Tuesday, 15 March 2022

Kuttu Ka Atta: ब्लड प्रेशर और हड्डियों के लिए फायदेमंद कुट्टू के आटे के बेशुमार फायदे जानकार रह जाएंगे दंग

भारत में व्रत-त्योहारों पर तरह-तरह के पकवान बनाने की परंपरा काफी पहले से है। हर जगह का अपना स्वाद और व्यंजन बनाने के तरीका होता है। वहीं आपमें से कई लोगों ने नवरात्र जैसे अन्य व्रत में बनने वाले फलाहार में कुट्टू के आटे की पूरी या पकोड़ी खाई होगी। कुट्टू का आटा स्वादिष्ट होने के साथ ही कई गुणों से भरपूर भी होता है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व जैसे ऊर्जा, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम, फाइबर, वसा और कैल्शियम पाए जाते हैं। तो आइए जानते हैं कुट्टू के आटे के स्वास्थ्य लाभों के बारे में...

1. हड्डियों की मजबूती के लिए
हड्डियों को स्वस्थ रखने में कुट्टू का आटा काफी फायदेमंद माना गया है। शोधानुसार कूटू के आटे में मैंगनीज पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूती देने में मदद कर सकता है। साथ ही इससे शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में भी मदद मिल सकती है। कुट्टू के आटे को अपनी डाइट में शामिल करके हड्डियों से जुड़ी समस्या ऑस्टियोपोरोसिस से भी बचा जा सकता है।

 

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2. ब्लड प्रेशर में आराम दिला सकता
बढ़े हुए रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए भी कूटू के आटे के फायदे देखे जा सकते हैं। क्योंकि मैग्नीशियम युक्त कूट्टू का सेवन रक्त प्रवाह में सुधार कर सकता है। जिससे रक्तचाप को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।

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3. अस्थमा के रोगियों के लिए
कूट्टू के आटे को अपनी डाइट में शामिल करना अस्थमा के मरीजों के लिए बहुत लाभकारी साबित हो सकता है। क्योंकि एक शोध में पाया गया है कि कूट्टू के आटे में मौजूद विटामिन ई और मैग्नीशियम अस्थमा के लक्षणों को कम करने में काफी मददगार होते हैं। साथ ही इसका सेवन अस्थमा होने के जोखिम को भी घटा सकता है।

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4. मेंटल हेल्थ के लिए
आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भी कूट्टू के आटे का सेवन फायदेमंद हो सकता है। आपको बता दें कि कूट्टू के आटे में ट्रिप्टोफैन नामक यौगिक की मौजूदगी के कारण इसके सेवन से आपके मूड को बेहतर बेहतर करने में मदद मिल सकती है। यही नहीं इसके सेवन से तनाव के लक्षणों को भी कम किया जा सकता है।

(डिस्क्लेमर: आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह जरूर लें। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)

यह भी पढ़ें: होली पर जमकर पी ली है भांग तो नशा उतारने के लिए अपनाएं ये तरीके

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होली पर जमकर पी ली है भांग तो नशा उतारने के लिए अपनाएं ये तरीके

होली के दिन लगभग सभी लोग मस्ती, उल्लास में झूमते हुए और खाते-पीते नजर आते हैं। इस दिन तरह-तरह के पकवान जैसे गुंझिया, पापड़, मिठाई और ठंडाई आदि बनाई जाती है। लेकिन कुछ लोग ठंडाई में भांग मिलाकर भी पीते हैं। होली के दिन भांग पीने की परंपरा बहुत पुरानी है। हालांकि थोड़ी बहुत भांग पीना चल जाता है, लेकिन कुछ लोगों को जब तक पूरी भांग न चढ़ जाए वे पीना नहीं छोड़ते। और फिर नशे में धुत होकर पड़े रहते हैं। इसलिए भांग पीने से होने वाले नशे को उतारने के लिए ये कुछ घरेलू उपाय अपना सकते हैं...

1. नारियल पानी
भांग पी लेने से व्यक्ति का गला सूखने लगता है और उसे डिहाइड्रेशन हो जाता है। ऐसे में नशा उतारने के लिए शरीर को हाइड्रेड करने आवश्यक हो जाता है। इसलिए भांग के नशे को कम करने के लिए व्यक्ति को नारियल पानी पिलाएं।

2. अदरक का रस
अगर आपके घर में किसी को भांग का नशा चढ़ गया है तो ऐसी हालत में उसे थोड़ा स अदरक का रस एक कप पानी में मिलाकर पिला दें। इसके अलावा मुंह में अदरक का टुकड़ा रखने से भी नशा कम करने में मदद मिलती है।

 

3. खट्टी चीजें
भांग का नशा उतारने के लिए खट्टी चीजों का सेवन भी बहुत कारगर साबित हो सकता है। इसके लिए आप दही या इससे बनी चीजें, इमली का पानी, नींबू पानी आदि का सेवन कर सकते हैं।

4. अरहर की दाल
अरहर की कच्ची दाल को पीसकर और इसे पानी के साथ पीने से भी भांग का नशा कम होने लगता हैं।

5.घी
भांग के नशे में धुत व्यक्ति को यदि खूब सारा घी पिलाया जाए तो भी नशा उतारा जा सकता है।

6. इमली और गुड़
अगर होली के मजे में आपके घर में किसी ने कुछ ज्यादा ही भांग पी ली है, तो उसका नशा उतारने के लिए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। बस आपको इतना करना है कि 30 ग्राम इमली को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें और फिर इमली को ठीक से मथकर उसका पानी निकाल लें। अब इस छाने हुए इमली के पानी में थोड़ा स गुड़ मिलाकर उस व्यक्ति को पिला दें।

(डिस्क्लेमर: आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह जरूर लें। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)

यह भी पढ़ें: पीरियड्स से जुड़ी हर परेशानी होगी दूर, डाइट में शामिल करें ये चीजें



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बालों को उगाने और मजबूती के साथ शाइनिंग देता है ये खास तेल, जानिए कैसे बनाएं हेयरमास्क

बालों का गिरना, कमजोर होना और चमक विहिन होने की समस्या हर दस में से पांच की होती है। अगर आप भी बालोंं की किसी भी तरह की समस्या को झेल रहे हैं तो आपके लिए ये खबर बहुत काम की है। बालों अंदर से मजबूत होने के साथ बाहर से भी हेल्दी और शाइनी नजर आएंगे। इसके लिए आपको एक खास तेल की जरूरत होगी और वो तेल है अंरडी का। अरंडी यानी कैस्टर ऑयल ही आपकी बालों की हर समस्या का एक इलाज है। बस इसे कैसे लगाना है यह समझना होगा।

अरंडी का तेलवनस्पति तेल है, जिसे अरंडी के बीजों से निकाला जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम रिसिनस कम्युनिस (Ricinus Communis) है। अरंडी के तेल में कई अमिनो एसिड होते हैं लेकिन सबसे ज्यादा रिसिनोलिक एसिड पाया जाता है। ये एसिड बाल ही नहीं शरीर की अन्य समस्याओं में भी बहुत कारगर होते हैं। बालों में इन्हें लगाने के लिए जब कुछ और चीजें इसमें मिलाई जाती हैं तो इससे इसके गुण और बढ़ जाते हैं।

तो चलिए जानें कैसे बनाएं बालों के लिए इस तेल से मास्क
रुखे-बेजान बालों के लिए बनाए अरंडी के तेल का ये मास्क- अरंडी के तेल में दो चम्मच एपल साइडर विनेगर और अंडा मिक्स करें। अब इस मास्क काे बालों में लगा कर सूखने दें। सूखने के बाद माइल्ड शैंपू से बाल धो लें।

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डैंड्रफ वाले बालों के लिए- बालों को मजबूती देने के साथ अगर स्केल्प या बालों में डैंड्रफ हो तो आप अरंडी के तेल में खाने वाली मायोनीज मिलाएं और उसमें विटामिन ई मिक्स कर दें। इससे लगा कर सूखने देने और बाद में शैंपू कर लें।
बालों का गिरना रोकने के लिए- दो चम्मच अरंडी के तेल में एक चम्मच ग्लिसरीन, दो विटामिन ई, एक अंडा मिक्स कर लें। ये बालों सहित जड़ों पर लगाएं। इससे बाल में मजबूती और शाइनिंग दोनों आएगी। ये हेयर स्पा की महंगी क्रीम से कहीं बेहतर होता है।
बाल उगाने के लिए-अरंडी के तेल को आप खाली भी बालों पर लगा सकते हैं। ये बालों को उगने का काम करता है।

