Thursday, 20 February 2020

खानपान और नियमित दिनचर्या से संक्रामक रोगों से कर सकते हैं बचाव

वसंत ऋतु में (मध्य फरवरी से लेकर मध्य अप्रेल तक का समय) सूर्य उत्तरायण होता है। सूर्य के उत्तर दिशा की ओर जाने से मौसम में गर्मी बढ़ती है। इसका असर हमारे शरीर पर भी पड़ता है। मनुष्य की स्वभाविक बल मध्यम और अग्नि मंद हो जाती है। अग्नि मंद होने से पाचन क्रिया बिगडऩे लगती और पेट संबंधी परेशानी बढ़ जाती है। शरीर तथा वातावरण में गर्माहट से रुक्षता (रुखापन) भी बढ़ती है। शरीर की ऊर्जा घटने लगती और बीमारियां व संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। जानते हैं कि इस मौसम में बीमारियों से कैसे बचाव करें।
इनकी आशंका
आंखों में खुलजी, जलन, पानी आना, साइनस से नाक में सूजन, पानी आना, छीकें व सांस लेने में परेशानी, दमा, माइग्रेन, गले में खराश, जुखाम, सिर का भारीपन या दर्द, कानों में दर्द और त्वचा संबंधी रोग बढ़ जाते हैं।
कारण : वसंत में तिक्त (कड़वे), कषाय (कषैले) एवं कटु (तीखा) रस का स्तर शरीर में बढ़ जाता है। इसके साथ ही वातावरण में फ सलों के पराग कणों की संख्या भी अधिक हो जाती हैं जिससे इम्युनिटी घटती और एलर्जी की आशंका बढ़ जाती है। सुबह के साथ छींके आना इसके लक्षण हैं।
काजल लगाएं : घर पर गाय के घी से तैयार अंजन (काजल) लगाएं। इससे आंखों में धूल-मिट्टी और एलर्जी से बचाव होता है। अगर बाजार से काजल ले रहे हैं तो उसकी शुद्धता परख लें।
काढ़ा : काली मिर्च, पीपली और सौंठ को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। आधा चम्मच का काढ़ा बनाकर सुबह शहद के साथ पीएं। विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं।
ध्यान रखने वाली बातें
हल्का व सुपाच्य भोजन करें। गुनगुने पानी से नहाएं, कर्पूर, चंदन, कुमकुम आदि लगाएं। पुराना गेहूं, जौ, अदरक, मूंग-मसूर की दाल आदि का सेवन करें। शहद-पानी पीएं। करीब 30 मिनट योग-ध्यान और व्यायाम जरूर करें। नशा करने से बचें। समय पर सोएं।



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