पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले चुका नोवेल कोरोना वायरस कोविड-19 से संक्रमित आइडेंटिकल और नॉन-आइडेंटिकल जुड़वा के लक्षणों की तुलना करने वाले एक हालिया (अप्रकाशित) अध्ययन का निष्कर्ष है कि कोविड-19 वायरस के लक्षण लगभग 50 फीसदी आनुवांशिक प्रतीत होते हैं। शोध के निष्कर्ष किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा विकसित 'कोविड-19 सिम्पटम ट्रैकर' ऐप के माध्यम से 2600 से अधिक जुड़वा लोगों पर किए अध्ययन से प्राप्त डेटा पर आधारित थे।
हालांकि अध्ययन में शामिल नहीं होने वाले वैज्ञानिकों ने आम लोगों से कहा है कि वे जुड़वा बच्चों पर प्रकाशित इस अध्ययन या ऐसे ही दूसरे शोधों के निष्कर्षों पर जल्दबाजी में भरोसा न करें। उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण के परिणाम पर पर्यावरण और आनुवंशिक प्रभावों में अंतर कर पाना आसान नहीं है, खासकर अगर लोग एक ही घर में रहते हैं। वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी है कि जुड़वा मौतों की मीडिया कवरेज भी जोखिम के सार्वजनिक धारणाओं को एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव के माध्यम से दुष्प्रभाव डाल सकती है, जिसे सैलिएंस बायस के रूप में जाना जाता है।

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