मास्क लगाने के बाद क्या करें
जब भी आप अपने हेयर पर मास्क लगाएं, गर्म पानी में डुबे तौलिए को निचोड़कर सिर पर बांध लें। या सिर पर पर कम से कम 15 मिनट भाप लें। इससे स्कैल्प के रोमछिद्र खुल जाएंगे और सारा पोषक तत्व अंदर तक पहुंचेगा। इसके बाद बाल को ठंडे पानी से धो लें, ताकि रोमछिद्र बंद हो जाएं। शैंपू से धुले बालों को लास्ट रिंस आप नींबू मिले पानी से करें।

(डिस्क्लेमर: आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सक सलाह जरूर लें। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)



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होली पर चढ़ने लगे भांग का नशा तो क्या करें? ये चीजें हैंगओवर को करेंगी छूमंतर

होली का त्योहार रंग और मिठाईयों का होता है। गुझिया से लेकर ठंडाई तक इस दिन खूब खाई-पी जाती है। लेकिन कई बार ठंडाई या गुझिया में भांग डालकर भी लोग खाते हैं। भांग का नशा बहुत ही खतरनाक रूप से चढ़ता है, क्योंकि खानपान में मीठी चीजें के सेवन से भांग ज्यादा ही असर दिखाने लगता है। ऐसे में सिर चकराना, बेहोशी सा महसूस होना या कई बार बेसुध सी स्थिति हो जाती है। इसलिए भांग खाने से पहले यह जानना जरूरी है कि भांग कितनी मात्रा में खानी चाहिए और उसके नशे को बढ़ने से रोकेने के लिए कौन से उपाय करने चाहिए।

भांग लेने के बाद किन बातों का रखें ध्यान

  • भांग लेने से पहले अपने स्वास्थ्य का ध्यान जरूर रखें। अगर आप हाई बीपी, हार्ट पेशेंट या किसी गंभीर अन्य बीमारी से पीड़ित हैं तो आपको भांग या किसी भी दूसरे तरह के नशे से दूर रहना चाहिए।
  • भांग लेने के बाद कभी भी ड्राइव न करें। कोशिश करें कि ऐसी चीजें घर पर ही लें।
  • भाग के साथ कभी भी किसी दूसरे नशे जैसे अलकोल या सिगरेट आदि लेने से बचें।
  • कभी एक साथ ज्यादा मात्रा में भांग का सेवन न करें। क्योंकि भांग का नशा एक घंटे के बाद अपने चरम पर होता है।

भांग लेने के बाद इस चीज पर रखें कंट्रोल

  • भांग लेने के बाद मीठी चीजों से बिलकुल दूर रहें। ये नशे को और गहरा बनाती हैं।
  • भांग के साथ कभी चिप्स-पापड़ या तले भुनी चीजों को लेने से भी बचें।
  • कोशिश करें कि भांग के बाद कम से कम खाना खाएं, क्योंकि नशे में भूख पर कंट्रोल नहीं रहता हैं और ये नशे को और बढ़ाता है।
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भांग का नशा उतारने के उपाय

  • खट्‌टी चीजों का प्रयोग करें। नींब चाटें या नींब पानी पीते रहें। नींबू पानी हर तरह के हैंगओवर में काम आता है।
  • छाछ-दही आदी थोड़ी-थोंड़ी मात्रा में बार-बार खाएं।
  • इमली या अमचूर से बने खट्‌टे पानी या पन्ने को पीएं।
  • अरहर की कच्ची दाल पीसकर पीने से भी भांग का नशा उतर जाता है।
  • भुने हुए चने और संतरे के सेवन से भी फायदा होता है।

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पीरियड्स से जुड़ी हर परेशानी होगी दूर, डाइट में शामिल करें ये चीजें

महिलाओं को हर महीने मासिक धर्म के दौरान मूड स्विंग्स, पेट और कमर दर्द, चिड़चिड़ापन जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं आमतौर पर इस दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं का मन ज्यादा चटपटा या जंक फूड खाने का करता है। लेकिन पीरियड्स में महिलाओं को अपना खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। ऐसे में एक हेल्दी डाइट अपनाना बहुत जरूरी होता है। तो आइए जानते हैं कि किसी भी तकलीफ से बचने के लिए पीरियड्स में महिलाओं को कौन सी चीजें खानी चाहिएं...

1. केला
पोटैशियम और मैग्नीशियम का एक अच्छा स्रोत माना जाने वाले केले का सेवन पीरियड्स के दौरान मूड को बेहतर रखने में मदद कर सकता है। साथ ही इसमें फाइबर भी होता है जिससे पेट साफ रखने और मासिक धर्म के दौरान पाचन असुविधा को दूर करने में मदद मिल सकती है।

 

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2. डार्क चॉकलेट
सामान्यतौर पर चॉकलेट बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को खाना पसंद होता है। लेकिन पीरियड्स के दौरान डार्क चॉकलेट खाने के फायदे देखे जा सकते हैं। क्योंकि इसमें मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जिससे मूड स्विंग्स को कम करने में सहायता मिलती है। इसलिए अगर आपको पीरियड्स के दौरान जब भी चिड़चिड़ापन या अनईजी फ़ील हो तो आप थोड़ी सी डार्क चॉकलेट खा लें, क्योंकि इससे हैप्पी हार्मोन भी रिलीज होते हैं।

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3. भुनी अलसी
पीरियड्स में पेट दर्द होना आम बात है। ऐसे में पेट दर्द से राहत पाने के लिए सुबह नाश्ते में भुने हुए अलसी के बीजों को पानी के साथ लेना काफी लाभकारी हो सकता है।

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4. दही
पीरियड्स में कैल्शियम युक्त दही का सेवन भी काफी अच्छा माना गया है। क्योंकि दही खाने से मासिक धर्म के दौरान होने वाले मांसपेशियों के दर्द और ऐंठन से आराम मिल सकता है। इसके अलावा दही का सेवन मासिक धर्म में हैप्पी हार्मोन पैदा करता है जिससे आपके मूड को ठीक रखने में मदद मिलती है।

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Monday, 14 March 2022

होली खेलने से पहले रखें इन बातों का ध्यान, तो नहीं होगा स्किन और बालों को नुकसान

होली करीब आ रही है, इसलिए ये जरूरी है कि रंग से अपने बालों और स्किन को बचाने की तैयारी पहले से ही कर ली जाए। हानिकारक रंग त्वचा और बालों के लिए बहुत नुकसानदायक होते हैं। एलर्जी और बालों की समस्याएं बहुत खतरनाक होती हैं। तो चलिए जानें कि होली खेलने से पहले किन बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए जिससे बाल और स्किन दोनों ही सेफ रहें।

होली से पहले: होली खेलने से पहले चेहरे पर फैशियल वैक्सिंग या फिर थ्रेडिंग, लेसर ट्रीटमेंट या फिर स्किन पीलिंग जैसा कोई ट्रीटमेंट न करवाएं। अगर आपने इनमें से कोई भी ट्रीटमेंट हाल ही में करवाया है तो होली का सूखा या गीला, दोनों तरह का ही रंग त्वचा को नुकसान पहुंचाएगा। रंग लगते ही त्वचा पर एलर्जी, चकत्ते, रेडनेस, रूखापन के साथ पहले से हुई एलर्जी को और खराब कर सकता है।

होली के दिन: होली के रंग बालों को बेहद रूखा, बेजान और कमज़ोर बना देते हैं। इसलिए होली खेलने से पहले बालों में अच्छी तरह तेल लगाकर मसाज कर लें। इसके बाद बालों को जूड़े में बांध लें और सिर पर बंदाना पहन लें। अपने शरीर को बचाने के लिए, ऐसे कपड़े पहनें जिनमें आपका शरीर ढका रहे। साथ ही पूरे शरीर पर अच्छी तरह तेल लगा लें। इसके लिए आप नारियल या फिर बादाम का तेल बेहतर रहता है। इसके बाद हाथों, पैरों और चेहरे पर सनसक्रीन ज़रूर लगाएं, जिससे आपकी त्वचा सूरज की किरणों से बची रहे। अगर आपको एक्ने की शिकायत है या आपकी त्वचा नाज़ुक है, तो रंगों के इस्तेमाल से बचे या फिर हर्बल रंग यूज़ करें।

होली खेलने से पहले ऑयल-फ्री मॉइश्चराइज़िंद क्रीम ज़रूर लगा लें। साथ ही अपने नाखूनों पर नेलपॉलिश ज़रूर लगा लें, इससे आपके नाखूनों और आसपास की स्किन में लगा रंग आसानी से निकल जाएगा।

