Sunday, 31 May 2020

Vitamin k: सेहत के लिए जरूरी है विटामिन के, ऐसे करें पूर्ति

Vitamin k: हमारे शरीर की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए विटामिन्स की अहम भूमिका होती है। हर विटामिन सेहत के लिए अलग-अलग काम करता है। शरीर में विटामिन के की कमी (Vitamin K Deficiency) से आपको कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसकी कमी को दूर करने के लिए आपको विटामिन के से भरपूर फूड्स (Vitamin K Rich Foods) का सेवन करने की जरूरत होती है। विटमिन-के हमारे शरीर को लिवर, हार्ट और किडनी से संबंधित खतरनाक बीमारियों से तो बचाता में मददगार हो सकता है। साथ ही हमारे ब्लड को पूरे शरीर में सर्कुलेट करने, चोट लगने पर खून का थक्का जमाने में मदद भी मददगार साबित हो सकता है।

विटामिन K हमारी हड्डियों की मजबूती (Strong Bones) के लिए भी बहुत जरूरी है। अगर आपके शरीर में विटामिन 'के' की कमी (Vitamin K Deficiency) है, तो चोट लगने या कटने पर बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है क्योंकि विटामिन 'के' ब्लड क्लॉटिंग में मदद करता है। गर्भवती महिलाओं में विटामिन 'के' (Vitamin K) भ्रूण के विकास के लिए जरूरी हो सकता हैं। इसके अलावा भी ये शरीर की कई समस्याओं से बचाव के लिए जरूरी होते हैं। गर्मियों में विटामिन के कमी को दूर करने के लिए कुछ चुनिंदा फूड्स ही होते हैं। यहां जानें कुछ ऐसे फूड्स के बारे में जो विटामिन के की कमी को दूर कर सकते हैं। रोजाना सेवन कर रहें हमेशा स्वस्थ।

विटामिन के की कमी से आपको हड्डियों के रोग भी हो सकते हैं। विटामिन K की कमी से ऑस्टियो-पोरोसिस की समस्या हो सकती है। अगर आप नहीं चाहते कि आपके शरीर में विटामन के और के2 की कमी हो तो अपने आहार में दही, पालक, कीवी, एवोकाडो, अनार, हरे मटर, नींबू, गाजर, बादाम, चिकन, अंडा, ब्रोकली, शलजम, पत्तागोभी और चुकंदर को शामिल करें।

कीवी का सेवन करें
कीवी में विटामिन के भरपूर मात्रा में पाया जाता है। कीवी एक ऐसा फल है जो मूल रूप से तो भारतीय नहीं है लेकिन भारत में फ्रूट स्टोर्स पर हर सीजन में मिलता है। इस फल की खास बात यह है कि यह फल पूरे साल किसी भी मौसम में खाया जा सकता है। क्योंकि यह पोषण में रिच होने के साथ ही शरीर के तापमान को संतुलित करने में सहायता कर सकता है। इसमें विटमिन-के, विटमिन-सी और विटमिन-ई पाए जाते हैं। कीवी का सेवन कर इम्यूनिटी को भी बढ़वा दिया जा सकता है साथ ही यह आपकी स्किन के लिए काफी फायददेमंद हो सकता है।

सोयाबीन आयल
शरीर में विटामिन के की कमी को पूरा करने के लिए आप सोयाबीन के तेल का सेवन कर सकते हैं। सोयाबीन के तेल का आप किसी भी खाने में इस्तेमाल कर सकते हैं। आप दैनिक जीवन में कुकिंग के लिए इस तेल का उपयोग करके शरीर में विटमिन-के की जरूरत को पूरा कर सकते हैं।

एवोकाडो
एवोकाडो को सुपरफूड माना जाता है। डाइट में एवोकाडो को शामिल करने के लिए कई स्वास्थ्य लाभ हैं। रोजाना एवोकाडो का सेवन करने से शरीर में विटामिन के की कमी को दूर किया जा सकता है। एवोकाडो स्किन के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है।

ब्रोकली
ब्रोकली विटामिन के का बेहतरीन स्रोत है। ब्रोकली में कई फाइटोकेमिकल्स और एंटीऑक्‍सीडेंट्स होते हैं। विटामिन 'के' की कमी के लिए लिए आप ब्रोकली की कमी को दूर कर सकते हैं। इसमें लोहा, प्रोटीन, कैल्‍शियम, कार्बोहाइड्रेट, क्रोमियम, विटामिन ए और विटामिन सी भी पाया जाता है। ब्रोकली को आप पका कर या कच्चा भी खा सकते हैं।



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गर्मी की सब्जी भिंडी में अच्छी सेहत के लिए कई गुण, जानें इसके फायदे

न्यू ट्रीशनिस्ट के मुताबिक भिंडी सेहत के लिए गुणकारी है। इसमें कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है। इसलिए यह बढ़ते वजन को नियंत्रित करने में भी फायदेमंद है। इसमें पाया जाने वाला पेक्टिन फाइबर बैड कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। भिंडी में फोलिक एसिड, आयरन, विटामिन-ए, बी, सी व के और एंटीऑक्सीडेंट्स तत्त्व भी होते हैं। यह रक्तसंचार को दुरुस्त रखती है जिससे स्किन में चमक आती है, साथ ही बालों के झडऩे और चेहरे के दाग-धब्बों को कम करती है। भिंडी के सेवन से पाचन तंत्र में सुधार के साथ ही कब्ज व गैस जैसी कई समस्याओं से छुटाकरा मिलता है।

यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़कर हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है। भिंडी में एंटीऑक्सीडेंट, न्यूरोप्रोटेक्टिव, एंटीडायबिटिक, एंटीहाइपरलिपिडेमिक और थकावट रोधी गुण होते हैं। ये सभी गुण आपको कैंसर से बचाने में मदद करते हैं। भिंडी में मौजूद लेक्टिन से स्तन कैंसर का इलाज भी किया जा सकता है।



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तुलसी की पत्ती का एेसे करें इस्तेमाल, जानें इसके फायदे

एंटीऑक्सीडेंट्स का स्त्रोत तुलसी के पत्ते और बीज शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। जानें कैसे-

हर में घर की वैद्य तुलसी हर तरह से सेहत के लिए अच्छी होती है। औषधीय गुणों व एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर तुलसी के पत्तों को मौसमी रोगों से बचाव के लिए रोजाना खाने या उबालकर बनाए गए काढ़े को पीने की सलाह देते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार तुलसी के पत्ते तासीर में काफी गर्म होते हैं जिन्हें उबालना नहीं चाहिए। गर्म मौसम में तुलसी की सेवन कम करना चाहिए।

तुलसी में पारे की मात्रा होती है जिसे उबालने से इसकी तासीर और ज्यादा बढ़ जाती है। इसके बाद इसके प्रयोग से शरीर का तापमान भी बढ़ता है जिससे फोड़े-फुंसी, नकसीर, रक्तस्त्राव की समस्या हो सकती है। चाय या काढ़ा बनाने के बाद ऊपर से तुलसी के पत्तों को डालें। 2-3 पत्तों के छोटे-छोटे टुकड़े या गोली बनाकर निगलकर ऊपर से आधा कप पानी पी लें।



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गर्मी में पसीने और घमौरियों से एेसे पाए छुटकारा, अपनाएं ये आसान उपाय

गर्मी में पसीना और ऊमस बढ़ने से शरीर में छोटी-छोटी घमौरियां निकल आती हैं। ये त्वचा में खुजली और जलन का कारण बनती हैं। जानें घमौरियों का कैसे पाएं-

कुछ देर शरीर के ज्यादातर हिस्सों पर हवा लगने दें। कोशिश करें कि घर या बाहर तंग कपड़ों को पहनने से बचें। हल्के कपड़ों का चयन करें।
बारिश और गर्मी के मौसम में सूती व ढीले कपड़े पहनने की आदत डालें।
खुजली से मुक्ति पाने के लिए नारियल तेल में कपूर मिलाकर लगाएं या कैलामाइन लोशन का भी प्रयोग कर सकते हैं।
घमौरियों से प्रभावित हिस्सों में मुल्तानी मिट्टी का लेप करें। यह त्वचा को नमी पहुंचाकर जलन कम करती है।
नीम की कुछ पत्तियों को पानी में उबालें। ठंडा कर इस पानी से नहाना लाभदायक होगा।
नहाने के पानी में एंटीसेप्टिक लिक्विड डालकर नहाएं।
दिनभर में कम से कम आठ गिलास पानी पीएं ताकि त्वचा में नमी बरकरार रहे।
तेज मसाले वाले भोजन से परहेज करें। इससे त्वचा में खुजली बढ़ती है जो घमौरियों का कारण बनता है।
सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें।
तेज धूप में ज्यादा देर न रहें।



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Saturday, 30 May 2020

Cucumber Benefits: त्वचा को निखारने के लिए गर्मियों में खाएं खीरा-ककड़ी

Cucumber Benefits: पानी और मिनरल्स से भरपूर ककड़ी व खीरे की डिमांड गर्मी के मौसम में बढ़ जाती है। अक्सर इनका इस्तेमाल एक सुपर भोजन के रूप में होता है। खीरे में पाए जाने वाले विटामिन-बी के कारण शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है। इससे शरीर डीहाइड्रेशन से बचा रहता है और शरीर में बनने वाले खराब टॉक्सिन्स को बाहर निकलने में भी मदद मिलती है। इसको आप कई तरह से खा सकते हैं, जैसे- सलाद, सैंडवीच, या यूं ही नमक छिड़क कर भी खा सकते हैं। आइए जानते हैं इनके फायदों के बारे में

पानी की कमी होती है दूर - ककड़ी में 95 प्रतिशत पानी रहता है। इसलिए यह शरीर से अवांछित पदार्थों को निकालने में मदद करके शरीर को स्वस्थ और जल मिश्रित रखने में मदद करता है।

त्वचा को निखारने में मददगार - ककड़ी एक ऐसी सब्जी है जो त्वचा को विभिन्न तरह की समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करती है। जैसे- टैनिंग, सनबर्न, रैशेज आदि। रोजाना ककड़ी खाने से रूखी त्वचा में नमी लौट आती है। इसलिए यह नैचुरल मॉश्चराइजर का काम करती है। यह त्वचा से तेल के निकलने के प्रक्रिया को कम करके मुंहासों को कम करता है।

वजन घटाने में मदद- ककड़ी में कैलोरी कम और फाइबर उच्च मात्रा में होता है, इसलिए मीड-डेे में भूख लगने पर खीरा खाने से पेट देर तक भरा हुआ रहता है।

हैंगओवर में मदद- शराब पीने के बहुत सारे दुष्परिणाम होते हैं, उनमें अगले दिन का हैंगओवर बहुत ही कष्ट देनेवाला होता है। इससे बचने के लिए आप रात को सोने के पूर्व ककड़ी खाकर सोयें। ककड़ी में जो विटामिन बी, शुगर और इलेक्ट्रोलाइट होते हैं वे हैंगओवर को कम करने में बहुत मदद करते हैं।



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Coronavirus Update: covid-19 के मरीजाें के लिए जानलेवा साबित हाे रही है सर्जरी

coronavirus Update: COVID-19 के चपेट में आने वाले लोगों में सर्जरी के बाद मौत का खतरा बढ़ सकता है। द लांसेट पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है। बर्मिंघम विश्वविद्यालय के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ रिसर्च के वैज्ञानिकों द्वार यह शोध किया गया है। वैज्ञानिकों ने 24 देशों के 235 अस्पतालों से 1,128 मरीजों पर शोध किया है। शोध के अनुसार कोरोना संक्रमित मरीजों में जिन लोगों की सर्जरी हो रही है, उनमें मृत्युदर ज्यादा है।

शोध की मानें तो महिलाओं की तुलना में पुरुषों में मृत्युदर ज्यादा है। शोध के मुताबिक पुरुषों में मृत्युदर 28.4 फीसदी तो महिलाओं में 18.2 फीसदी मृत्युदर है। यही नहीं 70 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों में मृत्युदर 33.7 फीसदी और 70 साल से कम उम्र वाले लोगों में ये दर 13.9 फीसदी है।

इसके अलावा जिन लोगों में पहले से गंभीर बीमारी मौजूद हैं, जैसे कैंसर का इलाज या सर्जरी तो इन मरीजों में मृत्युदर ज्यादा होने की संभावना रहती है। ऐसे मरीजों में मृत्युदर इसलिए ज्यादा है क्योंकि इनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता पहले से थोड़ी कमजोर हो जाती है।

बर्मिंघम विश्वविद्यालय में कार्यरत शोध के सहलेखक एनिल भंगू का कहना है कि शोध से पहले यह अनुमान लगाया था कि छोटी और चुनिंदा सर्जरी करने वालों में मृत्युदर एक फीसद से भी कम रहेगी लेकिन अब पता चला है कि ये दर छोटी सर्जरी में 16.3 फीसदी और वैकल्पिक सर्जरी में 18.9 फीसदी हो सकती है।

भंगू का मानना है कि ये मृत्युदर उन मरीजों से भी ज्यादा है जो महामारी से पहले ज्यादा जोखिम में रहते थे। शोध का यह भी कहना है कि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस की वजह से आई रुकावट के बाद 2.84 करोड़ वैकल्पिक सर्जरी को रद्द किया गया है।



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दवा कंपनी का दावा-अक्टूबर तक तैयार हो सकती है कोविड-19 वैक्सीन

न्यूयॉर्क। वैश्विक दवा प्रमुख फाइजर का मानना है कि कोविड -19 को रोकने के लिए एक वैक्सीन अक्टूबर के अंत तक तैयार हो सकती है। कंपनी के सीईओ अल्बर्ट बोरला ने ये जानकारी दी है। फाइजर जर्मन एमआरएनए कंपनी बायोएनटेक के सहयोग से कोविड -19 को रोकने के लिए बीएनटी 162 वैक्सीन कार्यक्रम के लिए अमेरिका और यूरोप में क्लीनिकल परीक्षण कर रही है।

बोरला ने इस सप्ताह इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्च र्स एंड एसोसिएशन (आईएफपीएमए) द्वारा आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम में भाग लेते हुए यह टिप्पणी की।

फियर्सबायोटेक द्वारा आयोजित इस समारोह में बोरला ने कहा कि अगर चीजें अच्छी तरह से चलती हैं, तो हमारे पास एफडीए (यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) और ईएमए (यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी) के लिए सुरक्षा और प्रभावकारिता के पर्याप्त सबूत होंगे और अक्टूबर के अंत के आसपास हमारे पास एक वैक्सीन होगा।"

इस कार्यक्रम में वक्ताओं में एस्ट्राजेनेका के सीईओ पास्कल सोरियट, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन की प्रमुख एमा वाल्स्ले, जॉनसन एंड जॉनसन के मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी पॉल स्टॉफल्स भी शामिल थे। इनमें से प्रत्येक कंपनी अपने साझेदारों के साथ मिलकर बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीन विकसित कर रही है।

जबकि जीएसके सैनोफी के साथ सेना में शामिल हो गया है, वहीं एस्ट्राजेनेका ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में विकसित किए जा रहे टीके का समर्थन कर रहा है। जे एंड जे अपने वैक्सीन को विकसित करने के लिए अमेरिका के बायोमेडिकल एडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के साथ सहयोग कर रहा है। अब तक दुनिया भर में 120 से अधिक टीके प्रस्तावित हैं। वर्तमान में, क्लीनिकल ट्रायल में कम से कम 10 वैक्सीन उम्मीदवार हैं और ऐसे 115 वैक्सीन उम्मीदवार हैं जिनके क्लीनिक ट्रायल से पूर्व के मूल्यांकन में हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, जितना संभव हो उतने टीकों का मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण है क्योंकि हम यह अनुमान नहीं लगा सकते हैं कि यह कितने व्यवहारिक साबित होंगे। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि सफलता की संभावना बढ़ाने के लिए, सभी उम्मीदवारों के टीके का परीक्षण तब तक करना आवश्यक है जब तक वे विफल नहीं हो जाते। फाइजर और बायोएनटेक के डेवलपमेंट प्रोग्राम में चार वैक्सीन उम्मीदवार शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक एमआरएनए के अलग कॉम्बिनेशन और टारगेट एंटीजन का प्रतिनिधित्व करते हैं।



