Tuesday, 30 November 2021

जानिए नाखून को मजबूत और चमकदार बनाने के क्यूटिकल ऑयल कितना असरदार है

नई दिल्ली : अब सवाल यह है कि नाखूनों को मजबूत बनाने के लिए घर पर कैसे तेल तैयार किया जाएं तो आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि नाखूनों को मजबूत और लंबे बनाने के लिए आप घर पर किस प्रकार तेल तैयार कर सकते हैं। साथ ही इन तेलों के फायदों के बारे में भी जानेंगे।

नाखून को चमकदार बनाने वाले  क्यूटिकल ऑयल 

1 - नारियल का तेल और वैसलीन
नारियल के तेल की कुछ बूंदों को यदि वैसलीन के साथ मिक्स की जाएं और नाखूनों के साथ-साथ क्यूटिकल्स पर लगाया जाए तो ऐसा करने से नाखूनों की कई समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। ऐसे में आप बने मिश्रण को 15 से 20 मिनट के नाखूनों पर लगाएं और उसके बाद सूखे कपड़े से नाखूनों को अच्छे से पौछ लें। ऐसा करने से न केवल नाखून चमकदार नजर आएंगे बल्कि वे मजबूत भी बने रहेंगे।

2  - वैसलीन और एसेंशियल से बनाएं तेल
इस तेल को बनाने के लिए आपके पास एसेंशियल ऑयल के साथ वैसलीन और शिया बटर का होना भी जरूरी है। अब आप तीनों मिश्रण को अच्छे से मिक्स कर लें और बने मिश्रण को नाखून और उनके आसपास क्यूटिकल्स पर लगाएं। तकरीबन 15 मिनट तक हल्के-हल्के हाथों से मसाज करते रहें। इसके अलावा अगर आप चाहें तो रात भर इस मिश्रण को नाखून पर लगा रहने दे सकते हैं। उसके बाद सुबह उठकर आप नाखूनों को साफ कपड़े से पौछ लें।

3 - नारियल का तेल और कैस्टर ऑयल
नारियल के तेल से भी नाखूनों को मजबूत बनाया जा सकता है। ऐसे में कैस्टर ऑयल और नारियल का तेल मिक्स करें और नाखूनों पर लगाएं। 15 से 20 मिनट तक इस मिश्रण नाखून पर लगा रहने दें और उसके बाद साधारण पानी से धो लें। अब सूखे कपड़े से पौछ लें। ऐसा करने से न केवल नाखून मजबूत नजर आते हैं बल्कि ये लंबे और चमकदार भी नजर आएंगे।

4 - नारियल का तेल और तिल का तेल
नारियल का तेल और तिल का तेल नाखूनों के लिए बेहद उपयोगी है। ऐसे में नारियल के तेल की कुछ बूंदे तिल के तेल की कुछ बूंदों के साथ मिलाएं और बने मिश्रण को नाखूनों और क्यूटिकल्स पर अच्छे से लगाएं। अब इस मिश्रण को रात में नाखूनों पर लगा रहने दें। अगले दिन उसे साफ कपड़े से पूछ लें या साधारण पानी से धो लें। ऐसा करने से नाखून लंबे और मजबूत नजर आएंगे।

5 - विटामिन ई और नारियल तेल
इस तेल को बनाने के लिए आप नारियल के तेल में विटामिन ई के कैप्सूल को मिलाएं। और बने मिश्रण को नाखून पर लगाएं। 15 से 20 मिनट तक इस मिश्रण नाखून पर लगा रहने दें और उसके बाद साधारण पानी से धो लें। अब सूखे कपड़े से पौछ लें। ऐसा करने से न केवल नाखून चमकदार बनेंगे बल्कि ये मजबूत भी नजर आएंगे।

नाखूनों को मजबूती देने के लिए होममेड तेल आपके बेहद काम आ सकते हैं। लेकिन यदि नाखून टेढ़े मेढ़े या ज्यादा ही कमजोर हैं तो इसके पीछे कुछ चिकित्सक समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।



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जानिए एल्कोहल की लत कैसे डालती है पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर असर और क्या है इसके नुक्सान

नई दिल्ली : अगर आप भी ज्‍यादा एल्कोहल का सेवन करते हैं तो सावधान हो जाएं हो सकता है ये आगे चलकर बांझपन का कारण बन जाए क्‍योंक‍ि डॉक्‍टर्स के मुताब‍िक शुक्राणु पर एल्कोहल का बुरा असर पड़ता है।

मेल हार्मोन पर बुरा असर डालता है एल्कोहल
पुरुषों की बात करें तो उनमें सबसे मुख्‍य हार्मोन टेस्‍टोस्‍टेरोन माना जाता है। इस हार्मोन की मदद से स्‍पर्म की क्‍वॉल‍िटी अच्‍छी होना, बोन व मसल्‍स का बढ़ना मस्‍कुल बॉडी आद‍ि फंक्‍शन होते हैं अगर इस हार्मोन की कमी हो जाएगी तो पुरुषों में इंफर्ट‍िल‍िटी की समस्‍या हो सकती है। अगर आप एल्कोहल का सेवन करेंगे तो ल‍िवर पर बुरा असर पड़ेगा ज‍िसके कारण एंड्रोजन हॉर्मोन एस्‍ट्रोजन में बदल जाएगा ज‍िससे आपको आगे चलकर प‍िता बनने का सुख नहीं म‍िलेगा।

क्‍या एल्कोहल के कारण हो सकती है इंफर्टि‍ल‍िटी की समस्‍या
अगर आप जरूरत से ज्‍यादा एल्कोहल का सेवन करेंगे तो ब्‍लड एल्कोहल लेवल बढ़ जाएगा ज‍िससे टेस्‍टोस्‍टेरोन का स्‍तर कम होना, इरेक्‍टल ड‍िसफंशन जैसी समस्‍या हो सकती है। डॉक्‍टर्स के मुताब‍िक एल्कोहल का सेवन करने से ल‍िवर से जुड़ी बीमारी होती है और मेल हार्मोन टेस्‍टोस्‍टेरोन का स्‍तर भी कम हो जाता है इस हार्मोन के ब‍िना फर्टिल‍िटी मुमक‍िन नहीं है। अगर आप एल्कोहल का ज्‍यादा सेवन करते हैं तो शुक्राणु का न‍िर्माण कम होगा ज‍िससे इंफर्ट‍िल‍िटी की समस्‍या हो सकती है और अगर आप दूसरे मायनों में देखें तो एल्कोहल का सेवन करने से वजन भी बढ़ता है ज‍िससे स्‍पर्म क्‍वॉल‍िटी ग‍िर सकती है। एल्कोहल का सेन करने से सीमेन स‍िकुड़ता है और इंफर्टि‍ल‍िटी के लक्षण नजर आने लगते हैं।

इंफर्टि‍ल‍िटी का इलाज कैसे क‍िया जाता है
अगर एल्कोहल के कारण मेल हार्मोन टेस्‍टोस्‍टेरोन का स्‍तर कम हुआ है तो उसे बैलेंस करने के ल‍िए डॉक्‍टर टेस्‍टोस्‍टेरोन र‍िप्‍लेसमेंट थैरेपी की सलाह देते हैं। इस थैरेपी को लेते समय आपको एल्कोहल अवॉइड पूरी तरह से अवॉइड करने के ल‍िए डॉक्‍टर कह सकते हैं। अगर आप सही समय पर डॉक्‍टर से म‍िलें तो आपको थैरेपी की जरूरत नहीं होगी दवाओं से भी आप ठीक हो सकते हैं लेक‍िन समय पर और जल्‍दी इलाज जरूरी है।

स्‍पर्म क्‍वॉल‍िटी बढ़ाने के ल‍िए क्‍या करें

1. स्‍पर्म क्‍वॉल‍िटी बढ़ाने के ल‍िए एल्कोहल तंबाकू स‍िगरेट आद‍ि चीजों का सेवन न करें इससे स्‍पर्म क्‍वॉल‍िटी पर बुरा असर पड़ता है।

