जाना चाहिए ताकि समुदाय में प्रबल होने वाले कोरोना वायरस संक्रमण के उसी शेड्यूल का पालन किया जा सके। इसके अलावा विशेषज्ञ समूह ने सलाह दी है कि रोग की रोकथाम के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सुझाए स्वास्थ्यकर उपायों का जनता द्वारा पालन किया जाना चाहिए।

कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण प्रबंधन में उपयोगी यूनानी दवाएं
- शरबतउन्नाब- 10-20 मिली दिन में दो बार।
- तिर्यकअर्बा- 3-5 ग्राम दिन में दो बार।
- तिर्यक नजला- 5 ग्राम दिन में दो बार।
- खमीरा मार्वारिद- 3-5 ग्राम दिन में एक बार।
- स्कैल्प और छाती पर रोगन बाबूना / रोगन मॉम / कफूरी बाम से मालिश करें।
- नथुने में रोगन बनाफशा धीरे लगाएं।
- अर्क अजीब 4-8 बूंद ताजे पानी में लें और दिन में चार बार इस्तेमाल करें।
- बुखार होने की स्थिति में हब ए एकसीर बुखार 2 की गोलियां गुनगुने पानी के साथ दिन में दो बार लें।
- 10 मिली शरबत नाजला 100 मिली गुनगुने पानी में दो बार रोजाना पिएं।
- क़ुरस ए सुआल 2 गोलियों को प्रतिदिन दो बार चबाना चाहिए।



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corona virus thermal scanner: जानिए थर्मल स्कैनर से कैसे करते हैं कोरोनावायरस की पहचान

चीन के कोरोनावायरस की पहचान व रोकथाम में थर्मल स्कैनर काफी उपयोगी साबित हुआ है। यह एक ऐसा उपकरण है, जिसके माध्यम से कोरोनावायरस या फिर ऐसे ही किसी अन्य रोग से ग्रस्त व्यक्ति की पहचान की जा सकती है।

प्रसिद्ध वैज्ञानिक एन. कोलिन बताते हैं कि यह स्कैनर एक स्वस्थ व्यक्ति और विषाणु से ग्रस्त व्यक्तिय में स्पष्ट अंतर बताता है। थर्मल स्कैनर की सबसे खास बात यह है कि इससे निकलने वाली तरंगों का कोई दुष्प्रभाव मानव शरीर पर नहीं पड़ता है। हालांकि, इसका उपयोग प्रशिक्षण प्राप्त विशेषज्ञ की देखरेख में ही संभव है।

थर्मल स्कैनिंग विशेषज्ञ सतीश कुमार ने आईएएनएस से कहा कि सामान्य रूप से थर्मल स्कैनिंग को लेकर लोगों के मन में एक अनजाना सा डर रहता है। सामान्य लोग थर्मल स्कैनिंग को सीटी-स्कैन जैसी ही किसी मशीन से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, थर्मल स्कैनिंग मानव शरीर की जांच के सबसे आसान उपायों में से एक है और इसके लिए किसी भी व्यक्ति को किसी भारी भरकम मशीन से होकर नहीं गुजरना पड़ता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भी थर्मल स्क्रीनिंग के प्रति लोगों की आशंकाएं दूर करने व जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया है।

डॉ. हर्षवर्धन ने थर्मल स्कैनिंग के बारे में बात करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में विदेशों से आ रहे लोगों को हवाईअड्डे पर एक स्कैनर से होकर गुजरना होता है। इस दौरान यदि थर्मल स्कैनर से गुजरने वाले किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान सामान्यत व्यक्ति के तापमान से अधिक पाया जाता है, तो ऐसे संदिग्ध की मेडिकल जांच की जाती है।

उन्होंने कहा कि शरीर का तापमान अधिक होने पर थर्मल स्कैनर तुरंत इसकी जानकारी दे देता है। थर्मल स्कैनर एक इंफ्रारेड कैमरे की तरह काम करता है। इस स्कैनर के जरिए गुजरने वाले व्यक्ति के शरीर में मौजूद विषाणु इंफ्रारेड तस्वीरों में दिखाई पड़ते हैं, विषाणुओं की संख्या अधिक या खतरनाक स्तर पर होने पर व्यक्ति के शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, कोच्चि, जयपुर, अहमदाबाद समेत देशभर के 20 हवाईअड्डों पर इस प्रकार के आधुनिक थर्मल कैमरा स्कैनर लगाए हैं। देशभर के विभिन्न हवाई अड्डों पर लगाए गए थर्मल स्कैनर्स के जरिए अभी तक करीब 38,000 लोगों की सफलतापूर्वक जांच की जा चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि कुछ अन्य स्थानों पर भी अब थर्मल स्कैनिंग के जरिए कोरोनावायरस के संदिग्धों की जांच की जाएगी। इसके लिए जल्द ही नए थर्मल स्कैनर विदेशों से आयात किए जाएंगे।



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Wednesday, 29 January 2020

Liver Friendly Food: छाछ पीने से फैटी लिवर की समस्या में मिलेगा आराम

Liver Friendly Food In Hindi: आज के समय में अहैल्दी खानपान के कारण कई लोगों में फैटी लीवर की समस्या होना आम बात है। फैटी लीवर रोग के दो प्रमुख प्रकार हैं - अल्कोहल-प्रेरित और नॉन अल्कोहलिक। अल्कोहल-प्रेरित फैटी लीवर के लिए अत्यधिक अल्कोहल का सेवन जिम्मेदार होता है, जबकि नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर की समस्या अत्यधिक प्रसंस्कृत आहार खाने वाले, मोटे और आलसी लोगों में देखी जाती है।

एक स्वस्थ शरीर में, लिवर विषाक्त पदार्थों को हटाने में मदद करता है और पित्त, पाचन प्रोटीन का उत्पादन करता है। फैटी लिवर की बीमारी लिवर को नुकसान पहुंचाती है और उसे काम करने से भी रोकती है। वसायुक्त यकृत रोग यकृत की विफलता के प्रमुख कारणों में से एक है। लेकिन आप चाहे तो कुछ खास खाद्य पदार्थ अपनी डाइट में शामिल कर आप फैटी लिवर की समस्या से बच सकते हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में :-


कॉफी
अध्ययनों से पता चला है कि कॉफी पीने वाले लोगों में, कॉफी न पीने वाले लोगों की तुलना में फैटी लीवर की समस्या कम होती है। यदि फैटी लिवर की समस्या हो भी तो लिवर फेलियर का खतरा कम रहता है। कॉफी में पाया जाने वाला कैफीन जिगर के रोगों को बढ़ाने वाले एंजाइम की मात्रा को कम करता है।

हरी सब्जियां
ब्रोकोली फैटी लिवर के जोखिम को कम करने में मददगार हैं। इसके अलावा पालक, ब्रसेल्स स्प्राउट्स और केल जैसी सब्जियां भी लिवर वसा को कम करने का काम करती हैं।

टोफू
अध्ययनों से पता चला कि सोया प्रोटीन, जो टोफू जैसे खाद्य पदार्थों में मिलता है, यकृत में वसा के निर्माण को कम कर सकता है। साथ ही, टोफू वसा में कम और प्रोटीन में उच्च होता है।

अखरोट
अखरोट ओमेगा -3 फैटी एसिड में उच्च हैं। शोध में पाया गया है कि अखरोट खाना फैटी लीवर की बीमारी दूर करने में सहायक है।

एवोकैडो
Avocados स्वस्थ वसा में उच्च होते हैं, और शोध से पता चलता है कि उनमें ऐसे रसायन होते हैं जो यकृत की क्षति को धीमा कर सकते हैं। वे फाइबर में भी समृद्ध हैं, जो वजन नियंत्रण में मदद कर सकते हैं। फैटी लिवर की समस्या में एवोकैडो और मशरूम सलाद को आजमाएं।

छाछ
चूहाें पर हुए एक शाेध में इस बात का खुलासा हुआ है कि प्रोटीन में उच्च छाछ यानि मट्ठा फैटी लिवर की समस्या को कम कर सकता है। इसलिए अपने आहार में इन्हें जगह दें।

सूरजमुखी के बीज
अखरोट के स्वाद वाले सूरजमुखी के बीज विटामिन ई में उच्च होते हैं, यह एक एंटीऑक्सिडेंट है जो जिगर को और अधिक नुकसान से बचा सकता है।



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Skin Care in winter: सर्द माैसम में त्वचा की खुजली से बचने के लिए अपनाएं ये टिप्स

Skin Care in winter in Hindi: सर्दियों के मौसम में कम तापमान की वजह से त्वचा में रूखापन आ जाता है। जिसकी वजह से अक्स र त्वचा में खुजली होने की समस्या हो जाती है। एग्जिमा से पीड़ित लोगों के लिए यह और भी परेशान करने वाली स्थिति होती है। लेकिन आप चाहे तो कुछ टिप्स के जरिए इस समस्या से अपना बचाव कर सकते हैं। आइए जानते हैं खुजली का कारण और बचाव के उपायों के बार में

