बुजुर्गों के एक समूह के लिए यह सिर्फ बीमारी से बचे रहना या सामालिक सक्रियता तक सीमित नहीं है। बल्कि उनके लिए जीवन का अर्थ और उससे जुड़ाव है। क्योंकि सामाजिक समावेश समुदाय में घुलने-मिलने की हमारी क्षमता में सुधार करता है, बुजुर्गों में परस्पर घनिष्ठता बनाने, स्वास्थ्य देखभाल की लागत को कम करने और अकेलेपन के शारीरिक और मानसिक टोल में कटौती करने में मदद करता है।
अपनी किताब 'एजिंग वैल' में वैज्ञानिक जीन गैलिआना और विलियम हेजलटाइन ने इस पर रोशनी डालते हुए बताया है कि बुजुर्गों को अपने देखभाल संबंधी बीमा को अधिक सुलभ बनाना चाहिए जिसमें प्राथमिक देखभाल भी शामिल हो। वहीं बढ़ती उम्र में पति-पत्नी का अतरंग साथ भी स्वास्थ्य बेहतर बनाता है। वहीं स्कूल-कॉलेज में पढऩे वाले युवाओं के साथ बारतचीत करना, उनके साथ समय बिताना भी हमें ऊर्जावान रखता है। इससे पीढ़ीगत बातचीत को बढ़ावा मिलता है और बुजुर्गों को बढ़ती उम्र में एकाकीपन से एक सुरक्षित ढाल मिलती है। जीन और विलियम का कहना है कि सामाजिक समावेश अकेलेपन से निपटने में मदद करता है।
अमरीकी सामाजिक संस्था आर्प के एक अध्ययन में सामने आया कि उन बुजुर्गों की मृत्यु दर दूसरों की तुलना में ज्यादा थी जिनमें सामाजिक संपर्क की कमी थी जबकि वे अपने समकक्षों की तुलना में स्वास्थ्य देखभाल पर ज्यादा खर्च कर रहे थे। सामाजिक अलगाव के कारण अकेले अमरीका में बुजुर्गों की देखभाल पर सालाना अतिरिक्त ६७० करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। लेखकों का कहना है कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित करना, सामाजिक रूप से जुड़ाव और युवाओं के साथ संवाद बुजुर्गों को खुश रहने में मदद करता है।

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