सौंफ का इस्तेमाल अधिकतर एक माउथफ्रेशनर के रूप में किया जाता है। इसे काढ़ा के रूप में भी काम लिया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, एंटीऑक्सीडेंट्स, फाइबर, मिनरल्स जैसे गुणयुक्त सौंफ, वात एवं पित्त संबंधी समस्याओं में राहत देती है।
इन समस्याओं में लें: गैस, अपच, जलन, कफ वाली खांसी जैसी पाचन व श्वसन समस्याओं, मुंह के छालों, शरीर में गर्मी, मुंह की दुर्गंध, डिहाइड्रेशन, अनियमित माहवारी आदि में यह लाभदायक है। इससे लिवर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और कोलेस्ट्रॉल में सुधार होता है।
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ऐसे तैयार करें काढ़ा
पानी में दो चम्मच सौंफ भिगोकर उबाल लें। मिश्री, चीनी या गुड़ मिलाएं व पीएं। इसी तरह भीगी हुई सौंफ को मिश्री के साथ पानी में गाढ़ा होने तक उबालें। यह शरीर को ठंडा रखता है। इससे रक्त की गुणवत्ता में सुधार होता है।
सौंफ को अजवाइन के साथ लेने से कफ वाली खांसी में सुधार होता है।
उबली हुई सौंफ को चीनी के साथ लेने से पैरों की जलन मिटती है। पित्त नियंत्रण के साथ ही यह वात समस्याओं से भी राहत दिलाती है।
रोजाना 10-15 ग्राम से अधिक सौंफ लेने से बचना चाहिए।
बच्चों में स्पीच सुधार के लिए इसे वचा चूर्ण के साथ ले सकते हैं।
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बादाम, मिश्री, सौंफ व सफेद मिर्च का चूर्ण आंखों की रोशनी बढ़ाता है।
शरीर में ठंडक के लिए इसे सारिवा बेल के साथ ले सकते हैं।
मुंह के छालों से राहत पाने के लिए भी इसे ले सकते हैं।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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