2. अगर आपका वजन ज्‍यादा है तो भी स्‍पर्म क्‍वॉल‍िटी पर बुरा असर पड़ सकता है और इंफर्ट‍िल‍िटी की समस्‍या बढ़ सकती है इसल‍िए वजन न‍ियंत्रण में रखें।
3. आपको स्‍पर्म क्‍वॉल‍िटी बढ़ानी है तो आप अदरक साबुत अनाज नट्स दाल पालक आद‍ि चीजों का सेवन करना चाह‍िए।
4. ट्रांस फैट का सेवन ज्‍यादा करने से भी स्‍पर्म की गुणवत्‍ता पर बुरा असर पड़ता है, आपको फ्राइड फूड या कैन में म‍िलने वाली ड्र‍िंक्‍स का सेवन अवॉइड करना चाह‍िए।
5. आपको अपनी डाइट में सब्‍ज‍ियों की मात्रा बढ़ानी चाह‍िए सब्‍ज‍ियों का ज्‍यादा सेवन करने से शरीर में फाइबर की मात्रा बढ़ती है ज‍िससे स्‍पर्म क्‍वॉल‍िटी भी बढ़ती है।



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Kadhi Benefits: सर्दियों में बेसन की कढ़ी खाने से मिलेंगे ये स्वास्थ्य लाभ

नई दिल्ली। Kadhi Benefits: कढ़ी-चावल अथवा कढ़ी-बाजरा एक पारंपरिक भारतीय भोजन है। कई त्योहारों पर भी बेसन की कढ़ी को बड़े चाव से बनाया तथा खाया जाता है। बेसन की कढ़ी को ट्रेडिशनल इंडियन सूप भी माना जाता है। सर्दियों में तो गरमा-गरम कढ़ी पीने का अपना ही मजा होता है। पकौड़ी कढ़ी के अलावा इसमें डाली जाने वाली कई सब्जियों की पौष्टिकता भी कढ़ी को और सेहतमंद बनाती है। तो आइए जानते हैं विटामिन और खनिजों से भरपूर बेसन की कढ़ी खाने के फायदे...

1. बेहतर ग्रोथ के लिए
बेसन की कढ़ी में फास्फोरस, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन तथा खनिज जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की कार्य क्षमता को बेहतर बना सकते हैं। जिससे बॉडी ग्रोथ में भी मदद मिलती है।

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2. रक्तचाप रेग्युलेट करने के लिए
मैग्नीशियम युक्त बेसन की कढ़ी का सेवन आपके हृदय को स्वस्थ रखने तथा मांसपेशियों को आराम पहुंचाने में लाभदायक होता है। साथ ही इसमें मौजूद फॉस्फोरस लिपिड मकैनिजम को सही रखने का कार्य करता है। जिससे शरीर में रक्तचाप रेगुलेशन में मदद मिल सकती है।

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3. त्वचा समस्याओं के लिए
स्वस्थ त्वचा के लिए भी बेसन की कढ़ी के फायदे देखे जा सकते हैं। स्किन की स्मूदनेस बनाए रखने के लिए बेसन की कढ़ी अच्छी मानी जाती है, क्योंकि एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों से युक्त बेसन की कढ़ी खाने से त्वचा के कोलैजन को बढ़ाने में सहायक होती है। कढ़ी का सेवन त्वचा के दाग-धब्बों, ऐक्ने और टैनिंग जैसी समस्याओं को दूर करने में कारगर साबित हो सकता है।

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4. पाचन क्रिया दुरुस्त करने के लिए
बेसन की कढ़ी का सेवन आपके पेट के लिए काफी अच्छा माना जाता है, क्योंकि बेसन की कढ़ी में गुड बैक्टीरिया मौजूद होते हैं। जो लोग बेसन की कढ़ी का सेवन करते हैं, उनकी आहारनाल का वातावरण सही रहने के साथ ही शरीर में पोषक तत्व ढंग से अवशोषित होते हैं। जिसके परिणामस्वरूप पाचन क्रिया बेहतर होती है।

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5. खून की कमी दूर करने में
शरीर में खून की कमी या हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होना एक गंभीर समस्या हो सकती है। इसके लिए बेसन की कढ़ी का सेवन इस समस्या से आराम दिलाने में कारगर साबित हो सकता है। क्योंकि कढ़ी में पर्याप्त मात्रा में आयरन तथा प्रोटीन होता है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए बेहतरीन कॉम्बो है।

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Black Pepper And Mishri Combination: क्या आपको पता है काली मिर्च और मिश्री एक साथ खाना स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद होता है

नई दिल्ली। Black Pepper And Mishri Combination: काली मिर्च और मिश्री के उपयोग सदियों से होता आ रहा है। इन्‍हें आयुर्वेद में औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। जब इन दोनों का सेवन साथ में किया जाता है तो शरीर के लिए यह कई मामले में फायदेमंद साबित होता है। काली मिर्च में विटामिन सी, बीटा कैरोटीन, विटामिन ए, एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन बी, सेलेनियम आदि मौजूद होते हैं। वहीं मिश्री के अंदर भी विटामिन b12, फाइबर, एंटी ऑक्सीडेंट गुण, एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। मिश्री और काली मिर्च को एक साथ खाया जाए तो यह सेहत को कई तरीकों से फायदा पहुंचा सकती है। आइए जानते हैं काली मिर्च और मिश्री को एक साथ खाने से किस तरह के फायदे होते हैं।

काली मिर्च और मिश्री खाने के फायदे

1. वजन घटाने के लिए फायदेमंद :

काली मिर्च को मिश्री के साथ खाया जाता है, तो ये वजन कम करने में मदद करता है। वास्तव में काली मिर्च के ऊपरी सतह पर प्राकृतिक यौगिक जैसे फाइटोन्यूट्रीयंट्स मौजूद होते हैं जो शरीर के अंदर वसा कोशिकाओं को तोड़ने का काम करते हैं। मिश्री पेट को स्वस्थ और भूख को काबू रखने का काम करता है। ऐसी स्थिति में अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो आप दोनों सामग्रियों का मिश्रण खा सकते हैं।

2. दिमाग के लिए फायदेमंद :

अगर आप अपनी कमजोर याददाश्त से परेशान है तो ऐसे में काली मिर्च के साथ मिश्री का सेवन कर सकता है। ऐसा करने से मानसिक थकान दूर हो जाएगी और याददाश्त भी तेज होगी। इससे अलग इन दोनों का मिश्रण नींद को भी नियंत्रित करता है। ऐसे में दिमाग को ताजा रखने में काली मिर्च और मिश्री का मिश्रण एक अच्छा विकल्प है।

3. गले के लिए फायदेमंद :

एक शोध के अनुसार, काली मिर्च और मिश्री दोनों में ऐसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं जो बलगम को खत्म करके कफ से राहत दिलाती हैं। यह आपके गले और ओरल कैविटी को भी काफी आराम पहुंचाती है।

4. एनर्जी के लिए फायदेमंद :

जो व्यक्ति नियमित रूप से काली मिर्च और मिश्री का सेवन करता है उसके शरीर में एनर्जी का लेवल हमेशा बड़ा रहता है। मिश्री मूड़ को अच्छा रखती है साथ ही यह सुस्त महसूस करने वाले लोगों में उर्जा का संचार करती है। अगर आप हर वक्त तनाव में महसूस करते हैं या मानसिक थकाम महसूस करते हैं तो आप काली मिर्च और मिश्री के सेवन से अपनी समस्या को दूर कर सकते हैं।

5. पाचन क्रिया के लिए फायदेमंद :

पाचन क्रिया को अच्छा रखने के लिए लोग मिश्री के साथ सौंफ का सेवन करते हैं लेकिन आपको बता दें कि अगर आपके पेट में गैस, कब्ज, अपच की समस्या, सूजन या पेट फूलने की शिकायत रहती है तो आप काली मिर्च के साथ मिश्री का सेवन करें। पाचन क्रिया से जुड़ी सारी समस्याएं दूर रहेंगी।

6. खांसी :

