डायबिटीज लंबे समय तक अनियंत्रित रहे तो शरीर के सभी अंगों पर असर होता है लेकिन पांच अंग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। डायबिटिक फुट भी एक गंभीर समस्या है जिसके कुछ मामलों में पैर काटने तक की नौबत आ जाती है।
डायबिटिक न्यूरोपैथी -
मरीज के हाथों-पैरों में सुन्नपन, जलन, दर्द और झुनझुनी होती है, दर्द नहीं होता है। चोट लगने पर पता नहीं चलता है। ब्लड में ग्लूकोज अधिक होने पर सेल्स खराब होते हैं जिससे कुछ अहसास नहीं हो पाता है।
डायबिटिक नेफ्रोपैथी -
अनियंत्रित ब्लड ग्लूकोज से गुर्दों पर बुरा असर पड़ता है। किडनी इंफेक्शन के बाद क्रॉनिक किडनी डिजिज होती है। रोगी का ब्लड प्रेशर भी असंतुलित रहता है। किडनी के मरीजों का डायलिसिस होता है।
पैरालिसिस अटैक -
ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ने से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। दिमाग की नसों में थक्का जमने से हाथों व पैरों के काम करने की क्षमता खत्म होती है। पैरालिसिस अटैक से बचने के लिए ब्लड शुगर को नियंत्रित करें।
डायबिटिक नेफ्रोपैथी -
अनियंत्रित ब्लड ग्लूकोज से गुर्दों पर बुरा असर पड़ता है। किडनी इंफेक्शन के बाद क्रॉनिक किडनी डिजिज होती है। रोगी का ब्लड प्रेशर भी असंतुलित रहता है। किडनी के मरीजों का डायलिसिस होता है।
हार्ट प्राब्लम-
हार्ट अटैक का खतरा रहता है। मधुमेह पीडि़त हृदय रोगी की स्थिति बहुत गंभीर होती है। रोगी को बीपी चेक कराते रहना चाहिए। दो से तीन महीने में एक बार हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।
डायबिटिक रेटीनोपैथी -
डायबिटीज के मरीजों में मोतियाबिंद और आंख के पर्दे पर सूजन व इससे अंधेपन की आशंका रहती है। समय पर इलाज न मिलने से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। जांच कराते रहें।
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