हैल्थ फेे्रंडली जीवाणु
एक ग्राम मिट्टी में करीब 10 अरब बैक्टीरिया, फंग्स, वायरस और प्रोटोजोआ आदि होते हैं। इसमें कुछ ही नुकसान पहुंचाते हैं जबकि अधिकतर फायदेमंद होते हैं। यह मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं। हमें मजबूती भी देते हैं।
खुले वातावरण मेंं खेलने से कई दूसरे लाभ भी
धूल-मिट्टी में खेलने का अर्थ केवल मिट्टी से नहीं होता बल्कि प्रकृति से जुडऩा भी है। इसमें धूल-मिट्टी के साथ धूप, हरियाली, स्वच्छ वातावरण, अधिक ऑक्सीजन और फिजिकल एक्टिविटी भी शामिल है। धूप से न केवल विटामिन डी मिलता, हड्डियां मजबूत होती हैं बल्कि इम्युनिटी बढ़ती और स्ट्रेस घटता है। हरियाली से मन प्रसन्न होता है।
प्रदूषित मिट्टी में न खेलें
बच्चों को मिट्टी में खेलने से मना न करें। मिट्टी में खेलने से शारीरिक व मानसिक विकास होता है लेकिन ध्यान रखें कि मिट्टी संक्रमित या प्रदूषित न हो। मिट्टी में कैमिकल और मेटल्स न हों। इससे नुकसान हो सकता है।
स्किन भी रहती हैल्दी
फिनलैंड-रूस के सीमा से सटे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हेलसिंकी यूनिवर्सिटी के अध्ययन में पाया गया है कि वहां के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों की न केवल इम्युनिटी (रोगों से लडऩे की क्षमता) अधिक थी बल्कि उनमें एलर्जी की समस्या कम देखने को मिली। उनकी त्वचा भी अधिक हैल्दी है। माइक्रोबायोम (हैल्दी जीवाणु) भी अधिक मिले।
क्या है माइक्रोबायोम
माइक्रोबायोम, बहुकोशिकीय व सूक्ष्म जीव हैं जो जीवित प्राणियों के अंदर होते हैं। यह कवक, जीवाणु और वायरस से मिलकर बने होते हैं। इनके अंदर भी एक जेनेटिक संरचना होती है जो पोषक तत्वों के पाचन और उनकी संचालन प्रक्रिया को पूरा करती है। इनका काम शरीर में घावों को भरने, इम्युनिटी बढ़ाने, तंत्रिका तंत्र को ठीक रखना है।
भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाव
एक अन्य शोध में पाया गया है कि जो बचपन में बैक्टीरिया और वायरस के संपर्क में नहीं होते यानी अधिक साफ जगहों पर रहे हैं, ऐसे बच्चों के बड़े होने पर हाई बीपी और कई दूसरी बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है। यदि बच्चे नियमित खुले वातावरण और मिट्टी से खेलते हैं तो भविष्य में होने वाली बीमारियों से भी बचाव होता है।
मिट्टी नेचुरल क्लीनर
मिट्टी को नेचुरल क्लीनर भी कहते हैं। आज भी कई जगह लोग चेहरे और शरीर को साफ करने के लिए मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करते हैं। अगर बच्चे मिट्टी में खेलते हैं तो उनके रोम छिद्र खुलते हैं। उनकी त्वचा स्वस्थ रहती है। त्वचा में चमक और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। कोशिकाएं जल्दी मृ़त नहीं होती हंै।
इम्युनिटी ऐसे भी बढ़ाएं
इम्युनिटी बढ़ाने के लिए टीकाकरण और खानपान पर विशेष ध्यान दें। वैक्सीन में जीवित जीवाणु होते हैं जो बीमारियों के खिलाफ शरीर की रक्षा करते हैं। इसी तरह हैल्दी डाइट लेते हैं तो उसमें भरपूर मात्रा में माइक्रोन्यूट्रीएंट्स, न्यट्रीएंट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स होते, जिनसे भी इम्युनिटी बढ़़ती है।
बैड इम्युनिटी से बचें
कई कारण हैं जिनसे बैड इम्युनिटी भी बढ़ती है। इसे ऑटोइम्यून कहते हैं। इनमें पर्याप्त नींद का अभाव, नशा करना और अधिक तनाव में रहना है। तनाव से होने वाली बैड इम्युनिटी से बच्चों में मोटापा, डिप्रेशन, डायबिटीज आदि का खतरा और वयस्कों में बीपी और हार्ट डिजीज की आशंका रहती है।
क्रिएटिव भी बनते हैं
बच्चों में क्रिएटिविटी आती है। दूसरे बच्चों के साथ खेलने से एक-दूसरे के साथ मिलकर यानी टीम भावना भी बढ़ती है। यही बच्चे टीम लीडर बनते हैं।
डॉ. उमा कुमार, रूमेटोलॉजिस्ट एंड इम्यूनोलॉजिस्ट (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, रूमेटोलॉजी) एम्स, नई दिल्ली
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