नोवेल कोरोना वायरस के बारे में अभी हमें ज्यादा जानकारी नहीं है लेकिन हालिया शोध बताते हैं कि यह तेजी से फैलने के कारण ज्यादा घातक है। हालांकि शोध में यह भी सामने आया है कि बच्चे अभी इससे ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं। लेकिन अभिभावक होने के नाते माता-पिता का इस महामारी के समय अपने बच्चों के प्रति चिंतित होना सामान्य है। इंसान की प्रवृत्ति उसे बच्चों की सुरक्षा के लिए लगातार संवेदनशील बनाए रखती है। बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली उम्र बढ़ने के साथ विकसित और मजबूत होती है इसलिए बच्चों को कोरोना संक्रमण के समय संक्रमित होने से बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। राहत की बात यह है कि अब तक के शोधों में सामने आया है कि बच्चों को सामान्य तौर पर कोरोना वायरस से कोई नुकसान नहीं होता है।
शोध में बच्चों पर खास असर नहीं-
हाल ही अमरीकन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में कोविड-19 के पुष्टि या संदिग्ध मामलों वाले दो हजार से अधिक बच्चों की जांच की गई थी। इन बच्चों को 16 जनवरी से 8 फरवरी के बीच चीन के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र में आइसोलेशन में रखा गया था। इन 2143 बच्चों में से 90 फीसदी बच्चों में या तो कोई लक्षण नहीं थे या केवल हल्का बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, खांसी, गले में खराश, नाक बहने और छींकने, निमोनिया के साथ लगातार बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने में तकलीफ के लक्षण थे। इन बच्चों को बिना किसी जटिलता के सामान्य फ्लू के इलाज से ही ठीक कर लिया गया था। इलाज के दौरान सभी उम्र के बच्चों में कोरोनावायरस के प्रति अतिसंवेदनशील पाया गया था लेकिन ऐसा किसी भी संक्रामक बीमारी में सामान्य है।
शोध के दौरा 4 फीसदी बच्चों में कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए। केवल 6 फीसदी यानि 2143 में से 125 बच्चों में ही अधिक गंभीर लक्षण पाए गए। केवल 14 वर्षीय एक बच्चे की मौत हुई। यह अब तक का सबसे बड़ा अध्ययन है जो हमें बच्चों में कोरोनावायरस के प्रसार की व्यापक जानकारी देता है। डेटा से पता चलता है कि 19 वर्ष से कम आयु के लोगों में कोरोना वायरस की गंभीर जटिलताएं बहुत कम हैं।
हालांकि बच्चे अगर संक्रमित हैं तो वे रोग के सबसे संवेदनशील वाहक बन सकते हैं क्योंकि वे घर के हर सदस्य के संपर्क मेंं आते हैं।
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