होली के बाद: जब आप होली खेल लें तो तुरंत नहाने जाएं, जिससे रंग त्वचा और बालों से आसानी से निकल जाए। अगर सिर्फ नहाने से रंग नहीं निकल रहा हो, तो गुनगुने ज़ैतून के तेल में नींबू मिलाकर त्वचा पर लगा लें और एकक घंटे के लिए छोड़ दें। इसके बाद फिर नहा लें। रंग को त्वचा से निकालने के लिए कैरोसीन, पैट्रोल या फिर नेल पॉलिश रिमूवर जैसी चीज़ों का इस्तेमाल न करें। साथ ही त्वचा को ज़ोर से न रगड़ें।

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अगर आपकी त्वचा नाज़ुक है, तो क्लिंज़िंग मिल्क का इस्तेमाल करें। शरीर के लिए हल्का बॉडी वॉश और फिर नहाने के बाद मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल करें। होली के अगले दिन मेनीक्योर और पेडीक्योर करवाएं। वहीं बालों के लिए हल्के शैम्पू का इस्तेमाल करें और गर्म पानी से बाल न धोएं। इसके बाद तौलिए से बालों को हल्का-सा सुखाएं और सूदिंग हेयर मास्क लगा लें। थोड़ी देर बाद ठंडे पानी से बालों को धो लें और बालों में सीरम लगा लें।

एक हफ्ते बाद: जब त्वचा पर रंग हल्का हो जाए, तो फैशियल के लिए जाएं। इससे आपकी त्वचा पर रौनक और चमक लौट आएगी। बालों के लिए हफ्ते में एक बार हेयर मास्क का इस्तेमाल ज़रूर करें। इसके लिए अंडे के साथ एलोवेरा जेल, दही या फिर ज़ैतून के तेल का इस्तेमाल करें। अगर चेहरे पर लाल चकत्ते हो जाते हैं, तो इसके लिए कैलामाइन लोशन लगा सकती हैं। अगर 24 घंटों बाद भी लाल चकत्ते बरकरार रहते हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

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Sudden Weight Loss: बिना कुछ किए अगर घट रहा है वजन तो खतरे की है ये घंटी

असंतुलित खानपान और अस्त-व्यस्त दिनचर्या के कारण आजकल बहुत से लोग वजन बढ़ने से परेशान हैं। वहीं दूसरी तरफ कई लोग ऐसे भी हैं जो खूब खाने-पीने के बाद भी अपना वजन नहीं बढ़ा पा रहे हैं और दुबलेपन से परेशान हैं। लेकिन अगर कुछ समय से आप ये नोटिस कर रहे हैं कि आपका वजन बेवजह ही घटता जा रहा है, तो ये आपके लिए एक गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। और आपको तुरंत अपने चिकित्सक को दिखाने की जरूरत है। तो आइए जानते हैं उन कारणों के बारे में जिनसे अचानक वजन घटने की समस्या पैदा हो सकती है...

1. तनाव के कारण
आजकल बहुत से लोगों ने अपनी जीवनशैली इस तरह की बना ली है कि कोई न कोई चिंता उन्हें सताती रहती है जो धीरे-धीरे डिप्रेशन में बदल जाती है। और इस तनाव का गलत असर न केवल आपके दिमाग पर होता है, बल्कि आपकी आदतों को भी प्रभावित करता है। तनाव के कारण आप निराश और चिड़चिड़े तो होते ही हैं, साथ ही आपके सोने, खाने-पीने का समय भी प्रभावित होता है। जो अचानक वजन घटने का कारण हो सकता है।

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2. सीओपीडी से ग्रस्त व्यक्ति
सीओपीडी यानि क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज, फेफड़ों की बीमारियों का एक ऐसा समूह है जिसमें इंसान को सांस लेने में परेशानी होती है। क्योंकि इस बीमारी में आपके फेफड़ों तक हवा ले जाने वाली नली में सूजन आ जाती है। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी के आगे बढ़ने पर इंसान के वजन में ज्यादा कमी होने जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।

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3. हार्मोनल असंतुलन में
आपके अचानक घटते हुए वजन के पीछे हार्मोनल असंतुलन भी हो सकता है। जिससे आपको थकान, मसल्स कमजोर होना, खानपान में कमी, रक्तचाप से जुड़ी समस्याओं के साथ ही आपका वेट लॉस भी होने लगता है।

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4. थाइरॉयड होने पर
थाइरॉयड ग्लैंड हॉर्मोन थाइरॉयड का निर्माण करते हैं जिससे आपके मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। जिससे आपकी पाचन क्रिया और आपके द्वारा कितनी जल्दी कैलोरी बर्न होती है इस बात का भी निर्धारण होता है। लेकिन यदि थाइरॉयड ग्लैंड ज्यादा मात्रा में थाइरॉयड का निर्माण करने लग जाए तो उस स्थिति में अचानक से आपका अधिक वजन घट सकता है।

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यह भी पढ़ें: बच्चों के मिट्टी खाने के पीछे आखिर क्या है वजह? जानिए कैसे छुड़ाएं ये आदत

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पैरों में सूजन और मांसपेशियों में बढ़ रहा दर्द, तो समझ लें बॉडी में ज्यादा हो रही है ये एक चीज

फिल्म शोले का गब्बर-कालिया डायलॉग आपके जेहन में जरूर होगा, जिसमें नमक का जिक्र आता है। कालिया कहता है कि सरदार मैंने आपका नमक खाया है, तो गब्बर जवाब देता है- तो अब गोली खा। जी हां, आज हम बात कर रहे हैं नमक की। अगर आपने भी एक निश्चित मात्रा से ज्यादा नमक खाया, तो आपको भी दवा की गोलियां खानी पड़ सकती हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो एक दिन में आपके खान-पान में 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं होना चाहिए। ये एक व्यावहारिक सच है कि हमें पता भी नहीं चलता और हम ज्यादा नमक खाने लगते हैं। अगर हम कम नमक खाते हैं तो हमारा टेस्ट बड उसी के मुताबिक ढल जाता है, वहीं अगर हम ज्यादा नमक खाने लगते हैं तो कुछ समय बाद हल्के नमक वाली चीजें फीकी लगने लगती हैं।

मेडिकल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ज्यादा नमक खाने से शरीर में कई ऐसे लक्षण नजर आते हैं, जिनका समय रहते इलाज न किया जाए तो हालत गंभीर भी हो सकती है।
ज्यादा नमक खाने से नुकसान
डिहाइड्रेशन- ज्यादा नमक खाने से हमारे शरीर में पानी की कमी हो सकती है। वजह ये है कि नमक में पया जानेवाला सोडियम हमारी आंतों के जरिये शरीर में अवशोषित होता है और अपने साथ पानी भी लाता है। यह खून के पार्ट जैसे प्लाज्मा, टिशूज को जरूरी खनिज उपलब्ध कराता है। शरीर में ज्यादा सोडियम पहुंचने से आपको ज्यादा पसीना आ सकता है, पेशाब आ सकती है, उल्टी और दस्त की भी समस्या हो सकती है। आपको बार-बार प्यास लगती है, जिसकी वजह से आपको बार-बार पानी पीना पड़ सकता है और स्थिति काबू में न आने पर डॉक्टर से सलाह भी लेनी पड़ सकती है।
ब्लड प्रेशन बढ़ने का रिस्क - शरीर में खून की सप्लाई में बड़ी मात्रा में सोडियम होता है, तो इसे पतला करने के लिए पानी हमारे टिशूज से बाहर निकल जाता है। इससे टिशूज को खतरा पैदा हो जाता है। सबसे ज्यादा ***** मस्तिष्क के टिशूज को लेकर रहता है। जैसे ही ये टिशूज सिकुड़ते हैं, वे अपने सामान्य जगहों से दूर चले जाते हैं। ऐसे में रक्त वाहिकाओं में हेमरेज हो सकता है और मस्तिष्क में तरल पदार्थ का निर्माण कोमा की वजह बन सकता है। इसके अलावा फेफड़ों में भी पानी भरने का रिस्क बढ़ सकता है। इसके चलते सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

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शरीर में सूजन - नमक के ज्यादा सेवन से शरीर में सूजन हो सकती है। दरअसल, नमक शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ाता है और ज्यादा पानी पीने की इच्छा के चलते हमारे शरीर में पानी की अधिकता हो जाती है। ये पानी आपके टिशूज में चला जाता है और शरीर के अलग-अलग अंगों में रुक जाता है। मेडिकल टर्म में इसे एडीमा कहते हैं। टिशूज में भी इसकी वजह से सूजन बढ़ जाती है।
ऑस्टियोपोरोसिस- शरीर में ज्यादा नमक और प्रोटीन के चलते पेशाब में कैल्शियम बढ़ने का रिस्क होता है। इससे हडि्डयों में से कैल्शियम निकलने लगता है। इसलिए ज्यादा नमक खाने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। हडि्डयां कमजोर होने लगती हैं और उनके टूटने की आशंका बढ़ जाती है।