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Prevent Fatigue: आपको भी रहती है थकान, तो ऐसे बढ़ाएं एनर्जी

Tips To Prevent Fatigue: आज के समय की खराब लाइफस्टाइल और खानपान की वजह से कई लोग थकान का शिकार हो जाते हैं। हर समय थकान महसूस होना आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि इससे जल्द से जल्द छुटकारा पाया जाए। अगर आप भी थकान की समस्या से जूझ रहे हैं तो कुछ बातों पर ध्यान मे देकर आप इस से छुटकारा पा सकते हैं।

खूब पानी पिंए - पानी शरीर के लिए बहुत आवश्यक है। पानी की कमी से शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है जिससे थकावट महसूस होती रहती है। इसलिए पानी खूब पिएं।

हेल्दी डाइट लें - बचपन से पढ़ते आ रहे हैं कि हमारे शरीर को प्रोटीन युक्त आहार की जरूरत होती है लेकिन पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक आहार लेने के बजाय हम ऊलजलूल चीजें खाते रहते हैं। हरी साग-सब्जी का सेवन करेंगे तो शरीर को पर्याप्त मात्रा में पोषण मिलेगा और शरीर नहीं थकेगा।

स्ट्रेचिंग - ऑफिस या घर पर काम करने के दौरान हम एक ही मुद्रा में काफी देर तक बैठे रहते हैं। इससे हमारे शरीर में रक्त का प्रवाह सुचारु रूप से नहीं हो पाता है। इसलिए काम करने के दौरान बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें और स्ट्रेचिंग करते रहें इससे आपकी शरीर को थकान महसूस नहीं होगी और आप लम्बे समय तक काम भी कर पाएंगे।

एक्सरसाइज करें - कहते हैं कि दिनभर अगर नहीं थके रहना चाहते तो सुबह खुद को एक घंटे थकाइए। मतलब साफ है कि अगर आप नियमित रूप से व्यायाम करेंगे तो ना केवल शरीर स्वस्थ रहेगा बल्कि थकान भी नहीं रहेग।

भरपूर नींद लें - कई लोग नींद पूरी नहीं कर पाते हैं इसकी वजह से उनके शरीर में थकान बनी रहती है। 8 घंटे की नींद भरपूर नींद की श्रेणी में आती है। इसलिए थकान से भरे हुए नहीं रहना चाहते तो कम से कम 8 घंटे जरूर सोएं।



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एेसे करें कोरोना और सामान्य फ्लू के लक्षण में फर्क, जानें इसके बारे में

कोरोना के इस काल में खांसी और बुखार आते ही लोग दहशत में आ जा रहे हैं। इसकी वजह कोरोनायरस और सामान्य फ्लू के लक्षणों का आपस में मिलना है। सरकार के हेल्पलाइन नंबर पर रोजाना आ रही सैकड़ों काल इसकी तस्दीक करती हैं।

सवाल यह है कि दोनों में फर्क कैसे किया जाए। क्या खांसी और बुखार आते ही आपको कोरोना की जांच करानी चाहिए? माइक्रोबायोलाजिस्ट डॉ. टी.एन.ढोल के मुताबिक दोनों में काफी बारीक फर्क है। शुरूआती लक्षण काफी-कुछ मिलते-जुलते हैं, लेकिन पहचान करना संभव है। डॉ. ढोल एसजीपीजीआई में सीनियर माइक्रोबायोलाजिस्ट रहे हैं। इस वक्त हिन्द इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस में माइक्रोबायोलाजी विभाग के हेड हैं।

डॉ. ढोल के मुताबिक बुखार के साथ अगर सांस लेने में तकलीफ और सूखी खांसी है तो सावधान हो जाना चाहिए। इसके अलावा अगर खांसी के साथ गले में खराश हो रही है तो व्यक्ति फौरन डॉक्टर से संपर्क करे। डाक्टर कोरोना टेस्ट कराएगा और जरूरी दवाएं देगा जिससे पकड़ में आ जाएगा कि मरीज कोरोना से संक्रमित तो नहीं।

डॉ. ढोल ने कहा कि कोरोना में खून में आक्सीजन की कमी (40 से 50 प्रतिशत) हो जाती है। यह भी एक लक्षण है कोरोनावायरस को पहचाने का। उन्होंने कहा कि इसकी जांच पल्स आक्सीमीटर नाम की मशीन से किया जा सकता है। इस मशीन को हाथ की किसी उंगली में लगाने पर आक्सीजन लेवल पता चल जाता है जिससे झट से कोरोना के बारे में पता चल सकता है।

कोरोना के लक्षण :

सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश होने के साथ सूखी खांसी, मांसपेशियों में दर्द, बुखार

सामान्य फ्लू के लक्षण

जुकाम (नाक बहना), बुखार- खांसी, सिरदर्द, आंखों का लाल होना या आंखों में पानी आना आदि हैं।



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World No Tobacco Day: आज ही छोड़े तंबाकू, बचाएं अपनी जिंदगी

World No Tobacco Day 2020: लोगों को तंबाकू का सेवन करने के कारण होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करने के लिए पूरी दुनिया में 31 मई के दिन विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2020 (World No Tobacco Day) मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के द्वारा इसलिए की गई थी। इस बार इसकी थीम "युवाओं को इंडस्ट्री के हथकंडे से बचाना और उन्हें तंबाकू और निकोटिन के सेवन से रोकना है" Protecting youth from industry manipulation and preventing them from tobacco and nicotine use”. रखी गई है। तम्बाकू में मादकता या उतेजना प्रदान करने वाला सबसे हानिकारक तत्व निकोटीन (Nicotine) पाया जाता है। इसकी मात्रा शरीर में बढ़ जाने से यह मृत्युदूत कि तरह कार्य करता है। रिसर्च से पता चला है कि तंबाकू में 28 तरह के कार्सिनोजेनिक तत्व होते हैं जिनसे कैंसर हो सकता है। इनमें निकोटीन तथा कार्बन मोनोऑक्साइड गैस प्रमुख हैं। आइए विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जानते हैं तंबाकू सेवन से हाेने वाले नुकसान के बारे में

कैंसर
कैंसर होने के कारणों में सबसे बड़ा योगदान तम्बाकू का ही होता हैं। तम्बाकू के सेवन से अनेक प्रकार के होने वाले रोगों में कैंसर प्रमुख हैं। इससे फेफड़े का कैंसर हो सकता है, मुँह का कैंसर हो सकता है या फिर गले अथवा श्वसन नली का कैंसर हो सकता हैं। इसके अलावा पेट का कैंसर, किडनी तथा पैंक्रियाज में होने वाले कैंसर, ब्लैडर और मूत्राशय संबंधी रोगों में भी तम्बाकू महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।

फेफड़ों की बीमारी
क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और एम्फीसेमा ऐसी बढ़ने वाली बीमारियाँ हैं जो धूम्रपान करने वालों को होती हैं। ये बीमारियाँ कभी ठीक नहीं होती। इनकी वजह से साँस लेना दुश्वार होता चला जाता है। फेफड़ों में रुकावट के कारण साँस लेना भी मुश्किल हो जाता है।

कोरोनरी हार्ट डिसीज
धूम्रपान करने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है साथ ही उच्च रक्तचाप की समस्या भी खड़ी हो जाती है। धूम्रपान करने वालों को दिल के दौरे का जोखिम दूसरों की तुलना में तीन गुना अधिक होता है।

फेफड़े का कैंसर
दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों में सबसे बड़ा आँकड़ा फेफड़े के कैंसर का है। इसमें 80 प्रतिशत मौतें धूम्रपान की वजह से होती हैं। जैसे-जैसे प्रतिदिन सिगरेट पीने का आँकड़ा बढ़ता जाता है वैसे-वैसे फेफड़े का कैंसर होने की आशंका बढ़ती जाती है।

प्रजनन क्षमता पर असर
तम्बाकू का सेवन पुरुष या महिला दोनों के प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है, पुरुषों में तम्बाकु के सेवन से शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है, जिससे नपुंसकता हो सकता हैं, जबकि स्त्रियों में तम्बाकू के सेवन से बाँझपन हो सकता हैं। गर्भावस्था के दौरान गर्भपात हो जाने की आशंका बनी रहती है तथा भ्रूण का विकास प्रभावित होता है।

टीबी
तम्बाकू में पाए जानेवाले फोस्फोरल प्रोटिक एसिड के कारण टी. बी. रोग तथा परफैरोल के कारण दांत पीले, मैले और कमजोर हो जाते हैं। तंबाकू से होने वाले ल्यूकोप्लाकिया (leukoplakia) रोग के कारण आपके दांत और मसूड़े सड़ने लगते हैं।

अस्थमा का खतरा
तम्बाकू का ज्यादा नशा करने से स्वाद तथा सूंघने की शक्ति प्रभावित होती हैं। साथ ही Asthma(दम्मा) तथा कई असंक्रामक रोग हो जाते हैं।



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Coronavirus: एप के जरिए कोरोना रोगी ढूंढ सकेंगे अस्पताल और बेड

नई दिल्ली । दिल्ली में कोरोनावायरस रोगियों के लिए जल्द ही एक मोबाइल एप शुरू किया जाएगा। इस एप के जरिए कोरोना संक्रमित रोगी यह जान सकेंगे कि उनके लिए दिल्ली के किस सरकारी अथवा निजी अस्पताल में बिस्तर उपलब्ध है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस एप के बारे में जानकारी देते हुए शनिवार को कहा, "बीते दिनों ऐसा देखने को मिला है कि कुछ लोगों को अस्पताल में बेड के लिए धक्के खाने पड़े हैं। ऐसा जानकारी के अभाव के कारण हुआ है। इसे देखते हुए दिल्ली सरकार एप बना रही है, जिसके जरिए पता लग सकेगा कि किस अस्पताल में कितने बेड खाली हैं और कितने बेड भरे हुए हैं। कहां ऑक्सीजन की व्यवस्था है और कहां वेंटिलेटर उपलब्ध है।"

अस्पतालों की स्थिति बताने वाला यह एप सोमवार को दिल्ली की जनता के लिए जारी कर दिया जाएगा। मोबाइल एप के अलावा दिल्ली सरकार इसके लिए एक वेब पेज भी लॉन्च कर रही है। साथ ही हेल्पलाइन के जरिए भी अब अस्पतालों में बेड की स्थिति का पता लगाया जा सकेगा।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया के जरिए अभी तक कई लोगों ने दिल्ली के अस्पतालों में कोरोना के उपचार के लिए बिस्तर (बैड) न मिलने की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचाई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुताबिक, लोगों को अस्पताल और बेड ढूंढ़ने में हुई दिक्कत का मूल कारण जानकारी की कमी रही है।

दिल्ली में अब तक कोरोना से मृत हुए लोगों की कुल संख्या बढ़कर 398 हो गई है। दिल्ली में कोरोनावायरस के कुल रोगी बढ़कर 17386 हो चुके हैं। गुरुवार को 1106 नए रोगी मिले हैं। दिल्ली में अभी तक 7846 रोगी स्वस्थ भी हुए हैं। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने चार हजार से अधिक कोरोना पॉजिटिव रोगियों को उनके घर में ही आइसोलेशन में रखा है। दिल्ली सरकार के मुताबिक, इन व्यक्तियों को स्वास्थ्य संबंधी कोई बड़ी समस्या नहीं है। सभी को घरों के अंदर आइसोलेशन में रहने को कहा गया है।



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Bael Benefits: बील के ये गुण जानकर आप भी करने लगेंगे इसका सेवन

Bael Benefits: बील या बेल एक ऐसा ही फल हो, जो अपने विशेष गुणों के कारण गर्मियों में अधिक उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में भी बेल के फल और पत्ते दोनों को समान रूप से उपयोगी माना गया है। फल का गुदे में क्यूसिलेज पेक्टिन तथा टेनिन आदि रसायन पाए जाते हैं। फल का गूदा, पत्ते, मूल एवं छाल का चूर्ण तथा पेड़ के अन्य सभी अंग एवं अवयव उपयोग में लिए जाते हैं। बेल का चूर्ण बनाने के लिए कच्चा, मुरब्बे के लिए अधपका और ताजे शर्बत के लिये पके हुए फल का उपयोग होता है। बेल का उपयोग सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में:-

अस्थमा
बेल-पत्रों से बना क्वाथ (काढ़ा) सर्दी-जुकाम के कहर को कम करता है। यह सर्दी से होने वाली श्लेष्मा (कफ) को कम करता है और अस्थमा के प्रसार को धीमा करता है।

आंखों का संक्रमण
बेल-पत्रों को आंखों में होने वाले विभिन्न संक्रमण तथा सूजन के निदान में व्यवहार किया जाता है। खासतौर से नेत्र-शोध (Psoralen) यह बहुत प्रभावी होता है।

बुखार
बेल-मूल तथा पेड़ का छाल से बने क्वाथ से विभिन्न तरह के ज्वरों का इलाज किया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में बेल-मूलों से वात-कफ-पित्त से होने वाले दोषों तथा ज्वरों को ठीक किया जाता है।

कब्ज
उदर विकारों में बेल का फल अचूक दवा के रूप में उपयोग किया जाता है। फल के नियमित सेवन से कब्ज जड़ से समाप्त हो जाता है। बेल फल उदर की स्वच्छता के अलावा आंतों को साफ कर उन्हें ताकत भी देता है।

डायरिया
गर्मियों में प्राय: अतिसार/ डायरिया की वजह से पतले दस्त होने लगते हैं, ऐसी स्थिति में कच्चे बेल को आग में भून कर उसका गूदा, रोगी को खिलाने से फौरन लाभ मिलता है। बेल का मुरब्बा खाने से पित्त व अतिसार में लाभ होता है। पेट के सभी रोगों में बेल का मुरब्बा खाना लाभप्रद है।

लू से बचाए
गर्मियों में जरा-सी असावधानी से लू लगने का खतरा बना रहता है, इसलिए गर्मियों में बेल का सेवन जरूर करें। अगर लू लग जाए, तो निवारण करने के लिए बेल के ताजे पत्तों को पीसकर मेहंदी की तरह पैर के तलुओं में ठीक से मलें। इसके अलावा सिर, हाथ, छाती पर भी इसकी मालिश करने से राहत मिलती है। बेल के शर्बत में मिश्री मिलाकर पीने से भी तुरंत राहत मिलती है।

अल्सर
बेल फल तथा बेल पत्रों के रस से बनी दवाओं का प्रयोग पेप्टिक अल्सर को ठीक करने के लिए किया जाता है। फल के गूदे से गैस्ट्रिक म्यूकोसा पर म्यूसिलेजिनस लेयर बन जाती है, जिससे अम्लता म्यूकोसल स्तर के साथ प्रतिक्रिया नहीं कर पाती है और अल्सर बढ़ने से रूक जाता है।

कान की समस्या
बेल की जड़ों में एस्ट्रिंजेंट ए्क्टिविटी पाई जाती है और इसी वजह से यह घरेलू उपायों में कान की समस्या को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। बेल की जड़ों को नीम के पत्तों के साथ मिलाकर बनी दवाएं कान के संक्रमण, असाध्य सूजन तथा पस को निकलाने में मदद करती है।