ठंड में क्यों होती है खुजली
ठंड के मौसम में नमी की कमी के कारण हमारी त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है। नमी के कमी से त्वचा की मृत कोशिकाओं में बढ़ोत्तरी हो जाती है। और उनमें खिचाव पैदा हो जाता है। जिसका अनुभव हमें खुजली के तौर पर होता है।

ऐसे करें बचाव

नहाने से पहले तेल मालिश करें
सर्दियों में नहाने से पहले सरसों या नारियल के तेल से मालिश करें। फिर गुनगुने पानी से नहा लें। इससे त्वचा की नमी बरकरार रहती है। और खुजली की समस्या नहीं होती। इस बीच साबुन का प्रयोग करने ये बचें, क्योंकि साबुन का प्रयोग त्वचा का शुष्क बनाता है

गरम पानी से ज्यादा देर न नहाएं
देर तक गर्म पानी से न नहाएं गर्म पानी में देर तक नहाने से त्वचा के ऊपरी परत में स्थित नेचुरल ऑयल निकल जाते हैं। इससे त्वचा शुष्क हो जाती है और फिर खुजली शुरू हो जाती है। ऐसे में 15 मिनट से ज्यादा गर्म पानी में न नहाएं और नहाने के तुरंत बाद त्वचा पर मॉइश्चराइजर लगाएं।

नर्म कपड़े पहनें
सर्दियों में हमेशा नर्म कपड़े पहनें। कॉटन, सिल्क जैसे कॉटन के कपड़े पहनना ज्यादा फायदेमंद होता है। इसके अलावा परफ्यूम वाले डिटर्जेंट से धुले कपड़े पहनने से परहेज करें।

रगड़कर त्वचा को साफ न करें
हाथ या मुंह धोने के बाद तौलिए से रगड़कर साफ न करें। इससे त्वचा की बाहरी परत को नुकसान पहुंचता है जिससे खुजली की समस्या हो जाती है।

खूब पिएं पानी
दिन भर में सात-आठ गिलास पानी पीना हर मौसम में जरूरी होता है। ज्यादा मात्रा में पानी पीने से त्वचा में नमी की कभी कमी नहीं होती है। इससे खुजली की समस्या होने की कोई संभावना नहीं होती।



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Mulethi Benefits: आप नहीं जानते हाेगें, सर्दियाें में मुलेठी खाने के ये फायदे

Mulethi Benefits In Hindi: मुलेठी अपने औषधीय गुणों के कारण कई तरह के रोगों को दूर करने में काम आती है। आयुर्वेद के अनुसार इसका सेवन दिल,त्वचा और बालों की सेहत बनाए रखने के साथ सर्दी, खांसी, कफ जैसी समस्याओं को दूर रखता है। यह वात और पित्त दोष को कम करती है। मुलेठी के प्रयोग से खून साफ होता है और बुद्धि तेज होती है। मुलेठी को यष्टीमधु और मुलहठी भी कहा जाता है। आइए जानते हैं मुलेठी खाने के फायदों के बारे में :-

त्वचा व बालों के लिए
मुलेठी के सेवन से बालों को असमय सफेद होने और झड़ने से रोका जा सकता है। साथ ही यह आपकी त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद है। मुलेठी और आंवला के पाउडर को पानी के साथ मिलाकर पीने से आपकी त्वचा स्वस्थ व चमकदार रहेगी। और असमय बाल सफेद होना और झड़ना रूक जाएगा।

कमजोरी को दूर करे
अगर आप हमेशा थका हुआ महसूस करते हैं, तो आप 2 ग्राम मुलेठी चूर्ण के साथ 1 चम्मच घी और 1 चम्मच शहद को गर्म दूध के साथ मिलाकर पिएं। इससे आपकी थकान व कमजोरी दूर होगी। इसके अलावा पेट के अल्सर की समस्या होने पर आप 1 गिलास दूध के साथ 1 चम्मच मुलेठी चूर्ण मिलाकर दिन में 2 या 3 बार मिलाकर पी सकते हैं।

पीरियड्स के दौरान
अनियमित पीरियड्स की समस्या या पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए आप मुलेठी का इस्तेमाल कर सकते हैं। मासिक धर्म के दौरान होने वाले अधिक रक्तस्त्राव में आप 2 चम्मच मुलेठी का चूर्ण, 4 ग्राम मिश्री पानी में मिला लें। इसका सेवन करने से आपके पीरियड्स में होने वाले दर्द और अधिक रक्तत्राव से राहत मिलेगी।

दिल संबंधी बीमारियों में
मुलेठी के नियमित सेवन से दिल संबंधी बीमरियों को दूर रखा जा सकता है। इसके लिए आप 2 ग्राम मुलेठी और 2 ग्राम कुटकी का चूर्ण, 4 ग्राम मिश्री लें और इसे एक गिलास पानी में घोल लें। इसे आप प्रतिदिन दो बार से अधिक न पिएं। अगर आपको दिल की बीमारियों के अलावा भी कोई रोग या समस्या है, तो उसमें भी आपको इससे फायदा मिलेगा।



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Skin Care: त्वचा की चमक गायब कर सकती हैं ये गलतियां

Skin Care in Hindi: अगर आप स्वस्थ और दमकती हुई त्वचा को पाने की चाह रखते हैं, तो त्वचा की देखभाल से जुड़ी इन गलतियों को करने से बचें। त्वचा रोग विशेषज्ञ और कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉ. गीतांजलि शेट्टी ने त्वचा की दैनिक देखभाल के दौरान की जाने वाली चार ऐसी ही बेहद आम गलतियों का जिक्र किया है। आइए जानते हैं उनके बारे में...

सेहतमंद डाइट न लेना
आप जो भी खाते हैं आपकी त्वचा पर उसका प्रभाव पड़ता है। अगर आप अनहैल्दी भोजन, जैसे कि प्रोसेस्ड या जंक फूड का सेवन करेंगे, पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीएंगे, हानिकारक पेय पदार्थों का सेवन करेंगे, तो इन सबसे आपकी त्वचा प्रभावित होगी। आपकी त्वचा इनसे रूखी हो जाएगी और इसमें नमीं भी नहीं रहेगी। इसलिए अच्छी कंपनी के सौन्दर्य उत्पादों के इस्तेमाल के साथ-साथ पोषण पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

सही ब्यूटी प्रोडक्ट का चुनाव न करना
आपको ऐसा लग ही सकता है कि आप जिस मॉश्च्यूराइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं वह सबसे बेहतरीन है क्योंकि इससे आपकी त्वचा में नमीं काफी लंबे समय तक बरकरार रहती है, लेकिन इसमें कुछ ऐसे अवयव भी हो सकते हैं जिनका हानिकारक प्रभाव आपकी त्वचा पर पड़ सकता है। ऐसे में आप अपने त्वचा विशेषज्ञ से उन प्रोडक्टस के बारे में जान सकते हैं जो आपकी त्वचा के अनुरूप हो।

नियमित रूप से क्लींजिंग न करना
क्लींजिंग हमारी त्वचा के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। ऐसे में इसे नियमित रूप से जरूर करें। दिन में मेकअप अप्लाई करने से पहले और रात में सोने से पहले क्लींजिंग निश्चित रूप से करें।

मॉश्च्यूराइजिंग न करना
आपकी त्वचा को हर रोज मॉश्च्यूराइजेशन की आवश्यकता पड़ती है। नहाने के तुंरत बाद मॉश्च्यूराइजर अप्लाई करने और नहाने के काफी समय बाद भी इसे न लगाने का प्रभाव आपकी त्वचा पर बिल्कुल पड़ता है। आपकी त्वचा को मॉश्च्यूराइजर न लगाने की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।



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Coronavirus: वैक्सीन के लिए रोगजनकों की सूची तैयार करेगा भारत

coronavirus Vaccine In Hindi: दुनियाभर में फैल रहे कोरोनावायरस संक्रमण के मद्देनजर भारत सरकार "प्राथमिकता" वायरस और बैक्टीरिया की एक सूची तैयार करेगी, जो कोरोनावायरस संक्रमण को रोकने के लिए वैक्सीन बनाने में मदद करेगी। यह कदम उन विकासशील तकनीकों पर केंद्रित है जो भारत को वैक्सीन बनाने में मदद करेंगी - चार महीने या उससे भी पहले - किसी भी वायरस या बैक्टीरिया से संबंधित प्रकोप की स्थिति में।

