Cross cradle position Benefits: मां का दूध शिशु के लिए अमृत के समान है, जो उसे रोगों से बचाता और इम्युनिटी बढ़ाता है। शिशु जन्म के बाद उसे फीड करवाना एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। जन्म के एक घंटे के अंदर मां को स्तनपान के लिए कहा जाता है, ऐसे में नई मांओं के लिए यह एक अलग तरह का अनुभव होता है और उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं होती। उन्हें गाइड करना जरूरी है।
ब्रेस्टफीडिंग का तरीका
नवजात के लिए ब्रेस्टफीडिंग का सही तरीका क्रॉस क्रैडल होल्ड माना जाता है। इसमें महिलाओं को सीधे बैठकर शिशु को दूध पिलाना होता है। शिशु को गोद में लें और सिर ऊपर उठाएं। बच्चे के सिर को हाथ से सहारा दें। शिशु का गला खुला व नाक ऊपर की तरफ होनी चाहिए। ब्रेस्ट को यू शेप में होल्ड करते हुए निप्पल को बच्चे के लोअर लिप से टच करवाएं।
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मां के लिए भी फायदेमंद
फीडिंग से मां-बच्चे के बीच बॉन्डिंग मजबूत होती है। प्रेग्नेंसी में बढ़ा वजन नियंत्रित होता है। हार्मोन संतुलित होता है। ब्रेस्ट व ओवेरियन कैंसर, प्री-मेनोपॉज, मधुमेह, हाइपरटेंशन और पोस्टपार्टम डिप्रेशन घटता है।
शिशु को फायदा
यह शिशु की इम्युनिटी बढ़ती है। मस्तिष्क का विकास तेजी से होता है। अधिक उम्र में भी सुरक्षा देता है।
मां का खानपान हो बेहतर
ऐसी भ्रांतियां हैं कि मां दूध पिलाती है, तो उसके बाल झड़ जाएंगे, हाथ-पैरों में दर्द होगा। लेकिन यदि मां के पोषण का ध्यान रखा जाए तो ऐसी समस्याएं नहीं आती हैं। यदि मां पोषक तत्त्व नहीं लेगी तो शिशु को उनकी पूर्ति दूध के जरिए मां के स्टोर न्यूट्रिशन से ही होगी।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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