कैंसर
अध्ययनों ने बताया है कि बेल फल के सत्त में एंटी-प्रोलिफरेटिव एक्टिविटी होती है। जो मानवों में ट्यूमर सेल्स के फैलाव को रोकने में मदद करती है। गूदे से बने शर्बत में जल में घुलनसील एंटी-ऑक्सीडेंट्स, फेनोलिक तत्व तथा एंटी-म्यूटाजेन्स पाए जाते हैं, जो कैंसर-रोधी होते हैं तथा ये शरीर की सेल्स को फ्री-रेडिएशन से होने वाली क्षति से बचाते हैं।



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Friday, 29 May 2020

SPECIAL REPORT : भारत में संक्रमितों को अमरीका से आठ गुना कम वेंटिलेटर, आइसीयू और ऑक्सीजन की जरूरत

नई दिल्ली. 27 मई को देश में कुल 83,004 सक्रिय मामलों में से 3500 से कम मरीजों को ऑक्सीजन थैरेपी, आइसीयू या वेंटिलेटर की जरूरत थी। कुल संक्रमितों में से 1868 मरीजों को आइसीयू (2.25 प्रतिशत) की जरूरत थी। इसमें से सिर्फ तीन वेंटिलेटर पर थे। 1585 मरीज (1.91 प्रतिशत) ऑक्सीजन पर थे। यह मांग शुरू से अब तक यही है। 15 मई तक देश में 18855 वेंटिलेटर उपलब्ध थे। इसके अलावा सरकार ने 60 हजार और वेंटिलेटर का आदेश दिया है।

तीन राज्यों में एक भी मरीज वेंटिलेटर पर नहीं
छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में जहां प्रवासियों के पहुंचने के बाद संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन राहत की खबर यह है कि अब तक वहां एक भी मरीज वेंटिलेटर, ऑक्सीजन या आइसीयू में नहीं है। हालांकि विशेषज्ञ इसे महामारी का प्रारंभिक चरण बता रहे हैं। 27 मई तक उत्तर प्रदेश में 2,680 सक्रिय मामलों में से 61 को आइसीयू और 38 को ऑक्सीजन की जरूरत थी। किसी मरीज को वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत नहीं पड़ी।
देश में 1.91 प्रतिशत को ऑक्सीजन की जरूरत
देश में सबसे ज्यादा मौतें महाराष्ट्र में हुई हैं। 27 मई को, जब महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 36012 थी, तो ऑक्सीजन पर सिर्फ 796 (2.21 प्रतिशत) लोग थे, जबकि दिल्ली में 6954 सक्रिय मामलों में से 248 (3.56 प्रतिशत) ऑक्सीजन पर थे। देश में 1.91 प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है जो कुछ दिनों बाद ही स्वस्थ हो जाते हैं। यदि ऑक्सीजन नहीं दी जाती है तो आंतरिक अंगों के नुकसान की आशंका बढ़ती है।

पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा
पश्चिम बंगाल में करीब 10.34 प्रतिशत को आइसीयू और 5.8 प्रतिशत को ऑक्सीजन की जरूरत है। अब तक 295 मौतें हो चुकी हैं। मध्यप्रदेश में 7.85 प्रतिशत मरीज ऑक्सीजन पर और 6.44 प्रतिशत आईसीयू में थे। अब तक 321 मौतें हो चुकी हैं। पश्चिम बंगाल व मध्यप्रदेश को छोड़कर देखें तो ऑक्सीजन थैरेपी की अपेक्षा वेंटिलेटर का प्रयोग की जरूरत काफी कम पड़ी। पब्लिक हैल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष व आइसीएमआर के सदस्य डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी का कहना है कि क्रिटिकल केयर के उपकरणों सीमित मांग का अर्थ है कि मरीजों की हालत अपेक्षाकृत गंभीर कम हो रही है।

कोरोना से लडऩे के लिए तैयारी
देश में 69 प्रतिशत संक्रमितों में हल्के लक्षण और 15 प्रतिशत से कम मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है। हल्के लक्षण वाले मरीजों को ज्यादातर क्वॉरंटीन सेंटरों में रखा जा रहा है। हालात बिगडऩे पर उन्हें अस्पतालों में स्थानांतरित किया जाता है। देश में 27 मई तक 930 कोरोना स्पेशल हॉस्पिटल में 158747 आइसोलेशन बेड, 20355 आइसीयू बेड, 69076 ऑक्सीजन सुविधा युक्त बेड थे। इसके अलावा 2362 स्वास्थ्य सेंटरों में 132493 आइसोलेशन बेड, 10341 क्वॉरंटीन सेंटर और 7195 कोविड केयर सेंटरों में 652830 बेड की व्यवस्था की गई है। अब तक 33.62 लाख टेस्ट किए जा चुके हैं।



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एक्सरसाइज व आयुर्वेदिक इलाज से गठिया की समस्या में मिलता है आराम

अर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली एक बहुत ही आम बीमारी है। इस बीमारी में जोड़ों में दर्द होता है और जोड़ों को घुमाने, मोड़ने, हिलाने और हरकत करने में परेशानी होती है।

हफ्ते में तीन घंटे की गई एक्सरसाइज आर्थराइटिस (गठिया) के असहनीय दर्द को कम कर सकती है। लंदन के वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है। इसके लिए मरीजों को तीन तरह के व्यायाम कराए गए। सबसे पहले कुर्सी पर बैठे व्यक्ति को फौरन खड़ा होना था फिर दोबारा कुर्सी पर बैठना था लेकिन बिना सहारा लिए। दूसरे व्यायाम में कुर्सी पर बैठे हुए घुटनों को मोड़े बिना पंजों को दोनों हाथों से छूना था। तीसरे व्यायाम में घर पर ही तेज चाल से वॉक करने के लिए कहा गया। विशेषज्ञों ने पाया कि रोगियों के दर्द में 60 फीसदी तक कमी आई।

आयुर्वेदिक इलाज -

विरेचन करें, अभ्यंगम करें, एरंड तेल गुनगुने पानी से लें, निर्गुन्डी तेल, पिंड तेल, सुकुमार तेल, गुडुची तेल, अदरक का पेस्ट लगाएं, शुंठी का पानी पिएं, लहसुन शहद के साथ लें, लहसुन का पेस्ट लगाएं, गुडुची चूर्ण खाएं, गुडुची काढ़ा पिएं।



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सेल्फी से हो सकता है सेहत को नुकसान

सेल्फी लेने के चक्कर में लोगों में बॉडी डायस्मोर्फिक डिसऑर्डर बढ़ रहा है। मनचाहा लुक न होने की मानसिक पीड़ा को बॉडी डायस्मोर्फिक डिसऑर्डर कहते हैं। लंदन में हुए एक शोध के अनुसार इसका शिकार सबसे ज्यादा किशोर होते हैं। वे बार-बार सेल्फी लेते हैं उसमें आंख, नाक, मुस्कान, बाल आदि को निहारते हैं और यह सिलसिला तब तक जारी रहता है, जब तक परफेक्ट सेल्फी न आ जाए। इसके लिए जरूरी है कि हम सामाजिक बनें और अपनी कमियों को दूसरों के जरिए जानने का प्रयास करें।

स्किन पर सेल्फी का असर -

एक्सपर्ट्स के अनुसार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडियेशन आपकी त्वचा में मौजूद डीएनए पर बुरा असर डालता है। इस रेडिएशन के चलते शरीर की स्किन रिपेयरिंग की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है, जिससे समय से पहले झुर्रियां दिखनी शुरू हो जाती हैं और माना जाता है कि किसी भी तरह की क्रीम या सनस्क्रीन इससे बचाव नहीं कर सकती। हालांकि एक अच्छा स्क्रब त्वचा की सेहत काफी अच्छी रख पाता है। त्वचा विशेषज्ञ और ओबागी स्किन हेल्थ इंस्टीट्यट के संस्थापक डॉ. जेन ओबागी कहते हैं कि आप त्वचा को बाहर से हाइड्रेट नहीं कर सकते यानि उसकी पानी की जरूरत को बाहर से पूरा नहीं कर सकते। ये जरूरत अंदर से ही पूरी की जा सकती है।



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Thursday, 28 May 2020

जून-जुलाई में कोरोना के चरम पर पहुंचने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं

नई दिल्ली । देश में कोविड-19 महामारी के चरम पर होने के संबंध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया द्वारा की गई भविष्यवाणी पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सहमत होते नहीं दिख रहे हैं। हर्षवर्धन ने गुरुवार को बीमारी के भविष्य के परिदृश्य के बारे में कहा कि इस संबंध में फिलहाल कोई भी धारणा बनाना मुश्किल है।

स्वास्थ्य मंत्री ने आईएएनएस के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि विभिन्न मान्यताओं और वायरस के बारे में कम जानकारी के आधार पर विषम गणितीय मॉडलिंग को देखते हुए बीमारी के भविष्य के परिदृश्य के बारे में सटीक भविष्यवाणी करना बेहद मुश्किल है।

एम्स के निदेशक गुलेरिया का कहना है कि अगले दो महीनों में स्थिति और बिगड़ सकती है, जबकि डॉ. हर्षवर्धन ने स्थिति को स्थिर बताते हुए स्पष्ट किया, "अभी कोई अप्रत्याशित वृद्धि नहीं देखी गई है।"

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि कोविड-19 एक नई बीमारी है और इस वायरस का स्वभाव और प्रकोप अभी भी अज्ञात है। उन्होंने कहा कि हमारे वैज्ञानिक जीन अनुक्रमण की मदद से इसका अध्ययन कर रहे हैं। मंत्री ने कहा, "वायरस और बीमारी के बारे में अधिक डेटा फिलहाल उपलब्ध नहीं है।"

उन्होंने कहा, "जहां तक बीमारी के प्रसार को लेकर भविष्यवाणियों का मुद्दा है, मैं आपको बता दूं कि मैं एक गणितीय भविष्यवाणी मॉडल या अन्य के बारे में सुनता रहता हूं। बहुत सारे ऐसे मॉडल हैं, जो काफी भविष्यवाणियां करते हैं। हालांकि इन्हें ट्रैक करना या उन्हें सही ठहराना मुश्किल है।"

एम्स निदेशक डॉ. गुलेरिया ने सात मई को कहा था, "राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों विशेषज्ञ डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं। उनमें से अधिकांश ने अनुमान लगाया है कि भारत में जून या जुलाई में स्थिति अपने चरम पर होगी।"



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'देश के 80 फीसदी मरीजों में कोरोना के लक्षण शून्य या बहुत कम'

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने गुरुवार को कहा कि भारत में कोविड-19 के लगभग 80 फीसदी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखा या बहुत ही हल्के लक्षण देखने को मिले हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने आईएएनएस के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा, "भारत में कोविड-19 के जो मामले रिपोर्ट किए गए हैं, उनमें लगभग 80 फीसदी ऐसे मामले हैं, जिनमें मरीज में या तो शून्य या बहुत हल्के लक्षण पाए गए हैं। ये मरीज ज्यादातर पुष्टि किए गए मामलों के संपर्क में आकर संक्रमित हुए हैं।"

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कार्यकारी बोर्ड के प्रमुख की जिम्मेदारी संभालने वाले हर्षवर्धन से पूछा गया कि क्या बिना लक्षण वाले रोगी, जो संभावित वायरस के वाहक हैं, वे ग्रामीण भारत में वायरस को गहराई तक ले जा सकते हैं और सरकार के लिए चिंता का कारण बन सकते हैं?

इस पर उन्होंने कहा, "मैं डब्ल्यूएचओ के ऐसे पुष्ट मामलों के बारे में जानता हूं, जिनमें वास्तव में कोई लक्षण नहीं पाया गया। यह भी उतना ही सच है कि आज तक कोई भी बिना लक्षण वाले व्यक्ति से संचरण नहीं हुआ है।"

उन्होंने कहा कि हाल ही में सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, गुलाबी आंख, गंध या स्वाद का अनुभव होने में कमी, तेज ठंड लगना और गले में खराश जैसे और अधिक लक्षण संयुक्त राज्य अमेरिका की सीडीसी द्वारा कोविड-19 लक्षणों की सूची में शामिल किए गए हैं।

उन्होंने कहा, "मुझे इन अध्ययनों को भारत में हमारी सूची में शामिल करने से पहले अधिक अध्ययन की आवश्यकता होगी।" हर्षवर्धन ने कहा कि अगर एक पल के लिए हम ऐसे बिना लक्षणों वाले रोगियों के परीक्षण की बात करते भी हैं तो इन सभी मामलों की पहचान के लिए 1.3 अरब जनसंख्या के परीक्षण की आवश्यकता होगी, जो किसी भी देश के लिए काफी महंगी प्रक्रिया है, जो कि न संभव भी नहीं है। उन्होंने कहा, "परीक्षण सुविधाओं की निरंतरता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के हमारे प्रयासों से मुझे यकीन है कि हम अधिकतम मामले का पता लगाने के लिए और भी बेहतर स्थिति में होंगे।"



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'देश के हर नागरिक का कोरोना टेस्ट करना संभव नहीं'

नई दिल्ली | केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने गुरुवार को आईएएनएस के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि कोविड-19 के लिए 1.3 अरब लोगों का परीक्षण करना न तो संभव है और न ही सुसंगत है। भारत की आगे की रणनीति और परीक्षण के बारे में स्थिति पर एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "वर्तमान परीक्षण रणनीति जरूरत आधारित है और ऐसे व्यक्तियों को प्राथमिकता देती है जो मुख्य रूप से जोखिम में हैं या जिन्हें लक्षण हैं। इस स्थिति को देखते हुए नियमित रूप से संशोधित किया जाता है।"

परीक्षण डेटा और क्षमता के बारे में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "हमारी परीक्षण क्षमता 27 मई को प्रति दिन 1,60,000 है और हमने अब तक 32,44,884 परीक्षण किए हैं। 26 मई को हमने कुल 15,229 परीक्षण किए। अगर एक पल के लिए हम बीमारी पर अंकुश लगाने के लिए 1.3 अरब जनसंख्या के परीक्षण की बात करते भी हैं, तो आप भी इस बात को मानेंगे कि यह न केवल एक महंगी प्रक्रिया है, बल्कि न तो यह संभव है और न ही सुसंगत है।"

उन्होंने यह भी कहा कि फरवरी 2020 के पहले सप्ताह में पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) में एकमात्र प्रयोगशाला से देश में इस सुविधा की संख्या बढ़कर अब 624 हो गई है। इसमें 435 सरकारी प्रयोगशालाएं और 189 एनएबीएल से मान्यता प्राप्त निजी प्रयोगशालाएं हैं।

हर्षवर्धन ने कहा कि प्राथमिकता आधारित और लक्षित परीक्षण कोविड-19 के अधिक मामलों का पता लगाने और बीमारी पर अंकुश लगाने में मददगार होगा। उन्होंने कहा, "परीक्षण सुविधाओं में निरंतरता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के हमारे प्रयासों के साथ, मुझे यकीन है कि हम अधिकतम मामलों को खोजने के लिए एक बेहतर स्थिति में होंगे।"



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SPECIAL REPORT : वैक्सीन विकसित होने के बाद भी क्यों कोरोना वायरस हमसे दूर नहीं जाएगा