गगनदीप कांग, कार्यकारी निदेशक, ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीएचएसटीआई) के अनुसार, भारत अभी तक इतना सक्षम नहीं है कि कोरोनावायरस के नवीनतम प्रकोप के लिए टीके का उत्पादन कर सके। हालांकि, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) प्राथमिकता वाले रोगजनकों की एक सूची तैयार करेगा। प्राथमिकता वाले रोगजनकों की एक नई सूची के साथ, हम अगले प्रकोप से निपटने के लिए तैयार होंगे।

THSTI विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के DBT के तहत एक स्वायत्त संस्थान है।

रोगजनक कोई भी संक्रामक सूक्ष्मजीव हो सकते हैं जैसे वायरस, जीवाणु, प्रोटोजोअन या कवक।

उन्होंने कहा, "डीबीटी प्लेटफॉर्म प्रौद्योगिकियों के विकासशील दृष्टिकोण करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा, जहां, वायरस के आनुवंशिक अनुक्रम के कारण प्रकोप होता है, विभिन्न प्रकार की प्लेटफॉर्म प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके टीका विकास पर काम करना संभव होगा।

वैक्सीन के विकास के लिए एक प्लेटफॉर्म तकनीक बैक बोन है जो हर वैक्सीन के लिए समान रहती है लेकिन रोगजनकों में भिन्नता रहती है।


टीके विकसित करने के लिए भारत का कदम 2016 में गठित एक वैश्विक गैर-लाभकारी संगठन व महामारी संबंधी तैयारी नवाचार (CEPI) के गठबंधन के बाद आया था, जिसने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि यह उभरते संक्रामक रोगों के खिलाफ नए टीकों के विकास को निधि देगा। इसने नोवल कोरोनावायरस या 2019-nCoV के खिलाफ टीके विकसित करने के लिए तीन कार्यक्रमों की भी घोषणा की।

नार्वे, भारत, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, वेलकम ट्रस्ट और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा शुरू की गई CEPI - ने कोरोवायरस वायरस के टीके विकसित करने के लिए तीन कंपनियों को 12.5 मिलियन डॉलर का फंड भी दिया है।

संगठन कोशिश कर रहा है कि टीकों का विकास और परीक्षण पहले से कहीं अधिक तेजी से हो।

CEPI के उपाध्यक्ष कांग ने कहा कि भारत किसी भी प्रकोप के लिए टीकाकरण के साथ तैयार होगा,टीके विकसित करने के लिए भारत के कार्यक्रम को संयुक्त रूप से CEPI और भारत सरकार द्वारा DBT के माध्यम से वित्त पोषित किया जाएगा, कांग ने कहा, जो CEPI के उपाध्यक्ष भी हैं।

उन्होंने कहा कि इस हैंड-होल्डिंग के आने से भारत किसी भी प्रकोप के वैक्सीनेशन लिए तैयार हो जाएगा। इन टीकों को ज्ञात रोगजनकों के खिलाफ बनाया जाएगा, जिनके कारण प्रकोप के साथ-साथ अज्ञात रोगजनकों के बारे में भी भविष्यवाणी की जा सकती है, जिसके लिए रोगज़नक़ों को अच्छी तरह से जाने बिना टीके विकसित करने की आवश्यकता हो सकती है।



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Tuesday, 28 January 2020

आइक्यू नहीं बच्चे का 'ईक्यू' लेवल तय करता है उसकी सफलता, जानें इसके बारे में

अपने बच्चों के पालन पोषण में हम अक्सर उसकी बौद्धिक क्षमताओं पर ध्यान केन्द्रित करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे के भावनात्मक पक्ष को भी उतना ही महत्त्व दिया जाना चाहिए। हाल के शोध बताते हैं कि बच्चे के इमोशनल कोशेंट यानि ईक्यू (भावनात्मक बुद्धिमत्ता) को बढ़ाने से बच्चों में सकारात्मकता और सफल होने की आशा बढ़ जाती है। इस विषय पर किताब लिखने वाले मार्क ब्रैकेट सेंटर फॉर इमोशनल इंटेलीजेंस के संस्थापक भी है। मार्क कहते हैं कि हमारा ईक्यू हमारे इंटेलीजेंस कोशेंट यानि आइक्यू से बिल्कुल उलट है। यह हमें अपनी भावनाओं को पहचानने, उन्हें संयमित करने और दूसरों की भावनाओं के साथ सहानुभूति रखने की क्षमता देती है। बच्चों में आइक्यू लेवल बढ़ाने की चिंता में हम अक्सर उनकी ईक्यू को कम कर के आंकते हैं। इससे उनमें भावनात्मक कौशल में कमी आई है और वे थोड़ी सी विफलता पर ही टूट जाते हैं। मार्क का कहना है कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता का सृजन, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, स्मृति, निर्णय लेने, रिश्ते, रचनात्मकता, ग्रेड और नौकरी के प्रदर्शन को बढ़ाने का एक सीधा तरीका है।

अक्सर माता-पिता यह मान लेते हैं कि पढ़ाई और आइक्यू के साथ ईक्यू भी स्कूल में कौशल के रूप में बच्चों में विकसित किया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसे घर पर भी मजबूत किया जाता चाहिए। बच्चों को दूसरों का आभारी होना और धन्यवाद कहना सिखाएं। शिक्षकों को विशेष दिवसों पर कार्ड लिखने, खिलौनों को खुद साफ करने, दोस्तों के साथ बराबरी का व्यवहार करने और सेवाओं के लिए लोगों का शुक्रगुजार होना सिखाएं। यह रातों-रात होने वाला बदलाव नहीं है। लेकिन सतत प्रयास से बच्चों में इसे आसानी से विकसित किया जा सकता है। इन तरीकों से आप भी अपने बच्चों के इमोशन कोशंट को बेहतर कर सकते हैं।



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Coronavirus Symptoms: कोरोनावायरस के लिए केंद्र सरकार देशभर में बना रही विशेष वार्ड

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नोवेल कोरोनावायरस के उपचार व संक्रमण की रोकथाम के लिए दिल्ली के अस्पतालों में खास वार्ड बनाए गए हैं। अब ऐसे ही वार्ड देश के अन्य राज्यों में भी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल व सिक्किम में तुरंत प्रभाव से कोरोनावायरस के आइसोलेशन वार्ड तैयार किए जा रहे हैं।

नेशनल सेंटर फॉर डिजीजिज कंट्रोल (एनसीडीसी) के निदेशक सुजीत कुमार सिंह ने आईएएनएस से कहा कि भारत सरकार कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों को कोरोना वायरस से पहले निपटने के लिए आइसोलेशन वार्डस बनाने को कहा है। नेपाल सीमा से सटे पांचों राज्यों- यूपी, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, और सिक्किम में भी कोरोनावायरस के लिए विशेष चिकित्सा कक्ष तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर कहा है कि सभी राज्य जल्द से जल्द अपने यहां कोरोनावायरस के लिए विशेष चिकित्सा कक्ष तैयार करें।

फिलहाल दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कोरोना वायरस के रोगियों को रखने के लिए विशेष वार्ड बनाए गए हैं। यह वार्ड इस तरह से बनाए गए हैं कि इनमें से किसी भी प्रकार का संक्रमण बाहर न जा सके। साथ ही रोगियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के निपटान के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है।

एनसीडीसी के निदेशक सुजीत सिंह ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल में नोवेल कोरोना वायरस के लिए बनाए गए एकांत वार्ड का निरीक्षण कर चुके हैं। नोवेल कोरोना वायरस के मुद्दे पर सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक अहम बैठक भी हुई थी, जिसमें नेपाल की सीमा से सटे पांचों राज्यों- पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और सिक्किम के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशकों के साथ केंद्र सरकार ने कोरोनावायरस से निपटने के उपायों पर चर्चा की।

इन पांचों राज्यों के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और इन राज्यों के मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस बैठक में शामिल हुए। मुख्य सचिवों से विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। राज्यों को कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों को रखने के लिए अस्पतालों में एकांत वार्ड बनाने को कहा गया है।

भारत-नेपाल सीमा के फिलहाल 10 अलग-अलग प्रवेशद्वारों पर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। थर्मल स्क्रीन के जरिए स्वास्थ्य विभाग की टीम कोरोनावायरस को देश में आने से रोकने का प्रयास कर रही है। संदिग्ध मरीजों की तुरंत पहचान कर उनके खून व अन्य नमूने लेकर राज्यों में मौजूद स्वास्थ्य मंत्रालय की टीमों को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। नमूनों की जांच पुणे स्थित स्वास्थ्य मंत्रालय की लैब को भेजे जाएंगे।

मंत्रालय की ओर से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और सिक्किम पुलिस महानिदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि नेपाल से आने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना स्क्रीनिंग के भारत में दाखिल न होने दिया जाए।



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बढ़ती उम्र में यूं रखें दिल को खुश

