पित्त के असंतुलन से 40-50 प्रकार के रोग होते हैं। तीखा भोजन करने, तनाव, ज्यादा मेहनत करने, नॉनवेज, खट्टी चीजें, गर्म तासीर और सिरके से बनी चीजें अधिक खाने से भी पित्त दोष होता है।
ऐसे पहचानें पित्त का बढऩा :
ज्यादा थकान, गर्मी और पसीना आना, शरीर से दुर्गंध, मुंह में छाले, माइग्रेन, गले में सूजन, बहुत गुस्सा आना, चक्कर, बेहोशी होना, ठंडी चीजें खाने की इच्छा भी लक्षण हैं।
पित्त बढऩे पर ये रोग
सीने में जलन, सनबर्न, एक्जिमा, मुंहासे, पेप्टिक अल्सर, बुखार, खून का थक्का, स्ट्रोक, किडनी में संक्रमण, थायरॉइड, पीलिया, आर्थराइटिस, दस्त, कम दिखाई देना, ऑटोइम्यून विकार, डिप्रेशन आदि रोग इससे हो सकते हैं।
देसी गाय का घी लें, कच्चे टमाटर से परहेज
मसालेदार-नॉनवेज आहार न लेेंं। देसी गाय का घी, हरी व मौमसी सब्जियां जैसे खीरा, मूली, चुकंदर, ककड़ी, गाजर, ब्रोकली ज्यादा खाएं। कच्चे टमाटर, मूंगफली और समुद्री नमक खाने से बचें। सीमित मात्रा में व्यायाम भी करें। दही की जगह छाछ-लस्सी में अजवाइन मिलाकर लें। काले जीरे का पाउडर बनाकर रख लें। इसको डाइट में लेते रहें। आंवला रात को भिगो दें। सुबह उसमें मिश्री-जीरा कूटकर मिलाएं। इसे पीने से आराम मिलेगा।
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