वॉशिंगटन. शिकागो विश्वविद्यालय में एक महामारीविद सारा कोबे का कहना है कि इस वायरस से कैसे हम खुद को सुरक्षित रख जी सकते हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के पूर्व निदेशक टॉम फ्रीडेन ने कहा कि हमें एक व्यापक लड़ाई की रणनीति की जरूरत है। इसके लिए सावधानी सबसे ज्यादा जरूरी है। संभव है कि कुछ समय बाद इसकी संक्रामकता दर कम हो सकती है। तक अधिकांश लोगों के शरीर में इस वायरस के प्रति शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हो जाएगी। वैक्सीन रिसर्च सेंटर की उप निदेशक बार्नी ग्राहम ने कहा कि वैक्सीन बनने के बाद टीके की आपूर्ति व टीकाकरण में कई साल लग जाएंगे।

100 वैक्सीनों पर चल रहा है काम
नई दिल्ली. कोरोना वायरस को लेकर देश में करीब 30 समूह कोविड-19 का टीका विकसित करने में जुटे हैं। इसमें मेडिकल सेवा से जुड़ी कंपनियां, स्टार्टअप और अपने स्तर पर चिकित्सा वैज्ञानिक शामिल हैं। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन ने कहा कि सामान्यत: वैक्सीन विकसित करने में 10 से 15 साल का समय और 200 मिलियन डॉलर (15.13 अरब रुपए) के करीब लागत आती है। लेकिन कोशिश है कि इसे एक साल में बनाने के लिए एक ही समय में 100 से अधिक वैक्सीन पर काम कर रहे हैं। टीके की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि इसका सही तरीके से परीक्षण किया जाए।

पंचगव्य की दवा क्लीनिकल ट्रायल
अहमदाबाद. कोरोना से बचाने के लिए गुजरात पंचगव्य के आधार पर बनी दवा का क्लीनिकल परीक्षण करेगा। राष्ट्रीय कामधेनू आयोग के अध्यक्ष डॉ. वल्लभ कथीरिया ने कहा कि इसके लिए क्लीनिकल ट्रायल जल्द आरंभ होगा। एलोपैथिक दवाओं के प्रोटोकॉल का उपयोग कर इसका ट्रायल देश के दस अस्पतालों में किया जाएगा। इसकी शुरूआत गुजरात के शहर राजकोट से शुुरु होगी जो मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का गृह नगर है। डॉ. कथीरिया ने कहा कि पंचगव्य से बनी दवा में गाय का दूध, मक्खन, घी, गोबर व मूत्र शामिल है। यह दवा गोली जैसी होगी जिसे दूध या पानी के साथ लिया जा सकेगा। इससे उपचार की इच्छा रखने वाले मरीज को दवा दी जाएगी और इसका परिणाम के परीक्षण वैज्ञानिक आधार और क्लीनिकल ट्रायल के आधुनिक दिशानिर्देशों के साथ होगा।

नोवासैक्स भारत में खरीद रही वैक्सीन प्लांट
अमरीका के मुख्य महामारी रोग विशेषज्ञ एंथनी फाउसी ने कहा है कि नवंबर के शुरुआत में कोरोना की वैक्सीन के विकसित होने की उम्मीद है। अमरीका की जैव प्रौद्योगिकी कंपनी नोवावैक्स ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से एक विनिर्माण संयंत्र खरीद रही है। इससे पहले नोवावैक्स ने ऑस्ट्रेलिया में टीके का मानव परीक्षण शुरू कर दिया है। यूएस बायोटेक्नोलॉजी फर्म की जुलाई में मेलबर्न व ब्रिस्बेन में क्लीनिकल ट्रायल के पहले चरण के परिणाम आने की उम्मीद है।



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Hand Sanitizer बन सकता है आपके लिए खतरनाक,स्वास्थ्य पर भी डाल सकता है बुरा प्रभाव

नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Union Ministry of Health and Family Welfare) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 6,566 नए मामले सामने आए हैं और 194 लोगों की मौत हुई है। इसके बाद देशभर में कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 1,58,333 हो गई है, जिनमें से 86,110 सक्रिय मामले हैं, 67,692 लोग ठीक हो चुके हैं या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और अब तक 4,531 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, आज राजस्थान में 131, कर्नाटक में 75, ओडिशा में 67और आंध्र प्रदेश में 54 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इस महामारी से बचने के लिए कोई दवा अभी तक नहीं बनी। इस वायरस से बचने का एक ही तरीका है साफ-सफाई। सैनिटाइजर के इस्तेमाल से आसानी से हाथों को साफ किया जा सकता है। अभी तक कोरोना से बचाव के लिए सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हैंड सैनिटाइजर का ज्यादा प्रयोग आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। आइए, आपको बताते हैं बार-बार हैंड सैनिटाइजर का इस्‍तेमाल करने से आपकी सेहत को क्या नुकसान पहुंच सकता है..


-हैंड सैनिटाइजर में ट्राइक्लोसान नाम एक केमिकल होता है, जिसे हाथ की स्किन सोख लेती है। इसके ज्यादा इस्तेमाल से यह केमिकल आपकी त्वचा से हुते हुए आपके स्क्त में मिल जाता हैं। रक्त में मिलने के बाद यह आपकी मांसपेशियों के ऑर्डिनेशन को नुकसान पहुंचाता है।

-हैंड सैनिटाइजर में विषैले तत्व और बेंजाल्कोनियम क्लोराइड होता है, जो कीटाणुओं और बैक्टीरिया को हाथों से बाहार निकाल देता है, लेकिन यह हमारी त्वचा के लिए अच्छा नहीं होता है। इससे त्वचा में जलन और खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

-ऐसा देखा गया है कि लोग हर आधे घंटे में हैंड वाश या हैंड सैनिटाइज करते हैं। अगर आपने किसी अनचाही वस्तुओं को नहीं छुआ है तो आपको हैंड सैनिटाइजर यूज करने की जरूरत नहीं है। इसके बदले आप नॉर्मल पानी से हाथ धो सकते हैं।

-अगर आप गंदे हाथ को हैंड सैनिटाइजर से साफ करने की कोशिश करते हैं तो इससे कोई फायदा नहीं मिलता है। इसके लिए सबसे पहले अपने हाथों को साफ पानी से धोएं। फिर हैंड सोप से धोएं। जब आप गार्डन में खेलते हैं, गार्डेनिंग करते हैं या साफ-सफाई करते हैं तो हैंड सैनिटाइजर का यूज न करें।

-बदलते मौसम में सर्दी-खांसी और बुखार होने का खतरा अधिक रहता है। ये लक्षण कोरोना वायरस के लक्षणों से मिलता-जुलता है। ऐसे में जब भी आपको फ्लू हो तो घर से बाहर न निकलें और हैंड सैनिटाइजर के बदले टिसू का अधिक इस्तेमाल करें।

-सैनिटाइजर में खुशबू के लिए फैथलेट्स नामक रसायन का इस्तेमाल किया जाता है, इसकी मात्रा जिन सैनिटाइजर में ज़्यादा होती है, वे हमारे लिए हानिकारक होते हैं। इस तरह के अत्यधिक खुशबू वाले सैनिटाइजर लीवर, किडनी, फेफड़े तथा प्रजनन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं।

-इसके ज्यदा इस्तेमाल से त्वचा ड्राई हो जाती है।

-कई रिसर्च के अनुसार इसका ज्यादा प्रयोग बच्चों की इम्यूनिटी को भी घटाता है।



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Wednesday, 27 May 2020

Colon Cancer: तेजी से घटता वजन देता है इस गंभीर बीमारी के संकेत

Colon Cancer: आपकी बॉडी में बिना कारण के वजन कम हो रहा है, मल में खून आ रहा है, थकान, एनीमिया, आंतों में बदलाव या उल्टी जैसे लक्षण नजर आ रहे है तो आप सावधान हो जाए क्योकि ये सभी कोलोरेक्टर कैंसर के लक्षण है।

कोलोरेक्टल कैंसर को आम भाषा में बड़ी आंत का कैंसर भी कहते है। यह कैंसर पुरुषों में तीसरा और महिलाओं में दूसरा आम कैंसर है। इस बीमारी के लक्षणों की समय पर पहचान करना बहुत जरूरी है। 30 साल की उम्र के बाद पांच साल में एक बार कोलनोस्कोपी कराकर इसके खतरों से बचा जा सकता है। यह कैंसर की वजह से हमारी शरीर में पनपता है।

खराब जीवनशैली से बढ़ता खतरा
कोलन और रेक्टम पाचनतंत्र के अंग हैं। ये शरीर के मल-मूत्र को हटाने में मदद करते हैं। कोलोरेक्टल कैंसर का कारण आनुवांशिकता, जंकफूड व रेड मीट का ज्यादा खाना, फाइबर कम लेना, मोटापा, धूम्रपान, शराब और इंफ्लेमेट्री बाउल सिंड्रोम है। देर रात तक काम करना, डायबिटीज और शारीरिक गतिविधियां न करने से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ता है।

कोलोरेक्टल सर्जरी
इलाज के तौर पर सर्जरी कर बड़ी आंत से प्रभावित हिस्से को हटाया जाता है। पहले यह प्रक्रिया जटिल मानी जाती थी लेकिन लेप्रोस्कोपिक कोलोरेक्टल सर्जरी ओपन सर्जरी के मुकाबले फायदेमंद है।

कोलनोस्कोपी कराएं
इसमें पतली ट्यूब (कोलनोस्कोप ) से बड़ी आंत की अंदरूनी सतह का परीक्षण करते है। इससे अल्सर, पॉलिप्स, सूजन और रक्तस्त्राव की स्थिति का पता लगाते हैं।

ये रखें ध्यान
डाइट में फायबर (अलसी, दलिया ओट्स), मौसमी फल व हरी सब्जियां लें। जीवनशैली को सुधारें। रुटीन में एक्सरसाइज जरूर शामिल करें। एक उम्र के बाद जांच जरूर कराएं।



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Sendha Namak: सफेद नहीं, खाने में खाएं ये चुटकी भर नमक, सेहत काे हाेगा दाेगुना फायदा

Sendha Namak: नमक हमारे खाने का एक महत्वपूर्ण अंग हैंं। यह खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ता बल्कि शरीर को कई बीमारियों से भी बचाता है। लेकिन आमतौर पर हम लोग जो सफेद नमक खाते हैं, उसकी अधिक मात्रा शरीर को नुकसान भी पहुंचाती है। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार खाने में सफेद नमक की जगह सैंधा नमक का सेवन ज्यादा फायदेमंद होता है। सैंधा नमक में लगभग 65 प्रकार के खनिज लवण पाए जाते हैं, जो कई तरह की बीमारियों से बचाने में मददगार होते हैं। वहीं इसका एक बढ़ि‍या फायदा यह है कि यह पाचन के लिए फायदेमंद है। चूंकि यह पाचक रसों का निर्माण करता है, इसलिए कब्ज भी दूर करने में सहायक है। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में:-

रक्तचाप करे कंट्रोल
सैंधा नमक हाई ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करने में काफी लाभदायक है। इसी के साथ यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम रहता है।

तनाव कम करे
सैंधा नमक स्ट्रेस कम को कम करता है। इसी के साथ यह सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन्स का बैलेंस बनाएं रखता है जो तनाव से लड़ने में मदद करते हैं।

बदन दर्द में फायदेमंद
सैंधा नमक मांसपेशियों के दर्द और ऐंठन के साथ ही ज्वाइंट्स पेन को भी कम करता है।

साइनस में राहत
साइनस का दर्द पूरे शरीर को तकलीफ देता है और इससे छुटकारा पाने के लिए सैंधा खाना फायदेमंद रहता है।

पथरी करें दूर
अगर आपको स्टोन की प्राब्लम है तो सेंधा नमक और नींबू को पानी में मिलाकर पीने से कुछ ही दिनों में पथरी गलने लगती है।

अस्थमा को करे दूर
अस्थमा, डायबिटीज और आर्थराइटिस के मरीजों के लिए सैंधा नमक का सेवन काफी फायदेमंद होता है। नींद न आने की समस्या में भी सेंधा नमक काफी लाभदायक होता है।



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Vitamin E: त्वचा की रंगत निखारने से लेकर दिल की सेहत के लिए जरूरी है विटामिन-ई

Vitamin E: विटामिन ई त्वचा की रंगत बनाए रखने में खासतौर पर काम करता है। विटामिन-ई एक फैट सॉल्युबल विटामिन है, जो एक कारगर एंटीऑक्सीडेंट भी है। यह शरीर के टिश्यू को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। यह शरीर की इम्युनिटी मजबूत करने, दिल की सेहत बनाए रखने और बढ़ती उम्र में होने वाले कुछ नेत्र संबंधी विकार जैसे एज रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन (Age-Related Macular Degeneration-AMD) और मोतियाबिंद अंधेपन के जोखिम का कम करने में सहायक होता है। इसलिए अपने आहार में विटामिन ई की खुराक जरूर लें। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में:-


विटामिन ई के फायदे
- विटामिन ई में एंटीऑक्‍सीडेंट गुण होते हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट वो तत्‍व होते हैं जो फ्री रेडिकल्‍स से कोशिकाओं को बचाने में मदद करते हैं। वहीं, जब धूम्रपान या रेडिएशन के संपर्क में आने या शरीर के खाद्य पदार्थों को तोड़ने पर जो अणु बनते हैं, वो फ्री रेडिकल्‍स होते हैं।

- कोशिकाओं की रक्षा कर ये शरीर को कई बीमारियों जैसे कि ह्रदय रोग या कैंसर और डिमेंशिया आदि से बचा लेता है।

- विटामिन ई इम्‍यून सिस्‍टम के कार्य में भी अहम भूमिका निभाता है। ये संक्रमण से लड़ने में कोशिकाओं की मदद करता है।

- विटामिन ई प्रोस्‍टाग्‍लैंडिन नामक हार्मोन के उत्‍पादन में भी अहम भूमिका निभाता है। ये हार्मोन कई शारीरिक प्रक्रियाओं जैसे कि ब्‍लड प्रेशर और मांसपेशियों के संकुचन को नियंत्रित करने के लिए जिम्‍मेदार होता है।

- इसके अलावा विटामिन ई एक्‍सरसाइज के बाद मांसपेशियों को ठीक करने मे भी मददगार है।

- क्रोन डिजीज, सिस्‍टिक फाइब्रोसिस या लिवर की पाचन मार्ग में पित्त रस स्रावित न कर पाने की क्षमता को विटामिन ई से ठीक किया जा सकता है। विटामिन ई के सप्‍लीमेंट से पाचन संबंधित समस्‍याओं से भी बचा जा सकता है।

यहां से लें विटामिन ई

बादाम
विटामिन ई का मजबूत स्रोत हैं बादाम। बादाम से प्राकृतिक तरीके से विटामिन ई हासिल होता है। हम बादाम का दूध, बादाम तेल या कच्चे बादाम खाकर विटामिन ई हासिल कर सकते हैं।

सूरजमुखी के बीज
विटामिन ई के मजबूत स्रोत में से एक है सूरजमुखी के बीज। सूरजमुखी के बीज से भरपूर मात्रा में विटामिन ई हासिल होता है। एक चौथाई कप सूरजमुखी के बीजों से दिनभर की जरूरत का लगभग 90.5 फीसदी विटामिन ई हासिल होता है। कद्दू और तिल के कच्चे बीजों से भी विटामिन ई हासिल होता है।


ब्रोकली
ब्रोकली भी हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में बहुत ही कारगर है। यह स्वास्थ्यवद्र्धक होती है जिससे हमें कई तरह के फायदे हासिल होते हैं। इसमें विटामिन ई के अलावा अन्य कई पोषक तत्व होते हैं जिनसे हमें बहुत से फायदे हासिल होते हैं। खानपान में ब्रोकली को प्राथमिकता दें।

