वाइट ब्रेड मैदे से बनती है। इसमें कई ब्लीचिंग एजेंट्स जैसे पोटैशियम ब्रोमेट आदि होते हैं। बनाने के दौरान इसमें पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। फाइबर की कमी से यह पचने में दिक्कत करता है। इससे कब्ज की समस्या होती है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होने से खून में शर्करा बढ़ाने वाली होती है। होलग्रेन और ***** व्हीट बे्रड साबुत अनाज से बनती है। इसमें वाइट ब्रेड की तुलना में अधिक पोषक तत्व होते हैं लेकिन फिर भी इसे खाने से बचना चाहिए। मल्टीग्रेन बे्रड में ओट्स, जौ, गेहूं, ज्वार, अलसी आदि अनाज होते हैं। अगर मल्टीग्रेन बे्रड खानी है तो घर में ही बनाएं।
कैमिकल से बनाते मुलायम
ब्रेड को मुलायम बनाने के लिए कई कैमिकल्स मिलाए जाते हैं। इनमें से कई तो अन्य देशों में बैन है। एक वाइट ब्रेड स्लाइस में 75 में कैलोरी होती है जबकि रोटी में 30-35 कैलोरी ही होती है। रोटी में दूसरे पोषक तत्व भी होते हैं।
इनका रखें ध्यान
ब्रेड को ठंडे और सूखे स्थान पर रखें। खुले में या धूप में न रखें। फ्रिज में भी न रखें। हो सके तो ब्रेड को कमरे के तापमान पर ही रखें। ब्रेड की एक्सपायरी डेट जरूर देखें। अगर कोई व्यक्ति रोज दो स्लाइस खाता है तो उसमें मोटापे का खतरा 40फीसदी तक बढ़ सकता है।
भ्रम- ब्राउन ब्रेड में वाइट ब्रेड से अधिक पोषकता होती है?
तथ्य- कई जांचों में पाया गया है कि ब्राउन ब्रेड मेंं स्वाद बढ़ाने के लिए शुगर की मात्रा वाइट ब्रेड से अधिक डाली जाती है। ब्राउन ब्रेड में रंग को गहरा करने के लिए कुछ कैमिकल मिलाते हैं जो नुकसान करता है। अगर देखें तो दोनों ही में पोषकता नहीं होती है।
सिर्फ 1-2 स्लाइस ही लें
केवल होलग्रेन और मल्टीग्रेन ब्रेड ही खानी चाहिए, वह भी घर में बनी हुई। रेडिमेड होलग्रेन बे्रड मेंं भी ब्राउन कलर मिला होता है। अगर घर की बनी ब्रेड है तो सप्ताह में एक-दो दिन 1-2 स्लाइस खा सकते हैं। इसमें कैलोरी अधिक होती है। इसलिए मक्खन और जैम के साथ खाने पर वजन तेजी से बढ़ सकता है। इसे हल्का सेंककर या फैटलेस दूध के साथ ले सकते हैं।
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