बुजुर्गों के एक समूह के लिए यह सिर्फ बीमारी से बचे रहना या सामालिक सक्रियता तक सीमित नहीं है। बल्कि उनके लिए जीवन का अर्थ और उससे जुड़ाव है। क्योंकि सामाजिक समावेश समुदाय में घुलने-मिलने की हमारी क्षमता में सुधार करता है, बुजुर्गों में परस्पर घनिष्ठता बनाने, स्वास्थ्य देखभाल की लागत को कम करने और अकेलेपन के शारीरिक और मानसिक टोल में कटौती करने में मदद करता है।

बढ़ती उम्र में यूं रखें दिल को खुश

अपनी किताब 'एजिंग वैल' में वैज्ञानिक जीन गैलिआना और विलियम हेजलटाइन ने इस पर रोशनी डालते हुए बताया है कि बुजुर्गों को अपने देखभाल संबंधी बीमा को अधिक सुलभ बनाना चाहिए जिसमें प्राथमिक देखभाल भी शामिल हो। वहीं बढ़ती उम्र में पति-पत्नी का अतरंग साथ भी स्वास्थ्य बेहतर बनाता है। वहीं स्कूल-कॉलेज में पढऩे वाले युवाओं के साथ बारतचीत करना, उनके साथ समय बिताना भी हमें ऊर्जावान रखता है। इससे पीढ़ीगत बातचीत को बढ़ावा मिलता है और बुजुर्गों को बढ़ती उम्र में एकाकीपन से एक सुरक्षित ढाल मिलती है। जीन और विलियम का कहना है कि सामाजिक समावेश अकेलेपन से निपटने में मदद करता है।

बढ़ती उम्र में यूं रखें दिल को खुश

अमरीकी सामाजिक संस्था आर्प के एक अध्ययन में सामने आया कि उन बुजुर्गों की मृत्यु दर दूसरों की तुलना में ज्यादा थी जिनमें सामाजिक संपर्क की कमी थी जबकि वे अपने समकक्षों की तुलना में स्वास्थ्य देखभाल पर ज्यादा खर्च कर रहे थे। सामाजिक अलगाव के कारण अकेले अमरीका में बुजुर्गों की देखभाल पर सालाना अतिरिक्त ६७० करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। लेखकों का कहना है कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित करना, सामाजिक रूप से जुड़ाव और युवाओं के साथ संवाद बुजुर्गों को खुश रहने में मदद करता है।

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novel coronavirus: चीन में कोरोनावायरस से अबतक 106 की मौत, 4515 संक्रमित मरीज सामने आए

बीजिंग। चीन में नोवेल कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 106 हो गई है, वहीं 30 प्रांतीय स्तर के क्षेत्रों में 4,515 मामलों की पुष्टि हुई है। चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने कहा कि 976 मरीजों की स्थिति गंभीर बनी हुई है और सोमवार तक कुल 6,973 लोगों के वायरस से संक्रमित होने का संदेह था। ठीक होने के बाद कुल 60 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।

सोमवार को 1,771 नए मामलों की पुष्टि हुई, 2,077 नए संदिग्ध मामले सामने आए और 26 मौतें हुईं, जिनमें से 24 हुबेई प्रांत में और एक-एक बीजिंग और हाइनान में हुई। कुल 47,833 करीबी संपर्कों का पता चला। आयोग ने कहा कि उनमें से 914 को सोमवार को मेडिकल ऑब्जर्वेशन से छुट्टी दे दी गई, 44,132 अन्य अभी भी निगरानी में थे।

फिलहाल, चीन में तिब्बत एकमात्र ऐसा प्रांत है, जहां कोरोनावायरस का एक भी मामला सामने नहीं आया है। समाचार एजेंसी एफे ने क्षेत्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस बीच, जर्मनी में, बवेरिया राज्य के स्टारनबर्ग के एक व्यक्ति को कोरोनोवायरस से संक्रमित होने की पुष्टि की गई। जो देश में पहला ममाला है। अधिकारियों ने सोमवार शाम यह जानकारी दी।

बवेरियन हेल्थ एंड फूड सेफ्टी अथॉरिटी के अनुसार, मरीज की स्थिति फिलहाल ठीक है और आइसोलेशन में उस पर निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा सोमवार की रात, कंबोडिया के स्वास्थ्य मंत्री मैम बन हेंग ने देश में पहले कोरोनावायरस के मामले की पुस्टि की । 60 वर्षीय चीनी व्यक्ति में जिसने परिवार के तीन सदस्यों के साथ वुहान से सिहानूकविल की यात्रा की थी, वह इस बीमारी से ग्रस्त पाया गया। रोगी की स्थिति सामान्य बताई जा रही है और डॉक्टर उसके परिवार के सदस्यों की निगरानी कर रहे हैं, जिनमें जिन्होंने के कोई संकेत नहीं दिखाए दिए हैं।

श्रीलंका ने भी सोमवार रात को हुबेई की एक 43 वर्षीय चीनी महिला पर्यटक के इस रोग की चपेट में आने की पुष्टि की। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी। चीन, हांगकांग, ताइवान और मकाऊ के बाहर थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, अमेरिका, जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, फ्रांस, वियतनाम, कनाडा, आइवरी कोस्ट और नेपाल में कोरोनावायरस के मामलों की पुष्टि हुई है। चीन के बाहर इस बीमारी से किसी की मौत नहीं हुई है।



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भारत के 9 राज्यों में फैला कोरोना वायरस का खतरा, 100 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में भर्ती

चीनी में फैलने वाले कोरोना वायरस (Corona Virus) का खतरा अब भारत में भी मंडराने लगा है। भारत के कई राज्यों में कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीज सामने आए हैं। मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, इनकी विशेष देखभाल की जा रही है। संदिग्ध मरीजों के खून के नमूने पुणे की वायरोलॉजी लैब में टेस्ट के लिए भेजे गए हैं। कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों में से ज्यादातर चीन से लौटकर भारत आए हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में सौ से ज्यादा कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों को अस्पतालों भर्ती किया गया है।

चंडीगढ़ -

चंडीगढ़ में चीन से लौटे एक 28 वर्षीय व्यक्ति को कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीज के रूप में पीजीआई में आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। पीजीआई के निदेशक जगत राम ने मीडिया से कहा कि मरीज को आइसोलेशन वार्ड में निगरानी में रखा गया है। उसके नमूने को पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को भेजा गया है। जगत राम ने कहा कि वह एक मात्र संदिग्ध मामला है और दो-तीन दिनों में रिपोर्ट आने के बाद ही उसकी पुष्टि हो सकेगी। मरीज को पीजीआई में तेज बुखार और सिर दर्द के साथ भर्ती कराया गया था।

मध्य प्रदेश -

कोरोना वायरस ने मध्यप्रदेश में भी दस्तक दे दी है। कोरोना वायरस (Corona Virus) के दो संदिग्ध मरीज मध्य प्रदेश के उज्जैन में सामने आए हैं। दोनों मरीज दो हफ्ते पहले चीन (China) के वुहान (Vuhan) शहर से लौटे हैं। दोनों मरीज को उज्जैन के अस्पातल में भर्ती करवाया गया है। जानकारी के अनुसार भर्ती कराए गए दोनों मरीज अभी कुछ दिनों पहले ही चीन से लौटे हैं। पीड़ित माँ बेटे को सर्दी-ज़ुकाम था। जिसका इलाज करवाने वे डॉक्टर के पास गए। इलाज कर रहे डॉक्टर को जब युवक के चीन से लौटने की जानकारी लगी तो उन्होंने वायरस की चपेट में होने की आशंका में उसे विशेष स्वाइन फ्लू (Swine Flu) वार्ड में भर्ती करवाया। संदिग्ध युवक चीन के वुहान शहर में पढ़ाई कर रहा है। 13 जनवरी को वह उज्जैन लौटा तभी से उसको सर्दी-ज़ुकाम है। डॉक्टरों को संदेह है कि कहीं बेटे के संक्रमण के चलते माँ भी तो कहीं इसके चपेट में नहीं आ गई।

बिहार -

चीन से वापस बिहार के छपरा अपने घर लौटी एक छात्रा में कोरोना वायरस की आशंका के बाद पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में भर्ती कराया गया है, उसके रक्त के नमूने जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। सारण के सिविल सर्जन माधवेश्वर झा ने सोमवार को आईएएनएस को बताया कि नगर थाना क्षेत्र के शांतिनगर की रहने वाली 22 वर्षीय युवती चीन में पढ़ाई करती है। वह 23 जनवरी को यहां आई थी। युवती की तबियत खराब होने के बाद उसे छपरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने बताया कि आशंका है कि छात्रा चीन में कोरोना वायरस की चपेट में आई है। झा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद पीड़ित युवती को पीएमसीएच भेज दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि छपरा से आई बीमार छात्रा को एहतियातन निगरानी में रखा गया है और उसमें किसी तरह की किसी दिक्कत वाली बात नहीं दिखाई दे रही है। इस बीच पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. विनय कारक ने बताया कि ''बीमार छात्रा को पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है। उसकी बीमारी के लक्षण को देखते हुए उसके लिए विशेष कक्ष का इंतजाम किया गया है। उसके अस्पताल में आने के बाद उसके रक्त के नमूने लेकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलजी, पुणे भेजा गया है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद उसका इलाज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ''पीएमसीएच के चिकित्सकों की एक टीम बनाई गई है और इस तरह से किसी भी बीमारी की आंशका को देखते हुए हम पूरी तरह तैयार हैं,