जैतून
जैतून से भी विटामिन ई खूब मिलता है। इसे अपने सलाद के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके तेल का इस्तेमाल पकाने के रूप में भी किया जा सकता है। आपको जैतून का स्वाद पसंद है तो यह आपके लिए बेहतर है। जैतून के एक कप से दिनभर की विटामिन ई की जरूरत का बीस फीसदी हमें हासिल होता है।

उबली सब्जियां
उबली हरी सब्जियां आपके लिए विटामिन ई का मजबूत स्रोत है। आप उबली हुई सब्जियों का एक कप भी लेते हैं तो आपको 17 फीसदी विटामिन ई हासिल होगा। इन उबली सब्जियों से आपको विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन के भी भरपूर मात्रा में मिलेगा।

अजमोद
अजमोद का इस्तेमाल गार्निश के रूप में किया जाता है लेकिन इससे हमें अच्छी मात्रा में विटामिन ई हासिल होता है। यह ताजा अच्छा माना जाता है लेकिन इसे सुखाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अजमोद को सलाद और सूप के रूप में अपने खानपान में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।

एवोकेडो
एवोकेडो में भी विटामिन ई की भरपूर मात्रा होती है। एवोकेडो हमारे विटामिन ई की जरूरत को पूरा करने में सक्षम हैै। इससे हमें स्वास्थ्य संबंधी कई तरह के फायदे हासिल होते हैं। इसे सलाद के रूप में भी खाया जा सकता है। इसे अपने खानपान में प्राथमिकता से शामिल करना चाहिए।

पपीता
पपीते से भी हमें अच्छी मात्रा में विटामिन ई हासिल होता है। पपीता खाने में भी स्वादिष्ट होता है। इसे फ्रूट सलाद, जूस या स्मूदी के रूप में खा सकते हैं। पपीते में विटामिन ई के अलावा और भी पौष्टिक तत्व हासिल होते हैं। पपीते को अपने खानपान का हिस्सा बनाकर हम पर्याप्त मात्रा में विटामिन ई हासिल कर सकते हैं।

विटामिन ई कितना लेना चाहिए
विशेषज्ञों के अनुसार 14 साल से अधिक उम के लोगों को प्रतिदिन 15 मि.ग्रा विटामिन ई की जरूरत होती है। स्‍तनपान करवाने वाली महिलाओं को 19 मि.ग्रा और 6 महीने से कम उम्र के शिशु को 4 मि.ग्रा विटामिन ई चाहिए होता है। 6 महीने से 1 साल के बच्‍चे को 5 मि.ग्रा, 1 से 3 साल के बच्‍चे को 6 मि.ग्रा, 4 से आठ साल के बच्‍चे को 7 मि.ग्रा और 9 से 13 साल के बच्‍चे को 11 मि.ग्रा विटामिन ई की जरूरत होती है।
अन्‍य विटामिनों की तरह विटामिन ई भी शरीर के लिए बहुत आवश्‍यक होता है और हर उम्र के व्‍यक्‍ति को इस विटामिन का सेवन जरूर करना चाहिए।



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Tuesday, 26 May 2020

CORONA TREATMENT : जब तक वैक्सीन तैयार नहीं होती, तब तक कोरोना से लड़ेगा इम्युनिटी शील्ड

जॉर्जिया. जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं के अध्ययन के अनुसार ऐसे लोगों की मदद से वायरस के प्रसार को रोका जा सकता है या धीमा किया जा सकता है। टीका विकसित होने तक यह एक कारगर उपाय हो सकता है। कोरोना संक्रमण से लड़कर स्वस्थ हो चुके मरीज लॉकडाउन के बाद देश को आर्थिक संकट से उबारने व नए शोध में मददगार बनेंगे।
कोरोना से लड़ने का ऐसा है मॉडल
उदाहरण के लिए अत्यधिक संक्रमण दर वाली करीब एक करोड़ आबादी में करीब 71 हजार की मौतें हो सकती है। वायरस का प्रसार रोकने के लिए यदि यहां संक्रमण से लड़कर स्वस्थ हो चुके मरीजों को सार्वजनिक जगहों पर तैनात कर दिया जाए तो यह संख्या 20 हजार तक हो सकती है।
स्वस्थ हो चुके मरीज बनेंगे कोरोना वॉरियर
शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि स्वस्थ हो चुके मरीज में एंटीबॉडी विकसित हो चुके होते हैं जो इंसान से इंसान के संक्रमण को रोकने में मदद करते हैं। यदि संक्रमण दर ज्यादा रहती है तो एक संक्रमित 2.33 से अधिक और कम रहता है तो 1.36 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है। क्योंकि स्वस्थ व्यक्ति में करीब चार माह से अधिक समय तक एंटीबॉडीज शरीर में प्रभावी रहते हैं। स्वस्थ हो चुके मरीजों में इसकी पहचान कर किया जा सकता है।



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प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना मरीज को ठीक किया

गौतमबुद्धनगर । उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं अब तक कुल 235 मरीज स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं। इसी क्रम में जिले में पहली बार 65 वर्षीय एक महिला का प्लाज्मा थेरेपी से सफल इलाज किया गया। ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल में प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना संक्रमित मरीज के ठीक होने का यह पहला मामला है। महिला मरीज आगरा की रहने वाली है। यह महिला 5 मई को संक्रमित पाई गई थी। महिला को मेट्रो अस्पताल से जिम्स अस्पताल में भेजा गया था। भर्ती होने के 12 दिन बाद महिला का प्लाज्मा थेरेपी से इलाज शुरू किया गया था।

जिम्स के नोडल अधिकारी डॉ. सौरभ श्रीवास्तव ने बताया, "महिला डाइबिटीज, ब्लड प्रेशर से पहले से पीड़ित थी। उसे सांस लेने में भी दिक्कत थी। महिला की एक्सरे रिपोर्ट से उसे निमोनिया होने का पता चला। वह कोरोना पॉजिटिव भी थी। उसका इलाज लगभग 15 दिन चला। महिला को 21 या 22 मई के आसपास घर भेजा गया था।"

इसके अलावा जिम्स अस्पताल में इस समय और 4 मरीजों का प्लाज्मा थेरेपी से इलाज चल रहा है। इसी अस्पताल के चिकित्सक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया, "प्लाज्मा थेरेपी से मरीज के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और प्लाज्मा थेरेपी से इलाज के पॉजिटिव रिस्पांस भी आ रहे हैं।"

ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल ने आईसीएमआर से प्लाज्मा थेरेपी से इलाज करने की अनुमति मांगी थी और इजाजत मिलने के बाद मरीजों का इलाज इस थेरेपी से करना शुरू किया था। कोरोना संक्रमित मरीज पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद अपना प्लाज्मा दान कर सकता है और एक बार दान करने के 15 दिन बाद फिर प्लाज्मा दान कर सकता है।

गौतमबुद्धनगर में इस समय शारदा अस्पताल, चाइल्ड पीजीआई और जिम्स में संक्रमित मरीजों का इलाज चल रहा है, लेकिन प्लाज्मा थेरेपी से इलाज करने की इजाजत सिर्फ जिम्स को मिली हुई है। खुशी की बात यह है कि जिम्स में 5 लोग अपना प्लाज्मा दान कर चुके हैं। हर स्वस्थ व्यक्ति ने अपना 400 मिलीलीटर प्लाज्मा दान किया है। 400 मिलीलीटर प्लाज्मा से 2 मरीजों का इलाज हो सकता है।



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चीन में मानव के शरीर पर कोविड-19 टीके का परीक्षण किया

बीजिंग। चीनी अनुसंधान टीम ने कोविड-19 टीके का मानव पर परीक्षण किया है। इस बात की जानकारी चीनी अनुसंधान टीम ने ब्रिटिश चिकित्सा पत्रिका द लासेंट को दी है। पहले चरण के क्लिनिकल परीक्षण परिणाम से जाहिर है कि यह टीका सुरक्षित है। चीनी विज्ञान अकादमी के सदस्य रो त्सी ह ने बताया कि निसंदेह चीनी वैज्ञानिकों के अध्ययन कार्य ने कोविड-19 महामारी के अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के लिए अहम वैज्ञानिक प्रमाण प्रदान किये हैं।

द लासेंट पर जारी इस टीके का परीक्षण 108 वयस्कों के बीच किया गया। पहले चरण के परीक्षण से पता चला है कि यह टीका सुरक्षित है और इस की अच्छी सहनशीलता है, लेकिन अधिक अध्ययन की जरूरत है कि क्या यह टीका कोविड-19 संक्रमण की प्रभावी रोकथाम कर सकेगा या नहीं।

द लासेंट के मुख्य संपादक रिचोर्ड होर्टन ने सोशल मीडिया पर इस खबर को शेयर किया और इस परीक्षण के परिणाम को मील का पत्थर बताया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अब विश्व में कोविड-19 की रोकथाम के लिए 120 से अधिक टीकों का अनुसंधान चल रहा है, जिन में से कुछ का क्लिनिकल आकलन किया जा रहा है ।



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भारत में कोरोना वायरस वैक्सीन का मानव परीक्षण होने में लगेंगे 6 महीने

नई दिल्ली। भारत वैश्विक संक्रमण सूची में 10वें स्थान पर आ गया है और यह कोरोना वायरस के प्रारंभिक हॉटस्पॉट रहे ईरान को पछाड़ रहा है। भारत के शीर्ष चिकित्सा निकाय ने कहा है कि कोविड-19 वैक्सीन के लिए कम से कम 6 महीने में मानव परीक्षण शुरू हो सकते हैं।

रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर के निदेशक और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के प्रमुख डॉ. रजनी कांत ने आईएएनएस से कहा, "पुणे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) प्रयोगशाला में वायरस का स्ट्रेन पृथक किया गया है, अब इसका वैक्सीन बनाने में उपयोग किया जाएगा। इस स्ट्रेन को सफलतापूर्वक भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (बीबीआईएल) में स्थानांतरित कर दिया गया है। उम्मीद है कि कम से कम छह महीनों में वैक्सीन के मानव परीक्षण शुरू हो जाएंगे।"

भारत के रूप में कोविड-19 मामलों की संख्या 1.4 लाख पहुंच गई है लेकिन कांत का कहना है कि हमें संख्या में तेजी से हो रही वृद्धि के बारे में चिंतित नहीं होना चाहिए। जबकि पिछले सप्ताह में, हर दिन 5,000 कोविड -19 मामले सामने आए। कांत ने कहा कि हमें संख्या की बजाय कमजोर समूहों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।

कांत ने आगे कहा, "हमें कोविड-19 मामलों के बढ़ने से नहीं डरना चाहिए। बुजुर्गों और ऐसे लोग जो पहले से ही किसी बीमारी से ग्रसित हैं, उन लोगों की सुरक्षा की आवश्यकता है। यह अत्यधिक कमजोर समूह है, और हमें इस समूह में मृत्युदर को कम रखने के लिए पर्याप्त संसाधन लगाने और रणनीतियों को विकसित करने की जरूरी है।"

शुरुआत में यह माना गया था कि देश को हजारों वेंटिलेटर की जरूरत होगी, लेकिन पिछले हफ्ते, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 के केवल 0.45 प्रतिशत मामलों में वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत है।

कांत ने जोर दिया कि फोकस पांच फीसदी से 10 फीसदी गंभीर मरीजों पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम रोजाना एक लाख से अधिक परीक्षण कर रहे हैं और हमारे यहां कोविड मामलों की मृत्युदर पहले से ही दुनिया में सबसे कम है। लिहाजा, वैक्सीन के अभाव में, लोगों को सामाजिक दूरी के दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए, जो बहुत कारगर है।"

रिकवरी दर के महत्व पर, कांत ने कहा कि कोविड-19 रोगियों की रिकवरी दर 41 प्रतिशत है, जो कि इस घातक संक्रमण के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक अहम चीज है।

मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद में बड़े पैमाने पर सामने आ रहे मामलों को लेकर कांत ने कहा कि इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व बहुत अधिक है, जो वायरल संक्रमण फैलने के लिए सही वातावरण साबित होता है। उन्होंने ऐसे कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हुए हॉटस्पॉट्स में मजबूत क्लस्टर प्रबंधन रणनीतियों को विकसित करने पर जोर दिया और कहा कि इन क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही पूरी तरह बंद की जानी चाहिए। कांत ने आगे कहा, "वर्तमान में, बहुत लोग आसानी से घूम रहे हैं और सामाजिक दूरियों के मानदंडों का पालन नहीं कर रहे हैं। लॉकडाउन का पहला चरण बहुत प्रभावी था, लेकिन अब चीजें बदल गई हैं।"

सुमित सक्सेना

आईएएनएस



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CORONA UPDATE : इन चार राज्यों में क्यों सबसे ज्यादा बढ़ रही है संक्रमितों की संख्या

महाराष्ट्र :
देश की वित्तीय राजधानी कहे जाने वाला राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित है। 50 हजार से अधिक मरीजों वाला इकलौता राज्य है। इस समय 52,6670 संक्रमित हैं। राज्य के के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि हम दो माह से इस लड़ाई को लड़ रहे हैं। मुझे विश्वास है कि हम कोरोना के प्रसार को जल्द ही रोक देंगे।

तमिलनाडु :
कोरोनावायरस की संख्या 17,000 के पार पहुंच गई। एक दिन पहले राज्य में सबसे अधिक 805 कोरोना मरीज पाए गए। चेन्नई में सबसे अधिक 549 नए मामलों के साथ कुल 11,131 मरीज हो गए। इसमें 93 संक्रमित जिनमें 87 महाराष्ट्र, दो केरल, तीन गुजरात और एक आंध्र प्रदेश से आया था। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ये सभी सड़क मार्ग से आए। टेस्ट किया गया तो ये सभी पॉजिटिव पाए गए।

गुजरात :
यहां अब तक कुल 14,460 संक्रमित मिले हैं। अहमदाबाद में 310 संक्रमित मिले हैं। यहां रोजाना 20 से अधिक मौतें हो रही थीं लेकिन एक दिन पहले यह आंकड़ा 30 को पार कर गया। इस तरह अब तक गुजरात में कोरोना से 888 मौतें हो चुकी हैं। यह महाराष्ट्र के बाद दूसरा राज्य बन गया है। सिर्फ अहमदाबाद शहर में 722 संक्रमितों की मौत हुई।

दिल्ली :
दिल्ली में एक दिन पहले 600 से अधिक कोरोना से संक्रमित मिले। राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 14,053 पहुंच गई। राष्ट्रीय राजधानी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि में कोरोना की स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अधिकांश संक्रमित हल्के लक्षण वाले हैं। निजी अस्पतालों में 20 प्रतिशत संक्रमितों के लिए आरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।



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'बैट वुमन' की चेतावनी, कोरोना वायरस तो सिर्फ शुरुआत, फैल सकते हैं ऐसे कई वायरस

बीजिंग. चीन की प्रमुख वायरोलॉजिस्ट BAT WOMEN ने एक इंटरव्यू में नए वायरस के फैलने की ओर आगाह किया। चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हम किसी भी संक्रामक रोग के प्रकोप से बचना चाहते हैं तो सबसे पहले जंगली जानवरों द्वारा फैलाए गए अज्ञात वायरस के बारे में अध्ययन करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं करेंगे तो आगे चलकर कोई दूसरी महामारी फैलेगी, जिसे रोकना मुश्किल होगा।

वैज्ञानिकों और सरकारों को पारदर्शी होने की जरूरत
वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WUHAN INSTITUTE OF VIROLOGY) की डिप्टी डायरेक्टर झेंगली चमगादड़ में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर शोध के लिए जाने जाती हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों के राजनीतिकरण पर कहा कि वायरस के शोध के लिए वैज्ञानिकों व सरकारों को पारदर्शी और सहयोगी होने की जरूरत है। वहीं देशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की बात कही है।

