Thursday, 30 April 2020

देश को कोविड-19 के संक्रमण से बचाने वाली टीम के ये हैं 'कोरोना वारियर्स'

कोरोना वायरस निपटने में जिस तरह भारत ने अभी तक समझदारी दिखाई है विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत पूरी दुनिया उसकी कायल हो गई है। कोरोनोवायरस से निपटने के लिए जनता कफ्र्यू, 21 दिन के लॉकडाउन, लॉकडाउन 2.0 और महाकफ्र्यू जैसे उपाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्ययोजना में देखने को मिले हैं। लेकिन इन समझदारी भरे फैसलों को लेने से पहले स्वयं प्रधानमंत्री जिन लोगों से चर्चा करते हैं उनके बारे में हम बहुत कम जानते हैं। देश को कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाने के पीछे 30 से अधिक डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की एक टीम का दिमाग है जो दो विशेष टीमों के रूप में दिनरात हमारी सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं।

देश को कोविड-19 के संक्रमण से बचाने वाली टीम के ये हैं 'कोरोना वारियर्स'

वैज्ञानिकों और चिकित्सकों की दो टीम
संक्रमण को रोकने, तुरंत उपाय करने, हॉटस्पॉट न बनने देने, लॉकडाउन के दौरान तेजी से जांच परीक्षण करने और इलाज में तीव्रता जैसे लक्ष्य लेकर दो टीमों का गठन किया गया था। एक टीम में देश के शीर्ष वैज्ञानिक हैं जो वैक्सीन बनाने ओर संभावित इलाज खोजने में लगे हुए हैं जबकि दूसरी टीम में चिकित्सक हैं जो देशभर के अस्पतालों और डॉक्टर्स से संपर्क कर उन्हें जरूरी गाइडलाइन उपलब्ध करवा रहे हैं। टीम का मुख्य कार्य कोरोना महामारी के संबंध में प्रत्येक तकनीकी नीति निर्णय पर पीएम को सलाह देना है। यह प्रकोप की प्रकृति का आकलन करने और संक्रमण को कैसे नियंत्रण में रखा जाए पर भी काम कर रहे हैं। 18 मार्च को गठित पहला समूह नीती अयोग के सदस्य डॉ. वी.के.पॉल की अगुवाईमें 20 अन्य सदस्य केसाथ काम कर रहा है। वहीं दूसरी टीम की सह-अध्यक्षता पॉल और प्रधान मंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के.विजयराघवन और नौ अन्य सदस्य कर रहे हैं। दोनों टीमें मिनट-टु-मिनट प्रणाली के आधार पर प्रधान सचिव के साथ पीके मिश्रा के संपर्क में हैं जो प्रधानमंत्री मोदी को जानकारी देते हैं।

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कोरोना टास्क फोर्स
वीके पॉल के नेतृत्व वाली इस टीम को कोरोना टास्क फोर्स भी कहा जाता है जिसमें स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हैं। पॉल के अलावा इस टीम में स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन, एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ्र(आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव और सूक्ष्म जीव विज्ञान में स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हैं। वैज्ञानिक और आईसीएमआर संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. रमन गंगाखेड़कर और डॉ. निवेदिता गुप्ता भी टास्क फोर्स का हिस्सा हैं। इनके अलावा टीम में आईसीएमआर के इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी के सदस्य भी शामिल हैं जो बीमारी के गणितीय मॉडलिंग को संभालते हैं और कोरोनावायरस की प्रकृति और प्रसार का निर्धारण करते हैं। यह समूह वायरस के प्रभावों का भी आकलन कर रहा है।

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क्रियान्वयन की जिम्मेदारी इन पर
दूसरी टीम विज्ञान एजेंसियों, वैज्ञानिकों और नियामक निकायों के बीच समन्वय और कोविड-19 वायरस से संबंधित क्रियान्वयन के लिए त्वरित निर्णय लेने का काम करती है। टीम में संयुक्त रूप से वी.के. पॉल और के. विजयराघवन के अलावा, आईसीएमआर शोधकर्ता, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, जैव प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक, औद्योगिक अनुसंधान केंद्र, के शोधकर्ता, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के सचिव शामिल हैं। यह समूह विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान से संबंधित मामलों को तय करने में पीएम मोदी की सहायता कर रहा है। उदाहरण के लिए सभी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं को भारत में कोविड-19 के नैदानिक परीक्षण करने की अनुमति देने का निर्णय लेने में इसी टीम की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। केन्द्र सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपट्र्स को साथ लेकर स्पेशल टीम बनाई है जो फैसले लेने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मदद करती है। आइए जानते हैं प्रधानमंत्री के इन सभी सेनापतियों के बारे में जो देश को इस वायरस महामारी से बचाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।

देश को कोविड-19 के संक्रमण से बचाने वाली टीम के ये हैं 'कोरोना वारियर्स'

