दवाएं (medicines) फायदा पहुंचाती हैं, लेकिन अगर इन्हें गलत तरह से लिया जाए तो नुकसान भी उतना ही होता है। कई बार मरीज के लंबे समय तक दवा लेने के बाद भी उसमें सुधार नहीं दिखता। ऐसे में समय-समय पर डॉक्टरी सलाह (doctor advice) से दवाएं बदलते रहें ताकि रोगी पर इसका बेहतर असर दिख सके।
कई तरह से लेते दवाएं
मर्ज की स्थिति के अनुसार दवाएं देते हैं। इमरजेंसी में आईवी रूट, इंजेक्शन, ओरल डोज (oral dose) के अलावा हृदय रोगियों को दवा मुंह में दबाकर रखने के लिए कहते हैं। इससे दवा घुलकर तकलीफ वाले हिस्से तक पहुंच जाती है। वर्ना ओरल तरीके से देने पर दवा लिवर, आंत और रक्त तक होते हुए हृदय तक पहुंचती है। वैसे हर दवा का असर करने का समय अलग-अलग होता है। ज्यादातर ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिसका असर कम से कम 24 घंटे तक रहे।
दवा लेने से पहले ध्यान रखें
-दवा खाने से आधे घंटे पहले व बाद में नशीले पदार्थ न लें।
-होम्योपैथिक दवा (homeopathic medicine) ले रहे हैं तो कच्चे प्याज, लहसुन, कॉफी, पिपरमिंट और सुगंधित वस्तुओं से परहेज करना चाहिए।
-दवा खाने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट जांच लें। आयुर्वेदिक दवाओं की एक्सपायरी डेट ड्रग एंड कॉस्मेटिक रूल के तहत इस प्रकार है - जड़ी बूटी की एक्सपायरी तीन साल, आंवला च्यवनप्राश की तीन साल, भस्म की दस साल और चूर्ण की एक साल होती है।
10 साल शोध
ड्रग कंट्रोलर नियमावली के अनुसार दवा पर 10 साल तक फार्मा विशेषज्ञों के शोध के बाद रिपोर्ट सामान्य आने पर रोगियों पर प्रयोग कर क्षमता जांचते हैं। सामान्य मिलने पर पोस्ट मार्केटिंग टीम नुकसान आदि की निगरानी करती है।
एलोपैथी : दवा हाथ में न लें वर्ना संक्रमण से दवा के असर करने की क्षमता घटती है।
एक से अधिक दवा है तो थोड़े-थोड़े अंतराल पर खाएं। एक साथ 3-4 दवाएं न निगलें।
बच्चों की दवा उनकी पहुंच से दूर रखें।
आयुर्वेद : आयुर्वेदिक दवाएं द्रव्य, भस्म और ठोस रूप में होती हैं। द्रव्य=भस्म तेजी से शरीर में पहुंचकर खून में मिलते हैं। इसमें दवाएं, पानी, दूध, शहद के साथ लेते हैं। इससे दवा का असर दोगुनी तेजी से होता है।
होम्योपैथी
-इन दवाओं का शरीर पर नुकसान नहीं होता है।
-इनमें पचास गुना अधिक तेजी के साथ काम कर रोग को जड़ से मिटाने की ताकत होती है।
-ये दवाएं सीधे नसों के माध्यम से शरीर में पहुंचती हैं और बीमार कोशिका को दुरुस्त करती हैं।
-इंसुलिन उत्पादन में उपयोगी पैच
अमरीकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल इमेजिंग एंड बायोइंजीनियरिंग (American National Institute of Biomedical Imaging and Bioengineering ) में हुए शोध से टाइप-2 मधुमेह (type-2 diabetes) रोगियों के लिए दर्द भरे इंसुलिन इंजेक्शन से मुक्ति के लिए राहत की खबर है। शोधकर्ताओं ने ऐसा दर्द रहित पैच बनाया है जिसे हफ्ते में एक बार त्वचा पर कहीं भी लगाने से जरूरत के अनुसार शरीर में स्वयं का इंसुलिन उत्पादन होगा। इस पैच में सूक्ष्म सुइयां हैं जो त्वचा से जुड़कर असर करेंगी।
एक्सपर्ट कमेंट : भारत में इंसुलिन (insulin) पहुंचाने के लिए फिलहाल इंजेक्शन, निडिललेस पैन व पंप आदि का प्रयोग होता है। लेकिन ऐसा पैच शायद जल्द भारत में आ सकता है।
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