बालासन
जमीन पर पर वज्रासन मुद्रा में बैठ जाएं। सांस अंदर लेते हुए दोनों हाथों को सीधा सिर के उपर ले जाएं। हथेलियां आपस में मिलाएं नहीं। सांस छोड़ते हुए आगे झुकें। जब तक हथेलियां जमीन पर नहीं टिक जाती हैं। चित्रानुसार सिर को जमीन पर टिका लें। आराम से लंबी सांस लें और छोड़ें। इस मुद्रा में 30 सेकेंड से 2 मिनट तक रहें। इससे टांगों की चर्बी घटाती है। कंधे व पीठ दर्द से राहत मिलती है। गर्भावस्था, घुटने की चोट में न करें।
मार्जरी आसन
वज्रासन मुद्रा में बैठकर आगे की ओर झुकें। दोनों हथेलियां व घुटने जमीन पर होने चाहिए और कूल्हे से घुटने व कंधे से हथेलियों के बीच 90 अंश का कोण बनना चाहिए। कमर सीधी होनी चाहिए।
इस अवस्था में धीरे-धीरे सांस लें। गर्दन को ऊपर और नीचे की तरफ करते रहें और धीरे-धीरे सांस छोड़ते रहें। शुरुआत में 2-3 मिनट से ज्यादा ना करें। रीढ़ की हड्डी मजबूत, पीठ दर्द में आराम मिलता है। गर्दन में चोट हो तो आसन ना करें।
विपरीतकर्णी आसन
पीठ के बल जमीन पर सीधा लेट जाएं। दोनों टांगों को 45 डिग्री तक उठाएं। इसके बाद कमर को हाथों से सहारा देते हुए कूल्हों को ऊपर उठाएं। 90 डिग्री तक टांगों को ऊपर ले जाएं। दोनों कोहनियां जमीन पर टिकाकर हाथ से कमर को सहारा देते रहें। इस मुद्रा में 30-60 सेकंड तक रहें। आराम से सांस लें। गठिया, पाचन से जुड़ी समस्याओं, सिरदर्द, लो ब्लड प्रेशर, अनिद्रा, माइग्रेन में फायदेमंद है। मोतियाबिंद के मरीज, मासिक धर्म के दौरान न करें।
वृक्षासन
ताड़ासन मुद्रा में खड़े हो जाएं। दाएं पैर को मोड़कर पंजे को बाएं पैर के जांघ वाले हिस्से पर टिकाएं। एड़ी ऊपर और पंजे जमीन की तरफ हों। बाएं पैर पर संतुलन बनाते हुए खड़े हों। दोनों हाथों को ऊपर उठाएं, दोनों हथेलियों को सिर के ऊपर नमस्कार मुद्रा में जोड़ लें। शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए अपना ध्यान केंद्रित करें। इस मुद्रा में 30-60 सेकेंड रहें। जांघों व रीढ़ को मजबूत बनाता है। गर्भवती चिकित्सक की सलाह से करें।
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