01. प्रीति सूदन: इतनी महत्त्वपूर्ण की एक्सटेंशन दिया
हाल ही एक्सटेंशन पाने वाली कोरोना टास्क फोर्स की सबसे मजबूत कड़ी में से एक स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन लगातार राज्यों के संपर्क में रहीं और वहां के हालातों का जायजा लिया। केन्द्र से लेकर राज्यों तक वे दोनों के बीच की अहम कड़ी हैं और केंद्र के सभी विभागों के साथ तालमेल बिठाकर काम को गति प्रदा करती हैं ताकि सरकार की सभी त्वरित नीतियां समय पर क्रियान्वित हो सकें। चीन के वुहान शहर से 645 भारतीय छात्रों को सही-सलामत निकालने के बाद वे प्रधानमंत्री की विश्वासपात्रों में शामिल हो गईं। आंध्र प्रदेश कैडर की 1983 बैच की प्रीति जून 2019 में स्वास्थ्य सचिव बनी थीं। केरल में आई बाढ़ में भी उन्होंने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया था।

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02. डॉ.वी के पॉल: टास्क फोर्स के सेनापति
कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए बनाई गई कोरोना टास्क फोर्स के कर्ताधर्ता नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल हैं। इस टीम के सदस्यों के साथ मिलकर वे कोरोना वायरस प्रभावित राज्यों में आपातकालीन सेवाएं, फ्रंटलाइन में संक्रमितों के इलाज में जुटे चिकित्सकों और नर्र्सिंगकर्मियों के लिए महत्त्वपूर्ण चिकित्सकीय पीपीई किट, उपकरण और दवाओं के निर्बाध वितरण को सुनिश्चित कर रहे हैं। कोरोना वायरस को लेकर देश में चल रही शोध टीमों के भी वे सदस्य हैं और उन्हें जरूरीसलाह भी दे रहे हैं। इस टीम ने ही प्रयोगशाला परीक्षण शुरू करने का सुझाव दिया था।

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03. के. विजयराघवन: टीका बनाने पर है जोर
पद्म श्री सम्मान से नवाजे जा चुके कृष्णास्वामी विजयराघवन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार हैं। वीके पॉल के साथ मिलकर वे देश की वैज्ञानिक संस्थाओं का नेतृत्व कर रहे हें जो कोरोना का संभावित इलाज और टीका बनाने पर काम कर रही है। उन्होंने विकासात्मक जीव विज्ञान, आनुवंशिकी और न्यूरोजेनेटिक्स पर शोधकार्य किया है। उनका शोध मुख्य रूप से उन महत्वपूर्ण सिद्धांतों और तंत्रों पर केंद्रित है जो विकास के दौरान तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों को नियंत्रित करते हैं। उनकी टीम में टीम में आईसीएमआर के इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी के सदस्य भी शामिल हैं जो बीमारी के गणितीय मॉडलिंग को संभालते हैं और कोरोनावायरस की प्रकृति और प्रसार का निर्धारण करते हैं।

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04. बलराम भार्गव: परीक्षण की जिममेदारी संभल रहे
आज इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च का नाम हर कोई जानता है। यह संस्थान ही आज पूरे देश में कोरोना वायरस से संबंधित आंकड़े जुटाने और देशभर में संक्रमितों की पहचान करने के लिए वृहद स्तर पर परीक्षण कर रहा है। इस महत्त्वपूर्ण काम की देखरेख भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव पर है। मरीजों के प्रतिदिन आंकड़े आईसीएमआर की सहमति से ही जारी किए जाते हैं। देश में जो दो दर्जन कोरोना वैक्सीन पर काम हो रहा है उसका नेतृत्व भी भार्गव और उनकी टीम पर ही है।

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05. सीके मिश्रा: कोरोना से लड़ रहे हैं सीधी लड़ाई
1983 बैच के प्रशासनिक अधिकारी सी.के. मिश्रा पर वर्तमान में देश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वे फिलहाल देश में कोरेाना वायरस का पता लगाने, रैपिड टेस्टिंग, संक्रमितों के लिए तेजी से सुविधा संपन्न अस्पतालों को तैयार करने और क्वारंटीन प्रक्रिया की व्यवस्था संभाल रहे हैं। उनका काम किसी भी तरह देश में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकना है। मिश्रा इस दुरूह काम में कितने सफल हुए हैं इसका अंदाजा देश में अब तक के हालातों को देखकर लगाया जा सकता है। महाशक्ति अमरीका ने भी जिस कोरोना वायरस के सामने घटने टेक दिए हैं वहीं भारत केे कोरोना नियत्रण का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है। सीके मिश्रा को स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और बिजली के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सुधारों के लिएभी पहचाना जाता है। इतना ही नहीं उन्होंने बिहार के सबसे कठिन ग्रामीण क्षेत्रों में भी पोलियो उन्मूलन में अहम भूमिका निभाई है।

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