प्रिंस्टन और कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नया गणितीय मॉडल विकसित किया है जो महामारी के समय वायरस के उत्पविर्तन यानी उनके म्यूटेशन की ट्रैकिंग करने में सुधार लाकर इसे फैलने से रोक सकता है। कोरोना वायरस के संदर्भ में वैज्ञानिक अपने इस नए मॉडल को लागू करने पर काम कर रहे हैं ताकि वे महामारी के प्रभावों का मूल्यांकन कर सकें। प्रिंस्टन विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग के अंतरिम डीन और अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ताओं में से एक एच. विंसेंट पुअर ने बताया कि क्वारंटाइन एवं आइसोलेशन में रह रहे लोगों पर वे इस मॉडल का परीक्षण कर रोगजनक (पैथोजीन) कैसे महामारी को फैलने में मदद करते हैं।
वैज्ञानिकों ने मॉडल का परीक्षण कोरोना वायरस के इलाज में जुटे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से प्राप्त डेटा का उपयोग किया है। माइकल हेनरी स्ट्रेटर यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर पुअर का कहना है कि वर्तमान में उपयाग किए जा रहे मॉडल महामारी के वायरास में होने वाले म्यूटेशन का ट्रैक करने के लिए डिजायन नहीं किए गए हैं। जिससे कोरोना जैसे नए वायरस का इलाज ढूंढना अधिक कठिन बन जाता है। इससे संक्रमित क्षेत्र में लोगों के इलाज और क्वारंटाइन या सेल्फ-आइसोलेशन जैसे निर्णय लेने में मदद मिलेगी। यह मॉडल हमें म्यूटेशन के पीछे का कारण समझने में मदद कर सकता है।

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