Friday, 28 February 2020

अस्थमा को ऐसे समझें, इस तरह कर सकते हैं बचाव

सांस की मुख्य नली यानी विंड पाइप में इंफेक्शन से सूजन और सिकुडऩ आती है। फेफड़ों को साफ हवा पहुंचाने वाली नली पतली हो जाती हैं। इससे सांस लेने में परेशानी होती है। इसे अस्थमा या दमा कहते हैं। बुजुर्गों में इसकी आशंका अधिक होती।
इलाज कैसे
इसका इलाज दो तरह से होता। तत्काल राहत और स्थाई प्रबंधन। सूजन, जलन, प्रभाव कम करने के लिए कई दवाइयां और इनहेलर देते हैं।
ऐसे करें बचाव
नियमित दवाइयां लें। दिनचर्या सही रखें। ज्यादा ठंडा-गर्म खाने से बचें। बदलते मौसम में विशेष सावधानी बरतें। पर्याप्त नींद लें और तनाव से बचें। धूल-धुआं और प्रदूषित जगहों पर जाने से बचें। घर में कारपेट का इस्तेमाल न करें। परदे और कवर हर माह धोएं। अपने बच्‍चों के खाने में उन चीजों को शामिल करना चाहिए जो न सिर्फ एलर्जी से लड़ने में उनकी मदद करें, बल्‍कि उनके शरीर की इम्‍यूनिटी भी बढ़ाएं. बादाम, मछली जैसे सैलमॉन, पटसन के बीज और सोयाबीन तेल में मौजूद जरूरी पॉलीअनसेचुरेटेड फैट अम्ल आपके बच्चों के खाने में शामिल होकर उन्हें एलर्जी संबंधी बीमारियों से दूर रखते हैं। इनका सेवन आपके बच्चे को खास तौर से अस्थमा और नाक में जलन के खतरे को रोकने में कारगर होगा। पॉलीअनसेचुरेड फैट अम्ल में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटअम्ल आते हैं, जिन्हें एराकिडोनिक अम्ल कहते हैं। ऐसे बच्चों में, जिनमें आठ साल की उम्र में ओमेगा 3 का हाई ब्‍लड लेवल होता है, उनमें 16 साल की उम्र में अस्‍थमा, नाक में जलन और श्लेष्मा झिल्ली में एलर्जी होने का खतरा कम रहता है।



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