मांसपेशियों में दर्द- हमारी मांसपेशियों के लिए नमक जरूरी है। इससे मांसपेशियों में लचीलापन बना रहता है, नर्वस सिस्टम सुचारु तरीके से काम करता है और खून की समान सप्लाई बनी रहती है। यह आपके शरीर में द्रव के स्तर को भी नियंत्रित करता है। लेकिन हम जब ज्यादा नमक खाते हैं, तो ये मांसपेशियों में दर्द का भी कारण बनता है। इसके पीछे एक कारण ये भी है कि नमक ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है और वॉटर रिटेंशन को बढ़ा कर मांसपेशियों में ऐंठन लाता है।
इसलिए किसी को भी नमक के ज्यादा सेवन से बचना चाहिए। नहीं तो, ये शरीर को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाते हैं। ये आगे चलकर, दिल और किडनी से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकते हैं और आपकी सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं

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साबूदाना खाने के हैं शौकीन तो जान लें इसके नुकसान भी, इन बीमारियों में बिलकुल न खाएं

साबूदाना की खीर हो या खिचड़ी, सभी इसे चाव से खाते हैं। शिशुओं को भी पोषण के लिए साबुदाना दिया जाता है। व्रत में साबूदाना न केवल पेट भरता है बल्कि ये सुपाचय भी माना जाता है, लेकिन अति किसी भी चीज की बुरी हेाती है। अगर आप रोज की डाइट में साबुदाना शामिल कर रहे हैं तो ये आपके लिए नुकसान दायक हो सकती है। कभी काल साबुदाना खाना चलता है, लेकिन रोज खाने से इसके क्या नुकसान हो सकते हैं चलिए जानें।

साबूदाना प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फाइबर, एनर्जी, कार्बोहाइड्रेट, जिंक, फॉस्फोरस, पोटैशियम की प्रचुर मात्रा के चलते इसे सेहत के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है। ये एलिमेंट शरीर को कई रोगों से बचाने में मददगार साबित हो सकते हैं। साबूदाना डायरिया जैसे रोगों में भी फायदेमंद होता है, लेकिन इतने गुणों के बाद भी जरूरत से ज्यादा साबूदाना का सेवन सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है। तो चलिए जानते हैं साबूदाना किन परिस्थितियों या समस्याओं में खाना नुकसान होता।

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इन बीमारियों में साबूदाना बिलकुल न खाएं
डायबिटीज- अगर आपको शुगर की समस्या है तो साबूदाना का ज्यादा सेवन न करें क्योंकि साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट अधिक होता है, जो ब्लड शुगर के लेवल को बढ़ा सकता है।
मोटापा- बढ़े हुए वजन को कम करने के लिए आप डाइट पर हैं तो साबूदाना को डाइट में शामिल न करें क्योंकि साबूदाना में कैलोरी की मात्रा काफी अधिक होती है जो वजन को बढ़ाने का काम कर सकती है।
पाचन- साबूदाना को सुपाच्य की श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन लगातार साबूदाना का सेवन ब्लोटिंग, कब्ज की समस्या पैदा कर सकता है।

किडनी स्टोन- किडनी स्टोन के रिस्क वाले लोगों को कई चीजें खाने की मनाही होती है। इसमें साबूदाना को भी ऐड कर लें। साबूदाना के सेवन से ये समस्या बढ़ सकती है।
कब्ज का कारण-ज्यादा कार्बोहाइड्रेट कई बार कब्ज का कारण भी बन जाता है। क्योंकि, इसमें चिकनाहट के साथ कार्ब्स होते हैं इसलिए ये आंत में जाकर चिपक जाते हैं। इसलिए पेट साफ नहीं हो पाता।
(डिस्क्लेमर: आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सक सलाह जरूर लें। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)



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एक्ने और सनर्बन के साथ रिंकल्स भी होंगे गायब, जानिए राइस वाटर का जादुई कमाल

चावल के पानी में एंटीऑक्सीडेंट अमीनो-एसिड विटामिन-बी और विटामिन-ई की भरपूर मात्रा होती है। चावल के पानी का दो तरह से आप प्रयो कर सकते है। एक चावल को पानी में भीगा दें और करीब एक घंटे बाद छान लें। दूसरा चावल के माढ़ के रूप में। दोनों ही तरह के चावल के पानी से आपको क्या फायदे मिलेंगे चलिए जानें।

चावल का पानी कैसे बनाएं
कच्चे चावल लें और उसे तीन पानी धो कर 1 घंटे के लिए भीगाकर रख दें। एक घंटे बाद उस पानी को आप चावल को छान लें। अब ये पानी तैयार है। माढ़ बनाना भी आसान है। चावल को तीन गुने पानी में डाल कर उबाल लें और जब चावल पक जाए तो उसे छान लें। अब ये गाढ़ा सा पानी यानी माढ़ आपके काम आएगा।

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जानिए चावल के पानी का ये लाभ
नेचुरल टोनर की तरह करेगा काम
बेदाग और चमकदार स्किन पाने के लिए आप चावल के पानी में रुई को डुबोकर इसे चेहरे पर लगाएं। इसे दो बार दोहराएं और फिर सूखने दें। 10 मिनट बाद चेहरे को धो लें। इससे आपका चेहरा चमक उठेगा।
एक्ने होगा दूर
चावल के पानी से पिंपल्स और एक्ने जैसी समस्या भी दूर होती हैं। इसे कुछ देर फ्रिज में ठंडा करने के लिए रखें और फिर पिंपल पर लगा लें। चाहें तो इसमें नींबू के रस भी डाल दें।
सनबर्न से मिलेगा आराम
सनबर्न होने पर आप चावल के पानी का प्रयोग कर सकते हैं। चाहें तो इस पानी में एलोवेरा जेल मिला लें। इससे टैनिंग भी दूर होगी और जलन से भी आराम मिलेगा।

चेहरे पर निखार के लिए
अपने चेहरे पर चावल के पानी को लगाएं और आधे घंटे तक लगे रहने दें। ये न सिर्फ सेल ग्रोथ को बढ़ावा देगा, बल्कि रक्त संचार को भी बढ़ाएगा, जिससे चेहरे पर निखार आ जाएगा।
बालों के लिए
चावल का पानी बालों को प्रोटीन देता है। इससे न सिर्फ बालों का झड़ना बंद होता है, बल्कि बाल लंबे भी होते हैं।
डैंड्रफ से बचाव
चावल का पानी डैंड्रफ का दुश्मन होता है। अगर आप काफी समय से रूसी के लिए खास शैम्पू या सीरम का इस्तेमाल कर रही हैं, तो इस बार चावल का पानी इस्तेमाल कर देखें। हफ्ते में दो बार इससे बालों को धोएं और फर्क देखें।

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माढ़ से दूर होंगी झुर्रियां
चावल का माढ बना लें और इसे अपने चेहरे पर रुई की मदद से लगाएं। चाहे तो इसमें आप आरारोट भी मिक्स कर सकते हैं। जब ये सूख जाएं तो इसे धो दें और किसी क्रीम से चेहरे पर मसाज कर लें। वीक में 3 दिन ये उपाय करें। आपकी झुर्रिया खत्म होंगी और चेहरे पर निखार भी आएगा।

(डिस्क्लेमर: आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सक सलाह जरूर लें। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)



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इन गंभीर बीमारियों का एक इलाज है गिलोय, लेकिन कैसे और कितनी मात्रा लें? पढ़िए पूरी जानकारी

गिलोय आयुर्वेद की वो औषधि है, जो शरीर के तमाम रोगों को कंट्रोल करने वाली होती है। गिलोय में मानसिक विकार से लेकर शारीरिक विकार तक को ठीक करने का गुण होता है। इसमें कई असाध्य रोगों को भी काबू में करने का गुण होता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली ये औषधिय खून के विकार और कमियों को दूर करने के साथ शरीर के आंतिरिक और बाहरी हर तरह की समस्या को दूर करने में कारगर है। तो चलिए जानें कि गिलोय के फायदे क्या हैं और इसे कितनी मात्रा में लेना चाहिए।

