1-डायबेसिटी
डायबिटीज और ओबेसिटी से मिलकर यह बना हुआ है। डायबिटीज और ओबेसिटी भी आपस में एक-दूसरे से सीधे जुड़े हैं। मोटे लोगों में डायबिटीज का खतरा कई गुना अधिक होता है। कुछ मरीज ऐसे भी होते हैं, जिन्हें ये पता ही नहीं होता कि उन्हें टाइप 2 डायबिटीज है।
2-ग्लैंडूर मोटापा
बचपन में ग्रंथियों की विकृति से होने वाले मोटापे को ग्लैंडूर ओबेसिटी कहते हैं। इसमें शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने लगती है। मोटापा शरीर के अंगों जैसे पेट, जांघ, हाथ, कमर आदि पर हो जाता है। बाद में यह मोटापा पूरे शरीर पर दिखने लगता है।
3-फ्रॉलिच मोटापा
बचपन में किसी हार्मोन से जुड़ी बीमारी, विशेषकर हाइपोथैलमस ग्रंथि में खराबी, ट्यूमर के कारण यह मोटापा देखने को मिलता है। इसमें मोटापा सीना, पेट व कमर वाले हिस्से में बढ़ता है। बीमारी ठीक होने के बाद यह मोटापा भी कम होने लगता है।
4-कुशिंग सिंड्रोम
ऐसा मोटापा मुख्य रूप से एड्रिनल ग्रंथि में सूजन आने के कारण होता है। कई बार इसमें गांठें भी बन जाती हैं। इसमें स्टेरॉइड हार्मोन अधिक मात्रा में निकलने से यह मोटापा होता है। इस तरह के मोटापे का पता बहुत दिनों तक नहीं चलता है।
5-मोरबिड ओबेसिटी
मोरबिड ओबेसिटी वह स्थिति है जब बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) 40 से अधिक हो जाती है। यह गंभीर स्थिति है। इस मोटापे के कारण व्यक्ति को दूसरे रोग होने लगते हैं। कई बार मरीज की जान भी चली जाती है। इसमें कम कैलोरी वाली डाइट लें।
6-हाइपोथैलमिक
भूख को हाइपोथैलमस नियंत्रित करता है। इससे नींद भी नियंत्रित होती है। जब यह ब्रेन ट्यूमर-चोट से प्रभावित होता है तो व्यक्ति को सोकर उठने पर तेज भूख लगती है। खाना न मिलने पर गुस्सा आता है। इस तरह मोटापा बढ़ता है।
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