शिशुओं में दांत छह माह की उम्र से निकलने लगते हैं। इन्हें दूध के दांत कहते हैं। ये छह वर्ष की उम्र तक 20 की संख्या में आ जाते हैं और 13 वर्ष की उम्र तक टूटते हैं। इसी उम्र तक 28 दांत भी आ जाते हैं। कई बार खानपान और मुंह की सफाई की कमी से भी बच्चों में दूध के दांत असमय गिरने लगते हैं। यदि ये असमय गिरते हैं तो दांत संबंधी समस्या हो सकती है। इसके बाद पक्के दांत निकलते हैं। जानते हैं विस्तार से-
जल्द दांत गिरने के नुकसान
दूध के दांत असमय गिरने से बच्चे भोजन को ठीक से चबा नहीं पाते हैं। इससे पाचन बिगड़ता है। सेहत ठीक नहीं रहती है। दूध के दांत जल्दी गिरने से दांत टेढ़े-मेढ़े भी निकलते हैं क्योंकि इनके गिरने से आधार बिगड़ जाता है। बच्चों की बोली भी प्रभावित होती है।
सॉफ्ट फूड से भी समस्या
बच्चों में सॉफ्ट खाना खाने से परेशानी अधिक होती है। दांतों का व्यायाम ठीक से नहीं होता है। बच्चों को गन्ना, फल, सलाद आदि खिलाएं।
ये चीजें अधिक खाएं
बच्चों के दांतों की मजबूती के लिए फाइबर वाली चीजें ज्यादा देनी चाहिए। फाइबर को चबाने से दांत प्राकृतिक रूप से साफ हो जाते हैं। इसलिए सेब, गाजर, चुकंदर, अमरूद, साबुत अनाज आदि दे सकते हैं।
ऐसे करें छोटे बच्चों के दांतों की सफाई
छोटे बच्चों के दांतों की सफाई दो दांत निकलने के बाद से ही करनी चाहिए। इनके लिए भी ब्रश आते हैं। अगर ब्रश नहीं है तो माताएं साफ गीले सूती कपड़े से ही दांतों को सुबह-शाम पोछ दें।
चिपकने वाली चीजें न दें
चॉकलेट, टॉफी, पाउडर मिल्क आदि दांतों में चिपकते हैं। इससे दांतों के आसपास एसिड बनता है जिससे दांत तेजी से सडऩे लगते हैं।
इनका रखें ध्यान
रात में कुछ खिलाने के बाद मुंह की सफाई करें। ब्रश नहीं तो कुल्ला कराएं। छोटे बच्चों को रात में दूध पिलाने के बाद मुंह साफ कराएं।
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