वुहान से वायरस की बात नकारता रहा है चीन
गौरतलब है कि दुनिया में अब तक कोरोना 55 लाख से अधिक संक्रमित हो चुके हैं। वहीं मौतों का आंकड़ा बढ़कर 3.50 लाख के करीब है। कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर चीन-अमरीका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप व विदेश मंत्री माइकल पोम्पियो कोरोना वायरस के वुहान लैब से फैलने का आरोप लगा चुके हैं। हालांकि चीन और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी इन आरोपों को निराधार बता चुके हैं।



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Weight Loss Tips: पेट की जिद्दी चर्बी को कम करने के लिए काफी हैं ये 3 व्यायाम

Weight Loss Tips: मोटापा या पेट पर चर्बी जमने के कई कारण हो सकते हैं। और अगर आपको इससे झुटकारा पाना है तो पसीना बहाना ही होगा। लेकिन ज्यादा नहीं बस थोड़ा सा। सबसे पहले पेट और कमर की चर्बी कम करने के लिए आप अपने आहार में सही बदलाव करें और उसके बाद कुछ व्यायाम (Weight Loss Exercise) अपनाएं। आज हम आपको पेट की चर्बी कम करने वाली तीन व्यायाम बताने जा रहें हैं जो आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में

रस्सा कूदना यानी स्किपिंग
अगर आप नियमिन व्यायाम के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं। तो आप रोजाना कुछ समय रस्सी कूद सकते हैं। एक्सपर्टस की मानें तो रोजाना 10 मिनट तक रस्सी कूदना 8 मिनट की जॉगिंग के बराबर हो सकता है। तो अगर आप घर से बाहर नहीं जा पाते हैं तो नियमित रूप से 10 से 15 मिनट तक स्किपिंग कर सकते हैं यह आपको 200-300 कैलोरी जलाने में मदद कर सकता है।

सुबह की सैर
अगर आपकी सेहत ठीक नहीं रहती या उम्र ज्यादा है या डॉक्टर ने मुश्किल व्यायाम करने से मना किया है, तो भी आप वजन कम करने के लिए सैर का सहारा ले सकते हैं। जी हां, अगर आप जिम नहीं जा सकते तो वॉक करें। आप घर में रह कर भी रोज 2000 कदम चल सकते हैं।

स्विमिंग
इस बात को कौन नहीं मानता कि स्विमिंग बेस्ट एक्सरसाइज है। इसमें आप एक ही काम करते हुए अपने पूरे शरीर के लिए एक्सरसाइज करते हैं। यह आपके पेट पर जमी वसा को कम करती है, शरीर को शेप में लाती है और हां वजन भी कम करती है। तो अपने लिए समय निकल कर स्विमिंग को चुनें। एक ओर तो यह आपको रिलेक्स करेगी वहीं दूसरी और फिट भी बनाएगी।



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Coronavirus Update: Covid-19 के 73 का मरीजाें पर शाेध, वैज्ञानिकों ने किया से बड़ा दावा

coronavirus Update: नोवल कोरोना वायरस से दुनियाभर में अबतक 55 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हए हैं और 3 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिक इस बीमारी का इलाज तलाश कर रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। हालांकि कोविड-19 को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक आए दिन नए-नए दावे कर रहे हैं। इसी कड़ी में हुए एक ताजा रिसर्च में कुछ चौंकाने वाली बातें निकलकर सामने आई हैं जो के संक्रमण के फैलने से जुड़ी हैं।


सिंगापुर के कुछ वैज्ञानिकों ने 73 मरीजों पर की गई एक रिसर्च के बाद दावा किया है कि कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति लक्षण दिखने से दो दिन पहले से लोगों को संक्रमित करना शुरू कर देता है। लेकिन इस रिसर्च में जो सबसे बड़ा दावा किया गया है, वो ये है कि संक्रमित व्यक्ति बीमार होने के बाद 11 दिन तक ही संक्रमण फैला सकता है, उसके बाद नहीं।

पॉजिटिव आने पर भी नहीं
इस रिसर्च में ये भी दावा किया गया है कि बीमारी के 11 दिन बाद इलाज के दौरान अगर संक्रमित व्यक्ति का टेस्ट पॉजिटिव भी आया, तब भी वो संक्रमण नहीं फैला सकता। संक्रमित व्यक्ति बीमार होने के बाद तकरीबन 7 से 10 दिन तक ही वायरस को दूसरे लोगों में फैला सकता है। बीमार होने के मुख्य लक्षण तेज बुखार और लगातार सूखी खांसी आना हैं।

73 मरीजों पर किया गया शोध
सिंगापुर नेशनल सेंटर फॉर इन्फेक्शस डिजीज एंड एकेडमी ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने इस स्टडी के दौरान 73 कोरोना मरीजों पर रिसर्च की। इसमें ये पाया गया कि जिन मरीजों में दो हफ्तों के बाद भी लक्षण मौजूद रहते हैं और टेस्ट पॉजिटिव आता है, उन लोगों के अंदर वायरस के वो कण मौजूद रहते होंगे जो किसी और को बीमार करने में सक्षम नहीं होते।

कोरोना के उपचार में मिलेगा फायदा
बताया जा रहा है कि इस रिसर्च का फायदा डॉक्टरों को मिल सकता है जो कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे हैं। जब किसी मरीज में ठीक होने के संकेत दिखने लगते हैं तब डॉक्टर को पता होना चाहिए कि मरीज को कब घर भेजा जा सकता है। उम्मीद की जा रही है कि इस स्टडी पर थोड़ा और काम किया जाएगा ताकि स्थिति और स्पष्ट हो सके और उसके बाद ही विशेषज्ञ किसी ऐसे फैसले का प्रचार कर सकेंगे जिसका डॉक्टरों द्वारा पालन किया जा सके।



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Monday, 25 May 2020

Skin Care Mistakes: आपकी त्वचा की रंगत खराब कर सकती है ये 5 गलतियां

Skin Care Mistakes: त्वचा की खूबसूरती बनाए रखने के लिए लोग न जाने क्या-क्या नहीं करते। महंगे ब्यूटी प्रॉडक्ट्स ये लेकर घरेलू उपाय तक अपनाते हैं। लेकिन कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनके का कारण पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है और त्वचा को वो फायदा नहीं मिल पाता जो मिलना चाहिए। तो क्या हैं वो गलतियां जिनसे दूर रहना ही आपकी स्किन के लिए अच्छा है, चलिए जानते हैं:-

ऑइली फूड का शौक
चेहरे की ब्यूटी बढ़ाने के लिए चाहे जो मर्जी कर लें, लेकिन अगर ऑइली, फ्राइड फूड, फास्ट फूड और कैफीन का सेवन जारी रखेंगे तो स्किन से जुड़ी समस्याएं भी खत्म नहीं होंगी। बेहतर होगा कि इनका सेवन न करें या फिर बहुत कम करें।

कम पानी पीना
शरीर और स्किन को टॉक्सिन फ्री रखना है तो पानी जरूर पिएं। कम पानी पीने पर डाइजेशन से लेकर शरीर में कई तरह की समस्याएं आएंगी जो स्किन को नुकसान पहुंचाएंगी, इसलिए दिन में 8 ग्लास पानी जरूर पिएं।

नींद की कमी
पर्याप्त नींद न लेना न सिर्फ शरीर के लिए नुकसानदेह है बल्कि स्किन का भी बड़ा दुश्मन है। अगर आप सिर्फ दो दिन भी ठीक से न सोएं तो तीसरे दिन ही आपको अपनी स्किन में बदलाव दिखने लगेगा और ये बदलाव अच्छा नहीं होगा।

नींद की कमी
पर्याप्त नींद न लेना न सिर्फ शरीर के लिए नुकसानदेह है बल्कि स्किन का भी बड़ा दुश्मन है। अगर आप सिर्फ दो दिन भी ठीक से न सोएं तो तीसरे दिन ही आपको अपनी स्किन में बदलाव दिखने लगेगा और ये बदलाव अच्छा नहीं होगा।

त्वचा साफ न रखना
फेस को अच्छे से साफ न रखने का मतलब है कि आप त्वचा की नैचरल ब्यूटी खो देंगे। पिंपल्स, धब्बे जैसी समस्या इसी लापरवाही की देन होती हैं। दिन में दो बार चेहरा जरूर धोएं और सप्ताह में दो से तीन बार स्क्रब जरूर करें। साथ ही महीने में एक बार फेशल भी जरूर करवाएं।

केमिकल बेस्ड प्रॉडक्ट का इस्तेमाल
मार्केट में मिलने वाले ब्यूटी प्रॉडक्ट्स में काफी बड़ी मात्रा में केमिकल्स होते हैं। इससे स्किन को तुरंत भले ही कोई डैमेज न हो लेकिन लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से त्वचा को नुकसान होना शुरू हो जाता है। इनकी जगह नैचरल या ऑर्गैनिक ब्यूटी प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करें।



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Stay Happy: तनाव बढ़ा सकती है आपकी ये एक आदत, खुशहाल रहने के लिए अपनाएं ये टिप्स

Stay Happy: भागदौड़ भरी दिनचर्या हो या लॉकडाउन में घर में बंद रहने की मजबूरी, कभी न कभी आपको तनाव की ओर धकेल सकती हैं। जिसकी वजह से आप न चाहते हुए भी डिप्रैशन या माइग्रेन के शिकार भी हो सकते हैं। इतना ही नहीं स्ट्रेस या तनाव आपको चिड़चिड़ा और गुस्सैल बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि तनाव को दूर रखकर जिंदगी को खुशहाल बनाया जाए। आइए जानते है तनाव को दूर कर खुश रहने के कुछ टिप्स के बारे में:-


मेडीटेशन करें
स्ट्रेस, तनाव, और टेंशन को दूर करने के लिए यह सबसे अच्छा उपाय है। इसे करने के लिए हमेशा शांत जगह चुने और वहां बैठकर ओउम् का जाप करें। आप चाहें तो कुछ पॉजिटिव भी सोच सकते हैं। रोजाना मेडीटेशन करने से आप न सिर्फ तनाव से दूर रहेंगे बल्कि यह आपको सेहतमंद भी रखेगा।

गहरी सांस का अभ्यास करें
जब भी आपको तनाव, टेंशन या स्ट्रेस हो तो ब्रेक लेकर अपनी सांस पर ध्यान दें। अपनी आंखों को बंद करके एक हाथ को नाभी पर रखें और दूसरे हाथ से नाक के एक छिद्र को बंद कर लें। अब धीरे-धीरे सांस छोड़ें और दोबारा सांस लेकर उसे फिर धीरे-धीरे छोड़ दें। इससे आपका सारा स्ट्रेस गायब हो जाएगा।

अपना ध्यान रखें
अपने स्ट्रेस को एक साइड रखकर सबसे पहले अपने आप से यह पूछें कि ऐसे परेशान होने से क्‍या होगा? इसके अलावा अपने व्यवहार पर भी ध्यान दें और अगर उसमें कोई कमी नजर आए तो उसे सुधारने की कोशिश करें। इसके अलावा आप अपने स्ट्रेस को दूर करने के लिए अपना पसंदीदा खाना भी खा सकते हैं। जब भी आप खुद को एंजॉय करते हैं तब अपने सेंस पर फोकस करें। तनाव अपने आप ही गायब हो जाएगा।

लोगों से बात करें
अक्सर तनाव या स्ट्रेस होने पर आप अकेला रहना पसंद करते है लेकिन इससे आपकी समस्या और भी बढ़ सकती है। इसलिए लोगों से बातचीत करें। अपनी फैमिली और फ्रैंड्स के साथ समय बिताएं। ऐसा करने से आपको हल्‍का महसूस होगा और एक ताकत अंदर से आएगी जो आपको कुछ नया करने या सोचने की शक्ति प्रदान करेगा। इससे आपको अपनी समस्‍या का हल भी मिल सकता है।

खुलकर हंसें
खुलकर हंसने से न सिर्फ आपका स्ट्रैस दूर होता है बल्कि यह आपकी सेहत के लिए भी अच्छा है। एक रिसर्च के अनुसार, खुलकर हंसने से तनाव दूर होता है। इससे कॉर्टिसोल लोअर होता है, जिससे दिमाग में एंडोमॉर्फिन कैमिकल रिलीज होते हैं। इससे आपका तनाव दूर होता है। इससे लिए आप कोई कॉमेडी शो देख सकते हैं या फिर अपने किसी हंसमुख दोस्त से बात कर सकते हैं।

गाने सुनना भी जरूरी
रिसर्च के अनुसार, गाने सुनने से ब्‍लड़ प्रेशर कम, हार्ट रेट नॉर्मल और तनाव दूर हो जाता है। इसलिए जब भी आपको टेंशन हो अपने पसंदीदा गानें सुने लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि आप दुखी करने वाले गाने न सुने।

ज्यादा न सोचे
जरूरत से ज्यादा सोचने रहने से दिमाग काम करना बंद कर देता है। अगर आपकी भी ज्यादा साेचने की आदत है ताे इस पर राेक लगाएं, क्याेंकि इससे कई बार दिमागी और मानसिक परेशानी होने लगती हैं। जब भी आपको किसी बात की चिंता हो तो उसको अपने किसी दोस्त या परिवार वालों के साथ शेयर करे और जितना हो सके कम सोचें।



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Jackfruit Benefits: रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में रामबाण है कटहल, ऐसे करता है फायदा

Jackfruit Benefits: विटामिन ए, विटामिन सी, बी-6, थायमीन, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन और जिंक से भरपूर कटहल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। यही नहीं कटहल में पाया जाने वाला पोटैशियम हार्ट से जुड़ी बीमारियों से सुरक्षित रखता है। उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए ये बहुत ही फायदेमंद है। आइए जानते हैं कटहल खाने के फायदाें के बारे में...

