Sunday, 6 August 2023

खाएं मक्का की राबड़ी, ढोकले और मल्टीग्रेन रोटी, मिलेंगे गजब के फायदे

Benefits of Maize: मक्का एक ऐसा मिलैट है जो पूरे भारत में अलग-अलग व्यंजनों के रूप में खाया जाता है। पंजाब में मक्के की रोटी व सरसों का साग प्रसिद्ध है। पूरे उत्तर भारत में मक्का की रोटी घी व गुड़ के साथ सर्दी के दिनों में खाई जाती है, लेकिन इसे गर्मी के दिनों में भी खा सकते हैं। जरूरत है इसे खाने के तरीकों में बदलाव की। सुपर फूड सीरीज में जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के क्लिनिकल न्यूट्रिशन विभाग की प्रमुख विनीता बंसल बता रही हैं इसके बारे में।

 

पोषक तत्त्वों से भरपूर
100 ग्राम मक्का में प्रोटीन 8.8 ग्राम, फैट 3.77 ग्राम, फाइबर 12.24 ग्राम और कार्बोहाइड्रेट 64.77 ग्राम होता है। गर्मी में इसे 25-50 ग्राम यानी दो पतली चपाती के बराबर खाया जा सकता है। सर्दी के मुकाबले गर्मी में लोग इसे कम खाना पसंद करते हैं, लेकिन गर्मी के दिनों में भी इसे आहार के रूप में लेने के कई तरीके हैं।

 

गर्मी के मौसम में भी इसे राबड़ी, ढोकले या मल्टीग्रेन रोटी-खिचड़ी के रूप में खा सकते हैं। ये गर्मी से राहत देते हैं। इसकी तासीर गर्म होती हैं, इसलिए ज्यादा न खाएं। शरीर में पानी कमी न होने दें। इसके दानों को उबालकर या फ्रोजन दानों को धोकर स्वीटकॉर्न चाट के रूप में भी खा सकते हैं। इन्हें सेंडविच, परांठे में स्टफिंग या टॉपिंग्स के रूप में खा सकते हैं। जैसे पनीर, पालक पत्तागोभी, ककड़ी जैसी विभिन्न सब्जियों में भी दाने डाले जा सकते हैं। इन्हें दही या दाल के साथ भी खाया जा सकता है।

 

पाचन भी होता है बेहतर
मक्का में अमीनो अम्ल भरपूर होने से यह हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक है।
अच्छी मात्रा में फाइबर होने से यह रक्तचाप, डायबिटीज व हृदय रोगियों के लिए भी लाभदायक है।
मक्का ग्लूटेन फ्री भी होता है। इससे यह सीलियक रोगियों के लिए फायदेमंद है।


पाचन संबंधी समस्या में मक्के को दही या कांजी के साथ ले सकते हैं।
भुट्टे को पकाने के बाद इसमें 50% एंटीऑक्सीडेंट्स बढ़ जाते हैं। पके हुए भुट्टे में फेरुलिक एसिड होता है जो कैंसर जैसी बीमारी मे लडऩे में बहुत मददगार होता है। कॉर्न में केरोटीन होता है।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

 

 



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