राजस्थान -

जयपुर में भी सामने आया मरीज - चीन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर लौटे एक डॉक्टर को करोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में भर्ती कराए गए इस डॉक्टर को एक अलग वॉर्ड में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन को डॉक्टर के परिवार के पूरे सदस्यों की जांच करने का आदेश दिए गए हैं। डॉक्टर का ब्लड सैंपल पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलजी की लैब में जांच के लिए भेजा गया है। जानकारी के मुताबिक, राजस्थान राज्य के 4 जिलों में 18 व्यक्ति चीन की यात्रा से लौटे हैं। संबंधित चारों जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारियों को इन सभी को 28 दिनों तक लगातार निगरानी में रखने के निर्देश दिए गए हैं।

पश्चिम बंगाल (कोलकाता)

कोरोना वायरस का एक मामला कोलकाता में भी सामने आया है। महानगर के बेलियाघाटा आइडी अस्पताल में चीनी युवती को कोरोना वायरस से संक्रमित होने के संदेह में भर्ती कराया गया है। पीड़ित युवती का नाम ह्यूया मिन (28) है। राज्य स्वास्थ विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचा हालात का जायजा लिया। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, तेज बुखार और कोरोना वायरस जैसे लक्षण दिखने की स्थिति में चीनी युवती को भर्ती कराया गया। उसे आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।फिलहाल प्रारंभिक जांच में अभी तक युवती के शरीर में कोरोना वायरस नहीं मिला है। पीड़िता कोरोना वायरस की चपेट में है या नहीं सुनिश्चित करने के लिए और कुछ जांच करनी बाकी है। युवती कुछ महीने पूर्व चीन से अन्य देशों के भ्रमण पर निकली ह्यूया मॉरीशस होते हुए भारत पहुंची थी। इस दौरान वह गत 24 जनवरी से कोलकाता में थी।

महाराष्ट्र (मुंबई) -

महाराष्ट्र के पुणे में भी कोराना वायरस से पीड़ित संदिग्ध मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ये युवक हाल ही में चीन से लौटकर भारत आया है। महाराष्ट्र में अलग-अलग स्थानों पर अबतक कुल छह मरीजों को कोरोना वायरस जैसे लक्षण दिखने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चार लोगों को मुंबई और दो लोगों को पुणे के अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। इन की जांच चल रही है।

दिल्ली -

दिल्ली में भी कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीज सामने आए हैं। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के आइसोलेशन वॉर्ड में तीन मरीजों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। ये सभी मरीज पुरुष हैं और इन खून के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने बताया है कि अभी तक भारत में किसी भी मरीज को कोरोना वायरस से पॉजिटिव नहीं पाया गया है।

छतीसगढ़ -

छतीसगढ़ में भी कोरोना वायरस का एक संदिग्ध मरीज मिला है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इससे चिंता करने की कोई आवश्यकता नही है सिर्फ मरीज को निगरानी में रखा गया है। पीड़ित महिला को अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। स्वास्थ्य अमले को देकर सावधानी रखने को कहा गया है। भारत में केंद्र सरकार की ओर से इस जानलेवा बीमारी को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। छतीसगढ़ जैसे प्रदेश में इस वायरस को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नही है। स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के सभी जिलों में चिकित्सकों को बीमारी के प्रति अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। किसी भी प्रकार से संदिग्ध मरीज की पहचान होने पर उसे तत्काल निगरानी में लेकर समूचित इलाज किए जाने के निर्देश दिए हैं।

केरला -

केरल में लगभग 430 से अधिक लोगों को उनके घरों पर ही निगरानी में रखा जा रहा है। माना जा रहा है ये कोरोना वायरस से ग्रसित हो सकते हैं। यूनियन हेल्थ मिनिस्टर के सलाहकार डॉ. शौकत अली ने बताया कि विभिन्न शहरों में सात लोगों को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। इनमें से छह की रिपोर्ट नेगेटिव आई है जबकि एक की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।



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Monday, 27 January 2020

अगर बच्चे को है फूड एलर्जी तो जरूर जान लें ये खास बातें

बच्चों को सुबह स्कूल के लिए तैयार करने से लेकर उनके नाश्ते और टिफिन पैक करने की जिम्मेदारी बहुत बड़ी होती हैं। खासकर तक जब बच्चों को किसी भी तरह की फूड एलर्जी हो। बच्चे अपना खाना बांटकर खाना पसंद करते हैं। ऐसे में अपने बच्चों के साथ उन बच्चों का भी खयाल रखना पड़ता है जो हमारे बच्चों के साथ रोज खाने-पीने की चीजें शेयर करते हैं। इसलिए लंच बॉक्स में क्या रखा जाए यह एक मां के नजरिए से बहुत अहम है। इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है कि बच्चों को जंक फूड या पैक्ड फूड न दिया जाए।

खाद्य पदार्थों से संबंधित 90 फीसदी एलर्जी आठ खाद्य पदार्थों से होती है। ये हैं- दूध, अंडे, मछली, क्रेस्टिशियन शैलफिश, ट्री नट्स, मूंगफली, गेहूं और सोयाबीन। इसी तरह भारत में भी बच्चों में खाद्य संबंधी एलर्जी में इजाफा हो रहा है। इसके सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे ही हैं। देश की कुल आबादी का 1 से 2 फीसदी हिस्सा खाद्य संबंधी एलर्जी से प्रभावित है।

कक्षाओं में सबसे ज्यादा होती एलर्जी -
बच्चों को अक्सर स्नैक्स संबंधी उत्पादों से एलर्जी का जोखिम ज्यादा होता है। बच्चों को फूड एलर्जी संबंधी प्रतिक्रिया या अटैक आने की सबसे ज्यादा आशंका कक्षा में होती है न कि कैंटीन में। इसका अभी कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है लेकिन संभवत: ऐसा घर से लाया गया खाना न खाकर साथियों का दिया खाद्य उत्पाद खाने के कारण है। एक अन्य कारण अध्यापकों को फूड एलर्जी के समय क्या किया जाना चाहिए इस बारे में जानकारी न होना भी है। तीसरा कारण बच्चों में एक-दूसरे से फैलने वाले संक्रमण और ठीक से हाथ न धोना भी हो सकता है। स्कूल और घर पर बच्चों को फूड एलर्जी से बचाते हुए स्मार्ट और सुरक्षित खाने के बारे में कुछ सुझाव इस प्रकार हैं -

बच्चों को उनकी एलर्जी के बारे में समझाएं -
सबसे पहले तो अपने बच्चे को उसकी एलर्जी के बारे में समझाएं। बच्चे को क्या परेशानी है और किन बातों का ध्यान रखना है इन बातों को भी समझने में मदद करें। इतना ही नहीं अगर बच्चों को कोई खाद्य संबंधी एलर्जी नहीं भी है तो उन्हें उन्हें इसके बारे में बताएं क्योंकि कक्षा में उनके दोस्तों को इस तरह की समस्या हो सकती है। यह भी बताएं कि फूड एलर्जी हो तो उन्हें अपने साथियों के साथ भोजन करने से बचना चाहिए।

एलर्जी जनक खाना खाने से बचें -
बच्चों को बताएं कि उन्हें किस तरह के खाने से एलर्जी है। ऊपर दी गई सूची में शामिल खाद्य पदार्थों के बारे में उन्हें जानकारी दें। हालांकि तिल इसमें शामिल नहीं है लेकिन यह भी एलर्जी के जैसी प्रतिक्रियाएं कर सकता है। यह भी सुनिश्चित करें कि इनमें से किसी भी उत्पाद को पैक न करें यह भी प्रतिक्रिया का कारण बन सकता है। अपने बच्चों को खाद्य पदार्थों पर पड़ी सामग्री की जानकारी पढ़ना सिखाएं। कानूनी रूप से दूध, अंडे, मछली, क्रेस्टिशियन शैलफिश, ट्री नट्स, मूंगफली, गेहूं और सोयाबीन वाली खाद्य वस्तुओं की पैकिंग पर इनकी जानकारी देना भी अनिवार्य है।

बच्चों के लंच बॉक्स पर जानकारी दें -
इस बात की भी पूरी कोशिश करें कि आपके बच्चों के साथ लंच करने वाले बच्चों को पता रहे कि वे क्या खाने जा रहे हैं या उन्हें क्या नहीं खाना चाहिए। इसके लिए बच्चों के टिफिन बॉक्स पर लेबलिंग करें या जानकारी चस्पा करें।

