Saturday, 9 November 2019

खानपान व नियमित जीवनशैली रखें ताकि बच्चों में न हो फैटी लिवर

बच्चों में फैटी लिवर की समस्या बढ़ रही है। इसमें लिवर की कोशिकाओं में वसा जमा हो जाती है जिससे लिवर में सूजन होने और उसका आकार बढ़ जाता है। फैटी लिवर में थकान, भूख न लगना, कमजोरी, मितली, पेट दर्द की भी समस्या हो सकती है। आनुवांशिक कारणों के साथ खराब जीवनशैली व खानपान से बच्चों में नॉन फैटी लिवर की समस्या भी हो रही है जिसमें बिना अल्कोहल से भी लिवर में जरूरत से ज्यादा वसा एकत्र हो जाती है।
रुक जाती है ग्रोथ
लिवर खून में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है। लिवर की गतिविधि गड़बड़ाने से बच्चों का शारीरिक विकास बाधित होता है। लिवर भोजन में मौजूद पोषक तत्वों एंटीऑक्सीडेंट्स, मिनरल्स, विटामिन्स आदि को अलग करता है। जरूरत अनुसार अंगों को पोषकतत्वों को भेजता है। फैटी लिवर होने पर वह संबंधित अंगों को समुचित पोषकतत्व नहीं पहुंचा पाता है।
जंक-फास्ट फूड से बचें
जंक फूड में कैलोरी अधिक और पोषक तत्व न के बराबर होता है। इसमें कई तरह के साल्ट होते हैं। प्रिजर्वेटिव युक्त सॉस आदि वजन और कॉलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं। बच्चे को उनकी डाइट से ज्यादा न खिलाएं। हरी पत्तेदार मौसमी सब्जी-फल ज्यादा दें। ज्यादा खाने व मोटापे से भूख बढ़ती है, इसे क्रेविंग कहते हैं। इस कारण ऐसे बच्चे इंस्टेंट फूड आदि अधिक खाते हैं।

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