Thursday, 22 October 2020

संधिकाल में उड़द, अरहर, कुलथी की जगह मूंग, मसूर और मोठ की दाल ही खाएं

बरसात खत्म होने और सर्दी शुरू होने वाले समय को आयुर्वेद में संधिकाल कहते हैं। बरसात में पित्त और सर्दी में कफ का प्रकोप होता है। संधिकाल में दोनों के असंतुलन से जठराग्नि मंद पड़ती है और इम्युनिटी घटती है। मौसमी बीमारियां बढ़ती हैं। जानें क्या खाएं।
च्यवनप्राश शुरू कर दें
सांस के रोगियों की दिक्कत इस मौसम में बढ़ जाती है। च्यवनप्राश इसको रोकता है। शरीर में गर्माहट लाता, पाचन ठीक रहता, खून बढ़ाता व दिमागी क्षमता भी ठीक रखता है।
वात-पित्त प्रकृति वालों की समस्या बढ़ सकती है
शरद ऋ तु में पित्त दोष बढ़ जाता है। इसलिए संधिकाल में वात-पित्त प्रकृति के लोगों को अधिक ध्यान देने की जरूरत रहती है। पित्त बढऩे से ज्वर, रक्त विकार, सिर दर्द, चक्कर आना, अम्ल पित्त, खट्टी डकार, जुकाम आदि होता है।
मुनक्का, गुलकंद और आंवला लेना शुरू कर दें
इस मौसम में आंवला चूर्ण या त्रिफला चूर्ण लें। यह पित्त का शमन करते, कफ बनने से रोकते हैं। गुलकंद शरीर से पित्त को बाहर निकालकर ताजगी, स्फूर्ति देता है। रोज 7-8 भींगे मुनक्का खाएं।
डॉ. लीलाधर शर्मा, आयुर्वेद विशेषज्ञ



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3dS0FPx

No comments:

Post a Comment