महिलाओं में थायराइड (thyroid) एक आम बीमारी बनती जा रही है। हालांकि पुरुषों में भी ये बीमारी होती है लेकिन ज्यादातर महिलाएं ही इससे पीडि़त होती हैं। अगर आंकड़ों की भाषा में बात करें तो थायराइड के हर 100 रोगियों में 80 महिलाएं होती हैं। वैसे तो थायराइड तीन तरह के होते हैं लेकिन इनमें भी सबसे आम है हाइपोथायराइडिज्म। इसका पता ब्लड टेस्ट (blood test) के बाद ही चलता है। लेकिन लक्षण इस बीमारी का संकेत दे देते हैं।
क्या है थायराइड
हमारी गर्दन के सामने वाले हिस्से में एक ग्रंथि होती है जिसे थायराइड कहते हैं। इससे एक हार्माेन निकलता है जिसे थायराइड हार्मोन कहते हैं। इस हार्मोन से हमारे शरीर के अंगों की क्रियाएं नियंत्रित होती हैं। जब आपको लगता है कि आप थोड़ा सा काम करते ही ज्यादा थकान महसूस करने लगे हों। आपका वजन अचानक बढऩे लगा है। शरीर के अंगों में मंदा-मंदा सा दर्द रहने लगा है। स्किन और बालों में रुखापन भी दिखने लगा है या आप छोटी-छोटी बातों से अक्सर तनाव और अवसाद में घिर जाते हैं तो समझिए कि आप हाइपोथायराइडिज्म की शिकार हैं।
शुगर बढ़ाने वाले खाने से बचें
कैफीन (caffeine) और शुगर (sugar) की मात्रा एकदम से कम कर दें। इसके अलावा ऐसे खाद्य पदार्थों की मात्रा भी घटा दें जो कि शरीर के लिए शुगर की तरह काम करते हैं। खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ़ा दें। शरीर के अंदर प्रोटीन ही थायराइड हार्मोन को ढोकर टिश्यूज तक पहुंचाते हैं। खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाकर थायराइड के कार्यप्रणाली को सामान्य किया जा सकता है। इस बीमारी में वजन बढऩा बड़ी समस्या है। वजन घटाने के चक्कर में अक्सर रोगी फैट छोड़ देता है। इससे शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि शरीर की जरूरत भर का फैट जरूर लें। हां, ये जरूर ध्यान रखना चाहिए कि ये फैट हैल्दी हो। थायराइड के दौरान उभरने वाले कई लक्षण पोषक पदार्थों के सेवन से दूर हो जाते हैं। इस बीमारी में महिलाओं में खासकर आयरन की कमी हो जाती है। ऐसे में उन्हें आयरन के साथ दूसरे पोषक पदार्थ भी भरपूर मात्रा में लेने चाहिए। स्वस्थ रहने के लिए संतुलित भोजन करें।
कब्ज न रहने दें
हाइपोथायराइडिज्म से पीडि़त व्यक्ति अक्सर कब्ज की बीमारी से ग्रसित रहता है। इसके अलावा शरीर में थायराइड हार्मोन सामान्य से कम बनता है। इससे कई तरह की बीमारियां पैदा हो जाती हैं। कुछ अपवादों को छोड़ दिया तो थायराइड के रोगी को जिंदगी भर दवा लेनी होती है। लेकिन ये निराश होने वाली स्थिति नहीं है। खानपान में बदलाव लाकर बहुत हद तक इस बीमारी को काबू में रखा जा सकता है।
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