न्यूयॉर्क के इथाका शहर स्थित कॉर्नवैल विश्वविद्यालय (CORNWELL UNIVERSITY) की 'ह्यूमन फैक्टर्स एंड एर्गोनॉमिक्स' प्रयोगशाला की निदेशक एलन हेज ने अपने यहां काम करने वाले 80 फीसदी लोगों पर एक सर्वे किया है। इस सर्वे में उन्होंने ये जानने का प्रयास किया है कि कितने लोगों को कम्प्यूटर पर काम के दौरान दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव या ऐसी ही दूसरी परेशानियों का काम करना पड़ता है। की-बोर्ड पर टाइपिंग करते समय रोजाना हम 6 हजार शब्द प्रतिघंटा की औसत गति से टाइप करते हैं। अगर इस संख्या को सप्ताह के पांच दिन में काम करने के लिए निर्धारित सात या आठ घंटे से गुणा कर दें तो जो संख्या आएगी वह चौंकाने के लिए काफी है। प्रतिदिन 6हजार बार से ज्यादा की-बोर्ड पर उंगलियां चलाने के दौरान हम इस पर सप्ताह भर में करीब 20 टन वजन डालते हैं। यानि हमारी उंगलियों पर एक सप्ताह में 20 टन जितना दबाव पड़ता है।
यह इसलिए भी एक गंभीर मामला है क्योंकि हम में से अधिकांश लोग इसके बारे में जानते ही नहीं हैं। काम की समय सीमा, टारगेट पूरा करने का दबाव और चिंता में हम की-बोर्ड पर चार गुना ज्यादा दबाव से टाइप करते हैं। इतना ही नहीं अक्सर तनाव में ज्यादातर लोग आठ बार से ज्यादा बटनों को दबाते हैं जबकि इसकी कतई जरुरत नहीं होती। वहीं महिलाओं को 30 फीसदी अधिक टाइपिंग करनी पड़ती है क्योंकि ज्यादातर की बोर्ड्स को पुरुषों के उपयोग करने के लिहाज से बनाया जाता है।

from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2Z2jb2p
No comments:
Post a Comment