अस्थमा में फायदेमंद
अस्थमा के इलाज में भी ये एक कारगर औषधि की तरह काम करता है। कच्चे कटहल को पानी में उबालकर छान लें। जब ये पानी ठंडा हो जाए तो इसे पी लें। नियमित रूप से ऐसा करने से अस्थमा की समस्या में फायदा होता है।

एनीमिया से बचाए
कटहल आयरन का एक अच्छा सोर्स है जिसकी वजह से एनीमिया से बचाव होता है। साथ ही इसके प्रयोग से ब्लड सर्कुलेशन भी नियंत्रित रहता है।

हड्डियां भी स्वस्थ
कटहल में मैग्नीशियम भी पर्याप्त मात्रा में होता है। जिसकी वजह से हड्डियां भी स्वस्थ और मजबूत रहती हैं। इसमें पाए जाने वाले कई खनिज हार्मोन्स को भी नियंत्रित करते हैं।

कब्ज करें दूर
विशेषज्ञाें के अनुसार कटहल में फाइबर भरपूर मात्रा में होता हैं। जिन लोगों को कब्ज की समस्या रहती है उनके लिए यह फायदेमंद है। यह पाचन क्रिया को भी ठीक करता है। इसमें मिनरल्स की भी भरपूर मात्रा होने के कारण स्वास्थ्य वर्धक भी है।

इम्यूनिटी बढ़ाए
कटहल में कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम, मैग्निशियम, फोलिक एसिड, थायमीन और नियासी जैसे तत्व मिलते हैं। ये सभी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करते हैं।

संक्रमण से करें बचाव
कटहल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर में मुक्त कणों को शरीर से निष्क्रिय करने में मदद करता है। इस तरह हमारी रोगों से रक्षा होती है। कटहल में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो कैंसर, बढ़ती उम्र के लक्षणों और अपक्षयी रोगों से बचाता है। इसके साथ ही यह संक्रमण से बचाने के लिए भी बहुत उपयोगी है। इसका उपयोग फ्लू, वायरल और फीवर से बचाता है। इसके दैनिक उपयोग से गर्मी में होने वाली तमाम वायरस जनित बीमारियों से भी बचा जा सकता है।



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Coronavirus Update: विटामिन डी से कम होता है Covid-19 का खतरा, जानिए कितना सच है ये दावा

coronavirus Update: अब तक कई हुए कई अध्ययनों में इस बात का दावा किया गया था कि विटामिन डी की उच्च खुराक कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में सहायक हो सकती है। लेकिन हाल ही में हुए एक नए अध्ययन में खुलासा किया गया है कि विटामिन डी सप्लीमेंट की हाई डोज न ही कोविड-19 से बचाने में सहायक और न ही इसके इलाज में कोई भूमिका निभाती है। अपितु ज्यादा खुराक सेहत को नुकसान अवश्य पहुंचा सकती है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के वैज्ञानिकों ने यह बात कही है। वैज्ञानिकों ने बताया कि ऐसा कोई प्रमाण अब तक नहीं मिला है।

विज्ञान पत्रिका बीएमजे न्यूट्रिशन, प्रिवेंशन एंड हेल्थ में प्रकाशित रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने कहा कि जब तक कोई स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिल जाता, तब लोगों को हर हाल में विटामिन डी की हाई डोज से बचकर ही रहना चाहिए।

Vitamin D एक हार्मोन है। सूर्य के प्रकाश में त्वचा में इसका निर्माण होता है। शरीर में कैल्शियम और फॉस्फेट की मात्रा को नियमित करने में यह मदद करता है, जिससे हड्डी, दांत और मांसपेशियों का स्वास्थ्य सुनिश्चित होता है।

शोधकर्ता सू लेनहेम न्यू ने कहा, 'संपूर्ण स्वास्थ्य की दृष्टि से शरीर में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा बहुत जरूरी है। इसकी मात्रा बहुत कम हो जाए तो रिकेट जैसी समस्या हो सकती है। वहीं अगर मात्रा बहुत ज्यादा हो जाए तो शरीर में कैल्शियम का स्तर भी बढ़ जाएगा और शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।'

वैज्ञानिकों को अब तक कोविड-19 से बचाव में विटामिन डी की हाई डोज की भूमिका का कोई प्रमाण नहीं मिला है। ऐसे में चिकित्सकों की उचित सलाह और देखरेख के बिना विटामिन डी का ज्यादा सेवन दुष्प्रभाव का कारण बन सकता है। विटामिन डी ही नहीं, कोविड-19 से बचाव के नाम पर ऐसे किसी भी विटामिन या अन्य तत्व का ज्यादा सेवन घातक है, जिसको लेकर कोई पुष्ट वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हो।



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इन चीजों का जूस पीकर गर्मी से करें मुकाबला

गर्मी को मात देने के लिए जरूरी है कि शरीर में पानी की कमी न हो। ऐसे में जूस थैरेपी को फॉलो कर उमस भरी गर्मी से बचा जा सकता है।

चुकंदर: ये ब्लड को प्यूरिफाई करता है। इसके जूस से शरीर से विषैले पदार्थ दूर होते हैं।
पालक: रोज दो बार पालक का जूस पीने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।
टमाटर: टमाटर का जूस यह हृदय रोगों की रोकथाम में मदद करता है।
खीरा: यह जोड़ों की बीमारियों से बचाए रखता है। इसमें पोटेशियम की मात्रा बहुत होती है जिससे किडनी दुरुस्त रहती है और त्वचा संबंधी रोग भी नहीं होते।
नींबू: यह वजन कम करता है और बॉडी से दूषित पदार्थों को बाहर निकालता है। नींबू के रस को शहद से मिलाकर पीने से ठंडक मिलती है।
पपीता: यह पाचन से जुड़ी बीमारियों को ठीक करता है।
अंगूर : अंगूर का जूस ब्लड प्रेशर कम करता है।



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गर्मी में पसीने की समस्या से एेसे पाएं छुटकारा

गर्मी में सबसे ज्यादा परेशान हमें पसीना करता है। मौसम में नमी के चलते या ज्यादा धूप में पसीना आने पर शरीर से बदबू आने लगती है। शरीर में मौजूद बैक्टीरिया हाइड्रोजन सल्फाइड बनाने लगते हैं, जिससे बदबू पैदा होती है। कई बार जब मरीज कुछ खास तरह की दवाइयां लेते हैं तो भी पसीने से दुर्गंध आने लगती है। कई बार पसीना सूखने पर कपड़ों पर सफेद और पीले दाग दिखने लगते हैं, ऐसा पसीने के रंग से नहीं बल्कि उसमें मौजूद सॉल्ट (नमक) के कारण होता है।

उपाय : ज्यादा पसीना आने पर दिन में 2-3 बार नहाने की आदत डालें। टेलकम या एंटी-फंगल पाउडर प्रयोग करें या कैलामाइन लोशन लगाएं।

ये भी उपयोगी -
दिन में दो बार फिटकरी को हल्का गीला कर बॉडी फोल्ड्स में लगा लें। इससे पसीना आना कम हो जाता है। एंटी-प्रॉस्पेरेंट लोशन या पाउडर लगा सकते हैं। इसका जेनरिक नाम एल्युमिनियम हाइड्रोक्साइड है। इससे पसीना कम आएगा और बैक्टीरिया भी कम पनपेंगे। पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। कम पानी पीने से आपको डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है।



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भारत में 4 कोरोना वैक्सीन का जल्द ही चिकित्सकीय परीक्षण होगा

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने रविवार को कहा कि देश में उपन्यास कोरोनावायरस की वैक्सीन के लिए 14 उम्मीदवारों में से चार जल्द ही क्लीनिकल ट्रायल (चिकित्सकीय परीक्षण) के चरण में प्रवेश कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर भाजपा नेता जी. वी. एल. नरसिम्हा राव के साथ बातचीत के दौरान मंत्री ने कहा कि पांच महीने के भीतर देश में वैक्सीन चार क्लीनिकल ट्रायल चरण में प्रवेश कर सकते हैं।

राव ने स्वास्थ्य मंत्री से देश में वैक्सीन (टीकों) की स्थिति के बारे में पूछा तो मंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया कोविड-19 के लिए एक वैक्सीन विकसित करने की कोशिश कर रही है। 100 से अधिक वैक्सीन की उम्मीदवारी हैं, जो विकास के विभिन्न स्तरों पर हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इन प्रयासों में समन्वय कर रहा है। भारत भी इसमें सक्रिय रूप से काम कर रहा है। भारत में 14 उम्मीदवार हैं, जो विभिन्न स्तरों पर हैं।"

उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का जैव प्रौद्योगिकी विभाग अकादमिक दुनिया और उद्योगों को नियामक मंजूरी, अनुदान या वित्तीय सहायता के तौर पर मदद कर रहा है। हर्षवर्धन ने कहा, "जहां तक मुझे पता है, हमारी 14 में चार वैक्सीन जल्द ही चार से पांच महीनों के अंदर क्लीनिकल ट्रायल के चरण में होंगी। अभी सभी 14 प्री-क्लीनिकल ट्रायल चरण में हैं।

हालांकि मंत्री ने आगाह किया कि इस बीमारी के खिलाफ किसी भी वैक्सीन की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि इसके विकसित होने की एक लंबी प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, "चाहे यह जल्द से जल्द विकसित भी हो जाए फिर भी किसी भी वैक्सीन के विकसित होने में न्यूनतम एक वर्ष लगेगा। इसलिए सामाजिक दूरी, मास्क और हाथों एवं शारीरिक स्वच्छता का उपयोग करें।" उन्होंने कहा कि जब तक कोई वैक्सीन या इलाज नहीं मिल जाता है, तब तक यही उपाय बीमारी के खिलाफ सबसे बड़ी सुरक्षा है।



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Sunday, 24 May 2020

ये खास एंटीऑक्सीडेंट शरीर को तमाम बीमारियों से बचाएंगे

एंटी ऑक्सीडेंट ऐसे तत्त्व हैं जो कई प्रकार की बीमारियों से शरीर की रक्षा करते हैं। इनसे बुढ़ापे की प्रक्रिया धीमी होती है। ये विटामिन-ए, विटामिन-सी और विटामिन-ई से मिलते हैं। सब्जियों और फलों में एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं।

विटामिन-सी-
इसका सबसे बढिय़ा स्त्रोत आंवला है। यह नींबू, संतरा, मौसमी, स्ट्रॉबेरी, अमरूद, फूलगोभी और हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक, सरसों आदि में पाया जाता है।
विटामिन-ई -
यह श्वेत रक्तकणिकाओं को मजबूत करता है और हृदय रोगों से बचाता है। आटे, अंकुरित दालों और हरे साग में यह पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
विटामिन-ए -
ये दो प्रकार के होते हैं। एक, जो जानवरों से प्राप्त होते हैं जैसे मांस, दूध आदि जिसे रेटिनोल कहते हैं और दूसरे जो फल और सब्जियों से मिलते हैं जिसे बीटा कैरोटीन कहते हैं। रंगीन फल-सब्जियां इसका बेहतरीन स्त्रोत हैं जैसे गोभी, गाजर, सीताफल, आम, पपीता और टमाटर। कैरोटीन जब शरीर में पहुंचता है तो विटामिन-ए में बदल जाता है।



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Weight loss Tips: गर्मी के दिनों में फैट बर्नर ज्यूस के ऐसे घटाएं मोटापा

Weight loss Tips: बढ़ता हुआ मोटापा न केवल आपकी शारीरिक बनावट को खराब करता है, बल्कि उसे कई बीमारियों का घर भी बनाता है। मोटापे या बढ़ते वजन का सबसे बड़ा कारण अनियमित खान-पान और आलसी दिनचर्या। लेकिन आप चाहेे तो लॉकडाउन के दौरान कुछ घरेलू जूस के जरिए आप अपने वजन को अच्छे से कम कर सकते हैं। जी हां आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे हेल्दी जूस के बारे में जो आपका वजन घटाने में काफी मददगार साबित होंगे। आइए जानते हैं इनके बारे में:-

नींबू और अदरक का रस
विशेषज्ञों के मुताबिक, अदरक शरीर के कुछ विशेष अंगों जैसे – कमर और कूल्हों पर जमा होने वाली चर्बी को कम करने में कुछ हद तक मदद कर सकता है। वहीं, नींबू के रस में मौजूद पॉलीफेनोल्स इंसुलिन की सक्रियता को बढ़ाकर ब्लड शुगर को कम करने के साथ ही खाद्य पदार्थों के द्वारा शरीर पर जमा होने वाली वसा को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। इस कारण यह माना जा सकता है कि अदरक, नींबू और पानी का मिश्रण काफी हद तक वजन घटाने के प्रयास में सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है।


कैसे बनाएं:
एक इंच अदरक को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। अब अदरक के टुकड़ों को पानी के साथ मिक्सर में डालें और अच्छे से मिक्स करें। जब पानी के साथ अदरक अच्छी तरह मिक्स हो जाए, तो तैयार जूस को एक गिलास में अलग कर लें। अब इसमें नींबू का रस व स्वाद के लिए एक चुटकी काला नमक मिक्स करके सेवन करें।

मेथी का पानी
बायो-मेड रिसर्च इंटरनेशनल द्वारा मेथी दानों पर किए गए एक शोध में पाया गया कि यह वजन घटाने में मदद कर सकता है। शोध में बताया गया कि मेथी दाने में इंसुलिन की सक्रियता को बढ़ाने के साथ-साथ लिपिड, कोलेस्ट्रॉल और वसा की अधिक मात्रा को नियंत्रित करने की क्षमता होती है। क्योंकि, ये सभी संयुक्त रूप से मोटापे के मुख्य कारणों में शामिल हैं। ऐसे में यह माना जा सकता है कि मेथी के फायदे में एंटी-ओबेसिटी प्रभाव यानी मोटापा कम करने वाला गुण मौजूद होता है, जो मोटापे की समस्या से परेशान लोगों को राहत दिलाने में सहायक साबित हो सकता है।

कैसे बनाएं:
एक कप पानी में दो चम्मच मेथी दाने डालकर रातभर के लिए छोड़ दें। अगली सुबह पानी को छानकर अन्य कप में अलग कर लें। मेथी के इस पानी में एक चुटकी काला नमक मिलाकर पी जाएं।

अंगूर और व्हीट ग्रास का जूस
व्हीट ग्रास में बढ़े हुए लिपिड और कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ-साथ अन्य विषाक्त पदार्थों को दूर करने की क्षमता मौजूद होती हैं। वहीं, लेख में ऊपर बताया गया है कि लिपिड और कोलेस्ट्रॉल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मोटापे की समस्या से जुड़े हैं। ऐसे में व्हीट ग्रास कुछ हद तक वजन को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। वहीं, अंगूर के गूदे में फाइबर और पॉलीफेनोल्स संयुक्त रूप से मोटापे के जोखिमों को दूर कर बढ़ते हुए वजन को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। ऐसे में यह माना जा सकता है कि व्हीट ग्रास और अंगूर के मेल से तैयार किया गया जूस मोटापे की समस्या से ग्रस्त लोगों के लिए कारगर साबित हो सकता है।

कैसे बनाएं:
एक कप कटी हुई व्हीट ग्रास और आधा कप अंगूर को आधा कप पानी के साथ ब्लेंडर में डालकर जूस निकाल लें। अब तैयार हुए जूस को गिलास में अलग करें और उसमें एक चुटकी काला नमक मिलाकर सेवन करें।



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कालीमिर्च के सेवन से दूर होती है गले की खराश, जानें इसके अन्य फायदे

काली मिर्च का सेवन करने से खांसी और जुकाम की समस्या में आराम मिलता है। शहद के साथ कालीमिर्च को चाटने से गले की खरास साफ होती है। कालीमिर्च का प्रयोग शरीर को फिट रखेता है बल्कि खांसी और जुकाम जैसे रोगों से भी दूर रखता है। काली मिर्च में पिपराइन मौजूद होती है और उसमें एंटी-डिप्रेसेंट के गुण होते है, जिस कारण काली मिर्च लोगों की टेंशन और डिप्रेशन को दूर करने में मदद करती है। वैसे गर्मी को मौसम में कालीमिर्च का सेवन कम करना चाहिए।

काली मिर्च शरीर में वसा संचय को रोकती है। इसके अलावा, काली मिर्च आपके चयापचय में सुधार करके कैलोरीज के शमन में मदद कर सकती है। आधा चम्मच कालीमिर्च के चूर्ण और एक चम्मच मिश्री को मिलाकर एक कप गुनगुने दूध के साथ दिन में तीन बार लेने से सर्दी-जुकाम में लाभ होता है। सोने से पहले 3-4 कालीमिर्च चबाकर उसके बाद गुनगुना दूध पीने से जुकाम में आराम मिलता है।

कालीमिर्च और बताशे को पानी में उबालकर पीने से जुकाम ठीक हो जाता है और दिमाग भी हल्का होता है। इसके अलावा कालीमिर्च को पीसकर शहद में मिलाकर चाटने से खांसी-जुकाम में आराम मिलता है। ग्राम गुड़ या शक्कर और दही के साथ छह ग्राम पीसी कालीमिर्च मिलाकर सुबह-शाम पांच दिनों तक लेने से बिगड़ा हुआ जुकाम ठीक हो जाता है। चाय-दूध में काली मिर्च मिलाकर पीने से सर्दी से सीने में होने वाला दर्द ठीक होता है। सुबह गर्म पानी के साथ काली मिर्च के सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।



