वैज्ञानिकों का कहना है कि लोगों के दिमाग में एक क्षेत्र है जो उनके खराब मूड के लिए जिम्मेदार होता है। स्वस्थ लोगों के मस्तिष्क का स्कैन करने पर पता चला है कि जो लोग मूड खराब होने की शिकायत करते हैं उनके मस्तिष्क में एक क्षेत्र में गतिविधियां एकाएक बढ़ जाती हैं। मस्तिष्क के इस क्षेत्र को 'वेंट्रोमेडियल रेफिट्रल कॉर्टेक्स' कहा जाता है। यह क्षेत्र दाएं हाथ से काम करने वाले लोगों की दाईं आंख के पीछे एक या दो इंच नीचे होता है। मनुष्य की भावनाएं यहीं से संचालित होती हैं। इस अध्ययन को नेशविले के वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक डॉक्टर डेविड और उनकी टीम ने किया। शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क की गतिविधियों का पता लगाने के लिए पॉजीट्रॉन इमीशन टोमोग्राफी तकनीक का प्रयोग किया। जाल्ड के मुताबिक, दिमाग के काम करने के तरीके और खराब मूड के बीच संबंध का पता लगने से ऐसे लोगों का इलाज किया जा सकता है जो उदासी के शिकार होते हैं।
ये जिम्मेदार है खराब मूड के लिए -
अकेलापन -
घर से बाहर न निकलना, परिवारजनों व दोस्तों से भी न मिलना ।
कामचोरी -
कुछ काम करने की इच्छा न होना या उसे टाल देना।
सुस्ती -
थकान का बहाना, सोते रहना या जबरन बिस्तर में पड़े रहना।
आलसीपन -
शरीर को कष्ट देने से परहेज करना, कोई वर्कआउट नहीं करना।
निराशा -
जबरन ही उदास रहना, बुरी यादों को दोहराना और हताशा में खुद को कोसना।
बुरे विचार -
गंदे और बुरे विचार लाना और गलत काम करने की इच्छा होना।
अनजाने डर -
बेकार डर की कल्पनाएं करना और उनसे डरना।
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