अगर आप काली मिर्च के पाउडर के साथ मिश्री और घी का सेवन करते हैं तो इससे तुरंत खांसी में आराम मिल सकता है। काली मिर्च गले में जमे बलगम को बाहर निकालने में मदद कर सकती है।



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Side Effects of Dates: जरूरत से ज्यादा खजूर खाना आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है

नई दिल्ली। Side Effects of Dates: खजूर को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। खजूर में आयरन, मिनरल, कैल्शियम, अमीनो एसिड, फॉस्फोरस और विटामिन्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। खजूर या डेट्स को अगर दूध के साथ मिलाकर खाया जाए तो यह पाचन को मजबूत बनाता है, फाइबर से भरपूर होता है, ब्रेन हेल्थ के लिए भी अच्छा माना जाता है। लेकिन हर चीज को खाने पीने की एक लिमिट होती है। अगर लिमिट से ज्यादा कोई भी चीज खाई जाती है तो वह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है। खजूर में कैलोरी की मात्रा ज्यादा पाई जाती है जो वजन बढ़ाने का कारण बन सकती है। इसका ज्यादा सेवन करने से आप ब्लड शुगर के मरीज भी बन सकते हैं। तो आज हम आपको खजूर से होने वाले नुकसान के बारे में बताते हैं।

खजूर खाने के नुकसान

1. हाइपरक्लेमिया के लिए नुकसानदायक :

हाइपरकेलेमिया वह स्थिति है जिसमें रक्त में पोटैशियम लेवल बढ़ जाता है। खजूर पोटैशियम का एक समृद्ध स्रोत है और उनमें से बहुत से उपभोग करने से यह स्थिति हो सकती है। इसलिए, अगर आपके पोटैशियम का लेवल अधिक है, तो खजूर से बचें और इनका अधिक मात्रा में सेवन करने से बचें।

2. पेट के लिए नुकसानदायक :

बाजार में बिकने वाला खजूर लंबे समय तक खराब न हो इसके लिए उसमें प्रिजर्वेटिव के तौर पर सल्फाइट का इस्तेमाल किया जाता है। सल्फाइट केमिकल कंपाउंड होता है जिससे हानिकारक बैक्टीरिया को दूर रखा जाता है। लेकिन इसी सल्फाइट की वजह से कई लोगों को गंभीर ऐलर्जी हो सकती है। पेट दर्द, गैस, पेट फूलना और डायरिया जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। खजूर फाइबर का बेहतरीन सोर्स है और यही फाइबर शरीर में अगर ज्यादा मात्रा में पहुंच जाए तो कई बार नुकसान भी पहुंचा सकता है।

3. मोटापा के लिए नुकसानदायक :

खजूर का ज्यादा सेवन करने से वजन बढ़ सकता है। आपको बता दें कि खजूर में कैलोरी की मात्रा ज्यादा पाई जाती है जो वजन बढ़ाने का कारण बन सकती है। एक ग्राम खजूर में करीब 2.8 कैलरी होती है, इसलिए इसके ज्यादा सेवन से तेजी से वजन बढ़ता है।

4. ब्लड शुगर के लिए नुकसानदायक :

खजूर का सेवन यदि सीमित मात्रा में किया जाए तो यह आपके लिए सेहतमंद हो सकता है। लेकिन इसका ज्यादा सेवन करने से आप ब्लड शुगर के मरीज भी बन सकते हैं।

5. बच्चों के लिए नुकसानदायक :

खजूर मोटे ड्राइ फ्रूट्स में एक है, जिसे पचाने के लिए ठीक से चबाने की जरूरत होती है। बच्चों की आंत विकासशील अवस्था में होती है, जिससे खजूर को पचाना मुश्किल हो जाता है और उन्हें पेट की समस्याएं हो सकती हैं।



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महिलाओं की किन समस्याओं को दूर करता है मुनक्का और जानें इस्तेमाल करने का तरीका

नई दिल्ली : मुनक्का खाने से महिलाओं को पीरियड्स में होने वाली समस्याओं में आराम मिलता है और गर्भावस्था के दौरान पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मिलते हैं।

महिलाओं के लिए मुनक्का के फायदे
1. पीरियड्स से दर्द में राहत
तमाम महिलाओं को पीरियड्स के दौरान काफी दर्द का सामना करना पड़ता है । ऐसे में मुनक्का एक ब्लड प्यूरीफायर के रूप में काम करता है। यह शरीर को डिटॉक्स करके अनियमित पीरियड्स और पीसीओएस के दौरान खून का थक्का नहीं जमने देता है। इसमें मौजूद आयरन पीरियड्स के दौरान होने वाली कमजोरी से बचाता है। दरअसल आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन कम हो सकता है। आयरन की कमी से महिलाओं में एनीमिया की समस्या भी हो सकती है।

2. गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद मुनक्का
गर्भावस्था के दिनों में मुनक्का खाने के बहुत से फायदे हैं। मुनक्का कैल्शियम से भरपूर होती है। इसके साथ ही इसमें ओलेनोलिक एसिड होता है। ये तत्व दांतों के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसके लिए आप सुबह के समय भिगोकर मुनक्का खा सकते हैं।

3. वजन बढ़ाने में सहायक
मुनक्का वजन बढ़ाने में मदद करता है। इसमें ग्लूकोज और सुक्रोज का लेवल अधिक होता है। यह आपका एनर्जी लेवल भी बनाए रखता है। मुनक्का को दूध में डालकर खाना भी फायदेमंद होता है।

4. मुनक्का से पाए दमकती त्वचा
मुनक्का में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट मुक्त कणों से लड़ते हैं और कोशिकाओं को क्षति पहुंचाने से रोकते हैं। महिलाओं में यह उम्र बढ़ने पर झुर्रियों और त्वचा के खुरदुरेपन को नियंत्रित करने में मदद करता है और दमकता निखार भी लाता है।

5. दिल की बीमारियों के रखे दूर
मुनक्का में एंटी-कोलेस्ट्रॉल यौगिक मौजूद होते हैं। यह यौगिक एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल), उच्च रक्तचाप और दिल के दौरे के जोखिम को कम कर स्वस्थ रहने में मदद करता है।

मुनक्का के नुकसान
मुनक्का के अधिक सेवन से आपके स्वास्थ्य को कई नुकसान पहुंच सकते हैं। ज्यादा मुनक्का खाने से आपको दस्त की समस्या हो सकती है। इसके अलावा अगर आप ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं तो आपको इस बारे में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। साथ ही अगर आप डायबिटीज के मरीज है तो ये आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है क्योंकि मुनक्का में शुगर की मात्रा अधिक होती है। इसलिए डायबिटीज के मरीज डॉक्टर की सलाह पर मुनक्का का सेवन करें।

कैसे करें इस्तेमाल
1. मुनक्का को आप रातभर पानी में भिगोकर रख सकते हैं और सुबह बादाम और अंजीर के साथ खा सकते हैं।

2. वजन बढ़ाने के लिए आप मुनक्का को दूध में उबाल कर या रातभर भिगोकर खा सकते हैं। यह वजन बढ़ाने में मदद करता है।

3. अगर आप मुनक्का को मजेदार तरीके से खाना चाहते हैं तो मुनक्का को घी में फ्राई करके खा सकते हैं । यह गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद होता है।

4. इसके अलावा आप मुनक्का को भिगोकर जूस के साथ मिलाकर भी पी सकते हैं।



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जानिए कौन सा फाउंडेशन आपके स्किन को नुकसान से बचा सकता है

नई दिल्ली : कुछ फ़ाउंडेशन मॉइस्चराइजर सनस्क्रीन एस्ट्रिंजेंट या बेस लेयर के रूप में भी काम करते हैं। पर हर स्किन पर हर तरह का फाउंडेशन अच्छा नहीं लगता। इसलिए आपको अपने स्किन के अनुसार ही अपने लिए फाउंडेशन के प्रकार का चुनाव करना चाहिए। तो आइए जानते हैं अपने स्किन टाइट के अनुसार फाउंडेशन का चुनाव कैसे करें।