बच्चों को स्थिति संभालना सिखाएं -
जरूरी नहीं कि हर कोई आपके बच्चोंं की परेशानी को सहानुभूति के तौर पर देखे। एलर्जी की बाद सुनकर या कक्षा में कभी एलर्जी अटैक होने पर बच्चे आपके बच्चों से किनारा कर लें। ऐसे में उन्हें इन परिस्थितियों के लिए भी मानसिक रूप् से तैयार करें। उन्हें समझाएं कि असहज महसूस करने या अकेलेपन की बजाय स्थिति को स्वीकार कर अपना प्राकृतिक व्यवहार बनाए रखें। वहीं बच्चों को टिफिन में ऐसी चीजें दें जो स्वादिष्ट, दिखने मेंआकर्षक और रंगीन हों इससे बच्चे का भी खाने का मन करेगा। साथ ही विभिन्न एलर्जी के अनुसार नए-नए खाद्य पदार्थों का पता लगाने के के बारे में भी सोचें।

पौष्टिक और सेहत भरा हो निवाला -

विभिन्न प्रकार के खाद्य समूहों को परखें। कोशिश करें कि बच्चों को खाद्य एलर्जी के बावजूद पोषण और भरपेट खाने की कमी न रहे। इसके लिए संयोजन पर भी ध्यान देना होगा। अच्छी क्वालिटी के स्नैक्स पोषण की कमी को दूर करेंगे। इसी प्रकार ताजा फल, सूखे या डीप फ्रीज किए गए मेवे और सब्जियां आम तौर पर सुरक्षित उपाय हो सकते हैं। नूडल मिल्क एक विकल्प है वहीं सागों के जरिए भी बच्चों में पोषण की कमी को पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा, जैतून, कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज और एवोकाडो पर भी विचार किया जा सकता है। यदि अंडे एलर्जी की वजह हैं तो मछली, सीपियां, सोया, चिकन और दूध से विटामिन बी 12 प्राप्त कर सकते हैं। अगर ग्लूटेन मुक्त है तो ओट्स भी लिए जा सकते हैं। वहीं जापानी क्विनोआ भी खाने में लिया जा सकता है।



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इन योगासनों से करें दिन की शुरुआत, मिलेंगे ये लाभ

बालासन: घुटने के बल बैठ जाएं। अपने हाथ के पंजों को जमीन से सटाकर हाथों को तब तक आगे बढ़ाएं जब तक कि आपका माथा धीरे से जमीन पर न आ जाए। लगभग 3 से 5 बार गहरी और लंबी सांस लीजिए। हथेली आकाश की ओर रखें। धीरे से छाती से जांघो पर दबाव दें। इस स्थिति को सुविधा रहने तक बनाये रखें। फिर धीरे से उठकर एड़ी पर बैठ जाएं और रीढ़ की हड्डी को धीरे धीरे सीधा करें। विश्राम करें।

फायदा - यह पीठ को विश्राम, कब्ज से राहत और तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।

अर्ध पूर्वोत्तनासन: बालासन की मुद्रा में एक मेज की तरह घुटने के बल बैठ जाएं। आपके कंधे कलाई के ऊपर हों और आपके कूल्हे घुटनों पर टिके हुए हों। अपने हाथों और घुटनों के माध्यम से बराबर वजन बनाए रखें और अपने पैरों को आराम दें। अपने पेट की मांसपेशियों को एकत्र करें और अपनी रीढ़ को लंबा करें। अपना ध्यान दोनों हाथों के बीच में रखें।

इस आसन के कई लाभ हैं -

इससे कलाइयां भुजाएं कंधे पीठ और रीढ़ को मजबूती मिलती है। पैरों व कूल्हों का व्यायाम भी हो जाता है, श्वसन प्रक्रिया प्रक्रिया में सुधार करता है। हृदय के लिए भी यह आसन लाभदायक है। यह आंतों और उदर के अंगों में खिंचाव पैदा करता है इससे वे मजबूत बनती हैं।



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coronavirus in india: भारत में कोरोना वायरस के लिए बनाए गए विशेष वार्ड, राज्यों को सतर्क किया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नोवेल कोरोना वायरस के उपचार व संक्रमण रोकने के लिए दिल्ली में विशेष वार्ड बनाए हैं। केंद्र सरकार के अस्पतालों में स्थापित किए गए वार्ड इस तरह से बनाए गए हैं कि इनमें से किसी भी प्रकार का संक्रमण बाहर न जा सके। साथ ही रोगियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के निपटान के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है।

राम मनोहर लोहिया अस्पताल में नोवेल कोरोना वायरस के लिए ऐसा ही एक एकांत वार्ड तैयार किया गया है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के निदेशक सुजीत सिंह ने सोमवार को राम मनोहर लोहिया अस्पताल जाकर वायरस के उपचार एवं रोकथाम के लिए बनाए गए एकांत वार्ड का निरीक्षण किया।

कोरोना वायरस के मुद्दे पर सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में नेपाल की सीमा से सटे पांचों राज्यों पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और सिक्किम के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशकों के साथ केंद्र सरकार ने नोवेल कोरोना वायरस से निपटने के उपायों पर चर्चा की।

इन पांचो राज्यों के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस बैठक में शामिल हुए। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पांचों राज्यों के मुख्य सचिवों से विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। राज्यों को कोरोना वायरस के संदिग्धों को रखने के लिए अस्पतालों में एकांत वार्ड बनाने को भी कहा गया है।

अधिकारी ने बताया कि कोरोना वायरस से ग्रसित संदिग्धों की तुरंत पहचान कर उनके खून व अन्य नमूने लेकर राज्यों में मौजूद स्वास्थ्य मंत्रालय की टीमों को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्धों के नमूनों की जांच पुणे स्थित स्वास्थ्य मंत्रालय की लैब में भेजे जाएंगे।

इसके साथ ही उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और सिक्किम के पुलिस महानिदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि नेपाल से आने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना स्क्रीनिंग के भारत में दाखिल न होने दिया जाए। सोमवार को हुई स्वास्थ्य मंत्रालय की इस उच्चस्तरीय बैठक में मंत्रालय की सचिव प्रीती सुदन, केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव अजय भल्ला व अन्य अधिकारी शामिल हुए। केंद्रीय गृह सचिव ने इस बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शिरकत की।



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Coronavirus In India: भारत में भी कोरोनावायरस, जयपुर और बिहार में सामने आए मरीज

पटनाः चीन से वापस बिहार के छपरा अपने घर लौटी एक छात्रा में कोरोना वायरस की आशंका के बाद यहां स्वास्थ्य विभाग में हडकंप मच गया है। आनन-फानन में उसे पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में भर्ती कराया गया है तथा उसके रक्त के नमूने जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।

सारण के सिविल सर्जन माधवेश्वर झा ने सोमवार को आईएएनएस को बताया कि नगर थाना क्षेत्र के शांतिनगर की रहने वाली 22 वर्षीय युवती चीन में पढ़ाई करती है। वह 23 जनवरी को यहां आई थी। युवती की तबियत खराब होने के बाद उसे छपरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने बताया कि आशंका है कि छात्रा चीन में कोरोना वायरस की चपेट में आई है। झा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद पीड़ित युवती को पीएमसीएच भेज दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि छपरा से आई बीमार छात्रा को एहतियातन निगरानी में रखा गया है और उसमें किसी तरह की किसी दिक्कत वाली बात नहीं दिखाई दे रही है।

इस बीच पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. विनय कारक ने बताया कि ''बीमार छात्रा को पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है। उसकी बीमारी के लक्षण को देखते हुए उसके लिए विशेष कक्ष का इंतजाम किया गया है। उसके अस्पताल में आने के बाद उसके रक्त के नमूने लेकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलजी, पुणे भेजा गया है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद उसका इलाज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ''पीएमसीएच के चिकित्सकों की एक टीम बनाई गई है और इस तरह से किसी भी बीमारी की आंशका को देखते हुए हम पूरी तरह तैयार हैं

जयपुर में भी सामने आया मरीज -

चीन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर लौटे एक डॉक्टर को करोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में भर्ती कराए गए इस डॉक्टर को एक अलग वॉर्ड में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन को डॉक्टर के परिवार के पूरे सदस्यों की जांच करने का आदेश दिए गए हैं।

डॉक्टर का ब्लड सैंपल पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलजी की लैब में जांच के लिए भेजा गया है। जानकारी के मुताबिक, राजस्थान राज्य के 4 जिलों में 18 व्यक्ति चीन की यात्रा से लौटे हैं। संबंधित चारों जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारियों को इन सभी को 28 दिनों तक लगातार निगरानी में रखने के निर्देश दिए गए हैं।