इन बीमारियों को सही करने में गिलोय है वरदान
ऐंठन संबंधित समस्याओं से छुटकारा -नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफॉरमेशन की रिपोर्ट बताती है कि गिलोय शरीर में होने वाली ऐंठन और अकड़न को दूर करने में फायदेमंद है।
गठिया के मरीजों के लिए रामबाण औषधि-एनसीबीआई के अनुसार गिलोय में एंटी अर्थराइटिस गुण होते हैं और ये रुमेटाइड ऑर्थरायटिस्ट में बहुत फायदेमंद है।
हाथी पांव में कारगर- फीलपांव, हाथी पांव या एलिफेंटेसिस (Elephantiasis) में पैर बुरी तरह से सूज जाते हैं। ऐसा फिलेरियल वर्म (Filarial Worm) के कारण होता है। इस बीमारी में गिलोय का जूस बहुत कारगर होता है। ये सूजन को कम करने में कारगर होता है।

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घाव भरने वाला- गिलोय में एंटीमाइक्रोबियल गुण होता है और इस कारण ये शरीर में प्रवेश करने वाला किसी भी प्रकार का हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में कारगर होता है। साथ ही फोड़े-फुंसी को दूर कर घाव को तेजी से भरने का काम करता है। सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या से बचाने में भी गिलोय फायदेमंद होता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभदायक-शरीर में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने गिलोय कारगर है क्योंकि इसमें एंटीडायबेटिक गुण होता है।
अस्थमा से बचाने वाला- अस्थमा की समस्या हो तो गिलोय की जड़ चबाने की सलाह दी जाती है। इससे सीने का कड़ापन दूर होता है और गले में घरघराहट, कफ आना और सांस से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है

स्ट्रेस दूर करने में कारगर- गंभीर एंग्जाइटी और स्ट्रेस में गिलोय रामबाण है। गिलोय शरीर में मौजूद टॉक्सिन को शरीर से बाहर निकाल देता है। ये शरीर और दिमाग को शांति देने के साथ मेमोरी को भी अच्छा बूस्ट देता है।
बावाीसर की समस्या होगी दूर-बवासीर या पाइल्स में धनिया के पत्ते, गिलोय और हरड़ को एक साथ बराबर मात्रा में पीस लें। इस मिश्रण की 20 ग्राम मात्रा लेकर आधा लीटर पानी में मिलाएं और उबालें। उबल जाने के बाद थोड़े से गुड़ के साथ इसका दिन में दो बार सेवन करें।

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आंखों की रौशनी पर कारगर -आंखों की हर तरह की समस्या में गिलोय कारगर है। ये कॉर्निया डिसऑर्डर, मोतियाबिंद और स्कलेरल जैसी समस्याओं को भी ठीक कर सकता है। 11.5 ग्राम गिलोय का जूस लेकर उसमें 1 ग्राम शहद और 1 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को आंखों के ऊपर लगाया जा सकता है।
यौन बीमारियों दूर होंगी- यौनेच्छा को नेचुरल तरीके से बढ़ाने के लिए गिलोय जूस का सेवन फायदेमंद होता है। गिलोय में एफ्रोडिजिक या यौनेच्छा को बढ़ाने वाले गुण पाए जाते हैं। ये आपकी मैरिड लाइफ को बेहतर बनाने में भी मदद करता है।

श्वांस रोग में असरदार- सांस लेने से जुड़ी समस्याएं जैसे सर्दी-जुकाम, टॉन्सिल, कफ आदि गिलोय के सेवन से आसानी से ठीक हो सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि गिलोय में एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण पाए जाते हैं। ये गुण सांस की समस्याओं को कंट्रोल करने और दूर करने में मदद करता है।
एनिमिया-शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की कम हो जाने से अनीमिया की समस्या होती है। अनीमिया के लक्षणों में सुस्ती, आलस, सांस उखड़ना आदि शामिल है। इन लक्षणों से छुटकारा पाने के लिए गिलोय के पाउडर से बने काढ़े का सेवन किया जा सकता है।
यूरिन प्रॉब्लम में कारगर-मूत्र विकार या पेशाब की नली में होने वाली समस्याओं जैसे जलन का अनुभव होना या पेशाब करने में दर्द होने में गिलोय का सेवन बहुत फायदेमंद है।
लिवर डिसऑर्डर को ठीक करने वाला-लिवर से जुड़ी हर समस्या में गिलोय फायदेंमद होता है। पीलिया से लेकर फैटी लिवर तक को गिलोय कंट्रोल करता है।

जानिए कितनी मात्रा में लेना चाहिए गिलोय
गिलोय का सेवन बिना डॉक्टर या आयुर्वेद के वैद्य की सलाह लिए बिना नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार, एक दिन में स्वस्थ मनुष्य गिलोय की 20 gm मात्रा का अधिकतम सेवन कर सकता है। अगर कोई व्यक्ति गिलोय का जूस पी रहा है तो भी इसकी मात्रा 20 ml से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इससे ज्यादा सेवन करने पर गिलोय नुकसान भी कर सकती है।

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स्‍किन से दूर होंगे दाग-धब्‍बे और पिंपल्स, मुठ्ठी भर करी पत्ते का जानिए जबरदस्त कमाल

जी हां, करी पत्ते में मौजूद औषधिय गुण आपकी सेहत के साथ आपके सौंदर्य निखार में भी जबरदस्त असर दिखाते हैं। करी पत्ते के पेस्ट को स्किन पर लगाने से जादुई असर नजर आते हैं। कील-मुंहासों को दूर करने के साथ ये इनसे पैदा हुए दाग-धब्बों को दूर करने में भी कारगर होते हैं। बाल से लेकर स्किन तक के लिए इसके हरे पत्ते संजीवनी बूटी होते हैं।

एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल गुणों के साथ-साथ करी पत्ता में त्वचा के लिए कुछ आवश्यक विटामिन जैसे विटामिन ए और सी होते हैं। यही कारण है कि ये त्वचा और बाल के लिए फायदेमंद होते हैं। करी पत्तों का सादा पेस्ट भी अपने आप में बहुत कारगर होता है, लेकिन इसके साथ कुछ और चीजें मिला ली जाएं तो सोने पर सुहागा जैसा काम होता है।

तो आइए जानें कैसे आप भी पा सकते हैं सुंदर त्वचा

1. आप चाहे तों ताजी पत्तियों का पेस्ट यूज करें या करी पत्ते को पहले छाएं में धूप की दमक सेसूखा लें। फिर इसका पाउडर बना लें। फिर इसमें एक छोटा चम्मच मुल्तानी मिट्टी और हल्दी मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगा लें। सूखने पर इसे धो लें। ये चेहरे से झुर्रियों को भी दूर करता है।

2. करी पत्ते में रंग निखारने के साथ ही दाग-धब्बों को दूर करने का भी गुण होता है। करी पत्ते को कच्चे दूध के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगाएं और सूखने पर धो लें। इससे चेहरे के दाग-धब्बे भी दूर हो जाते हैं।

3. अगर आप भी पिंपल्स से परेशान हैं, तो करी पत्ता से बेहतर उपाय कुछ भी नहीं है। इसकी एंटीबैक्टिरिअल प्रोपर्टीज़ से पिंपल वाले बैक्टिरिया को ख़त्म करता है। इसके लिए 3-4 करी पत्ता धोकर इसका पेस्ट बना लें। इसमें नींबू का रस मिलाकर पिंपल पर लगाएं। सूखने पर धो लें।

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4.स्किन पर कहीं भी काले धब्बे हों आप वहां करी पत्ते को लगा सकते हैं। ये कोहनियों के कालेपन को भी दूर करने में कारगर है। इसके लिए नींबू के साथ करी पत्ते का पेस्ट बना कर इसे लगा लें और सूखने पर इसे धो लें।

5. अगर आप भी झड़ते बालों से परेशान हैं, तो करी पत्ते से अपना घरेलू तेल बनाएं। इसके लिए एक पैन में आधा कटोरी नारियल तेल लें। इसमें कुछ साफ करी पत्ते डालकर गर्म करें। जब ये मिक्सचर अपना रंग बदलने लगे, तो गैस बंद कर दें। ठंडा होने पर तेल को बॉटल में छान लें। सोने से पहले बालों पर इसका इस्तेमाल करें।

6. करी पत्ता डैंड्रफ भी दूर कर सकता है। इसके लिए करी पत्ते को पीसकर पेस्ट बनाएं और इसमें दही मिलाकर अपने पूरे सिर पर अच्छी तरह लगाएं। सूखने पर इसे धोकर शैम्पू कर लें। हफ्ते में दो बार इसका इस्तेमाल करें।