अपनी स्किन के अनुसार सही फाउंडेशन कैसे चुनें
1. सेंसिटिव स्किन के लिए
सेंसिटिव स्किन वाले लोग चेहरे के लिए किसी भी चीज के इस्तेमाल को लेकर सौ बार सोचते हैं। ऐसा इसलिए कि सेंसिटिव स्किन पर किसी भी प्रोडक्ट का असर तुरंत होता है और इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। जैसे कि एक्ने और स्किन इंफेक्शन। इसलिए आपको सेंसिटिव स्किन के लिए कोई भी हार्ड कैमिकल या फिर अल्कोहल वाले फाउंडेशन के चुनाव से बचना चाहिए। इसकी जगह आपको बहुत ही नम और लाइट इंग्रेडिएंट्स वाले फाउंडेशन का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा आप नेचुरल ऑयल बेस्ड फाउंडेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही सनस्क्रीन बेस्ड फाउंडेशन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

2. ड्राई स्किन के लिए
ड्राई स्किन के लिए आप मॉइस्चराइजर बेस्ड या फइर सनस्क्रीन बेस्ड मॉइश्चराइजर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ये त्वचा को अंदर से नमी देगा और इन्हें स्वस्थ बनाए रखने में आपकी मदद करेगा। ड्राई स्किन के लिए फाउंडेशन का चुनाव करते समय कुछ चीजों का ध्यान रखें जैसे कि हाइड्रेटिंग पाउडर पाउंडेशन या फिर लिक्विड बेस्ड फाउंडेशन का इस्तेमाल करें। ध्यान रखें कि आपकी त्वचा पर अच्छी तरह से फैल जाएं और स्किन को सॉफ्ट रखे।

3. ऑयली स्किन के लिए
ऑयली स्किन वाले लोग अक्सर अपने स्किन पर उन चीजों को लगाने से बचते हैं जो कि इसे और ऑयली बना देते हैं। इसलिए पाउडर वाले फाउंडेशन या फिर ऑयल फ्री लिक्विड फाउंडेशन का इस्तेमाल करें। ये त्वचा के पोर्स पर चिपकेंगे नहीं और ना ही पोर्स को बॉल्क करेंगे जिससे कि त्वचा अतिरिक्ट ऑयल प्रड्यूस करने लगती है। इसके अलावा आप मिंनरल फाउंडेशन और मेट फाउंडेशन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि ये त्वचा से तेल को सोख लेते हैं और त्वचा को खूबसूरती व साइन प्रदान करते हैं।

इसके अलाव भी फाउंडेशन का चुनाव करते वक्त ध्यान रखें कि इसका शेड परफेक्ट हो ये आपकी स्किन के रंग को मिलता हुआ हो और आपके चेहरे पर पूरी तरह से फैल जाए। साथ ही आप मौसम के अनुसार भी फाउंडेशन का चुनाव करें नहीं तो कुछ फाउंडेशन का इस्तेमाल करना सर्दियों में आपकी स्किन को और ड्राई बना सकता है। दरअसल अलग-अलग मौसम का मतलब है अलग-अलग मेकअप फाउंडेशन। गर्मियों में हमारी त्वचा का रंग थोड़ा गहरा हो जाता है जबकि सर्दियों में यह पीला हो जाता है। इसलिए जिस वक्त आप देखते हैं कि आपका फाउंडेशन उस तरह से काम नहीं कर रही है जिस तरह से उसे करना चाहिए तो समझ जाएं कि इसे स्विच करने का समय आ गया है। उदाहरण के लिए अगर आपकी त्वचा सर्दियों के दौरान बहुत अधिक सूख जाती है तो आपको तेल या क्रीम आधारित फाउंडेशन का चयन करना चाहिए न कि पानी आधारित। इसी तरह गर्मियों में सनस्क्रीन बेस्ड फाउंडेशन का इस्तेमाल करें।

तो अब आप जब भी अपने लिए फाउंडेन खरीदने जाएं तो इन बातों को अपने दिमाग में रखें। फिर अपनी स्किन को और स्किन की समस्याओं को देखते हुए ही फाउंडेशन के इंग्रेडिएंट्स को देखें और सही फाउंडेसन का चुनाव करें। ताकि आपका मेकअक आपको एक परफेक्ट लुक दे।



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Sulaimani Tea Benefits: सुलेमानी चाय की चुस्कियों से दूर करें ये समस्याएं

नई दिल्ली। Sulaimani Tea Benefits: बात चाहे थकान और सुस्ती दूर करने की हो, वर्षा ऋतु का मजा लेने की हो या फिर ठंड में गर्माहट पाने की, गरम-गरम चाय की चुस्कियां आनंदित कर देती हैं। कई लोगों को तो चाय की इतनी आदत हो जाती है कि दिन में जब तक दो-तीन कप चाय ना पीलें, तब तक उन्हें चैन नहीं आता। लेकिन आपने कभी आलस भगाने तथा स्वाद की संतुष्टि के अलावा चाय के फायदों के बारे में सोचा है? अगर नहीं, तो आपको बता दें कि एक चाय ऐसी है जो मूड फ्रेश करने के साथ ही डार्क सर्कल्स कम करने, फंगल संक्रमण को दूर करने जैसी अन्य समस्याओं में भी लाभकारी हो सकती है। जी हां, इस चाय का नाम है सुलेमानी चाय। तो आइए जानते हैं इस चाय को बनाने का तरीका और इसके अन्य स्वास्थ्य लाभों के बारे में...

 

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यह कोई नई चाय नहीं है। इसे बनाने की विधि सालों पुरानी है। सुलेमानी चाय बनाने के लिए आपको चाहिए डेढ़ कप पानी, 2 हरी इलायची, 1 चम्मच चाय की पत्ती, 1 चम्मच शहद, 2 लौंग, आधा इंच दालचीनी का टुकड़ा, 1 चम्मच नींबू का रस, 4-5 पुदीने की पत्तियां।

बनाने का तरीका:
सुलेमानी चाय बनाने के लिए सर्वप्रथम एक पैन में पानी डालकर गैस पर धीमी आंच पर रखें। इस पानी में लौंग, इलाइची, दालचीनी, पुदीने की पत्ती डालकर अच्छी तरह उबाल आने दें। उबलते हुए पानी जब डेढ़ कप से 1 कप रह जाए, तो इसमें 1 चम्मच चाय की पत्ती डालकर कुछ सेकेंड के बाद गैस को बंद कर दें। दो-तीन मिनट बाद इस चाय को पैन में से कप में छान लें। और फिर इसमें शहद तथा नींबू का रस डाल लें। आप चाहें तो गार्निश करने के लिए ऊपर से 1-2 पुदीने की पत्तियां डाल सकते हैं। तैयार है सुलेमानी चाय।

 

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फायदे:
इस चाय के सेवन से ना केवल चुस्ती-फुर्ती आती है बल्कि सुलेमानी चाय आपकी पाचन प्रक्रिया को भी बेहतर बनाती है। इसके अलावा, प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी सुलेमानी चाय के फायदे देखे जा सकते हैं। सुलेमानी चाय का सेवन आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में भी सहायक होता है। यही नहीं, एंटीऑक्सीडेंट युक्त सुलेमानी चाय में बरसात के मौसम में होने वाले फंगल संक्रमण को दूर करने का भी गुण होता है। साथ ही डार्क सर्कल्स की समस्या को दूर करने के लिए भी सुलेमानी चाय फायदेमंद होती है।



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जानिए एचआईवी होने पर क्या खाएं और क्या नहीं एक्सपर्ट से जानें हेल्दी डाइट टिप्स

नई दिल्ली : वैसे तो एचआईवी का इलाज करने के लिए दवाइयों का सेवन किया जाता है लेकिन आप कमजोर इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए अपनी डाइट का भी खास ध्यान रख सकते हैं। एचआईवी होने पर रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर हो जाती है। दरअसल एचआईवी वायरस शरीर में मौजूद CD4 कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। CD4 प्रतिरक्षा कोशिकाएं होती हैं जो एचआईवी वायरस के कारण नष्ट होने लगती हैं। हम आपको एड्स के लिए ऐसे डाइट टिप्स बता रहे हैं जिन्हें आपको फॉलो करना चाहिए।

