चेन्नई । कैंसररोधी दवा कैम्पटोथेसीन के स्रोत माने जाने वाले चीनी व भारतीय पौधे विलुप्त हो रहे हैं। पौधों के दुर्लभ होने से इनकी व्यापक स्तर पर कटाई हो रही है। आइआइटी मद्रास शोधकर्ताओं ने कैम्पटोथेसीन के उत्पादन के नए स्ट्रेन को खोजने में कामयाबी हासिल की है। इससे दवा सस्ती और मांग पूरी होगी। कैम्पटोथेसिन एक एल्कलॉयड (प्राकृतिक रूप से उपलब्ध रासायनिक यौगिक) है, जिसे चीनी पेड़ कैम्पटोथेकैमिनुमैटा और भारतीय पेड़ नोथापोडीट्स निमोनीना से लिया जाता है। इस शोध का नेतृत्व आइआइटी मद्रास की जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एसो. प्रोफेसर डॉ. स्मिता श्रीवास्तव ने किया।
पौधे में उच्च कैम्पटोथेसिन -
डॉ. स्मिता ने बताया कि पौधों में एंडोफाइट (सूक्ष्मजीव, जो पौधों के अंदर रहते हैं) होता है। यह उच्च कैम्पटोथेसिन का उत्पादन करता है। हमने इस एंडोफाइट का सृजन करने वाले 32 स्ट्रेन का पता लगाया तथा उनमें से उच्च उत्पादकता वाले स्ट्रेन (अल्टरनेरिया एसपी) को अलग किया। पौधे के बाहर उत्पादन के अनुरूप वातावरण के लिए इन विट्रो प्रोडक्शन प्रक्रिया को अपनाया।
कैंसर के आंकड़े चिंताजनक-
भा रत में कैंसर मृत्यु का बड़ा कारण है। एशियन पैसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार 2026 तक भारत में हर साल नए कैंसर के मामले पुरुषों में 0.93 लाख व महिला रोगियों में 0.94 लाख तक पहुंच जाएंगे।
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