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7.अगर स्किन पर टैंनिंग हो तो आप करी पत्ते के साथ नींबू और कच्चे दूध को मिक्स कर लगाएं। इससे टैनिंग दूर होगी। चाहे तो करी पत्ते को दही के साथ मिक्स कर पेस्ट बना लें और इसमें मुलतानी मिट्‌टी मिक्स कर लें। ये भी टैनिंग को दूर करेगा और चेहरे की जलन को भी शांत करेगा।

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अंडरआर्म्स का कालापन होगा एक हफ्ते में गायब, बस आजमा कर देंगे ये अचूक उपाय

अंडरआर्म्स में कालापन आना बहुत सामान्य बात है, लेकिन जितनी आसानी से ये कालापन आता है उतनी ही मुश्किल से ये जाता है। अंडरआर्म्स की स्किन बहुत पतली होती है, इसलिए इस जगह बहुत एक्सपेरिमेंट करने से फायदे की जगह नुकसान ज्यादा होते हैं। अंडरआर्म्स में एक बार कालापन जम जाए तो वह आसानी से तो नहीं जाता, लेकिन अगर आप पेशेंस के साथ यहां बताएं उपाय आजमाएं तो शर्तिया आपके अंडरआर्म्स का रंग साफ होगा।

बाजार में मिलने वाली तमाम क्रीम या स्क्रब केवल दिखावे के लिए होते हैं। महंगे खर्च के बात भी अगर आपको अंडरआर्म्स में कोई फर्क महसूस नहीं हुआ तो आप इन उपायों को आजमा लें। ये उपाय आसान और सस्ते होने के साथ बेहद असरदार भी हैं।

अंडरआर्म्स के कालेपन का जाने कारण

अंडरआर्म्स के कालेपन की वजह जानना सबसे जरूरी है, क्योंकि बिना इसे जाने आर्म्सपिट को साफ नहीं किया जा सकता। अंडरआर्म्स के कालेपन के लिए कई कारण जिम्मेदार होते हैं। अगर आप इनमें से कोई भी गलती कर रहे तो उससे दूर हो जाएं।

  • अंडरआर्म्स के बालों को साफ करने के लिए बहुत ज्यादा हेयर रिमूवर क्रीम का इस्तेमाल।
  • बालों को हटाने के लिए रेज़र का यूज करना।
  • अंडरआर्म्स की डेडस्किन को हटाने का प्रयास न करना
  • बहुत ज्यादा अलकोल युक्त डीयो का यूज
  • टेरिकॉट या पॉलिस्टर के कपड़ों का ज्यादा प्रयोग
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अंडरआर्म्स का कालापन दूर करने के अचूक उपाय

बेकिंग पाउडर - बेकिंग पाउडर में कालापन दूध करने के गुण मौजदू हैं। बस बेकिंग पाउडर को अंडरआर्म पर नींबू के साथ मिक्स कर लगा दें और कुछ देर के लिए छोड़ दें। जब ये सूख जाए तो हाथ गिला करें और बहुत ही हल्के हाथों से मजास करें। चाहें तो नींबू के छिलके से मसाज करें। फिर सादे पानी से धो कर ऑयल फ्री मॉश्चराइजर का लगा लें। इसे रोज 7 दिन करें। फर्क दिख जाएगा।
विटामिन सी की टैबलेट- अगर आपके पास बहुत समय नहीं, तो विटामिन सी की टैबलेट को पानी में घोलें और इसे अपने अंडरआर्म्स पर लगा कर कुछ देर छोड़ दें। फिर एक जेल स्क्रब लेकर हलके हाथों से मालिश कर करते हुए इसे साफ कर दें।

एक्टिवेटेड चारकोल- कालेपन को दूर कने में एक्टिवेडेट चारकोल का कोई तोड़ नहीं, बस इसे अंडरआर्म्स पर पानी के साथ पेस्ट बना कर लगा दें और सूखने पर इसे स्क्रब करते हुए साफ कर लें।
ये भी क्रीम और लोशन हैं मददगार
रेटिनॉइड्स युक्त क्रीम का प्रयोग-अंडरआर्म्स में आप रेटिनॉइड्स युक्त क्रीम का प्रयोग करें। इसमे ंविटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है और ये कालापन दूर करने में मददगार होता है।
AHA लोशन रोज़ाना इस्तेमाल - अंडरआर्म्स पर AHA लोशन रोज़ाना इस्तेमाल करना भी कालेपन से मुक्त करता है।



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Saturday, 12 March 2022

क्यों झड़ने लगते हैं अचानक से पुरुषों के बाल? जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय

महिला या पुरुष किसी के भी अगर रोजाना 50-100 बाल झड़ते हैं तो ये सामान्य माने जाते है, लेकिन अगर इससे अधिक बाल झड़ते शुरू हो जाएं तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। बालों के गिरने के बाद अगर बाल वहां नहीं आते तो ये हेयर लॉस की स्थिति होती है। पुरुषों में बाल गिरने के बाद दोबारा वापस कई बार नहीं आते और धीरे-धीरे ये स्थिति बॉल्डनेस में बदल जाती है। अगर आपके साथ भी अचानक से तेजी से बाल गिरने की समस्या हो रही तो आपको भी सतर्क हो जाना चाहिए। चलिए जानें कि पुरुषों के बाल अचानक क्यों झड़ते हैं और इसके पीछे क्या वजह होती है।

बाल अचानक झड़ने के लक्षण

  • सिर से बाल गुच्छों में छड़ना
  • वृत्ताकार या पैचेज में बाल का निकलना
  • बालों का रोज अधिक मात्रा में निकलना
  • पूरे शरीर के बालों का झड़ना
  • स्केलिंग के पैच, जो खोपड़ी पर फैलते हैं।
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पुरुषों के अचानक बाल झड़ने के कारण
1. तनाव
तनाव सबसे बड़ा कारण होता बाल झड़ने का। अमूमन जिन पुरुषों में लगातार तनाव रहता है उनमे 3-6 महीने बाद बाल तेजी से झड़ने की समस्या दिखती है। तनावपूर्ण जीवन हेयर लॉस का बड़ा कारण होता है।
2. इम्युन सिस्टम के कारण
कई बार इम्युन सिस्टम के कारण भी बालों के रोम छिद्र में दिक्कत होने लगती है। इससे अचानक से बाल झड़ने लगते हैं। इस स्थिति में बाल गोल पैच के रूप में निकलने लगते हैं। लेकिन इलाज के जरिए बालों को दोबारा उगाया जा सकता है।
3. मेडिकल कंडीशन
आंत के रोग और थायराइड होने पर बाल तेजी से झड़ते हैं। वहीं, थायराइड होने पर भी बालों का झड़ना चालू हो जाता है।
4. दवाइंयों का साइड इफेक्ट
कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट के चलते भी बाल झड़ने लगते हैं। ब्लड थिनर और कीमोथेरेपी दवाएं बालों के अचानक झड़ने का कारण हो सकते हैं। हार्मोनल असंतुलन भी बालों के अचानक झड़ने का कारण बन सकता है।

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5. पोषक तत्वों की कमी
पोषक तत्वों की कमी से भी बाल झड़ने लगते हैं। बालों के लिए विटामिन ए, आयरन, फोलिक एसिड शरीर में प्रचुर मात्रा में न हों तो इससे बालों का झड़ना चालू हो जाता है।

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बालों को झड़ने से कैसे बचाएं

  • बालों की सही तरीके से देखभाल करें। बालों को ब्रश या कंघी करते समय टगिंग से बचें। खासकर जब आपके बाल गीले हों।
  • चौड़े दांतों वाली कंघी बालों को खींचने से रोकने में मदद कर सकती है।
  • गर्म रोलर्स, कर्लिंग आयरन, गर्म तेल से बचें।
  • रबर बैंड, बैरेट और ब्रैड का उपयोग करने वाली शैलियों से बालों पर तनाव पैदा कर सकते हैं। इसलिए इनसे भी बचें।
  • तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें। इसके लिए योग का अभ्यास करें और खुश रहें।
  • कोई भी दवाई या सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह पर ही लें।
  • अपने बालों को सूरज की रोशनी और पराबैंगनी प्रकाश के अन्य स्रोतों से सुरक्षित रखें।
  • एल्कोहल, धूम्रपान और तंबाकू का सेवन बंद करें। क्योंकि पुरुषों में धूम्रपान भी गंजेपन का कारण बन सकता है।
    (डिस्क्लेमर: आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सक सलाह जरूर लें। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)