एचआईवी के लक्षण
एचआईवी वायरस के शरीर में जाने पर कई तरह के लक्षण नजर आने लगते हैं। जानें एचआईवी के शुरुआती लक्षण

1. बुखार
2. ठंड लगना
3. रात को पसीना
4. मांसपेशियों में दर्द होना
5. गले में खराश
6. थकान
7. लिम्फ नोड्स में सूजन

एचआईवी रोगियों को क्या खाना चाहिए
एचआईवी रोगियों के लिए फाइबर से भरपूर डाइट लेना जरूरी होता है। फाइबर से भरपूर डाइट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर दबाव नहीं डालता है। फलों में पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है। सेब अमरूद और नाशपाती में फाइबर काफी अच्छी मात्रा में होता है।
एंटीऑक्सीडेंट और फाइटोन्यूट्रीएन्ट्स डाइट भी एचआईवी रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। इसके लिए अपनी डाइट में फलों और सब्जियों को शामिल करें। इसके साथ ही कार्बोहाइड्रेट से भरपूर ***** ग्रेन डाइट भी एचआईवी रोगियों के लिए अच्छी डाइट है।
ब्राउन राइस आलू और रतालू या शकरकंद भी एचआईवी रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। ये खाद्य पदार्थ शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।
एचआईवी रोगियों को ओमेगा-3 फैटी एसिड अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। अलसी के बीज, तोफू, सोयबीन ओमेगा-3 के अच्छे सोर्स हैं।
एचआईवी रोगियों को तरल पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए। आप चाहें तो लिक्विड के लिए फलों का रस निकालकर पी सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि जूस हाइजीन तरीके से तैयार होना चाहिए। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है जिससे इम्यूनिटी बढ़ती है। एड्स में रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के साथ ही वजन भी घटने लगता है। अगर आपका वजन भी लगातर घट रहा है तो आप कैलोरी अमांउट को बढ़ा सकते हैं। कैलोरी लेने के लिए आपको अपनी डाइट में सिर्फ हेल्दी फैट को ही शामिल करना चाहिए। हेल्दी फैट के लिए आप आल्मंड बटर पीनट बटर को शामिल कर सकते हैं। एचआईवी रोगियों के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है। अगर आप शाकाहारी हैं, तो प्रोटीन के लिए दाल को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा अगर आप मांसाहारी हैं, तो लीन प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

एचआईवी रोगियों को इन खाद्य पदार्थों को नहीं खाना चाहिए
एचआईवी रोगियों की इम्यूनिटी काफी कमजोर हो जाती है। ऐसे में आपको ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिनसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। साथ ही ऐसे खाद्य पदार्थों से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए जो इम्यूनिटी को कमजोर करते हैं।


1. एचआईवी रोगियों को हाई शुगर, सॉल्ट लेने से बचना चाहिए।
2. कोल्ड ड्रिंक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन भी एचआईवी रोगियों के लिए नुकसानदायक होता है।
3. प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड और जंक फूड से परहेज करें।
4. शुगर लोडेड फूड आइटम, रिफाइंड शुगर के सेवन से बचें।
5. चिप्स बिस्किट ओपन मिल्क से भी एचआईवी रोगियों को परहेज करना चाहिए

अगर आप भी एचआईवी के मरीज हैं तो आपको अपनी डाइट का खास ध्यान रखना जरूरी होता है। ऐसे फूड्स का सेवन करें जिनसे इम्यूनिटी बढ़ती है। साथ ही ऐसे फूड्स को अवॉयड करें जो इम्यूनिटी को कमजोर बनाते हैं और समस्या को बढ़ाते हैं।



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जानिए भारत में तेज़ी से बढ़ते बच्चों में अंधेपन की समस्या का कारण और क्या हैं इसका इलाज

नई दिल्ली : रिसर्चगेट पर भारत में तेजी से बढ़ रहे बच्चों में अंधेपन की समस्या को लेकर प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में जन्म के समय से ही बच्चों में अंधेपन और नजर से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और इसके पीछे खानपान और पोषण जैसे कारक भी जिम्मेदार हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारत में ब्लाइंड बच्चों की संख्या लगभग 2 मिलियन के आसपास है। ज्यादातर बच्चों में यह समस्या पोषण की कमी और सामान्य स्वास्थ्य कारणों की वजह से हो रही है। आइये विस्तार से जानते हैं भारत में बच्चों में बढ़ रही अंधेपन की समस्या के प्रमुख कारण और इससे बचाव के उपाय के बारे में।

बच्चों में जन्म से अंधेपन की समस्या के कारण

चाइल्डहुड ब्लाइंडनेस या बच्चों में जन्म के समय से अंधेपन की समस्या के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। भारत में जन्म के समय से ही बच्चों में अंधेपन की समस्या होने की सबसे प्रमुख वजह गर्भवती मां का पोषण और उसकी जीवनशैली की भी माना जाता है। इसके अलावा कॉर्नियल क्लाउडिंग स्कारिंग या डैमेज भी बच्चों को जन्म से ही अंधा बनाने के प्रमुख कारण हैं। कुछ समय पहले भारत के बच्चों में जन्म के समय से ही अंधेपन की समस्या को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक जन्म के समय से बच्चों में आंखों से जुड़ी समस्या या अंधेपन का एक प्रमुख कारण रिफ्रैक्टिव एरर्स की समस्या भी होती है। बच्चों में जन्म के समय से ही अंधेपन की समस्या के प्रमुख कारण इस प्रकार से हैं।

1. कॉर्नियल क्लाउडिंग, स्कारिंग या डैमेज
2. रेटिनल ओपेसिटी, कॉर्नियल ओपेसिटी या आंखों से जुड़ी गंभीर समस्या
3. आनुवांशिक बीमारियों की वजह से अंधेपन की समस्या
4. शरीर में विटामिन ए की कमी
5. विटामिन डी की कमी
6. गर्भ में भ्रूण का सही से विकास न होने की वजह से
7. बच्चों में डायबिटीज की समस्या के कारण
8. कॉन्जेनिटल ग्लूकोमा

वो स्थितियां बच्चों की आंख को प्रभावित करती हैं
जन्म के समय से ही बच्चों में अंधेपन की समस्या के कारण ऊपर बताये गए हैं ये कारण बच्चों के गर्भ में रहने से लेकर पैदा होने के बाद तक प्रभावित कर सकते हैं।

1. गर्भधारण करते समय आनुवांशिक कारणों की वजह से
2. गर्भावस्था के दौरान आंख के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली स्थितियों के कारण
3. जन्म के समय पर उत्पन्न स्थितियों की वजह से
4. बच्चों के जन्म के बाद कुछ स्वास्थ्य कारणों से

बच्चों में अंधेपन की समस्या का इलाज और बचाव के टिप्स
बच्चों में जन्म के समय से ही अंधेपन की समस्या या आंख से जुड़ी गंभीर समस्या का पता उनके जन्म के बाद लगता है। इसके लिए आपको सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। ऐसे वक्त में माता-पिता को अन्धविश्वास में पड़ने या घबराने के बजाय समय रहते एक्सपर्ट चिकित्सक की देखरेख में इलाज शुरू करना चाहिए। बच्चों में जन्म के समय से अंधेपन की समस्या के लिए कई तरह की इलाज प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। डॉक्टर बच्चे की स्थिति के हिसाब से जांच के बाद इलाज की शुरुआत कर सकते हैं। बच्चों में जन्म से ही अंधेपन की समस्या से बचाव के लिए मां को गर्भावस्था के दौरान खानपान पोषण और लाइफस्टाइल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को गर्भ में मां के शरीर से ही उचित पोषण मिलता है और इसलिए हर मां को अपने शरीर में विटामिन ए, विटामिन डी जैसे आंखों के लिए जरूरी पोषक तत्वों का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा आनुवांशिक कारणों से अंधेपन के खतरे को कम करने के लिए आप जेनेटिक टेस्टिंग का सहारा ले सकते हैं।



