हम बाल और त्वचा को तो ढंककर या सनस्क्रीन (क्रीम) का इस्तेमाल कर धूप के असर से बचा लेते हैं लेकिन शरीर के सबसे संवेदनशील अंग यानी आंखों पर कम ही ध्यान देते हैं। जबकि इस मौसम में गर्मी व धूप के साथ, धूल और पसीने से भी आंखों में कई तरह के संक्रमण की आशंका रहती है।
स्टाइस की आशंका -
मृत कोशिकाओं और रोगाणु की वजह से पलकों में बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं। इससे पलकें सूज जाती हैं और उसमें दर्द होता है। पसीना और प्रदूषण से स्ट्राइस की आशंका बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए पलकों को साफ रखना जरूरी होता है।
ये भी समस्याएं -
एलर्जी : धूप, पॉल्यूशन और पराग कणों की वजह से आंखों में एलर्जी हो जाती है। इसमें आंखें लाल हो जाती हैं और लगातार खुजली का अहसास होता है। एलर्जी बढ़ने पर जलन भी होती है।
कंजक्टिवाइटिस : इस मौसम में आंखें लाल हो जाती हैं और उनमें से पानी निकलता रहता है। धीरे-धीरे आंखों में चुभन महसूस होने लगती है। कंजक्टवाइटिस एक-दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है। ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
आंखों की केयर-
आंखों को छूने से पहले हाथों को अच्छी तरह से धोएं या सेनिटाइजर से साफ करें। इससे संक्रमण की आशंका कम होती है।
छह से आठ घंटे की नींद जरूर लें। इससे आंखों को आराम मिलता है।
दिनभर में तीन से चार बार आंखों को ठंडे पानी से धो सकते हैं। बाहर से आने पर या लंबे समय तक कम्प्यूटर या मोबाइल पर काम करने के बाद आंखों को जरूर धोएं।
सप्ताह में 2-3 बार खीरे के टुकड़े या गुलाबजल से भीगे रूई के फाहे को आंखों पर रख सकते हैं। डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, गाजर आदि को जरूर शामिल करें।
यह भी ध्यान रखें -
जब भी धूप में निकलें अल्टा वॉयलेट किरणों से बचाने के लिए धूप वाले चश्में का इस्तेमाल जरूर करें।
स्विमिंग के दौरान भी स्विमिंग ग्लास पहनें ताकि पानी में मिले क्लोरीन से आंखों में एलर्जी न हो। स्विमिंग पूल से कंजक्टिवाइटिस होने की आशंका अधिक रहती है।
एयर कंडीशनर की सीधी हवा आंखों में लगने से बचें, इससे ड्राइनेस, खुजली और चुभन आदि समस्याएं होती हैं।
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