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Coronavirus: चीन में हुई 80 की मौत, 2,744 में संक्रमण की पुष्टि

coronavirus चीन के स्वास्थ्य प्रशासन ने सोमवार को घोषणा करते हुए कहा कि रविवार रात तक देश में नोवल कोरोनावायरस (2019-एनसीओवी) जनित निमोनिया के 2,744 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 461 लोगों की हालत गंभीर है। इससे मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो चुकी है।

Coronavirus: राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 769 नए मामलों की पुष्टि हुई है, 3,806 संदिग्ध मामले आए हैं और 24 लोगों (सभी हुबेई में) की मौत हुई है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, रविवार तक इससे मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो चुकी है, वहीं 51 लोग ठीक हो गए हैं और 5,794 लोग अभी भी संदिग्ध मरीज बने हुए हैं।

आयोग ने कहा कि वायरस के शिकार लोगों के संपर्क में आने वाले 32,799 लोगों पर नजर रखी गई है। उसके अनुसार, इनमें से 30,453 मेडिकल निरीक्षण से गुजर रहे हैं और 583 लोगों को रविवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके अलावा विशेष प्राशासनिक क्षेत्रों- हांगकांग में आठ, मकाऊ में पांच और ताईवान में चार मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

चीन के बाहर थाईलैंड में सात मामले, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में चार-चार, जापान, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, अमेरिका, मलेशिया और फ्रांस में तीन-तीन, वियतनाम में दो तथा नेपाल में कोरोनावायरस के एक मामले की पुष्टि हुई है।



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Sunday, 26 January 2020

युवाओं में कम नींद भी बन रही बड़ी परेशानी

आज के युवाओं की आंखों से नींद गायब है। उनकी आंखें बोझिल हैं। इसे काम का प्रेशर माने या फिर आधुनिक जीवनशैली की वजह, पर सच्चाई यही है कि नींद उनकी आंखों से दूर होती जा रही है। ऐसे में उनींदा सा युवा न अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर पा रहा है और न ही खुद को फिट रख पा रहा है।

एक अनुमान के मुताबिक भारत में करीब छह करोड़ युवा कम नींद के शिकार हैं। इनमें से ज्यादातर इसके लिए किसी तरह की डॉक्टरी सलाह नहीं लेते। ये शुरुआती लापरवाही गंभीर दिक्कत बन जाती है। अगर ध्यान न दिया जाता तो शरीर कई घातक बीमारियों की चपेट में आ सकता है और यहां तक ये जानलेवा भी हो सकता है।

डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादा वक्त तक कम नींद से इंसान डायबिटीज, ब्लडप्रेशर, दिल की बीमारियों या फिर ब्रेन स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ सकता है। कम नींद लेने वाली महिलाओं में तो पुरुषों की अपेक्षा इन बीमारियों की चपेट में आने का खतरा दोगुना होता है। खतरा यहां तक बढ़ चुका है कि दुनिया भर में कम नींद की वजह से होने वाली बीमारियों से होने वाली मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। हालांकि इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं उपलब्ध है।



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Lack of Water Side Effects: कम पानी पीने से सेहत काे हाेते हैं ये गंभीर नुकसान

Lack of Water Side Effects In Hindi: पर्याप्त पानी पीना हमारी सेहत बनाए रखने के लिए जरूरी है। लेकिन अक्सर देखने में आता है कि दिनभर की भागदौड़ के कारण लोग कम पानी पीते हैं। जो सेहत को काफी नुकसान पहुंचाता है। हमारे शरीर में 70 फीसदी पानी होता है। इसलिए भरपूर पानी पीना चाहिए। जब शरीर को पर्याप्त पानी मिलता है तो कई रोगों से बचाव होता है। पानी की कमी होने पर कई स्वास्थ्य समस्याएं हो जाती हैं। शायद आपको मालूम न हो, लेकिन पानी न पीने के काफी नुकसान होते हैं। आइए जानते हैं कि शरीर में पानी कमी किन-किन बीमारियों ( Side Effect of not drinking enough water ) काे जन्म दे सकती है :-

थकान:
पानी की कमी से शरीर में थकान महसूस होती है। जिसके कारण आप एनर्जी की कमी महसूस कर सकते हैं। पानी की कमी से सिरदर्द, उलझन, तनाव वगैरह समस्याएं हो सकती हैं। कम पानी पीने से सिरदर्द की समस्या बढ़ सकती हैं।

पेट की समस्या:
शरीर में पानी की मात्रा कम होने से डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है। जिससे पेट खराब, अपच और दर्द की समस्या हो सकती है। पानी की कमी के कारण शरीर से विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते हैं। जिससे अंदर कई बीमारियां लगती हैं।

दिल की समस्या:
पानी की कमी से शरीर डिहाइड्रेड हो जाता है। पानी का सही मात्रा में सेवन करने से शरीर के खराब पदार्थ पसीने और यूरीन के द्वारा बाहर निकल जाते हैं। जो कई बीमारियों से बचाने का काम करता है। शरीर में पानी की कमी से खून जमने लगता है रक्त संचार सही से नहीं हो पाता जिस कारण दिल के रोगों जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

चेहरे चमक गायब:
सही मात्रा में पानी पीने से चेहरे में चमक आती है। लेकिन कम मात्रा में पानी पीने से चेहरे में झुर्रियां, दाग, मुंहासे, बेचान और रूखी त्वचा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कम पानी पीने की समस्या चेहरे की चमक भी खत्म कर सकती है।

मोटापा:
कम पानी पीने से आपका वजन बढ़ सकता है। क्योंकि इससे कब्ज की शिकायत हो जाती है। और आहार चर्बी के तौर पर आपके शरीर पर बढ़ता रहता है। इसके साथ ही शरीर में विषैले पदार्थ जमा हो जाते हैं। जो कई बीमारियों का जन्म दे सकते हैं।

मुंह की दुर्गधं:
पानी की कमी मुंह में बदबू पैदा कर सकती है। कम पानी पीने से मुंह सूखने लगता है, जिसके कारण मुंह में बैक्टीरिया उत्पन्न होने लगते हैं और सांसों से बदबू शुरू हो जाती है। मुंह की बदबू से बचने के लिए आपको पर्याप्त मात्रा में यानी ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए।

जोड़ों में दर्द:
पानी का अधिक सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। लेकिन कम पानी का सेवन करने से जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है। क्योंकि पानी की कमी से जोड़ों की चिकनाहट खत्म हो जाती है जिसके कारण दर्द बढ़ सकता है।



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Thyroid Imbalances: इन याेगासनाें से दूर करें थायरॉयड की समस्या

Yoga For Thyroid-Imbalances In Hindi: एक शोध के अनुसार लगभग हर तीसरा भारतीय किसी न किसी तरह के थायरॉयड विकार से पीड़ित है। थायरॉइड की समस्या वजन बढ़ने और हार्मोनल असंतुलन के मुख्य कारकों में से एक हैं। आमतौर पर, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह समस्या ज्यादा होती है। थायरॉइड विकार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं - हाइपोथायरायडिज्म (पर्याप्त थायराइड हार्मोन नहीं होने के कारण) और हाइपरथायरायडिज्म (अत्यधिक थायराइड हार्मोन होने के कारण)। थायरॉइड की समस्या आपके दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए इसे नियंत्रित करना आवश्यक है। इसके उपचार में दवा, भोजन परिवर्तन और अच्छी लाइफस्टाइल का अनुसरण शामिल है। योग भी थायरॉइड की समस्या दूर करने में काफी मददगार है। नियमित 30-40 मिनट योग करने से आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आइए जानते हैं थायराइड की स्थिति में मदद करने वाले कुछ योगासनों के बारे में :-

शीर्षासन ( Sirshasana )
शीर्षासन करने के लिए के सबसे पहले समतल स्थान पर कंबल आदि बिछाकर वज्रासन की अवस्था में बैठ जाएं। अब आगे की ओर झुककर दोनों हाथों की कोहनियों को जमीन पर टिका दें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़ लें। अब सिर को दोनों हथेलियों के मध्य धीरे-धीरे रखें। सांस सामान्य रखें। सिर को जमीन पर टिकाने के बाद धीरे-धीरे शरीर का पूरा वजन सिर छोड़ते हुए शरीर को ऊपर की उठाना शुरू करें। शरीर का भार सिर पर लें। शरीर को सीधा कर लें। बस यही अवस्था को शीर्षासन कहा जाता है। यह आसन सिर के बल किया जाता है इसलिए इसे शीर्षासन कहते हैं।

लाभ
- यह मानसिक कार्यों के दौरान याददाश्त को बेहतर बनाने और थकान को दूर करने में मदद कर सकता है।
- कोर मांसपेशियों की ताकत बनाता है।
- असमय बालों का झडऩा एवं सफेद होना दूर करता है।

