Wednesday, 16 August 2023

रागी में 30 से अधिक पोषक तत्त्व, रोज आहार में करें शामिल

बदलते वक्त में अब सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और लोग अपने परम्परागत खानपान की ओर लौट रहे हैं। मिलेट्स यानी जिस मोटे अनाज से लोगों ने दूरी बना ली थी, वही मोटा अनाज अब उनकी थाली का अहम हिस्सा होता जा रहा है। रागी भी एक सुपर फूड है। इसमें 30 से अधिक पोषक तत्त्व होते हैं। इसमें सबसे अधिक कैल्शियम होता है। बच्चों और महिलाओं को जरूर लेना चाहिए। नियमित रूप से 40 ग्राम तक इसको रोज आहार में ले सकते हैं।

 

 

कैल्शियम : रागी में प्राकृतिक रूप से कैल्शियम भरपूर पाया जाता है। इसकी कमी से महिलाओं की बोन डेन्सिटी पर असर पड़ता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस, ऑस्टियोपीनिया हो सकता है। कैल्शियम हड्डियों को डेन्सिटी प्रदान करता है।

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विटामिन डी : बहुत कम अनाज होते हैं जिनमें विटामिन डी मिलता है। रागी में यह अच्छी मात्रा में होता है, जो कैल्शियम के अवशोषण के लिए अच्छा होता है। इससे हड्डियों का क्षरण नहीं होता।

 

फाइबर : रागी में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है और इसका ग्लाइसीमिक इंडेक्स कम होता है। यह शुगर का स्तर नियंत्रित रखने में मदद करता है। इसके अलावा वजन नियंत्रित करने में भी सहायक है।

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आयरन : एनीमिया महिलाओं में बहुत सामान्य है। रागी के नियमित सेवन से आयरन की कमी दूर होती है।

ट्रिप्टोफैन : यह स्ट्रेस कम करता है। यह केले में भी पाया जाता है, लेकिन अनाजों में रागी में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह डिप्रेशन और एंग्जाइटी में भी फायदेमंद होता है।

 

एंटीऑक्सीडेंट : रागी के एंटीऑक्सीडेंट स्किन के लिए अच्छे होते हैं। ये एजिंग के प्रभावों जैसे झुर्रियों को कम करते हैं।

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कैसे खाएं
रागी को आप चाहें तो रोटियों के रूप में खा सकते हैं। इसके चीले, डोसे, केक और इडली भी बनाए जा सकते हैं। बच्चों के लिए आप रागी के कटलेट, उत्तपम, मठरियां या पेनकेक बना सकते हैं। ध्यान रहे कि शिशुओं के एक वर्ष के होने के बाद ही उन्हें रागी आहार के रूप में दें।

 

प्रोटीन : रागी में अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन पाया जाता है। इसमें अनाज में पाया जाने वाला एमीनो एसिड लाइसिन और दालों में मिलने वाला एमीनो एसिड मिथियोनिन, दोनों पाए जाते हैं।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

 

 



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