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रंग पड़ गया है काला या टैंनिंग से हैं परेशान? तो क्रीम या उबटन नहीं, इस एक चीज से मिलेगा निखार

चेहरे का रंग कई बार धूप ही नहीं प्रदूषण और गलत खानपान के चलते भी उड़ जाता है। चेहरे पर कालापन आना आम बात है, लेकिन कई बार चेहरे का ओरिजनल रंग ही गायब हो जाता है और टैनिंग की ऐसी लेयर जमा हो जाती है, जिससे हटाना मुमकिन नहीं हो पाता। क्या आप भी इस जिद्दी टैनिंग से परेशान हैं? तो आपके लिए यहां एक ऐसी संजीवनी बूटी लाए हैं, जिसे लगाने के एक हफ्ते के अंदर ही आपकी स्किन अपना ओरिजनल कलर वापस पा लेगी।
वही, अगर आपको अपने चेहरे का रंग निखरना है तो भी इस अचूक चीज का प्रयोग बहुत कारगर होगा।

एक्टिवेटेड चारकोल
एक्टिवेटेड चारकोल एक कोयला ही होता है, लेकिन ये नारियल की खोपड़ी, पेट्रोलियम कोक, कोयला, लकड़ी के कोयले से बनता है और इसे बहुत ही हाई टेंपरेचर पर प्रॉसेस किया जताा है। इससे ये एक्टिवेट हो जाता है। एक्टिवेटेड चारकोल को नमी और हवा से बचा कर रखने की जरूरत होती है। अगर इसमें नमी या हवा आ जाए तो ये सामान्य कोयले के समान हो जाती है और काम नहीं करती है।
जानिए औषधिय गुणों से एक्टिवेटेड चारकोल के फायदे
एक्टिवेटेड चारकोर सेहत से लेकर स्किन तक के लिए फायदेमंद होता है। इसे अगर पानी में डाल दिया जाए तो पानी शुद्ध हो जाता है। दांत साफ करने में भी इसका यूज किया जाता है। लेकिन बात स्किन की करें तो ये रंग निखारने का बहुत ही कारगर नुस्खा है। एक्टिवेटेड चारकाेल का यूज कैसे करना चाहिए , चलिए जानें।

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चारकोल का ऐसे करें प्रयोग
चारकोल पाउडर को आप पानी में घोल लें और पेस्ट बना लें। याद रखें पेस्ट बनाने के बाद इसे लंबे समय तक छोड़ना नहीं होता है। इसे तुंरत चेहरे पर अप्लाई कर लें। बिलकुल मास्क की तरह। हालांकि, मास्क लगाने से पहले चेहरे को साफ जरूर कर लें और मास्क जब सूख जाए तो उसे सादे पानी से धो लें। अगर चेहरे पर चारकोल चिपका लगे तो आप इसे फेस वाश से भी साफ कर सकते हैं।
चारकोल स्क्रब
चारकोल पाउडर में कोई भी स्क्रब मिक्स कर उसे हल्के हाथों से चेहरे पर मलें। सूखने लगे तो इसमें थोड़ा पानी लें और कम से कम 10मिनट तक मसाज करें। अगर ड्राई स्किन है तो आप क्रीम बेस्ड स्क्रब का यूज करें और ऑयली स्किन है तो आप ऑयल फ्री स्क्रब में चारकोल मिलाएं। अच्छी तरह स्क्रबिंग के बाद आप इसे धो लें और किसी भी एंटी टैन क्रीम या लैक्टो टैन क्रीम से चेहेरे को मसाज करें। पानी से या फेसवॉश से चेहरा धो लें। वीक में कम से कम तीन या चार पर आपको चारकोल लगाना होगा।

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झुर्रिंया हटाने के उपाय
अगर चेहरे पर झुर्रियां हैं तो इसे भी चारकोल से हटाया जा सकता है। बस चारकोल पाउडर को आप फेविकोल में मिक्स करें और इसका पील ऑफ मास्क बना लें। इसे चेहरे पर नीचे से ऊपर की ओर ब्रश से लगाते जाएं। याद रहे ये पील ऑफ मास्क है, इसलिए आइब्रोज और बालों को बचाते हुए लगाएं। फेस पर लगने के बाद बिलुकल शांत हो कर लेट जाएं। बोले नहीं। जब ये सूख जाए तो इसे पील कर लें। इससे चेहरे पर ग्लो भी आएगा और झुर्रियां भी दूर होंगी। हफ्ते में दो बार इसे लगाना सही होगा।

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इंफेक्शन से बचने के लिए रोज पीते हैं काढ़ा, तो हो सकते हैं ये 5 नुकसान

कभी इम्यूनिटी बढ़ाने तो कभी कमजोरी और बीमारियों को दूर करने के लिए काढ़ा हम पीते हैं। काढ़े का सेवन आयुर्वेद में बहुत ही हेल्दी और इम्युन सिस्टम के साथ शरीर को डिटॉक्स करने वाला बताया गया है। लेकिन आयुर्वेद यह भी बताता है कि इस काढ़े का सेवन कब कितना करना चहिए। अगर आप ऐसा सोच कर रोज काढ़े पर काढ़ा पीते रहते हैं कि आप स्वस्थ रहेंगे, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये काढ़ा कई बार आपके लिए नुकसानदायक साबित हो जाता है।

मौसमी बीमारियों और इम्युनिटी के लिए काढ़ा पीना चाहिए, लेकिन मौसम, शरीर की प्रकृति और समय के अनुसार। जरूरत से ज्यादा काढ़ा पीने के पांच बड़े नुकसान होते है। तो चलिए जानें कि ज्यादा काढ़ा पीने से क्या नुकसान होते हैं।
काढ़ा पीने के जानिए ये नियम
काढ़ा पीना भर ही काफी नहीं होता है। उम्र, समय और मौसम के अनुसार काढ़ा पीना चाहिए। इसके साथ यह भी ध्यान देना जरूरी है कि काढ़ा आपके शरीर के प्रकृति के अनुसार है या नहीं। यदि शरीर के प्रकृति के अनुसार काढ़ा न हुआ तो वह फायदे से ज्यादा नुकसान करेगा।

रोजाना या ज्यादा काढ़ा पीने से हो सकती हैं ये परेशानियां
1- पेट गैस बनना और जलन होना
काढ़े की प्रकृति गर्म होती है। अगर इसे ज्यादा मात्रा में पीना शुरू कर दिया जाए तो पेट में गैस और जलन की समस्या बढ़ने लगती है।
2- नाक से खून बहना और सूखापन रहना
ज्यादा काढ़ा पीने से नाक के अंदर मौजूद पतली लेयर गर्मी से फट जाती है। इससे नाक से खून आना या बेहद सूखापन होने लगता है।
3- एसिड बनना और अपच की समस्या होना
पित्त की समस्या वाले लोगों में काढ़ा कई बार एसिडीटी की वजह बन जाता है। अपच और सिर दर्द के कारण अधिक कारण पीना बन सकता है।

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4- मुंह में छाले हो जाना
काढ़ा पेट में गर्मी पैदा करता है और इससे मुंह में छाले बनने की समस्या होने लगती है।
5- बार-बार पेशाब जाना और जलन होना
काढ़ा मूत्रवर्धक होता है। कई बार ये एसिडटी और ज्यादा मात्रा में एलकलाइन बनने के कारण यूरीन पास करने में जलन भी हो सकती है।
मौमस के हिसाब से पीएं काढ़ा
सर्दियों में काढ़ा एक से दो बार पिया जा सकता है, लेकिन गर्मी में काढ़ा पीने की आदत बदलनी होगी। ज्यादा गर्मी में काढ़े की जगह हर्बल जूस पीना ज्यादा फायदेमंद होगा।

वात, पित्त और कफ की प्रकृति है तो जानें काढ़े कैसा होना चाहिए
काढ़ा बनाने में ज्यादातर गर्म तासीर की चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें काली मिर्च, दालचीनी, हल्दी, गिलोय, अश्वगंधा, इलायची और सोंठ जैसी गर्म सामग्री डाली जाती है। ये सारी चीजें शरीर में गर्मी पैदा करती हैं। ऐसे में ज्यादा काढ़ा पीने से आपको नुकसान हो सकते हैं। अगर आपको कफ विकार है तो आप नियमित रूप से काढ़ा पी सकते हैं। ऐसा करने से कफ खत्म हो जाता है। लेकिन पित्त और वात दोष वाले लोगों को ज्यादा गर्म चीजों से बचना चाहिए। ऐसे लोगों को काली मिर्च, दालचीनी और सोंठ की मात्रा बहुत कम प्रयोग करनी चाहिए।

