1-इस वायरस के खिलाफ जो एंटीबाडी शरीर में बनती है उससे हार्ट की मांसपेशियों पर असर पड़ सकता है। हार्ट की पम्पिंग क्षमता कम होने से सांस लेने में तकलीफ, पैरों में सूजन, पेट में आफरा, खांसी, जल्दी थकान जैसे हार्ट फेल्योर के लक्षण आ सकते हैं।
2-कोरोना के इंफेक्शन से छाती में तेज दर्द होने से कार्डिएक एंजाइम बढ़ जाते हैं। ज्यादा तनाव से भी हार्ट के मांसपेशियों में सूजन आ सकती है। इसे स्ट्रेस कार्डिओमायोपैथी कहते हैं।
3-कोरोना के डर से लोगों में बेचैनी से हार्ट की धडकऩे बढऩे लगती हैं। जिसे पेलपिटेशन कहते हैं। कई बार हार्ट की धडकऩे असामान्य रूप से कम या ज्यादा हो सकती हैं।
4-कोरोना से बचाव या इलाज की कुछ दवाइयों से हार्ट को खतरा हो रहा है। कोरोना के इलाज में दो मुख्य दवाइयां हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन व एडीथ्रोमयसिन बिना डॉक्टरी सलाह के न लें। ये नुकसान करती हैं।
5-हार्ट फेल्यर के मरीजों के अधिकतर लक्षण कोरोना से मिलते-जुलते हैं। जैसे सांस भरना, सूखी खांसी आना आदि। इससे मरीज भ्रमित हो सकते हैं। पहले कोरोना हिस्ट्री पता करें। साथ में बुखार, गले में खराश और जुकाम भी कोरोना के लक्षण हैं।
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