पाचनतंत्र के लिहाज से फायदेमंद मानकर हम छाछ पीते हैं। यह शरीर के लिए पौष्टिक तो है लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं इसलिए इसको लेने से पहले कुछ बातें जानना जरूरी हैं-
छाछ की तासीर न सिर्फ ठंडी होती है बल्कि यह खट्टी भी होती है। ऐसे में इसे नियमित पीने से भविष्य में आर्थराइटिस होने का खतरा रहता है। हालांकि आसानी से पचने वाली छाछ अपच, भूख न लगने, कब्ज आदि की समस्या में लाभदायक है लेकिन यह हड्डियों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। जोड़ों में अकड़न को बढ़ाती है साथ ही मांसपेशियों व नसों में रक्तसंचार में अवरोधक का काम करती है।
सही समय -
सर्दियों में दोपहर 2 बजे से पहले एक बार में इसकी 300 मिली. (एक गिलास) की मात्रा ले सकते हैं। इसके बाद न लें।
कौन न पीएं -
सांस की तकलीफ वाले मरीज इससे परहेज करें क्योंकि इससे उनकी परेशानी बढ़ सकती है। वे गर्मियों में भी इसे सीमित मात्रा में ही लें। इसके अलावा गठिया, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की समस्या वाले इसे न पीएं।
अगर पीना पड़े तो -
ऐसे मरीज जिन्हें अस्थमा, गठिया, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द आदि समस्या हो और फिर भी वे छाछ पीना चाहें तो छाछ में छौंक लगाकर रायता बनाकर भोजन में कभी-कभार शामिल कर सकते हैं। ऐसा करने से इसकी तासीर में थोड़ा बदलाव आएगा। साथ ही सर्दी में यह नुकसान नहीं करेगी।
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