कोरोना की दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। लेकिन ऐसे रोगियों को घबराने की जरूरत नहीं है, जिनका स्वाद या सूंघने की क्षमता चली जाती है। हाल ही कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) ने एक रिसर्च के बाद यह खुलासा किया है। यह शोध 220 कोरोना रोगियों पर किया गया।
शोधकर्ताओं के मुताबिक इस शोध की दो श्रेणी बनाई गई हैं। एक में उन मरीजों को लिया गया है, जिन्हें स्वाद और गंध नहीं आ रही थी। जबकि दूसरी श्रेणी ऐसे रोगियों की जिनका स्वाद और गंध नहीं गई थी। दोनों के अध्ययन में पाया गया कि स्वाद और गंध नहीं पाने वाले 9 रोगी भर्ती हुए और जिन्हें स्वाद और गंध की समस्या नहीं थी, ऐसे 34 लोग अस्पताल में भर्ती हो गए। इनमें आठ लोगों की मौत भी हो गई। शोध में यह भी बताया गया है कि कोरोना वायरस का हमला स्वाद और गंध पर कैसे होता है। मेरठ मेडिकल कालेज भी ऐसा ही एक रिसर्च कर रहा है।
सामान्य दवा से ठीक हुए
रिसर्च करने वाले डॉक्टर हरेन्द्र कुमार का कहना है कि स्वाद और गंध नहीं पाने वाले अधिकतर मरीजों को सामान्य दवा और होम आइसोलेशन पर रखा गया। यह पाया गया कि 10 से 15 दिन के भीतर वे कोरोना निगेटिव हो गए। हालांकि स्वाद और गंध एक से डेढ़ माह तक नहीं लौटी।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3oFqqIt
No comments:
Post a Comment