(डिस्क्लेमर: आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सक सलाह जरूर लें। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)



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बार-बार शरीर पर पड़ रहे नीले धब्बे, तो विटामिन्स की कमी ही नहीं, इस बीमारी का भी हो सकता है खतरा

शरीर पर चोट के बाद अगर नीले धब्बे आते हैं तो यह वहज चोट होती है, लेकिन कई बार बिना वजह ही स्किन पर नीले और डार्क ब्राउन धब्बे बनने लगते हैं। चोट से बनने वाले नील यानी कन्टूशन भीतरी चोट की वजह से होते हैं, लेकिन ये नील बिना चोट के होते हैं।

क्यों पड़ते हैं नील के निशान?
चोट लगने पर रक्त धमनियों को नुकसान पहुंचता है जिससे त्वचा के अंदर खून रिसता है और आसपास की कोशिकाओं में फैलता और नीला रंग बन जाता है, लेकिन जब बिना चोट के नीले निशान पड़े तो इसकी वजह एक नहीं कई होती है। बढ़ती उम्र से लेकर शरीर में पोषण की कमी और कई बार ये हेमोफिलिया व कैंसर का भी लक्षण होता है।
जानिए नील पड़ने की ये वजहें
उम्र का भी होता है असर- अगर आप 60 प्लस हैं और आपके स्किन पर ऐसे नील के दाग पड़ रहे तो संभव है ये उम्र का असर हो। बड़ी उम्र में ये नील, लाल रंग से शुरु होकर फिर पर्पल और गहरे नीले में बदलता है और कुछ दिनों में यह गायब भी हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि रक्त धमनियां सूरज की रोशनी का सामना करते-करते कमजोर होने लगती है। यह बुढ़ापे में सामान्य बात होती है।

विटामिन के की कमी
विटामिन के- शरीर में कई बार विटामिन्स और मिनरल की कमी के चलते भी ब्लड क्लॉटिंग की समस्या होती है। कई बार घाव या जख्म भरने में काफी वक्त लग जाता है, क्योंकि विटामिन के शरीर को प्रचुर मात्रा में नहीं मिल पाता। विटामिन के की कमी हो जाना क्योंकि यहीं तत्व खून को जमने में मददगार होता हैं।
विटामिन सी-नील पड़ने की दूसरी वजह विटामिन सी की कमी भी होती है। असल में विटामिन सी रक्त धमनियों को चोटिल होने से बचाता है जब ये शरीर में कम होता है तो हल्की सी चोट जिसे आप महसूस भी नहीं करते उससे नील पड़ जाती है।
जिंक -तीसरी वजह जिंक और आयरन की कमी हो सकती है। जिंक और आयरन की कमी से एनीमिया भी हो जाता है, जिसे भी नील पड़ने का एक बड़ा कारण माना जाता है।

विटामिन पी-बायोफ्लेविनॉइड यानी विटामिन पी में ऐसे बायोफ्लेविनॉइड होते हैं जो अंदरूनी चोटों से बचाते हैं। विटामिन पी आंवला, खट्टे फल जैसे संतरा, मौसमी व तिल चुकंदर और केले आदि में पाया जाता है।
कैंसर और कीमोथेरेपी
कैंसर जैसी बीमारी के लिए जो व्यक्ति कीमोथेरेपी करवा रहा हो तो उनके ब्लड प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं जिसके चलते शरीर पर बार-बार नील के निशान दिख सकते हैं।
थ्रोंबोफिलिया के चलते
थ्रोम्बोफिलिया एक ब्लड डिसऑर्डर हैं जिनमें प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं, इनके कारण भी शरीर की ब्लड क्लॉट की क्षमता कम हो जाती है जिससे नील के निशान पड़ते हैं।
हीमोफीलिया की वजह से
हीमोफीलिया एक जेनेटिक बीमाीरी है और इसमें एक बार अगर चोट लगने या किसी कारण से ब्लड निकलने लगे तो उसकी क्लॉटिंग नहीं हो पाती। अत्यधिक या बिना वजह से रक्तस्राव या नील पड़ना हीमोफीलिया का एक लक्षण है।

रक्त धमनियों का कमजोर होना
नील पड़ने का एक कारण एहलर्स-डेन्लस सिंड्रोम भी हो सकता हैं। इस समस्या में नील के निशान इसलिए पड़ जाते हैं क्योंकि कोशिकाएं और रक्त धमनियां कमजोर हो जाती हैं और आसानी से टूट जाती हैं। इस बीमारी के मुख्य लक्षण शरीर में अत्यधिक निशान पड़ना, घाव देर से भरना, इंटरनल ब्लीडिंग आदि।
दवाइयां और सप्लीमेंट
खून को पतला करने वाली कुछ दवाइयां खून को जमने से रोकती है जिससे लगातार शरीर पर नील पड़ सकते हैं। इसके अलावा कुछ नैचुरल सप्लीमेंट का अधिक इस्तेमाल भी खून को पतला कर देता है जिससे ब्लड जल्दी जमता नहीं है हालांकि ऐसा कम ही होता है क्योंकि ऐसे सप्लीमेंट लेने से खून पतला तभी होता है जब खून पतला करने वाली दवाओं को इनके साथ ही लिया जाए।

गंभीरता से कब लेना चाहिए
जब नील का निशान बड़ा हो जाए और उस पर बहुत ज्यादा दर्द भी हो जाए या फिर लंबे समय तक निशान
बना रहे तो मेडिकल जांच जरूर करवाएं।
अगर नील के आस-पास इंफेक्शन, पस या बुखार भी हो तो चिकित्सक परामर्श लेना बहुत जरूरी है।
अगर बार-बार निशान पड़ते हैं तो भी एक बार जांच करवाएं और इसका कारण जानें।

धब्बों से बचाव के लिए करें ये उपाय

  • डाइट में मल्टी-विटामिन जरूर खाएं।
  • अगर चोट की वजह से नील पड़ा है तो तुंरत बर्फ की टकोर करें। इससे नील उसी समय ठीक हो जाएगा।
  • नीले निशान ठीक करने में बेकिंग सोडा मददगार साबित हो सकता है। इसके लिए 1 चम्‍मच बेकिंग सोडा में 3
  • चम्मच पानी मिलाकर निशान पर लगाएं।
  • एलोवेरा की ताजी जैल को निकालकर प्रभावित जगह पर लगाएं।
  • खीरे के रस को टोनर की तरह इस्तमाल करें।

(डिस्क्लेमर: आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सक सलाह जरूर लें। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)



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Weight Loss Yoga: पतली कमर चाहिए तो रोजाना करें बस यह आसन, मिलेंगे ढेरों फायदे

नियमित योग करने से आपका शरीर मजबूत, सुडौल और लचीला बनता है। वहीं जो लोग मोटापे से परेशान हैं, वे लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर बढ़े हुए वजन की समस्या से निजात पा सकते हैं। इसके अलावा जिन महिलाओं को पतली कमर की चाह है उनके लिए भी योग करना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। तो आइए जानते हैं एक ऐसे योगासन के बारे में जिसे नियमित रूप से करने से आपकी पतली कमर की चाह पूरी हो सकती है और साथ ही जानें इसके अन्य स्वास्थ्य लाभ...

उत्तानपादासन

इस योगासन के द्वारा पेट की अतिरिक्त चर्बी के साथ ही कमर के घेरे को कम करने में काफी मदद मिल सकती है।

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उत्तानपादासन करने का तरीका

उत्तानपादासन करने के लिए सबसे पहले योग मैट बिछाकर उस पर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों को एक साथ सटाकर रखें। इसके बाद सांस अंदर भरते हुए अपने दोनों पैरों को एक साथ धीरे धीरे ऊपर की ओर उठाएं। ध्यान रहे कि आपकी हथेलियां शरीर के बगल में जमीन पर ही रहनी चाहिएं। पैरों को जमीन से 30 डिग्री तक ऊपर लेकर आएं। इस पोजीशन में कुछ देर तक सांस होल्ड करने के बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ेते हुए पैरों को एक साथ जमीन पर ले आएं। शुरुवात में आप यह योगासन 30 सेकेंड से 1 मिनट तक कर सकते हैं। बाद में समय बढ़ाते जाएं।

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उत्तानपादासन के फायदे

1. पेट अंदर करने में
2. पैरों की मासपेशियों को मजबूती दे
3. पाचन को बेहतर बनाए
4. नाभि संतुलन में लाभकारी
5. कब्ज, गैस, पेट दर्द जैसी समस्याओं से आराम दिलाए
6. ऊर्जावान बनाए रखने में सहायक

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