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Cold Home Remedies: बंद नाक से रहते हैं परेशान,तो अपना सकते हैं इन आसान से घरेलू उपायों को

नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम आ गया है ऐसे में सर्दी-जुकाम,बुखार आदि समस्याएं होने का खतरा बढ़ता जाता है। वहीं इस मौसम में जब भी आप कहीं भी बाहर जाते हैं तो नाक बंद होने की समस्या जैसे प्रोब्लेम्स का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सर्दी के मौसम में हमेसा जब भी बाहर निकलें तो फुल कपड़े ही पहनें। कोशिश करें अपने साथ शॉल रखें ताकि ये ज्यादा ठंड लगने पर आपकी बॉडी को गर्माहट देता रहे। साथ ही साथ खाने में ठंडी चीजों के सेवन से बचें ताकि सर्दी-जुकाम जैसी दिक्कतों का आपको सामना न करना पड़े।
इसलिए आज हम आपको इन घरेलू उपायों के बारे में बताएंगें जो इस समस्या को दूर करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

1.शहद की चाय
शहद की चाय बहुत ही ज्यादा लाभदायक होती है वहीं ये सर्दी-जुकाम के समस्या से यदि आप परेशान हैं तो शहद से बनी चाय का सेवन आपको फायदा पंहुचा सकता है। कई रिसर्चों के अनुसार खांसी-जुकाम की समस्या आपको बहुत हद तक लाभ पहुंचाने में लाभदायक हो सकती है। यदि आप भी सर्दी-जुकाम की समस्या से परेशान हैं तो शहद की चाय बनाने के लिए आप दो चम्मच शहद में गर्म पानी या किसी भी हर्बल टी के साथ मिला के सेवन कर सकते हैं। ये लाभदायक साबित होगा।

honey tea

2.दालचीनी,नींबू और अदरक की चाय
यदि आप सर्दी-जुकाम की समस्या से बच के रहना चाहते हैं तो ऐसे में आप नींबू,दालचीनी व अदरक की चाय को रोजाना कि डाइट में शामिल कर सकते हैं। इनमें ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बना के रखने का काम करते हैं। वहीं इनके सेवन से सर्दी-जुकाम के जैसी समस्या भी दूर रहती है। सर्दी-जुकाम होने पर आप इन चाय का मिश्रण का सेवन कर सकते हैं। इनके सेवन से आपको बहुत ज्यादा लाभ मिलेगा। वहीं आपको इस चाय से तुरंत फायदा मिल जाएगा।

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3.लहसुन का सेवन
लहसुन का सेवन सेहत के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक होता है। सर्दी-जुकाम यदि हो जाए तो आप लहसुन का सेवन कर सकते हैं इसके सेवन से सर्दी-जुकाम के जैसी अनेकों दिक्कतें दूर होती जाती हैं। यदि आपको सर्दी या जुकाम की समस्या रहती है तो आप लहसुन का सेवन कर सकते हैं। सबसे पहले आप लहसुन की कुछ कलियों को लें फिर इसे आप दरदरा करें और पीस लें फिर इसमें शहद को मिलाके खाएं। लहसुन और शहद दोनों में ही एंटीबैक्टीरियल जैसे प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं जो सर्दी-जुकाम के वायरस को खत्म करने में लाभदायक होती है।

Cold Home Remedies: बंद नाक से रहते हैं परेशान,तो अपना सकते हैं इन आसान से घरेलू उपायों को

4.विटामिन सी युक्त फूड्स का सेवन
यदि आप सर्दी-जुकाम की समस्या से परेशान रहते हैं तो आपको खट्टे फलों को अपने डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। सर्दी-जुकाम के होने पर आप विटामिन सी युक्त फूड्स को अपने डाइट में जरूर शामिल करें। खट्टे फलों में विटामिन सी की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है और सर्दी-जुकाम की समस्याओं को दूर करने में सहायक होती है। वहीं इस बात का भी ध्यान रखें कि जरूरत से ज्यादा फलों का सेवन न करें। क्योंकि इनकी तासीर ठंडी होती है जो नुकसान पहुंचाने का काम भी कर सकती है।

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5.हल्दी का दूध
हल्दी का दूध सेहत के लिए कितना फायदेमंद होता है ये बात तो आप जानते ही होंगें इसमें एंटीइन्फ्लामेट्री,एंटी बैक्टीरियल जैसे अनेकों महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं जो इम्युनिटी को मजबूत बना के रखने में सहायक होते हैं। यदि आप हल्दी का सेवन करते हैं शरीर से ढेरों बीमारियां दूर होती जाती हैं। वहीं सर्दी-जुकाम के खतरे से बचने के लिए आप गर्म दूध में हल्दी को अच्छे से मिलाएं फिर रात में सोने से पहले इसका सेवन करें। आयुर्वेद में भी हल्दी को एक प्रकार से औषिधीय तत्वों से भरपूर माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीमिक्रोबियल गुण इन्फेक्शन को कम करने में सहायक होते हैं।

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Tortoise Pose Benefits: कुर्मासन करने के स्वास्थ्य लाभ जानकर रह जाएंगे दंग

नई दिल्ली। Tortoise Pose Benefits: कुर्मासन यानी कछुआ पोज एक कछुआ के समान दिखने वाली मुद्रा है। इसे इस नाम से इसलिए जाना जाता है, क्योंकि इस आसन को करने के दौरान आपके हाथ-पैर एक कछुए के समान सामने की ओर निकले हुए दिखाई पड़ते हैं। आपके शरीर को चुस्त और तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए कुर्मासन के कई फायदे हो सकते हैं। इस आसन को करने से आपकी पेट, पीठ, कमर, रीढ़ की हड्डी में एक अच्छा खिंचाव आने से रक्त संचार बेहतर होता है। तो आइए जानते हैं कुर्मासन करने के अन्य स्वास्थ्य लाभों के बारे में...

1. डिप्रेशन दूर करने में
आजकल की जीवनशैली के कारण तनाव, चिंता आदि लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। बच्चों को पढ़ाई की, युवाओं को काम की और बड़ों को घर-गृहस्थी संबंधी कोई ना कोई समस्या परेशान करती ही है। इस चिंता और तनाव को कम करने के लिए कुर्मासन करना फायदेमंद हो सकता है। यह आसन आपके मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को बेहतर करके याददाश्त में सुधार लाता है। साथ ही स्ट्रेस बस्ट करने वाला यह आसन दिमाग को शांत रखने के साथ ही एकाग्रता बढ़ाता है।

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2. पेट के विकार दूर करने में
पेट की समस्याओं को दूर करने तथा पाचन तंत्र की मजबूती के लिए भी कुर्मासन यानी कछुआ पोज़ के फायदे देखे जा सकते हैं। इस आसन का अभ्यास पेट के अंगों को उत्तेजित करने के साथ ही पेट में गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं को दूर करने में लाभकारी होता है। डायबिटीज के रोगियों और पेट की चर्बी से परेशान लोगों के लिए तो यह आसन बहुत प्रभावकारी है। इसके अलावा श्वसन प्रणाली को सही रखने में भी कुर्मासन लाभकारी होता है।

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3. मजबूत पीठ के लिए
कुर्मासन करने के दौरान आपको पूरी तरह से सामने की ओर झुकना पड़ता है, जिससे पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव आता है। यह स्ट्रेचिंग आपकी पीठ को लचीला बनाने में काफी सहायक होती है। पीठ से संबंधित अन्य समस्याओं को दूर करने में भी इस आसन को लाभदायक माना जाता है। यही नहीं, कछुआ पोज़ यानी कुर्मासन रीढ़ की हड्डी और कंधों की मांसपेशियों को भी खोलता है। इसलिए संपूर्ण शरीर की फ्लैक्सिबिलिटी के लिए इस आसन के कई फायदे हैं।

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Health Tips: इन्हें स्थितियों में भूलकर भी ना करें पपीते का सेवन

नई दिल्ली। Health Tips: कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, फास्फोरस, तथा विभिन्न विटामिंस से युक्त पपीता एक ऐसा फल है, जिसके हमारे शरीर के लिए ढेरों फायदे बताए गए हैं। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर पपीता विशेष तौर पर पेट की समस्याओं में तो काफी लाभकारी माना जाता है। लेकिन कुछ शारीरिक स्थितियां ऐसी भी हैं, जिसमें पपीते का सेवन आपको फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है। तो आइए जानते हैं किन स्थितियों में आपको पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए...

