Wednesday, 11 August 2021

Stress In Children: ऑनलाइन क्लास के कारण बच्चों में बढ़ रही है एंग्जायटी डिसऑर्डर, जानें एक्सपर्ट्स की राय

Stress In Children: नई दिल्ली। कोरोना महामारी जो बड़ों और बुर्जुर्गों के लिए ही नहीं बल्कि बच्चों के लिए भी तनाव का एक बहुत बड़ा कारण बन कर सामने खड़ी हुई है। पहले के समय तो सिर्फ बड़ों के ऊपर ही दुनिया भर की चिंता रहती थी जैसे रासन लाना, परिवार कि छोटी से बड़ी हर जिम्मेदारी और खुशियों को पूरा करना। इसके साथ ही साथ खुद का भी ध्यान रखना। इस उम्र में टेंशन सबको रहती है किसी न किसी चीज़ की। किसी को करियर को लेकर तो वहीँ किसी को फैमिली या फैमिली के खर्चे और सपनों को पूरा करने को लेकर। सिर्फ बच्चों कि उम्र ही ऐसे रहती है जो दूर चिंताओं से मुक्त सिर्फ पढ़ाई या खेल कूद में व्यस्त रहते हैं। लेकिन कोरोना ने सब कुछ बदल कर रख दिया है। अब बच्चे हो या बड़े वे सिर्फ घर पर सिमित होकर रह गए हैं। बच्चों को जहां बाहर खेलने की इजाजत नहीं। वे टीवी या इंडोर गेम्स तक ही उनका बचपन सिकुड़ कर रह गया है। और ऑनलाइन क्लास ये भी उनके लिए एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आकर खड़ी हुई है।



क्या होता है एंग्जायटी डिसऑर्डर

यदि हम बच्चों में एंग्जायटी डिसऑर्डर कि बात करें तो उनमे ये कई प्रकार के देखे जा सकते हैं। जैसे बच्चों को डर,सामान्य से अधिक खौफ में रहना आदि। उनके व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिलता है। जैसे खाना-पीना सही से न खाना,गुस्से में रहना या मूड स्विंग्स का बहुत होना। ये सब कारण देखे जा सकते हैं बच्चों में।

बच्चों में काफी तेजी से बदलाव भी हो सकते हैं एंग्जायटी की समस्या

बच्चे जो कि कभी भी एक जगह नहीं बैठ सकते हैं। जिन्हे स्कूल हो, घर हो या फिर प्ले ग्राउंड हो आप हमेसा उछलते कूदते ही उन्हें देखेंगे। लेकिन कोरोना ने सब कुछ खराब कर दिया है। अब वही बच्चे घर में कैद होकर रह गए हैं। उनकी पढ़ाई भी ऑनलाइन सिमित रह गई है। सबसे मिलना-जुलना भी बंद सा हो गया है। ऐसे में बच्चों के दिमाग में इसका बुरा असर पड़ा है। और वे एंग्जायटी कि समस्या से भी परेशान होते हुए दिख रहे है।

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Anxiety

बच्चों में हो रहे हैं इस प्रकार के परिवर्तन

  • घर में रहकर वे अकेला फील कर रहे हैं।
  • उनसे ऑनलाइन पढ़ाई अच्छे से नहीं हो पा रही है, और वे चिड़चिड़े से रहते हैं।
  • पहले वे स्कूल जाते कुछ क्रिएटिव काम करते थे,लेकिन घर पर रहकर वे सही से कोई भी काम नहीं कर पा रहे हैं।
  • उनके सीखने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म सी होती जा रही है,पहले वे टीचर्स से या दोस्तों से रोज कुछ न कुछ नया जरूर सीखते थे।
  • बच्चे अब किसी से मिलने-जुलने से मना करते हैं, क्योंकि उनके आत्म विश्वास में कमी आई है।

आप कैसे कर सकते हैं बच्चों की मदद

  • बच्चों को कुछ समय के लिए इंडोर गेम्स में व्यस्त रखें ताकि उन्हें अकेला न फील हो।
  • बच्चों से समय-समय पर बात करते रहें, उनकी प्रोब्लेम्स को सुने।
  • बच्चों कि पढ़ाई में मदद करें।
  • उनके साथ खेलने का रोज समय जरूर निकालें।

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