हलासन ( Halasana )
अपनी भुजाओं को अपने बगल में रखकर पीठ के बल लेट जाएँ। श्वास लेते हुए अपनी पेट के मांसपेशियों के बल पर अपने पैर को फर्श से 90 डिग्री तक ऊपर उठाएं। सांस लेते छोड़ते हुए अपने कुलहो और पीठ को अपने हाथों की सहायता फर्श से ऊपर उठाएं। अपने पैरों को अपने सिर के ऊपर से होते हुए 180 डिग्री के कोण तक ले जाकर पीछे फर्श पर लगाएं। आपकी पीठ फर्श पर लम्बवत रहे। ऐसा करना आरंभ में कठिन होगा लेकिन कुछ सेकंड्स तक करें। इसी मुद्रा में कुछ क्षण तक विश्राम करें और स्थिर श्वास लेते छोड़ते रहें। लगभग एक मिनट (आरम्भ में कुछ सेकंड्स ही) इस मुद्रा में विश्राम करें, फिर धीरे धीरे अपने पैर वापस लाकर श्वास छोड़ दें।

लाभ
- इससे कब्ज और पेट के रोग ठीक होते हैं
- हलासन शरीर की चर्बी को कम करने में मदद करता है
- थायरॉयड, गुर्दे, प्लीहा और अग्न्याशय जैसे अंगों को उत्तेजित किया जाता है
- यह उच्च रक्तचाप को सामान्य करता है
- उलटा रक्त प्रवाह त्वचा को पोषण और युवा बनाए रखने में मदद करता है।

सर्वांगासन ( Sarvangasana )
अपनी पीठ के बल लेट जाएँ। एक साथ, अपने पैरों, कूल्हे और फिर कमर को उठाएँ। सारा भार आपके कन्धों पर आ जाये । अपनी पीठ को अपने हाथों से सहारा दे। अपनी कोहनियों को पास में लें आयें। हाथों को पीठ के साथ रखें, कन्धों को सहारा देते रहें। कोहनियों को जमीन पर दबाते हुए और हाथों को कमर पर रखते हुए, अपनी कमर और पैरों को सीधा रखें। शरीर का पूरा भार आपके कन्धों व हाथों के ऊपरी हिस्से पर होना चाहिए, न कि आपके सर और गर्दन पर।

अपने पैरों को सीधा व मज़बूत रखें। अपने पैर कि एड़ी को इस भांति ऊँचा रखें जैसे आप छत को छूना चाहते हो। लंबी गहरी साँसे लेते रहें और 30-60 सेकण्ड्स तक आसन में ही रहें। आसन से बहार आने के लिए, घुटनो को धीरे से माथे के पास लें कर आयें। हाथों को ज़मीन पर रखें। बिना सर को उठाये धीरे-धीरे कमर को नीचे लें कर आयें। पैरों को ज़मीन पर लें आयें। कम से कम 60 सेकण्ड्स के लिए विश्राम करें।

लाभ
-सर्वांगासन से सिरसाना के कई लाभ मिलते हैं और प्रदर्शन करना आसान होता है। यह आसन स्टेज 1 और स्टेज 2 - थायराइड के मुद्दों से पीड़ित लोगों के लिए उचित है।
- यह कोर ताकत बनाने में मदद करता है।
- यह संतुलन की भावना को बेहतर बनाने में मदद करता है।
- यह रिवर्स ब्लड फ्लो में मदद करता है जिससे चेहरे पर बेहतर रक्त की आपूर्ति होती है और बदले में त्वचा को पोषण मिलता है और शरीर को डिटॉक्स करता है।
- यह गर्दन, कंधे और पीठ को ताकत और लचीलापन देता है।



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आपकी रसोई में रखी ये चीजें घटाएंगी आपका वजन, जानें इनके बारे में

क्या आप अपना वजन कुछ किलोग्राम घटाना चाहते हैं? तो आपको यहां-वहां देखने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आपकी रसोईघर में ही कुछ ऐसे तत्व आपको मिल जाएंगे जो वजन कम करने में आपकी मदद करेंगे।

आहार और व्यायाम वजन कम करने का स्वास्थ्यवर्धक जरिया है, लेकिन किसी को यह नहीं पता है कि उनकी रसोईघर में ही कुछ ऐसी चीजें हैं जो उनका वजन कुछ किलोग्राम तक कम करने में मदद कर सकता है। प्रतिदिन के आहार में रसोईघर के उन कुछ तत्वों को शामिल करना आपके वजन कम करने में काफी प्रभावी हो सकता है। रसोईघर में आसानी से मिलने वाले पांच तत्वों हैं जो आपके मेटाबॉलिज्म और पाचन को दुरुस्त करता है।

दालचीनी - आयुर्वेद में दालचीनी का प्रयोग इसके कीटाणुनाशक, जलन कम करने, एंटी-बैक्टिरियल गुणों के कारण किया जाता है। जब बात वजन कम करने की आती है, तो मीठी सुगंध वाला यह तत्व मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। सुबह उठने के बाद सबसे पहले दालचीनी मिला पानी का सेवन करने से यह भूख कम करने में मदद करने के साथ बुरे कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है।

काली मिर्च - आयुर्वेद के अनुसार, काली मिर्च वजन कम करने में काफी प्रभावी है। यह शरीर के ब्लॉकेज को घटाता है, सर्कुलेशन को सुचारु करता है और मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है। यह शरीर को डिटॉक्स करने के साथ चर्बी को भी कम करता है।

अदरक - आयुर्वेद का यह जादुई तत्व मेटाबॉलिज्म को 20 प्रतिशत तक बढ़ा देता है, यह पेट को स्वस्थ रखता है, चर्बी को घटाता है और शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालता है। इसमें ज्वलन कम करने वाले और एंटी-बैक्टीरियल तत्व हैं। इसके निरंतर सेवन से न सिर्फ आपका वजन कम होता है, बल्कि यह आपके पूरे स्वास्थ्य को दुरुस्त रखता है।

नींबू - खाने में इस्तेमाल से या सलाद पर डालकर नींबू के सेवन से वजन काफी जल्द कम होता है। नींबू में विटामिन सी और घुलने वाली फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है, जिससे कई स्वास्थयवर्धक फायदे होते हैं। नींबू से हृदय संबंधी बीमारी, एनीमिया, किडनी में पथरी, सुचारु पाचन और कैंसर में फायदा मिलता है।

शहद - बिस्तर पर जाने के ठीक पहले शहद के सेवन से नींद के शुरुआती घंटों में कैलोरी कम होती है। शहद में शामिल फायदेमंद हार्मोन से भूख कम लगती है और तेजी से वजन कम होता है। इसके इस्तेमाल से पेट की चर्बी आसानी से कम होती है।



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Saturday, 25 January 2020

Coronavirus: कोरोनवायरस से निपटने के लिए भारत ने कसी कमर, उठाए ये कदम

Coronavirus In India in Hindi: केरल में कम से कम सात लोगों के नोवल कोरोनवायरस से संक्रमित होने की आशंका के चलते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शनिवार को कोरोनवायरस की रोकथाम के लिए तैयारियों की समीक्षा की। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सात केंद्रीय दल वायरस नियंत्रण तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्यों और नामित हवाई अड्डों का दौरा करेंगे। वर्धन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से भी बात की और उन्हें नेपाल सीमा पर नोवल कोरोनोवायरस की स्क्रीनिंग के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

केरल के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि चीन से लौटे सात लोगों को बुखार, खांसी और गले में खराश के हल्के लक्षण दिखाई दिए। इन सात लोगों में से दो कोच्चि में हैं और चार क्रमश: तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, कोझीकोड और पठानमथिट्टा में हैं।

इसके अलावा, केरल में कम से कम 73 लोगों को कथित तौर पर उनके घरों में चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

इस बीच, चीन के हुबेई प्रांत के एक डॉक्टर की शनिवार को नोवल कोरोनावायरस के कारण पर मृत्यु हो गई। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने शनिवार को घोषणा की कि वायरस के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है, और 1,287 लोग संक्रमित हैं। इनमें से 237 की हालत गंभीर बताई गई है।

चार भारतीयों - मुंबई में दो और बेंगलुरु और हैदराबाद में एक-एक का शुक्रवार को वायरस के लिए नकारात्मक परीक्षण किया गया। इस महीने चीन और हांगकांग से लौटे 20,000 से अधिक यात्रियों के मद्देनजर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS),दिल्ली ने किसी भी संदिग्ध मामले में उपचार प्रदान करने के लिए एक आइसोलेशन वार्ड और बेडस तैयार कर रखें हैं।

थाईलैंड, वियतनाम, सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, नेपाल, फ्रांस और अमेरिका सहित वैश्विक स्तर पर कोरोनावायरस से 1,300 से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं।



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