• किडनी स्टोन की समस्या में
पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी मौजूद होने के कारण पपीता एक एंटीऑक्सीडेंट रिच फ्रूट है। लेकिन जिन लोगों को पहले से ही किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें पपीते का सेवन संभलकर करना चाहिए, क्योंकि विटामिन-सी की मात्रा शरीर में अधिक होने से कैल्शियम ऑक्सालेट किडनी स्टोन का निर्माण हो सकता है। यह स्टोन के साइज को बढ़ा सकता है और जिसे यूरिन के जरिए निकालना मुश्किल हो जाता है।

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• एलर्जी की समस्या में
लेटेक्स से एलर्जी की समस्या वाले लोगों को पपीता खाने से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसे लोगों को चिटिनासेस नामक एंजाइम युक्त पपीते के अधिक सेवन से खांसने, छींकने, तथा श्वसन संबंधी अन्य समस्या और आंखों से पानी आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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• लो-ब्लड शुगर से ग्रस्त व्यक्ति
पपीते में ब्लड शुगर लेवल को प्रबंधित करने का गुण होता है, जिससे यह डायबिटीज पेशेंट के लिए बेहतर फल माना जाता है। लेकिन आपको बता दें कि लो-ब्लड शुगर लेवल की समस्या से ग्रस्त व्यक्ति को पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कुछ गुणों के कारण ब्लड शुगर लेवल और भी कम हो सकता है। जिससे व्यक्ति को गंभीर समस्या झेलनी पड़ सकती है।

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• अनियमित धड़कन की समस्या में
हालांकि, पपीता को हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में अच्छा माना जाता है, परंतु जिन लोगों की पहले से ही दिल की धड़कन अनियमित रहती है, उन्हें पपीते से परहेज करना चाहिए। एक शोध के अनुसार, पपीते में साइनोजेनिक ग्लाइकोसाइड नामक एक अमीनो एसिड पाया जाता है। यह आपके पाचन तंत्र में हाइड्रोजन साइनाइड उत्पन्न कर सकता है। जिससे अनियमित दिल की धड़कन की समस्या वाले लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है।

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• गर्भावस्था में
हालांकि कई शारीरिक समस्याओं में पपीते के फायदे देखे जा सकते हैं, परंतु स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए पपीता खाना हानिकारक हो सकता है। इसका कारण है पपीते में मौजूद लेटेक्स। गर्भावस्था में पपीते का सेवन करने पर यह है गर्भाशय के संकुचन का कारण बन सकता है। जहां तक संभव हो चिकित्सक की सलाह से ही गर्भवती महिला को आहार देना चाहिए।

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Health Benefits of Anjeer: इम्युनिटी बूस्ट करने से लेकर पाचन तंत्र को मजबूत बना के रखता है अंजीर, जानें और भी फायदे

नई दिल्ली। अंजीर की बात करें तो ये एक हरे रंग का ड्राई फ्रूट होता है। अंजीर का स्वाद बहुत ही ज्यादा बेहतरीन होता है वहीं ये कई सारे पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। इसके रोजाना सेवन से कई सारी बीमारियां दूर होती जाती हैं वहीं ये अनेकों पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। अंजीर में अनेकों पोषक तत्व पाए जाते हैं वहीं ये एंटीऑक्सीडेंट्स,फाइबर,विटामिन्स आदि चीजों की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसके रोजाना सेवन से शुगर का स्तर नहीं बढ़ता है। वहीं ये डायबिटीज जैसी बीमारी को नियंत्रण में रखता है।
आइए जानते हैं यदि आप अंजीर को रोज अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो इससे कौन-कौन से फायदे हो सकते हैं।

1.पाचन रहता है मजबूत
यदि आप पाचन तंत्र को मजबूत बना के रखना चाहते हैं तो अंजीर का सेवन बहुत ही ज्यादा लाभदायक हो सकता है। अंजीर का रोजाना सेवन आपके पाचन तंत्र को मजबूत और पेट से जुड़ी कई समस्या को दूर करने में मदद कर सकता है। पाचन तंत्र को मजबूत बना के रखने के लिए आप अंजीर को पानी में भिगों दें फिर इसका सेवन करें। अंजीर पेट से जुड़ी अनेकों दिक्कतों को दूर करेगा साथ ही साथ आपके पाचन तंत्र को मजबूत बना के रखेगा। यदि आपको पेट में दर्द,अपच,गैस के जैसी समस्याएं रहती हैं तो भी अंजीर का सेवन लाभदायक हो सकता है।

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2.वेट लॉस में होता है मददगार
वेट को कम करना चाहते हैं तो अंजीर का सेवन बहुत ही ज्यादा लाभदायक हो सकता है। अंजीर में फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है। फाइबर वजन को कम करने में लाभदायक हो सकता है। इसका सेवन पाचन तंत्र के लिए अच्छा होता है। यदि आप रोजाना एक मुट्ठी अंजीर का सेवन रोजाना सुबह करते हैं तो इससे शरीर को ढेरों लाभ मिलते हैं। बहुत सारे रिसर्च के दौरान इस बात का पता चलता है कि इसके सेवन से आपको जल्दी-जल्दी भूख नहीं लगती है। वहीं इसके रोजाना सेवन से ओवरईटिंग के खतरे को कम किया जा सकता है।

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3.डायबिटीज के मरीजों के लिए
अंजीर का सेवन डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभदायक हो सकता है। अंजीर में कई सारे ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो डायबिटीज की समस्या को दूर करने में सहायक होते हैं। वहीं डायबिटीज के पेशेंट्स इसकी पत्तियों से बने चाय का सेवन भी कर सकते हैं। डायबिटीज के पेशेंट्स को यदि रोजाना अंजीर से बनी हुई चाय पिलाई जाती है तो ये बहुत ही ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। ऐसे में जिन लोगों को डायबिटीज की प्रॉब्लम रहती है उन्हें अंजीर का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

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4.स्किन के लिए
अंजीर का सेवन त्वचा के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक होता है। अंजीर में कई तरह के विटामिन्स,मिनरल्स,एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे तत्व पाए जाते हैं जो स्किन को बैलेंस करते हैं। अंजीर के रोजाना सेवन से आपकी त्वचा चमकदार बनी रहती है। वहीं त्वचा को खूबसूरत बना के रखने के साथ-साथ ये बालों के ग्रोथ के लिए भी बहुत ज्यादा अच्छा होता है। अंजीर के रोजाना सेवन से आपके बाल और स्किन दोनों अच्छे हो जाते हैं। क्योंकि ये एंटीऑक्सीडेंट्स,विटामिन्स,मिनरल्स आदि चीजों से भरपूर होते हैं।

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5. लिवर की सेहत के लिए
अंजीर का सेवन सेहत के लिए बहुत ही ज्यादा अच्छा होता है। इसके फल के साथ-साथ इसकी पत्तियों के रोजाना सेवन से भी लिवर की सेहत लम्बे समय तक स्वस्थ बनी रहती है। अंजीर के पत्तियों की बात करें तो इसमें अनेकों प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं जो लिवर की सेहत के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक होते हैं। वहीं इसकी पत्तियों में हेप्टोप्रोटेक्टिव नामक एक तत्व पाया जाता है जो शरीर में से हानिकारक तत्वों को शरीर से दूर रखता है। वहीं ये लिवर की सेहत को भी स्वस्थ रखता है। आप अंजीर के फल को तो डाइट में शामिल करें हीं वहीं इसकी पत्तियां भी शरीर को ढेरों लाभ पंहुचा सकती है।