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Wuhan Lab के निदेशक का दावा-चमगादड़ों से मिले थे वायरस पर कोरोना महामारी से कोई संबंध नहीं

बीजिंग. चीन की सरकारी टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में वुुहान लैब के निदेशक वांग यनई ने कहा कि दुनिया के वैज्ञानिकों को लगता है कि कोविड-19 वुहान से शुरू होकर पूरी दुनिया में लगभग 3.4 लाख से ज्यादा लोगों की मौत का कारण बना। अमरीकी राष्ट्रपति का वुहान की लैब से पूरी दुनिया में वायरस फैलने का दावा मनगढ़ंत है। सेंटर के पास चमगादड़ों से निकाले गए कोरोना वायरस के स्ट्रेन का कोविड-19 में 79.8 प्रतिशत समानता है। प्रोफेसर शी जेंग्ली के नेतृत्व में एक टीम 2004 से ही चमगादड़ से निकले कोरोना वायरस पर शोध कर रही है। वह सार्स के स्रोत को ढूंढ रही है। क्योंकि नोवेल कोरोना वायरस के जीनोम सार्स से 80 प्रतिशत मैच करते हैं।

चमगादड़ों से मिले स्ट्रेन से पहले महामारी फैल चुकी थी
30 दिसंबर 2019 को वायरस के स्ट्रेन का सैंपल मिला था। 2 जनवरी 2020 को उसका जीनोम पता लगाया और 11 जनवरी को उसे डब्ल्यूएचओ को सौंप दिया। लैब के निदेशक ने दावा किया है कि दिसंबर में सैंपल मिलने से पहले टीम को ऐसा वायरस पहले कभी नहीं मिला था। अन्य देशों की तरह हमें भी वायरस की मौजूदगी के बारे में नहीं पता था। प्रश्न उठता है कि ऐसे में वह वुहान लैब से कैसे लीक हो सकता है, जबकि उस समय तक हमारे पास था ही नहीं।

वुहान लैब से लीक हुआ वायरस
कोरोना वायरस को लेकर वुहान की वायरोलॉजी इस्टीट्यूट से इंसानों में फैले थे। इसके बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प व अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने भी चीन पर आरोप लगाए। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य सभा में भी सौ से अधिक देशों ने चीन के खिलाफ वायरस फैलाने की जांच की मांग की जिस पर डब्ल्यूएचओ व चीन जांच के लिए तैयार हो गए।



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World Thyroid Day: इस बीमारी में घातक हो सकता है वनस्पति और आयोडीन का सेवन

World Thyroid Day: थायरॉइड की समस्या के प्रति लोगों जागरूक करने के लिए हर साल 25 मई को विश्व थायरॉइड दिवस का आयोजन किया जाता है। Indian Thyroid Society की रिपोर्ट के अनुसार देश में हर 10वां व्यक्त‍ि थायरॉइड का शिकार है। खासतौर से महिलाओं में यह समस्या ज्यादा होती है। थाइरॉइड की वजह से अस्थमा, कोलेस्ट्रॉल की समस्या, डिप्रेशन, डायबिटीज, इंसोमनिया और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा है।

क्या होती है थायराइड की समस्या
यह बीमारी थायराइड ग्रंथि के बढ़ने की वजह से होती है। यह ग्रंथि तितली के आकार की होती है, जो कि शरीर की कई जरूरी गतिविधियों को नियंत्रित करती है। थायराइड ग्रंथि टी3 और टी4 थायरॉक्सिन हार्मोंन का निर्माण करती है जो कि सांस, ह्रदय गति, पाचन तंत्र और शरीर के तापमान पर सीधा असर करती है। साथ ही ये हड्डियों, मांसपेशियों व कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करते हैं। जब शरीर में ये हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं, तो वजन कम या ज्यादा होने लगता है, इसे ही थायराइड की समस्या कहते हैं।

थायराइड की समस्या इन से रखें परहेज
विशेषज्ञों की माने तो कुछ खास चीजों को खाने से थाइरॉइड बढ़ जाता है। ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि थाइरॉइड के दौरान किन चीजें को खाने से परहेज करना चाहिए। आइए जानते हैं उनके बारे में:


कैफीन:
कैफीन वैसे तो सीधे थायरॉइड नहीं बढ़ाता, लेकिन यह उन परेशानियों को बढ़ा देता है, जो थायरॉइड की वजह से पैदा होती हैं, जैसे बेचैनी और नींद में खलल.

आयोडीन वाला खाना:
थायरॉइड ग्लैंड्स हमारे शरीर से आयोडीन लेकर थायरॉइड हार्मोन पैदा करते हैं, इसलिए हाइपोथायरॉइड है तो आयोडीन की अधिकता वाली खाने-पीने की चीजों से जीवनभर दूरी बनाए रखें। सी फूड और आयोडीन वाले नमक को पूरी तरह नजरअंदाज करें।

वनस्पति घी:
वनस्पति घी को हाइड्रोजन में से गुजार कर बनाया जाता है। यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल को खत्म करते हैं और बुरे को बढ़ावा देते हैं। बढ़े थायरॉइड से जो परेशानियां पैदा होती हैं, ये उन्हें और बढ़ा देते हैं। ध्यान रहे इस घी का इस्तेमाल खाने-पीने की दुकानों में जमकर होता है। इसलिए बाहर का फ्राइड खाना न ही खाएं।

रेड मीट:
रेड मीट में कोलेस्ट्रॉल और सेचुरेडेट फैट बहुत होता है। इससे वेट तेजी से बढ़ता है। थायरॉइड वालों का वेट तो वैसे ही बहुत तेजी से बढ़ता है। इसलिए इसे न खाएं। इसके अलावा रेड मीट खाने से थायरॉइड वालों को बदन में जलन की शिकायत होने लगती है।

एल्कोहल:
एल्कोहल यानी शराब, बीयर वगैरा शरीर में एनर्जी के लेवल को प्रभावित करता है। इससे थायरॉइड की समस्या वाले लोगों की नींद में दिक्कत की शिकायत और बढ़ जाती है। इसके अलावा इससे ओस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ जाता है।



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Coronavirus Update: Covid-19 से लड़ाई में असरदार साबित हुई 5300 रुपए की ये दवा

coronavirus Update: नोवल कोरोनावायरस से दुनियाभर में अब तक 54 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हुए हैं। जिसमें से करीब 22 लाख 47 हजार लोग ठीक हुए हैं। जबकि कोविड-19 से मौतों का आंकड़ा 3 लाख 44 हजार 19 हो गया है। दुनियाभर के वैज्ञानिक कोरोनावायरस के लिए वैक्सीन बनाने के काम में जुटे हुए हैं। लेकिन अभी तक कोई सफलता हासिल नहीं हुई है। ऐसे में कोरोना वायरस से लड़ाई में एंटीवायरल ड्रग रेमडेसिवीर (Remdesivir) असरदार साबित हो रही है। अमेरिका में बड़े पैमाने पर हुए इसके क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे उम्‍मीद जगाते हैं। कोरोना के जिन मरीजों को ऑक्‍सीजन थेरपी की जरूरत पड़ रही है, उनमें यह दवा रिकवरी को तेज कर रही है। इस ट्रायल को US के नैशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्‍फेक्शियस डिजीजेज (NIAID) ने फंड किया है। ट्रायल के नतीजे इतने अच्‍छे रहे कि ट्रायल चलते-चलते ही उसकी फाइंडिग्‍स को पब्लिश कर दिया गया है।

Remdesivir से रिकवरी में लगने वाला समय कम हुआ
द न्‍यू इंग्‍लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन (NEJM) के मुताबिक रिसर्चर्स ने ट्रायल जारी होने के बावजूद शुरुआती नतीजे जारी करने का फैसला किया। कोविड-19 मरीजों के इलाज में Remdesivir का 10 दिन का कोर्स प्‍लेसीबो से कहीं ज्‍यादा असरदार साबित हुआ। दोनों तरीकों से इलाज के बाद रिकवरी में लगने वाला समय Remdesivir में कम था। रिसर्चर्स के मुताबिक, उन्‍होंने यह डेटा इसलिए साझा किया ताकि ट्रायल के साथ-साथ बिना ट्रायल वाले मरीजों को भी Remdesivir से फायदा हो सके।

कॉम्बिनेशन असरदार
रिसर्चर्स ने पाया कि 14 दिन के आधार पर, प्‍लेसीबो ट्रीटमेंट का मार्टलिटी रेट 11.9 पर्सेंट रहा है, जबकि remdesivir के साथ मार्टलिटी रेट 7.1% रहा। हालांकि 7.1% की दर भी बहुत ज्‍यादा है जिसे लेकर रिसर्चर्स अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। रिसर्चर्स ने कहा है कि शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, "remdesivir उन मरीजों पर इस्‍तेमाल हो सकती है जो कोविड-19 से पीड़‍ित हैं और जिन्‍हें सप्‍लीमेंटल ऑक्‍सीजन थेरपी की जरूरत है। Remdesivir के यूज के बावजूद हाई मार्टलिटी रेट होना यह साफ करता है कि कोरोना के इलाज में केवल एंटीवायरल ड्रग से काम नहीं चलेगा।" रिसर्चर्स ने सुझाव दिया है कि थिरेपॉटिक अप्रोच के साथ एंटीवायरल एजेंट्स का असर देखना चाहिए। एंटीवायरल एजेंट्स के कॉम्बिनेशन भी ट्राई करके देख सकते हैं।

गौरतलब है कि यह दवा पहले इबोला वायरस के लिए भी यूज हो चुकी है। इसके अलावा मिडल ईस्‍ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS) और सीवियर एक्‍यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) पर भी Remdesivir असरदार है। MERS और SARS भी कोविड-19 की तरह कोरोना वायरस से होने वाली बीमारियां हैं।

5300 रुपए है कीमत
ढाका में स्थापित Beximco ने जेनरिक रेमडेसिवीर को 6 हजार टका (5300 रुपए) में बेचने का फैसला किया है। मगर कोविड-19 मरीजों का इलाज कर रहे सरकारी अस्पतालों के लिए दवा मुफ्त में मिलेगी।



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CORONA TREATMENT : हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के प्रयोग को लेकर विवाद बढ़ा

वाशिंगटन. नई दिल्ली. बोस्टन में अध्ययन के प्रमुख लेखक और ब्रिघम एंड वीमेन्स हॉस्पिटल सेंटर फॉर एडवांस हार्ट डिजीज के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर मनदीप आर. मेहरा ने बताया कि छह महाद्वीपों के 671 हॉस्पिटल में दिसंबर 2019 से अप्रेल 2020 तक संक्रमितों पर अध्ययन किया गया। 96,000 मरीजों को एचसीक्यू व क्लोरोक्वीन दवा एक प्रकार के एंटीबायोटिक के साथ दी गई और अन्य को एजिथ्रोमाइसिन या क्लियरिथ्रोमाइसिन दी गई। दवा देने के 48 घंटे बाद एंटी मलेरियल दवा लेने वाले मरीजों पर कोई असर नहीं हुआ। इससे मरीजों की मृत्युदर 34 प्रतिशत और हृदय संबंधी खतरा 136 प्रतिशत तक बढ़ गया। जिन मरीजों को एंटीबायोटिक के साथ दिया गया उनमें मृत्यु दर 45 प्रतिशत और हृदय संबंधी खतरा 411 प्रतिशत तक बढ़ गया। यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ज्यूरिख में हार्ट सेंटर के निदेशक और अध्ययन के सह लेखक प्रोफेसर फ्रैंक रुसचित्जका ने कहा कि हमने दुनिया भर के रोगियों पर अध्ययन किया है। यह मानने का कोई कारण नहीं है कि भारतीय रोगियों पर इसका कोई अलग असर होगा।

अध्ययन राजनीति से प्रेरित : ट्रंप
ट्रंप ने इससे जुड़े अध्ययनों के बारे में कहा कि यह अध्ययन बिना सबूतों के हैं। अध्ययन करने वाले लोग राजनीति से प्रेरित हैं। कोरोना वायरस पाबंदियों को खत्म करने के उनके प्रयासों पर पानी फेरना चाहते हैं। गौरतलब हो कि अमरीका हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की तीन करोड़ से अधिक खुराक का भंडार किया है। जबकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) कह चुका है कि इन दवाओं के इस्तेमाल से गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इसे अस्पतालों या क्लिनिकल परीक्षणों के लिए करें।

आइसीएमआर ने दवा के प्रयोग का दायरा बढ़ाया
एनआइवी पुणे में एचसीक्यू की जांच में यह पाया गया कि इससे संक्रमण की दर कम होती है। इसके बाद आइसीएमआर ने संशोधित एडवाइजरी जारी कर कहा है कि सामान्य अस्पतालों में काम करने वाले बिना लक्षण वाले हैल्थकेयर, कंटेनमेंट जोन में निगरानी क्षेत्र में तैनात फ्रंटलाइन वर्कर, कोरोना वायरस संक्रमण से जुड़ी गतिविधियों में शामिल पुलिस व अर्धसैन्य बलों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा ले सकते हैं। दवा लेने वाले व्यक्ति को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह एकदम सुरक्षित हो गया है। साथ ही यह भी कहा है कि बिना चिकित्सक की परामर्श व निगरानी के इस दवा का प्रयोग न करें। इस दवा को 15 साल से कम आयु के बच्चों तथा गर्भवती एवं दूध पिलाने वाली महिलाओं को न दें।



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SPECIAL REPORT : पूर्वोत्तर के इस राज्य में क्यों नहीं हैं एक भी कोरोना संक्रमित

नई दिल्ली. देश के अन्य हिस्सों में फंसे राज्य के लोगों के घर लौटने से रोकने के लिए नगालैंड सरकार ने अनोखा तरीका अपनाया। ऐसे नागरिक जो दूसरे राज्यों में रह रहे हैं वे यदि घर वापस न लौटने का विकल्प नहीं चुनते हैं तो उन्हें 10 हजार रुपए सहायता राशि दी जाएगी। इस तरह 19,000 लोगों ने घर न लौटने के लिए अपने नाम पंजीकृत कराए। पिछले सप्ताह कोहिमा में कोरोना वायरस के परीक्षण के लिए प्रयोगशाला खोली है। ट्रेन व विमान सेवाएं शुरू होने के बाद अब राज्य सरकार क्वारंटीन सेंटर खोलने की तैयारी में है। जो लोग दूसरे प्रदेशों व देशों से लौट रहे हैं उन्हें दीमापुर व कोहिमा में 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया जा रहा है।

लक्षद्वीप भी संक्रमण मुक्त
नगालैंड के अलावा लक्षद्वीप भी कोरोनोवायरस से मुक्त हो गया है। इसके अलाव पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा राज्य सिक्किम एक दिन पहले तक संक्रमण मुक्त रखने में सफल रहा। एक दिन पहले दिल्ली से परीक्षाओं की तैयारी में गया छात्र संक्रमित मिला है, उसके साथ सफर कर रहे 12 अन्य यात्रियों को भी क्वारंटीन किया गया है। इससे 15 जून से स्कूल, कॉलेजों को खोलने की योजना खतरे में पड़ सकती है।

पूर्वोत्तर राज्यों संक्रमण रोकने में सफल
देश के अन्य क्षेत्रों की तुलना में, पूर्वोत्तर राज्यों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। एक संक्रमित मामले मिलने के बाद मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में कोई सक्रिय केस नहीं हैं। असम अब तक सबसे ज्यादा प्रभावित है, जिसमें अब तक 329 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार त्रिपुरा ने 189, मणिपुर 29 व मेघालय में 14 संक्रमित हैं।



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