जिस तरह महिला के लिए पीरियड्स का आना जरूरी होता है उसी तरह मेनोपॉज भी अहम है। इससे महिला को माहवारी के दौरान दर्द, मूड में बदलाव और सिरदर्द जैसे लक्षणों से छुटकारा मिलता है लेकिनसाथ ही कई तरह की दिक्कतों की शुरुआत भी होती है। महिलाओं में मेनोपॉज सामान्यत: 45 से 5० की उम्र में होता है। यदि इससे पहले मेनोपॉज होता है तो उसे अर्ली मेनोपॉज कहते हैं। यदि मेनोपॉज के बाद रक्तस्राव शुरू होता है तो यह बीमारी के लक्षण होते हैं।
40 के बाद...
45 से 50 वर्ष की उम्र में होता है मेनोपॉज
35 से 39 साल के बीच बढ़ रहा मेनोपॉज
5 दिन सप्ताह में योग और व्यायाम करने से लाभ
4 फीसदी महिलाओं को मेनोपॉज 29-34 साल में
मेनोपॉज में इन बातों का रखें ध्यान
मेनोपॉज के बाद महिला को सेहतमंद रहने के लिए तनाव से बचना चाहिए। नियमित जीवनशैली के साथ संतुलित व पौष्टिक आहार लेना चाहिए। नियमित 30 मिनट तक योग, प्राणायाम और व्यायाम करें। इससे दिक्कतें कम होंगी। इसके अलावा खुद को व्यस्त रखें। अपने रुचि वाले काम करें। खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, सलाद व फल ज्यादा लें। प्रोटीन डाइट जैसे सोयाबीन और डेयरी प्रोडक्ट लें। मसालेदार, सिगरेट, अल्कोहल, कॉफी चाय से परहेज करें। खूब पानी पीएं। कोई समस्या हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।
40 वर्ष के बाद करानी चाहिए ये जांचें
40 वर्ष के बाद महिलाओं को कुछ जांचें करानी चाहिए। इनमें ब्लड प्रेशर, थायरॉइड, मधुमेह व हार्ट संबंधी और हड्डियों के लिए बीएमडी टेस्ट कराना चाहिए। यदि आपके परिवार में गंभीर बीमारी की हिस्ट्री है तो महिला को स्क्रीनिंग करानी चाहिए। इसके अलावा ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए दो साल में पैपस्मीयर टेस्ट कराएं। डॉक्टरी सलाह पर लिपिड प्रोफाइल व अन्य जांचें भी करवा सकती हैं।
एक्सपर्ट : डॉ. सुनिला खंडेलवाल, मेनोपॉज एक्सपर्ट, जयपुर
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