Health Benefits of Anjeer: इम्युनिटी बूस्ट करने से लेकर पाचन तंत्र को मजबूत बना के रखता है अंजीर, जानें और भी फायदे

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Health Tips: कहीं इन चीजों के सेवन से ना बढ़ जाए आपका कमर दर्द

नई दिल्ली। Health Tips: कमर दर्द से पीड़ित व्यक्ति काफी परेशानियों का सामना करता है। ऐसे व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के काम करने, उठने-बैठने, झुकने आदि में बहुत समस्या आती है। इस दर्द और अकड़न के कारण पूरी दिनचर्या प्रभावित होती है। इस कमर दर्द के कई कारण हो सकते हैं। जिनमें लगातार बैठकर काम करना, गलत पोजीशन में उठना-बैठना अथवा सोना या भारी सामान उठाना इसके कुछ सामान्य कारण हो सकते हैं।

इसके अलावा गलत खानपान का भी असर आपके शरीर पर पड़ता है। जहां एक तरफ संतुलित और पौष्टिक आहार बीमारी को ठीक करने में मदद कर सकता है, वहीं कुछ भी गलत खा लेने पर समस्या विकराल रूप ले सकती है। इसी प्रकार कमर दर्द की समस्या होने पर कुछ ऐसे पदार्थ हैं जो आपकी सूजन तथा दर्द को ट्रिगर कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं कमर दर्द की समस्या को बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों के बारे में...

1. कार्बोनेटेड ड्रिंक्स
आजकल लोग प्यास लगने या बाहर घूमने जाने पर जूस या पानी की बजाए कोक अथवा कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का अधिक सेवन करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसे पेय पदार्थों में मौजूद रसायन आपके शरीर के लिए कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं। और कमर दर्द की समस्या होने पर तो कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन और भी बुरा हो सकता है। क्योंकि इससे पेट में बनने वाले एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे कमर की सूजन और दर्द में बढ़ोतरी हो सकती है।

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  • मीठे पदार्थ
    कोई शारीरिक समस्या हो या ना हो, मीठे अथवा चीनी युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन नुकसानदायक ही माना जाता है। चीनी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कमर दर्द में भी बहुत हानिकारक साबित हो सकता है। मीठे पदार्थ ना केवल सूजन को ट्रिगर करते हैं बल्कि मोटापा भी बढ़ा सकते हैं। और अधिक वजन वाले लोगों को तो पीठ और कमर दर्द की खासी समस्या रहती है।
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  • सेचुरेटेड फैट
    ट्रांस फैट और सेचुरेटेड फैट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन तो किसी के लिए भी सही नहीं होता है। साथ ही इससे आपकी कमर दर्द की समस्या भी बढ़ सकती है। ऐसे में पिज़्ज़ा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइस आदि का सेवन न बिल्कुल भी ना करें।
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  • सफेद ब्रेड
    पिज़्ज़ा बेस की ब्रेड तथा सफेद ब्रेड आदि अधिक रिफाइंड किए जाते हैं। जबकि सेहत के लिए रिफाइंड अनाज के बजाय साबुत अनाज खाना सबसे अच्छा होता है। सफेद ब्रेड का सेवन अचानक इंसुलिन स्पाइक का कारण बन सकता है। जिससे कमर दर्द में और अधिक सूजन आ सकती है।
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Rice Benefits: रोजाना करें चावल का सेवन सेहत को मिलेंगें अनेकों लाभ

नई दिल्ली। चावल की बात करें तो इसके रोजाना सेवन करना लोग कम पसंद करते हैं क्योंकि माना जाता है की ये वजन को बढ़ाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि चावल का सेवन सेहत के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। चावल के सेवन से आपकी ढेरों समस्याएं दूर हो सकती हैं। इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है वहीं चावल में कैलोरी की मात्रा भी बहुत कम होती है। इसे आप अपने डेली डाइट में यदि शामिल करते हैं तो शरीर के साथ-साथ पेट को बहुत ही ज्यादा लाभ मिलता है। इसलिए इसका रोजाना सेवन आपको जरूर करना चाहिए।
चलिए जानते हैं चावल के रोजाना सेवन से होने वाले फायदों के बारे में।

1. त्वचा के लिए होता है अच्छा
यदि आप अपनी त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ बना के रखना चाहते हैं तो ऐसे में चावल का सेवन बहुत ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। चावल में अनेकों प्रकार के महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं जो स्किन में ग्लो को बरक़रार रखने में काफी मदद करते हैं। यदि आप पिम्पल्स,रैसज जैसे अनेकों समस्याओं से परेशान रहते हैं तो आपको चावल अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। वहीं इसको डाइट में तो शामिल करें हीं साथ ही साथ चावल का पानी त्वचा के लिए भी अच्छा होता है। आप चेहरे में यदि चावल के पानी का इस्तेमाल करते हैं तो फेस में झुर्रियों की समस्या से निजात दिलाते हैं।

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2.पाचन तंत्र के लिए होता है अच्छा
यदि आपको पेट से जुड़ी समस्या रहती है या आप पाचन तंत्र को मजबूत बना के रखना चाहते हैं तो चावल को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। चावल बहुत ही ज्यादा हल्का होता है इसलिए इसे पचाने में आपको मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता है। वहीं चावल के रोजाना सेवन से आपकी नींद न आने की समस्या भी दूर हो जाती है। ये बिगड़ते हुए हार्मोन्स को नियंत्रण में रखने में भी सहायक होता है। यदि हार्मोन्स के चलते आपके मूड स्विंग्स बहुत तेजी से बदलते हैं तो ऐसे में चावल का सेवन आपको फायदा पहुंचाने का काम कर सकता है।

Rice Benefits: रोजाना करें चावल का सेवन सेहत को मिलेंगें अनेकों लाभ

3.वेट कम करने में होता है मददगार
यदि आप तेजी से बढ़ते हुए वजन से परेशान हैं तो आपको चावल को रोजाना के अपने डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। चावल का सेवन आपके एक्स्ट्रा फैट को कम करने में मददगार होते हैं। चावल में फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो आसानी से पच जाती है। चावल के सेवन से पेट से जुड़ी अनेकों दिक्कतें भी दूर होती हैं जैसे कि कब्ज, पेट फूलना, गैस की समस्या आदि। वहीं इसके और फायदे की बात करें तो इसमें कैलोरी की भी कम मात्रा पाई जाती है। इसलिए आपको चावल का सेवन जरूर करना चाहिए।

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4.अल्सर की समस्या होती है दूर
चावल के रोजाना सेवन से अल्सर की समस्या दूर होती जाती है। वहीं यदि आप बासी या बचे हुए चावल को खाते हैं तो ये भी अल्सर की समस्या को दूर करने में फायदा पंहुचा सकते हैं। अल्सर की समस्या आमतौर पर गर्मी के तेजी से बढ़ने की समस्या होने के कारण होती है। वहीं चावल का सेवन आपको फायदा पंहुचा सकता है। ये शरीर से गर्मी को दूर कर ठंडा रखता है। इसलिए आप चावल को अपने डाइट में शामिल कर सकते हैं। साथ ही साथ इससे हुई चीजें भी लाभदायक होती हैं।

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5.ब्लड शुगर को रखता है कंट्रोल में
ब्लड प्रेशर के पेशेंट्स को अधिकतर डाइट में ध्यान देने की जरूरत होती है ताकि कोई भी उलटी सीधी चीज के सेवन से उनका ब्लड प्रेशर बढ़ न जाए। ऐसे में यदि ब्लड प्रेशर के पेशेंट्स हैं और इसे कंट्रोल में करना चाहते हैं तो चावल को अपनी रोजाना की डाइट में शामिल कर सकते हैं। चावल में अनेकों ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो सेहत से अनेकों दिक्कतों को दूर करता है वहीं ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रण में रखता है। इसलिए चावल का सेवन सेहत के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक साबित हो सकता है।

Rice Benefits: रोजाना करें चावल का सेवन सेहत को मिलेंगें अनेकों लाभ

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