ठंड के कम रोशनी वाले दिनों में सीजनल मूडीनेस की परेशानी सामान्य है। भारत में तो इसे मौसमी व्यवहार के तौर पर लिया जाता है लेकिन विदेशों में इस पर बहुत शोध कार्य हुआ है। जब शोधकर्ताओं ने अंधेरे और रोशनी को लेकर दिमागी प्रतिक्रिया से परदा उठाया तो सामने आया एक नया हार्मोन रसायन 'मेलेटोनिन'। धूसर-काले बादल या अंधेरा दिमाग के ग्रे मैटर हिस्से को प्रभावित करते हैं। यही रसायन नींद को और सुस्ती को बुलाता है। रोशनी भरे दिन में दिमाग मिलेटोनिन कम और खुश करने वाला रसायन 'सेरोटोनिन' ज्यादा बनाता है। 'सेरोटोनिन' ही वह हार्मोन या रसायन है जो हमारे मूड को अच्छा बनाए रखता है।
सेरोटोनिन एक न्यूरो ट्रांसमीटर की तरह है, जो हमारे मस्तिष्क के माध्यम से हमारे मनोभावों को नियंत्रित करता है और साथ ही हमें इस बात की भी जानकारी मुहैया कराता है कि किस तरह कुछ लोग अधिक और कुछ कम आक्रामक होते हैं। 'सेरोटोनिन' का काम संदेश को एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक पहुंचाना है। इसे एक ऐसा फील-गुड रसायन कहा गया है, जो हमें आत्मविश्वास देता है, सुरक्षा की भावना विकसित करता है और साथ ही साथ हमारी भूख को भी बढ़ाता है। 'मेलेटोनिन' उदासी और नींद बढ़ाता है इसलिए इसे 'ब्लैकटॉनिक' जबकि खुश रहने की प्रेरणा देने वाले सिरोटिनिन को 'सीरम टॉनिक' भी कहते हैं।
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